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शिक्षा विभाग का सख्त निर्देश: ग्रीष्मावकाश से पहले स्कूलों में पढ़ाई जारी रहेगी

पटना बिहार में शिक्षकों की छुट्टी पर 27 से 31 मई तक रोक लगा दी गई है। शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि ग्रीष्मावकाश से पहले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। सभी शिक्षक ग्रीष्मावकाश शुरू होने से पहले अंतिम कार्य दिवस तक विद्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। इस दौरान छात्रों को विषयवार गृहकार्य दिया जायेगा और उसकी प्रविष्टि छात्रों की डायरी में भी करनी होगी। विभागीय निर्देश में कहा गया है कि हाल के दिनों में बड़ी संख्या में शिक्षक अवकाश आवेदन दे रहे हैं। ऐसे में ग्रीष्मावकाश से पहले विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। कॉलेजों का टॉप 10 विश्वविद्यालयों से करार टीचरों की छुट्टियों पर रोक लगाने के अलावा मंगलवार को सम्राट चौधरी सरकार ने बिहार में शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई अहम फैसले लिए। जिसके तहत अब बिहार के कॉलेजों का देश के शीर्ष दस विश्वविद्यालयों से करार होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उच्च शिक्षा विभाग को बिहार के कॉलेजों को संबद्ध करने के लिए देश के टॉप 10 विश्वविद्यालयों से करार करने का निर्देश दिया है, ताकि बाहर से भी बिहार आकर बच्चे शिक्षा हासिल कर सकें। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को लोक सेवक आवास में उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान पदाधिकारियों को कई निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जुलाई से उन 211 प्रखंडों में स्नातक की पढ़ाई शुरू कराएं, जहां पूर्व से डिग्री कॉलेज नहीं हैं। ऐसे प्रखंडों में नए महाविद्यालयों की स्थापना की जा रही है। उनमें शिक्षकों और कर्मियों की नियुक्ति के लिए कमेटी का शीघ्र गठन कर वैकेंसी को एक साथ अटैच करें। प्रखंडों में स्थापित होने वाले महाविद्यालय ऐसी जगह पर हों, जहां विद्यार्थियों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो तथा सुगमतापूर्वक वे आ-जा सकें। उन्होंने यह भी कहा कि वित्तरहित महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की संख्या, आधारभूत संरचना, भवन और दी जाने वाली अनुदान राशि का आकलन करें। भूमि देने वाले के नाम पर होंगे डिग्री कॉलेज मुख्यमंत्री ने कहा कि डिग्री कॉलेज रहित प्रखंडों में महाविद्यालय स्थापित करने के लिए भूमि दान देने वाले व्यक्ति या उनके द्वारा अनुशंसित व्यक्ति के नाम पर उस महाविद्यालय का नामकरण किया जाएगा। महाविद्यालय में भवन निर्माण/आंशिक रूप से सहयोग करने वाले व्यक्ति या उनके द्वारा अनुशंसित व्यक्ति के नाम पर भी महाविद्यालय परिसर के किसी हिस्से का नामकरण कराया जायेगा। बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री संजय सिंह टाइगर, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, उच्च शिक्षा सचिव राजीव रौशन सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे। राज्य में खुला विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ेगी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में संचालित ओपेन यूनिवर्सिटी का अध्ययन करें। इसके साथ ही बिहार में और अधिक संख्या में ओपेन यूनिवर्सिटी स्थापित करें, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया करायी जा सके। इससे राज्य के विश्वविद्यालयों पर बोझ भी घटेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विक्रमशिला विश्वविद्यालय को पुनर्स्थापित करने के लिए भारत सरकार को शीघ्र भूमि हस्तांतरित की जायेगा। इस संबंध में भारत सरकार को पत्र भेजकर सूचित किया जायेगा। बिहार के शोध संस्थानों को सुव्यवस्थित किया जाएगा मुख्यमंत्री ने एएन सिन्हा समाज अध्ययन संस्थान को फिर से व्यवस्थित करने के लिए कहाा है, ताकि इसका अधिक से अधिक उपयोग हो सके। उन्होंने कहा कि बिहार में विश्वविद्यालय के साथ जितने भी रिसर्च सेंटर हैं, उन्हें फिर से व्यवस्थित कर नियमित और विशिष्ट बनाएं। शोध संस्थान सुव्यवस्थित होगा, तो नियमित रूप से शोध होगा और सरकार की पॉलिसी या प्लान का परीक्षण हो सकेगा।

ईद-उल-अजहा पर मुरादाबाद में 500 पुलिसकर्मी और ड्रोन से होगी निगरानी

 मुरादाबाद बकरीद को लेकर मुरादाबाद नगर निगम ने पूरे महानगर को चार जोन में बांटा है। दस क्यूआरटी टीमों का भी गठन किया गया है। सूचना मिलते ही टीमें तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर समस्या का समाधान करेंगी। हर तीस मिनट के भीतर ओज उठाए जाने के भी व्यवस्था की गई है। नगरायुक्त दिव्यांशु पटेल ने मंगलवार को अधीनस्थ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। गलशहीद स्थित ईदगाह और मस्जिदों के आसपास जल का छिड़काव, चूना-फॉगिंग और नियमित सफाई की जाएगी। ईदगाह के आसपास अतिक्रमण के खिलाफ भी अभियान चलेगा। ईदगाह के आसपास चला सफाई अभियान, पकड़े आवारा डॉग बकरीद के त्योहार को लेकर मंगलवार को नगर निगम टीम द्वारा ईदगाह व आसपास के इलाकों में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। इसके अलावा आवारा कुत्तों को भी पकड़ने की कार्रवाई की गई। सुरक्षा को लेकर ईदगाह क्षेत्र को 11 सेक्टरों में बांटा ईद-उल-अजहा(बकरीद) की नमाज शांतिपूर्ण माहौल में सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। ईदगाह और उसके आसपास के इलाके को 11 सेक्टर में बांट कर पुलिस ड्यूटी लगाई गई है। पूरे शहर को बीस सेक्टर में बांटा गया है। सुरक्षा के मद्देनजर पांच सौ से अधिक पुलिसकर्मियों और दो कंपनी पीएसी जवानों की लगाई गई है। एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि व्यवस्था बनाने के लिए ईदगाह और उसके आसपास के इलाके को 11 सेक्टरों में बांटा गया है। हर सेक्टर की जिम्मेदारी सीओ और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को दी गई है। दस सीओ के नेतृत्व में करीब 500 पुलिसकर्मियों और दो कंपनी पीएसी जवानों की लगाई गई है। निगरानी के लिए वॉच टावर और रूफ टॉप ड्यूटी भी लगी है। ईदगाह और उसके आसपास 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ईदगाह के सामने स्थित बिल्डिंग में कंट्रोल रूम मनाया गया है, जहां से नियमित निगरानी की जाएगी। ड्रोन से भी निगरानी होगी। ईदगाह रोड नमाज के दौरान बंद रहेगी बकरीद के दिन नमाज सकुशल संपन्न कराने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने सुबह के छह घंटे ईदगाह के आसपास डायवर्जन प्लान लागू रहेगा। ट्रैफिक पुलिस द्वारा तैयार प्लान के अनुसार 28 मई को छह बजे से दोपहर 12 बजे तक ईदगाह के आसपास वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इस दौरान शहर में भारी वाहन और बसों को भी नहीं घुसने दिया जाएगा। एसपी ट्रैफिक सुभाष चंद्र गंगवार ने बताया कि यह डायवर्जन प्लान सुबह छह बजे से दोपहर 12 बजे तक के लिए लागू किया गया है। जरूरत पड़ने पर इसका समय बढ़ाया और घटनाया जाएगा। ट्रैफिक प्लान को प्रभावी तरीके से लागू कराने के लिए जगह-जगह बैरियर लगाकर ट्रैफिक पुलसकर्मियों की तैनाती की गई है। बकरीद को लेकर प्रशासन ने भी जारी की गाइडलाइन बकरीद को लेकर प्रशासनिक मशीनरी तैयार हो चुकी है। जिलाधिकारी के निर्देश पर एडीएम सिटी ने महानगर और एडीएम प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्र में व्यवस्थाओं की कमान संभाल ली है। ऑन लाइन मीटिंग में सभी तहसीलों और निकायों को अफसरों ने बताया कि किस तरह कार्य करना है। आगामी 28 मई को बकरीद का पर्व मनाया जा रहा है। जिलाधिकारी डा. राजेंद्र पैंसिया और एसएसपी सतपाल अंतिल ने एक दिन पूर्व पीस कमेटी की बैठक में भी स्थिति स्पष्ट कर दी थी कि कैसे कार्य करना है। कुर्बानी खुले में न हो ओज खुले में न जाए इसपर फोकस है। एडीएम सिटी अंकुर श्रीवास्तव ने बकरीद की तैयारियों पर स्थिति का जायजा लिया। वहीं एडीएम प्रशासन संगीता गौतम ने ऑन लाइन मीटिंग में सभी निकायों के ईओ और संबंधित एसडीएम व तहसीलदार को पर्व पर जिम्मेदारी सौंपी।

खाप पंचायत का बड़ा फैसला, भिवानी में अंतरजातीय विवाह को मिली हरी झंडी

भिवानी. झाझड़िया खाप पंचायत ने अंतरजातीय विवाह का निर्णय लिया है। इसके अलावा हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव की मांग करते हुए साथ ही यह भी मांग उठाई है कि कोर्ट मैरिज में माता पिता की सहमति जरूरी हो। नेहरू पार्क में हुई पंचायत की अध्यक्षता खाप के राष्ट्रीय प्रधान राय सिंह झाझड़िया की रही। पंचायत में छह अहम निर्णय लिया गए। वक्ताओं ने कहा पंचायत समाज में सार्थक बदलाव पर काम करेगी। भाईचारा मजबूत करने के लिए मुहिम चलाई जाएगी। पंचायत में हुए निर्णय के बारे में खाप के राष्ट्रीय अध्यक्ष राय सिंह झाझड़िया ने कहा खाप अंतरजीतीय विवाह को मंजूरी देती है। कोर्ट मैरिज होती है तो उसमें माता पिता की सहमति जरूरी हो। हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव की मांग हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव किया जाए। इसके अलावा विकसित भारत जीरामजी योजना का रुपया किसानों ओर मजदूरों को दिया जाए। इस योजना का रुपया गलत हाथों में जा रहा है इस पर रोक लगाई जाए। पंचायत में यह प्रस्ताव किया गया कि पेट्रोल डीजल के एक माह में चार बार रेट बढ़ाए गए हैं इनको तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए। सौनाली फौगाट और शिक्षिका मनीषा मौत मामले में सीबीआई जांच की रिपोर्ट सामने लाई जाए। देरी होने से लोगों का भरोसा टूट रहा है। सीबीआई जांच जल्द लोगों के सामने नहीं लाई जाती तो लोग बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे और इसके लिए प्रशाासन स्वयं जिम्मेदार होगा। पंचायत में पर्यावरण संरक्षण को लेकर निर्णय लिया गया किया ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाए जाएंगे। बरगद, नीम, पीपल, त्रिवेणी हर गांंव में लगाए जाएंगे। पंचायत में खाप के राजस्थान प्रधान रामस्वरूप तारानगर, हरियाणा प्रधान प्रीत भैरवी, उप प्रधान सतबीर बारवास, भिवानी के प्रधान बनवारीलाल, प्रताप सिंह नंबरदार, सरपंच जयवीर सिंह, ईश्वर सिंह घिकाड़ा, अमरसिंह, राजेश पहाड़ी, फौजी जयसिंह, सूबेदार रामसिंह, पटवारी रामेहर सिंह, विजय पिलानी अधिवक्ता, सरपंच सतबीर रोहिला, सुरेश कोच, सरपंच धर्मबीर, युवा प्रधान संदीप बरालू आदि मौजूद रहे।

वाणिज्य कर विभाग का प्रदर्शन: झारखंड ने दो महीने में 12% राजस्व लक्ष्य हासिल किया

 रांची  झारखंड में वाणिज्य कर विभाग ने शुरुआत के दो महीने में धीमी गति से ही सही 2,815 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त करने में सफलता पाई है। 24 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य के विरुद्ध राज्य सरकार के खाते में 25 मई तक 2,815 करोड़ रुपये आ चुके हैं। यह लक्ष्य के हिसाब से 12 प्रतिशत के करीब है। अनुमान के अनुसार सर्वाधिक राजस्व जीएसटी मद से प्राप्त हुआ है और सरकार के खाते में इस मद से अभी तक 2,111 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं। इस बार इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से सरकार को 84 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है, जबकि प्रोफेशनल टैक्स के माध्यम से 14 करोड़ रुपये वसूलने में वाणिज्य कर विभाग सफल रहा है। साेमवार को मुख्यमंत्री के स्तर से समीक्षा के क्रम में ये आंकड़े सामने आए हैं। वित्त मंत्री की मौजूदगी में पेश इन आंकड़ों के लिए मुख्यमंत्री और वरीय अधिकारियों ने विभागीय अधिकारियों की सराहना की है। विभिन्न माध्यमों से प्राप्त राजस्व राजस्व की श्रेणी     लक्ष्य (करोड़ ₹)     उपलब्धि (करोड़ ₹)     प्राप्त प्रतिशत जीएसटी                       14,565          2,111                  14% वैट                              7,880             606                   8% इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी            355                84                    6% प्रोफेशनल टैक्स               200                14                     7% कुल राजस्व                      24,000          2,815                12%

नगर परिषद चुनावों में सुरक्षा और नामांकन प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की नजर, प्रशासन को अहम आदेश

गुरदासपुर. पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने गुरदासपुर, कादियां और दीनानगर की आगामी नगर परिषद चुनावों को ध्यान में रखते हुए चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। ये आदेश 26 मई 2026 को तीन याचिकाओं के संयुक्त निपटारे के दौरान जारी किए गए। डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस हरसिमरण सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मंचंदा शामिल थे, ने बलजीत सिंह, सुखविंदर पाल सिंह और परमिंदर सिंह द्वारा दायर याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं के वकील याजुर शर्मा ने अदालत के समक्ष दलील दी कि जून के पहले सप्ताह में होने वाले चुनावों के दौरान उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से रोका जा सकता है या मनमर्जी से खारिज किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने उम्मीदवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। इस पर अदालत ने चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए। अदालत ने आदेश दिया कि रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय, मतदान केंद्र, मतगणना केंद्र और वोटों के भंडारण स्थलों पर निगरानी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। किसी भी उम्मीदवार को नामांकन पत्र दाखिल करने से नहीं रोका जाएगा और यदि कोई नामांकन खारिज किया जाता है तो उसके स्पष्ट कारण लिखित रूप में 48 घंटों के भीतर देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा नामांकन पत्र में छोटी गलतियों के मामले में उम्मीदवार को सुधार का अवसर देने के निर्देश भी दिए गए हैं। यदि किसी उम्मीदवार के पास नो-ऑब्जेक्शन प्रमाण पत्र नहीं है, तो वह शपथ पत्र के माध्यम से अपनी योग्यता साबित कर सकता है। अदालत ने सुरक्षा के मद्देनज़र संबंधित जिला पुलिस प्रमुख को निर्देश दिए हैं कि उम्मीदवारों की सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जाए और चुनाव स्थलों के आसपास अनधिकृत व्यक्तियों की मौजूदगी पर रोक सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही अदालत ने पंजाब राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि मशीनों या बैलेट पेपर के माध्यम से मतदान कराने के संबंध में 7 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले जारी किए गए निर्देश भी इन तीनों नगर परिषदों पर लागू होंगे और कोई भी अधिकारी इनसे पीछे नहीं हट सकता। अदालत के इस फैसले को चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

निवेश बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम, छत्तीसगढ़ में बदलेगी भूमि उपयोग और बिल्डिंग परमिशन व्यवस्था

रायपुर. भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) सुधारों का दायरा अब केवल उद्योग और कर व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है. अब केंद्र सरकार का फोकस शहरी नियोजन (Urban Planning), भूमि उपयोग (Land Use) और निर्माण स्वीकृति प्रक्रियाओं को आधुनिक, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाने पर है. इसी दिशा में भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय द्वारा “Compliance Reduction and Deregulation Reforms” के तहत राज्यों को महत्वपूर्ण सुधार लागू करने की सिफारिश की गई है. इन सुधारों का उद्देश्य शहरों को अधिक लचीला, निवेश-तैयार और आर्थिक गतिविधियों के अनुरूप बनाना है, ताकि उद्योग, आवास, वाणिज्यिक गतिविधियां और आधुनिक शहरी विकास को नई गति मिल सके. विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा केवल औद्योगिक नीति या कर छूट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कोई राज्य निवेशकों को कितनी तेज, पारदर्शी और सरल स्वीकृति प्रणाली उपलब्ध कराता है. इसी दृष्टि से छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे सुधार भविष्य के निवेश वातावरण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. “जो प्रतिबंधित नहीं, वह अनुमति प्राप्त” मॉडल पर जोर कैबिनेट सचिवालय ने राज्यों को “डिमांड-ड्रिवन भूमि उपयोग प्रणाली” (Demand-Driven Land Use System) अपनाने की सलाह दी है, जो “Everything is Permitted Unless Prohibited” अर्थात “जो प्रतिबंधित नहीं है, वह अनुमति प्राप्त है” के सिद्धांत पर आधारित है. इसके तहत प्रत्येक क्षेत्र में केवल प्रतिबंधित गतिविधियों की “Negative List” तय की जाएगी, जबकि अन्य सभी गतिविधियों को स्वतः अनुमति प्राप्त होगी. इस व्यवस्था से भूमि उपयोग परिवर्तन की जटिल और लंबी प्रक्रियाएं कम होंगी तथा निवेशकों को अधिक स्पष्टता और सुविधा मिलेगी. त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, केरल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है. त्रिपुरा ने वर्ष 2025 में “Negative List of Industries” लागू कर इस मॉडल को व्यवहार में उतार दिया है. Flexible Zoning और Mixed Land Use को मिल रहा बढ़ावा छत्तीसगढ़ सरकार ने भी शहरी नियोजन और निर्माण स्वीकृति प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में आवश्यक संशोधन किए गए हैं. विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य शासन द्वारा “Flexible Zoning Framework” को बढ़ावा देते हुए मिश्रित भूमि उपयोग (Mixed Land Use) को प्रोत्साहित किया जा रहा है. संशोधित प्रावधानों के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में रेड, ऑरेंज, ग्रीन एवं ब्लू श्रेणी के उद्योगों को प्रतिबंधित किया गया है, जबकि वाणिज्यिक क्षेत्रों में केवल रेड एवं ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों पर प्रतिबंध रहेगा. उद्योगों का वर्गीकरण छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाएगा. इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों से जुड़े कर्मचारियों के लिए अधिकतम 60 वर्गमीटर तक के किफायती आवास निर्माण की अनुमति दी गई है. इसके लिए अधिकतम FAR 2.0 तथा 70 प्रतिशत भू-आच्छादन की अनुमति होगी. यह व्यवस्था “Walk to Work” जैसी अवधारणाओं को बढ़ावा देने के साथ उद्योग आधारित किफायती आवास परियोजनाओं को गति देगी. इससे श्रमिकों और कर्मचारियों को कार्यस्थल के नजदीक आवास उपलब्ध हो सकेंगे, परिवहन लागत कम होगी तथा शहरों में अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करने में भी सहायता मिलेगी. ऑनलाइन सेवाओं और Deemed Approval से निवेशकों को मिलेगा लाभ राज्य सरकार ने भूमि उपयोग परिवर्तन (CLU – Change of Land Use) प्रक्रिया को भी सरल और डिजिटाइज करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नगर निगम, नगरपालिका, नगर पंचायत क्षेत्रों तथा उनकी बाहरी सीमाओं से लगे निर्धारित क्षेत्रों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ श्रेणियों की भूमि के व्यपवर्तन के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति की आवश्यकता समाप्त की गई है. इससे भूमि उपयोग परिवर्तन प्रक्रिया में तेजी आएगी, अनुमोदन स्तरों का युक्तिकरण होगा और निवेशकों को समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी. साथ ही ऑनलाइन सिंगल विंडो प्रणाली, सभी NOC को ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ने तथा निर्धारित समय सीमा में स्वीकृति न मिलने पर “Deemed Approval” जैसे प्रावधानों की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उद्योग स्थापना की प्रक्रिया तेज होगी, परियोजनाओं की लागत में कमी आएगी और निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा. ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों की स्थापना होगी आसान विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को बढ़ावा देने के लिए सड़क चौड़ाई मानकों में भी युक्तिकरण किया है. संशोधित नियमों के अनुसार 0.1 हेक्टेयर तक के गैर-प्रदूषणकारी ग्रीन एवं व्हाइट श्रेणी के MSME उद्योगों के लिए न्यूनतम पहुंच मार्ग की चौड़ाई 7.5 मीटर तथा 0.1 से 0.25 हेक्टेयर तक के उद्योगों के लिए 9 मीटर निर्धारित की गई है. इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों की स्थापना आसान होगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा तथा औद्योगिक क्लस्टर विकास को गति मिलेगी. इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना भी बढ़ेगी. Third Party Inspection और Self Certification से घटेगा समय विश्वस्त सूत्रों के अनुसार भवन निर्माण स्वीकृतियों में देरी को समाप्त करने के लिए राज्य सरकार ने निरीक्षण एवं अनुमोदन प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण सुधार किए हैं. छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 96 एवं 98 में संशोधन कर प्लींथ सर्टिफिकेट, Completion Certificate और Occupancy Certificate जारी करने की समय-सीमा निर्धारित की गई है. नए प्रावधानों के तहत निरीक्षण 4 दिवस के भीतर किया जाएगा तथा निरीक्षण रिपोर्ट 48 घंटे में प्रस्तुत करनी होगी. निर्धारित समय सीमा में प्रमाण पत्र जारी नहीं होने पर उसे “Deemed Approval” माना जाएगा. इसके साथ ही तृतीय पक्ष (Third Party) एजेंसियों के माध्यम से संयुक्त निरीक्षण तथा आर्किटेक्ट आधारित Self Certification व्यवस्था को भी बढ़ावा दिया गया है. इससे निर्माण परियोजनाओं में अनावश्यक देरी कम होगी, भ्रष्टाचार और प्रक्रियागत जटिलताओं में कमी आएगी तथा उद्योग और रियल एस्टेट क्षेत्र को गति मिलेगी. ALBPMS सॉफ्टवेयर से पूरी प्रक्रिया हुई ऑनलाइन राज्य सरकार ने भवन अनुमति प्रणाली को पूर्णतः डिजिटल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किए हैं. ALBPMS सॉफ्टवेयर के माध्यम से अब ऑनलाइन आवेदन, एकीकृत भुगतान प्रणाली, डिजिटल हस्ताक्षरित भवन योजनाएं, Auto-DCR द्वारा स्वचालित भवन परीक्षण, निर्माण प्रारंभ एवं पूर्णता की ई-सूचना तथा डिजिटल Occupancy … Read more

तेज धूप से बिगड़ रही स्किन, सनबर्न और जलन के मामलों में इजाफा

जगदलपुर. बस्तर में बढ़ती गर्मी अब केवल तापमान तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों की त्वचा और सेहत पर असर दिखाने लगी है. 40 डिग्री के करीब पहुंचते पारे ने सनबर्न और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ा दी है. मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं. डॉक्टरों के मुताबिक हर 100 मरीजों में 10 से 15 मरीज लू और गर्मी से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित हैं. सीधी धूप में निकलने वाले लोगों की त्वचा लाल और सूखी पड़ रही है. पराबैंगनी किरणों (UV Rays) के असर से त्वचा में जलन और धब्बों की शिकायतें बढ़ रही हैं. मौसम में बादल छाने के बावजूद उमस और तपिश से राहत नहीं मिल रही. बच्चों और बुजुर्गों पर गर्मी का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है. अस्पतालों में डिहाइड्रेशन के मरीज भी तेजी से बढ़ रहे हैं. डॉक्टरों ने लोगों को धूप में निकलने से पहले पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है. साथ ही पानी में नमक और नींबू मिलाकर पीने और सूती कपड़े पहनने को कहा गया है. बस्तर में अब गर्मी केवल मौसम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनती नजर आ रही है.

शानदार कामकाज का मिला सम्मान, प्रदेश के दो IPS अफसरों को अहम जिम्मेवारी

रायपुर   प्रदेश के 2 IPS अफसरों को बड़ी जिम्मेदारी से नवाजा गया है। नीतू कमल और डी श्रवण को बड़ी सौगात मिली है। इन दोनों अधिकारियों को केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी में आईजी के लिए इंपैनल किया गया है जो बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 2008 बैच के आईपीएस अधिकारी नीतू कमल और डी श्रवण को बड़ी जिम्मेवारी छत्तीसगढ़ कैडर के  इन दो IPS अफसरों को यह अहम जिम्मेदारी मानी जा रही है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को केंद्र सरकार ने बड़ी सौगात दी है।  2008 बैच के आईपीएस अधिकारी नीतू कमल और डी श्रवण के केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी में आईजी के लिए इंपैनल होने को एक बड़ा मुकाम माना जा रहा है। आपको बता दें कि आईपीएस नीतू कमल मौजूदा समय में CBI  में प्रतिनियुक्ति पर हैं, जबकि डी श्रवण राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।  दोनों अधिकारियों के अनुभव को देखते हुए केंद्र ने उन्हें अहम जिम्मेदारी सौंपी है। गृह मंत्रालय की ओर से  जारी सूची में देश से वर्ष 2001 से 2008 बैच तक के 67 आईपीएस अधिकारियों को आईजी और डीआईजी स्तर के पदों के लिए इंपैनल किया गया है। छत्तीसगढ़ कैडर के  इन दो IPS अफसरों को ये सौगात मिली है जो एक अहम बात मानी जा रही है।

वंदे भारत पर हमला! उज्जैन में उत्पातियों ने की पत्थरबाजी, यात्रियों में दहशत

उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन में रेल्वे स्टेशन से 200 मीटर की दूरी पर वंदे भारत ट्रेन में उस वक्त हड़कंप मच गया जब अचानक एक के बाद एक पथराव होने लगे. देखते ही देखते उत्पातियों ने ट्रेन के 4 कोच के कांच फोड़ दिए. पथराव इतनी तेज था कि कोच के कांच तड़क गए. गनीमत रही इस दौरान यात्री सुरक्षित रहे किसी को कोई चोट नहीं लगी।  ग्लास टूटने की तस्वीरें आईं सामने जैसे ही घटना की जानकारी सामने आई मामले में रेल्वे ने तत्काल संज्ञान लेते हुए RPF थाने में FIR दर्ज करवाई. रेलवे पुलिस अब CCTV फुटेज व अन्य साक्ष्य के आधार पर उत्पातियों की तलाश में जुट गई है. घटना के बाद यात्री सहम उठे. वहीं जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर पहुंची रेलवे पुलिस ने जांच पड़ताल और पूछताछ शुरू कर दी है. घटना सोमवार देर शाम की है. जिसको लेकर अब FIR दर्ज की गई है. वहीं ट्रेन के ग्लास टूटने की तस्वीरे बुधवार सुबह सामने आई हैं।  अचानक होने लगा वंदे भारत ट्रेन पर पथराव पूरा मामला सोमवार देर शाम लगभग 07:30 बजे के आस पास का है. वंदे भारत ट्रेन भोपाल के रास्ते उज्जैन आ रही थी. उज्जैन स्टेशन से 200 मीटर दूरी पर गदा पुलिया के पास नीलगंगा क्षेत्र में अचानक ट्रेन पर पथराव होने लगा. कुल 4 कोच इस दौरान क्षतिग्रस्त हुए हैं. देखते ही देखते ट्रेन में मौजूद यात्रियों में हड़कंप मच गया. यात्री कुछ समझ पाते कि ट्रे स्टेशन पर पहुंच गई. जहां यात्रियों ने पुलिस से शिकायत की. जिसके बाद पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की. घटना को लेकर रेलवे पीआरओ मुकेश कुमार ने कहा, ''संबंधित अधिकारी मामले को देख रहे हैं. सभी यात्रि सुरक्षित हैं।  पुलिस ने की आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज RPF थाना प्रभारी नरेंद्र यादव ने बताया, ''सभी यात्री सुरक्षित है. उज्जैन में वंदे भारत ट्रेन में ऐसा पहली बार हुआ है. आगे से एसी घटना ना हो इसके लिए उत्पातियों को दबोचकर कड़ी कार्रवाईं की जाएगी. शिकायत पर FIR दर्ज कर अज्ञात उत्पातियों के विरुद्ध जांच एवं तलाश शुरू कर दी है। 

फ्री बस यात्रा के लिए तैयार रहें, भिवानी में हैपी कार्ड को लेकर शुरू होगा जागरूकता अभियान

भिवानी. आपकी यात्रा सुगम और सुखद हो इसके लिए हैप्पी कार्ड बनाए गए हैं। भिवानी डिपो में अभी भी 45 हजार से अधिक हैप्पी कार्ड आवेदकों का इंतजार कर रहे हैं। भिवानी डिपो, तोशाम और लोहारू सब डिपो में हजारों हैप्पी कार्डों का वितरण नहीं हो पाया है। रोडवेज कर्मचारी अब पात्र लोगों को फोन कर-करके कार्ड ले जाने की अपील कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अपेक्षित संख्या में लोग कार्ड लेने नहीं पहुंच रहे। रोडवेज अधिकारियों की मानें तो भिवानी डिपो, तोशाम और लोहारू डिपो में पिछले दिनों कुल 53,252 हैप्पी कार्ड पहुंचे थे। इनमें से बड़ी संख्या अब भी डिपो में पड़ी हुई है। इससे पहले अप्रैल 2024 में 1,52,892 हैप्पी कार्ड आए थे। इस प्रकार अब तक इन तीनों डिपो में कुल मिलाकर 2,06,144 हैप्पी कार्ड पहुंच चुके हैं। डेढ़ लाख से ज्यादा कार्ड बंटे रोडवेज के अनुसार अब तक 1,57,363 हैप्पी कार्ड पात्र लोगों को वितरित किए जा चुके हैं। बावजूद इसके 45 हजार से अधिक कार्ड अब भी पात्र लोगों तक पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत में योजना को लेकर लोगों में उत्साह दिखा, लेकिन अब धीरे-धीरे कार्ड लेने वालों की संख्या घटने लगी है। खासतौर पर भिवानी डिपो में अब पहले जैसी भीड़ नजर नहीं आ रही। कम होती दिलचस्पी ने बढ़ाई चिंता रोडवेज विभाग के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है। जिन लोगों ने आवेदन प्रक्रिया पूरी कर हैप्पी कार्ड बनवा लिया, वही अब कार्ड लेने में कम रुचि दिखा रहे हैं। कई पात्र लोग या तो सूचना के बावजूद डिपो नहीं पहुंच रहे या फिर कार्ड लेने में देरी कर रहे हैं। विभागीय कर्मचारियों को अब लाभार्थियों के मोबाइल नंबर पर संपर्क करना पड़ रहा है। कर्मचारी लगातार फोन करके लोगों से कार्ड प्राप्त करने की अपील कर रहे हैं, ताकि योजना का लाभ समय पर मिल सके और कार्ड निष्क्रिय अवस्था में डिपो में न पड़े रहें। लाभार्थियों तक पहुंचाना अब बड़ी चुनौती हैप्पी कार्ड योजना का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र वर्ग को रोडवेज यात्रा में राहत देना है, लेकिन लाभार्थियों की उदासीनता के कारण विभाग को अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं। डिपो स्तर पर कार्डों की सुरक्षा, रिकार्ड और वितरण व्यवस्था भी एक अतिरिक्त जिम्मेदारी बन गई है। रोडवेज अधिकारियों का मानना है कि अगर लोग समय पर अपने कार्ड नहीं लेते, तो योजना का पूरा लाभ प्रभावित हो सकता है। डिपो में आए हैप्पी कार्डों का वितरण लगातार किया जा रहा है। जिन पात्र लोगों के कार्ड तैयार हैं, उन्हें फोन के माध्यम से सूचना दी जा रही है। डीसी के गांवों में लगने वाले रात्रि दरबार में भी हैप्पी कार्ड वितरण के लिए बूथ बनाए जाते हैं। पात्र लोग संबंधित डिपो पर पहुंचकर अपना हैप्पी कार्ड प्राप्त कर सकते हैं ताकि सरकार की इस योजना का लाभ आसानी से मिल सके।