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राज्यपाल पटेल ने अपना जन्म दिवस बच्चों के साथ मनाया

राज्यपाल पटेल ने अपना जन्म दिवस बच्चों के साथ मनाया लोक भवन मंदिर में प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अपना जन्म दिवस सोमवार को लोक भवन में बच्चों के साथ मनाया। राज्यपाल पटेल को लोक भवन मंदिर में एकत्रित बच्चों ने उत्साहपूर्वक सामूहिक रुप से लयबद्ध ताली बजा और शुभकामना गीत गाकर जन्म दिवस की बधाई दी। राज्यपाल पटेल ने बच्चों को उपहार और शुभाशीष प्रदान किया। राज्यपाल पटेल ने जन्म दिवस के अवसर पर लोक भवन मंदिर में विधि-विधान से पूजा अर्चना की। उन्होंने ईश्वर से प्रदेश की खुशहाली, शांति, समृद्धि और सर्वांगीण विकास की कामना की है। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, उप सचिव सुनील दुबे सहित लोक भवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।  

हरियाणा के झज्जर के मुक्केबाजों ने किया कमाल, एशियन चैंपियनशिप के लिए बनाई जगह

झज्जर. खेलों की धरती झज्जर के लिए एक बार फिर गर्व का क्षण आया है। पटियाला में 28 मई से 1 जून तक आयोजित अंडर-23 राष्ट्रीय चयन ट्रायल में झज्जर जिले के चार प्रतिभाशाली मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की की है। ये सभी खिलाड़ी आगामी 3 जुलाई से 16 जुलाई तक जकार्ता (इंडोनेशिया) में आयोजित होने वाली एशियन अंडर-23 बाक्सिंग चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। कोच हितेश देशवाल ने बताया कि चयनित खिलाड़ियों में सागर जाखड़ (60 किग्रा), हितेश गुलिया (70 किग्रा), हेमंत सांगवान (90 किग्रा) तथा महिला वर्ग में प्राची धनखड़ (57 किग्रा) शामिल हैं। ये सभी मुक्केबाज इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए पदक जीत चुके हैं। वर्तमान में ये खिलाड़ी झज्जर के महर्षि दयानंद सरस्वती स्टेडियम में कोच हितेश देशवाल की देखरेख में कड़ा अभ्यास कर रहे हैं। खिलाड़ियों ने अपनी सफलता का श्रेय कोच और परिजनों को दिया। इस उपलब्धि पर खेल प्रेमी शमशेर जाखड़, योगेंद्र धनखड़, सत्यवान गुलिया, विनोद सांगवान, हरियाणा मुक्केबाजी संघ के अध्यक्ष मेजर सतपाल संधू व महासचिव ओमबीर हुड्डा ने खिलाड़ियों तथा कोच को बधाई दी और एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर देश व प्रदेश का नाम रोशन करने की शुभकामनाएं दीं।

पंजाब निकाय चुनाव में BJP को बढ़त, लेकिन शहरों में मजबूत पकड़ अब भी दूर

चंडीगढ़. पंजाब के हालिया निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। हालांकि सीटों और वार्डों की संख्या में बढ़ोतरी के बावजूद पार्टी शहरी क्षेत्रों में वह राजनीतिक सफलता हासिल नहीं कर सकी जिसकी उससे अपेक्षा की जा रही थी। चुनाव परिणामों ने यह संकेत जरूर दिया है कि पार्टी का जनाधार बढ़ रहा है, लेकिन अभी उसे राज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में मजबूत पकड़ बनाने के लिए लंबा सफर तय करना होगा। निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने 103 निकायों के कुल 1977 वार्डों में से 172 वार्डों पर जीत दर्ज की। वर्ष 2021 के निकाय चुनावों में पार्टी को केवल 49 वार्डों में सफलता मिली थी। इस लिहाज से पार्टी ने अपने प्रदर्शन में बड़ा सुधार किया है। इसके बावजूद वह कुल वार्डों के आंकड़े में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, निर्दलीय उम्मीदवारों और शिरोमणि अकाली दल से पीछे रही। चुनाव परिणामों के अनुसार भाजपा केवल दो स्थानीय निकायों पर नियंत्रण स्थापित कर सकी। इनमें अबोहर नगर निगम और नया गांव नगर परिषद शामिल हैं। पार्टी का सबसे मजबूत प्रदर्शन नगर निगम चुनावों में देखने को मिला, जहां उसने 400 में से 69 वार्डों में जीत हासिल की। अबोहर में 28 और पठानकोट में 22 वार्ड जीतकर भाजपा इन दोनों शहरों में प्रमुख राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरी। हालांकि अन्य प्रमुख शहरों में पार्टी का प्रदर्शन सीमित रहा। बठिंडा में उसे केवल एक सीट मिली, जबकि बटाला में दो सीटों पर सफलता मिली। मोहाली, कपूरथला और मोगा में पार्टी तीन-तीन वार्डों तक ही सिमट गई। इससे स्पष्ट है कि कुछ चुनिंदा शहरी क्षेत्रों को छोड़कर भाजपा अभी भी व्यापक स्तर पर मतदाताओं का विश्वास हासिल नहीं कर सकी है। नगर परिषद में 103 वार्डें जीतीं नगर परिषद चुनावों में भी भाजपा को 1331 वार्डों में से 103 वार्डों पर जीत मिली। वहीं 20 नगर पंचायतों के 246 वार्डों में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम भाजपा की उन चुनौतियों को उजागर करता है, जिनका सामना उसे राज्य में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए करना पड़ रहा है। पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी की सफलता का मूल्यांकन पिछले चुनावों के मुकाबले किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने वार्डों की संख्या 49 से बढ़ाकर 172 कर ली है। उनके अनुसार वास्तविक राजनीतिक तस्वीर आगामी विधानसभा चुनाव में स्पष्ट होगी।

आरंग नगर पालिका में आरोप-प्रत्यारोप तेज, अध्यक्ष ने कलेक्टर से की शिकायत

आरंग/रायपुर. नगर पालिका परिषद आरंग में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी अब एक बड़े राजनैतिक-प्रशासनिक विवाद के रूप में सामने आई है। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए रायपुर कलेक्टर को पत्र लिखकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। वहीं दूसरी ओर सीएमओ शीतल चंद्रवंशी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए धरातल पर काम होने का दावा किया है। इस खींचतान के बाद आरंग की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन ने कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में सीएमओ पर शासन के निर्देशों की अनदेखी और निर्वाचित परिषद को दरकिनार करने के कई गंभीर आरोप लगाए हैं। अध्यक्ष का कहना है कि 08 मई को ‘सुशासन तिहार’ के तहत आयोजित समाधान शिविर में कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने वार्ड क्रमांक 13 में अधूरे पड़े मिनी माता स्मृति भवन की समीक्षा की थी। मंत्री ने मंच से निर्देश दिए थे कि यदि ठेकेदार 2 दिनों में काम शुरू नहीं करता तो टेंडर निरस्त कर नया टेंडर जारी किया जाए। डॉ. जैन का आरोप है कि कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी न काम शुरू हुआ और न ठेकेदार पर कार्रवाई की गई, जिससे जनता में शासन की छवि धूमिल हो रही है। बजट प्रस्तुतिकरण में देरी नियमानुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट 31 मार्च 2026 तक प्रस्तुत होना था, जिसके लिए उन्होंने 16 मार्च को ही लिखित निर्देश दिए थे, परंतु प्रशासन की ढिलाई के कारण यह बजट देरी से 27 अप्रैल की सामान्य सभा में पेश हो सका। आवास आवंटन में प्रोटोकॉल का उल्लंघन अध्यक्ष का आरोप है कि एएचपी (अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप) योजना के तहत आवास आवंटन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को उनकी अनुपस्थिति में पूरा किया गया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रोटोकॉल के लिहाज से अनुचित है। आरोप पूरी तरह निराधार, काम धरातल पर जारी है : शीतल चंद्रवंशी इस पूरे विवाद पर जब मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) शीतल चंद्रवंशी से बात की गई तो उन्होंने अध्यक्ष के तेवरों और आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए प्रशासनिक व तकनीकी पक्ष सामने रखा। सीएमओ शीतल चंद्रवंशी ने साफ किया कि मिनीमाता स्मृति भवन को लेकर लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत है। धरातल पर निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है और वर्तमान में वहां सेप्टिक टैंक का स्लैब डालने का कार्य भी पूरा होने जा रहा है। वैधानिक प्रक्रियाओं की बाध्यता प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, किसी भी चालू ठेके को अचानक निरस्त करने की एक लंबी कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया होती है। इसमें एस्टीमेट का पुनर्मूल्यांकन और नियमानुसार नोटिस अवधि देना अनिवार्य होता है, ताकि मामला अदालती दांव-पेच में न फंसे। प्रशासन ने नियमों के दायरे में रहकर ठेकेदार से काम शुरू करवाया है। बजट और आवास आवंटन जैसे बड़े कार्यों में विभागीय स्वीकृतियों, कड़े सरकारी नियमों, स्क्रूटनी (दस्तावेजों की जांच) और प्रशासनिक व्यस्तताओं के चलते कई बार समय-सीमा में व्यावहारिक बदलाव आ जाते हैं। इसमें किसी भी जनप्रतिनिधि की उपेक्षा करने का कोई उद्देश्य नहीं था, बल्कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ पूरी की गई है। अब जिला प्रशासन के फैसले पर टिकी नजरें आरंग नगर पालिका का यह विवाद यह साफ करता है कि जहां एक तरफ जनप्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेही के कारण कार्यों में तेजी चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारी नियमों और वैधानिक प्रक्रियाओं की सीमाओं से बंधे होते हैं। विकास कार्यों को गति देने के लिए इन दोनों स्तंभों के बीच समन्वय होना अनिवार्य है। अब देखना होगा कि कलेक्टर इस शिकायत के बाद दोनों पक्षों के बीच के इस गतिरोध को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाते हैं। नगर पालिका में चल रहे गतिरोध से नगर के मूलभूत कार्य जरूर प्रभावित हो सकते हैं।

BJP ने अजेय कुमार को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, राजस्थान की राजनीति में बढ़ी हलचल

जयपुर  राजस्थान भाजपा को आखिरकार नया संगठन महामंत्री मिल गया है और इस जिम्मेदारी के लिए जिस नाम की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है, वह है अजेय कुमार. आम लोगों के बीच भले ही उनका चेहरा बहुत ज्यादा परिचित न हो, लेकिन भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनात्मक ढांचे में उन्हें लंबे समय से एक मजबूत रणनीतिकार माना जाता रहा है. यही वजह है कि राजस्थान जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से अहम राज्य में उनकी संभावित भूमिका को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा तेज हो गई है. राजस्थान भाजपा में यह पद लंबे समय से खाली चल रहा था. इससे पहले चंद्रशेखर अगस्त 2017 में राजस्थान भाजपा के संगठन महामंत्री बनाए गए थे और जनवरी 2024 तक करीब 6 साल 5 महीने इस जिम्मेदारी को संभालते रहे. बाद में उन्हें राजस्थान से हटाकर तेलंगाना भाजपा में संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी दे दी गई थी. तब से संगठन स्तर पर नए चेहरे को लेकर चर्चाएं चल रही थीं. संघ की पृष्ठभूमि से निकला संगठन का चेहरा अजेय कुमार उन नेताओं में गिने जाते हैं जिनकी पहचान मंचों और भाषणों से कम, संगठन और रणनीति से ज्यादा रही है. वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं और लंबे समय तक संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रहे हैं. भाजपा में संगठन महामंत्री का पद वैसे भी बेहद अहम माना जाता है. यह केवल राजनीतिक पद नहीं होता, बल्कि संघ और भाजपा के बीच समन्वय का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है. उनकी जिम्मेदारियों में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना, चुनावी रणनीति में समन्वय स्थापित करना, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना, सदस्यता अभियान को आगे बढ़ाना और प्रदेश नेतृत्व व केंद्रीय नेतृत्व के बीच संवाद बनाए रखना शामिल रहा है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ बड़ा सफर उत्तराखंड जाने से पहले अजेय कुमार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक काम किया. मेरठ, बिजनौर और मुरादाबाद जैसे क्षेत्रों में उन्होंने संगठन को मजबूत करने का काम संभाला. बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ता प्रशिक्षण और चुनावी नेटवर्क तैयार करने में उनकी खास भूमिका रही. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में काम करने का अनुभव बाद में उनके लिए बड़ी ताकत साबित हुआ. यही अनुभव उन्हें आगे बड़े राज्यों की जिम्मेदारी तक ले गया. 2019 में मिला सबसे बड़ा मौका वर्ष 2018 में उत्तराखंड भाजपा के तत्कालीन संगठन महामंत्री संजय कुमार को पद से हटाए जाने के बाद यह पद कुछ समय तक खाली रहा. भाजपा और संघ दोनों संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश में जुटे थे. इसी क्रम में सितंबर 2019 में अजेय कुमार को उत्तराखंड भाजपा का संगठन महामंत्री नियुक्त किया गया. इसे उनके राजनीतिक और संगठनात्मक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ माना जाता है. उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू की गई थी. इससे पहले वे मेरठ क्षेत्र में भाजपा के संगठन मंत्री के रूप में काम कर रहे थे. बूथ से लेकर चुनाव तक दिखाई पकड़ 2020 और 2021 के दौरान उन्होंने उत्तराखंड में बूथ समितियों के पुनर्गठन, मंडल स्तर की सक्रियता, युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ने और सोशल मीडिया नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया. उनकी कार्यशैली का सबसे खास पहलू यह माना गया कि वे बिना ज्यादा प्रचार के जमीन पर संगठन को मजबूत करने में विश्वास रखते हैं. भाजपा के भीतर उन्हें लो-प्रोफाइल लेकिन प्रभावशाली संगठनकर्ता कहा जाने लगा. 2022 चुनाव बना सबसे बड़ी परीक्षा अजेय कुमार के संगठनात्मक कौशल की सबसे बड़ी परीक्षा 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में हुई. उस समय राज्य में राजनीतिक चुनौतियां थीं और मुख्यमंत्री बदलने जैसी परिस्थितियां भी सामने आई थीं. इसके बावजूद भाजपा ने लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की. हालांकि तत्कालीन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी सीट हार गए थे, लेकिन पार्टी ने बहुमत बरकरार रखा. राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे भाजपा संगठन की बड़ी उपलब्धि माना. इस चुनाव के बाद अजेय कुमार की पकड़ और प्रभाव दोनों बढ़ते हुए दिखाई दिए. 2024 के बाद भी बनी रही चर्चा 2023 और 2024 के दौरान उन्हें भाजपा के रणनीतिक संगठनकर्ताओं में गिना जाने लगा. इस दौरान कुछ राजनीतिक विवादों और मीडिया चर्चाओं में उनका नाम भी सामने आया, लेकिन आधिकारिक स्तर पर कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ और न ही कोई कार्रवाई हुई. इसी समय भाजपा और संघ के बीच बेहतर समन्वय को लेकर भी उनकी भूमिका की चर्चा होती रही. संगठन के भीतर उन्हें शांत स्वभाव लेकिन मजबूत निर्णय क्षमता वाले नेता के रूप में देखा जाता है. क्यों कहा जाता है पर्दे के पीछे का रणनीतिकार अजेय कुमार की पहचान उन नेताओं में है जो सुर्खियों से दूर रहकर काम करना पसंद करते हैं. उनकी कार्यशैली में अनुशासन, बूथ आधारित राजनीति, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद और माइक्रो लेवल प्लानिंग को खास महत्व दिया जाता है. हाल के वर्षों में कुछ राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें भाजपा का “राइजिंग चाणक्य” तक कहा गया. इसकी वजह उत्तराखंड में संगठनात्मक सफलता, चुनावी प्रबंधन और बिना शोर किए परिणाम देने वाली कार्यशैली को माना गया. अब अगर राजस्थान जैसे बड़े राज्य में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलती है तो उनकी अगली परीक्षा भी कम बड़ी नहीं होगी. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि उत्तराखंड में संगठन को मजबूत करने वाले अजेय कुमार राजस्थान भाजपा के लिए किस तरह की नई रणनीति लेकर आते हैं.  

भारत विरोधी आतंकी मॉड्यूल बेनकाब, ISI और अंडरवर्ल्ड कनेक्शन से जांच एजेंसियां अलर्ट

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और केंद्रीय एजेंसियों की जांच में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और अंडरवर्ल्ड से जुड़े एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ है. हाल ही में एजेंसियों ने इस मॉड्यूल से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया था. इनके कब्जे से भारी मात्रा में हथियार और हैंड ग्रेनेड भी बरामद किए गए. जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क भारत में बड़े आतंकी हमलों की तैयारी कर रहा था. एजेंसियां अब इसके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही हैं।  जांच एजेंसियों को पता चला है कि इस मॉड्यूल का मुख्य निशाना दिल्ली और मुंबई थे. गिरफ्तार आरोपियों ने इन दोनों महानगरों की रेकी भी की थी. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हमलों के लिए संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाई जा रही थी. आरोपियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं ताकि साजिश को अंजाम दिया जा सके. समय रहते गिरफ्तारी होने से एक बड़ी आतंकी योजना नाकाम हो गई।  पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि पूरे मॉड्यूल का हैंडलर सैयद मुदस्सर हुसैन उर्फ मुन्ना झिंगाड़ा था. मुन्ना झिंगाड़ा को अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसके करीबी छोटा शकील का बेहद भरोसेमंद माना जाता है. जांच में सामने आया कि वही इस नेटवर्क का ऑपरेशन हेड था और पाकिस्तान से पूरे मॉड्यूल को संचालित कर रहा था. एजेंसियों के मुताबिक, भारत में सक्रिय गुर्गों को सीधे उसी से निर्देश मिल रहे थे।  जांच में यह भी सामने आया कि ISI ने एक बार फिर कराची के क्लिफटन रोड इलाके को सक्रिय किया है. इसी इलाके में दाऊद इब्राहिम का ठिकाना भी बताया जाता है. सूत्रों के अनुसार, मुन्ना झिंगाड़ा ने दाऊद के कराची स्थित कथित 'व्हाइट हाउस' से करीब 4 किलोमीटर दूर एक फाइव स्टार होटल के पास अपना सेफ हाउस बना रखा था. यहीं से वह भारत में सक्रिय गुर्गों के संपर्क में रहता था और पूरी गतिविधियों पर नजर रखता था।  भारत के अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि मुन्ना झिंगाड़ा अपने कराची स्थित सेफ हाउस से वीडियो कॉल के जरिए लगातार संपर्क में रहता था. वह भारत में अंडरवर्ल्ड से जुड़ी नई जेहादी ब्रिगेड तैयार करने की कोशिश कर रहा था. जांच एजेंसियों के मुताबिक, पूरा मॉड्यूल ISI के इशारों पर तैयार किया गया था. इतना ही नहीं, मुन्ना ने अपने गुर्गों को अपनी ताजा तस्वीरें भी भेजी थीं ताकि संपर्क और भरोसा बना रहे।  जांच में यह भी सामने आया कि मॉड्यूल से जुड़े कई गुर्गे नशे, खासकर 'चिट्टा' के आदी थे. आरोप है कि उनकी इस लत को बनाए रखने के लिए मुन्ना झिंगाड़ा की तरफ से हेरोइन का इंतजाम भी कराया जाता था. वहीं, भारत में बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए गुर्गों ने 20 लाख रुपये की मांग भी रखी थी. एजेंसियों के अनुसार, इसके बाद कुछ टोकन मनी दी गई और पाकिस्तान से भेजे गए हथियार तथा हैंड ग्रेनेड पंजाब के गुरदासपुर क्षेत्र में गिराए गए।  जांच एजेंसियों के हाथ लगी चैट्स ने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं. एक चैट में मुन्ना झिंगाड़ा ने अपने गुर्गों से कहा था, 'माशाल्लाह करके आना काम.' वहीं उसने यह भी भरोसा दिलाया कि काम पूरा होने के बाद उन्हें नेपाल के रास्ते दुबई बुला लिया जाएगा. दूसरी तरफ गुर्गों ने जवाब में पहले 'चिट्टा' और फिर 20 लाख रुपये की मांग रखी थी. इन चैट्स से साफ संकेत मिले हैं कि ये आतंकी मॉड्यूल अंडरवर्ल्ड, नशे और पैसों के नेटवर्क को एक साथ जोड़कर भारत में बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था। 

JSSC ने जारी किया एग्जाम शेड्यूल, 510 भर्तियों के साथ JPSC और JET पर भी अहम खबर

रांची. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने झारखंड क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा-2024 की तिथि घोषित कर दी है। यह लिखित परीक्षा पांच जुलाई केा राज्य के विभिन्न केंद्रों पर आयोजित होगी। आयोग के अनुसार, परीक्षा से संबंधित प्रवेश पत्र डाउनलोड करने के लिए लिंक आयोग के वेबसाइट पर जून माह के अंतिम सप्ताह में उपलब्ध कराया जाएगा। अभ्यर्थी उक्त लिंक के माध्यम से अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र डाक अथवा किसी भी अन्य माध्यम से उपलब्ध नही कराया जाएगा। आयोग ने परीक्षा में सम्मिलित होनेवाले अभ्यर्थियों को सुझाव दिया है कि परीक्षा से संबंधित सुचिता को बरकरार रखेंगे तथा किसी प्रकार के कदाचार संबंधी प्रयास में शामिल नहीं होंगे। अन्यथा दोषी पाए जाने पर झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। बताते चलें कि इस परीक्षा के माध्यम से क्षेत्रीय कार्यकर्ता के कुल 510 पदों पर नियुक्ति होनी है। 14 जून को होगी जेट व उड़िया की परीक्षा झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) के तहत शिक्षा तथा उड़िया विषय की परीक्षा 14 जून होगी। झारखंड लोक सेवा आयाेग ने साेमवार को परीक्षा की तिथि की घोषणा कर दी। यह परीक्षा उक्त तिथि को सुबह 10 बजे से अपराह्न एक बजे तक रांची में आयोजित की जाएगी। आयोग के अनुसार, उक्त दोनों विषयों के लिए अभ्यर्थी प्रवेश पत्र एवं उपस्थिति पत्रक 10 जून से आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे। बता दें कि पूर्व में इन दोनों की परीक्षा निर्धारित तिथि 26 अप्रैल को नहीं हो सकी थी।

मरीजों के लिए राहतभरी खबर, बठिंडा अस्पताल में लगी आधुनिक एक्स-रे और OPG मशीनें

बठिंडा. शहीद भाई मनी सिंह सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने बड़ा कदम उठाया गया है। अस्पताल प्रशासन ने करीब 50 लाख की लागत से अत्याधुनिक डिजिटल रेडियोग्राफी (डीआर) एक्स-रे मशीन और आर्थोपेंटोमोग्राम (ओपीजी) मशीन खरीदी है। दोनों मशीनें अस्पताल पहुंच चुकी हैं और इन्हें स्थापित कर शुरू कर दिया गया है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1800 से 2000 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें से लगभग 400 से 500 मरीजों को एक्स-रे जांच की आवश्यकता होती है। मौजूदा समय में अस्पताल में उपलब्ध एकमात्र डिजिटल एक्स-रे मशीन पर अत्यधिक दबाव होने के कारण प्रतिदिन केवल 350 मरीजों की ही जांच हो पाती है। इसके चलते कई मरीजों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है, जबकि कई बार उन्हें अगले दिन आने की सलाह भी दी जाती है। सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. अरूण बांसल का कहना है कि नई डीआर मशीन लगने के बाद अस्पताल में दो डिजिटल एक्स-रे मशीनें उपलब्ध होगी है। इससे जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और मरीजों को समय पर जांच सुविधा मिल सकेगी। नई मशीन अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, जिससे शरीर के अंदरूनी हिस्सों की उच्च गुणवत्ता वाली और स्पष्ट तस्वीरें प्राप्त होंगी। इससे हड्डियों के सूक्ष्म फ्रैक्चर समेत कई अन्य बीमारियों की पहचान पहले से अधिक सटीकता के साथ की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि नई डीआर मशीन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि इसमें रेडिएशन का स्तर अपेक्षाकृत कम होता है। इससे मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी और जांच प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद बनेगी। साथ ही डिजिटल तकनीक के कारण रिपोर्ट तैयार होने में भी कम समय लगेगा। पहली बार मिलेगी ओपीजी जांच की सुविधा अस्पताल में पहली बार ओपीजी मशीन की स्थापना की गई है। दंत चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह सुविधा दांतों और जबड़ों से संबंधित बीमारियों के निदान में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। अब तक सरकारी अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों का सहारा लेना पड़ता था। निजी संस्थानों में ओपीजी जांच के लिए मरीजों को 800 से 1000 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे। नई मशीन शुरू होने के बाद यह सुविधा सरकारी अस्पताल में ही उपलब्ध होगी, जिससे मरीजों का आर्थिक बोझ कम होगा। साथ ही जांच रिपोर्ट भी महज पांच से दस मिनट में प्राप्त हो सकेगी। ओपीजी मशीन के माध्यम से दांतों की सड़न, संक्रमण, जबड़े की हड्डियों की स्थिति, ट्यूमर, अक्ल दाढ़ की समस्या, टेढ़े-मेढ़े दांतों तथा रूट कैनाल ट्रीटमेंट (आरसीटी) से जुड़ी जटिलताओं का सटीक आकलन किया जा सकेगा। इससे दंत रोगों के उपचार में तेजी आएगी और चिकित्सकों को बेहतर उपचार योजना बनाने में मदद मिलेगी। रोजाना 120 तक मरीजों को होगा लाभ अस्पताल के डेंटल विभाग में प्रतिदिन 100 से 120 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ओपीजी मशीन शुरू होने के बाद इन मरीजों को जांच के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। समय और धन दोनों की बचत होगी तथा एक ही परिसर में जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार नई मशीनों के संचालन से रेडियोलॉजी और डेंटल विभाग की सेवाओं में गुणात्मक सुधार आएगा। मरीजों की लंबी कतारें कम होंगी, जांच रिपोर्ट जल्दी उपलब्ध होगी और गंभीर रोगों की पहचान समय रहते संभव हो सकेगी। इससे सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों का भरोसा दोनों मजबूत होंगे।

बहसबाजी पड़ी भारी, पीएम आवास योजना राशि मामले में जनपद CEO निलंबित

दुर्ग. सरल लेकिन सख्त मुख्यमंत्री विष्णु देव के सुशासन में एक बार फिर से कड़ा एक्शन देखने को मिला है. दुर्ग जिले के सुशासन तिहार में भाजपा नेता के साथ ‘तेरे को जो करना है कर ले’ कहते हुए बहसबाजी करने वाले जनपद सीईओ पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. मामला संज्ञान में आने के बाद मुख्यमंत्री साय ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे. जनपद सीईओ रूपेश पांडे को जारी नोटिस का जवाब असंतोष पाए जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. महेंद्र कुमार जांगड़े को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. जानकारी के मुताबिक, थनौद गांव में सुशासन तिहार 2026 के जनसमस्या समाधान शिविर में सामुदायिक भवन की राशि जारी जारी करने को लेकर भाजपा नेता पहुंचे थे. उनका कहना था कि पूर्व सरपंच के कार्यक्रम में सामुदायिक भवन का निर्माण किया जा रहा था, जिसपर भाजपा नेता ने स्टे लगाया था. ऐसे में वर्तमान सरपंच की कार्यकाल में राशि क्यों जारी की गई. हालांकि इस मामले में सीईओ का कहना था कि स्टे हटने चुका था, जिस कारण राशि जारी की. सुशासन तिहार में भाजपा के दुर्ग ग्रामीण मंडल महामंत्री पुराण देशमुख और जनपद सीईओ रूपेश पांडे के बीच बहस शुरू हुई. देखते ही देखते तीखी बहस होने लगी. इस दौरान जनपद सीईओ ने भाजपा कार्यकर्ता को उंगली दिखाते हुए कहा कि, “तेरे को जो करना है कर ले”. हैरानी की बात रही कि पूरा घटनाक्रम विवाद दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर के सामने हुआ. मामले में जनपद सीईओ को नोटिस जारी किया गया था. हालांकि जवाब समाधानकारक नहीं पाए जाने पर दुर्ग संभाग आयुक्त ने एक्शन लेते हुए निलंबन की कार्रवाई की है.  जनता जनार्दन सर्वोपरि : मुख्यमंत्री साय इस कार्रवाई से मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनता जनार्दन सर्वोपरि है. जनता के सम्मान और अधिकारों से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा.

प्रदेश में UCC लागू करने की प्रक्रिया तेज, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए बड़े संकेत

प्रदेश में चल रही है समान नागरिक संहिता (यू.सी.सी.) लागू करने की प्रक्रिया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में गठित की गई है उच्च स्तरीय समिति आम नागरिकों से किये गये है सुझाव आमंत्रित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यू.सी.सी) लागू करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। वर्तमान समय में विभिन्न धर्मों में विवाहित बहनों के लिए प्रचलित अलग-अलग रीति-रिवाज और नियमों की आवश्यकता नहीं है। मध्यप्रदेश को आज समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ने की आवश्यकता है। वर्तमान में देश के तीन राज्यों उत्तराखंड, गुजरात और असम ने समान नागरिक संहिता को लागू किया है। मध्यप्रदेश सरकार ने भी यूसीसी (यूनिफॉर्म सिविल कोड) को लागू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकारी आज सोमवार को मंत्रालय में मीडिया को जारी वक्तव्य में दी। जिलों में विभिन्न धर्म समुदाय के लोगों से लिए जायेंगे सुझाव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में यूसीसी के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। अलग-अलग क्षेत्र के विद्वानों को इस समिति में स्थान दिया गया है। यह समिति प्रदेश के विभिन्न जिलों में अलग-अलग धर्म-समुदाय के लोगों से सुझाव प्राप्त करेगी। सभी वर्गों के साथ संवाद और समन्वय से लागू की जायेगी समान नागरिक संहिता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार सभी वर्गों के साथ संतुलन बनाते हुए समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य की जन हितैषी सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। मध्यप्रदेश समान नागरिक आचार संहिता लागू करने के लिए सबसे अनुकूल प्रदेश है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता के लिए एक वेबसाइट भी लॉन्च की है, जिस पर आम नागरिक अपने सुझाव दे सकते हैं।