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मासूम का सपना हुआ पूरा: 8 साल की बच्ची को मिली पुलिस की नौकरी, जानें कितना मिलेगा वेतन

उज्जैन क्या चौथी कक्षा में पढ़ने वाली आठ साल की बच्ची पुलिस विभाग में भर्ती हो सकती है, तो इसके जवाब में हर कोई कहेगा कि नहीं ऐसा बिल्कुल भी संभव नहीं है। लेकिन मध्य प्रदेश के उज्जैन में ऐसा हो चुका है। यहां पर पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने हाल ही में इस 8 साल की बच्ची को पुलिस में बाल आरक्षक पद पर नियुक्ति का पत्र सौंपा है। नियुक्ति पत्र के साथ बालिका की सैलरी ओर कार्य का दायित्व भी सौंपा गया। हालांकि वर्दी पहनने के लिए उसे 10 साल ओर इंतजार करना पड़ेगा। यह मामला सोमवार को उस वक्त सामने आया, जब बच्ची अपनी मां के साथ हाथों में कॉपी-पेंसिल की जगह अनुकम्पा नियुक्ति के लिए नौकरी का आवेदन लेकर उज्जैन शहर के पुलिस कंट्रोल रूम स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची। इस बच्ची का नाम इच्छा रघुवंशी है, जो कि अपने पिता की जगह अनुकम्पा नियुक्ति पाने के लिए आवेदन लेकर पहुंची थी। दरअसल उसके पिता देवेंद्र सिंह रघुवंशी महाकाल थाने में प्रधान आरक्षक थे, और इस साल 17 मई को ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक आने से उनकी मौत हो गई थी। पति के अचानक जाने से मां-बेटी पर टूटा दुखों का पहाड़ तीन सदस्यों के परिवार में इच्छा के पिता कमाने वाले अकेले सदस्य थे। ऐसे में उनके यूं अचानक गुजर जाने से मां-बेटी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया और उनका पालन-पोषण करने वाला कोई नहीं बचा। ऐसे में देवेंद्र सिंह के गुजरने के तीन महीने बाद 2 सितंबर को मृतक प्रधान आरक्षक की पत्नी अपनी 8 वर्षीय बेटी इच्छा के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची और यहां आरक्षक पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन देने के 25 मिनिट के अंदर मिला नियुक्ति पत्र शासकीय कार्य कैसे होते हैं यह तो हम भलीभांति जानते हैं। ऐसे मामलों में आमतौर पर फाइलें इधर से उधर घूमती रहती हैं, साइन और आदेश के बीच समय निकलता जाता है, पर इस मामले ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ। मां-बेटी जब अनुकम्पा नियुक्ति से जुड़ा आवेदन पत्र लेकर पहुंचीं तो उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने अति संवेदनशीलता का परिचय देते हुए आवेदन प्राप्त होते ही तत्काल इस बारे में आदेश जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी और मात्र 25 मिनट के भीतर ही उन्होंने बच्ची को बाल आरक्षक पद पर नियुक्ति का आदेश जारी कर नियुक्ति पत्र परिजन को सौंप दिया। नौकरी में बच्ची को करना पड़ेगा यह काम, मिलेगा इतना वेतन इच्छा अभी 8 साल की है और चौथी कक्षा में पढ़ती है, हालांकि इसके बावजूद उसका नाम पुलिस कर्मचारी की लिस्ट में दर्ज हो चुका है। पुलिस नियमों के अनुसार जब वो 10वीं कक्षा पास कर लेगी तो स्थायी आरक्षक बन सकेगी। इच्छा को मिलने वाले वेतन की जानकारी देते हुए अधिकारी ने बताया कि बाल आरक्षक को नव आरक्षक से आधा वेतन मिलता है। इसी नियम के तहत इच्छा को हर महीने 15 हजार 113 रुपए वेतन मिलेगा। साथ ही उसे महीने में एक बार थाने आकर साइन करना होगा और इस दौरान उसकी पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी जानकारी भी ली जाएगी। 10 साल बाद जब इच्छा 18 साल की उम्र पूरी कर लेगी और 10वीं की परीक्षा पास कर लेगी, तो उसके बाद वह स्थायी आरक्षक बन पाएगी। इस दौरान पिता की पेंशन उनकी मां को मिलती रहेगी।

नरेश मीणा को जमानत, मेडिकल कॉलेज प्रदर्शन मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

जयपुर झालावाड़ में स्कूल भवन हादसे के बाद अस्पताल के बाहर धरना देने पर गिरफ्तार किए गए नरेश मीणा को हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। मीणा पर राजकार्य में बाधा और आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित करने के आरोप थे। गिरफ्तारी के बाद वे न्यायिक हिरासत में भेजे गए थे। झालावाड़ जिले में हुए स्कूल भवन हादसे के बाद उपजी सियासी हलचल अब अदालत तक पहुंच गई। इस घटनाक्रम में गिरफ्तार नेता नरेश मीणा को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें जमानत दे दी है। गौरतलब है कि 25 जुलाई को जब झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में स्कूल भवन हादसे के बाद नरेश मीणा अपने समर्थकों के साथ झालावाड़ के मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे थे। वहां उन्होंने अस्पताल के इमरजेंसी भवन के बाहर धरना और प्रदर्शन किया। इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए नरेश मीणा सहित कई लोगों पर राजकार्य में बाधा डालने और आपातकालीन सेवा को बाधित करने के आरोप लगाए। पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद उन्हें झालावाड़ जिला न्यायालय में अवकाशकालीन न्यायाधीश के समक्ष पेश किया। वहां से उन्हें 8 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। हिरासत की अवधि के दौरान उनके समर्थकों ने इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए लगातार विरोध प्रदर्शन भी किया।

भारी बारिश से ठिठुरन बढ़ी, यूपी के 11 जिलों में अलर्ट जारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों, खासकर पश्चिम में बाढ़ और भारी बारिश का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग ने अलीगढ़, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, झांसी, महोबा सहित 11 जिलों में भारी वर्षा की संभावना जताई है। 23 जिलों में गरज-चमक के साथ वर्षा और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया। पूर्वांचल में सरयू और बड़ी गंडक का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। यूपी के मुजफ्फरनगर में रामराज क्षेत्र में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर चल रहा है। बुढ़ाना क्षेत्र में पांच मकानों की छत-दीवारें गिर गई। चरथावल क्षेत्र के रोनी हरजीपुर गांव में पक्का मकान भी ढह गया। कई जिलों में मकानों की दीवारें ढहीं मेरठ समेत वेस्ट यूपी के कई जिलों में लगातार तीसरे दिन बारिश की आफत रही। बुलंदशहर में पेड़ गिरने से एक युवक की मौत हो गई। हापुड़, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, बुलंदशहर में करीब 15 मकान गिरने से कई लोग घायल हो गए। उधर, गंगा-यमुना अपने पूरे उफान पर चल रही हैं। पूर्वांचल में भी नदियों का जलस्तर बढ़ता जा रहा गोरखपुर-बस्ती मंडल में भले ही बारिश न हुई हो, लेकिन सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटों में गोरखपुर में सरयू का जलस्तर 18 सेंटीमीटर बढ़ गया है। तुर्तीपार में सरयू खतरे के निशान से 36 सेंटीमीटर, अयोध्या में 31 सेंटीमीटर और देवरिया में 85 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बस्ती में भी नदी खतरे के निशान से 28 सेंटीमीटर ऊपर है। कुशीनगर में बड़ी गंडक नदी भी चेतावनी बिंदु से 8 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। वहीं राप्ती और रोहिन नदियों का जलस्तर फिलहाल घट रहा है। प्रशासन ने सभी बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है। मुरादाबाद मंडल में लगातार बारिश और बैराजों से छोड़े गए पानी ने हालात बिगाड़ दिए हैं।  

बाढ़ पर रिपोर्ट सौंपने के बाद राज्यपाल संग बैठक, शिवराज सिंह चौहान पहुंचे पंजाब

पंजाब  केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पंजाब के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने पहुंच गए हैं। वह आज अमृतसर और गुरदासपुर जिलों सहित विभिन्न इलाकों का निरीक्षण करेंगे और हालात की समीक्षा करेंगे। इससे पहले पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने अमृतसर स्थित श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर केंद्रीय मंत्री से मुलाकात की और उन्हें पंजाब के पांच सरहदी जिलों — अमृतसर, पठानकोट, गुरदासपुर, तरनतारन और फिरोजपुर में आई बाढ़ संबंधी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी।   राज्यपाल कटारिया ने 1 से 4 सितंबर तक इन पांच जिलों का दौरा किया था। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को मानव जीवन, संपत्ति, फसलों और बुनियादी ढांचे को हुए बड़े पैमाने पर नुकसान के बारे में जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने पंजाब सरकार, जिला प्रशासन, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से चलाए जा रहे राहत एवं पुनर्वास कार्यों की प्रगति की भी जानकारी दी। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उनका यह दौरा बाढ़ प्रभावित लोगों से मिलकर उनकी तात्कालिक जरूरतों को समझने के लिए है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार पंजाब को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी, ताकि राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाई जा सके। मंत्री पूरे दिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहकर लोगों से मुलाकात करेंगे और शाम को पंजाब के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद वे दिल्ली रवाना हो जाएंगे।

MP हाईकोर्ट सख्त: परीक्षा में सहायक अध्यापकों को 25% आरक्षण का आधार बताएं सरकार

इंदौर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर पूछा है कि सहायक प्राध्यापकों की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में किस आधार पर सहायक अध्यापकों को 25 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। कोर्ट ने शासन को यह नोटिस भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए जारी किया है। सहायक प्राध्यापक के रिक्त पदों के लिए राज्य शासन ने 31 दिसंबर 2024 को भर्ती निकाली थी। इस संबंध में मप्र लोकसेवा आयोग ने परीक्षा आयोजित की थी। इसमें सहायक अध्यापकों को 25 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया गया। इस संबंध में शासन ने 24 दिसंबर 2024 को आदेश जारी किया था। इस आदेश को याचिकाकर्ता सोनू जाटव ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में कहा है कि आरक्षण पिछड़े एवं कमजोर वर्ग के लिए बनाई गई एक संवैधानिक नीति है। सहायक अध्यापक न तो समाज के पिछड़े वर्ग से आते हैं, न ही वे कमजोर वर्ग में शामिल हैं, इसलिए उन्हें आरक्षण का लाभ दिया जाना संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है। याचिका पर सुनवाई हुई। 17 जून को नए प्रमोशन के नियम को दी थी मंजूरी मोहन यादव कैबिनेट ने 17 जून को नए प्रमोशन नियमों को मंजूरी दी थी। इसके बाद सरकार ने 19 जून 2025 को नए नियम बनाकर उन्हें लागू कर दिया। लेकिन सरकार ने न तो सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका वापस ली और न ही पुराने नियम से प्रमोट हुए कर्मचारियों को पदावनत किया। इसका मतलब है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की थी, उसे वापस नहीं लिया। साथ ही, पुराने नियमों के तहत जिन कर्मचारियों का प्रमोशन हुआ था, उन्हें उनके पद से नहीं हटाया गया। इसी वजह से जब इन नियमों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, तो कोर्ट ने सरकार से नए और पुराने नियमों के बीच का अंतर स्पष्ट करने को कहा। कोर्ट ने यह भी पूछा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस क्यों नहीं ली। जब ये नियम बन रहे थे, तब भी यह मुद्दा उठा था। लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। अब इस मामले में सरकार जो जवाब देगी, उससे ही यह तय होगा कि प्रमोशन का रास्ता खुलेगा या प्रमोशन पर रोक लगी रहेगी।

बड़ी सेंध! बांग्लादेशी घुसपैठिया भारतीय सेना में भर्ती, खुफिया एजेंसियां अलर्ट

इंदौर  बांग्लादेशी नागरिक और रोहिंग्याओं की जांच कर रही मध्य प्रदेश की एसआइटी को चौंकाने वाली जानकारी मिली है। पड़ताल में न केवल कई बांग्लादेशी अवैध तरीके से इंदौर में रहते मिले, बल्कि यह भी पता चला कि ऐसी ही एक महिला का बेटा सेना में भर्ती हो गया है। आइबी सहित अन्य राष्ट्रीय एजेंसियों ने शुरू की जांच एसआइटी की रिपोर्ट के बाद आइबी सहित अन्य राष्ट्रीय एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। एसआइटी ने एक महिला को वापस बांग्लादेश भेज दिया है, जबकि दो अन्य महिलाओं को हिरासत में लिया है। बता दें कि पुलिस मुख्यालय से मिली गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर डीसीपी इंटेलिजेंस डॉ. हंसराज ने एसआइटी का गठन किया था। पिछले माह पुलिस का सात सदस्यीय दल बंगाल गया था, जहां पता चला कि इंदौर में कई बांग्लादेशी नागरिक फर्जी आधार और पैनकार्ड बनाकर रह रहे हैं। सौरभ ने इंदौर में घर बना लिया कॉकद्वीप (कोलकाता) का सौरभ दास भी उनमें एक है। वर्षों पूर्व घुसपैठ कर भारत आए उसके दादा आज भी बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में रेलवे पटरी के समीप रहते हैं। सौरभ ने इंदौर में घर बना लिया और बांग्लादेशी युवती से शादी कर ली। पुलिस ने युवती को शाजापुर से पकड़कर वापस भेज दिया, पर सौरभ गायब हो गया। इसी जांच में पता चला कि सौरभ की बहन प्रभा का एक बेटा सेना में भर्ती हो गया है। डीसीपी ने बंगाल के बड़े अफसरों से बात की बता दें कि बंगाल गई एसआइटी टीम का वहां रहवासियों ने न केवल विरोध किया, बल्कि स्थानीय पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और दिनभर थाने में बैठाकर रखा। डीसीपी ने बंगाल के बड़े अफसरों से बात की, तब कहीं एसआइटी के सदस्यों को छोड़ा गया।  

दलित सांसद के अपमान का मुद्दा गरमाया, पार्षदों ने विपक्ष के साथ मिलकर किया हंगामा

लखनऊ  लखनऊ नगर निगम सदन में गुरुवार को भाजपा पार्षद मुकेश सिंह मोंटी अचानक विपक्ष की दीर्घा में बैठकर सुर्खियों में आ गए। महापौर सुषमा खर्कवाल से उनकी लगातार अनबन चल रही है, जिसकी झलक सदन की कार्यवाही के दौरान फिर दिखी। वहीं नगर निगम सदन की बैठक शुक्रवार को हंगामे की भेंट चढ़ गई। कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि मोहनलालगंज के दलित सांसद आरके चौधरी का किसी भी विकास कार्य के शिलापट्ट पर नाम नहीं लिखा जा रहा है। बजट की पुष्टि पर चर्चा के बीच मोंटी ने महापौर पर मनमर्जी से संशोधन करने का आरोप लगाया और मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाने की मांग की। उन्होंने साफ कहा कि समिति में दो सत्ता पक्ष और एक विपक्ष के पार्षद को शामिल किया जाए। इस पर महापौर भड़क उठीं और जवाब दिया कि कमेटी गठित करना केवल महापौर का अधिकार है। तनावपूर्ण माहौल के बीच मोंटी का विपक्ष के साथ बैठना सियासी हलचल का कारण बना। कांग्रेस पार्षद और पूर्व कांग्रेस नगर अध्यक्ष मुकेश सिंह चौहान ने उन्हें अपनी पार्टी में शामिल होने का निमंत्रण दिया और आश्वासन दिया कि उनका स्वागत होगा। वहीं सपा पार्षद दल के नेता कामरान बेग ने भी मोंटी को सपा में आने का न्यौता देते हुए दावा किया कि 2027 तक भाजपा के अधिकांश पार्षद समाजवादी पार्टी से जुड़ जाएंगे। इस घटनाक्रम ने नगर निगम की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत दे दिए हैं। भाजपा पार्षद के विपक्ष की ओर झुकाव से न सिर्फ सदन का माहौल गरमाया बल्कि भाजपा संगठन में भी बेचैनी बढ़ गई है। सदन में नारेबाजी होने लगी और कार्यवाही बाधित कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने चौहान के इस बयान पर विपक्षी पार्षदों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। सदन में नारेबाजी होने लगी और कार्यवाही बाधित हो गई। पार्षदों ने कहा कि सांसद क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनके नाम को जानबूझकर दरकिनार करना दलित समाज का अपमान है। विवाद बढ़ता देख महापौर ने स्थिति संभालने की कोशिश की। उन्होंने आश्वासन दिया कि मोहनलालगंज सांसद का नाम विकास कार्यों से जुड़े शिलापट्टों पर अवश्य लिखा जाएगा। महापौर के आश्वासन के बाद विपक्ष शांत हुआ और कार्यवाही आगे बढ़ सकी।  

रीवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: पहाड़ पर खड़ी गाड़ी से मिला भारी मात्रा में विस्फोटक

 रीवा  बीती शाम करीबन 6 बजे गुढ़ पुलिस को मुखबिर से एक सूचना मिली। मुखबिर ने बताया कि एक विस्फोटक वाहन जिसका नं. यूपी 70 एचटी 4843 है। इस वाहन में विस्फोटक पदार्थ भरा हुआ है। इसे अवैध तरीके से कहीं ले जाया जा रहा है। इतना सुनने के बाद ही पुलिस अलर्ट हो गई। मुखबिर की सूचना पर पुलिस गाड़ी को तलाशने हुए इटार पहाड़ पहुंची। जहां वाहन मिल गया। वाहन में ड्राइवर मौजूद था। उसके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं थे। पुलिस ने वाहन को जब्त कर लिया और गाड़ी थाना ले आए। चालक को भी गिरफ्तार किया गया है। उसके खिलाफ बीएनएस की धारा 288, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 5(ए),6 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी उप निरी. शैल यादव, प्र.आर. राकेश वर्मा, आरक्षक मनोज निनामा, प्र.आर. अयोध्या प्रजापति, आर.रोवर हालदार, आर विपिन यादव, आर मनोज द्विवेदी, आर राजकुमार गुप्ता, आर अनिल दाहिया, सैनिक संतोष मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विस्फोटक हुआ बरामद जब्त वाहन क्रमांक यूपी 70 एचटी 4843 से पुलिस को विस्फोटक इण्डोसुपर पावर 90-32 एमएस की राड के 17 नग खाखी रंग के कार्टून जिनका वजन 25 केजी प्रति कार्टून है। कुल वजन 425 किलो है। एक कार्टून खुला हुआ जिसमें करीबन 10 किलो उपरोक्त विस्फोटक राड है। दो बंडल लाल रंग का ब्लास्टिंग में उपयोग करने वाले तार व एक खुले हुए कार्टून मे विस्फोटक ऐसेसीरिज, ड्राइवर द्वारा पेश संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए हैं। ग्वालियर का रहने वाला है ड्राइवर पुलिस ने वाहन के ड्राइवर को भी गिरफ्तार किया है। ड्राइवर का नाम सौरभ प्रजापति पिता पूरन प्रजापति उम्र 25 वर्ष है। वह ग्राम टिकुला थाना मोहना जिला ग्वालियर हाल पता जय मां विंध्यवासिनी इन्टर प्राइजेज मैंगजीन ग्राम लतीफपुर थाना कोरांव जिला प्रयागराज उ.प्र. का रहने वाला है।

करप्शन केस में कार्रवाई: ऑर्डिनेंस फैक्ट्री जबलपुर से DGM गिरफ्तार, नागपुर कनेक्शन

जबलपुर  भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोपों के चलते सीबीआई ने बुधवार को जबलपुर ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में बड़ी कार्रवाई की. इस दौरान टीम ने डीजीएम दीपक लांबा से गहन पूछताछ की. लांबा के खिलाफ पहले ही सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर रखी है. आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की और इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा. जानकारी के मुताबिक, लांबा के नागपुर ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में पदस्थ रहते समय यह मामला सामने आया था.सीबीआई ने 25 अगस्त को दर्ज एफआईआर में नागपुर की कंपनी ऑटोमेशन इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रियल सर्विसेज के मालिक मोहित ठोलिया और तत्कालीन डीजीएम दीपक लांबा पर भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए हैं. जांच एजेंसी का कहना है कि दोनों की मिलीभगत से सरकारी ठेके में गंभीर अनियमितताएं की गईं, जिसके चलते लाखों रुपये का नुकसान हुआ. सीबीआई मिले कई आपत्तिजनक दस्तावेज सीबीआई की टीम ने इस प्रकरण की तह तक जाने के लिए जबलपुर और नागपुर समेत चार स्थानों पर छापेमारी की. इसमें आरोपितों के घर और दफ्तर शामिल थे. छापों के दौरान सीबीआई को कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं. जांच अधिकारियों के अनुसार, ये दस्तावेज आरोपों को और मजबूत करते हैं तथा यह साबित करते हैं कि नियमों को दरकिनार कर निजी स्वार्थ साधे गए. लांबा ने निजी कंपनी को दिलाया लाभ शिकायत में यह भी उल्लेख है कि दीपक लांबा ने नागपुर की ऑर्डनेंस फैक्ट्री अंबाझरी (OFAJ) में उप महाप्रबंधक रहते हुए नियमों के विरुद्ध एक प्रोप्राइटरशिप फर्म की स्थापना की. बाद में इस फर्म को टेंडर दिलाने के लिए अपनी आधिकारिक स्थिति का गलत इस्तेमाल किया. सीबीआई का मानना है कि इस पूरे खेल में सरकारी खजाने को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया और लाभ निजी कंपनी को दिलाया गया. फिलहाल सीबीआई ने डीजीएम दीपक लांबा को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है और उनसे भ्रष्टाचार की पूरी श्रृंखला को लेकर सवाल-जवाब हो रहे हैं. एजेंसी इस मामले में मिले दस्तावेजों का तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण भी कर रही है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ेगा तथा अन्य अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है.  

NHRC मेंबर को लालच देने की कोशिश, शारिक मछली का गुर्गा बोला- भारी नुकसान हो गया, छोड़ दो उसे

भोपाल  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि नई दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर भोपाल के शारिक मछली गैंग से जुड़ा एक शख्स पहुंचा और उन्हें प्रलोभन देने की कोशिश की. लेकिन कानूनगो ने सख्त नाराजगी जताते हुए आरोपी को फटकार लगाई और तुरंत बाहर निकलवा दिया. इसके बाद पुलिस को शिकायत दी गई है.  प्रियंक कानूनगो ने 'X' पर पोस्ट में लिखा, "मेरे दिल्ली सरकारी आवास पर जैनेंद्र पाठक नामक व्यक्ति, जो स्वयं को मध्य प्रदेश का निवासी बता रहा था, मुझसे मिलने आया. उसने कहा कि वह भोपाल के शारिक मछली के साथ प्रॉपर्टी का व्यवसाय करता है और उसकी ओर से आया है. उसने बताया कि शारिक को भारी नुकसान हुआ है और उसे छोड़ दिया जाए. मैंने उसे डांटकर भगा दिया. वह अपने साथ लाई मिठाई छोड़ना चाहता था, जो उसने दरवाजे पर रखकर भागते समय छोड़ दी. हमने पुलिस को शिकायत की, और पुलिस ने मिठाई जप्त कर ली. शारिक के खिलाफ हिंदू लड़कियों को नशीले पदार्थ देने, बलात्कार, वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने और इस्लाम में धर्मांतरण कराने के साथ-साथ वंचित केवट-मांझी समुदाय के वंशानुगत तालाबों पर मत्स्याखेट के लिए कब्जा करने के मामलों में मेरे निर्देश पर जांच चल रही है. जांच पूरी सख्ती और निष्पक्षता से की जाएगी." प्रॉपर्टी सौदे के नाम पर लालच कानूनगो के मुताबिक, शख्स ने प्रॉपर्टी डील के नाम पर लालच देने की कोशिश भी की. वो अपने साथ मिठाई का डिब्बा भी लाया था और भेंट स्वरूप देना चाहता था. लेकिन उन्होंने सख्ती से इनकार करते हुए आरोपी को बाहर निकलवा दिया. बताया जाता है कि वह मिठाई का डिब्बा दरवाजे पर ही छोड़कर वहां से भाग गया. अब पुलिस ने मिठाई का डिब्बा जब्त कर जांच शुरू कर दी है.