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नक्सल नेटवर्क पर शिकंजा कसने उतरी ED, संयुक्त अभियान में होगी भागीदारी

रायपुर नक्सलियों के खिलाफ ज्वाइंट एक्शन में अब ED भी शामिल होगी. टेरर फंडिंग को लेकर रायपुर में हुई बड़ी बैठक में “प्लान ऑफ एक्शन टू नक्सल” पर चर्चा के दौरान इस संबंध में फैसला लिया गया. बैठक में छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना,आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के आईजी, और डीआईजी शामिल थे. इस दौरान ED और NIA के अफसर से हाल में टेरर फंडिंग को लेकर हुए खुलासे पर चर्चा हुई. इसके साथ ED और NIA के ज्वाइंट ऑपरेशन पर जोर दिया गया. पूरी बैठक IB के स्पेशल डायरेक्टर ऋत्विक रूद्र ने ली. वित्तीय लेन-देने रोकने का काम करेगी ED इस संबंध में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ED का काम अगर ऐसे मामलों में वित्तीय लेनदेन है, तो उसे रोकना है. ये IB की भी सूचना हो सकती है कि लेनदेन की जानकारी निकाल लें. विभिन्न एजेंसियां ये काम करती हैं. ये दिखता है कि मामला ईडी को दिए जाने लायक है तो दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि चाहे नक्सलियों का अर्बन, लीगल, फाइनांसियल या रूरल बेस हो, सब पर एजेंसियां काम कर रही हैं.

एम.पी. ट्रांसको देवास में हुआ सी.पी.आर. प्रशिक्षण सत्र

सब-स्टेशन स्टाफ ने सीखी जीवन बचाने की तकनीक भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) द्वारा देवास व आसपास के सब-स्टेशनों में तैनात आउटसोर्स कर्मियों सहित अन्य कार्मिकों के लिए सी.पी.आर. (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) और आपातकालीन चिकित्सा तकनीकों पर केंद्रित एक विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन सिविल हॉस्पिटल देवास में किया गया। डॉ. बी.आर. शुक्ला (मेडिसिन विशेषज्ञ) और डॉ. कुलदीप एवं उनकी टीम द्वारा कर्मचारियों को जीवन रक्षक प्राथमिक चिकित्सा के व्यावहारिक गुर सिखाए गए। कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा सी.पी.आर. की तकनीकी जानकारी और उसका लाइव प्रदर्शन दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि हृदयगति रुकने की स्थिति में शुरुआती तीन मिनट के भीतर दी गई सी.पी.आर. सहायता से मरीज के जीवित बचने की संभावना तीन गुना तक बढ़ जाती है। डॉ. शुक्ला ने कहा कि “हर व्यक्ति को जीवन रक्षक तकनीकों की जानकारी होनी चाहिए, सी.पी.आर. जैसी सरल विधि भी किसी की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। बिजली व्यवस्था से जुड़े स्टाफ अगर यह ज्ञान रखते हैं तो वे केवल अपने परिवार ही नहीं, समाज के लिए भी मददगार बन सकते हैं। स्वास्थ्य शिविर में देवास, चापड़ा, सोनकच्छ, शंकरगढ़, बरोठा, मक्सी, किशनगढ़ सहित 9 सबस्टेशनों के आउटसोर्स कर्मियों सहित लगभग 40 कर्मियों ने हिस्सा लिया।  

प्रकृतिक आपदा से पिड़ित व्यक्ति को उपलंब्ध कराई गई राहत राशि

प्रकृतिक आपदा से पिड़ित व्यक्ति को उपलंब्ध कराई गई राहत राशि कलेक्टर ने व्हीसी के माध्यम से अनुभागवार राहत राशि वितरण की समीक्षा    सिंगरौली प्रकृतिक आपदा अतिवृष्टि से पिड़ित जिले के ऐसे नागरिक जिनके आवास, फसल, पशु हानि सहित आकाशीय बिजिली की चपेट में आने से पिड़ित व्यक्तियो के राहत राशि वितरण की समीक्षा कलेक्टर श्री चन्द्र शेखर शुक्ला ने व्हीसी के माध्यम से की। एवं अनुभागवार राहत राशि वितरण की जानकारी ली। जिसके तहत सभी राजस्व अधिकारियो द्वारा अवगत कराया गया कि अपने अपने अनुभागो में पिड़ित व्यक्तियो के सम्पत्तियो का सर्वे कराकर उन्हे राहत राशि उपलंब्ध करा दी गई है।  कलेक्टर ने राजस्व अधिकारियो को निर्देश दिए कि अपने  क्षेत्रो के  पटवारियो द्वारा एक बार फिर से सर्वे कराये कि कोई पिड़ित व्यक्ति छूट तो नही है अगर त्रृटिवस कोई पिड़ित छूट गया है तो उसके क्षतिग्रस्त सम्पत्ति का  आकलन कर राहत राशि उपलंब्ध कराये। उन्होने निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित करे कि कोई भी पिड़ित व्यक्ति राहत राशि से वंचित न रहे।

सभी 55 जिलो में लागू होंगे सड़क सुरक्षा के उपाय : मुख्य सचिव जैन

भोपाल सर्वोच्च न्यायालय सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष जस्टिस श्री अभय मनोहर सप्रे ने सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आव्हान किया है। उन्होंने मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन के साथ सड़क सुरक्षा को लेकर बैठक की। जस्टिस श्री सप्रे ने बैठक में उपस्थित समस्त अधिकारियों से आम आदमी के जीवन को सुरक्षित रखने का दायित्व निभाने की अपील भी की। उन्होंने सड़क सुरक्षा की गंभीरता के दृष्टिगत अधिकारियों को सलाह और मार्गदर्शन भी दिया। उन्होंने कहा कि स्वीडन में सड़क सुरक्षा को लेकर बहुत अच्छा काम हुआ है। वैसा काम हमारे देश में और मध्यप्रदेश में हम भी कर सकते हैं। सड़क दुर्घटना से प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ लाख लोगों की मृत्यु होती है। उनके जीवन को बचाने के लिए मिशन की शुरूआत मध्यप्रदेश से की है। उन्होंने बताया कि रोड सेफ्टी की मैदानी स्थिति जानने के लिए वे सड़क से ही अपनी यात्रा कर रहे है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश के लिए दीर्घकालीन एवं तात्कालिक नीति तैयार की जाकर क्रियान्वयन किया जाये। अच्छे काम करने वालों को प्रोत्साहित किया जाये तथा खराब सड़क बनाने वालों को ब्लैक लिस्ट करें। सड़कों पर इतनी सुरक्षा होनी चाहिये कि एक भी व्यक्ति की जान नहीं जाये। जस्टिस श्री सप्रे ने अधिकारियों से कहा कि लोगों की जान बचाने की आपको जिम्मेदारी दी गयी है और इस कार्य पर सुप्रीम कोर्ट पूरे समय ध्यान दे रहा है। जस्टिस सप्रे ने कहा कि जैसे मध्यप्रदेश के इंदौर ने स्वच्छता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, वैसे ही प्रदेश के शहर सड़क सुरक्षा में अपना स्थान बनायेंगे। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की है कि प्रदेश के अधिकारी लोगों की जान बचाने के लिए अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करेंगे। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा कि भारत सरकार की ही तरह तात्कालिक एवं दीर्घकालीन उपाय प्रदेश के सभी 55 जिलों में लागू किये जायेंगे। प्रदेश के 9 जिलों में सड़क सुरक्षा के लिए आई.आई.टी. मद्रास की मदद ली जायेगी और बाद में 6 और जिलों में यह किया जायेगा। सड़क सुरक्षा के लिए सभी एजेंसियों में समन्वय स्थापित किया जायेगा। पुलिस, नगरीय प्रशासन, स्वास्थ्य एवं लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की टीम बनायी गयी है। इंजीनियरों को केपिसिटी बिल्डिंग के लिए प्रशिक्षण दिया जायेगा तथा सड़कों एवं ब्रिज की मरम्मत की जायेगी। मुख्य सचिव ने कहा कि हर जिले मे आटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन शुरू किया जायेगा। ड्राइविंग इंस्टीट्यूट की संख्या बढ़ायी जायेगी। यातायात नियमों का पालन कराया जायेगा। लोगों को हेलमेट लगाने के लिए प्रेरित किया जायेगा। सभी वाहनों का इंश्योरेंस किया जायेगा। चालान जनरेशन एवं पेमेण्ट सिस्टम दुरूस्त किया जायेगा। सड़क दुर्घटना में गोल्डन ऑवर में जान बचाने के प्रयास किये जायेंगे। एम्बुलेंस की व्यवस्थाएं सुधारी जायेंगी। इमरजेंसी रिस्पांस टाइम को बेहतर किया जायेगा। यातायात नियमों एवं सड़क सुरक्षा की जागरूकता के लिए स्कूलों में बताया जायेगा। जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठकें नियमित तौर पर आयोजित की जायेंगी। सड़क सुरक्षा कोष का उपयोग किया जायेगा। राहवीर योजना का भी व्यापक प्रचार-प्रसार करने की भी जानकारी दी गई। मुख्य सचिव श्री जैन ने जस्टिस श्री अभय मनोहर सप्रे को आश्वस्त किया कि मध्यप्रदेश के अधिकारी उनके निर्देश और मार्गदर्शन से बेहतर कार्य करेंगे। एक्शन प्लान से सड़क दुर्घटनाओं में तथा मृत्यु में कमी लाने के प्रयास सफल हो सकेंगे। नोडल अधिकारी एवं परिवहन आयुक्त श्री विवेक शर्मा ने राज्य के एक्शन प्लान का प्रस्तुतीकरण किया। बैठक में प्रमुख सचिव श्री संदीप यादव, परिवहन सचिव श्री मनीष सिंह, गृह सचिव श्रीमती कृष्णा वेणी-देशावतु, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय विकास, स्कूल शिक्षा, लोक निर्माण, मध्यप्रदेश सड़क निगम विकास निगम, एवं रेल्वे के अधिकारी उपस्थित रहे। समिति करेगी जिलों का भ्रमण सर्वोच्च न्यायालय सड़क सुरक्षा समिति भोपाल, नर्मदापुरम एवं नरसिंहपुर जिलों का भ्रमण कर जिला सड़क सुरक्षा समिति के साथ बैठक करेगी। इसके पूर्व समिति ने इंदौर जिले का भ्रमण कर बैठक की थी।  

महापौर की अध्यक्षता में मेयर इंन काउसिल की बैठक आयोजित

सिंगरौली   नगर पालिक निगम सिंगरौली की महापौर श्रीमती रानी अग्रवाल की अध्यक्षता एवं  मेयर इंन काउसिल के सदस्य खुर्शिद आलम, श्रीमती अंजना शाह, श्रीमती शिवकुमारी कुशवाहा, श्रीमती श्यामला, श्रीमती रीता देवी जापति, श्रीमती बबली शाह,, श्रीमती रूकमन प्रजापति,नगर निगम आयुक्त श्री डी.के शर्मा  के उपस्थिति में मेयर इंन काउसिल की बैठक आयोजित हुई। बैठक में सर्व प्रथम चर्चा उपरांत मेयर इंन काउसिल की पूर्व  बैठक के कार्यवाही विवरण का सर्वसम्मति  से पुष्टि की गई।  तत्पश्चात नगर निगम सिगरौली के वार्ड क्रमांक 32 में स्थित कादम्बरी काम्प्लेक्स के दुकानदारों द्वारा दुकानों के व्यवस्थापन किए जाने हेतु  प्राप्त आवेदन पत्र एवं पूर्व में जिन्हे दुकान आवटित की गई थी ऐसे आवंटियों के संबंध में विस्तार से चर्चा कर निर्णय लिया गया। मेयर इंन काउसिल की बैठक में म.प्र. अचल सम्पत्ति अन्तरण नियम 2016 में संशोधित नियम 2023 के तहत 5 वर्ष से  अधिक समय तक किराएदार के रूप में दुकानों में व्यवसायरत किराएदार को व्यवस्थापन  पद्यति से दुकानों का आंवटन किया जा सकता है। उपरोक्त सभी दुकानदार 5 वर्ष से अधिक समय से दुकानों में काबिज है। उपरोक्त सभी दुकानदार अप्रैल 2020 से दुकानों का किराया जमा करना बन्द कर दिया है। वर्ष 2025-26 के कलेक्टर गाइडलाईन अनुसार प्रति दुकान रूपये 5,90,58 लागत मूल्य निर्धारित हो रही है। अतः उपरोक्त वर्णित सभी किराएदारों से बकाया किराया मांह अप्रैल 2020 से वर्तमान तक का जमा कराते हुए म०प्र० अचल सम्पत्ति अन्तरण नियम 2023 के प्रावधान अनुसार व्यवस्थापन पद्यति से दुकानों के आवंटन के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान उपायुक्त आर पी बैस,  सहायक आयुक्त रूपाली द्विवेदी, सहाय आयुक्त  एच एम श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री प्रदीप चडार, लेखाधिकारी अनुपम दुबे,  सहायक यंत्री प्रवीण गोस्वामी, अभयराज सिंह, आलोक टीरु, एस एन द्विवेदी, सहायक विधि अधिकारी अक्षत उपाध्याय, आदि उपस्थित रहे।

दिल्लीवालों को बड़ी राहत: एक दशक बाद सबसे स्वच्छ हवा, देखें ताजा AQI रिपोर्ट

नई दिल्ली पिछले एक दशक में जुलाई का महीना दिल्ली के लिए सबसे स्वच्छ रहा, जहां औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 79 दर्ज किया गया, जो 2015 के बाद का सबसे कम आंकड़ा है. हाल ही में हुई रुक-रुक कर बारिश ने दिल्ली की वायु को साफ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे पूरे सप्ताह के दौरान वायु गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है. AQI में सुधार के पीछे बारिश का एक महत्वपूर्ण कारण है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में पिछले दस वर्षों में जुलाई का महीना सबसे अधिक स्वच्छ रहा. लगातार हो रही बारिश के कारण वायु गुणवत्ता में सुधार होता रहा, जिससे दिल्ली की हवा ने पिछले एक दशक के रिकॉर्ड को तोड़ दिया. बीते सालों में जुलाई के महीने में दिल्ली की हवा बीते वर्षों में जुलाई के दौरान दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) विभिन्न स्तरों पर रहा है. 2015 में यह 138.13, 2016 में 145.64, 2017 में 98.39, 2018 में 103.83, 2019 में 134, 2020 में 83.80, 2021 में 110.06, 2022 में 87.29, 2023 में 83.67, 2024 में 96 और 2025 में 79 दर्ज किया गया है. यह 2025 का AQI पिछले वर्षों की तुलना में सबसे कम है, जो वायु गुणवत्ता में सुधार का संकेत देता है. सामान्य से अधिक हुई बारिश जुलाई महीने में बारिश की मात्रा औसत से अधिक रही है, और शहर के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार वर्षा हो रही है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश की संभावना जताई है. इसके साथ ही, 31 जुलाई को बारिश के लिए यलो अलर्ट भी जारी किया गया है. AQI कितना बेहतर दिल्ली और एनसीआर में लगातार बारिश के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार हुआ है. जुलाई महीने में औसत AQI 79 दर्ज किया गया, जो 2015 के बाद से सबसे कम है. यह AQI संतोषजनक श्रेणी में आता है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, AQI को 0 से 50 के बीच अच्छा, 51 से 100 के बीच संतोषजनक, 101 से 200 के बीच मध्यम, 201 से 300 के बीच खराब, 301 से 400 के बीच बहुत खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर माना जाता है. वायु प्रदूषण विशेषज्ञ ने क्या कहा? विशेषज्ञ इस दावे को लेकर संदेह में हैं. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की वायु प्रदूषण विशेषज्ञ और कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी ने बताया कि वायु गुणवत्ता में सुधार मौसम की परिस्थितियों का परिणाम है. उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण प्रदूषक पानी में मिल जाते हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर घटता है. इस वर्ष लगातार हो रही तीव्र बारिश को इस स्थिति का मुख्य कारण माना गया है. रॉयचौधरी ने सरकार के योगदान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सीमित समय में सभी उत्सर्जन डेटा की तुलना करना संभव नहीं है. मानसून के मौसम में इस तरह के आकलन करना उचित नहीं होगा. सर्दियों के महीनों में प्रदूषण के स्तरों का विश्लेषण करना आवश्यक है, ताकि यह पता चल सके कि सरकार की पहल सही दिशा में प्रगति कर रही हैं या नहीं. सामान्य से अधिक हुई बारिश जुलाई में बारिश की मात्रा पहले के औसत से अधिक रही है. दिल्ली के सफदरजंग मौसम केंद्र ने बुधवार सुबह 8:30 बजे तक 220.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड की, जबकि इसका लंबा अवधि का औसत 209.7 मिमी है. इसी दिन शाम 5:30 बजे तक इस केंद्र ने 15 मिमी और बारिश दर्ज की. शहर के विभिन्न क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हुई. पालम मौसम केंद्र ने बुधवार सुबह 8:30 बजे तक पिछले 24 घंटों में 4.6 मिमी और सुबह 8:30 से शाम 5:30 बजे के बीच 28.3 मिमी बारिश रिकॉर्ड की. इसी समय में पूसा स्टेशन पर क्रमशः 37.5 मिमी और 12.5 मिमी बारिश हुई, जबकि जनकपुरी स्टेशन में देर दोपहर 11.5 मिमी बारिश हुई. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के एक अधिकारी के अनुसार, गुरुवार को भी हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी रहेगी, जबकि शुक्रवार से बहुत हल्की से हल्की बारिश, गरज और बिजली गिरने की घटनाएं देखी जा सकती हैं.

पति की संपत्ति पर तलाक के बाद नहीं रहेगा हक़: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का साफ़ आदेश

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विवाह विच्छेद (तलाक) के बाद पत्नी का पति की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं रह जाता। अदालत ने कहा कि तलाक की डिक्री मिलने के बाद पत्नी का वैवाहिक दर्जा खत्म हो जाता है और वह पति की संपत्ति पर उत्तराधिकार या स्वामित्व का दावा नहीं कर सकती। हाई कोर्ट ने रायगढ़ सिविल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी। जिंदल स्टील स्टाफ से प्रेम विवाह, 2010 से रहने लगे अलग रायगढ़ निवासी युवक, जो जिंदल स्टील में कार्यरत था। उसने 11 मई 2007 को जिंदल स्टील प्लांट के स्टाफ से प्रेम विवाह किया था। कुछ वर्षों बाद पत्नी के चरित्र पर सवाल उठाते हुए दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया और वे वर्ष 2010 से अलग-अलग रहने लगे। पति ने वर्ष 2013 में रायगढ़ के पारिवारिक न्यायालय में तलाक के लिए आवेदन दायर किया। फैमिली कोर्ट ने मार्च 2014 को पति के पक्ष में तलाक की डिक्री जारी कर दी। आदेश के अनुसार, पति-पत्नी का वैवाहिक संबंध 31 मार्च 2014 से समाप्त हो गया। संपत्ति पर अधिकार के लिए दाखिल किया सिविल वाद, सिविल कोर्ट ने किया खारिज तलाक के बावजूद पत्नी ने पति की संपत्ति पर अधिकार जताते हुए रायगढ़ सिविल कोर्ट में सिविल वाद दायर किया। लेकिन सिविल कोर्ट ने यह कहते हुए वाद खारिज कर दिया कि तलाक के आदेश के बाद पत्नी का पति की संपत्ति पर कोई वैध अधिकार नहीं बनता है। पति ने मकान खरीदा, पत्नी ने कर लिया कब्जा पति ने रायगढ़ में एक मकान खरीदा था, जिसे किराए पर दिया गया था। तलाक के बाद पत्नी अपने 8-10 साथियों के साथ जबरन उस मकान में घुस गई और अवैध रूप से कब्जा कर वहीं रहने लगी। इस घटना के बाद पति ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने पत्नी सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 452 व 448/34 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पत्नी का उत्तराधिकार हो जाता है समाप्त: हाई कोर्ट सिविल कोर्ट के आदेश के खिलाफ महिला ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अपील दायर की। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि विवाह विच्छेद की तारीख (31 मार्च 2014) से दोनों के वैवाहिक संबंध समाप्त हो चुके हैं। इसलिए पत्नी के पास पति की संपत्ति पर कोई भी वैधानिक अधिकार नहीं बचता। अदालत ने कहा कि तलाक की डिक्री के बाद पत्नी का दर्जा समाप्त हो जाता है, इसलिए उत्तराधिकार का अधिकार भी स्वतः समाप्त हो जाता है। अदालत ने सिविल कोर्ट रायगढ़ के आदेश की पुष्टि करते हुए पत्नी की अपील को खारिज कर दिया है।

अपने क्षेत्र में 51वीं बार पहुंचेंगे पीएम मोदी, वाराणसी को मिलेंगी बड़ी सौगातें

वाराणसी  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 अगस्त को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के 51वें दौरे पर आ रहे हैं. अपने इस एक दिवसीय दौरे में प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी में लगभग 2 घंटे बिताएंगे. इस दौरान वो जनसभा को भी संबोधित करेंगे. उनकी जनसभा सेवापुरी ब्लाक के कालिकाधाम (बलौनी) में होनी है. इसकी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं.  गौरतलब है कि जब कभी प्रधानमंत्री अपने संसदीय क्षेत्र में आते हैं, तो अक्सर कुछ बड़ा ऐलान करते हैं और परियोजनाओं की बड़ी सौगात भी देते हैं. इस बार भी वह 2183.45 करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 52 परियोजनाओं की सौगात काशीवासियों को देंगे.  इस दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी जाने वाली परियोजनाओं का लाभ न केवल वाराणसी, बल्कि पूर्वांचल की जनता को भी मिलेगा. इसके अलावा, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 20वीं किस्त के रूप में 9.7 करोड़ किसानों के लिए  20 हजार 500 करोड़ रुपये की किस्त भी जारी करेंगे.  प्रधानमंत्री मोदी 2 अगस्त को सुबह लगभग 10 बजकर 25 मिनट पर वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर वायुसेना के विशेष विमान से पहुंचेंगे, जहां से वे सीधे जनसभा स्थल हेलीकॉप्टर से पहुंच जाएंगे. वहीं, भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के अंतर्गत काम करने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम एलिम्को की ओर से प्रधानमंत्री चुनिंदा कुछ दिव्यांगजनों और वयोश्री योजना के तहत अपने हाथों से उपकरण बाटेंगे. इसके बाद 2025 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण भी बांटा जाएगा. इसमें वाराणसी के सेवापुरी, आराजीलाइन और बड़ागांव के लाभार्थी शामिल किए गए हैं. तैयारियों जोरों पर, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम जनसभा स्थल और तैयारियों की बात करें तो प्रशासनिक स्तर पर लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. मानसून के मौसम में खासकर बारिश के मद्देनजर सभी तैयारी है. जनसभा स्थल पर 50 हजार लोगों के आने की उम्मीद जताई जा रही है, लिहाजा जर्मन हैंगर के अलावा पूरे पंडाल को वाटरप्रूफ रखने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं, प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर एसपीजी भी पहुंचकर सुरक्षा जांच में जुट गई है. प्रधानमंत्री मोदी के आगमन के मद्देनजर न केवल प्रशासनिक स्तर पर, बल्कि भारतीय जनता पार्टी भी पूरे जोर-शोर से लग गई है, जिसके तहत पूरे वाराणसी में स्वच्छता अभियान भी चलाया जा रहा है. शहर के प्रमुख चौराहों, पार्कों, महापुरुषों की प्रतिमाओं एवं मठ-मंदिरों के आसपास स्वच्छता की जा रही है. इसमें मंत्री, जनप्रतिनिधि, भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं. प्रधानमंत्री की जनसभा की व्यवस्था में लगे कार्यकर्ताओं की बैठक भी संपन्न हुई है, जिसमें जनसभा स्थल को 20 ब्लॉकों में बांटा गया है और चाक-चौबंद व्यवस्था के लिए प्रत्येक ब्लॉक के इंचार्ज भी बनाए गए हैं. पीएम मोदी के हाथों लोकार्पित और शिलान्यास होने वाली प्रमुख परियोजनाएं : * 565.35 करोड़ की लोकार्पित होने वाली 14 परियोजनाएं- वाराणसी-भदोही फोरलेन मार्ग (269.10 करोड़), मोहनसराय अदलपुरा रोड पर आरओबी (42.22 करोड़), होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल में मशीनें व यूनिट (73.30 करोड़), जल जीवन मिशन की 47 परियोजनाएं (129.97 करोड़) आदि. * 1618.10 करोड़ की 38 परियोजनाओं का होगा शिलान्यास- होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल (85.72 करोड़), दालमंडी रोड का चौड़ीकरण (215.88 करोड़), बिजली के तारों का अंडर ग्राउंड कार्य (881.56 करोड़), अस्सी घाट पर मल्टीलेवल पार्किंग (9.84 करोड़) आदि.

ग्रीन इंदौर मिशन: 50 करोड़ की लागत से गार्डनों का सौंदर्यीकरण शुरू

इंदौर  इंदौर विकास प्राधिकरण ने शहर को हरा-भरा बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण दो दर्जन नए गार्डनों को विकसित करने जा रहा है, जिस पर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बीते साल भी हरियाली महोत्सव और एक पेड़ मां के नाम जैसे अभियानों के तहत ग्रीन बेल्ट और गार्डनों में हजारों पौधे लगाए गए थे, जो अब बड़े होकर हरे-भरे पेड़ों में तब्दील हो चुके हैं। स्कीम 78 में सिटी फारेस्ट बनाया आईडीए ने योजना क्रमांक 78 में मियावाकी पद्धति से गार्डन विकसित किया है। यह इसकी एक सफल मिसाल है। प्राधिकरण केवल पौधारोपण ही नहीं करता, बल्कि रख-रखाव के लिए भी ठेका देता है, जिससे पौधों का जीवित रहना सुनिश्चित होता है। रिंग रोड की हरियाली और सिटी फॉरेस्ट योजना को भी मिलेगा विस्तार प्राधिकरण के सीईओ आरपी अहिरवार के अनुसार, प्राधिकरण ने वर्षों पहले रिंग रोड पर जो चौड़े ग्रीन बेल्ट विकसित किए थे, वह आज भी हरे-भरे हैं, हालांकि मेट्रो प्रोजेक्ट और फ्लाईओवर निर्माण के कारण कुछ स्थानों पर ग्रीन बेल्ट हटाने की भी नौबत आई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद योजना क्रमांक 97 पार्ट-4 में 42 एकड़ भूमि पर सिटी फॉरेस्ट के लिए जमीन मिली है, जिसके लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। हाल ही में प्राधिकरण ने कुमेर्डी में आईएसबीटी के सामने 2100 पौधे लगाए हैं। पिछले वर्ष लगाए गए करीब ढाई लाख पौधे अब 10 से 15 फीट तक ऊंचे हो चुके हैं, जो इस योजना की सफलता दर्शाते हैं। नई टीपीएस योजनाओं में शामिल होंगे बड़े गार्डन क्षेत्र प्राधिकरण के सीईओ आरपी अहिरवार के अनुसार, इस वर्ष भी मां की बगिया और एक पौधा मां के नाम जैसे अभियानों के तहत मानसून सीजन में हजारों पौधे लगाए जा रहे हैं। साथ ही, जो नई टीपीएस योजनाएं घोषित की गई हैं, उनमें बड़ी संख्या में गार्डनों के लिए जमीन आरक्षित की गई है। इन दो दर्जन नए गार्डनों में ही ढाई लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। मियावाकी पद्धति के अतिरिक्त अन्य पौधारोपण कार्यों के लिए भी टेंडर बुलाए जा चुके हैं और विभिन्न ठेकेदार फर्मों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। ठेकेदार फर्में करेंगी रखरखाव, प्राधिकरण करेगा सख्त मॉनिटरिंग पौधारोपण की सफलता का राज यह है कि प्राधिकरण पौधों के रख-रखाव की जिम्मेदारी भी ठेकेदारों को सौंपता है। पौधे सूखने की स्थिति में फर्म को नए पौधे लगाने होते हैं। इसके अलावा पौधारोपण से पहले गार्डनों और ग्रीन बेल्ट में बाउंड्री, फेंसिंग, बोरिंग और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। प्राधिकरण की टीम लगातार इसकी निगरानी करती है। हाल ही में पर्यावरण दिवस पर सिंदूर गार्डन में 1100 पौधे लगाए गए थे। अब बारिश के मौसम में प्राधिकरण पूरे शहर में बड़े पैमाने पर पौधारोपण करने जा रहा है। 

सफाई में नंबर 1 इंदौर की नई पहल: ऑन डिमांड कचरा उठाने के लिए लॉन्च होगा मोबाइल ऐप

इंदौर सफाई के मामले में इंदौर एक बार फिर नंबर बन रहा है। वहीं अब इंदौर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के बाद एक और सुविधा मिलने जा रही है। इस सुविधा के तहत लोग अपने मोबाइल में एक एप्लीकेशन के जरिए कचरा गाड़ी बुलवाकर कचरा दे सकेंगे। यह सुविधा घर और संस्थानों सभी के लिए उपलब्ध रहेगी। दरअसल, इस खास ऐप के जरिए लोगों को साफ-सफाई का ऑप्शन दिया जाएगा। इंदौर में शुरू होने वाले इस खास ऐप को 5 अगस्त को लॉन्च किया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक जो ऐप लॉन्च किया जाएगा, वह एंड्रॉयड और आईओएस दोनों ही एप्लीकेशन पर काम करेगा। इस ऐप का मकसद सफाई के मामले में इंदौर को और आगे ले जाना है। अब इंदौर में डोर टू डोर ही नहीं ऑन डिमांड भी कचरा किया जाएगा कलेक्ट, फूड डिलीवरी की तरह ही होगा काम कैसे काम करेगा यह ऐप? दरअसल, लॉन्च किया जाने वाला यह ऐप एकदम फूड डिलीवरी ऐप की तरह ही काम करेगा। जिस प्रकार से हम किसी फूड डिलीवरी ऐप पर जाकर फूड आइटम सेलेक्ट करते हैं और अपना एड्रेस डालकर ऑर्डर करते हैं, वैसे ही इस ऐप में भी सफाई के कुछ ऑप्शंस को सेलेक्ट करना होगा और अपने घर व संस्थान का एड्रेस देना होगा। इसके बाद गाड़ियां घर आएंगी और आपका कचरा कलेक्ट करेंगी। दरअसल, यह कचरा रोज़ाना के अलावा इकट्ठा होने वाला एक्स्ट्रा कचरा होगा। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं किया गया है कि इसका चार्ज कितना होगा, लेकिन जल्द ही यह तय किया जा सकता है। यह चार्ज नगर निगम द्वारा लिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि 5 अगस्त को इस ऐप को लॉन्च किया जा सकता है। ये एप्लिकेशन एंड्राइड और आईओएस दोनों के लिए रहेगी। फूड डिलीवरी ऐप की तरह करेगी काम जिस प्रकार आप फूड डिलीवरी ऐप का इस्तेमाल करते हैं। वैसे ही ये ऐप भी काम करेगी। फूड डिलीवरी ऐप पर जिस प्रकार फूड को सिलेक्ट करते हैं उसके बाद ऑर्डर देते हैं। ऑर्डर होने के बाद फूड आपके घर या संस्थान तक पहुंचाया जाता है। उसी प्रकार इस ऐप के माध्यम से आप अपने घर या संस्थान से निकलने वाले कचरे (रोजाना के अलावा) कलेक्शन के लिए गाड़ियां बुला सकते हैं। बड़े संस्थान और बड़े इवेंट के लिए साफ-सफाई का भी ऑप्शन मिलेगा। हालांकि, इसके लिए नगर निगम द्वारा चार्ज लिया जाएगा, लेकिन कितना चार्ज लिया जाएगा ये फिलहाल तय नहीं हुआ हैं। ऐप को दिया ‘क्विक साफ' नाम स्वच्छ भारत मिशन द्वारा तैयार की गई इस ऐप को 'क्विक साफ' (Quick Saaf) नाम दिया है। इंदौर में लोगों के घरों में डोर-टू-डोर कचरा गाड़ी रोजाना आती हैं, जिसमें लोग गिला और सूखा कचरा अलग-अलग डालते हैं। 5 अगस्त को लॉन्च की जा सकती है ऐप 5 अगस्त को नगर निगम परिषद के कार्यकाल के तीन साल पूरे हो रहे हैं। महापौर भार्गव ने बताया कि 5 अगस्त को कार्यकाल पूरे हो रहे हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव से इस विषय में चर्चा की जाएगी। अगर अनुमति मिलती है तो इस ऐप को 5 अगस्त को ही लॉन्च कर दिया जाएगा। इस ऐप की फिलहाल दरें तय नहीं हुई है। दरें एमआईसी में अप्रूवल के लिए आई है। जल्द ही दरें भी अप्रूव हो जाएगी। मगर इस ऐप का इस्तेमाल से लोग अपने घरों और संस्थानों में निकलने वाले एक्स्ट्रा कचरे को देने के लिए गाड़ी बुक कर सकते हैं। बुकिंग पर गाड़ी आपके घर आएगी और घर या संस्थान से कचरा कलेक्ट कर ले जाएगी। बड़े इवेंट या बड़े संस्थानों में साफ-सफाई के लिए भी आप इस माध्यम से टीम को बुला सकते हैं। नवाचार और इनोवेशन से इंदौर नंबर वन महापौर पुष्यमित्र भार्गव से दैनिक भास्कर ने इसे लेकर खास चर्चा की। उन्होंने बताया कि इंदौर नगर निगम अपने नवाचार और इनोवेशन के कारण लगातार देश में नंबर वन हैं। गीले कचरे से बायो सीएनजी बन रही है, सूखे को रिसाइकिलिंग कर रहे हैं, हरे कचरे से प्लेट्स बनाने का काम इंदौर नगर निगम में शुरू हो गया है, लेकिन इस कचरा प्रबंधन को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने लिए अब इंदौर नगर निगम ऑन डिमांड कचरा कलेक्शन भी शुरू करने जा रहा है। क्विक साफ (Quick Saaf) नाम से ऐप हमारा बनकर तैयार हो गया है, जिसकी शुरुआत जल्द होने वाली है। फूड डिलीवरी ऐप पर जैसे खाने की डिलीवरी होती है। उसी तरह डोर-टू-डोर कचरा गाड़ी के अलावा जो कचरा है वह यदि कोई देना चाहता है तो ऐप के माध्यम से घर बुलाकर दे सकता है। वैसे ही किसी बडे़ आयोजन की साफ-सफाई करना है तो ऐप के माध्यम से रिक्वेस्ट भेज सकता है। टीम वहां जाकर साफ-सफाई भी कर देगी। कई नवाचार लाइन में हैं। रोड स्वीपिंग के हो, मिक्स्ड वेस्ट के या प्लास्टिक से फ्यूल बनाना हो। इन्हें हम तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। क्या है इस ऐप का नाम? बता दें कि इंदौर में डोर टू डोर कलेक्शन किया जाता है, यानी गाड़ियां लोगों के घर जाती हैं और वहां से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग इकट्ठा करती हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि जब महीने या हफ्ते में घर की सफाई की जाती है तो एक्स्ट्रा कचरा निकलता है। ऐसे में इस कचरे को डालना भी बड़ी समस्या बन सकता है। लेकिन इंदौर नगर निगम सफाई के मामले में बेहद ही सक्रिय है। अब एक्स्ट्रा कचरे के लिए लोग गाड़ी बुक कर सकेंगे। बुकिंग करने पर यह गाड़ी आपके घर आएगी और घर से यह कचरा कलेक्ट कर लेगी। यह बड़े इवेंट और संस्थाओं के लिए भी सफाई का अच्छा माध्यम बनेगी। बता दें कि इंदौर में शुरू होने वाले ऐप को क्विक साफ नाम से तैयार किया गया है।