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यूपी के पीएमश्री विद्यालयों में पढ़ाई के साथ होगी बागवानी की पढ़ाई, 49 स्कूलों को ₹20 हजार की मदद

 बांदा  अब सरकारी स्कूलों में किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक शिक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में पीएमश्री विद्यालयों में एक नई पहल शुरू होने जा रही है। यहां पढ़ने वाले बच्चे अब पढ़ाई के साथ-साथ बागवानी के गुर भी सीखेंगे। बच्चों को प्रकृति और पोषण से जोड़ने के लिए हर स्कूल में किचन, सब्जी और औषधीय उद्यान बनाए जाएंगे। इसके लिए शासन ने प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार रुपये की धनराशि भी जारी कर दी है। इस योजना से बच्चों में पर्यावरण संरक्षण की भावना तो विकसित होगी ही, साथ ही उन्हें जैविक खेती और स्वस्थ जीवनशैली की भी जानकारी मिलेगी। मंडल के चारों जिलों में कुल 49 पीएमश्री विद्यालय संचालित हैं। इनमें 36 बेसिक शिक्षा के व 13 माध्यमिक शिक्षा के पीएमश्री विद्यालय शामिल हैं। जिनमें करीब 42 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। अब बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ बागवानी भी सीखेंगे। बच्चों को प्रकृति, पोषण और पर्यावरण से जोड़ने के लिए हर पीएमश्री स्कूल में किचन, सब्जी और औषधीय उद्यान विकसित किए जाएंगे। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार रुपये की धनराशि भेजी गई है। समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार उद्यान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि बच्चों को पौधों की पहचान, पोषण, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, जैविक खाद और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी देना है। विद्यालयों में तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा, नीम, आंवला, हल्दी, लेमनग्रास, पुदीना, धनिया, पालक, मेथी, सहजन जैसे उपयोगी एवं स्थानीय पौधे लगाए जाएंगे। कम भूमि वाले विद्यालयों में वर्टिकल गार्डन, प्लास्टिक बोतल, टायर, ग्रो बैग, कंटेनर व रेज्ड बेड माडल अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।     बहुत अच्छी योजना है। बच्चे अभी तक सिर्फ किताबों में पौधों के बारे में पढ़ते थे, अब खुद पौधे लगाना सीखेंगे। इससे उन्हें सब्जियों और औषधीय पौधों का महत्व पता चलेगा और मोबाइल से दूर प्रकृति से जुड़ाव भी बढ़ेगा। -सुनील कुमार, अभिभावक, नरैनी।     स्कूल में बागवानी शुरू होने से हमारे बच्चों में मेहनत करने की आदत पड़ेगी। घर पर भी वे बागवानी में हमारी मदद कर सकते हैं। जो सब्जियां स्कूल में उगेंगी, उनसे मिड-डे-मील भी पौष्टिक होगा, यह हमारे लिए गर्व की बात है। -रीना देवी, अभिभावक, अतर्रा।     पीएमश्री विद्यालयों में बच्चों को बागवानी से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। इसमें सबसे बेहतर बात यह होगी कि बच्चों को पौधों की पहचान हो सकेगी। औषधियों के होने वाले लाभों के बारे में जान सकेंगे। -राजेश कुमार, वर्मा, संयुक्त शिक्षा निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चित्रकूट धाम मंडल, बांदा। पीएमश्री विद्यालय की स्थिति एक नजर में जिला     बेसिक स्तर     माध्यमिक शिक्षा बांदा     07     05 चित्रकूट     07     02 हमीरपुर     16     04 महोबा     06     02 कुल     36     13

त्योहारी सीजन में यात्रियों को बड़ी राहत, भोपाल होकर गुजरेंगी स्पेशल ट्रेनें; IRCTC की एडवाइजरी जारी

भोपाल  आने वाले दिनों में दशहरा, दिवाली और छठ पूजा के दौरान रेल यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मध्य प्रदेश के भोपाल रेल मंडल से तीन राज्यों के बीच दो जोड़ी विशेष ट्रेनें चलाने का फैसला हुआ है। भारतीय रेलवे के इस कदम से त्योहारों के मौसम में घर जाने वाले लोगों को कन्फर्म सीट प्राप्त करने में काफी सुविधा मिलेगी। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आईआरसीटीसी ने यात्रियों के लिए विशेष एडवाइजरी भी जारी की है।   ट्रेनों के मार्ग और फेरों का विवरण रेलवे द्वारा घोषित विशेष ट्रेनों में पहली ट्रेन पुणे और गोरखपुर के बीच संचालित होगी। यह ट्रेन अक्तूबर के दूसरे सप्ताह से शुरू होकर नवंबर तक दोनों दिशाओं में कुल 44 फेरे लगाएगी। वहीं दूसरी विशेष ट्रेन मुंबई सीएसएमटी से गोरखपुर के बीच चलाई जाएगी, जो अक्तूबर से नवंबर के दौरान कुल 43 फेरे पूरे करेगी। ये दोनों ट्रेनें अपने मार्ग में इटारसी, भोपाल, बीना, झांसी, कानपुर, लखनऊ और गोंडा जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों से होकर गुजरेंगी। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी भी स्टेशन से अपना रिजर्वेशन करवा सकते हैं।   टिकट बुकिंग और सीटों की स्थिति त्योहारों के समय यात्रा के लिए एडवांस टिकट बुकिंग की व्यवस्था यात्रा की तारीख से 60 दिन पहले शुरू होती है। सुबह 8 बजे जैसे ही टिकट बुकिंग विंडो खुलती है, एक मिनट के अंदर ही सीटें वेटिंग में पहुंच जाती हैं। यात्रियों को कन्फर्म सीट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही दो जोड़ी विशेष ट्रेनों का संचालन करने का निर्णय लिया गया है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया के अनुसार रेलवे प्रशासन त्योहारों के दौरान यात्रियों को सुगम यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए लगातार प्रयासरत है। आईआरसीटीसी की सलाह यात्रियों को फर्जी एजेंटों से बचाने के लिए रेलवे ने सलाह दी है कि टिकट केवल आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट irctc.co.in या 'आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट' एप से ही बुक करें। किसी भी अनधिकृत दलाल या फर्जी एजेंट के झांसे में न आएं, क्योंकि उनसे लिया गया टिकट अवैध माना जा सकता है। बुकिंग के समय केवल अपना चालू मोबाइल नंबर ही दर्ज करें ताकि ट्रेन के समय और प्लेटफॉर्म की सटीक जानकारी एसएमएस पर मिलती रहे।   वेबसाइट पर अकाउंट रजिस्टर करके यूजरनेम और पासवर्ड से लॉगिन करें। इसके बाद यात्रियों का नाम, उम्र तथा सीट की प्राथमिकता दर्ज करके क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग या यूपीआई के माध्यम से भुगतान करें। भुगतान पूरा होने के बाद ई-टिकट ईमेल और एसएमएस पर प्राप्त हो जाएगा।  

मध्य प्रदेश में 500 वर्गमीटर तक के प्लॉट पर स्थानीय निकाय देगा मकान की मंजूरी, T&CP से मिली राहत

भोपाल / इंदौर  मध्य प्रदेश में 500 वर्गमीटर (करीब 5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर मकान बनाने की अनुमति अब स्थानीय निकाय के स्तर पर ही मिल सकेगी। इसके लिए T&CP से अलग डेवलपमेंट परमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी। स्वीकृत लैंड यूज वाले प्लॉट का नक्शा नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद 30 दिन में मंजूर कर सकेगा। पहले इस प्रक्रिया में तीन से चार महीने लगते थे।  500 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर प्रक्रिया होगी सरल महापौर भार्गव ने कहा कि संशोधन से 500 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर भवन निर्माण और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया अधिक सरल और सुगम होगी। इससे आम नागरिकों को निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं में राहत मिलने की उम्मीद है। विकास की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी उन्होंने कहा कि नियमों में बदलाव से नागरिकों को सुविधा मिलेगी और शहरों में विकास की गति भी बढ़ेगी। साथ ही बेहतर शहरी नियोजन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस निर्णय को जनसुविधा और सुगम विकास की दिशा में स्वागतयोग्य पहल बताया। मुख्यमंत्री और मंत्री का जताया आभार पुष्यमित्र भार्गव ने इस संशोधन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का हृदय से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जनसुविधा को प्राथमिकता देते हुए लिए गए ऐसे फैसले नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। डिजिटल दस्तावेज ही होंगे मान्य मध्य प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में अब घर या अन्य भवन बनाने की अनुमति लेना पहले से आसान होगा। राज्य सरकार ने बिल्डिंग परमिशन के लिए कई विभागों से अनिवार्य रूप से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लाने की बाध्यता खत्म कर दी है। अब हाउसिंग सोसायटी, नजूल और बिजली विभाग समेत कई मामलों में आवेदकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही भवन अनुज्ञा की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और केवल डिजिटल दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, भवन अनुज्ञा प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने के लिए यह बदलाव किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे आम नागरिकों के साथ निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को भी राहत मिलेगी। कई विभागों की NOC से मिली राहत नई व्यवस्था के तहत सहकारिता विभाग एवं गृह निर्माण सहकारी समितियों, नजूल और बिजली विभाग से मांगी जाने वाली कई प्रकार की NOC की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में भी अब आवेदकों को स्वयं NOC लाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। यदि किसी मामले में संबंधित विभाग की राय आवश्यक होगी तो सक्षम प्राधिकारी आवेदन मिलने के सात दिन के भीतर प्रकरण संबंधित विभाग को भेजेगा। विभाग को 21 दिन के भीतर अपनी अनापत्ति या आपत्ति देनी होगी। तय समय में जवाब नहीं मिलने पर भवन अनुमति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। इन मामलों में अब भी NOC जरूरी सरकार ने स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) और हेरिटेज क्षेत्रों से संबंधित NOC केवल उन्हीं मामलों में जरूरी होगी, जहां ऑनलाइन GIS आधारित जांच में भूखंड प्रतिबंधित या प्रभावित क्षेत्र में पाया जाएगा। अन्य मामलों में इनकी जरूरत नहीं होगी। पर्यावरण और फायर नियमों में भी स्पष्टता निर्धारित क्षेत्रफल से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए ही पर्यावरणीय स्वीकृति जरूरी होगी। वृक्ष कटाई की अनुमति भी केवल उन्हीं मामलों में लेनी होगी, जहां वास्तव में पेड़ काटे जाने हों। अग्निशमन (फायर) अनापत्ति के नियम राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुसार लागू रहेंगे। नियमों में 5 बड़े बदलाव     दायरा: छूट 500 वर्गमीटर (5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर ही लागू होगी।     T&CP की अनुमति खत्म: भवन निर्माण के लिए T&CP से अलग ‘डेवलपमेंट परमिशन’ लेने की जरूरत नहीं होगी।     मंजूरी का अधिकार: नक्शा पास करने और निर्माण की अनुमति देने का अधिकार स्थानीय निकाय-नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद के पास होगा।     अनिवार्य शर्त: प्लॉट का लैंड यूज स्वीकृत डेवलपमेंट प्लान (मास्टर प्लान) के मुताबिक होना जरूरी है।     प्रक्रिया: सरकार ने 28 अगस्त को संशोधन का ड्राफ्ट जारी कर 5 दिन में आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। अब फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जा रहा है। इंदौर में 3 साल से अटकी भवन अनुमतियों की प्रक्रिया फिर शुरू होने की उम्मीद मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव की पृष्ठभूमि इंदौर की भवन अनुमति से जुड़ी समस्या रही। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने यह मुद्दा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने उठाया था। बाणगंगा, भागीरथपुरा, न्यू देवास रोड और परदेशीपुरा समेत एक दर्जन से अधिक इलाकों में खसरा भूमि और प्लॉटों के लेआउट T&CP से स्वीकृत नहीं थे। यहां पहले ‘डाटा फॉर्म’ के आधार पर प्लॉट तैयार कर भवन अनुमति दी जाती थी, लेकिन जुलाई 2023 में इस व्यवस्था पर रोक लग गई। इसके बाद इन इलाकों में मकानों के नक्शे पास होने की प्रक्रिया रुक गई। नए नियम से इंदौर समेत प्रदेश के ऐसे भूखंड मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

चंडीगढ़ में सोलर एनर्जी को मिलेगा बढ़ावा, 8000 घरों की छतों पर लगेंगे सोलर प्लांट, ₹78 हजार तक सब्सिडी

चंडीगढ़  शहर को वर्ष 2030 तक मॉडल सोलर सिटी बनाने की दिशा में प्रशासन ने निजी घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का अभियान तेज कर दिया है।चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी, साइंस एंड टेक्नोलाजी प्रमोशन सोसायटी (क्रेस्ट) ने मार्च 2027 तक शहर के आठ हजार निजी घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य तय किया है। अभी तक प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत 1433 निजी घरों पर सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं, जबकि करीब दो हजार लोगों ने अपने स्तर पर संयंत्र स्थापित किए हैं। लक्ष्य हासिल करने के लिए क्रेस्ट की ओर से शहरभर में जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं। इनमें लोगों को आवेदन प्रक्रिया, सब्सिडी, बैंक ऋण और सोलर प्लांट लगाने की तकनीकी जानकारी दी जा रही है। 12 सूचीबद्ध विक्रेता लोगों को संयंत्र की क्षमता और स्थापना संबंधी जानकारी दे रहे हैं। पंजाब एंड सिंध बैंक तथा पंजाब नेशनल बैंक के प्रतिनिधि ऋण संबंधी सवालों का जवाब दे रहे हैं। सरकारी भवनों पर पहले ही पूरा हुआ लक्ष्य चंडीगढ़ देश के उन शुरुआती शहरों में शामिल है, जहां सभी पात्र सरकारी भवनों और मकानों पर सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। शहर के 6366 सरकारी भवनों पर सौर संयंत्र लगाए गए हैं। करीब 1400 सरकारी मकानों में बिजली खपत नेट-जीरो स्तर तक पहुंच गई है। इन संयंत्रों की कुल क्षमता 18.1 मेगावाट पीक है और इनसे सालाना करीब 2.35 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत अब तक 148 लाभार्थियों के बिजली बिल शून्य हो चुके हैं। योजना में तीन किलोवाट तक के घरेलू सोलर प्लांट के लिए केंद्र सरकार की ओर से अधिकतम 78 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाती है। पात्र लोगों को छह प्रतिशत तक की ब्याज दर पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है। 97 नगर निगम भवनों पर लगेगा सोलर प्लांट क्रेस्ट ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड से रेंट-ए-रूफ योजना के तहत छतों पर सोलर प्लांट लगाने का आग्रह किया है। वहीं नगर निगम के 97 भवनों, जिनमें सामुदायिक केंद्र भी शामिल हैं, पर सोलर प्लांट लगाने के लिए क्रेस्ट का समझौता हो चुका है। चंडीगढ़ फ्लोटिंग सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। सेक्टर-39 वाटरवर्क्स में उत्तर भारत का सबसे बड़ा 2.5 मेगावाट पीक क्षमता का फ्लोटिंग सोलर प्लांट पहले ही शुरू किया जा चुका है। अब तीन मेगावाट क्षमता का एक और फ्लोटिंग प्लांट तैयार है, जिसे जल्द शुरू किया जाएगा। सूर्य घर योजना में क्या मिलेगा     तीन किलोवाट तक के सोलर प्लांट पर अधिकतम 78 हजार रुपये की केंद्रीय सब्सिडी।     छह प्रतिशत तक की ब्याज दर पर बैंक ऋण की सुविधा।     क्रेस्ट की ओर से विक्रेता चयन और तकनीकी सहायता।     सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में।     शिकायतों के समाधान के लिए एकल खिड़की व्यवस्था।     आवेदन के लिए प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है।  

अपनी भाषा और जड़ों से जुड़कर ही युवा कर सकते हैं सशक्त राष्ट्र का निर्माण : मंत्री सारंग

भोपाल  “मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे भाव, विचार, संस्कार और संस्कृति की अभिव्यक्ति है। अपनी भाषा और जड़ों से जुड़कर ही युवा सशक्त राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।” यह बात सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को भारत भवन में आयोजित दो दिवसीय ‘भारतीय भाषा अनुष्ठान’ के शुभारंभ सत्र में कही। इस अवसर पर 19 पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, संस्कृति संचालनालय के संचालक एन.पी. नामदेव, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी एवं दत्तोपंत ठेंगडी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश मिश्रा उपस्थित रहे। वीर भारत न्यास एवं संस्कृति संचालनालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सारंग ने कहा कि किसी भी समाज और संस्कृति की मूल पहचान उसकी मातृभाषा में निहित होती है। भाषा के माध्यम से व्यक्ति अपनी परंपराओं, ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ता है। उन्होंने औपनिवेशिक काल की शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी शिक्षा पद्धति के प्रभाव से भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक दृष्टि को कमजोर करने का प्रयास हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को मातृभाषा आधारित शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए मध्यप्रदेश में हिंदी माध्यम से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू किए जाने का उल्लेख किया। मंत्री सारंग ने युवाओं से अपनी भाषा, बोली और संस्कृति को आत्मसात कर वर्ष 2047 तक विकसित और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया। भारतीय भाषाओं में सुरक्षित हैं हमारी सभ्यता और संस्कृति की स्मृतियाँ: शिव शेखर शुक्ला स्वागत संबोधन में अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि आज गणेश चतुर्थी का पावन अवसर भी है। ज्ञान, बुद्धि और शुभारंभ के प्रतीक भगवान गणेश के पर्व पर भारतीय भाषाओं, साहित्य और ज्ञान परंपरा के इस अनुष्ठान का शुभारंभ होना अत्यंत मंगलकारी संयोग है। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति की स्मृतियाँ हमारी मातृभाषाओं, बोलियों और लिपियों में सुरक्षित हैं। यह आयोजन भारतीय भाषाओं की विविधता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता की भावना को अभिव्यक्त करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि संवाद, प्रदर्शनी, पुस्तक लोकार्पण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ अनुष्ठान को व्यापक सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करेंगी। इन 19 पुस्तकों का लोकार्पण इस अवसर पर भारतीय ज्ञान, साहित्य और संस्कृति से जुड़ी 19 महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। जिसमें वीर भारत न्यास की भारत निधि श्रृंखला अंतर्गत महर्षि पाणिनि, भोजदेव, महर्षि पतंजलि, भर्तृहरि और सम्राट राजेंद्र चोल शामिल है। इसके साथ ही दस गीताएँ- ‘अष्टावक्रगीता’, ‘नारदगीता’, ‘गर्भगीता’,‘ब्राह्मणगीता’, ‘उत्तरगीता’, ‘परमहंसगीता’, ‘वृत्रगीता’, ‘हंसगीता’, ‘चंद्रगीता’, ‘जानकीगीता’ , मध्यकालीन परिदृश्य में मध्य भारत के नगर, बस्तियाँ, मंदिर और तालाब, ‘युग-युगीन जल’, ‘उड़ चल अपने देश’, ‘सूर्यकांत त्रिपाठी निराला—हिंदी साहित्य के प्रकाश पुंज’ जैसी कृतियाँ शामिल हैं। भाषाओं में भारत की आत्मा को समझने का माध्यम है मातृभाषा भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान में ‘मातृभाषा से राष्ट्रभाषा : भाषाओं में भारत की आत्मा’ विषय पर सार्थक विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि मातृभाषाएँ भारत की सांस्कृतिक स्मृति और विविधता की संवाहक हैं। बांग्ला के स्नेहाशीष सूर और कश्मीरी के आसिम मोहिउद्दीन ने विचार रखे। सत्र का समन्वय कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने किया। दूसरे सत्र में भाषाई पत्रकारिता पर जयदीप कर्णिक, गिरीश उपाध्याय और नारायण व्यास ने विचार साझा किए। संचालन मुकेश मिश्रा ने किया। राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में गूंजे काव्य के विविध स्वर भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान के अंतर्गत राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसमें डॉ. कीर्ति काले, स्वयं श्रीवास्तव, दिनेश दिग्गज, शैलेन्द्र मधुर, अज़हर इकबाल और रामायणधर द्विवेदी ने अपनी रचनाओं का काव्य पाठ कर श्रोताओं को भाव-विभोर किया। विविध रसों से सजी प्रस्तुतियों को श्रोताओं की सराहना मिली। शब्द से चित्र तक: भारत भवन में सजी चित्रित पांडुलिपियों की प्रदर्शनी भारत भवन में ‘शब्द से चित्र तक’ प्रदर्शनी आयोजित की गई। इसमें भारतीय भाषाओं के साथ तिब्बत, नेपाल और दक्षिण-पूर्व एशिया की चित्रित पांडुलिपि परंपराओं को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी ने अक्षर, लिपि, रंग और चित्रों के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध यात्रा को साकार किया। पूर्व रंग में भारतीय भाषाओं एवं बोलियों के गीतों की प्रस्तुति ‘भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान’ की सांस्कृतिक गरिमा को बढ़ाते हुए पूर्वरंग में उमेश तरकसवार एवं दल द्वारा भारतीय भाषाओं और विभिन्न लोकबोलियों के गीतों की मनोहारी प्रस्तुति दी गई। विविध भाषाओं के सुरों ने भारत की सांस्कृतिक एकता और भाषाई विविधता का सुंदर भाव प्रस्तुत करते हुए वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। सहभागी संस्थाएँ वीर भारत न्‍यास एवं संस्कृति संचालनालय, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में भारत भवन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान तथा मातृभाषा मंच की सहभागिता रही।  

JPSC-JSSC CGL समेत भर्ती परीक्षाओं के रद्द होने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, 15 सितंबर को सुनवाई

रांची Jharkhand High Court Hearing: झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार 15 सितंबर को JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा, JSSC CGL-2023, CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा के विज्ञापन रद्द करने के खिलाफ दायर विभिन्न याचिकाओं पर महत्वपूर्ण सुनवाई होगी. यह मामला जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है. इस सुनवाई पर हजारों अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इन परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है. सरकार ने अब तक दाखिल नहीं किया जवाब मामले की सुनवाई से पहले सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद राज्य सरकार अब तक अपना जवाब दाखिल नहीं कर सकी है. अदालत ने सरकार को 7 सितंबर तक शपथ पत्र दाखिल करने का स्पष्ट निर्देश दिया था, लेकिन सोमवार तक सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया. वहीं, कुछ मामलों में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल के माध्यम से शपथ पत्र दाखिल किया जा चुका है. ऐसे में अदालत के सामने आयोग और सरकार के रुख में अंतर भी चर्चा का विषय बना हुआ है. किन परीक्षाओं का मामला पहुंचा हाईकोर्ट हाईकोर्ट में एक साथ कई याचिकाओं पर सुनवाई होनी है, जिनमें अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द करने की वैधता को चुनौती दी गई है. इनमें JSSC CGL-2023, JPSC संयुक्त सिविल सेवा (11वीं से 13वीं), CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं. इन सभी परीक्षाओं को राज्य सरकार ने पूर्व में रद्द करने का निर्णय लिया था, जिसके बाद अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. अलग-अलग अभ्यर्थियों ने दायर की हैं याचिकाएं JSSC CGL-2023 परीक्षा रद्द करने के खिलाफ रमेश उरांव और अन्य अभ्यर्थियों ने याचिका दायर की है. वहीं, CDPO नियुक्ति परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना को सुभाष मुरमू और अन्य अभ्यर्थियों ने चुनौती दी है. इसी तरह दीपमाला, आशीष अक्षत, आकांक्षा मिंज और अन्य अभ्यर्थियों ने JPSC 11वीं से 13वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने के खिलाफ याचिका दाखिल की है. फूड सेफ्टी ऑफिसर प्रतियोगिता परीक्षा रद्द करने के मामले में सौरभ सिंह और अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया है. इन सभी परीक्षाओं से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य जुड़ा हुआ है. लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया पर अनिश्चितता बनी हुई है, इसलिए सोमवार की सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार अदालत में अपना पक्ष रखती है या नहीं और हाईकोर्ट आगे इस मामले में क्या निर्देश देता है. अदालत के अगले आदेश से इन विवादित भर्ती प्रक्रियाओं की आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है.

विधवा महिला से दुष्कर्म के आरोपित आरक्षक को राहत नहीं, हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से किया इनकार

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि पुलिस अधिकारी के पास राज्य की ओर से मिली संस्थागत शक्ति होती है और वह वर्चस्व की स्थिति में रहता है। ऐसे में पीड़िता की सहमति को सामान्य अर्थ में स्वतंत्र सहमति नहीं माना जा सकता, क्योंकि वह कानूनी कार्रवाई के भय या दबाव में भी संबंध के लिए सहमत हो सकती है। इस टिप्पणी के साथ जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने आदिवासी विधवा महिला से दुष्कर्म के आरोपित आरक्षक रूद्रमणी यादव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। मामला जशपुर जिले के कांसाबेल थाना क्षेत्र का है। आरक्षक रूद्रमणी यादव, निवासी तंगरडीह जशपुर ने एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 14-ए(2) के तहत आपराधिक अपील पेश कर 30 अप्रैल 2026 के विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी एक्ट जशपुर के आदेश को चुनौती दी थी। उसके खिलाफ कांसाबेल थाने में अपराध दर्ज है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एन) और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वी) के तहत आरोप हैं। अभियोजन के अनुसार पीड़िता ने शिकायत में आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में फेसबुक के जरिए उसकी आरोपी से पहचान हुई। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। आरोप है कि आरोपित ने महिला को अपने प्रभाव में लेकर कई बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इससे महिला गर्भवती हो गई और आरोप है कि बाद में उसका गर्भपात करा दिया गया। शिकायत में यह भी आरोप है कि इसके बाद आरोपित महिला को धमकाने और परेशान करने लगा। उसकी तस्वीरें रिश्तेदारों और परिचितों के बीच प्रसारित करने का भी आरोप लगाया गया है। इसके अलावा जमीन दिलाने के नाम पर महिला और उसके भाई से दो लाख रुपये लेने का आरोप भी लगाया गया। आरोपी ने कहा- तीन साल तक सहमति से था संबंध अग्रिम जमानत के लिए आरोपित की ओर से दलील दी गई कि वह और पीड़िता जनवरी 2023 से एक-दूसरे को जानते थे और दोनों बालिग हैं। लंबे समय तक दोनों के बीच सहमति से संबंध रहे। आरोपी पक्ष ने कहा कि पीड़िता दो बच्चों की मां है और उसने करीब तीन साल तक कोई शिकायत नहीं की। इसलिए एफआईआर में हुई देरी के आधार पर आरोपी ने उसे झूठा फंसाए जाने की बात कही। आरोपित ने एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वी) के आरोप पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसा कोई प्रथम दृष्टया साक्ष्य नहीं है कि कथित अपराध पीड़िता की जाति के कारण किया गया। आरोपी का कोई आपराधिक पूर्ववृत्त नहीं होने की दलील भी दी गई। बचाव पक्ष ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के दिनेश कुमार श्रीवास्तव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले का हवाला देते हुए लंबे समय के सहमति वाले संबंध में अग्रिम जमानत दिए जाने की बात कही। राज्य ने कहा- पुलिसकर्मी ने पद का फायदा उठाया राज्य की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध किया गया। बताया गया कि पीड़िता अनुसूचित जनजाति वर्ग की विधवा महिला है और आरोपी पुलिस कर्मचारी है। आरोप है कि उसने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए महिला के साथ संबंध बनाए और बाद में उसका शोषण किया। राज्य ने कोर्ट को बताया कि जांच के दौरान पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया, जिसमें पुराने हाइमेन के फटने और यौन संबंध की आदत संबंधी निष्कर्ष दर्ज किए गए हैं। पीड़िता का जाति प्रमाणपत्र भी जांच में जब्त किया गया है। पुलिस की वर्दी और अधिकार से प्रभावित हो सकती है सहमति मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने आरोपित के इस बचाव को स्वीकार नहीं किया कि दोनों के बीच सहमति से संबंध थे। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारी के पास राज्य की ओर से मिली संस्थागत शक्ति होती है। वह वर्चस्व की स्थिति में रहता है। ऐसे में पीड़िता कई बार अपनी स्वतंत्र इच्छा से नहीं, बल्कि कानूनी कार्रवाई के भय के कारण भी संबंध के लिए सहमत हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि इस कारण वर्तमान मामले में सहमति से संबंध होने की दलील को आरोपी के बचाव के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। आरोपी का मामला दूसरे फैसले से अलग हाई कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में वर्ष 2023 से लगातार जबरन शारीरिक संबंध बनाने, गर्भावस्था और गर्भपात, धमकी, उत्पीड़न, तस्वीरें प्रसारित करने तथा दो लाख रुपये लेने जैसे गंभीर आरोप हैं। जांच में सामने आए चिकित्सकीय और अन्य दस्तावेज भी रिकार्ड पर हैं। कोर्ट ने आरोपी पक्ष की ओर से उद्धृत इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले से वर्तमान मामले को अलग माना। हाई कोर्ट ने कहा कि उस मामले में लंबे समय के सहमति वाले संबंध के तथ्यों के आधार पर राहत दी गई थी, जबकि यहां आरोप बार-बार जबरन संबंध बनाने और उसके बाद शोषण एवं उत्पीड़न के हैं। इन्हीं आधार पर जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने रूद्रमणी यादव को अग्रिम जमानत का लाभ देने से इनकार करते हुए उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी।  

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने 17 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय डेलीगेशन के लिए आयोजित किया विशेष हेरिटेज टूर

रायपुर छत्तीसगढ़ की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड  ने जापान के मत्सुयामा स्थित एहिमे यूनिवर्सिटी के 17 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के लिए विशेष हेरिटेज टूर का आयोजन किया। अकादमिक एवं शोध सहयोग के उद्देश्य से 12 से 14 सितंबर 2026 तक एनआईटी रायपुर द्वारा होस्ट किए गए जापानी डेलीगेशन ने 14 सितंबर को प्राचीन ऐतिहासिक नगरी  सिरपुर का भ्रमण कर छत्तीसगढ़ की उस विरासत को करीब से जाना, जिसमें बौद्ध, हिंदू और जैन संस्कृति का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। मुख्य हॉस्पिटैलिटी एवं आयोजन सहयोगी के रूप में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए सिरपुर में विशेष हेरिटेज टूर की व्यवस्था की। डेलीगेशन को सिरपुर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थापत्य कला, पुरातात्विक महत्व और धार्मिक-सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराने के लिए विशेषज्ञ स्थानीय गाइड की सेवाएं ली गईं। साथ ही जापानी मेहमानों की खान-पान संबंधी पसंद को ध्यान में रखते हुए विशेष हॉस्पिटैलिटी एवं भोजन की व्यवस्था भी की गई। सिरपुर – इतिहास, धर्म और स्थापत्य का अद्भुत संगम महानदी के तट पर बसा सिरपुर प्राचीन काल में  श्रीपुर  के नाम से जाना जाता था और दक्षिण कोसल की राजधानी के रूप में इसका महत्वपूर्ण स्थान रहा। वर्तमान सिरपुर में हुए पुरातात्विक उत्खननों से बौद्ध विहारों, हिंदू मंदिरों, जैन अवशेषों तथा अन्य प्राचीन संरचनाओं का विस्तृत संसार सामने आया है। यहां बौद्ध, हिंदू और जैन परंपराओं से जुड़े अनेक पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं। जापानी प्रतिनिधिमंडल ने इस ऐतिहासिक नगरी के प्रमुख विरासत स्थलों का भ्रमण करते हुए यहां की स्थापत्य परंपरा और प्राचीन सांस्कृतिक जीवन को समझा। उनके लिए यह भ्रमण केवल पर्यटन नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच अकादमिक, सांस्कृतिक और विरासत संवाद का एक जीवंत अनुभव रहा। लक्ष्मण मंदिर – ईंटों में उकेरी अद्भुत स्थापत्य कला डेलीगेशन के भ्रमण का प्रमुख आकर्षण लक्ष्मण मंदिर रहा। लगभग सातवीं शताब्दी से संबद्ध यह मंदिर भारत के उत्कृष्ट प्राचीन ईंट निर्मित मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर की वास्तुकला, अलंकरण और ईंटों पर की गई बारीक कारीगरी सिरपुर की स्थापत्य कला को प्रदर्शित करती है। मंदिर परिसर में पुरातात्विक महत्व की अनेक प्रतिमाएं और अवशेष भी संरक्षित हैं। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मंदिर की संरचना, गर्भगृह, अंतराल और मंडप सहित इसकी स्थापत्य विशेषताओं को देखा तथा स्थानीय गाइड से मंदिर के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संदर्भों की जानकारी प्राप्त की। आनंद प्रभु कुटी विहार ने बताया सिरपुर का बौद्ध वैभव इसके बाद डेलीगेशन ने आनंद प्रभु कुटी विहार का भ्रमण किया। यह सिरपुर के प्रमुख बौद्ध पुरातात्विक स्थलों में शामिल है। विहार की संरचना में केंद्रीय प्रांगण के चारों ओर कक्षों की व्यवस्था तथा सुंदर नक्काशीदार स्थापत्य तत्व दिखाई देते हैं। यहां बुद्ध की प्रतिमा और पद्मपाणि अवलोकितेश्वर से संबंधित कलात्मक अवशेष इसकी बौद्ध विरासत को विशेष बनाते हैं। उपलब्ध पुरातात्विक विवरणों के अनुसार यहां 14 कक्षों वाला मठीय परिसर रहा है। जापानी विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने यहां प्राचीन बौद्ध शिक्षा, मठीय जीवन और स्थापत्य परंपरा के बारे में जानकारी ली। यह स्थल उनके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि जापान की अपनी सांस्कृतिक परंपरा में भी बौद्ध दर्शन और कला का गहरा प्रभाव रहा है।  स्वास्तिक विहार – प्राचीन वास्तु योजना का अनूठा उदाहरण डेलीगेशन ने स्वास्तिक विहार का भी अवलोकन किया। अपने विशिष्ट स्वास्तिकाकार विन्यास के कारण यह विहार सिरपुर की पुरातात्विक विरासत में विशेष पहचान रखता है। उत्खनन से यहां बुद्ध एवं पद्मपाणि से संबंधित प्रतिमाएं और अन्य बौद्धकालीन अवशेष प्राप्त हुए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने विहार की संरचना और प्राचीन वास्तु योजना को समझा तथा यह जाना कि सदियों पूर्व सिरपुर किस प्रकार धार्मिक एवं बौद्धिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा होगा।   तीवरदेव महाविहार में दिखा बौद्ध और भारतीय कला का समन्वय हेरिटेज टूर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव तीवरदेव महाविहार रहा। सिरपुर के प्रमुख बौद्ध स्मारकों में शामिल इस परिसर की कला में बौद्ध एवं हिंदू परंपराओं का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। यहां बुद्ध प्रतिमाओं के साथ गंगा-यमुना, गजलक्ष्मी, पौराणिक एवं अन्य अलंकरणात्मक शिल्प दिखाई देते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने इस स्थल को भारतीय सांस्कृतिक समन्वय की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया और यहां की कलात्मक विशेषताओं को करीब से देखा। यह अनुभव विशेष रूप से अकादमिक एवं शोध पृष्ठभूमि से आए सदस्यों के लिए ज्ञानवर्धक रहा। पुरातात्विक विरासत के विस्तृत संसार से हुए परिचित सिरपुर में अब तक हुए उत्खननों से अनेक बौद्ध विहारों, शिव एवं विष्णु मंदिरों तथा जैन परंपरा से जुड़े अवशेषों का पता चला है। यहां 12 बौद्ध विहार, एक जैन विहार, बुद्ध एवं महावीर की प्रतिमाओं के साथ अनेक शिव और विष्णु मंदिरों के अवशेष सामने आए हैं। इसी समृद्ध पुरातात्विक परिदृश्य को जापानी डेलीगेशन ने स्थल पर पहुंचकर अनुभव किया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने प्राचीन ईंट निर्माण, मूर्तिकला, विहारों की योजना और मंदिर स्थापत्य को विशेष रुचि के साथ देखा तथा कई स्थलों की जानकारी और दस्तावेजीकरण में भी रुचि दिखाई। अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए स्थानीय संस्कृति और आतिथ्य का अनुभव छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने हेरिटेज टूर को केवल स्मारक भ्रमण तक सीमित न रखते हुए अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को स्थानीय संस्कृति और आतिथ्य से जोड़ने का भी प्रयास किया। जापानी प्रतिनिधिमंडल के खान-पान की पसंद को ध्यान में रखते हुए विशेष भोजन व्यवस्था की गई तथा स्थानीय गाइडों ने सरल एवं रोचक तरीके से सिरपुर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थापत्य और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी। इस दौरान जापानी विद्यार्थियों एवं प्रतिनिधियों ने सिरपुर की प्राचीनता, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विविधता में विशेष रुचि दिखाई। उनके लिए यह अनुभव भारत की विरासत को अकादमिक अध्ययन और प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से समझने का अवसर बना। एनआईटी रायपुर ने सराहा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का सहयोग एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर दिलीप सिंह सिसोदिया ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के सिरपुर भ्रमण के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा की गई व्यवस्थाओं और सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि बोर्ड की ओर से किए गए समन्वय और आतिथ्य ने जापान से आए प्रतिनिधिमंडल के लिए इस सांस्कृतिक यात्रा को सहज, यादगार और ज्ञानवर्धक बनाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए इस तरह के हेरिटेज टूर केवल पर्यटन अनुभव नहीं, बल्कि विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक और अकादमिक संवाद को मजबूत करने का माध्यम भी हैं। … Read more

23 मोबाइल, 37 सिम, 11 एटीएम कार्ड, तीन लैपटॉप और छह पासबुक सहित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त; प्रतिमाह 7-8 करोड़ रुपए के लेन-देन का अनुमान

भोपाल  ग्वालियर पुलिस ने साइबर अपराध, ऑनलाइन सट्टा, ऑनलाइन गेम्बलिंग एवं बैंक खातों की खरीद-फरोख्त से जुड़े संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। विंडसर हिल्स स्थित किराए के डुप्लेक्स से संचालित इस नेटवर्क से 23 मोबाइल फोन, 37 सिम कार्ड, 11 एटीएम कार्ड, तीन लैपटॉप, छह पासबुक सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में नेटवर्क के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 7 से 8 करोड़ रुपए तथा वार्षिक स्तर पर करीब 100 करोड़ रुपए के वित्तीय लेन-देन का अनुमान सामने आया है। आरोपियों के दुबई एवं श्रीलंका से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में होने की जानकारी भी मिली है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर श्री धर्मवीर सिंह के निर्देश पर साइबर अपराधों एवं साइबर फ्रॉड में बैंक खातों का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई के क्रम में 12 सितम्बर को साइबर क्राइम विंग को विंडसर हिल्स स्थित एक डुप्लेक्स में ऑनलाइन सट्टा, बैंक खातों की खरीद-फरोख्त एवं ऑनलाइन गेम्बलिंग संचालित किए जाने की सूचना मिली। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए पांच व्यक्तियों को पकड़ा। पूछताछ एवं प्रारंभिक जांच में उनके उक्त गतिविधियों में संलिप्त होने की जानकारी सामने आई। आरोपियों के विरुद्ध क्राइम ब्रांच ग्वालियर में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है। ‘100 पैनल’ वेबसाइट से संचालित हो रहा था नेटवर्क प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ‘100 पैनल’ नामक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन सट्टे का संचालन कर रहे थे। आरोपियों के मोबाइल फोन से बड़ी संख्या में बैंक खातों से संबंधित विवरण प्राप्त हुए हैं। संबंधित बैंकों से इन खातों की जानकारी प्राप्त कर यह पता लगाया जा रहा है कि इनका उपयोग साइबर ठगी सहित अन्य अपराधों में किस प्रकार किया गया। करोड़ों रुपए के वित्तीय लेन-देन की जांच प्रारंभिक जांच के अनुसार नेटवर्क में प्रतिमाह करीब 7 से 8 करोड़ रुपए का लेन-देन होने का अनुमान है। पुलिस द्वारा बैंक खातों में हुए संदिग्ध लेन-देन, धनराशि के स्रोत, लाभार्थियों तथा पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच की जा रही है। दुबई और श्रीलंका से जुड़े नेटवर्क की भी जांच पूछताछ में आरोपियों द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से दुबई एवं श्रीलंका से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में होने की जानकारी दी गई है। पुलिस जब्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त डेटा का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। इससे नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों, बैंक खातों एवं वित्तीय लेन-देन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है। डुप्लेक्स मालिक की भूमिका की भी जांच जिस डुप्लेक्स में गतिविधियां संचालित की जा रही थीं, उसे किराए पर देने वाले मकान मालिक की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि डुप्लेक्स में संचालित गतिविधियों की जानकारी मकान मालिक को थी अथवा नहीं। जब्त सामग्री आरोपियों से 23 मोबाइल फोन, 37 सिम कार्ड, 11 एटीएम कार्ड, तीन लैपटॉप, छह पासबुक एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं। मध्यप्रदेश पुलिस साइबर अपराधों एवं ऑनलाइन अवैध गतिविधियों के विरुद्ध निरंतर प्रभावी कार्रवाई कर रही है। पुलिस द्वारा ऐसे संगठित नेटवर्क की पहचान कर उनके वित्तीय एवं तकनीकी नेटवर्क को खंगाला जा रहा है, ताकि साइबर ठगी, ऑनलाइन सट्टा, गेम्बलिंग तथा बैंक खातों के दुरुपयोग में संलिप्त अन्य व्यक्तियों तक पहुंच बनाई जा सके। साथ ही नागरिकों से अपील है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम अथवा अन्य डिजिटल संसाधन किसी भी व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध न कराएं और साइबर अपराध से संबंधित किसी भी घटना की तत्काल सूचना पुलिस को दें।  

दताना-मताना में प्रदेश के 10वें एयरपोर्ट का विकास जारी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सिंहस्थ-2028 के दृष्टिगत उज्जैन में अधोसंरचना विकास के कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और अन्य यात्रियों के सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए दताना-मताना स्थित हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह मध्यप्रदेश का 10वां एयरपोर्ट होगा। सिंहस्थ-2028 से पूर्व इसके निर्माण को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। आरसीएस-उड़ान 5.2 योजना के तहत विकास कार्य जारी दताना-मताना हवाई पट्टी का विकास केंद्र सरकार की आरसीएस-उड़ान 5.2 योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। इसके लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और राज्य सरकार के बीच एमओयू निष्पादित हो चुका है। परियोजना के लिए लगभग 120 एकड़ शासकीय भूमि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को हस्तांतरित की जा चुकी है। 1800 मीटर रनवे से होगी शुरुआत, 2700 मीटर तक विस्तार का प्रावधान दताना-मताना में वर्तमान हवाई पट्टी को 1800 मीटर रनवे के लिए विकसित किया जा रहा है। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए रनवे की लंबाई 27 मीटर तक बढ़ाये जाने की योजना है। इससे उज्जैन के लिए हवाई सेवाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी और विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों के यात्रा समय में कमी आएगी। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में महत्वपूर्ण कड़ी सिंहस्थ-2028 उज्जैन के लिए देश और दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक होगा। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में दताना-मताना एयरपोर्ट का विकास सिंहस्थ की तैयारियों की महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक कड़ी है। एयरपोर्ट के माध्यम से उज्जैन तक हवाई मार्ग से पहुंचना अधिक सुगम होगा, जिससे बड़े आयोजन के दौरान यात्रियों को आवागमन का एक अतिरिक्त और सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध होगा। धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा विस्तार बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन देश के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन केंद्रों में शामिल है। एयरपोर्ट के विकास से वर्षभर देश के विभिन्न हिस्सों से उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुविधा मिलेगी। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ व्यापार, स्थानीय परिवहन, होटल, खान-पान और अन्य सेवा क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। प्रदेश में लगातार बढ़ रहा हवाई अधोसंरचना का दायरा मध्यप्रदेश में हवाई अधोसंरचना के विस्तार की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। वर्ष 2023-24 में प्रदेश में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और खजुराहो सहित 5 प्रमुख एयरपोर्ट संचालित थे। वर्ष 2024-25 में रीवा, दतिया और सतना को जोड़ने के बाद इनकी संख्या 8 हो गई। इसके बाद शिवपुरी में नए एयरपोर्ट के विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और दताना-मताना में एयरपोर्ट का विकास पूरा होने पर मध्यप्रदेश को अपना 10वां एयरपोर्ट प्राप्त होगा। केंद्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश में 5 नए एयरपोर्ट के विकास को भी मंजूरी दी गई है। प्रदेश में हवाई अधोसंरचना के विस्तार के लिए व्यापक स्तर पर प्रस्तावित कार्यों से आने वाले समय में विभिन्न क्षेत्रों को बेहतर हवाई संपर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा।