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बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर: CM यादव ने तुरंत भेजे 20 करोड़ रुपए

भोपाल मध्यप्रदेश की सरकार हर संकट में किसानों के साथ खड़ी है। इस स्पष्ट संदेश के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 6 सितंबर को अतिवृष्टि-बाढ़ से क्षतिग्रस्त फसलों के लिए राहत राशि का वितरण किया। उन्होंने एक क्लिक के माध्यम से किसानों को 20 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। मध्यप्रदेश सरकार साल 2025-26 तक 188 करोड़ 52 लाख रुपये आपदा प्रभावित लोगों को ट्रांसफर कर चुकी है। प्रदेश सरकार का कहना है कि इन दिनों मौसम असंतुलित हो गया है। इसलिए सरकार किसानों की हर संभव मदद के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश सरकार का मानना है कि किसानों की मुस्कान ही राज्य की ताकत है। गौरतलब है कि सीएम डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन से कई जिलों के किसानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बात की। उन्होंने किसानों से उनका हालचाल जाना और सरकार का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि किसानों के जीवन में मौसम की मार से परेशानी आई है। इस परेशानी का सरकार ने समाधान कर दिया है। खेतों में किसान और सीमा पर जवान दोनों आंधी-तूफान और कष्टों के बीच अपनी मौजूदगी से, मेहनत से, जान की बाजी लगाकर देश के लोगों की सेवा करते हैं। प्रदेश में कहीं-कहीं बहुत ज्यादा बारिश हुई और कहीं-कहीं कम बारिश भी हुई। इस असंतुलन की कीमत हमें थोड़ी-थोड़ी चुकानी पड़ रही है। सरकार हर परेशानी में किसान के साथ है। हमारी सरकार बाढ़ के दौरान भी जनता के बीच गई। सरकार किसानों के हर संकट में साथ खड़े रहने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों को सरकार पर पूरा भरोसा सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज 11 जिलों के 12 हजार हेक्टेयर से ज्यादा बड़े क्षेत्र में 17500 भाई-बहनों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 20 करोड़ रुपये की राशि दे रहे हैं। किसान हमारी सरकार पर पूरा भरोसा करता है। किसानों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है। उनके नेतृत्व में हमारी सरकार लगातार जनकल्याण के काम कर रही है। इससे पहले हमने 30 करोड़ की राहत राशि ट्रांसफर की थी। 2025-26 में अभी तक 188 करोड़ 52 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है। मिलकर आपदा से मुकाबला करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैं हर किसान को आश्वासन देना चाहता हूं कि संकट की घड़ी में हमारी सरकार सदैव आपके साथ खड़ी है। किसानों की मुस्कान ही मध्यप्रदेश की ताकत है। किसान अपनी मेहनत से एक फिर जीवन के मैदान में उतरेंगे। हमें आशा है कि अगली फसल इस नुकसान की भरपाई कर देगी। हम सब मिलकर इस आपदा से मुकाबला करेंगे। किसान कभी हार नहीं मानता, वह जीवटता के साथ आने वाले कल की तैयारी करता है। आइए हम सब मिलकर एक बार फिर कामना करें कि एक बार फिर धरती माता हमारे अन्न के भंडार भरेगी।

वन विहार में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध दिवस, हुए जागरूकता कार्यक्रम

गिद्ध संरक्षण पर हुई एक दिवसीय कार्यशाला भोपाल वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इण्डिया, बीएनएचएस के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस के अवसर पर विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियों का आयोजन शनिवार को वन विहार स्थित विहार वीथिका में किया गया। इसका उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्धों की महत्त्वपूर्ण भूमिका और उनके संरक्षण की तात्कालिक आवश्यकता के बारे में आमजन को जागरूक करना था। अंर्तराष्ट्रीय गिद्ध दिवस प्रतिवर्ष माह सितम्बर के प्रथम शनिवार को मनाया जाता है। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में स्थित विहार वीथिका में अंर्तराष्ट्रीय 'गिद्ध दिवस' के अवसर पर 'गिद्ध संरक्षण एवं संर्वधन' विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला हुई, जिसमें 30 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। इसमें गिद्ध संरक्षण एवं संर्वधन विषय पर जानकारी के साथ गायों के उपचार में डायक्लोफेनिक दवा का उपयोग न करने एवं अन्य विषयों पर विषय-विशेषज्ञों द्वारा जानकारी उपलब्ध कराई गई। सहायक संचालक वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल डॉ. रूही हक द्वारा कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया। भोपाल बर्ड्स के मो. खालिक, डॉ. संगीता राजगीर तथा सहायक वन्‍यप्राणी चिकित्‍सक वन विहार डॉ. हमजा नदीम फारूकी ने प्रस्तुतिकरण के माध्‍यम से गिद्ध प्रजाति एवं उनके महत्व और पारिस्थितिकीय तंत्र में गिद्धों की महत्‍वपूर्ण भूमिका तथा गायों के उपचार में डायक्लोफेनिक दवा का उपयोग से होने वाली हानियों की जानकारी दी गई। सहायक संचालक द्वारा गिद्धों के संरक्षण के लिये प्रतिभागियों से चर्चा की। 'पन्नी से पक्षी' विषय पर होगी राज्य स्तरीय कला प्रतियोगिता कार्यक्रम में संरक्षण को सतत विकास से जोड़ने और गिद्धों के स्वास्थ्य के लिए प्लास्टिक प्रदूषण से खतरे पर प्रकाश डाला गया। वन विभाग द्वारा राज्य-स्तरीय कला प्रतियोगिता “पन्नी से पक्षी” की भी घोषणा की। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों और कलाकारों को प्लास्टिक कचरे से गिद्धों के मॉडल बनाने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिन्हें वन्यप्राणी सप्ताह-2025 के दौरान प्रदर्शित किया जाएगा। विद्यार्थियों के लिए पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता कार्यशाला में विभिन्न महाविद्यालयों के स्नातक विद्यार्थियों के लिए पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसका विषय “गिद्धों की पारिस्थितिक सेवाएँ” था। “वल्चर्स ऑफ मध्यप्रदेश” शीर्षक से एक उपयोगी फील्ड गाइड का लोकार्पण भी किया गया, जो राज्यभर में कार्यरत वन अमले को गिद्ध प्रजातियों की पहचान और निगरानी में सहायता करेगी। वल्चर थीम पर ड्राइंग प्रतियोगिता इसी कड़ी में बीएनएचएस संस्‍था द्वारा वल्चर थीम पर स्कूली बच्चों के लिए ड्राइंग कॉम्पिटिशन का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता के विजेताओं (प्रथम, द्वितीय व तृतीय) को पुरूस्कृत किया गया। श्री सेमसंग, प्रबंधक, गिद्ध संवर्धन केन्द्र केरवा, भोपाल एवं श्री संकल्‍प किसनानी, भोपाल द्वारा वन विहार में भ्रमण करने आए पर्यटकों के साथ वल्‍चर थीम पर एक "ऑन द स्पॉट क्विज" का भी आयोजन किया गया जिसमें पर्यटकों से गिद्धों के सम्‍बन्‍ध प्रश्‍न पूछे गए जिन पर्यटकों ने सही उत्‍तर दिया उन्‍हें पुरूस्‍कृत भी किया गया। कार्यशाला में गिद्धों के संरक्षण एवं बचाव के बारे जानकारी देकर जागरूक किया। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री शुभरंजन सेन, मुख्य वन्य जीव अभिरक्षक श्री आर. श्रीनिवास मूर्ति, पूर्व संचालक श्रीमती संगीता सक्‍सेना, डॉ. स्‍वाति मोघे, संचालक, डब्‍ल्‍यू.डब्‍ल्‍यू.एफ., भोपाल और सहायक संचालक वन विहार डॉ. रूही हक उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मऊगंज को देंगे 241.33 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

मऊगंज में संयुक्त जिला कार्यालय भवन का करेंगे भूमिपूजन देवतालाब में होगा मुख्य कार्यक्रम, हितग्राही होंगे लाभान्वित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 सितम्बर को मऊगंज को 241.33 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात देंगे। इसमें प्रमुख रूप से मऊगंज के संयुक्त जिला कार्यालय भवन का शिलान्यास शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 37 करोड़ 50 लाख रूपये के 16 विकास कार्यों का लोकार्पण और 203 करोड़ 83 लाख रूपये के 6 विकास कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मऊगंज प्रवास के दौरान बहुती प्रपात का अवलोकन करेंगे और देवतालाब में स्थित शिव मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगे। देवतालाब स्टेडियम में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं में हितलाभ वितरण भी करेंगे। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, सांसद श्री जनार्दन मिश्र और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक श्री गिरीश गौतम भी संबोधित करेंगे।

चुनाव आयोग का ऐतिहासिक फैसला: पूरे देश में एक साथ लागू होगा ‘SIR’

पटना  बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले SIR को लेकर विवाद के बीच Election Commission ने एक बड़ा फैसला लिया है। इसके अनुसार यह प्रोसेस देशभर में एक साथ लागू किया जाएगा। आयोग ने इसे अंतिम रुप देने के लिए 10 सितंबर को दिल्ली में सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।   क्या है SIR? SIR यानी 'मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण'। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें चुनाव आयोग मतदाता सूचियों को अपडेट और सही करता है। इसका मकसद है कि देश में मतदाता सूची पूरी तरह से ठीक और विश्वसनीय हो। चुनाव आयोग ने कहा है कि यह कदम जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत लिया जा रहा है, ताकि मतदाता सूचियों की अखंडता बनी रहे। बैठक में इन मुद्दों पर होगी चर्चा 10 सितंबर की बैठक में चुनाव आयोग मुख्य चुनाव अधिकारियों से 10 बिंदुओं पर जानकारी मांगेगा। इनमें मतदाताओं की मौजूदा संख्या, पिछली SIR की तारीख और डेटा और डिजिटलीकरण की स्थिति शामिल है। इसके अलावा मतदान केंद्रों की संख्या और उनकी व्यवस्था तथा अधिकारियों और BLO की नियुक्ति और प्रशिक्षण पर भी चर्चा होगी। आयोग ने भारतीय नागरिकों को इसमें शामिल करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेजों के बारे में भी सुझाव मांगे हैं।    बिहार में जारी है प्रक्रिया बिहार में SIR की प्रक्रिया पहले से ही चल रही है और यह 30 सितंबर तक पूरी हो जाएगी। चुनाव आयोग ने अपने 24 जून के आदेश में ही यह संकेत दे दिया था कि यह प्रक्रिया पूरे देश में लागू की जाएगी, लेकिन बिहार में चुनाव होने की वजह से इसे वहां पहले शुरू किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से फिल्म अभिनेता विंदु दारा सिंह ने की सौजन्य भेंट

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शनिवार को समत्व भवन मुख्यमंत्री निवास में फिल्म अभिनेता श्री विंदु दारा सिंह ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री विंदु दारा सिंह का शाल ओढ़ाकर अभिनन्दन किया और प्रदेश की फिल्म निर्माण नीति की जानकारी दी। श्री विंदु दारा सिंह इन दिनों मध्यप्रदेश के प्रवास पर हैं। उन्होंने जय वीर हनुमान (1995), विष्णु पुराण (2000) और अयोध्या की रामलीला (2020)  में हनुमान जी की भूमिका निभाई है। इसके अलावा अनेक फिल्मों में अभिनय भी किया है।

पंजाब में प्रशासनिक फेरबदल, कई अधिकारियों के हुए तबादले

पंजाब  पंजाब सरकार ने आज प्रशासनिक फेरबदल करते हुए तीन पुलिस अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियां की हैं। यह आदेश राज्यपाल की ओर से जारी किया गया है और तत्काल प्रभाव से लागू होगा। सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत अपनी नई पदस्थापना पर कार्यभार संभालें।  

एम्स रायपुर में ‘देव हस्त’ रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम का मुख्यमंत्री साय ने किया शुभारंभ

रायपुर, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित टाटीबंध में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मध्य भारत के शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों के प्रथम रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम ‘देव हस्त’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “रोबोटिक सर्जरी छत्तीसगढ़ में चिकित्सा सुविधाओं के विकास में एक नया आयाम है। यह ऐतिहासिक क्षण प्रदेश की जनता को अत्याधुनिक और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।” मुख्यमंत्री  साय ने स्वयं ‘देव हस्त’ पर पहला ड्राई लैब डिसेक्शन कर इस अत्याधुनिक तकनीक की औपचारिक शुरुआत की। यह सिस्टम मध्य भारत के किसी शासकीय स्वास्थ्य संस्थान में स्थापित होने वाला पहला रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम है। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर एम्स रायपुर में छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से भर्ती होने वाले मरीजों के परिजनों के ठहरने की सुविधा हेतु एम्स रायपुर में सर्व-सुविधायुक्त परिजन निवास निर्माण की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि “डॉक्टरों को धरती पर भगवान का रूप माना जाता है क्योंकि वे हमें जीवन प्रदान करते हैं। आज जिस रोबोटिक सर्जरी सिस्टम का शुभारंभ हो रहा है, उसे ‘देव हस्त’ नाम दिया गया है। इसका लाभ न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि एम्स रायपुर में भर्ती होने वाले अन्य राज्यों के मरीजों को भी मिलेगा। एम्स रायपुर उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में लगातार मील का पत्थर साबित हो रहा है।” मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि एम्स रायपुर से मुझे विशेष लगाव है। उन्होंने कहा कि “जब रायपुर एम्स के निर्माण को स्वीकृति मिली, उस समय मैं सांसद था और प्रधानमंत्री  अटल बिहारी वाजपेयी से छत्तीसगढ़ में एम्स की शाखा स्थापित करने का आग्रह किया था। यह आवश्यक था ताकि दिल्ली स्थित एकमात्र एम्स पर मरीजों का दबाव कम हो और अन्य राज्यों के लोगों को भी उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उनके राज्य में ही उपलब्ध हो। हमारा सौभाग्य है कि जिन छह राज्यों में एम्स स्थापित करने की स्वीकृति मिली, उनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल था।” मुख्यमंत्री  साय ने परिजन निवास की घोषणा करते हुए कहा कि “दूर-दराज से आने वाले मरीजों के परिजनों के ठहरने की सुविधा कितनी आवश्यक है, यह मैं भली-भांति समझता हूं। सांसद रहते हुए दिल्ली स्थित मेरे आवास को लोग ‘मिनी एम्स’ कहते थे क्योंकि वहां मैं मरीजों के परिजनों की रुकने की व्यवस्था करता था। जनसेवा का यह कार्य मेरे दिल के बेहद करीब है। 2014 से 2019 के संसदीय कार्यकाल में मैंने लगभग 12 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष से मरीजों को दिलवाए थे। रायपुर में भी कुनकुरी सदन में मरीजों के परिजनों की व्यवस्था की गई है, जिसका लाभ पूरे प्रदेश के लोग उठाते हैं।” मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 20 महीनों में सरकार बनने के बाद राज्य में पाँच नए मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृति मिली है और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नवा रायपुर में 5,000 बिस्तरों की क्षमता वाली मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय मात्र एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। उन्होंने कहा कि जीवनशैली और खान-पान में बदलाव के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में वृद्धि हुई है और इनका इलाज भी महंगा होता है। इसी वजह से प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने आयुष्मान भारत योजना प्रारंभ की, जिसके अंतर्गत गरीब वर्ग के लोगों को पाँच लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध है। अब वय वंदन योजना के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वर्गों के मरीजों को भी यह सुविधा प्रदान की जा रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि समय के साथ जहाँ चिकित्सा सुविधाएँ बढ़ रही हैं, वहीं बीमारियों का दायरा भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि “आधुनिक चिकित्सा पद्धति में रोबोटिक सर्जरी का विशेष महत्व है। इसके माध्यम से चिकित्सकीय क्षमता और गुणवत्ता में कई गुना वृद्धि की जा सकती है। छत्तीसगढ़ को ‘देव हस्त’ रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम का अत्यधिक लाभ मिलेगा और शीघ्र ही राजधानी रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में भी रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।” इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने ‘देव हस्त’ के नामकरण हेतु आयोजित प्रतियोगिता की विजेता सुश्री ज्योत्स्ना किराडू को पाँच हजार रुपये की पुरस्कार राशि भेंट की। कार्यक्रम में एम्स रायपुर के निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) डॉ. अशोक जिंदल, विभागाध्यक्ष डॉ. देवज्योति मोहंती, बड़ी संख्या में चिकित्सा छात्र और गणमान्यजन उपस्थित थे।  

सरकारी जमीन पर कार्रवाई: संभल में बुलडोजर से हटाया सपा विधायक का कब्जा

संभल   उत्तर प्रदेश के संभल में शनिवार को एक बार फिर बुलडोजर गरजा। इस बार जिला प्रशासन ने समाजवादी पार्टी (सपा) विधायक और उनके परिजनों के बाग में शामिल सरकारी जमीन को बुलडोजर चलाकर कब्जामुक्त कराया। सपा विधायक इकबाल महमूद व उनके परिजनों आदि का तहसील संभल के ग्राम मंडलाई में दो गाटा संख्या में एक बाग है। इस बाग में सरकारी भूमि को शामिल कर लिए जाने की शिकायत प्रशासन को मिली थी। एसडीम विकास चंद्र टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बाग की नापजोख कराई। नापी के दौरान टीम को बंजर की लगभग साढ़े तीन बीघा सरकारी भूमि बाग में शामिल मिली। इसे टीम ने बुलडोजर चलाकर कब्जामुक्त कराया। एसडीएम ने बताया कि कब्जा काफी पुराना प्रतीत हो रहा है। नापी के दौरान बाग में एक कटहल का पेड़ भी बिना अनुमति के कटा मिला है। वन विभाग के अधिकारियों को कार्रवाई के लिए बुलाया गया है। गौरतलब है कि संभल में जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के बाद हिंसा फैल गई थी। इसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद प्रशासन ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाया था। इस अभियान में तमाम स्थानों पर अतिक्रमण मिले थे। इन अतिक्रमणों पर बुलडोजर गरजा तो कई हिंदू पौराणिक स्थल और कुएं आदि दिखाई देने लगे। इसी के बाद बिजली चोरी के खिलाफ भी अभियान चला। सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क भी प्रशासन के निशाने पर आए। उनके घर पर अतिक्रमण मिला और बिजली चोरी की रिपोर्ट भी दर्ज की गई।  

दीपेंद्र हुड्डा ने बाढ़ पर सरकार पर निशाना साधा, जनता के लिए मुआवजे की अपील

चंडीगढ़  कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा में बाढ़ और जलभराव की स्थिति को लेकर राज्य की भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की निष्क्रियता के कारण बाढ़ की स्थिति विकराल होती जा रही है, जिससे कई क्षेत्रों में हालात बदतर हो गए हैं। मीडिया से बातचीत में सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि पिछले 10 सालों में भाजपा सरकार ने न तो कोई नई नहर बनाई और न ही ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत किया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की नीति का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने सिर्फ उन किसानों की जमीन पर ड्रेन बनाने की नीति अपनाई, जो खुद जमीन उपलब्ध कराते थे। इसके अलावा, उन्होंने दादूपुर-नलवी नहर परियोजना को रद्द करने के फैसले की आलोचना की। कांग्रेस सांसद ने सरकार से मांग की कि सिर्फ क्षतिपूर्ति पोर्टल शुरू करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने विशेष गिरदावरी करवाकर किसानों को प्रति एकड़ कम से कम 50 हजार रुपए मुआवजे की मांग की। साथ ही, प्रभावित क्षेत्रों में पंप सेट, पाइप, बिजली कनेक्शन और लाइनों की तत्काल व्यवस्था करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार को युद्ध स्तर पर स्थिति की निगरानी कर इन सुविधाओं को उपलब्ध कराना चाहिए। हुड्डा ने सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि हरियाणा में बाढ़ के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार सोई हुई है। कांग्रेस सांसद ने आखिर में बात दोहराते हुए कहा कि तत्काल कार्रवाई की जरूरत है। इस बीच, कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हिसार के साबरवास गांव का दौरा किया और बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात की। सुरजेवाला ने भी हरियाणा सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "ये संकट की घड़ी है। स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। घर, फसलें और आजीविका तबाह हो चुकी है। बहुत ही दुख व चिंता की बात है कि भाजपा सरकार की ओर से समय पर राहत कार्यों में कमी दिख रही है। इस वक्त प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता की जरूरत है, लेकिन भाजपा की लापरवाही व ढिलाई लोगों का दर्द और ज्यादा बढ़ा रही है।"

प्रशांत किशोर किस सीट से उतरेंगे मैदान में—सासाराम या राघोपुर?

पटना बिहार की सियासत में हलचल मचाने वाले जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अब खुद चुनाव लड़ने के संकेत दे दिए हैं। लंबे समय से यह सवाल उठ रहा था कि क्या रणनीति के मास्टरमाइंड अब मैदान में उतरेंगे? इस बार उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगर नीतीश कुमार चुनाव लड़ते हैं तो वह भी जरूर लड़ेंगे। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी बताया कि अगर चुनाव लड़ना पड़ा तो अपनी जन्मभूमि या कर्मभूमि से ही लड़ेंगे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या पीके सासाराम, करगहर या फिर राघोपुर से ताल ठोक सकते हैं? अब तक दूसरों के लिए चुनावी रणनीति बनाने वाले प्रशांत किशोर अब खुद सियासी मैदान में उतरने को तैयार दिख रहे हैं। बिहार के हर जिले का दौरा कर चुके पीके ने दो साल तक जन संवाद और जन सुराज पदयात्रा के जरिए लोगों से सीधा संवाद किया है। अब वह केवल पार्टी के चेहरे नहीं बल्कि उसके उम्मीदवार भी बन सकते हैं। नीतीश कुमार पर डाली गेंद प्रशांत किशोर से जब पूछा गया कि वह खुद चुनाव लड़ेंगे या नहीं तो उन्होंने सीधे तौर पर नीतीश कुमार का नाम लिया। उन्होंने कहा "मैंने पहले भी कहा है कि अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुनाव लड़ते हैं तो निश्चित तौर पर मैं भी चुनाव लड़ूंगा।" इस बयान से साफ है कि पीके चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं लेकिन उन्होंने अंतिम फैसला नीतीश कुमार की चुनावी भागीदारी पर टाल दिया है। गौरतलब है कि नीतीश कुमार पिछले करीब 20 वर्षों से खुद कोई चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। तेजस्वी यादव से भी मुकाबले के संकेत प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी चाहे तो वह तेजस्वी यादव के खिलाफ भी चुनाव लड़ सकते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि "अगर विपक्ष के मुख्य चेहरे के खिलाफ लड़ना है तो लड़ने में कोई हर्ज नहीं है, लेकिन सिर्फ किसी के खिलाफ लड़ने का फायदा नहीं है।" यह बयान उनके आत्मविश्वास को दिखाता है और यह भी कि वह राजनीतिक चुनौतियों से भागने वाले नहीं हैं। जन्मभूमि बनाम कर्मभूमि – कौन सी सीट होगी चुनौतियों भरी? प्रशांत किशोर ने अपने आगामी चुनाव लड़ने को लेकर दो अहम विकल्पों की ओर इशारा किया है – उनकी जन्मभूमि और कर्मभूमि। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर उन्हें चुनाव लड़ना पड़ा, तो वह या तो अपनी जन्मभूमि या फिर कर्मभूमि से चुनाव मैदान में उतरेंगे। जन्मभूमि के आधार पर दो संभावित सीटों के नाम सामने आए हैं – सासाराम और करगहर। वहीं, कर्मभूमि के रूप में उन्होंने राघोपुर का नाम लिया, जहां उन्होंने सबसे अधिक समय बिताया और जन सुराज की नींव मजबूत की। पीके ने यह भी कहा कि वह खुद लोगों को सलाह देते हैं कि अगर चुनाव लड़ना है तो एक सीट जन्मभूमि से और दूसरी कर्मभूमि से लड़नी चाहिए। उनके इस बयान से यह भी संकेत मिलता है कि वे पार्टी की अनुमति मिलने पर दो सीटों से चुनाव लड़ सकते हैं, जिससे उनकी राजनीतिक मौजूदगी और असर दोनों और अधिक मजबूत हो सकते हैं। जन सुराज पार्टी की तैयारी और पीके की भूमिका जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पहले ही एलान कर दिया है कि उनकी पार्टी बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पार्टी का चेहरा बने प्रशांत किशोर खुद मैदान में उतरेंगे या केवल प्रचार तक सीमित रहेंगे। उन्होंने कहा "हम पार्टी के ऊपर नहीं हैं, पार्टी जो तय करेगी वही होगा।" इस बयान से यह साफ है कि वह एक लोकतांत्रिक ढंग से पार्टी चला रहे हैं और व्यक्तिगत निर्णयों से ऊपर संगठनात्मक निर्णयों को महत्व दे रहे हैं। प्रशांत किशोर की तरफ से यह अब तक का सबसे मजबूत संकेत है कि वह चुनाव लड़ने को लेकर गंभीर हैं। सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि अगर पीके चुनाव लड़ते हैं तो वह सीट "वीआईपी" सीट बन जाएगी। चाहे वह सासाराम हो, करगहर हो या राघोपुर – वहां मुकाबला दिलचस्प और हाई-प्रोफाइल हो जाएगा।