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उत्तर प्रदेश बनेगा इंडस्ट्री हब! 10 नए औद्योगिक क्षेत्रों के साथ केंद्र लाएगा जन विश्वास विधेयक

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में प्लग एंड प्ले नीति के तहत 10 नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की जाएगी। केंद्र सरकार की मदद से स्थापित होने वाले इस औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना के लिए राज्य सरकार ने प्रस्ताव भेज दिया है, हालांकि अभी यह तय नहीं है कि यह औद्योगिक क्षेत्र किन जिलों में स्थापित किए जाने हैं।  पिकप भवन में उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआइआइटी) के संयुक्त सचिव डा. जय प्रकाश शिवहरे ने बताया कि केंद्र सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए ईज आफ डूइंग बिजनेस (कारोबार में सुगमता) को बढ़ावा देने को लेकर देश भर में 100 नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की योजना पर काम शुरू किया है। एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों का विकास प्राथमिकता यीडा के सीईओ आर.के. सिंह के अनुसार, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास स्थित सेक्टरों का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा गया है. एयरपोर्ट के संचालन से पहले इन क्षेत्रों में सड़क, जलापूर्ति, सीवर और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इससे एयरपोर्ट आधारित उद्योगों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेश का केंद्र बन सकेगा।  46 नए सेक्टरों के लिए सर्विस मास्टर प्लान पर काम यमुना सिटी में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 46 नए सेक्टरों के लिए सर्विस मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है. इसके अंतर्गत जलापूर्ति, सीवर नेटवर्क, ड्रेनेज और अन्य शहरी सुविधाओं की विस्तृत योजना बनाई जाएगी. यीडा ने इसके लिए आरएफपी जारी कर आवेदन आमंत्रित किए हैं. यह योजना शहर के व्यवस्थित और टिकाऊ विकास को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  ग्रेटर नोएडा में गरीब परिवारों के लिए बनेंगे किफायती फ्लैट ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के परिवारों के लिए किफायती आवास योजना पर तेजी से काम कर रहा है. बिरौंडा और पतवाड़ी गांव के पास जमीन चिह्नित की गई है, जहां बहुमंजिला आवासीय परियोजनाएं विकसित होंगी. लगभग 30 वर्गमीटर आकार के फ्लैटों में लिफ्ट और दैनिक जरूरतों की दुकानों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे निम्न आय वर्ग को बेहतर आवास मिल सके।  श्रमिकों को कम कीमत में बेहतर आवास देने की योजना ग्रेटर नोएडा के सीईओ रवि कुमार एनजी ने बताया कि श्रमिकों और निम्न आय वर्ग के लोगों को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराना प्राधिकरण का उद्देश्य है. परियोजना और नियोजन विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं. जमीन चिन्हित होने के बाद योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा. इससे हजारों श्रमिक परिवारों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास का लाभ मिल सकेगा।  इसके लिए राज्यों से जुलाई तक नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना संबंधी प्रस्ताव मांगे गए हैं। पहले और दूसरे चरण में 25-25 औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि कारोबार में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए जन विश्वास (प्रविधान संशोधन) विधेयक-3.0 लाने की तैयारी की जा रही है। जन विश्वास-2.0 के तहत 717 प्रकार के औद्योगिक अपराधों में सीधे जेल भेजे जाने के प्रविधान को समाप्त किया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में देश से निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। इनवेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरन आनंद ने बताया कि निर्यात के मामले में उत्तर प्रदेश 11वें स्थान से 9वें स्थान पर आ गया है। इससे पहले उन्होंने निर्यातकों व औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर जन विश्वास (प्रविधान संशोधन) विधेयक में संशोधन को लेकर उनकी राय ली।  

चुनाव से पहले सियासी हलचल, क्या कैप्टन की घर वापसी बदल देगी पंजाब का राजनीतिक समीकरण?

चंडीगढ़ पंजाब की सियासत इस समय एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाले मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है. शिरोमणि अकाली दल के भीतर मचे घमासान और भारतीय जनता पार्टी के जमीनी संघर्ष के बीच, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और पटियाला के महाराजा कैप्टन अमरिंदर सिंह की एक बार फिर कांग्रेस में वापसी की अटकलें तेज हो गई हैं. दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक के राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि पंजाब की राजनीति के सबसे कद्दावर चेहरों में से एक रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी पुरानी पार्टी का हाथ थाम सकते हैं. हालांकि, इस खबर के बीच शनिवार को कैप्टन अमरिंदर सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मुलाकात हुई है. कैप्टन सिंह लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए थे. इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के लोकसभा सांसद अमर सिंह के एक बयान ने इन अटकलों को और अधिक हवा दे दी है।  चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की वापसी की संभावना पर बेहद सधा हुआ और गंभीर बयान दिया. उन्होंने कहा, “कैप्टन अमरिंदर सिंह एक बेहद वरिष्ठ नेता हैं. उन्होंने लंबे समय तक पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सेवा की है और पार्टी सहित सरकार में कई बड़ी जिम्मेदारियां संभाली हैं. हम उनके सामने काफी जूनियर हैं. इसलिए, अगर उनकी वापसी या इस विषय पर किसी भी तरह की चर्चा की आवश्यकता है, तो उसे सीधे हमारा शीर्ष नेतृत्व ही हैंडल करेगा.” सांसद अमर सिंह का यह बयान साफ इशारा करता है कि कैप्टन की वापसी की फाइल अब सीधे दिल्ली दरबार में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के टेबल पर पहुंच चुकी है।  पंजाब विधानसभा चुनाव पर क्या पड़ेगा असर? अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी औपचारिक रूप से हो जाती है, तो आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव की पूरी बिसात ही बदल जाएगी. साल 2022 के चुनाव से ठीक पहले जिस तरह अपमानजनक ढंग से कैप्टन को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था और उसके बाद कांग्रेस ताश के पत्तों की तरह बिखर गई थी, उस गलती को सुधारने का मौका अब पार्टी के पास होगा।  हिंदू और सिख वोट बैंक का अनूठा समन्वय कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के इकलौते ऐसे नेता माने जाते हैं जिनकी पकड़ सिखों के साथ-साथ राज्य के शहरी हिंदू मतदाताओं पर भी समान रूप से मजबूत है।  जमीनी कैडर में नया जोश: नवजोत सिंह सिद्धू और अन्य प्रांतीय नेताओं की आपसी कलह के कारण जो पारंपरिक कांग्रेस कार्यकर्ता आज घर बैठा है या उदासीन है, कैप्टन का नाम सामने आते ही वह दोबारा सड़कों पर सक्रिय हो जाएगा।  राष्ट्रवाद और पंजाब की सुरक्षा का नैरेटिव: सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब में सुरक्षा एक बहुत बड़ा मुद्दा है. कैप्टन की फौजी पृष्ठभूमि और राष्ट्रवाद की मुखर छवि कांग्रेस को अकाली दल और भाजपा के मुकाबले एक मजबूत बढ़त दिलाएगी।  क्या पंजाब में ‘आप’ को टक्कर सिर्फ कांग्रेस ही देगी? वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखें तो मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार के सामने मुख्य चुनौती पेश करने के मामले में कांग्रेस सबसे आगे खड़ी दिख रही है. अकाली दल इस समय गंभीर आंतरिक कलह और नेतृत्व के संकट से जूझ रहा है, जबकि भाजपा अभी भी शहरी इलाकों से निकलकर पंजाब के ग्रामीण और किसान बहुल क्षेत्रों में अपनी मजबूत पैठ नहीं बना पाई है. राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं, ‘पंजाब की जनता पारंपरिक रूप से एक मजबूत और स्थापित चेहरे को पसंद करती है. पिछले चुनाव में आप को एक बड़े विकल्प के रूप में मौका मिला था, लेकिन एंटी-इंकंबेंसी और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर घिरी सरकार के सामने विपक्ष का स्पेस पूरी तरह खाली है. कैप्टन अमरिंदर सिंह के कांग्रेस में आते ही यह लड़ाई सीधे तौर पर आप बनाम कांग्रेस के द्विपक्षीय मुकाबले में तब्दील हो जाएगी, जहां कांग्रेस का पलड़ा बेहद भारी हो सकता है।  पंजाब का इतिहास गवाह है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को जब-जब राजनीतिक रूप से कमतर आंका गया, उन्होंने उतनी ही मजबूती से वापसी की है. भले ही उनकी उम्र इस समय एक फैक्टर हो, लेकिन पंजाब की जनता के बीच उनकी राजनीतिक साख और प्रशासनिक अनुभव का कोई सानी नहीं है. अब देखना यह होगा कि दिल्ली में बैठी कांग्रेस की टॉप लीडरशिप पंजाब के प्रांतीय नेताओं के विरोध को दरकिनार कर कैप्टन की घर वापसी पर कब अंतिम मुहर लगाती है. इस फैसले पर ही पंजाब की भावी सत्ता का भविष्य निर्भर करेगा। 

MP ट्रांसको की बड़ी उपलब्धि, इन-हाउस ओवरहॉलिंग से 400 केवी सर्किट ब्रेकर पर बचाए 50 लाख रुपये

एमपी ट्रांसको ने बिरसिंहपुर फीडर के 400 केवी सर्किट ब्रेकर की इन-हाउस ओवरहॉलिंग कर बचाए 50 लाख रुपये भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के अभियंताओं ने 400 केवी सब स्टेशन कटनी में स्थापित बिरसिंहपुर नंबर-2 फीडर के 400 केवी एबीबी निर्मित सर्किट ब्रेकर की सफलतापूर्वक इन-हाउस ओवरहॉलिंग कर कंपनी को लगभग 50 लाख रुपये की बचत कराई है। अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री आर.सी. शर्मा की पहल पर अभियंताओं एवं तकनीकी कर्मचारियों द्वारा लगभग एक सप्ताह तक सतत प्रयास कर यह कार्य पूर्ण किया गया। बिरसिंहपुर के महत्वपूर्ण फीडर में लगा है यह ब्रेकर यह सर्किट ब्रेकर बिरसिंहपुर ताप विद्युत गृह से आने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण 400 केवी फीडर पर स्थापित है, जिसके माध्यम से लगभग 350 मेगावॉट विद्युत का पारेषण होता है। प्रदेश की विद्युत व्यवस्था की दृष्टि से यह फीडर अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण फीडर पर स्थापित सर्किट ब्रेकर की सफल ओवरहॉलिंग ने न केवल इसकी विश्वसनीयता बढ़ाई है, बल्कि विद्युत आपूर्ति की निर्बाधता और ग्रिड सुरक्षा को भी सुदृढ़ किया है। फर्स्ट जेनरेशन का है ब्रेकर लगभग 20 वर्ष पुराने फर्स्ट जनरेशन सर्किट ब्रेकर के स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध न होने के बावजूद कटनी डिवीजन की टीम ने अपनी तकनीकी दक्षता और अनुभव का परिचय देते हुए इसका निरीक्षण, परीक्षण, मरम्मत एवं आवश्यक पार्ट्स का प्रतिस्थापन किया। इस चुनौतीपूर्ण कार्य में ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस संभाग दमोह एवं कटनी का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। ऊर्जा मंत्री ने की सराहना ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इसे कंपनी की तकनीकी क्षमता, संसाधनों के कुशल उपयोग, लागत नियंत्रण एवं आत्मनिर्भर कार्य संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए संबंधित अभियंताओं एवं कर्मचारियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि कंपनी के अभियंता अपनी विशेषज्ञता के बल पर महत्वपूर्ण उपकरणों के रखरखाव एवं पुनर्संचालन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।  

जनजातीय अध्ययन में नई पहचान बना रहा DAVV इंदौर, शोध और नवाचार को मिल रही नई दिशा

जनजातीय अध्ययन को नई दिशा दे रहा इंदौर का डीएवीवी जनजातीय समाज, संस्कृति और विकास के अध्ययन-शोध के लिए विशेष पाठ्यक्रम; युवाओं के लिए शोध के अवसर डीएवीवी में एमए, एमबीए और पीएचडी में प्रवेश प्रारंभ इंदौर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के स्कूल ऑफ ट्राइबल स्टडीज द्वारा जनजातीय समाज, संस्कृति, परंपराओं और विकास के विविध आयामों को समझने के लिए एक अभिनव शैक्षणिक पहल की गई है। विश्वविद्यालय में जनजातीय अध्ययन एवं जनजातीय विकास पर केंद्रित विशेष पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को जनजातीय समुदायों के जीवन, ज्ञान परंपराओं, चुनौतियों और विकास की संभावनाओं से परिचित कराना है। यह पहल विद्यार्थियों में जनजातीय समाज के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के साथ उन्हें ऐसे ज्ञान और कौशल से सुसज्जित करती है, जिससे वे भविष्य में जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण और विकास में सार्थक योगदान दे सकें। स्कूल ऑफ ट्राइबल स्टडीज में एम.ए. (जनजातीय अध्ययन), एम.बी.ए. (जनजातीय विकास एवं प्रबंधन) तथा पीएचडी (जनजातीय अध्ययन) जैसे विशिष्ट कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। ये पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को जनजातीय समाज के इतिहास, संस्कृति, जीवन-पद्धति, पारंपरिक ज्ञान, सामाजिक चुनौतियों तथा विकास संबंधी मुद्दों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। वर्तमान में जनजातीय समुदायों से जुड़े विषयों पर अध्ययन और शोध की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ये पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ जनजातीय विकास की नीतियों, योजनाओं और प्रबंधन से जुड़ी व्यावहारिक समझ भी प्रदान करते हैं। इससे छात्र शोध, शिक्षण, सामाजिक विकास, नीति निर्माण तथा प्रशासनिक क्षेत्रों में बेहतर कॅरियर के अवसर बढ़ जाते हैं। स्कूल ऑफ ट्राइबल स्टडीज द्वारा संचालित ये पाठ्यक्रम न केवल मध्यप्रदेश बल्कि देश के उच्च शिक्षा परिदृश्य में भी अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। जनजातीय अध्ययन के प्रति रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह पाठ्यक्रम समाज के एक महत्वपूर्ण वर्ग को निकट से समझने और उनके विकास में सार्थक योगदान देने का अवसर उपलब्ध कराते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों से इन विशेष पाठ्यक्रमों का लाभ उठाने और समय पर प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होने की अपील की है।  

क्यों अहम है मालवा की 69 सीटों की लड़ाई? पंजाब की राजनीति का सबसे बड़ा रणक्षेत्र

अमृतसर  पंजाब की सियासत में सबसे अहम क्षेत्र है मालवा, केवल इसलिए नहीं कि कुल 117 विधानसभा सीटों में से 69 इसी क्षेत्र में हैं बल्कि इसलिए भी कि इस इलाके से उठी सियासी लहर पूरे पंजाब में सियासत के रुख को बदल देती है। राजनीति हो या किसानी आंदोलन यहां के नेता और बाशिंदों ने बखूबी अपना दम दिखाया है। कद्दावर नेताओं के साथ-साथ बड़ी किसान जत्थेबंदियां का मालवा से संबंध है।   पंजाब के सभी राजनीतिक दल इस क्षेत्र का सियासी महत्व जानते हैं लिहाजा साल 2027 के मद्देनजर नेताओं ने इस क्षेत्र पर अपना फोकस और सक्रियता बढ़ा दी है। इसके इतर मालवा के मतदाताओं की खास बात यह है कि यहां के लोगों ने सभी दलों को परखा, समझा और फिर अपनी सेवा का मौका दिया। पिछले पांच विधानसभा चुनावों का ट्रेंड इसी बात को साबित करता है। यही वजह है कि भाजपा को छोड़कर कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और आम आदमी पार्टी इस क्षेत्र को अपना-अपना गढ़ मानते रहे हैं मगर यहां मतदाताओं का मिजाज पढ़ना आसान नहीं है। साल 2002 के विधानसभा चुनाव का परिणाम देखें तो कांग्रेस को यहां सबसे ज्यादा 29 सीटें मिली थीं जबकि 27 सीटों के साथ शिअद दूसरे नंबर पर थी। साल 2007 में मालवा की 37 सीटें कांग्रेस जीती थी जबकि अकालियों के खाते में 19 सीटें आई थीं। साल 2012 में शिअद ने 34 सीटों पर कब्जा किया जबकि कांग्रेस 31 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई।  साल 2017 में कांग्रेस ने 40 सीटें जीतकर मालवा में दोबारा जलवा दिखाया जबकि अकाली 8 सीटों पर सिमट गए। इसी चुनाव में सूबे में नया दल आम आदमी पार्टी (आप) ने पहली बार इस इलाके से 18 सीटें जीती। साल 2022 के चुनाव में मालवा के मतदाताओं ने आप पर इतना प्यार लुटाया कि पार्टी ने इस क्षेत्र की 69 में से 66 सीटों पर कब्जा किया। कांग्रेस 2 और अकाली 1 सीट पर सीमित रह गए। मतदाताओं का यह रुझान बताता है कि यहां के बाशिंदे लहर के साथ चलते हैं। पंजाब के बरनाला, बठिंडा, फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का (अबोहर तहसील को छोड़कर), फिरोजपुर, लुधियाना, मलेरकोटला, मानसा, मोगा, पटियाला, मुक्तसर साहिब, रूपनगर व संगरूर मालवा का हिस्सा हैं। पार्टियों के अध्यक्ष यही सें, डेरा फैक्टर असरदार बरनाला से राजनीतिक मामलों के माहिर बघेल सिंह धालीवाल बताते हैं कि मालवा के लोग सरल मगर क्रांतिकारी प्रवृत्ति के हैं। यही वजह है कि नेताओं की घोषणाओं, उनके भाषणों, उनकी गतिविधियों और वादों का यहां के मतदाताओं पर बड़ा असर पड़ता है। पेंडू (ग्रामीण) कल्चर का भी यहां सियासत में काफी प्रभाव रहता है। अधिकतर बड़े नेता इसी संस्कृति की देन है। डेरा (सिरसा व ब्याास) फैक्टर भी अच्छी पकड़ रखता है। हालांकि सभी जातियों के लोग यहां बसते हैं मगर जट सिख बिरादरी की सियासत यहां ज्यादा अहम दिखती है। मोगा से सियासी मामलों के जानकार मलकीत सिंह कहते हैं कि पंथक मसलों का इस बेल्ट में बहुत असर रहता है। बरगाड़ी, बहबलकलां, कोटकपूरा में बेअदबी कांड हो या फिर हाथ में गुटका साहिब रखकर सूबे से नशा खत्म करने की बात हो, पंथ के हर मसले से जुड़ी बात यहां से उठकर पूरे पंजाब में सियासी असर डालती है। राजनीतिक विषयों के विशेषज्ञ जगतार सिंह भुल्लर कहते हैं मालवा की महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आप, कांग्रेस, शिअद और अब भाजपा ने अपने-अपने प्रदेशाध्यक्ष इसी क्षेत्र से चुने है। कांग्रेस, शिअद और आप तो यहां की सियासत में अपना जलवा दिखा चुके हैं, अब भाजपा यहां ज्यादा फोकस कर रही है। इस इलाके में विकास की बात भी होती है लेकिन लोक लुभावनी घोषणाओं की मतदाताओं पर गहरी छाप दिखती है। मिशन 2027 के लिए अहम क्यों? इन दिनों मालवा की सियासी महत्ता फिर बढ़ी हुई है क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। सभी दल इन इलाकों में अपना-अपना पार्टी सर्वे करवा रहे हैं। कांग्रेस करवा चुकी है। बठिंडा, मानसा, सरदूलगढ़, मोड़ मंडी, रामपुरफूला, तलवंडी साबो इत्यादि क्षेत्रों में किसान वर्ग निर्णायक बनता है। साल 2022 के परिणामों में यहां दबदबा तो आप का है मगर कांग्रेस और अकाली यहां दोबारा अपना प्रभाव जमाना चाहते हैं जबकि भाजपा के लिए यहां खाेने के लिए कुछ नहीं है। लिहाजा सभी दलों ने यहां ताकत झोंकनी शुरू कर दी है।  

आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर कम लागत में बढ़ा रहे उत्पादन, अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

रायपुर राज्य शासन द्वारा कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अब किसानों के खेतों में दिखाई देने लगा है। आधुनिक कृषि तकनीकों एवं नवाचारों को अपनाकर किसान खेती को अधिक सुविधाजनक, किफायती और लाभकारी बना रहे हैं। सक्ती जिले के विकासखंड सक्ती अंतर्गत ग्राम अचानकपुर के प्रगतिशील किसान  गुलाबचंद राठौर भी ऐसे ही किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने नैनो यूरिया (तरल) का सफल उपयोग कर खेती में बेहतर परिणाम प्राप्त किए हैं तथा अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।           गुलाबचंद राठौर ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष अपनी कृषि भूमि में नैनो यूरिया का उपयोग किया था, जिसके परिणाम अत्यंत संतोषजनक रहे। उन्होंने कहा कि पारंपरिक यूरिया की 45 किलोग्राम की भारी बोरियों की तुलना में नैनो यूरिया का परिवहन, भंडारण एवं उपयोग कहीं अधिक सरल और सुविधाजनक है। इसकी छोटी शीशी को किसान आसानी से खेत तक ले जा सकते हैं, जिससे समय, श्रम और परिवहन व्यय में उल्लेखनीय बचत होती है। उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया के उपयोग से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व सही समय पर उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे फसलों की वृद्धि एवं विकास में सहायता मिलती है।         उर्वरकों की उपलब्धता से किसानों को मिल रही सुविधा  राठौर ने बताया कि वर्तमान खरीफ सीजन के लिए सेवा सहकारी समिति में शासन के मानकों के अनुरूप यूरिया एवं डीएपी उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। उन्हें भी आवश्यकता के अनुसार यूरिया एवं डीएपी खाद सहजता से प्राप्त हुआ है, जिससे कृषि कार्यों के संचालन में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि उर्वरकों की समय पर उपलब्धता किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे खेती-किसानी के कार्य सुचारु रूप से संपादित किए जा सकते हैं। कम लागत में अधिक लाभ का माध्यम बन रहा नैनो यूरिया          किसान  गुलाबचंद राठौर का मानना है कि नैनो यूरिया खेती की लागत को नियंत्रित करने, उर्वरक प्रबंधन को सरल बनाने तथा बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने से संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो रहा है और किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हो रही है। नैनो उर्वरकों का उपयोग कृषि को अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। अन्य किसानों से आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील           राठौर ने जिले एवं प्रदेश के किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत खेती पद्धतियों तथा नैनो उर्वरकों का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने और नवाचारों को अपनाने से कम लागत में अधिक उत्पादन एवं बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी।       राज्य शासन द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, उन्नत बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी और समृद्ध बना रहे हैं।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से बदली तस्वीर, ग्रामीणों को मिली आवागमन, शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा

रायपुर  बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के अतिसंवेदनशील और पूर्व नक्सल प्रभावित अबुझमाड़ क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण कार्य ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। वर्षों तक विकास से दूर रहे मयूरीपारा तक अब सड़क पहुंचने से लोगों को बेहतर आवागमन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलने लगा है। 16 किलोमीटर सड़क निर्माण से जुड़ रहा दूरस्थ क्षेत्र           प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बैल से मयूरीपारा तक 16 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना में अब तक 13 किलोमीटर मिट्टीकृत सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। साथ ही मुरूमीकरण और छह पुलियों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार शेष कार्य जून माह में पूरा कर लिया जाएगा। दुर्गम रास्तों से मिल रही राहत           ग्राम बैल की सरपंच मती जुग्गी अठामी ने बताया कि लंबे समय तक सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य कार्यों के लिए घने जंगलों से होकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। बरसात के मौसम में नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था, जिससे समय और परेशानी दोनों बढ़ जाते थे। उन्होंने बताया कि आजादी के 78 वर्षों बाद भी यह क्षेत्र नक्सल प्रभाव और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास की मुख्यधारा से दूर था। अब सड़क निर्माण से हालात तेजी से बदल रहे हैं और लोगों को बड़ी राहत मिली है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मिला नया आधार        सड़क बनने से स्कूली बच्चों का आवागमन आसान हुआ है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर हुई है। अब जरूरत पड़ने पर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना संभव हो रहा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी सुविधा मिल रही है। विकास और समृद्धि की नई उम्मीद           ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद है। बैल से मयूरीपारा मार्ग के पूर्ण होने के बाद क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से अबुझमाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है।

16 विधाओं में 1281 प्रतिभागियों ने लिया प्रशिक्षण, रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ भव्य समापन

रायपुर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, हस्तशिल्प, संगीत, नृत्य और आधुनिक रचनात्मकता के अद्भुत संगम का प्रतीक बना संस्कृति विभाग का बहुप्रतीक्षित कला प्रशिक्षण शिविर “आकार-2026” रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं प्रतिभागियों की शानदार प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हो गया। 25 मई से 9 जून तक महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय परिसर, रायपुर में आयोजित इस 16 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में प्रदेशभर से आए 1281 प्रतिभागियों ने 16 विभिन्न कला विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी प्रतिभा को नई दिशा दी। समापन समारोह में रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद  बृजमोहन अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर साहित्य अकादमी के अध्यक्ष  शशांक शर्मा, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष  प्रभात मिश्रा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा सु मोना सेन, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे तथा उप संचालक  प्रताप चंद्र पारख सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी, प्रशिक्षु एवं अभिभावक उपस्थित थे। मुख्य अतिथि सांसद  बृजमोहन अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2004 में संस्कृति मंत्री रहते हुए उन्होंने “आकार” प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने तथा उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से यह पहल प्रारंभ की गई थी। उन्होंने कहा कि इसकी लोकप्रियता को देखते हुए ऐसे आयोजन प्रदेश के सभी संभागों में आयोजित किए जाने चाहिए। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक आभूषणों, हस्तशिल्प के लिए स्थायी विक्रय केंद्र भी विकसित किए जाने चाहिए, जिससे कलाकारों को आर्थिक लाभ मिल सके और लोग छत्तीसगढ़ के आभूषण और हस्तशिल्प को देख और खरीद सकंे।  अग्रवाल ने बच्चों को मिट्टी और प्रकृति से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि “जिस दिन बच्चे मिट्टी से जुड़ना और मिट्टी से सृजन करना सीख जाएंगे, उनका जीवन आनंद और संवेदनशीलता से भर जाएगा। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, कला और लोक परंपराओं की जानकारी देना समय की आवश्यकता है।” कार्यक्रम के स्वागत उद्बोधन में संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि “आकार केवल एक प्रशिक्षण शिविर नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककलाओं, हस्तशिल्प और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित एवं संवर्धित करने का एक सशक्त माध्यम है। वर्ष 2004 से लगातार आयोजित हो रहा यह कार्यक्रम युवाओं में सृजनशीलता और सांस्कृतिक चेतना विकसित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है।”  उन्होंने बताया कि अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए पंजीयन शुल्क को 200 रुपये से घटाकर मात्र 100 रुपये किया गया। साथ ही दिव्यांग एवं अनाथ बच्चों के लिए विशेष रियायत भी प्रदान की गई, जिससे समाज के सभी वर्गों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिल सके। “आकार-2026” ने इस वर्ष पारंपरिक लोक कलाओं और आधुनिक तकनीक के बीच एक सुंदर सेतु का निर्माण किया। जहां एक ओर प्रतिभागियों ने टेराकोटा, जूट शिल्प, गोदना कला, रजवार भित्ति चित्र, मंडला एवं मांडना कला, भरथरी गायन और कथक जैसी विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया, वहीं दूसरी ओर उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित कला की नवीनतम तकनीकों से भी परिचित कराया गया। समापन समारोह में मुख्य अतिथि  बृजमोहन अग्रवाल ने सभी कला गुरुओं एवं प्रशिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने प्रशिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए उनका अभिनंदन किया। समापन अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम ने पूरे वातावरण को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। सुवा नृत्य, कर्मा नृत्य, पंथी नृत्य, बांसगीत, भरथरी गायन तथा लोकसंगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर तक मंत्रमुग्ध रखा। पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्यों की मधुर ध्वनि और कलाकारों की ऊर्जा ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। शिविर में प्रदेश के प्रतिष्ठित कला गुरुओं ने प्रशिक्षण प्रदान किया। एआई आर्ट का प्रशिक्षण  वल्कल्पति जेस्सी, क्ले एवं टेक्सचर आर्ट सु अलका हनवत, पेंटिंग  राकेश पुजारी, बोनसाई कला  अनिल वर्मा, भरथरी गायन  प्रांजल सिंह, कथक नृत्य  चिरंजीव हलधर, मंडला एवं मांडना आर्ट मती कविता यादव, रजवार भित्ति चित्र कला मती प्रतिमा डहरवाल, जूट एवं गोदना शिल्प मती कल्पना यादव, पारंपरिक गहना निर्माण एवं वुडन ट्राइबल आर्ट डॉ. शुभ्रा मिश्रा, लोकनृत्य एवं लोकसंगीत  तेजराम साहू, हस्तकढ़ाई एवं शिल्प डिजाइनिंग प्रेमलता सिंह, टेराकोटा  विमल फुटान, लिप्पन आर्ट एवं पचवाई कला निधि अग्रवाल, वाद्य यंत्र  रिखी क्षत्रीय तथा क्रोशिया कला का प्रशिक्षण सीमा रायजादा ने दिया। “आकार-2026” ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की प्रेरणा भी है। 1281 प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता, अनुभवी कला गुरुओं का मार्गदर्शन और लोक संस्कृति से सराबोर प्रस्तुतियों ने इस आयोजन को रंग, रचनात्मकता और परंपरा के सच्चे महाकुंभ में परिवर्तित कर दिया। यह आयोजन न केवल कला प्रशिक्षण का मंच बना, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का एक सफल प्रयास भी सिद्ध हुआ।

चांदी की पायल के लालच में बुजुर्ग महिला की हत्या, पुलिस जांच में जुटी

भोपाल राजधानी के देहात क्षेत्र के नज़ीराबाद में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां बैरसिया क्षेत्र की रहने वाली एक 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला की गला दबाकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोपी की बर्बरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने महिला के दोनों पैरों से चांदी की पायल निकालने के लिए कुल्हाड़ी से दोनों पैर काट दिए। सोमवार को जब पुलिस ने महिला का शव बरामद किया, तब वह निर्वस्त्र स्थिति में था, जिसके चलते पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच आने तक दुष्कर्म की आशंका से भी इनकार नहीं किया है। मामले में पुलिस ने मृतका के एक 40 वर्षीय भांजे दामाद को हिरासत में लिया है, जिसने शुरुआती पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। आरोपी ने गुमराह कर मोटरसाइकिल पर ले जाकर दिया वारदात को अंजाम पुलिस के अनुसार, बैरसिया थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली भगवती बाई (नाम परिवर्तित) के पति पेशे से किसान हैं। वह बीते 4 जून की दोपहर करीब 12 बजे अपने एक रिश्तेदार शेषपुरा गांव के 40 वर्षीय जसमन गुर्जर के साथ यह कहकर घर से निकली थीं। जब वह देर रात तक वापस नहीं लौटीं, तो स्वजनों ने अपने स्तर पर तलाश शुरू की और रिश्तेदार से पूछताछ की, लेकिन असफल रहने पर 6 जून को स्वजनों ने बैरसिया थाने में महिला की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तभी से पुलिस और स्वजन उनकी तलाश में जुटे थे। शेषापुरा के जंगलों में मिला निर्वस्त्र शव बैरसिया पुलिस संभाग की एसडीओपी वैशाली करहालिया ने बताया कि सोमवार शाम को नज़ीराबाद पुलिस को सूचना मिली कि शेषापुरा के जंगल में एक अज्ञात महिला का नग्न अवस्था में शव पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और हुलिए के आधार पर लापता महिला के स्वजनों को शिनाख्त के लिए बुलाया। स्वजनों ने मृतका की पहचान भगवती बाई के रूप में की। घटनास्थल का दृश्य बेहद खौफनाक था, महिला के दोनों पैर टखने के पास से कुल्हाड़ी से कटे हुए थे और पैरों में पहनी हुई चांदी की पायल गायब थी। दाएं हाथ का एक पंजा भी गायब था। शरीर पर कपड़े न होने के कारण पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों और फोरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया। जांच के दौरान स्वजनों ने उसी 40 वर्षीय रिश्तेदार पर शक जताया, जिसके साथ बुजुर्ग महिला गई थीं। रिश्तेदार हिरासत में, लूटपाट के इरादे से की हत्या पुलिस ने घेराबंदी कर संदेही को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ में आरोपी टूट गया और उसने पूरी साजिश का खुलासा किया कि वह 4 जून को महिला के घर गया था और उसने झांसा दिया कि वह उन्हें मोटरसाइकिल से उनके बेटे के पास छोड़ देगा। महिला ने उस पर भरोसा कर उसके साथ बाइक पर बैठ गईं। आरोपी उन्हें सीधे शेषापुरा के सूने जंगल में ले गया, जहां उसने पहले गला घोंटकर उनकी जान ली और फिर कुल्हाड़ी से पैर काटकर चांदी की पायल लूट ली। नज़ीराबाद पुलिस ने इस मामले में अपहरण, हत्या और लूट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मंगलवार को डॉक्टरों के एक विशेष पैनल ने मृतका के शव का पोस्टमार्टम किया। इनका कहना है 'आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। महिला का शव बिना कपड़ों के मिला है, इस कारण से पीएम रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्यों में पुष्टि जरूरी है। अगर ऐसा कुछ होता है तो मामले में तत्काल प्रासंगिक धाराएं बढ़ाई जाएंगी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस जघन्य अपराध में आरोपी के साथ कोई और मददगार तो शामिल नहीं था।' – वैशाली करहालिया, एसडीओपी बैरसिया पुलिस संभाग

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले जर्मनी के काउंसलेट जनरल हालियर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में जर्मनी के काउंसलेट जनरल  क्रिस्टोफ हालियर ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  हालियर का पुष्प-गुच्छ और विश्व धरोहर स्मारक सांची की फ्रेम युक्त तस्वीर भेंट कर स्वागत किया। हालियर ने भोपाल की सुंदरता की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी जर्मनी की यात्रा का स्मरण करते हुए कहा कि उनकी जर्मनी यात्रा सुखद रही थी। भारत और जर्मनी के प्राचीन काल से संबंध हैं जिन्हें प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में अब नया आयाम मिल रहा है। उद्योग और व्यवसाय जगत में दोनों देशों के संबंध मजबूत हैं। ये संबंध अब अधिक प्रगाढ़ हो रहे हैं। उद्योग और व्यवसाय के साथ शिक्षा के क्षेत्र में संयुक्त रूप से ठोस कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जर्मन विद्वान मैक्समूलर ने भारतीय ग्रंथों और वेदों का जर्मनी और अन्य भाषाओं में अनुवाद किया था। वे संस्कृत के भी विद्वान थे और स्वामी विवेकानंद की नैसर्गिक प्रतिभा के कायल थे। मध्यप्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक और मानव संसाधनों के साथ जर्मनी की तकनीक का संगम हो, इस दृष्टि से नवम्बर 2024 में म्यूनिख जर्मनी में इण्टरैक्टिव सेशन भी आयोजित किया गया था। मध्यप्रदेश जर्मनी के साथ दोतरफा सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में जर्मन प्रतिष्ठानों द्वारा निवेश के साथ ही जर्मन भाषा के प्रशिक्षण के लिए भी सहयोग दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में जर्मन भाषा के शिक्षण की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश की दृष्टि से जर्मन के औद्योगिक संस्थानों का मध्यप्रदेश में स्वागत है। गत 2 वर्ष में निवेश के कई प्रस्तावों को क्रियान्वित किया गया है। उन्होंने अब फिर से वह समय आया है जब विश्व की प्रमुख भाषाओं का अध्ययन किसी भी देश में किया जा सकता है। मध्यप्रदेश में जर्मन के शिक्षण- प्रशिक्षण की व्यवस्थाएं अनेक उच्च शिक्षा संस्थाओं में की गई हैं। हमारे युवा भी भारतीय भाषाओं के साथ विदेशी भाषाएं सीखना चाहते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जर्मन कॉउंसलेट द्वारा पुन: जर्मनी आने के आमंत्रण पर कहा कि वे एक बार नहीं इससे अधिक बार जर्मनी आएंगे। निश्चित ही दोतरफा सहयोग का यह क्रम जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश औद्योगिक निवेश, कौशल विकास, उच्च शिक्षा, अनुसंधान तथा सतत विकास के क्षेत्रों में जर्मनी के साथ साझेदारी को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर स्थित इंडो-जर्मन टूल रूम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दोनों देशों के सफल औद्योगिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। बैठक में जर्मन ड्यूल एजुकेशन मॉडल के माध्यम से युवाओं के कौशल उन्नयन, मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों और जर्मनी के उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों एवं पेशेवरों के लिए नए अवसर विकसित करने के विषय में भी सार्थक चर्चा हुई। जल संरक्षण, पर्यावरणीय स्थिरता और जल गंगा संवर्धन अभियान जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। काउंसलेट जनरल  क्रिस्टोफ हालियर ने कहा कि उन्हें मध्यप्रदेश आना अच्छा लगता है। वे यहां आकर प्रसन्न हैं। इंदौर और भोपाल में उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से भेंट की है।  हालियर ने जानकारी दी कि इसी वर्ष जनवरी माह में अहमदाबाद में प्रधानमंत्री  मोदी से जर्मन के फेडरल चान्सलर  फ्रेडरिक मर्ज ने भेंट की है।  मर्ज की भारत यात्रा का उद्देश्य भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को सशक्त करना था। भारत की संस्कृति से जर्मन चांसलर प्रभावित हुए थे और उन्होंने अंतराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भी हिस्सा लिया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को काउंसलेट जनरल  क्रिस्टोफ हालियर ने जर्मनी की ओर से विशेष स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।  हालियर ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा उन्हें दिए गए सम्मान और आत्मीयता के लिए आभार माना। इस अवसर पर जर्मन काउंसलेट सेंटर इंडिया के पदाधिकारी  अविनाश कश्यप ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश का औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग पूर्ण सहयोग के लिए तत्पर रहता है। हाल ही में नागदा में जर्मन सहयोग से संचालित संस्थान की समस्या का अविलंब समाधान किया गया है। उद्योग संचालन में आने वाली किसी भी कठिनाई को मध्यप्रदेश शासन की ओर से तत्काल दूर किया जाता है। इस अवसर पर एमपी औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड में प्रबंध निदेशक  चंद्रमौली शुक्ला भी उपस्थित थे।