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Gurdaspur Accident: नेशनल हाईवे पर दर्दनाक टक्कर, कार सवार 4 दोस्तों की गई जान

गुरदासपुर पंजाब के गुरदासपुर जिले में मंगलवार तड़के एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया है। पठानकोट-गुरदासपुर नेशनल हाईवे पर नौशहरा मज्झा सिंह के पास एक तेज रफ्तार ऑल्टो कार की किसी अज्ञात भारी वाहन से भीषण टक्कर हो गई। इस हादसे में कार सवार पठानकोट के चार युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और चारों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। तड़के 4 बजे हुआ हादसा, धमाके से सहमे लोग प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह हादसा सुबह करीब 4 बजे हुआ। हाईवे पर अचानक हुए तेज धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। वहां का मंजर बेहद खौफनाक था। दुर्घटनाग्रस्त ऑल्टो कार (नंबर PB-35Y-8420) के परखच्चे उड़ चुके थे। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस फरार वाहन का सुराग लगाने के लिए घटनास्थल के आसपास और टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। खड़े या आगे चल रहे ट्रक से टक्कर की आशंका मामले की जांच कर रहे एएसआई दलजीत सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि तेज रफ्तार ऑल्टो कार सड़क किनारे खड़े या आगे जा रहे किसी भारी वाहन (जैसे ट्रक या ट्राला) से पीछे से टकराई है। हादसे के तुरंत बाद अज्ञात वाहन चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने इलाके में नाकाबंदी कर वाहन की तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी और फॉरेंसिक जांच के बाद ही हादसे के सही कारणों का पता चल सकेगा। मृतकों में एक की पहचान, परिवार में पसरा मातम हादसे का शिकार हुए चार युवकों में से एक की पहचान पठानकोट के भदरोआ स्थित टीचर कॉलोनी निवासी 31 वर्षीय विक्रम उर्फ विक्की के रूप में हुई है। विक्की स्लीपवेल मैट्रेस के शोरूम में काम करता था और कुछ दिन पहले अपने दोस्तों के साथ घूमने निकला था। जानकारी के अनुसार, हादसे के वक्त कार विक्की ही चला रहा था। वह अपने पीछे दो छोटे बच्चे छोड़ गया है। हादसे की खबर मिलते ही रोते-बिलखते परिजन गुरदासपुर के लिए रवाना हो गए हैं। पुलिस के अनुसार, अन्य तीन मृतकों की शिनाख्त अभी नहीं हो पाई है, जिनकी पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हाईवे पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार के कारण पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। लोगों ने प्रशासन से रात के समय हाईवे पर निगरानी मजबूत करने और सड़क सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने की मांग की है।

सोशल मीडिया स्टंट बना मुसीबत, नदी के बीच ले गए थार; वायरल वीडियो पर बवाल

बिजनौर उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के कालागढ़ क्षेत्र से सोशल मीडिया की सनक का एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां कुछ युवकों ने इंटरनेट पर वायरल होने के लिए अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डाल दी. मामला रामगंगा नदी का बताया जा रहा है, जहां तेज बहाव और गहरे पानी के बीच थार गाड़ी उतारकर रील बनाई गई. इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।  वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि नदी के बीच तेज बहते पानी में एक थार गाड़ी खड़ी है और उसके आसपास कई युवक मौजूद हैं. बताया जा रहा है कि वहां मौजूद कुछ लोग नदी में नहाने आए थे, लेकिन रील बनाने की होड़ में माहौल अचानक खतरनाक बन गया. वीडियो देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि जरा सी चूक किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकती थी।  स्थानीय लोगों के मुताबिक, हाल के दिनों में डैम और नदी किनारे रील बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है. कई बार लोग जोखिम भरे स्टंट करते हुए नजर आते हैं, लेकिन इस बार मामला बेहद गंभीर माना जा रहा है. लोगों का कहना है कि कुछ मिनट की सोशल मीडिया प्रसिद्धि के लिए इस तरह जीवन से खिलवाड़ करना बेहद चिंताजनक है।  घटना सामने आने के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी हलचल बढ़ गई है. वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस संबंधित युवकों की पहचान में जुटी है. हालांकि जांच में सबसे बड़ी परेशानी यह आ रही है कि वीडियो में थार का नंबर स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा।  सूत्रों के अनुसार, यह गाड़ी उत्तराखंड के जसपुर क्षेत्र की बताई जा रही है. जानकारी मिली है कि दो नई थार खरीदने के बाद कुछ युवक उनकी रील बनाने के लिए रामगंगा नदी पहुंचे थे. बताया जा रहा है कि गाड़ियों का अभी रजिस्ट्रेशन भी नहीं हुआ था, इसलिए उन पर नंबर प्लेट नहीं लगी थी. फिलहाल पुलिस वाहन और उसके मालिकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी और डैम जैसे संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाए ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही किसी बड़े हादसे की वजह न बने। 

लू का ऑरेंज अलर्ट, राजस्थान के कई जिलों में तापमान 45 से 46 डिग्री के बीच

राजयपुर जस्थान भीषण गर्मी की चपेट में है. पिलानी और चित्तौड़गढ़ में तापमान 46 डिग्री पार हो गया है. इन दोनों जिलों में पारा 46.2 डिग्री दर्ज किया गया. राज्य के लगभग सभी शहरों में सोमवार (18 मई) को अधिकतम तापमान 41 डिग्री से ऊपर रहा. राजधानी जयपुर में भी 43.6 डिग्री दर्ज किया गया. हीटवेव के अलर्ट को देखते हुए अगले 4-5 दिन लोगों की परेशानी बढ़ सकती है. मंगलवार (19 मई) के लिए 7 जिलों में लू का येलो अलर्ट जारी किया गया है. जबकि 5 जिलों में हीटवेव का ऑरेंज अलर्ट है. इन जिलों में भी तापमान 45 के पार मौसम विभाग के अनुसार, श्रीगंगानगर में तापमान 46.1 डिग्री  बना हुआ है. बीकानेर में पारा 46, वनस्थली में 45.6, फतेहपुर में 45.5, कोटा में 45.3, बाड़मेर और चूरू में 45.1 डिग्री दर्ज किया गया. बारां, झालावाड़, कोटा, प्रतापगढ़, बालोतरा, जोधपुर और श्रीगंगानगर में येलो अलर्ट है. वहीं, चित्तौड़गढ़, बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर और फलोदी में लू का ऑरेंज अलर्ट है.    हीट वेव को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी! तेज़ गर्मी और लू सिर्फ थकान ही नहीं, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकती है। इस भीषण गर्मी में खुद का और अपने परिवार का विशेष ध्यान रखें। धूलभरी आंधी भी बढ़ाएगी परेशानी इस सप्ताह राज्यभर में मौसम शुष्क रहने की संभावना है. पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में लू जैसी स्थिति रहने का अनुमान है. अगले चार से 5 दिनों तक पश्चिमी, उत्तरी और पूर्वी राजस्थान में 20–30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूलभरी आंधी चलने का पूर्वानुमान जताया है. लोगों को गर्मी से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि आने वाले दिनों में तापमान के अधिक रहने की संभावना है.

बेअदबी मामले को लेकर सड़कों पर उतरे सिख संगठन, कपूरथला चौक पर जोरदार प्रदर्शन

जालंधर  जालंधर के बस्ती पीर दाद रोड इलाके में  देर रात श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन अंगों की बेअदबी की घटना सामने आई है। इसके बाद पूरे इलाके में भारी तनाव का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही विभिन्न सिख जत्थेबंदियों, धार्मिक संस्थाओं और संगत के सदस्य बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे। बेअदबी की खबर फैलते ही लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिला और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। घटना को लेकर संगत ने प्रशासनिक रवैये पर नाराजगी जताते हुए रात करीब साढ़े 10 बजे बस्ती बाबा खेल क्षेत्र के मुख्य पुल पर चक्का जाम कर पक्का धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली इस घटना पर पुलिस और प्रशासन ने समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की।  हालात बिगड़ते देख पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट हो गया। बाद में देर रात करीब 12 बजे प्रदर्शनकारी कपूरथला चौक पहुंच गए, जहां धरना और विरोध प्रदर्शन और तेज हो गया। मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए एसीपी आतिश भाटिया भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को शांत कराने की कोशिश की। पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।  प्रदर्शन कर रहे सिख संगठनों ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक इस मामले के मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, उनका धरना जारी रहेगा, चाहे उन्हें पूरी रात सड़कों पर क्यों न बैठना पड़े। वहीं बस्ती बावा खेल पुलिस ने धार्मिक भावनाएं आहत करने और माहौल खराब करने की धाराओं के तहत अज्ञात शरारती तत्वों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद पूरे शहर में तनाव और रोष का माहौल बना हुआ है। एडीसीपी सुखविंदर सिंह ने कहा कि बेअदबी के मामले में बीएनएस की धारा 299 और जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। 

वैश्विक तनाव ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें, अमृतसर में मशरूम उद्योग पर संकट गहराया

अमृतसर. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज में बाधा का असर अब पंजाब के मशरूम उद्योग पर भी साफ दिखने लगा है। हर वर्ष मई में शुरू होने वाली मिल्की मशरूम की खेती इस बार संकट में है। उर्वरक, कंपोस्ट और ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से अधिकांश उत्पादकों ने खेती शुरू ही नहीं की। हालात यह हैं कि अमृतसर जिले के जंडियाला गुरु, मानांवाला, वेरका और अजनाला जैसे प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में केवल 20 प्रतिशत किसानों ने ही इस बार मशरूम उत्पादन का जोखिम उठाया है। मशरूम उत्पादक जागीर सिंह का कहना है कि युद्ध जैसे हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। इसका सीधा असर नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों, कंपोस्ट और परिवहन लागत पर पड़ा है। उर्वरक एवं कंपोस्ट के दाम तीन गुना तक बढ़े पिछले कुछ सप्ताह में उर्वरक एवं कंपोस्ट के दाम तीन गुना तक बढ़ चुके हैं। जिन किसानों को पहले एक ट्राली कंपोस्ट 12 से 15 हजार रुपये में मिल जाती थी, उन्हें अब इसके लिए 35 से 40 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। उधर, जंडियाला गुरु के मशरूम उत्पादक सरबजीत सिंह का कहना है कि मिल्की मशरूम की खेती नियंत्रित वातावरण पर निर्भर करती है। इसमें तापमान, नमी और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए लगातार बिजली की आवश्यकता होती है, लेकिन डीजल और बिजली की लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च अत्यधिक बढ़ गया है। उस पर प्लास्टिक पैकेजिंग और परिवहन भी महंगा हो चुका है। ऐसे में छोटे उत्पादकों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो गया है। होर्मुज मार्ग प्रभावित होने से मानांवाला क्षेत्र में उर्वरकों की सप्लाई प्रभावित हुई है। कई कंपनियों ने समय पर माल पहुंचाने में असमर्थता जताई है, जबकि कुछ ने सीधे दाम बढ़ा दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि हालात सामान्य नहीं हुए तो आने वाले महीनों में मशरूम उत्पादन और घट सकता है। उल्लेखनीय है कि अमृतसर से उत्पादित मशरूम देश सहित विदेश में भी भेजा जाता है। अमृतसर का जलवायु मशरूम उत्पादन के लिए अनुकूल है। यही कारण है कि अमृतसर स्थित खालसा कालेज में मशरूम उत्पादन के लिए एक वर्षीय डिप्लोमा भी शुरू किया गया है। मांग के मुकाबले उत्पादन बेहद कम रहेगा इस बार इस बार मांग के मुकाबले उत्पादन कम होगा। पंजाब में होटल इंडस्ट्री, रेस्टोरेंट, फास्ट फूड कारोबार और घरों में मशरूम की मांग अधिक है। वेजीटेरियन लोगों के लिए मशरूम पहली पसंद है। खासकर मिल्की व बटन मशरूम की मांग गर्मियों में अधिक रहती है। लेकिन इस बार उत्पादन कम होने से बाजार में भारी कमी देखने को मिल रही है। आने वाले दिनों में मशरूम के दाम में 30 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। पहले स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उत्पादन होने से आपूर्ति सामान्य बनी रहती थी, लेकिन इस बार कई यूनिट बंद पड़े हैं। जिन किसानों ने उत्पादन शुरू भी किया है, वे सीमित मात्रा में मशरूम तैयार कर रहे हैं ताकि नुकसान का जोखिम कम रहे। मशरूम उद्योग पूरी तरह आयात आधारित कच्चे माल पर निर्भर नहीं है, लेकिन उर्वरक, रसायन और ईंधन की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का सीधा असर इसकी लागत पर पड़ता है। निकट भविष्य में उपभोक्ताओं को महंगे मशरूम खरीदने पड़ सकते हैं। होटल और कैटरिंग व्यवसाय में यदि आपूर्ति कम रही तो मेन्यू की लागत बढ़ाना मजबूरी बन जाएगी। वास्तविक स्थिति यह है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब आम लोगों की थाली तक पहुंचने लगा है। कभी सस्ती और पौष्टिक मानी जाने वाली मशरूम जल्द ही उपभोक्ता की पहुंच से दूर होने की संभावना है।

आजीविका मिशन को लेकर मंत्री पटेल सख्त, बोले- योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन में लाएं सुधार

आजीविका मिशन अंतर्गत योजनाओं का वित्तीय प्रबंधन करें बेहतर : मंत्री पटेल संविदा कर्मियों के लिए समान कार्य-समान वेतन का हो निर्धारण, पदों का करे युक्तियुक्तकरण राज्य आजीविका मिशन फोरम की शासी निकाय की बैठक में मंत्री पटेल ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने मंत्रालय में मध्यप्रदेश राज्य आजीविका मिशन फोरम की शासी निकाय की बैठक ली और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में विगत बैठक के निर्णयों के पालन प्रतिवेदन की समीक्षा करते हुए मंत्री पटेल ने आजीविका मिशन के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मियों के एचआर मैनुअल पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभाग में 'समान कार्य के लिए समान वेतन' का निर्धारण किया जाए और आवश्यकतानुसार पदों का युक्तियुक्तकरण भी किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने योजनाओं के बेहतर वित्तीय प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की बात कही, जिससे क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध रहे और विभाग की देयताएं (लायबिलिटी) कम हो सकें। बैठक में मंत्री पटेल ने जनोपयोगी सुविधाओं के लिए वन भूमि के उपयोग की अनुमति देने वाले नए वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप एफआरए लैंड डायवर्शन' की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस पारदर्शी, सुगम और त्वरित प्रक्रिया से वन भूमि पर रहने वाले अनुसूचित जनजाति के कृषकों और मजदूरों को बड़ी सुगमता होगी। इसके साथ ही, प्रदेश के 52 जिलों में स्थापित 85 आजीविका पुस्तकालयों की समीक्षा करते हुए उन्होंने इन केंद्रों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से स्किल ट्रेनिंग देने पर जोर दिया। उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें अंग्रेजी भाषा और अन्य आवश्यक कौशलों में प्रशिक्षित करने के लिए केंद्रीकृत वीसी के माध्यम से प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। मंत्री पटेल ने दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना 2.0 के तहत वर्तमान बाजार की मांग के अनुसार स्किल्स की पहचान करने और स्किल गैप एनालिसिस के आधार पर ही नवीन परियोजनाओं के मूल्यांकन के लिए नई टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने योजना की सफलता की कहानियों को बुकलेट, फ्लेक्स और फिल्मों के माध्यम से व्यापक रूप से प्रचारित करने को कहा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने एमपीएसईडीसी के माध्यम से फंड फ्लो की डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए बनाए जा रहे पोर्टल का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान की समीक्षा करते हुए मंत्री पटेल ने कहा कि पुराने तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए त्वरित कार्य करें। 5 हेक्टेयर से ऊपर के तालाबों की सूची तैयार करें और आवश्यकता के आधार पर अधूरे कार्यों को पूरा करें। 1 जुलाई से विकसित भारत – जी-राम-जी के तहत सभी निर्माण कार्य होने हैं इसलिए पूर्व से कार्य योजना तैयार रखें।इसमें विस्थापन के कारण शिफ्ट हुए परिवारों का विशेष ध्यान रखें और उन्हें इस योजना का लाभ मिले यह सुनिश्चित किया जाए। बैठक में अपर मुख्य सचिव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

बादल अकादमी में सजी संस्कृति की महफिल, अमित शाह ने लिया लोकनृत्यों का आनंद

जगदलपुर. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने बस्तर दौरे के दौरान बादल अकादमी पहुंचे, जहां उन्होंने बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखा और लोकनृत्य प्रस्तुतियों का आनंद लिया। कार्यक्रम में बस्तर की पारंपरिक लोक संस्कृति की रंगारंग झलक देखने को मिली। मंच पर लोक गीत, गेड़ी नृत्य, शहीद गुंडाधुर पर आधारित नाट्य प्रस्तुति, ‘जादू बस्तर’ और लोक कलाकार लखेश्वर बुधराम के गीतों ने माहौल को पूरी तरह बस्तरमय बना दिया। कलाकारों की प्रस्तुति ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस खास मौके पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। सभी नेताओं ने बस्तर की सांस्कृतिक विविधता और लोक कला की सराहना की। कार्यक्रम के समापन के बाद सभी अतिथि नेता बादल अकादमी में ही रात्रि भोज में शामिल होंगे, जहां अनौपचारिक चर्चा के साथ बस्तर के विकास और सांस्कृतिक पहचान पर भी बातचीत होने की संभावना है।

स्वास्थ्य सुविधाओं में देरी नहीं चलेगी: उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

निर्माण कार्य पूर्ण होते ही शीघ्र प्रारंभ हों स्वास्थ्य सेवाएं : उप मुख्यमंत्री शुक्ल स्वास्थ्य अधोसंरचना परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग अंतर्गत संचालित स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं में पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति की आवश्यकता है, उनके प्रस्ताव शीघ्र सक्षम स्तर पर भेजे जाएं। साथ ही जिन संस्थानों में निर्माण कार्य पूर्णता के निकट हैं, वहां मैनपावर, आवश्यक उपकरण एवं फर्नीचर की उपलब्धता प्राथमिकता से सुनिश्चित की जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं शीघ्र प्रारंभ की जा सकें। स्वास्थ्य अधोसंरचना कार्यों में निरंतर प्रगति बैठक में बताया गया कि 1 अप्रैल 2025 की स्थिति में विभिन्न योजनाओं अंतर्गत कुल 2841 कार्य स्वीकृत हैं, जिनमें से वर्ष 2025-26 में 1553 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं तथा 1178 कार्य वर्तमान में प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 61 कार्य निविदा स्तर पर हैं। विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग 2267 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है, जिसके विरुद्ध लगभग 1315 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सभी कार्यों को गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ पूर्ण करने तथा लंबित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। निर्माण एजेंसी के कार्यों पर विशेष जोर कुल 1282 स्वीकृत कार्य में से 1177 कार्य प्रगतिरत हैं, 81 कार्य निविदा स्तर पर हैं। इन परियोजनाओं हेतु लगभग 1372 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है, जिसके विरुद्ध अब तक लगभग 546 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक लगभग 34 करोड़ रुपये का व्यय हुआ है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 15वें वित्त आयोग अंतर्गत कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति 15वें वित्त आयोग अंतर्गत स्वास्थ्य अधोसंरचना परियोजनाओं के तहत कुल 1940 इकाइयों हेतु लगभग 1361 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। इसके विरुद्ध लगभग 1150 करोड़ रुपये के अनुबंध संपादित किए जा चुके हैं और अब तक लगभग 877 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। कुल वित्तीय प्रगति 76 प्रतिशत दर्ज की गई है। भवनविहीन उप स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। कुल 963 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 945 कार्य प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 23 कार्य निविदा स्तर पर हैं। पीएम-अभिम योजना में 86 प्रतिशत से अधिक वित्तीय प्रगति पीएम-अभिम योजना अंतर्गत कुल 72 इकाइयों हेतु लगभग 76 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है, जिसके विरुद्ध लगभग 63 करोड़ रुपये के अनुबंध संपादित किए जा चुके हैं। अब तक लगभग 54 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं तथा कुल वित्तीय प्रगति 86 प्रतिशत दर्ज की गई है। इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेट्री (IPHL) परियोजनाओं के अंतर्गत 51 इकाइयों में से 33 कार्य पूर्ण हो चुके हैं तथा 18 कार्य प्रगतिरत हैं। वहीं ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट्स अंतर्गत 23 इकाइयों में से 1 कार्य पूर्ण एवं 22 कार्य प्रगतिरत हैं। बैठक में अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अशोक बर्णवाल, आयुक्त धनराजू एस, एमडी एमपीपीएचसीएल मयंक अग्रवाल सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी एवं निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

रायपुर में नर्सिंग और PPHT परीक्षा की तैयारी पूरी, 12 परीक्षा केंद्रों पर जुटेंगे 1954 परीक्षार्थी

रायपुर. छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल की ओर से 21 मई 2026 को होने जा रही दो महत्वपूर्ण परीक्षाओं को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पी.पी.एच.टी. और पोस्ट बेसिक नर्सिंग परीक्षा के लिए राजधानी रायपुर में 12 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां हजारों अभ्यर्थी शामिल होंगे। इन परीक्षाओं को लेकर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि परीक्षा शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई जा सके। जानकारी के मुताबिक पी.पी.एच.टी. परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 1:15 बजे तक आयोजित की जाएगी। वहीं पोस्ट बेसिक नर्सिंग परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक चलेगी। दोनों परीक्षाओं में कुल 1,954 अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा केंद्रों में सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के लिए विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है। सुबह 7:30 बजे बांटी जाएगी गोपनीय सामग्री परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री का वितरण 21 मई की सुबह 7:30 बजे जिला कोषालय, कलेक्टर परिसर Raipur से किया जाएगा। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में विशेष व्यवस्था बनाई गई है। परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए डिप्टी कलेक्टर उपेंद्र किण्डो को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं विशेष रोजगार कार्यालय रायपुर के रोजगार अधिकारी केदारनाथ पटेल को सहायक नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासन का कहना है कि सभी परीक्षा केंद्रों पर निर्धारित दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा, ताकि अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

महंगाई का नया झटका! पेट्रोल-डीजल के दामों में 90 पैसे की बढ़ोतरी, चंडीगढ़-पंजाब में क्या है नया भाव

चंडीगढ़  ईंधन के दामों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। अब लुधियाना में पेट्रोल के नए दाम 101.98 रुपये हो गए हैं। वहीं डीजल 91.79 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं चंडीगढ़ में अब पेट्रोल का दाम 98.10 रुपये हो गया है। डीजल का भाव 86.09 रुपये प्रति लीटर हो गया है।  तीन दिन पहले बढ़े थे भाव तीन दिन पहले ही पेट्रोल-डीजल तीन रुपये लीटर महंगे हुए थे। जिसके बाद चंडीगढ़ में पेट्रोल के दाम 97.24 रुपये हो गए थे। वहीं डीजल 85.25 रुपये प्रति लीटर हो गया था। अब नई बढ़ोतरी से लोगों की जेब पर नया बोझ पड़ गया है। पटियाला में पेट्रोल 101.3 रुपये और डीजल का दाम 90.80 रुपये है। अमृतसर में पेट्रोल का भाव 101.30 रुपये और डीजल का 90.80 प्रति लीटर हो गया है।   वाहन चालकों में नाराजगी बताया जा रहा है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और ईरान संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। वहीं, आम लोगों का कहना है कि पहले से बढ़ी महंगाई के बीच ईंधन के दाम बढ़ने से घरेलू बजट बिगड़ गया है। पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों में नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि रोजमर्रा के खर्च पहले ही बढ़ चुके हैं और अब पेट्रोल-डीजल महंगा होने से सफर करना भी मुश्किल होता जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर नौकरीपेशा लोगों, ऑटो चालकों और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है। शहरवासियों का कहना है कि ईंधन महंगा होने से सब्जियों, दूध और अन्य जरूरी सामान के दाम भी बढ़ेंगे। लुधियाना में पेट्रोल की कीमत ₹101.11 से बढ़कर ₹101.98 हो गई है, यानी इसमें 85 पैसे की बढ़ोतरी हुई। वहीं डीजल के दाम ₹90.90 से बढ़कर ₹91.79 पहुंच गए, जिससे 89 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। जालंधर में पेट्रोल पहले ₹100.40 का था, तो अब बढ़ाकर ₹101.41 हो गया, जबकि डीज़ल ₹90.35 से बढ़ाकर ₹91.24 हो गया हैं। वहीं पठानकोट में पेट्रोल ₹101.60 से बढ़कर ₹102.46 हो गया, जबकि डीजल ₹91.38 से बढ़कर ₹92.25 हो गया है। चंडीगढ़ में पेट्रोल 97.27 से बढ़कर 98.12 रुपए हो गए। इसमें 85 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। डीजल के रेट 85.25 से बढ़कर 86.09 रुपए हो गए। उसमें 84 पैसे बढ़े हैं। चंडीगढ़ के सेक्टर-17 स्थित सिटको पेट्रोल पंप के मैनेजर ने बताया की हमारे यहां अदानी टोटल गैस ग्रुप की सप्लाई है। सीएनजी के रेट आज ₹94.25 से बढ़कर ₹96 हो गए हैं। एक्सपर्ट क अनुसार, पेट्रोल-डीचल में हुई बढ़ोतरी से अब धान के सीजन में किसानों को ₹756 करोड़ ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। क्योंकि औसतन प्रति एकड़ करीब 90 लीटर डीजल खर्च होता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। डीजल के दाम बढ़ने का किसानों पर क्या असर… किसानों को ₹756 करोड़ ज्यादा खर्च करना पड़ेगाः पंजाब पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक सचदेवा के अनुसार, पेट्रोल-डीजल के रेट एक बार फिर से बढ़ गए हैं। धान के सीजन में डीजल के रेट बढ़ने का सीधा असर किसानों पर भी दिखता है। पांच दिन में डीजल के रेट करीब 4 रुपए प्रति लीटर बढ़ गए हैं। पहले 3.11 रुपए प्रति लीटर बढ़ोत्तरी हुई और अब 89 पैसे प्रति लीटर बढ़े हैं। पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण सेल के अनुसार पंजाब में धान सीजन (4 महीने) में कुल 189 करोड़ लीटर डीजल की खपत होती है। ऐसे में पंजाब की किसानी पर 756 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। चार महीने में 189 करोड़ लीटर डीजल की खपत: पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के अुनसार, धान के चार महीने के सीजन के दौरान पंजाब में कुल 189 करोड़ लीटर डीजल की खपत का अनुमान है। पंजाब पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (PPDA) के अनुसार, धान के सीजन (जून से सितंबर) के दौरान पंजाब में डीजल की कुल बिक्री का लगभग 50% हिस्सा सीधे कृषि क्षेत्र और किसानों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। औसतन प्रति एकड़ करीब 90 लीटर डीजल खर्च होता: पंजाब में खेत तैयार करने (कद्दू करने) से लेकर सिंचाई और फसल कटाई तक औसतन प्रति एकड़ करीब 90 लीटर डीजल खर्च होता है। वहीं कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक राज्य में लगभग 5.5 लाख पंजीकृत ट्रैक्टर, करीब 1.2 लाख फसल अवशेष प्रबंधन (पराली संभालने वाली) मशीनें और लगभग 1.5 लाख डीजल चालित ट्यूबवेल मौजूद हैं। इन कृषि उपकरणों और मशीनों में बड़े स्तर पर डीजल की खपत होती है, इसलिए डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर किसानों की खेती लागत और कृषि खर्च पर पड़ता है। अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं… डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब और किचन पर पड़ता है। इसे ऐसे समझिए: मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे। खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी। बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।