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लव जिहाद मामले में कांग्रेस पार्षद की बेटी को राहत, फरार है पिता

इंदौर इंदौर में लव जिहाद और धर्मांतरण की साजिश रचने के मामले में आरोपी बनाई गई फरार कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी की बेटी आयशा को कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। स्पेशल कोर्ट में उसकी ओर से पेश जमानत आवेदन पर सुनवाई के बाद यह राहत दी गई। दिल्ली से हुई थी गिरफ्तारी बीते दिनों इंदौर पुलिस फरार अनवर की तलाश में दिल्ली पहुंची थी। वहां अनवर तो पुलिस के हाथ नहीं लगा, लेकिन उसकी बेटी आयशा को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के बाद उसे जेल भेजा गया था। अनवर पर 30 हजार का इनाम फरार अनवर कादरी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 30 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। उस पर लव जिहाद और धर्मांतरण की साजिश रचने के गंभीर आरोप हैं। 18 आपराधिक मामले दर्ज अनवर कादरी पर अब तक कुल 18 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके साथ ही नगर निगम पार्षद पद से उसकी अयोग्यता घोषित करने की तैयारी भी प्रशासन द्वारा की जा रही है। 

महिलाओं के साथ मिलकर किया 70 लाख का घोटाला, बैंककर्मी सहित चारों सलाखों के पीछे

बिलासपुर बिलासपुर में बैंककर्मी के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा करने का एक मामला सामने आया है, जहां बैंक में फर्जी चेक लगाकर युवक ने 70 लाख रुपये अपने खाते में जमा करा लिए। इसके बाद अलग-अलग माध्यम से रुपये बैंक से निकलवा लिया। फर्जीवाड़ा सामने आने पर बैंक मैनेजर ने इसकी शिकायत सरकंडा थाने में की। मामले की जांच के बाद सरकंडा पुलिस ने बैंक की दो महिला कर्मचारियों समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित को न्यायालय में पेश किया गया है। साथ ही मामले की आगे गहनता से जांच जारी है। डीएसपी सिद्धार्थ बघेल ने बताया कि सरकंडा स्थित एचडीएफसी बैंक के मैनेजर सत्यजीत कुमार राय ने धोखाधड़ी की शिकायत की है। बैंक के मैनेजर ने बताया कि गीतांजलि सिटी में रहने वाले एडवर्ड थामस ने उनके ब्रांच में 70 लाख रुपये का चेक जमा किया था। प्राथमिक जांच के बाद बैंक की ओर से एडवर्ड के खाते में जमा करा दिए गए। इधर एडवर्ड और उसके साथी रितेश केशरवानी(28) निवासी महंतपारा शिवरीनारायण के साथ मिलकर चेक के माध्यम से रुपये निकलवा लिए। इसे अलग-अलग खातों के माध्यम से रुपये बैंक से निकलवा लिए। बाद में गड़बड़ी का पता चलने पर बैंक मैनेजर ने मामले की शिकायत सरकंडा थाने में की। इस पर पुलिस ने जुर्म दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। जांच के बाद पुलिस ने रितेश को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसमें उसने बैंक की कर्मचारी सोनल खूंटे और आरती यादव की मदद से चेक से रुपये निकलवाए थे। पूछताछ के बाद पुलिस ने चारो आरोपित को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। आरोपित को न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा गया है।

क्या आपका भी कटेगा राशन कार्ड से नाम? केंद्र ने भेजी 1.17 करोड़ लोगों की सूची, अब तक 19.17 करोड़ कार्ड जारी

भोपाल  केंद्र सरकार ने पहली बार उन राशन कार्डधारकों की पहचान की है जो मुफ्त खाद्यान्न योजना का लाभ पाने के पात्र नहीं हैं। इन लाभार्थियों में आयकर दाता, चार-पहिया वाहन मालिक और कंपनियों के निदेशक शामिल हैं। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने राशन कार्डधारकों के विवरण को आयकर विभाग, सड़क परिवहन मंत्रालय और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय जैसी सरकारी एजेंसियों के डाटाबेस से मिलान कर यह सूची तैयार की है। जांच में पाया गया कि 94.71 लाख राशन कार्डधारक करदाता हैं, 17.51 लाख चार-पहिया वाहन मालिक हैं और 5.31 लाख कंपनी निदेशक हैं। कुल मिलाकर लगभग 1.17 करोड़ कार्डधारक अपात्र की श्रेणी में आते हैं। अब केंद्र ने राज्यों से कहा है कि वे जमीनी स्तर पर सत्यापन कर 30 सितंबर तक इन अपात्र कार्डधारकों को सूची से बाहर करें। आपको बता दें कि इसकी लिस्ट स्थानीय स्तर पर प्रखंड मुख्यालयों को मुहैया करा दिए गए हैं। पीडीएस का लाभ उठाने वाले लोग वहां से लिस्ट लेकर अपनी स्थिति चेक कर सकते हैं। खाद्य विभाग के एक अधिकारी ने  बताया, “केंद्र ने राज्यों की मदद के लिए यह डेटा साझा किया है ताकि अपात्र लाभार्थियों को हटाकर प्रतीक्षा सूची में शामिल वास्तविक जरूरतमंदों को लाभ पहुंचाया जा सके। राशन कार्डों की समीक्षा और अपात्र/डुप्लीकेट कार्ड हटाने तथा योग्य लाभार्थियों को शामिल करने की जिम्मेदारी राज्यों की है।” आपको बता दें कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत अब तक 19.17 करोड़ राशन कार्ड जारी किए जा चुके हैं। कुल 76.10 करोड़ लाभार्थी देशभर में इस योजना के तहत आते हैं। नियमों के अनुसार, सरकारी कर्मचारी, सालाना 1 लाख रुपये या उससे अधिक आय वाले परिवार, चार-पहिया वाहन मालिक और करदाता मुफ्त राशन के लिए पात्र नहीं हैं। 8 जुलाई 2025 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे पत्र में खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि यह कवायद सही लोगों तक राशन पहुंचाने के लिए की जा रही है। उन्होंने लिखा कि मंत्रालय ने CBDT, CBIC, MCA, MoRTH और PM-किसान जैसी कई एजेंसियों के डाटाबेस से जानकारी मिलाकर अपात्र लाभार्थियों की पहचान की है। चोपड़ा ने कहा, “डेटाबेस की शुद्धता से वास्तविक वंचित परिवारों को लाभ मिलेगा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। यह कार्य 30 सितंबर 2025 तक पूरा कर लिया जाए।” जुलाई में केंद्र ने राज्यसभा को बताया था कि 2021-23 के बीच 1.34 करोड़ “फर्जी/अपात्र” राशन कार्ड रद्द किए जा चुके हैं। वर्तमान में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत राशन कार्ड धारकों को अनाज पूरी तरह मुफ्त कर दिया है।

रिश्तों का कत्ल: लड़की से सामूहिक दुष्कर्म के बाद गला दबाकर उतारा मौत के घाट

 कोरबा जिले में एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। 23 दिनों से लापता महिला की तलाश करते हुए पुलिस ने अपराध की गुत्थी सुलझा ली है। जिसके आधा पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। यह पूरी घटना जिले के कोरबी पुलिस चौकी की है। जानकारी के अनुसार, पुलिस ने 23 दिनों से लापता महिला का कंकाल लालपुर जंगल में ठेंगुनाला से बरामद किया। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। वहीं घटना में एक फरार आरोपी की पतासाजी की जा रही है। मामले में खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि आरोपी महिला का प्रेमी था। महिला के साथ प्रेमी ने शारीरिक संबंध बनाया, साथ ही अपने दो साथियों के साथ जबरन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। जब महिला द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की धमकी दी गई तो, आरोपियों ने गमछा से महिला का गला घोंट कर शव बोरे में भर नाले में फेंक दिया और फरार हो गए। राशन लेने गई महिला नहीं लौटी 27 जुलाई 2025 को चोटिया निवासी सविता राजवाड़े राशन लेने शक्कर सोसायटी गई थी, पर वह वापस नहीं लौटी। इस पर उसके पति समेलाल राजवाड़े ने पुलिस में अपनी पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने महिला की तलाश शुरू कर दी। जांच में पूरे मामले का खुलासा हुआ। चौकी प्रभारी सहायक निरीक्षक सुरेश कुमार जोगी ने बताया कि पति की शिकायत पर महिला की तलाश जारी की जा रही थी, जांच में यह सामने आया कि मृतका राशन लेने के लिए सोसायटी आई थी। जिसके बाद मृतका सविता ने अपने पूर्व प्रेमी उमेंद्र प्रसाद को बुलाया। महिला अपने पूर्व प्रेमी के साथ चली गई। दोस्तों के साथ संबंध बनाने के लिए किया मजबूर इस जानकारी के आधार पर मृतका के पति की मदद से पुलिस ने उमेंद्र को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की। जिसमें उसने चौंकाने वाले खुलासे किए। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह राशन दुकान से सविता को लेकर जंगल गया, जहां उसने सविता के साथ शारिरिक संबंध बनाए। इसके बाद आरोपी ने अपने दो दोस्तों को वहां बुलाया और जबरन सविता को उनके साथ संबंध बनाने पर मजबूर किया। सामूहिक दूष्कर्म के बाद जब पीड़िता ने पुलिस में घटना की शिकायत करने की बात कही, तो आरोपियों ने गमछे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। जिसके बाद सबने मिलकर लाश को ठीकाने लगाने के लिए उसे बोरे में भरकर नाले में फेंक दिया। एक आरोपी अब भी फरार आरोपी के बयान के आधार पर पुलिस ने उसके साथी संतराम को भी गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि वारदात में शामिल एक अन्य अब भी फरार है। वहीं पुलिस ने आरोपी की बाइक भी जब्त कर ली है। आरोपी की निशानदेही पर मृतका का कंकाल लालपुर जंगल में ठेंगुरनाला से बरामद किया है। दोनों आरोपियों के विरुद्ध धारा 70, 103(1), 238 व 3-5 के तहत जुर्म दर्ज कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस ने कहा कि जल्द ही फरार तीसरे आरोपित को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय कार्यक्रम में बोले CM मोहन यादव – पत्रकारिता समाज का दर्पण बने

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित सत्रारंभ समारोह ‘अभ्युदय-2025’ में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने हिन्दी रचनाकार, कवि, लेखक और पत्रकार पद्म भूषण से अलंकृत पं. माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर सीएम ने विश्वविद्यालय में चलाए गए पौधरोपण अभियान के अंतर्गत 1111वें पौधे के रूप में कृष्णवट का पौधा रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। कार्यक्रम में राज्य मंत्री कृष्णा गौर, प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास, कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। माखनलाल विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित तीन दिवसीय सत्रारंभ समारोह ‘अभ्युदय-2025’ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में ‘अभ्युदय’ का अर्थ मात्र आरंभ नहीं, बल्कि निरंतर जागरूकता, सत्य की खोज और समाज को नई दिशा देने वाले उत्तरदायित्व की यात्रा है। सीएम ने कहा कि नारद जी को पत्रकारिता का आद्य प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की समाज में महत्वपूर्ण भूमिका होती है और उन्हें विश्वास है कि यहां पढ़ने वाले छात्र आगे बढ़कर देश दुनिया में नाम रोशन करेंगे। ‘पत्रकारिता के क्षेत्र में विश्वविद्यालय का विशिष्ट स्थान’ सीएम मोहन यादव ने कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय की पूरे देश में विशिष्ट पहचान है। उन्होंने हिंदी भाषा को पुनर्प्रतिष्ठित करने का महत्वपूर्ण अभियान चलाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें गर्व है कि ऐसे महापुरुष और महान कवि का जन्म मध्यप्रदेश की धरती पर हुआ और ये विश्वविद्यालय उनकी परंपरा को आगे बढ़ाने का का काम कर रहा है। इस अवसर पर सीएम ने कहा कि मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों में हमने कुलपति के स्थान पर ‘कुलगुरु’ शब्द के प्रयोग की परंपरा प्रारंभ की। यह हमारी शिक्षा परंपरा में गुरु को सर्वोच्च स्थान देने का प्रतीक है। कुमार विश्वास ने छात्रों को दिए अनमोल सुझाव कार्यक्रम में सम्मिलित प्रख्यात कवि कुमार विश्वास ने कहा कि पत्रकार की सबसे बड़ी विशेषता और आवश्यकता है ‘विश्वसनीयता’। उन्होंने कहा कि एक पत्रकार का दायित्व होता है कि वो अपनी निजी वैचारिकी से उठकर सही तथ्य सामने लाएं। कुमार विश्वास ने कहा कि किसी विचार को केंद्र में रखने के बाद तठस्थ होकर लिखना ही पत्रकारिता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि यदि वे वास्त्व में एक सच्चे पत्रकार बनना चाहते हैं तो उन्हें अपने करियर की शुरुआत में कम से कम तीन साल प्रिंट में काम ज़रूर करना चाहिए। विभिन्न उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकार का मूल उद्देश्य सिर्फ धन कमाना नहीं होना चाहिए। धन अवश्य कमाएं लेकिन वो नैतिकता से कमाया हुआ होना चाहिए। कुमार विश्वास ने विश्वास जताया कि कि तठस्थता, ईमानदारी और कड़ी मेहनत के बल पर ये छात्र भविष्य के सम्मानजनक पत्रकार बनेंगे और देश दुनिया में अपना नाम उज्जवल करेंगे।

बिहार की सियासत में हलचल, प्रशांत किशोर के सहयोगी आनंद मिश्रा ने थामा भाजपा का हाथ

पटना पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मंत्री सुचित्रा सिन्हा और पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले आज भाजपा में शामिल हो गए। वे प्रदेश पार्टी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हुए। "पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करते रहेंगे"- मिश्रा   पार्टी में शामिल होने के बाद आनंद मिश्रा ने कहा कि वह पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने भाजपा को मजबूत करने के लिए आईपीएस से इस्तीफा दिया है। मिश्रा ने बक्सर सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की संभावना से जुड़े एक सवाल को टाल दिया और कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य पार्टी को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि यह तय है कि बक्सर से भाजपा विजयी होगी, चाहे कोई भी चुनाव लड़े। "चुनावों के बाद NDA फिर से बनाएगा सरकार"- नागमणि वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे नागमणि ने कहा कि उनका ध्यान भाजपा को मज़बूत करने के उन क्षेत्रों पर होगा जहां राजद ने पिछले विधानसभा चुनावों में ज़्यादा सीटें जीती थीं। उन्होंने कहा, "विधानसभा चुनावों के बाद एनडीए फिर से सरकार बनाएगा।" बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल ने नेताओं का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि उनके शामिल होने से संगठन मज़बूत होगा। इस अवसर पर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा और पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे। कई पार्टियों से जुड़े रहे हैं नागमणि नागमणि जदयू, राजद, भाजपा और लोजपा समेत कई पार्टियों से जुड़े रहे हैं। मिश्रा असम कैडर के आईपीएस अधिकारी थे और उन्होंने पिछला लोकसभा चुनाव बक्सर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा था। वह जन सुराज की युवा शाखा के अध्यक्ष भी थे, लेकिन इसके संस्थापक प्रशांत किशोर से मतभेद के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि मिश्रा को इस साल अक्टूबर-नवंबर में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव में बक्सर से भाजपा का टिकट मिल सकता है। नागमणि की पत्नी सुचित्रा सिन्हा नीतीश कैबिनेट में मंत्री थीं।  

चुनावी संग्राम तेज: अखिलेश ने ‘तीन तिगाड़ा’ पर साधा निशाना

लखनऊ सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार, चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन को लेकर करारा हमला बोला है. अखिलेश यादव ने तीनों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और कुछ सवाल पूछे हैं. साथ ही लोकतंत्र पर डाका डालने का आरोप भी लगाया है. खासकर जिलाधिकारी की संलिप्तता की जांच की मांग उठाई है. अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, डीएम लोगों से जनता का एक मासूम सवाल है, क्यों इतने सालों बाद आया जवाब है? जिस तरह कासगंज, बाराबंकी, जौनपुर के DM हमारे 18000 शपथपत्रों के बारे में अचानक अति सक्रिय हो गए हैं, उसने एक बात तो साबित कर दी है कि जो चुनाव आयोग कह रहा था कि ‘एफ़िडेविट की बात गलत है’ मतलब एफिडेविट नहीं मिले, उनकी वो बात झूठी निकली. अगर कोई एफिडेविट मिला ही नहीं, तो ये जिलाधिकारी लोग जवाब किस बात का दे रहे हैं. अब सतही जवाब देकर खानापूर्ति करेन वाले इन जिलाधिकारियों की संलिप्तता की भी जांच होनी चाहिए. कोर्ट संज्ञान ले, चुनाव आयोग या डीएम में से कोई एक तो गलत है ही ना? आगे अखिलेश यादव ने कहा, जो सीसीटीवी पर पकड़े गये हों उनके द्वारा अपने घपलों पर दी गयी सफाई पर किसी को भी रत्ती भर विश्वास नहीं है. झूठ का गठजोड़ कितना भी ताकतवर दिखे पर आखिरकार झूठ हारता ही है, क्योंकि नकारात्मक लोगों का साझा-गोरखधंधा अपने-अपने स्वार्थों की पूर्ति करने के लिए होता है, ऐसे भ्रष्ट लोग न तो अपने ईमान के सगे होते हैं, न परिवार, न समाज के, तो फिर भला अपने साझेदारों के कैसे होंगे. ये बेईमान लोग देश और देशवासियों से ताउम्र दगा करते हैं और अंततः पकड़े जाने पर अपमान से भरी जिंदगी जीने की सजा काटते हैं. भाजपा सरकार, चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत वो ‘चुनावी तीन तिगाड़ा’ हैं, जिसने सारा काम बिगाड़ा है और देश के लोकतंत्र पर डाका डाला है. अब जनता इस ’त्रिगुट’ की अदालत लगाएगी.

एक ही परिवार के तीन बच्चे रहस्यमयी तरीके से गायब, पीछे छोड़ा हैरान करने वाला संदेश

जयपुर शहर के सांगानेर इलाके से एक ही परिवार के तीन बच्चे लापता होने से इलाके में खलबली मच गई है। तीनों बच्चे 14 अगस्त को स्कूल जाने के लिए घर से निकले थे। शाम को बच्चे जब वापस घर नहीं लौटे तो परिजनों ने स्कूल में जाकर पूछताछ की, जहां पता चला की बच्चे स्कूल पहुंचे ही नहीं थे। इसके बाद परिजनों ने सांगानेर सदर थाना और अशोक नगर थाने में बच्चों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। लापता हुए बच्चों में सांगानेर के रहने वाले विजयसिंह के दो बेटे मोहित सिंह (10) और नितिन सिंह (9) और एक उनकी बहन का बेटा अरमान (9) शामिल हैं। 14 अगस्त को मोहित और नितिन सुबह साढ़े सात बजे अपने स्कूल जाने के लिए घर से निकले थे। वहीं बहन का बेटा अरमान भी अपने घर से अशोक नगर स्थित स्कूल जाने के लिए निकला था। बच्चों के लापता होने के बाद परिवार को घर पर एक चिट्ठी भी मिली है जिसमें लिखा है कि हम घर छोड़कर जा रहे हैं। हमें ढूंढने की कोशिश न करें, पांच साल बाद आ जाएंगे। बहरहाल सांगानेर सदर पुलिस और अशोक नगर थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर बच्चों की खोजबीन शुरू कर दी है लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। इसी बीच सांगानेर सदर थाना सीआई अनिल जैमन ने बताया- रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस टीम ने कई लोकेशन पर सीसीटीवी फुटेज चेक किए, जिसमें तीनों बच्चे गांधी नगर रेलवे स्टेशन के आसपास दिखाई दिए थे, उन्होंने कपड़े चेंज कर लिए थे। इसके बाद बच्चे कहां गए, कोई जानकारी नहीं है। परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार मोहित और अरमान के पास मोबाइल फोन हैं लेकिन दोनों ने फोन बंद कर रखे हैं। पुलिस की साइबर टीम इस पर पूरी नजर रखे हुए है। करणी विहार से भी गायब हुए दो बच्चे इधर जयपुर के करणी विहार इलाके से भी दो बच्चों के लापता होने की खबर है। करणी विहार थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार दो चचेरे भाई संजय सिंह और समीर सिंह 15 अगस्त को घर से निकले थे और वापस नहीं लौटे। इन बच्चों के परिवार को बच्चों के गायब होने के बाद एक फोन भी आया था, जिसमें सामने वाले पक्ष ने परिजनों के साथ गाली-गलौज करते हुए बात की थी।

मनी लॉन्ड्रिंग केस: चैतन्य बघेल से पूछताछ के लिए ईडी को मिली 5 दिन और

 रायपुर प्रदेश में हुए 32 सौ करोड़ के शराब घोटाला और मनी लांड्रिंग मामले में कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को 5 दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया है। अब 23 अगस्त तक ईडी चैतन्य से नए तथ्यों पर पूछताछ करेगी। कोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री भी बेटे से मिलने पहुंचे थे। मंगलवार को न्यायिक रिमांड खत्म होने पर चैतन्य बघेल को कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान ईडी ने नए साक्ष्यों के आधार पर कस्टोडियल रिमांड की मांग की। कोर्ट में इस पर लंबी बहस हुई। बचाव पक्ष ने रिमांड की मांग को अवैधानिक बताया। वकीलों ने तर्क दिया कि दर्ज एफआईआर आइपीसी की धाराओं के तहत हुई है, जिसमें केवल प्रथम न्यायिक रिमांड तक ही कस्टडी मांगी जा सकती है। वहीं, ईडी के वकील ने पंजाब और इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए रिमांड को वैधानिक ठहराया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष कोर्ट ने ईडी की मांग स्वीकार कर ली। 16.70 करोड़ मिलने का दावा ईडी के मुताबिक, शराब घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग केस में चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपये मिले हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि घोटाले से निकली ब्लैक मनी को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में लगाया गया। पैसे को सफेद करने के लिए फर्जी निवेश दिखाया गया और सिंडिकेट के साथ मिलकर करीब 1,000 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई। जांच में सामने आया कि चैतन्य बघेल के विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट (बघेल डेवलपर्स) में भी घोटाले की रकम का निवेश हुआ। ईडी ने प्रोजेक्ट से जुड़े अकाउंटेंट और अन्य ठिकानों पर छापेमारी कर अहम दस्तावेज व डिजिटल डिवाइस जब्त किए हैं। मामले में ईडी की पूछताछ जारी है।

महंगाई भत्ता बढ़ोतरी: MP वित्त विभाग ने तय की लिमिट, 2028-29 तक 94% होगा डीए

भोपाल  मध्यप्रदेश में अधिकारी-कर्मचारियों का अगले 3 साल में 30 प्रतिशत तक महंगाई भत्ता (DA) बढ़ेगा। अभी कर्मचारियों को 55 प्रतिशत डीए मिल रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में 31 मार्च तक इसे 9 प्रतिशत बढ़ाकर 64 प्रतिशत करने का टारगेट है। इसमें से 4 प्रतिशत तो दिवाली तक ही बढ़ेगा। जबकि शेष 5 प्रतिशत मार्च के आखिर से पहले दिया जाएगा।सरकार हर साल डीए बढ़ाकर चुनावी साल 2028-29 तक महंगाई भत्ता 94 प्रतिशत कर देगी। दरअसल, सरकार ने रोलिंग बजट की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें ये प्रावधान किए गए हैं। वहीं, विभागवार बजट की लिमिट भी तय कर दी है। अब अलग-अलग कार्यों के लिए विभाग प्रमुख इसी बजट में बदलाव कर सकेंगे। लेकिन, विभागों को तय लिमिट से अधिक बजट का प्रावधान नहीं होगा। अभी आधा वित्तीय वर्ष न बीता हो पर सरकार ने 2026-27 के बजट की तैयारी शुरू कर दी है। अभी कर्मचारियों को 55 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है, जो अगले साल बढ़कर 74 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। यानी एक साल में 19 प्रतिशत तक की महंगाई भत्ता की वृद्धि होगी। इसके हिसाब से सभी विभागों को स्थापना व्यय की गणना करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश में पहली बार सरकार एक साथ तीन वर्ष की वित्तीय आवश्यकताओं का आकलन करके बजट तैयार करा रही है। हर वर्ष स्थापना बजट बढ़ता जा रहा है। भारत सरकार बढ़ा सकती महंगाई भत्ता आगामी वर्षों में ढाई लाख से अधिक रिक्त पदों की पूर्ति किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसे देखते हुए वित्त विभाग ने सभी विभागों से कहा है कि वे स्थापना का आकलन भी उसी हिसाब से करते हुए बजट प्रस्ताव तैयार करें। वर्ष 2026-27 के लिए कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में संभावित वृद्धि को देखते हुए 74 प्रतिशत की दर से स्थापना व्यय की गणना करने के लिए कहा गया है। दरअसल, वर्ष 2025-26 की शेष अवधि के लिए भारत सरकार तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ा सकती है। इसके अनुरूप प्रदेश में भी वृद्धि होगी, जिससे यह 58 प्रतिशत हो जाएगा। प्रदेश सरकार ने तय किया है कि भारत सरकार जब से महंगाई भत्ता बढ़ाएगी तब से ही प्रदेश के कर्मचारियों को उसका लाभ दिया जाएगा। यद्यपि, पेंशनरों के मामले में ऐसा नहीं है। अभी भी उन्हें 53 प्रतिशत की दर से महंगाई राहत मिल रही है क्योंकि छत्तीसगढ़ सरकार में 55 प्रतिशत करने को लेकर सहमति अब तक नहीं दी है। राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अनुसार महंगाई राहत में वृद्धि के लिए दोनों के मध्य सहमति होना आवश्यक है। पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी का कहना है कि पेंशनरों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। अभी भी कर्मचारियों की तुलना में हमें दो प्रतिशत महंगाई राहत कम दी जा रही है। पुराना एरियर भी अभी तक नहीं दिया गया है। मार्च तक 9 प्रतिशत महंगाई भत्ता देगी सरकार रोलिंग बजट की सरकार की कवायद के बीच यह बात भी सामने आई है कि 2026-27 के बजट के लिए प्रस्तावित महंगाई भत्ते के पहले सरकार को इसे 64 प्रतिशत तक पहुंचाएगी। अभी प्रदेश के कर्मचारियों को राज्य सरकार सातवें वेतनमान पर 55 फीसदी महंगाई भत्ता दे रही है। माना जा रहा है कि इस साल दिवाली के समय और फिर अगले साल फरवरी-मार्च में सरकार 2 किस्तों में 4 प्रतिशत और 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता देकर इसे 31 मार्च के पहले 64 प्रतिशत तक पहुंचा देगी। 5वें और 6वें वेतनमान वालों को भी मिलेगा फायदा वित्त विभाग ने कहा है कि जिन विभागों में छठवें या पांचवें वेतनमान पाने वाले कर्मचारी हैं, उन्हें भी हर साल 10 फीसदी महंगाई भत्ता बढ़ाकर दिया जाएगा। छठवें वेतनमान में वर्तमान में 252% तक महंगाई भत्ता दिया जाता है। इसके आधार पर वर्ष 2026-27 में 265 प्रतिशत, वर्ष 2027-28 में 280 और वर्ष 2028-29 में 295 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जाएगा। इसके हिसाब से विभागों को रोलिंग बजट में प्रावधान करना होगा। प्रदेश सरकार के उपक्रम, निगम, मंडल में काम करने वाले कर्मचारियों को भी इसी तर्ज पर महंगाई भत्ता दिया जाना है। 85 हजार करोड़ रुपये से अधिक होंगे खर्च प्रदेश में स्थापना व्यय पर सरकार प्रतिवर्ष बजट का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा व्यय करती है। 2023-24 में वेतन-भत्ते और पेंशन मिलकर व्यय 72 हजार करोड़ रुपये के आसपास था, जो 2024-25 में 75 हजार करोड रुपये से अधिक हो गया 2025-26 में 79 हजार करोड़ रुपये व्यय अनुमानित है। इसे देखते हुए 26-27 में यह राशि 85 हजार करोड रुपये तक पहुंच सकती है। आठवें वेतनमान को लेकर भी तैयारी उधर, भारत सरकार ने आठवें वेतनमान आयोग का गठन कर दिया है। इसे देखते हुए प्रदेश के साढ़े सात लाख नियमित सरकारी कर्मचारियों और साढ़े चार लाख पेंशनरों को नया वेतनमान देने की तैयारी राज्य सरकार ने भी शुरू कर दी है। सातवां वेतनमान मूल वेतन में 2.75 का गुणा करके निर्धारित हुआ था। तब लगभग सात से 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन में वृद्धि हुई थी।