samacharsecretary.com

अखिलेश यादव का आरोप: जनता का ध्यान भटकाने के लिए लाई जा रही यूसीसी

लखनऊ  यूसीसी को लेकर अमित शाह के बयान पर अखिलेश की प्रतिक्रिया आई है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सियासत तेज होती जा रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूसीसी लागू करने के ऐलान पर पहली प्रतिक्रिया दी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भाजपा पर निशाना साधते हुए यूसीसी के मुद्दे को लेकर तंज कसा है। अखिलेश ने कहा कि हम तो बस इतना कहेंगे कि पहले पिछले वादे निभाओ, यूसीसी फिर बाद में लाओ। नया जुमला न लेकर आओ और न जनता को बहकाओ। 15 लाख खाते में पहुंचाओ। दरअसल, गृहमंत्री अमित शाह ने बीते दिनों NDA शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने का ऐलान किया था। अखिलेश यादव ने मंगलवार को कहा कि जनता समझ रही है कि भाजपा जिस यूसीसी की बात कर रही है, दरअसल उसकी पूर्ण रूप "अंडरग्राउंड कम्युनल कॉन्सपिरेसी" है। उन्होने सोशल मीडिया पर जारी बयान में भाजपा के पुराने चुनावी वादों को याद दिलाते हुए कहा कि सरकार को नए मुद्दे उठाने से पहले पिछले वादों को पूरा करना चाहिए। इसमें लोगों के खातों में 15 लाख रुपये पहुंचाने और दो करोड़ रोजगार देने जैसे वादों का जिक्र किया गया। अखिलेश ने भाजपा के 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे पर भी सवाल उठाया बयान में तंज कसते हुए कहा गया- "पहले पिछले वादे निभाओ, यूसीसी फिर बाद में लाओ। नया जुमला न लेकर आओ और न जनता को बहकाओ।" अखिलेश ने भाजपा के 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे पर भी सवाल उठाया और कहा कि सरकार को पहले इन दावों को जमीन पर साबित करना चाहिए। सपा पीडीए को एकजुट कर भाजपा सरकार हटाएगी: अखिलेश इससे पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि यूपी के भविष्य और आने वाली पीढ़ी की खुशहाली के लिए भाजपा को सत्ता से हटाना लोकतंत्र के हित में है। यूपी की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था चौपट है। भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार की हद हो गई है। इसलिए भाजपा सरकार को सत्ता से हटाना ही एकमात्र उपाय है। समाजवादी पार्टी पीडीए को एकजुट करके यूपी से भाजपा सरकार का सफाया करने के लिए संकल्पित है। बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए नए राजनीतिक मुद्दे उठाए जा रहे उन्होंने कहा है कि इसके साथ ही स्कूलों को बंद होने से बचाने, बेटियों को सुरक्षा देने, महिलाओं के सम्मान की रक्षा करने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई। बयान में लगातार दोहराया गया कि "यूसीसी फिर बाद में लाओ"। विपक्ष ने आरोप लगाया कि रोजगार, महंगाई, शक्षिा, महिला सुरक्षा और अन्य बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए नए राजनीतिक मुद्दे उठाए जा रहे हैं।

निजी वाहन चालकों को राहत: सिर्फ कमर्शियल वाहनों (ट्रक और बसों) से वसूला जाएगा टोल टैक्स

पटना   बिहार में स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स वसूली की शुरुआत होने जा रही है. शुरुआत दो प्रमुख सड़कों से होगी. बिहटा-सरमेरा और उदाकिशुनगंज-भटगामा स्टेट हाईवे पर टोल नाके बनाए जाएंगे. खास बात यह है कि निजी वाहनों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. इन दो स्टेट हाईवे पर लगेगा टोल पथ निर्माण विभाग ने सबसे पहले दो स्टेट हाईवे पर टोल वसूली की तैयारी शुरू की है. इनमें बिहटा से सरमेरा के बीच SH-78 और उदाकिशुनगंज से भटगामा के बीच SH-58 शामिल हैं. दोनों सड़कों पर टोल प्लाजा बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इसके लिए सरकार की ओर से टेंडर भी जारी किया जा चुका है. सिर्फ कमर्शियल वाहनों से लिया जाएगा टोल स्टेट हाईवे पर सफर करने वाले निजी वाहन चालकों को टोल नहीं देना होगा. टोल की वसूली सिर्फ व्यावसायिक वाहनों से की जाएगी. यानी कार, बाइक जैसे निजी वाहनों पर इस व्यवस्था का सीधा असर नहीं पड़ेगा. वहीं ट्रक, बस और अन्य कमर्शियल वाहनों से निर्धारित शुल्क लिया जाएगा. सभी स्टेट हाईवे पर धीरे-धीरे लागू होगी व्यवस्था पथ निर्माण विभाग ने राज्य के स्टेट हाईवे और राज्य सरकार के अधीन आने वाले पुलों पर भी टोल व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है. हालांकि, सभी जगह एक साथ टोल नाके नहीं लगाए जाएंगे. विभाग चरणवार तरीके से इस व्यवस्था को लागू करेगा. पहले कुछ प्रमुख सड़कों और पुलों को चुना जाएगा. इसके बाद दूसरे स्थानों पर टोल वसूली शुरू होगी. आरा-छपरा पुल पर भी टोल की तैयारी स्टेट हाईवे के साथ बड़े पुलों पर भी टोल वसूली की तैयारी चल रही है. बिहार राज्य पथ विकास निगम स्टेट हाईवे पर टोल की प्रक्रिया देख रहा है. वहीं, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम पुलों पर टोल वसूली की तैयारी कर रहा है. प्राथमिकता के आधार पर आरा-छपरा ब्रिज समेत कुछ बड़े पुलों को चुना गया है. इन पुलों पर टोल वसूली के लिए एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी. इसके लिए जल्द ही नया टेंडर जारी किया जा सकता है. पहले भी निकला था आरा-छपरा पुल का टेंडर आरा-छपरा पुल के लिए पहले भी टोल वसूली को लेकर निविदा जारी की गई थी. हालांकि, अपरिहार्य कारणों से उस टेंडर को वापस लेना पड़ा था. अब विभाग नए सिरे से टेंडर जारी करने की तैयारी में है. इसके बाद एजेंसी का चयन किया जाएगा. 2-3 महीने में शुरू हो सकती है टोल वसूली पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, अगले दो से तीन महीने में कुछ स्टेट हाईवे पर टोल वसूली शुरू हो सकती है. बता दें कि बिहार कैबिनेट पहले ही 55 स्टेट हाईवे और 47 पुलों पर टोल वसूलने को मंजूरी दे चुकी है. ऐसे में आने वाले समय में राज्य की कई प्रमुख सड़कों और पुलों पर टोल व्यवस्था धीरे-धीरे लागू होने वाली है. 

वृंदावन के पुजारियों के सानिध्य में संगमरमर से बनने वाले भव्य गणेश मंदिर की रखी गई नींव

सिवानी  हरियाणा शहर के संजीवनी आश्रम में सोमवार को 15वें गणेश महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर भगवान गणेश के भव्य मंदिर निर्माण की नींव विधि-विधान के साथ रखी गई। वृंदावन स्थित राधा रमण मंदिर के निज पुजारी के सानिध्य में मंदिर की आधारशिला रखी गई। मंदिर का निर्माण संगमरमर के पत्थरों से किया जाएगा और करीब तीन वर्ष में इसके तैयार होने की उम्मीद है। करीबन दस करोड की लागत से ये मंदिर बनेगा। महोत्सव के शुभारंभ से पहले शहर में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा अनाज मंडी से शुरू होकर संजीवनी आश्रम पहुंची। यात्रा में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं और बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। श्रद्धालु भजनों और जयकारों के साथ यात्रा में शामिल हुए। रखी गई गणेश मंदिर की नींव संजीवनी आश्रम पहुंचने के बाद विधि-विधान से भगवान गणेश की प्रतिमा विराजित की गई। इसके बाद भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। धार्मिक माहौल के बीच दोपहर 12:12 बजे भव्य गणेश मंदिर की नींव रखी गई। मंदिर निर्माण का संचालन श्री मेहंदीपुर बालाजी जन कल्याण सेवा समिति के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। मंदिर निर्माण को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। नींव रखने के दौरान पार्षद समेत कई हस्तियां रहीं मौजूद मंदिर की नींव रखे जाने के अवसर परसंजीवनी आश्रम के संचालक पारुल भगत, पार्षद आनन्द जांगडा, दीपक शर्मा, संजय कौशिक, पार्षद मांगेराम देहडू , जिला पार्षद मुकेश डालमिया, युवा उद्योगपति एवं भाजपा नेता अमित लोहिया, बहल अलख आश्रम के संचालक विकास गिरि महाराज, श्रीश्याम मित्र मंडल के प्रधान सत्यनारायण धारणिया,दीवान सिंह, प्रदीप खारिया, रामभगत बंसल, प्रेम किंगर, नवीन सूरतपुरिया, अंकुर जांगड़ा, चंद्र बंसल, राहूल गर्ग ढिगावा, संदीप अग्रवाल, नाहर सिंह तंवर, धीरजा शर्मा, अनिल केडिया, सुशील बिश्नोई, दीपक गर्ग सहित शहर के सैकड़ों गणमान्य लोग और श्रद्धालु मौजूद रहे।  

चुनावी माहौल के बीच आम जनता और मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए तैयार किया गया फर्जी पेज

जयपुर राजस्थान में एक तरफ जहां 309 नगरीय निकायों और आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर सरगर्मियां बेहद तेज हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह (IAS) के नाम और फोटो का गलत इस्तेमाल करके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक फर्जी प्रोफ़ाइल बना दी गई है। किसी शरारती तत्व द्वारा चुनावी माहौल के बीच आम जनता और मतदाताओं को भ्रमित करने की मंशा से यह फर्जी पेज तैयार किया गया है। मामला सामने आते ही राज्य निर्वाचन आयोग में हड़कंप मच गया। आयुक्त राजेश्वर सिंह ने तुरंत संज्ञान लेते हुए फेसबुक प्रबंधन को पत्र लिखकर इस फेक आईडी को हटाने के निर्देश दिए हैं और अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से अलर्ट जारी कर लोगों से इस फर्जी अकाउंट से सावधान रहने की अपील की है। सोशल मीडिया पर प्रशासनिक अधिकारियों की फर्जी आईडी बनाकर लोगों को ठगने या भ्रामक सूचनाएं फैलाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने अपनी असली प्रोफ़ाइल पर जानकारी साझा करते हुए लिखा, "किसी शरारती व्यक्ति ने 'राजेश्वर सिंह आईएएस' के नाम से मेरी फेक प्रोफाइल बनाई है। मैंने इसे रिपोर्ट कर दिया है, कृपया आप सभी इससे सावधान रहें।" चुनावी मौसम में जब हर छोटे-बड़े अपडेट पर जनता की नजरें टिकी होती हैं, ऐसे समय में चुनाव आयोग के प्रमुख की फर्जी प्रोफाइल बनने से साइबर सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस की साइबर सेल टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जिस आईपी एड्रेस से यह फर्जी आईडी बनाई गई है, उसकी लोकेशन ट्रैक की जा रही है। ये है आईएएस राजेश्वर सिंह के नाम से फेक प्रोफ़ाइल डिजिटल दौर में किसी की फोटो और नाम चुराकर फर्जी आईडी बनाना एक गंभीर कानूनी अपराध है। यदि आपके या आपके किसी रिश्तेदार के नाम से फेसबुक पर ऐसी कोई फेक आईडी बन जाती है, तो उसे तुरंत डिलीट और बैन कराने के लिए इन स्टेप्स का पालन करें: 1. प्रोफ़ाइल को सीधे फेसबुक पर रिपोर्ट करें: सबसे पहले उस फर्जी प्रोफाइल पर जाएं। कवर फोटो के नीचे दाईं तरफ दिख रहे थ्री डॉट्स (…) पर क्लिक करें। वहां "Find support or report" विकल्प को चुनें। इसके बाद "Impersonation" (नकल करना) ऑप्शन को सेलेक्ट करके सबमिट कर दें। अपने 5 से 10 करीबी दोस्तों से भी इसी तरह रिपोर्ट कराएं, जिससे फेसबुक इसे तेजी से ब्लॉक करेगा। 2. बिना अकाउंट के भी कर सकते हैं रिपोर्ट: अगर आपका खुद का फेसबुक अकाउंट नहीं है, तब भी आप गूगल पर "Report an Impersonation Account on Facebook" सर्च करके फेसबुक का आधिकारिक वेब फॉर्म भर सकते हैं। वहां फेक प्रोफाइल का लिंक और अपनी पहचान के लिए कोई भी एक सरकारी आईडी कार्ड अपलोड करके सीधे शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया सोशल मीडिया पर किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान बनाकर अकाउंट चलाना केवल नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह भारतीय कानून के तहत दंडनीय अपराध है। IT Act की धारा 66D: किसी की पहचान चुराकर कंप्यूटर या इंटरनेट के जरिए धोखाधड़ी करना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66D के तहत अपराध है, जिसमें 3 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। ऑनलाइन शिकायत: पीड़ित व्यक्ति तुरंत भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाकर अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं। सबूत संभाल कर रखें: शिकायत दर्ज कराते समय फर्जी प्रोफाइल का वेब लिंक (URL), प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट और उससे की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट अपने पास सुरक्षित रखें। आप अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन के साइबर सेल में जाकर भी लिखित शिकायत दे सकते हैं। अपनी असली प्रोफ़ाइल से जारी करें अलर्ट मैसेज जब तक साइबर सेल या फेसबुक द्वारा उस फर्जी अकाउंट को पूरी तरह से हटा या बैन नहीं कर दिया जाता, तब तक लोगों को ठगी या भ्रम से बचाने के लिए अलर्ट पोस्ट जारी करना बेहद जरूरी है। अपनी असली प्रोफ़ाइल, व्हाट्सएप स्टेटस या इंस्टाग्राम हैंडल पर तुरंत एक संदेश साझा करें। उसमें स्पष्ट लिखें, "कोई व्यक्ति मेरे नाम और फोटो का गलत इस्तेमाल करके फेक फेसबुक आईडी चला रहा है। अगर वह व्यक्ति आपसे पैसे मांगे, कोई संदिग्ध लिंक भेजे या गलत मैसेज करे, तो उस पर बिल्कुल भरोसा न करें और उस अकाउंट को तुरंत ब्लॉक व रिपोर्ट करें।" चुनाव आयोग ने भी सभी नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के नाम से आने वाले संदिग्ध मैसेज या फ्रेंड रिक्वेस्ट से सतर्क रहें।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनहितकारी विजन से खड़ी हो रही कल्याण मंडपम की श्रृंखला

गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी विधायक निधि से गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा बनवाए गए कल्याण मंडपम का लोकार्पण 16 सितंबर (बुधवार) को अपराह्न में करेंगे। समाज के अल्प एवं मध्यम आय वर्ग के लोगों के मांगलिक-पारिवारिक आयोजनों के लिए मैरिज हाउस का रियायती विकल्प देने के लिए वार्ड नंबर 54 उर्वरक नगर के जंगल नकहा नंबर 2 में यह भव्य ‘कल्याण मंडपम’ बनकर तैयार है। इसके पहले मुख्यमंत्री ने 29 अगस्त को बशारतपुर में कल्याण मंडपम का उपहार दिया था। सीएम योगी के ईज ऑफ लिविंग (जीवन सुगमता) विजन के अनुरूप गोरखपुर में वार्ड स्तर पर सर्वसुविधायुक्त कल्याण मंडपम की श्रृंखला खड़ी हो रही है। समाज के हर वर्ग के जीवन में सुगमता लाने के लिए योगी सरकार ने बीते साढ़े नौ वर्षों में आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण से लेकर जनकल्याण तक कई पहल की है। कल्याण मंडपम की मुख्यमंत्री की परिकल्पना भी इसी कड़ी का हिस्सा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) और नगर निगम को यह विजन दिया था कि वे निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों को उनके मांगलिक आयोजनों के लिए कल्याण मंडपम बनाकर मैरिज हाउस का बेहतरीन विकल्प दें। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कल्याण मंडपम का निर्माण शुरू हुआ। कल्याण मंडपम की पहल के साथ ही मुख्यमंत्री ने अपनी विधायक निधि से धनराशि की व्यवस्था भी कराई। गोरखपुर में अब तक सात कल्याण मंडपम का लोकार्पण मुख्यमंत्री के हाथों हो चुका है और आठवें का लोकार्पण बुधवार (16 सितंबर) को जंगल नकहा नंबर 2 में होने जा रहा है। जीडीए के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने बताया कि वार्ड नंबर 54, उर्वरक नगर के अंतर्गत जंगल नकहा नंबर 2 में कल्याण मंडपम का निर्माण 2461 वर्गमीटर भूमि पर 3.08 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया है। आधुनिक शहरी सुविधाओं और आकर्षक वास्तुकला से सुसज्जित कल्याण मण्डप दो तल में बना है जहां 300 व्यक्तियों की क्षमता के विभिन्न मांगलिक, सामाजिक और उत्सवी आयोजन किए जा सकेंगे। कल्याण मंडपम में बड़े हाल के साथ किचन, स्टोर, ऑफिस, चेंज रूम और दोनों तलों पर महिलाओं एवं पुरुषों के लिए अलग-अलग टॉयलेट बनाए गए हैं। कल्याण मंडपम आने वाले वाहनों के लिए परिसर के अंदर ही इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाकर अलग से पर्याप्त पार्किंग का प्रावधान किया गया है। परिसर में फव्वारे के साथ लॉन भी विकसित किया गया है। कल्याण मंडपम से विवाह, समाजिक आयोजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा सामूहिक उत्सवों के लिए आमजन को काफी सहूलियत मिलेगी। जीडीए के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल बताते हैं कि जीडीए के दो अन्य कल्याण मंडपम का निर्माण भी प्रगति पर है। इनमें से एक वार्ड नंबर 7 महादेव झारखंडी तथा दूसरा वार्ड नंबर 2 बाबा राघवदास नगर के सेमरा में बनाया जा रहा है। दोनों के निर्माण पर क्रमशः ढाई-ढाई करोड़ रुपये की लागत आएगी। अब तक लोकार्पित कल्याण मंडपम खोराबार, सूरजकुंड, मानबेला, राप्तीनगर विस्तार क्षेत्र के टोला पीरू शहीद, बिछिया जंगल तुलसीराम, जंगल बेनी माधव और बशारतपुर। आईएमए के चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन करेंगे मुख्यमंत्री बुधवार को गोरखपुर दौरे पर आ रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर के चैरिटेबल ब्लड सेंटर का उद्घाटन करेंगे। यह ब्लड सेंटर आईएमए के तारामंडल क्षेत्र स्थित भवन में स्थापित किया गया है।

मंडियों में आवक प्रभावित होने से आलू, प्याज और हरी सब्जियां हुई महंगी

 पटना लगातार हो रही बारिश और बाढ़ का असर अब सब्जियों की कीमतों पर साफ दिखने लगा है। मंडियों में आवक प्रभावित होने से हरी सब्जियों समेत आलू-प्याज और मसाला वर्ग की सब्जियों के भाव बढ़ने लगे हैं। कारोबारियों के अनुसार तीन माह पहले की तुलना में इस समय अधिकांश सब्जियां महंगी बिक रही हैं। इससे आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ने लगा है। वर्तमान में प्याज 280 रुपये प्रति पांच किलो तक पहुंच गया है। धनिया पत्ता 160, शिमला मिर्च 100, लाल आलू 90 का पांच किलो तथा ओल और अदरक 80 रुपये किलो बिक रहे हैं। वहीं, परवल और बैंगन 60, लाल साग व हरी मिर्च 60, बोरो 60, चठैल 50 और मूली 50 रुपये किलो है। कद्दू 50 रुपये पीस बिक रहा है। भिंडी, नेनुआ, टमाटर, बंदागोभी, खीरा और करैला 40 रुपये किलो के आसपास है। फूलगोभी भी 40 रुपये पीस बिक रही है। उजला आलू 70 रुपये के पांच किलो है। कारोबारियों का कहना है कि बारिश के कारण खेतों से सब्जियों की तुड़ाई और मंडियों तक पहुंच प्रभावित होने लगी है। रास्तों में जलजमाव के कारण परिवहन लागत भी बढ़ रही है। कारोबारियों के अनुसार यदि बारिश का दौर जारी रहा और खेतों से आवक सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में सब्जियों के भाव में और उछाल आ सकता है। खासकर हरी सब्जियों के दाम मौसम पर काफी निर्भर हैं। अभी बाजार में प्रमुख सब्जियों के भाव सब्जी          वर्तमान भाव     पूर्व का भाव प्याज               56 रुपये     25 रुपये धनिया पत्ता       160 रुपये     120 रुपये शिमला मिर्च     100 रुपये     80 रुपये लाल आलू        18 रुपये     15 रुपये ओल                  80 रुपये     70 रुपये अदरक                80 रुपये     120 रुपये उजला आलू     14 रुपये     12 रुपये परवल            60 रुपये     40 रुपये बैंगन              60 रुपये     30 रुपये हरी मिर्च     60 रुपये     80 रुपये लाल साग     60 रुपये     40 रुपये बोरो            60 रुपये     30 रुपये मूली            50 रुपये     50 रुपये चठैल       50 रुपये     80 रुपये कद्दू           50 रुपये/पीस     30 रुपये/पीस नेनुआ      40 रुपये     30 रुपये भिंडी       40 रुपये     30 रुपये टमाटर     40 रुपये     30 रुपये बंदागोभी     40 रुपये     30 रुपये खीरा         40 रुपये     20 रुपये करैला     40 रुपये     30 रुपये फूलगोभी     40 रुपये/पीस     20 रुपये/पीस

बुनकरों के हुनर को मिलेगा सरकारी बाजार, अस्पतालों में गूंजेगी हथकरघे की पहचान

लखनऊ  प्रदेश की योगी सरकार हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने और बुनकरों को उनके उत्पादों के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रही है। अब सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और अन्य चिकित्सा संस्थानों में इस्तेमाल होने वाले हथकरघा निर्मित उत्पादों की खरीद के जरिए प्रदेश के बुनकरों को बड़ा और सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने की तैयारी है। इससे सरकारी संस्थानों की जरूरतें पूरी होने के साथ बुनकर परिवारों को नियमित रोजगार और आर्थिक मजबूती मिलने का रास्ता तैयार होगा। मंगलवार को खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, तिलक मार्ग, डालीबाग स्थित सभाकक्ष में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग में प्रयुक्त होने वाले हथकरघा उत्पादों की खरीद एवं आपूर्ति व्यवस्था को लेकर समीक्षा बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुपालन में सरकारी चिकित्सा संस्थानों में हथकरघा निर्मित बेडशीट और गॉज बैंडेज की खरीद एवं आपूर्ति सुनिश्चित करने की कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। सरकारी खरीद से बुनकरों को मिलेगा बड़ा बाजार मंत्री राकेश सचान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपूर्ति व्यवस्था को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए। सरकार का उद्देश्य सरकारी खरीद को केवल सामान की खरीद तक सीमित रखना नहीं, बल्कि इसके माध्यम से बुनकर परिवारों को निरंतर रोजगार, स्थायी बाजार और आर्थिक मजबूती देना है। सरकारी संस्थानों में स्थानीय बुनकरों द्वारा निर्मित उत्पादों की खरीद बढ़ने से बुनकरी क्षेत्र को नई गति मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम लिमिटेड के माध्यम से सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और अन्य चिकित्सा संस्थानों में आवश्यकतानुसार बेडशीट, तकिया कवर और गॉज बैंडेज क्लॉथ की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए प्रदेश के बुनकरों और बुनकर सहकारी समितियों से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कराया जाएगा। गुणवत्ता और समयबद्ध आपूर्ति पर जोर मंत्री ने निर्देश दिए कि चिकित्सा संस्थानों को उपलब्ध कराए जाने वाले उत्पाद निर्धारित मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले होने चाहिए। इसके साथ ही प्राथमिकता के आधार पर अंतिम रूप देने और आवश्यक दिशा-निर्देश शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग अनिल सागर, विशेष सचिव शेषमणि पांडेय, संयुक्त आयुक्त पीसी ठाकुर सहित चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

त्विशा शर्मा आत्महत्या केस में गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका टली, CBI ने मांगा लिखित आपत्ति के लिए समय

भोपाल  भोपाल के बहुचर्चित त्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को फिलहाल हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है।  मंगलवार को उनकी जमानत याचिका पर जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने जमानत याचिका का विरोध किया। सीबीआई की ओर से आपत्ति दर्ज कराते हुए लिखित जवाब पेश करने के लिए समय मांगा गया। इस पर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सीबीआई को लिखित आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए एक सप्ताह की मोहलत दे दी। अब मामले की अगली सुनवाई सीबीआई के जवाब के बाद होगी।  गौरतलब है कि बहू की आत्महत्या के मामले में गिरिबाला सिंह और उनके बेटे के खिलाफ भोपाल के कटारा थाने में प्रकरण दर्ज किया गया था। मामले में पूर्व में भोपाल जिला एवं सत्र न्यायालय ने उन्हें अग्रिम जमानत का लाभ दिया था। इसके बाद मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी। अब गिरिबाला सिंह की ओर से जमानत के लिए दोबारा हाईकोर्ट का रुख किया गया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई। हालांकि लिखित आपत्ति पेश करने के लिए एक सप्ताह का समय मिलने के कारण हाईकोर्ट ने फिलहाल जमानत याचिका पर कोई अंतिम राहत नहीं दी है। मामले में अगली सुनवाई सीबीआई के जवाब के बाद होगी।  

बिहार में सियासी हलचल तेज, RJD का JDU को साथ आने का न्योता ठुकराया

पटना नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) को लालू एवं तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से गठबंधन सरकार बनाने का न्योता मिला है। राजद के वरीय नेता एवं विधायक भाई वीरेंद्र ने जदयू से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का साथ छोड़ने को कहा है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर नीतीश पहले ही स्टैंड ले चुके हैं। जदयू और राजद समाजवादी दल हैं, इनकी राजनीति एक ही है। इसलिए भाजपा का साथ छोड़कर जदयू को राजद के साथ आना चाहिए और बिहार में नई सरकार बनानी चाहिए। भाई वीरेंद्र ने मंगलवार को जारी बयान में आरोप लगाया कि एनडीए सरकार 'नागपुर' से चल रही है। उन्होंने कहा, "यह बिहार है। यहां नागपुर का नहीं चलेगा। बिहार में यूसीसी लागू नहीं करने देंगे। नीतीश कुमार भी स्टैंड ले चुके हैं। उनसे कहेंगे कि वैसे लोगों (भाजपा) को छोड़िए, इधर आइए और हम मिलकर सरकार बनाएं। भाजपा को लात मारकर आएं। बिहार में यूसीसी लागू नहीं होने देंगे- वीरेंद्र यूसीसी का विरोध करते हुए राजद विधायक ने कहा कि यूसीसी को बिल्कुल भी लागू नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि भारत धर्म निरपेक्ष देश है। सभी धर्मों को मानने का अधिकार मिला हुआ है। संविधान में भी इसका उल्लेख है। समाजवाद का हवाला भाई वीरेंद्र ने दावा किया कि जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के साथ कुछ ऐसे लोग लगे हैं, जिन्होंने उन्हें बर्बाद कर दी दिया और आगे और बर्बाद कर देंगे। उन्होंने नीतीश से कहा, “हम सामाजिक न्याय के लोग हैं, जिस राजनीति में आप हैं, उसमें हम भी हैं। आप हमारे साथ आइए और भाजपा को लात मारिए।” जदयू ने ठुकराया राजद का ऑफर दूसरी ओर, जदयू ने राजद का ऑफर ठुकरा दिया है। बिहार के डिप्टी सीएम और जदयू के वरिष्ठ नेता विजय चौधरी ने राजद विधायक भाई वीरेंद्र के प्रस्ताव पर पलटवार भी किया है। उन्होंने कहा कि हम लोग राजद के सुझावों पर नहीं चलते हैं। राजद क्या चाहती है, उससे हमें कोई मतलब नहीं है। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि जदयू को सिर्फ हमारी सोच और हमारे गठबंधन के दलों की सोच से मतलब है। दो बार राजद के साथ बिहार में सरकार बना चुकी है जदयू जदयू और राजद के बीच पहले भी दो बार गठबंधन हो चुका है। पहली बार 2015 से 2017 के बीच राजद, जदयू और कांग्रेस के महागठबंधन वाली सरकार रही थी। इसके बाद, फिर से अगस्त 2022 से जनवरी 2024 के बीच दोनों दलों के गठबंधन की सरकार बिहार में रही। महागठबंधन सरकार में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे और राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम रहे थे। इसके बाद जदयू ने महागठबंधन का साथ छोड़ एनडीए में वापसी कर ली थी। यूसीसी पर जदयू का सस्पेंस केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूसीसी कानून लागू करने के ऐलान के बाद एनडीए में घमासान तेज है। नीतीश की पार्टी ने फिलहाल इस पर खुलकर समर्थन नहीं दिया है और ना ही विरोध किया है। जदयू ने सस्पेंस बनाते हुए ड्राफ्ट आने के बाद जदयू के पूर्व मंत्री एवं विधायक श्याम रजक ने एक दिन पहले बिहार में इस कानून को लागू नहीं करने की बात कह दी थी। मंगलवार को केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की। इसके बाद डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने कहा कि यूसीसी का ड्राफ्ट में प्रावधानों को देखने के बाद ही जदयू इस पर विचार-विमर्श करेगी। बिहार विधानसभा की मौजूदा स्थिति- एनडीए के पास कुल 201 विधायक     भाजपा- 88     जदयू- 85     लोजपा आर- 19     हम- 5     रालोमो- 4 महागठबंधन में कुल 35 विधायक     राजद- 25     कांग्रेस- 6     सीपीआई माले- 2     सीपीआई- 1     आईआईपी- 1 अन्य 7 विधायक     AIMIM- 5     बसपा- 1     जन सुराज-1

जल प्रवाह प्रणाली उपलब्ध न होने के कारण पिछले तीन दशकों से राज्य को नहीं मिल पा रहा था यह पानी

जयपुर  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तरी भारत की वर्षों से लंबित जल परियोजनाएं अब धरातल पर क्रियान्वित होने जा रही हैं। इस दिशा में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के लिए 6 राज्यों के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। किशाऊ परियोजना से प्राप्त जल शेखावाटी के जल की दृष्टि से अभावग्रस्त रहे क्षेत्रों की जल आवश्यकताओं की पूर्ति में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सी आर पाटिल की मौजदगी में हुए इस एमओयू पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किये। किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना यमुना की प्रमुख सहायक टौंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर प्रस्तावित है। करीब 15,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना से 660 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन होगा तथा इससे राजस्थान सहित उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा लाभान्वित होंगे। परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से का एक भाग राजस्थान और दिल्ली को आवंटित किया जाएगा। इसके बदले इन राज्यों द्वारा हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक की लागत में योगदान किया जाएगा। जल घटक की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार द्वारा सहायता के रूप में वहन की जाएगी और शेष 10 प्रतिशत भागीदार राज्यों द्वारा दिया जाएगा। किशाऊ बांध परियोजना को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय परियोजनाओं की सूची में शामिल किया गया है। परियोजना के निर्माण, संचालन एवं रख-रखाव की जिम्मेदारी किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा निभाई जाएगी तथा इसकी निगरानी अपर यमुना बेसिन से संबंधित व्यवस्था के तहत होगी। शेखावाटी के लिए जल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम किशाऊ बांध से राजस्थान को आवंटित 124 एमसीएम पानी को यमुना जल परियोजना के अंतर्गत तीन भूमिगत पाइपलाइन प्रणालियों के माध्यम से हरियाणा के हांसीवासी से चूरू तक पहुंचाने की योजना है। इससे सीकर, चूरू, झुंझुनंू और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल तथा अन्य आवश्यकताओं के लिए जल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी। यह परियोजना शेखावाटी के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और स्वास्थ्य मानकों में सुधार की आधारभूमि भी तैयार करेगी। पर्याप्त और नियमित जल उपलब्धता से क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी तथा लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा। यमुना जल समझौते से किशाऊ तक, एक व्यापक जल दृष्टि प्रदेश के शेखावाटी क्षेत्र के लिए इस उपलब्धि के तहत दीर्घकालीन जल सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यमुना जल समझौते के तहत सीकर, चूरू, झुंझुनूं और अन्य क्षेत्रों की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से पानी राजस्थान लाने हेतु संयुक्त डीपीआर तैयार करने पर सहमति बनी है। अब किशाऊ परियोजना के संशोधित एमओयू से इस पूरी जल व्यवस्था को और मजबूत आधार मिलेगा। परियोजना से उपलब्ध जल का उपयोग पेयजल, सिंचाई और अन्य हितकारी उपयोगों के लिए किया जा सकेगा। राजस्थान के हितों का विशेष ध्यान संशोधित समझौते में राजस्थान के हितों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। हिमाचल प्रदेश द्वारा अपने विद्युत घटक से संबंधित लागत वहन किए जाने के बदले किशाऊ परियोजना के उसके आवंटित जल हिस्से का 95 प्रतिशत दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध होगा, जबकि 5 प्रतिशत हिस्सा हिमाचल प्रदेश अपने स्थानीय उपयोग के लिए रखेगा। इस 95 प्रतिशत हिस्से में दिल्ली और राजस्थान की हिस्सेदारी 75ः25 के अनुपात में होगी। शेखावाटी में विकास का नया अध्याय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों से शेखावाटी अब जल उपलब्धता के साथ ही कनेक्टिविटी, पर्यटन, विरासत संरक्षण और हवाई संपर्क के क्षेत्र में भी व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। क्षेत्र में यमुना जल समझौता, ऐतिहासिक हवेलियों एवं समृद्ध विरासत के संरक्षण के प्रयास, एक्सप्रेस-वे और हाईवे परियोजनाएं, तथा सीकर और झुंझुनूं में हवाई संपर्क से जुड़ी योजनाएं शेखावाटी को विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन परियोजनाओं का समन्वित प्रभाव शेखावाटी की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। बेहतर जल उपलब्धता के साथ बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, पर्यटन एवं विरासत संरक्षण से रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ेंगे। इससे शेखावाटी के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की संभावनाएं मजबूत होंगी। 32 वर्षों से लंबित जल हिस्से की दिशा में निर्णायक पहल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जल अभावग्रस्त राजस्थान में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रामजल सेतु लिंक परियोजना सहित प्रदेश के प्रत्येक जिले में पेयजल व सिंचाई के लिए जल संसाधन उपलब्ध कराने की योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। वर्ष 1994 में पांच राज्यों के बीच संपन्न यमुना जल समझौते के तहत ताजेवाला हेड से मानसून अवधि में राजस्थान के लिए 1917 क्यूसेक (577 एमसीएम) जल आवंटित किया गया था। जल प्रवाह प्रणाली उपलब्ध नहीं होने के कारण राजस्थान को पिछले 32 वर्षों से अपने हिस्से का पानी प्राप्त नहीं हो पा रहा था।