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डॉक्टरों की हड़ताल खत्म: सरकार-IMA बैठक में बनी सहमति, नई SOP 10 दिन में

जयपुर राजस्थान के लाखों सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और आम मरीजों के लिए गुरुवार की सुबह राहत की खबर लेकर आई है. पिछले कई दिनों से चल रहा मेडिकल गतिरोध अब पूरी तरह खत्म हो गया है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) राजस्थान और अन्य चिकित्सा संगठनों ने राज्य सरकार के साथ हुई एक हाई-लेवल बैठक के बाद राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के बहिष्कार को आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया है. इस फैसले के बाद प्रदेश के सभी प्राइवेट अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों में आरजीएचएस (RGHS) के तहत मिलने वाली मुफ्त इलाज और ऑपरेशन की सुविधाएं दोबारा शुरू हो गई हैं. स्वास्थ्य मंत्री की बैठक में बनी बात बुधवार देर शाम डॉक्टरों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल ने सूबे के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा और चिकित्सा विभाग की प्रधान सचिव गायत्री राठौड़ के साथ सचिवालय में लंबी बैठक की. बैठक में डॉक्टरों ने आरजीएचएस स्कीम के नियमों में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों और अस्पतालों के करोड़ों रुपये के पेंडिंग पेमेंट्स का मुद्दा उठाया. डॉक्टरों की दलीलों को सुनने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने तुरंत एक्शन लिया और अफसरों को दो-टूक निर्देश जारी किए. 10 दिन में बदलेंगे नियम, जारी होगी नई SOP आईएमए राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा और सचिव डॉ. एनके अग्रवाल ने बताया कि सरकार का रुख बेहद सकारात्मक रहा है. स्वास्थ्य मंत्री ने आरजीएचएस प्रशासन को सख्त आदेश दिया है कि डॉक्टरों द्वारा सौंपे गए सुझावों को शामिल करते हुए अगले 10 दिनों के भीतर योजना की नई और संशोधित गाइडलाइन जारी की जाए. इसके अलावा, नियमों को आसान बनाने और क्लेम की कड़ियों को पारदर्शी रखने के लिए एक जॉइंट कमेटी भी बनाई जाएगी, जिसमें आरजीएचएस अधिकारियों के साथ-साथ आईएमए के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. अस्पतालों को मिलेगा बकाया पैसा, प्राइवेट एम्बुलेंस पर कड़ाई बैठक में सरकार ने डॉक्टरों को लिखित आश्वासन दिया है कि निजी अस्पतालों का जितना भी जायज बकाया पैसा अटका हुआ है, उसे जल्द से जल्द बजट जारी करके क्लियर किया जाएगा. साथ ही, भविष्य के पेमेंट्स के लिए एक तय टाइमलाइन बनाई जाएगी ताकि अस्पतालों को बार-बार चक्कर न काटने पड़ें. सरकार के इस ठोस कदम के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म कर तुरंत काम पर लौटने का ऐलान कर दिया. अब किसी भी मरीज को प्राइवेट अस्पतालों से बिना इलाज के खाली हाथ नहीं लौटना पड़ेगा.

धमतरी हादसे का LIVE VIDEO वायरल, पिकअप की चपेट में आने से युवक की मौत

धमतरी. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में आज एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ है, जहां एक बाइक सवार युवक तेज रफ्तार पिकअप के नीचे आ गया। इस घटना में युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जिसका वीडियो भी सामने आया है। यह घटना मगरलोड थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक, मृतक की पहचान यशवंत निषाद के रूप में हुई है, जो कि अमलीडीह का रहने वाला था। गुरुवार सुबह 11 बजे वो मगरलोड थाना क्षेत्र से गुजर रहा था, तभी अचानक बाइक से गिर गया और पिकअप ने उसे कुचल दिया। इस हादसे में उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना का सीसीटीवी आया सामने घटना का सीसीटीवी सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि किस तरह से युवक हादसे का शिकार हुआ। वीडियो में दिख रहा है कि युवक अचानक चलती बाइक के साथ गिर गया और बाजू से गुजर रहे पिकअप ने उसके सिर को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरु कर दी है। 

पश्चिमी सिंहभूम में माओवादी नेटवर्क पर बड़ा असर, कई सरेंडर

गुवा पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा और सारंडा क्षेत्र में कभी माओवादी संगठनों का गहरा प्रभाव था. इन्हीं जंगलों से कई ऐसे नाम उभरे, जिन्होंने बाद में संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां संभालीं. इनमें सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल, गादी मुण्डा उर्फ गुलशन, नागेंद्र मुण्डा उर्फ प्रभात मुण्डा और सुलेमान हांसदा जैसे नाम शामिल हैं. कभी गरीबी और अभाव में जीवन बिताने वाले ये युवक बाद में माओवादी संगठनों के सक्रिय कमांडर बन गए. मजदूरी से माओवादी कमांडर बनने तक का सफर गोइलकेरा क्षेत्र का रहने वाला सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल सामान्य आदिवासी परिवार से जुड़ा था. ग्रामीणों के अनुसार उसका बचपन गरीबी, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच बीता. शुरुआती दिनों में वह मजदूरी और जंगल आधारित काम करके परिवार चलाता था. धीरे-धीरे वह इलाके में सक्रिय माओवादी संगठन के संपर्क में आया. स्थानीय युवाओं को पुलिस कार्रवाई, विस्थापन और सरकारी उपेक्षा का हवाला देकर संगठन से जोड़ा जाता था. सागेन भी इसी प्रचार से प्रभावित हुआ और बाद में हथियारबंद दस्ते का हिस्सा बन गया. समय के साथ वह माओवादी संगठन का विशेष क्षेत्र समिति सदस्य बना. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ 123 मामले दर्ज हैं और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था. लगातार सुरक्षा अभियानों और संगठन की कमजोर स्थिति के बाद उसने आत्मसमर्पण का फैसला लिया. गादी मुण्डा बना एरिया कमांडर रांची जिले के बुंडू क्षेत्र का निवासी गादी मुण्डा उर्फ गुलशन भी गरीब ग्रामीण परिवार से जुड़ा था. युवावस्था में रोजगार और स्थायी आय की कमी के कारण वह उग्रवादी नेटवर्क के संपर्क में आया. शुरुआत में उसने संगठन के लिए संदेश पहुंचाने और ग्रामीण नेटवर्क तैयार करने का काम किया. बाद में वह हथियारबंद दस्ते में शामिल हो गया और धीरे-धीरे एरिया कमांडर के पद तक पहुंच गया. पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ 48 मामले दर्ज हैं. उस पर भी पांच लाख रुपये का इनाम था. जंगलों में लगातार चल रहे अभियान, सुरक्षा कैंपों की स्थापना और संगठन के भीतर बढ़ते अविश्वास के कारण उसका प्रभाव कमजोर पड़ गया. अंततः उसने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया. नागेंद्र मुण्डा रहा सक्रिय माओवादी चेहरा खूंटी जिले के अड़की क्षेत्र का निवासी नागेंद्र मुण्डा उर्फ प्रभात मुण्डा उर्फ मुखिया लंबे समय तक सक्रिय माओवादी कमांडर रहा. ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े नागेंद्र पर शुरुआती दिनों में उग्रवादी विचारधारा का प्रभाव पड़ा. संगठन ने उसे हथियार प्रशिक्षण दिया और जंगल अभियानों में शामिल किया. धीरे-धीरे वह संगठन का भरोसेमंद सदस्य बन गया. पुलिस के अनुसार वह पुलिस कैंपों पर हमले, विस्फोट और हथियार लूट जैसी घटनाओं में शामिल रहा. उसके खिलाफ 38 मामले दर्ज थे और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था. लगातार घेराबंदी, जंगलों में नए सुरक्षा कैंप और सप्लाई नेटवर्क टूटने के कारण उसकी गतिविधियां कमजोर हो गईं. इसके बाद उसने आत्मसमर्पण कर सामान्य जीवन में लौटने का फैसला लिया. सुलेमान हांसदा ने भी छोड़ा हथियार सुलेमान हांसदा उर्फ सुनीया हांसदा पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा क्षेत्र के हतनाबुरू गांव का निवासी है. आर्थिक कठिनाइयों और सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े सुलेमान को स्थानीय माओवादी नेटवर्क ने अपने साथ जोड़ लिया था. शुरुआत में वह जंगल के रास्तों की जानकारी देने, राशन पहुंचाने और सूचनाएं उपलब्ध कराने का काम करता था. बाद में वह सक्रिय दस्ते का हिस्सा बन गया. उसके खिलाफ 13 मामले दर्ज हैं और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम था. हाल के वर्षों में सारंडा क्षेत्र में लगातार पुलिस और सीआरपीएफ अभियान चलाए गए. सुरक्षा बलों की बढ़ती मौजूदगी और संगठन की कमजोर होती स्थिति के बीच सुलेमान ने भी हथियार छोड़ने का फैसला लिया. पुलिस द्वारा उसके परिजनों को संरक्षण में लेकर रांची भेजे जाने के बाद उसके आत्मसमर्पण की प्रक्रिया तेज हुई.

समाधान योजना से 29.81 लाख बिजली उपभोक्ताओं को राहत, ऊर्जा मंत्री तोमर का दावा

समाधान योजना में 29 लाख 81 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने लिया लाभ : ऊर्जा मंत्री तोमर भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि समाधान योजना में 15 मई तक 29 लाख 81 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने सरचार्ज में छूट का लाभ लिया है। उन्होंने बताया है कि पिछले वर्ष 3 नवम्बर को समाधान योजना 2025-26 की शुरुआत हुई थी। योजना 15 मई तक लागू थी। 473 करोड़ 39 लाख का सरचार्ज हुआ माफ मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 में 29 लाख 81 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने इस योजना का लाभ लिया है। कुल 1497 करोड़ 45 लाख रूपये जमा किये गये हैं, जबकि 473 करोड़ 39 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 8 लाख 91 हजार बकायादार उपभोक्ताओं ने अपना पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 834 करोड़ 55 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 331 करोड़ 60 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 11 लाख 27 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 340 करोड़ 8 हजार रूपये जमा हुए हैं, जबकि 99 करोड़ 49 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 9 लाख 63 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 322 करोड़ 82 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 42 करोड़ 30 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है।  

देवास विस्फोट कांड का मुख्य आरोपी दिल्ली एयरपोर्ट से दबोचा गया, अब तक 5 गिरफ्तारी

देवास देवास जिले के टोंककला में बीते दिनों पटाखा फैक्टरी में भीषण विस्फोट और आग लगने की घटना सामने आई थी। इस हादसे में पांच से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब 20 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। घटना के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया और कांग्रेस तथा बीजेपी के नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते नजर आए। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मामले की जांच के लिए विशेष दल का गठन किया गया, जिसने टोंककला पहुंचकर जांच शुरू की। मामले को गंभीरता से लेते हुए देवास पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम बनाई और मुख्य आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, मामले में अभी एक आरोपी की गिरफ्तारी बाकी है। पुलिस ने मुख्य आरोपी को दिल्ली एयरपोर्ट से किया गिरफ्तार टोंककला पटाखा फैक्टरी विस्फोट मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी मुकेश विज को देवास पुलिस ने गुरुवार सुबह नई दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया। आरोपी चीन के गुआंग्झू शहर से फ्लाइट के जरिए भारत लौटा था। देवास पुलिस की विशेष टीम पहले से एयरपोर्ट पर तैनात थी और “लुक आउट सर्कुलर (LOC)” के आधार पर उसे दबोच लिया गया। पुलिस ने इस मामले में एक अन्य फरार आरोपी महेश चौहान, निवासी उत्तराखंड, को भी दिल्ली से गिरफ्तार किया है। इससे पहले फैक्टरी लाइसेंसी अनिल मालवीय, मुख्य ठेकेदार मोहम्मद अयाज और संयुक्त संचालक कपिल विज की गिरफ्तारी की जा चुकी है। अब तक इस मामले में कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 13 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया एसपी देवास पुनीत गेहलोत ने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश और तकनीकी जांच के लिए 13 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया था। दोनों फरार आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। पुलिस की टीमें लगातार दिल्ली सहित कई स्थानों पर दबिश दे रही थीं। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश और डीजीपी कैलाश मकवाना के मार्गदर्शन में की गई। एडीजी उज्जैन जोन राकेश गुप्ता और डीआईजी उज्जैन रेंज नवनीत भसीन की निगरानी में देवास पुलिस मामले की वैज्ञानिक और पेशेवर तरीके से जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

राजस्थान-महाराष्ट्र पुलिस का जॉइंट ऑपरेशन, 4 करोड़ से ज्यादा के लैपटॉप बरामद

 जयपुर एक राज्य में चोरी करना और दूसरे राज्य में जाकर छिप जाना, अपराधियों का यह पुराना पैंतरा इस बार काम नहीं आया. महाराष्ट्र के नागपुर में हुई करोड़ों रुपये के लैपटॉप की एक बहुत बड़ी चोरी का पुलिस ने बुधवार को पर्दाफाश कर दिया. राजस्थान की डीग पुलिस और महाराष्ट्र की नागपुर पुलिस ने मिलकर एक बड़ा जॉइंट ऑपरेशन चलाया, जिसके तहत न सिर्फ चोरी के मुख्य मास्टरमाइंड को दबोचा गया, बल्कि उसके पास से 4 करोड़ रुपये से ज्यादा की कीमत के नए लैपटॉप भी बरामद कर लिए गए. आखिर कैसे हुआ इस बड़ी चोरी का खुलासा? यह पूरा मामला नागपुर के पारशिवनी इलाके का है, जहां मोटोरोला कंपनी के नए-नए लैपटॉप की एक बड़ी खेप चोरी हो गई थी. नागपुर पुलिस इस मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए राजस्थान के डीग जिले के पहाड़ी थाने पहुंची. यहां के एसपी कांबले शरण गोपीनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत अपनी स्पेशल डीएसटी (DST) टीम और पहाड़ी थाना पुलिस को काम पर लगा दिया. इसी बीच पुलिस कांस्टेबल सहाबुद्दीन को एक पक्की खबर मिली कि चोरी का मुख्य आरोपी इसी इलाके में छिपा हुआ है. इस सटीक सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी की और नागपुर पुलिस के साथ मिलकर आरोपी को धर दबोचा. पुलिस के हाथ क्या-क्या लगा? चोरों ने नागपुर से कुल 5 करोड़ 72 लाख रुपये की कीमत के 641 लैपटॉप उड़ाए थे. पुलिस ने जब पकड़े गए आरोपी से कड़ाई से पूछताछ की और उसकी बताई जगह पर छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर सब हैरान रह गए. पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 4 करोड़ 14 लाख रुपये से भी ज्यादा की कीमत के 464 बिल्कुल नए मोटोरोला लैपटॉप बरामद कर लिए. इसके साथ ही, चोरी की इस पूरी वारदात को अंजाम देने में जिस मारुति बलेनो कार का इस्तेमाल किया गया था, पुलिस ने उसे भी जब्त कर लिया है. कौन है यह शातिर आरोपी? पकड़े गए मुख्य आरोपी का नाम अजरूद्दीन उर्फ हजरूद्दीन है, जिसकी उम्र 28 साल है और वह डीग जिले के ही खल्लूका गांव का रहने वाला है. पुलिस के मुताबिक अजरूद्दीन कोई नौसिखिया नहीं है, बल्कि वह काफी शातिर और आपराधिक प्रवृत्ति का इंसान है. उसके खिलाफ पहले भी इस तरह की बड़ी चोरियों के दो मामले दर्ज हो चुके हैं. फिलहाल, चोरी के बचे हुए 176 लैपटॉप को ढूंढने के लिए पुलिस की टीमें लगातार भाग-दौड़ कर रही हैं. साथ ही, इस वारदात में अजरूद्दीन का साथ देने वाले उसके दूसरे साथियों को पकड़ने के लिए भी जगह-जगह दबिश दी जा रही है. क्या है ऑपरेशन सहयोग? इस पूरी कामयाबी के पीछे डीग पुलिस का 'ऑपरेशन सहयोग' है. यह एसपी डीग द्वारा चलाया जा रहा एक खास अभियान है, जिसका मकसद बेहद सीधा और साफ है- अगर किसी दूसरे जिले या दूसरे राज्य की पुलिस अपराधियों को पकड़ने के लिए डीग आती है, तो यहां की लोकल पुलिस बिना किसी देरी के उनकी पूरी मदद करेगी. इसी शानदार तालमेल की वजह से नागपुर पुलिस को इतनी बड़ी सफलता मिल पाई है. अब इस पकड़े गए शातिर चोर और बरामद किए गए करोड़ों के लैपटॉप को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए महाराष्ट्र पुलिस के हवाले किया जा रहा है.

विश्व मधुमक्खी दिवस पर अनोखा स्टॉल: शहद का सिरका देख हैरान रह गए मुख्यमंत्री

झज्जर  विश्व मधुमक्खी दिवस के अवसर पर बीते बुधवार को पंचकूला में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उस समय बेहद दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जब सूबे के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी झज्जर के प्रगतिशील मधुमक्खी पालक विनय फोगाट के स्टाल पर पहुंचे। वहां प्रदर्शित अनूठे उत्पादों को देखकर मुख्यमंत्री भी हैरान रह गए और उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, शहद का सिरका… यह तो मैंने पहले कभी सुना ही नहीं! कन्वेंशन सेंटर, रेड बिशप, सेक्टर-1 में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को विनय फोगाट द्वारा तैयार किया गया ''शहद का सिरका'' (हनी विनेगर) और ''बी प्रोबायोटिक'' इतना पसंद आया कि वे इसे विशेष रूप से अपने साथ लेकर गए। क्या खास है शहद के सिरके और बी प्रोबायोटिक में? प्रदर्शनी से वापिस लौटे विनय फोगाट ने बातचीत के दौरान उत्पादों की खासियत के बारे में विस्तार से जानकारी दी। शहद का सिरका (हनी विनेगर): यह आम सिरके की तरह तीखा नहीं होता। इसे शुद्ध शहद को लंबे समय तक प्राकृतिक रूप से फरमेंट (किण्वित) करके तैयार किया जाता है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने, वजन नियंत्रित करने और शरीर को डिटाक्सिफाई करने में बेहद असरदार माना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीआक्सीडेंट्स होते हैं। बी प्रोबायोटिक: यह मधुमक्खियों के प्राकृतिक स्लाइवा (लार) और शहद के कॉम्बिनेशन से तैयार एक ऐसा अनूठा उत्पाद है, जो पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को मजबूत करने में गेम-चेंजर साबित हो रहा है। 5 राज्यों का सफर और 18 तरह का शहद दरअसल, झज्जर जिले के मलिकपुर गांव के रहने वाले शहद उत्पादक विनय फोगाट आज क्षेत्र के किसानों के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुके हैं। उनके पास मौजूदा समय में करीब 1,100 मधुमक्खी कालोनियां हैं, जिनसे वे सालाना लगभग 38 से 40 टन शहद का रिकार्ड उत्पादन करते हैं। विनय फोगाट ने बताया कि वे केवल एक या दो नहीं, बल्कि 18 अलग-अलग तरह के शहद और उत्पाद तैयार करते हैं। इसके लिए वे मौसम और फूलों के खिलने के चक्र के हिसाब से अपने बी-फार्म को हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश के इलाकों में शिफ्ट करते हैं। उनके पिटारे में सरसों, नीम, शीशम, कीकर, हिमाचल व कश्मीर का पहाड़ी शहद, कश्मीर का एकेशिया, सूरजमुखी, सौंफ और जामुन का शहद प्रमुख रूप से शामिल है। इसके अलावा वे शहद से गुलकंद, हनी अर्क, बी प्रोपोलिस टिंक्चर और घुटनों के दर्द की विशेष जेल भी तैयार करते हैं। फसलों की सच्ची मित्र हैं मधुमक्खियां स्टाल के दौरे के दौरान विनय फोगाट ने मुख्यमंत्री के सामने किसानों से रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाने की पुरजोर अपील की। उन्होंने कहा केमिकल और पेस्टीसाइड्स के अंधाधुंध इस्तेमाल से हमारी सबसे अच्छी मित्र कीट मधुमक्खियां बहुत तेजी से मर रही हैं। जबकि सच्चाई यह है कि जहां भी मधुमक्खी के बाक्स रखे जाते हैं, उसके 3 से 4 किलोमीटर के दायरे में क्रास-पालिनेशन (परागण) के जरिए फसलों की पैदावार ढाई से तीन क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बढ़ जाती है। वैज्ञानिक तथ्य साझा करते हुए बताया कि मधुमक्खियों के पॉलिनेशन से तिलहनी फसलों में तेल के भीतर सल्फर कंटेंट 10 से 15% तक बढ़ जाता है। साथ ही, मधुमक्खियां अपने स्लाइवा (लार) से फूलों के अंदर जो यीस्ट छोड़ती हैं, उससे फसलों में प्राकृतिक मिनरल्स की मात्रा में भारी इजाफा होता है।  

चुड़ादा गांव में चौपाल के बाद सीएम ने खाट पर बैठकर सुनी ग्रामीणों की बातें

बांसवाड़ा बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ क्षेत्र के चुड़ादा गांव में बुधवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का अलग ही अंदाज देखने को मिला. ग्राम विकास चौपाल कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री गांव निवासी गट्टूलाल यादव के घर भोजन करने पहुंचे. परिवार के साथ जमीन पर बैठकर पत्तल-दोने में खाना खाया. भोजन में दाल-चावल के साथ मिक्स वेज परोसी गई, जिसमें आलू, ग्वार फली और मटर शामिल थी. इसके अलावा भोजन के साथ आमरस भी परोसा गया. खाट पर बैठकर ग्रामीणों से की बात मुख्यमंत्री ने परिवार के साथ बैठकर भोजन किया. भोजन के बाद वे घर के बाहर खाट पर बैठ गए और आसपास मौजूद ग्रामीणों, महिलाओं और बुजुर्गों से आत्मीय बातचीत की. इस दौरान उन्होंने गांव की स्थिति, खेती-बाड़ी, पशुपालन और परिवारों की आजीविका के बारे में जानकारी ली.  मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की कुशलक्षेम पूछते हुए सरकारी योजनाओं के लाभ और गांव की जरूरतों पर भी चर्चा की. जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील इससे पहले मुख्यमंत्री ने चुड़ादा गांव में आयोजित ग्राम विकास चौपाल कार्यक्रम में किसानों और पशुपालकों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार की मंशा है कि किसान लाभ की खेती अपनाएं, आय बढ़ाएं और विकास यात्रा में सहभागी बनें. मुख्यमंत्री ने किसानों से जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार बैलों से पारंपरिक और प्राकृतिक खेती करने पर 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दे रही है. "बिजली-पानी की उपलब्धता पर हो रहा काम" मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में बिजली और पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने रामजल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौता, आईजीएनपी और गंगनहर सुदृढ़ीकरण सहित माही, देवास और सोम-कमला-अंबा परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है. उन्होंने कहा कि प्रदेश के 26 जिलों में किसानों को दिन में बिजली आपूर्ति की जा रही है, और वर्ष 2027 तक यह व्यवस्था पूरे राजस्थान में लागू करने का लक्ष्य है. पॉली हाउस को बढ़ावा देने की बात कही उन्होंने स्थानीय कृषि उत्पादों के अनुसार, प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने, ग्रीन हाउस और पॉली हाउस को बढ़ावा देने की बात कही.  मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान दुग्ध उत्पादन में नए रिकॉर्ड बना रहा है और मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना के तहत 5 रुपये प्रति लीटर का अनुदान दिया जा रहा है. कृषि क्षेत्र में नवाचार करने का आह्वान किया   मुख्यमंत्री ने युवाओं से कृषि क्षेत्र में नवाचार करने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिए रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार 4 लाख भर्तियों के संकल्प की दिशा में आगे बढ़ रही है और बड़ी संख्या में नियुक्तियां प्रक्रियाधीन हैं. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किसानों, पशुपालकों और युवा उद्यमियों को चेक और स्वीकृति पत्र भी वितरित किए. इस दौरान कई लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए सरकार की योजनाओं के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया.

सीमा पर तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ा अभियान, भारत-नेपाल बॉर्डर पर बढ़ी चौकसी

किशनगंज. भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और संगठित रूप में दिखाई देने लगी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की फरवरी में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह एक्टिव मोड में डाल दिया गया है। इसका असर अब जमीन पर साफ नजर आ रहा है, जहां भारत और नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संयुक्त अभियान चलाकर सीमा पार होने वाली हर गतिविधि पर कड़ी नजर रख रही हैं। साप्ताहिक समन्वय बैठक से बढ़ा तालमेल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB), नेपाल एपीएफ और बिहार पुलिस के बीच अब नियमित रूप से हर सप्ताह समन्वय बैठक आयोजित की जा रही है। पहले यह बैठकें अनियमित थीं, लेकिन अब लगातार संवाद और समन्वय ने सुरक्षा तंत्र को अधिक प्रभावी बना दिया है। इस बेहतर तालमेल के चलते इंटेलिजेंस शेयरिंग और संयुक्त पेट्रोलिंग को गति मिली है, जिससे मानव तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी, फर्जी दस्तावेजों के उपयोग और संदिग्ध आवाजाही पर तेजी से कार्रवाई संभव हो रही है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि पहले जिन गतिविधियों पर कार्रवाई में समय लगता था, अब उन पर रियल टाइम में कदम उठाए जा रहे हैं। संवेदनशील प्वाइंट्स चिन्हित, बढ़ाई गई निगरानी सीमावर्ती इलाकों में कई ऐसे संवेदनशील स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी बढ़ाई गई है। इन क्षेत्रों में ड्रोन, डिजिटल सर्विलांस और मोबाइल ट्रैकिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इन तकनीकों के माध्यम से सीमाई गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है, जिससे किसी भी संदिग्ध मूवमेंट की तुरंत पहचान संभव हो रही है। हाईटेक निगरानी प्रणाली पर जोर दो दिन पहले बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी सीमाई सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को हाईटेक मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने का निर्देश दिया है। इस दिशा में तकनीकी संसाधनों को और मजबूत करने पर काम शुरू हो गया है। वहीं नेपाल में नई सरकार बनने के बाद वहां की सुरक्षा एजेंसियों ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में सख्ती बढ़ा दी है। हाल के दिनों में थाई नागरिक की गिरफ्तारी, मादक पदार्थों की बड़ी खेप की बरामदगी और संदिग्ध गतिविधियों पर हुई कार्रवाई ने दोनों देशों की एजेंसियों को और अधिक सतर्क कर दिया है। तस्करी नेटवर्क पर बढ़ा दबाव सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ी सतर्कता का सीधा असर सीमांचल क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। लंबे समय से खुली सीमा का फायदा उठाकर सक्रिय तस्कर गिरोह और अवैध नेटवर्क अब दबाव में आ गए हैं। संयुक्त अभियान और रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग के कारण सीमा पार अपराधियों के लिए गतिविधियां संचालित करना पहले की तुलना में काफी कठिन हो गया है। लगातार कार्रवाई से तस्करी के पुराने नेटवर्क भी कमजोर पड़ रहे हैं। SSB की 15 किलोमीटर तक बढ़ी सक्रियता इधर भारतीय सीमा में सशस्त्र सीमा बल (SSB) का दायरा 15 किलोमीटर तक बढ़ाए जाने का भी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। बिहार पुलिस के साथ मिलकर एसएसबी न केवल निगरानी बढ़ा रही है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के बीच जागरूकता अभियान भी चला रही है। ग्रामीणों को सीमा सुरक्षा में सहयोगी भूमिका के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी समय पर सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंच सके। आधुनिक तकनीक का उपयोग कुल मिलाकर, भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ी हुई सतर्कता, आधुनिक तकनीक का उपयोग और दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय ने सीमाई सुरक्षा को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। इससे न केवल तस्करी और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगा है, बल्कि सीमांचल क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था भी पहले से अधिक मजबूत हुई है।

परमानेंट नौकरी की मांग को लेकर सड़क पर उतरे रोडवेज कर्मचारी, लुधियाना में हंगामा

लुधियाना. पंजाब परिवहन विभाग में सेवाएं दे रहे संविदा कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर वीरवार को जोरदार प्रदर्शन किया। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी संविदा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले बड़ी संख्या में कर्मचारी बस स्टैंड पर एकत्रित हुए और करीब दो घंटे तक पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों की मुख्य मांग उन्हें स्थायी किया जाना था। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी और परिवहन विभाग के निजीकरण को बढ़ावा देने के आरोप लगाए। इस मौके पर पंजाब रोडवेज पनबस पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के नेताओं ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार को बने चार साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन अब तक एक भी संविदा कर्मचारी को स्थायी नहीं किया गया। किमी स्कीम बसों की तरफ ध्यान केंद्रित लुधियाना बस स्टैंड और डिपो के अध्यक्ष जतिंदर सिंह सोनी तथा राज्य नेता गुरबाज सिंह ने कहा कि सरकार ने परिवहन विभाग में नई सरकारी बसें भी शामिल नहीं की हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विभाग को मजबूत करने की बजाय किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसों को बढ़ावा देकर विभाग के निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार कर्मचारियों और यूनियन कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आवाज उठाने वाले कर्मचारियों को गैरकानूनी तरीके से घरों से उठाकर गिरफ्तार किया जा रहा है और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। 25 से 27 मई तक मुख्यमंत्री निवास के बाहर बैठेंगे कर्मचारी प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई फैसला नहीं लिया गया तो संघर्ष और तेज किया जाएगा। यूनियन नेताओं ने घोषणा की कि 25, 26 और 27 मई को पंजाब के मुख्यमंत्री के आवास के बाहर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से संविदा आधार पर काम करने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग में कार्यरत हजारों कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। यूनियन नेताओं ने सरकार से मांग की कि संविदा कर्मियों को तुरंत पक्का किया जाए, परिवहन विभाग में नई सरकारी बसें डाली जाएं और निजीकरण की नीति को रोका जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो राज्यभर में आंदोलन और तेज किया जाएगा।