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अपनी भाषा और जड़ों से जुड़कर ही युवा कर सकते हैं सशक्त राष्ट्र का निर्माण : मंत्री सारंग

भोपाल  “मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे भाव, विचार, संस्कार और संस्कृति की अभिव्यक्ति है। अपनी भाषा और जड़ों से जुड़कर ही युवा सशक्त राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।” यह बात सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को भारत भवन में आयोजित दो दिवसीय ‘भारतीय भाषा अनुष्ठान’ के शुभारंभ सत्र में कही। इस अवसर पर 19 पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, संस्कृति संचालनालय के संचालक एन.पी. नामदेव, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी एवं दत्तोपंत ठेंगडी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश मिश्रा उपस्थित रहे। वीर भारत न्यास एवं संस्कृति संचालनालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सारंग ने कहा कि किसी भी समाज और संस्कृति की मूल पहचान उसकी मातृभाषा में निहित होती है। भाषा के माध्यम से व्यक्ति अपनी परंपराओं, ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ता है। उन्होंने औपनिवेशिक काल की शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी शिक्षा पद्धति के प्रभाव से भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक दृष्टि को कमजोर करने का प्रयास हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को मातृभाषा आधारित शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए मध्यप्रदेश में हिंदी माध्यम से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू किए जाने का उल्लेख किया। मंत्री सारंग ने युवाओं से अपनी भाषा, बोली और संस्कृति को आत्मसात कर वर्ष 2047 तक विकसित और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया। भारतीय भाषाओं में सुरक्षित हैं हमारी सभ्यता और संस्कृति की स्मृतियाँ: शिव शेखर शुक्ला स्वागत संबोधन में अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि आज गणेश चतुर्थी का पावन अवसर भी है। ज्ञान, बुद्धि और शुभारंभ के प्रतीक भगवान गणेश के पर्व पर भारतीय भाषाओं, साहित्य और ज्ञान परंपरा के इस अनुष्ठान का शुभारंभ होना अत्यंत मंगलकारी संयोग है। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति की स्मृतियाँ हमारी मातृभाषाओं, बोलियों और लिपियों में सुरक्षित हैं। यह आयोजन भारतीय भाषाओं की विविधता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता की भावना को अभिव्यक्त करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि संवाद, प्रदर्शनी, पुस्तक लोकार्पण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ अनुष्ठान को व्यापक सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करेंगी। इन 19 पुस्तकों का लोकार्पण इस अवसर पर भारतीय ज्ञान, साहित्य और संस्कृति से जुड़ी 19 महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। जिसमें वीर भारत न्यास की भारत निधि श्रृंखला अंतर्गत महर्षि पाणिनि, भोजदेव, महर्षि पतंजलि, भर्तृहरि और सम्राट राजेंद्र चोल शामिल है। इसके साथ ही दस गीताएँ- ‘अष्टावक्रगीता’, ‘नारदगीता’, ‘गर्भगीता’,‘ब्राह्मणगीता’, ‘उत्तरगीता’, ‘परमहंसगीता’, ‘वृत्रगीता’, ‘हंसगीता’, ‘चंद्रगीता’, ‘जानकीगीता’ , मध्यकालीन परिदृश्य में मध्य भारत के नगर, बस्तियाँ, मंदिर और तालाब, ‘युग-युगीन जल’, ‘उड़ चल अपने देश’, ‘सूर्यकांत त्रिपाठी निराला—हिंदी साहित्य के प्रकाश पुंज’ जैसी कृतियाँ शामिल हैं। भाषाओं में भारत की आत्मा को समझने का माध्यम है मातृभाषा भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान में ‘मातृभाषा से राष्ट्रभाषा : भाषाओं में भारत की आत्मा’ विषय पर सार्थक विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि मातृभाषाएँ भारत की सांस्कृतिक स्मृति और विविधता की संवाहक हैं। बांग्ला के स्नेहाशीष सूर और कश्मीरी के आसिम मोहिउद्दीन ने विचार रखे। सत्र का समन्वय कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने किया। दूसरे सत्र में भाषाई पत्रकारिता पर जयदीप कर्णिक, गिरीश उपाध्याय और नारायण व्यास ने विचार साझा किए। संचालन मुकेश मिश्रा ने किया। राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में गूंजे काव्य के विविध स्वर भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान के अंतर्गत राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसमें डॉ. कीर्ति काले, स्वयं श्रीवास्तव, दिनेश दिग्गज, शैलेन्द्र मधुर, अज़हर इकबाल और रामायणधर द्विवेदी ने अपनी रचनाओं का काव्य पाठ कर श्रोताओं को भाव-विभोर किया। विविध रसों से सजी प्रस्तुतियों को श्रोताओं की सराहना मिली। शब्द से चित्र तक: भारत भवन में सजी चित्रित पांडुलिपियों की प्रदर्शनी भारत भवन में ‘शब्द से चित्र तक’ प्रदर्शनी आयोजित की गई। इसमें भारतीय भाषाओं के साथ तिब्बत, नेपाल और दक्षिण-पूर्व एशिया की चित्रित पांडुलिपि परंपराओं को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी ने अक्षर, लिपि, रंग और चित्रों के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध यात्रा को साकार किया। पूर्व रंग में भारतीय भाषाओं एवं बोलियों के गीतों की प्रस्तुति ‘भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान’ की सांस्कृतिक गरिमा को बढ़ाते हुए पूर्वरंग में उमेश तरकसवार एवं दल द्वारा भारतीय भाषाओं और विभिन्न लोकबोलियों के गीतों की मनोहारी प्रस्तुति दी गई। विविध भाषाओं के सुरों ने भारत की सांस्कृतिक एकता और भाषाई विविधता का सुंदर भाव प्रस्तुत करते हुए वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। सहभागी संस्थाएँ वीर भारत न्‍यास एवं संस्कृति संचालनालय, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में भारत भवन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान तथा मातृभाषा मंच की सहभागिता रही।  

JPSC-JSSC CGL समेत भर्ती परीक्षाओं के रद्द होने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, 15 सितंबर को सुनवाई

रांची Jharkhand High Court Hearing: झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार 15 सितंबर को JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा, JSSC CGL-2023, CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा के विज्ञापन रद्द करने के खिलाफ दायर विभिन्न याचिकाओं पर महत्वपूर्ण सुनवाई होगी. यह मामला जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है. इस सुनवाई पर हजारों अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इन परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है. सरकार ने अब तक दाखिल नहीं किया जवाब मामले की सुनवाई से पहले सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद राज्य सरकार अब तक अपना जवाब दाखिल नहीं कर सकी है. अदालत ने सरकार को 7 सितंबर तक शपथ पत्र दाखिल करने का स्पष्ट निर्देश दिया था, लेकिन सोमवार तक सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया. वहीं, कुछ मामलों में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल के माध्यम से शपथ पत्र दाखिल किया जा चुका है. ऐसे में अदालत के सामने आयोग और सरकार के रुख में अंतर भी चर्चा का विषय बना हुआ है. किन परीक्षाओं का मामला पहुंचा हाईकोर्ट हाईकोर्ट में एक साथ कई याचिकाओं पर सुनवाई होनी है, जिनमें अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द करने की वैधता को चुनौती दी गई है. इनमें JSSC CGL-2023, JPSC संयुक्त सिविल सेवा (11वीं से 13वीं), CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं. इन सभी परीक्षाओं को राज्य सरकार ने पूर्व में रद्द करने का निर्णय लिया था, जिसके बाद अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. अलग-अलग अभ्यर्थियों ने दायर की हैं याचिकाएं JSSC CGL-2023 परीक्षा रद्द करने के खिलाफ रमेश उरांव और अन्य अभ्यर्थियों ने याचिका दायर की है. वहीं, CDPO नियुक्ति परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना को सुभाष मुरमू और अन्य अभ्यर्थियों ने चुनौती दी है. इसी तरह दीपमाला, आशीष अक्षत, आकांक्षा मिंज और अन्य अभ्यर्थियों ने JPSC 11वीं से 13वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने के खिलाफ याचिका दाखिल की है. फूड सेफ्टी ऑफिसर प्रतियोगिता परीक्षा रद्द करने के मामले में सौरभ सिंह और अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया है. इन सभी परीक्षाओं से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य जुड़ा हुआ है. लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया पर अनिश्चितता बनी हुई है, इसलिए सोमवार की सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार अदालत में अपना पक्ष रखती है या नहीं और हाईकोर्ट आगे इस मामले में क्या निर्देश देता है. अदालत के अगले आदेश से इन विवादित भर्ती प्रक्रियाओं की आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है.

विधवा महिला से दुष्कर्म के आरोपित आरक्षक को राहत नहीं, हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से किया इनकार

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि पुलिस अधिकारी के पास राज्य की ओर से मिली संस्थागत शक्ति होती है और वह वर्चस्व की स्थिति में रहता है। ऐसे में पीड़िता की सहमति को सामान्य अर्थ में स्वतंत्र सहमति नहीं माना जा सकता, क्योंकि वह कानूनी कार्रवाई के भय या दबाव में भी संबंध के लिए सहमत हो सकती है। इस टिप्पणी के साथ जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने आदिवासी विधवा महिला से दुष्कर्म के आरोपित आरक्षक रूद्रमणी यादव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। मामला जशपुर जिले के कांसाबेल थाना क्षेत्र का है। आरक्षक रूद्रमणी यादव, निवासी तंगरडीह जशपुर ने एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 14-ए(2) के तहत आपराधिक अपील पेश कर 30 अप्रैल 2026 के विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी एक्ट जशपुर के आदेश को चुनौती दी थी। उसके खिलाफ कांसाबेल थाने में अपराध दर्ज है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एन) और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वी) के तहत आरोप हैं। अभियोजन के अनुसार पीड़िता ने शिकायत में आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में फेसबुक के जरिए उसकी आरोपी से पहचान हुई। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। आरोप है कि आरोपित ने महिला को अपने प्रभाव में लेकर कई बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इससे महिला गर्भवती हो गई और आरोप है कि बाद में उसका गर्भपात करा दिया गया। शिकायत में यह भी आरोप है कि इसके बाद आरोपित महिला को धमकाने और परेशान करने लगा। उसकी तस्वीरें रिश्तेदारों और परिचितों के बीच प्रसारित करने का भी आरोप लगाया गया है। इसके अलावा जमीन दिलाने के नाम पर महिला और उसके भाई से दो लाख रुपये लेने का आरोप भी लगाया गया। आरोपी ने कहा- तीन साल तक सहमति से था संबंध अग्रिम जमानत के लिए आरोपित की ओर से दलील दी गई कि वह और पीड़िता जनवरी 2023 से एक-दूसरे को जानते थे और दोनों बालिग हैं। लंबे समय तक दोनों के बीच सहमति से संबंध रहे। आरोपी पक्ष ने कहा कि पीड़िता दो बच्चों की मां है और उसने करीब तीन साल तक कोई शिकायत नहीं की। इसलिए एफआईआर में हुई देरी के आधार पर आरोपी ने उसे झूठा फंसाए जाने की बात कही। आरोपित ने एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वी) के आरोप पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसा कोई प्रथम दृष्टया साक्ष्य नहीं है कि कथित अपराध पीड़िता की जाति के कारण किया गया। आरोपी का कोई आपराधिक पूर्ववृत्त नहीं होने की दलील भी दी गई। बचाव पक्ष ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के दिनेश कुमार श्रीवास्तव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले का हवाला देते हुए लंबे समय के सहमति वाले संबंध में अग्रिम जमानत दिए जाने की बात कही। राज्य ने कहा- पुलिसकर्मी ने पद का फायदा उठाया राज्य की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध किया गया। बताया गया कि पीड़िता अनुसूचित जनजाति वर्ग की विधवा महिला है और आरोपी पुलिस कर्मचारी है। आरोप है कि उसने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए महिला के साथ संबंध बनाए और बाद में उसका शोषण किया। राज्य ने कोर्ट को बताया कि जांच के दौरान पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया, जिसमें पुराने हाइमेन के फटने और यौन संबंध की आदत संबंधी निष्कर्ष दर्ज किए गए हैं। पीड़िता का जाति प्रमाणपत्र भी जांच में जब्त किया गया है। पुलिस की वर्दी और अधिकार से प्रभावित हो सकती है सहमति मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने आरोपित के इस बचाव को स्वीकार नहीं किया कि दोनों के बीच सहमति से संबंध थे। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारी के पास राज्य की ओर से मिली संस्थागत शक्ति होती है। वह वर्चस्व की स्थिति में रहता है। ऐसे में पीड़िता कई बार अपनी स्वतंत्र इच्छा से नहीं, बल्कि कानूनी कार्रवाई के भय के कारण भी संबंध के लिए सहमत हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि इस कारण वर्तमान मामले में सहमति से संबंध होने की दलील को आरोपी के बचाव के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। आरोपी का मामला दूसरे फैसले से अलग हाई कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में वर्ष 2023 से लगातार जबरन शारीरिक संबंध बनाने, गर्भावस्था और गर्भपात, धमकी, उत्पीड़न, तस्वीरें प्रसारित करने तथा दो लाख रुपये लेने जैसे गंभीर आरोप हैं। जांच में सामने आए चिकित्सकीय और अन्य दस्तावेज भी रिकार्ड पर हैं। कोर्ट ने आरोपी पक्ष की ओर से उद्धृत इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले से वर्तमान मामले को अलग माना। हाई कोर्ट ने कहा कि उस मामले में लंबे समय के सहमति वाले संबंध के तथ्यों के आधार पर राहत दी गई थी, जबकि यहां आरोप बार-बार जबरन संबंध बनाने और उसके बाद शोषण एवं उत्पीड़न के हैं। इन्हीं आधार पर जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने रूद्रमणी यादव को अग्रिम जमानत का लाभ देने से इनकार करते हुए उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी।  

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने 17 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय डेलीगेशन के लिए आयोजित किया विशेष हेरिटेज टूर

रायपुर छत्तीसगढ़ की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड  ने जापान के मत्सुयामा स्थित एहिमे यूनिवर्सिटी के 17 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के लिए विशेष हेरिटेज टूर का आयोजन किया। अकादमिक एवं शोध सहयोग के उद्देश्य से 12 से 14 सितंबर 2026 तक एनआईटी रायपुर द्वारा होस्ट किए गए जापानी डेलीगेशन ने 14 सितंबर को प्राचीन ऐतिहासिक नगरी  सिरपुर का भ्रमण कर छत्तीसगढ़ की उस विरासत को करीब से जाना, जिसमें बौद्ध, हिंदू और जैन संस्कृति का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। मुख्य हॉस्पिटैलिटी एवं आयोजन सहयोगी के रूप में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए सिरपुर में विशेष हेरिटेज टूर की व्यवस्था की। डेलीगेशन को सिरपुर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थापत्य कला, पुरातात्विक महत्व और धार्मिक-सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराने के लिए विशेषज्ञ स्थानीय गाइड की सेवाएं ली गईं। साथ ही जापानी मेहमानों की खान-पान संबंधी पसंद को ध्यान में रखते हुए विशेष हॉस्पिटैलिटी एवं भोजन की व्यवस्था भी की गई। सिरपुर – इतिहास, धर्म और स्थापत्य का अद्भुत संगम महानदी के तट पर बसा सिरपुर प्राचीन काल में  श्रीपुर  के नाम से जाना जाता था और दक्षिण कोसल की राजधानी के रूप में इसका महत्वपूर्ण स्थान रहा। वर्तमान सिरपुर में हुए पुरातात्विक उत्खननों से बौद्ध विहारों, हिंदू मंदिरों, जैन अवशेषों तथा अन्य प्राचीन संरचनाओं का विस्तृत संसार सामने आया है। यहां बौद्ध, हिंदू और जैन परंपराओं से जुड़े अनेक पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं। जापानी प्रतिनिधिमंडल ने इस ऐतिहासिक नगरी के प्रमुख विरासत स्थलों का भ्रमण करते हुए यहां की स्थापत्य परंपरा और प्राचीन सांस्कृतिक जीवन को समझा। उनके लिए यह भ्रमण केवल पर्यटन नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच अकादमिक, सांस्कृतिक और विरासत संवाद का एक जीवंत अनुभव रहा। लक्ष्मण मंदिर – ईंटों में उकेरी अद्भुत स्थापत्य कला डेलीगेशन के भ्रमण का प्रमुख आकर्षण लक्ष्मण मंदिर रहा। लगभग सातवीं शताब्दी से संबद्ध यह मंदिर भारत के उत्कृष्ट प्राचीन ईंट निर्मित मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर की वास्तुकला, अलंकरण और ईंटों पर की गई बारीक कारीगरी सिरपुर की स्थापत्य कला को प्रदर्शित करती है। मंदिर परिसर में पुरातात्विक महत्व की अनेक प्रतिमाएं और अवशेष भी संरक्षित हैं। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मंदिर की संरचना, गर्भगृह, अंतराल और मंडप सहित इसकी स्थापत्य विशेषताओं को देखा तथा स्थानीय गाइड से मंदिर के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संदर्भों की जानकारी प्राप्त की। आनंद प्रभु कुटी विहार ने बताया सिरपुर का बौद्ध वैभव इसके बाद डेलीगेशन ने आनंद प्रभु कुटी विहार का भ्रमण किया। यह सिरपुर के प्रमुख बौद्ध पुरातात्विक स्थलों में शामिल है। विहार की संरचना में केंद्रीय प्रांगण के चारों ओर कक्षों की व्यवस्था तथा सुंदर नक्काशीदार स्थापत्य तत्व दिखाई देते हैं। यहां बुद्ध की प्रतिमा और पद्मपाणि अवलोकितेश्वर से संबंधित कलात्मक अवशेष इसकी बौद्ध विरासत को विशेष बनाते हैं। उपलब्ध पुरातात्विक विवरणों के अनुसार यहां 14 कक्षों वाला मठीय परिसर रहा है। जापानी विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने यहां प्राचीन बौद्ध शिक्षा, मठीय जीवन और स्थापत्य परंपरा के बारे में जानकारी ली। यह स्थल उनके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि जापान की अपनी सांस्कृतिक परंपरा में भी बौद्ध दर्शन और कला का गहरा प्रभाव रहा है।  स्वास्तिक विहार – प्राचीन वास्तु योजना का अनूठा उदाहरण डेलीगेशन ने स्वास्तिक विहार का भी अवलोकन किया। अपने विशिष्ट स्वास्तिकाकार विन्यास के कारण यह विहार सिरपुर की पुरातात्विक विरासत में विशेष पहचान रखता है। उत्खनन से यहां बुद्ध एवं पद्मपाणि से संबंधित प्रतिमाएं और अन्य बौद्धकालीन अवशेष प्राप्त हुए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने विहार की संरचना और प्राचीन वास्तु योजना को समझा तथा यह जाना कि सदियों पूर्व सिरपुर किस प्रकार धार्मिक एवं बौद्धिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा होगा।   तीवरदेव महाविहार में दिखा बौद्ध और भारतीय कला का समन्वय हेरिटेज टूर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव तीवरदेव महाविहार रहा। सिरपुर के प्रमुख बौद्ध स्मारकों में शामिल इस परिसर की कला में बौद्ध एवं हिंदू परंपराओं का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। यहां बुद्ध प्रतिमाओं के साथ गंगा-यमुना, गजलक्ष्मी, पौराणिक एवं अन्य अलंकरणात्मक शिल्प दिखाई देते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने इस स्थल को भारतीय सांस्कृतिक समन्वय की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया और यहां की कलात्मक विशेषताओं को करीब से देखा। यह अनुभव विशेष रूप से अकादमिक एवं शोध पृष्ठभूमि से आए सदस्यों के लिए ज्ञानवर्धक रहा। पुरातात्विक विरासत के विस्तृत संसार से हुए परिचित सिरपुर में अब तक हुए उत्खननों से अनेक बौद्ध विहारों, शिव एवं विष्णु मंदिरों तथा जैन परंपरा से जुड़े अवशेषों का पता चला है। यहां 12 बौद्ध विहार, एक जैन विहार, बुद्ध एवं महावीर की प्रतिमाओं के साथ अनेक शिव और विष्णु मंदिरों के अवशेष सामने आए हैं। इसी समृद्ध पुरातात्विक परिदृश्य को जापानी डेलीगेशन ने स्थल पर पहुंचकर अनुभव किया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने प्राचीन ईंट निर्माण, मूर्तिकला, विहारों की योजना और मंदिर स्थापत्य को विशेष रुचि के साथ देखा तथा कई स्थलों की जानकारी और दस्तावेजीकरण में भी रुचि दिखाई। अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए स्थानीय संस्कृति और आतिथ्य का अनुभव छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने हेरिटेज टूर को केवल स्मारक भ्रमण तक सीमित न रखते हुए अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को स्थानीय संस्कृति और आतिथ्य से जोड़ने का भी प्रयास किया। जापानी प्रतिनिधिमंडल के खान-पान की पसंद को ध्यान में रखते हुए विशेष भोजन व्यवस्था की गई तथा स्थानीय गाइडों ने सरल एवं रोचक तरीके से सिरपुर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थापत्य और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी। इस दौरान जापानी विद्यार्थियों एवं प्रतिनिधियों ने सिरपुर की प्राचीनता, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विविधता में विशेष रुचि दिखाई। उनके लिए यह अनुभव भारत की विरासत को अकादमिक अध्ययन और प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से समझने का अवसर बना। एनआईटी रायपुर ने सराहा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का सहयोग एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर दिलीप सिंह सिसोदिया ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के सिरपुर भ्रमण के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा की गई व्यवस्थाओं और सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि बोर्ड की ओर से किए गए समन्वय और आतिथ्य ने जापान से आए प्रतिनिधिमंडल के लिए इस सांस्कृतिक यात्रा को सहज, यादगार और ज्ञानवर्धक बनाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए इस तरह के हेरिटेज टूर केवल पर्यटन अनुभव नहीं, बल्कि विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक और अकादमिक संवाद को मजबूत करने का माध्यम भी हैं। … Read more

23 मोबाइल, 37 सिम, 11 एटीएम कार्ड, तीन लैपटॉप और छह पासबुक सहित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त; प्रतिमाह 7-8 करोड़ रुपए के लेन-देन का अनुमान

भोपाल  ग्वालियर पुलिस ने साइबर अपराध, ऑनलाइन सट्टा, ऑनलाइन गेम्बलिंग एवं बैंक खातों की खरीद-फरोख्त से जुड़े संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। विंडसर हिल्स स्थित किराए के डुप्लेक्स से संचालित इस नेटवर्क से 23 मोबाइल फोन, 37 सिम कार्ड, 11 एटीएम कार्ड, तीन लैपटॉप, छह पासबुक सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में नेटवर्क के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 7 से 8 करोड़ रुपए तथा वार्षिक स्तर पर करीब 100 करोड़ रुपए के वित्तीय लेन-देन का अनुमान सामने आया है। आरोपियों के दुबई एवं श्रीलंका से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में होने की जानकारी भी मिली है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर श्री धर्मवीर सिंह के निर्देश पर साइबर अपराधों एवं साइबर फ्रॉड में बैंक खातों का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई के क्रम में 12 सितम्बर को साइबर क्राइम विंग को विंडसर हिल्स स्थित एक डुप्लेक्स में ऑनलाइन सट्टा, बैंक खातों की खरीद-फरोख्त एवं ऑनलाइन गेम्बलिंग संचालित किए जाने की सूचना मिली। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए पांच व्यक्तियों को पकड़ा। पूछताछ एवं प्रारंभिक जांच में उनके उक्त गतिविधियों में संलिप्त होने की जानकारी सामने आई। आरोपियों के विरुद्ध क्राइम ब्रांच ग्वालियर में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है। ‘100 पैनल’ वेबसाइट से संचालित हो रहा था नेटवर्क प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ‘100 पैनल’ नामक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन सट्टे का संचालन कर रहे थे। आरोपियों के मोबाइल फोन से बड़ी संख्या में बैंक खातों से संबंधित विवरण प्राप्त हुए हैं। संबंधित बैंकों से इन खातों की जानकारी प्राप्त कर यह पता लगाया जा रहा है कि इनका उपयोग साइबर ठगी सहित अन्य अपराधों में किस प्रकार किया गया। करोड़ों रुपए के वित्तीय लेन-देन की जांच प्रारंभिक जांच के अनुसार नेटवर्क में प्रतिमाह करीब 7 से 8 करोड़ रुपए का लेन-देन होने का अनुमान है। पुलिस द्वारा बैंक खातों में हुए संदिग्ध लेन-देन, धनराशि के स्रोत, लाभार्थियों तथा पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच की जा रही है। दुबई और श्रीलंका से जुड़े नेटवर्क की भी जांच पूछताछ में आरोपियों द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से दुबई एवं श्रीलंका से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में होने की जानकारी दी गई है। पुलिस जब्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त डेटा का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। इससे नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों, बैंक खातों एवं वित्तीय लेन-देन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है। डुप्लेक्स मालिक की भूमिका की भी जांच जिस डुप्लेक्स में गतिविधियां संचालित की जा रही थीं, उसे किराए पर देने वाले मकान मालिक की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि डुप्लेक्स में संचालित गतिविधियों की जानकारी मकान मालिक को थी अथवा नहीं। जब्त सामग्री आरोपियों से 23 मोबाइल फोन, 37 सिम कार्ड, 11 एटीएम कार्ड, तीन लैपटॉप, छह पासबुक एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं। मध्यप्रदेश पुलिस साइबर अपराधों एवं ऑनलाइन अवैध गतिविधियों के विरुद्ध निरंतर प्रभावी कार्रवाई कर रही है। पुलिस द्वारा ऐसे संगठित नेटवर्क की पहचान कर उनके वित्तीय एवं तकनीकी नेटवर्क को खंगाला जा रहा है, ताकि साइबर ठगी, ऑनलाइन सट्टा, गेम्बलिंग तथा बैंक खातों के दुरुपयोग में संलिप्त अन्य व्यक्तियों तक पहुंच बनाई जा सके। साथ ही नागरिकों से अपील है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम अथवा अन्य डिजिटल संसाधन किसी भी व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध न कराएं और साइबर अपराध से संबंधित किसी भी घटना की तत्काल सूचना पुलिस को दें।  

दताना-मताना में प्रदेश के 10वें एयरपोर्ट का विकास जारी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सिंहस्थ-2028 के दृष्टिगत उज्जैन में अधोसंरचना विकास के कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और अन्य यात्रियों के सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए दताना-मताना स्थित हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह मध्यप्रदेश का 10वां एयरपोर्ट होगा। सिंहस्थ-2028 से पूर्व इसके निर्माण को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। आरसीएस-उड़ान 5.2 योजना के तहत विकास कार्य जारी दताना-मताना हवाई पट्टी का विकास केंद्र सरकार की आरसीएस-उड़ान 5.2 योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। इसके लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और राज्य सरकार के बीच एमओयू निष्पादित हो चुका है। परियोजना के लिए लगभग 120 एकड़ शासकीय भूमि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को हस्तांतरित की जा चुकी है। 1800 मीटर रनवे से होगी शुरुआत, 2700 मीटर तक विस्तार का प्रावधान दताना-मताना में वर्तमान हवाई पट्टी को 1800 मीटर रनवे के लिए विकसित किया जा रहा है। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए रनवे की लंबाई 27 मीटर तक बढ़ाये जाने की योजना है। इससे उज्जैन के लिए हवाई सेवाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी और विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों के यात्रा समय में कमी आएगी। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में महत्वपूर्ण कड़ी सिंहस्थ-2028 उज्जैन के लिए देश और दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक होगा। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में दताना-मताना एयरपोर्ट का विकास सिंहस्थ की तैयारियों की महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक कड़ी है। एयरपोर्ट के माध्यम से उज्जैन तक हवाई मार्ग से पहुंचना अधिक सुगम होगा, जिससे बड़े आयोजन के दौरान यात्रियों को आवागमन का एक अतिरिक्त और सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध होगा। धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा विस्तार बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन देश के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन केंद्रों में शामिल है। एयरपोर्ट के विकास से वर्षभर देश के विभिन्न हिस्सों से उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुविधा मिलेगी। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ व्यापार, स्थानीय परिवहन, होटल, खान-पान और अन्य सेवा क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। प्रदेश में लगातार बढ़ रहा हवाई अधोसंरचना का दायरा मध्यप्रदेश में हवाई अधोसंरचना के विस्तार की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। वर्ष 2023-24 में प्रदेश में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और खजुराहो सहित 5 प्रमुख एयरपोर्ट संचालित थे। वर्ष 2024-25 में रीवा, दतिया और सतना को जोड़ने के बाद इनकी संख्या 8 हो गई। इसके बाद शिवपुरी में नए एयरपोर्ट के विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और दताना-मताना में एयरपोर्ट का विकास पूरा होने पर मध्यप्रदेश को अपना 10वां एयरपोर्ट प्राप्त होगा। केंद्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश में 5 नए एयरपोर्ट के विकास को भी मंजूरी दी गई है। प्रदेश में हवाई अधोसंरचना के विस्तार के लिए व्यापक स्तर पर प्रस्तावित कार्यों से आने वाले समय में विभिन्न क्षेत्रों को बेहतर हवाई संपर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा।  

गयाजी में पिंडदान के लिए खास पैकेज जारी, ₹11,250 से शुरू कीमत; ऑनलाइन ई-पिंडदान भी

पटना Pitru Paksha Mela 2026: गयाजी में पितृपक्ष मेला 25 सितंबर से शुरू होने जा रहा है. यह मेला 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगा. देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बिहार पर्यटन ने खास पिंडदान पैकेज जारी किए हैं. इनमें यात्रा, पिंडदान, पूजा सामग्री, भोजन और ठहरने की सुविधा शामिल है. श्रद्धालु अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से एक दिन या एक रात-दो दिन का पैकेज चुन सकते हैं. जो लोग गयाजी नहीं आ सकते, उनके लिए ऑनलाइन ई-पिंडदान की सुविधा भी दी गई है. ऑनलाइन कर सकते हैं बुकिंग पिंडदान पैकेज की बुकिंग ऑनलाइन की जा सकती है. इसके लिए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की वेबसाइट पर जाना होगा. बुकिंग या किसी अन्य जानकारी के लिए 8544418408 और 8294307690 पर संपर्क किया जा सकता है. पर्यटन विभाग के अनुसार, पैकेज में पंडा-पुजारी की सेवा, जरूरी पूजन सामग्री, परिवहन, आवास और भोजन जैसी सुविधाएं शामिल हैं. पैकेज-A: पटना से पुनपुन और गयाजी यह एक दिन का पिंडदान पैकेज है. इसमें पटना से श्रद्धालुओं के पिकअप और ड्रॉप की सुविधा मिलेगी. पटना शहर के 10 किलोमीटर के दायरे के अलावा पटना रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट से भी परिवहन की सुविधा होगी. श्रद्धालुओं के लिए सेडान या हैचबैक कार उपलब्ध होगी. पुनपुन घाट पर पिंडदान, पिंडदान शुल्क और पूजन सामग्री की सुविधा मिलेगी. इसके बाद गयाजी में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर पिंडदान कराया जाएगा. इसमें बजट एसी से लेकर थ्री स्टार होटल तक में ठहरने की सुविधा है. शाकाहारी दोपहर का भोजन भी मिलेगा. पैकेज की कीमत 14,550 रुपये से शुरू होकर 30,650 रुपये तक है. कीमत होटल की श्रेणी और यात्रियों की संख्या के अनुसार तय होगी पैकेज-B: पिंडदान के साथ नालंदा-राजगीर की यात्रा यह एक रात और दो दिन का पैकेज है. इसमें पटना से पिकअप और ड्रॉप की सुविधा मिलेगी. पुनपुन घाट और गयाजी में पिंडदान से जुड़ी सेवाएं भी पैकेज में शामिल हैं. श्रद्धालुओं को आवास के साथ शाकाहारी नाश्ता, दोपहर और रात का खाना मिलेगा. इस दौरान राजगीर के विश्व शांति स्तूप और नालंदा के प्राचीन अवशेषों का भ्रमण भी कराया जाएगा. धार्मिक अनुष्ठान और यात्रा के साथ बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों को देखने का मौका भी मिलेगा. हालांकि, स्मारकों और पर्यटन स्थलों के प्रवेश टिकट पैकेज में शामिल नहीं हैं. इस पैकेज की कीमत 18,850 रुपये से शुरू होकर 40,700 रुपये तक है. पैकेज-C: गयाजी में एक दिन में पूरा पिंडदान गयाजी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक दिन का पैकेज है. गयाजी रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित पूजा स्थल से पिकअप और ड्रॉप की सुविधा मिलेगी. पैकेज में सेडान या हैचबैक कार की सुविधा होगी. फल्गु नदी पर तर्पण, विष्णुपद मंदिर में पिंडदान और अक्षयवट पर पिंडदान कराया जाएगा. इसके अलावा पंडाजी की सेवा, पिंडदान शुल्क, पूजन सामग्री, आवास और शाकाहारी दोपहर का भोजन भी शामिल है. इसकी कीमत 11,250 रुपये से शुरू होकर 25,250 रुपये तक है. पैकेज-D: देर रात और सुबह पिंडदान करने वालों के लिए यह पैकेज उन श्रद्धालुओं के लिए तैयार किया गया है, जो देर रात, सुबह या शाम के समय पिंडदान करना चाहते हैं. इसमें गयाजी रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या पूजा स्थल से पिकअप और ड्रॉप की सुविधा होगी. श्रद्धालुओं को सेडान या हैचबैक कार से यात्रा कराई जाएगी. आवास के साथ शाकाहारी दोपहर और रात का भोजन भी मिलेगा. फल्गु नदी पर तर्पण, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर पिंडदान की सुविधा इस पैकेज में शामिल है. इसकी कीमत 16,000 रुपये से शुरू होकर 39,500 रुपये तक है. पैकेज-E: गयाजी के साथ राजगीर-नालंदा भी घूम सकेंगे यह भी एक रात और दो दिन का पैकेज है. इसमें गयाजी में पिंडदान के साथ राजगीर और नालंदा घूमने की सुविधा मिलेगी. गयाजी रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित पूजा स्थल से पिकअप और ड्रॉप होगा. परिवहन, पिंडदान से जुड़ी सेवाएं, पूजन सामग्री और आवास पैकेज में शामिल हैं. श्रद्धालुओं को शाकाहारी नाश्ता, दोपहर का भोजन, अतिरिक्त दोपहर का भोजन और रात का खाना मिलेगा. राजगीर के विश्व शांति स्तूप और नालंदा के प्राचीन अवशेषों का भ्रमण भी कराया जाएगा. इस पैकेज में स्मारकों और पर्यटन स्थलों के प्रवेश टिकट शामिल नहीं हैं. इसकी कीमत 16,550 रुपये से शुरू होकर 32,850 रुपये तक है. गयाजी नहीं पहुंच सकते तो ऑनलाइन कराएं ई-पिंडदान जो श्रद्धालु किसी वजह से गयाजी नहीं आ सकते, उनके लिए ऑनलाइन ई-पिंडदान की सुविधा भी शुरू की गई है. इसकी कुल कीमत 23,000 रुपये है. इसमें GST भी शामिल है. ई-पिंडदान पैकेज में विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट और फल्गु नदी पर पिंडदान या तर्पण की व्यवस्था होगी. पंडित और पुरोहित की सेवा भी इसमें शामिल है. पूजन सामग्री और दक्षिणा की व्यवस्था भी पैकेज का हिस्सा है. पूरे अनुष्ठान की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाएगी. इसकी रिकॉर्डिंग पेन ड्राइव में श्रद्धालु को उपलब्ध कराई जाएगी. पुरोहित तीनों प्रमुख स्थलों पर विधि-विधान से पिंडदान या तर्पण कराएंगे. मंत्रोच्चार, दान-दक्षिणा और पूजन सामग्री समेत पूरे अनुष्ठान की रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराई जाएगी.

कोयला संकट के बीच योगी सरकार का प्रभावी प्रबंधन, रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति जारी

लखनऊ कोयला खदान क्षेत्रों में अतिवृष्टि से देशभर में कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने और तापीय विद्युत उत्पादन में आई कमी के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था को संभालने के लिए प्रभावी प्रबंधन पर जोर दिया है। विषम परिस्थितियों के बावजूद उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन प्रबंधन उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए प्रदेश के ग्रामीण, तहसील, नगर पंचायत और बुंदेलखंड क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार और कई स्थानों पर उससे अधिक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटा है। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने सोमवार को विद्युत आपूर्ति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में निर्धारित शिड्यूल के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए जहां से भी विद्युत उपलब्ध हो, उसे प्राप्त कर आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाए। 1500 से 2000 मेगावाट की कमी के बावजूद आपूर्ति वर्तमान में कोयले की कमी के कारण उत्तर प्रदेश को सामान्य दिनों की तुलना में करीब 1500 से 2000 मेगावाट विद्युत की कमी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में विद्युत की मांग भी पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ी है। वहीं कोयले की कमी के कारण लगभग 35 गीगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है। विंड एवं हाइड्रो पावर के उत्पादन में भी कमी आई है। इसके बावजूद वर्तमान परिस्थितियों में लगभग 27,000 मेगावाट तक की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीण, तहसील और नगर पंचायत क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर से अधिक बिजली देने की कोशिश की जा रही है। जल्द मिलेगी अतिरिक्त बिजली रात्रि में 2000 से 3000 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत उपलब्ध न हो पाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित कटौती की जा रही है। हालांकि आगामी दो-तीन दिनों में अनपरा डी, हरदुआगंज-ई तथा जवाहरपुर की बॉयलर ट्यूब लीकेज के कारण बंद इकाइयों के उपलब्ध होने से लगभग 1500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने की संभावना है। इसके अलावा अनपरा के कोयले को लैंको की ओर डायवर्ट करने तथा बारा में कोयला आपूर्ति में सुधार के चलते रात्रि में अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित करने से लगभग 700 मेगावाट विद्युत उपलब्धता एवं आपूर्ति में वृद्धि हुई है। योगी सरकार का फोकस, जनता को अधिकतम राहत पावर कारपोरेशन प्रबंधन का कहना है कि वर्ष 2017 एवं 2021 जैसी कोयला आपूर्ति संबंधी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करते हुए दिन के समय प्रदेश के सभी क्षेत्रों में कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीण, तहसील, नगर पंचायत एवं बुंदेलखंड क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर से अधिक घंटे विद्युत आपूर्ति देने का प्रयास लगातार जारी है। कोयला आपूर्ति में सुधार के लिए कोयला मंत्रालय के उच्च प्रबंधन से भी समुचित कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

अब 1.80 लाख आय तक परिवारों की महिलाओं को मिलेंगे हर महीने 2100 रुपये

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार अब लाडो लक्ष्मी योजना का दायरा बढ़ाने जा रही है। 17 सितंबर से एक लाख से 1.80 लाख रुपये तक की वार्षिक पारिवारिक आय वाले परिवारों की महिलाओं को भी हर महीने 2,100 रुपये की आर्थिक सहायता मिलनी शुरू हो जाएगी। सरकार ने इस आय वर्ग की प्रदेशभर में करीब 17 लाख महिलाओं को नए लाभार्थी के रूप में चिन्हित किया है। अभी तक एक लाख रुपये की पारिवारिक आय वाले परिवारों की महिलाओं को इस योजना का लाभ मिल रहा था। योजना के तहत अब तक 10 लाख 10 हजार लाभार्थी हैं। इन्हें 11 किस्तों में कुल 2,254 करोड़ 47 लाख रुपये की राशि जारी की जा चुकी है। हरियाणा सरकार ने लाडो लक्ष्मी योजना का बजट 5,000 करोड़ से बढ़ाकर 6,500 करोड़ रुपये कर दिया है। नए आय वर्ग की महिलाओं को योजना में शामिल करने के बाद सरकार ने बजट में 1,500 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की है। आय सीमा बढ़ने से लाभार्थियों की संख्या भी बढ़ेगी, इसलिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि बढ़े हुए बजट से पात्र महिलाओं को हर महीने 2,100 रुपये की आर्थिक सहायता नियमित रूप से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। किस जिले में कितने लाभार्थी चिन्हित किए गए एक लाख से 1.80 लाख रुपये तक की वार्षिक पारिवारिक आय वाले नए लाभार्थियों में फरीदाबाद सबसे आगे है। यहां 2 लाख 22 हजार 562 महिलाओं को चिन्हित किया गया है। इसके बाद सोनीपत में 1 लाख 18 हजार 878, पानीपत में 1 लाख 9 हजार 424, करनाल में 1 लाख 5 हजार 717 और पलवल में 1 लाख 1 हजार 652 महिलाएं योजना के दायरे में आएंगी। वहीं, गुरुग्राम में 92 हजार 17, यमुनानगर में 77 हजार 605, जींद में 73 हजार 152, नूंह में 69 हजार 760, सिरसा में 69 हजार 397 और झज्जर में 67 हजार 513 महिलाओं को चिन्हित किया गया है। हिसार में 67 हजार 177, कैथल में 66 हजार 518 और भिवानी में 66 हजार 14 लाभार्थी हैं। सबसे कम संख्या चरखी दादरी में 24 हजार 159 है। इसके अलावा हांसी में 27 हजार 809 और पंचकूला में 37 हजार 472 महिलाएं चिन्हित की गई हैं। लाडो लक्ष्मी योजना से पंजाब की सियासत साधने की कोशिश हरियाणा की लाडो लक्ष्मी योजना अब पंजाब की चुनावी राजनीति में भी मुद्दा बनती दिख रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की पिछले 11 महीनों में पंजाब में करीब 90 कार्यक्रमों में मौजूदगी और योजना का दायरा बढ़ाने को राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हरियाणा में अब 1.80 लाख रुपये तक सालाना पारिवारिक आय वाली पात्र महिलाओं को 2,100 रुपये मासिक मिलेंगे। भाजपा इसे पंजाब की महिलाओं तक अपना संदेश पहुंचाने के मौके के तौर पर देख रही है। पार्टी हरियाणा की 2,100 रुपये की सहायता की तुलना पंजाब की योजना से कर सकती है। हालांकि दोनों योजनाओं की पात्रता अलग है। पंजाब में योजना का दायरा काफी व्यापक है, जबकि हरियाणा में आय और उम्र जैसी शर्तें हैं। ऐसे में योजना का चुनावी असर इस बात पर निर्भर करेगा कि भाजपा इसे पंजाब में कितना प्रभावी राजनीतिक मुद्दा बना पाती है।  

25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक 2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों में ‘आंगन मिलन सेवा’

रायपुर  बलरामपुर जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले ’सेवा संकल्प अभियान’ को जनभागीदारी और सामाजिक सरोकार से जोड़ने की दिशा में बलरामपुर जिले में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसी कड़ी में ’आंगन मिलन सेवा‘ (आंगनबाड़ी सम्मान एवं मातृ सम्मान) कार्यक्रम 25 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होगा। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के मंशानुरूप इस पहल के तहत जिले के सभी ’2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों’ में आने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए जनसहयोग से खिलौने उपलब्ध कराए जाएंगे। ‘आंगन मिलन सेवा’ का उद्देश्य आंगनबाड़ी केन्द्रों को बच्चों के लिए और अधिक आनंदमय, आकर्षक तथा सीखने के अनुकूल वातावरण प्रदान करना है। इस पहल में जिले के नागरिकों की सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। ’खिलौना दान इस आयोजन का सबसे आत्मीय और संवेदनशील पक्ष होगा’, जिसके माध्यम से जिलेवासी आंगनबाड़ी के बच्चों के साथ सेवा, स्नेह और अपनत्व का भाव साझा कर सकेंगे। ’घर में रखे खिलौने भी बनेंगे किसी बच्चे की खुशी का कारण’ कलेक्टर  चंदन संजय त्रिपाठी ने जिलेवासियों से अपील की है कि उनके घरों में ऐसे ’सुरक्षित, स्वच्छ एवं उपयोगी खिलौने’, जिनका अब उपयोग नहीं हो रहा है, वे उन्हें आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों को भेंट कर सकते हैं। इसके साथ ही इच्छुक नागरिक अपनी स्वेच्छा से नए खिलौने खरीदकर भी बच्चों को दान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए किया गया छोटा-सा प्रयास भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। जिले के नागरिक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं और व्यवसायिक प्रतिष्ठान 25 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच अपने निकटतम आंगनबाड़ी केन्द्र पहुंचकर इस जनभागीदारी अभियान में शामिल हो सकते हैं। आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों की पहली पाठशाला कलेक्टर  त्रिपाठी ने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों के जीवन की ’पहली पाठशाला’ हैं। यहीं से बच्चों में सीखने, समझने, संवाद करने और सामाजिक व्यवहार की प्रारंभिक नींव तैयार होती है। ऐसे में इन केन्द्रों को बच्चों के लिए अधिक जीवंत और सीखने योग्य बनाने में समाज की सहभागिता निर्णायक भूमिका निभा सकती है। उन्होंने जिलेवासियों से आग्रह करते हुए कहा कि आपका छोटा-सा सहयोग किसी बच्चे के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकता है और उसकी सीखने की यात्रा को और समृद्ध कर सकता है। बच्चों के लिए किया गया प्रत्येक छोटा प्रयास उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव को मजबूत करने में योगदान देता है। खिलौनों से खेल-खेल में सीखने की मजबूत होगी नींव बच्चों के लिए खिलौने केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे उनके ’रचनात्मक, बौद्धिक और सामाजिक विकास’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेल-खेल में बच्चे नई चीजों को समझते हैं, अपनी कल्पनाशक्ति को विकसित करते हैं और भाषा तथा सामाजिक व्यवहार से जुड़े कौशल सीखते हैं। जनसहयोग से प्राप्त खिलौनों का उपयोग आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करने में किया जाएगा, जहां वे ’खेलते हुए सीख सकें, अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्त कर सकें और सीखने की प्रक्रिया का आनंद उठा सकें।’  इससे आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की रुचि और सहभागिता को भी बढ़ावा मिलेगा। सेवा से संकल्प और संकल्प से जनभागीदारी की ओर ‘आंगन मिलन सेवा’ केवल खिलौना दान तक सीमित पहल नहीं है, बल्कि यह समाज में ’संवेदनशीलता, सहयोग और अपनत्व की भावना को मजबूत करने का अवसर’ भी है। एक ओर जहां बच्चों को उनके विकास के लिए उपयोगी संसाधन मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर समाज के विभिन्न वर्गों को बच्चों के साथ सीधे जुड़कर सेवा का अवसर मिलेगा। जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आयोजित ‘आंगन मिलन सेवा’ में सक्रिय सहभागिता निभाएं। अपने घर में अनुपयोगी लेकिन सुरक्षित और उपयोगी खिलौने किसी आंगनबाड़ी केन्द्र में दान करें या अपनी इच्छा के अनुसार नए खिलौने उपलब्ध कराएं। यह जनभागीदारी पहल 2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों के नन्हे-मुन्नों के जीवन में खुशियों के रंग भरने के साथ-साथ सेवा, स्नेह और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी नई मजबूती देगी। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जिले में यह संदेश भी जाएगा कि बच्चों के बेहतर भविष्य की जिम्मेदारी केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है।