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खाद की नहीं होगी कमी! खरीफ सीजन को लेकर जिला प्रशासन ने किए विशेष प्रबंध

बिलासपुर. खरीफ सीजन 2026 में किसानों को खाद की कमी नहीं हो इसके लिए जिला प्रशासन सतर्क नजर आ रहा है. प्रशासन ने बताया कि किसानों को खाद की कमी नहीं होगी, 49,772 टन से अधिक उर्वरक का भंडारण उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 31 प्रतिशत अधिक है. खरीफ 2026 के लिए जिले को 68,950 टन उर्वरक उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से अब तक करीब 64.98 प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित की जा चुकी है. प्रशासन के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में उर्वरक उपलब्धता में 49 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. इस वर्ष अब तक 26,131.71 टन उर्वरक किसानों को वितरित किया जा चुका है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 56.6 प्रतिशत अधिक है. भंडारित उर्वरक का 58.33 प्रतिशत हिस्सा किसानों तक पहुंच चुका है. सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के माध्यम से लगातार खाद वितरण किया जा रहा है. हालांकि कई किसान अभी भी पर्याप्त खाद नहीं मिलने की आशंका जताते हुए खेती और उत्पादन प्रभावित होने की चिंता व्यक्त कर रहे हैं.

बिलासपुर में NEET UG री-एग्जाम को लेकर हाई अलर्ट, कलेक्टर-SSP ने व्यवस्थाओं का किया निरीक्षण

बिलासपुर. नीट यूजी-2026 की 21 जून को दोबारा होने वाली परीक्षा की तैयारियों को लेकर कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी ने समीक्षा बैठक की. बैठक में परीक्षा केंद्राध्यक्षों और संबंधित अधिकारियों के साथ व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया. जिले के 19 परीक्षा केंद्रों पर दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक परीक्षा आयोजित की जाएगी. प्रशासन ने परीक्षा की पारदर्शिता, सुरक्षा और निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. मानसून को देखते हुए अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों के लिए सभी केंद्रों पर वाटरप्रूफ शेड बनाए जाएंगे. प्रवेश द्वारों और परीक्षा केंद्र परिसर के बाहर भी बारिश से बचाव की व्यवस्था रहेगी. इसके अलावा जल निकासी, वैकल्पिक बिजली व्यवस्था और आपातकालीन संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी रहेगी तथा प्रश्नपत्र और OMR शीट की सुरक्षा के लिए सख्त प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे. किसी भी संवेदनशील गतिविधि पर नजर रखने के लिए जिला स्तरीय कंट्रोल रूम भी सक्रिय रहेगा.

महिलाओं के सशक्तिकरण पर योगी सरकार का फोकस, फ्री घर और हेल्थ सिक्योरिटी का बड़ा ऐलान

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की महिलाओं के लिए योगी सरकार बड़ी तैयारी कर रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में पात्र महिलाओं को मुफ्त आवास और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने की योजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है. इसके तहत प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. महिला कल्याण विभाग लाभार्थियों का डाटा जुटाने में लगा है।  सरकार की योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ दिया जाएगा. इसका उद्देश्य उन महिलाओं को नई शुरुआत का अवसर देना है, जो सामाजिक या पारिवारिक संकटों के कारण असुरक्षित जीवन जीने को मजबूर हैं।  किन महिलाओं को मिलेगा लाभ सरकारी तैयारी के अनुसार तीन श्रेणियों की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी. जिसमें पहले तीन तलाक से प्रभावित महिलाएं, दूसरे पर एसिड अटैक पीड़ित महिलाएं और तीसरे पर निराश्रित एवं बेसहारा महिलाएं होंगी. इन महिलाओं को आवास, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की व्यापक योजना पर काम शुरू हो चुका है. सरकार का मानना है कि केवल आर्थिक सहायता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सम्मानजनक जीवन के लिए स्थायी आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।  मुख्यमंत्री योगी के निर्देश के बाद शुरू हुई कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ऐसी महिलाओं की पहचान की जाए जो गंभीर सामाजिक संकटों का सामना कर चुकी हैं और जिनके पास रहने के लिए सुरक्षित घर नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा था कि तीन तलाक और एसिड अटैक जैसी घटनाओं से प्रभावित महिलाओं को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना प्राथमिकता होनी चाहिए. इसके तहत पात्र महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के जरिए पक्का मकान उपलब्ध कराया जाएगा. साथ ही उन्हें और उनके परिवारों को आयुष्मान भारत तथा मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा और उपचार की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।  महिला कल्याण विभाग जुटा रहा विस्तृत डाटा सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने के लिए महिला कल्याण विभाग ने व्यापक स्तर पर डाटा संग्रहण अभियान शुरू कर दिया है. विभाग तीन तलाक, एसिड अटैक और निराश्रित महिलाओं का सत्यापित विवरण एकत्रित कर रहा है. इसके लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि कोई भी पात्र महिला सरकारी लाभ से वंचित न रह जाए. अधिकारियों के अनुसार लाभार्थियों की पहचान के बाद उन्हें प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा. इसके लिए शासन स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देश और शासनादेश तैयार करने की प्रक्रिया भी चल रही है।  क्यों खास है यह पहल? विशेषज्ञों का मानना है कि एसिड अटैक और तीन तलाक जैसी घटनाएं किसी महिला के जीवन को पूरी तरह बदल देती हैं. एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को लंबे समय तक इलाज, प्लास्टिक सर्जरी और पुनर्वास की आवश्यकता पड़ती है. वहीं तीन तलाक से प्रभावित कई महिलाएं अचानक आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा के दायरे में आ जाती हैं. ऐसी परिस्थितियों में यदि उन्हें सुरक्षित आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा मिलती है तो वे दोबारा आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ सकती हैं. यही वजह है कि सरकार केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि महिलाओं को स्थायी सुरक्षा देने के लिए बहुआयामी योजना पर काम कर रही है।  आवास के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा भी सरकार की इस योजना का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू स्वास्थ्य सुरक्षा है. कई बार गंभीर परिस्थितियों का सामना कर रही महिलाओं के पास इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते. आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र परिवारों को लाखों रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है. वहीं मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. सरकार चाहती है कि जिन महिलाओं को आवास मिलेगा, उन्हें स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा भी समान रूप से उपलब्ध हो ताकि वे भविष्य को लेकर निश्चिंत रह सकें।  जानकारी के अभाव में नहीं छूटेगा कोई लाभार्थी महिला कल्याण विभाग का कहना है कि अक्सर कई पात्र लोग केवल जानकारी के अभाव या जटिल प्रक्रियाओं के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते. इसी समस्या को देखते हुए विभाग विभिन्न जिलों से डाटा जुटा रहा है और पात्र महिलाओं तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने की रणनीति भी तैयार की जा रही है. सरकार का प्रयास है कि लाभार्थी महिलाओं को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें एकीकृत व्यवस्था के माध्यम से योजनाओं का लाभ मिल सके। 

नेपाली नौकर निकले मास्टरमाइंड! 12 करोड़ की ज्वेलरी चोरी कर भाग रहे थे दंपती और साली, ऐसे पकड़े गए

 रामपुर रामपुर और तेलंगाना पुलिस के ऑपरेशन में ऐसे पति-पत्नी और साली को अरेस्ट किया गया है, जो तेलंगाना से चोरी कर नेपाल भाग रहे थे. ये चोरी कोई मामूली नहीं थी. जिस घर में तीनों नौकर बनकर पहुंचे थे, वहां से करीब 7 किलो सोना, एक किलो चांदी और कैश पर हाथ साफ किया था. टोटल चोरी करीब 12 करोड़ की थी. फिलहाल तीनों आरोपियों को पकड़ लिया गया है।  दरअसल, तेलंगाना के साइबराबाद कमिश्नरेट के गाचीबाउली इलाके में एक संपन्न परिवार रहता था. घर बड़ा था, जिंदगी व्यवस्थित थी और जरूरत थी कुछ मदद की. इसी जरूरत ने घर में एंट्री कराई- नेपाल से आए कमल, उसकी पत्नी विमला और उसकी साली कल्पना की।  शुरुआत बिल्कुल सामान्य थी. काम हुआ, व्यवहार अच्छा रहा और धीरे-धीरे ये तीनों घर के 'अंदर' आ गए- सिर्फ दीवारों के भीतर नहीं, बल्कि भरोसे के भीतर भी. घर के लोग शायद यह सोच भी नहीं सकते थे कि जिस परिवार पर वे आंख बंद करके भरोसा कर रहे हैं, वही एक दिन उनके लिए सबसे बड़ा झटका बन जाएगा।  कहते हैं कि बड़े घरों में सबसे बड़ी सुरक्षा दीवारें नहीं, भरोसा होता है. और इसी भरोसे को धीरे-धीरे मजबूत किया गया. कमल, विमला और कल्पना ने खुद को सिर्फ काम करने वाले लोगों तक सीमित नहीं रखा. वे घर की दिनचर्या, लोगों की आदतें, आने-जाने का समय- सब समझने लगे. और जब किसी घर की हर कमजोरी सामने हो, तो वार करना आसान हो जाता है।  फिर आया वो दिन, जो इस पूरी कहानी का टर्निंग पॉइंट बना. घर के मालिक परिवार समेत बाहर गए हुए थे. घर खाली था, लेकिन अंदर तीन लोग मौजूद थे- जिन्हें अब सिर्फ काम नहीं करना था, बल्कि खेल खेलना था।  आरोप है कि इसी मौके का फायदा उठाकर इन तीनों ने घर के अंदर रखे कीमती सामान पर हाथ साफ कर दिया. और जो माल लेकर ये निकले, वह मामूली नहीं था- 7 किलो सोना, 1 किलो चांदी और नकदी- कुल कीमत करीब 12 करोड़ रुपये. एक झटके में घर की दुनिया बदल गई, और एक घर के अंदर का भरोसा पूरी तरह टूट गया।  नेपाल की तरफ भाग रहे थे आरोपी चोरी के बाद ये तीनों अचानक गायब हो गए. कोई शोर नहीं, कोई संकेत नहीं. बस एक खाली घर और एक बड़ा सवाल- इतना बड़ा माल गया कहां? तेलंगाना पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू हुई. लेकिन यह केस इतना आसान नहीं था. क्योंकि चोरी के आरोपी थे, जो रोज उसी घर में खाना बनाते, सफाई करते और लोगों के बीच रहते थे।  जांच धीरे-धीरे आगे बढ़ी और सुराग रामपुर तक पहुंचे. तेलंगाना पुलिस ने यूपी के रामपुर पुलिस अधीक्षक से संपर्क साधा. दो राज्यों की पुलिस एक साथ आई, इनपुट शेयर हुए, चेकिंग शुरू हुई और निगाहें उन लोगों पर टिक गईं, जो नेपाल की तरफ निकलने की कोशिश में थे।  रामपुर में चेकिंग के दौरान पुलिस को सफलता मिली. पुलिस टीम ने तीनों- कमल, विमला और कल्पना को दबोच लिया. उनके पास से जो बरामद हुआ, उसने पूरे केस को और बड़ा बना दिया- करीब 7 किलो सोना, 1 किलो चांदी और लगभग 25 हजार रुपये नकद. पुलिस के मुताबिक, यह पूरा माल उसी घर से चोरी किया गया था, जहां वे नौकरी करते थे।  रामपुर पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीना ने बताया कि यह एक संयुक्त ऑपरेशन था, जिसमें तेलंगाना पुलिस और रामपुर पुलिस ने मिलकर काम किया. उनके अनुसार, गाचीबाउली में दर्ज केस के आधार पर लगातार इनपुट शेयर किए जा रहे थे. चेकिंग के दौरान ही यह सफलता मिली और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस का कहना है कि अभी इनके अन्य साथियों की भी जांच की जा रही है और नेपाल पुलिस से भी संपर्क किया जाएगा, ताकि इनके आपराधिक इतिहास की पूरी जानकारी सामने आ सके। 

सिंहस्थ के लिए प्रगति पर हैं 16 हजार 910 करोड़ रूपए के 148 विकास व निर्माण कार्य ओंकोरश्वर में बनेगा हेलीपेड

सिंहस्थ : 2028 के लिए 17 नए विकास कार्यों को मिली मंजूरी सिंहस्थ के लिए प्रगति पर हैं 16 हजार 910 करोड़ रूपए के 148 विकास व निर्माण कार्य ओंकोरश्वर में बनेगा हेलीपेड उज्जैन सहित ओंकारेश्वर, देवास, इंदौर, खंडवा, आगर-मालवा, शाजापुर, मंदसौर और खरगोन में जारी हैं गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रद्धालुओं की सुविधा, बेहतर आवागमन, सुरक्षा व्यवस्था के लिए दिए निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-मंडलीय समिति की छठवीं बैठक सम्पन्न भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ : 2028 के भव्य और दिव्य आयोजन के लिए जारी बेहतर रोड नेटवर्क के लिए इंफ्रॉस्ट्रक्चर निर्माण, शिप्रा घाटों के निर्माण, पुण्य स्नान के लिए जल की पर्याप्त उपलब्धता, श्रद्धालुओं के ठहरने और आवागमन की सुगम व्यवस्था तय समय-सीमा में पूर्ण की जाए। बेहतर प्रबंधन के लिए स्टाफिंग और उनके प्रशिक्षण की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से आरंभ हो। भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा के लिए अद्यतन तकनीक के उपयोग और आपदा प्रबंधन व चिकित्सा सुविधाओं के लिए माइक्रो प्लानिंग की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में हुई सिंहस्थ : 2028 की मंत्रि-मंडलीय समिति की छठवीं बैठक में यह दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-मंडलीय समिति ने 491.66 करोड़ रुपये की लागत के 17 नए विकास कार्यों को मंजूरी दी। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन एवं आसपास के 07 जिलों में जारी 16 हजार 910 करोड़ से अधिक लागत के 148 विकास एवं निर्माण कार्यों की समीक्षा की और संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंत्रालय में संपन्न बैठक में उप-मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप, श्रम मंत्री गौतम टेटवाल तथा पर्यटन राज्य मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उज्जैन के विकास कार्यों को मिली स्वीकृति     उज्जैन में शनि मंदिर से प्रशांति धाम चौराहा मार्ग तक पुल और एप्रोच रोड का 30 करोड़ की लागत से निर्माण।     तपोभूमि से पिपलियाराघो पंचक्रोशी मार्ग पर कान्ह नदी पर 12 करोड़ रूपए की लागत से समानन्तर नया पुल।     तपोभूमि से गंगेडी व्हाया राघोपिपल्या तक 5.5 किलोमीटर की 30 करोड़ रूपए लागत की दो लेन की नई सड़क।     देवास रोड से लालपुर होते हुए गरोठ मार्ग तक ढाई किलोमीटर लंबा पंचक्रोशी मार्ग। फोर लेन की यह सड़क 18 करोड़ रुपये की लागत से बनेगी।     उज्जैन में देवास रोड पर लोक निर्माण विभाग 2.36 करोड़ रुपये की लागत से विश्राम गृह (रेस्ट हाउस)।     उज्जैन के देवास रोड स्थित पीडब्लयूडी सर्किट हाउस का विस्तार और नवीनीकरण।     लेकोड़ा से टनकारिया रेलवे स्टेशन रोड तक 13.28 करोड़ रुपये से 2.50 किलोमीटर लंबी सड़क‍।     महाकाल पुलिस थाने से चौबीस खंबा मार्ग तक 4 करोड़ रुपये लागत से 180 मीटर लंबी नई सड़क।     कुशाभाऊ ठाकरे मार्ग से छोटी रपट तक 36.75 करोड़ रुपये लागत से सड़क चौड़ीकरण कार्य। ओंकारेश्वर के निर्माण कार्य स्वीकृत मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में ओंकारेश्वर मंदिर परिसर के 160 करोड़ रूपए लागत के निर्माण कार्य, नगर परिषद ओंकारेश्वर में 12.63 करोड़ रूपए लागत की सीसी रोड निर्माण, ओंकारेश्वर रोड सनावद पर 9.23 करोड़ रूपए लागत के रेलवे आरओबी निर्माण, ओंकारेश्वर में 24.99 करोड़ रूपए लागत की मल्टी लेवल पार्किंग, फूड कोर्ट, टॉयलेट और एडमिन ब्लॉक निर्माण, ओंकारेश्वर में 1.46 करोड़ रूपए लागत के बैरिक तथा प्रशिक्षण हॉल आदि के निर्माण, 4.74 करोड़ रूपए लागत से अस्पताल और स्टाफ क्वार्टर, 38 करोड़ रूपए लागत की 3 फ्लोर कुबेर भंडारी पार्किंग और 12.68 करोड़ रूपए लागत से अस्पताल भवन उन्नयन कार्यों को भी स्वीकृति प्रदान की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ : 2028 के लिए जारी विभिन्न गतिविधियों की विभागवार समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओंकारेश्वर में सर्वसुविधायुक्त अस्पताल बनाने और हेलीपैड बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह निर्माण आपदा की स्थिति में विशेष रूप से सहायक होंगे। एयर एम्बुलेंस के संचालन में भी इससे मदद मिलेगी। ओंकारेश्वर-बड़वाह क्षेत्र के विकास के लिए पृथक प्राधिकरण गठित करें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़वाह, ओंकारेश्वर, खेड़ी घाट क्षेत्र के आसपास होने वाले निर्माण कार्यों के लिए पृथक से प्राधिकरण गठित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इससे खंडवा खरगोन जिलों में होने वाले कार्यों का बेहतर समन्वय सुनिश्चित होगा और विकास गतिविधियां समय से पूर्ण करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओंकारेश्वर के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करने के भी निर्देश दिए। क्षिप्रा घाटों के प्रबंधन में आश्रमों और गुरूकुलों को भी जोड़ा जाए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देशित किया कि उज्जैन में शिप्रा नदी के साथ विकसित हो रहे घाटों का निर्माण चरणबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। घाटों तक आने-जाने के मार्गों और पार्किंग व्यवस्था का निर्माण भी साथ-साथ किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिप्रा नदी पर बन रहे घाटों के पास के आश्रमों तथा गुरुकुलों को घाटों के प्रबंधन से जोड़ा जाए। इससे आश्रम और गुरुकुलों को मदद मिलेगी। साथ ही सिंहस्थ के बाद भी घाटों का दीर्घकालिक उपयोग हो सकेगा। पुलिस-प्रशासन-नगर निगम बेहतर समन्वय के लिए अभी से अभ्यास करें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ : 2028 के लिए सम्पर्ण व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन का समन्वय कंट्रोल रूम से होगा। इसका सम्पूर्ण नियंत्रण पुलिस द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा। पुलिस, जिला प्रशासन, नगर निगम तथा अन्य सभी एजेंसियां बेहतर समन्वय सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिये कि इसके लिए प्रशिक्षण और अभ्यास की प्रक्रिया अभी से आरंभ की जाए। अतिक्रमण हटाने में भेदभाव न हो मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मार्ग चौड़ीकरण के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में कोई भेदभाव न हो, सबके लिए एक समान कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऐसे मामलों में तत्काल मुआवजा भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उज्जैन क्षेत्र में 15 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंचक्रोशी मार्ग पर … Read more

दिल्ली-मेरठ नमो भारत की बढ़ी रफ्तार, 24 घंटे में 1.25 लाख यात्रियों के साथ बना नया कीर्तिमान

 नई दिल्ली दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर ने सबसे ज्यादा यात्रियों का नया रिकॉर्ड बनाया है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) ने मंगलवार को जानकारी दी कि नमो भारत ट्रेन से 8 जून को एक दिन में करीब 1,25,500 यात्रियों ने सफर किया।    यह आंकड़ा अब तक का सबसे ज्यादा है. आम दिनों में औसतन एक लाख यात्री नमो भारत ट्रेन से सफर करते हैं. NCRTC के मुताबिक, सोमवार को यात्री संख्या में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली।  क्यों बढ़ रहे हैं यात्री? NCRTC ने बताया कि कई कारणों से लोग नमो भारत की ओर आकर्षित हो रहे हैं. दरअसल, नमो भारत के जरिए मेरठ से दिल्ली की यात्रा का समय काफी कम हो गया है. सड़क के ट्रैफिक जाम से बचना आसान हो गया है. वहीं,  गर्मी के प्रकोप (40 डिग्री से ऊपर तापमान) के बीच पूरी तरह एयर कंडीशंड ट्रेनें ठंडक और आरामदायक साबित हो रही हैं. दिल्ली-एनसीआर में रोजाना सफर करने वाले यात्री अब नमो भारत का इस्तेमाल कर रहे हैं।  किस स्टेशन पर सबसे ज्यादा भीड़ रही? दिल्ली में सराय काले खां, न्यू अशोक नगर और आनंद विहार स्टेशन सबसे ज्यादा व्यस्त रहे. वहीं, उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद और बेगमपुल स्टेशन भी काफी भीड़ वाले रहे. इन पांचों स्टेशनों पर कुल यात्रियों में से 40 प्रतिशत से ज्यादा सवारियां होती हैं।  खास बात यह है कि यह स्टेशन मेट्रो, रेलवे, इंटर-स्टेट बस टर्मिनल और शहर की बस सर्विस से कनेक्ट हैं. इससे यात्रियों को आसानी होती है. मेरठ में लोकल मेट्रो सेवाएं भी नमो भारत के ही इंफ्रास्ट्रक्चर पर चल रही हैं. इससे शहर के अंदर भी सफर आसान हो गया है।  यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए NCRTC ने हाल ही में पीक ऑवर्स में 18 अतिरिक्त ट्रेनें चलाई हैं. ये अतिरिक्त ट्रिप्स सुबह और शाम के पीक समय में सराय काले खां से मेरठ साउथ के बीच चलाई जा रही हैं।  NCRTC ने कहा कि नमो भारत अब दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के रोजाना के सफर का महत्वपूर्ण साधन बनती जा रही है. इससे समय की बचत, भरोसेमंद सेवा और आरामदायक यात्रा की वजह से लोग सड़क के बजाय इस ट्रेन को चुन रहे हैं. पूरी तरह एयर कंडीशंड ट्रेनें गर्मी से राहत दे रही हैं और लोगों को समय पर गंतव्य तक पहुंचा रही हैं. नमो भारत रैपिड रेल अब NCR क्षेत्र में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मजबूत विकल्प साबित हो रही है। 

आयुर्वेद और योग को घर-घर पहुंचाने का आह्वान, आयुष मंत्री परमार बोले- स्वस्थ समाज का यही आधार

"आयुर्वेद और योग को जन-जन तक पहुँचाकर स्वस्थ समाज का निर्माण करें": आयुष मंत्री परमार मंत्री परमार की अध्यक्षता में शासकीय धन्वन्तरि आयुर्वेद महाविद्यालय, उज्जैन की साधारण सभा की बैठक हुई भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में शासकीय धन्वन्तरि आयुर्वेद महाविद्यालय, उज्जैन की साधारण सभा की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मंत्री परमार ने महाविद्यालय के विकास, आयुर्वेद के संवर्धन तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। आयुष मंत्री परमार ने आगामी सिंहस्थ महापर्व की दृष्टि से शासकीय धन्वन्तरि आयुर्वेद महाविद्यालय की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर बल दिया। मंत्री परमार ने कहा कि सिंहस्थ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग और जीवनशैली आधारित स्वास्थ्य पद्धतियों को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर का उपयोग आयुर्वेद और योग के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा जनजागरूकता के लिए किया जाना चाहिए। मंत्री परमार ने कहा कि योग भारत की अमूल्य धरोहर है और इसे गाँव-गाँव तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने संस्थान से योग को जन-आंदोलन का स्वरूप देने, ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकाधिक योग गतिविधियाँ संचालित करने तथा लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष प्रयास करने का आह्वान किया। मंत्री परमार ने आयुर्वेद को जन-जन तक पहुँचाने के लिए इसे भारतीय रसोई (किचन) से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय भोजन परंपरा स्वयं में आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित रही है तथा दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले मसाले, औषधीय पौधे एवं पारंपरिक खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य संरक्षण के प्रभावी माध्यम हैं। आयुर्वेद को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए इसकी उपयोगिता को प्रत्येक घर तक पहुँचाना आवश्यक है। बैठक में पिछले वर्ष की कार्यकारिणी सभा के निर्णयों के पालन प्रतिवेदन पर चर्चा की गई। मंत्री परमार ने महाविद्यालय परिसर में 500 बिस्तरों वाले आयुर्वेद चिकित्सालय के निर्माण के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। मंत्री परमार ने महाविद्यालय परिसर में नवीन ऑडिटोरियम निर्माण किए जाने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने महाविद्यालय परिसर में अतिथि गृह तथा छात्रावास अधीक्षकों के आवास निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश भी दिए। बैठक में उज्जैन (उत्तर) विधायक अनिल जैन कालूहेडा, उप सचिव आयुष श्रीमती रंजना देवड़ा, आयुष संचालनालय की प्रतिनिधि डॉ. वंदना बोराना, महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. जे.पी. चौरसिया, नीमा जिलाध्यक्ष डॉ अनिल सराफ, पूर्व छात्र डॉ ईश्वर सिंह सिसोदिया सहित अन्य अधिकारी, साधारण सभा के सदस्यगण एवं महाविद्यालय के पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक का संचालन डॉ अजयकीर्ति जैन और आभार प्रदर्शन प्रो. नृपेन्द्र मिश्रा ने किया।  

मंत्री परमार का निर्देश: विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों और आधुनिक कौशल के अनुरूप करें तैयार

विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में कार्य करें : मंत्री परमार उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की सामान्य परिषद की बैठक हुई भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की सामान्य परिषद की बैठक सम्पन्न हुई। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने संस्थान के शैक्षणिक, शोध, छात्र कल्याण एवं अधोसंरचनात्मक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्देश दिए। मंत्री परमार ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने जापान सहित भारत के सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों वाले देशों की भाषाओं के प्रशिक्षण पर विशेष बल देते हुए कहा कि इससे युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे तथा वे विदेशों में प्रभावी संवाद स्थापित कर सकेंगे। उन्होंने संस्थान को इस दिशा में नवाचारपूर्ण पहल करने के निर्देश दिए। मंत्री परमार ने छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए परिसर में सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं के लिए स्वच्छ, आधुनिक एवं पर्याप्त शौचालय सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया तथा कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित और सुविधायुक्त परिसर भी उतना ही आवश्यक है। मंत्री परमार ने संस्थान परिसर में वृहद स्तर पर नीम, बरगद, पीपल, जामुन एवं आम जैसे पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों के रोपण के निर्देश दिए। उन्होंने संस्थान के हरित वसुंधरा क्लब द्वारा लुप्तप्राय वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण एवं रोपण के संकल्प की सराहना करते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को अनुकरणीय बताया। मंत्री परमार ने संस्थान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रस्तुत शोधपत्रों के संकलन एवं संस्थान के वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन का विमोचन भी किया। बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा विभाग अनुपम राजन ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं कल्याण से संबंधित विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। बैठक में संस्थान के वर्ष 2026-27 के वार्षिक बजट 12 करोड़ 86 लाख 3 हजार 503 रुपये को स्वीकृति प्रदान की गई। साथ ही संस्थान के प्रत्येक संकाय के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को संचालक पदक प्रदान किए जाने तथा सामान्य परिषद के अध्यक्ष के नाम से विशेष पदक स्थापित किए जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित किया गया। परिषद ने प्रत्येक संकाय के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के शैक्षणिक शुल्क में राहत प्रदान करने के प्रस्ताव को भी सहर्ष स्वीकृति दी। बैठक में उच्च स्तरीय शोध को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से फोरियर इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोप (FTIR) उपकरण के क्रय के लिये 20 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। साथ ही विभिन्न स्तरों पर उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान किए जाने के प्रस्ताव को भी परिषद द्वारा अनुमोदित किया गया। बैठक में संस्थान के संचालक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल द्वारा सामान्य परिषद को अवगत कराया गया कि वर्ष 2026 में भारतीय वाणिज्य परिषद का राष्ट्रीय सम्मेलन भोपाल में संस्थान द्वारा सेज विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर परिषद ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अपनी सहमति प्रदान की। बैठक में विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा अनिल पाठक, डॉ दिवा मिश्रा, माधव विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हरीश व्यास, सीए संजय श्रीवास्तव, डॉ. शैलजा दुबे, डॉ. महिपाल सिंह यादव, डॉ. ज्योति सक्सेना, डॉ. रामकृष्ण श्रीवास्तव, डॉ. सभाकांत द्विवेदी, डॉ. स्वामी स्वरूप श्रीवास्तव, डॉ. अमित जैन, डॉ. निधि चौहान, डॉ. रचना सिंह ठाकुर एवं डॉ. अमित मांडले सहित सामान्य परिषद के सदस्य उपस्थित थे।  

भारत-जर्मनी रिश्तों को मिला नया विस्तार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गिनाईं सहयोग की संभावनाएं

भारत, जर्मन संबंधों को मिला है नया आयाम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले जर्मनी के काउंसलेट जनरल हालियर भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में जर्मनी के काउंसलेट जनरल क्रिस्टोफ हालियर ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हालियर का पुष्प-गुच्छ और विश्व धरोहर स्मारक सांची की फ्रेम युक्त तस्वीर भेंट कर स्वागत किया।हालियर ने भोपाल की सुंदरता की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी जर्मनी की यात्रा का स्मरण करते हुए कहा कि उनकी जर्मनी यात्रा सुखद रही थी। भारत और जर्मनी के प्राचीन काल से संबंध हैं जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अब नया आयाम मिल रहा है। उद्योग और व्यवसाय जगत में दोनों देशों के संबंध मजबूत हैं। ये संबंध अब अधिक प्रगाढ़ हो रहे हैं। उद्योग और व्यवसाय के साथ शिक्षा के क्षेत्र में संयुक्त रूप से ठोस कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जर्मन विद्वान मैक्समूलर ने भारतीय ग्रंथों और वेदों का जर्मनी और अन्य भाषाओं में अनुवाद किया था। वे संस्कृत के भी विद्वान थे और स्वामी विवेकानंद की नैसर्गिक प्रतिभा के कायल थे। मध्यप्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक और मानव संसाधनों के साथ जर्मनी की तकनीक का संगम हो, इस दृष्टि से नवम्बर 2024 में म्यूनिख जर्मनी में इण्टरैक्टिव सेशन भी आयोजित किया गया था। मध्यप्रदेश जर्मनी के साथ दोतरफा सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में जर्मन प्रतिष्ठानों द्वारा निवेश के साथ ही जर्मन भाषा के प्रशिक्षण के लिए भी सहयोग दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में जर्मन भाषा के शिक्षण की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश की दृष्टि से जर्मन के औद्योगिक संस्थानों का मध्यप्रदेश में स्वागत है। गत 2 वर्ष में निवेश के कई प्रस्तावों को क्रियान्वित किया गया है। उन्होंने अब फिर से वह समय आया है जब विश्व की प्रमुख भाषाओं का अध्ययन किसी भी देश में किया जा सकता है। मध्यप्रदेश में जर्मन के शिक्षण- प्रशिक्षण की व्यवस्थाएं अनेक उच्च शिक्षा संस्थाओं में की गई हैं। हमारे युवा भी भारतीय भाषाओं के साथ विदेशी भाषाएं सीखना चाहते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जर्मन कॉउंसलेट द्वारा पुन: जर्मनी आने के आमंत्रण पर कहा कि वे एक बार नहीं इससे अधिक बार जर्मनी आएंगे। निश्चित ही दोतरफा सहयोग का यह क्रम जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश औद्योगिक निवेश, कौशल विकास, उच्च शिक्षा, अनुसंधान तथा सतत विकास के क्षेत्रों में जर्मनी के साथ साझेदारी को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर स्थित इंडो-जर्मन टूल रूम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दोनों देशों के सफल औद्योगिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। बैठक में जर्मन ड्यूल एजुकेशन मॉडल के माध्यम से युवाओं के कौशल उन्नयन, मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों और जर्मनी के उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों एवं पेशेवरों के लिए नए अवसर विकसित करने के विषय में भी सार्थक चर्चा हुई। जल संरक्षण, पर्यावरणीय स्थिरता और जल गंगा संवर्धन अभियान जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। काउंसलेट जनरल क्रिस्टोफ हालियर ने कहा कि उन्हें मध्यप्रदेश आना अच्छा लगता है। वे यहां आकर प्रसन्न हैं। इंदौर और भोपाल में उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से भेंट की है। हालियर ने जानकारी दी कि इसी वर्ष जनवरी माह में अहमदाबाद में प्रधानमंत्री मोदी से जर्मन के फेडरल चान्सलर फ्रेडरिक मर्ज ने भेंट की है। मर्ज की भारत यात्रा का उद्देश्य भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को सशक्त करना था। भारत की संस्कृति से जर्मन चांसलर प्रभावित हुए थे और उन्होंने अंतराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भी हिस्सा लिया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को काउंसलेट जनरल क्रिस्टोफ हालियर ने जर्मनी की ओर से विशेष स्मृति चिन्ह भी भेंट किया। हालियर ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा उन्हें दिए गए सम्मान और आत्मीयता के लिए आभार माना। इस अवसर पर जर्मन काउंसलेट सेंटर इंडिया के पदाधिकारी अविनाश कश्यप ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश का औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग पूर्ण सहयोग के लिए तत्पर रहता है। हाल ही में नागदा में जर्मन सहयोग से संचालित संस्थान की समस्या का अविलंब समाधान किया गया है। उद्योग संचालन में आने वाली किसी भी कठिनाई को मध्यप्रदेश शासन की ओर से तत्काल दूर किया जाता है। इस अवसर पर एमपी औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड में प्रबंध निदेशक चंद्रमौली शुक्ला भी उपस्थित थे।  

आधुनिकता के साथ संस्कृति का संगम: PM मोदी के कार्यकाल में भारत की बदलती पहचान

  भोपाल मई 2014 में जब हमारे देवतुल्य नरेंद्र मोदीजी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब देश की जनता ने केवल एक सरकार नहीं चुनी थी, बल्कि शासन की एक नई कार्यशैली और राजनीतिक संस्कृति की अपेक्षा भी व्यक्त की थी. बारह वर्ष बाद इस यात्रा को केवल योजनाओं,आंकड़ों और उपलब्धियों के आधार पर नहीं, बल्कि उस व्यापक दृष्टिकोण के आधार पर समझना अधिक उचित होगा, जिसने शासन की सोच को प्रभावित किया. यदि इन बारह वर्षों को तीन शब्दों में समेटना हो, तो वे शब्द होंगे- सेवा, सुशासन और संकल्प।  राजनीति से आगे सेवा का भाव भारतीय राजनीति में लंबे समय तक सत्ता को अधिकार और विशेषाधिकार के रूप में देखा जाता रहा. हमारे देवतुल्य नेता नरेंद्र मोदी जी ने इसे सेवा के रूप में प्रस्तुत करने का सफल प्रयास किया. उन्होंने स्वयं को कई बार प्रधान सेवक कहा. यह केवल एक राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि शासन की भाषा और शैली में दिखाई देने वाला दृष्टिकोण भी था. सेवा का अर्थ केवल कल्याणकारी योजनाएं चलाना नहीं है. सेवा का अर्थ है कि शासन स्वयं को जनता का संरक्षक नहीं, बल्कि उसका सेवक माने. इस दृष्टि से पिछले बारह वर्षों में शासन की प्राथमिकताओं में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की चिंता है. गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को केवल वोट बैंक के रूप में नहीं, बल्कि विकास प्रक्रिया के केंद्र में रखने की सफल कोशिश की गई है।  यह वही सोच है, जिसकी जड़ें पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद में दिखाई देती है. मोदी जी की सरकार ने बार-बार यह संदेश दिया है कि विकास का वास्तविक अर्थ तब है, जब उसका लाभ समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति तक पहुंचे।  सुशासन: व्यवस्था में विश्वास की पुनर्स्थापना लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता, बल्कि संस्थाओं और व्यवस्थाओं पर जनता के विश्वास से चलता है. लंबे समय तक भारतीय नागरिक की एक शिकायत रही कि सरकार दूर है, प्रक्रियाएं जटिल हैं और व्यवस्था आम आदमी के लिए कठिन हैं।  पिछले बारह वर्षों में शासन की चर्चा करते समय सुशासन एक प्रमुख शब्द बनकर उभरा. सुशासन का अर्थ केवल भ्रष्टाचार कम करना या तकनीक का उपयोग बढ़ाना नहीं होता है. इसका वास्तविक अर्थ है सरकार को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और प्रभावी बनाना. डिजिटल तकनीक का उपयोग इसी दर्शन का हिस्सा था. तकनीक को केवल आधुनिकता का प्रतीक नहीं, बल्कि सुशासन का माध्यम माना गया. शासन और नागरिक के बीच की दूरी कम करने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा निर्णयों को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास हुए।  सुशासन का एक महत्वपूर्ण पहलू निर्णय लेने की क्षमता भी है. लोकतंत्र में संवाद आवश्यक है, लेकिन अनिर्णय विकास का सबसे बड़ा शत्रु होता है. हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार की कार्यशैली में यह स्पष्ट दिखाई दिया है कि बड़े निर्णयों से बचने के बजाय उन्हें समाधान तक कैसे पहुंचाया जाए? दरअसल इसे ही निर्णायक नेतृत्व कहते हैं. यह निर्विवाद है कि निर्णय लेने की क्षमता इस शासनकाल की प्रमुख पहचान रही है।  संकल्प: विकसित भारत का सपना हर युग की राजनीति का एक केंद्रीय विचार होता है. स्वतंत्रता आंदोलन का विचार स्वराज था. स्वतंत्रता के बाद का विचार राष्ट्र निर्माण था. इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में मोदी सरकार ने विकसित भारत को राष्ट्रीय संकल्प के रूप में प्रस्तुत किया. यह संकल्प केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है. इसके भीतर आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय गौरव की भावना भी जुड़ी हुई है. पिछले बारह वर्षों में बार-बार यह संदेश दिया गया कि भारत को केवल विकासशील राष्ट्र के रूप में संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे विश्व की अग्रणी शक्तियों में स्थान प्राप्त करना चाहिए।  यह दृष्टिकोण भारतीय समाज में एक नए आत्मविश्वास का निर्माण करता है. लंबे समय तक भारत अपनी संभावनाओं की चर्चा तो करता था, लेकिन उन्हें प्राप्त करने का साहस कम दिखाई देता था. आज विकसित भारत का विचार एक राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में स्थापित हुआ है।  मोदीजी का आशीर्वाद मध्यप्रदेश के साथ अपने देवतुल्य, 'प्रधानसेवक' से प्रेरणा लेकर हमने भी विकसित मध्यप्रदेश का सपना देखा. यह बताते हुए मन भाव विभोर है कि मोदीजी का हर कदम पर हर निर्णय पर मार्गदर्शन, स्नेह और आशीर्वाद मिला. चाहे वर्षों से लंबित केन बेतवा और पार्वती-कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना हो या पीएम मित्र पार्क, उन्होंने आगे बढ़कर परेशानियों को दूर किया, उनके जैसा नेतृत्व दुर्लभ है।  देश के सात राज्यों में पीएम मित्र पार्क बनाने का निर्णय हुआ, तो उस सूची में मध्यप्रदेश को भी रखा गया. यह अति प्रसन्नता का विषय है कि अब तक सिर्फ मध्यप्रदेश में ही पीएम मित्र पार्क का भूमिपूजन हुआ है और यह गौरव का विषय रहा कि धार में पार्क के भूमिपूजन में प्रधानमंत्री जी शामिल हुए. यह सब मध्यप्रदेश से उनके विशेष लगाव का परिणाम ही है।  प्रदेश में साइबर तहसील का सफल क्रियान्वयन हो या भोपाल और इंदौर में मेट्रो रेल, सब प्रधानमंत्रीजी के स्नेह आशीर्वाद मार्गदर्शन का ही परिणाम है. आज प्रदेश में नौ एयरपोर्ट हैं, तो इसके पीछे भी उनका ही मार्गदर्शन है।  आज हमारा मध्यप्रदेश नक्सल मुक्त है, तो इसके पीछे उनका ही दिशा-निर्देश है. उन्होंने समय-समय पर समझाया तो चेताया भी. उन्होंने कहा कि गोली का जवाब गोली से दो पर जो लोग बंदूक-हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं, उनके लिए बेहतर से बेहतर पुनर्वास की व्यवस्था भी हो।  उनकी सलाह चेतावनी का ही सुफल है कि आज मध्यप्रदेश लाल सलाम को आखिरी सलाम कह चुका है. आज मध्यप्रदेश में उद्योगों का जाल बिछ रहा है, लाखों करोड़ का निवेश हो रहा है, तो इसके पीछे प्रधानमंत्रीजी का ही मार्गदर्शन है. फरवरी 2025 में भोपाल में आयोजित ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में शामिल होना, उनका विशेष स्नेह ही तो दर्शाता है. उन्होंने हमें संवेदना की सीख दी है. बताया है कि नर ही नारायण हैं. वंचितों-गरीबों में नारायण के दर्शन करो. उनकी सीख ही थी कि हमने अपने शुरुआती निर्णयों में ही इंदौर के हुकुमचंद मिल के कामगारों को उनका बकाया अधिकार दिलवाने में सफलता हासिल की. कामगारों को चेक सौंपने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को प्रधानमंत्रीजी ने वर्चुअली संबोधित भी किया था।  मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों में अग्रणी सरकारी कालेजों को प्रधानमंत्री … Read more