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अब बाहर से महंगी दवा खरीदने की जरूरत नहीं, रिम्स में शुरू होगी अमृत फार्मेसी

 रांची  राजधानी रांची स्थित रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को जल्द बड़ी राहत मिलने वाली है। अब इलाज के दौरान महंगी दवाओं के लिए बाहर की निजी मेडिकल दुकानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ट्रॉमा सेंटर परिसर में अमृत फार्मेसी शुरू करने की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। औषधि लाइसेंस मिलते ही इसका संचालन शुरू कर दिया जाएगा। अब बाहर से महंगी दवा खरीदने की मजबूरी होगी खत्म फिलहाल ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मरीजों को कई जरूरी दवाएं रिम्स के दवा भंडार में उपलब्ध नहीं होने के कारण बाहर की निजी दुकानों से खरीदनी पड़ती है। इन दवाओं की कीमत अधिक होने से मरीज और उनके परिजनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। अमृत फार्मेसी शुरू होने के बाद यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। डॉक्टरों की सूची के आधार पर उपलब्ध होगी दवाएं रिम्स प्रबंधन ने योजना बनाई है कि डॉक्टरों से उन दवाओं की सूची ली जाएगी, जिनकी सबसे अधिक जरूरत पड़ती है और जिन्हें अक्सर बाहर से खरीदना पड़ता है। इसी सूची के आधार पर अमृत फार्मेसी में पर्याप्त मात्रा में दबे उपलब्ध कराई जाएगी ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। रिम्स के अधीक्षक डॉ. हिरेंद्र बिरुआ ने बताया कि अमृत फार्मेसी की दुकान पूरी तरह तैयार है। फिलहाल औषधि लाइसेंस की प्रक्रिया चल रही है। लाइसेंस मिलते ही दुकान का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। यहां मरीजों को अच्छी कंपनियों की जेनेरिक और ब्रांडेड दवाएं रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी। रिम्स परिसर में निजी दवा दुकानों की बढ़ गई है संख्या रिम्स ट्रॉमा सेंटर ओर सेंट्रल इमरजेंसी के आसपास पिछले कुछ वर्षों में कई निजी दवा दुकानें खुल चुकी हैं। गंभीर मरीजों के परिजन अक्सर इन्हीं दुकानों से दवाएं खरीदते है ऐसे में अमृत फार्मेसी शुरू होने से मरीजों को एक सस्ता और भरोसेमंद विकल्प मिलेगा। जल्द शुरू होगा संचलन रिम्स प्रबंधन में अमृत फार्मेसी संचालक को लाइसेंस की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है। उम्मीद है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होते ही ट्रॉमा सेंटर में मरीजों को कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं मिलने लगेगी, जिससे इलाज का खर्च कम होगा और परिजनों को भी बड़ी राहत मिलेगी।  

112 करोड़ से ज्यादा की विकास परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे लोकार्पण-भूमिपूजन

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय 6 जुलाई को रायपुर जिले के समोदा में 112 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे। इनमें 21 करोड़ 67 लाख रुपए के 67 कार्यों का लोकार्पण और 90 करोड़ 34 लाख रुपए लागत के 29 निर्माण कार्यों के भूमिपूजन शामिल हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन व लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। वन एवं पर्यावरण तथा रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री  केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब और सांसद  बृजमोहन अग्रवाल कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आरंग क्षेत्र के ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में लोक निर्माण विभाग के 9 करोड़ 43 लाख रुपए के तीन कार्यों, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के 79 लाख रुपए के पांच कार्यों, नगर पंचायत समोदा के 6 करोड़ 67 लाख रुपए के 20 कार्यों तथा आरंग नगर पालिका में 4 करोड़ 78 लाख रुपए के 39 कार्यों का लोकार्पण करेंगे।   साय लोक निर्माण विभाग द्वारा किए जाने वाले 61 करोड़ 11 लाख रुपए लागत के 8 कार्यों, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के दो करोड़ 54 लाख रुपए के 11 कार्यों एवं समोदा नगर पंचायत के 8 करोड़ 70 लाख रुपए के 9 कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। वे स्वास्थ्य विभाग द्वारा नवा रायपुर के सेक्टर-17,  कोटरा भाठा में 18 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जा रहे 100 बिस्तर अस्पताल का भी भूमिपूजन करेंगे।

भोपाल को मिलेगा 25 एकड़ क्षेत्रफल का विश्वस्तरीय कन्वेंशन और एग्जिबिशन सेंटर

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश को देश का अग्रणी औद्योगिक एवं निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिये औद्योगिक अधोसंरचना के विस्तार, निवेश-अनुकूल वातावरण के निर्माण और रोजगार सृजन को गति देने के उद्देश्य से निरंतर प्रभावी पहल की जा रही हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजधानी भोपाल को आधुनिक औद्योगिक पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 6 जुलाई (सोमवार) को सतगढ़ी में विकसित किए जा रहे 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क' का भूमि-पूजन एवं शिलान्यास करेंगे। राष्ट्रवादी चिंतक एवं भारत के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम प्रदेश की औद्योगिक विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। कार्यक्रम में देश और प्रदेश के लगभग 200 से अधिक प्रमुख उद्योगपति, निवेशक और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। लगभग 173 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाला डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का नया आधार बनेगा। परियोजना में आधुनिक औद्योगिक अधोसंरचना, उत्कृष्ट सड़क एवं परिवहन संपर्क, आईटी एवं एआई आधारित सुविधाएं, लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग कॉम्प्लेक्स तथा भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा, जिससे निवेशकों को विश्वस्तरीय औद्योगिक वातावरण उपलब्ध हो सके। यह परियोजना 'वर्क-लिव-ग्रो' मॉडल पर आधारित होगी, जहां उद्योगों के साथ कौशल विकास, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण जीवन के लिए आवश्यक सुविधाओं का समन्वित विकास किया जाएगा। पार्क में उच्च मूल्य विनिर्माण, गारमेंट, टॉयज, आईटी, एआई, लॉजिस्टिक्स तथा उभरती तकनीकों से जुड़े उद्योगों को स्थापित करने की परिकल्पना की गई है। इससे राजधानी में विविध औद्योगिक क्षेत्रों का संतुलित विकास सुनिश्चित होगा और नए निवेश के अवसर सृजित होंगे। सतगढ़ी में विकसित हो रहा यह स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क कोलार क्षेत्र के विकास की दिशा भी बदलेगा। अब तक मुख्य रूप से आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित कोलार आने वाले समय में निवेश, उद्योग और रोजगार का नया केंद्र बनेगा। परियोजना से 15 हजार से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है, जिनका लाभ विशेष रूप से भोपाल और आसपास के युवाओं को मिलेगा। इसके साथ ही बढ़ती औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्राप्त होगी। परियोजना की एक विशेष उपलब्धि यहां विकसित किया जाने वाला विश्वस्तरीय कन्वेंशन एवं एग्जिबिशन सेंटर होगा। लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित यह परिसर 10 हजार से अधिक लोगों की क्षमता वाला होगा, जहां राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के निवेशक सम्मेलन, औद्योगिक प्रदर्शनियां, व्यापारिक आयोजन और वैश्विक व्यवसायिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। इससे भोपाल को मध्य भारत के प्रमुख एमआईसीई (मीटिंग्स, इंसेन्टिव्स, कॉन्फ्रेंसेस एण्ड एग्जिबिशन) गंतव्य के रूप में नई पहचान मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार मिलेगा। रणनीतिक दृष्टि से भी यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। सतगढ़ी क्षेत्र राजा भोज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, कोलार रोड तथा प्रस्तावित वेस्टर्न बायपास से बेहतर संपर्क के कारण निवेशकों के लिए सुविधाजनक औद्योगिक गंतव्य के रूप में विकसित होगा। यह कनेक्टिविटी उद्योगों की स्थापना, लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पार्क को पर्यावरण अनुकूल एवं स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत एससीएडीए आधारित जल प्रबंधन प्रणाली, जल एवं सीवेज शोधन संयंत्र, ऑटोमेटेड एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन, आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था तथा अत्याधुनिक यूटिलिटी कॉरिडोर जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण-संरक्षण और संसाधनों के कुशल प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क राजधानी भोपाल में औद्योगिक निवेश, आधुनिक विनिर्माण और रोजगार सृजन के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा। यह परियोजना औद्योगिक अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण के साथ प्रदेश की निवेश क्षमता को और मजबूत करेगी तथा भोपाल को मध्य भारत के प्रमुख औद्योगिक एवं व्यावसायिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  

मध्यप्रदेश में शिक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी, स्कूल शिक्षा विभाग में 5,017 पदों पर नियुक्ति का आदेश जारी

भोपाल. मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने 5 हजार 17 शिक्षकों का नियु​क्ति आदेश जारी कर दिया है। मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती-2024 के तहत 5017 कैंडिडेट्स का चयन किया गया था। 3 और 4 जुलाई को संभागीय संयुक्त संचालकों के जरिए नियुक्तियां जारी की गईं, जिसमें 4 हजार 67 माध्यमिक और 950 प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं। इन शिक्षकों को इसी सत्र से स्कूलों में पढ़ाने का मौका मिलेगा। गायन-वादन विषयों में भी शिक्षक नियुक्त स्कूल शिक्षा विभाग ने माध्यमिक स्तर पर हिंदी, गणित, अंग्रेजी, संस्कृत, सामाजिक विज्ञान, खेल और गायन-वादन विषयों में शिक्षकों की नियुक्ति की है। लोक शिक्षण संचालनालय ने 21 जून 2026 तक चॉइस फिलिंग करा चुका है। करीब एक सप्ताह बाद विभाग ने नियुक्ति आदेश जारी किया है। कैंडिडेट्स कर रहे 28 हजार पद पढ़ाने की मांग प्रदेश में लंबे समय से शिक्षक पात्रता परीक्षा पास वर्ग 2 और वर्ग 3 के हजारों कैंडिडेट्स आंदोलन कर रहे हैं। कैंडिडेट्स प्रदेश में दोनों कैटेगरी में कुल 28 हजार से अधिक पदों में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। हालांकि, अब तक स्कूल शिक्षा विभाग से उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया है। डेढ़ लाख पद खाली, फिर भर्ती क्यों नहीं ? कैंडिडेट्स का कहना है कि मध्यप्रदेश में डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों के पद रिक्त हैं। सरकार 8-10 हजार पदों पर भर्ती करती है। भर्ती प्रक्रिया 4 साल चलती है। जिस वजह से हजारों योग्य उम्मीदवार, जो परीक्षा (TET) पास करके आते हैं उनका सिलेक्शन नहीं हो पता है। दो-दो परीक्षाएं पास करने के बाद भी नौकरी नहीं एक अन्य कैंडिडेट ने बताया कि पात्रता परीक्षा और चयन परीक्षा यानी दो-दो परीक्षाएं क्वालिफाई करने के बाद भी नौकरी नहीं मिल रही है।  20 साल से ESB की फीस भर रहे बताया गया कि जनजाति कार्य विभाग में शिक्षकों के करीब 50 हजार पद रिक्त हैं। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) एक लाख शिक्षकों के पद रिक्त हैं और 50 हजार अभ्यर्थी दो-दो परीक्षा पास कर चुके हैं, लेकिन कम पदों पर भर्ती के कारण उन्हें नौकरी नहीं मिल रही। ओवर ऐज हो जाते हैं। 20-20 साल तक ESB (मप्र कर्मचारी चयन मंडल ) की फीस भरते हैं, फिर भी बेरोजगार हैं।  ये हैं कैंडिडेट्स की मांगें शिक्षक वर्ग-3 (प्राथमिक शिक्षक) में 25 हजार पदों पर पद वृद्धि की जाए शिक्षक वर्ग 2 (माध्यमिक शिक्षक) में प्रत्येक विषय में तीन-तीन हजार पदों पर पद वृद्धि करने की मांग है।

शिक्षा मंत्री ने दी पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि, उनकी अंतिम संस्कार में रहे शामिल

रायपुर स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव ने आज विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्मविभूषण से सम्मानित एवं छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अप्रतिम धरोहर डॉ. तीजन बाई के गृहग्राम गनियारी स्थित निवास पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके उपरांत वे उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए तथा दाह संस्कार कार्यक्रम तक उपस्थित रहकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने घोषणा किया कि उनके गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नामकरण "डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी" के नाम से किया जाएगा।        शिक्षा मंत्री  यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना, ओजस्वी वाणी और आजीवन समर्पण के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के एक स्वर्णिम अध्याय का अवसान है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने चरणों में स्थान प्रदान करने तथा शोकाकुल परिजनों एवं असंख्य प्रशंसकों को इस दुःख की घड़ी में संबल देने की प्रार्थना की।       मंत्री  यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन लोकपरंपराओं, संस्कृति और कला के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित रहा। उनकी कला साधना, संघर्ष और उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व पटल पर स्थापित करने में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने डॉ. तीजन बाई के सम्मान में उनके गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नामकरण "डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी" के नाम से किया जाएगा। राज्य सरकार का यह निर्णय महान लोककलाकार के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगा तथा इससे भावी पीढ़ियों को उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व, जीवन-संघर्ष और सांस्कृतिक योगदान से निरंतर प्रेरणा प्राप्त होती रहेगी।

पटना समेत पूरे बिहार में हाईटेक बस डिपो की तैयारी, यात्रियों को मिलेंगी मॉल-होटल जैसी सुविधाएं

पटना राजधानी पटना समेत बिहार के कई प्रमुख शहरों में जल्द ही विश्वस्तरीय बस डिपो और आधुनिक बस टर्मिनल विकसित किए जाएंगे। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) ने इसके लिए पटना और आसपास के क्षेत्रों सहित 30 से अधिक स्थानों पर सरकारी जमीन चिह्नित कर ली है। इन परियोजनाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा, जहां यात्रियों को दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के बस टर्मिनलों जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। पटना में करीब पांच एकड़ भूमि पर नया बस डिपो प्रस्तावित है। इसके अलावा पालीगंज, मोकामा और नौबतपुर में लगभग एक-एक एकड़ सरकारी भूमि चिह्नित की गई है। इन स्थानों पर डिपो निर्माण के लिए विभागीय प्रक्रियाएं जारी हैं। 30 से अधिक शहरों में बनेंगे आधुनिक बस टर्मिनल बीएसआरटीसी के अनुसार, औरंगाबाद में 5.57 एकड़, मुजफ्फरपुर में 5.11 एकड़, गया में 4.95 एकड़, जमुई में 4.72 एकड़ और नवादा में 4.57 एकड़ भूमि पर बड़े बस डिपो विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा बिहारशरीफ, पूर्णिया, मुंगेर (तारापुर), दरभंगा समेत कई जिलों में तीन एकड़ से अधिक सरकारी भूमि पहले ही चिह्नित की जा चुकी है। वहीं भागलपुर, सहरसा, मधुबनी, किशनगंज, मोतिहारी, छपरा, सुल्तानगंज, बरबीघा, चकाई, सीतामढ़ी, आरा, जहानाबाद, संग्रामपुर, भदौनी और राजगीर जैसे प्रमुख शहरों में भी बस टर्मिनल विकसित किए जाएंगे। मल्टी-मॉडल हब के रूप में होंगे विकसित सभी बस डिपो और टर्मिनलों को मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि यात्रियों को एक ही परिसर में परिवहन और अन्य जरूरी सुविधाएं मिल सकें इन परिसरों में बस संचालन के साथ व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे परियोजनाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। पांच मंजिला होंगे बस डिपो निगम के अनुसार, सभी नए बस डिपो पांच मंजिला होंगे। ग्राउंड फ्लोर पर बस पार्किंग, प्लेटफॉर्म और अत्याधुनिक वर्कशॉप की व्यवस्था होगी। ऊपरी मंजिलों पर निगम कार्यालय, एसी और नॉन-एसी प्रतीक्षालय, कैफेटेरिया, दुकानें, डॉर्मेटरी, गेस्ट रूम, महिलाओं के लिए फीडिंग रूम, बैंक्वेट हॉल, शॉपिंग मॉल, होटल और एंटरटेनमेंट जोन जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना का उद्देश्य बस यात्रा को केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए सुविधाजनक और बेहतर अनुभव बनाना है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा बढ़ावा परिवहन मंत्री दामोदर रावत ने कहा कि राज्य सरकार परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। पटना सहित पूरे बिहार में विश्वस्तरीय बस डिपो और टर्मिनल विकसित किए जा रहे हैं, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और सार्वजनिक परिवहन अधिक आकर्षक बनेगा। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से केवल परिवहन व्यवस्था ही मजबूत नहीं होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक जिला मुख्यालय में आधुनिक बस टर्मिनल विकसित करना है, ताकि यात्री सुविधाओं के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल सके।  

स्टेट हाईवे पर टोल वसूली की तैयारी तेज, ट्रैफिक सर्वे के बाद तय होगी दरें

 पटना  राज्य उच्च पथों से गुजरने वाले वाहनों से टोल लिए जाने की प्रक्रिया इस वर्ष नवंबर से पहले संभव नहीं दिखती। पथ निर्माण विभाग फिलहाल यह आकलन कर रहा कि एक महीने में किसी राज्य उच्च पथ (एसएच) पर कितने वाहनों की आवाजाही है। दो महीने तक इसका अध्ययन संभावित है। इसके बाद उक्त रिपोर्ट के आधार पर संबंधित सड़क के लिए टोल एजेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया निविदा के आधार पर आगे बढ़ेगी। सड़कों के दोनों छोर पर कैमरे लगाकर वाहनों की संख्या की गिनती हो रही। वार्षिक संग्रह क्षमता के आधार पर तय होगा मामला पथ निर्माण विभाग आयी टोल पालिसी में सबसे महत्वपूर्ण विषय किसी भी सड़क की एनुअल पोटेंशियल कलेक्शन यानी वार्षिक संग्रह क्षमता है। इसके माध्यम से यह देखा जाएगा कि एक एसएच पर माह भर में औसत कितने वाहन गुजरे। इस हिसाब से संबंधित सड़क की टोल संग्रह क्षमता तय होगी। टोल संग्रह की राशि का अंदाजा होने के बाद उसमें टोल एजेंट का खर्च और रख रखाव की राशि जोड़ी जाएगी। इस राशि को जोड़कर संबंधित सड़क के लिए एक रकम तय कर उसकी निविदा होगी। इस प्रक्रिया के माध्यम से संबंधित सड़क के लिए टोल एजेंट तय हो जाएंगे। एक वर्ष में वाहनों की संख्या में पांच प्रतिशत बढ़ोतरी पथ निर्माण विभाग की टोल पालिसी में यह प्राविधान किया गया है कि एक राज्य उच्च पथ पर वर्तमान में जितने वाहनों की आवाजाही हो रही उसमें पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी संभव है। टोल एजेंट को नियुक्त करते में समय इसका भी ख्याल रखा जाएगा। इसके अतिरिक्त टोल फ्री वाहनों की संख्या भी जोड़ी जाएगी। अधिसूचना के बाद यह सूचना सार्वजनिक होगी कि संबंधित सड़क पर कितना टोल लगेगा टोल लागू किए जाने की अधिसूचना के बाद यह तय हाेगा कि संबंधित राज्य उच्च पथ से गुजरने पर टोल के मद में कितनी राशि लगेगी। अधिकतम 20 किमी की दूरी को टोल में शामिल किए जाने पर चर्चा चल रही। राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद अभी सिर्फ यह तय हुआ है कि प्रति किमी कितनी राशि टोल मद में ली जाएगी।  

योगी सरकार 6 से 11 जुलाई तक प्रदेश की सभी सहकारी गन्ना विकास समितियों में चलाएगी सामाजिक सुरक्षा जागरूकता एवं नामांकन महाअभियान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार गन्ना किसानों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा का मजबूत कवच देने की दिशा में बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। 6 से 11 जुलाई तक प्रदेश की सभी सहकारी गन्ना विकास समितियों में विशेष सामाजिक सुरक्षा जागरूकता एवं नामांकन महाअभियान चलाया जाएगा।  इसके माध्यम से लाखों गन्ना किसान परिवारों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), अटल पेंशन योजना (एपीवाई) सहित भारत सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा। अभियान का उद्देश्य किसानों की आर्थिक सुरक्षा, वित्तीय समावेशन और सामाजिक स्थिरता को मजबूत करना है।  योगी सरकार का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का व्यापक विस्तार किसानों को दुर्घटना, आकस्मिक मृत्यु और वृद्धावस्था जैसी परिस्थितियों में आर्थिक संबल प्रदान करेगा। इससे किसान परिवारों की आय सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन मजबूत होगा। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता मिलेगी।  योगी सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक पात्र गन्ना किसान परिवार इन योजनाओं से जुड़ें और प्रत्येक किसान परिवार सुरक्षित, सशक्त तथा आत्मनिर्भर बने। यही अभियान 'विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' के संकल्प को नई गति देने के साथ किसानों के समग्र कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। गन्ना समितियां निभाएंगी नई भूमिका प्रदेश की सहकारी गन्ना विकास समितियां इस अभियान की प्रमुख कड़ी होंगी। वर्षों से किसानों के साथ जुड़े विश्वास को सामाजिक सुरक्षा अभियान से जोड़ा जाएगा। समितियां योजनाओं का प्रचार-प्रसार करेंगी, किसानों को जागरूक करेंगी, पात्र लाभार्थियों का नामांकन कराएंगी और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इससे गन्ना समितियां किसान सेवा के साथ सामाजिक सुरक्षा की प्रभावी संस्थागत व्यवस्था के रूप में भी स्थापित होंगी। समिति परिसरों में लगेंगे सहायता एवं नामांकन केंद्र अभियान के दौरान प्रत्येक सहकारी गन्ना विकास समिति परिसर में बैंकों, इफ्को, चीनी मिलों और अन्य सहयोगी संस्थाओं के संयुक्त सहयोग से विशेष सहायता एवं नामांकन काउंटर स्थापित किए जाएंगे। किसानों को एक ही स्थान पर योजनाओं की जानकारी, पात्रता का सत्यापन, दस्तावेजों की जांच, बैंकिंग सहायता और तत्काल नामांकन की सुविधा मिलेगी। नए सदस्य पंजीकरण, बैंक खाते खोलने तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। महिला किसानों के सशक्तीकरण पर रहेगा विशेष फोकस अभियान में महिला स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। ग्रामीण महिला किसानों को बीमा, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने के साथ उन्हें वित्तीय निर्णयों में अधिक सक्षम बनाने का प्रयास किया जाएगा। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी और परिवारों की सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। गांव-गांव पहुंचेगा जागरूकता अभियान गन्ना पर्यवेक्षक, समिति सचिव और विभागीय अधिकारी गांवों में जनसंपर्क कर किसानों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के साथ गन्ना विकास विभाग, इफ्को तथा चीनी मिलों द्वारा संचालित किसान हितैषी योजनाओं की भी जानकारी देंगे। अधिक से अधिक पात्र परिवारों का नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा। ग्राम सभाओं और किसान गोष्ठियों का भी आयोजन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर के वन धन विकास केंद्र पंचक्की की महिला स्व-सहायता समूह को किया सम्मानित

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने जशपुर के वन धन विकास केंद्र पंचक्की की महिला स्व-सहायता समूह को किया सम्मानित मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सहकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए जशपुर जिले के वन धन विकास केंद्र, पंचक्की से जुड़े महिला स्व-सहायता समूह को ‘सहकार प्रेरणा सम्मान’ से सम्मानित किया। यह सम्मान भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम में आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकारी सप्ताह कार्यक्रम में प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने जशपुर के वन धन विकास केंद्र पंचक्की के अनंत स्व-सहायता समूह को उत्कृष्ट कार्यों के लिए सहकार प्रेरणा पुरस्कार एवं लाभांश राशि प्रदान कर सम्मानित किया। यह समूह वन विभाग के अंतर्गत संचालित वन धन विकास केंद्र से जुड़ा है। अनंत स्व-सहायता समूह की 10 महिलाएं सामूहिक रूप से च्यवनप्राश सहित विभिन्न औषधीय उत्पादों का निर्माण करती हैं। समूह द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की आपूर्ति आयुष विभाग सहित अन्य संस्थानों एवं उपभोक्ताओं को की जाती है। वर्ष 2024-25 के दौरान समूह ने लगभग 36 लाख रुपये के उत्पादों का विक्रय कर महिला स्वावलंबन और ग्रामीण उद्यमिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठित सहकारिता मंत्रालय ने देश में श्सहकार से समृद्धिश् के लक्ष्य को नई गति दी है। राज्य सरकार सहकारिता के माध्यम से किसानों, वनवासियों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कृषि के साथ-साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मजबूती प्रदान कर रही है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि 29 जून से 6 जुलाई तक प्रदेश में सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में कोई भी पंचायत सहकारिता से वंचित न रहे, इसके लिए अब तक 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है।

मध्यप्रदेश बनेगा देश में महिलाओं की सोसायटी बनाने वाला अग्रणी राज्य : मंत्री सारंग

भोपाल  सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश में महिलाओं की सोसायटी बनाकर अग्रणी राज्य बनेगा। इस नवाचार की शुरूआत अगले माह से की जायेगी। मंत्री सारंग रविवार को अपेक्स बैंक में आयोजित "सहकारी सप्‍ताह'' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंत्री सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश जल्द ही बीज के मामले में भी लीड करेगा। इसके पहले कम्प्यूटराइजेशन के साथ पिछले साल ऑनलाइन ऑडिट में भी मध्यप्रदेश का सहकारिता विभाग आगे रहा। यही नहीं मध्यप्रदेश ऑनलाइन केसीसी देने वाला पहला राज्य भी बना है। समाज के निचले वर्गों को आत्म-निर्भर बनाने में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका सहकारिता मंत्रालय भारत सरकार की स्थापना के 5 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सहकारी सप्ताह समारोह में मंत्री सारंग ने कहा कि सहकारिता में अधिकारी-कर्मचारी समाज के उन्नयन के लिये योगदान दे रहे हैं। साथ ही अलग-अलग आयामों पर काम किया जा रहा है। युवा, महिला, किसान सहित हर वर्ग के कल्याण पर ध्यान दिया जा रहा है। रोजगार की दिशा में समाज के निचले वर्गों को आत्म-निर्भर बनाने में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राष्ट्र के उन्नयन में राज्य का समावेश होना जरूरी मंत्री सारंग ने कहा कि राष्ट्र के उन्नयन में राज्य का समावेश होना जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश सहकारिता की दिशा में नित नये आयाम गढ़ रहा है। किसान, जवान, विज्ञान और अनुसंधान के जरिये सहकारिता आंदोलन को नई दिशा दी जा रही है। कॉर्पोरेट और को-ऑपरेटिव को जोड़कर नई अवधारणा बनाई जा रही है। पुरस्कृत होना अन्य लोगों के लिये करता है प्रेरणा-स्रोत का कार्य मंत्री सारंग ने कहा कि कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को पुरस्कृत एवं सम्मानित किया जा रहा है, जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी का ठीक ढंग से निर्वहन किया। यह लोग दूसरों के लिये प्रेरणा-स्रोत बने हैं। इससे जिन्हें पुरस्कार नहीं मिले हैं वे लोग भी अच्छा कार्य कर सम्मानित हो सकेंगे और अपनी नई पहचान बना सकेंगे। सहकारिता सप्ताह के दौरान जिलों में भी हुए उत्साहवर्धक कार्य अपेक्स बैंक के प्रशासक महेन्द्र सिंह यादव ने कहा कि सहकारिता सप्ताह के दौरान जिलों में भी उत्साह के साथ कार्यक्रम हुए। इस दौरान अधिक से अधिक पौध-रोपण भी किया गया। अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक मनोज गुप्ता ने स्वागत उद्बोधन दिया। अंत में सहकारी संघ के प्रबंध संचालक ऋतुराज रंजन ने आभार माना। उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति और संस्था हुईं पुरस्कृत अमानत संग्रहण लक्ष्य के विरुद्ध पूर्ति में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक विदिशा को 21 हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया। इसी में द्वितीय स्थान प्राप्त करने के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दतिया को 15 हजार रुपये और तृतीय स्थान प्राप्त करने के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दतिया को 11 हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया। पैक्स सदस्यता महाभियान में सर्वप्रथम लक्ष्य प्राप्ति के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक झाबुआ को सम्मानित किया गया। इसी प्रकार अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह में विभिन्न प्रतियोगिताएँ हुईं। जरी-जरदोजी क्रॉफ्ट प्रतियोगिता में प्रथम यासमीन खान, द्वितीय गुड़िया और तृतीय आशिया खान रहीं। जूट क्रॉफ्ट प्रतियोगिता में प्रथम धीरू पटेल, द्वितीय संगीता यदुवंशी और तृतीय पूजावास्तव रहीं। कढ़ाई क्रॉफ्ट प्रतियोगिता में प्रथम दामिनी सोलंकी, द्वितीय सोनल महोबे और तृतीय रागिनी वर्मा नहीं। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में कृष कुमार साहू, दीपक कुमार सोनी और तृप्ति कुशवाहा अव्वल रहीं। निबंध प्रतियोगिता में सृष्टि जैन, वेदिका दीक्षित, टीना कारा क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर रहीं। राज्य स्तरीय सहकारी प्रदर्शनी में प्रथम स्थान पर सोलर पॉवर विस्तार सहकारी संस्था खरगोन, दूसरे स्थान पर प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति रेहटी, सीहोर और तृतीय स्थान पर सुविधा साख सहकारी संस्था मर्यादित भोपाल रहीं। राज्य स्तरीय सहकारी प्रदर्शनी में विशिष्ट प्रस्तुतिकरण के लिये मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ सहकारी मर्यादित भोपाल और मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बीज उत्पादक संघ भोपाल को पुरस्कृत किया गया।