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सिंगरौली बनेगा माइनिंग का मॉडल डिस्ट्रिक्ट, खनिज संपदा के बेहतर इस्तेमाल पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जोर

सिंगरौली को बनायें माइनिंग का मॉडल डिस्ट्रिक्ट – मुख्यमंत्री डॉ. यादव खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग से प्रदेश के विकास को मिले नई गति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की खनिज साधन द्वारा प्रस्तावित राज्य खनिज अन्वेषण नीति 2026 की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश प्राकृतिक और खनिज संपदा की दृष्टि से समृद्ध प्रदेश है। खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक, पारदर्शी और पर्यावरण-सम्मत तरीके से उपयोग प्रदेश की आर्थिक प्रगति को नयी गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि खनिज नीतियों का उद्देश्य राजस्व वृद्धि के साथ-साथ रोजगार, निवेश और स्थानीय विकास के अवसरों का विस्तार करना होना चाहिए और राज्य सरकार यही सुनिश्चित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में खनिज साधन विभाग की बैठक में विभागीय गतिविधियों और प्रस्तावित राज्य खनिज अन्वेषण नीति 2026 की समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी सहित खनिज साधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी  उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की खनिज संपदा प्रदेश के विकास की महत्वपूर्ण पूंजी है। इन प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन के साथ ऐसे हो कि प्रदेश को राजस्व मिले, निवेश को प्रोत्साहन मिले और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नये अवसर सृजित हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रस्तावित नीति के संबंध में कहा कि जिला खनिज निधि (डीएमएफ राशि) का समुचित उपयोग करते हुए खनिज संसाधनों से सम्पन्न सिंगरौली जिले को शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, कृषि, वन,  पर्यावरण,  सड़क सुविधाओं और वाटरशेड के मामले में माडल डिस्ट्रिक्ट के रूप में विकसित किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खनिज संसाधनों से प्राप्त होने वाले लाभ का अधिकाधिक हिस्सा जनहित के कार्यों में लगाया जाये। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर मध्यप्रदेश को खनिज क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में कार्य किया जाए। बैठक में खनिज साधन से संबंधित विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित राज्य खनिज अन्वेषण नीति 2026 का अनुमोदन कर प्रदेश के नागरिकों के हित में नीति का कारगर अमल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव, खनिज साधन विवेक पोरवाल ने पालिसी प्रेजेंटेशन में बताया कि विभिन्न प्रयासों के जरिए राज्य में खनिज संसाधनों से राजस्व आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित खनिज नीति में वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक खनिज संसाधनों से राजस्व आय 13720 करोड़ रुपए तक और वित्त वर्ष 2030-31 के अंत तक इसे 30000 करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 के अंत तक ही सालाना खनिज राजस्व लक्ष्य से भी अधिक (106 प्रतिशत) राजस्व आय प्राप्त कर ली गई है। प्रदेश के दस जिलों क्रमशः सिंगरौली, अनूपपुर, शहडोल,  कटनी, बालाघाट, सतना,  जबलपुर, छिंदवाड़ा, उमरिया और बैतूल से सर्वाधिक खनिज आय मिलती है। जारी वित्त वर्ष में जुलाई 2026 के अंत तक इन दस जिलों में 3147.10 करोड़ रुपए डीएमएफ निधि उपलब्ध है। इसमें सर्वाधिक योगदान सिंगरौली जिले का है। सभी 55 जिलों को मिलाकर यह डीएमएफ निधि 3574.53 करोड़ रुपए है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले- ‘हनुमान अंश’ में दिखती है आस्था और भक्ति की अद्भुत शक्ति

हनुमान अंश’ फिल्म आस्था, संस्कृति और भक्ति की शक्ति का देती है संदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देखी हनुमान अंश फीचर फिल्म भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार की शाम कोलार स्थित एक निजी प्लाजा में बहुचर्चित फीचर फिल्म ‘हनुमान अंश’ के प्रदर्शन में सहभागिता करते हुए फिल्म देखी। फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसकी विषय-वस्तु, प्रस्तुति और कलाकारों के अभिनय की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नीब करौली बाबा के जीवन चरित्र पर केंद्रित ‘हनुमान अंश’ फिल्म हमारी आस्था, आध्यात्मिक परंपरा और भगवान हनुमान की भक्ति के मार्ग को समझने का एक माध्यम है। भक्ति से समाज सुधार की शक्ति पाने की पटकथा वाली इस फिल्म ने हम सबके आराध्य भगवान हनुमान की आराधना और सेवा की भावना को अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि नीब करौली बाबा के जीवन पर केंद्रित इस फिल्म से हमें एकात्म मानववाद और सर्वहारा वर्ग के कल्याण की प्रेरणा देती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फिल्म में नीब करौली बाबा की भूमिका निभाने वाले कलाकार शोभिनव सत्या के अभिनय की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि शोभिनव सत्या ने नीब करौली बाबा के चरित्र का सिर्फ़ अभिनय ही नहीं किया, बल्कि उसे खुद जीकर जीवंत कर दिया है। उनके अभिनय में बाबा के व्यक्तित्व की सहजता, भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं की गहरी अनुभूति दिखाई देती है। उन्होंने सचमुच कमाल ही कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी संस्कृति और आध्यात्मिक परम्पराओं में संतों का जीवन समाज को सदैव प्रेरणा देता रहा है। ऐसे विषयों पर बनने वाली फिल्में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कारों और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से ‘हनुमान अंश’ फिल्म देखने का आह्वान करते हुए कहा कि अपने धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक परम्पराओं में आस्था रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह फिल्म अवश्य देखनी चाहिए। यह फिल्म भक्ति के साथ ही हमें अपने जीवन में सेवा, समर्पण, परोपकार और सबके प्रति सद्भावना रखने की अभिप्रेरणा देती है। इस अवसर पर विधायक रामेश्वर शर्मा, मप्र राज्य वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष संजय नगाईच, एमपी हाऊसिंग बोर्ड के चेयरमैन कोमल जैन, महापौर श्रीमती मालती राय, जिलाध्यक्ष रविन्द्र यति सहित अन्य जनप्रतिनिधि, निजी प्लाजा के आनर एवं बड़ी संख्या में दर्शकगण उपस्थित थे।  

अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 107 लीटर मदिरा और 1200 किलो गुड़ लाहन जब्त

अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 107 लीटर मदिरा और 1200 किलो गुड़ लाहन जब्त   ग्वालियर  कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान के आदेशानुसार तथा आबकारी उपायुक्त श्री संदीप शर्मा के निर्देशन एवं सहायक आबकारी आयुक्त श्री राज नारायण सोनी के मार्गदर्शन में अवैध मदिरा के विनिर्माण, विक्रय, संग्रह और परिवहन के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में आबकारी विभाग की टीम ने नयागांव, दामोदर नगर और शंकरपुर स्टेडियम क्षेत्र में दबिश देकर बड़ी कार्रवाई की। नयागांव कंजर डेरा में कार्रवाई के दौरान 94 लीटर कच्ची हाथ भट्टी मदिरा, मदिरा निर्माण के उपकरण, भट्टी एवं पात्र बरामद किए गए। इसके अलावा छह ड्रम में भरे करीब 1200 किलोग्राम गुड़ लाहन का सैंपल लेकर शेष लाहन मौके पर नष्ट किया गया। अवैध शराब के परिवहन के लिए रखी एक मोटरसाइकिल भी जब्त की गई। मामले में फरार आरोपी विवेक कंजर पुत्र भूरा कंजर के खिलाफ मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(1), 34(2) एवं 49-A के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। इसी तरह दामोदर नगर क्षेत्र से 45 पाव देसी मदिरा प्लेन तथा शंकरपुर स्टेडियम क्षेत्र से 11 पाव देसी मदिरा प्लेन और 6 बीयर कैन जब्त किए गए। आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(1) के तहत दो प्रकरण दर्ज किए गए हैं। कार्रवाई में कुल 107 लीटर अवैध मदिरा और 1200 किलोग्राम गुड़ लाहन जब्त किया गया। जब्त मदिरा, निर्माण उपकरण, भट्टी, पात्र और मोटरसाइकिल की अनुमानित कीमत करीब 2.25 लाख रुपए बताई गई है। कार्रवाई में आबकारी नियंत्रण कक्ष प्रभारी एवं सहायक जिला आबकारी अधिकारी राजेश तिवारी, सहायक जिला आबकारी अधिकारी अमीन खान, दिनेश भार्गव, उप निरीक्षक हरेंद्र मावई, शिवा रघुवंशी, सतेंद्र मीणा, रवि सिसोदिया सहित मुख्य आरक्षक ब्रजेश नगर, आरक्षक राघवेंद्र भदौरिया, मातादीन धाकड़, मनोज यादव, अमन राजावत, देवेश शर्मा एवं प्रशांत मुद्गल का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आबकारी विभाग ने कहा है कि अवैध मदिरा के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

CM विष्णुदेव साय ने सपरिवार देखी ‘हनुमान अंश’, राज्यपाल रमेन डेका और डॉ. रमन सिंह भी रहे मौजूद

राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सपरिवार देखी फिल्म ‘हनुमान अंश’ मुख्यमंत्री साय ने फिल्म ‘हनुमान अंश’ को छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री करने की घोषणा की भारत की संत परंपरा ने सदैव समाज को सत्य, सेवा, करुणा और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाया है : मुख्यमंत्री साय नीम करौली बाबा का जीवन मानव सेवा, प्रेम और भक्ति का प्रेरणादायी उदाहरण : मुख्यमंत्री भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत पर आधारित फिल्में नई पीढ़ी को अपने संस्कारों और मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम मंत्रिपरिषद के सदस्य एवं निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्ष भी रहे उपस्थित रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित जोरा मॉल के सिनेमाघर में सपरिवार फिल्म ‘हनुमान अंश’ देखी। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भी सपरिवार उपस्थित रहे। मंत्रिपरिषद के सदस्य तथा विभिन्न निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्षों ने भी फिल्म देखी। फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री साय ने ‘हनुमान अंश’ को छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और संत परंपरा से समाज को परिचित कराने वाली ऐसी प्रेरणादायी फिल्में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचनी चाहिए। फिल्म को टैक्स फ्री किए जाने से प्रदेश के अधिकाधिक दर्शकों, विशेषकर युवाओं को भारत की समृद्ध संत परंपरा और उसके जीवन मूल्यों को जानने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत की संत परंपरा ने सदैव समाज को सत्य, सेवा, करुणा, प्रेम और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाया है। संतों ने अपने जीवन और आचरण के माध्यम से समाज को मानवता और लोककल्याण का संदेश दिया है। नीम करौली बाबा का जीवन भी इसी महान परंपरा का प्रेरणादायी उदाहरण है। उनका जीवन हमें यह सीख देता है कि मानव सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीम करौली बाबा ने अत्यंत सरल शब्दों और सहज जीवन के माध्यम से प्रेम, सेवा और भक्ति का संदेश दिया। उनके विचारों में मानवता और सभी के प्रति समान भाव सर्वोपरि रहा। उनका यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है और समाज को सकारात्मक दिशा देने की सामर्थ्य रखता है। मुख्यमंत्री साय ने फिल्म के निर्माताओं, निर्देशक, कलाकारों एवं पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज तक विचार, संस्कार और प्रेरणा पहुंचाने का भी प्रभावी माध्यम है। भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और संत परंपरा पर आधारित सकारात्मक फिल्में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और मानवीय मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति उसकी हजारों वर्षों पुरानी परंपराओं और जीवन मूल्यों में निहित है। सेवा, करुणा, सद्भाव और मानव कल्याण जैसे मूल्यों को आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्में इन मूल्यों को सरल और प्रभावी रूप में समाज तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास हैं। उल्लेखनीय है कि फिल्म ‘हनुमान अंश’ नीम करौली बाबा के जीवन, आध्यात्मिक यात्रा और उनके सेवा एवं भक्ति के संदेश पर आधारित है।  इस अवसर पर मंत्रिपरिषद के सदस्य, विभिन्न निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्षगण सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

सहायक आयुक्त महोदयों के गरिमामयी निरीक्षण में निखरी पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-5 की प्रतिभा, नवाचार और उत्कृष्टता

सहायक आयुक्त महोदयों के गरिमामयी निरीक्षण में निखरी पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-5 की प्रतिभा, नवाचार और उत्कृष्टता ग्वालियर  पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-5, ग्वालियर में एक दिवसीय विद्यालय भ्रमण एवं निरीक्षण हेतु माननीय सहायक आयुक्त महोदय श्री दीपक डबराल (ACAD) KVS HQ DELHI एवं श्री विजय वीर सिंह सहायक आयुक्त KVS RO BHOAL के आगमन पर श्री  मनीष तिलक प्राचार्य पीएम श्री केवी 5, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा आत्मीय एवं भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करते हुए कक्षा प्रथम से षष्ठम तक के विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा एवं क्षेत्रीय भाषाओं में अभिनंदन से हुई। छात्रा समृद्धि शुक्ला की मनमोहक नृत्य प्रस्तुति तथा विद्यार्थियों के बैंड वादन एवं स्वागत गीत ने वातावरण को संगीतमय बना दिया। स्काउट एवं गाइड की ओर से अनुष्का तिलक एवम् अन्य छात्राओं ने गार्ड ऑफ ऑनर प्रस्तुत किया, वहीं छात्राओं दिव्यांशी पाल एवं कीर्ति ने हरित स्वागत कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। विद्यालय निरीक्षण के दौरान प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों ने गणित एवं विज्ञान की गतिविधियों और कार्यशील मॉडलों के माध्यम से अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। टेसलेशन, वीविंग पैटर्न, सौरमंडल, जल चक्र एवं फाउंटेन जैसी गतिविधियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। माननीय सहायक आयुक्त ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उनकी जिज्ञासा, आत्मविश्वास एवं रचनात्मकता की सराहना की तथा उन्हें अधिकाधिक प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित किया। माननीय अधिकारी ने पीएम श्री योजना के सभी छह स्तंभों का अवलोकन कर इसके प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना की। कक्षा X एवं XII के विद्यार्थियों के साथ विशेष संवाद में उन्हें बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु महत्वपूर्ण सुझाव एवं प्रेरक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। इसके पश्चात बोर्ड कक्षाओं के शिक्षकों के साथ बैठक में शत-प्रतिशत परिणाम एवं प्रत्येक विद्यार्थी के शैक्षणिक स्तर में सुधार हेतु प्रभावी रणनीतियों पर चर्चा हुई। प्राचार्य महोदय ने समस्त शिक्षकों की ओर से उत्कृष्ट परिणाम के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया। अंत में श्रीमती चेतना शर्मा द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया तथा माननीय सहायक आयुक्त महोदय सहित सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की गई।

यात्री परिवहन के विस्तार पर मंथन, इंदौर में विजन समिट से निवेश और उद्योग को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

इंदौर  मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2005 में घाटे का हवाला देकर सड़क परिवहन निगम (सपनि) को बंद कर दिया था। पत्रिका ने सड़क परिवहन निगम के बंद होने से प्रदेश में बिगड़ी परिवहन व्यवस्था को उजागर किया था। सरकार के सामने वे सभी तथ्य लेकर आए, जिसने सफर की मुश्किलें बढ़ाईं। इसके बाद मोहन सरकार ने सरकारी लोक परिवहन सेवा को शुरू करने ऐलान किया और अब क्रियान्वयन की ओर बढ़ी है। यानी अब मध्य प्रदेश में जल्द ही सरकारी बस परिवाहन सेवा शुरु होगी। आपको बता दें कि, राज्य सरकार प्रदेश के नागरिकों को स्मार्ट, सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण-अनुकूल लोक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम लेने जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा यात्री परिवहन विजन समिट-2026 आयोजित की जाएगी। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में 11 और 12 सितंबर को आयोजित होने समिट में प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था को अधिक आधुनिक, व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के साथ-साथ निवेश, रोजगार और उद्योग के नए अवसरों को बढ़ावा देने पर मंथन होगा। इसमें पूरे देश से आने वाले परिवहन विशेषज्ञ, निजी बस ऑपरेटर, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और नीति-निर्माता प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विचार-विमर्श करेंगे। विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यात्री परिवहन का रोडमैप तैयार करने में मदद मिलेगी। साथ ही प्रदेश की 75 फीसदी ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़कर ग्रामीण कनेक्टिविटी को बेहतर किया जाएगा। मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड अंतर्गत 'मोबिलिटी विज़न 2030' का लक्ष्य प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक परिवहन नेटवर्क का विस्तार करना है। इसके अंतर्गत प्रदेश में 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें संचालित की जाएंगी। इससे रोजाना 30 लाख से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी। साथ ही 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड्स, टर्मिनल्स और डिपो का कायाकल्प होगा। इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से समिट में स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा। मौजूदा समय में 96 पीएम ई-बसें और 120 इंटरसिटी बसें प्रदेश में संचालित हैं। इसके साथ आगामी 6 महीनों में 486 पीएम ई-बसें और 34 इंटरसिटी बसें जोड़ी जाएंगी, जबकि वर्ष 2027 तक यह संख्या बढ़ाकर 1,100 करने का लक्ष्य है। प्रदेश में 100 बसों की क्षमता वाले आधुनिक चार्जिंग डिपो और सोलर इंफ्रॉस्ट्रक्चर भी तैयार किए जा रहे हैं। इससे सालाना 70,000 टन से अधिक कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी। यात्री सुरक्षा, स्मार्ट तकनीक और 24×7 निगरानी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत संचालित होने वाली सभी बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए होगी। इसके लिए मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं उसकी 7 सहायक कंपनियों में अत्याधुनिक कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन सेंटरों से बसों के संचालन, लोकेशन, टाइमिंग एवं अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इससे यात्री परिवहन व्यवस्था अधिक सुरक्षित, सुगम, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी। सभी बसों को 07 सीसीटीवी कैमरों, पैनिक बटन और रियल-टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम से लैस किया जा रहा है। इसके अलावा, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम, ड्राइवरों की तकनीकी ट्रेनिंग और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र के जरिए सुरक्षित एवं समयबद्ध यात्रा सुनिश्चित की जाएगी।

सेवारत शिक्षकों के लिए TET जरूरी, अनिवार्यता को चुनौती देने वाली याचिका ग्वालियर हाईकोर्ट ने ठुकराई

ग्वालियर  सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को चुनौती देने वाली याचिका एमपी में ग्वालियर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने खारिज कर दी है। जस्टिस जीएस आहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता का मामला सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले से पूरी तरह कवर होता है। ऐसे में उसे अलग से कोई राहत नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 29 मई 2026 के रिव्यू आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि टीईटी हासिल करने की समय-सीमा दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है। अब संबंधित इन-सर्विस शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी की योग्यता हासिल करनी होगी। बता दें, पहले परीक्षा पास करने की यह समय-सीमा 31 अगस्त 2027 थी। पुराने शिक्षकों को राहत की मांग याचिकाकर्ता राजेश मिश्रा ने मांग की थी कि आरटीई एक्ट की धारा 23(2) और उसके प्रावधान उन शिक्षकों पर पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं किए जाएं, जिनकी नियुक्ति टीईटी की अनिवार्यता लागू होने से पहले हुई थी। उन्होंने टीईटी पास नहीं करने के आधार पर सेवा से हटाने, अनिवार्य सेवानिवृत्ति या अन्य दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की भी मांग की थी। टीईटी औपचारिकता नहीं, आवश्यक योग्यता कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टीईटी केवल पात्रता की औपचारिकता नहीं, बल्कि शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए आवश्यक योग्यता है। शिक्षक पद पर नियुक्ति चाहने वाले व्यक्ति को टीईटी पास करना होगा। इसके बाद ही वह नियुक्ति के लिए पात्र माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने पुराने शिक्षकों की परिस्थितियों को देखते हुए कुछ राहत भी दी है। जिन इन-सर्विस शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से कम समय बचा है, वे टीईटी पास किए बिना सेवानिवृत्ति की आयु तक सेवा में रह सकते हैं। हालांकि, ऐसे शिक्षक टीईटी पास किए बिना पदोन्नति के लिए पात्र नहीं होंगे। 5 साल से अधिक सेवा बाकी तो टीईटी जरूरी कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय बचा है, उनके लिए निर्धारित अवधि में टीईटी पास करना अनिवार्य है। निर्धारित समय में योग्यता हासिल नहीं करने पर सेवा में बने रहने का अधिकार प्रभावित भी हो सकता है।

AI और रोबोट से बदलेगी कैंसर जांच की तस्वीर, इंदौर में 12 सेकंड में रिपोर्ट और मुफ्त स्क्रीनिंग

इंदौर  देश भर में तेजी से ओरल कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं. ऐसे में समय रहते बीमारियों की जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काफी मददगार साबित हो रहा है. रोबोट डिवाइस मुंह से जुड़ी बीमारियों और खासतौर पर कैंसर का पता आसानी से और समय रहते लगा रहा है, जिससे मरीज को बीमारी के गंभीर होने से पहले इलाज मिल सकेगा।  हर साल कैंसर की चपेट में आ रहे हजारों लोग भारत में धूम्रपान की लत के अलावा, तंबाकू का सेवन और तरह-तरह के जानलेवा शौक से कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं. हर साल हजारों मरीज डायग्नोज हो रहे हैं, इनमें से अधिकांश थर्ड और फोर्थ स्टेज कंडीशन में होते हैं. इसलिए इनमें से हर साल 50 हजार लोगों की इलाज के बावजूद बीमारी फैलने के कारण मौत हो जाती है. हॉस्पिटल और ऑन्कोलॉजिस्ट वाले कैंसर सहित कई अन्य गंभीर बीमारियों को प्री स्टेज में पता करने के लिए स्कैन ओ एयर नामक रोबोटिक मशीन का उपयोग कर रहे हैं. यह मशीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए बीमारी का 96% तक पता लगाने में सक्षम है।  फ्री में होगी जांच इंदौर स्थित एक निजी अस्पताल में पहली बार यह मशीन स्थपित किया गया है. जहां मुंह की किसी भी समस्या का निशुल्क जांच किया जा रहा है. जांच के बाद फौरन रिपोर्ट मरीज के मोबाइल नंबर में आ जाता है. अस्पताल के ऑन्कोलॉजिस्ट अमय बियानी ने कहा, "अधिकांश मरीजों को यह पता नहीं होता कि उनके मुंह की छोटी सी तकलीफ कभी भी कैंसर का रूप ले सकती है. अस्पताल में किसी भी तरह की तकलीफ में आने वाले लोग अपने मुंह की प्री मेलेनिन स्टेज में ही जांच कर सकें. इसलिए यह रोबोटिक मशीन स्थापित की गई है।  ओरल कैंसर के लिए क्रांतिकारी साबित इस रोबोटिक मशीन की खोज साल 2020 में पुणे की डेंटिस्ट विधि भानुशाली और रजत कबाड़े ने किया था, इसका उद्देश्य दांतों और मसूड़े की 40 तरह की बीमारियों की पहचान के लिए किया गया था. इस रोबोटिक मशीन से तरह-तरह की मुंह की जांच के अलावा, कैंसर की प्री स्टेज से संबंधित बीमारी और स्थितियां भी डायग्नोज होने लगी हैं, जिससे यह मशीन ओरल कैंसर के डायग्नोज के लिए क्रांतिकारी साबित हो रही है।    मेडिकल प्रोफेशनल के लिए सहायक कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा पवार ने कहा, "रोबोटिक मशीन की जांच रिपोर्ट से काफी हद तक मरीज की बीमारी का पता चल जाता है. जिससे यह डॉक्टर और मेडिकल प्रोफेशनल के लिए भी सहायक सिद्ध होगी. मशीन की जांच रिपोर्ट के बाद सिर्फ उन मरीजों को सीटी स्कैन अथवा बायोप्सी करनी जरूरी होगी. जिनका डायग्नोज मशीन द्वारा ओरल कैंसर के रूप में किया गया है इससे लोगों को अनावश्यक जांच के खतरे और आर्थिक समस्या से बचाव हो सकेगा। 

2027 चुनाव के लिए BJP का बड़ा प्लान, 125 मौजूदा विधायकों पर संकट; 2024 के नतीजों से लिया सबक

लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब छह महीने से भी कम वक्त बचा है. इस चुनाव में 10 साल से सत्तारूढ़ योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली भाजपा सरकार के सामने हैट्रिक लगाने की चुनौती है. भाजपा ने स्थानीय विधायकों के कामकाज और लोकप्रियता का सर्वे कराते हुए जनता का मूड भांपने की कोशिश की है. 2024 के लोकसभा चुनाव से लगे झटके से सबक लेकर भाजपा ने 403 विधानसभा सीटों पर एक गोपनीय और बहुस्तरीय आंतरिक सर्वे कराया है. इस सर्वे रिपोर्ट ने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।  भाजपा का आंतरिक सर्वे सूत्रों की मानें तो इस सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में करीब 125 से 128 मौजूदा विधायकों के खिलाफ उनके ही क्षेत्रों में जबर्दस्त एंटी इनकंबेंसी है. सीधे तौर पर कहें तो करीब भाजपा में 128 सीटों पर मौजूदा विधायकों के टिकट काटा या बदला जा  सकता है. पश्चिम यूपी से लेकर पूरब तक मंत्रियों से लेकर दिग्गज विधायकों तक के नाम इस रेड लिस्ट में शामिल हैं. भाजपा यूपी को अपने संगठन के लिहाज से 6 क्षेत्रों में बांटती है. ऐसे में कहां किस क्षेत्र से कितने टिकट कट सकते हैं, ये आंकड़ा चौंकाने वाला है. यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल माना जा रहा है।      पश्चिम क्षेत्र की 71 सीटों में 23-25 टिकट कटने के आसार     ब्रज क्षेत्र कुल 65 सीटों में 24-26 टिकट कटने की संभावना     अवध क्षेत्र में कुल 82 सीट में 26-28 टिकट कटने का संकेत     कानपुर क्षेत्र की कुल 52 सीट में 22-24 कटने के कयास     काशी क्षेत्र में कुल 72 सीट में 19-21 का पत्ता कट सकता है     गोरखपुर क्षेत्र की 62 सीटों में 18-22 टिकट कटने की संभावना यूपी में भाजपा की हैट्रिक की चुनौती भाजपा यूपी में हैट्रिक लगाने को पूरी ताकत झोंक रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले एक-डेढ़ महीने में ही राज्य के ज्यादातर जिलों का दौरा कर विकास परियोजनाओं की झड़ी लगा दी है.2022 की जीत की बात करें तो 1985 के बाद यूपी में यह पहला मौका था जब किसी मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी ने लगातार दूसरी बार पूरे बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी. वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित है. अखिलेश यादव जहां पीडीए के सामाजिक समीकरणों पर ध्यान केंद्रित किए हैं, वहीं कांग्रेस दलित-मुस्लिम वोटों को एकजुट करके अपना जनाधार बढ़ाने में जुटी है।  2022 विधानसभा चुनाव में किसको कितनी सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP)- 255 अपना दल (सोनेलाल)-1 2 निषाद पार्टी (NISHAD)- 06 एनडीए (NDA)-  273 कुल सीटें 403: बहुमत 202 गठबंधन में सीटों का बंटवारा भी चुनौती उत्तर प्रदेश में मोदी-योगी लहर को कायम रखते हुए भाजपा को अकेले 41.29% वोट मिले थे. भाजपा का पिछले चुनाव में अपना दल सोनेलाल, निषाद पार्टी जैसे दलों के साथ गठबंधन रहा है. अब एनडीए के खेमे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय लोकदल शामिल है. एनडीए का सपा-कांग्रेस गठबंधन से मुख्य मुकाबला होना तय है. मायावती की बहुजन समाज पार्टी, आजाद समाज पार्टी, एआईएमआईएम जैसे दल भी ताल ठोकने को तैयार हैं। 

युवाओं को मिलेगा देश की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं और प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को करीब से जानने का अवसर

भोपाल  राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत मध्यप्रदेश शासन की महत्वपूर्ण ‘माँ तुझे प्रणाम’ योजना के अंतर्गत वर्ष 2026-27 के लिए युवाओं के चयन की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है। योजना का उद्देश्य युवाओं में भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के प्रति सम्मान और राष्ट्रभाव विकसित करना, सीमा पर होने वाली सैन्य गतिविधियों एवं सैनिकों की दिनचर्या से परिचित कराना तथा मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक स्थलों से युवाओं को परिचित कराना है। हर विकासखंड से 10 युवा जाएंगे अनुभव यात्रा पर योजना के अंतर्गत प्रत्येक विकासखंड स्तर से 5 युवक एवं 5 युवतियों, कुल 10 युवाओं का चयन किया जाएगा। चयनित युवा भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं की अनुभव यात्रा अथवा प्रदेश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक स्थलों के भ्रमण के माध्यम से देश की विविधता, संस्कृति और सीमा सुरक्षा व्यवस्था को करीब से जान सकेंगे। 5 अलग-अलग श्रेणियों से होगा चयन विकासखंड स्तर पर चयन में एक एनसीसी, एक एनएसएस, एक खिलाड़ी, एक मेधावी छात्र तथा एक स्काउट सहित इसी मानदंड के अनुसार युवतियों का चयन किया जाएगा। चयन के लिए युवाओं की आयु 15 से 25 वर्ष निर्धारित है, जिसकी गणना 31 दिसंबर 2027 तक की जाएगी। चयन के मापदंड योजना के निर्धारित परिशिष्ट में दिए गए हैं। खेल प्रतिभाओं को मिलेगा विशेष अवसर खेल श्रेणी में अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राज्य, संभाग और जिला स्तर पर पदक प्राप्त करने अथवा सहभागिता करने वाले खिलाड़ियों को प्राथमिकता के आधार पर चयन के लिए पात्र माना गया है। इससे विभिन्न स्तरों पर खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके युवाओं को योजना के माध्यम से देश की सीमाओं और राष्ट्रीय गौरव से जुड़ने का अवसर मिलेगा। एनसीसी, एनएसएस और स्काउट युवाओं के लिए भी अवसर एनसीसी श्रेणी में सी, बी और ए प्रमाण-पत्र को चयन की प्राथमिकता में रखा गया है। वहीं स्काउट वर्ग में अंतर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय जम्बूरी, राष्ट्रपति स्काउट गाइड रोवर रेंजर पुरस्कार, राज्य पुरस्कार तथा तृतीय एवं द्वितीय सोपान जैसी उपलब्धियों को चयन का आधार बनाया गया है। एनएसएस श्रेणी में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में सहभागिता, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पुरस्कार, गणतंत्र दिवस परेड, राष्ट्रीय युवा उत्सव, एनएसएस मेगा शिविर, राष्ट्रीय एकता शिविर, साहसिक कार्यक्रम शिविर सहित राज्य, विश्वविद्यालय, जिला एवं इकाई स्तर के शिविरों में सहभागिता को प्राथमिकता दी जाएगी। मेधावी विद्यार्थियों को भी मिलेगा मौका मेधावी श्रेणी में निर्धारित आयु वर्ग के अंतर्गत आयोजित परीक्षाओं में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले युवाओं को चयन में प्राथमिकता दी जाएगी। इस प्रकार योजना में खेल, शिक्षा, एनसीसी, एनएसएस और स्काउटिंग जैसी विविध गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं को अवसर दिया जा रहा है। जिला स्तर पर समिति करेगी परीक्षण, लॉटरी से होगा चयन विकासखंड स्तर से प्राप्त आवेदनों का जिला स्तर पर सूक्ष्म परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित चयन समिति द्वारा लॉटरी के माध्यम से युवाओं का चयन किया जाएगा। समिति में जिला पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी, नेहरू युवा केंद्र के समन्वयक, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड, चिन्हित महाविद्यालय के जिला प्रभारी तथा जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी शामिल रहेंगे। दस्तावेजों की होगी अनिवार्य जांच अनुभव यात्रा के लिए चयनित युवाओं से निर्धारित प्रपत्र के अनुसार आवेदन पत्र के साथ फिटनेस सर्टिफिकेट/चिकित्सा प्रमाण-पत्र, जोखिम एवं संबंधित थाने से चरित्र प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जाएगा। चरित्र प्रमाण-पत्र एवं चिकित्सा प्रमाण-पत्र चयनित युवाओं से ही लिया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। एक युवा को केवल एक बार मिलेगा अनुभव यात्रा का अवसर योजना में चयनित युवा को केवल एक बार ही अनुभव यात्रा में भेजा जाएगा। यदि कोई युवा अनुभव यात्रा में जाने से असहमति व्यक्त करता है, तो उसे आगामी किसी भी अनुभव यात्रा में नहीं भेजा जाएगा। साथ ही पूर्व में अनुभव यात्रा पर भेजे जा चुके युवाओं का पुनः चयन नहीं किया जाएगा। आवेदन के लिए 22 सितंबर तक का समय, वेबसाइट से भी प्राप्त किए जा सकते हैं आवेदन ‘माँ तुझे प्रणाम’ योजना के अंतर्गत विकासखंड स्तर पर पात्र युवाओं से 22 सितंबर तक आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। प्राप्त आवेदनों के परीक्षण के बाद 23 से 26 सितंबर तक जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित चयन समिति द्वारा लॉटरी के माध्यम से युवाओं का चयन किया जाएगा। चयनित युवाओं की सूची तथा समिति के हस्ताक्षरित दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी 30 सितंबर तक संचालनालय, खेल एवं युवा कल्याण को ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। ‘माँ तुझे प्रणाम’ योजना के आवेदन पत्र खेल एवं युवा कल्याण विभाग की वेबसाइट www.dsywmp.gov.in से भी प्राप्त किए जा सकते हैं। युवा शक्ति को राष्ट्रसेवा और राष्ट्रीय गौरव से जोड़ने की पहल ‘माँ तुझे प्रणाम’ योजना के माध्यम से मध्यप्रदेश शासन का प्रयास है कि प्रदेश के युवा केवल पुस्तकों के माध्यम से नहीं, बल्कि सीमा पर तैनात सैनिकों के जीवन, राष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था तथा भारत की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासत को प्रत्यक्ष अनुभव कर देश के प्रति अपने दायित्व और गौरव की भावना को और मजबूत करें।