samacharsecretary.com

राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर दो दिवसीय आयोजन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर सोमवार 14 सितंबर को शाम 4 बजे भारत भवन में ‘भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान’ का शुभारंभ करेंगे। भारतीय भाषाओं की विविधता में निहित भारतीय संस्कृति, जीवन-मूल्यों और राष्ट्रीय एकता की भावना को केंद्र में रखते हुए 14 एवं 15 सितंबर 2026 दो दिवसीय अनुष्ठान का केन्द्रिय विषय ‘मातृभाषा, संस्कृति और भारतीय जीवन-मूल्यों पर संवाद’ रखा गया है। संस्कृति विभाग के वीर भारत न्यास एवं संस्कृति संचालनालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में भारत भवन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान तथा मातृभाषा मंच की सहभागिता रहेगी। पहले दिन राष्ट्रभाषा और भाषाई पत्रकारिता पर होगा विमर्श मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव राम तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा शुभारंभ किए जाने के बाद पहला सत्र शाम 4:30 से 5:30 बजे तक ‘मातृभाषा से राष्ट्रभाषा : भाषाओं में भारत की आत्मा’ विषय पर व्याख्यान होगा। इसमें बांग्ला के  स्नेहाशीष सूर, कश्मीरी के  आसिम मोहिउद्दीन अपने विचार रखेंगे, सत्र समन्वयक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरू  विजय मनोहर तिवारी करेंगे। दूसरा सत्र शाम 6 से 7:30 बजे तक ‘भाषाई पत्रकारिता, समाज की आवाज़’ विषय पर होगा, जिसमें  जयदीप कर्णिक, वरिष्ठ संपादक  गिरीश उपाध्याय और वरिष्ठ पुरातत्वविद  नारायण व्यास सहभागी होंगे। सत्र का समन्वयक दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के निदेशक  मुकेश मिश्रा द्वारा किया जायेगा। न्यासी सचिव  तिवारी ने बताया कि 14 सितंबर की शाम 7:30 बजे राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आयोजित होगा। इसमें डॉ. कीर्ति काले,  स्वयं वास्तव,  दिनेश दिग्गज,  शैलेन्द्र मधुर,  अज़हर इकबाल तथा  रामायणधर दि्ववेदी काव्य पाठ करेंगे। इसी दिन शाम 4 बजे ‘पूर्वरंग’ में भारतीय भाषाओं एवं बोलियों के गीतों की प्रस्तुति  उमेश तरकसवार एवं साथी, भोपाल द्वारा दी जाएगी। 15 सितंबर के विमर्श सत्र एवं 'संत राग' प्रस्तुति 15 सितंबर को पहला सत्र शाम 4 से 5:30 बजे तक ‘डिजिटल युग में मातृभाषाएँ : संकट, संभावना और नई पत्रकारिता’ विषय पर होगा। इसमें उर्दू के वरिष्ठ संपादक  अब्दुल वदूद साजिद, मराठी से सुबह सवेरे के कार्यकारी प्रधान संपादक  अजय बोकिल, असमिया के वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक  समुद्रगुप्त कश्यप तथा फाउंडर फ्रेंड्स ऑफ मध्यप्रदेश, यूके के  रोहित दीक्षित विचार रखेंगे। दूसरा सत्र शाम 5:30 से 7 बजे तक ‘भाषा अनेक, भारत एक’ विषय पर होगा, जिसमें मलयालम के  मनोज के. दास,  सतीश के. सिंह,  अनुराग उपाध्याय एवं  मनोज शर्मा सहित अन्य पत्रकार सहभागी होंगे। शाम 7:30 बजे ‘संत राग’ कार्यक्रम में संत कवियों की वाणी की प्रस्तुति सु सुधा रघुरामन, नई दिल्ली द्वारा की जाएगी। भाषाई शब्द-चित्र प्रदर्शनी एवं दुर्लभ पुस्तकों का होगा लोकार्पण  तिवारी ने बताया कि आयोजन स्थल पर शब्द-चित्र और भारतीय भाषाओं से संबंधित प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। इसके साथ ही महर्षि पाणिनि, भोजदेव, महर्षि पतंजलि, भर्तृहरि और सम्राट राजेंद्र चोल सहित भारतीय परंपरा के महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्वों तथा ‘युग-युगीन जल’, ‘उड़ चल अपने देश’, ‘अष्टावक्र गीता’, ‘नारद गीता’, ‘गर्भ गीता’, ‘ब्राह्मण गीता’, ‘उत्तर गीता’, ‘परमहंस गीता’, ‘वृत्र गीता’, ‘हंस गीता’, ‘चंद्र गीता’, ‘जानकी गीता’ एवं सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हिन्दी साहित्य के प्रकाश पुंज जैसी पुस्तकों का लोकार्पण भी होगा। भारतीय सभ्यता की स्मृतियाँ हमारी मातृभाषाओं, बोलियों और लिपियों में सुरक्षित हैं। राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान के माध्यम से भाषाओं में रची साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत और भाषाई पत्रकारिता के योगदान को समझने का प्रयास होगा। हमारा उद्देश्य अतीत की स्मृतियों से साक्षात्कार करते हुए वर्तमान समाज को अपनी सभ्यतागत चेतना से जोड़ना और भविष्य के लिए नई सांस्कृतिक दृष्टि विकसित करना है। इस अनुष्ठान में व्याख्यान, विमर्श, राष्ट्रीय कवि सम्मेलन, संत कवियों की वाणी, पूर्वरंग तथा प्रदर्शनी सहित विविध कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं।  

यूपी डायलॉग – चैप्टर 2’ में जुटे 200 से अधिक युवा, उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा पर प्रयागराज में हुआ मंथन

प्रयागराज उत्तर प्रदेश में पिछले एक दशक के दौरान हुए बदलाव, विकास कार्यों और युवाओं के लिए तैयार हुए नए अवसरों को लेकर रविवार को प्रयागराज में ‘यूपी डायलॉग – चैप्टर 2’ का आयोजन किया गया। ‘फ्रेंड्स ऑफ यूपी’ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में 200 से अधिक युवा स्वयंसेवकों और प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में कानून-व्यवस्था से लेकर अर्थव्यवस्था, शिक्षा, रोजगार के अवसर और धार्मिक पर्यटन तक विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों और युवाओं के बीच विस्तार से संवाद हुआ। ‘यूपी डायलॉग’ के दूसरे चैप्टर में ‘यूपी डिकेड’ को केंद्र में रखते हुए उत्तर प्रदेश की पिछले एक दशक की विकास यात्रा पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने राज्य में हुए बदलावों के साथ ही बदलते सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य युवाओं को प्रदेश में हो रहे बदलावों से जोड़ने के साथ उन्हें ऐसा मंच उपलब्ध कराना रहा, जहां वे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से सीधे सवाल कर सकें और अपनी बात भी रख सकें। कानून-व्यवस्था और युवाओं की भूमिका पर हुई चर्चा कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता अर्चना सिंह ने कानून एवं न्याय व्यवस्था से जुड़े विषयों पर युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुरक्षित और सशक्त भविष्य के निर्माण के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकार की विभिन्न नीतियों और योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका बड़ा लाभ युवा वर्ग को मिल रहा है। अपने संबोधन के दौरान अर्चना सिंह ने युवाओं से सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने तथा अपने भविष्य को लेकर जागरूक भूमिका निभाने का आह्वान किया। अर्थव्यवस्था, वित्त और शिक्षा के अवसरों पर भी मंथन कार्यक्रम में अरुणेश सिंह ने अर्थशास्त्र, वित्त और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं के लिए मौजूद संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बदलती अर्थव्यवस्था के बीच युवाओं के सामने खुल रहे अवसरों और भविष्य की संभावनाओं को लेकर अपनी बात रखी। प्रो. राजेश कुमार गर्ग ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदेश की विकास प्रक्रिया में युवाओं की भूमिका केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार के रूप में भी महत्वपूर्ण है। धार्मिक पर्यटन और बदलते उत्तर प्रदेश पर हुई बात ‘UP Decade’ संवाद के दौरान उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के बढ़ते दायरे पर भी विशेष चर्चा की गई। प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत तथा उससे जुड़े पर्यटन के विकास को स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों से जोड़कर देखा गया। इसके साथ ही राज्य के सामाजिक-आर्थिक बदलाव और भविष्य में युवाओं के लिए बनने वाली संभावनाओं पर भी वक्ताओं ने विचार रखे। दो सत्रों में हुआ संवाद, युवाओं ने खुलकर पूछे सवाल पूरे कार्यक्रम को दो प्रमुख संवाद सत्रों में बांटा गया। पहले सत्र में आमंत्रित विशेषज्ञों और वक्ताओं ने अलग-अलग विषयों पर अपने विचार रखे। इसके बाद दूसरे सत्र को युवाओं के साथ प्रश्नोत्तर और खुले संवाद के लिए रखा गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने कानून-व्यवस्था, शिक्षा, रोजगार, अर्थव्यवस्था और प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सवाल पूछे। युवाओं ने अपने विचार और सुझाव भी विशेषज्ञों के सामने रखे। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसे केवल वक्ताओं के संबोधन तक सीमित रखने के बजाय युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर केंद्रित किया गया। युवाओं और विशेषज्ञों के बीच संवाद बढ़ाना उद्देश्य ‘फ्रेंड्स ऑफ यूपी’ के अनुसार ‘यूपी डायलॉग’ का उद्देश्य युवाओं को उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा से जोड़ने के साथ नीति, विकास और समाज से जुड़े मुद्दों पर तथ्यपरक संवाद को आगे बढ़ाना है। इसके माध्यम से युवाओं, विशेषज्ञों और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि ‘यूपी डायलॉग’ को एक निरंतर संवाद श्रृंखला के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रयागराज में आयोजित ‘चैप्टर 2’ इसी कड़ी का हिस्सा रहा, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी के साथ उत्तर प्रदेश के बीते दशक, वर्तमान बदलावों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

बालाघाट में स्वास्थ्य सेवाओं की शत प्रतिशत पहुंच और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के दिये निर्देश

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने निवास कार्यालय भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बालाघाट जिले में स्वास्थ्य सेवाओं एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि बालाघाट के पूरे क्षेत्र को स्वास्थ्य सेवाओं से प्रभावी रूप से कवर करना है। कोई भी पात्र व्यक्ति स्वास्थ्य सुविधा से वंचित न रहे और प्रत्येक स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत एवं जवाबदेह बनाया जाए। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  सुखवीर सिंह, आयुक्त  धनराजू एस, एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बालाघाट कलेक्टर  कुँअर सत्यम, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि बालाघाट जिले के प्रत्येक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्वास्थ्य अधोसंरचना के सशक्तीकरण के लिए आवश्यकतानुसार संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों सहित पूरे क्षेत्र को स्वास्थ्य सेवाओं के दायरे में लाते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता और पहुंच को और बेहतर बनाया जाए। शत-प्रतिशत टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन सुनिश्चित करें उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि बालाघाट नक्सल प्रभाव से मुक्त हुआ है। ऐसे क्षेत्रों में स्थानीय निवासियों को स्वास्थ्य सेवाओं एवं विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति जागरुक बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य जागरुकता अभियान से जोड़ते हुए शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने गर्भवती महिलाओं के पंजीयन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला का समय पर पंजीयन हो तथा सभी एएनसी (ANC) समय पर हों, यह सुनिश्चित किया जाए। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) वाली गर्भवती महिलाओं को समय पर चिन्हित कर उनका नियमित फॉलोअप किया जाए और आवश्यकतानुसार उन्हें उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार एवं प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। संस्थागत प्रसव के लिए पूर्व तैयारी सुनिश्चित करें उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि शत प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किए जाएँ। जिन गर्भवती महिलाओं में प्रसव के दौरान जोखिम की संभावना हो, उन्हें समय रहते स्वास्थ्य संस्थान में भर्ती कराकर आवश्यक निगरानी एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों के लिए बर्थ वेटिंग होम की व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए, ताकि एचआरपी चिन्हित गर्भवती महिलाओं को प्रसव के समय उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं समय से उपलब्ध हो सकें। 67 नए मेडिकल ऑफिसर्स की पदस्थापना उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि बालाघाट जिले में आवश्यकता एवं मांग के अनुरूप 67 नए मेडिकल ऑफिसर्स की पदस्थापना की गई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपलब्ध मानव संसाधन का प्रभावी उपयोग करते हुए प्रत्येक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य अधिकारियों की मैदानी उपस्थिति आवश्यक है। स्वास्थ्य अधिकारी नियमित रूप से क्षेत्रों का दौरा करें और मैदानी अमले की कार्यप्रणाली की समीक्षा करें। मैदानी अमले को प्रोत्साहित करें, इंसेंटिव समय पर वितरित किये जाए उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता में मैदानी अमले की महत्वपूर्ण भूमिका है। अधिकारियों द्वारा मैदानी स्वास्थ्य कर्मचारियों को निरंतर मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन दिया जाए। उनके कार्यों को प्रोत्साहित करने के साथ ही निर्धारित इंसेंटिव का समय पर वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नियमित रूप से मैदानी क्षेत्रों का दौरा करें, कर्मचारियों की समस्याओं को समझें और उन्हें बेहतर कार्य के लिए प्रेरित करें। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का आवश्यकतानुसार उपयोग करें उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि जिले में स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनटाइड फंड आवश्यकतानुसार उपलब्ध कराया गया है। इसका उपयोग स्थानीय स्तर की आकस्मिक आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है। विशेष रूप से आवश्यक परिवहन, आकस्मिक दवाओं, उपकरणों तथा अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इसका नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा प्रभावित न हो और स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली आकस्मिक आवश्यकता का तत्काल समाधान हो, इसके लिए उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाए। जन्मजात बीमारियों से प्रभावित बच्चों का समय पर उपचार पर दें विशेष ध्यान उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने निर्देश दिए कि जन्मजात बीमारियों से प्रभावित बच्चों की पहचान एवं उपचार पर विशेष ध्यान दिया जाए। जन्मजात हृदय रोग, क्लेफ्ट लिप, क्लब फुट आदि समस्याओं से प्रभावित बच्चों को चिन्हित कर उनकी आवश्यक सर्जरी एवं उपचार समय पर कराया जाए। उन्होंने कहा कि आरबीएसके (RBSK) के अंतर्गत पात्र बच्चों की आवश्यक सर्जरी एवं उपचार की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। इसलिए ऐसे बच्चों की पहचान, रेफरल और उपचार की पूरी प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाए, ताकि कोई भी बच्चा आवश्यक उपचार से वंचित न रहे। टीकाकरण के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का भी उपयोग करें उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि जहां नियमित टीकाकरण व्यवस्था के माध्यम से शत-प्रतिशत कवरेज प्राप्त करने में कठिनाई हो, वहां आवश्यकता के अनुसार हायर्ड वैक्सीनेटर तथा ऑल्टरनेट वैक्सीन डिलीवरी (एवीडी) जैसी व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित किया जाए। दूरस्थ एवं कठिन पहुंच वाले क्षेत्रों में विशेष रणनीति बनाकर टीकाकरण का लक्ष्य पूरा किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विशेष अभियान चला कर टीकाकरण से छूटे बच्चों की पहचान करें और शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाये। पंचायतों को सुमन पंचायत के लिए प्रेरित करें उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को जनभागीदारी से मजबूत किया जाए। पंचायतों को सुमन पंचायत बनने के लिए प्रेरित करें और स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय रूप से शामिल करें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच केवल विभागीय प्रयासों से नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से अधिक प्रभावी बनाई जा सकती है। इसलिए स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य जागरूकता अभियान का हिस्सा बनाया जाए। स्वच्छता अभियान को गति दें उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के बीच सीधा संबंध बताते हुए क्षेत्र में विशेष स्वच्छता अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पंचायतों, स्थानीय संस्थाओं एवं नागरिकों की सहभागिता से स्वच्छता को जन-अभियान का स्वरूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था को फुलप्रूफ बनाने के लिए बीमारी की रोकथाम, समय पर पहचान, उपचार, … Read more

सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान, 100 प्रोफेसरों को ऑक्सफोर्ड समेत विदेशी विश्वविद्यालयों में मिलेगी ट्रेनिंग

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा ऐलान किया है। सीएम सम्राट चौधऱी ने कहा है कि राज्य के सहायक प्रोफेसर ऑक्सफोर्ड समेत विदेशों के अन्य मशहूर विश्विद्यालयों में ट्रेनिंग लेंगे। मुख्यमंत्री रविवार को बापू सभागार में 211 नये डिग्री कॉलेजों में नवनियुक्त शिक्षकों के उन्मुखीकरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि जबतक कॉलेज में आकर बच्चे पढ़ेंगे नहीं, तबतक इस संस्थान का महत्व नहीं होगा। कॉलेज में पढ़ने विद्यार्थी जरूर आयें, इसे सुनिश्चित करायें। 75 प्रतिशत न्यूनतम हाजिरी हो1ानी ही चाहिए। नहीं तो सरकार की बड़ी तैयारी सफल नहीं होगी। इसको लेकर हमारी टीम भी काम करेगी। उन्होंने कहा कि लाइव क्लासेज की भी व्यवस्था शुरू करें। यह भी कहा कि राज्य के डिग्री कॉलेजों में भी खुला विश्वविद्यालय की मान्यता सरकार देगी। इस मौके पर बिहार की शिक्षा व्यवस्था को वर्ल्ड क्लास बनाने को लेकर सीएम सम्राट चौधऱी ने बड़ा ऐलान किया। सीएम ने कहा कि 100 प्रोफेसरोों को ऑक्सफोर्ड समेत दुनिया के बड़े विश्वविद्यालयों में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। सबका खर्ज राज्य सराकर वहन करेगी। यह ट्रेनिंग एक महीने की होगी। सीएम सम्राट चौधऱी ने कहा कि बेहतर शिक्षा का सपना तब ही पूरा होगा जब हम अपनी तमाम चीजों को स्थापित करने का काम करेंगे। उसमें यह भी एक व्यवस्था है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की चीजों को हम कैसे इसमें जोड़ें। मैं जरूर कहूंगा कि 100 लोगों को चिन्हित करें जिनको ऑक्सफोर्ड में भेजकर वहां से भी कोर्स कराने का काम करें। तब तो हम दुनिया के मानक पर आ पाएंगे। सीएम ने आगे कहा कि दुनिया में जहां कहीं भी अच्छे संस्थान हैं वहां से जोड़ना हमारे बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन देगा। एक जमाना था जब हमने क्वालिटी के साथ क्वांटिटी को लेकर समझौता किया। बड़ी संख्या में लोग पढ़ने लगे। अब क्वालिटी औऱ क्वांटिटी दोनों ही साथ चलाना होगा। इसलिए दुनिया में जहां भी अच्छे यूनिवर्सिटी हैं। मैं शिक्षकों से आग्रह करूंगा कि अगर आप लोगों को लगता है कि दुनिया में कहीं कोई अच्छा संस्थान है तो उसका सुझाव विभाग को दें। वैसे 10 संस्थानों को हम चिन्हित करेंगे जिनसे सीधा संवाद कराने का काम बिहार सरकार अपने खर्च पर करेगी।

​छ.ग. फेंसिंग एसोसिएशन की 20वीं वार्षिक आमसभा एवं महत्वपूर्ण बैठक संपन्न

​रायपुर, छत्तीसगढ़ फेंसिंग एसोसिएशन की 20वीं वार्षिक आमसभा का आयोजन आज  को क्विंस  क्लब, रायपुर में किया गया। ​इस बैठक में संघ के अध्यक्ष  एस. प्रकाश, महासचिव  समीर खान, वर्किंग प्रेसिडेंट  अजीत सिंह पटेल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष  दिनेश गुप्ता,छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के संयुक्त सचिव  मो. अकरम खान, वालीवाल संघ से  नितिन पाण्डेय मुख्य रूप से उपस्थित रहे। ​बैठक के दौरान पूर्व महासचिव महसचिव बशीर अहमद खान भी उपस्थित थे  समीर खान ने छत्तीसगढ़ प्रदेश फेंसिंग एसोसिएशन के सभी महत्वपूर्ण एजेंडों पर विस्तार से चर्चा की तथा कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किए, जिस पर उपस्थित सभी जिला संघों के अध्यक्षों एवं सचिवों ने सर्वसम्मति से अपनी सहमति प्रदान की। अपने सम्बोधन मेँ प्रदेश फेंसिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष  एस. प्रकाश (IAS) ने प्रदेश के सभी जिलों प्रमुखो के फेंसिंग के प्रचार के लिए आवश्यक सुझाव मांगे सभी के विचार सुनने के पश्चात् अपने उदबोधन मेँ कहा की आप सभी को अपने जिला मेँ फेंसिंग (तलवारबाज़ी ) की नर्सरी तैयार करने को ये खेल तभी प्रदेश के मुख्य धारा मेँ जुड़ पायेगा। उन्होंने कहा की अधिक से अधिक प्रशिक्षण शिविर एवं लगातर स्पर्धा से फेंसिंग का वातवरण निर्मित होगा, हम इसके विकास के सरकार से मिलने वाली हर सुविधा का लाभ दिलवाने का प्रयास करेंगे.  अकरम ने भी मुख्यमंत्री के खेल के प्रति नवीन योजना से अवगत कराया।  अजित सिंह पटेल ज़ी ने सभी जिलों के सचिव से मंथली रिपोर्ट पर कार्य को कहा, फेंसिंग (तलवार बाज़ी )को बढ़ाने के लिए विकासखंड स्तर मेँ चयन प्रक्रिया कर प्रशिक्षण की व्यवस्था जिला संघ सुनिश्चित करें। संघ के कोषाध्यक्ष  अखिलेश दुबे ने छत्तीसगढ़ मेँ  खेलों इंडिया फेंसिंग अ कादमी का प्रस्ताव जो बहरतरई बिलासपुर मेँ होना जो अभी तक लंबित हैँ ध्यान दिलाया, फेंसिंग खेल को छत्तीसगढ़ के साई सेंटर मेँ जोड़ने का प्रस्ताव रखा।  निखिल जम्बूलकर ने फेंसिंग पंडित रविशंकर विश्व विद्यालय के खेल कैलेंडर मेँ जोड़े जाने का प्रस्ताव रखा। ​बैठक के मुख्य बिंदु एवं निर्णय: ​वार्षिक  एवं मासिक कार्ययोजना एवं क्षेत्रीय,जिला  पर स्पर्धा आयोजित कर राज्य प्रतियोगिताएं: संघ की वार्षिक कार्ययोजना तय की गई और संघ द्वारा आयोजित की जाने वाली राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के स्थान निश्चित किए गए एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का कैलेंडर इस प्रकार जारी किया गया: ​सब-जूनियर प्रतियोगिता: रायपुर जिला अक्टूबर माह  ​जूनियर एवं सीनियर प्रतियोगिता: दुर्ग जिला दिसंबर माह  ​कैडेट बालक- बलिका 17 वर्ष प्रतियोगिता: कोरबा जिला नवम्बर  ​अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण: संघ द्वारा जानकारी दी गई कि प्रदेश की कु. नेहा यादव एवं दीपांशी नेताम हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग प्राप्त करने के लिए इटली प्रस्थान कर चुकी हैं। ​पुरस्कार एवं सम्मान: फेंसिंग के 05 खिलाड़ियों को इस वर्ष 'राज्य पुरस्कार' हेतु नामांकित किया गया था, जिन्हें यह पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इसके अलावा वर्ष 2026 में 5 खिलाड़ियों के नाम 'उत्कृष्ट खिलाड़ी' के रूप में घोषित किए गए। ​शासकीय सेवा में अवसर: संघ के 12 खिलाड़ियों को उत्कृष्ट खिलाड़ी नीति के अंतर्गत सरकारी विभागों में नौकरी प्राप्त हुई है। ​खेल प्रोत्साहन प्रस्ताव: ​फेंसिंग खेल को 'हाई ग्रेड' (High Grade) श्रेणी की सूची में शामिल करवाने पर चर्चा की गई। ​राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों की खेल सूची में फेंसिंग को शामिल करने का प्रस्ताव पारित किया गया। ​आगामी आयोजन: आगामी वर्ष में ऑल इंडिया चैंपियनशिप एवं सीनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित करवाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। ​15 जिलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति: ​आज की इस वार्षिक बैठक में प्रदेश के 15 जिलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से: ​रायपुर: अखिलेश दुबे, आरती सिंह  ​दुर्ग: अर्पित तिवारी, मती केशवमणि पांडे ​कोरबा: तारिकेश मिश्रा ​मुंगेली: भूमेश पांडे ​दुर्ग ग्रामीण: ज्ञानचंद ​बालोद: मनमोहन सिंह वर्मा ​बेमेतरा: योगेश साहू ​खैरागढ़: प्रियंक कश्यप ​धमतरी: वेदप्रकाश ​गरियाबंद: बलराम यादव ​दुर्ग नगर निगम: निखिल जाबुलकर जांजगीर चंपा से वरुण पाण्डेय, प्रदेश फेंसिंग के उपाध्यक्ष  कमल रुपरेला,  आबिद, ​सहित कई अन्य पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

अखिलेश यादव के जलभराव वाले ट्वीट पर वाराणसी के महापौर का पलटवार

वाराणसी काशी में जलभराव और गलियों के जलमग्न होने को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद सियासत तेज हो गई है। अखिलेश यादव के ट्वीट में काशी में जलभराव की स्थिति को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद महापौर अशोक तिवारी ने पलटवार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जलभराव को लेकर चलाए जा रहे अभियान की परिस्थितियों की जांच कराए जाने की बात कही। उन्होंने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनको  बनारस के बारे में कम जानकारी है या उनका सूचना तंत्र काफी कमजोर है। बिना सही  जानकारी के उनको सोशल मीडिया पर वीडियो साझा नहीं करना चाहिए।  अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए महापौर ने कहा कि उन्हें इस तरह के छोटे राजनीतिक मामलों से बचना चाहिए। ऐसा तरीका नहीं अपनाया जाना चाहिए जिससे काशी की बदनामी हो। यह काशी की जनता का अपमान है। सीवर पाइपलाइन में बोरी मिलने के मामले में जलकल विभाग भेलूपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज करा चुकी है। महापौर अशोक तिवारी ने कहा कि पिछले करीब एक सप्ताह से सोशल मीडिया पर काशी में जलजमाव, गलियों के जलमग्न होने और कई वार्डों में समस्याओं को लेकर लगातार सोशल मीडिया पर ट्रेंड या अभियान चलाया जा रहा था। सोशल मीडिया पर जहां-जहां शिकायतें और वीडियो सामने आए, वहां अधिकारियों को भेजकर मौके की जांच कराई गई। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान कई स्थानों पर सीवर को कूड़े-करकट और अन्य सामग्री से ढके जाने की बात सामने आई। कुछ स्थानों पर सीवर में बोरी भरकर डाली गई थी, जबकि कहीं प्लाई डालकर सीवर को ढक दिया गया था। महापौर ने नवेद कॉम्प्लेक्स का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे अवैध बिल्डिंग बताते हुए कहा कि इसके नीचे से बड़ा नाला गुजरता है और उसके ऊपर निर्माण किया गया है। उनका कहना है कि नालों और सीवर की स्थिति की जांच कराई जा रही है, ताकि जलभराव के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। सीसीटीवी के इस दौर में यह पता लगाया जा सकता है कि सीवर में बोरी कब डाली गई, किसके द्वारा डाली गई और इसके पीछे क्या वजह थी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने जांच के दौरान सीवर में बोरे डाले जाने और नाले में मलबा भरे होने की बात भी देखी है। हालांकि, महापौर ने स्पष्ट किया कि इन गतिविधियों के लिए कौन जिम्मेदार है, इसका निर्णय जांच पूरी होने के बाद ही होगा।  महापौर ने कहा कि यदि जलभराव को लेकर कोई समस्या है तो उसका समाधान कराने के लिए नगर निगम और जलकल लगातार काम कर रहे हैं। लेकिन यदि जानबूझकर सीवर और नालों को बाधित किया गया है तो यह नगर निगम, जलकल और काशी की जनता की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली बात है।

BRICS की अध्यक्षता भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण : मुख्यमंत्री

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत आज विश्व पटल पर एक विश्वसनीय और प्रभावशाली शक्ति के रूप में उभरा है। वर्ष 2026 में BRICS की अध्यक्षता और 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता का परिचायक है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह प्रत्येक भारतवासी के लिए गौरव का अवसर है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत आज न केवल अपने राष्ट्रीय हितों को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है, बल्कि विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को भी वैश्विक मंचों पर सशक्त स्वर दे रहा है। उन्होंने कहा कि “Building Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability” की थीम के साथ भारत की BRICS अध्यक्षता वैश्विक सहयोग, नवाचार और सतत विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण अवसर है। भारत का दृष्टिकोण सदैव दुनिया को साथ लेकर चलने और साझा प्रगति के नए मार्ग तैयार करने का रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक मंचों पर सदैव स्पष्ट और दृढ़ रुख रखा है। साथ ही डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय समावेशन और तकनीक के माध्यम से जनसामान्य के जीवन में बदलाव का भारत का मॉडल आज दुनिया के लिए प्रेरणा बन रहा है। BRICS जैसे मंच इन अनुभवों और विकास की संभावनाओं को साझा करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका देश और राज्यों के लिए निवेश, प्रौद्योगिकी, नवाचार और रोजगार के नए अवसर भी लेकर आ रही है। विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को भारत की BRICS अध्यक्षता के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि भारत का नेतृत्व वैश्विक सहयोग को मजबूत करने, ग्लोबल साउथ की आवाज को सशक्त बनाने और साझा समृद्धि के नए मार्ग प्रशस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पटना का ट्रैफिक जाम होगा कंट्रोल, सड़क पर गलत पार्किंग करते ही बजेगा अलर्ट

पटना अवैध पार्किंग की वजह से राजधानी में लगने वाले ट्रैफिक जाम पर नियंत्रण को ले अब तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इस तकनीक के मूल में यह है कि वाहन अगर सड़क पर वैसी जगह लगी दिखी, जहां पार्किंग निषिद्ध है, तो तुरंत एक स्वचालित अलर्ट संबंधित इलाके के नियंत्रण कक्ष को चला जाएगा। उक्त इलाके में ट्रैफिक नियंत्रण को तैनात पुलिसकर्मी को तुरंत नियंत्रण कक्ष संपर्क कर इस बारे में जवाब तलब करेगा। पार्किंग व स्टॉपेज आरंभ से ही बेमानी पटना में पार्किंग व स्टॉपेज आरंभ से ही बेमानी रही है। सिटी सर्विस की बसों के लिए मोटी राशि खर्च दो बार आधुनिक बस स्टॉपेज का निर्माण कराया गया, लेकिन इन स्टॉपेज पर बसें कभी नहीं रूकी। यात्रियों की सुविधा के नाम पर बसें जहां पैसेंजर दिखा वहां रुक जाती हैं। ट्रैफिक के दबाव से उनका कोई मतलब नहीं। ऑटो व ई रिक्शा चालकों ने अपनी इच्छा से बना लिए हैं स्टॉपेज पथ निर्माण विभाग ने जब केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के साथ राजधानी के जाम को नियंत्रित किए जाने की योजना पर काम आरंभ किया तो यह बात सामने आयी कि ऑटो व ई रिक्शा चालकों की वजह से समस्या अधिक है। इन लोगों ने अपनी इच्छा से शहर के कई जगहों पर स्टॉपेज बना लिया है। उन जगहों पर ट्रैफिक पुलिस और यहां तक कि अधिकारियों तक की तैनाती पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा। अब तकनीक का इस्तेमाल कर इस बड़ी समस्या को नियंत्रित करने की योजना पर काम होना है। यहां तक कि यह भी देखा जाना है कि जिस ट्रैफिक जवान की तैनाती संबंधित इलाके में है वह अपने जगह पर मौजूद है कि नहीं। इसे देखने के लिए भी तकनीक का इस्तेमाल किया जाना है। हर इलाके की ट्रैकिंग के लिए खास तरह की तकनीक हर इलाके में ट्रैफिक जाम की ट्रैकिंग के लिए खास तरह की तकनीक की व्यवस्था की जा रही है। संबंधित इलाके में ट्रैफिक जाम को नियंत्रित किए जाने काे ले पहले ही मैजिस्ट्रेट व डीएसपी स्तर के अधिकारी की तैनाती है। ट्रैकिंग की रिपोर्ट तुरंत उन्हें दी जाएगी। उन्होंने सूचना पर क्या किया इस पर भी तुरंत रिपोर्ट उपलब्ध होगी।  

सीएम धामी ने विद्यार्थियों से किया सीधा संवाद, कहा—युवा ही देश और प्रदेश के भविष्य के निर्माता

देहरादून   मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने  हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित प्रेक्षागृह में ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ विषय पर आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में  प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशभर से जुड़े विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद किया और विकसित उत्तराखंड को लेकर उनके विचारों, सुझावों, सपनों तथा भविष्य की परिकल्पनाओं को जाना। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उनका मार्गदर्शन भी किया। मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विद्यार्थियों की ऊर्जा, उनकी सोच और विकसित उत्तराखंड के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उत्साहवर्धक है। प्रदेश की भावी पीढ़ी को सशक्त, आत्मनिर्भर, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि युवाओं के विचार और सुझाव उत्तराखंड के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आज के विद्यार्थी ही कल के उत्तराखंड और भारत का नेतृत्व करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान को प्रदेश के विद्यार्थियों का व्यापक समर्थन मिला है। अभियान के तहत प्रदेशभर से 2,67,744 विद्यार्थियों ने अपने निबंध एवं विचार भेजे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा व्यक्त किए गए विचार उत्तराखंड के विकास, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनकी सोच, संवेदनशीलता और संकल्प को दर्शाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा लिखे गए निबंधों की सराहना करते हुए कहा कि सभी ने इतनी अच्छी तरह अपने विचार व्यक्त किए हैं कि यह निर्णय करना कठिन है कि किसने अच्छा लिखा और किसने बहुत अच्छा लिखा। संवाद के दौरान रुद्रप्रयाग की कक्षा 11 की छात्रा सीमा सेमवाल ने पलायन विषय पर लिखे अपने निबंध के बारे में मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने इसे दो-तीन दिनों में लिखा है और पलायन को विषय इसलिए चुना, क्योंकि उन्होंने इसे स्वयं महसूस किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में मुख्य रूप से दो प्रकार का पलायन देखा जाता है—स्थायी और अस्थायी। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार के लिए घर से बाहर जाना हमेशा नकारात्मक नहीं होता। बाहर जाकर पढ़ने, सीखने और अनुभव प्राप्त करने से युवाओं को बेहतर एक्सपोजर मिलता है। हालांकि, पहाड़ों में माताओं-बहनों को अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद वे कठिन परिस्थितियों में भी अपने परिवार और समाज को संभालते हुए स्वयं कार्य कर रही हैं तथा दूसरों को भी प्रेरित कर रही हैं। देवप्रयाग की छात्रा श्रेया सेमवाल ने ‘पहाड़ रहें, अपने रहें, मेरे सपने रहें’ विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने पहाड़ों में रोजगार और अवसरों के विस्तार के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहने की आवश्यकता पर विचार रखे। वहीं जीईसी पौड़ी की छात्रा प्रिया ने विकसित उत्तराखंड को लेकर अपने विचार साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है, जब देश का प्रत्येक गांव, प्रत्येक जिला और प्रत्येक राज्य विकास की मुख्यधारा से जुड़े और विकसित हो। छात्रा तमन्ना ने पलायन और खेती से होने वाली कम आय की समस्या को रेखांकित करते हुए कहा—‘मेरा पहाड़, मेरा रोजगार, पत्थर की छाती पर बनेगा रोजगार।’ मुख्यमंत्री ने उनके विचार की सराहना करते हुए कहा कि यह सकारात्मक सोच का परिचायक है। परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं, लेकिन हमारा संकल्प मजबूत होना चाहिए कि जीवन में हमें कुछ बेहतर करना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं को अपनी परिस्थितियों को अवसर में बदलने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। छात्रा सृष्टि ने सरकारी स्कूलों और अस्पतालों के प्रति लोगों के भरोसे से जुड़े सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जैसे व्यक्तित्व साधारण परिवारों से निकलकर देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज की पीढ़ी अच्छे और बेहतर की समझ रखती है। युवाओं को अपने जनपद और प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों तथा विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी रखनी चाहिए और सकारात्मक बदलाव के लिए अपनी भूमिका निभानी चाहिए। रुद्रप्रयाग की छात्रा अनुष्का ने पलायन रोकने से जुड़े अपने विचार साझा किए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, इसके बावजूद सरकार द्वारा गांव-गांव तक बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है और सरकार निरंतर इस दिशा में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 500 से अधिक स्मार्ट क्लास संचालित किए जा रहे हैं तथा रिवर्स माइग्रेशन भी हो रहा है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने का लक्ष्य रखें। इशिका नेगी और गौरव बिष्ट ने पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण तथा चारधाम यात्रा से जुड़े विषयों पर अपने सुझाव साझा किए। विद्यार्थियों ने उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा को संरक्षित रखते हुए पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर भी अपने विचार रखे। छात्र मुकेश कुशवाहा ने स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए छोटे-छोटे गांवों तक हेलीकॉप्टर एंबुलेंस जैसी सुविधा पहुंचाने तथा विद्यालय स्तर पर कौशल विकास की ट्रेनिंग उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने इसे महत्वपूर्ण सुझाव बताते हुए कहा कि सरकार का प्रयास है कि युवाओं को अपनी प्रतिभा और क्षमता का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा रखे गए सभी विचारों और सुझावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड के निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएं और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन उनके लिए विशेष है, क्योंकि उन्हें विद्यार्थियों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला। विद्यार्थियों के विचारों से उनकी परिकल्पना, ज्ञान, संवेदनशीलता और भविष्य को लेकर उनकी सोच का पता चलता है। उन्होंने कहा कि सभी विद्यार्थियों के भीतर आगे बढ़ने और कुछ बेहतर करने की तीव्र इच्छा दिखाई देती है। यही … Read more

मुख्यमंत्री योगी ऊंचाहार में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कथा श्रवण करने पहुंचे

   रायबरेली/ऊंचाहार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब तक भारत की धरती पर पावन कथाओं की परंपरा चलती रहेगी, सनातन की ध्वजा-पताका कभी झुकने नहीं पाएगी। सनातन की पताका ऊंची रहेगी तो भारत का कोई बाल बांका नहीं कर पाएगा। शिव भक्ति भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का आधार है। हिमालय से लेकर रामेश्वरम तक भगवान शिव के पवित्र ज्योतिर्लिंग भारत की सांस्कृतिक एकता और एकात्मकता का दर्शन कराते हैं।   मुख्यमंत्री रविवार को ऊंचाहार में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कथा श्रवण करने पहुंचे। कथा स्थल पर पहुंचते ही वेदपाठी बटुकों ने शंखनाद और डमरू की मंगल ध्वनि के बीच उनका स्वागत किया। प्रदेश सरकार के खाद्य, रसद एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री एवं ऊंचाहार विधायक मनोज पांडेय ने मुख्यमंत्री को शॉल, श्रीफल और कलश में गंगाजल भेंटकर उनका अभिनंदन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने व्यासपीठ को नमन किया और कथा व्यास पंडित प्रदीप मिश्रा का स्वागत एवं अभिनंदन किया। शिव महापुराण कथा का आयोजन कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय की ओर से किया गया है।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सनातन परंपरा में जिसे ईश्वर की भक्ति प्राप्त हो गई, मानो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो गईं। अवध की धरती इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। रामायण में प्रभु की भक्ति हनुमान को मिली तो वे लोकपूज्य हो गए। आज भी प्रत्येक सनातन धर्मावलंबी हनुमान की पूजा और अनुष्ठान से जुड़कर स्वयं को धन्य महसूस करता है। शिव भक्ति भी मनुष्य को इसी प्रकार लोकमंगल और कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ाती है।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में वेशभूषा, खान-पान और रहन-सहन अलग हो सकता है, लेकिन शिव के प्रति भक्ति का भाव एक है। तमिलनाडु के नागरिकों में शिव के प्रति जो भक्ति है, वही उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के श्रद्धालुओं में दिखाई देती है। पूर्वोत्तर से लेकर महाराष्ट्र और गुजरात तक यही भाव है। शिव के ज्योतिर्लिंग उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक भारत की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हैं।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भगवान शिव लोकमंगल के देवता हैं। लोक कल्याण के लिए वे विष को भी धारण कर लेते हैं। वे नकारात्मक शक्तियों को दूर करते हैं और समाज के विकारों को किनारे कर लोकमंगल का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यही सनातन धर्म की सबसे बड़ी पूंजी है। पावन कथाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए और समाज को ऐसे आयोजनों से जुड़ना चाहिए। इनसे मिलने वाली सकारात्मक ऊर्जा समाज और राष्ट्र दोनों को शक्ति प्रदान करती है।   उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ने धर्म को केवल पूजा पद्धति तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे समाज की जीवन शक्ति, व्यक्ति के कर्तव्य और राष्ट्र की प्रेरक शक्ति के रूप में स्वीकार किया है। मध्यकाल में राजनीतिक कमजोरियों के कारण देश को विदेशी आक्रांताओं का सामना करना पड़ा। भारत के धर्मस्थलों और आस्था पर प्रहार हुए, लेकिन व्यासपीठों से निकली आध्यात्मिक धारा ने सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को कमजोर नहीं होने दिया।   मुख्यमंत्री योगी ने गोस्वामी तुलसीदास का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मध्यकाल में रामकथा के माध्यम से समाज को जोड़ने और उसकी चेतना जगाने का कार्य किया। उन्हें अकबर के दरबार में नवरत्न बनने का प्रस्ताव मिला, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि उनका राजा केवल राम हैं। उस कठिन कालखंड में रामलीलाओं और रामकथा के माध्यम से 'राजा रामचंद्र की जय' का उद्घोष समाज की चेतना जगाने वाला शंखनाद था। व्यासपीठों ने हर कालखंड में समाज को नई प्रेरणा देने के साथ राष्ट्र के उन्नयन की नींव मजबूत की है।   मुख्यमंत्री योगी ने उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में मर्यादा की बात होती है तो हम अयोध्या की ओर देखते हैं। चेतना की चर्चा होती है तो काशी, भक्ति की बात आती है तो मथुरा-वृंदावन और समरसता की चर्चा होती है तो प्रयागराज की ओर देखते हैं। नैमिषारण्य और शुकतीर्थ की धरती ने हजारों वर्ष पहले ज्ञान की उस परंपरा को आगे बढ़ाया, जिसे ऋषियों ने पुराणों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित किया।   मुख्यमंत्री योगी ने कथा के आयोजन के लिए कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय और उनके परिवार को धन्यवाद दिया। कहा कि ऊंचाहार के लोग सौभाग्यशाली हैं कि उन्होंने ऐसे जनप्रतिनिधि को चुना है, जो क्षेत्र की विरासत को सुरक्षित रखने के साथ विकास को भी आगे बढ़ा रहे हैं। यहां विरासत और विकास दोनों की यात्रा एक साथ चल रही है और यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रहेगी।   मुख्यमंत्री योगी ने कथा व्यास पंडित प्रदीप मिश्रा और उपस्थित श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी शिव महापुराण कथा के रस को अंगीकार कर अपने जीवन और जन्म को धन्य करें। उन्होंने 'नमः पार्वती पतये, हर-हर महादेव' के उद्घोष के साथ अपना संबोधन पूरा किया।