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छत्तीसगढ़ को मिला ‘Best Emerging Tourist Destination’ सम्मान, बस्तर-सिरपुर की खूबसूरती ने बनाई खास पहचान

रायपुर  छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पर्यटन क्षमता का लोहा मनवाया है. विशाखापट्टनम में आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (IATO) के 41वें वार्षिक सम्मेलन में प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक पर्यटन स्थलों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया. इस दौरान छत्तीसगढ़ को ‘Best Emerging Tourist Destination' सम्मान से नवाजा. यह उपलब्धि न केवल प्रदेश के बढ़ते पर्यटन विकास की पहचान है, बल्कि देश और दुनिया के पर्यटकों के बीच छत्तीसगढ़ की मजबूत होती मौजूदगी का भी संकेत है।  विशाखापट्टनम के नोवोटेल वरुण बीच में 10 से 13 सितंबर तक आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन में देशभर के पर्यटन विशेषज्ञ, ट्रैवल एजेंट्स, टूर ऑपरेटर्स और पर्यटन विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए. इस दौरान छत्तीसगढ़ ने अपनी पर्यटन विविधता को प्रमुखता से सामने रखा. सम्मेलन का मुख्य विषय भारत को वैश्विक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने पर केंद्रित रहा, जिसमें नए पर्यटन स्थलों और संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।  पर्यटन विकास के विजन को मिली नई पहचान सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की योजनाओं और संभावनाओं को विस्तार से प्रस्तुत किया. प्रदेश के प्राकृतिक स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक केंद्रों और जनजातीय संस्कृति को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए इसकी व्यापक संभावनाओं पर प्रकाश डाला. वीडियो प्रेजेंटेशन के जरिए प्रदेश की खूबसूरती और विविधता को देशभर से आए प्रतिनिधियों तक पहुंचाया।  देशभर के टूर ऑपरेटर्स को दिया आमंत्रण सम्मेलन के दौरान ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स को छत्तीसगढ़ को अपनी यात्रा योजनाओं में शामिल करने का आमंत्रण दिया. पर्यटन बोर्ड की ओर से प्रदेश में चल रही विभिन्न पर्यटन परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं की जानकारी भी साझा की गई. साथ ही यह बताया गया कि पर्यटन के माध्यम से स्थानीय समुदायों को रोजगार और आर्थिक अवसरों से जोड़ने का लगातार प्रयास किया जा रहा है।  केंद्रीय मंत्री समेत कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद सम्मेलन में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू, आंध्र प्रदेश के पर्यटन मंत्री कंदुला दुर्गेश और विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने भी सम्मेलन में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया और राज्य की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से रखा।  झरनों, जंगलों और संस्कृति की अनूठी पहचान छत्तीसगढ़ की पहचान केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है. बस्तर के जलप्रपात, घने जंगल, सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहर, दंतेवाड़ा की धार्मिक आस्था और जनजातीय संस्कृति प्रदेश को एक विशिष्ट पर्यटन गंतव्य बनाती है. यही विविधता सम्मेलन में आकर्षण का केंद्र रही और इसे छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत बताया।  पर्यटन कारोबार को मिला बढ़ावा सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के पवेलियन में बड़ी संख्या में ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स पहुंचे. यहां बी-टू-बी बैठकों के माध्यम से पर्यटन पैकेज, नए डेस्टिनेशन और व्यापारिक साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई. इससे प्रदेश में पर्यटन निवेश और पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की दिशा में नए अवसरों के द्वार खुलने की उम्मीद है।  प्रतिष्ठित सम्मान से बढ़ा प्रदेश का गौरव सम्मेलन के समापन अवसर पर छत्तीसगढ़ को ‘Best Emerging Tourist Destination' पुरस्कार से सम्मानित किया. यह सम्मान राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों और सतत विकास के प्रयासों की मान्यता के रूप में देखा जा रहा है. इस उपलब्धि ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित किया है।  पर्यटन के लिए खुलेंगी नई संभावनाएं पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि इस सम्मान और राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान से छत्तीसगढ़ में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी. इससे न केवल देश और विदेश से अधिक पर्यटक आकर्षित होंगे, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश बढ़ने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने की भी संभावना है।  नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक स्थलों, वन्यजीव संपदा और जनजातीय परंपराओं का अनूठा मेल छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों की श्रेणी में लाने की क्षमता रखता है. राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर मिली यह पहचान और ‘Best Emerging Tourist Destination' का सम्मान प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिला सकता है।   

राजस्थान निकाय चुनाव में रोचक मुकाबले, पर्ची से फैसला और एक वोट से हार-जीत

जयपुर  राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में रिश्तों के अनोखे समीकरण, नजदीकी मुकाबले और अनूठे नतीजे देखने को मिले। सुमेरपुर में कांग्रेस के देवर-भाभी (हितेश और भगवती देवी) ने जीत दर्ज की, तो नैनवां में देवर-भाभी की जोड़ी हार गई। जैसलमेर के वार्ड 34 में भतीजे शुभम शर्मा ने अपने सगे चाचा को 72 वोटों से हराया। चूरू और सुमेरपुर में पति-पत्नी की जोड़ियों ने जीत हासिल की, जबकि सीकर में पति हारा तो पत्नी विजयी रहीं। वहीं, जोधपुर (मथानिया), बांसवाड़ा (कुशलगढ़) और कोटा (सांगोद) में बराबरी का मुकाबला रहने पर पर्ची/लॉटरी से विजेताओं का फैसला हुआ। इटावा, रामगंजमंडी और फतहनगर में महज 1 वोट के अंतर से हार-जीत तय हुई। डूंगरपुर और बालोतरा में प्रत्याशी को शून्य वोट भी मिले, जबकि लूणकरनसर से पूजा बाई और लालसोट से मीनू किन्नर ने पार्षदी का चुनाव जीता। अजमेर से 21 वर्षीय बीटेक छात्रा काश्यपी सांखला की बड़ी जीत आकर्षण का केंद्र रही। पाली: देवर-भाभी की जीत और हार सुमेरपुर नगर पालिका के वार्ड 9 और 10 में कांग्रेस के देवर-भाभी ने जीत दर्ज की। वार्ड 9 से हितेश कुमार 61 वोटों से और वार्ड 10 से भगवती देवी सुमेर मीणा महज 6 वोटों से विजयी हुईं। वहीं, बूंदी जिले के नैनवां में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे देवर मुकेश मारवाड़ा और भाभी मोनिका मारवाड़ा दोनों हार गए। दोनों को निर्दलीय प्रत्याशियों ने मात दी। चूरू में पति-पत्नी जीते कांग्रेस की पूर्व उप सभापति नसीम निशा वार्ड 37 और उनके पति व पूर्व पार्षद रमजान खान वार्ड 36 से विजयी हुए। वहीं, पाली जिले के सुमेरपुर में तखतगढ़ नगर पालिका चुनाव में वार्ड 16 से कांग्रेस की सरोज मेवाड़ा 81 वोटों से और उनके पति वार्ड 19 से कांग्रेस के अनराज मेवाड़ा 63 वोटों से विजयी हुए। जैसलमेर में भतीजे ने चाचा को हराया वार्ड 34 में भाजपा के महेश शर्मा और कांग्रेस के शुभम शर्मा आमने-सामने थे। दोनों सगे चाचा-भतीजे हैं। मुकाबले में शुभम ने महेश को 72 मतों से हरा दिया। जोधपुर: बराबर मिले वोट…पर्ची से हुआ किस्मत का फैसला जोधपुर जिले के मथानिया नगरपालिका के वार्ड 7 में कांग्रेस की रिया भाटी और भाजपा की बेबी देवी को 221-221 वोट मिले। दोनों के नाम की पर्चियां निकाली गईं। रिया भाटी के नाम की पर्ची निकलने पर उन्हें विजेता घोषित किया गया। वहीं, बांसवाड़ा जिले में कुशलगढ़ के वार्ड 14 में कांग्रेस के रजनीकांत खाब्या और भाजपा के कलीमुद्दीन को 157-157 वोट मिले। एक वोट नोटा को पड़ा। लॉटरी में खाब्या विजेता रहे। कोटा जिले में सांगोद के वार्ड 5 में भाजपा के विकास मेहता और निर्दलीय सत्यनारायण गहलोत को 241-241 वोट मिले। पर्ची से निर्दलीय गहलोत विजयी। कोटा में 1 वोट से हार-जीत कोटा में इटावा के वार्ड 1 में भाजपा के रामस्वरूप को 65 और निर्दलीय विनोद कुमार को 66 वोट मिले। रामस्वरूप एक वोट से हार गए। रामगंजमंडी के वार्ड 33 में कांग्रेस के शुभम सनन को 138 और भाजपा के नरेंद्र राजा को 137 वोट मिले। एक वोट से राजा हारे। उदयपुर के फतहनगर-सनवाड़ नगर पालिका के वार्ड 1 में भाजपा के प्रकाशपुरी गोस्वामी ने कांग्रेस के नरेश को एक वोट से हराया। प्रकाशपुरी को 212 और नरेश को 211 वोट मिले, जबकि नोटा को 7 वोट पड़े। सीकर में पति हारा, पत्नी जीती सीकर के वार्ड 46 में कांग्रेस के सुरेश सैनी भाजपा की मोनिका सैनी से 105 मतों से हार गए। वहीं, वार्ड 47 से उनकी पत्नी कोमल सैनी ने भाजपा की रेखा सैनी को 505 मतों से हरा दिया। यहां प्रत्याशियों को 1-1 वोट ही मिला डीडवाना-कुचामन में परबतसर के वार्ड 13 से भाजपा प्रत्याशी कैलाश चन्द्र को महज एक वोट मिला। प्रत्याशी का परिवार वार्ड में नहीं रहता और उनका खुद का वोट भी यहां नहीं है। भाजपा प्रत्याशी और नोटा, दोनों को एक-एक वोट मिला। श्रीडूंगरगढ़ के वार्ड 29 में कांग्रेस प्रत्याशी कुसुम को सिर्फ एक वोट मिला। निर्दलीय बबिता स्वामी ने 202 वोट हासिल कर भाजपा की अंजू देवी को नौ मतों से हराया। पोकरण में सास हारी, बहू ने बाजी मारी पोकरण के वार्ड 7 में कांग्रेस की कल्पना ने भाजपा की मीनाक्षी को 49 वोटों से हराया। वहीं, वार्ड 8 में कल्पना की सास पुष्पा को भाजपा की विमला ने 79 वोटों से शिकस्त दी डूंगरपुर में 1 वोट भी नहीं मिला उम्मीदवारों को डूंगरपुर नगर परिषद के वार्ड 3 से बीएपी प्रत्याशी आशा रोत को एक भी वोट नहीं मिला। इस वार्ड से कांग्रेस के जस्सु डोडा ने 430 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। वहीं, बालोतरा जिले में सिणधरी के वार्ड संख्या 3 का में आरएलपी के उम्मीदवार ओमप्रकाश को एक भी वोट नहीं मिला। ओमप्रकाश इस वार्ड के मतदाता नहीं हैं, इसलिए खुद का वोट भी नहीं मिला। वहीं नोटा का एक वोट रहा। बीकानेर: दो वोट से किन्नर पूजा बाई जीती लूणकरनसर के वार्ड 22 में कांग्रेस की पूजा बाई किन्नर ने भाजपा के बृजलाल पुरी को महज दो वोट से हराया। दिलचस्प यह कि नगरपालिका क्षेत्र में सिर्फ दो ट्रांसजेंडर मतदाता बताए गए हैं और दोनों वार्ड 26 में हैं। दौसा में मीनू किन्नर बनी पार्षद लालसोट में वार्ड 34 से भाजपा की मीनू किन्नर ने जीत दर्ज की। 'बुआजी' के नाम से मशहूर मीनू ने पहले निर्दलीय नामांकन किया था, बाद में भाजपा ने टिकट दिया। चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व मंत्री के बयान से भी मुकाबला चर्चित रहा। अलवर: जेन-जी चेहरे भी चमके थानागाजी के वार्ड 6 में भाजपा की 21 वर्षीय नेहा शर्मा ने 101 वोट से जीत दर्ज की। नेहा को 262 वोट मिले। अजमेर के वार्ड 80 में भाजपा की 21 वर्षीय काश्यपी सांखला ने 3323 वोट लेकर 1275 वोट से जीत हासिल की। बीटेक की छात्रा काश्यपी का यह पहला चुनाव था।

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, संवेदनशील वर्गों तक पहुंच और आगामी प्राथमिकताओं पर हुई विस्तार से चर्चा

जयपुर  राज्य सरकार प्रदेश में मातृ, नवजात, शिशु एवं किशोर स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण एवं समान रूप से सुलभ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में मंगलवार को यूनिसेफ़  इंडिया के उप प्रतिनिधि जेस्पर मोलर ने मंगलवार को शासन सचिवालय में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ से मुलाकात कर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति एवं आगामी प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में मातृ, नवजात, शिशु एवं किशोर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ विशेष रूप से संवेदनशील एवं वंचित वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में राजस्थान सरकार एवं यूनिसेफ़ के बीच जारी साझेदारी को और मजबूत करते हुए नई स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान, नवाचार तथा बेहतर स्वास्थ्य परिणामों की दिशा में मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। जेस्पर मोलर ने स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद इक्विटी गैप्स पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार के पास व्यापक स्तर पर सेवाओं को पहुंचाने की क्षमता है, जबकि यूनिसेफ़ नवाचार, साक्ष्य आधारित समाधान एवं प्रभावी मॉडल उपलब्ध कराने में सहयोग कर सकता है। बैठक में इन समाधानों को बड़े स्तर पर लागू करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में लाइफ-साइकिल अप्रोच को और मजबूत करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर कन्वर्जेंस और समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य बच्चों एवं किशोरों से लेकर माताओं एवं नवजातों तक स्वास्थ्य सेवाओं को एक समग्र दृष्टिकोण के साथ मजबूत करना है। यूनिसेफ़ के उप प्रतिनिधि ने प्री-सर्विस मेडिकल एजुकेशन में बाल अधिकारों के दृष्टिकोण को शामिल करने का प्रस्ताव रखा। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया और यूनिसेफ़ से इस संबंध में विस्तृत कॉन्सेप्ट नोट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, ताकि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जा सके। मोलर ने प्रमुख शासन सचिव को राजस्थान दौरे के दौरान किशनगढ़ स्थित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट के अपने दौरे के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने यहां चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा कमजोर एवं गंभीर नवजातों की जीवन रक्षा के लिए किए जा रहे समर्पित प्रयासों को देखा और फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिबद्धता एवं सेवाभाव की सराहना की। बैठक में यूनिसेफ़ के आगामी कंट्री प्रोग्राम 2028–2032 को लेकर प्रारंभिक चर्चाओं और राजस्थान की प्राथमिकताओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। नई एवं उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने के साथ वर्तमान उपलब्धियों को बनाए रखने तथा जिन क्षेत्रों में अभी गैप हैं, उन्हें भरने के लिए यूनिसेफ़ के निरंतर सहयोग के महत्व पर जोर दिया गया। बैठक के अंत में राजस्थान सरकार एवं यूनिसेफ़ ने नवजात एवं बाल स्वास्थ्य प्रणालियों को और सुदृढ़ करने तथा प्रदेश के प्रत्येक बच्चे के लिए बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक समान रूप से पहुंचे और विशेष रूप से माताओं, नवजातों, बच्चों एवं किशोरों जैसे संवेदनशील वर्गों को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों।

सिर्फ व्यावसायिक वाहनों से लिया जाएगा टोल, निजी वाहनों को टैक्स से पूरी तरह छूट दी गई

पटना बिहार में स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स की वसूली की शुरुआत दो प्रमुख रोड से होने वाली है। इनमें बिहटा (पटना) से सरमेरा (नालंदा) के बीच स्टेट हाईवे नंबर 78 और उदाकिशुनगंज (मधेपुरा) से भटगामा के बीच एसएच 58 पर टोल नाके लगाए जाएंगे। इसके लिए बिहार सरकार ने टेंडर जारी कर दिया है। सबसे पहले इन्हीं दोनों स्टेट हाईवे से टोल वसूलने की तैयारी की जा रही है। हाईवे पर चलने वाले सिर्फ व्यावसायिक वाहनों से टोल लिया जाएगा, निजी वाहनों से किसी तरह की राशि नहीं वसूली जाएगी। इन दोनों स्टेट हाईवे पर टोल प्लाजा बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पथ निर्माण विभाग ने फैसला लिया है कि राज्य के लगभग भी स्टेट हाईवे और राज्य सरकार के अधीन पुलों पर चरणवार तरीके से टोल टैक्स वसूली की व्यवस्था लागू की जाएगी। सभी हाईवे और पुलों पर एक साथ टोल नाके नहीं लगाए जाएंगे। बल्कि, धीरे-धीरे करके यह व्यवस्था लागू की जाएगी। आरा-छपरा पुल पर भी टोल नाका लगाने की तैयारी बिहार राज्य पथ विकास निगम की ओर से स्टेट हाईवे और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की ओर से पुलों पर टोल टैक्स वसूले जाने की कार्रवाई चल रही है। पुल निगम के द्वारा प्राथमिकता के तौर पर आरा-छपरा ब्रिज समेत अन्य कुछ बड़े पुलों पर सबसे पहले टोल लिए जाने की तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है। बताया जा रहा है कि इन पुलों पर भी टोल वसूलने को लेकर एजेंसी के चयन के लिए जल्द ही टेंडर निकाला जाएगा। आरा-छपरा पुल के लिए पूर्व में भी निविदा जारी की गई थी, लेकिन अपरिहार्य कारणों से उसे वापस ले लिया गया था। अब नए सिरे से टेंडर निकाला जाएगा। 3 महीने में शुरू हो सकती है टोल वसूली पदाधिकारी बताते हैं कि अगले दो से तीन महीने के भीतर कुछ स्टेट हाईवे पर टोल वसूली का काम शुरू हो जाएगा। विदित हो कि बिहार के 55 स्टेट हाईवे और 47 पुलों पर टोल वसूले जाने की राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है।

कोर्ट ने विवाह पंजीकरण अधिकारियों को निर्देश दिया कि शादी का रजिस्ट्रेशन करने से पहले उम्र की जांच करें

प्रयागराज इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में नाबालिगों की शादी का रजिस्ट्रेशन होने पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने राज्य के सभी विवाह पंजीकरण अधिकारियों को निर्देश दिया कि शादी का रजिस्ट्रेशन करने से पहले दूल्हा और दुल्हन की उम्र की जांच की जाए। यह निर्देश गाजियाबाद में नाबालिग लड़की की शादी का रजिस्ट्रेशन होने के मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। जस्टिस तेज प्रताप तिवारी ने कहा कि नाबालिगों की शादी के रजिस्ट्रेशन के मामले सिर्फ कभी-कभार सामने नहीं आ रहे हैं, बल्कि ऐसे कई मामले देखने को मिले हैं। हाई कोर्ट ने साफ किया कि शादी के दिन अगर दूल्हा या दुल्हन में से कोई भी कानून के मुताबिक नाबालिग है, तो उस शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा सकता। इसके लिए अधिकारियों को दोनों की उम्र की जांच भरोसेमंद दस्तावेजों और तय प्रक्रिया के तहत करनी होगी। बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत 18 साल से कम उम्र की लड़की और 21 साल से कम उम्र का लड़का नाबालिग माना जाता है। हाई कोर्ट का सख्त निर्देश अदालत ने कहा कि अगर दस्तावेजों से पता चलता है कि दोनों में से कोई तय उम्र से कम है, तो आवेदन को सामान्य रजिस्ट्रेशन की तरह नहीं लिया जाए। ऐसे मामले की जानकारी तुरंत बाल विवाह निषेध अधिकारी और संबंधित जिले के सक्षम अधिकारी को दी जाए, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। मामला उस समय सामने आया जब एक व्यक्ति ने पॉक्सो कानून के तहत दर्ज मामले में हाई कोर्ट का रुख किया। आरोपी के वकील ने दावा किया कि लड़की बालिग थी और उसने अपनी मर्जी से शादी की थी। शादी के बाद उसका रजिस्ट्रेशन भी हुआ और प्रमाणपत्र जारी किया गया। राज्य सरकार की ओर से इस मामले में कहा गया कि ट्रायल कोर्ट लड़की को नाबालिग मान चुका है। सरकार ने यह भी कहा कि उम्र छिपाकर हासिल किए गए शादी के प्रमाणपत्र से लड़की के बालिग होने की पुष्टि नहीं होती। हाई कोर्ट ने संबंधित विवाह पंजीकरण अधिकारी को तलब कर पूछा कि नाबालिग लड़की की शादी का रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ। अधिकारी ने कहा कि उसने पिछले प्रभारी अधिकारी से कार्यभार संभाला था और उसे इस रजिस्ट्रेशन की जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने इस जवाब को गंभीर चिंता का विषय बताया। अदालत ने कहा कि विभागीय निर्देशों में पहले से ही दूल्हा-दुल्हन की जन्मतिथि की जांच जरूरी है।

बस रोहतक से सुबह 8:25 पर रवाना होकर गोहाना, पानीपत और जालंधर होते हुए शाम को पहुंचेगी डेरा ब्यास

 रोहतक  हरियाणा रोडवेज से पंजाब का सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर है। रोहतक से डेरा ब्यास के लिए सीधी बस सर्विस का नया टाइम टेबल सामने आया है। सोनीपत डिपो के गोहाना उपकेंद्र की बस रोहतक से सुबह आठ बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी। यह बस गोहाना, पानीपत सहित सात शहरों से होकर गुजरेगी। कहां-कहां से होकर जाएगी बसें हरियाणा रोडवेज के अनुसार, बस रोहतक से सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी। इसके बाद गोहाना, पानीपत, करनाल, अंबाला, राजपुरा, लुधियाना बाईपास, जालंधर और करतारपुर से होते हुए शाम करीब साढ़े पांच बजे डेरा ब्यास तक पहुंचेगी। किस शहर से कितने बजे मिलेगी बस रोहतक से बस 8 बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी। इसके बाद गोहाना से सुबह 9 बजे प्रस्थान करेगी। पानीपत से सुबह 10 बजे और करनाल से सुबह 11 बजे यह बस रवाना होगी। अंबाला से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी। जालंधर में शाम चार बजकर 20 मिनट पर रवाना होगी। इसके बाद शाम करीब साढ़े पांच बजे बस डेरा ब्यास पहुंचेगी। कितना होगा किराया?     रोहतक से लुधियाना का किराया 410 रुपये।     रोहतक से जालंधर का किराया 510 रुपये     रोहतक से डेरा ब्यास का किराया 565 रुपये।     गोहाना से डेरा ब्यास का किराया 535 रुपये ।     पानीपत से डेरा ब्यास का किरााय 480 रुपये। वापसी का समय बस डेरा ब्यास से रात दो बजे रवाना होगी। इसके बाद जालंधर से तीन बजे बस रवाना होगी और अंबाला से सुबह छह बजे बस रोहतक के लिए रवाना होगी  

पिछली सरकारों के दौर के गुंडाराज पर निशाना साधते हुए योगी सरकार की कानून-व्यवस्था की सराहना की

लखनऊ  यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज में अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए न्यायिक व्यवस्था और प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बड़ा बयान दिया। नए भवन की चाभी सौंपे जाने के अवसर पर डिप्टी सीएम ने अधिवक्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का गौरवशाली इतिहास पूरे देश की न्यायिक परंपरा की अमूल्य धरोहर है। प्रयागराज एक ओर आस्था का संगम है, तो दूसरी ओर न्याय की समृद्ध परंपरा का प्रतीक। राजनीतिक संदर्भ जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि हर पांच वर्ष में जनता की अदालत में जाते हैं। उन्होंने अधिवक्ताओं से कहा, ‘आप सबका मुकदमा लड़ते हैं, हम 2027 का मुकदमा आपकी अदालत में छोड़कर जा रहे हैं। हमें पूरा भरोसा है कि सरकार के अच्छे कार्यों को आपका समर्थन, न्याय और आशीर्वाद मिलेगा।’ प्रदेश की कानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए केशव मौर्य ने पिछली सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में कानून का राज केवल कागजों पर था और जमीन पर गुंडाराज चलता था। प्रयागराज इसका प्रमुख केंद्र बना हुआ था। आज योगी सरकार की नीति स्पष्ट है, निर्दोष को छेड़ा नहीं जाएगा और दोषी को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार कानून बनाती है, लेकिन उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में अधिवक्ता एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाते हैं। डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि न्याय व्यवस्था में प्राथमिकता यही होनी चाहिए कि कानून सबके लिए समान हो, चाहे कोई गरीब हो या प्रभावशाली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में ‘ईज ऑफ लिविंग’ के साथ-साथ डिजिटल व्यवस्था और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए ‘ईज ऑफ जस्टिस’ को बढ़ावा मिल रहा है। पुराने औपनिवेशिक कानूनों को हटाकर नए न्याय-केंद्रित आपराधिक कानून लागू करना देश की न्याय प्रणाली में युगांतरकारी बदलाव है। ​उपमुख्यमंत्री ने बार और बेंच के समन्वय की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि अधिवक्ताओं को सम्मान, सुरक्षा और आधुनिक कार्य सुविधाएं देना सरकार का संकल्प है, ताकि आम नागरिक को समयबद्ध और सुलभ न्याय मिल सके। चुनौतियों का सामना कर कानून व्यवस्था में किया बदलाव वहीं, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में उपस्थित अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए सीएम ने प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के पूर्व की चुनौतियों का जिक्र करते हुए बताया कि 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद किस तरह से इन चुनौतियों का सामना कर कानून और न्याय व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया गया।

गृह ऋण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए भवन का नक्शा स्वीकृत होने के बाद ही आगे बढ़ेगी फाइल

गोरखपुर अब सिर्फ भू-प्रयोग सही होने के आधार पर घर बनाने के लिए के लिए होम लोन पास नहीं किया जा सकेगा। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि भवन का मानचित्र स्वीकृत होने या मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन किए जाने के बाद ही होम लोन की स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। इससे बिना मानचित्र स्वीकृति के भवन निर्माण के लिए लोन मिलने की संभावना पर रोक लगेगी। अवैध निर्माण पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। गोरखपुर के एनेक्सी भवन में सोमवार को प्राधिकरण और विभिन्न बैंकों के अधिकारियों की बैठक में गृह ऋण प्रक्रिया को लेकर यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने की। उन्होंने बैंकों और प्राधिकरण के बीच बेहतर समन्वय के साथ ऐसी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया, जिससे ऋण प्रक्रिया सरल भी हो और भवन निर्माण के नियमों का पालन भी सुनिश्चित हो। प्राधिकरण उपाध्यक्ष ने आश्वस्त किया कि प्राधिकरण की ओर से अपने एलटीपी (लाइसेंस्ड टाउन प्लानर) का पूरा डेटा संबंधित बैंकों को उपलब्ध कराया जाएगा। बैंकों को निर्देश दिया कि जनसामान्य की सुविधा और जागरूकता के लिए इस डेटा के साथ संबंधित मोबाइल नंबर अपनी शाखाओं में प्रमुखता से प्रदर्शित करें। इससे भवन मानचित्र से जुड़ी जानकारी लेने वाले आवेदकों को सही संपर्क उपलब्ध हो सकेगा। प्रक्रिया में अनावश्यक भ्रम कम होगा। इस बैठक में यह भी तय हुआ कि बैंक गृह ऋण से संबंधित प्राप्त आवेदनों का आवश्यक डेटा नियमित रूप से प्राधिकरण को उपलब्ध कराएंगे। इससे प्राधिकरण अवगत हो सकेगा कि किन क्षेत्रों और भवनों के लिए गृह ऋण के आवेदन मिल रहे हैं। इसके आधार पर मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया में भी बेहतर समन्वय स्थापित होगा। एनबीएफसी और लीड बैंक मैनेजर संग बैठक जल्द बैंक अधिकारियों ने बताया कि गृह ऋण केवल पारंपरिक बैंकों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि एनबीएफसी के जरिये भी मिलता है। एसबीआइ और पीएनबी के शाखा प्रबंधकों ने प्रक्रिया में लीड बैंक मैनेजर (एलडीएम) को भी शामिल करने का सुझाव दिया। जीडीए उपाध्यक्ष ने सहमति जताते हुए एनबीएफसी और एलडीएम के साथ शीघ्र अलग बैठक करने का आश्वासन दिया। एक प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी जीडीए की सुविधाएं गोरखपुर विकास प्राधिकरण अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तेज बनाने की तैयारी में है। इसके लिए प्राधिकरण में इंटीग्रेटेड ईआरपी (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) एवं सिटीजन सर्विसेज प्लेटफॉर्म लागू करेगा। इसके जरिए प्राधिकरण के विभिन्न अनुभागों की कार्यप्रणाली को एकीकृत करने के साथ नागरिक सेवाओं को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। प्रस्तावित सिटीजन सर्विसेज पोर्टल पर ही नागरिकों को ऑनलाइन आवेदन, भुगतान, शिकायत निवारण, नीलामी और आवेदन की स्थिति की ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी। डिजिटल होगी फाइलों की आवाजाही ईआरपी में वर्कफ्लो ऑटोमेशन की व्यवस्था होगी। इसके तहत डिजिटल अनुमोदन, फाइल ट्रैकिंग और अधिकारियों-कर्मचारियों को सूचनाएं भेजने की सुविधा रहेगी। प्रत्येक प्रक्रिया का ऑडिट ट्रेल उपलब्ध होने से यह भी पता लगाया जा सकेगा कि फाइल किस स्तर पर और कितने समय से लंबित है। ई-ऑफिस की कार्यक्षमता को भी इसी व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। रियल टाइम डैशबोर्ड से होगी निगरानी प्राधिकरण रियल टाइम एमआईएस और डैशबोर्ड विकसित करेगा। इसके जरिए प्राधिकरण की परियोजनाओं, वित्तीय स्थिति, नागरिक सेवाओं की डिलीवरी और संगठनात्मक प्रदर्शन की निगरानी की जा सकेगी। प्रस्तावित प्रणाली में पेमेंट गेटवे, ओबीपीएएस-फास्टपास, आधार सत्यापन और डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (डीएमएस) के एकीकरण की व्यवस्था होगी। भूमिका आधारित एक्सेस कंट्रोल से अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके कार्यक्षेत्र के अनुसार सिस्टम तक पहुंच दी जाएगी। प्राधिकरण का मानना है कि इससे आंतरिक कार्यप्रणाली मजबूत होने के साथ फास्टर पब्लिक डिलीवरी और कार्यों में तेजी आएगी। बोर्ड की मंजूरी के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू प्राधिकरण की ओर से इस प्रस्ताव का उद्देश्य अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने, आंतरिक कार्यप्रणाली को मजबूत करने और नागरिक सेवाओं की डिलीवरी में तेजी लाना है। बोर्ड से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद इसके क्रियान्वयन की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

जशपुर में जनजातीय पर्यटन को बड़ी सौगात, पीएम-जुगा के तहत क्लस्टर होमस्टे परियोजना मंजूर

जशपुर में जनजातीय पर्यटन को बड़ी सौगात, पीएम-जुगा के तहत क्लस्टर होमस्टे परियोजना को मिली मंजूरी बगीचा-मयाली-जशपुर क्षेत्र के 6 जनजातीय गांवों में विकसित होंगे 30 होमस्टे, स्थानीय परिवारों को पर्यटन से मिलेगा सीधा रोजगार और आय के नए अवसर जनजातीय संस्कृति और स्थानीय आजीविका को पर्यटन से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता-पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल रायपुर छत्तीसगढ़ में जनजातीय पर्यटन को नई ऊंचाई देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (PM-JUGA) के अंतर्गत जशपुर जिले के बगीचा-मयाली-जशपुर क्लस्टर में क्लस्टर आधारित होमस्टे परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के माध्यम से जनजातीय अंचल के गांवों में पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने के साथ-साथ स्थानीय परिवारों को पर्यटन गतिविधियों से सीधे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। परियोजना के तहत किंकेल, कमतरा, डंगरी, महनई, सरुधाप और पंडरापाठ सहित 6 जनजातीय गांवों में कुल 30 नए होमस्टे विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक गांव में 5 होमस्टे तैयार किए जाने का प्रस्ताव है। इस क्लस्टर के विकास पर लगभग 1.80 करोड़ रुपये व्यय प्रस्तावित है। इसमें होमस्टे निर्माण के साथ गांव स्तर पर आवश्यक सामुदायिक सुविधाओं के विकास का भी प्रावधान किया गया है। पर्यटक जशपुर को सिर्फ देखेंगे नहीं, यहां के जीवन को भी अनुभव करेंगे यह परियोजना पारंपरिक होटल आधारित पर्यटन से आगे बढ़कर कम्यूनिटी बेस्ड को प्रोत्साहित करेगी। होमस्टे के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के बीच रहकर जशपुर की जनजातीय संस्कृति, खान-पान, लोक परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और ग्रामीण जीवन को करीब से जानने और अनुभव करने का अवसर मिलेगा। इससे पर्यटन से होने वाली आय का सीधा लाभ स्थानीय परिवारों तक पहुंचेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। प्रस्तावित होमस्टे स्थानीय परिवेश और पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रत्येक गांव में सामुदायिक स्तर की सुविधाओं के लिए 5 लाख रुपये तक के कार्य प्रस्तावित हैं। इन सुविधाओं से पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलने के साथ गांवों में सामूहिक उपयोग की आधारभूत सुविधाएं भी विकसित होंगी। प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों से जुड़ेगा होमस्टे क्लस्टर क्लस्टर का चयन क्षेत्र की पर्यटन क्षमता को ध्यान में रखते हुए किया गया है। प्रस्तावित गांव बगीचा और जशपुर नगर के साथ-साथ कैलाश गुफा, खुड़ियारानी गुफा, बादलखोल अभयारण्य, रानीदाह जलप्रपात, देशदेखा पहाड़, लोरोघाट सहित अनेक प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों के निकट स्थित हैं। होमस्टे सुविधा विकसित होने से पर्यटकों के लिए इन क्षेत्रों में ठहरने के बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे। इससे जशपुर में पर्यटकों की ठहरने की अवधि बढ़ने की संभावना है और पर्यटन गतिविधियों का लाभ स्थानीय स्तर पर व्यापक रूप से पहुंच सकेगा। गाइडिंग से लेकर स्थानीय व्यंजन और हस्तशिल्प तक बढ़ेंगे रोजगार के अवसर होमस्टे क्लस्टर का प्रभाव केवल आवास सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। परियोजना के माध्यम से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को आतिथ्य सेवा, स्थानीय व्यंजन, पर्यटक गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प तथा अन्य पर्यटन सेवाओं से जोड़ने की संभावनाएं विकसित होंगी। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक खान-पान और हस्तशिल्प की मांग में भी वृद्धि हो सकती है। इस प्रकार पर्यटन गतिविधियां गांवों में रोजगार और आय के अनेक सहायक अवसरों को जन्म देंगी। जनजातीय संस्कृति और स्थानीय आजीविका को पर्यटन से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता-पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय और ग्रामीण संस्कृति प्रदेश की विशिष्ट पहचान है और सरकार का प्रयास है कि इस विरासत को संरक्षित करते हुए स्थानीय समुदायों को पर्यटन से प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिले। उन्होंने कहा कि जशपुर प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विशिष्ट लोक परंपराओं से समृद्ध क्षेत्र है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के तहत स्वीकृत यह क्लस्टर होमस्टे परियोजना पर्यटन को गांवों तक पहुंचाने और स्थानीय परिवारों को इसके आर्थिक लाभ से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हमारा लक्ष्य है कि पर्यटक जब जशपुर आएं तो वे यहां की प्रकृति के साथ-साथ जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपराओं को भी करीब से अनुभव करें। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि स्थानीय युवाओं और महिलाओं को पर्यटन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में अवसर मिलने से रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी से विकसित पर्यटन मॉडल न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि जशपुर की सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पर्यटन का लाभ गांव और स्थानीय परिवारों तक पहुंचे-सौमिल रंजन चौबे छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने कहा कि पर्यटन का लाभ केवल बड़े पर्यटन स्थलों अथवा होटल व्यवसाय तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गांव और स्थानीय परिवारों को भी इसका सीधा भागीदार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जशपुर का यह होमस्टे क्लस्टर स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और आजीविका को एक साथ जोड़ने वाला मॉडल बनेगा। इससे पर्यटकों को प्रामाणिक छत्तीसगढ़ी अनुभव मिलेगा और जनजातीय परिवारों के लिए स्थायी आय के नए अवसर विकसित होंगे। जशपुर को जनजातीय एवं ग्रामीण पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में कदम क्लस्टर होमस्टे परियोजना के माध्यम से जशपुर में पर्यटन का विस्तार प्रमुख पर्यटन स्थलों से आगे आसपास के गांवों तक होने की उम्मीद है। इससे पर्यटकों को स्थानीय जीवन का अनुभव मिलेगा और ग्रामीण समुदाय पर्यटन मूल्य-श्रृंखला का सक्रिय हिस्सा बनेगा। प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन को एक साथ जोड़ने वाली यह पहल आने वाले समय में जशपुर को छत्तीसगढ़ के प्रमुख जनजातीय एवं ग्रामीण पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

पार्टी के बाद शिवपाल से छिना लोहिया ट्रस्ट, अखिलेश यादव पर राजभर-कश्यप ने साधा निशाना

अखिलेश ने शिवपाल से छीनी लोहिया ट्रस्ट की कमान, राजभर बोले- भरोसा नहीं; मंत्री नरेंद्र कश्यप ने भी उठाए सवाल पार्टी के बाद शिवपाल से छिना लोहिया ट्रस्ट, अखिलेश यादव पर राजभर-कश्यप ने साधा निशाना शिवपाल के हाथों से लिया लोहिया ट्रस्ट, सियासत तेज; ओपी राजभर बोले- अखिलेश को चाचा पर भरोसा नहीं लखनऊ  सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के हाथों अब लोहिया ट्रस्ट की कमान होगी। अब तक इसकी कमान पूर्व कैबिनेट मंत्री और उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव के हाथों थी। शिवपाल सिंह यादव से कमान लिए जाने को लेकर भाजपा ने सपा पर निशाना साधा है। योगी सरकार के मंत्री ओपी राजभर और नरेंद्र कश्यप ने इसे लेकर अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि अखिलेश यादव को शिवपाल यादव पर भरोसा नहीं है, इसलिए उनसे ट्रस्ट की कमान ले ली गई। ओपी राजभर ने साधा निशाना, भरोसे पर उठाया सवाल योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने इस बदलाव को लेकर अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को शिवपाल यादव पर भरोसा नहीं है। राजभर ने शिवपाल के पुराने राजनीतिक रुख का जिक्र करते हुए कहा कि अखिलेश यादव को शिवपाल यादव जी पर भरोसा नहीं है। इससे पहले शिवपाल यादव अखिलेश यादव को छोड़कर चले गए थे। उन्होंने अपनी खुद की पार्टी बना ली थी। उस दौरान उन्होंने सपा को क्या-क्या नहीं कहा। चोर-उचक्कों की पार्टी बताया, शराब-माफियाओं की पार्टी, जमीन हड़पने वाली पार्टी तक बताया था। ऐसे में अखिलेश यादव शिवपाल यादव पर कैसे ट्रस्ट करेंगे? इसीलिए उन्होंने शिवपाल यादव से लोहिया ट्रस्ट की कमान ले ली है। मंत्री नरेंद्र कश्यप बोले- सपा में लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं योगी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने भी इस फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की जिम्मेदारी शिवपाल यादव से अखिलेश यादव के पास जाना अपने आप में कोई बड़ा बदलाव नहीं है, क्योंकि कमान अब भी परिवार के ही हाथों में है। नरेंद्र कश्यप ने कहा कि किसी संस्था की जिम्मेदारी परिवार के सदस्यों के बीच ही केंद्रित रहना लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं कहा जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है अखिलेश यादव को आशंका रही हो कि आगे चलकर शिवपाल यादव अपनी शर्तों या अपने तरीके से ट्रस्ट चलाएं, इसलिए उन्होंने खुद इसकी जिम्मेदारी संभाल ली। बता दें कि शिवपाल और अखिलेश के बीच राजनीतिक रिश्तों में उतार-चढ़ाव का लंबा इतिहास रहा है। शिवपाल सिंह यादव अलग होकर अपनी पार्टी बना चुके हैं और बाद में दोबारा समाजवादी पार्टी के साथ आए। ऐसे में ट्रस्ट का जिम्मा उनके हाथों से निकलकर अखिलेश के पास जाना सामान्य बदलाव नहीं, बल्कि परिवार और पार्टी की मौजूदा शक्ति-संरचना के बीच भरोसे को लेकर भी देखा जा रहा है। अखिलेश के पास अब पार्टी, लोहिया ट्रस्ट और जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट की कमान शिवपाल यादव से लोहिया ट्रस्ट लिए जाने और उसकी कमान खुद के हाथों में लेने के बाद अब अखिलेश के पास सपा के साथ लोहिया ट्रस्ट और जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट की भी कमान आ गई है। बता दें कि लोहिया ट्रस्ट का गठन सपा के गठन से पहले हुआ था। इसका उद्देश्य समाजवादी विचारधारा और डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों का प्रचार-प्रसार करना रहा है।