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राजस्थान में BJP का मेगा जनसंपर्क अभियान, 1 महीने तक 13 प्रकल्पों से घर-घर पहुंचेगा मोदी का संदेश

जयपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और राजनीति में 25 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय जनता पार्टी राजस्थान में एक बड़ा और व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रही है। 17 सितंबर से शुरू होकर पूरे 1 महीने तक चलने वाले इस विशेष कार्यक्रम को 'सेवा संकल्प अभियान-जन सेवा ही प्रभु सेवा' नाम दिया गया है। इस अभियान के जरिए बीजेपी कार्यकर्ता केंद्र सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं और पीएम मोदी के 25 वर्षों के समर्पित राजनीतिक सफर को प्रदेश के हर पोलिंग बूथ और आम जनता के घरों तक पहुंचाएंगे। इस राज्य स्तरीय अभियान की रूपरेखा और रणनीतिक तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में शनिवार को एक उच्चस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस 2 घंटे तक चली मैराथन कार्यशाला में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और अभियान की क्षेत्रीय प्रभारी व राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2.5 दशकों की राजनीतिक यात्रा और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण भाव को जन-जन तक ले जाना हर बीजेपी कार्यकर्ता का दायित्व है। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि देश में बीते वर्षों में आए बुनियादी बदलावों और कल्याणकारी योजनाओं की सही जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंचना बेहद जरूरी है। अभियान के तहत पूरे राजस्थान में 13 अलग-अलग प्रकल्पों के माध्यम से सांस्कृतिक, सामाजिक और जनसेवा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार ने कार्यशाला के दौरान 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत आयोजित होने वाले 13 विशेष प्रकल्पों की विस्तृत जानकारी साझा की। 1. आशीर्वाद का दीया: 17 सितंबर 2026 की शाम ठीक 7 बजे प्रदेशभर में कार्यकर्ता और आम नागरिक अपने-अपने घरों में दीप प्रज्ज्वलन करेंगे। 2. सपनों का भारत-सेवा चित्र: स्कूली बच्चों और युवाओं के बीच देश के विकास और भावी भारत से जुड़े रचनात्मक चित्रकला और निबंध कार्यक्रम आयोजित होंगे। 3. नमो सेवा गाथा-सेवा स्मरण: राजस्थान के प्रमुख चौराहों और कस्बों में नुक्कड़ नाटकों के जरिए पीएम मोदी की 25 साल की राजनीतिक यात्रा और सेवा कार्यों को दर्शाया जाएगा। 4. आंगन का उत्सव: राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर कार्यकर्ताओं और पोषण सखियों के साथ विशेष संवाद व सम्मान कार्यक्रम आयोजित होंगे। 5. कहानी बदलाव की: देश और राजस्थान में हुए ढांचागत व सामाजिक बदलावों को ऑडियो-वीडियो और प्रस्तुतियों के जरिए जनता के सामने रखा जाएगा। 6. सेवा ज्योति यात्रा: प्रदेश के विभिन्न जिलों और ग्रामीण आंचलों में जन जागरूकता और सेवा संदेश के साथ यात्राएं निकाली जाएंगी। 7. वडनगर से वाराणसी सेवा यात्रा: पीएम मोदी के जन्मस्थान वडनगर और संसदीय क्षेत्र वाराणसी के जुड़ाव को दर्शाते हुए पवित्र नदियों के जल से हाटकेश्वर महादेव और काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक किया जाएगा। 8. सेवा मेरा योगदान: आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं को सीधे सामाजिक और स्वच्छता अभियानों से जोड़ने के लिए यह सहभागिता कार्यक्रम चलेगा। 9. सेवा सेतु अभियान: समाज के वंचित वर्गों और सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं के बीच समन्वय स्थापित करने का काम किया जाएगा। 10. सेवा के रंग-राष्ट्र के संग: युवाओं और स्थानीय कलाकारों के साथ राष्ट्रभावना से ओत-प्रोत सांस्कृतिक व कलात्मक प्रस्तुतियां होंगी। 11. जन सेवा महाकुंभ: जिला और मंडल स्तर पर स्वास्थ्य जांच शिविर और जन कल्याणकारी मेलों का आयोजन किया जाएगा। 12. रक्तदान महादान: प्रदेश के सभी जिलों में बड़े पैमाने पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। 13. विकसित भारत संकल्प यात्रा: विकसित भारत 2047 के संकल्प और केंद्र सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं का घर-घर प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

बठिंडा के करनदीप का कमाल, 17,618 फीट की ऊंचाई पर 20 घंटे में पूरी की 122 किमी दौड़

बठिंडा. हौसले के आगे ऊंचे पहाड़ भी छोटे पड़ जाते हैं। बठिंडा के करनदीप मोंगा ने लद्दाख की बेहद कठिन परिस्थितियों के बीच आयोजित सिल्क रूट अल्ट्रा चैलेंज में हिस्सा लेकर शहर का नाम रोशन किया है। करनदीप ने नुब्रा वैली से शुरू होकर खारदुंगला पास होते हुए लेह तक की 122 किलोमीटर लंबी दूरी 20 घंटे 36 मिनट और 4 सेकेंड में पूरी की। इस दौरान उन्होंने करीब 17,618 फीट की ऊंचाई पर दौड़ लगाकर अपनी फिटनेस, सहनशक्ति और मजबूत इरादों का परिचय दिया। लद्दाख की ऊंची पहाड़ियों में आयोजित यह अल्ट्रा चैलेंज सामान्य दौड़ से बिल्कुल अलग चुनौती पेश करता है। प्रतिभागियों को लंबी दूरी तय करने के साथ-साथ बेहद ऊंचाई, कम ऑक्सीजन, ठंड, तेज हवाओं और कठिन पहाड़ी रास्तों का सामना करना पड़ता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में 122 किलोमीटर की दौड़ पूरी करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। नुब्रा से खारदुंगला के रास्ते पहुंचे लेह करनदीप की दौड़ नुब्रा वैली से शुरू हुई। यहां से उन्होंने लद्दाख के दुर्गम पहाड़ी मार्गों पर दौड़ते हुए खारदुंगला पास की ओर सफर किया। रास्ते में जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती गई, वैसे-वैसे शरीर पर दबाव भी बढ़ता गया। इसके बावजूद उन्होंने अपनी गति और हौसले को बनाए रखा। खारदुंगला के ऊंचे क्षेत्र से गुजरने के बाद उन्होंने लेह की तरफ दौड़ जारी रखी और आखिरकार 122 किलोमीटर का सफर 20 घंटे 36 मिनट 4 सेकेंड में पूरा कर लिया। 17,618 फीट पर दौड़ना आसान नहीं क चंद कांसल ने कहा कि इतनी अधिक ऊंचाई पर दौड़ लगाना प्रतिभागियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। समुद्र तल की तुलना में यहां ऑक्सीजन काफी कम होती है। ऐसे में लंबे समय तक दौड़ने के लिए शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक मजबूती भी जरूरी होती है। करनदीप ने इन मुश्किल परिस्थितियों का सामना करते हुए अपनी मंजिल हासिल की। बठिंडा के लोगों ने दी बधाई करनदीप मोंगा की इस उपलब्धि की जानकारी मिलने के बाद बठिंडा में खेल प्रेमियों और उनके परिचितों में खुशी का माहौल है। शहरवासियों का कहना है कि लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्र में 122 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन पूरी कर करनदीप ने न केवल अपनी व्यक्तिगत क्षमता साबित की, बल्कि बठिंडा का नाम भी गौरवान्वित किया है। उनकी यह उपलब्धि शहर के युवाओं को फिटनेस और साहसिक खेलों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

पीएम आवास योजना को लेकर BJP का कांग्रेस पर हमला, पोस्टर में दिखाया ‘कुशासन बनाम सुशासन’

रायपुर. पीएम आवास को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत जारी है. मुद्दे पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच बहस की तारीख को लेकर एक तरफ जहां तारीख का इंतजार किया जा रहा है, इस बीच भाजपा ने कांग्रेस या कहें भूपेश बघेल पर सोशल मीडिया में पोस्टर जारी कर फिर से हमला कर दिया है. छत्तीसगढ़ बीजेपी ने सोशल मीडिया में पीएम आवास को लेकर कांग्रेस पर या कहें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधा है. पोस्टर में कांग्रेस के कुशासन और भाजपा के सुशासन का फर्क दिखाया गया है, जिसमें एक तरफ जहां पूर्व सीएम भूपेश बघेल के हाथ में आवास रद्द का पर्चा दिखाया जा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हितग्राहियों को पीएम आवास की चाबी देते नजर आ रहे हैं. कांग्रेस सरकार के समय प्रदेश के जरूरतमंद परिवार मन के पक्का घर के हक ला छीन ले गे रिहिस, फेर आज सुशासन के सरकार म गरीब परिवार मन के सपना साकार होवत हे। भाजपा ने पोस्टर से साथ लिखा है कि कांग्रेस सरकार के समय प्रदेश के जरूरतमंद परिवार मन के पक्का घर के हक ला छीन ले गे रिहिस, फेर आज सुशासन के सरकार म गरीब परिवार मन के सपना साकार होवत हे। माननीय मुख्यमंत्री श्री @vishnudsai जी के प्रयास ले प्रदेश ला 3.65 लाख अतिरिक्त पीएम आवास के स्वीकृति मिलिस। अब गांव-गांव म बनत हे पक्का घर, बढ़त हे रोजगार अउ मजबूत होवत हे परिवार मन के भविष्य। इही तो फर्क हे… कांग्रेस के कुशासन अउ भाजापा के सुशासन म।

जबलपुर के 62 गांवों में मास्टर प्लान का असर, जमीन के उपयोग को लेकर बढ़ी चिंता

जबलपुर. जबलपुर के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2041 को लेकर एक बार फिर जमीन के उपयोग को लेकर हलचल तेज हो गई है। वर्ष 2022 में नियोजन क्षेत्र का दायरा बढ़ाकर 62 गांवों को शामिल किए जाने के बाद अब इन क्षेत्रों के संभावित लैंड यूज को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। पाटन, जबलपुर और पनागर तहसील के कुछ गांवों में बड़े हिस्से को अंतिम योजना में कृषि या ग्रीन बेल्ट के रूप में रखे जाने की संभावना चर्चा में है। इससे जमीन मालिकों और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े लोगों की निगाहें अंतिम लैंड यूज मैप पर टिक गई हैं। हालांकि, अभी इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। संबंधित गांवों का वास्तविक भू-उपयोग मास्टर प्लान की प्रक्रिया पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद जारी होने वाली अंतिम अधिसूचना से ही स्पष्ट होगा। इन गांवों की जमीन पर सबसे ज्यादा नजर पाटन तहसील के नुहारी, बिनेकी और टिमरी, जबलपुर तहसील के खमरिया, पिपरिया कला, नौमखेड़ा और कोसमघाट तथा पनागर तहसील के पिपरिया, मगेला, पटना और बरौदा सहित कुछ गांवों को लेकर भू-उपयोग की चर्चाएं अधिक हैं। यदि इन क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा कृषि या ग्रीन बेल्ट में निर्धारित होता है तो वहां आवासीय कॉलोनी, टाउनशिप अथवा अन्य गैर-कृषि विकास भू-उपयोग नियमों और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अधीन होगा। इसके विपरीत आवासीय या मिश्रित उपयोग वाले क्षेत्रों में नियोजित विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। 2022 में बढ़ा था नियोजन क्षेत्र शहर के अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करने और भविष्य के विकास को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में जबलपुर के नियोजन क्षेत्र का विस्तार किया गया था। इसमें 62 गांवों को शामिल किया गया। इसके साथ इन क्षेत्रों में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, परिवहन और हरित क्षेत्र के नियोजन की प्रक्रिया नगर तथा ग्राम निवेश व्यवस्था के दायरे में आ गई। अब जमीन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अंतिम योजना में उनकी भूमि किस श्रेणी में आती है। यही स्थिति भविष्य में जमीन के विकास और उपयोग की दिशा तय करेगी। धारा 16 के तहत विकास योजना अहम मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के तहत विकास योजना के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के नियोजित भू-उपयोग का निर्धारण किया जाता है। ऐसे में 62 गांवों के लिए तैयार किए जा रहे अंतिम लैंड यूज मैप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जमीन मालिकों और डेवलपर्स की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि प्रस्तावित उपयोग के आधार पर भूमि पर भविष्य की विकास गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। खासकर जिन क्षेत्रों को शहरी विस्तार की संभावनाओं के आधार पर निवेश योग्य माना जा रहा है, वहां अंतिम भू-उपयोग का निर्धारण महत्वपूर्ण होगा। डेवलपर्स को भी अंतिम नक्शे का इंतजार 62 गांवों के नियोजन क्षेत्र में आने के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र की गतिविधियां भी इस बात पर निर्भर करेंगी कि किन इलाकों को आवासीय, मिश्रित, कृषि या हरित क्षेत्र में रखा जाता है। क्रेडाई सहित रियल উভয় एस्टेट क्षेत्र से जुड़े संगठन भी मास्टर प्लान को स्पष्ट रूप से लागू करने और भू-उपयोग की स्थिति जल्द सामने लाने की मांग करते रहे हैं। देरी ने बढ़ाया असमंजस मास्टर प्लान 2041 की प्रक्रिया लंबे समय से चर्चा में है। सितंबर 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट में भी 62 गांवों को नियोजन क्षेत्र में शामिल किए जाने, योजना के मसौदा स्तर पर होने तथा आपत्तियों और सुझावों की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया था। अंतिम स्वरूप सामने नहीं आने से जमीन मालिकों के लिए यह तय करना मुश्किल बना हुआ है कि भविष्य में उनकी भूमि का नियोजित उपयोग क्या होगा।जबलपुर के विस्तार की दृष्टि से 62 गांवों का नियोजन क्षेत्र में शामिल होना महत्वपूर्ण है।

अबुआ दवाखाना में एलोपैथी संग आयुर्वेद-होम्योपैथी की दवाएं भी मुफ्त, झारखंड सरकार ने मंजूर किए ₹37.25 करोड़

रांची  राज्य के 746 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में खुलनेवाली अबुआ दवाखाना में एलोपैथी के अलावा होम्योपैथी, आयुर्वेद, यूनानी तथा सिद्धा की दवाएं मिलेंगी। सबसे बड़ी बात यह है कि मरीजों को यह दवा मुफ्त मिलेगी। इसके लिए उन्हें कोई शुल्क नहीं देना होगा। राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 37.25 करोड़ रुपये का एकमुश्त प्रविधान किया है। वहीं, इन दवाखानों के संचालन के लिए 7.45 प्रति वर्ष करोड़ रुपये खर्च होंगे। ये दवाखाना इंटीग्रेटेड मेडिकल स्टोर के रूप में काम करेगी। राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत योजना के तहत प्रत्येक केंद्र के संचालन के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (सीएचओ) को एकमुश्त पांच लाख रुपये दिए जाएंगे। इस राशि से बुनियादी ढांचा का निर्माण होगा तथा रेक, आलमारी, कंप्यूटर, रेफ्रीजरेटर, पावर बैकअप आदि की व्यवस्था की जाएगी। दवाखाना का संचालन पूर्व से नियुक्त योग प्रशिक्षक द्वारा किया जाएगा, जिसे पारिश्रमिक के रूप में प्रतिमाह तीन हजार रुपये दिए जाएंगे। प्रत्येक केंद्र को प्रोत्साहन राशि, इंटरनेट, रजिस्टर आदि के लिए एक लाख रुपये दिए जाएंगे। सभी केंद्रों में राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अनिवार्य दवा की आपूर्ति सिविल सर्जन तथा जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी के माध्यम से की जाएगी। गठित की जाएगी कमेटी इस योजना की निगरानी के लिए प्रखंड से लेकर राज्य स्तर पर कमेटी गठित की जाएगी। जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी, जिसमें जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी सदस्य सचिव तथा सिविल सर्जन सदस्य होंगे। इसी तरह, प्रखंड स्तर पर प्रखंड विकास पदाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी, जिसमें प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सदस्य सचिव तथा सीएचओ सदस्य होंगे। राज्य स्तर पर प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट की स्थापना की जाएगी, जिसमें आयुष उपनिदेशक के अलावा आईटी के जानकार तथा फार्मासिस्ट भी शामिल रहेंगे। योजना के संचालन के लिए नोडल कार्यालय आयुष निदेशालय होगा।

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पर योगी सरकार का बड़ा कदम, डॉक्टरों के लिए बनेगा इलाज का स्पष्ट रोडमैप

लखनऊ  प्रदेश में एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध और अनियंत्रित इस्तेमाल से बढ़ रहे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) को रोकने के लिए यूप सरकार नई पहल करने जा रही है। अब प्रदेश में एंटीबायोटिक दवाओं के प्रयोग को लेकर एक नई गाइडलाइन तैयार की जाएगी, ताकि मरीजों को जरूरत के अनुसार ही सही एंटीबायोटिक दी जा सके और दवाओं के प्रति बैक्टीरिया में बढ़ते प्रतिरोध को रोका जा सके। केजीएमयू में वर्ल्ड सेप्सिस डे पर शनिवार को आयोजित दो दिवसीय कान्फ्रेंस के दौरान अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते प्रयोग के कारण दवा प्रतिरोध एक गंभीर चुनौती बनकर सामने आ रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए प्रदेश स्तर पर प्रभावी व्यवस्था बनाने की जरूरत है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि नई गाइडलाइन बनाने की प्रक्रिया आखिरी दौर में है। इस माह के आखिरी सप्ताह या अक्टूबर पहले सप्ताह तक शासनादेश जारी हो जाएगा। एंटीबायोटिक के दुरुपयोग पर दैनिक जागरण की ओर से बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा चुका है, जिसके बाद सरकार अब महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। जरूरत के मुताबिक ही होगी एंटीबायोटिक की सलाह अमित घोष का कहना है कि नई गाइडलाइन का उद्देश्य डाक्टरों को एंटीबायोटिक के उचित चयन और उपयोग के लिए एक स्पष्ट रोडमैप उपलब्ध कराना होगा। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि सामान्य संक्रमणों में बिना जरूरत एंटीबायोटिक न दी जाए और गंभीर संक्रमण की स्थिति में मरीज की बीमारी तथा संक्रमण की प्रकृति के अनुसार प्रभावी दवा का चयन किया जाए। एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल कई स्तर पर हो रहा है। वायरल संक्रमण में भी कई बार एंटीबायोटिक का प्रयोग कर लिया जाता है, जबकि वायरस पर एंटीबायोटिक का प्रभाव नहीं होता। इसके अलावा मरीजों द्वारा बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेना, निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले दवा बंद कर देना और जरूरत से अधिक शक्तिशाली एंटीबायोटिक का इस्तेमाल भी रेजिस्टेंस बढ़ने की प्रमुख वजह है। दवा बेअसर होने का बढ़ रहा खतरा केजीएमयू में पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग करे अध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश के मुताबिक, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की स्थिति में बैक्टीरिया दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं। ऐसे में पहले प्रभावी रहने वाली दवाएं संक्रमण पर असर करना बंद कर देती हैं। इसके बाद मरीज के इलाज के लिए दूसरी और अधिक शक्तिशाली दवाओं का सहारा लेना पड़ता है। इससे इलाज जटिल होने के साथ ही खर्च और अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी बढ़ सकती है। प्रदेश में भी दवा प्रतिरोध को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। हाल के अध्ययनों में कई बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक प्रतिरोध बढ़ने की बात सामने आ चुकी है। अस्पतालों में संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को गंभीर चुनौती माना गया है। अब इसको लेकर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। डॉक्टरों के लिए भी बनेगा स्पष्ट रोडमैप प्रो. वेद प्रकाश के मुताबिक, प्रस्तावित गाइडलाइन के जरिए चिकित्सकों को विभिन्न प्रकार के संक्रमणों में एंटीबायोटिक के चयन और उसके उचित इस्तेमाल के संबंध में दिशा-निर्देश दिए जारी होंगे। इसका मकसद मरीजों को एक जैसी और वैज्ञानिक आधार पर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना होगा। एंटीबायोटिक शुरू करने से पहले संक्रमण की गंभीरता का आकलन, जरूरत पड़ने पर जांच और कल्चर रिपोर्ट का उपयोग तथा दवा की सही अवधि तय करना रेजिस्टेंस रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गाइडलाइन बनने के बाद सरकारी चिकित्सा संस्थानों के साथ ही अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी एंटीबायोटिक के जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, सर्दी-जुकाम, सामान्य बुखार और कई वायरल संक्रमणों में मरीज स्वयं एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं। यह प्रवृत्ति बेहद खतरनाक हो सकती है। एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के इलाज में उपयोगी होती हैं, जबकि वायरल संक्रमण पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ऐसे में आम लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत है कि वे डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक न लें और न ही पुरानी बची हुई दवाओं का इस्तेमाल करें।

Moga: गणेश चतुर्थी के मद्देनजर पनीर-खोया की जांच, 10 नमूने लिए गए

मोगा. गणेश चतुर्थी और आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरी के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। मोगा में खाद्य सुरक्षा टीम ने हलवाइयों और डेयरी दुकानों पर विशेष जांच करते हुए पनीर और खोया के कुल 10 नमूने लिए। सभी नमूनों को जांच के लिए सरकारी खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद गुणवत्ता में कमी या मिलावट पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डिप्टी कमिश्नर मोगा सागर सेतिया के दिशा-निर्देशों और जिला स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. संदीप सिंह की अगुवाई में खाद्य सुरक्षा टीम ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जांच अभियान चलाया। टीम ने टुडीके, चूड़चक्क, मुख्य बाजार मोगा, कोटकपूरा मार्ग, गांधी मार्ग और फिरोजपुर मार्ग सहित कई क्षेत्रों में स्थित हलवाइयों और डेयरी दुकानों की जांच की। दुकानों पर साफ सफाई की भी हुई बात जांच के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के साथ दुकानों में साफ-सफाई, खाद्य सामग्री तैयार करने और उसके भंडारण की व्यवस्था भी देखी गई। अधिकारियों ने कारोबारियों को खाद्य पदार्थ तैयार करने में अच्छी गुणवत्ता वाले कच्चे माल का इस्तेमाल करने और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. संदीप सिंह ने बताया कि त्योहारों के दौरान दूध, पनीर, खोया और मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में मिलावट की आशंका को देखते हुए विभाग की ओर से लगातार निगरानी और नमूने लिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सभी नमूने सरकारी प्रयोगशाला भेजे गए हैं और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। मिलावट मिली तो होगी कानूनी कार्रवाई – यदि किसी नमूने में मिलावट, घटिया गुणवत्ता या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित खाद्य कारोबारी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। कारोबारियों को स्वच्छता रखने की हिदायत खाद्य सुरक्षा टीम ने हलवाइयों और डेयरी संचालकों को दूध व दुग्ध उत्पाद तैयार करते समय साफ-सफाई रखने, स्वीकृत खाद्य रंग का ही निर्धारित मात्रा में इस्तेमाल करने और गैर-स्वीकृत रंग या रसायन का प्रयोग नहीं करने की हिदायत दी। कच्चे और तैयार खाद्य पदार्थ अलग रखने तथा उचित तापमान पर सामग्री का भंडारण करने को कहा गया। विभाग ने सभी खाद्य कारोबारियों को अपना लाइसेंस या पंजीकरण वैध रखने और खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश भी दिए। डा. संदीप सिंह ने कहा कि त्योहारी सीजन में जांच अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाना है। खाने से पहले देख लें ये पॉइंट्स – पनीर में साबुन या रसायन जैसी गंध असामान्य स्वाद या बहुत ज्यादा चिकनापन बहुत ज्यादा सफेद, असामान्य रूप से मुलायम या रबर जैसा पैकेट वाला पनीर खरीदते समय लेबल, सामग्री और निर्माता की जानकारी जरूर देखें आयोडीन से खुद पनीर की करें जांच – आयोडीन से घर पर पनीर में स्टार्च की मिलावट की जांच की जा सकती है। पनीर को पानी में उबालकर ठंडा करने के बाद आयोडीन डालने पर नीला रंग आने पर स्टार्च होने की आशंका होती है। हालांकि यह जांच डिटर्जेंट की नहीं है। पर, इससे डिटर्जेंट की भी शंका का समाधान किया जा सकता है। डिटर्जेंट की पक्की पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही हो सकती है।

जिंदल स्टील ने रचा इतिहास, दुनिया की सबसे लंबी स्टील स्लैग रोड बनाकर बनाया गिनीज रिकॉर्ड

रायगढ़. रायगढ़ में जिंदल स्टील ने देश के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कंपनी ने फैक्ट्रियों से निकलने वाले स्टील कचरे (स्टील स्लैग) का 100% इस्तेमाल करके 1.85 किलोमीटर लंबी 4-लेन सड़क बनाई है। पूरी तरह से प्रोसेस किए गए स्टील स्लैग से बनी यह दुनिया की सबसे लंबी सड़क है, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है। इस सड़क का उद्घाटन नयी दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह एवं जिंदल स्टील लिमिटेड के चेयरमैन नवीन जिंदल ने आॅनलाइन किया। कचरे से कंचन (वेस्ट टू वेल्थ) का सपना साकार करने वाली इस सड़क के निर्माण में लगभग 2 लाख टन प्रोसेस्ड स्टील स्लैग का इस्तेमाल हुआ है। इससे प्राकृतिक पत्थरों की खुदाई और खनन पर निर्भरता खत्म हुई है। यह सड़क सिर्फ दिखाने के लिए नहीं, बल्कि भारी कमर्शियल गाड़ियों (ट्रक आदि) की आवाजाही को ध्यान में रखकर बेहद मजबूत बनाई गई है। इससे पैसे और संसाधनों की बचत होगी। पारंपरिक सड़कों के मुकाबले यह सड़क लगभग 35% पतली है और इसे बनाने में करीब 40% लागत की बचत हुई है।   जिंदल स्टील ने सीएसआईआर और सड़क अनुसंधान संस्थान के साथ मिलकर इस स्लैग को वैज्ञानिक प्रक्रिया (क्रशिंग, मेटल निकालना और ग्रेडिंग) के जरिए सड़क बनाने लायक पत्थरों में बदला और सड़क की सबसे निचली परत से लेकर ऊपरी डामर (बिटुमिन) की परत तक इसी का इस्तेमाल किया। सभी कड़े पर्यावरणीय परीक्षणों के बाद ही इसे मंजूरी दी गई है। जिन्दल स्टील के चेयरमैन नवीन जिंदल ने इस अवसर पर कहा  कि  भारत की तरक्की ऐसे नए प्रयोगों से होनी चाहिए जो पर्यावरण को बचाते हुए देश को फायदा पहुंचाएं। यह तकनीक दिखाती है कि कैसे उद्योग का कचरा देश निर्माण का जरिया बन सकता है। डॉ. जितेंद्र सिंह (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री) ने कहा कि यह प्रोजेक्ट 'वेस्ट टू वेल्थ' (कचरे से संपत्ति) के सपने को साकार करता है। यह साबित करता है कि हमारी स्वदेशी तकनीक से देश की बड़ी समस्याओं का हल निकाला जा सकता है। जिंदल स्टील ने इस प्रोसेस्ड स्लैग का नाम स्टील ग्रिट रखा है। इसका लोगो आज लोकार्पित किया गया। इस तकनीक को देश भर में बाकी सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल करने के लिए एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं। इस्पात संयंत्रों से निकलने वाले स्लैग का उच्च गुणवत्ता वाली सड़क निर्माण में उपयोग करने का मार्ग प्रशस्त करने वाली इस मील का पत्थर परियोजना का निर्माण जिंदल सीमेंट परियोजना स्थल को नेशनल हाइवे—49 से सीधे जोड़ने के लिए किया गया है। परियोजना के दौरान देश के कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने निरंतर दौरा कर इसका निरीक्षण किया एवं महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विगत दिनों गिनीज बुक आॅफ वल्र्ड रिकाड्र्स की टीम ने भी रायगढ़ का दौरा कर स्थल का मुआयना किया। शनिवार को उद्घाटन समारोह के दौरान जिंदल स्टील लिमिटेड रायगढ़ के समस्त अधिकारी—कमर्चारी आॅनलाइन माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।

Gwalior-Jhansi Bypass होगा सुरक्षित, 109 करोड़ की लागत से बनेंगे 3 अंडरपास और फ्लाईओवर

ग्वालियर. एनएच-44 के ग्वालियर-झांसी बायपास रूट पर सिकरौदा के बाद अब तीन पॉइंट पर और फ्लाई ओवर एवं अंडरपास बनेंगे। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के इस प्लान को स्वीकृति मिल गई है और अब कंस्ट्रक्शन कंपनियों के साथ फाइनल एग्रीमेंट हो गए हैं। बताया जा रहा है कि बारिश के बाद बिलौआ, कल्याणी और अर्रू तिराहे पर फ्लाई ओवर व अंडरपास का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इन तीनों स्थानों पर होने वाले कामों पर करीब 109 करोड़ 43 लाख रुपये खर्च होंगे। सिकरौदा, बिलौआ, कल्याणी व अर्रू तिराहे पर लगातार होने वाले एक्सीडेंट को देखते हुए यह निर्णय जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में लिया गया था। जिसमें समिति अध्यक्ष व सांसद भारत सिंह कुशवाह ने एनएचएआई से डीपीआर तैयार कराई थी और फिर केंद्र सरकार से राशि स्वीकृत कराई। अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद तिराहे पर होने वाले हादसों में कमी आएगी। यह निर्माण कार्य अगले महीने अक्तूबर में शुरू हो जाएगा। इसके तहत अलग-अलग पॉइंट्स की समस्या का समाधान हो सकेगा। हादसे के बड़े कारण… सिकरौदा और अर्रू तिराहा ग्रामीणों और स्थानीय वाहनों के आवागमन के लिए अवैध कट बने हुए हैं, जहां से अचानक वाहन मुख्य हाइवे पर आ जाते हैं। क्रेशर व हैवी माइनिंग ट्रैफिक बिलौआ क्रेशर मंडी क्षेत्र से यहां मिट्टी व पत्थरों से लदे डंपर, ट्रक व ओवरलोडेड वाहन अनियंत्रित गति में हाइवे पर आते हैं। ओवरटेकिंग एनएच-44 पर वाहन 100-120 किमी घंटा से अधिक की रफ्तार में चलते हैं। तिराहे या मोड़ पर अचानक ब्रेक लगाने का समय नहीं मिलता। स्ट्रीट लाइट और संकेतक कल्याणी व अर्रू तिराहे के पास रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था और सर्विस रोड/साइन बोर्ड न होने से दूर से आ रहे वाहनों को मोड़ का अंदाजा नहीं लगता। रॉन्ग-साइड ड्राइविंग स्थानीय ग्रामीण और क्रेशर क्षेत्र के वाहन चालक समय और दूरी बचाने के चक्कर में हाइवे की गलत दिशा में वाहन चलाते हैं, जो कई बार आमने-सामने की भिड़ंत का कारण बनता है। लोगों को मिलेगी राहत इस बायपास पर सबसे बड़ा ब्लैक स्पॉट सिकरौदा तिराहे पर है। जहां आए दिन बड़े हादसे होते हैं और अब तक सैकड़ों लोगों की मौत इन हादसों में हो चुकी है। अब यहां एक फ्लाई ओवर बनने से सड़क हादसों में कमी आएगी।

पुराने लखनऊ में मेट्रो का रास्ता साफ, चारबाग से बसंतकुंज तक बनेगा 11 KM का ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर

लखनऊ लखनऊ मेट्रो (Lucknow Metro) का दायरा बढ़ाने की तैयारी है। पुराने लखनऊ की तंग गलियों, घने बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों के बीच अब मेट्रो दौड़ने की राह साफ हो गई है। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के फेज-1बी का भूमिगत रूट फाइनल कर लिया गया है। करीब 11.165 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में 6.879 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत और 4.286 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड रहेगा। भूमिगत हिस्से में सात स्टेशन बनाए जाएंगे, जबकि एलिवेटेड सेक्शन में पांच स्टेशन होंगे। चारबाग से बसंतकुंज तक इस नए कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत इसका पुराने लखनऊ से होकर गुजरना है। यहां सड़कें अपेक्षाकृत संकरी हैं और बड़ी संख्या में बाजार, आबादी और प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक स्थल आसपास हैं। ऐसे में सड़क के ऊपर मेट्रो का ढांचा खड़ा करने के बजाय बड़े हिस्से को जमीन के नीचे ले जाने की योजना बनाई गई है। इससे निर्माण के दौरान सतही यातायात और बाजारों पर असर को सीमित रखने में मदद मिलेगी। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर की शुरुआत चारबाग से होगी। चारबाग को इंटरचेंज स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे मौजूदा उत्तर-दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर से आने-जाने वाले यात्रियों को नए ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर में सीधे ट्रांजिट की सुविधा मिलेगी। यानी चारबाग आने वाला यात्री मेट्रो बदले बिना नहीं, बल्कि इंटरचेंज से शहर के दूसरे हिस्सों में बढ़ सकेगा। चारबाग पहले से ही रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और मेट्रो नेटवर्क का प्रमुख परिवहन केंद्र है। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर जुड़ने के बाद इसकी भूमिका और बढ़ेगी। 4.28 किमी हिस्सा एलिवेटेड भूमिगत हिस्से के बाद कॉरिडोर का 4.28 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा। इस पर पांच स्टेशन बनाए जाएंगे। एलिवेटेड सेक्शन वसंतकुंज को आगे बढ़ेगा और इसमें बसंतकुंज, ठाकुरगंज, बालागंज, सरफराजगंज, और मूसाबाग स्टेशन रहेंगे। कॉरिडोर का मकसद पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को मेट्रो से जोड़ना है। पुराने लखनऊ में सड़क नेटवर्क सीधा और चौड़ा नहीं है। बाजारों और आबादी के बीच से गुजरते हुए मेट्रो के भूमिगत ट्रैक को कई जगह मोड़ लेना पड़ेगा। यही वजह है कि नए कॉरिडोर का भूमिगत हिस्सा काफी घुमावदार रहेगा। कई जगह ऊपर पार्क और चौराहे नजर आएंगे, नीचे भूमिगत स्टेशन और ट्रैक होंगे। मेट्रों और रोड परियोजनाओं को तय समय में पूरा करें: मुख्य सचिव इससे पहले मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने प्रदेश में संचालित मेट्रो एवं सड़क परियोजनाओं को बेहतर समन्वय के साथ तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिया। गुरुवार को प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग ग्रुप की बैठक की अध्यक्षता करते हुए एसपी गोयल ने कहा कि सभी संबंधित विभागों एवं कार्यदायी संस्थाओं के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर लंबित कार्यों का शीघ्र निस्तारित किए जाएं ताकि विकास परियोजनाओं का लाभ आमजन को जल्द मिल सके।