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बस्तर दशहरा की भव्य तैयारी, 1.22 करोड़ के खर्च का बजट प्रस्ताव तैयार

जगदलपुर. बस्तर की ऐतिहासिक दशहरा परंपरा इस साल भी भव्यता और पारंपरिक रस्मों के साथ मनाई जाएगी, लेकिन आयोजन का बजट पिछले साल की तुलना में बढ़ गया है। पाट जात्रा विधान पूरा होने के बाद अब आगे होने वाले विभिन्न विधानों की तैयारियां तेज हो गई हैं। कलेक्टोरेट में बस्तर दशहरा समिति की दो घंटे से अधिक चली बैठक में आयोजन की व्यवस्थाओं के साथ खर्च का खाका भी रखा गया। वर्ष 2026 के लिए 1 करोड़ 22 लाख 53 हजार 629 रुपए खर्च का प्रस्ताव तैयार किया गया है। पिछले साल वास्तविक खर्च 1 करोड़ 11 लाख 39 हजार 663 रुपए रहा था। यानी इस बार करीब 11.14 लाख रुपए ज्यादा खर्च प्रस्तावित है। बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा पारंपरिक रस्मों में उपयोग होने वाले बकरा-सूअर और शराब पर होने वाले खर्च को लेकर रही। प्रस्ताव के अनुसार बकरा-सूअर पर 15.40 लाख रुपए और दशमी सामग्री व शराब पर 4.13 लाख यानी कुल 19.52 लाख का प्रावधान किया है। पिछले साल इन मदों पर करीब 17.75 लाख रुपए खर्च हुए थे। इस लिहाज से इन मदों का खर्च भी बढ़ा है। टेंपल कमेटी के सचिव एवं तहसीलदार राहुल गुप्ता ने बताया कि बस्तर दशहरा धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं का जीवंत स्वरूप है। बस्तर दशहरा की अलग-अलग रस्मों को पूरा करने के लिए बजट में चावल से लेकर किराना, फल-फूल, भोग सामग्री, कपड़ा और रथ की लकड़ी तक का इंतजाम किया गया है। चावल पर 2.31 लाख, किराना पर 10.98 लाख, विदाई रस्म पर 5.40 लाख और विद्युत सजावट पर 10.61 लाख रुपए प्रस्तावित हैं। कुश्ती प्रतियोगिता के लिए 9.26 लाख और डीजल के लिए 10.71 लाख रुपए रखे गए हैं। रथ-कपड़ा, रंगाई-पुताई, पटाखे और प्रचार- प्रसार पर भी अलग-अलग राशि प्रस्तावित है। इस बार इन मदों पर बड़ा खर्च किए जाने की तैयारी बकरा-सूअर 15.40 लाख, कपड़ा 15.40 लाख, रंगाई-पुताई 11.72 लाख, डीजल 10.71 लाख, विद्युत सजावट 10.61 लाख, किराना 10.98 लाख और कुश्ती 9.26 लाख रुपए प्रस्तावित हैं। यानी दशहरा की रस्मों के साथ व्यवस्थाओं पर भी बड़ा खर्च होगा। 75 लाख मिले, लेकिन पुराना भुगतान बाकी 2026 के आयोजन के लिए संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग से 25 लाख और कलेक्टर कार्यालय से 50 लाख रुपए मिले हैं। यानी अभी कुल 75 लाख रुपए उपलब्ध हैं। वहीं वर्ष 2025 के वास्तविक खर्च में 36 लाख 39 हजार 663 का अतिरिक्त भुगतान लंबित बताया गया है। 1.22 करोड़ के बजट में ये रस्में होंगी पूरी प्रस्ताव में चावल, किराना, बकरा-सूअर, दशमी सामग्री व शराब, विदाई रस्म, विद्युत सजावट, कुश्ती, वाहन, डीजल, लोहा, फल-फूल व भोग, रथ-कपड़ा, रंगाई-पुताई, कपड़ा, पटाखे, प्रचार-प्रसार, लकड़ी चिरान और अन्य सामग्री शामिल हैं।

कुलपति पर लगे आरोपों की होगी जांच, हेमचंद यादव विवि पहुंची उच्चस्तरीय कमेटी

दुर्ग. हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग में कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी के विरुद्ध प्राप्त वित्तीय, प्रशासनिक एवं मूल्यांकन संबंधी शिकायतों की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। राज्यपाल सचिवालय द्वारा कुलपति को शिकायतों से संबंधित नस्तियां, नोटशीट एवं अभिलेख प्रस्तुत करने दिए गए अंतिम अवसर की समय-सीमा समाप्त होने के बाद जांच समिति के सदस्य विश्वविद्यालय पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि समिति द्वारा संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों की मौके पर जांच- पड़ताल की जा रही है। इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब राज्यपाल सचिवालय द्वारा कुलपति को स्पष्ट समय-सीमा में दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, और वह अवधि भी समाप्त हो चुकी है, तो अब जांच समिति स्वयं विश्वविद्यालय पहुंचकर अभिलेखों की जांच कर रही है। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया था। राज्यपाल के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना द्वारा 30 जुलाई को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया गया था। बताया जाता है कि दुर्ग ग्रामीण के विधायक एवं छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष ललित चंद्राकर ने कुलपति के विरुद्ध विभिन्न बिंदुओं को लेकर कलाधिपति के समक्ष शिकायत प्रस्तत की थी। इसके बाद शिकायतों की जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल सचिवालय ने 19 अगस्त 2026 के पत्र के माध्यम से कुलपति के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए आवश्यक दस्तावेज एवं नस्तियां जांच समिति को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके लिए 24 अगस्त 2026 तक की समय- सीमा निर्धारित की गई थी। बताया जाता है कि कुलपति की ओर से विभिन्न विभागों से अभिलेख एकत्र करने तथा उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित जानकारी के लिए आरटीआई आवेदन किए जाने का हवाला देते हुए समय-सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 किए जाने का अनुरोध किया गया। हालांकि, निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी अपेक्षित दस्तावेज जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जाने की बात सामने आई। विधायक ललित चंद्राकर ने की है शिकायत हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलपति डॉ. संजय तिवारी के विरुद्ध गंभीर वित्तीय, प्रशासनिक एवं शैक्षणिक अनियमितताओं सबंधी शिकायती पत्र राज्यपाल को प्रेषित किया है। पत्र में लिखा गया है कि विश्वविद्यालय द्वारा माह मार्च 2026 में लगभग 12 लाख से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं की खरीदी हेतु निविदा आमंत्रित की गई थी। निविदा प्रक्रिया में शासकीय फर्म “संवाद” द्वारा न्यूनतम दर प्रस्तुत किए जाने के बावजूद कुलपति द्वारा एक निजी फर्म के पक्ष में अर्धशासकीय पत्र जारी कर कार्य आबंटित किए जाने की अनुशंसा की गई। तत्पश्चात उक्त फर्म को ही कार्य प्रदान किया गया तथा लगभग 40 लाख रुपए से अधिक का भुगतान भी किया गया। यह कृत्य शासकीय निविदा प्रक्रिया एवं वित्तीय नियमों के प्रतिकूल प्रतीत होता है। इसके अलावा विश्वविद्यालय द्वारा एमबीए, एमसीए, पीजीडी बीएम सहित 8 नये पाठ्यक्रम प्रारंभ करने हेतु एआईसीटीसी एवं आरसीआई से निरीक्षण कराया गया, जबकि इसके पूर्व राज्य शासन से आवश्यक अनुमति प्राप्त नही की गई। यह तथ्य भी सामने आया है कि एक ही विभागीय सरंचना को परिवर्तित स्वरुप में प्रस्तुत कर विभिन्न पाठ्यक्रमों हेतु मान्यता प्राप्त करने का प्रयास किया गया। नए पाठ्यक्रमों के लिए आवश्यक पुस्तकों की खरीदी में भी गंभीर अनियमितता बरती गई है। कुलपति द्वारा बिना किसी विधिवत निविदा प्रक्रिया के सिर्फ मौखिक निर्देश पर लगभग 40 लाख रुपए मूल्य की 380 पुस्तकें तत्काल खरीद ली गईं। पुस्तकों के मूल्य एवं खरीदी प्रक्रिया दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न उत्पन्न हो रहे हैं। शासकीय नियमों के अनुसार अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के पश्चात की जाती है, परंतु कुलपति द्वारा मई माह में ही 5 विषयों हेतु 15 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई, जबकि संबंधित विभाग अभी विधिवत अस्तित्व में नहीं हैं तथा उनमें विद्यार्थियों का प्रवेश भी नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में उनके वेतन भुगतान के स्रोत एवं औचित्य की जांच आवश्यक है। कुलपति डॉ. तिवारी विश्वविद्यालय के अनेक महत्वपूर्ण एवं वित्तीय विषयों को कार्यपरिषद के समक्ष अनुमोदन हेतु प्रस्तुत नहीं करते, जबकि निर्धारित सीमा से अधिक राशि की खरीदी एवं वित्तीय निर्णयों में कार्यपरिषद की स्वीकृति आवश्यक होती है। यह आचरण विश्वविद्यालय अधिनियम एवं प्रशासनिक अनुशासन के विपरीत प्रतीत होता है।

पंजाब में कर्मचारियों की हड़ताल से सरकारी कामकाज प्रभावित, लुधियाना में हाईवे पर लगा जाम

चंडीगढ़  लंबित मांगों को लेकर पंजाब सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को सामूहिक अवकाश के बाद कर्मचारी संगठनों ने अब 11 सितंबर तक हड़ताल जारी रखने का एलान किया है। पंजाब सिविल सचिवालय, निदेशालयों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के इस फैसले से आने वाले दिनों में सरकारी कामकाज प्रभावित होने की आशंका है। दूसरी ओर, सरकार ने भी सख्त रुख अपनाते हुए नो वर्क नो पे (काम नहीं तो वेतन नहीं) का आदेश जारी कर दिया। कार्यालयों में होगी जनता को परेशानी साथ ही, ड्यूटी से अनधिकृत अनुपस्थिति पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं। इसमें कहा गया है कि कई कर्मचारी कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने के बाद काम के दौरान कार्यालयों से अनुपस्थित हो जाते हैं। इससे आम जनता को परेशानी होती है। बसों के चक्का जाम की चेतावनी  पंजाब रोडवेज, पनबस और पी. आर. टी. से. काट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। यूनियन के राज्य अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर परिवहन मंत्री के साथ 8 सितम्बर को बैठक तय की गई थी, लेकिन मंत्री ने निजी कारणों का हवाला देते हुए बैठक को 9 सितम्बर तक टाल दिया है। रेशम सिंह गिल ने स्पष्ट किया कि यूनियन सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन कर्मचारियों की मांगों को लगातार लंबित रखने को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 9 सितम्बर को दोपहर 12 बजे तक परिवहन मंत्री के साथ बैठक का समय तय नहीं किया गया तो यूनियन पंजाब में बसों का चक्का जाम कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर देगी। क्यों हो रहा आंदोलन? इसे "अनधिकृत अनुपस्थिति" मान उन्हें वेतन नहीं दिया जाएगा। कर्मचारी आंदोलन के पिछले चरण में सरकार ने 2,500 कर्मचारियों को नोटिस जारी किए थे। कर्मचारी लंबित महंगाई भत्ता और एरियर जारी करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, अस्थायी कर्मियों को नियमित और वेतन से जुड़ी विसंगतियां दूर करने समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

लुधियाना में आज प्रदर्शन से बिगड़ेगी ट्रैफिक व्यवस्था, जालंधर बाईपास चौक पर धरना; 22 रास्ते प्रभावित

 लुधियाना जालंधर बाईपास चौक पर बाबा साहिब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के साथ हुई बेअदबी के विरोध में बुधवार को वाल्मीकि समाज, रविदास समाज समेत विभिन्न जत्थेबंदियां सड़क पर उतरेंगी। संगठनों की ओर से सुबह 10 बजे जालंधर बाईपास चौक में धरना दिया जाएगा। इसके चलते जालंधर-पानीपत हाईवे समेत आसपास की करीब 22 सड़कों पर ट्रैफिक प्रभावित होने की संभावना है। धरने को लेकर पुलिस प्रशासन ने ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। पुलिस की ओर से फिलहाल जगराओं पुल से समराला चौक फ्लाईओवर की तरफ जाने वाले ट्रैफिक तथा सदर्न बाईपास की ओर जाने वाले ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है। हालांकि पुलिस ने इसे फिलहाल अस्थायी व्यवस्था बताया है। धरने के दौरान ट्रैफिक का दबाव बढ़ने पर जरूरत के मुताबिक अन्य रास्तों पर भी यातायात को मोड़ा जा सकता है। 22 सड़कों पर पड़ सकता है असर जालंधर बाईपास चौक पर धरना होने के कारण चौक से जुड़ी करीब 22 सड़कों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है। जालंधर-पानीपत हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों के अलावा आसपास के इलाकों से आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पुलिस की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे बुधवार को इस रूट पर जाने से पहले वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। जरूरी सेवाओं को रहेगी छूट पुलिस प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि धरने के दौरान एम्बुलेंस, डॉक्टरों, स्कूलों और मेडिकल सेवाओं से जुड़े वाहनों को जरूरी छूट दी जाएगी। आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित न होने देने के लिए पुलिस कर्मियों को विशेष तौर पर व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस का प्रयास है कि प्रदर्शनकारियों के धरने के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे और आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। वहीं, विभिन्न संगठनों के धरने को देखते हुए जालंधर बाईपास चौक और इसके आसपास पुलिस बल की तैनाती भी की जाएगी।

शो खत्म कर लौट रहे एमी विर्क की गाड़ी पर चलीं गोलियां, कनाडा में मचा हड़कंप; बाल-बाल बचे सभी

चंडीगढ़  कनाडा के एबट्सफोर्ड में पंजाबी गायक एमी विर्क के कार्यक्रम के बाद उनके काफिले पर कथित तौर पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाए जाने का मामला सामने आया है। एबट्सफोर्ड पुलिस ने मैक्कलम रोड के 2500-ब्लॉक में हुई गोलीबारी की पुष्टि की है। हालांकि पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि गोलीबारी में निशाना कौन था और एमी विर्क उस वाहन में सवार थे या नहीं। पुलिस के मुताबिक बीती रात करीब 11 बजे के बाद एक गहरे रंग की एसयूवी में सवार लोगों ने दूसरी गाड़ी पर कई गोलियां चलाईं। घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। गोलीबारी के कुछ ही देर बाद सनीसाइड प्लेस के 2400-ब्लॉक में एक एसयूवी को आग के हवाले किए जाने की सूचना मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने वाहन को पूरी तरह जला हुआ पाया। जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि जले हुए वाहन का गोलीबारी की घटना से कोई संबंध है या नहीं। पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर इतना जरूर कहा है कि जिस वाहन को निशाना बनाया गया, उस पर गोलीबारी जानबूझकर की गई थी। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक 5 सितंबर की रात एबट्सफोर्ड के रोजर्स फोरम हॉल में एमी विर्क का कार्यक्रम था। दावा है कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद रात करीब 11 बजे एमी विर्क वाहनों के काफिले के साथ शहर की ओर रवाना हुए। इसी दौरान काफिले में शामिल एक रॉल्स रॉयस पर दूसरे वाहन में सवार लोगों ने गोलियां चला दीं। सूत्रों का दावा है कि संबंधित रॉल्स रॉयस बुलेटप्रूफ थी, जिसके कारण वाहन में सवार किसी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचा। हालांकि पुलिस ने अभी इस बात की पुष्टि नहीं की है कि एमी विर्क उसी वाहन में सवार थे। यह भी स्पष्ट नहीं है कि गोलीबारी के समय गायक के साथ कौन-कौन लोग मौजूद थे। इस बीच सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े बताए जा रहे चर्ण दत्त चार्ली नाम के व्यक्ति की एक पोस्ट सामने आई है, जिसमें उसने गोलीबारी की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। पोस्ट में कहा गया कि हमला एमी विर्क के कार्यक्रम के प्रमोटर को निशाना बनाकर किया गया था। सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने भी अब तक गोलीबारी को किसी गिरोह से जोड़कर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।  एबट्सफोर्ड पुलिस के प्रवक्ता सार्जेंट पॉल वॉकर ने लोगों से जांच में सहयोग करने की अपील की है। पुलिस के मुताबिक घटना की रात 10:45 से 11:30 बजे के बीच मैक्कलम रोड के 2500-ब्लॉक या रात करीब 11 बजे सनीसाइड प्लेस के 2400-ब्लॉक के आसपास मौजूद लोगों के पास यदि किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी या डैशकैम फुटेज है, तो वे पुलिस से संपर्क करें।  फिलहाल पुलिस गोलीबारी, जले हुए वाहन और दोनों घटनाओं के बीच संभावित संबंध की जांच कर रही है। 

निवेशकों को राहत देने के लिए नीतियों में जरूरत के मुताबिक छूट देंगे: CM डॉ. यादव

निवेशकों को देंगे आवश्यकतानुसार नीतियों (पॉलिसी) में छूट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश उद्योग क्षेत्र में आशाओं और असीम अवसरों की धरती 900 कानूनों को समाप्त कर उद्योग और व्यापार व्यवसाय क्षेत्र को बनाया सुगम और सरल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में उद्योगों के विकास के लिए 2700 से अधिक नियमों और लगभग 900 कानूनों को समाप्त कर उद्योग और व्यापार-व्यवसाय क्षेत्र को सरल, सुगम बनाने का प्रयास किया है। इस कदम से उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण बना है। निर्धारित नीतियों के अंतर्गत और आवश्यकता होने पर निवेशकों को नीतियों में आवश्यक छूट दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को दुबई में "इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश" को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्य पद्धति के आधार पर दुनियाभर में रहने वाला भारतीय समुदाय आज स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते राज्य को विकास के नए आयाम दिए। अब उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद दुनिया हमारी अर्थव्यवस्था की शक्ति देख रही है। दुबई वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्र माना जाता है। यूएई से अफ्रीका और एशिया के साथ यूरोप में व्यापार होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश दुनिया का इकलौता राज्य है, जहां हीरे और स्वर्ण भंडार मौजूद है। अफ्रीका के बाद मध्यप्रदेश एक मात्र धरती है, जहां कटनी और सिंगरौली में सोने की खदान मिली है। मध्यप्रदेश में माइनिंग क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं। निवेशक यहां आएं और अपने व्यापार-व्यवसाय के राज्य को समृद्ध बनाएं। होटल व्यवसाय शुरू करने पर मध्यप्रदेश सरकार 30 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी उपलब्ध करवा रही है। दुनिया की सबसे सस्ती बिजली 2.17 पैसे प्रति यूनिट बिजली मध्यप्रदेश उपलब्ध करवा रहा है। हमारी सरकार ग्रीन एनर्जी को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश आशाओं और असीम संभावनाओं की धरती है। नवाचार, विकास और साझा समृद्धि की सोच हमें जोड़ती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को जीआईएस-2027 का निमंत्रण देते हुए कहा कि देश की सबसे अच्छी एविएशन पॉलिसी मध्यप्रदेश में है। मध्यप्रदेश से यूएई और अबुधाबी के लिए सीधी एयर कनेक्टिविटी हो गई है। हमारी सरकार प्रति फ्लाइट वीजीएफ भी दे रही है। अगले महीने प्रदेश से शारजाह से भी उड़ान सेवा शुरू की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उनकी निरंतर दूसरे वर्ष दुबई की यात्रा है। इसके पहले पर्यटन निगम के अध्यक्ष के नाते भी दुबई आने का अवसर मिला था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं और प्रदेश की विशेषताओं की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार में लगभग 15 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव धरातल पर नजर आने लगे हैं। मध्यप्रदेश से आज 76 हजार करोड़ से अधिक का निर्यात हो रहा है। देश में सबसे तेज विकास दर और बेरोजगारी को खत्म करने की दर मध्यप्रदेश की है। यहां अपराध मुक्त वातावरण और समय सीमा में कामों के निपटारे का प्रावधान सभी को आकर्षित करता है। औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए राज्य में अब केवल 29 दिन में जमीन उपलब्ध करवाई जा रही है। प्रदेश सरकार ऑन द स्पॉट लैंड अलॉटमेंट में विश्वास रखती है। मध्यप्रदेश में 1 लाख से अधिक इंडस्ट्रियल लैंड बैंक और 5 लाख किलोमीटर से अधिक रोड नेटवर्क है। सभी व्यवस्थाएं करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। है। बुर्ज खलीफा की ऊंचाई के साथ दुबई का भाग्य भी बदलता चला गया। हम मध्यप्रदेश की समृद्धि के लिए वक्त से, वक्त को पहचानने वालों के बीच आए हैं। मध्यप्रदेश में लॉजिस्टिक्स, खनन और पर्यटन सेक्टर में अपार संभावनाएं : एसीएस मंडलोई दुबई में इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश इन्वेस्टमेंट सेशन के तीसरे दिन औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश की मजबूत कनेक्टिविटी, निवेश अनुकूल नीतियों और विकसित हो रहे औद्योगिक इको सिस्टम के साथ लॉजिस्टिक्स, खनन और पर्यटन क्षेत्रों की संभावनाओं पर प्रेजेंटेशन दिया। एसीएस मंडलोई ने बताया कि लॉजिस्टिक्स पॉलिसी-2025 के तहत निवेशकों को फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 30 प्रतिशत तक सहायता सहित कई प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क तथा नर्मदा एक्सप्रेस-वे और दिल्ली-नागपुर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़ रहे औद्योगिक अवसरों की जानकारी दी गई। खनन क्षेत्र में हीरा, तांबा, मैंगनीज, चूना पत्थर और डायमंड और स्वर्ण खनिज संसाधनों को निवेश के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में रेखांकित किया गया। पर्यटन सेक्टर में मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत, वन्य जीव और प्राकृतिक स्थलों के बारे में निवेशकों को जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में प्रदेश में 13.41 करोड़ पर्यटक आए, जबकि पर्यटन नीति-2025 के तहत पूंजी निवेश पर 30 प्रतिशत तक सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी की प्रतिपूर्ति और 90 वर्ष तक की लीज जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। विभिन्न पर्यटन स्थलों पर निजी निवेश की संभावनाएं प्रदर्शित की गईं। मुख्यमंत्री डॉ . यादव की सक्रियता और निवेशकों से सीधा संवाद मध्यप्रदेश की ताकत : भारत के काउंसिल जनरल डॉ. रेड्डी दुबई में भारत के काउंसिल जनरल डॉ. ई. विष्णुवर्धन रेड्डी ने कहा कि भारत और यूएई के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और दोनों देशों के बीच सहयोग के लिए कोई भी क्षेत्र अछूता नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के उद्योग जगत से निरंतर संवाद और हर कार्यक्रम में समान ऊर्जा के साथ सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश के साथ जुड़ाव और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने मध्यप्रदेश की बेहतर कनेक्टिविटी, तेज आर्थिक विकास और विशाल पर्यटन एवं आध्यात्मिक संभावनाओं की सराहना की। आईपीएफ यूएई के नेशनल प्रेसिडेंट जितेंद्र वैद्य ने कहा कि भगवान राम ने 14 वर्ष के वनवास में से अधिकांश समय मध्यप्रदेश के चित्रकूट में बिताया। ऐसे राज्य में निवेश का सौभाग्य निवेशकों को मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश में अधिकतम निवेश के लिए दिन-रात परिश्रम कर रहे हैं। उद्योगपति और सांसद राजिंदर गुप्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश देश की प्रगति में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रदेश में उद्योगों को हर तरह से सहयोग मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से मध्यप्रदेश देश का सबसे उन्नतशील राज्य … Read more

योगी सरकार का बड़ा ऐलान, यूपी में सरकारी डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र बढ़कर 70 साल हुई

लखनऊ  यूपी के सरकारी डॉक्टरों के लिए खुशखबरी है। अब उनकी रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 70 साल कर दी है। सेवानिवृत्ति के बाद 70 वर्ष की आयु तक रिअप्वॉइंटमेंट के माध्यम से सेवाएं दे सकेंगे। वर्तमान व्यवस्था के तहत सरकारी डॉक्टर 65 वर्ष की आयु तक सेवाएं दे रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव स्तर से इस संबंध में आदेश जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग स्वास्थ्य विभाग का प्रमुख चिकित्सकीय संवर्ग है। इसमें चिकित्सा अधिकारी एवं विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हैं, जो प्रदेश के सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद योग्य एवं अनुभवी चिकित्सकों को 70 साल की आयु तक सेवाएं देने का अवसर मिलने से उनके लंबे अनुभव का सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा। डिप्टी सीएम ने बताया कि विशेष रूप रूप से स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी वाले विभागों में यह व्यवस्था प्रभावी साबित होगी। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को डॉक्टरों की रिटायर्मेंट के बाद 70 वर्ष की आयु तक पुनर्नियुक्ति संबंधी आदेश जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिक सक्षम बनेंगी स्वास्थ्य सेवाएं विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों में तृतीय श्रेणी कर्मियों के 2500 पदों पर भर्ती होगी। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को जल्द पदों का विस्तृत अधियाचन भेजा जाएगा। उच्च शिक्षा, कृषि शिक्षा और प्राविधिक शिक्षा के विश्वविद्यालयों के साथ ही डिग्री कॉलेजों में भी तृतीय श्रेणी के रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। उच्च शिक्षा के ही शिक्षण संस्थानों में 500 से ज्यादा पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसे ही दूसरे विभागों के उच्च शिक्षण संस्थानों में भी पद रिक्त चल रहे हैं। पहले उच्च शिक्षण संस्थान कर्मियों के पदों पर भी खुद भर्ती करते थे। अब आयोग के जरिए भर्ती होगी। लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे 7 डॉक्टरों को नोटिस उधर, गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तैनात सात नॉन पीजी रेजिडेंट (एनपीजेआर) डॉक्टरों ने वेतन असमानता दूर करने की मांग को लेकर लखनऊ में प्रदर्शन किया है। आंदोलन का संज्ञान लेते हुए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा कार्यालय ने कॉलेज प्रशासन को सातों डॉक्टरों के नाम सौंपते हुए नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। नॉन पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों का आरोप है कि एमबीबीएस करने के बाद एक ही काउंसलिंग से तैनात होने के बावजूद मेडिकल कॉलेज और ग्रामीण अस्पतालों में तैनात एनपीजेआर को अलग-अलग मानदेय मिलता है। मेडिकल कॉलेज की तुलना में सीएचसी पर तैनात होते ही एनपीजेआर को करीब डेढ़ गुना ज्यादा मानदेय मिलता है, जिसे वेतन असमानता बताते हुए डॉक्टर समान वेतन की मांग कर रहे हैं।

बिहार के सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव, 12वीं पास छात्रों को मिलेगा प्लेसमेंट का मौका

 पटना बिहार के सरकारी स्कूलों में भी प्लेसमेंट की सुविधा मिलेगी। राज्य सरकार 12वीं कक्षा में ऐसे इच्छुक बच्चों को प्लेसमेंट की सुविधा देगी जो आगे पढ़ाई नहीं करना चाहते या फिर जो 12वीं के बाद ही करियर बनाना चाहते हैं। इसके लिए बड़े व्यावसायिक कंपनियों की मदद ली जाएगी। इसमें बड़ी कंपिनयों और बड़े औद्योगिक घरानों से भी सहयोग लिया जाएगा। बिहार सरकार अब सरकारी स्कूलों के 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाई के बाद सीधे रोजगार से जोड़ने की तैयारी में है। इस व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य उन विद्यार्थियों को अवसर देना है, जो इंटरमीडिएट के बाद परिवार की आर्थिक स्थित या अन्य कारणों से कामकाजी दुनिया में प्रवेश करना चाहते हैं। ऐसे बच्चों को विद्यालय से ही प्लेसमेंट की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। अवसर विकसित होंगे प्रस्तावित नई पहल के तहत विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की रुचि, योग्यता और कौशल का आकलन कर उन्हें निजी कंपनियों तथा विभिन्न रोजगार क्षेत्रों से जोड़ा जाएगा। सरकार इसके लिए बड़े व्यावसायिक समूहों और उद्योग जगत का सहयोग लेने की योजना बना रही है। देश की नामी-गिरामी कंपनी और बड़े औद्योगिक घरानों सहित अन्य कंपनियों की भागीदारी से प्लेसमेंट, प्रशिक्षण और अप्रेंटिसशिप के अवसर विकसित किए जाएंगे। कौशल के अभाव में बेहतर प्सेलमेंट नहीं मिलता बिहार में 13 लाख बच्चे सरकारी विद्यालयों में इंटर की पढ़ाई करते हैं। इंटर स्तर पर मेडिकल, इंजीनियरिंग, एनडीए के सात-साथ रेलवे, बैंक में बड़ी संख्या में लड़के जाते हैं। निजी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में बच्चे जाते हैं। लेकिन जानकारी और कौशल के अभाव में उन्हें बेहतर प्सेलमेंट नहीं मिल पाता। इसीलिए सरकार ने यह व्यवस्था शुरू की है। सरकार की बड़े औद्योगिक घरानों और कंपनियों से अपेक्षा होगी कि वे विद्यार्थियों के लिए एंट्री-लेवल रोजगार, प्रशिक्षु पद, ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग और अप्रेंटिसशिप के अवसर उपलब्ध कराएं। विद्यार्थियों के पास दो विकल्प होंगे राज्य में पहले से कौशल विकास और उद्योग-संबद्ध प्रशिक्षण के जरिए युवाओं को रोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जाते रहे हैं। नई व्यवस्था से 12वीं पास विद्यार्थियों के सामने दो स्पष्ट रास्ते होंगे। पहला तो उच्च शिक्षा में दाखिला। दूसरा कौशल प्रशिक्षण के बाद नौकरी या अप्रेंटिसशिप चुनना। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए यह पहल आय का साधन बनाने में उपयोगी हो सकती है। विशेष विद्यालयों का चयन किया जाएगा इस योजना में केवल नौकरी दिलाने पर ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार योग्य बनाने पर भी जोर रहेगा। 12वीं के बाद चयनित युवाओं को संचार कौशल, डिजिटल दक्षता, कार्यस्थल व्यवहार, तकनीकी प्रशिक्षण तथा क्षेत्र-विशेष की जरूरतों के अनुरूप तैयारी कराई जा सकती है। इसके लिए कुछ विशेष सरकारी विद्यालयों का चयन किया जाएगा, जहां 12 वीं के बाद बच्चों को रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा। इन विद्यालयों में बड़ी कंपनियों को भी स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि हम 12 वीं के बाद इच्छुक बच्चों को उनके बेहतर करियर और रोजगार दोनों में मदद करेंगे। जो बच्चे रोजगार चाहते हैं, उनके लिए प्लेसमेंट की योजना बनायी जा रही है। हम विद्यालय के बाद ही उनके लिए रोजगार का प्रबंध करेंगे।

डॉ. राजेश्वरी अम्मा का जीवन निःस्वार्थ सेवा और मानवता की मिसाल: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

रायपुर : निःस्वार्थ सेवा और मानवता की मिसाल है डॉ. राजेश्वरी अम्मा का जीवन : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी सत्य साई संजीवनी अस्पताल में डॉक्यूमेंट्री फिल्म “डॉ. अम्मा” की हुई स्क्रीनिंग रायपुर नवा रायपुर स्थित सत्य साई संजीवनी अस्पताल में माता डॉ. सी. राजेश्वरी जी के प्रेरणादायी जीवन और मानवता की निःस्वार्थ सेवा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म “DR. AMMA – 50 Years of Healing, Humanity & Hope” की स्क्रीनिंग आयोजित हुई। कार्यक्रम में मंत्री रामविचार नेताम एवं वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी शामिल हुए। रायपुर : निःस्वार्थ सेवा और मानवता की मिसाल है डॉ. राजेश्वरी अम्मा का जीवन : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि माता डॉ. सी. राजेश्वरी जी ने अपना संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा के लिए समर्पित किया है। उनका जीवन सेवा, समर्पण और करुणा की प्रेरणादायी गाथा है। डॉक्यूमेंट्री फिल्म के माध्यम से उनके जीवन, कार्यों और समाज के प्रति योगदान को लाखों लोग जान सकेंगे तथा उनसे प्रेरणा प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा करने वाले व्यक्तित्व समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत होते हैं। डॉ. राजेश्वरी अम्मा जी का जीवन यह संदेश देता है कि सेवा का संकल्प समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकता है। वित्त मंत्री चौधरी ने इस पुनीत अवसर पर सत्य साई परिवार सहित डॉक्यूमेंट्री फिल्म के निर्माण और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में राजनांदगांव के पूर्व सांसद अभिषेक सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं सत्य साई परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

सक्रिय जीवनशैली से हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा होगा कम, डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने बताया बचाव का तरीका

सक्रिय जीवन शैली हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम में सहायक- डॉ मनीषा श्रीवास्तव भोपाल भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी), भोपाल में 08 सितंबर 2026 को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वर्ष 2026 में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस की थीम “हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन एवं पुनर्वास में फिजियोथेरेपी और शारीरिक गतिविधि की भूमिका” रही। बीएमएचआरसी के सभागार में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, NCAHP (National Commission for Allied and Healthcare Professions) के अध्यक्ष  डॉ. डी. विजय कुमार थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने की। अपने उद्बोधन में डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने विश्व फिजियोथेरेपी दिवस 2026 की थीम के प्रमुख संदेशों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हृदय संबंधी रोग (सीवीडी) विश्व स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हृदय रोग एवं स्ट्रोक की रोकथाम में नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली की महत्वपूर्ण भूमिका है। फिजियोथेरेपिस्ट लोगों को शारीरिक रूप से सक्रिय रहने तथा दीर्घकालिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बेहतर प्रबंधन के लिए प्रेरित एवं प्रशिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि शारीरिक गतिविधि एवं नियमित मूवमेंट व्यक्ति को स्वतंत्र एवं सक्रिय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना चाहिए तथा प्रत्येक आधे घंटे में शरीर को सक्रिय अवस्था में लाने का प्रयास करना चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधि हृदय रोग एवं स्ट्रोक की रोकथाम में सहायक हो सकती है। मुख्य अतिथि डॉ. डी. विजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में “वन हेल्थ, वन नेशन” के दृष्टिकोण के तहत विश्व फिजियोथेरेपी दिवस को समग्र स्वास्थ्य चेतना के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक तक शारीरिक तंदुरुस्ती एवं पुनर्वास संबंधी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने फिजियोथेरेपी के संबंध में विश्वसनीय जानकारी साझा करने, आवश्यकता पड़ने पर उचित चिकित्सा एवं पुनर्वास सेवाएं लेने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने तथा स्वास्थ्य एवं पुनर्वास के क्षेत्र में फिजियोथेरेपी की व्यापक भूमिका के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के विभिन्न जिला चिकित्सालयों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क फिजियोथेरेपी शिविर तथा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों एवं पुनर्वास केंद्रों में फिजियोथेरेपिस्ट की सेवाएं ली जा रही हैं, जिससे स्वास्थ्य एवं पुनर्वास सेवाओं को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने में सहायता मिल रही है। कार्यक्रम में फिजियोथेरेपी विभाग के प्रभारी डॉ. असलम जमाली ने कहा कि प्रत्येक चार में से एक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में स्ट्रोक होने की संभावना रहती है, जबकि अधिकांश स्ट्रोक के जोखिम को प्रभावी जीवनशैली एवं स्वास्थ्य प्रबंधन के माध्यम से कम किया जा सकता है। उन्होंने नियमित व्यायाम एवं शारीरिक सक्रियता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सप्ताह में पांच दिन लगभग 30 मिनट का नियमित व्यायाम स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है। उन्होंने संदेश दिया कि “ज्यादा चलें और सक्रिय रहें, बैठे कम” को दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। नियमित व्यायाम से मांसपेशियां मजबूत होती हैं तथा शारीरिक क्षमता में सुधार होता है।  न्यूरोमेडिसिन के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रचित राज सक्सेना ने “मैनेजमेंट ऑफ स्ट्रोक” विषय पर पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी। उन्होंने स्ट्रोक के उपचार में समय पर चिकित्सा सहायता प्राप्त करने के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने स्ट्रोक के प्रारंभिक उपचार में समय की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। न्यूरो सर्जरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सौरभ गुप्ता ने अपने प्रस्तुतीकरण में सर्जरी के पश्चात मरीज के पुनर्वास में फिजियोथेरेपिस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मरीज को पुनः शारीरिक रूप से सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाने में फिजियोथेरेपिस्ट की सहभागिता भी महत्वपूर्ण होती है। फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. नेहल शाह ने “स्ट्रोक रिहैबिलिटेशन में न्यूरोप्लास्टिसिटी का महत्व” विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि न्यूरोप्लास्टिसिटी के माध्यम से मस्तिष्क के स्वस्थ क्षेत्र स्ट्रोक अथवा चोट के कारण प्रभावित हुए कार्यों की भरपाई एवं पुनर्गठन में सहायता कर सकते हैं। नियमित अभ्यास एवं व्यायाम से नए तंत्रिका मार्गों को मजबूत करने, मस्तिष्क के अनुकूलन को बढ़ावा देने तथा रिकवरी की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है। उन्होंने स्ट्रोक से उबर रहे मरीजों के लिए अर्ली न्यूरो-रिहैबिलिटेशन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।  कार्यक्रम के दौरान हृदय रोग एवं स्ट्रोक की रोकथाम के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से फिजियोथेरेपी के विद्यार्थियों द्वारा नाटक का मंचन किया गया। कार्यक्रम में फिजियोथेरेपी विभाग के चिकित्सकों का सम्मान कर विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए। इस अवसर पर न्यूरो-सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप सोरते, मिनी यूनिट को-ऑर्डिनेटर डॉ. रोमा रस्तोगी, डॉ. अंजलि शर्मा, डॉ. सीमा नवेद, डॉ. महेश राठौर, देवेंद्र सिंह सहित संस्थान के चिकित्सक, अधिकारी-कर्मचारी एवं विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।