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रोहित शर्मा से आगे निकलीं स्मृति मंधाना, अब विराट कोहली के रिकॉर्ड पर नजर

नई दिल्ली हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने महिला एशिया कप 2026 अपने नाम किया। भारत ने फाइनल में श्रीलंका को 72 रनों से धूल चटाई। हरमन ब्रिगेड ने दुबई के मैदान पर 183/5 का स्कोर खड़ा किया। स्टार सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा ने अर्धशतक जमाया। मंधाना ने 39 गेंदों में पांच चौकों और तीन छक्कों की मदद से 59 रन बनाए। शेफाली ने 39 गेंदों में 68 रन जुटाए, जिसमें 9 चौके और दो सिक्स हैं। श्रीलंकाई टीम जवाब में 111 रनों पर ढेर हो गई और भारत ने रिकॉर्ड आठवीं बार ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। यह टूर्नामेंट का दसवां संस्करण था। रोहित शर्मा से आगे निकलीं स्मृति मंधाना 30 वर्षीय स्मृति मंधाना टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा 50 प्लस स्कोर बनाने वाले भारतीयों की लिस्ट में दूसरे पायदान पर पहुंच गई हैं। वह दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा से आगे निकली हैं। मंधाना ने अब तक 176 T20I मैचों में 4751 रन बनाए हैं, जिसमें दो शतकीय और 38 अर्धशतकीय पारियां हैं। उन्होंने महिला एशिया कप में एक शतक लगाया। 'हिटमैन' के नाम से मशहूर रोहित ने सबसे छोटे फॉर्मेट में भारत के लिए 159 मुकाबले खेले और 4231 रन बटोरे। उन्होंने पांच शतक और 32 अर्धशतक ठोके। मंधाना ने खतरे में डाला कोहली का रिकॉर्ड मंधाना ने विराट कोहली का रिकॉर्ड खतरे में डाला दिया है। सुपरस्टार बल्लेबाज कोहली ने T20I में भारत की ओर से सबसे ज्यादा पचास प्लस पारियां खेलने का कारनामा अंजाम दिया है। उन्होंने 125 मैचों में 4188 रन जोड़े, जिसमें एक शतक और 38 अर्धशतक शामिल हैं। मंधाना आने वाले समय में दो पचास प्लस स्कोर बनाते ही कोहली का रिकॉर्ड ध्वस्त कर देंगे। कोहली और रोहित टी20 इंटरेशनल के अलावा टेस्ट से भी संन्यास ले चुके हैं। दोनों भारत के लिए सिर्फ वनडे क्रिकेट खेलते हैं। T20I में सबसे ज्यादा 50+ स्कोर बनाने वाले भारतीय 39 – विराट कोहली 38 – स्मृति मंधाना 37 – रोहित शर्मा 29 – सूर्यकुमार यादव 24 – केएल राहुल 21 – शेफाली वर्मा 19 – हरमनप्रीत कौर गौरतलब है कि स्मृति मंधाना और शेफाली की शानदार बल्लेबाजी के बाद श्री चरणी ने की अगुआई में भारतीय गेंदबाजों के बेहतरीन प्रदर्शन किया। स्पिनर चरणी ने 20 रन देकर चार विकेट चटकाए। दीप्ति शर्मा ने तीन जबकि क्रांति गौड़ और शेफाली वर्मा ने एक-एक शिकार किया। फाइनल में शेफाली को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। इस धमाकेदार जीत के साथ भारत ने पिछले संस्करण के फाइनल में श्रीलंका से मिली हार का बदला लिया।  

वायरल रील्स का असर: 3500 किलो मेहंदी लेने जयपुर पहुंचे श्रद्धालु

जयपुर मेहंदी से जुड़ी शादी की बड़ी आस… यही आस्था रविवार को मोतीडूंगरी गणेशजी मंदिर तक देशभर से श्रद्धालुओं को खींच लाई। गणेश चतुर्थी पर्व से पहले रविवार को सिंजारा महोत्सव में गणेशजी को अर्पित मेहंदी लेने के लिए मंदिर के बाहर लंबी कतारें लगीं और भीड़ गणेश चतुर्थी के लक्खी मेले सी जैसी नजर आई। सोशल मीडिया पर वायरल रील ने इस बार मेहंदी उत्सव की उत्सुकता और बढ़ा दी। सोशल मीडिया पर रील्स से बढ़ी भीड़ सोशल मीडिया पर वायरल रीलों में मेहंदी लगाने से कुंवारे युवक-युवतियों का विवाह होने की मान्यता के दावे ने उत्सुकता और बढ़ा दी। दिल्ली, चंडीगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, फरीदाबाद, मध्यप्रदेश, पुणे, इंदौर, भोपाल, आगरा और उत्तर प्रदेश सहित कई जगहों से लोग एक दिन पहले ही जयपुर पहुंच गए। तेज धूप और उमस के बीच कतारों में लोग छह से सात घंटे मेहंदी के लिए खड़े रहे। सात बजे मंदिर प्रबंधन को मेहंदी खत्म होने की घोषणा करनी पड़ी। रात में पहुंचे युवा, मंदिर के बाहर सोए श्रद्धालुओं की भीड़ शनिवार रात से ही मंदिर के बाहर जुटने लगी थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई लोग रात में ही मंदिर के बाहर आकर सो गए। दिन चढ़ने के साथ भीड़ लगातार बढ़ती गई। जेएलएन मार्ग तक श्रद्धालुओं की कतारें नजर आईं। कई जगह धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। महाराष्ट्र से आई एक महिला तेज गर्मी से बेहोश हो गई। आगरा से आए दीपक ने कहा कि यहां की मेहंदी लगाने से शादी हो जाती है। यह रील देखकर जयपुर आया हूं। इंदौर से राधिका शर्मा अपने बेटे के लिए मेहंदी लेने आई हैं। इतनी भीड़ की उम्मीद नहीं थी। कई युवक अपने लिए तो माता-पिता बच्चों के लिए मेहंदी लेने पहुंचे। खेतड़ी से आए राधेश्याम और शैफाली ने बताया कि मैंने यहां की मेहंदी लेने वाले युवाओं की शादी होते भी देखी है, इसलिए लेने आया हूं। मंदिर के पास दुकान लगाने वाले रोशन शर्मा ने बताया कि उन्होंने 40 साल में ऐसी भीड़ नहीं देखी। 3500 किलो मेहंदी, प्रसाद के रूप में वितरण मंदिर के महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि दो शताब्दी पहले महज सवा किलो मेहंदी से शुरू हुआ उत्सव आज मेहंदी उत्सव के रूप में देशभर में ख्यात हो गया। शाम 7.30 बजे सिंजारा पूजन के बाद मेहंदी वितरित की जानी थी, लेकिन भीड़ को देखकर शाम पांच बजे से वितरित की गई। सिंजारा के लिए सोजत से करीब 3500 किलो मेहंदी मंगवाई गई थी। पहली बार मेहंदी में ही लाखों की संख्या में उमड़े श्रद्धालु गणेश चतुर्थी पर मोती डूंगरी गणेश मंदिर में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन इस बार पहली बार गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले मेहंदी के अवसर पर ही लाखों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। भीड़ को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल पहले से तैनात किया गया था। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल भी बुलाया गया। श्रद्धालु शांतिपूर्वक कतार में लगकर व्यवस्था बनाए रखते हुए गणेशजी के दर्शन कर रहे हैं।  

अब ट्रांसपोर्ट नगर में नहीं होगा परमानेंट DL का टेस्ट, मौंदा सेंटर में लगेगा ऑटोमेटेड ट्रैक

 लखनऊ  परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने वालों का सोमवार से वाहन चलाने का टेस्ट ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं टेस्टिंग सेंटर मौंदा में होगा। अब टेस्ट की व्यवस्था बदल जाएगी। आवेदकों का ट्रांसपोर्ट नगर व देवा रोड एआरटीओ कार्यालय में ट्रैक पर टेस्ट नहीं होगा। ज्ञात हो कि ट्रांसपोर्ट नगर कार्यालय में 2014 में 20 लाख रुपये की लागत से तैयार कराए गए टेस्ट ट्रैक पर अब रिनीवल यानि नवीनीकरण के लिए आने वाले आवेदकों का टेस्ट होगा। परिवहन विभाग ने राजधानी में ड्राइविंग टेस्ट की मैनुअल व्यवस्था खत्म कर दिया है। अब कंप्यूटराइज्ड और सेंसर आधारित सिस्टम से नए केंद्र में आटोमेटेड टेस्टिंग होगी। मौंदा केंद्र के ट्रैक पर लगे सेंसर वाहन की गतिविधि और चालक की गलतियों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा। साथ ही टेस्ट के परिणाम में मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश कम होगी। आज से ड्राइविंग टेस्ट शुरू राजधानी के पहले ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं टेस्टिंग सेंटर का उद्घाटन 30 जून को परिवहन राज्य मंत्री दयाशंकर सिंह ने किया था। अब 14 सितंबर से वहां स्थायी डीएल के लिए ड्राइविंग टेस्ट शुरू किया जा रहा है। शुरुआती योजना में प्रतिदिन 150 आवेदकों के टेस्ट की क्षमता थी, इसे बढ़ाकर 300 टेस्ट प्रतिदिन किया गया था। एआरटीओ प्रशासन प्रदीप कुमार सिंह ने बताया, पहले आवेदक एआरटीओ कार्यालय पहुंचकर दस्तावेज और बायोमीट्रिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद ट्रैक पर वाहन चलाकर टेस्ट देते थे। अब उन्हें नए आटोमेटेड ट्रैक पर टेस्ट देना होगा। बायोमीट्रिक व अभिलेखों की जांच की प्रक्रिया एआरटीओ कार्यालय में ही पूरी होगी। उल्लेखनीय है कि मौंदा स्थित नया केंद्र ट्रांसपोर्ट नगर से नादरगंज इंडस्ट्रियल एरिया होकर सेंटर 12 व कानपुर रोड किसान पथ से 20 किलोमीटर की दूरी पर है।  

चीन को हराकर भारत बना जूनियर एशिया चैंपियन, रांची की तीन बेटियों का शानदार प्रदर्शन

रांची भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने चीन के मोकी में आयोजित एएचएफ महिला जूनियर एशिया कप 2026 के फाइनल में मेजबान चीन को 1-0 से हराकर लगातार तीसरी बार खिताब अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ भारत ने आगामी जूनियर विश्व कप के लिए भी क्वालीफाई कर लिया। भारतीय टीम की इस उपलब्धि में रांची के सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस गर्ल्स, बरियातू रांची की तीन छात्राओं रौशनी आईंद, विनिमा धान और पार्वती टोपनो की अहम भूमिका रही। मिडफील्डर रौशनी आईंद ने पाकिस्तान के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो गोल दागे। भारत ने यह मुकाबला 19-0 से जीता था। वहीं मिडफील्डर विनिमा धान ने मलेशिया के खिलाफ 11-1 की जीत में एक गोल किया। पाकिस्तान के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में भी उन्होंने गोल कर टीम की जीत में योगदान दिया। डिफेंडर पार्वती टोपनो ने पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम की रक्षापंक्ति को मजबूती दी और कई मौकों पर विपक्षी टीम के हमलों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तीनों खिलाड़ी बरियातू स्थित विद्यालय के एस्ट्रोटर्फ मैदान पर नियमित अभ्यास करती रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली इस सफलता से विद्यालय परिवार में खुशी का माहौल है। विद्यालय की हॉकी कोच करुणा पूर्ति ने तीनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता प्रतिभा, अनुशासन, निरंतर अभ्यास और कठिन परिश्रम का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बरियातू के एस्ट्रोटर्फ मैदान से एशिया चैंपियन बनने तक का सफर विद्यालय की अन्य छात्राओं के लिए भी प्रेरणादायी है। विद्यालय परिवार ने उम्मीद जताई कि तीनों खिलाड़ी आगे भी भारतीय हॉकी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने में योगदान देंगी।

बर्फीली चोटियों से मौत के मुहाने तक, अमिता श्रीवास ने पूरा किया एवरेस्ट फतह का कठिन सफर

जांजगीर- चांपा की बेटी ने फतह किया माऊंट एवरेस्ट जांजगीर-चांपा दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई को छू लेना ही एवरेस्ट फतह नहीं माना जाता, बल्कि उस ऊंचाई को छूकर सकुशल लौटने वाले को ही वास्तविक एवरेस्ट विजेता कहा जाता है। यह कठिन परीक्षा हाल ही में छत्तीसगढ़ की बेटी अमिता श्रीवास ने भी पूरी की। अमिता के लिए यह सफर केवल बर्फीली चोटियों को पार करने का नहीं, बल्कि मौत को बेहद करीब से देखने का भी था।  एवरेस्ट फतह करने वाली अमिता श्रीवास की कहानी किसी संपन्न परिवार से नहीं, बल्कि जांजगीर-चांपा जिले के एक अत्यंत गरीब और विपरित परिस्थितियों से शुरू होती है। उनके पिता जैतराम श्रीवास चांपा के लोहारपारा में एक छोटी-सी सैलून चलाते हैं, उसी आय से उन्होंने पांच बेटियों और दो बेटों का पालन-पोषण हुआ। वर्ष 2008 में उन्होंने शासकीय लक्ष्मीबाई गर्ल्स स्कूल, चांपा से बारहवीं उत्तीर्ण की और इसके बाद बी.कॉम की पढ़ाई पूरी की। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, इसलिए वर्ष 2011 में वे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बन गईं। चांपा नगर पालिका के वार्ड 4 में छोटे से आंगनबाड़ी भवन में नन्हें मुन्ने बच्चों को संभालते हुए अमिता अक्सर अपने भविष्य के सपने बुनती थीं। उनकी नजर अक्सर कुछ दूर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी ताप विद्युत संयंत्र, मड़वा पर पड़ती थी। उन्हें कल्पना भी नहीं थी कि एक दिन यही विद्युत परियोजना उनके पर्वतारोहण के सपनों को नई उड़ान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी का यह इस ताप विद्युत केवल बिजली पैदा नहीं करता, बल्कि अपने कोरे में पल रही बेटी  अमिता श्रीवास के सपनों को भी नई ऊर्जा दे रहा है। किसी औद्योगिक परियोजना का लाभ स्थानीय लोगों के जीवन को कैसे नई दिशा दे सकता है, अमिता इसका सशक्त उदाहरण हैं। वैसे तो अमिता श्रीवास की पारिवारिक पृष्ठभूमि पर्वतारोही वाली नहीं रही है, परन्तु पहली बार उनकी सहेली क्षमा राजपूत के साथ माउंट आबू में उन्होंने पर्वतारोहण का अनुभव लिया और वहीं से ऊंचे पर्वतों को लांघने के बड़े सपने देखने लगी। सपने को मंजिल तक पहुंचाने के लिए उन्होंने वर्ष 2018 में पर्वतारोहण का बेसिक कोर्स किया। इसके बाद सिक्किम में 28 दिन के एडवांस पर्वतारोहण प्रशिक्षण में प्रवेश मिला। महज कुछ हजार रुपये का मानदेय पाने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के लिए प्रशिक्षण की फीस जुटाना आसान भी नहीं था। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और किसी तरह प्रशिक्षण पूरा किया। पर्वतारोहण के सफर में सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव तब आया जब उन्हें अफ्रीका के सबसे ऊंचे पर्वत किलिमंजारो अभियान का हिस्सा बनने का मौका मिला। इस अभियान में भाग लेने के लिए पैसे नहीं थे, इतनी बड़ी राशि जुटाना उनके लिये किसी पर्वत पर चढ़ने से कम कठिन नहीं था। उन्होंने कलेक्टर चांपा से किया, जिनके जरिये जनरेशन कंपनी ने पहली बार उनकी यात्रा के लिए फंड दिया। यह सहयोग अमिता के जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इस मौके को अमिता ने पूरी निष्ठा और अनुशासन के साथ साधा। उनके ही गांव के श्री रमेश कुमार श्रीवास, जो छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में मुख्य सांख्यिकी अधिकारी के पद पर कार्यरत् हैं। वे बताते हैं कि अमिता ने बहुत कठिनाईयों में मेहनत की। सुबह-सुबह उन्हें अभ्यास करते हुए मिलती थी तो उसके पैर में जूते तक नहीं होते थे। इतने अभावों के बाद भी उसकी लक्ष्य पाने के लिए जीवटता सबके लिए सीखने लायक है। कठोर शारीरिक और मानसिक तैयारी का परिणाम यह रहा कि 8 मार्च 2021 को विश्व महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने अफ्रीका के किलिमंजारो माउंट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की और छत्तीसगढ़ की पहली अंतरराष्ट्रीय महिला पर्वतारोही बनने का गौरव हासिल किया। यह केवल एक पर्वत की जीत नहीं थी, बल्कि उस विश्वास की जीत थी कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों की राह नहीं रोक सकते। इस सफलता के बाद अमिता का सफर यहीं नहीं रुका। उनके सामने अब दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की चुनौती थी। लेकिन इस अभियान के लिए भी 50 लाख रुपए के फीस की आवश्यकता थी। राज्य शासन और कलेक्टर की अनुशंसा पर छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी ने उन्हें काफी वित्तीय सहायता प्रदान की। एवरेस्ट के लिए 9 अप्रैल को ट्रेन से दिल्ली के लिये निकली, वहां से काठमांडू और एवरेस्ट के बेस कैंप पहुंची। उनकी पहली चुनौती तब आयी जब 6500 मीटर की ऊंचाई पर मौसम खराब होने के कारण यात्रा ही स्थगित थी। छत्तीसगढ़ के गोंद के लड्डू, ठेठरी, खुरमी और सलौनी खाकर समय बिताया। कुछ दिन इंतजार के बाद यात्रा शुरू हुई। कड़ाके की ठंड, बर्फीली हवाएं, बेहद कम ऑक्सीजन और हर कदम पर मौत का खतरा—यही उस यात्रा की वास्तविक पहचान थी। रातभर धीरे-धीरे आगे बढ़ना पड़ता था। रास्ते में कई पर्वतारोहियों के शव दिखाई देते थे, जो इस अभियान की कठिनाई का मौन प्रमाण थे। कुछ ऊंचाई को पार करने में ही पूरा दिन निकल जाता था। एवरेस्ट अभियान के दौरान सबसे भयावह क्षण तब आया, जब उनके सामने ही बेंगलुरु के पर्वतारोही संदीप आप्टे स्नो ब्लाइंडनेस (Snow Blindness) का शिकार हो गए। वैसे वे काफी हष्ट-पुष्ट थे, लेकिन सूरज की पराबैंगनी किरणें संदीप की आंखों में पड़ी तो उनका कार्नियां डेमेज हो गई। बहुत अधिक कराहते हुए संदीप को देखा। बाद में पता चला की उनकी मौत हो गई है।  अभी अमिता इस सदमे से उबर भी नहीं पाई थीं कि एक और हादसे ने पूरे अभियान दल को झकझोर दिया। हैदराबाद के पर्वतारोही कनक तिवारी की एवरेस्ट शिखर से महज 100 मीटर पहले अचानक मौत हो गई।  इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद अमिता का हौसला नहीं टूटा। उनके शेरपा दावा गैल्जिन उनका उत्साह बढ़ाते रहे और एवरेस्ट फतह करने का संकल्प याद दिलाते रहे। अंतिम चरण में ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे 800 मीटर की चढ़ाई पूरी करने में उन्हें लगभग 21 घंटे लग गए। अंततः 22 मई 2026 को उन्होंने समुद्र तल से 8848 मीटर (29,031 फीट) की ऊंचाई पर स्थित विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराकर इतिहास रच दिया। उस क्षण उन्होंने केवल एवरेस्ट ही नहीं जीता था, बल्कि उन सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त की थी, जिन्होंने बचपन से उनके रास्ते कठिन बनाए थे। लेकिन पर्वतारोहियों की दुनिया … Read more

कुल्लू के ‘अमरफल’ की देशभर में होगी सप्लाई, लुधियाना से पहली खेप रवाना

जैतो/फिरोजपुर. उत्तर रेलवे के फिरोजपुर रेल के मंडल प्रबंधक संजीव कुमार के मार्गदर्शन में फिरोजपुर मंडल के बिजनेस डिवैल्पमैंट यूनिट के विशेष प्रयासों से पर्सिमोन फलों की रेल मार्ग से ढुलाई के लिए नया यातायात प्राप्त किया गया है। लुधियाना से 98 पैकेटों में 2,600 किलोग्राम पर्सिमोन हावड़ा के लिए लोड किए गए। हिमाचल के कुल्लू सहित ठंडे बागवानी क्षेत्रों में किसान पर्सिमोन की खेती अपना रहे हैं, क्योंकि इसमें कम लागत, बेहतर मूल्य और बढ़ती घरेलू मांग की संभावना हैं। पर्सिमोन जिसे ‘जापानी फल’ या ‘अमरफल’ के नाम से भी जाना जाता है, इसमें विटामिन-सी, फाइबर और एंटीऑक्सीडैंट से भरपूर, कम कैलोरी वाला पौष्टिक फल है और बदलती जलवायु में सेब की तुलना में अधिक अनुकूल माना जाता है। फिरोजपुर मंडल के बिजनेस डिवैल्पमैंट यूनिट द्वारा किए गए प्रयासों के फलस्वरूप हिमाचल प्रदेश से आने वाले पर्सिमोन फलों का यातायात लुधियाना से रेल के माध्यम से प्राप्त किया गया है। वर्तमान में हावड़ा, कोलकाता और सियालदह के लिए पर्सिमोन भेजे जा रहे हैं, जबकि आने वाले दिनों में पटना और गुवाहाटी जैसे अन्य प्रमुख गंतव्यों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक/फ्रेट परमदीप सिंह सैनी ने बताया कि फिरोजपुर मंडल की विश्वसनीय एवं समयबद्ध माल परिवहन व्यवस्था व्यापारियों को बेहतर सुविधा प्रदान कर रही है। मंडल माल यातायात बढ़ाने तथा पर्यावरण-अनुकूल परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। 

मछुआरा समाज के वोटों पर सियासत तेज, संजय निषाद ने किया आगाह- दलाली करने वालों से बचें

मछुआरा समाज के वोटों की दलाली करने वालों से रहें सावधान: संजय निषाद   बोले, यूपी में पहली बार राजनीतिक ताकत बनकर खड़ा हुआ मछुआरा समाज, मौसमी नेताओं से सतर्क रहने की जरूरत   लखनऊ कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने विधानसभा चुनाव की बढ़ती सरगर्मी के बीच मछुआरा समाज को मौसमी नेताओं से सावधान रहने की नसीहत दी है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आजादी के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में मछुआरा समुदाय एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर खड़ा हुआ है। ऐसे समय में समाज के वोटों की दलाली करने वालों को पहचानने की जरूरत है।   डॉ. संजय निषाद ने बिना किसी का नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि कुछ मौसमी नेता अब तक यह तय नहीं कर पाए हैं कि उन्हें मुंबई में व्यापार करना है, यहां-वहां घूमकर दूसरों की दरी बिछानी है या मछुआरा समाज के वोटों की दलाली करनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में मछुआरा समुदाय के वोटों की खरीद-बिक्री के लिए बदनाम और वहां समाज के राजनीतिक उभार को नुकसान पहुंचाने वाले लोग अब उत्तर प्रदेश में निषाद समाज को गुमराह करने निकले हैं।   उन्होंने कहा कि जो खुद एक विधानसभा चुनाव जीतने की हैसियत नहीं रखता, वह जेब में नोटों की गड्डी लेकर लाल टोपी और नीली वर्दी पहनकर यूपी के निषाद समाज को राजनीति सिखाने चला है। मछुआरा समुदाय पैसों पर बिकने वाली कौम नहीं है। उत्तर प्रदेश के मछुआरों को राजनीति सिखाने से पहले यह समझ लेना चाहिए कि राजनीति और संघर्ष उनके खून में है।   डॉ. निषाद ने कहा कि मछुआरा समाज ने मुगलों और अंग्रेजों से संघर्ष किया और देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संविधान में समाज को अधिकार और आरक्षण मिला, लेकिन आपसी बिखराव के कारण उसका हक लुटता रहा। आज भी केवट, मल्लाह, बिंद और कश्यप के नाम पर भेद पैदा कर समाज को एकजुट होने से रोकने की कोशिश की जा रही है।   उन्होंने कहा कि दूसरे दलों से पैसा लेकर समाज के बीच बांटने और उसके वोटों का सौदा करने वालों को समाज पहचान ले। मछुआरा गरीब जरूर है, लेकिन अपने स्वाभिमान और अधिकारों का सौदा करने वाला नहीं है। उन्होंने पोस्ट के अंत में ‘जय निषादराज’ लिखा।

बस्तर पहुंचीं रेलवे की PCCM, माल ढुलाई तेज करने की रणनीति पर होगा मंथन

जगदलपुर. बस्तर से निकलने वाले लौह अयस्क की रेल ढुलाई की गति को और बढ़ाने तथा रेलवे का राजस्व कैसे बढ़े. इसकी संभावना तलाशने के उद्देश्य से पूर्व तट रेलवे की प्रधान मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधक रीता राज बस्तर पहुंचीं. उनका दौरा ऐसे समय हो रहा है. जब बस्तर में लौह अयस्क परिवहन रेलवे के लिए सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियों में शामिल है. रीता राज ने जगदलपुर के अमृत भारत स्टेशन का निरीक्षण किया और इसके बाद किरंदुल पहुंचकर राष्ट्रीय खनिज विकास निगम के अधिकारियों के साथ बैठक की. अमृत भारत स्टेशन के रूप में विकसित हो रहे जगदलपुर रेलवे स्टेशन का निरीक्षण इस दौरे का एक अहम हिस्सा रहा. बस्तर में रेलवे के विस्तार और यात्री सुविधाओं की चर्चा के बीच वाणिज्यिक पक्ष से स्टेशन और क्षेत्र की संभावनाओं को देखना इस दौरे को और महत्वपूर्ण बनाता है. स्टेशन के विकास के साथ भविष्य में बढ़ने वाली यात्री और माल परिवहन गतिविधियों को लेकर रेलवे की तैयारियों पर भी नजर है. बैठक में लौह अयस्क की ढुलाई बढ़ाने और रेल परिवहन की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा हुई. बताते चलें कि रीता राज की पहचान रेलवे के वाणिज्यिक और माल परिवहन क्षेत्र में लंबे अनुभव वाली अधिकारी के रूप में है. रेलवे के उपलब्ध दस्तावेजों में उनका नाम माल ढुलाई संबंधी नीतिगत जिम्मेदारियों से भी जुड़ा रहा है. ऐसे में उनका बस्तर दौरा औपचारिक निरीक्षण के बजाय रेल राजस्व और माल परिवहन के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. आज से फिर चलेगी रायपुर-कोरबा पैसेंजर ट्रेन बिलासपुर. तीज त्योहार के दौरान यात्रियों की सुविधा और आवागमन को सुगम बनाने के लिए रेलवे ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। रेलवे ने 14 सितंबर को रद्द की गई 58204 रायपुर-कोरबा पैसेंजर ट्रेन का परिचालन फिर से बहाल कर दिया है। दोहरीकरण कार्य के कारण रद हुई थी ट्रेन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल अंतर्गत उरकुरा-रायपुर स्टोर डिपो के बीच दोहरीकरण परियोजना का कार्य चल रहा है। इसके तहत उरकुरा स्टेशन पर यार्ड रीमॉडलिंग के लिए प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन इंटरलॉकिंग कार्य किया जा रहा है। इसी कार्य के चलते रेलवे ने पहले 14 सितंबर को रायपुर-कोरबा पैसेंजर ट्रेन को रद्द करने की घोषणा की थी। तीज पर्व को देखते हुए लिया फैसला तीज पर्व के दौरान बड़ी संख्या में यात्रियों के आवागमन को देखते हुए रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए ट्रेन का परिचालन बहाल करने का निर्णय लिया है। अब यह ट्रेन 14 सितंबर को रायपुर से कोरबा के बीच अपने निर्धारित समय पर संचालित होगी। रेलवे के इस फैसले से रायपुर, बिलासपुर, कोरबा सहित मार्ग के अन्य स्टेशनों के बीच सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

राष्ट्रीय हिंदी दिवस पर भोपाल में ‘भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान’, 14-15 सितंबर को भारतीय भाषाओं पर मंथन

भोपाल  राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर भारत भवन में सोमवार से दो दिवसीय ‘भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान’ की शुरुआत होगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव शाम 4 बजे कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। 14 और 15 सितंबर को होने वाले इस आयोजन का मुख्य विषय ‘मातृभाषा, संस्कृति और भारतीय जीवन-मूल्यों पर संवाद’ रखा गया है। कार्यक्रम में देशभर से वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार और कवि शामिल होंगे। आयोजन का उद्देश्य भारतीय भाषाओं, बोलियों और उनमें मौजूद साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत पर संवाद करना है। संस्कृति विभाग के वीर भारत न्यास और संस्कृति संचालनालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भारत भवन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान और मातृभाषा मंच की सहभागिता रहेगी। भाषा और पत्रकारिता पर होगी चर्चा पहले दिन मुख्यमंत्री के शुभारंभ के बाद शाम 4:30 बजे ‘मातृभाषा से राष्ट्रभाषा : भाषाओं में भारत की आत्मा’ विषय पर चर्चा होगी। इसके बाद शाम 6 बजे ‘भाषाई पत्रकारिता, समाज की आवाज’ विषय पर विमर्श होगा। इसमें अलग-अलग भारतीय भाषाओं से जुड़े पत्रकार और विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। शाम 7:30 बजे राष्ट्रीय कवि सम्मेलन होगा। इसमें कीर्ति काले, स्वयं श्रीवास्तव, दिनेश दिग्गज, शैलेन्द्र मधुर, अज़हर इकबाल और रामायणधर द्विवेदी काव्य पाठ करेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय भाषाओं और बोलियों के गीतों की प्रस्तुति से होगी।   डिजिटल दौर में मातृभाषा पर मंथन 15 सितंबर को आयोजन में ‘डिजिटल युग में मातृभाषाएँ : संकट, संभावना और नई पत्रकारिता’ विषय पर चर्चा होगी। इसके बाद ‘भाषा अनेक, भारत एक’ विषय पर संवाद होगा। इसमें उर्दू, मराठी, असमिया, मलयालम सहित विभिन्न भाषाओं के पत्रकार और लेखक शामिल होंगे। शाम 7:30 बजे ‘संत राग’ कार्यक्रम में संत कवियों की वाणी की प्रस्तुति होगी।  दुर्लभ पुस्तकों की प्रदर्शनी भी आयोजन स्थल पर भारतीय भाषाओं और बोलियों से जुड़ी शब्द-चित्र प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके अलावा भारतीय परंपरा के महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों और विभिन्न विषयों पर आधारित पुस्तकों का लोकार्पण भी होगा। आयोजकों के अनुसार भारतीय सभ्यता और संस्कृति की स्मृतियां मातृभाषाओं, बोलियों और लिपियों में सुरक्षित हैं। इस आयोजन के जरिए भाषाई विरासत, साहित्य और पत्रकारिता के योगदान पर चर्चा के साथ नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। 

चंडीगढ़ में ड्रग्स के खिलाफ पुलिस का शिकंजा, 16 FIR में नशा बरामद; 82 आरोपी जेल भेजे

चंडीगढ़  चंडीगढ़ में नशे के खिलाफ पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है। शहर में घोड़ों से गश्त के साथ थाना प्रभारी और एरिया डीएसपी रात को भी फील्ड में उतर रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई के वीडियो बनाकर मीडिया तक पहुंचाए जा रहे हैं। जंगल एरिया, खंडहरों और श्मशान घाट के पास बनाए गए नशेड़ियों के अड्डों पर माउंटेड पुलिस की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया गया। जंगल क्षेत्र से लोगों को पकड़ा गया, जिनके पास से 10 रुपए के नोट, फॉइल पर लगा चिट्टा, लाइटर और गर्म करने वाले चम्मच बरामद हुए। पुलिस ने छापेमारी के दौरान सरकारी कैमरामैन और पुलिसकर्मियों के मोबाइल से हर गतिविधि की वीडियोग्राफी की, ताकि कोर्ट में केस साबित हो सके। 82 लोगों के खिलाफ प्रिवेंटिव एक्शन चंडीगढ़ पुलिस ने 82 लोगों के खिलाफ प्रिवेंटिव एक्शन लेते हुए उन्हें जेल भेजा है। वहीं, NDPS एक्ट के तहत 16 FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें ड्रग्स की रिकवरी भी हुई है। पुलिस ने ग्राउंड लेवल पर आक्रामक अभियान शुरू कर दिया है। इस मुहिम में केवल थाना प्रभारी और एरिया DSP ही नहीं, बल्कि CRPF की टीम भी साथ है। ड्रग सप्लायरों और पैडलरों की सूची तैयार CID विंग को भी पूरी तरह एक्टिव किया गया है। CID की टीम कॉलोनियों में अपने मुखबिरों के जरिए ड्रग सप्लायरों और पैडलरों की सूची तैयार कर रही है। एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स के साथ-साथ अब स्थानीय पुलिस CRPF के हथियारबंद जवानों को साथ लेकर अलसुबह और देर रात सरप्राइज चेकिंग व रेड कर रही है। शहर में सप्लाई चेन को ध्वस्त करने के लिए दो या उससे अधिक NDPS केस वाले अपराधियों को PIT-NDPS के तहत एक साल के लिए डिटेन करने की रूपरेखा तैयार की गई है। प्रशासक बोले- पुलिस एक्शन ले तो नशा खत्म होगा चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया बीते वीरवार को नगर निगम के कार्यक्रम नशा मुक्त चंडीगढ़ में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा था कि पुलिस एक्शन ले तो नशा खत्म हो सकता है। उन्होंने एरिया पार्षदों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में नशे को रोकने के लिए आगे आने को कहा था। पार्षद ने पुलिस के सामने खोली नशे की पोल इसके बाद सिर्फ एक पार्षद जो नगर निगम की डिप्टी मेयर भी हैं, सुमन देवी ने पुलिस को पब्लिक मीटिंग में बताया था कि उनके एरिया में नशा बिक रहा है। उस दौरान डीएसपी और आईटी पार्क थाना प्रभारी मीनी भारद्वाज भी वहीं मौजूद थीं। सुमन देवी ने तीन अलग-अलग वीडियो भी दिखाए थे, जिनमें तीन युवक नशे की हालत में झूम रहे थे। समीर को 5 युवकों ने चाकू मारे दो दिन पहले ही न्यू इंदिरा कॉलोनी निवासी समीर को पार्क में पांच युवकों ने चाकू मारे थे। समीर के पिता ने आरोप लगाया कि सभी युवक नशा करते हैं। उन्होंने पुलिस को कई बार बताया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके भाई पवन, जिसकी थार से टक्कर मारकर हत्या कर दी गई थी, उसकी मौत भी नशे के मुद्दे से जुड़ी थी। उन्होंने नशे के खिलाफ आवाज उठाई थी, ताकि युवा पीढ़ी को बचाया जा सके। ऑटो ड्राइवर राजकुमार पर फायरिंग सेक्टर-49 में ऑटो ड्राइवर राजकुमार पर फायरिंग मामले में भी राजकुमार ने आरोप लगाया था कि उनके एरिया में नशा बिकता है। उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद उन पर फायरिंग कर दी गई।