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रजिस्ट्री कराने वालों को लगेगा झटका, पंजाब में देना होगा 10,000 रुपए

जालंधर  पंजाब सरकार ने जनता की सहूलियत और तहसीलों में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म करने की कवायद के तहत पूरे राज्य में इजी रजिस्ट्रेशन पॉलिसी लागू की थी। शुरूआत में इसे पारदर्शी और सरल व्यवस्था बता कर पेश किया गया था ताकि संपत्ति रजिस्ट्रेशन में आम नागरिकों को राहत मिल सके। लेकिन समय के साथ पॉलिसी में लगातार हो रहे बदलावों ने आमजन के साथ-साथ डीड राइटरों को भी परेशान कर दिया है। सरकार ने अब नया आदेश जारी करते हुए कहा है कि यदि कोई व्यक्ति आपात स्थिति में अपनी प्री-स्क्रूटनी तुरंत करवाना चाहता है तो उसे 10,000 रुपए का तत्काल शुल्क देना होगा। यह ‘शार्टकट’ के रास्ते वाला शुल्क पंजाब के सभी सब-रजिस्ट्रार और तहसीलदार कार्यालयों में एक समान रहेगा। यानी यदि किसी को अचानक लेन-देन करना है या किसी पारिवारिक/कानूनी आपात स्थिति में रजिस्ट्री तुरंत पूरी करनी है तो अब उसके पास 10 हजार रुपए देने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा। जनता का सवाल: सहूलियत या मजबूरी का फायदा? सरकार के इस नए फरमान ने आम लोगों में असंतोष की लहर पैदा कर दी है। लोग खुले तौर पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह कदम सहूलियत देने के लिए उठाया गया है या फिर जनता की मजबूरी का फायदा उठाने का तरीका है? प्रॉपर्टी कारोबारी जसविंदर सिंह का कहना है कि "सरकार ने भ्रष्टाचार खत्म करने और लोगों को राहत देने के नाम पर इजी रजिस्ट्रेशन पॉलिसी लागू की थी। लेकिन अब 10 हज़ार रुपए का आपात शुल्क लगाकर उन्हीं लोगों की जेब पर बोझ डाला जा रहा है। यह सहूलियत नहीं, मजबूरी का फायदा उठाना है।" जिला कांग्रेस के उपप्रधान दीपक मोदी ने कहा कि "हर किसी के पास इतनी बड़ी रकम तुरंत देने की क्षमता नहीं होती। सरकार को गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों के लिए राहत का रास्ता निकालना चाहिए, न कि उन्हें और मुश्किलों में धकेलना चाहिए।"   पंजाब सरकार ने नया आदेश जारी करते हुए सभी सब-रजिस्ट्रार और तहसीलदार कार्यालयों में नोटिस बोर्ड लगाने को कहा है, जिन पर रजिस्ट्री संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाएगी। इन नोटिस बोर्डों पर अब नागरिक उप-पंजीयक कार्यालय में स्थापित सुविधा केंद्र से मात्र 550 रुपए शुल्क देकर अपनी रजिस्ट्री लिखवा सकते हैं। इसके लिए सरकार द्वारा नियुक्त वकील और सेवानिवृत्त पटवारी/कानूनगो दस्तावेज़ तैयार करेंगे। दस्तावेज़ लिखने के बाद उन्हें पूर्व-जांच (प्री-स्क्रूटनी) के लिए उप-पंजीयक के पास भेजा जाएगा। इस चरण में किसी स्टाम्प पेपर या सरकारी शुल्क की आवश्यकता नहीं होगी और पक्षकारों को तहसील भी नहीं आना पड़ेगा। पूर्व-जांच एफ.आई.एफ.ओ. (फीफो) सिद्धांत के आधार पर की जाएगी। सही पाए गए मामलों की सूचना संबंधित पक्षकारों को शाम 7 बजे व्हाट्सएप पर भेज दी जाएगी। इसके बाद नागरिक ऑनलाइन शुल्क जमा कर रजिस्ट्री के लिए अप्वाइंटमैंट ले सकते हैं। रजिस्ट्री के दिन सभी पक्षकारों को पहचान पत्र और दस्तावेजों के साथ समय पर उप-पंजीयक कार्यालय पहुंचना अनिवार्य लिखा होगा। पॉलिसी का उद्देश्य और हकीकत इजी रजिस्ट्रेशन पॉलिसी का उद्देश्य तहसीलों और सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका को खत्म करना था। वर्षों से यह शिकायतें मिलती रही थीं कि लोग अपने दस्तावेज़ समय पर तैयार कराने के लिए मजबूरी में अतिरिक्त पैसे खर्च करते हैं। हालांकि सरकार ने तकनीकी व्यवस्था और ऑनलाइन सिस्टम लागू कर इस प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की कोशिश की, लेकिन बार-बार होने वाले बदलावों से लोग और अधिक परेशान होते जा रहे हैं। इजी रजिस्ट्रेशन ने उल्टा बढ़ाई उलझनें : एडवोकेट अनूप गौतम वहीं इजी रजिस्ट्रेशन पॉलिसी को लेकर सीनियर एडवोकेट अनूप गौतम ने सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि इस पॉलिसी का उद्देश्य भ्रष्टाचार खत्म करना और जनता को सहूलियत देना था, लेकिन लगातार बदलावों ने प्रक्रिया को आसान बनाने के बजाय और अधिक उलझा दिया है। एडवोकेट गौतम ने कहा कि सरकार को चाहिए कि पॉलिसी में स्थिरता लाई जाए और जनता को राहत देने वाले प्रावधान शामिल किए जाएं। आपात स्थिति में 10,000 रुपए का शुल्क लगाना मजबूर लोगों के साथ अन्याय है और यह उनकी मजबूरी का फायदा उठाने जैसा है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिस तरह नागरिक सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में बने सुविधा केंद्र से केवल 550 रुपए शुल्क देकर रजिस्ट्री लिखवा सकते हैं, उसी तर्ज पर आपात प्री-स्क्रूटनी के लिए भी शुल्क 1000 से 2000 रुपए के बीच रखा जाना चाहिए, ताकि जनता को सरकार के “रैवेन्यू चाबुक” से राहत मिल सके।

राशन वितरण में पारदर्शिता: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, अब नहीं होगी हेराफेरी

चंडीगढ़ हरियाणा में सस्ते अनाज की सभी सरकारी दुकानों पर आॅनलाइन सीसीटीवी कैमरे लगाएं जाएंगे। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने यह फैसला राशन वितरण प्रणाली में गड़बड़ी रोकने को लेकर उठाया है। ताकि डिपो संचालक राशन वितरण के दौरान कोई गड़बड़ी न कर सके। विभाग का सीसीटीवी कैमरे लगाने का मकसद डिपो पर होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखना है।प्रदेश में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत लगभग 30 लाख परिवार पीडीएस योजना का फायदा उठा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में उचित मूल्य की लगभग 9400 दुकानें हैं, जिन पर स्वचालित पीओएस मशीनों द्वारा लोगों को राशन दिया जा रहा है। इसके साथ ही विभाग को डिपो पर रखे स्टॉक और राशन वितरण की पूरी जानकारी ऑनलाइन मिलेगी। कैमरे की निगरानी में डिपो होल्डर उपभोक्ताओं के साथ किसी तरह की गड़बड़ी नहीं कर पाएंगे। इससे राशन डिपो पर गड़बड़ी की शिकायतों पर लगाम लगेगा और उपभोक्ताओं को सही मात्रा में राशन मिलेगा।   करनाल के जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी अनिल कुमार ने जानकारी दी कि विभाग के मंत्री राजेश नागर के दिशा निर्देशों के अनुसार यह योजना बनाई गई है। कैमरों की फुटेज विभाग के सर्वर में स्टोर होगी। उन्होंने बताया कि इससे उपभोक्ताओं द्वारा डिपो होल्डर के खिलाफ अक्सर दी जाने वाली शिकायतें काफी हद तक खत्म हो जाएगी। सीसीटीवी कैमरों की मदद से विभाग को डिपो पर स्टॉक की स्थिति की वास्तविक जानकारी मिलेगी। इससे न केवल राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित होगा कि किसी भी परिवार को राशन वितरण में कमियां न हों। इस योजना से सार्वजनिक वितरण प्रणाली अधिक भरोसेमंद और गड़बड़ी मुक्त बनेगी।

अम्बिकापुर : गणेश चतुर्थी एवं ईद मिलाद-उन-नबी त्योहार शांतिपूर्ण मनाने एवं सुव्यवस्था सुनिश्चित करने कलेक्टर ने जारी किए दिशा निर्देश

अम्बिकापुर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सरगुजा ने आगामी त्यौहारों के मद्देनजर शांति एवं सुव्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गणेश चतुर्थी से लेकर गणेश विसर्जन तक होने वाले धार्मिक आयोजन तथा दिनांक 5 सितम्बर 2025 को मुस्लिम समुदाय द्वारा मनाए जाने वाले ईद मिलाद-उन-नबी पर्व के दौरान जिले में भीड़-भाड़ की संभावना को देखते हुए यह आदेश लागू किए गए हैं। पंडाल व्यवस्था पर कड़े नियम सड़कों पर पंडाल लगाकर मार्ग अवरुद्ध नहीं किए जाएंगे। विशेष रूप से विद्यालयों, अस्पतालों और आपात सेवा मार्गों पर ध्यान रखा जाएगा। आयोजन समितियों को यातायात, पुलिस एवं नगर निगम से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा। पंडाल में सीसीटीवी कैमरे, वालंटियर्स की व्यवस्था और डस्टबिन रखना आवश्यक होगा। भंडारा के दौरान प्लास्टिक सामग्री का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। मूर्ति स्थापना एवं पर्यावरण संरक्षण केवल मिट्टी से निर्मित मूर्तियों की स्थापना की अनुमति दी गई है। केमिकल युक्त रंग और प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों पर रोक लगाई गई है। मुख्य पंडाल के बाहर मूर्ति रखने की अनुमति नहीं होगी। ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक ही अनुमति होगी। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। ध्वनि स्तर 45 से 70 डीबी की सीमा में रखना होगा तथा साउंड लिमिटर का उपयोग अनिवार्य है। अश्लील या धार्मिक उन्माद फैलाने वाले गीतों पर प्रतिबंध रहेगा। मूर्ति विसर्जन के दिशा-निर्देश विसर्जन केवल निर्धारित तिथि, स्थल और मार्ग के अनुसार किया जाएगा। विसर्जन के दौरान सड़कों पर मंच बनाने की अनुमति नहीं होगी। घाटों की सफाई, प्रकाश व्यवस्था, गोताखोर, जेसीबी और क्रेन की व्यवस्था निगम द्वारा की जाएगी। शांति व्यवस्था की जिम्मेदारी जिले के सभी अनुविभागीय दण्डाधिकारी अपने क्षेत्र में शांति समिति की बैठक आयोजित कर इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करेंगे। पुलिस विभाग को पर्याप्त बल तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने नागरिकों से अपील की है कि त्योहारों को सौहार्द्र और शांतिपूर्ण तरीके से मनाएं और प्रशासन को सहयोग दें।

रायपुर: CM विष्णु देव साय ने ओसाका की SAS सानवा कंपनी को छत्तीसगढ़ में निवेश का आमंत्रण दिया

रायपुर : CM साय ने ओसाका की एसएएस सानवा कंपनी लिमिटेड को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए किया आमंत्रित राज्य में अत्याधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सुविधा  होगी स्थापित: कृषि मूल्य शृंखला और रोजगार को मिलेगा नया आयाम रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने ओसाका की एसएएस सानवा कंपनी लिमिटेड को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित कियामुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने ओसाका की एसएएस सानवा कंपनी लिमिटेड को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित कियामुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने ओसाका की एसएएस सानवा कंपनी लिमिटेड को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित किया मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने जापान प्रवास के दौरान ओसाका स्थित एसएएस सानवा कंपनी लिमिटेड को राज्य में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कंपनी को छत्तीसगढ़ में अत्याधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई तथा उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव दिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ये परियोजनाएँ न केवल कृषि मूल्य शृंखलाओं को मज़बूत करेंगी बल्कि उच्च-तकनीकी विनिर्माण को भी प्रोत्साहित करेंगी और राज्य के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर नए रोजगार अवसर सृजित करेंगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण, सुगम प्रक्रिया और प्रत्येक स्तर पर सहयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आशा व्यक्त की कि एसएएस सानवा कंपनी लिमिटेड की प्रस्तावित खाद्य प्रसंस्करण इकाई से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और कृषि आधारित उद्योगों को नई मजबूती प्राप्त होगी। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सुविधा राज्य को उच्च-तकनीकी उत्पादन का नया केंद्र बनाएगी और युवाओं को आधुनिक उद्योगों से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विश्वास जताया कि ये निवेश परियोजनाएँ आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उद्योग और निवेश का प्रमुख केंद्र बनाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता जनता की समृद्धि, युवाओं का भविष्य और निवेशकों का विश्वास है, और इसी संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

‘मजार को छूकर देख लो…’ धमकी भरा संदेश, CM योगी और विधायक शलभ मणि पर खतरा

देवरिया  उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से एक गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। देवरिया सदर से विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी दी गई है। यह धमकी 'एमडी सेराज' नाम की ईमेल आईडी से भेजी गई है। पुलिस को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, जांच शुरू कर दी गई है और मामला साइबर सेल को सौंप दिया गया है। धमकी क्यों मिली? मामला देवरिया के गोरखपुर रोड पर बने एक मजार (दरगाह) से जुड़ा है। विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने पहले शिकायत की थी कि यह मजार रेलवे के ओवरब्रिज के पास बनी है और हर साल इसका दायरा अवैध रूप से बढ़ता जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि बंजर जमीन और नेशनल हाइवे पर यह मजार कैसे बनी? इसका नक्शा किसने पास किया? क्या रेलवे ब्रिज के नीचे निर्माण की इजाजत दी जा सकती है? इसी मुद्दे को लेकर विधायक जून 2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिले थे और उन्होंने खुद मजार के विस्तार पर आपत्ति जताई थी। क्या लिखा था धमकी में? 'मजार को छूकर देख लो', 'सदर विधायक को गोली मार देंगे', मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हाल भी बुरा कर देंगे'। यह धमकी सोशल मीडिया और एक वेबसाइट के कमेंट बॉक्स में पोस्ट की गई थी, जिसके बाद मामला तेजी से वायरल हो गया। पुलिस और साइबर सेल की जांच शुरू देवरिया के एसपी विक्रांत वीर ने बताया कि सोशल मीडिया पर जैसे ही यह धमकी वायरल हुई, पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की। कमेंट बॉक्स की जांच हो रही है, IP ऐड्रेस और ईमेल आईडी की ट्रेसिंग के लिए मामला साइबर सेल को सौंप दिया गया है।

हनीट्रैप में फंसा इंदौर का क्लब मालिक, 23 लाख ऐंठे गए और मिली रेप की धमकी

इंदौर इंदौर शहर के एक क्लब कारोबारी की मौत से सनसनी फैल गई है। पता चला है कि शोशा क्लब के मालिक भूपेंद्र रघुवंशी को एक शादीशुदा औरत की हरकतों और ब्लैकमेलिंग ने मौत के मुंह में धकेल दिया। मौत से पहले लिखे गए सुसाइड नोट में उन्होंने उसी महिला को जिम्मेदार ठहराते हुए आत्महत्या करने की बात लिखी है। महिला ने उन्हें रेप केस में फंसाकर बदनाम कर धमकियां दे रही थी। ब्लैकमेलर महीने भर पहले भी भूपेंद्र को ब्लैकमेल कर 23 लाख वसूल चुकी है। लड़की की धमकी और सुसाइड अन्नपूर्णा थाना टीआई अजय नायर के मुताबिक, मृतक भूपेंद्र पिता लक्ष्मी नारायण (निवासी भवानीपुर) ने देर रात जहर खा लिया, जिसके बाद सुबह हालत बिगड़ने पर निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने पुलिस को बताया कि विजयनगर इलाके में भूपेंद्र का शोशा क्लब चलता है। पिछले कई दिनों से इति तिवारी नाम की महिला उन्हें लगातार ब्लैकमेल कर रही थी। कभी रेप केस की धमकी, तो कभी बदनाम करने की धमकी देकर वह उनसे लाखों रुपए वसूल चुकी थी। मुंबई शिफ्ट होकर भी जारी रखा खेल परिजनों ने खुलासा किया कि इति तिवारी पहले इंदौर में रहती थी और महालक्ष्मी नगर स्थित अपनी बहन शिवांगी और जीजा के घर आना-जाना करती थी। बाद में नौकरी लगने के बाद वह मुंबई शिफ्ट हो गई, लेकिन वहां से भी उसने ब्लैकमेलिंग का खेल बंद नहीं किया। बताया गया कि इति तिवारी पहले भी भूपेंद्र रघुवंशी को रेप केस में फंसाने के नाम पर 23 लाख रुपए ऐंठ चुकी है। इतना ही नहीं, वह फ्लैट और कार की डिमांड भी कर रही थी। शराब पीकर गंदी गालियां देना और फोन पर धमकाना उसकी आदत बन चुकी थी। इंदौर में रहने पर वहां भूपेंद्र को मानसिक प्रताड़ना देती थी। फिलहाल मर्ग कायम कर जांच शुरू की गई है।

पूर्व मंत्री पर कार्रवाई की संभावना, पंजाब में जारी नोटिस

चंडीगढ़ पंजाब की सियासत में एक बार फिर हलचल देखने को मिली है। दरअसल, राज्य सरकार ने पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की याचिका पर आशू को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस कदम से एक बार फिर आशू के खिलाफ चर्चाएं तेज हो गई हैं क्योंकि हाईकोर्ट ने पिछले साल दिसंबर में उनके खिलाफ दर्ज की गई एफ.आई.आर. को रद्द कर दिया था। इस एफ.आई.आर. में 2 जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक अधिकारी और एक ठेकेदार भी सह-आरोपी बनाए गए थे। सरकार का दावा है कि 2020-21 की पंजाब फूडग्रेन लेबर एंड कार्टेज पॉलिसी में मनमाने तरीके से संशोधन कर पसंदीदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया और रिश्वत लेकर टेंडर बांटे गए। वहीं, हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि नीति संशोधन को पहले ही डिवीजन बेंच द्वारा सही माना जा चुका है और ठेकों को कैबिनेट और वित्त विभाग की मंज़ूरी भी प्राप्त थी। इसलिए केवल मंत्री को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले के नए पहलू सामने आने की उम्मीद है, जो न सिर्फ़ आशू की राजनीतिक साख बल्कि सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी दावेदारी के लिए भी बड़ी कसौटी साबित हो सकता है।  

धार्मिक मंच पर विवाद: अविमुक्तेश्वरानंद ने रामभद्राचार्य को सुनाई खरी-खोटी

लखनऊ  तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा स्वामी प्रेमानंद को लेकर दिए गए बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नाराजगी जताई है। उन्होंने एक मंच से नाम लिए बिना रामभद्राचार्य पर कटाक्ष किया है। साथ ही संत प्रेमानंद का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आपको दिखाई नहीं देता तो क्या सुनाई भी नहीं दे रहा है। प्रेमानंद दिनभर संस्कृत ही बोलते रहते हैं। ज्योर्तिमठ नाम के इंस्टाग्राम आईडी ने जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का वीडियो शेयर किया। जिसमें वह कह रहे हैं, “वो एक पीले कपड़े वाले महात्माजी है वृंदावन में प्रेमानंद जी, कह रहे हैं कि उनको एक अक्षर संस्कृत नहीं आती। उनको संस्कृत आने की जरूरत क्या है? वो तो भगवान के नाम का प्रचार कर रहे हैं और भगवान का नाम संस्कृत में ही हैं। भगवान का नाम किस भाषा में है बताएं आप?” अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा, “जो दिन भर राधे-राधे, कृष्ण-कृष्ण, हे गोविंद, हे गोपाल बोल रहे हैं और लोगों को प्रेरित कर रहे हैं कि नाम का स्मरण करो, हमें बताएं कि भगवान का नाम ये किस भाषा के शब्द हैं? क्या ये संस्कृत भाषा के शब्द नहीं है. क्या ये संबोधन की विभक्ति संस्कृत भाषा की नहीं है। वो तो दिन भर संस्कृत बोल रहा है, जो भगवान के नाम का उच्चारण कर रहा है। आपको नहीं दिखाई नहीं देता, लगता है आपको सुनाई भी नहीं देता।” प्रेमानंद से ईर्ष्या नहीं लेकिन चमत्कार को नहीं मानते; उत्तराधिकारी ने दी सफाई उधर, संत प्रेमानन्द महाराज को चुनौती देने वाले पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बयान के बाद बखेड़ा खड़ा होता देख जगदगुरु के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्रदास ने उनके हवाले से सोमवार को बयान में सफाई दी। जगद्गुरु ने कहा कि प्रेमानंदजी से कोई ईर्ष्या नहीं, लेकिन चमत्कार को नहीं मानता। प्रेमानंद महाराज के बिना किडनी जीवन जीने को चमत्कार मानने के सवाल पर जगद्गुरु ने कहा था कि यह कोई चमत्कार नहीं है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल बोले – साहित्यकार ही संस्कृति और परंपरा के असली संरक्षक

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विंध्य क्षेत्र के साहित्यकारों का किया सम्मान भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि साहित्य समाज का आईना होता है। साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से संस्कृति, परंपरा, संवेदना और विचारों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाते हैं। विंध्य की यह गौरवशाली परंपरा है कि यहां के साहित्यकारों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त करना न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि विंध्य की साहित्यिक धरती की सामूहिक उपलब्धि है। यह गौरव पूरे प्रदेश का है और साहित्यकारों के इस योगदान को सदैव याद रखा जाएगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विंध्य क्षेत्र के वरिष्ठ साहित्यकारों को मंत्रालय भोपाल में सम्मानित किया। उन्होंने डॉ. चंद्रिका प्रसाद चंद्र, डॉ. ओमप्रकाश मिश्र ‘व्यथित’ एवं डॉ. विवेक द्विवेदी का शॉल और श्रीफल प्रदान कर अभिनंदन किया। उल्लेखनीय है कि विंध्य क्षेत्र के 6 साहित्यकार/लेखकों को प्रतिष्ठित मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पहला अवसर है जब विंध्य क्षेत्र के 6 लेखकों को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इनमें से 4 लेखक रीवा के निवासी हैं। डॉ. चंद्रिका प्रसाद चंद्र को ‘रिश्तन केर निबाह’ बघेली कहानी संकलन के लिए विश्वनाथ सिंह जूदेव साहित्य एकेडमी पुरस्कार वर्ष-2023 से सम्मानित किया गया है। डॉ. चंद्र ने 8 निबंध संग्रह, 1 कविता संग्रह और 2 बघेली कहानी संकलन की रचना की है। डॉ. ओमप्रकाश मिश्र ‘व्यथित’ को ‘मेरा परिचय-मेरी कविता’ गीत संग्रह के लिए वर्ष-2023 का वीरेन्द्र कुमार मिश्र साहित्य एकेडमी पुरस्कार प्राप्त हुआ है। डॉ. विवेक द्विवेदी को ‘सुनो कावेरी’ कहानी संकलन पर सुभद्रा कुमारी चौहान साहित्य एकेडमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। डॉ. द्विवेदी ने 9 उपन्यास और 10 कहानी संग्रह लिखे हैं। इसके अतिरिक्त डॉ. प्रमोद जैन को लघु कथा संग्रह ‘सेल्फी’ पर जैनेन्द्र कुमार पुरस्कार और मैहर निवासी सीताशरण गुप्त को बघेली कविता संग्रह ‘जगन्नाथ केर प्रसाद’ के लिए वर्ष-2022 का विश्वनाथ सिंह जूदेव साहित्य एकेडमी पुरस्कार प्राप्त हुआ है। बाल साहित्य पर पाणि पंकज पांडे को वर्ष-2022 का हरिकृष्ण देवसरे मध्यप्रदेश साहित्य एकेडमी पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले- ओसाका एक्सपो में छत्तीसगढ़ सप्ताह से विज़न 2047 को मिलेगा वैश्विक आयाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी जापान यात्रा से और मजबूत होंगे भारत-जापान संबंध: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले- ओसाका एक्सपो में छत्तीसगढ़ सप्ताह से विज़न 2047 को मिलेगा वैश्विक आयाम ओसाका एक्सपो में छत्तीसगढ़ सप्ताह से विज़न 2047 को मिलेगा वैश्विक आयाम: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने जापान प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की आगामी यात्रा और ओसाका में आयोजित वर्ल्ड एक्सपो 2025 में छत्तीसगढ़ की सहभागिता पर कहा कि “हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी बहुत जल्द जापान आ रहे हैं। भारत और जापान की मित्रता ऐतिहासिक और गहरी है। उनके इस दौरे से यह संबंध और भी मजबूत होंगे और हमारे देश को अनेक लाभ प्राप्त होंगे।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी की यात्रा भारत और जापान के बीच तकनीकी, औद्योगिक और सांस्कृतिक सहयोग को और प्रगाढ़ बनाएगी। इससे दोनों देशों की जनता को लाभ होगा और साझा समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा। ओसाका में वर्ल्ड एक्सपो 2025 के संदर्भ में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “कल हमने छत्तीसगढ़ को समर्पित सप्ताह का शुभारंभ किया है। यह वर्ल्ड एक्सपो भारत की संस्कृति को विश्व के सामने प्रस्तुत करने का एक बड़ा प्रयास है। छत्तीसगढ़ का सप्ताह न केवल प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए लाभकारी रहेगा।” उन्होंने कहा कि इस आयोजन से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर और औद्योगिक प्रगति को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी। इससे निवेश और सहयोग के अवसर भी बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि जापान यात्रा और ओसाका एक्सपो में छत्तीसगढ़ की सक्रिय भागीदारी प्रदेश और देश दोनों के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगी।