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हाईवे के अवैध कटों पर होगी सख्त कार्रवाई, रोड एक्सीडेंट की घटनाएं घटेंगी

जबलपुर हाइवे पर ढाबा, होटल, पेट्रोल पंप के आसपास डिवाइडरों के अवैध कट में कहीं से भी बाइक, कार, ई रिक्शा, ऑटो दुर्घटना का कारण बन रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित रोड सेफ्टी कमेटी इन अवैध कट की हकीकत देख चुकी है। कमेटी के निर्देश पर अब एनएचएआई हाईवे पर डिवाईडर के सभी अवैध कट बंद करेगी। दो दिन में लखनादौन से धूमा मार्ग पर 6 अवैध कट बंद किए गए हैं। इस सम्बंध में सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी, एमपीआरडीसी, नगर निगम व अन्य निर्माण एजेंसी के अधिकारियों, तकनीकी टीम, जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक करेगी। कुम्भ के दौरान हुए थे सर्वाधिक एक्सीडेंट प्रयागराज में कुंभ के दौरान जबलपुर-नागपुर हाईवे, जबलपुर-कटनी हाईवे पर बड़ी संख्या में सडक़ दुर्घटनाएं हुई थीं। सिहोरा में हुई तीन बड़ी दुर्घटनाओं में 15 के लगभग लोगों को मौत हो गई थी। जिले में उस दौरान एक महीने के अंदर 20 के लगभग बड़ी सडक़ दुर्घटना हुई थीं। जिनमें 35 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इन सडक़ दुर्घटनाओं में ज्यादातर का कारण हाईवे के डिवाइडर में ढाबा, होटल व अन्य प्रतिष्ठानों की ओर से लगा दिए गए कट थे। एनएचएआई की टीम ने हाईवे पर डिवाइडर के 50 के लगभग कट बंद कर दिए थे, जो कट छूट गए थे उन्हें अब बंद किया जा रहा है। हाईवे पर डिवाइडर में जो कट बचे हुए हैं उन्हें बंद किया जा रहा है। तैयारी इस तरह की है कि एक सप्ताह में सभी बचे हुए कट बंद कर लिए जाएंगे।- अमृतलाल साहू, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई गोसलपुर, गांधी ग्राम की ओर भी हाईवे पर डिवाइडर में कई अवैध कट हैं, ये ही हाल पनागर छोर पर भी है। एनएचएआई ने हाईवे पर डिवाइडर के कई अवैध कट हैं। एनएचएआई ने एक सप्ताह में 15 अगस्त तक इन अवैध कट को बंद करने का निर्णय लिया है।

इंदौर के लिए 737 करोड़ का केबल कार प्रोजेक्ट मंजूर, दिल्ली को प्रस्ताव सौंपा गया

इंदौर इंदौर में केबल कार से सफर करने का सपना जल्द हकीकत बन सकता है। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) द्वारा कराए गए फिजिबिलिटी सर्वे की रिपोर्ट नेशनल हाइवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) को सौंप दी गई है। NHLML ने इस प्रस्ताव को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, दिल्ली को अनुमोदन और बजट आवंटन के लिए भेज दिया है। परियोजना की मुख्य बातें कुल लागत: करीब 737 करोड़ रुपये कुल लंबाई: 11 किमी (दो रूट) शुरुआत: 2028 से अनुमानित यात्री: 2028 में प्रतिदिन 29,900, 2068 तक 1.95 लाख पहला रूट: चंदन नगर से शिवाजी वाटिका (6.24 किमी) लागत: 369.32 करोड़ रुपये स्टेशन: चंदन नगर, लाबरिया भेरू, यशवंत निवास रोड गुरुद्वारा, सरवटे, शिवाजी वाटिका यात्री अनुमान (2028): 11,700 प्रतिदिन दूसरा रूट: रेलवे स्टेशन से विजय नगर (4.7 किमी) लागत: 367.68 करोड़ रुपये स्टेशन: रेलवे स्टेशन, मालवा मिल, पाटनीपुरा, विजय नगर यात्री अनुमान (2028): 18,200 प्रतिदिन भविष्य का यात्री अनुमान     2038: 47,400 प्रतिदिन     2048: 78,200 प्रतिदिन     2068: 1.95 लाख प्रतिदिन सेक्शन विवरण     चंदन नगर – शिवाजी वाटिका: 3 सेक्शन (1.74 किमी, 1.93 किमी, 2.59 किमी)     रेलवे स्टेशन – विजय नगर: 2 सेक्शन (2.08 किमी, 2.62 किमी)

भोपाल की यूनिवर्सिटी में तैनात होगी पासपोर्ट वैन, घर के पास ही बनेगा पासपोर्ट

भोपाल मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT), भोपाल के छात्रों, स्टाफ और आम नागरिकों के लिए पासपोर्ट बनवाना अब और आसान हो गया है। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, भोपाल की ओर से पासपोर्ट सेवा प्रोजेक्ट (पीएसपी) वैन को मैनिट कैंपस में तैनात किया जा रहा है। यह वैन मैनिट के फैकल्टी गेस्ट हाउस परिसर में एक महीने के लिए अपनी सेवाएं देगी। समय और यात्रा खर्च की होगी बचत जरूरत और जन सहभागिता के आधार पर इसकी अवधि आगे बढ़ाई जा सकती है। इस सेवा का लाभ छात्रों, संस्थान के कर्मचारियों के साथ आम जनता भी ले सकेगी। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को इंटर्नशिप, उच्च शिक्षा या विदेश में रोजगार जैसे भविष्य के अवसरों के लिए पासपोर्ट संबंधी औपचारिकताएं आसानी से पूरी करने में मदद करना है। साथ ही, इससे समय और यात्रा खर्च की भी बचत होगी।    मैनिट प्रशासन ने की अपील मैनिट प्रशासन ने सभी छात्रों, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों से इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है। अधिक जानकारी के लिए क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, भोपाल द्वारा जारी पत्र को देखा जा सकता है। यह सुविधा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन संचालित राष्ट्रीय महत्व के संस्थान मैनिट में दी जा रही है।

भोपाल में हमीदिया अस्पताल, स्कूल और कॉलेज के नाम बदलने की तैयारी तेज

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अलग-अलग स्थानों के नाम को बदलने की प्रक्रिया तेज हो गई है। निगम की बैठक में नाम को बदलने की प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब इस सरकार को भेजा जा रहा है। निगम के प्रस्ताव के बाद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने प्रस्ताव कमिश्नर हरेंद्र नारायण को भेज दिया है। अब वह इस प्रस्ताव को शासन को भेजने की तैयारी कर रहे हैं। आपको बता दें कि भोपाल में कुछ स्थानों के नाम बदलने की प्रक्रिया चल रही है इनमें हमीदिया अस्पताल , कॉलेज और स्कूल के नाम को बदल जाना है। दरअसल, शहर में नाम को बदलने के लिए पहला प्रयास नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने किया था। उन्होंने जून महीने में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था और भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह के नाम से संचालित हमीदिया अस्पताल, स्कूल और कॉलेज का नाम बदलकर राष्ट्र भक्तों के नाम पर किए जाने की अपील की थी। स्कूल, अस्पताल के नाम बदलने का प्रस्ताव इससे पहले भोपाल में कुछ स्थानों के नाम बदले गए हैं। सितंबर 2023 में हमीदिया रोड का नाम बदलकर गुरु नानक मार्ग किया गया था। यह कार्य नगर निगम द्वारा कर दिया गया था। लेकिन स्कूल, कॉलेज और अन्य स्थानों के नाम बदलने का अधिकार नगर निगम को नहीं है। इसीलिए नगर निगम ने प्रस्ताव पास करवाया है और इसे नगर निगम कमिश्नर को भेज दिया है। नगर निगम की बैठक में मिली मंजूरी 24 जुलाई को नगर निगम परिषद की बैठक हुई थी। इसमें भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने नाम बदलने का प्रस्ताव रखा था। तब इसके बाद जमकर हंगामा हुआ था। निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा था कि नवाब हमीदुल्लाह गद्दार थे, उनका आरोप था कि नवाब ने भारत के आजाद होने के बाद भी 2 साल तक भोपाल रियासत का विलय नहीं होने दिया। वे इसे पाकिस्तान में शामिल कराना चाहते थे। वहीं, कांग्रेस ने आरोप पर पलटवार करते हुए कहा था कि यह निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है। इतिहास गवाह है कि नवाब हमीदुल्लाह ने इन संस्थान की स्थापना के लिए अपने निजी संपत्ति दान में दी थी।

पहली बार इंदौर से नवी मुंबई की उड़ान, विंटर शेड्यूल में होगी शुरुआत

इंदौर  इंदौर एयरपोर्ट पर 26 अक्टूबर से 28 मार्च विंटर शेड्यूल लागू होगा। इस दौरान इंदौर को कुछ नए शहरों की एयर कनेक्टिविटी मिलेगी। इंदौर से मुंबई के लिए कई उड़ानें हैं, लेकिन नई उड़ान नवी मुंबई के लिए शुरू होगी। नवी मुबंई में नया इंटरनेश्नल एयरपोर्ट तैयार हो रहा है। जल्दी ही वहां से उड़ानों का संचालन शुरू होगा। इंदौर से नवी मुंबई जाने वाले यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट लेने में इस नए एयरपोर्ट से आसानी होगी। कई अंतर्राष्ट्रीय उड़ाने नवी मुंबई एयरपोर्ट से संचालित होगी। इंदौर से रीवा के लिए के लिए भी उड़ान सेवा शुरू होगी। रीवा के लिए पहली बार इंदौर से उड़ान शुरू होगी। पहले बंद हो चुकी नासिक, जम्मू, उदयपुर उड़ान भी शुरू हो सकती है।विंटर शेड्यूल के दौरान नई उड़ान शुरू करने के लिए एयरलाइंस डायरेक्टर जनरल आफ सिविल एविएशन के साथ एयरपोर्ट प्रबंधन से भी अनुमति लेता है। नवी मुंबई और रीवा की उड़ान की अनुमति की प्रक्रिया एयरलाइंस कंपनियों ने की थी। दोनो नई उड़ानों के लिए दोनों एयरपोर्ट से अनुमति मिल चुकी है। अब कंपनियां उड़ानों को शेड्यूल कर उसकी जानकारी एयरपोर्ट को देगी। आपको बता दें कि इंदौर से फिलहाल 84 उड़ानों का संचालन किया जा रहा है। इंदौर से सबसे ज्यादा उड़ानें दिल्ली, मुंबई, बेंगलरु शहर के लिए है। अक्टूबर में इंदौर से गोवा के लिए भी नई उड़ान शुरू होगी। फिलहाल इंदौर से अंतर्राष्ट्री उड़ान सिर्फ एक ही संचालित होती है। इंदौर से शारजाह के एक फ्लाइट है।

शिक्षा में संकट: मध्य प्रदेश में 6.70 लाख बच्चों ने बीच में छोड़ी पढ़ाई, हर साल बढ़ रही इनकी संख्या

 भोपाल  मध्य प्रदेश के स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार प्रयार हो रहे हैं, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या लगातार घटती ही जा रही है। सरकारी व निजी स्कूलों के इस साल 6.70 लाख विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ दी है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 5.70 लाख था। वहीं सरकारी स्कूलों में इस साल करीब 4.67 लाख बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी है। पिछले साल 3.99 लाख विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ी थी। इसमें निजी स्कूलों के करीब दो लाख विद्यार्थी शामिल हैं। यह आंकड़ा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफार्मेशन सिस्टम फार एजुकेशन (यूडाईस) रिपोर्ट में सामने आई है। इसके अनुसार, वर्ष 2024-25 में प्रदेश के सरकारी व निजी स्कूलों में पहली से 12वीं तक में करीब 1.50 करोड़ विद्यार्थियों का पंजीयन हुआ था। वहीं 2025-26 में करीब एक करोड़ 41 हजार बच्चों का 13 जुलाई तक प्रोग्रेसिंग पेंडिंग है। वहीं 6.70 लाख बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने किसी भी स्कूल में प्रवेश नहीं लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विद्यार्थियों के प्रोग्रेशन को पूर्ण करें और ड्रापबाक्स के बच्चों को खोजकर स्कूल में नामांकन कराएं तथा नामांकित विद्यार्थियों का मैपिंग कराएं। इंदौर की स्थिति ज्यादा खराब प्रदेश के कुछ जिलों में अधिक संख्या में बच्चों ने स्कूल में प्रवेश नहीं लिया है। इसमें इंदौर में सर्वाधिक 38 हजार, शिवपुरी में 25 हजार, धार व बड़वानी में 21 हजार, छिंदवाड़ा में 20 हजार, छतरपुर में 19 हजार, खरगोन में 18 हजार, बालाघाट में 17 हजार और खंडवा में 16 हजार बच्चों ने स्कूल में प्रवेश नहीं लिया। यहां के सरकारी स्कूलों में सबसे अधिक बच्चों ने पढ़ाई छोड़ी प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पिछले सत्र में 79.75 लाख बच्चों का नामांकन दर्ज हुआ था। इस सत्र में अब तक 53.81 लाख का प्रोग्रेशन पेडिंग है। वहीं 4.67 लाख बच्चों ने किसी भी स्कूल में प्रवेश नहीं लिया है। इसमें सबसे अधिक बड़वानी में 17 हजार, छिंदवाड़ा व छतरपुर में 16 हजार, बालाघाट में 13 हजार, भिंड में 10 हजार, शहरी क्षेत्र ग्वालियर व भोपाल में चार-चार हजार, जबलपुर में छह हजार और इंदौर में 11 हजार विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ी है। विभाग ने ये कारण गिनाए     बच्चों का अपने माता-पिता के साथ दूसरी जगह जाना।     समग्र आईडी से मैपिंग नहीं होने के कारण ऐसे हालात बने।     जगह बदलने के कारण बच्चे का ठीक से मैपिंग नहीं होना।     अब ऑनलाइन चाइल्ड ट्रैकिंग से सही संख्या सामने आ रही है। ऑनलाइन चाइल्ड ट्रैकिंग से सामने आ रही संख्या     ऐसा भी हो सकता है कि कई जगहों पर सरकारी व निजी स्कूलों में एक ही बच्चों के नाम दर्ज होते हैं। अब ऑनलाइन चाइल्ड ट्रैकिंग के कारण वास्तविक संख्या सामने आ रही है। – डॉ. दामोदर जैन, शिक्षाविद्  

भोपाल में साइबर ठगी के 70 केस, करोड़ों की रिश्वत देकर बचे आरोपी

भोपाल  साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ने के बावजूद भोपाल में अब भी हर सप्ताह कम से कम एक ‘डिजिटल अरेस्ट’ का मामला सामने आ रहा है। बीते डेढ़ साल में क्राइम ब्रांच की साइबर सेल में ऐसे 70 मामले दर्ज हुए हैं, यानी औसतन हर सात से आठ दिन में एक पीड़ित पुलिस तक पहुंच रहा है। इस दौरान ठगों ने पीड़ितों से करीब ढाई करोड़ रुपये हड़पे हैं। साल 2024 में डिजिटल अरेस्ट के 53 मामलों में लगभग 1 करोड़ 82 लाख रुपये की ठगी हुई, जबकि वर्ष 2025 में जून तक 17 लोगों से 77 लाख 57 हजार रुपये वसूले जा चुके हैं। ऐसे फंसाते हैं ठग साइबर ठग पहले विभिन्न माध्यमों से पीड़ितों के डाटा आधार, पैन, बैंक डिटेल, मोबाइल नंबर से लेकर सोशल मीडिया गतिविधियां तक पर नजर रखते हैं। इन जानकारियों के आधार पर वे पीड़ित की वर्चुअल प्रोफाइल बनाते हैं, ताकि उसे यह भरोसा हो कि काल करने वाला कोई सरकारी अधिकारी है। इसके बाद शुरू होता है डराने-धमकाने का सिलसिला। पीड़ित को फोन कर बताया जाता है कि उसका नाम मनी लांड्रिंग, ड्रग तस्करी या अवैध लेनदेन के मामले में आ गया है। दावा किया जाता है कि ईडी, सीबीआई या कोर्ट में मामला दर्ज है और तुरंत वेरिफिकेशन जरूरी है। पीड़ित को किसी ऐप के जरिए वीडियो कॉल पर जोड़ा जाता है, जहां ठग पुलिस अधिकारी के वेश में, पुलिस कार्यालय जैसी पृष्ठभूमि के साथ बैठा दिखता है। पीड़ित को परिवार या किसी अन्य से बात करने की मनाही होती है। सामान्य पूछताछ के बाद वीडियो काल में ‘अन्य एजेंसियों’ के अफसर के रूप में और लोग जुड़ते हैं, जो सख्ती से पूछताछ कर आरोप ‘सिद्ध’ कर देते हैं और फिर ‘क्लीन चिट’ के नाम पर रकम की मांग करते हैं। यह रकम सीधे ठगों के खातों में जमा कराई जाती है। जज बनकर सुनाई सजा सितंबर 2024 में भोपाल के श्यामला हिल्स क्षेत्र में साइबर ठगों ने एक गैस संचालक की मां को डिजिटल अरेस्ट कर 80 लाख रुपये ठग लिए थे। आरोपियों ने उन्हें फर्जी मनी लांड्रिंग केस में फंसाया। करीब दस दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और ‘अदालत’ में पेश कर दिया। यहां नकली कोर्ट, फर्जी वकील और जज की भूमिका निभाई गई। महिला को ‘सजा’ सुनाने के बाद समझौते के नाम पर 80 लाख रुपये ले लिए गए। यह मामला क्राइम ब्रांच साइबर सेल में दर्ज हुआ था। डिजिटल अरेस्ट के मामलों में कमी आई     साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता के लिए भोपाल और प्रदेशभर में पुलिस लगातार अभियान चला रही है, जिससे डिजिटल अरेस्ट के मामलों में कमी आई है। मप्र स्टेट साइबर ने पहली बार डिजिटल अरेस्ट में लाइव रेस्क्यू किया था। वहीं भोपाल क्राइम ब्रांच ने पहली बार डिजिटल अरेस्ट करने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया। इसके बाद से साइबर ठगों पर लगातार कार्रवाई जारी है। – शैलेंद्र सिंह चौहान एडिशनल डीसीपी, क्राइम ब्रांच  

गोवंश सुरक्षा के नए प्रयास, गोसेवकों के लिए मानदेय योजना लागू

रायपुर  राज्य सरकार ने गोवंशों की सुरक्षा के लिए ‘गौधाम’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसमें बेसहारा गोवंश के लिए चारा-पानी की व्यवस्था की जाएगी। चरवाहों और गोसेवकों को मासिक मानदेय मिलेगा, चारा-पानी की व्यवस्था की जाएगी और बेहतर संचालन करने वाली संस्थाओं को रैंकिंग के साथ ईनाम भी दिया जाएगा। वित्त विभाग ने ‘गौधाम योजना’ को मंजूरी दे दी है और पशुधन विकास विभाग ने कलेक्टरों और फील्ड अधिकारियों को आदेश जारी कर दिया है। गोवंशों की लगातार हो रही मौतों पर रोक लगाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार का यह बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरकार में आने के बाद गो अभ्यारण बनाने की बात कही थी। बता दें कि दिसंबर 2024 में मुख्यमंत्री साय ने एक कार्यक्रम में कहा था कि गो माता हमारी समृद्धि का प्रतीक हैं और माना जाता है कि उनमें 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। उन्होंने कहा था कि गो अभ्यारण्य को ‘गौधाम’ कहना अधिक उचित है। बेमेतरा में 50 एकड़ में ‘गौधाम’ तैयार बेमेतरा के झालम में 50 एकड़ में गौधाम तैयार है। इसी तरह कवर्धा में 120 एकड़ में गौधाम निर्माण तेजी से जारी है। बता दें कि हाल ही में हाई कोर्ट ने सड़कों पर मृत पड़ी गायों की घटनाओं पर गंभीर टिप्पणी की थी। पिछले सप्ताह तीन अलग-अलग हादसों में 90 गायों की मौत और बिलासपुर रोड पर 18 गायों की दर्दनाक मौत के बाद मुख्य सचिव ने अफसरों को फटकार लगाई थी। क्या होगा ‘गौधाम’ में     गौधाम शासकीय भूमि पर बनाए जाएंगे, जहां सुरक्षित बाड़ा, पशु-शेड, पर्याप्त पानी, बिजली और चारागाह की सुविधा होगी।     इनका संचालन निकटस्थ पंजीकृत गौशाला समितियों को प्राथमिकता देकर किया जाएगा।     योग्य एनजीओ, ट्रस्ट, सहकारी समितियां या किसान उत्पादक कंपनियां भी जिम्मेदारी संभाल सकेंगी।     चयन का मापदंड गोसेवा, नस्ल सुधार, जैविक खाद निर्माण और पशुपालन प्रशिक्षण का अनुभव होगा।     गोधाम में वैज्ञानिक पद्धति से पशुओं का संरक्षण और संवर्धन किया जाएगा।     गो- उत्पादों को बढ़ावा देना, चारा विकास कार्यक्रम, प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकास, नस्ल सुधार, गौसेवा के प्रति जन-जागरण और रोजगार सृजन योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं।     प्रत्येक गो-धाम में अधिकतम 200 पशु रखे जा सकेंगे। ये हैं कानूनी प्रविधान छत्तीसगढ़ की सीमाएं सात राज्यों से जुड़ी हैं और यहां से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं, जिससे अंतर्राज्यीय पशु परिवहन की संभावना रहती है। राज्य में कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 (संशोधित 2011) और छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण नियम 2014 लागू हैं, जिनमें अवैध पशु परिवहन व तस्करी पर सख्ती से रोक है। प्रदेश में बड़ी संख्या में निराश्रित और जब्त गोवंश पाए जाते हैं, जो फसलों को नुकसान और सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। राज्य सरकार का मानना है कि ‘गौधाम योजना’ से न केवल निराश्रित पशुओं की मौत पर रोक लगेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नए अवसर पैदा होंगे। बेहतर प्रबंधन करने वाली संस्थाएं राज्य में माडल गौधाम के रूप में पहचान बनाएंगी।  

CM मोहन का ‘मेक इन MP’ विजन साकार, राज्य में शुरू होगा प्रीमियम रेल कोच निर्माण

भोपाल  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राज्य को लगातार विकास के पथ पर ले जा रहे हैं। सीएम डॉ. यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' मंत्र को साकार कर रहे हैं। वे 'मेक इन मध्यप्रदेश' की ओर बढ़ रहे हैं। राज्य को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रदेश के मुखिया डॉ. यादव लगातार उद्योगपतियों से मुलाकात कर रहे हैं। वे लगातार इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित कर प्रदेश में निवेश और रोजगार को आकर्षित कर रहे हैं। दरअसल, भारत सरकार की बड़ी कंपनियों में से एक भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) प्रदेश में बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत देश की प्रीमियम ट्रेनों वंदे भारत, अमृत भारत और मेट्रो कोच का निर्माण किया जाएगा।  इस परियोजना की लागत 1800 करोड़ रुपये है। इस प्रोजेक्ट को ब्रह्मा (BRAHMA) नाम दिया गया है। इस कंपनी से प्रदेश के हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। यह प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत की ओर एक बड़ा और अहम कदम है।   गौरतलब है कि बीईएमएल इस प्रोजेक्ट की स्थापना रायसेन जिले के गांव उमरिया में कर रही है। इस प्रोजेक्ट में 5000 लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। खास बात है कि यह पहला मौका है जब इस प्रकार के रेलवे कोच निर्माण की सुविधा मध्यप्रदेश को मिलने जा रही है। यह राज्य को देश के रेलवे प्रोडक्शन मैप पर अहम स्थान दिलाएगा। जानकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए उमरिया गांव की तहसील गौहरगंज में 148 एकड़ जमीन का आवंटन किया जा चुका है। इस प्रोजेक्ट की दूरी ओबैदुल्लागंज से 4 किमी, एनएच-46 से एक किमी और भोपाल एयरपोर्ट से 50 किमी है।  लगातार बढ़ेगा रोजगार बता दें, बीईएमएल इस क्षेत्र में 1800 करोड़ रुपये की लागत से वंदे भारत, अमृत भारत, मेट्रो कोच का निर्माण करेगी। शुरुआत में कंपनी सालाना 125-200 कोचों का निर्माण करेगी। 5 साल के अंदर इनकी संख्या 1100 कोच होगी। इस प्रोजेक्ट से भोपाल और रायसेन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर छोटे उद्योगों का निर्माण होगा। ये उद्योग आने वाले समय में बीईएमएल को प्रोडक्शन का मटेरियल बनाकर सप्लाई करेंगे। इस प्रोजेक्ट के लिए कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता होगी। इससे स्थानीय युवाओं के कौशल विकास और प्रशिक्षण के अवसर उत्पन्न होंगे। मिशन ज्ञान और पीम मोदी के मंत्र पर सीएम डॉ. यादव का फोकस गौरतलब है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा फोकस मेक इन इंडिया पर है। राज्य सरकार भी लगातार पीएम मोदी के मंत्र पर चल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के विकास और मिशन ज्ञान की पूर्ति के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। प्रदेश के मुखिया डॉ. यादव अब मेक इन मध्यप्रदेश की ओर बढ़ चले हैं। इससे युवाओं को रोजगार तो मिलेगा ही, साथ ही उद्योग स्थापित होंगे और समाज के अंतिम व्यक्ति का भी कल्याण होगा। बता दें, मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश का सबसे विकसित राज्य बनाने की ओर अग्रसर हैं। इसके लिए वे देश के साथ-साथ विदेशों में भी प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने एक ओर जहां देश के कई राज्यों में इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की, वहीं जापान-दुबई-स्पेन में उद्योगपतियों से संपर्क कर निवेश को राज्य तक ले लाए।  आत्मनिर्भर भारत की दिशा में वैश्विक कदम गौरतलब है कि, भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) का यह नया प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम है। इस कंपनी का प्रोजेक्ट ब्रह्मा (BRAHMA) भारत का नेक्स्ट-जेन रेल मैन्युफैक्चरिंग हब है। यह केवल एक संयंत्र नहीं, बल्कि एक दृष्टिकोण है। यह आत्मनिर्भर भविष्य के लिए तैयार और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रोजेक्ट है। बता दें, बीईएमएल लिमिटेड रक्षा मंत्रालय के तहत ‘शेड्यूल ए’ की कंपनी है। य रक्षा, रेल, खनन और निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बीईएमएल तीन क्षेत्रों में रक्षा-एयरोस्पेस, खनन-निर्माण और रेल-मेट्रो क्षेत्रों में काम करती है।

फैमिली कोर्ट का आदेश: बिना वजह पति को छोड़ा, भरण-पोषण का दायित्व नहीं महिला का

शिवपुरी कुटुम्ब न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश शालिनी शर्मा सिंह ने अकारण पति का त्याग करने वाली महिला द्वारा लगाई गई भरण-पोषण याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया है कि, वह पढ़ी लिखी महिला है और खुद कमा कर अपना भरण-पोषण कर सकती है। यह है पूरा मामला जानकारी के अनुसार बैंक कालोनी कलारबाग निवासी बृजेश शिवहरे की 24 वर्षीय बेटी रागिनी उर्फ भूमि की शादी 21 नवम्बर 2021 को ब्यावरा जिला राजगढ़ निवासी खेमचंद्र उर्फ अंकित पुत्र भगवान सिंह शिवहरे के साथ संपन्न हुई थी। रागिनी 16 जुलाई 2022 को अपने पिता के साथ ससुराल से मायके लौट आई। उसका आरोप था कि ससुराल वाले उसे 5 लाख रूपये के दहेज के लिए प्रताड़ित करते हैं, जबकि उसके पिता ने शादी के समय दहेज में आठ लाख रुपये नगद, सोने-चांदी के जेवर व घर-गृहस्थी का सामान दिया था।   रागिनी ने कुटुम्ब न्यायालय में इस आधार पर भरण-पोषण का दावा पेश किया कि उसके पास भरण-पोषण का कोई साधन नहीं है और उसका पति एक क्लीनिक, मेडिकल स्टोर व पाल्ट्री फार्म चलाता है एवं साधन संपन्न व्यक्ति है। खेमचंद ने अपने वकील पंकज आहूजा के माध्यम से न्यायालय को बताया कि रागिनी ने अकारण ही घर छोड़ा है, वह पढ़ी लिखी महिला है जो मायके में बच्चों को ट्यूशन देकर करीब 15 हजार रुपये महीना कमाती है। रागिनी द्वारा उसकी जो आय बताई गई है, वह उतना पैसा नहीं कमाता है। न्यायालय के समक्ष रागिनी ने स्वीकार किया कि वह आय अर्जित करने में सक्षम है। न्यायालय ने समस्त तथ्यों एवं साक्ष्यों पर विचारण उपरांत माना कि आवेदक महिला ने अकारण ही अपने पति का त्याग किया है, वह पढ़ी लिखी है और आय अर्जित कर अपना भरण-पोषण करने में सक्षम है। ऐसे में भरण-पोषण प्राप्त करने की अधिकारी नहीं है।