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त्विषा शर्मा केस में नया मोड़, कोर्ट में दोनों पक्षों ने दायर किए नए आवेदन; CBI के सवालों पर पूर्व जज की सफाई

भोपाल. बहुचर्चित एक्ट्रेस त्विषा शर्मा मौत मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कानूनी दांव-पेंच और तीखे होते जा रहे हैं। भोपाल कोर्ट में दोनों पक्षों ने कॉल रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट खंगालने के लिए 3 नए आवेदन लगाए हैं। सीबीआई के तीखे सवालों पर पूर्व जिला जज ने माना कि एफआईआर से पहले अग्रिम जमानत की अर्जी लगाना उनकी बड़ी भूल थी। मामले की कमान संभालते ही सीबीआई ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की घेराबंदी शुरू कर दी है। शुरुआती पूछताछ में जब उनसे पूछा गया कि- "अगर आपकी कोई गलती नहीं थी, तो आपने एफआईआर दर्ज होने से पहले ही इतनी जल्दबाजी में अग्रिम जमानत की अर्जी क्यों लगाई? और बेटे समर्थ को फरार होने के लिए क्यों कहा? इस सवाल पर कानून की जानकार गिरिबाला सिंह पहले तो पूरी तरह खामोश रहीं। हालांकि, बाद में उन्होंने इसे अपनी बड़ी रणनीतिक भूल स्वीकार करते हुए कहा कि "उन्हें इस बात का रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था कि इस कदम से उन पर ही संदेह और ज्यादा मजबूत हो जाएगा।" भोपाल कोर्ट में दोनों पक्षों की ओर से कुल तीन नए आवेदन दाखिल किए गए हैं, जिसने इस मिस्ट्री को और उलझा दिया है। 1. त्विषा के वकील (अंकुर पांडे) का आवेदन: उन्होंने अदालत से मांग की है कि 12 से 20 मई के बीच पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए। इसके साथ ही एम्स (AIIMS) में पोस्टमार्टम के समय के सीसीटीवी फुटेज को भी सीबीआई अपनी कस्टडी में लेकर सुरक्षित करे। 2. गिरिबाला सिंह की ओर से दो आवेदन: पूर्व जज के वकील ने त्विषा के परिजनों के कॉल रिकॉर्ड निकालने और त्विषा के बैंक अकाउंट का स्टेटमेंट सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका दावा है कि त्विषा को करीब 7 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। परिजनों का बड़ा आरोप: त्विषा के परिवार का दावा है कि मौत की वारदात के ठीक बाद पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने शहर के 46 प्रभावशाली लोगों को लगातार फोन किए थे। यही वजह है कि उनके कॉल रिकॉर्ड्स को खंगालना बेहद जरूरी है। सीबीआई ने इन तीनों आवेदनों पर अपना पक्ष रखने के लिए कोर्ट से समय मांगा है। केस डायरी में साइन कराने पहुंचे एसीपी; डमी पुतले से होगा टेस्ट शनिवार दोपहर करीब 1 बजे सीबीआई के अधिकारी, एफआईआर में फरियादी बनाए गए एसीपी रजनीश कश्यप के साथ भोपाल कोर्ट पहुंचे। केस डायरी में कई महत्वपूर्ण जगहों पर उनके हस्ताक्षर बाकी थे, जिन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत पूरा कराया गया। इसके तुरंत बाद, सीबीआई की टीम ट्विशा के हुबहू वजन और ऊंचाई का एक डमी पुतला तैयार कर घटनास्थल पर पूरा क्राइम सीन री-क्रिएट करने की तैयारी में जुट गई है। गिरिबाला से पूछे जाएंगे 50 सवाल; सीबीआई की 'चेकलिस्ट' तैयार सीबीआई ने पूर्व जज से पूछताछ के लिए 50 से ज्यादा तीखे सवालों की एक विस्तृत लिस्ट तैयार की है, जिसमें शामिल हैं ऐसे कुछ अहम बिंदु: एम्स पहुंचने के बाद भी स्थानीय पुलिस को तुरंत सूचना क्यों नहीं दी गई? वारदात के बाद बेटे समर्थ को अचानक फरार होने के लिए क्यों कहा गया? घर में सीसीटीवी लगाने वाले वेंडर को फुटेज डिलीट करने या छेड़छाड़ के लिए कॉल क्यों किए गए? ब्यूटी पार्लर से सीसीटीवी फुटेज निकलवाने के पीछे क्या मकसद था? पोस्टमार्टम रिपोर्ट में त्विषा के शरीर पर मिले चोट के निशान कैसे आए? त्विषा की प्रेग्नेंसी (गर्भावस्था) को लेकर दोनों पक्षों के बीच क्या विवाद चल रहा था? क्या आप प्रभावशाली लोगों को फोन कर दबाव बना रही थीं? क्या आप दबाव बनाकर त्विषा के बिजनेस शेयर अपने नाम कराना चाहती थीं?

मिशन वात्सल्य की चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 बनी बच्चों की मजबूत ढाल, संकट में मिल रही तुरंत मदद

मिशन वात्सल्य की चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 बनी संकटग्रस्त बच्चों का सशक्त सुरक्षा कवच 24×7 मुस्तैदी: वित्तीय वर्ष 2025-26 में 30 हजार से अधिक बच्चों को मिला नया जीवन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लगभग ढाई साल के कार्यकाल में राज्य ने महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में संवेदनशीलता और गवर्नेंस के एक नये प्रतिमान स्थापित किये है। उनके नेतृत्व में 'चाइल्ड हेल्पलाइन-1098' प्रदेश के संकटग्रस्त, शोषित और बेसहारा बच्चों के लिए एक बेहद सशक्त और अभेद्य सुरक्षा कवच बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 'मिशन वात्सल्य' योजना में चाइल्ड हेल्पलाइन 24 घंटे कार्य कर रही है। यह हेल्पलाइन प्रदेश में हजारों बच्चों को हिंसा, बाल श्रम और मानव तस्करी के चंगुल से छुड़ाकर उनका पुनर्वास सुनिश्चित कर रही है। सरकार के इस प्रभावी कदम से न केवल संकट के समय बच्चों को आपातकालीन मदद मिल रही है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण भी मिल रहा है। इस हेल्पलाइन की व्यापकता और रिस्पॉन्स टाइम में अभूतपूर्व सुधार आया है, जिसका अंदाजा विभागीय आंकड़ों से साफ लगाया जा सकता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस हेल्पलाइन से रिकॉर्ड 30 हजार 810 संकटग्रस्त बच्चों को सहायता पहुंचाई गई। वहीं, वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी हेल्पलाइन की टीम पूरी मुस्तैदी से डटी हुई है, जहां महज़ 15 मई तक ही 4 हजार 376 बच्चों तक त्वरित मदद पहुंचाई जा चुकी है। अब तक 2 हजार 367 मामलों का पूरी तरह से निराकरण किया जा चुका है, जबकि शेष बचे मामलों में जिला स्तर पर फॉलो-अप कार्रवाई तेजी से जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की 'जीरो टॉलरेंस' नीति 'मिशन वात्सल्य' के अंतर्गत नए स्वरूप में संचालित इस हेल्पलाइन को और अधिक हाईटेक और चुस्त रिस्पॉन्स सिस्टम से लैस किया गया है। हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल्स को उनकी गंभीरता के आधार पर 2 हिस्सों में बांटा जाता है। कोई बच्चा किसी गंभीर या तत्काल खतरे में होता है, तो मुख्यमंत्री डॉ. यादव की 'जीरो टॉलरेंस' नीति में उस आपातकालीन मामले को तुरंत 'रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम' यानी आरएसएस-112 को ट्रांसफर किया जाता है, जिससे गृह विभाग और पुलिस की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच सके। गैर-आपातकालीन मामलों को संबंधित जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) को प्रेषित किया जाता है। इस हेल्पलाइन से प्रदेश के बच्चों को केवल रेस्क्यू ही नहीं किया जा रहा, बल्कि उन्हें समुचित सुरक्षा दी जा रही है। इसमें बच्चों को हिंसा और शोषण से बचाना, उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देना, मानसिक एवं सामाजिक परामर्श उपलब्ध कराना, बाल श्रम से मुक्ति और सबसे महत्वपूर्ण—लापता बच्चों का उनके परिवारों से पुनर्मिलन कराना शामिल है। बेघर हुए या मानव तस्करी के शिकार बच्चों के लिए यह हेल्पलाइन एक नई जिंदगी की शुरुआत साबित हो रही है। इन शहरों में दिखा सबसे ज्यादा असर प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और सतना जैसे बड़े जिलों में हेल्पलाइन का नेटवर्क सबसे ज्यादा सक्रिय रहा है और यहां बड़ी संख्या में बच्चों को रेस्क्यू किया गया है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि हमारा उद्देश्य केवल आपातकालीन सहायता देना नहीं, बल्कि हर बच्चे के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है। विभाग ने मध्यप्रदेश के सभी जागरूक नागरिकों, प्रबुद्ध वर्ग और ग्रामीणों से अपील की है कि वे सूबे के बच्चों के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं। प्रदेश के किसी भी कोने में यदि कोई बच्चा संकट में, बाल विवाह का शिकार, बाल श्रम करता हुआ या किसी भी प्रकार के शोषण से पीड़ित दिखाई दे, तो मूकदर्शक न बनें। राज्य सरकार की 'चाइल्ड हेल्पलाइन-1098' पर तुरंत इसकी सूचना दें, ताकि समय रहते मध्यप्रदेश के हर मासूम का भविष्य सुरक्षित और खुशहाल बनाया जा सके।  

सुशासन तिहार में शामिल होंगे CM साय, दुर्ग और बेमेतरा में करेंगे जनसमस्याओं का समाधान

रायपुर. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रविवार काे दुर्ग और बेमेतरा जिले के महत्वपूर्ण दौरे पर रहेंगे। वे सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री निवास में मन की बात कार्यक्रम का श्रवण करेंगे। इसके बाद दोपहर 12:30 बजे दुर्ग पहुंचकर सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री यहां आम नागरिकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं के निराकरण की दिशा में पहल करेंगे। साथ ही करोड़ों रुपये के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन कर क्षेत्र को नई विकास सौगात देंगे। दोपहर 3 बजे वे सुशासन तिहार के तहत अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रगति का जायजा भी लेंगे। शाम 6 बजे मुख्यमंत्री बेमेतरा जिला पहुंचेंगे, जहां मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के कार्यक्रम में शामिल होकर नवदंपतियों को आशीर्वाद देंगे। इसके साथ ही विभिन्न विकास परियोजनाओं का भूमिपूजन और लोकार्पण कर जिले के विकास को नई गति प्रदान करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री रात 9 बजे रायपुर लौटेंगे।

DAP खाद की 68 बोरियां चोरी, सुराग तलाशने के लिए डॉग स्क्वाड की ली गई मदद

बालोद. मानसून अभी पहुंचा नहीं है, लेकिन किसान अपनी तैयारी में जुट गए हैं. ऐसे में खेतों को तैयार करने के लिए जरूरी खाद की किल्लत को देखते हुए चोर गोदाम से खाद की बोरियां चोरी करने लगे हैं. बालोद जिला स्थित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कुसुमकसा के ग्राम चिपरा के खाद बीज गोदाम से चोरों ने 68 बोरी नवरत्ना कम्पनी का डीएपी चोरी करके ले गए. चोरी की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुँची डौंडीलोहारा पुलिस जांच में जुटी गई है. घटना स्थल पर डॉग स्क्वायड की टीम की मदद से चोरों को खोजने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन अब तक पुलिस को कोई सुराग हाथ नही लग पाए है. गौरतलब है कि इस खाद गोदाम से 15 मई 2024 में भी 35 बोरी डीएपी, 12 बोरी पोटाश, 7 बोरी यूरिया, 8 बोरी सुपरफास्फेट की चोरी हुई थी, लेकिन उस मामले में आज तक पुलिस चोरों को पकड़ नहीं पाई है. 

युवाओं के भविष्य को संवार रहा ग्लोबल स्किल पार्क, साकार हो रहा CM डॉ. यादव का सपना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन को साकार कर रहा ग्लोबल स्किल पार्क कौशल प्रशिक्षण से अंतर्राष्ट्रीय रोजगार तक पहुंच रहे मध्यप्रदेश के युवा तीन प्रशिक्षणार्थियों को मिला हंगरी जॉब भोपाल संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क कौशल विकास की उस नई कार्य संस्कृति का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जहां प्रशिक्षण केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को वैश्विक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में विकसित हो रहा कौशल तंत्र अब युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार अवसरों से भी जोड़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश में कौशल विकास को औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार से जोड़ते हुए युवाओं के लिए नए अवसर निर्मित किए जा रहे हैं। इसी दिशा में कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल के मार्गदर्शन में प्रदेश में कौशल आधारित प्रशिक्षण व्यवस्थाओं को अधिक उद्योगोन्मुख और रोजगारपरक बनाया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। इसी क्रम में संस्थान के बैच-9 के तीन विद्यार्थियों का चयन हंगरी में रोजगार के लिए हुआ है। चयनित विद्यार्थी हंगरी पहुंचकर अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन प्रारंभ कर चुके हैं। यह उपलब्धि प्रदेश में विकसित हो रहे आधुनिक कौशल प्रशिक्षण मॉडल और उद्योगोन्मुख शिक्षा व्यवस्था को रेखांकित करती है। हंगरी में रोजगार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में एडवांस्ड मैकेनिकल टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम के विद्यार्थी लकी साहू तथा एडवांस्ड मैकेनिकल एंड इलेक्ट्रिकल सर्विसेज पाठ्यक्रम के विद्यार्थी रौशन कुमार एवं मयंक जांगिड़ शामिल हैं। सिवनी, चंपारण और दौसा जैसे क्षेत्रों से आने वाले इन विद्यार्थियों ने यह सिद्ध किया है कि अवसर और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिलने पर युवा वैश्विक स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना सकते हैं। एसएसआरजीएसपी में विद्यार्थियों को अत्याधुनिक मशीनों, सिम्युलेशन आधारित प्रशिक्षण, व्यवहारिक अभ्यास और उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किए गए पाठ्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता है। प्रशिक्षण प्रक्रिया में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ कार्यस्थल अनुशासन, व्यावसायिक व्यवहार, सुरक्षा मानकों और अंतरराष्ट्रीय कार्य संस्कृति की समझ पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। यही कारण है कि संस्थान से प्रशिक्षित युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की अपेक्षाओं पर खरे उतर रहे हैं। कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) टेटवाल ने चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि हंगरी में विद्यार्थियों का चयन प्रदेश के कौशल विकास मॉडल की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार युवाओं को केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य के साथ कार्य कर रही है। आधुनिक कौशल, व्यवहारिक प्रशिक्षण और उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार मानव संसाधन ही विकसित मध्यप्रदेश की आधारशिला बनेंगे। इन विद्यार्थियों की सफलता उस व्यापक परिवर्तन का संकेत है जिसमें मध्यप्रदेश के युवा अब स्थानीय सीमाओं से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। आने वाले समय में एसएसआरजीएसपी प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय रोजगार अवसरों से जोड़ते हुए कौशल विकास के क्षेत्र में नई उपलब्धियां स्थापित करेगा। हंगरी में इन तीनों विद्यार्थियों का चयन वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित औद्योगिक समूह SRF Limited में हुआ है। SRF विशेष रसायन, फ्लोरोकेमिकल्स, पैकेजिंग फिल्म्स और टेक्निकल टेक्सटाइल्स के क्षेत्र में कार्यरत भारत की अग्रणी विनिर्माण कंपनियों में से एक है, जिसकी उत्पादन इकाइयाँ भारत के साथ-साथ यूरोप के हंगरी सहित कई देशों में संचालित हैं। कंपनी अपनी उन्नत तकनीक, वैश्विक गुणवत्ता मानकों और नवाचार आधारित कार्य संस्कृति के लिए जानी जाती है। ऐसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कंपनी में रोजगार प्राप्त करना विद्यार्थियों के कौशल, प्रशिक्षण और पेशेवर दक्षता का प्रमाण है तथा यह दर्शाता है कि एसएसआरजीएसपी से प्रशिक्षित युवा वैश्विक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को सफलतापूर्वक स्थापित कर रहे हैं।  

बाबा बागेश्वर ने खोली ‘पर्ची’, कहा- PM मोदी से पहले ही बंद कर दिया था ये काम; नया चुनाव मॉडल जरूरी

छतरपुर बाबा बागेश्‍वर धीरेंद्र कृष्‍ण शास्‍त्री ने कहा कि भारत को अब “एक देश, एक चुनाव” की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ना चाहिए. उनके अनुसार देश में बार-बार होने वाले चुनाव न केवल हजारों करोड़ रुपये खर्च करवा रहे हैं, बल्कि प्रशासनिक मशीनरी और सुरक्षा बलों को भी लंबे समय तक चुनावी ड्यूटी में उलझाए रखते हैं. उनका ऐसा बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है. बद्रीनाथ धाम में कठिन साधना पूरी करने के बाद अपने अनुयायियों को संबोधित करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस बार किसी धार्मिक विषय के बजाय देश की चुनावी व्यवस्था पर खुलकर अपनी राय रखी।  धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में “वन नेशन, वन इलेक्शन” को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस जारी है. बागेश्वर महाराज ने कहा कि यदि पंच, सरपंच, पार्षद, मेयर, विधायक और सांसद तक के चुनाव एक साथ कराए जाएं तो देश का समय, धन और संसाधन तीनों बच सकते हैं. उन्होंने इसे केवल राजनीतिक सुधार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से जुड़ा विषय बताया. उनके इस बयान ने समर्थकों के बीच उत्साह और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।  चुनावी खर्च पर उठाया बड़ा सवाल धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि देश में लगभग हर साल किसी न किसी स्तर पर चुनाव होते रहते हैं. लोकसभा, विधानसभा, नगर निकाय और पंचायत चुनावों की वजह से लगातार सरकारी संसाधन खर्च होते हैं. उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव कराने में हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जिनका उपयोग विकास कार्यों में किया जा सकता है।  पंच से सांसद तक एक साथ चुनाव की वकालत बागेश्वर महाराज का कहना है कि यदि सभी चुनाव एक साथ कराए जाएं तो उम्मीदवारों को भी राहत मिलेगी. एक ही चुनावी अभियान में गांव के पंच से लेकर सांसद तक के उम्मीदवार जनता के बीच जा सकेंगे. इससे चुनावी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और कम खर्चीली बन सकती है।  प्रशासन और सुरक्षा बलों पर भी पड़ता है दबाव उन्होंने कहा कि हर चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अमला चुनावी ड्यूटी में लग जाता है. इससे कई बार नियमित प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं. यदि चुनाव एक साथ हों तो सुरक्षा बलों और सरकारी मशीनरी पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव भी कम होगा।  PM मोदी के कहने से पहले ही बंद कर दिया था यह काम बागेश्वर बाबा के नाम से प्रसिद्ध धीरेंद्र शास्त्री ने सीना ठोककर दावा किया है कि, यदि देश में डीजल पेट्रोल बचाने में सबसे ज्यादा योगदान किसी का है तो वह मैं हूं। उन्होंने कहा कि, यदि कोई कहे तो मैं लिखकर देने को तैयार हूं कि एक महीने में एक लीटर डीजल भी नहीं फूंका। बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री अपने तर्क और बयानों के लिए भी पहचाने जाते हैं। वे अल्हड़ और देसी और चुटीले अंदाज में बोलने के लिए फेमस है। उनका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे दावा कर रहे हैं कि देश में यदि डीजल-पेट्रोल बचाने की बात आएगी तो सीना ठोक के कह सकता हूं कि सबसे ज्यादा मेरा योगदान हैं। वे पीएम मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का जिक्र करते हुए बात कर रहे थे। सीना ठोककर बोले, मैं लिखकर देने को तैयार हूं धीरेंद्र शास्त्री कथा के दौरान यह बात पंडाल में मौजूद लोगों से कर रहे थे। उन्होंने पीएम मोदी की डीजल-पेट्रोल बचाने की अपील का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कोई यदि कहे तो मैं लिखकर देने को तैयार हूं, एक महीने में मैंने एक लीटर भी डीजल नहीं फूंका। बद्रीनाथ में गुप्ता साधना के बाद कथा कर रहे आपको बता दें कि धीरेंद्र शास्त्री बीते 25 दिन से उत्तराखंड देवभूमि में साधना कर रहे हैं। भगवान बद्रीनाथ के धाम में नारायण पर्वत की गुप्ता में एकातिंक साधना में लीन थे। एक छोटी सी गुफा में बर्फीले पहाड़ों के बीच वे साधना में ली थे। दो दिन पहले ही वे साधना पूरी कर नीचे आए और फिर नारायण पर्वत की 13 किलोमीटर की दुर्गम परिक्रमा भी की है।  आर्थिक मजबूती से जोड़ा मुद्दा अपने संबोधन में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने देश की आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि दुनिया में डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और ऐसे समय में भारत को संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग करना चाहिए. उनके अनुसार चुनावी खर्च में कमी लाकर विकास और बुनियादी ढांचे पर ज्यादा निवेश किया जा सकता है।  क्यों चर्चा में है ‘एक देश, एक चुनाव’? देश में लंबे समय से यह बहस चल रही है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं या नहीं. समर्थकों का तर्क है कि इससे चुनावी खर्च कम होगा और प्रशासनिक संसाधनों की बचत होगी. वहीं आलोचकों का मानना है कि इससे संघीय ढांचे और क्षेत्रीय मुद्दों पर असर पड़ सकता है. बागेश्वर महाराज का बयान इस बहस को धार्मिक और सामाजिक मंच से भी नई ऊर्जा देता दिखाई दे रहा है। 

स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग पार करना पड़ेगा भारी, अमृतसर में AI कैमरे रखेंगे नजर

अमृतसर अमृतसर में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के लिए अब सावधान रहने का समय आ गया है। अमृतसर ट्रैफिक पुलिस ने आज से ऑनलाइन चालान प्रणाली को लागू कर दिया है। इसके तहत ट्रैफिक सिग्नलों और प्रमुख चौकों पर लगे लगभग 1300 सीसीटीवी कैमरों की मदद से नियम तोड़ने वालों पर नजर रखी जाएगी। आज से उल्लंघन होने पर स्वचालित रूप से ऑनलाइन चालान जारी किया जाएगा। इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (यातायात) अमनदीप कौर ने बताया कि इस व्यवस्था को पहले परीक्षण आधार पर शुरू किया गया था औ अब इसे पूरी तरह लागू कर दिया गया है। उन्होंने वाहन चालकों से अपील की कि वे ट्रैफिक सिग्नलों पर निर्धारित स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग के पीछे ही अपने वाहन रोकें। यातायात पुलिस के अनुसार यदि कोई वाहन चालक स्टॉप लाइन पार करता है या जेब्रा क्रॉसिंग पर वाहन खड़ा करता है तो उसका ऑनलाइन चालान स्वतः दर्ज हो जाएगा। 1300 हाईटैक कैमरे रखेंगे नजर शहर में स्थापित तकरीबन 1300 कैमरे आधुनिक कैमरे दूर से ही वाहन नंबर पढ़ने और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की पहचान करने में सक्षम हैं। इससे पूरी चालान प्रक्रिया बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के संचालित की जा सकेगी। यातायात पुलिस का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और वाहन चालकों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। साथ ही चौकों पर लगने वाले जाम और अव्यवस्था को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। जानें किन 7 चौको पर शुरू हुआ ई-चालान अधिकारियों के अनुसार शुरुआती चरण में यह प्रणाली शहर के कुछ प्रमुख चौकों पर लागू की जाएगी। इनमें नोवेल्टी चौक, क्रिस्टल चौक, न्यू रियाल्टो चौक, रेलवे स्टेशन के आसपास का क्षेत्र, भंडारी पुल और क्वींस रोड क्षेत्र शामिल हैं। इन स्थानों पर ट्रैफिक दबाव अधिक होने के कारण नियमों के उल्लंघन की घटनाएं भी ज्यादा सामने आती हैं। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कदम लोगों को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षित और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। ऐसे में वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे ट्रैफिक संकेतों का पालन करें और स्टॉप लाइन तथा जेब्रा क्रॉसिंग का सम्मान करें, ताकि अनावश्यक चालान से बचा जा सके।

‘विवाहित बेटी परिवार का हिस्सा है तो तलाकशुदा क्यों नहीं?’ हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह साफ कर दिया है कि तलाकशुदा बेटी भी पिता के परिवार का हिस्सा होती है और संपत्ति में भी उसका अधिकार है। हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ होम गार्ड्स के डायरेक्टर जनरल के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें एक रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट की तलाकशुदा बेटी को फैमिली पेंशन के लिए उनकी नॉमिनी मानने से इनकार कर दिया गया था। हाईकोर्ट कहा है कि सरकारी कर्मचारी की तलाकशुदा बेटी को परिवार के सदस्य का दर्जा देने से इनकार करना, समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। जस्टिस विशाल धागत ने कहा कि जब एक शादीशुदा बेटी परिवार का सदस्य हो सकती है, तो एक तलाकशुदा बेटी क्यों नहीं हो सकती? यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के मामले पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता मृतक सरकारी कर्मचारी पर आश्रित थी तो फैमिली पेंशन के उसके आवेदन को मंजूर किया जाए। बेंच ने होमगार्ड्स डीजी से 90 दिन के अंदर इस संबंध में एक आदेश पारित करने को कहा है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, होम गार्ड्स डीजी ने याचिकाकर्ता ज्योति श्रीवास्तव को उनके पिता शंकरलाल श्रीवास्तव की फैमिली पेंशन के लिए नॉमिनी मानने से इस आधार पर इनकार कर दिया था कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976 के मुताबिक तलाकशुदा बेटी कर्मचारी के परिवार का हिस्सा नहीं होती है। याचिकाकर्ता के पिता शंकरलाल श्रीवास्तव का 2017 में निधन हो गया था। इसके बाद उनकी तलाकशुदा बेटी ज्योति ने फैमिली पेंशन पाने के लिए आवेदन किया था। होम गार्ड्स डीजी ने 16 दिसंबर 2021 को ज्योति के आवेदन को खारिज कर दिया था। डीजी के आदेश में कहा गया था कि पेंशन नियमों के अनुसार, एक तलाकशुदा बेटी कर्मचारी पर आश्रित नहीं होती है। इसके बाद ज्योति ने होमगार्ड्स डीजी के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बेटियों को समान व्यवहार मिलना चाहिए जस्टिस धागत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा, “पेंशन नियम 1976 के प्रावधानों को देखने पर यह पाया गया कि तलाकशुदा बेटी को परिवार की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, विवाहित बेटियों को 1976 के पेंशन नियमों के नियम 44(5) के तहत परिवार की परिभाषा में शामिल किया गया है।” बेंच ने कहा कि अविवाहित बेटी, विवाहित बेटी या तलाकशुदा बेटी के बीच कोई अंतर नहीं है। ऐसा करना अनुच्छेद 14 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। बेंच ने कहा कि यदि एक विवाहित बेटी को परिवार के सदस्य के रूप में शामिल किया जाता है, तो तलाकशुदा बेटी को परिवार की परिभाषा से बाहर रखने का कोई कारण नहीं है। जज ने कहा कि एक तलाकशुदा बेटी के साथ भी 1976 के नियमों के नियम 44(5) में बताई गई बेटियों के समान ही व्यवहार किया जाना चाहिए।

ट्रंप परिवार का राजस्थान दौरा, चार्टर प्लेन से जैसलमेर पहुंचेंगी बेटी और दामाद

जैसलमेर  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की छोटी बेटी टिफनी ट्रंप अपने पति माइकल बोलस के साथ आज रविवार को राजस्थान के जैसलमेर पहुंचेंगी। यह शाही जोड़ा चार्टर प्लेन से सीधे जैसलमेर पहुंचेगा। उनके इस हाई-प्रोफाइल और निजी दौरे को देखते हुए पर्यटन नगरी में सुरक्षा का अलर्ट जारी।  अपनी इस यात्रा के दौरान टिफनी ट्रंप जैसलमेर की ऐतिहासिक धरोहरों का दीदार करेंगी। वे यहां के विश्व प्रसिद्ध सोनार किला (जैसलमेर फोर्ट), पटवों की हवेली और खूबसूरत गड़ीसर लेक देखने जाएंगी। सोमवार को उनका यहां से रवाना होने का कार्यक्रम है। अक्षरधाम और ताजमहल की खूबसूरती देखी भारत घूमने आईं टिफनी ट्रंप और उनके पति माइकल बोलस ने अपनी यात्रा की शुरुआत देश की राजधानी दिल्ली से की। शुक्रवार को उन्होंने दिल्ली के प्रसिद्ध स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर का दौरा किया। टिफनी ने मंदिर की भव्यता और अद्भुत शिल्पकला की सोशल मीडिया (X) पर तस्वीरें पोस्ट करते हुए जमकर तारीफ की। इसके बाद शनिवार को वह आगरा पहुंचीं, जहां उन्होंने दुनिया के सात अजूबों में शामिल 'ताजमहल' का दीदार किया। बॉर्डर का जिला होने से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, रूट डायवर्जन की तैयारी अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी के दौरे को लेकर जैसलमेर जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटा जिला होने और हाई-प्रोफाइल वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों और उनके रुकने वाले संभावित स्थानों पर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। खुफिया एजेंसियां भी सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं। पर्यटन कारोबारियों में भारी उत्साह अमेरिकी राष्ट्रपति के परिवार की इस यात्रा से जैसलमेर के पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों, होटल व्यवसायियों और गाइडों में जबरदस्त उत्साह का माहौल है। कारोबारियों का मानना है कि टिफनी ट्रंप के इस दौरे से वैश्विक स्तर पर जैसलमेर के पर्यटन को एक नई और बड़ी पहचान मिलेगी। इस हाई-प्रोफाइल विजिट के बाद आने वाले दिनों में यहां विदेशी पर्यटकों की संख्या में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है। स्वर्ण नगरी अपने पारंपरिक अंदाज 'पधारो म्हारे देस' के साथ इस खास विदेशी मेहमान के भव्य स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप के एक और दामाद आ चुके हैं जैसलमेर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर नवंबर 2018 में जैसलमेर में एक हाई-प्रोफाइल शादी में शामिल होने आए थे। वह डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इवांका ट्रम्प के पति हैं। जारेड कुशनर (डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद और तत्कालीन वरिष्ठ व्हाइट हाउस सलाहकार) 22 से 25 नवंबर, 2018 को जैसलमेर रहे थे। वे सम रोड स्थित होटल सूर्यगढ़ में उद्योगपति संजय हिंदुजा की पत्नी अनु हिंदुजा के भाई नितिन संपाल की हाई-प्रोफाइल शादी में शामिल होने जैसलमेर आए थे। जारेड कुशनर की सुरक्षा के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी यूएस सीक्रेट सर्विस (US Secret Service) के एजेंट्स कई दिन पहले ही जैसलमेर पहुंच गए थे। स्थानीय राजस्थान पुलिस और सीक्रेट सर्विस ने मिलकर होटल सूर्यगढ़ को एक किले में तब्दील कर दिया था।

MP सरकार में बदलाव की आहट, किन मंत्रियों पर गिरेगी गाज और कौन बनेगा नया चेहरा?

भोपाल  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Government) की तस्वीर बदलने जा रही है। जून के अंत तक कैबिनेट में बड़ा फेरबदल (Major Cabinet Reshuffle) होना लगभग तय है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कम से कम 5-6 मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है तो 7-8 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 2023 में मोहन यादव के नेतृत्व में बनी सरकार के कैबिनेट में पहली बार बदलाव होने जा रहा है। कैबिनेट में इस समय मोहन यादव समेत कुल 31 सदस्य हैं। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) कई बार दिल्ली पहुंचे हैं और शीर्ष नेतृत्व के साथ मुलाकातों के दौरान कैबिनेट में फेरबदल की रूपरेखा पर सहमति बन चुकी है। 19 मई को मोहन यादव की मुलाकात जगदलपुर में गृहमंत्री अमित शाह के साथ हुई थी। इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय भी बुलाए गए थे। मुख्यमंत्री की दिल्ली में भी शाह से मुलाकात हुई। वह पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से भी मिले। सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में कैबिनेट के नए स्वरूप पर विस्तार से बातचीत हुई है। बताया जा रहा है कि 20 से 30 जून के बीच कभी भी पुराने मंत्रियों से इस्तीफा लिया जा सकता है और इसके तुरंत बाद शपथग्रहण होगा। कैलाश विजयवर्गीय का क्या होगा? कैबिनेट फेरबदल में जिन मंत्रियों पर सबसे ज्यादा नजरे हैं उनमें कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल हैं। कैबिनेट में सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में शामिल कैलाश विजयवर्गीय को लेकर अटकलें हैं कि उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है। वहीं प्रह्लाद सिंह को केंद्रीय संगठन में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। बताया जाता है कि वरिष्ठता की वजह से ये मंत्री कैबिनेट में सहज नहीं हैं। भाजपा के पूर्व महासचिव रह चुके कैलाश विजयवर्गीय को जब विधनसभा चुनाव में उतारा गया था तो उन्हें संभावित मुख्यमंत्रियों की सूची में भी प्रमुखता से गिना जा रहा था, लेकिन बाजी मोहन यादव की लगी जो कहीं रेस में नहीं दिख रहे थे। और किन मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी मोहन यादव कैबिनेट से जिन मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, उनमें सबसे प्रबल नाम विजय शाह का है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले मंत्री को लेकर पार्टी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार तीखी टिप्पणियां की हैं। पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक, पंचायती राज्य मंत्री राधा सिंह, शहरी प्रबंधन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी, वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार शामिल हो सकते हैं। नए चेहरों को मिल सकता है मौका कैबिनेट विस्तार में कई नए विधायकों और नेताओं को अवसर मिलने की चर्चा है. पार्टी क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नए नामों का चयन कर सकती है. सागर और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से कुछ नेताओं के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं. इसके अलावा महिला, युवा और आदिवासी वर्ग को बेहतर प्रतिनिधित्व देने पर भी भाजपा विचार कर सकती है. माना जा रहा है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाने के लिए नए चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।  प्रदर्शन के आधार पर होगा फैसला सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की है. इसी मूल्यांकन के आधार पर मंत्रिमंडल में बदलाव का फैसला लिया जा सकता है. पार्टी का उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले सरकार की कार्यक्षमता और जनसंपर्क को और मजबूत बनाना है. ऐसे में जून का अंतिम सप्ताह मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए काफी अहम साबित हो सकता है, क्योंकि कैबिनेट फेरबदल से कई नए राजनीतिक संदेश और समीकरण सामने आने की संभावना है।  किन्हें मंत्री बनाए जाने की चर्चा सागर जिले से आने वाले विधायकों शैलेंद्र जैन या प्रदीप लारिया में से किसी एक को पद मिलना लगभग तय माना जा रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी माने जाने वाले प्रमुराम चौधरी को भी मंत्री बनाया जा सकता है। पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा कुछ नए और युवा चेहरों को भी मौका दिया जा सकता है। महिला और आदिवासी समुदाय को भी साधने की कोशिश होगी। सूत्रों का यह भी कहना है कि पुराने कुछ मंत्रियों को हटाकर जहां नए चेहरों को जगह दी जाएगी, वहीं विभागों में भी बड़े पैमाने पर फेरबदल होगा। कुछ मंत्रियों से मौजूदा विभाग लेकर नए मंत्रालय दिए जाएंगे। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों के कामकाज की गहन समीक्षा की है और इसी आधार पर बड़े और कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।