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राजस्थान SET 2026: 13 सितंबर को परीक्षा, सुबह 10 बजे बाद नहीं मिलेगा प्रवेश

 कोटा कोटा विश्वविद्यालय की ओर से 13 सितम्बर को सहायक आचार्य के लिए राज्य पात्रता परीक्षा (सेट)-2026 आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा 7 संभाग जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा, अजमेर व भरतपुर में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक एक पारी में ऑफलाइन मोड पर होगी। इसमें 37 विषयों में इस वर्ष 1 लाख 77 हजार 901 अभ्यर्थी पंजीकृत हुए हैं। सात संभागीय मुख्यालयों में कुल 429 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जयपुर में सबसे अधिक 78 हजार तो भरतपुर में सबसे कम 8 हजार से अधिक अभ्यर्थी बैठेंगे। इसके अलावा जोधपुर में 22,609, बीकानेर 22,281, उदयपुर 17,320, कोटा 14839, अजमेर संभाग में 13,753 अभ्यर्थी शामिल होंगे। कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बीपी सारस्वत ने बताया कि परीक्षा का आयोजन यूजीसी-नेट के नवीनतम मानकों के अनुरूप किया जाएगा। परीक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए कोटा विश्वविद्यालय में केंद्रीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। परीक्षा की सुरक्षा, गोपनीयता और संवेदनशीलता से जुड़े सभी मानकों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने अभ्यर्थियों से निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने और परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचने की अपील की। प्रवेश के लिए ये दस्तावेज जरूरी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर प्रवेश-पत्र की रंगीन प्रति, मूल फोटोयुक्त पहचान-पत्र के रूप में केवल आधार कार्ड तथा ऑनलाइन आवेदन के समय अपलोड की गई फोटो से मेल खाती एक रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो साथ लानी होगी। अभ्यर्थियों की रिपोर्टिंग सुबह 9 से 10 बजे तक होगी। 10 बजे बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। परीक्षा समन्वयक प्रो. घनश्याम शर्मा ने बताया कि प्रवेश-पत्र पर अंकित परीक्षा केंद्र और रोल नंबर के कोड को केवल सांकेतिक न मानते हुए परीक्षा केंद्र की वास्तविक लोकेशन पहले से सुनिश्चित कर लें। इसके लिए परीक्षा से एक दिन पूर्व केंद्र पर जाकर स्थान की जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी गई है, ताकि परीक्षा के दिन किसी प्रकार की परेशानी न हो। मोबाइल, स्मार्ट वॉच और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण प्रतिबंधित 1- परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परीक्षा कक्ष में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर सहित किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, पुस्तक, नोट्स आदि ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। 2- अभ्यर्थियों को आधी आस्तीन के हल्के रंग के कपड़े तथा कम हील वाली चप्पल या सैंडल पहनकर आने की सलाह दी गई है। 3- धार्मिक, पारंपरिक अथवा सांस्कृतिक पोशाक में आने वाले अभ्यर्थियों की सुरक्षा जांच के दौरान विशेष रूप से तलाशी ली जाएगी। अभ्यर्थी अपने साथ केवल काले या नीले बॉल पेन लेकर आएं। 4- ओएमआर शीट पर व्हाइटनर, ब्लेड अथवा किसी अन्य वस्तु का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। 5- अनुचित साधनों का प्रयोग करते पाए जाने वाले अभ्यर्थियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

कोविड से मौत पर अस्पताल का मृत्यु प्रमाण पत्र पर्याप्त, तकनीकी आधार पर मुआवजा रोकना गलत: हाईकोर्ट

पटना पटना हाईकोर्ट ने कोरोना से मौत मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। कहा कि कोविड से मौत मामले में तकनीकी आधार पर मुआवजा रोकना गलत है। अस्पताल का मृत्यु प्रमाण पत्र विश्वसनीय सबूत होता है। सिर्फ आरटीपीसीआर रिपोर्ट नहीं होने पर विधवा का हक नहीं छीना जा सकता। न्यायमूर्ति आलोक कुमार ने मुंगेर की आशा देवी की अर्जी पर अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर अनुग्रह राशि भुगतान करने का आदेश दिया। कोर्ट को बताया गया कि आवेदिका के पति अजय कुमार शर्मा की मृत्यु 21 मई 2021 को मुंगेर के सिटी क्रिटिकल हॉस्पिटल में हो गई थी। मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण कोविड-19 दर्ज है। जिला प्रशासन ने उन्हें कोविड मृतकों की सूची में रखा और राशि भी आवंटित की। लेकिन भुगतान नहीं किया गया। मृतक की पत्नी ने आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य विभाग और मुंगेर डीएम को विस्तृत अभ्यावेदन दिया। पर जिला स्वास्थ्य समिति ने आरटी पीसीआर रिपोर्ट नहीं होने का हवाला दे दावा खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, टेस्ट रिपोर्ट के अभाव में किसी को मुआवजे से वंचित करने का आधार नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि कोविड सर्टिफिकेट या टेस्ट रिपोर्ट नहीं होना निर्णायक नहीं हो सकता है। अस्पताल का प्रमाण पत्र और जिला स्तरीय सूची में नाम है, तो तकनीकी आधार पर राशि नहीं देना गलत है। कोविड के दौरान इलाज में लापरवाही पर अस्पताल सील कोविड के दौरान इलाज में लापरवाही पर पटना के कुम्हरार स्थित भागवत नगर स्थित पुष्पांजलि मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल को सिविल सर्जन ने सील कर दिया। जिला प्रशासन और पुलिस से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाने को आवेदन भी दिया गया है। यह कार्रवाई 2021 में आई कोरोना की दूसरी लहर में भारती देवी नाम की महिला की मौत के मामले में की गई है। मामले में परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने और अधिक बिल देने का आरोप लगाया था। परिजनों ने सिविल सर्जन के पास शिकायत की थी। इसके बाद मेडिकल बोर्ड बैठी थी। सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अस्पताल के विरुद्ध कार्रवाई की गई। अस्पताल के साथ वहां के चिकित्सकों और अन्य कर्मियों के खिलाफ भी शिकायत का उल्लेख है। पत्र की प्रतिलिपि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है। सिविल सर्जन ने कहा कि अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाना प्रभारी को आवेदन दिया गया है। जांच में जो तथ्यों आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई होगी।

झारखंड वोटर लिस्ट में नाम के लिए दूसरे राज्य का दस्तावेज भी चलेगा

 रांची यदि आप झारखंड में निवास कर रहे हैं और आपका जन्म दूसरे किसी राज्य में हुआ है तो विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए वहां का भी बना आपका दस्तावेज मान्य होगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम सम्मिलित होने के लिए उसका भारत का नागरिक होना, संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना तथा संबंधित अर्हता तिथि (वर्तमान एसआइआर के लिए एक अक्टूबर 2026) को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करना आवश्यक है। उनके अनुसार, झारखंड की मतदाता सूची में ऐसे मतदाता भी पंजीकृत हैं, जिनका जन्म अथवा पूर्व निवास किसी अन्य राज्य में रहा है। दावा-आपत्ति एवं सुनवाई की प्रक्रिया के क्रम में यदि ऐसे मतदाताओं को आयु, जन्म अथवा अन्य विवरण के सत्यापन के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने का नोटिस प्राप्त हुआ है, तो वे इससे संबंधित भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर के लिए मान्य दस्तावेज के रूप में अपने संबंधित राज्य के द्वारा जारी किए गए दस्तावेज को प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित दस्तावेज का झारखंड से ही निर्गत होना आवश्यक नहीं है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाता अपने जन्म स्थान, आयु अथवा पारिवारिक संबंध के सत्यापन के लिए वंशावली अथवा सक्षम पदाधिकारी द्वारा निर्गत पारिवारिक सूची, खतियान, शैक्षणिक दस्तावेज सहित निर्वाचन आयोग द्वारा एसआइआर के लिए निर्धारित अन्य मान्य दस्तावेज अपने संबंधित राज्य से प्रस्तुत कर सकते हैं। इन दस्तावेज का परीक्षण संबंधित निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि नोटिस प्राप्त होने पर निर्धारित समय पर सुनवाई में उपस्थित होकर उपलब्ध मान्य दस्तावेज प्रस्तुत करें। उन्होंने निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक मामले में प्रस्तुत दस्तावेज का नियमानुसार परीक्षण करते हुए पात्रता के संबंध में निर्धारित प्रक्रिया के तहत निर्णय सुनिश्चित करें, ताकि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे और किसी भी अपात्र अथवा विदेशी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो।  

पंजाब सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 3 IAS अफसरों के ट्रांसफर; ऋषि पाल को नई जिम्मेदारी

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर तीन IAS अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियों के आदेश जारी किए हैं। सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार 2014 बैच के IAS अधिकारी ऋषि पाल सिंह को पंजाब राज्य महिला आयोग का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही दो अन्य आइएएस अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। 2014 बैच के अधिकारी ऋषि पाल सिंह अब पंजाब राज्य महिला आयोग में सदस्य सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे। आयोग से जुड़े प्रशासनिक कार्यों और विभागीय स्तर पर समन्वय की जिम्मेदारी उनके पास रहेगी। IAS सुखपाल रजिस्ट्रार नियुक्त इसी तरह 2018 बैच के आइएएस अधिकारी सुखजीत पाल सिंह का तबादला करते हुए उन्हें पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना का रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है। वह विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे। IAS अभिजीत संभालेंगे ऊर्जा विकास वहीं, 2015 बैच के आइएएस अधिकारी अभिजीत कपलिश को पंजाब ऊर्जा विकास एजेंसी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें खेल एवं युवा सेवाएं विभाग के निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा गया है। सरकार के इन प्रशासनिक आदेशों के बाद तीनों अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव हुआ है। अभिजीत कपलिश के पास ऊर्जा विकास एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद के साथ खेल एवं युवा सेवाएं विभाग के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा।

Bastar मेडिकल कॉलेज में पैरामेडिकल शिक्षा का विस्तार, डिप्लोमा-डिग्री कोर्स होंगे शुरू

जगदलपुर. डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में इसी सत्र से पैरामेडिकल के डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। पहले चरण में 90 सीटों पर विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा, जिसमें सीटी स्कैन, एक्स-रे, एमआरआई और ऑपरेशन थिएटर जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। खास बात यह है कि प्रशिक्षण केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यार्थियों को आधुनिक चिकित्सा उपकरणों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिलेगा। शरीर रचना विज्ञान, शरीर क्रिया विज्ञान, पैथोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री जैसे विषय भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे। पैरामेडिकल स्टाफ अस्पताल की वह महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसके बिना आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था पूरी नहीं हो सकती। मरीज की जांच से लेकर रिपोर्ट तैयार करने और ऑपरेशन थिएटर तक इनकी भूमिका अहम रहती है। पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद सरकारी सेवा में नियमित नियुक्ति का अवसर युवाओं के लिए इसे और आकर्षक बना रहा है। स्थानीय युवाओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर के लिए बस्तर से बाहर जाने की जरूरत भी कम होगी। इससे एक तरफ युवाओं को रोजगार का रास्ता मिलेगा तो दूसरी तरफ बस्तर के अस्पतालों को प्रशिक्षित तकनीकी मानव संसाधन मिल सकेगा। यानी डिमरापाल में शुरू होने वाला पैरामेडिकल पाठ्यक्रम शिक्षा के साथ रोजगार और स्वास्थ्य व्यवस्था, तीनों मोर्चों पर बड़ा बदलाव ला सकता है।

मंदाकिनी का बढ़ा जलस्तर, चित्रकूट में बारिश के बाद बाढ़ का खतरा; 400 अतिक्रमण से बदली नदी की धार

चित्रकूट /सतना सतना मुख्यालय और तराई इलाके में शुक्रवार रात हुई तेज बारिश के बाद चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है। शनिवार सुबह तक नदी का पानी लगातार बढ़ता रहा। रामघाट समेत दूसरे घाटों की सीढ़ियां पूरी तरह पानी में डूब गईं।  सावधानी के तौर पर प्रशासन ने घाटों पर बैरिकेडिंग लगा दी है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को निचले इलाकों में जाने से रोका गया है। घाट किनारे के दुकानदारों को भी सतर्क रहने और नदी के बढ़ते पानी को देखते हुए सामान सुरक्षित जगह पर हटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन लगातार जलस्तर पर नजर रख रहा है। जलस्तर खतरे से करीब 3 मीटर नीचे फिलहाल राहत की बात यह है कि मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 3 मीटर नीचे है। हालांकि, रातभर हुई बारिश के बाद पानी तेजी से बढ़ने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। पिछले दिनों आई बाढ़ के बाद नदी के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी को लेकर घाटों पर खास नजर रखी जा रही है। शुक्रवार को दिनभर बादल आते-जाते रहे। कभी हल्की बारिश हुई तो कुछ देर बाद तेज धूप निकल आई। इससे अधिकतम तापमान में करीब 2 डिग्री की बढ़ोतरी हुई और पारा 31.9 डिग्री दर्ज किया गया। यह सामान्य से आधा डिग्री ज्यादा रहा। न्यूनतम तापमान 24.4 डिग्री रहा, जो सामान्य था। शाम को मौसम ने अचानक करवट बदली और करीब 15 मिनट तक हल्की से मध्यम बारिश हुई। इसके बाद रात 11.30 बजे से तेज बारिश शुरू हुई, जो रातभर रुक-रुककर जारी रही। 24 घंटे में आधा इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली। ये है मौसम सिस्टम मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र वर्तमान में ओडिशा के ऊपर बना हुआ है। इसके साथ ही मानसून ट्रफ लाइन बंगाल की खाड़ी से छत्तीसगढ़, दक्षिण-पश्चिम मध्यप्रदेश होते हुए राजस्थान तक बनी हुई है। इसके प्रभाव से सतना समेत रीवा संभाग में अगले दौर में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना बनी हुई है। 1000 करोड़ लीटर पानी घरों में घुसा सतना जिले के चित्रकूट में 5 दिनों में 3 बार आई बाढ़ के पीछे अतिक्रमण, अव्यवस्थित विकास और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 12 साल पहले मंदाकिनी के किनारे अतिक्रमण के सर्वे के निर्देश दिए थे। दूसरी ओर आरोप ये भी है कि नदी संरक्षण के लिए बने रिवर फ्रंट कॉरिडोर की वजह से भी प्राकृतिक बहाव प्रभावित हुआ है। 29 अगस्त की बाढ़ से चित्रकूट में 500 करोड़ रुपए से अधिक के नुकसान का अनुमान है, जबकि घरों और दुकानों में करीब 1 हजार करोड़ लीटर पानी घुसने का दावा किया गया है। अब कलेक्टर ने नदी के बहाव में बाधा बने अतिक्रमण चिह्नित करने के लिए 5 सदस्यीय टीम बनाई है। भास्कर ने विशेषज्ञों से बात कर समझा कि अतिक्रमण से मंदाकिनी का बहाव कैसे प्रभावित हुआ, एनजीटी के निर्देश क्या थे और इतने वर्षों में प्रशासन ने क्या कार्रवाई की। कैसे घरों में घुसा 1000 करोड़ लीटर पानी? समझिए इसका वैज्ञानिक गणित पर्यावरणविद और प्रोफेसर घनश्यामदास गुप्ता ने इसका वैज्ञानिक आकलन समझाया। उनके मुताबिक चित्रकूट में मंदाकिनी की लंबाई करीब 5 किलोमीटर (5000 मीटर) है और दोनों किनारों पर कम से कम 100-100 मीटर के दायरे में अवैध निर्माण व अतिक्रमण है। यदि अतिक्रमण वाले दोनों किनारों की लंबाई 5 किलोमीटर और चौड़ाई 100-100 मीटर मानें, तो कुल क्षेत्रफल 10 लाख वर्ग मीटर बनता है। 10 मीटर ऊंचाई मानने पर यह 1 करोड़ क्यूबिक मीटर यानी 1,000 करोड़ लीटर के बराबर होगा। विशेषज्ञ के इस आकलन के मुताबिक, यदि यह जगह उपलब्ध होती तो इतना पानी वहां समा सकता था। अतिक्रमण और निर्माण के कारण पानी के फैलाव की जगह कम होने से बाढ़ का असर बढ़ा। अतिक्रमण हटाने 5 सदस्यीय टीम कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने मंदाकिनी नदी के तटीय क्षेत्रों में हुए निर्माण कार्यों की जांच के लिए मझगवां एसडीएम के नेतृत्व में 5 सदस्यीय टीम गठित की है। टीम सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की गाइडलाइन के आधार पर नदी किनारे के निर्माणों का परीक्षण कर जरूरी वैधानिक कार्रवाई करेगी। जांच टीम में चित्रकूट नगर परिषद के सीएमओ, नायब तहसीलदार, पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग के एसडीओ तथा नगर परिषद के सब इंजीनियर को शामिल किया गया है। टीम नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधक सरकारी और निजी निर्माणों को चिन्हित करेगी। हाई फ्लड लेवल भी होगा तय जांच के दौरान मंदाकिनी नदी के हाई फ्लड लेवल को भी चिन्हित किया जाएगा। बता दें कि 28-29 अगस्त की रात आई बाढ़ के दौरान आरोग्यधाम में नदी का जलस्तर तय हाई फ्लड लेवल 139.60 मीटर से काफी ऊपर पहुंच गया था। प्रशासन के अनुसार जलस्तर करीब 145.76 मीटर तक पहुंचने से चित्रकूट में बड़े पैमाने पर तबाही हुई।

मध्यप्रदेश में हाईटेक होंगी सुगम बसें, CCTV और गेटवे सॉफ्टवेयर से निगरानी; मोबाइल पर मिलेगा टिकट

 इंदौर  बस दुर्घटनाओं को रोकने और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत चलने वाली बसों में कई आधुनिक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। बस शुरू करने से पहले ड्राइवर को अपनी सीट पर लगे ब्रीथ एनालाइजर में फूंक मारनी होगी। यदि उसने शराब पी रखी है तो बस स्टार्ट ही नहीं होगी। इसके साथ ही यात्रियों की सुविधाओं के लिए बस के टिकट ऑनलाइन मिलेंगे। ड्राइवर को झपकी आने पर सेंसर अलार्म के जरिये सचेत करेगा और बस के अपनी लेन से लहराने या रूट बदलने पर भी सुरक्षा सिस्टम सक्रिय हो जाएगा। गुरुवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित यात्री परिवहन विजन समिट में पुणे की एरो ईगल कंपनी की मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए तैयार बस प्रदर्शित की गई। यह बस कंपनी ने संचालन के लिए रीवा को दी है। बसों में ये सुरक्षा इंतजाम     80 किमी की तय रफ्तार : बस की अधिकतम गति 80 किमी प्रति घंटा निर्धारित रहेगी। इससे ज्यादा गति से बस नहीं चलाई जा सकेगी।     सीसीटीवी कैमरे : यात्रियों की निगरानी के लिए बस के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।     साइबर सुरक्षा : बस के इलेक्ट्रानिक सिस्टम को हैकिंग से बचाने के लिए गेटवे सॉफ्टवेयर के जरिये सुरक्षा व्यवस्था की गई है।     आग से सुरक्षा : बस निर्माण में अग्निरोधी प्लाइवुड का इस्तेमाल किया गया है। बैटरी के लिए बस के निचले हिस्से में अलग कंपार्टमेंट है। इसके ऊपर फायर एक्टिंग्विशर लगा है। आग बुझाने के लिए केमिकल और पानी, दोनों की व्यवस्था होगी।     झपकी आई तो अलार्म : ड्राइवर को झपकी आने पर सेंसर उसे अलर्ट करेगा। बस के लहराने पर भी सेंसर सक्रिय होगा, जिससे बस को सीधा रखने में मदद मिलेगी।     दूसरे वाहनों से दूरी : आगे-पीछे करीब 1.5 मीटर की दूरी पर दूसरा वाहन आने पर ड्राइवर को अलर्ट मिलेगा। रिवर्स पार्किंग के लिए भी सेंसर लगाए गए हैं। इंदौर में अभी सात बसें पहुंचीं मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत इंदौर में अभी सात बसें पहुंची हैं। 45 सीटर इन बसों का डिपो में रंगरोगन किया जा रहा है। 25 दिसंबर से इंदौर में 23 रूट पर सेवा शुरू करने की योजना है। एआइसीटीएसएल के माध्यम से इंदौर से सागर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, नरसिंहपुर, छतरपुर, बीना, नर्मदापुरम और बालाघाट के लिए बसें चलाने की योजना है। इसके अलावा खंडवा-शाजापुर, धार-मंदसौर, धार-पचमढ़ी, झाबुआ-भोपाल, खरगोन-नीमच, बुरहानपुर-नीमच, बड़वानी-आगर मालवा, बड़वानी-शाजापुर और बुरहानपुर-रतलाम सहित अन्य मार्गों पर भी बस सेवा प्रस्तावित है। अंदर आरामदायक सफर पर चर्चा, बाहर बस में ठसाठस यात्री ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में यात्री परिवहन समिट के दौरान विशेषज्ञ पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए चार प्रमुख बिंदुओं- रीच, रिलायबिलिटी, कंफर्टेबिलिटी और अफोर्डेबिलिटी पर चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान विजयनगर क्षेत्र में एआईसीटीएसएल की अरविंदो से विजयनगर की ओर आने वाली बस में यात्री ठसाठस भरे थे। कई यात्रियों को बैठने की जगह तक नहीं मिली। खुली खिड़कियों से धूल भी यात्रियों को परेशान कर रही थी। इससे आधुनिक और आरामदायक सार्वजनिक परिवहन की जरूरत साफ नजर आई। यात्रा परिवहन विजन समिट-2026 में विशेषज्ञों के मिले सुझाव     ईवी ट्रांजिशन के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस हो।     बस स्टेशनों को आधुनिक ‘बस पोर्ट’ के रूप में विकसित करें।     छोटे व कम यात्री वाले रूट पर छोटी बसों का संचालन।     बस डिपो पर कमर्शियल गतिविधि, रिटेल और लाजिस्टिक्स से गैर-किराया राजस्व अर्जित करें।     स्मार्ट टिकटिंग और पैसेंजर इंफार्मेशन सिस्टम के माध्यम से बसों के आने-जाने व रूट की रियल टाइम जानकारी।     डिजिटल फीडबैक एवं पारदर्शी शिकायत निवारण व्यवस्था।     आरक्षित, अनारक्षित और नियमित यात्री पास डिजिटल मिलें। मप्र में परिवहन सेवा     96 पीएम ई-बसें और 120 इंटरसिटी बसें संचालित हैं।     6 महीनों में 486 नई पीएम ई-बसें व 34 नई इंटरसिटी बसें बढ़ेंगी।     2027 तक बसों की संख्या बढ़कर 1,100 पहुंचेगी।     7 डिपो हैं व अगले छह माह में सौ-सौ बस क्षमता के 9 नए अत्याधुनिक डिपो बनेंगे।     प्रति वर्ष 70 हजार टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। 300 बसें चल रहीं, जरूरत तीन हजार की इंदौर में वर्तमान में करीब 300 बसें चल रही हैं, जबकि शहर की जरूरत करीब तीन हजार बसों की बताई गई है। प्रदेश में अभी निजी ऑपरेटर करीब 87 प्रतिशत बसों का संचालन कर रहे हैं। फिलहाल 11 हजार बसें प्रदेश में निजी आपरेटर चला रहे हैं और अगले चार वर्ष में 15 हजार बसें चलाने की योजना है। इंदौर में एआईसीटीएसएल के अलावा भोपाल, ग्वालियर, रीवा, जबलपुर, उज्जैन और सागर में अन्य परिवहन कंपनियां संचालन करेंगी। 2030 तक प्रदेश के 30 प्रतिशत हिस्से में होगा पब्लिक ट्रांसपोर्ट     वर्तमान में 87 फीसद बसे निजी ऑपरेटर चला रहे हैं । मप्र में अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पुर्नजीवित होगा। पीएम ई सेवा व मुख्यमंत्री परिवहन सेवा के तहत फिलहाल 10 हजार बसे प्रदेश के शहरों में चलाई जा रही है। 2030 तक प्रदेश के 169 शहरों में 38 हजार बसें चलाई जाएगी। देश के 30 प्रतिशत सिटी ट्रांसपोर्ट के लिए इलेक्ट्रिक बस सेवा उपलब्ध होगी। – शेखर एन धोले, हेड टेक्नीकल सेक्रेटेरिएट, सेंट्रल इंस्टि्टयुट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट  

शेयर बाजार के भारी नुकसान और आर्थिक तंगी ने उजाड़ा जयपुर का एक हंसता-खेलता परिवार

जयपुर करधनी की गोविंद वाटिका में शुक्रवार सुबह घटी वारदात ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। शेयर बाजार में भारी नुकसान, गृहक्लेश और कर्ज के दलदल में फंसे राहुल झा ने ऐसा खौफनाक कदम उठाया कि वह अपनी पत्नी गीता और बेटियों नंदिनी, राधिका व गिरिशा का हत्यारा बन गया। यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि उस आर्थिक बदहाली और सामाजिक अलगाव का वीभत्स रूप है, जिसमें घुट रहे एक परिवार की चीखें बंद दरवाजों के पार तक नहीं पहुंच सकीं। एडिशनल डीसीपी राजेश गुप्ता ने बताया कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि राहुल ने कई लोगों से पैसे उधार ले रखे थे। गोविंद वाटिका स्थित मकान उसकी पत्नी के नाम पर है और राहुल कुछ दिनों से इसे बेचने की फिराक में था। आशंका है कि इसी बात को लेकर दंपती के बीच गृहक्लेश चल रहा था। फिलहाल जांच जारी है और आरोपी की तलाश में पुलिस की टीमें जुटी हुई हैं। बेटियों के सुनहरे भविष्य का खौफनाक अंत कभी राहुल अपनी बेटियों को अच्छे से पढ़ा-लिखाकर उनका भविष्य संवारना चाहता था। पत्नी गीता घर में ब्यूटी पार्लर चलाकर आर्थिक मदद की कोशिश में थी, वहीं बड़ी बेटी नंदिनी भी पढ़ाई के साथ हाथ बंटा रही थी। बेटी राधिका और गिरिशा भी पढ़ाई में जुटी थीं। लेकिन आर्थिक तंगी व गृहक्लेश ने परिवार को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया, जहां राहुल का दिमागी संतुलन ढह गया। उसने एक पड़ोसी से 50 हजार रुपए मांगे थे, पर 25 हजार की मदद मिल पाई। तनाव गहराता गया, लेकिन पड़ोसियों या रिश्तेदारों को भनक तक नहीं लगी कि यह घबराहट हत्या के पागलपन में बदल जाएगी। एफएसएल जांच के मुताबिक वारदात तड़के 4 से 5 बजे के बीच हुई। आशंका है कि राहुल ने पहले पत्नी व बेटियों को कोई नशीला पदार्थ सूंघाया और फिर सीमेंट की भारी ईंट से वार कर उनके चेहरे कुचल दिए। फूट-फूटकर रो पड़ा बड़ा भाई चाची व चचेरी बहनों की मौत की सूचना पर भतीजी सिमरन मौके पर पहुंची। सिमरन ने अपने दादा लक्ष्मीनाथ झा को संभाला, लेकिन उसके भी आंसू थम नहीं रहे थे। कुछ देर बाद सिमरन के पिता संजय और भाई भी वहां पहुंचे और फूट-फूटकर रोने लगे। परिवार के अनुसार, बिजली विभाग से सेवानिवृत्त लक्ष्मीनाथ पहले झोटवाड़ा के संजय नगर में दोनों बेटों संजय और राहुल के साथ रहते थे। लक्ष्मीनाथ की पत्नी की मृत्यु के बाद यह मकान बेच दिया गया और राहुल ने वर्ष 2021 में गोविंद वाटिका में मकान खरीदा। ग्राउंड फ्लोर पर अलग-अलग कमरों में बेटियां व हॉल में लक्ष्मीनाथ रहते थे, जबकि ऊपर की मंजिल पर राहुल व गीता रहते थे। बड़ा भाई संजय प्रेम नगर में परिवार के साथ रहने लगा। घटना की सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में परिजन व कॉलोनी के लोग राहुल के घर पहुंच गए। 'व्यवहार में बदलाव, घोर निराशा जैसे संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए' ऐसी जघन्य घटना के पीछे केवल कर्ज या गृहक्लेश को ही कारण मानना उचित नहीं होगा। लंबे समय तक बना आर्थिक दबाव, वैवाहिक तनाव, क्रोध पर नियंत्रण की कमी, निराशा और मानसिक अस्थिरता जैसे कई कारक इसमें भूमिका निभाते हैं। परिवारों को व्यवहार में अचानक आने वाले बदलाव, अत्यधिक चिड़चिड़ापन, हिंसक प्रवृत्ति, नींद के पैटर्न में बदलाव और घोर निराशा जैसे संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में समय रहते मनोचिकित्सक से परामर्श लिया जाना बेहद जरूरी है। -डॉ. संजय जैन, मनोरोग विशेषज्ञ

सेवा सेतु की त्वरित सेवा से 6 दिन में मिला आय प्रमाण पत्र

सेवा सेतु की त्वरित सेवा से 6 दिन में मिला आय प्रमाण पत्र  बिलासपुर शासन द्वारा नागरिकों को सरल, सहज एवं समयबद्ध तरीके से शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित ‘सेवा सेतु’ डिजिटल व्यवस्था आम नागरिकों के लिए सुविधाजनक साबित हो रही है। सेवा सेतु के माध्यम से नागरिक विभिन्न शासकीय सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन कर निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।        कोटा विकासखण्ड के मझगांव निवासी मुक्तामणि मानिकपुरी ने तहसील कार्यालय बेलगहना में आय प्रमाण पत्र बनवाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा किया। उनका आवेदन 18 जुलाई 2026 को प्रक्रिया में लिया गया। आवेदन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारी श्री संदीप कुमार कश्यप द्वारा समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया गया। मात्र छह दिनों में मुक्तामणि मानिकपुरी को आय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। महज छह दिनों में आय प्रमाण पत्र प्राप्त होने से मुक्तामणि मानिकपुरी को अपने आवश्यक व्यक्तिगत एवं शासकीय कार्यों को पूरा करने में सुविधा मिली। उन्होंने सेवा सेतु की त्वरित एवं व्यवस्थित कार्यप्रणाली की सराहना की।       सेवा सेतु के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन और समयबद्ध निराकरण की यह प्रक्रिया नागरिकों को अनावश्यक कार्यालयीन भागदौड़ से राहत देने के साथ ही शासकीय सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने में सहायक हो रही है। छत्तीसगढ़ शासन का सेवा सेतु पोर्टल नागरिकों को विभिन्न सेवाओं का लाभ निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।   

सेवा सेतु की त्वरित सेवा से 6 दिन में मिला आय प्रमाण पत्र

सेवा सेतु की त्वरित सेवा से 6 दिन में मिला आय प्रमाण पत्र  बिलासपुर शासन द्वारा नागरिकों को सरल, सहज एवं समयबद्ध तरीके से शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित ‘सेवा सेतु’ डिजिटल व्यवस्था आम नागरिकों के लिए सुविधाजनक साबित हो रही है। सेवा सेतु के माध्यम से नागरिक विभिन्न शासकीय सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन कर निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।        कोटा विकासखण्ड के मझगांव निवासी मुक्तामणि मानिकपुरी ने तहसील कार्यालय बेलगहना में आय प्रमाण पत्र बनवाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा किया। उनका आवेदन 18 जुलाई 2026 को प्रक्रिया में लिया गया। आवेदन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारी श्री संदीप कुमार कश्यप द्वारा समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया गया। मात्र छह दिनों में मुक्तामणि मानिकपुरी को आय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। महज छह दिनों में आय प्रमाण पत्र प्राप्त होने से मुक्तामणि मानिकपुरी को अपने आवश्यक व्यक्तिगत एवं शासकीय कार्यों को पूरा करने में सुविधा मिली। उन्होंने सेवा सेतु की त्वरित एवं व्यवस्थित कार्यप्रणाली की सराहना की।       सेवा सेतु के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन और समयबद्ध निराकरण की यह प्रक्रिया नागरिकों को अनावश्यक कार्यालयीन भागदौड़ से राहत देने के साथ ही शासकीय सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने में सहायक हो रही है। छत्तीसगढ़ शासन का सेवा सेतु पोर्टल नागरिकों को विभिन्न सेवाओं का लाभ निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।