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बिजली से वंचित टोलों पर प्रशासन का फोकस, DC ने दिए सख्त निर्देश

लोहरदगा झारखंड के लोहरदगा जिले में अब बिजली से वंचित टोलों और गांवों तक भी बिजली सुविधा पहुंचाने की दिशा में प्रशासन ने पहल तेज कर दी है. जिले के उपायुक्त संदीप कुमार मीणा की अध्यक्षता में जिला विद्युत समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न बिजली योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री उज्ज्वल झारखंड योजना की समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने मुख्यमंत्री उज्ज्वल झारखंड योजना तथा संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत चल रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन टोलों और गांवों में अब तक विद्युतीकरण नहीं हो सका है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जाए. उपायुक्त ने कहा कि जिन क्षेत्रों तक पहुंच पथ उपलब्ध है, वहां जुलाई माह तक हर हाल में विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर लिया जाए, ताकि ग्रामीणों को बिजली की सुविधा मिल सके. सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लिए अपनाए जाएंगे तकनीकी विकल्प बैठक के दौरान उपायुक्त संदीप कुमार मीणा ने कहा कि जिन दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क या पहुंच पथ उपलब्ध नहीं है, वहां विशेष प्रकार के पोल और अन्य तकनीकी उपायों का इस्तेमाल किया जाए. इसके लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक अनुमति प्राप्त कर जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया. उन्होंने कहा कि तकनीकी चुनौतियों के कारण किसी भी गांव या टोले को बिजली सुविधा से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा. नए चिन्हित गांवों का होगा भौतिक सत्यापन उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं को निर्देश दिया कि हाल में चिह्नित किए गए गांवों और टोलों का भौतिक सत्यापन किया जाए. सत्यापन के बाद वहां बिजली आपूर्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं. उन्होंने कहा कि सभी विभागीय अधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके. कोई भी परिवार बिजली से वंचित नहीं रहेगा उपायुक्त संदीप कुमार मीणा ने स्पष्ट कहा कि जिले का कोई भी परिवार बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित नहीं रहना चाहिए. इसके लिए सभी संबंधित पदाधिकारी और अभियंता जिम्मेदारी के साथ कार्य करें और निर्धारित समय सीमा के भीतर योजनाओं को धरातल पर उतारना सुनिश्चित करें. बैठक में विद्युत विभाग के अधिकारियों और संबंधित पदाधिकारियों ने भी विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की और निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्यों को पूरा करने का भरोसा दिलाया.

कोयला भंडार में लगी आग ने बढ़ाई चिंता, SECL की टीम दूसरे दिन भी करती रही मशक्कत

कोरबा. SECL कुसमुंडा खदान के 29 नंबर कोयला स्टॉक में गुरुवार को लगी भीषण आग शुक्रवार को भी पूरी तरह नहीं बुझ सकी। कोयले के विशाल भंडार में आग लगातार धधक रही है, जिससे SECL को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। आग पर काबू पाने के लिए SECL के टैंकर वाहनों की मदद से लगातार पानी का छिड़काव किया जा रहा है। वहीं आग प्रभावित क्षेत्र में डोजर चलाकर कोयले को अलग-अलग करने का कार्य भी किया जा रहा है। डोजर के आग की चपेट में आने की आशंका को देखते हुए उस पर भी पानी का लगातार छिड़काव किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप भी सामने आए हैं। जान जोखिम में डालकर आग लगे कोयले के बीच डोजर के संचालन किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि आग लगने की सूचना मिलते ही संबंधित विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंच गए थे और आग बुझाने के प्रयास जारी है। भीषण गर्मी से आग लगने की आशंका बताया जा रहा है कि बरसात से पहले SECL द्वारा बड़े पैमाने पर कोयले का स्टॉक तैयार किया जा रहा है। भीषण गर्मी के कारण आग लगने की आशंका जताई जा रही है। बता दें कि खदान क्षेत्र में हर दो-तीन दिन के अंतराल में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और कोयला भंडारण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है और राहत कार्य लगातार जारी है।

अच्छे जनप्रतिनिधियों से बहती है विकास की धारा: मुख्यमंत्री

माफिया को चुनकर भेजोगे तो गरीबों का खून चूसेगा: मुख्यमंत्री सीएम योगी ने बलरामपुर में 300 करोड़ से अधिक की योजनाओं का किया लोकार्पण/शिलान्यास अच्छे जनप्रतिनिधियों से बहती है विकास की धारा: मुख्यमंत्री अब किसी गरीब का राशन नहीं खा सकता है माफिया: सीएम योगी सीएम बोले- बेटी या व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों को छोड़ेंगे नहीं बलरामपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकास की प्रक्रिया तब आगे बढ़ती है, जब जनता अच्छे लोगों को चुनती है। माफिया को चुनकर भेजोगे तो गरीबों का खून चूसेगा। हमने माफिया को तबाह किया, उसकी जमीनों पर गरीबों के लिए मकान बना रहे हैं। डबल इंजन की सरकार डबल स्पीड के साथ काम कर रही है। किसान, व्यापारी, महिला को सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। आज हर जनपद विकास की मुख्यधारा से जुड़ा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलरामपुर के मध्यनगर बिलोहा में शुक्रवार को 300 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण व अन्य शासकीय योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित भी किया गया। सीएम ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। उन्होंने प्रगति के पथ पर अग्रसर बलरामपुर के विकास मॉडल पर जनता से सीधा संवाद भी किया। गोरखपुर से आकर करता था मदद मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से नौ वर्ष पूर्व बलरामपुर में जब भी दुर्गा पूजा होती थी, पचपेड़वा, गैसड़ी, बलरामपुर, उतरौला आदि जगहों पर दंगे होते थे। मुझे गोरखपुर से आकर लोगों की मदद करनी पड़ती थी। आज उत्तर प्रदेश के 75 जनपद, 350 तहसीलें और 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें दंगामुक्त हैं। विकास की प्रक्रिया के साथ प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। बलरामपुर के लोग 2017 से पहले कहीं जाते थे तो पहचान का संकट था। लोग माफिया से जोड़कर देखते थे। लेकिन, माफिया आज मिट्टी में मिल गए, कोई पहचान का संकट नहीं। आज बाहर जाएं और कहें कि आप यूपी से हैं तो आपको पूरा सम्मान मिलेगा। अब किसी गरीब का राशन नहीं खाता माफिया मुख्यमंत्री ने कहा कि याद करिए 2017 के पहले गरीब को राशन नहीं मिलता था। सपा के गुंडे राशन खा जाते थे। अब हर गरीब को फ्री में राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। गांवों में आय, निवास प्रमाण पत्र की भी सुविधा दी जा रही है। गरीब के उपचार के लिए आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है। एक ओर गरीब कल्याणकारी योजनाएं और दूसरी ओर विकास कार्य बढ़ाए गए। सभी सरकारी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव दिया जा रहा है। पीएम मोदी के ‘सबका साथ-सबका विकास’ विजन के तहत काम हो रहा है। सुरक्षित माहौल में हो रहा निवेश मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी ने बेटी या व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाई तो फिर उसको छोड़ेंगे भी नहीं। यही सरकार की घोषित नीति है। प्रदेश के सुरक्षित माहौल में आज निवेश हो रहा है। बलरामपुर सौभाग्यशाली है कि चीनी मिल द्वारा प्लास्टिक जैसे एक मैटीरियल का निर्माण हो रहा है, जो उपयोग के बाद मिट्टी में मिल जाएगा। देश का सबसे युवा राज्य है यूपी मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यूपी की पहचान सबसे ज्यादा निवेश, रोजगार, देश के सबसे युवा राज्य के रूप में हो रही है। यूपी को अयोध्या, काशी, मां पाटेश्वरी, मां शाकम्भरी, नैमिषारण्य, श्रावस्ती, जैन तीर्थंकरों की भूमि के रूप में नई पहचान मिल रही है। यह सम्मान आपको इसलिए मिल रहा है, क्योंकि आपने अच्छे जनप्रतिनिधियों को चुनकर भेजा है। आपने कैलाशनाथ शुक्ला, राम प्रताप वर्मा, पलटूराम को जिताया।  तुलसीपुर गैसड़ी बॉर्डर पर जनसभा की बड़ी वजह मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मैं गैसड़ी और तुलसीपुर विधानसभा के बॉर्डर पर आया हूं। मैं 2007 में तुलसीपुर आया था, तब मांग हो रही थी कि मथुरा घाट में राप्ती नदी पर पुल बने। जैसे ही आपने कैलाश नाथ शुक्ला को तुलसीपुर से विधायक बनाया, मथुरा घाट पर भी पुल की स्वीकृति मिल चुकी है। तुलसीपुर और बलरामपुर में विकास हो रहा है। गैसड़ी में शैलेंद्र सिंह शैलू विधायक होते तो तेजी से विकास लाते। अच्छे लोग चुनेंगे तो अच्छे परिणाम आएंगे। जब आप परिवारवाद से ऊपर उठे और सत्ता परिवर्तन किया तो सरकार ने गरीब को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा। विकास, सुरक्षा व सुशासन दिया। विश्वविद्यालय दिया, गरीब बच्चों को स्कॉलरशिप दी। बलरामपुर की उपलब्धियां और पर्यावरण संरक्षण का संदेश मुख्यमंत्री ने बलरामपुर की उपलब्धियों के साथ पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस हमें प्रेरित करता है कि जल है तो कल है। अगर हम जलस्रोत गंदा करते हैं या वन की कटान करते हैं तो पर्यावरण की क्षति होती है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की कीमत मानव को चुकानी होगी। आज तुलसीपुर को 300 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। नौ वर्ष पूर्व यह आकांक्षात्मक जनपद था। नीति आयोग के मानकों में देश के सबसे पिछड़े जनपदों में यह जिला था। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने डबल स्पीड से काम किया तो यह जनपद विकसित होने की ओर तेजी से बढ़ा है। सीएम योगी ने कहा कि एक समय बलरामपुर में बिजली, सड़क, सरयू राष्ट्रीय परियोजना, मेडिकल कालेज या हर घर नल योजना साकार होने के बारे में कोई सोच नहीं सकता था। किसी ने थारू संग्रहालय या मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय बनाने की बात नहीं सोची होगी। हमने मां पाटेश्वरी के नाम पर विश्वविद्यालय बनाया। अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर मेडिकल कालेज का निर्माण और नानाजी देशमुख की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखते हुए थारू संग्रहालय बनाया। वनटांगिया गांवों के लोगों को आवासीय या जमीन के पट्टे देकर नागरिकता दी। आज थारू जनजाति के लोगों के पास अपना मकान और बच्चों के लिए स्कूल है।  सर्वाधिक नामांकन बलरामपुर में हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष सर्वाधिक नामांकन बलरामपुर में हुए हैं। यह शुभ लक्षण है। सीमावर्ती जनपद होने के नाते, विकास की प्रक्रिया के साथ तेजी से बढ़ रहा बलरामपुर विकास का मॉडल बन रहा है। बलरामपुर में विकास परियोजनाओं का शिलान्यास/लोकार्पण कुल परियोजनाएं: 126 लोकार्पण: 89 शिलान्यास: 37 कुल लागत: 392.25 करोड़ लोकार्पण की योजनाओं की लागत: 301.50 करोड़ शिलान्यास वाली योजनाओं की … Read more

सरकारी नौकरी के नियमों में बड़ा बदलाव, दो से अधिक बच्चों पर रोक; प्रोबेशन पूरा होते ही ऑटो परमानेंट होंगे कर्मचारी

भोपाल मध्यप्रदेश सरकार छह दशक बाद सरकारी नौकरी के लिए सेवा की सामान्य शर्तें बदलने जा रही है। 1961 की सेवा शर्तों में महिला अपराध में दोषी सिद्ध होने वाले व्यक्ति को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माना गया था, लेकिन अब नैतिक पतन को इसमें शामिल किया गया है यानी हत्या, भ्रष्टाचार सहित अन्य गंभीर अपराध में दोष सिद्ध होने पर भी पात्रता नहीं रहेगी। दरअसल, परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन) समाप्त करने को लेकर भी यह स्पष्ट कर दिया गया है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने पर अधिकतम छह माह के भीतर निर्णय लेना होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो यह मान लिया जाएगा कि कोई आपत्ति नहीं है और संबंधित को शासकीय सेवा में स्थायी कर दिया जाएगा। दावा किया जा रहा है कि एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर सरकारी नौकरी के लिए अपात्रता रहेगी। हालांकि, विशेष कारण होने पर इसमें सरकार छूट दे सकती है। स्वास्थ्य परीक्षण में उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा। यदि किसी को स्वास्थ्य परीक्षण में अयोग्य घोषित कर दिया तो कोई भी इसकी अनदेखी नहीं कर सकेगा। इसमें किसी को विवेकाधिकार से निर्णय का अधिकार भी नहीं होगा। दो बच्चे से अधिक होने पर सेवा समाप्ति का प्रावधान यथावत रखा गया है। 24 साल पुराना नियम फिर बरकरार मध्य प्रदेश सरकार अपने सिविल सेवा नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 2026 का नया मसौदा जारी किया है। इस ड्राफ्ट में सबसे चर्चित बात यह है कि दो से अधिक बच्चों पर सरकारी नौकरी की पाबंदी को हटाया नहीं गया है। यह नियम मूल रूप से 2001 में तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने लागू किया था। पिछले साल खुद जीएडी ने इस पाबंदी को हटाने का प्रस्ताव बनाया था। साथ ही, मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक सहमति भी मिल गई थी। वहीं, नए ड्राफ्ट में सरकार उस फैसले से पलट गई है। दो बच्चों का नियम क्या कहता है? नए ड्राफ्ट के नियम पांच और छह के तहत पात्रता और अपात्रता की शर्तें तय की गई हैं। जिस उम्मीदवार की दो से अधिक जीवित संतानें हों और उनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद हुआ हो, वह सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होगा। जुड़वां बच्चों के मामले में भी राहत नहीं है। यदि पहले से एक बच्चा हो और अगली डिलीवरी में दो या ज्यादा बच्चे हों, तो वह उम्मीदवार अपात्र माना जाएगा। प्रोबेशन में बड़ा बदलाव नए नियमों में प्रोबेशन (Probation – परिवीक्षा काल) को लेकर एक अहम प्रावधान जोड़ा गया है। यदि किसी कर्मचारी की प्रोबेशन अवधि खत्म होने के छह महीने के भीतर विभाग कोई निर्णय नहीं लेता, तो उसे स्वतः स्थायी मान लिया जाएगा। यानी विभागीय लापरवाही का फायदा अब कर्मचारी को मिलेगा। भर्ती दो माध्यमों से होगी। सीधी भर्ती और पदोन्नति (Promotion)। वयस्क होने पर नियुक्ति से पहले मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की सहमति ली जाएगी। सीधी भर्ती से आए कर्मचारियों को प्रोबेशन पर रखा जाएगा, जिसे जरूरत पड़ने पर अधिकतम एक साल तक बढ़ाया जा सकता है। नियमों में स्पष्टता के लिए नया प्रारूप तैयार प्रदेश में शासकीय सेवा के लिए सामान्य सेवा शर्तें 1961 में निर्धारित की गई थीं। बीच-बीच में कुछ संशोधन हुए मगर विभागों को असमंजस रहता था और वे सामान्य प्रशासन विभाग से मार्गदर्शन मांगते थे। इस प्रक्रिया में अनावश्यक समय लगता था। इसे देखते हुए सरकार ने नियम में स्पष्टता के लिए नए सिरे से नियम बनाने का निर्णय लिया। विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने प्रारूप तैयार करके 15 जून तक सुझाव मांगे हैं ताकि इन्हें जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाए। अपात्रता, स्वास्थ्य परीक्षण और दो बच्चों का नियम एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर सरकारी नौकरी के लिए अपात्रता रहेगी। हालांकि, विशेष कारण होने पर इसमें सरकार छूट दे सकती है। स्वास्थ्य परीक्षण में उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा। यदि किसी को स्वास्थ्य परीक्षण में अयोग्य घोषित कर दिया तो कोई भी इसकी अनदेखी नहीं कर सकेगा। इसमें किसी को विवेकाधिकार से निर्णय का अधिकार भी नहीं होगा। दो बच्चे से अधिक होने पर सेवा समाप्ति का प्रविधान यथावत रखा गया है। वरिष्ठता और पदोन्नति का नया विन्यास वहीं, वरिष्ठता का निर्धारण चयन सूची में क्रम के अनुसार होगा न कि पदभार ग्रहण करने के आधार पर यानी जुलाई में यदि चयन होता है और कुछ अगस्त तो कुछ सितंबर में पदभार ग्रहण करते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वरिष्ठता सह उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाए गए व्यक्तियों की वरिष्ठता वही होगी जैसे उस संवर्ग में है, जिससे पदोन्नति की जाती है। परिवीक्षा अवधि को लेकर यह निर्धारित किया है कि जो अवधि शासन द्वारा निर्धारित की गई है, उसमें स्थायी करने या न करने को लेकर निर्णय लेना ही होगा। सीनियरिटी का नया फॉर्मूला एक ही साल में सीधी भर्ती, अनुकंपा नियुक्ति और पदोन्नति से लोग आते हैं तो सीनियरिटी का क्रम इस तरह होगा। पहले सीधी भर्ती वाले, फिर अनुकंपा नियुक्ति वाले और आखिर में पदोन्नति वाले। वहीं, यदि तीनों का नियुक्ति आदेश एक ही तारीख को निकले, तो प्रमोटेड कर्मचारी सबसे सीनियर माना जाएगा। हर साल 01 जनवरी की स्थिति में 31 मार्च तक नई ग्रेडेशन लिस्ट (Gradation List – वरिष्ठता सूची) अपडेट की जाएगी। इन 4 स्थितियों में भी नौकरी नहीं मिलेगी नए ड्राफ्ट में चार और कारण जोड़े गए हैं जिनमें उम्मीदवार अयोग्य माना जाएगा। पहला, एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर (विशेष मामलों में छूट संभव)। दूसरा, शारीरिक या मानसिक रूप से अनफिट पाए जाने पर। तीसरा, नैतिक अधोपतन या चारित्रिक मामलों में दोषी होने पर। चौथा, केंद्र, राज्य या किसी स्थानीय निकाय से पहले बर्खास्त हो चुके कर्मचारी भी अपात्र होंगे। इसके अलावा ड्राफ्ट में पांच परिस्थितियों में सेवा समाप्त करने का भी प्रावधान है: उपयुक्त शासकीय सेवक न पाए जाने पर, जरूरी योग्यता या दक्षता न होने पर, असंतोषजनक प्रदर्शन पर, विभागीय परीक्षा पास न करने पर और नियुक्ति के समय झूठी जानकारी देने पर। FIR वाले नियम पर उठा सवाल ड्राफ्ट के एक नियम पर विवाद खड़ा हो गया है। प्रावधान है कि किसी उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामला … Read more

IAS अशोक खेमका को राहत: हाई कोर्ट ने समानता के आधार पर दिया बड़ा निर्णय

चंडीगढ़  हरियाणा कैडर के चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के उन आदेशों को निरस्त कर दिया, जिनके जरिये खेमका को भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर पर एंपैनल किए जाने का लाभ देने से इनकार कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने समान परिस्थितियों वाले कई अन्य आईएएस अधिकारियों को नियमों में छूट देकर यह लाभ दिया है तो अशोक खेमका को इससे वंचित रखना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने 29 मई 2026 को यह फैसला सुनाया। अशोक खेमका 1991 बैच के आईएएस अधिकारी थे। वर्ष 2010 में उन्हें भारत सरकार में संयुक्त सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था। वर्ष 2019 में उनके बैच के कई अधिकारियों को अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर पर एंपैनल कर दिया गया, लेकिन खेमका को यह लाभ नहीं मिला। केंद्र सरकार ने कहा था कि उन्होंने भारत सरकार में उप सचिव या उससे ऊपर के पद पर कम से कम तीन वर्ष की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पूरी नहीं की है, इसलिए वे पात्र नहीं हैं। खेमका ने इस निर्णय को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में चुनौती दी। उनका तर्क था कि केंद्र सरकार ने पहले भी कई आईएएस अधिकारियों को इस शर्त में छूट देकर अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर पर एंपैनल किया है, जबकि उनके पास भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का आवश्यक अनुभव नहीं था। उन्होंने 20 ऐसे अधिकारियों की सूची पेश की, जिनमें पंजाब, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, राजस्थान और अन्य राज्यों के आईएएस अधिकारी शामिल थे। इनमें से कई अधिकारियों को शून्य केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अनुभव के बावजूद अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था। हाई कोर्ट ने पाया कि केंद्र सरकार ने याचिका में उठाए गए इन तथ्यों का कोई प्रभावी खंडन नहीं किया। अदालत ने कहा कि यदि नियमों में छूट देने की शक्ति मौजूद है और उसका उपयोग अन्य समान अधिकारियों के पक्ष में किया गया है, तो अशोक खेमका को वही लाभ नहीं देना स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि खेमका का दावा खारिज होने के बाद भी तमिलनाडु कैडर के 1992 बैच के आईएएस अधिकारी जे राधाकृष्णन को इसी प्रकार की छूट देकर अतिरिक्त सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था। हालांकि, अदालत ने माना कि खेमका अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उन्हें केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति का वास्तविक लाभ नहीं दिया जा सकता। फिर भी हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि भविष्य में जिन आयोगों, प्राधिकरणों, ट्रिब्यूनलों या अन्य पदों पर नियुक्ति के लिए अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर पर एंपैनल होना वांछनीय या प्राथमिक योग्यता माना जाता है, वहां अशोक खेमका को भी उसी स्तर का अधिकारी माना जाएगा और उन्हें एंपैनल अतिरिक्त सचिव/सचिव के समान दर्जा दिया जाएगा। इस प्रकार अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें भविष्य की नियुक्तियों और अवसरों के लिए समान अधिकार प्रदान कर दिए।

SAIL-BHEL पर संकट: कमजोर प्रदर्शन के बाद महारत्न दर्जे पर सवाल

बोकारो  भारत सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों Steel Authority of India Limited (SAIL) और Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) का महारत्न दर्जा खतरे में पड़ सकता है। बीते तीन वर्षों के वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा के बाद केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय और लोक उद्यम विभाग (डीपीई) ने दोनों कंपनियों को चेतावनी नोटिस जारी कर वित्तीय स्थिति में सुधार लाने का निर्देश दिया है। सूत्रों के अनुसार, नोटिस की अवधि एक वर्ष निर्धारित की गई है। इस दौरान कंपनियों के प्रदर्शन पर लगातार नजर रखी जाएगी। एक वर्ष बाद पुनः समीक्षा की जाएगी और यदि निर्धारित वित्तीय मानकों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो दोनों कंपनियों का महारत्न दर्जा वापस लेकर उन्हें नवरत्न श्रेणी में रखा जा सकता है। 5 हजार करोड़ रुपये का चाहिए वार्षिक लाभ सरकार के नियमों के मुताबिक किसी कंपनी को महारत्न का दर्जा बनाए रखने के लिए लगातार तीन वर्षों में औसतन कम से कम 5,000 करोड़ रुपये का वार्षिक शुद्ध लाभ अर्जित करना आवश्यक है। बताया जा रहा है कि सेल इस अनिवार्य मानक को पूरा नहीं कर सकी है, जिसके कारण उसे चेतावनी नोटिस जारी किया गया है। वहीं, भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन संचालित भेल को भी अपेक्षित वित्तीय प्रदर्शन नहीं कर पाने के कारण लोक उद्यम विभाग की ओर से चेतावनी दी गई है। विभाग ने कंपनी प्रबंधन को लाभप्रदता और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है। सेल को 2010 और भेल को 2013 में मिला था दर्जा गौरतलब है कि सेल को मई 2010 में तथा भेल को फरवरी 2013 में नवरत्न से पदोन्नत कर महारत्न का दर्जा प्रदान किया गया था। महारत्न का दर्जा मिलने से कंपनियों को निवेश और व्यावसायिक निर्णयों में अधिक स्वायत्तता प्राप्त होती है। ऐसे में यह दर्जा बनाए रखना दोनों सार्वजनिक उपक्रमों के लिए प्रतिष्ठा और कारोबारी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

राजगीर क्रिकेट स्टेडियम की डेडलाइन तय, खेल ढांचे को मिलेगा बड़ा विस्तार

पटना बिहार में खेलों के विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खेल विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य में अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए ओलंपिक स्तर की सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि बिहार के खिलाड़ी राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें। लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में आयोजित बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने खेल अवसंरचना, खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों को खेल परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का निर्देश दिया गया। राजगीर क्रिकेट स्टेडियम के लिए तय हुई डेडलाइन मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राजगीर में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण 31 दिसंबर 2026 तक हर हाल में पूरा किया जाए। इसके साथ ही पटना के डुमरी खेल परिसर में विभिन्न खेलों के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम विकसित करने की योजना को भी तेजी से आगे बढ़ाने को कहा। गांवों तक पहुंचेगी खेल सुविधाएं बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य की 8053 ग्राम पंचायतों में से 4700 पंचायतों में 5266 खेल मैदानों का निर्माण पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने शेष खेल मैदानों के निर्माण कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए पंचायत स्तर पर खेल सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। मुख्यमंत्री ने VB-G RAM G (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन, ग्रामीण) के माध्यम से पंचायतों में खेल मैदानों के निर्माण पर भी जोर दिया। खिलाड़ियों को मिलेगा हर संभव सहयोग मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत प्रोत्साहित कर रही है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करने के साथ-साथ उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, खेल उपकरण, कोचिंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी माहौल देने के लिए खेल प्रशिक्षण केंद्रों को और मजबूत किया जाए तथा ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। मोइनुल हक स्टेडियम के पुनर्विकास पर जोर बैठक में मुख्यमंत्री ने पटना स्थित मोइनुल हक स्टेडियम के पुनर्विकास कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर परियोजना को गति दी जाए। इसके अलावा स्टेडियम तक बेहतर सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया, ताकि बड़े खेल आयोजनों के दौरान यातायात और भीड़ प्रबंधन में किसी तरह की समस्या न हो। पंचायतों में खेल संस्कृति विकसित करने की तैयारी मुख्यमंत्री ने पंचायत स्तर पर नियमित खेल उत्सव और प्रतियोगिताएं आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत खेल क्लबों के माध्यम से पूर्व खिलाड़ियों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों को जोड़कर खेल संस्कृति को मजबूत किया जाए। साथ ही जिला और प्रखंड स्तर पर खेल भवन-सह-व्यायामशालाओं तथा आउटडोर स्टेडियमों के निर्माण कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, खेल विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

बारिश ने दी गर्मी से राहत, हरियाणा के 16 जिलों में बरसे बादल, 7 में आज भी चेतावनी

हिसार. प्रदेश में तेजी से मौसम बदल रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से वीरवार शाम के बाद 16 जिलों में वर्षा हुई। शुक्रवार को भी जींद में वर्षा से मौसम सुहावना हो गया। मौसम विज्ञानियों ने शनिवार को भी सात जिलों में वर्षा का अलर्ट जारी किया है। वीरवार को हुई वर्षा के चलते तापमान में तीन से चार डिग्री तक कमी आई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार छह जून तक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। उसके बाद सात से 10 जून तक मौसम साफ रहने की उम्मीद है। 11 जून से फिर से नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण वर्षा की संभावना बन रही है। विज्ञानियों के अनुसार वीरवार और शुक्रवार को हुई वर्षा के कारण तापमान में कमी आई है। तापमान तीन से चार डिग्री तक कम हुआ है। साथ ही कुछ जिलों में वीरवार को आए रेत के तूफान के कारण बिजली के खंभे भी टूट गए थे। इससे बिजली सप्लाई बाधित हुई जिसे रात तक ठीक किया गया है। वर्षा का यलो अलर्ट : हिसार, फरीदाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़ व रेवाड़ी। वर्षा (मिलीमीटर में)     अंबाला : 0.8     हिसार : 1.7     करनाल : 7.6     नारनौल : 6.5     भिवानी : 4     चरखी दादरी : 0.5     गुरुग्राम : 10     जींद : 1.7     महेंद्रगढ़ : 7     पलवल : 34     रोहतक : 1.5     सोनीपत : 15.5     यमुनानगर : 7.5     मेवात : 3.5 तापमान (डिग्री सेल्सियस में)      जिला न्यूनतम  अधिकतम अंबाला                     24.8       37.3 भिवानी                     20.5       41.5 फरीदाबाद                   26.7       37.4 गुरुग्राम                     26.1       35.5 हिसार                      25.8       39 करनाल                     22.5       36.2 नारनौल                     20.5       40 रोहतक                     22.8       43.6

चोरी से परेशान किसान बोले- बार-बार नुकसान क्यों? QR कोड दो, रकम सीधे ले जाओ

फरीदकोट. फरीदकोट के गांव पक्की कलां में ट्यूबवेल मोटरों की लगातार हो रही चोरियों से परेशान किसानों ने चोरों को ही एक अनोखा प्रस्ताव दे दिया है। किसानों का कहना है कि चोर उनकी मोटरें चोरी करने की बजाय खेतों में अपना यूपीआई (UPI) स्कैनर या क्यूआर कोड लगाकर चले जाएं, वे आपस में पैसे इकट्ठे करके उनके खाते में डाल देंगे, लेकिन उनकी कृषि मशीनरी को नुकसान न पहुंचाया जाए। यह अनोखी अपील उस समय सामने आई जब बीती रात चोरों ने गांव के खेतों से करीब 25 ट्यूबवेल मोटरें चोरी कर लीं। एक ही रात में बड़ी संख्या में मोटरों की चोरी के बाद किसानों ने अपना रोष और बेबसी जाहिर करने के लिए एक पोस्टर तैयार किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पीड़ित किसानों का कहना है कि धान की रोपाई के महत्वपूर्ण समय में मोटरों की चोरी उनके लिए बड़ा संकट बन जाती है। मोटरों के गायब होने से सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होती है और फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। उनका आरोप है कि बार-बार हो रही चोरियों के बावजूद न तो पुलिस और न ही प्रशासन इस समस्या पर प्रभावी रोक लगा सका है। गांव के किसानों ने कहा कि हर साल ऐसी घटनाओं के कारण उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मोटरों की चोरी से फसलों का पूरा चक्र प्रभावित हो जाता है और मानसिक तनाव भी बढ़ता है। इसी कारण वे मजबूरी में यह कहने को विवश हुए हैं कि चोर मोटरों को हाथ न लगाएं और बदले में पैसे ले जाएं। गांव के किसान और मजदूर रात के समय खेतों में बने कमरों में रहकर मोटरों की रखवाली करते थे, लेकिन अब चोरी करने वाले गिरोहों के हथियारबंद होने के कारण लोग डर महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि अंधेरा होते ही खेत सुनसान हो जाते हैं और किसान अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। बताया जा रहा है कि ये चोरी करने वाले गिरोह 10 से 12 सदस्यों के होते हैं और चोरी की गई मोटरों को तोड़कर कबाड़ियों को बेच देते हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पहले भी ऐसे मामलों में कुछ चोरीशुदा मोटरें कबाड़ियों से बरामद की जा चुकी हैं। किसानों की यह अनोखी अपील उनकी बेबसी और कृषि उपकरणों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाती है, जिसने इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

फुहारों से बदला मौसम का मिजाज, बस्तर समेत कई इलाकों में 5 दिन तक राहत के आसार

रायपुर. छत्तीसगढ़ में बस्तर समेत कई इलाकों में प्री मानसून बारिश शुरू हो गई है. राजधानी रायपुर को अभी राहत देने वाली बारिश का इंतजार है. मध्य इलाके- बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है. इन क्षेत्रों में 42 डिग्री के करीब तापमान दर्ज हो रहा है. मौसम विभाग ने संभावना जताई कि प्रदेश में अगले 5 दिनों तक एक-दो स्थानों पर मेघगर्जन की गतिविधि के साथ तेज हवा, वज्रपात और वर्षा जारी रहेगी. मौसम विभाग ने बताया कि पिछले 24 घंटों में एक दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हुई. इस दौरान सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान बिलासपुर में 42.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं सबसे कम न्यूनतन तापमान 23.4 पेंड्रा रोड में दर्ज हुआ. रायपुर में आज ऐसा रहेगा मौसम ? रायपुर में शनिवार को मौसम विभाग ने आसमान में बादल छाए रहने, गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है. हालांकि अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है. इन इलाकों में हुई बारिश जानकारी के अनुसार प्रदेश के ओडगी में 5 सेंटीमीटर, कुआकोंडा में 4 सेंटीमीटर, बड़े बचेली में 3 सेंटीमीटर, सुकमा, बलरामपुर, तोंगपाल, कांसाबेल, मनोरा में 2-2 सेंटीमीटर बारिश हुई है. चिरमिरी, गादीरास, छिंदगढ़ में भी बारिश हुई. मौसम विज्ञानी एच.पी. चंद्रा ने जानकारी दी  कि छत्तीसगढ़ में लगातार नमी आ रही है. बस्तर में वर्षा भी हो रही है. मानसून के लिए तय मानकों के अनुरूप वर्षा होने और परिस्थितियों पर नजर है. मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल हालात मौसम विभाग के अनुसार अगले 2-3 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के मध्य अरब सागर के कुछ और हिस्सों, पूरे गोवा, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश के कुछ हिस्सों, कर्नाटक के कुछ और हिस्सों, तमिलनाडु के शेष हिस्सों, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, पश्चिम-मध्य, पूर्व मध्य और उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों और पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं. पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है और यह समुद्र तल से 1.5 किलोमीटर ऊपर तक फैला हुआ है. प्रदेश में एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है.