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एक पेड़, एक ज़िंदगी अभियान को उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सराहा

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि विकास और पर्यावरण संतुलन एक साथ आवश्यक हैं। सुखद, समृद्ध और सुरक्षित भविष्य के लिए प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के पुनीत कार्य में सभी की सहभागिता ज़रूरी है। पौधारोपण व्यक्ति को जीवन और प्रकृति के बीच आत्मीय संबंध की गहरी अनुभूति भी कराता है। प्रदेश में हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनचेतना के लिए मीडिया समूह के “एक पेड़, एक ज़िंदगी” अभियान की उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सराहना की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया है कि यह अभियान हरियाली बढ़ाने में सहायक होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि मीडिया समूह द्वारा जनसामान्य को तुलसी के बीज वितरित कर आयुर्वेदिक परंपरा, स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच के संबंध को भी सशक्त किया जा रहा है। यह नवाचार न सिर्फ सराहनीय है, बल्कि प्रेरणादायक भी है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली भूमिका निभाई है। मध्यप्रदेश में “जल-गंगा संवर्धन अभियान”, “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान से जनभागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति वृक्षारोपण को अपनी भावनाओं और स्मृतियों से जोड़ता है, तो उसका संरक्षण भी स्वाभाविक रूप से होता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि पर्यावरण और विकास विरोधी तत्व नहीं, बल्कि एक दूसरे के पूरक हैं। जितना आवश्यक अधोसंरचना, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में विकास है, उतना ही महत्वपूर्ण स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और हरियाली को संरक्षित रखना भी है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने नागरिकों से अपील की है कि वे पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों से जुड़ें और अपने आसपास हरियाली बढ़ाने में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

18 टीमों की छानबीन, 14 ठिकानों पर छापे: छांगुर बाबा के ठिकानों से करोड़ों की बरामदगी

बलरामपुर लखनऊ और बलरामपुर समेत कई जिलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला नेटवर्क से जुड़े मामलों में बड़ा एक्शन लिया है. छांगुर बाबा और उसके नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए ईडी की 18 टीमों ने एक साथ 14 ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई सुबह 6 बजे एक साथ शुरू की गई, ताकि किसी को भागने का मौका न मिले. बलरामपुर, उतरौला, लखनऊ, पुणे समेत अन्य स्थानों पर चली इस कार्रवाई में कई चौंकाने वाले सुराग हाथ लगे हैं. बलरामपुर में कार्रवाई लगभग 13 घंटे तक चली, 100 करोड़ की संपत्तियों की जांच हुई. यहां जमीनों की खरीद-फरोख्त से जुड़े लोगों के घरों पर भी दबिश, लेनदेन का ब्योरा जुटाया गया. वहीं लखनऊ के चिनहट में बलरामपुर CGM कार्यालय के बाबू राजेश उपाध्याय के घर भी छापा मारा गया. बलरामपुर के उतरौला में एटीएस ने जहां जांच की थी, उन जगहों को भी ईडी ने खंगाला. कार्रवाई में सोना, नकदी, लग्जरी गाड़ियां और संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए.  इसके अलावा दुबई, यूएई और नेपाल से फंडिंग के सुराग भी मिले हैं. ईडी ने नीतू और नवीन की संपत्तियों की भी जांच की है. उतरौला में सुबह 6 बजे से छापेमारी की गई. यहां एक कॉम्प्लेक्स जो नीतू के नाम था, उसमें भी छानबीन की गई. दुकान में रखे सामान, रजिस्टर और अन्य अभिलेखों की गहराई से जांच हुई है. मधपुर स्थित छांगुर के मकान में पुलिस ने कमरों के ताले खुलवाए और अंदर की बारीकी से जांच की गई. प्रशासन द्वारा ढहाई गई कोठी की भी जानकारी ली गई है. पूर्व प्रधान जुम्मन सहित कई लोगों से पूछताछ हुई, जिन्होंने छांगुर से पैसे लिए या जमीन के सौदों में शामिल रहे. बेनामी और नामी संपत्तियों की भी गहन जांच की जा रही है. अधिकारियों ने जब पूछताछ की तो इस दौरान कई लोगों की जुबान लड़खड़ाई, माथे पर चिंता की लकीरें दिखीं. ईडी ने किसी को बाहर आने-जाने की अनुमति नहीं दी. रेहरामाफी गांव और रफीनगर जैसे स्थानों पर भी छापेमारी की गई और लोगों से पूछताछ हुई. छापामारी सुबह 6 बजे की गई, ताकि कोई भाग न सके. एसटीएफ की टीम ने उतरौला में सबरोज नाम के युवक से पूछताछ की, कोई संबंध नहीं मिलने पर छोड़ दिया गया. छांगुर के भतीजे सोहराब और उसके सहयोगी रशीद की तलाश में ATS जुटी है. इसके अलावा पुणे के लोनावला में 16 करोड़ की संपत्ति की जांच की जा रही है, जिसमें छांगुर बाबा, नवीन रोहरा और मोहम्मद अहमद के नाम शामिल हैं. संगीता देवी का नाम भी इस संपत्ति से जोड़ा जा रहा है. ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत जुटाने में लगी है.

यूपी में डिजिटल अरेस्ट केस में पहली सजा, 7 साल की कैद से शुरू हुआ नया अध्याय

लखनऊ उत्तर प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट मामले में पहली बार सजा सुनाई गई. राजधानी लखनऊ में महिला डॉक्टर से 85 लाख ठगने वाले एक ठग को कोर्ट द्वारा 7 साल की सजा दी गई. आपको बता दें कि खुद को CBI अधिकारी बताकर केजीएमयू की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सौम्या गुप्ता से 85 लाख रुपये ठगने वाले साइबर अपराधी देवाशीष को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है. यह ऐतिहासिक फैसला स्पेशल सीजेएम कस्टम अमित कुमार ने सुनाया.  मामले की विवेचना साइबर थाना लखनऊ ने की थी और इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार यादव द्वारा कोर्ट में ठोस साक्ष्य पेश किए गए. साइबर क्राइम के इतिहास में यह देश का पहला मामला है जिसमें डिजिटल अरेस्ट के आरोप में 14 महीने के भीतर कोर्ट से सजा सुनाई गई है. जानिए पूरा मामला  अभियोजन अधिकारी मषिन्द्र ने बताया कि 15 अप्रैल 2024 को डॉ. सौम्या गुप्ता केजीएमयू में अपनी ड्यूटी कर रही थीं. तभी आरोपी देवाशीष ने उन्हें कॉल कर खुद को कस्टम विभाग का अधिकारी बताया और कहा कि वह दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से बोल रहा है. उसने दावा किया कि डॉ. गुप्ता के नाम से एक कार्गो बुक है जिसमें जाली पासपोर्ट, एटीएम कार्ड और 140 ग्राम एमडीएम मिला है. इसके बाद देवाशीष ने कॉल को ट्रांसफर कर खुद को फर्जी CBI अधिकारी बताने वाले व्यक्ति से बात करवाई, जिसने डॉ. गुप्ता को धमकाया कि उन्हें सात साल की जेल हो सकती है. डर के चलते डॉक्टर ने अपनी पर्सनल जानकारी जैसे- बैंक खाता, पैन नंबर और संपत्ति विवरण साझा कर दिया.  आरोपियों ने डर और धमकी के माध्यम से डॉक्टर को 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और अलग-अलग चार बैंक खातों में कुल 85 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए. जांच-पड़ताल के क्रम में आरोपी की पहचान देवाशीष के रूप में हुई जिसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया. मजबूत साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने दोषी करार देते हुए उसे सात साल की सजा और जुर्माना भी लगाया. देवाशीष आजमगढ़ के अजमतगढ़ क्षेत्र के मसौना गांव का रहने वाला है.  

जैसलमेर में छाया सन्नाटा, 39 डिग्री के पार पारा

जैसलमेर सीमावर्ती जिले जैसलमेर में इन दिनों प्रचंड गर्मी और भीषण उमस ने आमजन का जीना दूभर कर दिया है। पिछले कई दिनों से तापमान लगातार 39 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है और इसके साथ ही उमस ने हालात और भी खराब कर दिए हैं। दिन चढ़ने के साथ ही शहर में गर्म हवाएं और चिपचिपी गर्मी का ऐसा असर देखने को मिल रहा है कि पंखे और कूलर तक बेअसर साबित हो रहे हैं। दोपहर के समय शहर की सड़कें सूनी नजर आ रही हैं, लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। वातावरण में उमस और तपन का ऐसा मेल बना हुआ है कि घरों के भीतर भी रहना मुश्किल होता जा रहा है। लगातार गर्म रातों ने लोगों की नींद तक छीन ली है। बिजली की खपत में भी काफी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिससे आमजन की परेशानियां और बढ़ गई हैं। मानसून का इंतजार बना चिंता का कारण हालांकि प्रदेश के कई जिलों में मानसून सक्रिय हो चुका है और अच्छी बारिश दर्ज की गई है, लेकिन जैसलमेर अब भी सूखा ही नजर आ रहा है। मौसम विभाग ने 15 से 17 जुलाई तक के लिए बारिश का येलो अलर्ट जारी किया था और 16-17 जुलाई को भारी बारिश की चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन आसमान ने रुख नहीं बदला। हल्के बादलों की आवाजाही जरूर दिखी, लेकिन बारिश की एक भी बूँद नहीं गिरी। किसानों की बढ़ी चिंता, वैज्ञानिक ने जताई उम्मीद बारिश नहीं होने से आमजन के साथ-साथ किसान भी चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि अगर समय पर बरसात नहीं हुई तो खरीफ की फसलों पर असर पड़ेगा। इस बीच कृषि मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अतुल गालव ने उम्मीद जताई है कि आने वाले एक-दो दिनों में मानसून जिले में सक्रिय हो सकता है। उन्होंने बताया कि कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। हालांकि यह राहत अस्थायी हो सकती है क्योंकि इसके बाद मौसम फिर से साफ रहने की आशंका है। गर्मी और उमस ने तोड़े रिकॉर्ड, जनजीवन अस्त-व्यस्त जैसलमेर में हर साल जून-जुलाई में गर्मी का कहर आम बात होती है, लेकिन इस बार उमस ने हालात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिए हैं। दिन के साथ-साथ रात में भी तापमान में गिरावट नहीं आ रही है, जिससे लोग पूरी तरह से परेशान हो गए हैं। दुकानों पर ग्राहकों की संख्या कम हो गई है और सार्वजनिक स्थानों पर भी सन्नाटा छाया हुआ है। अब पूरा शहर आसमान की ओर निहार रहा है और राहत की बारिश का इंतजार कर रहा है। फिलहाल शहरवासी तेज धूप और भीषण उमस के दोहरे प्रकोप से जूझ रहे हैं। हर किसी को बस इस बात की उम्मीद है कि जल्द ही मानसून की मेहरबानी होगी और जैसलमेर को गर्मी से राहत मिलेगी।

रेल यातायात बाधित: जोधपुर मंडल में डिरेलमेंट के बाद बदले गए कई ट्रेनों के रास्ते

जोधपुर उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल में मेड़ता रोड-फुलेरा रेलखंड के गच्छीपुरा स्टेशन के पास शुक्रवार सुबह 10:15 बजे मालगाड़ी के इंजन सहित सात डिब्बे पटरी से उतर गए। इस दुर्घटना से रेल यातायात बाधित हुआ और जोधपुर-जयपुर रेल मार्ग पर कई ट्रेनों को परिवर्तित मार्गों से चलाया जा रहा है। घटना सुबह 10:15 बजे की है। रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि जोधपुर मंडल के मेड़ता रोड से फुलेरा के बीच गच्छीपुरा स्टेशन के पास मालगाड़ी पटरी से उतर गई। इस हादसे में इंजन के अलावा साथ और डब्बे पटरी से उतर गए। सूचना मिलते ही रेलवे अलर्ट हो गया। सूचना के बाद आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और रेल मार्ग को दुरुस्त करवाने के प्रयास शुरू किए गए हैं। बारिश के कारण आ रही दिक्कतें जोधपुर में और आसपास के इलाकों में पिछले 24 घंटे से लगातार बारिश का दौर जारी है। कुछ एक इलाकों में तेज तो कुछ एक इलाकों में रिमझिम बारिश हो रही है, जिसके चलते रेल मार्ग दुरुस्त करने के लिए रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। मालगाड़ी के इंजन के अलावा सात डब्बे पटरी से उतर जाने के बाद रेल यातायात प्रवाहित हुआ है। कुछ एक रेलों को डायवर्ट किया गया है जोधपुर और जयपुर के बीच रेल यातायात प्रभावित हुआ है। मालगाड़ी के पटरी से उतर जाने के बाद ट्रेन संख्या 14814 ,14865 ओर 14813 प्रभावित हुई है इन ट्रेनों को परिवर्तित मार्गो से चलाया जा रहा है। उपरोक्त कारण से निम्न रेलसेवाएं मार्ग परिवर्तित रहेगी     गाड़ी संख्या 14814, भोपाल-जोधपुर एक्सप्रेस रेलसेवा जो दिनांक 17.07.25 को भोपाल से प्रस्थान की है, वह परिवर्तित मार्ग वाया फुलेरा-अजमेर-मारवाड जं.-लूनी होकर जायेगी।     गाड़ी संख्या 14865, वाराणसी सिटी-जोधपुर एक्सप्रेस रेलसेवा जो दिनांक 17.07.25 को वाराणसी सिटी से प्रस्थान की है, वह परिवर्तित मार्ग वाया फुलेरा-अजमेर-मारवाड जं.-लूनी होकर जायेगी।     गाड़ी संख्या 14813, जोधपुर- भोपाल एक्सप्रेस रेलसेवा जो दिनांक 18.07.25 को जोधपुर से प्रस्थान की है, वह परिवर्तित मार्ग वाया डेगाना-रतनगढ- चूरू-सीकर-रींगस-जयपुर होकर जायेगी।  

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 23 जुलाई को समीक्षा बैठक

भोपाल सड़क दुर्घटना पीड़ितों का नकदी रहित उपचार स्कीम, 2025 एवं राह-वीर योजना  की प्रगति की समीक्षा बैठक 23 जुलाई 2025 को मुख्य सचिव की अघ्यक्षता में आयोजित की जायेगी। बैठक में परिवहन, पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा दोनों योजनाओं के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया जायेगा

सीएम यादव की स्पेन यात्रा: निवेश और सांस्कृतिक साझेदारी की ओर कदम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पेन में की निवेश, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग की नई पहल स्पेन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की बड़ी पहल, निवेश-शिक्षा-संस्कृति को मिलेगी नई दिशा सीएम यादव की स्पेन यात्रा: निवेश और सांस्कृतिक साझेदारी की ओर कदम स्पेन में डॉ. यादव की तीन मोर्चों पर पहल, निवेश, शिक्षा और संस्कृति पर खास फोकस कैटलोनिया के विदेश मंत्री जैम डच गुइलोट के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक अकादमिक साझेदारी की दिशा में नया संवाद भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पेन यात्रा के तीसरे दिन बार्सिलोना में कैटलोनिया सरकार के विदेश मंत्री जैम डच गुइलोट से भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थान आईआईटी इंदौर और IISER भोपाल को बार्सिलोना के विश्वविद्यालयों से जोड़ते हुए अकादमिक और शोध सहयोग को बढ़ाने की बात कही। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश विश्वस्तरीय अनुसंधान और नवाचार केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेश और औद्योगिक सहयोग के लिए आमंत्रण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कैटलोनिया की अग्रणी कंपनियों को मध्यप्रदेश में निवेश और तकनीकी सहयोग के लिए आमंत्रण दिया। उन्होंने प्रदेश की नई औद्योगिक नीति, मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और युवा शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सही समय है जब यूरोपीय कंपनियाँ मध्यप्रदेश को अपने निवेश गंतव्य के रूप में देखें। खेल, पर्यटन और संस्कृति में साझेदारी के नए आयाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एफसी बार्सिलोना फाउंडेशन जैसे संगठनों के साथ मिलकर खेल, नेतृत्व और जीवन कौशल पर आधारित कार्यक्रमों की साझेदारी की संभावनाएं साझा कीं। साथ ही मध्यप्रदेश के विश्व धरोहर स्थलों साँची, खजुराहो और भीमबेटका को यूरोप में प्रमोट करने के लिए संयुक्त पर्यटन अभियान पर भी सहमति बनी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी सुझाव दिया कि दोनों सरकारें प्रदर्शन कला, सिनेमा, साहित्य और संग्रहालयों के माध्यम से सांस्कृतिक संवाद को और सशक्त बनाएं। तकनीकी सहयोग और नीति-स्तरीय समन्वय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्मार्ट सिटी, ग्रीन बिल्डिंग्स और शहरी परिवहन में कैटलोनिया की विशेषज्ञता का लाभ लेने के लिए तकनीकी सहयोग प्रस्तावित किया। उन्होंने दोनों सरकारों के बीच एक संयुक्त कार्य समूह गठित करने की बात कही, जो प्रमुख परियोजनाओं की पहचान कर उन्हें लागू करने में सक्रिय भूमिका निभाएगा। वैश्विक मंच पर मध्यप्रदेश की सशक्त उपस्थिति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस मुलाकात को प्रदेश की वैश्विक रणनीति का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अब निवेश, शिक्षा, खेल और संस्कृति के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के लिए तैयार है, और स्पेन यात्रा प्रदेश के विकास में नए अध्याय जोड़ेगी।  

मुस्लिम धर्मगुरु मुफ्ती ए आजम का खत, मुस्लिम समाज से बोले दस्तावेज रखें तैयार- जानें पूरा मामला

भोपाल  मध्य प्रदेश के मुफ्ती-ए-आजम का एक खत वायरल हो रहा है, जिससे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का मुद्दा फिर उठता दिख रहा है. मुफ़्ती-ए-आजम ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से अपील की है कि अपने सभी दस्तावेज तैयार कर लें.  दरअसल, मध्य प्रदेश मुफ्ती-ए-आजम डॉ. मौलाना मोहम्मद मुजाहिद रज़ा पत्र जारी कर मुसलमानों से आग्रह किया है कि सभी देश की नागरिकता साबित करने संबंधित और अपनी पहचान संबंधित सभी दस्तावेज चेक कर लें और कोई चूक है तो उसे सुधरवा लें.  मुस्लिम समाज को दस्तावेजी तैयारी के नसीहत वाला मुस्लिम धर्मगुरु का पत्र चर्चा में है। जिसमें उन्होंने अपनी पहचान से जुड़े पेपर तैयार कराने के लिए कहा है। मुफ्ती ए आजम मप्र डॉ. मौलाना मुशाहिद रजा कादरी की ओर से जारी इस पत्र में यह चिंता साफ नजर आ रही है। जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 16 जुलाई के इस पत्र में कहा गया है कि सभी मुसलमानों को देश की नागरिकता सिद्ध करने वाले तमाम कागजात पहले से दुरुस्त कर लेने चाहिए। क्योंकि एनआरसी की पड़ताल बहुत जोरों से चल रही है। एनआरसी, सीएए और एनपीआर के मुद्दों को लेकर भाजपा हुकूमत बहुत उत्सुकता से गौर फिक्र कर रही है। यह बात अच्छे से अपने दिमाग में बैठा कर सोच फिक्र रखना होगा, क्योंकि हमारा नाम हर लिस्ट में नं 01 पर रखा गया है। एनआरसी किसी भी समय हमारे सूबे मध्य प्रदेश में शुरू हो जाएगी। जिससे पहले हमें अपनी नागरिकता को भारतीय साबित करने के लिए कागजात की तैयारी पूरी करना होगा। उन्होंने मूल निवास, आधार, वोटर कार्ड, पैन कार्ड, राशनकार्ड सहित पासपोर्ट व दूसरे दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाण पत्र, निकाहनामा व प्रॉपर्टी के रेकॉर्ड भी शामिल है। उसे अपने पास दुरुस्त कराकर रखने की ताकीद की है। कोई शाब्दिक त्रुटि हो तो ठीक करवा लें। 'एमपी सरकार शुरू कर सकती है NRC' उन्होंने कहा कि जन्म, जाति, शादी, संपत्ति, निवासी, मृत्यु से संबंधित सभी दस्तावेज मुसलमानों को अब तैयार कर लेने चाहिए, क्योंकि मध्य प्रदेश सरकार कभी भी NRC शुरू कर सकती है. Mufti-e-Azam MP : उनका कहना है- आमजनों को शासकीय कार्यवाहियों में जरूरी दस्तावेज तैयार रखने की गुजारिश की है। यह पत्र जागरूकता के लिए जारी किया गया है।     मौलाना मुशाहिद रजा कादरी,मुफ्ती-ए-आजम मप्र   NRC और NPR क्या है, CAA के बाद क्यों चल रही चर्चा केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 11 मार्च 2024 को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसके साथ ही सीएए के नियम देशभर में लागू हो गए। सीएए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है, जहां लोग पोर्टल के माध्यम से सीएए के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सीएए को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार पर हमलावर है। एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने नागरिकता (संशोधन) कानून को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा और कहा कि देश में धर्म के आधार पर कानून नहीं बनाया जा सकता। सीएए को एनआरसी और एनपीआर के साथ जोड़कर देखने की जरूरत है। भाजपा का मुख्य उद्देश्य देश में एनपीआर और एनआरसी लागू करना है। आइए जानते हैं क्या होता है एनपीआर (राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर) और एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर)। एनपीआर क्या है? What is NPR Bill Meaning एनपीआर की फुल फॉर्म राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर है। एनपीआर देश के सामान्य निवासियों की एक सूची है। भारत के प्रत्येक सामान्य निवासी के लिए एनपीआर में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इसमें भारतीय नागरिक और विदेशी नागरिक दोनों शामिल हैं। एनपीआर का उद्देश्य देश के प्रत्येक सामान्य निवासी का डेटाबेस बनाना है। इसे नागरिकता अधिनियम 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करना) नियम 2003 के प्रावधानों के तहत स्थानीय (गांव/उप-नगर), उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जा रहा है। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के लिए डेटा पहली बार 2010 में भारत सरकार द्वारा एकत्र किया गया था और इसे हर 10 साल में दोहराया जाएगा। इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक सामान्य निवासी का एक व्यापक पहचान डेटाबेस बनाना है। डेटाबेस में जनसांख्यिकीय के साथ-साथ बायोमेट्रिक विवरण भी शामिल होंगे। एनपीआर के लिए किसी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि जनसंख्या रजिस्ट्रार में डेटा प्रविष्टि के लिए स्व-घोषणा को पर्याप्त माना जाएगा। सीएए यानी नागरिकता संशोधन अधिनियम पर चल रहे विवाद के बीच लोगों की मन में बहुत विभ्रांति उत्पन्न हो गई है, बहुत से लोग नहीं जान पा रहे हैं कि आखिर यह राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी एनपीआर क्या है और उसे क्यों अपडेट किया जा रहा है? हम आपको समझते हैं कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर क्या है? एनपीआर देश के सभी नागरिकों की जनसंख्या विवरण का डेटा है। सभी नागरिकों के लिए एनपीआर में पंजीकरण और सरकार को सही विवरण बताना अनिवार्य है। भारत में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार के तहत कारगिल समीक्षा समिति ने गैर नागरिकों और नागरिकों के अनिवार्य पंजीकरण सिफारिश को 2001 में स्वीकार किया गया था। वर्तमान में प्रक्रिया असम को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में की जाएगी। दरअसल केंद्र और राज्य सरकार कल्याणकारी योजनाएं बनती है, लेकिन सरकार को कोई योजना बनाने से पहले यह जानना जरूरी होता है कि जिन लोगों के लिए कोई योजना बनाई जा रही है उन लोगों की संख्या कितनी है? उनकी आर्थिक स्थिति कैसी है? उनकी क्या आवश्यकता है? इत्यादि। एनपीआर का मूल उद्देश्य क्या है? What is NPR Objective जनगणना आयोग के अनुसार, एनपीआर का उद्देश्य प्रत्येक सामान्य निवासी का एक व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करना है। एनपीआर में किस तरह का डेटा शामिल किया जाएगा?     राष्ट्रीयता घोषित व्यक्ति का नाम     जन्म तिथि     जन्म स्थान     मां का नाम     पिता का नाम     लिंग     वैवाहिक स्थिति     पति का नाम यदि विवाहित है तो     स्थाई आवासीय पता     शैक्षिक योग्यता     व्यवसाय वर्तमान पता पर रहने की अवधि     सामान्य निवास का पता     घर के मुखिया से संबंध आदि एनपीआर की वर्तमान स्थिति क्या है? राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के लिए डेटा 2010 में भारत की जनगणना 2011 के साथ एकत्र किया गया था। जनगणना के दौरान एकत्र किए गए डेटा को 2015 में … Read more

छोटे गांव से राष्ट्रीय गौरव तक: छत्तीसगढ़ के गांव से उठकर देश का सबसे तेज धावक बना अनिमेष कुजूर

रायपुर  छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव घुइटानगर से निकले 22 वर्षीय अनिमेष कुजूर आज भारत के सबसे तेज धावक बन चुके हैं. मात्र 10.18 सेकंड में 100 मीटर की दौड़ पूरी कर उन्होंने गुरिंदरवीर सिंह का रिकॉर्ड तोड़ा और भारतीय एथलेटिक्स में एक नई क्रांति की शुरुआत की. अब वे सिर्फ देश नहीं, बल्कि विश्व पटल पर भारत की पहचान बनाने की राह पर हैं. मोनाको डायमंड लीग में हिस्सा लेने वाले पहले भारतीय स्प्रिंटर बनकर अनिमेष ने इतिहास रच दिया है. यहां उन्होंने 200 मीटर U-23 स्पर्धा में भाग लिया और दुनिया के दिग्गज एथलीट्स के सामने भी आत्मविश्वास से दौड़े. हालांकि वे केवल 0.10 सेकंड से पोडियम से चूक गए, लेकिन उनका प्रदर्शन भारत के लिए गर्व का विषय बना. गांव से लेकर ग्लोबल मंच तक कोविड लॉकडाउन के दौरान जब दुनिया ठहर सी गई थी, तब अनिमेष का करियर दौड़ने लगा. शुरुआत फुटबॉल से हुई, लेकिन गांव के पास आर्मी के जवानों के साथ ट्रैक पर दौड़ते हुए उनकी स्पीड ने लोगों को चौंका दिया. किसी ने उन्हें लोकल रेस में भाग लेने की सलाह दी और वहीं से एथलेटिक्स की दुनिया में उनका प्रवेश हुआ. जब कोच और खिलाड़ी की जिद ने इतिहास रचा अनिमेष के कोच मार्टिन ओवेन्स बताते हैं, "वह बहुत बड़ा लड़का था, और खुद को ट्रेनिंग में लेने की जिद कर रहा था. हम दोनों में आज तक बहस होती है कि किसने किससे गुजारिश की थी!" HPC (हाई परफॉर्मेंस सेंटर) में आने के बाद अनिमेष ने पहले ही टूर्नामेंट में U-23 200 मीटर दौड़ जीत ली. छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव घुइटानगर से निकले अनिमेष अब भारतीय एथलेटिक्स में नया अध्याय लिख रहे हैं. वह पहले ही भारत के सबसे तेज धावक बन चुके हैं. उन्होंने 100 मीटर दौड़ 10.18 सेकेंड में पूरी कर ली और गुरिंदरवीर सिंह का 10.20 सेकेंड वाला रिकॉर्ड तोड़ दिया. अनिमेष कुजूर ने एथलेटिक्स में क्या नया किया है? सिर्फ 22 साल की उम्र में और 6 फीट 2 इंच लंबाई के साथ कुजूर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. जुलाई में उन्होंने पहली बार डायमंड लीग में हिस्सा लिया, जहां उनका मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के उभरते सितारे गॉट गॉट (Gout Gout,) से हुआ, जो पहले से ही एथलेटिक्स की दुनिया में सबका ध्यान खींच रहे हैं. मोनाको डायमंड लीग में कुजूर ने U-23 200 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया और स्प्रिंट प्रतियोगिता में भारत के पहले प्रतिभागी बने. महान मंच से दबाव महसूस करने की बजाय, उन्होंने खुद को प्रेरित किया और दुनिया के कुछ सबसे बड़े उभरते सितारों के साथ पदक जीतने की लड़ाई लड़ी. मुकाबले से डरने की बजाय अनिमेष  कुजूर ने कड़ी मेहनत की (20.55), लेकिन वह पोडियम से महज दसवें सेकेंड से चूक गए. निमेष दक्षिण अफ्रीका के जैक नईम (20.42 सेकेंड) से पीछे रहे.यह समय बहुत मायने रखता है. भारत को आमतौर पर 100 मीटर या 200 मीटर जैसी विश्व स्तरीय स्प्रिंट रेस में कम ही देखा गया है, लेकिन कुजूर  इस सोच को बदल रहे हैं. छत्तीसगढ़ की पूर्वी सीमा से आने वाले कुजूर लगातार रिकॉर्ड बना रहे हैं और भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा में ला रहे हैं. कुजूर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियनशिप के लिए क्वालीफाई कर पाएंगे? हालांकि वर्ल्ड चैम्पियनशिप के लिए सीधे क्वालीफाई करना (100 मीटर में 10.00 सेकें ड और 200 मीटर में 20.16 सेकेंड) मुश्किल लगता है,लेकिन कुजूर रैंकिंग सिस्टम के जरिए क्वालिफाई करने की काबिलियत रखते हैं. फिर भी वह सीधे क्वालिफाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, जो उनकी अंदर की जज्बे का प्रमाण है. अनिमेष के कोच ओवेन्स ने, जो इंटरव्यू में उनके साथ थे, मुस्कराते हुए कहा, 'अनिमेष को मेडल या रिकॉर्ड की चाह नहीं है, वो तो मेहनत के साथ अपने आप मिल जाते हैं. वह सिर्फ खुद को बेहतर बनाना चाहता है. इसीलिए ग्रां प्री में आना उसके लिए खास था- ये जानने के लिए कि बड़े खिलाड़ी क्या अलग करते हैं, वो कैसे रहते हैं, और वो क्या-क्या त्याग करते हैं. यह सिर्फ दौड़ने या वजन उठाने की बात नहीं है, इसमें आइसक्रीम खाना छोड़ना पड़ता है, शादियों में नहीं जाना पड़ता है और भी बहुत कुछ छोड़ना होता है.' ओवेन्स का मानना है कि डायमंड लीग में आना और नोआ लाइल्स (100 मीटर) तथा लेट्सिले तेबोगो (200 मीटर) जैसे ओलंपिक चैम्पियनों के साथ रहना, इस युवा एथलीट के लिए सही दिशा में उठाया गया एक अहम कदम था. डायमंड लीग में कुजूर का अनुभव कैसा रहा? रिलायंस फाउंडेशन की ओर से रखे गए इस इंटरव्यू में कुजूर ने कहा, 'मैंने लाइल्स और टेबोगो को देखा, उनके साथ तस्वीरें लीं और उनके वॉर्म-अप रूटीन देखे. मैंने अपने प्रशिक्षण में लागू करने के लिए बहुत कुछ सीखा. भीड़ खचाखच भरी थी, जोश चरम पर था…मैं बस दौड़ना चाहता था.' हालांकि कुजूर ने माना कि वह मोनाको में अपने प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं थे. उनका समय 20.55 सेकेंड रहा, जो उनके पर्सनल बेस्ट 20.32 सेकेंड से धीमा था. कोच ओवेन्स ने कहा, 'यह दौड़ तेज हवा (-1.9 मीटर/सेकेंड) के बीच हुई, जिससे सभी प्रतियोगियों की गति धीमी हो गई. इसके अलावा, मोनाको इस सीजन में कुजूर की यूरोप में तीसरी दौड़ थी, और थकान ने उन पर भारी असर डाला.' ओलंपिक चैम्पियनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दौड़ने से पहले कुजूर पेशेवर एथलेटिक्स की दुनिया से दूर थे. दरअसल, कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान वह गंभीरता से दौड़ भी नहीं रहे थे. शुरुआत में वह एक फुटबॉल खिलाड़ी थे और कभी-कभी अपने गांव के पास सेना के जवानों के साथ दौड़ लिया करते थे.एक ऐसा इलाका जहां न तो कोई ट्रैक था, न कोच, और न ही किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी को तैयार करने की कोई योजना… यह वो जगह थी, जहां से एक पीढ़ी का सबसे तेज धावक निकल आएगा, ऐसा किसी ने सोचा भी नहीं था. … तो क्या इस सुझाव ने अनिमेष को बड़ा धावक बना डाला? लेकिन जैसा कहा जाता है, हर बड़ी यात्रा एक छोटे से कदम से शुरू होती है. कुजूर के लिए भी वो शुरुआत एक साधारण सुझाव से हुई-'क्यों न तुम एक स्थानीय दौड़ में हिस्सा लो?' जब उन्होंने अपनी पहली दौड़ पूरी की, तो उनके अंदर … Read more

IAS मीणा की सुरक्षा याचिका ठुकराई हाईकोर्ट ने, मणिपुर जाने से इनकार नहीं

जबलपुर  मणिपुर-त्रिपुरा कैडर के आईएएस एमएल मीणा को हाईकोर्ट की जबलपुर बैंच से करारा झटका लगा है. IAS मीणा की वह याचिका निरस्त कर दी गई है, जिसके जरिए उन्होंने अपने मूल कैडर मणिपुर से दूसरे राज्य में ट्रांसफर की मांग की थी. उन्होंने याचिका दायर करते हुए कहा था कि दो विधायकों से मारपीट के कारण उनकी जान को खतरा है. हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन व जस्टिस डीके पालीवाल की युगलपीठ ने इस मामले में सुनवाई की. क्या है IAS मीणा का ट्रांसफर मामला? दरअसल, आईएएस अधिकारी एम एल मीणा की ओर से दायर याचिका में अपने मूल कैडर मणिपुर से दूसरे राज्य में ट्रांसफर किए जाने की राहत चाही गई थी. याचिका में कहा गया था कि उनका वर्ष 2006 में मणिपुर में दो विधायकों द्वारा उनके साथ कथित मारपीट की गई थी. मणिपुर में उनकी जान को खतरा है और सुरक्षा कारणों से उन्हें मणिपुर में वापस भेजा जाना अनुचित है. सुनवाई में कोर्ट ने क्या पाया? हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि 2001 बैच के आईएएस अधिकारी मीणा का मूल कैडर मणिपुर-त्रिपुरा है. उनका स्थानांतरण पूर्व में मध्य प्रदेश कर दिया गया था. इसके बाद उन्हें उनके मूल कैडर में वापस भेजने के आदेश जारी किए गए थे. वह विगत चार सालों से ड्यूटी से अनुपस्थित हैं, साल 2020 की आईबी रिपोर्ट में याचिकाकर्ता को मणिपुर में खतरा होने का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिसके बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया. सरकार जिम्मेदारी तय करने के लिए स्वतंत्र युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि सरकार यह तय करने के लिए स्वतंत्र है कि अधिकारी को किस स्थान पर कार्य करना है. युगलपीठ ने याचिकाकर्ता पर कथित हमले के संबंध में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों पर भी संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि याचिका में किसी विधायक के विरुद्ध की गई एफआईआर नंबर, थाना या अन्य विवरण का उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे पता चले कि आपराधिक मामला दर्ज भी हुआ था.