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वेतन बढ़ोतरी के साथ नई सौगात, छुट्टी के दिन का भी मिलेगा भुगतान; 8 घंटे की ड्यूटी तय

चंडीगढ़  चंडीगढ़ से बड़ी खबर सामने आ रही है। चंडीगढ़ के कर्मचारियों के लिए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। चंडीगढ़ में कर्मचारियों की सैलरी 6% से 10% तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। इससे चंडीगढ़ प्रशासन के अधीन नियमित सैलरी और आउटसोर्सिंग के जरिए काम कर रहे 20 हजार कर्मचारियों कोबड़ा लाभ मिलने वाला हैं। इसके लिए प्रशासन ने 2026-27 के लिए नई DC रेट जारी कर दिए हैं। ये नए आदेश 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गए हैं, जो 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगे। प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक मंथली बेसिस पर रखे कर्मचारियों को सरकारी छुट्टियों के दिनों का भी पूरा वेतन मिलेगा। इसके अलावा, पांच साल से काम कर रहे कर्मचारियों को मूल DC रेट पर 2% अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। Chandigarh  ऐसे में अब सबसे कम सैलरी वॉच रूम ड्यूटी ऑपरेटर की 18,058 रुपए और सबसे अधिक साइकियाट्रिस्ट की 86,703 रुपए मासिक तय की गई है। इसके अलावा ड्यूटी का टाइम 8 घंटे का रहेगा। 5 साल पूरा करने वालों को ऐसे मिलेगा फायदा प्रशासन की तरफ से ये दरें संशोधित कर 560 से अधिक श्रेणियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बढ़ाई गई हैं। नोटिफिकेशन के मुताबिक, जो कर्मचारी 31 मार्च 2026 तक अपने पद पर 5 साल की निरंतर सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें मूल डीसी रेट पर 2% अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। खास बात यह है कि यदि इस दौरान उनका ठेकेदार या एजेंसी बदली भी है, तो भी उनकी नौकरी को निरंतर माना जाएगा। इस अतिरिक्त 2% लाभ की गणना वित्तीय वर्ष 2025-26 के वेतन के आधार पर की जाएगी। ऐसे मिलेगा फायदा प्रशासन की तरफ से मिली जानकारी के अनुसार, ये दरें संशोधित कर 560 से अधिक श्रेणियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बढ़ाई गई हैं। नोटिफिकेशन के मुताबिक, जो कर्मचारी 31 मार्च 2026 तक अपने पद पर 5 साल की निरंतर सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें मूल डीसी रेट पर 2% अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, यदि इस दौरान उनका ठेकेदार या एजेंसी बदली भी है, तो भी उनकी नौकरी को निरंतर माना जाएगा। इस अतिरिक्त 2% लाभ की गणना वित्तीय वर्ष 2025-26 के वेतन के आधार पर की जाएगी। नहीं बढ़ा वेतन आदेश के मुताबिक, कुछ श्रेणियां ऐसी भी हैं जिनके वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इनमें असिस्टेंट लेक्चरर, बेयरर, क्लॉक रूम अटेंडेंट, कंसल्टेंट, डेस्क हेल्पर, गेस्ट ट्रेनर और टैक्स कलेक्टर जैसे पद शामिल हैं। Chandigarh News प्रशासन का कहना है कि इनका ग्रेड पे 7वें वेतन आयोग में उपलब्ध नहीं होने और संबंधित विभागों से कोई सिफारिश न आने के कारण फिलहाल इनके रेट पुराने (वित्तीय वर्ष 2025-26) वाले ही रखे गए हैं। इन कर्मचारियों का नहीं बढ़ा वेतन आदेश के मुताबिक, कुछ श्रेणियां ऐसी भी हैं जिनके वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इनमें असिस्टेंट लेक्चरर, बेयरर, क्लॉक रूम अटेंडेंट, कंसल्टेंट, डेस्क हेल्पर, गेस्ट ट्रेनर और टैक्स कलेक्टर जैसे पद शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि इनका ग्रेड पे 7वें वेतन आयोग में उपलब्ध नहीं होने और संबंधित विभागों से कोई सिफारिश न आने के कारण फिलहाल इनके रेट पुराने (वित्तीय वर्ष 2025-26) वाले ही रखे गए हैं। हालांकि, विभाग से ब्योरा मिलने पर इनकी समीक्षा की जा सकती है। पंजाब सरकार आउटसोर्स मुलाजिम करेगी पक्के पंजाब सरकार ने ग्रुप सी और ग्रुप डी की नौकरियों में (आउटसोर्सिंग) व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने जा रही है। सरकार इसके लिए दो कानून 'पंजाब राज्य आउटसोर्स्ड पर्सनल विधेयक-2026' और 'पंजाब कॉन्ट्रैक्चुअल पर्सनल विधेयक-2026' को मंजूरी दी है। इससे रज्य के 65,000 कर्मचारियों को लाभ होगा। राज्य के 51 सरकारी विभागों में काम कर रहे कच्चे और आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे सरकारी अनुबंध के दायरे में लाया जाएगा। इससे अब वेतन किसी तीसरे ठेकेदार के बजाय सीधे कर्मचारियों के बैंक खाते में आएगा, जिससे कमीशनखोरी और शोषण बंद होगा। भविष्य में इन पदों पर कोई भी भर्ती ठेके पर नहीं होगी। सीवरमैन, फायरमैन और सफाई सेवक जैसे जोखिम भरे पदों के कर्मचारी 3 वर्ष और अन्य श्रेणियों के कर्मचारी 5 वर्ष की सेवा के बाद सीधे सरकारी अनुबंध के पात्र होंगे। इस अनुबंध पर 10 वर्ष पूरे करने के बाद उन्हें स्थायी (नियमित) किया जाएगा। इन कर्मचारियों को अब मातृत्व लाभ और हर साल 10 दिनों की कैजुअल लीव मिलगी।

हवारा की पैरोल याचिका पर सुनवाई, अदालत ने दिल्ली और NCT प्रशासन से मांगा जवाब

चंडीगढ़  पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में दोषी करार दिए गए जगतार सिंह हवारा की पैरोल याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली के डायरेक्टर जनरल (प्रिज़न) को नए सिरे से नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि पूर्व में जारी नोटिस के बावजूद दिल्ली जेल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि चंडीगढ़ प्रशासन और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) पहले ही अपना-अपना जवाब दाखिल कर चुके हैं। वहीं, दिल्ली जेल प्रशासन की ओर से जवाब न आने पर अदालत ने दोबारा नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 6 जुलाई के लिए निर्धारित कर दी। दोबारा आतंकी संगठन से जुड़ सकते हैं हवारा इससे पहले सीबीआई ने जगतार सिंह हवारा की पैरोल याचिका पर जवाब दाखिल करते हुए उसकी रिहाई का विरोध किया। एजेंसी ने कहा कि यदि हवारा को पैरोल दी जाती है तो उसके फरार होने और दोबारा आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ने की आशंका है। सीबीआई ने कहा कि वह पहले भी जेल से फरार हो चुका है। वर्ष 2004 में हवारा और उसके साथियों ने सुरंग खोदकर बुरैल जेल से फरार होने में सफलता हासिल की थी। हवारा का बब्बर खालसा जैसे आतंकी संगठनों से संबंध हालांकि उसे करीब एक साल बाद दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया था। हवारा का संबंध बब्बर खालसा इंटरनेशनल जैसे आतंकी संगठनों से रहा है। उसके आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए उसे किसी भी सूरत में पैरोल नहीं दी जानी चाहिए। हवारा ने मां की सेवा के लिए मांगी पैरोल हवारा ने अपनी वृद्ध और बीमार मां की देखभाल के लिए चार सप्ताह की पैरोल देने की मांग की है। याचिका में उसका कहना है कि वह पिछले लगभग 28 वर्ष 9 माह से जेल में बंद है और इस दौरान उसने कभी पैरोल की मांग नहीं की। उसने यह भी दावा किया कि उसके पैतृक गांव हवारा कलां (जिला फतेहगढ़ साहिब) की पंचायत ने भी पैरोल दिए जाने के पक्ष में सहमति व्यक्त की है। ऐसे में मानवीय आधार पर उसे अस्थायी रिहाई प्रदान की जानी चाहिए।  सीबीआई ने जताया विरोध हालांकि सीबीआई ने हाई कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में हवारा की पैरोल का जोरदार विरोध किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि यदि उसे पैरोल दी जाती है तो उसके फरार होने की गंभीर आशंका है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि हवारा वर्ष 2004 में चंडीगढ़ की बुडैल जेल से अपने साथियों के साथ सुरंग बनाकर फरार हो चुका है। बाद में उसे लगभग एक वर्ष बाद दोबारा गिरफ्तार किया गया था। ऐसे में उसके पिछले आचरण को देखते हुए उसे पैरोल देना सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं होगा। सीबीआई ने यह भी कहा कि हवारा का संबंध प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से रहा है। एजेंसी के अनुसार पैरोल मिलने की स्थिति में उसके दोबारा अलगाववादी और आतंकवादी तत्वों के संपर्क में आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उसके आपराधिक रिकॉर्ड और सुरक्षा संबंधी जोखिमों को देखते हुए किसी भी परिस्थिति में पैरोल नहीं दी जानी चाहिए। 6 जुलाई को होग अगली सुनवाई दूसरी ओर, चंडीगढ़ प्रशासन ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि हवारा वर्तमान में दिल्ली की मंडोली जेल में बंद है। इसलिए पैरोल से संबंधित किसी भी मांग पर विचार करने का अधिकार क्षेत्र दिल्ली प्रशासन और वहां की जेल अथॉरिटी के पास है। प्रशासन ने कहा कि हवारा को अपनी पैरोल संबंधी मांग संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष उठानी चाहिए। अब इस मामले में सभी पक्षों के जवाब आने के बाद हाई कोर्ट 6 जुलाई को अगली सुनवाई में पैरोल याचिका पर आगे विचार करेगा।  

पूजा सिंघल दंपती ने कोर्ट के निर्देश पर सरेंडर किए पासपोर्ट, विदेश यात्रा से लौटने के बाद कार्रवाई

रांची ईडी कोर्ट में मनी लांड्रिंग में आरोपित आइएएस पूजा सिंघल और उनके पति अभिषेक झा ने बुधवार को अपना पासपोर्ट जमा कर दिया। दोनों हाल ही में सिंगापुर से लौटे हैं, जहां वे अपनी बेटी के इलाज के लिए गए थे। इससे पहले पूजा सिंघल और अभिषेक झा ने अदालत में याचिका दाखिल कर पासपोर्ट रिलीज करने तथा विदेश यात्रा की अनुमति मांगी थी। याचिका में बताया गया था कि उनकी बेटी गंभीर न्यूरोलाजिकल बीमारी से पीड़ित है और उसके इलाज के लिए सिंगापुर जाना आवश्यक है। अदालत ने उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति देते हुए शर्त रखी थी कि वे 31 मई तक रांची लौट आएंगे और वापसी के एक सप्ताह के भीतर अपना पासपोर्ट अदालत में जमा करेंगे। अदालत के आदेश का अनुपालन करते हुए दोनों बुधवार को अपना पासपोर्ट जमा कर दिया। चिल्ड्रेन कोर्ट से हत्या के मामले में नाबालिग बरी चिल्ड्रेन कोर्ट ने हत्या के मामले के नाबालिग आरोपित को बुधवार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपित के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सका। इसलिए उसे संदेह का लाभ दिया जाता है। घटना को लेकर युवती के पिता ने 23 मई 2024 को लापुंग थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोप लगाया गया था कि बेटी नाबालिग लड़के से बातचीत करती थी। 15 मई 2024 को घर से सहेली के मिलने के निकली, लेकिन वापस नहीं आई। पिता ने हत्या करने का आरोप लगाते हुए नाबालिग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना के समय उसकी उम्र करीब 17 वर्ष पाई गई, जिसके कारण उसका मामला अलग कर चिल्ड्रेन कोर्ट में चलाया गया। बैटरी चोरी के मामले में पांच आरोपित बरी न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मयंक मलियाज की अदालत ने टेलीकाम टावर से बैटरी चोरी के मामले में लगभग दो वर्ष तक चली सुनवाई के बाद पांच आरोपितों को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष एक भी गवाह पेश नहीं कर सका। मामले से शहनवाज, साजिद अंसारी, रिजवान, आर्यन खान तथा नायर आलम को बरी किया गया। मामला नामकुम (खरसीदाग ओपी) थाना से जुड़ा था। प्राथमिकी के अनुसार 26 जुलाई 2024 की रात करीब 2:30 बजे एक टेलीकाम टावर के शेल्टर का ताला तोड़ कर वहां रखी 48 बैटरियों में से 24 एक्साइड बैटरियां अज्ञात चोरों द्वारा चोरी कर ली गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को गवाह प्रस्तुत करने के लिए कई अवसर दिए गए। अदालत ने समन, वारंट, एसएसपी को पत्र और अंतिम अवसर तक प्रदान किया, लेकिन इसके बाद एक भी गवाह अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि यह नो एविडेंस का मामला है। दहेज उत्पीड़न मामले में पुनरीक्षण याचिका खारिज न्यायायुक्त की अदालत ने वैवाहिक प्रताड़ना और दहेज उत्पीड़न के मामले में पत्नी की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें केवल पति सुखराम हजाम के संज्ञान लिया गया था। यह मामला शिकायतवाद से जुड़ा है। मामले में शिकायतकर्ता सुरेखा प्रमाणिक ने आरोप लगाया था कि पति के साथ-साथ सास-ससुर एवं अन्य ससुराल वालों ने भी उसे प्रताड़ित किया और पांच लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने दलील दी थी कि जांच के दौरान गवाहों ने सभी आरोपितों की भूमिका की पुष्टि की है। इसलिए उनके खिलाफ भी संज्ञान लिया जाना चाहिए था। लेकिन अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

बिजली बिल को नियंत्रण करने की चाबी अब आपके हाथ में, जानिए कैसे करें बचत

बिल को नियत्रंण करने की चाबी अब आपके पास भोपाल अधिकतर उपभोक्ता बिजली का बिल ज्यादा आने पर स्मार्ट मीटरों या बिजली कंपनी को शिकायत हैं जबकि वास्तविकता यह है कि उपकरणों के ज्यादा उपयोग से बिजली का बिल ज्यादा आता है। यदि आप थोड़ी सी सावधानी बरतें तो बिल ज्यादा आने की आपकी चिंता बढ़ेगी नहीं। आप चाहें तो अपने बढ़ते बिल को नियंत्रण में रख सकते हैं। बस आपको अपनी आदतों में बदलाव करना होगा। एक आंकलन के अनुसार अधिकांश शहरवासी रिमोट चलित विद्युत उपकरणों को ‘‘स्टैंडबाय’’ मोड पर छोड़़ देते हैं, जिससे उपकरण तो बंद हो जाते हैं परन्तु इनमें सतत् विद्युत प्रवाहित होती रहती है। यदि आप रिमोट से चलने वाले उपकरणों को स्विच ऑफ नहीं करते है और रिमोट से बंद करके उपकरणों को छोड़ देते हैं तो बिजली की खपत बढ़ जाती है, जिससे बिल बढ़ जाता है। एक सर्वे के अनुसार 70 फीसदी लोग टी.वी. को मैन स्विच से ऑन-ऑफ न करके रिमोट से ऑन-ऑफ करते हैं। इससे टी.वी.ऑफ होने के बावजूद भी पॉवर सप्लाई चालू रहती है। इससे 21 इंच के टी.वी. में 15 वाट का करंट निरन्तर प्रवाहित होता रहता है एवं आपके मीटर को आगे बढ़ाता रहता है, जिसके कारण इन 70 फीसदी लोगों को हर महीने लगभग 200 रूपये और हर साल 1500 रूपये का अतिरिक्त भार सहना पड़ता है। इलेक्ट्रीशियन की सलाह के अनुसार एक व्यवसायी द्वारा 1200 वॉट क्षमता के एलईडी बल्ब अपने घर में लगाने के लिए खरीद लिए गए। इसी प्रकार एलईडी ट्यूबलाईट एवं ऊर्जा दक्ष पंखे लगा लिए तो उनके घर में बिजली की 30 प्रतिशत तक बिजली बचत हुई। बिजली विशेषज्ञों के अनुसार अब तो एल.ई.डी. जैसे उपकरण बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं, उनके उपयोग से और अधिक बिजली की बचत और ज्यादा रोशनी प्राप्त हो सकती है। हर महीने लगभग 75 रूपये की चपत  म्यूजिक सिस्टम, टी.वी., ए.सी., कम्प्यूटर आदि स्टैंडबाय मोड पर 5 से 15 वॉट तक बिजली की खपत करते हैं। अगर महीने भर भी टी.वी. बंद रहे जब भी 15 वॉट के हिसाब से एक दिन में 0.36 यूनिट व 30 दिन में 10.8 यूनिट बिजली खर्च होती है। कम्प्यूटर  कम्यूटर के मॉनिटर एवं कापीअर्स को स्लीप मोड में रखने से लगभग 40 प्रतिशत ऊर्जा की बचत होती है। एलईडी मॉनिटर का प्रयोग करें यह पारंपरिक सी.आर.टी. मॉनिटर की तुलना में कम ऊर्जा खर्च करता है। यदि कम्प्यूटर को चालू रखना आवश्यक हो तो मॉनिटर अवश्य बंद रखें जो कि कुल ऊर्जा का 50 प्रतिशत से अधिक खर्च करता है। यदि एक कम्प्यूटर 24 घंटे चालू रखा जाए तो यह एक ऊर्जा दक्ष फ्रिज से अधिक विद्युत खर्च करता है। अतः उपयोग न होने पर कम्प्यूटर बंद रखें। एलईडी बल्ब वर्तमान में एलईडी बल्ब ऊर्जा बचत हेतु अतिउत्तम विकल्प है क्योंकि इनका उपयोग करके हम बिजली की बचत कर सकते हैं। एलईडी बल्ब बार-बार चालू/बंद करने से उनकी उम्र पर असर नहीं पड़ता है जबकि साधारण बल्ब जल्दी ही फ्यूज हो जाता है। एक 40 वाट के साधारण बल्ब के प्रकाश के बराबर के प्रकाश के लिए 4 से 5 वाट क्षमता के एलईडी बल्ब की आवश्यकता होती है। एलईडी बल्ब परंपरागत बल्ब की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक प्रकाश देते हैं एवं इनकी टिकाऊ होने की अवधि सामान्य बल्ब की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक है। यह कम ऊर्जा ग्रहण करते हैं और ज्यादा गर्म भी नहीं होते हैं। सीलिंग फैन वर्तमान में नियमित पंखों के स्थान पर बीईई फाईव स्टार रेटेड पंखे एवं उच्च दक्षता के पंखे उपलब्ध हैं जो कि ऊर्जा की बचत करने में सहायक होते हैं। फ्रिज  फ्रिज को दीवार, सीधे सूर्य का प्रकाश अथवा अन्य ऊष्मा देने वाले उपकरणों के पास न रखें। फ्रिज के पीछे कंडेंसर क्वाईल पर जमी धूल के कारण मोटर को अधिक कार्य करना पड़ता है एवं बिजली ज्यादा लगती है, अतः क्वाइल्स को नियमित साफ करें। फ्रीजर की नियमित डीफ्रास्टिंग आवश्यक है जिससे कूलिंग करने हेतु फ्रिज को अधिक कार्य करना पड़ता है एवं इससे अधिक ऊर्जा का अपव्यय होता है। इसके अंदर के स्थान का पूर्ण उपयोग आवश्यक है किंतु भीतर खुली हवा के सरकुलेशन के लिए जगह छोड़ना जरूरी है। इससे ऊर्जा की बचत होती है। फ्रिज के दरवाजे की गास्केट में लीकेज नहीं होना चाहिए, जिसके कारण फ्रिज हमेशा अधिक ऊर्जा खर्च करता है एवं बिजली का बिल अधिक आता है। एयर कंडीशनर्स (एसी)  26 डिग्री सेंटीग्रेड की सेटिंग पर न्यूनतम खर्च में अधिकतम समुचित आरामदेह वातानुकूलन प्राप्त होता है। पुराने एवं रिपेयर किए हुए एसी की दक्षता कम होती है। इसकी तुलना में नए ऊर्जा दक्ष एसी खरीदना बेहतर एवं किफायती है। एक अच्छा एसी लगभग 30 मिनट में एक कमरे को ठण्डक प्रदान कर देता है अतः टाइमर का प्रयोग कर एसी कुछ समय के लिए बंद कर दिया जा सकता है। इसके एयर फिल्टर्स में धूल जमा होने पर हवा का बहाव कम हो जाता है जबकि साफ फिल्टर्स से शीतलता शीघ्र प्राप्त होती है एवं बहुमूल्य ऊर्जा की बचत होती है। घर के आसपास हरियाली पेड़-पौधों की छांव रहने पर एसी द्वारा विद्युत की खपत में 40 प्रतिशत तक ऊर्जा की बचत की जा सकती है।  

खाद वितरण के नियम बदले, हरियाणा के किसानों को अब आधार वैरिफिकेशन कराना होगा जरूरी

पंचकूला. पश्चिम एशिया में छाए युद्ध संकट को देखते हुए किसानों को दी जाने डीएपी और यूरिया तथा अन्य उर्वरक की वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही है। कालाबाजारी नहीं हो इसके लिए नई प्रणाली में क्यूआर कोड और आधार सत्यापन को अनिवार्य किया जा रहा है। हरियाणा में यह योजना उत्तर प्रदेश से सटे यमुना नगर तथा राजस्थान से सटे रेवाड़ी तथा महेंद्रगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है। इसके लिए किसानों तथा कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों खाद विक्रेताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले इन जिलों को इसलिए चुनाव किया गया कि डीएपी और यूरिया वितरण करनें में शिकायत अधिक आ रही थी। दस्तावेज हरियाणा के किसानों के लगाकर राजस्थान और उत्तर प्रदेश में डीएपी यूरिया बेंच दी जाती थी। प्रदेश सरकार यही व्यवस्था अगले चरण् में पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी में है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय तथा कृषि एवं कल्याण ने फ्रेम वर्क फार फर्टिलाइजर सेल के नाम से नई डिजिटल खाद प्रणाली तैयार की है। इसके ही तहत हरियाणा के तीन जिला चुने गए हैं। यह कदम युद्ध संकट के चलते उर्वरक का आयात प्रभावित होने के चलते किया गया है। नई व्यवस्था आरंभ होने पर किसानों को पहले अपने मोबाइल एप के जरिए अग्रिम बुकिंग करनी होगी। किसान को अपनी फसल और जमीन की जानकारी दर्ज करनी होगी। बुकिंग पूरी होने पर किसान को क्यूआर कोड आधारित टोकन जारी होगा। जब किसान खाद लेने जाएगा तो डीलर पीओएस मशीन से क्यूआर कोड को स्कैन करेगा। इसके बाद आधार कार्ड आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन होने पर ही खाद देगा। प्रदेश के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा पहले ही यह कह चुके हैं कि कालाबाजारी रोकने के लिए नया सिस्टम अपनाया जा रहा है। इस योजना के लिए भी जल्द गाइडलाइन जारी कर दी जाएगी। इस व्यवस्था से किसानों को भटकना नहीं पड़ेगा और डीलर के पास मौजूदा स्टाक की रियल टाइम मानिटरिंग भी हो जाएगी। कोड स्कैन नहीं होने पर किसान को आइडी आधार नंबर और आवेदन नंबर के जरिए भी यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नई व्यवस्था में यह विकल्प इसलिए दिया गया है कि किसानों को किसी तरह की परेशानी नही हो।

अकाल तख्त साहिब में धार्मिक आयोजन का आगाज, ब्लू स्टार बरसी से पहले श्रद्धालुओं ने किया अखंड पाठ आरंभ

अमृतसर. ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी के अवसर पर 6 जून को आयोजित होने वाले श्रद्धांजलि समागम की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में वीरवार को श्री अकाल तख्त साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब का आरंभ किया गया। यह पाठ जून 1984 में श्री हरिमंदिर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब परिसर में सैन्य अभियान के दौरान मारे गए लोगों की स्मृति को समर्पित है। श्री अखंड पाठ साहिब के आरंभ अवसर पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह सहित कई धार्मिक और प्रबंधकीय हस्तियां मौजूद रहीं। इस दौरान बड़ी संख्या में संगत ने भी हाजिरी लगाई और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। धामी ने सप्ताह को बताया पीड़ादायक एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि जून का पहला सप्ताह सिख समुदाय के इतिहास का अत्यंत संवेदनशील और पीड़ादायक दौर माना जाता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1984 में तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा श्री हरिमंदिर साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब और अन्य गुरुद्वारा साहिबानों में की गई सैन्य कार्रवाई ने सिख समुदाय को गहरे घाव दिए थे। उन्होंने कहा कि इस घटना की यादें आज भी सिख मन में जीवित हैं और इन्हें भुलाया नहीं जा सकता। धामी ने कहा कि उस सैन्य अभियान के दौरान अनेक लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों को भी गोलियां लगने से नुकसान पहुंचा था। यही कारण है कि हर वर्ष इस अवधि के दौरान विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कर शहीदों और पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी जाती है। बंदी सिखों की रिहाई का मुद्दा उठाया एसजीपीसी अध्यक्ष ने इस अवसर पर बंदी सिखों की रिहाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई सिख लंबे समय से विभिन्न जेलों में बंद हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि मानवीय आधार पर ऐसे मामलों पर विचार कर उचित निर्णय लिया जाए। इस मौके पर श्री अकाल तख्त साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह, मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नन, सदस्य जत्थेदार मंगविंदर सिंह खापड़खेड़ी, सदस्य गुरचरण सिंह ग्रेवाल, मनजीत सिंह, सचिव बलविंदर सिंह काहलवां समेत एसजीपीसी के अनेक पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। जून 1984 की घटनाओं पर विशेष प्रदर्शनी बरसी कार्यक्रम के साथ-साथ जून 1984 की घटनाओं और उस दौरान हुए नुकसान को दर्शाने वाली एक विशेष फोटो प्रदर्शनी भी शुरू की गई है। गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हाल के बाहर लगाई गई इस प्रदर्शनी में उस समय की दुर्लभ तस्वीरों को प्रदर्शित किया गया है। इनमें श्री अकाल तख्त साहिब को पहुंचे नुकसान और उस दौर की परिस्थितियों को दर्शाया गया है। एसजीपीसी के अनुसार यह प्रदर्शनी 6 जून तक जारी रहेगी। संगत सुबह से शाम तक इसे देख सकेगी और इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेगी। श्रद्धांजलि समागम को लेकर धार्मिक परिसर में विशेष तैयारियां भी की जा रही हैं और बड़ी संख्या में संगत के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

अतिक्रमणकारियों पर सख्त एक्शन, वन क्षेत्र में बने 34 अवैध मकान किए गए ध्वस्त

बलरामपुर. जिले में वन भूमि पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया। संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर वन भूमि पर बने 34 अवैध मकानों को ध्वस्त कर अतिक्रमण हटाया। कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन की इस कार्रवाई को वन भूमि संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, वन भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जे की शिकायतें मिल रही थी। प्रशासन द्वारा पहले संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर भूमि खाली करने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित समय सीमा के बाद भी कब्जा नहीं हटाए जाने पर वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर 34 मकानों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति रही। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी और वन भूमि पर किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।अधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सिकल सेल उन्मूलन अभियान को दें नई गति, राज्यपाल पटेल ने दिए सघन प्रयासों के निर्देश

सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों को दें सघनता : राज्यपाल पटेल प्रत्येक मंगलवार को आंगनवाड़ी केन्द्र में सिकल सेल की जानकारी दें लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं आयुष विभाग की समीक्षा भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा की 19 जून को विश्व सिकल सेल दिवस है। उन्होंने लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और आयुष विभाग को विश्व सिकल सेल दिवस के तारतम्य में सिकल सेल उन्मूलन गतिविधियों को सघनता के साथ संचालित करने के निर्देश दिये है। उन्होने कहा कि स्क्रीनिंग, उपचार, कार्ड और दवा वितरण प्रयासों के साथ ही रोग की जागरूकता के कार्यक्रम भी आयोजित किये जाने चाहिए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन के संकल्प को पूरा करने तक हमें थकना और रूकना नहीं है। इसलिए उन्मूलन और उपचार की नियमितता की जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र में विशेष निगरानी की जाना जरूरी है। राज्यपाल पटेल गुरुवार को लोक भवन में लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और आयुष विभाग के साथ चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने प्रत्येक मंगलवार को आंगनवाड़ी केन्द्र में माता और बच्चों को सिकल सेल एनीमिया के कारण, लक्षण और उपचार से संबंधित जानकारी प्रदान करने के निर्देश दिये है। उन्होंने स्वास्थ्य और आयुष विभाग के सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों पर जिलेवार चर्चा की। राज्यपाल पटेल को स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिकल सेल स्क्रीनिंग, दवा और कार्ड वितरण आदि की विस्तार से जिलेवार जानकारी दी गई। आयुष विभाग द्वारा भी जिलेवार दवाई वितरण, परामर्श, उपचार और रोगियों से सतत संवाद के द्वारा उपचार गतिविधियों की जानकारी दी गई। राज्यपाल पटेल ने आयुष विभाग को सिकल सेल उपचार प्रयासों का रोगियों से फीडबैक प्राप्त करने के निर्देश दिए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि राज्य सरकार, सिकल सेल उन्मूलन के लिए संकल्पित है। मध्यप्रदेश सिकल सेल उन्मूलन के राष्ट्रीय स्तर के प्रयासों में अग्रणी है। यह संबंधित विभागों द्वारा सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों की सही दिशा में सार्थक कार्यों का परिणाम है। उन्होंने स्वास्थ्य और आयुष विभाग के सिकल सेल उन्मूलन कार्यों और गतिविधियों की सराहना की। सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों से जुड़े सभी वरिष्ठ अधिकारियों सहित मैदानी अमले को बधाई दी। राज्यपाल को अपर मुख्य सचिव अशोक कुमार बर्णवाल ने विश्व सिकल सेल दिवस पर खंडवा जिले में प्रस्तावित कार्यक्रम के संबंध में अवगत कराया। बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन, जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं आयुष विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और लोक भवन के अधिकारी मौजूद थे।   

आशा, संतोष और आत्मसम्मान से बदली जिंदगी, वर्षों बाद पूरी हुई बड़ी तमन्ना

बरसों का सपना हुआ पूरा अब मन में भविष्य की चिंता नहीं, आशा, संतोष और आत्मसम्मान रायपुर  एक सुरक्षित और पक्का घर हर परिवार का सपना होता है। यह सपना केवल चार दीवारों का नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का भी होता है। दुर्ग नगर निगम के उरला वार्ड की श्रीमती कुंती जगने के मन में भी वर्षों से खुद के पक्के घर का सपना पल रहा था, जो अब प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 से साकार हो गया है। श्रीमती कुंती जगने मजदूर हैं। उनके पति श्री प्रभुदास जगने मोची का काम करते हैं। सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करना ही उनके लिए बड़ी चुनौती थी। ऐसे में घर बनाना उनके लिए दूर की कौड़ी थी। कई वर्षों तक उनका परिवार किराये के मकान में रहा, जहां उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बरसात में मकान की छत से पानी टपकता था, जिससे परिवार की चिंता और परेशानी बढ़ जाती थी। बच्चों की सुरक्षा के लिए रातभर जागना पड़ता था। गर्मियों में कमरा इतना गर्म हो जाता था कि आराम से रहना और सोना भी मुश्किल हो जाता था। इन परिस्थितियों के बीच उनका परिवार हमेशा एक ऐसे घर का सपना देखता था, जहां वे सुरक्षित और सम्मानपूर्वक रह सकें। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत आवास की स्वीकृति के साथ कुंती के खुद के आशियाने के सपने को पंख मिला। दुर्ग नगर निगम के सहयोग और योजना से मिली राशि से आवास निर्माण का काम शुरू हुआ और उनके बरसों पुराने सपने को नई उड़ान मिली। मकान पूर्ण होते ही कुंती का सपना हकीकत में बदल गया। आज कुंती अपने परिवार के साथ अपने नए पक्के घर में सुखपूर्वक रह रही हैं। खुद का घर, सुरक्षित वातावरण और स्थायित्व के अहसास ने उन्हें नया आत्मविश्वास दिया है। मन में हमेशा रहने वाली भविष्य की चिंता की जगह अब आशा, संतोष और आत्मसम्मान ने ले ली है। कुंती कहती हैं, “यह केवल ईंट, सीमेंट और दीवारों से बना मकान नहीं है, बल्कि उनके संघर्ष, मेहनत और सपनों का साकार रूप है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके परिवार को न केवल पक्का घर दिया है, बल्कि सम्मान और सुरक्षित जीवन भी सुनिश्चित किया है।“ कुंती के सपने का हकीकत में बदलना प्रमाण है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं और स्थानीय निकायों द्वारा उसका प्रभावी क्रियान्वयन गरीब परिवारों के जीवन में किस तरह सकारात्मक बदलाव ला सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) ने कुंती की ही तरह अनेक परिवारों के खुद के पक्के घर के सपने को साकार कर बेहतर, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन दिया है।

नैनो उर्वरकों से बढ़ रहा किसानों का मुनाफा, कम लागत में बेहतर उत्पादन का नया मॉडल

नैनो उर्वरकों से खेती बन रही अधिक लाभकारी, किसान अपना रहे ‘कम लागत, अधिक मुनाफा’ का मॉडल नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से बढ़ रही उत्पादन क्षमता, मिट्टी की सेहत को भी मिल रहा संरक्षण रायपुर छत्तीसगढ़ में आधुनिक कृषि तकनीकों और नवाचार आधारित खेती को बढ़ावा मिलने से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की दिशा में सफल कदम बढ़ा रहे हैं। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरकों का उपयोग किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इससे खेती की लागत में कमी आने के साथ-साथ फसलों को बेहतर पोषण और मिट्टी की गुणवत्ता के संरक्षण में भी मदद मिल रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसान नैनो उर्वरकों के सकारात्मक परिणामों का अनुभव कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो तकनीक आधारित उर्वरक पौधों तक पोषक तत्वों की प्रभावी आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं, जिससे उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है और फसलों का विकास बेहतर होता है। साथ ही पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में इनके परिवहन, भंडारण और उपयोग में भी अधिक सुविधा होती है। सरगुजा जिले के प्रगतिशील किसान श्री सत्यम कुमार ने पिछले तीन वर्षों से अपनी कृषि भूमि में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग कर सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए हैं। उनके अनुभव बताते हैं कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई है तथा खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है। धान, गेहूं, सब्जियों और बाड़ी फसलों सहित विभिन्न कृषि गतिविधियों में इन उर्वरकों का सफल उपयोग किया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नैनो उर्वरकों का छिड़काव सीधे पौधों पर किया जाता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण अधिक प्रभावी ढंग से होता है। इससे उर्वरकों की बर्बादी कम होती है और फसल को आवश्यक पोषण समय पर उपलब्ध होता है। यही कारण है कि किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। नैनो उर्वरकों का उपयोग पर्यावरणीय दृष्टि से भी लाभकारी माना जा रहा है। इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायता मिलती है तथा रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है। इससे टिकाऊ एवं संतुलित कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिल रहा है। राज्य सरकार और कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। प्रशिक्षण, प्रदर्शन एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग और उनके लाभों की जानकारी दी जा रही है। इसका परिणाम है कि प्रदेश में अधिक से अधिक किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।