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सीएम सहभागिता योजना के तहत 93,287 लाभार्थियों को 1,67,658 गोवंश किए गए सुपुर्द

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश के संरक्षण के साथ ही उनके बेहतर पालन-पोषण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में सीएम सहभागिता योजना के माध्यम से निराश्रित गोवंश को इच्छुक एवं पात्र लाभार्थियों को सुपुर्द कर उनका संरक्षण और देखभाल सुनिश्चित किया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव श्री मुकेश मेश्राम ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत अब तक 93,287 लाभार्थियों को 1,67,658 गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश को सुरक्षित एवं बेहतर आश्रय उपलब्ध हुआ है। साथ ही ग्रामीण परिवारों को गोवंश के पालन-पोषण से जोड़कर उनकी आजीविका को मजबूत करने का भी प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर निराश्रित गोवंश की समस्या को कम करने के साथ-साथ गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन को जनसहभागिता से प्रभावी बनाया जा रहा है। सीएम सहभागिता योजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के तहत लाभार्थियों द्वारा सुपुर्द किए गए गोवंश की देखभाल, चारा-पानी एवं संरक्षण की जिम्मेदारी ली जाती है। इससे गोवंश को सुरक्षित वातावरण मिलता है और पशुपालन को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करने में मदद मिलती है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में सार्वजनिक एवं गोचर भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश के 62 जनपदों में कुल 39,721.541 हेक्टेयर गोचर भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता गोचर भूमि को सुरक्षित रखते हुए उसका उपयोग गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सुनिश्चित करना है। इससे निराश्रित गोवंश के संरक्षण की व्यवस्था को और मजबूती मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को भी बढ़ावा मिलेगा।

सीएम योगी का अधिवक्ताओं को बड़ा तोहफा, 5 लाख रुपये की कैशलेस चिकित्सा सुविधा

लखनऊ यूपी के वकीलों को 5 लाख तक का कैशलेस इलाज की को लेकर सीएम योगी ने ऐलान किया है। यूपी के वकीलों के लिए अच्छी खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए पांच लाख रुपये सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा की है। इसका लाभ हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को मिलेगा। उन्होंने हाईकोर्ट में 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए बने चैंबर में मेंटेनेंस के लिए फर्नीचर और उपकरण उपलब्ध कराने के लिए मुख्य न्यायमूर्ति के माध्यम से आने वाले प्रस्ताव पर सरकार की ओर से पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया। साथ ही 400 राज्य विधि अधिकारियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए टैबलेट देने की घोषणा की। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए चैंबर, मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी का निर्माण कराया गया है। अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि डेढ़ लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये की गई है। अधिवक्ता के निधन पर परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की आयु सीमा भी 60 से बढ़ाकर 70 वर्ष की गई है। इसके अलावा कौशांबी, लखनऊ, कासगंज और श्रावस्ती समेत करीब एक दर्जन जिलों में अधिवक्ता चैंबर के निर्माण के लिए अलग से धनराशि उपलब्ध कराई गई है। अधिवक्ताओं की समस्याओं पर भी होती है सीएम और चीफ जस्टिस की बैठक में चर्चा मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अधिवक्ता समाज देश के प्रबुद्ध वर्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर संविधान निर्माण, लोकतंत्र के स्तंभों को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण तक अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बार और बेंच न्याय रूपी रथ के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। दोनों के बीच आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद, समन्वय और सहयोग निरंतर बना रहना चाहिए। मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायमूर्ति की बैठक में केवल न्यायपालिका से जुड़े विषयों पर ही चर्चा नहीं होती, बल्कि अधिवक्ताओं की समस्याएं भी रखी जाती हैं और उनके समाधान का रास्ता निकाला जाता है। इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स में चैंबर और सस्ती कैंटीन भी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश में न्यायिक आधारभूत ढांचे को बेहतर किया जा रहा है। जिन 10 जिलों में जिला अदालतें किराये के भवनों में संचालित हो रही थीं, वहां इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ा है। इनमें न्यायिक अधिकारियों के आवास के साथ अधिवक्ताओं के चैंबर, खेल सुविधाएं, इंडोर स्टेडियम और अधिवक्ताओं के लिए सस्ती कैंटीन की व्यवस्था भी की जा रही है। त्वरित निस्तारण के लिए पहले चरण में जिला स्तर पर 900 न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई है। विधि अधिकारियों की फीस 50 फीसदी से अधिक बढ़ी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिला न्यायालय, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले विधि अधिकारियों की फीस में 50 फीसदी से अधिक की वृद्धि की गई है। अब 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे उन्हें शासन से जुड़े न्यायालय में आने वाले मामलों की जानकारी आधुनिक तकनीक के माध्यम से मिल सकेगी। फ्यूचर रेडी बार से बनेगा फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि तीन नए कानूनों को तेजी से अपनाने में अधिवक्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साइबर क्राइम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी, डिजिटल कॉमर्स, फिनटेक, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और क्लाइमेट लिटिगेशन जैसे नए क्षेत्रों के लिए अधिवक्ताओं को खुद को अपडेट करना होगा। तकनीक, अर्थव्यवस्था और समाज में हो रहे बदलावों की गहरी समझ आज की आवश्यकता है। फ्यूचर रेडी बार ही फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव रखेगा। समय पर न्याय से कायम रहेगा आम आदमी का विश्वास मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास है और इसकी पहली शर्त समय पर न्याय है। नागरिक को भरोसा होना चाहिए कि उसकी निष्पक्ष सुनवाई होगी, उसके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा और कानून की नजर में सभी समान हैं। पारदर्शिता, निर्णयों में ईमानदारी, संस्थाओं की जवाबदेही और नागरिकों का विश्वास सशक्त न्याय व्यवस्था के लिए जरूरी है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिला अदालतों और जेलों को हाईस्पीड इंटरनेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से लैस किया गया है। न्याय श्रुति प्रणाली से अदालतों में वर्चुअल गवाही की व्यवस्था शुरू की गई है। अदालती दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन को भी गति दी गई है। पुलिस और अभियोजन के बेहतर समन्वय के साथ अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे चार्जशीट और वैज्ञानिक साक्ष्य समय पर न्यायालय के सामने रखे जा सकें। अधिवक्ताओं को पार्किंग, भवन और अन्य सुविधाएं मिलना खुशी की बात: मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि बार एसोसिएशन हाईकोर्ट का अभिन्न अंग है। बार के अनेक अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अधिवक्ताओं को पार्किंग, भवन और अन्य सुविधाएं मिलना खुशी की बात है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष रूप से आभार जताया। उन्होंने कहा कि युवा अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे बार और हाईकोर्ट को और आगे ले जाएं तथा लोगों की सेवा करें। न्यायपालिका और सरकार के बीच बेहतर समन्वय के लिए भी उन्होंने धन्यवाद दिया।  

विधवा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल, डेयरी से ब्यूटी पार्लर तक के लिए मिलेगा लोन

चरखी दादरी  प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त, स्वावलंबी व आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं क्रियांवित की जा रही हैं। विधवा अनुदान योजना के तहत राज्य की विधवा महिलाओं को बैंकों के माध्यम से स्वरोजगार के लिए तीन लाख रुपये तक ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है ताकि वे स्वावलंबी बनकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। उपायुक्त मनदीप कौर ने बताया कि इस योजना का लाभ तीन लाख रुपये तक वार्षिक आय वाली विधवा महिलाओं को प्रदान किया जाता है। इसकी पात्रता शर्तों में महिला की आयु 18 से 60 वर्ष के बीच, पूर्व के किसी ऋण मामले में डिफाल्टर न होना, हरियाणा का निवासी होना शामिल है। योजना के तहत बैंक ऋण के ऊपर लगे ब्याज की प्रतिपूर्ति हरियाणा महिला विकास निगम द्वारा अनुदान के रूप में अदा कर की जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा 50 हजार रुपये व अवधि तीन वर्ष, जो भी पहले होगी। योजना के तहत इन व्यवसायों के लिए मिल सकता है ऋण योजना के तहत डेयरिंग, आटो रिक्शा, ई-रिक्शा, सामाजिक व व्यक्तिगत सेवा गतिविधियों के तहत सैलून, ब्यूटी पार्लर, टेलरिंग, बुटीक, पापड़ बनाना, आचार बनाना, हलवाई की दुकान, फूड स्टाल, आइसक्रीम बनाने की यूनिट, बिस्कुट बनाना, टिफिन सर्विस, स्कूल यूनिफार्म सीलना इत्यादि शामिल है। इच्छुक महिलाएं आवेदन करने के लिए भिवानी स्थित महिला विकास निगम जिला प्रबंधक कार्यालय में संपर्क कर सकती हैं तथा किसी भी कार्य दिवस में सुबह 9 बजे से सायं 5 बजे तक संपर्क किया जा सकता है। योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित दस्तावेज उपायुक्त ने बताया कि विधवा अनुदान योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को निर्धारित दस्तावेज आवेदन के साथ जमा करवाने होंगे। इन दस्तावेजों में राशन कार्ड, परिवार पहचान पत्र, आधार कार्ड, पति का मृत्यु प्रमाण पत्र, पासपोर्ट आकार के फोटो, रिहायशी प्रमाण पत्र आदि शामिल है तथा आवेदक के पास उपरोक्त सभी दस्तावेजों की दो-दो कापी जमा करवाएं।  

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद की ओर से आयोजित सम्मान समारोह को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित

प्रयागराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए पांच लाख रुपये सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा की है। इसका लाभ हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को मिलेगा। उन्होंने हाईकोर्ट में 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए बने चैंबर में फर्नीचर और उपकरण उपलब्ध कराने के लिए मुख्य न्यायमूर्ति के माध्यम से आने वाले प्रस्ताव पर सरकार की ओर से पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया। साथ ही 400 राज्य विधि अधिकारियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए टैबलेट देने की घोषणा की।   हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए चैंबर, मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी का निर्माण कराया गया है। अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि डेढ़ लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये की गई है। अधिवक्ता के निधन पर परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की आयु सीमा भी 60 से बढ़ाकर 70 वर्ष की गई है। इसके अलावा कौशांबी, लखनऊ, कासगंज और श्रावस्ती समेत करीब एक दर्जन जिलों में अधिवक्ता चैंबर के निर्माण के लिए अलग से धनराशि उपलब्ध कराई गई है।   अधिवक्ताओं की समस्याओं पर भी होती है सीएम और चीफ जस्टिस की बैठक में चर्चा मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अधिवक्ता समाज देश के प्रबुद्ध वर्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर संविधान निर्माण, लोकतंत्र के स्तंभों को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण तक अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बार और बेंच न्याय रूपी रथ के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। दोनों के बीच आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद, समन्वय और सहयोग निरंतर बना रहना चाहिए। मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायमूर्ति की बैठक में केवल न्यायपालिका से जुड़े विषयों पर ही चर्चा नहीं होती, बल्कि अधिवक्ताओं की समस्याएं भी रखी जाती हैं और उनके समाधान का रास्ता निकाला जाता है।   इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स में चैंबर और सस्ती कैंटीन भी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश में न्यायिक आधारभूत ढांचे को बेहतर किया जा रहा है। जिन 10 जिलों में जिला अदालतें किराये के भवनों में संचालित हो रही थीं, वहां इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ा है। इनमें न्यायिक अधिकारियों के आवास के साथ अधिवक्ताओं के चैंबर, खेल सुविधाएं, इंडोर स्टेडियम और अधिवक्ताओं के लिए सस्ती कैंटीन की व्यवस्था भी की जा रही है। त्वरित निस्तारण के लिए पहले चरण में जिला स्तर पर 900 न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई है।   विधि अधिकारियों की फीस 50 फीसदी से अधिक बढ़ी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिला न्यायालय, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले विधि अधिकारियों की फीस में 50 फीसदी से अधिक की वृद्धि की गई है। अब 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे उन्हें शासन से जुड़े न्यायालय में आने वाले मामलों की जानकारी आधुनिक तकनीक के माध्यम से मिल सकेगी।   फ्यूचर रेडी बार से बनेगा फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि तीन नए कानूनों को तेजी से अपनाने में अधिवक्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साइबर क्राइम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी, डिजिटल कॉमर्स, फिनटेक, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और क्लाइमेट लिटिगेशन जैसे नए क्षेत्रों के लिए अधिवक्ताओं को खुद को अपडेट करना होगा। तकनीक, अर्थव्यवस्था और समाज में हो रहे बदलावों की गहरी समझ आज की आवश्यकता है। फ्यूचर रेडी बार ही फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव रखेगा।   समय पर न्याय से कायम रहेगा आम आदमी का विश्वास मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास है और इसकी पहली शर्त समय पर न्याय है। नागरिक को भरोसा होना चाहिए कि उसकी निष्पक्ष सुनवाई होगी, उसके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा और कानून की नजर में सभी समान हैं। पारदर्शिता, निर्णयों में ईमानदारी, संस्थाओं की जवाबदेही और नागरिकों का विश्वास सशक्त न्याय व्यवस्था के लिए जरूरी है।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिला अदालतों और जेलों को हाईस्पीड इंटरनेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से लैस किया गया है। न्याय श्रुति प्रणाली से अदालतों में वर्चुअल गवाही की व्यवस्था शुरू की गई है। अदालती दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन को भी गति दी गई है। पुलिस और अभियोजन के बेहतर समन्वय के साथ अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे चार्जशीट और वैज्ञानिक साक्ष्य समय पर न्यायालय के सामने रखे जा सकें। अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र को मजबूत करने में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका: मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि बार एसोसिएशन हाईकोर्ट का अभिन्न अंग है। बार के अनेक अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अधिवक्ताओं को पार्किंग, भवन और अन्य सुविधाएं मिलना खुशी की बात है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष रूप से आभार जताया। उन्होंने कहा कि युवा अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे बार और हाईकोर्ट को और आगे ले जाएं तथा लोगों की सेवा करें। न्यायपालिका और सरकार के बीच बेहतर समन्वय के लिए भी उन्होंने धन्यवाद दिया।  

बलरामपुर में सेवा और स्नेह की अनूठी पहल, आंगनबाड़ी के नन्हे-मुन्नों के लिए होगा खिलौना दान

रायपुर : बलरामपुर जिले में सेवा और स्नेह का अनूठा संकल्प, आंगनबाड़ी के नन्हे-मुन्नों के लिए होगा खिलौना दान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक 2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों में ‘आंगन मिलन सेवा’ कलेक्टर ने जिलेवासियों से खिलौना दान कर बच्चों की खुशियों में सहभागी बनने की अपील रायपुर, बलरामपुर जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले ’सेवा संकल्प अभियान’ को जनभागीदारी और सामाजिक सरोकार से जोड़ने की दिशा में बलरामपुर जिले में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसी कड़ी में ’आंगन मिलन सेवा‘ (आंगनबाड़ी सम्मान एवं मातृ सम्मान) कार्यक्रम 25 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप इस पहल के तहत जिले के सभी ’2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों’ में आने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए जनसहयोग से खिलौने उपलब्ध कराए जाएंगे। ‘आंगन मिलन सेवा’ का उद्देश्य आंगनबाड़ी केन्द्रों को बच्चों के लिए और अधिक आनंदमय, आकर्षक तथा सीखने के अनुकूल वातावरण प्रदान करना है। इस पहल में जिले के नागरिकों की सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। ’खिलौना दान इस आयोजन का सबसे आत्मीय और संवेदनशील पक्ष होगा’, जिसके माध्यम से जिलेवासी आंगनबाड़ी के बच्चों के साथ सेवा, स्नेह और अपनत्व का भाव साझा कर सकेंगे। ’घर में रखे खिलौने भी बनेंगे किसी बच्चे की खुशी का कारण’ कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने जिलेवासियों से अपील की है कि उनके घरों में ऐसे ’सुरक्षित, स्वच्छ एवं उपयोगी खिलौने’, जिनका अब उपयोग नहीं हो रहा है, वे उन्हें आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों को भेंट कर सकते हैं। इसके साथ ही इच्छुक नागरिक अपनी स्वेच्छा से नए खिलौने खरीदकर भी बच्चों को दान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए किया गया छोटा-सा प्रयास भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। जिले के नागरिक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं और व्यवसायिक प्रतिष्ठान 25 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच अपने निकटतम आंगनबाड़ी केन्द्र पहुंचकर इस जनभागीदारी अभियान में शामिल हो सकते हैं। आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों की पहली पाठशाला कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों के जीवन की ’पहली पाठशाला’ हैं। यहीं से बच्चों में सीखने, समझने, संवाद करने और सामाजिक व्यवहार की प्रारंभिक नींव तैयार होती है। ऐसे में इन केन्द्रों को बच्चों के लिए अधिक जीवंत और सीखने योग्य बनाने में समाज की सहभागिता निर्णायक भूमिका निभा सकती है। उन्होंने जिलेवासियों से आग्रह करते हुए कहा कि आपका छोटा-सा सहयोग किसी बच्चे के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकता है और उसकी सीखने की यात्रा को और समृद्ध कर सकता है। बच्चों के लिए किया गया प्रत्येक छोटा प्रयास उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव को मजबूत करने में योगदान देता है। खिलौनों से खेल-खेल में सीखने की मजबूत होगी नींव बच्चों के लिए खिलौने केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे उनके ’रचनात्मक, बौद्धिक और सामाजिक विकास’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेल-खेल में बच्चे नई चीजों को समझते हैं, अपनी कल्पनाशक्ति को विकसित करते हैं और भाषा तथा सामाजिक व्यवहार से जुड़े कौशल सीखते हैं। जनसहयोग से प्राप्त खिलौनों का उपयोग आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करने में किया जाएगा, जहां वे ’खेलते हुए सीख सकें, अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्त कर सकें और सीखने की प्रक्रिया का आनंद उठा सकें।’  इससे आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की रुचि और सहभागिता को भी बढ़ावा मिलेगा। सेवा से संकल्प और संकल्प से जनभागीदारी की ओर ‘आंगन मिलन सेवा’ केवल खिलौना दान तक सीमित पहल नहीं है, बल्कि यह समाज में ’संवेदनशीलता, सहयोग और अपनत्व की भावना को मजबूत करने का अवसर’ भी है। एक ओर जहां बच्चों को उनके विकास के लिए उपयोगी संसाधन मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर समाज के विभिन्न वर्गों को बच्चों के साथ सीधे जुड़कर सेवा का अवसर मिलेगा। जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आयोजित ‘आंगन मिलन सेवा’ में सक्रिय सहभागिता निभाएं। अपने घर में अनुपयोगी लेकिन सुरक्षित और उपयोगी खिलौने किसी आंगनबाड़ी केन्द्र में दान करें या अपनी इच्छा के अनुसार नए खिलौने उपलब्ध कराएं। यह जनभागीदारी पहल 2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों के नन्हे-मुन्नों के जीवन में खुशियों के रंग भरने के साथ-साथ सेवा, स्नेह और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी नई मजबूती देगी। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जिले में यह संदेश भी जाएगा कि बच्चों के बेहतर भविष्य की जिम्मेदारी केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है।  

CM योगी का बड़ा संदेश- गलत करने वाले लोक सेवकों की तय हो जवाबदेही, झूठी शिकायतों पर भी हो कार्रवाई

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई भी लोक सेवक गलत करता है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। कई बार व्यक्ति को ताकत मिलने पर वह उच्छृंखल और उद्दंड व्यवहार करने लगता है। उन्होंने रामचरितमानस की पंक्ति ‘प्रभुता पाई काहि मद नाहीं’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे में कहीं न कहीं अंकुश होना आवश्यक है, जो मर्यादाओं का पालन करा सके। लोकायुक्त जैसी संस्था मेरिट के आधार पर शिकायतों का समाधान निकालकर लोक सेवकों को जनता के प्रति जवाबदेही का अहसास कराती है। मुख्यमंत्री योगी सोमवार को उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संगठन की 50 वर्ष की यात्रा के लिए बधाई देते हुए कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवैधानिक संस्थाओं में सामान्य नागरिक का विश्वास है। गुड गवर्नेंस पब्लिक ट्रस्ट पर निर्भर करता है। जनता का विश्वास नहीं है तो सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता। अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास और गौरव की अनुभूति करे, यही लोकतंत्र की कसौटी है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि केवल संस्था का गठन करने से समस्या का समाधान नहीं होता। सामान्य व्यक्ति बेझिझक अपनी समस्या लेकर आए और नियमानुसार उसका समयबद्ध समाधान अपनी आंखों के सामने देख सके। शिकायतकर्ता की जाति, मत या संप्रदाय देखे बिना मेरिट के आधार पर समाधान होना चाहिए। साथ ही शिकायत की व्यवस्था का दुरुपयोग करने वालों पर भी शिकंजा कसना होगा। झूठी और बेवजह शिकायतें सिस्टम का समय खराब करने के साथ वास्तविक पीड़ित के न्याय का समय भी नष्ट करती हैं। मुख्यमंत्री योगी ने तकनीक से आए बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद जनता दर्शन में आने वाली शिकायतों में करीब 60 फीसदी सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ी होती थीं। ई-पॉस मशीनें लगाने और प्रदेश की करीब 80 हजार उचित दर की दुकानों को तकनीक से जोड़ने के बाद हेराफेरी की गुंजाइश समाप्त हुई है। आज 16 करोड़ लोगों को राशन मिल रहा है और पीडीएस से जुड़ी शिकायतें लगभग शून्य हो गई हैं। राजस्व विभाग का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 में भूमि विवाद, पैमाइश, वरासत और नामांतरण से जुड़े 34 लाख मामले लंबित थे। पिछले साढ़े नौ वर्षों में इन 34 लाख मामलों का समाधान किया गया। हालांकि इस दौरान नौ लाख नए मामले भी आए हैं। पैमाइश में गड़बड़ी रोकने के लिए हर तहसील में तकनीक आधारित उपकरण उपलब्ध कराया गया है। अब कोऑर्डिनेट के आधार पर पैमाइश होगी, जिससे एक इंच जमीन भी इधर-उधर नहीं हो सकेगी। मुख्यमंत्री योगी ने जनधन खाते और डीबीटी को भी सुशासन का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि पहले वृद्धावस्था और विधवा पेंशन के पैसे में भी बिचौलिये हिस्सा लेते थे। आज 1.10 करोड़ लोगों को सालाना 12 हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं। बीच में न कोई मध्यस्थ है और न दलाली। यही सुशासन है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और ई-गवर्नेंस के बेहतर उपयोग से प्रशासन की पारदर्शिता और बढ़ेगी। तकनीक वही सार्थक है, जो लोक कल्याण और सुशासन का माध्यम बने। उन्होंने लोकायुक्त संगठन की 50 वर्षों की पूरी यात्रा का दस्तावेजीकरण करने का सुझाव दिया। कहा कि कितने मामले आए, कितनों का निस्तारण हुआ और किन मामलों में क्या कार्रवाई हुई, इसका बेहतर प्रस्तुतीकरण तैयार किया जाए। देशभर के लोकायुक्तों और भारत के लोकपाल को आमंत्रित कर बड़ा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाए, जिसमें श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों पर चर्चा हो। स्वर्ण जयंती के माध्यम से उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन को अगले 50 वर्षों की कार्ययोजना और मजबूत रोडमैप के साथ आगे बढ़ना चाहिए। भ्रष्टाचार राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न: लोकायुक्त लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने कहा कि संगठन की 50 वर्षों की यात्रा विश्वसनीयता और जनविश्वास की यात्रा है। उन्होंने संस्था के सुदृढ़ीकरण में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष आभार जताया। कहा कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं है, इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है और यह राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न है। डिजिटल गवर्नेंस के जरिए संस्था को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि एक सही निर्णय किसी नागरिक का अधिकार सुनिश्चित कर सकता है, जबकि एक गलत निर्णय पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर सकता है। उन्होंने इस अवसर पर पूर्व लोकायुक्तों और संस्था से जुड़े पूर्व अधिकारियों के योगदान का भी उल्लेख करते हुए उनका अभिवादन किया। लोकायुक्त ने मजबूत किया जनविश्वास उप लोकायुक्त सुरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि लोकायुक्त ने अनेक दौर देखे हैं और हर दौर में साबित किया है कि लोकतंत्र में जवाबदेही केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवंत व्यवस्था है। लोकायुक्त के पास अधिकांश शिकायतें गांवों से मनरेगा में फर्जी उपस्थिति, आवास एवं शौचालय आवंटन में कथित भ्रष्टाचार, राशन कार्ड, पेंशन और भूमि अभिलेखों में हेराफेरी से जुड़ी आती हैं। चीनी मिल श्रमिकों का बकाया दिलाने के साथ खाद्य एवं रसद, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग से जुड़ी शिकायतों पर भी जांच और कार्रवाई की गई है। इससे जनता में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त केवल शिकायत सुनने वाली संस्था नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था है। चार प्रमुख क्षेत्रों में काम कर रहा लोकायुक्त प्रशासन उप लोकायुक्त शंभू सिंह यादव ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से लोकायुक्त प्रशासन की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशासन मुख्य रूप से चार क्षेत्रों- अन्वेषण, अतिरिक्त कृत्यों का निर्वहन, जनजागरूकता कार्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में काम करता है। वर्ष 2024 में परिवादों के निस्तारण की अधिकतम दर 98 प्रतिशत रही, जबकि औसत निस्तारण 90 प्रतिशत दर्ज किया गया। 1.25 लाख परिवादों पर कार्रवाई, 33.55 करोड़ की राहत संगठन की सचिव रीमा बंसल ने कहा कि उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन की भूमिका केवल भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके हस्तक्षेप से आम जनता को प्रशासनिक और आर्थिक राहत भी मिली है। सितंबर 1977 से अगस्त 2026 तक 1,25,056 परिवादों में कार्रवाई की गई। वर्ष 2017 से 2025 के बीच परिवादियों और आम जनता को 33 करोड़ 55 … Read more

गयाजी में पिंडदान से राजगीर-नालंदा दर्शन तक, श्रद्धालुओं के लिए खास टूर पैकेज तैयार

पटना  पितृपक्ष मेला-2026 में देश-विदेश से गयाजी और बिहार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पर्यटन विभाग ने विशेष तैयारी की है। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (BSTDC) ने पिंडदान और धार्मिक पर्यटन को जोड़ते हुए पांच विशेष पैकेज जारी किए हैं। ये पैकेज 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे। इन पैकेजों में श्रद्धालुओं को पिंडदान अनुष्ठान, पंडा-पुजारी की सेवाएं, पूजन सामग्री, परिवहन, आवास और भोजन जैसी सुविधाएं एक साथ उपलब्ध कराई जाएंगी। श्रद्धालु अपनी यात्रा अवधि और बजट के अनुसार एक दिवसीय अथवा एक रात्रि-दो दिवसीय पैकेज चुन सकेंगे। ऑनलाइन बुकिंग के लिए श्रद्धालु BSTDC की वेबसाइट  https://bstdc.bihar.gov.in/Pitripaksha/पर जा सकते हैं। जानकारी के लिए 8544418408 और 8294307690 पर संपर्क किया जा सकता है। पैकेज-ए : पटना से गयाजी तक एक दिन में पिंडदान इस पैकेज में पटना से पुनपुन घाट होते हुए गयाजी और फिर पटना वापसी की सुविधा मिलेगी। पटना शहर के 10 किलोमीटर क्षेत्र, रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट से श्रद्धालुओं को पिकअप और ड्रॉप की सुविधा दी जाएगी। सेडान या हैचबैक कार से यात्रा कराई जाएगी। पुनपुन घाट पर पिंडदान के साथ गयाजी में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर पिंडदान की व्यवस्था होगी। पिंडदान शुल्क, पूजन सामग्री, आवास और शाकाहारी दोपहर का भोजन भी पैकेज में शामिल है। होटल की श्रेणी और यात्रियों की संख्या के अनुसार इसकी कीमत 14,550 से 30,650 रुपये तक है। पैकेज-बी : पिंडदान के साथ नालंदा-राजगीर की सैर एक रात्रि-दो दिवसीय इस पैकेज में पटना से पुनपुन घाट और गयाजी में पिंडदान कराया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं को राजगीर के विश्व शांति स्तूप और नालंदा के प्राचीन अवशेषों का भ्रमण कराया जाएगा। आवास के साथ शाकाहारी नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन शामिल है। हालांकि स्मारकों और पर्यटन स्थलों के प्रवेश टिकट पैकेज में शामिल नहीं होंगे। इसकी दर 18,850 से 40,700 रुपये तक है। पैकेज-सी : गयाजी में एक दिन में पूरा पिंडदान गयाजी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक दिवसीय पैकेज है। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट अथवा 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित पूजा स्थल से पिकअप और ड्रॉप की सुविधा मिलेगी। फल्गु नदी पर तर्पण, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर पिंडदान के साथ पंडाजी की सेवाएं, पिंडदान शुल्क, पूजन सामग्री, आवास और शाकाहारी भोजन शामिल है। इसकी कीमत 11,250 से 25,250 रुपये तक निर्धारित की गई है। पैकेज-डी : देर रात और सुबह पिंडदान करने वालों के लिए खास यह पैकेज खासतौर पर उन श्रद्धालुओं के लिए तैयार किया गया है जो देर रात, सुबह या शाम के समय पिंडदान करना चाहते हैं। इसमें गयाजी स्टेशन, एयरपोर्ट या पूजा स्थल से पिकअप-ड्रॉप, कार, आवास और भोजन की सुविधा रहेगी। फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर पिंडदान की व्यवस्था के साथ इसकी कीमत 16,000 से 39,500 रुपये तक है। पैकेज-ई : पिंडदान के साथ राजगीर और नालंदा भ्रमण एक रात्रि-दो दिवसीय इस पैकेज में गयाजी में पिंडदान के साथ राजगीर और नालंदा घूमने का मौका मिलेगा। परिवहन, पिंडदान सेवाएं, पूजन सामग्री, आवास और शाकाहारी भोजन पैकेज में शामिल हैं। राजगीर में विश्व शांति स्तूप और नालंदा के प्राचीन अवशेषों का भ्रमण कराया जाएगा। पर्यटन स्थलों के प्रवेश टिकट अलग से देने होंगे। इसकी कीमत 16,550 से 32,850 रुपये तक है। गयाजी नहीं पहुंच पाने वालों के लिए ई-पिंडदान जो श्रद्धालु किसी कारण गयाजी नहीं पहुंच सकते, उनके लिए ऑनलाइन ई-पिंडदान की सुविधा भी शुरू की गई है। इसकी कुल कीमत 23,000 रुपये, जीएसटी सहित निर्धारित है। ई-पिंडदान में विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट और फल्गु नदी पर पिंडदान अथवा तर्पण कराया जाएगा। इसमें पुरोहित की सेवाएं, पूजन सामग्री, दक्षिणा और पूरे अनुष्ठान की वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल है। अनुष्ठान की रिकॉर्डिंग पेन ड्राइव में भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस तरह श्रद्धालु स्वयं गयाजी पहुंचे बिना भी प्रमुख पिंडदान स्थलों पर विधि-विधान से अनुष्ठान करा सकेंगे।

504 रोवर से बदल रहा जमीन की पैमाइश का तरीका, योगी सरकार ने राजस्व सर्वेक्षण को बनाया हाईटेक

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जमीन की पैमाइश और सीमांकन की प्रक्रिया अब तकनीक की नई रफ्तार पकड़ रही है। योगी सरकार राजस्व विभाग के कामकाज को आधुनिक बनाने के लिए जीएनएसएस रोवर तकनीक को बड़े स्तर पर जमीन पर उतार रही है। प्रदेश में उपलब्ध 504 जीएनएसएस रोवर में से 350 रोवर तहसीलों तक पहुंचाए जा चुके हैं और इनसे काम भी शुरू हो गया है। वहीं 143 रोवर 10 यूएलबी की नक्शा परियोजनाओं में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। हरदोई के केटीएस (चकबंदी प्रशिक्षण केंद्र) में दो रोवर लगाए गए हैं, जबकि लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों के लिए खरीदे गए 9 रोवर से सभी प्रशिक्षण पूरे हो चुके हैं। यह बदलाव जमीन की पैमाइश को पारंपरिक तरीकों से निकालकर अधिक तेज, सटीक और डिजिटल व्यवस्था की ओर ले जा रहा है। खेत-खलिहान से नक्शे तक, एक ही तकनीक से कई काम राजस्व परिषद आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि जीएनएसएस रोवर की तैनाती केवल तहसीलों तक सीमित नहीं है। 350 रोवर सीधे तहसीलों में पहुंचने के बाद फील्ड सर्वेक्षण में इस्तेमाल हो रहे हैं। इसके साथ 143 रोवर 10 यूएलबी (शहरी स्थानीय निकाय) की नक्शा परियोजनाओं के लिए लगाए गए हैं। हरदोई के केटीएस को भी दो रोवर उपलब्ध कराए गए हैं। दूसरी ओर, लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों के लिए खरीदे गए 9 रोवर का इस्तेमाल प्रशिक्षण में किया गया और सभी प्रशिक्षण पूरे हो चुके हैं। यानी राजस्व विभाग में तकनीक के इस्तेमाल के साथ कर्मचारियों को इसके संचालन के लिए तैयार करने पर भी जोर दिया गया है। सीएम योगी ने सहारनपुर से रखी थी अभियान की नींव कंचन वर्मा ने कहा कि भूमि की सीमाओं और पैमाइश से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए धारा-24 का विशेष महाअभियान 1 जुलाई से 15 अगस्त तक चलाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 जुलाई को सहारनपुर से इस अभियान की शुरुआत की थी। अभियान को प्रभावी और एक समान तरीके से संचालित करने के लिए राजस्व विभाग ने एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) भी जारी की। अब इसी व्यवस्था को आधुनिक सर्वे तकनीक का सहारा मिलने से जमीन से जुड़े कामों में तकनीकी क्षमता बढ़ी है। जीएनएसएस रोवर के कई फायदे सेंटीमीटर स्तर तक सटीक स्थिति बताता है रोवर जीएनएसएस रोवर आधुनिक सर्वेक्षण उपकरण है, जो विभिन्न उपग्रह प्रणालियों से मिलने वाले सिग्नल के आधार पर जमीन पर किसी बिंदु की सटीक स्थिति निर्धारित करता है। उत्तर प्रदेश के नेटवर्क से जुड़ने पर यह लगभग 1 से 5 सेंटीमीटर तक सटीक जानकारी दे सकता है। सर्वेक्षक खेत या भूमि की सीमा के प्रमुख बिंदुओं के डिजिटल निर्देशांक (कोऑर्डिनेट्स) दर्ज करते हैं। इसके बाद सॉफ्टवेयर की मदद से दूरी और क्षेत्रफल की गणना की जाती है व डिजिटल नक्शा तैयार किया जाता है। जंजीर-फीते से डिजिटल पैमाइश की ओर बढ़ा कदम जमीन की पैमाइश के पारंपरिक तरीकों में जंजीर और फीते के इस्तेमाल की तुलना में रोवर तकनीक सर्वेक्षण को अधिक वैज्ञानिक और डिजिटल बना रही है। फील्ड में जुटाए गए डिजिटल निर्देशांकों को जीआईएस और भूमि रिकॉर्ड प्रणालियों से जोड़ा जा सकता है। इससे तैयार डेटा को सुरक्षित रखना, उसकी गुणवत्ता जांचना और जरूरत के समय उसका इस्तेमाल करना आसान बन रहा है। मानवीय चूक की संभावना होगी कम रोवर के जरिए भूमि की सीमा के प्रमुख बिंदु डिजिटल रूप में दर्ज किए जाते हैं। इससे दूरी और क्षेत्रफल की गणना में मानवीय हस्तक्षेप कम हो रहा है और गलतियों की संभावना घट रही है। बड़े क्षेत्र में सर्वेक्षण कम समय में पूरा किया जा रहा है और अपेक्षाकृत कम जनशक्ति की जरूरत पड़ रही है। बड़े भूमि सर्वेक्षण और नक्शा परियोजनाओं में इससे समय और लागत बचाने में भी मदद मिलने लगी है। फसल को नुकसान पहुंचाए बिना जमीन की पैमाइश कृषि भूमि की पैमाइश में फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। जीएनएसएस रोवर के इस्तेमाल से पारंपरिक तरीके से खेत में बार-बार आवाजाही और लंबी प्रक्रिया की जरूरत कम की जा रही है। सीमा के जरूरी बिंदुओं के डिजिटल निर्देशांक लेकर सर्वेक्षण किया जा रहा है। इससे फसलों को नुकसान पहुंचाए बिना पैमाइश करने की सुविधा मिल रही है। किसानों के लिए भी प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनती जा रही है। डिजिटल रिकॉर्ड से बढ़ेगी पारदर्शिता रोवर से तैयार डिजिटल डेटा भूमि रिकॉर्ड और नक्शा प्रणालियों को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद कर रहा है। रिकॉर्ड की गुणवत्ता जांचने और डेटा की ट्रेसबिलिटी बनाए रखने में भी सुविधा है। भूमि पार्सल सर्वेक्षण, कडास्ट्रल मैपिंग, नक्शा परियोजनाओं और जीआईएस आधारित मैपिंग में इसका इस्तेमाल राजस्व प्रशासन को आधुनिक बनाने में सहायता प्रदान कर रहा है।

बारिश में सड़क की बदहाली पर CM साय सख्त, सभी कलेक्टरों को नियमित निरीक्षण और सुरक्षा के निर्देश

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश में बारिश के दौरान निर्माणाधीन सड़कों के कारण नागरिकों को आवागमन में हो रही परेशानियों को गंभीरता से लिया है। अंबिकापुर शहर के खरसिया चौक में सड़क की खराब स्थिति का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस वायरल वीडियो को देखने के बाद संज्ञान लिया है। वायरल वीडियो को देखने के बाद संज्ञान मुख्यमंत्री साय ने सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत से फोन कर वायरल वीडियो की सच्चाई जानी है। फोन पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को तत्काल सड़क का निरीक्षण कर आवश्यक सुधार कार्य सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। क्या कहा सीएम ने मुख्यमंत्री साय ने खरसिया चौक की सड़क में बड़े गड्ढों को भरने, आवश्यक समतलीकरण तथा जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि जहां यातायात का दबाव अधिक है, वहां पुलिस एवं यातायात विभाग के साथ समन्वय कर सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जाए। सभी कलेक्टरों को निर्देश सीएम विष्णुदेव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने जिलों में निर्माणाधीन सड़कों की स्थिति की नियमित निगरानी करें, आवश्यकता के अनुसार स्वयं मौके पर जाकर निरीक्षण करें और संबंधित विभागों एवं निर्माण एजेंसियों से समन्वय कर सड़कों को आवागमन योग्य बनाए रखना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री साय ने सभी जिला कलेक्टरों से कहा है कि बारिश के दौरान सड़क सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाए। बारिश के कारण जर्जर हो गई थी सड़क, विधायक ने ठीक कराई उन्होंने कहा कि जहां सड़क क्षतिग्रस्त होने, निर्माण कार्य, पुल-पुलिया के आसपास कटाव, जलभराव अथवा अन्य किसी कारण से आवागमन प्रभावित होने या दुर्घटना की आशंका हो, वहां तत्काल सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं। आवश्यकता के अनुसार चेतावनी संकेतक, बैरिकेडिंग और सुरक्षित वैकल्पिक यातायात व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। लोगों को नहीं होनी चाहिए परेशानी मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मानसून के दौरान किसी भी क्षेत्र में सड़क की खराब स्थिति के कारण नागरिकों को आवागमन में अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। जहां निर्माण कार्य प्रगति पर हैं अथवा बारिश के कारण सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, वहां गड्ढों को भरने, समतलीकरण, जल निकासी सहित सभी आवश्यक अंतरिम सुधार कार्य प्राथमिकता से किए जाएं। स्थायी निर्माण में मौसम संबंधी व्यावहारिक कठिनाइयां होने पर भी सड़क को चलने योग्य बनाए रखने के लिए हर आवश्यक उपाय सुनिश्चित किया जाए। राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग, नगरीय निकाय अथवा अन्य किसी एजेंसी से संबंधित सड़क हो, जिला प्रशासन संबंधित विभाग के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित कर समस्या का त्वरित समाधान सुनिश्चित करे। कलेक्टर अपने जिले में अधिक यातायात दबाव वाली प्रमुख सड़कों और निर्माणाधीन मार्गों को चिन्हांकित कर उनकी स्थिति की नियमित समीक्षा करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री की प्रदेशवासियों से अपील- ‘वोकल फॉर लोकल’ को बनाएं व्यवहार का हिस्सा

    लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘योगी की पाती’ लिखकर प्रदेशवासियों को गणेश चतुर्थी और 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने गणेश चतुर्थी को सामाजिक एकता एवं राष्ट्र के प्रति संकल्प को सुदृढ़ करने वाला महापर्व बताया। मुख्यमंत्री ने ‘वोकल फॉर लोकल’ पर जोर देते हुए प्रदेशवासियों से अपील की कि इसे सिर्फ विचार नहीं, बल्कि व्यवहार का हिस्सा बनाएं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को संबोधित पाती में लिखा कि प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश शुभत्व एवं मंगल के आराध्य हैं। प्रदेश में युवाओं द्वारा घरों में भगवान गणपति की स्थापना कर श्रद्धा के साथ उनका पूजन किया जाना देख हृदय प्रफुल्लित हो उठता है। सामाजिक एकता एवं राष्ट्र के प्रति अपने संकल्प को सुदृढ़ करने वाले महापर्व गणेश चतुर्थी की सभी को कोटि-कोटि मंगलकामनाएं। सीएम ने लिखा कि भगवान गणेश का पर्यावरण और जीवों के साथ गहरा जुड़ाव, उनकी रूप-रचना तथा जीवन-दर्शन, प्रकृति के संरक्षण और संतुलन का संदेश देता है। गज मुख जंगलों और वन्यजीवों का प्रतीक हैं, तो मूषक वाहन भूमि की उर्वरता और कृषि से जुड़ा है। विशाल उदर संपूर्ण ब्रह्मांड को समाहित करने का भाव व्यक्त करता है, जबकि उनके बड़े कान हमें प्रकृति की हर पुकार को सुनने का संदेश देते हैं। सीएम ने लिखा कि गणेश चतुर्थी पर पूजा जाने वाला 'एकविंशति पत्र' (21 प्रकार की विशेष पत्तियां) औषधीय पौधों के संरक्षण से जुड़ा है। इस प्रकार गणपति भगवान का चरित्र हमें मानव जीवन और प्रकृति के एक-दूसरे का पूरक होने का संदेश देता है। इसी विराटता को लोकमान्य तिलक ने आस्था से एकता, एकता से जनशक्ति और जनशक्ति से राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देने वाला महापर्व बना दिया। गणेशोत्सव के ज्ञान, विवेक और कर्म की भावना सृजन तथा निर्माण के स्वरूप भगवान विश्वकर्मा के पूजन में दिखाई देती है। 17 सितंबर को जब सृष्टि के प्रथम अभियंता भगवान विश्वकर्मा का पूजन किया जाएगा, तब कौशल एवं तकनीक के संगम से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प और पुष्ट होगा। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक क्षेत्र और आधुनिक आधारभूत संरचनाएं नए उत्तर प्रदेश के बढ़ते सामर्थ्य का प्रमाण हैं। किसी प्रदेश का वास्तविक निर्माण केवल बड़े ढांचों से नहीं, वहां के लोगों के हुनर, विचारों की शक्ति और उद्यमिता के साहस से होता है। इसी सोच के साथ हमारी सरकार विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, एक जनपद-एक उत्पाद, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन तथा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान जैसी पहलों के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों, शिल्पकारों, युवाओं और उद्यमियों को कौशल, उपकरण, वित्त और बाजार से जोड़ने का कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने अपनी पाती में प्रदेशवासियों से विशेष आग्रह किया कि 'वोकल फॉर लोकल' को केवल विचार नहीं, बल्कि व्यवहार का अंग बनाएं। स्थानीय उत्पादों का सम्मान बढ़ेगा तो कारीगरों के हाथों को काम, युवाओं को रोजगार के अवसर और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और हुनर तथा स्थानीय सामर्थ्य पर विश्वास से ही आत्मनिर्भर एवं विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।