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मध्य प्रदेश: कांग्रेस 12 सितंबर को उज्जैन में बड़े प्रदर्शन के लिए तैयार, सीएम के गृह क्षेत्र से भिड़ेगी

 उज्जैन   वर्ष 2023 में विधानसभा और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में करारी हार के बाद फिर से खड़ा होने की कोशिश कर रही कांग्रेस राज्य की भाजपा सरकार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह क्षेत्र उज्जैन से ललकारेगी। सरकार को घेरने कांग्रेस 12 सितंबर को उज्जैन में बड़ा प्रदर्शन करेगी। बड़ी रैली के बाद सभा भी होगी। इसमें सिंहस्थ क्षेत्र के भूमि अधिग्रहण, कानून-व्यवस्था, वोट चोरी, अवैध शराब के कारोबार सहित तमाम मुद्दों को उठाया जाएगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल, सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहेंगे। बता दें, सिंहस्थ-2028 के लिए किसानों की जमीन लैंड पुलिंग के जरिये लिए जाने का किसान संगठन विरोध कर रहे हैं। संगठन के प्रतिनिधि भाजपा के बड़े नेताओं से भी मिल चुके हैं। प्रदेश में वर्ष 2027 से नगरीय निकायों के साथ चुनाव की शुरुआत होनी है। इसके बाद वर्ष 2028 में विधानसभा और वर्ष 2029 में लोकसभा चुनाव होंगे। कांग्रेस इसके लिए खुद को तैयार कर रही है। दरअसल, विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले वरिष्ठ नेताओं से नाराजगी के चलते कांग्रेस से बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता भाजपा में चले गए थे। इसका असर यह हुआ कि कई मतदान केंद्रों पर बैठाने के लिए कार्यकर्ता तक नहीं मिले। यह स्थिति आगे न बने और कार्यकर्ता हतोत्साहित न रहें, इसके लिए पीढ़ी परिवर्तन पर काम प्रारंभ किया गया। वोट चोर-गद्दी छोड़ अभियान के जरिये पूरे प्रदेश में माहौल बनाया जा रहा है। इसी क्रम में उज्जैन में बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी है। प्रदर्शन को प्रभावी बनाने का जिम्मा उज्जैन से लगे जिलों की टीम को दिया है। इसकी सफलता के आधार पर नए अध्यक्षों की क्षमता का आकलन भी होगा। नेतृत्व नए नेताओं के हाथ दे रही कांग्रेस मध्य प्रदेश में भाजपा से मुकाबला करने कांग्रेस नया नेतृत्व तैयार कर रही है। ओबीसी वर्ग से आने वाले जीतू पटवारी को जहां प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया तो आदिवासी वर्ग के उमंग सिंघार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाकर मौका दिया। संगठन सृजन अभियान चलाकर जिला अध्यक्ष बनाए गए। जयवर्धन सिंह, प्रियव्रत सिंह, ओमकार सिंह मरकाम जैसे वरिष्ठ नेताओं को जिला अध्यक्ष बनाकर संदेश दिया कि जिला इकाई सबसे महत्वपूर्ण है। जिले के बाद अब ब्लाक इकाइयों में परिवर्तन की तैयारी है। कार्यकर्ताओं को मिशन 2028 में जुटने का संदेश दिया जाएगा     अधिकतर जिलों में 'वोट चोर-गद्दी छोड़' अभियान के अंतर्गत प्रदर्शन हो चुके हैं इसलिए अब राज्य स्तरीय प्रदर्शन उज्जैन में होना है। मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र होने के साथ-साथ उज्जैन मालवा अंचल का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां बड़ा प्रदर्शन करके पूरे प्रदेश के कार्यकर्ताओं को मिशन-2028 (विधानसभा चुनाव) में जुटने का संदेश दिया जाएगा। – संजय कामले, प्रदेश संगठन महामंत्री, कांग्रेस  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की निवेश संवर्धन पहल का परिणाम

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवेश संवर्धन प्रयासों के फलस्वरुप ऊर्जा क्षेत्र और ज्यादा मजबूत हो रहा है। ऊर्जा सुरक्षा बढ़ रही है। मध्यप्रदेश पॉवर सरप्लस राज्य के रूप में पहचान बना चुका है। ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से अब इस क्षेत्र में नया निवेश आ रहा है। टोरेंट पॉवर और अडानी पॉवर जैसी बड़ी कंपनियों ने अब ऊर्जा उत्पादन के लिए प्रदेश में काम करना शुरू कर दिया है। टोरेंट पॉवर कंपनी 22 हजार करोड़ और अडानी पॉवर कंपनी 10 हजार 500 करोड़ रूपये का निवेश करेगी। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार 17,000 को रोजगार मिलेगा। टोरेंट पॉवर 1600 मेगावॉट थर्मल प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश में 22 हजार करोड़ रूपये का निवेश करेगी। टोरेंट पॉवर लिमिटेड को एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) से 1,600 मेगावॉट के कोयला आधारित बिजली संयंत्र की स्थापना के लिए "लेटर ऑफ अवार्ड (LoA)" दे दिया है। यह अहमदाबाद-स्थित समूह द्वारा बिजली क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। यह परियोजना ग्रीनफील्ड 2×800 मेगावॉट की अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगी और इसे डिज़ाइन, निर्माण, वित्तपोषण, स्वामित्व और संचालन (DBFOO) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। टोरेंट इस संयंत्र की पूरी क्षमता MPPMCL को 25 साल की पॉवर परचेज एग्रीमेंट पॉवर परचेस एग्रीमेंट के तहत 5.829 रूपये प्रति यूनिट की दर से आपूर्ति करेगा। यह परियोजना PPA पर हस्ताक्षर होने के 72 महीनों के भीतर चालू होनी है। परियोजना लागत का लगभग 70% ऋण के माध्यम से पूरा किया जाएगा। इस संयंत्र के लिए कोयले का आवंटन MPPMCL द्वारा केंद्र सरकार की SHAKTI नीति के अंतर्गत किया जाएगा। यह परियोजना अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगी, जिससे पारंपरिक थर्मल यूनिट्स की तुलना में बेहतर दक्षता और कम उत्सर्जन मिलेगा। टोरेंट पॉवर का यह निवेश केंद्र सरकार के 2032 तक 80 गीगावॉट अतिरिक्त कोयला आधारित क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे ग्रिड को स्थिर करने के लिए आवश्यक बेसलोड क्षमता जुड़ेगी। इस परियोजना के निर्माण के दौरान 10 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। अडानी पॉवर मध्यप्रदेश में 800 मेगावॉट का ताप विद्युत संयंत्र 10 हजार 500 करोड़ रुपये की लागत से विकसित कर मध्यप्रदेश को बिजली आपूर्ति करेगी। इस परियोजना के तहत 800 मेगावॉट की क्षमता वाला एक नया ताप विद्युत संयंत्र स्थापित किया जाएगा। यह संयंत्र अनूपपुर ज़िले में स्थित होगा। संयंत्र को 54 महीनों में चालू किया जाएगा। यह कदम प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेगा। एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र विकसित करने और उससे बिजली आपूर्ति के लिए लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) दे चुकी है। यह संयंत्र डिज़ाइन, निर्माण, वित्त, स्वामित्व और संचालन (DBFOO) मॉडल के तहत स्थापित किया जाएगा। जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है, देश की बिजली की मांग, विशेष रूप से बेस लोड पॉवर की मांग, लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ऊर्जा अधोसंरचना में निवेश अत्यंत आवश्यक है, जिससे बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। अनूपपुर संयंत्र विश्वसनीय, सस्ती और प्रतिस्पर्धात्मक दरों पर बिजली उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह न केवल भारत बल्कि मध्यप्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा और राज्य के सतत विकास को गति देगा। इस संयंत्र के लिए कोयले की आपूर्ति भारत सरकार की 'शक्ति योजना' (SHAKTI Policy) के तहत मध्यप्रदेश को आवंटित की गई है। परियोजना निर्माण चरण में 7,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा और चालू होने के बाद इसमें लगभग एक हजार स्थायी कर्मचारी कार्यरत होंगे।  

मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर IAS ट्रांसफर, सीधी-रीवा-भिंड के कलेक्टर बदलना तय

भोपाल  मध्य प्रदेश में बहुप्रतीक्षित आईएएस अधिकारियों की तबादला सूची अनंत चतुर्दशी के बाद जारी होगी। इन दिनों गणेश विसर्जन के जुलूस निकल रहे हैं। इस दौरान कानून-व्यवस्था को देखते हुए अभी कलेक्टरों को बदला जा रहा है। नवरात्रि के दो-चार दिन पहले तबादला आदेश जारी होंगे ताकि नए कलेक्टर पदभार ग्रहण करने के कुछ दिनों में जिलों को समझ भी लें। मुख्यमंत्री सीधी, रीवा, भिंड सहित कुछ जिलों के कलेक्टरों से नाराज हैं जिनका तबादला होना निश्चित बताया जा रहा है। करीब एक दर्जन कलेक्टरों के साथ ही तीन संभाग के कमिश्नर भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। 2010 बैच के आईएएस अधिकारियों, जिन्हें तीन-चार महीने बाद सुपर टाइम स्केल मिलना है, को भी सुपर टाइम स्केल वाली पदस्थापना मिल सकती है। 2010 बैच के इंदौर के कलेक्टर आशीष सिंह का उज्जैन संभाग का कमिश्नर बनना तय माना जा रहा है। जबलपुर के कलेक्टर दीपक सक्सेना को भी किसी बड़े संभाग का कमिश्नर बनाया जा सकता है। भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह भी 2010 बैच के अधिकारी हैं, उन्हें भी किसी बड़े विभाग का विभाग अध्यक्ष बनाने के साथ ही संबंधित कॉरपोरेशन का MD बनाने की चर्चा है।   प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की अपील का दिखा असर  मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने 3 सितंबर को अपना जन्मदिन परिवार के साथ बाबा महाकाल के दरबार में मनाया और भगवान महाकालेश्वर का आशीर्वाद लिया। मध्य प्रदेश में शायद पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी राजनीतिक हस्ती का जन्मदिन हो और कहीं पर भी होर्डिंग, बैनर और विज्ञापन नहीं दिखे। दरअसल खंडेलवाल ने अपने जन्मदिन से दो दिन पहले ही अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से सभी कार्यकर्ताओं से अपील की थी कि उनके जन्मदिन पर किसी भी प्रकार का होर्डिंग, बैनर या किसी प्रचार माध्यम से शुभकामनाएं ना दें। उन्होंने न सिर्फ यह अपील की वरन यह सुनिश्चित किया कि इसका पालन भी हो वरना पूर्व में यह देखा गया है कि राजनीतिक हस्ती दिखावे के लिए अपील तो कर देती है लेकिन होता यही है कि अखबारों में पूरे पेज के विज्ञापन के साथ ही शहर जन्मदिन के होर्डिंग और बैनर से सजे रहते हैं लेकिन वाकई इस बार ऐसा नहीं हुआ।  केवल एक सदस्य के भरोसे मानव अधिकार आयोग  मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग की संरचना के अनुसार अध्यक्ष और तीन सदस्य होते हैं, लेकिन वर्तमान में आयोग की स्थिति यह है कि पिछले कुछ महीनों से केवल एक ही सदस्य पूर्व आईपीएस अधिकारी राजीव टंडन ही कार्यरत हैं। जस्टिस एनके जैन के रिटायरमेंट के बाद अध्यक्ष पद पर तो पिछले दो वर्षों से कोई नहीं है। पूर्व न्यायाधीश मनोहर ममतानी थे तो केवल सदस्य लेकिन पिछले 2 वर्ष से कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में काम कर रहे थे, लेकिन वे भी चार महीने पहले रिटायर हो चुके हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार आने वाले समय में इस महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था में अध्यक्ष और सदस्य की जल्द ही नियुक्ति करेगी। उप लोकायुक्त: एक पद भरा, अभी भी एक पद खाली  मध्य प्रदेश में उप लोकायुक्त पद पर प्रदेश के पूर्व प्रमुख सचिव विधि नरेंद्र प्रसाद सिंह की नियुक्ति राज्य शासन ने कर दी है। लोकायुक्त संगठन की संरचना के अनुसार दो उप लोकायुक्त की पदस्थापना की जा सकती है, यानी अभी भी एक पद खाली है। बता दें कि उप लोकायुक्त के दोनों पद पिछले दो साल से खाली रहे हैं। कुछ साल पहले लोकायुक्त के दोनों पद भरे हुए थे और इन पदों पर पूर्व न्यायाधीश उमेश माहेश्वरी और श्री पालो पदस्थ रहे हैं। इससे पहले भी पूर्व न्यायाधीश चंद्र भूषण भी इस पद पर रहे हैं। दो महत्वपूर्ण संस्थाओं के डीजी इस माह हो रहे रिटायर इस महीने महानिदेशक स्तर के दो आईपीएस अधिकारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ये अधिकारी हैं राजविंदर सिंह भट्टी, महानिदेशक, सीआईएसएफ और राहुल रसगोत्रा, महानिदेशक, आईटीबीपी। भट्टी बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं जबकि रसगोत्रा मणिपुर कैडर के हैं। इस बीच पता चला है कि 1991 से 1994 के बीच के लगभग एक दर्जन आईपीएस अधिकारी इस दोनों पदों को हासिल करने के लिए जोड़ तोड़ में जुट गए हैं। माना जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय 20 सितंबर के बाद इन दोनों पदों के प्रमुखों के बारे में फैसला ले सकती है। 

सोशल मीडिया इनकम पर सरकार का नया नियम, लाइक्स-डील से होने वाली कमाई पर टैक्स अनिवार्य

भोपाल  सोशल मीडिया पर रील्स बनाकर फेमस होना, यूट्यूब पर वीडियोज से लाखों की कमाई करना या इंस्टाग्राम पर ब्रांड प्रमोशन से पैसा कमाना अब सिर्फ लाइक्स और फॉलोअर्स का खेल नहीं रहा. अगर आप भी डिजिटल दुनिया से कमाई कर रहे हैं, तो अब सरकार की नजर भी आप पर है. आयकर विभाग ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स और ट्रेडर्स के लिए आईटीआर फाइलिंग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. आप भी सोशल मीडिया पर रील बनाकर पैसे कमाते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। अब सरकार आपके हर लाइक्स व ब्रांड डील (Brand Deals) पर टैक्स लेगी। आयकर विभाग ने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर (content creators) की कमाई को ट्रैक करने के लिए नया प्रोफेशनल कोड 16021 (New professional code) लागू किया है। इसके लागू होते ही प्रदेश के 300 से ज्यादा इन्फ्लुएंसर आयकर की रडार पर आ गए हैं। अब तक उन्हें कंपनियां टीडीएस काटकर रुपए देती थी। लेकिन पहली बार अब इनकम टैक्स रिटर्न भी भरना होगा। बताते हैं, मप्र में रील, सोशल मीडिया पर ब्रांडिंग करने वालों की संख्या दो हजार तक जा सकती है। सीए पंकज शर्मा ने कहा, बदलते समय में यह जरूरी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म की आइटीआर-3 या आइटीआर-4 में दर्ज नए कोड के तहत, ब्रांड प्रमोशन, प्रोडक्ट बेचने या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट बनाने से होने वाली आय को आइटीआर-3 या आइटीआर-4 फॉर्म में स्पष्ट रूप से दर्ज करना अनिवार्य है। धारा 44 एडीए में अनुमानित आय पर टैक्स छूट लेने के लिए आइटीआर-4 फॉर्म भरना होगा। यदि सालाना प्रोफेशनल इनकम 50 लाख रुपए से कम है, तो 50 फीसदी आय यानी 25 लाख पर टैक्स लगेगा। जिनकी आय 50 लाख से अधिक है तो उन्हें 25 लाख पर टैक्स तो देना होगा। खर्च का ऑडिट भी कराना होगा। आयकर को नहीं पता चलता था कमाई का स्रोत अब तक कुछ इन्फ्लुएंसर आयकर रिटर्न को अन्य प्रोफेशनल कैटेगरी में भरते थे। इससे विभाग को उनका पेशा पता करने में दिक्कत होती थी। कमाई का स्रोत भी पता नहीं चलता था। 2020 तक देश में करीब 10 लाख इंफ्लुएंसर्स थे। 2024 में यह बढ़कर करीब 40 लाख से ज्यादा हो गए। देश के टॉप इंफ्लुएंसर     केरी मिनाटी- 21.3 मिलियन     भुवन बाम – 20.8 मिलियन     अमित भड़ाना- 9.8 मिलियन     प्रजकता कोली- 8.8 मिलियन     जाकिर खान- 7.8 मिलियन मप्र के टॉप इंफ्लुएंसर्स     पायल धरे- 4 मिलियन     नमन देशमुख- 3.6 मिलियन     ऋत्विक धनजानी- 3 मिलियन     तान्या मित्तल- 2.8 मिलियन अब कौन भरेंगे ITR-3 या ITR-4? अब तक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर अन्य प्रोफेशनल कैटेगरी में आईटीआर भरते थे, जिससे उनकी आय का वर्गीकरण ठीक से नहीं हो पाता था. लेकिन अब यदि आप यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक या अन्य किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म से ब्रांड प्रमोशन, डिजिटल कंटेंट या विज्ञापन से पैसा कमा रहे हैं, तो आपको ITR-3 या ITR-4 फॉर्म में नया कोड 16021 चुनना होगा. टैक्स कितना देना होगा? टैक्स का गणित आपकी सालाना आय पर निर्भर करता है. सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स भी अब प्रोफेशनल्स की तरह माने जाएंगे. अगर आपकी प्रोफेशनल इनकम सालाना 50 लाख से कम है, तो 44ADA के तहत आप अनुमानित 50% इनकम पर ही टैक्स दे सकते हैं. इससे टैक्स का बोझ कम हो सकता है. क्यों जरूरी है यह बदलाव? सरकार का मकसद है कि डिजिटल पेशों से होने वाली आय पारदर्शी तरीके से रिकॉर्ड हो. इसके अलावा टैक्स चोरी की संभावनाएं भी कम हों. सोशल मीडिया से कमाई करने वालों के लिए यह बदलाव एक अलार्म की तरह है.  अगर आप अपनी कमाई पर धारा 44ADA के तहत अनुमानित आय के आधार पर टैक्स देना चाहते हैं, तो आपको ITR-4 फॉर्म भरना होगा. लेकिन अगर आपकी आय कॉम्प्लिकेटेड है और प्रोफेशनल एकाउंटिंग करते हैं, तो ITR-3 जरूरी होगा. और भी पेशों के लिए जोड़े गए नए कोड * कमीशन एजेंट- 09029 * सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर- 16021 * सट्टा कारोबार- 21009 * वायदा-ऑप्शन ट्रेडर (F&O)- 21010 * शेयर ट्रेडिंग- 21011 

प्रशासन की नाक के नीचे लूट: भोपाल में जमीन गई गुम, जिम्मेदार बेखबर

भोपाल राजस्व विभाग ने पशुपालन विभाग को वर्ष 1990 में कोकता के आसपास 99 एकड़ जमीन आवंटित की थी। तब से अब तक 35 साल में विभाग के 21 संचालक आए और चले गए, लेकिन जमीन की सुरक्षा को लेकर लापरवाह रहे। राजधानी में सरकारी जमीनों पर कुख्यात मछली परिवार के कब्जे का मामला खुला को विभाग गहरी नींद से जागा। उसे अपनी जमीन की याद आई, तब तक जमीन का एक हिस्सा उनके पांव के नीचे से खिसक चुका था। सरकारी जमीन की यह लूट अधिकारियों के नाक के नीचे हुआ है। नाक के नीचे लुट गई जमीन दरअसल, पशुपालन विभाग के आग्रह पर तीन तहसीलदार, तीन आरआइ और 11 पटवारियों की टीम ने सीमांकन किया तो जमीन की लूट का खेल खुला। सामने आया कि कुल 99 एकड़ जमीन में से 11 एकड़ पर पशुपालन विभाग की पोल्ट्री है। उसके बाद करीब सात एकड़ जमीन में 80 से अधिक स्थायी अतिक्रमण मिले हैं। इनमें मकान, दुकान, पेट्रोल पंप, स्कूल, रिसोर्ट के अलावा सड़क और एसटीपी तक शामिल है। चिंता की बात यह है कि विभाग के अलावा जिले में पदस्थ रहे कलेक्टरों को भी इस फर्जीवाड़ा की भनक नहीं लगी और तत्कालीन तहसीलदारों ने नामांतरण किया और पंजीयक इन जमीनों की रजिस्ट्रियां करते रहे। 35 साल में 21 संचालक बने पशुपालन विभाग में अभी डा. पीएस पटेल संचालक हैं। 1990 से अब तक 35 वर्ष में इस विभाग को 21 संचालक संभाल चुके हैं। इनमें डॉ. पीआर शर्मा, डॉ.पीडी लिमिये, डॉ. एमएम तट्टे, डॉ. एसआर नेमा, डॉ. आरके निगम, एसके चतुर्वेदी, डॉ. आरएस यादव, डॉ. आरएन सक्सेना, वीसी सेमवाल, शैलेंद्र सिंह, केके सिंह, डॉ. राजेश राजौरा, केसी गुप्ता, एससी प्रजापति , आइसीपी केशरी,शिखा दुबे, डॉ. आरएस श्रीमाल, डॉ. बीडी लारिया, डॉ. पीएस जाट, डॉ. आरके रोकड़े, डॉ. आरके मेहिया शामिल हैं। डॉ. रोकड़े के समय से शुरू हुआ कब्जा पशुपालन विभाग में सबसे लंबा कार्यकाल डॉ. आरके रोकडे का रहा। वे वर्ष 2009 से 2021 तक यानि 12 साल तक संचालक बने रहे। इसी दौरान वहां से भोपाल बायपास निकला। उसके बाद ही यह जमीन भू माफिया की नजर में आई। कोकता का मुख्य बायपास 200 फिट तक इसी जमीन पर बना दिया गया और नगर निगम ने 50 दुकानें बनाकर बेच डालीं। धीरे-धीरे जमीन पर कब्जे होते गए और संचालक अनभिज्ञ रहते हुए ही सेवानिवृत्त हो गए। इन तहसीलदारों के समय हुई गड़बड़ी गोविंदपुरा तहसील में पिछले 12 साल में पदस्थ तहसीलदारों ने भी नामांतरण करते समय यह ध्यान नहीं दिया कि जमीन किसकी है और किस प्रयोजन से वहां छोड़ी गई है। नतीजतन पशुपालन विभाग की जमीन पर लोगों को सभी तरह की अनुमतियां मिलती चली गई और उन्होंने निजी भूमि समझ पक्के निर्माण कर लिए। वर्ष 2015 से गोविंदपुरा तहसीलदार की कुर्सी पर हरिशंकर विश्वकर्मा, भुवन गुप्ता, सुधीर कुशवाह, मनीष शर्मा, संतोष मुदग्ल , मनोज श्रीवास्तव, देवेंद्र चौधरी, सुनील वर्मा, मुकेश राज, दिलीप कुमार चौरसिया पदस्थ रहे और अब सौरभ वर्मा जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। तत्कालीन कलेक्टरों को भी पता नहीं चला राजस्व के रिकॉर्ड में यह जमीन पशुपालन विभाग के नाम पर दर्ज है। इसके बाद भी तत्कालीन कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त तक को पता नहीं चला। यही कारण है कि निगम ने दुकानें बनाकर बेच डालीं। पिछले 12 साल में भोपाल में जिलाधीश की कुर्सी पर शिवशेखर शुक्ला, निकुंज कुमार श्रीवास्तव, निशांत बरबड़े, डॉ. सुदाम खाड़े, तरूण कुमार पिथौड़े, अविनाश लवानिया, आशीष सिंह पदस्थ रहे और अब कौशलेंद्र विक्रम सिंह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सीमांकन में यह कब्जे आए सामने नगर निगम द्वारा निर्मित 50 दुकानें, एसटीपी प्लांट – एचपी पेट्रोल पंप – निर्माणाधीन कस्तूरी कोर्टयार्ड, कोर्टयार्ड प्राइम का गेट, पहुंच मार्ग पार्क – डायमंड सिटी कालोनी का पहुंच मार्ग व 20 मकान – द ग्रीन स्केप मेंशन शादी हाल रिसोर्ट – बीपीएस स्कूल – राजधानी परिसर पहुंच मार्ग – कोकता मुख्य बायपास मार्ग 200 फिट – फर्सी-पत्थर की दुकान – शुकराचार्य फार्म्स का पहुंच मार्ग – फार्म हाउस पक्का निर्माण – सवा सात एकड़ में भूमि पर कृषि कार्य अधिकारियों ने क्या कहा? पशुपालन विभाग सेवानिवृत्त संचालक डॉ. आरके रोकड़े ने इस पर कहा कि कोकता ट्रांसपोर्ट नगर और हथाईखेड़ा डैम के पास विभाग की 99 एकड़ जमीन स्थित है। उसके 11 एकड़ में पोल्ट्री फार्म बना है। उस पर पूरी नजर रखी जाती थी। पोल्ट्री में पदस्थ उप संचालक सहित अन्य अधिकारियों से भूमि की जानकारी समय-समय पर ली जाती थी तो वहां से कोई अतिक्रमण नहीं होने की रिपोर्ट ही मिलती थी। पशुपालन विभाग संचालक डॉ. पीएस पटेल ने कहा कि विभाग की 99 एकड़ जमीन का सीमांकन प्रशासन द्वारा पूरा कर दिया गया है। जिसमें से लगभग छह एकड़ में अवैध कब्जे मिले हैं, जिन्हें हटाकर जमीन को मुक्त करवाने की कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि गोविंदपुरा एसडीएम और तहसीलदार ने पशुपालन विभाग की जमीन का सीमांकन कर रिपोर्ट सौंप दी है। जिसमें अतिक्रमण सामने आए हैं, सभी को चिह्नित कर लिया गया है। अतिक्रमणकारियों को नोटिस देने के निर्देश दिए गए हैं, इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

आई-बैंक की जानकारी अब हाथ में: एम्स का नया मोबाइल ऐप कार्निया ट्रांसप्लांट मरीजों के लिए

नई दिल्ली नेत्रदान को लेकर जागरूकता का स्तर बढ़ा है। दान में मिले कार्निया नेत्र बैंकों में जमा हो रहे हैं। यहीं से प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध होते हैं। मरीजों को इसकी जानकारी नहीं हो पाती और वे दूसरे राज्यों का चक्कर लगाते रहते हैं। इसमें समय, श्रम और धन तीनों अनावश्यक बर्बाद होते हैं। देश में 100 से अधिक नेत्र बैंक हैं। सभी जगह कार्निया के उपयोग की दर भी अलग है। कहीं कार्निया का उपयोग नहीं हो पाता तो कहीं उसकी कमी से प्रत्यारोपण नहीं हो पाते। इन समस्याओं के समाधान के लिए एम्स के डाॅ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र स्थित राष्ट्रीय नेत्र बैंक (एनईबी) आगे आया है। आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सहयोग से एप विकसित कर रहा है। इसकी मदद से न केवल अपने राज्य के नेत्र बैंकों में कार्निया की उपलब्धता का पता चलेगा, बल्कि वाॅट्सएप के जरिए लोकेशन भी प्राप्त होगी। वहीं, सभी नेत्र बैंक एक साझा प्रणाली से भी जुड़ेंगे। कम उपयोग होने पर कार्निया ज्यादा उपयोग वाले नेत्र बैंकों को भेजे जा सकेंगे। राष्ट्रीय नेत्र बैंक 40वां नेत्रदान पखवाड़ा मना रहा है, जो आठ सितंबर तक चलेगा। आरपी सेंटर की प्रमुख प्रो. राधिका टंडन के मुताबिक एप पर तेजी से काम चल रहा है। अगले दो से तीन महीने में इसे लांच कर दिया जाएगा। नेत्र बैंकों का सारा डाटा इस पर उपलब्ध होगा। हर शहर में वाॅट्सएप के जरिए लोकेशन भी आ जाएगी। एआई चैटबाट भी लाॅन्च किया जाएगा, जिस पर मरीज या तीमारदार टाइप करके या वाइस नोट के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं के जवाब पा सकेंगे। इसके अलावा देश के अन्य नेत्र बैंकों के कामकाज में भी लगातार मदद की जा रही है। इसके लिए कार्नियल संरक्षण भंडारण माध्यमों (एमके मीडिया और एक्सस्टोरसोल मीडिया) का निर्माण और वितरण किया जा रहा है, जो भारत सरकार के एनपीसीबी से वित्तपोषित है। यह एम्स के नेत्र औषध विज्ञान विभाग में ही निर्मित किया जाता है। वर्ष 2024 में 24 राज्यों के 114 नेत्र बैंकों में एक्सस्टोरसोल मीडिया की 2824 से अधिक वायल वितरित की गईं। डोनर कार्निया के विकल्प के तौर पर बायो इंजीनियर्ड कार्निया आईआईटी-दिल्ली के सहयोग से तैयार किया है। खरगोश में इसका प्रत्यारोपण सफल रहा। अब क्लीनिकल ट्रायल की तैयारी है। राष्ट्रीय नेत्र बैंक एक नजर में     36,000 कार्निया एकत्र की पिछले 60 वर्षों में।     26,000 से अधिक कार्निया प्रत्यारोपण पिछले छह दशक में।     500 से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सकों को एंडोथेलियल केराटोप्लास्टी तकनीक की ट्रेनिंग।     1,931 कार्निया मिले देशभर से वर्ष 2024 में।     1,611 कार्निया अस्पताल कार्निया प्राप्ति कार्यक्रम (एचसीआरपी) से मिले।     1,636 कार्निया प्रत्यारोपण वर्ष 2024 में     50 प्रतिशत है कार्निया उपयोग की राष्ट्रीय दर।     85 प्रतिशत है आरपी सेंटर के एनईबी में कार्निया उपयोगी की दर। संक्रमण और चोट बन रही कार्निया डैमेज की वजह प्रो. टंडन के मुताबिक संक्रमण और चोट के चलते कार्निया डैमेज के सबसे ज्यादा मामले आते हैं। आंख में कुछ चले जाने पर आमतौर पर लोग रगड़ने लगते हैं। इसका कार्निया पर असर पड़ता है। वहीं, चोट लगने की स्थिति में भी लोग खुद से स्टेरायड डाल लेते हैं। ये आंख में संक्रमण की वजह बनता है। कई बच्चों को जन्मजात भी कार्निया की बीमारी होती है। ऐसी स्थिति में भी कार्निया ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। देश में हर वर्ष लगभग एक लाख लोगों को कार्निया प्रत्यारोपण की जरूरत होती है। जबकि केवल 25 से 30 हजार को ही इसके लिए कार्निया उपलब्ध हो पाता है।  

UP सरकार का शिक्षक दिवस सरप्राइज: शिक्षामित्र और अनुदेशक भी होंगे कैशलेस इलाज के लाभार्थी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस पर प्रदेश के सभी शिक्षकों को बड़ा उपहार दिया है। इनमें शिक्षामित्रों के साथ अनुदेशकों को भी लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस समारोह के दौरान शुक्रवार को लोकभवन में 81 शिक्षकों को सम्मानित किया। सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को एक बड़े तोहफे की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महान शिक्षाविद और देश के पूर्व राष्ट्रपति एस.राधाकृष्णन की जयंती शिक्षक दिवस पर प्रदेश के सभी शिक्षकों को बड़ा तोहफा दिया। लोक भवन में आयोजित सम्मान समारोह में उन्होंने घोषणा की कि अब सभी शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना का लाभ शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को भी मिलेगा। प्रदेश के नौ लाख परिवार लाभान्वित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक के साथ वित्त पोषित विद्यालयों के शिक्षकों को कैशलैस उपचार की सुविधा मिलगी। इनके साथ ही शिक्षा मित्र, अनुदेशक और रसोइया को भी इसके साथ जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस कदम से प्रदेश के नौ लाख परिवार लाभान्वित होंगे। शिक्षा मित्र और अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने को लेकर भी काम मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके साथ ही आने वाले समय में शिक्षा मित्र और अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने को लेकर भी काम होगा। इसके लिए कमेटी बनाई गई है। शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय भी बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। समिति की रिपोर्ट जल्द आने वाली है, जिसके बाद उनका मानदेय बढ़ा दिया जाएगा। राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित 81 शिक्षकों को किया सम्मानित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित 81 शिक्षकों को सम्मानित किया। उन्हाेंने बेसिक शिक्षा विभाग के 66 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 15 शिक्षकाे काे सम्मानित किया। उन्हाेंने 2,204 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को टैबलेट वितरण करने के साथ 1,236 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों (प्रति विद्यालय-2) में स्थापित स्मार्ट क्लास का लोकार्पण किया। बाल कथाओं के संग्रह 'गुल्लक', शैक्षिक नवाचारों के संकलन 'उद्गम' एवं बाल वाटिका हस्तपुस्तिका' का विमोचन करने के साथ 'उद्गम' के डिजिटल प्लेटफॉर्म की लॉन्चिंग की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ माध्यमिक शिक्षा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी, बेसिक शिक्षा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह, प्रभारी मुख्य सचिव एवं माध्यमिक शिक्षा एवं बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार, महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा सहित प्रदेशभर से आये शिक्षकगण उपस्थित रहे।

ई-बसें बंद! यूपी के इस जिले में यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव, पढ़ें पूरी वजह

शाहजहांपुर बाढ़ की वजह से चार्जिंग स्टेशन में पानी भर गया है, जिस कारण ई-बसें चार्ज नहीं हो पा रही हैं। खिरनीबाग रामलीला मैदान में खड़ा किया गया है। संचालन बंद होने से दो दिन से नगर निगम को हर रोज एक लाख 10 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। सिटी बस ट्रांसपोर्ट के माध्यम से शहर से गांव तक ई-बसों का परिचालन किया जाता था। शहर के न्यू सिटी ककराकला में चार्जिंग स्टेशन बना है। गुरुवार की रात से चार्जिंग स्टेशन व उसके आसपास बाढ़ का पानी भर गया। जिस वजह से बसों को पहले ही खिरनीबाग स्थित मैदान में खड़ा करा दिया गया था। बसों से पांच हजार से अधिक यात्री हर दिन सफर करते हैं। जिस तरह से चार्जिंग स्टेशन पर पानी भरा है उससे कई दिनों तक संचालन बंद रहेगा। गत वर्ष बाढ़ में आठ बसें खराब हो गई थीं। जिसमें तीन अभी तक ठीक नहीं हो सकी हैं। ट्रांसपोर्ट के प्रबंधक मोहम्मद हुमायूं लाडी ने बताया कि 25 ई-बसें हैं, जिसमें तीन खराब हैं। बाढ़ की वजह से संचालन बंद कराया गया।

गणेश विसर्जन जाते समय हादसा: खंडवा में वाहन पलटा, 20 घायल, 10 अस्पताल में भर्ती

खंडवा तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में शुक्रवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया।गणपति विसर्जन के लिए जा रहे लोडिंग वाहन में सवार होकर जा रहे श्रद्धालु वाहन पलटने से हादसे का शिकार हो गए।बाइक को बचाने में लोडिंग वाहन पलट गया।जिसमें 30 से अधिक श्रद्धालु घायल हो गए। इनमें महिला-पुरुषों सहित बच्चे भी शामिल थे। घायलों को उपचार के लिए ओंकारेश्वर सिविल अस्पताल ले जाया गया। जहां 15 से ज्यादा घायलों का प्राथमिक उपचार किया गया। करीब 10 श्रद्धालुओं को चोटें अधिक होने से खंडवा जिला अस्पताल सह मेडिकल कालेज रेफर किया गया। जहां उनका उपचार जारी है।   घटना शुक्रवार दोपहर करीब एक से दो बजे की बीच की बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार खरगोन जिले के भीकनगांव तहसील के ग्राम मनोहरपुरा के पास से आए श्रद्धालुओं का लोडिंग वाहन ओंकारेश्वर में नया बस स्टैंड से अभय घाट को जोड़ने वाले मार्ग पर बाइक को बचाने में अनियंत्रित होकर पलट गया। मौके पर पहुंचे तहसीलदार उदय मंडलोई, ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी, विश्व हिंदू परिषद के महेश राठौर, नीरज वर्मा एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से सभी घायलों को सिविल अस्पताल ओंकारेश्वर ले जाया गया। बीएमओ डाक्टर रवि वर्मा ने प्राथमिक उपचार के बाद 10 घायलों को खंडवा जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहीं, कुछ लोगों को हल्की-फुल्की चोटें भी आई हैं। अभय घाट जाने वाले मार्ग पर मोड ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि लोडिंग वाहन में लगभग 30 श्रद्धालु सवार थे, जिनमें महिलाएं, बच्चे और युवक शामिल थे। फिलहाल सभी घायलों का इलाज जारी है। विश्व हिंदू परिषद के महेश राठौर का कहना है कि नए बस स्टैंड से शंकराचार्य जी की ओर जो सड़क जाती है उसे पर मोड ज्यादा है एवं ढलान वाला रोड है। इससे कि टर्न में सामने से आ रहा वाहन दिखाई नहीं देता है। सड़क महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां आदिगुरु शंकराचार्य जी की ओर सड़क की जाती है।इस पर टर्न कम करने चाहिए और जगह-जगह स्पीड ब्रेकर बनाए जाना चाहिए।

युद्ध में सफलता की कुंजी: CDS अनिल चौहान ने बताया ‘सरप्राइज’ फैक्टर

गोरखपुर ‘भारत के समक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियां’ विषयक संगोष्ठी के मुख्य अतिथि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान ने कहा कि युद्ध में सफलता हासिल करने के लिए सरप्राइज एक महत्वपूर्ण फैक्टर होता है। उरी सर्जिकल स्ट्राइक में भारत ने जमीन के रास्ते जाकर आतंकी ठिकानों को बर्बाद किया, बालाकोट में एयर स्ट्राइक का सहारा लिया गया। जबकि पहलगाम हमले के बाद लो एयर स्पेस, ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। भारतीय सेनाओं ने हर बार दुश्मन को सरप्राइज कर अपना टारगेट पूरा किया।   उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए भारतीय सेनाएं 365 दिन, 24×7 के फार्मूले पर हमेशा तैयार हैं। आतंकवादी कहीं भी हो, उसे ढूढ़कर मारा जाएगा। सीडीएस जनरल चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा एक व्यापक और महत्वपूर्ण विषय है। हर वर्ग और व्यक्ति इसे अपने नजरिए से देखता है। किसी देश के राजदूत इसे द्विपक्षीय या बहुपक्षीय दृष्टि से देखतेहैं, तो अर्थशास्त्री इसे आर्थिक सुरक्षा की दृष्टि से। सैनिक का दृष्टिकोण भिन्न होता है। उन्होंने बताया कि आचार्य चाणक्य ने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए चार तथ्य बताएहैं:, राष्ट्र के आंतरिक खतरे, बाह्य खतरे, बाहरी सहयोग से आंतरिक खतरे और आंतरिक सहयोग से बाहरी खतरे। सीडीएस ने कहा कि समग्र रूप से राष्ट्र की सुरक्षा के लिए तीन घटक महत्वपूर्ण होते हैं। भूमि की सुरक्षा, विचारधारा की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा। राष्ट्र की सुरक्षा के लिए इन तीनों की सुरक्षा अनिवार्य है। इस संदर्भ में उन्होंने तीन घेरों सैन्य सुरक्षा, राष्ट्र की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सैन्य तत्परता के लिए रक्षा संसाधनों, अनुसंधान एवं विकास के साथ रणनीतिक संस्कृति अहम होती है। इस परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी भी जरूरी है। सीडीएस जनरल चौहान ने एक जर्मन विद्वान के उद्धरण के हवाले से कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में युद्ध, राजनीति का ही विस्तार है। युद्ध और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को अल-अलग नहीं देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब किसी राष्ट्र की सरकार यह सोचती है कि दूसरे राष्ट्र के खिलाफ बल प्रयोग करने की जरूरत है तो वह सैन्य अफसरों को कार्य करने के लिए निर्देशित करती है। इसमें सैन्य क्षमता पर भरोसा और सैन्य विकल्पों की विविधता महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि सैन्य क्षमता की मजबूती इस बात पर भी निर्भर होती है कि किसी राष्ट्र ने शांति काल में रक्षा क्षेत्र में कितना खर्च किया। सीडीएस ने बताया कि भारत की तीनों सेनाओं ने गलवान, बालाकोट में मजबूत सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि बालाकोट हमले के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों ने अलग-अलग सीख ली। पाकिस्तान ने एयर डिफेंस पर ध्यान दिया तो भारत ने लंबी दूरी तक हमला करने वाले हथियारों पर। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व से सैन्य बलों को दिशा मिलती है। ऑपरेशन सिंदूर में नेतृत्व से क्लियर कट दिशा निर्देश था कि आतंकी ठिकानों को ही निशाना बनाना है, नागरिक ठिकानों को नहीं। दुश्मन के किसी भी उकसावे पर सेना को जवाबी कार्रवाई की खुली छूट दी गई थी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का मकसद सिर्फ बदला लेना नहीं था, धैर्य का स्तर भी बढ़ाना था। ऑपरेशन सिंदूर ऐसा पहला युद्ध था जिसमें दुश्मन से आमने सामने की लड़ाई काफी कम थी। इसमें न फ्रंट था और न रियर। ऑपरेशन सिंदूर अभी ऑफिशियली टर्मिनेट नहीं किया गया है। सीडीएस ने कहा कि भारत में राष्ट्र की सुरक्षा की पहली चुनौती सीमा विवाद की है। पाकिस्तान और चीन से हुई लड़ाइयां सीमा विवाद का ही परिणाम हैं। पाकिस्तान की तरफ से प्रॉक्सी वार, पड़ोसी देशों में अस्थिरता और युद्ध के बदलते स्वरूप अन्य चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप अब विकेंद्रित होता जा रहा है। भविष्य में नई तकनीकी आधारित, रोबोटिक्स और मानवरहित युद्ध हो सकते हैं। सीडीएस ने कहा कि ‘न्यू नॉर्मल’ नीति ऐसी स्थिति होती है जो संकट खत्म होने के बाद बनती है। जैसे कोविड के बाद वर्क फ्रॉम होम और नोटबंदी के बाद डिजिटल लेनदेन की अभ्यस्तता। पर, न्यू नॉर्मल में यह स्पष्ट है कि आतंकवाद और बातचीत, व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते। सीडीएस ने अपने संबोधन में पीएम मोदी द्वारा घोषित ‘सुदर्शन चक्र’ वायु रक्षा प्रणाली की चर्चा करते हुए कहा कि इसे 2035 तक पूरा करने का लक्ष्य है। सुदर्शन चक्र स्वार्ड (तलवार) और शील्ड (ढाल) दोनों का काम करेगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और सशक्त भारत वसुधैव कुटुम्बकम की भूमिका निभाना चाहता है।