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कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई, सपा को आपत्ति है तो न्यायालय जाए- अनिल राजभर

लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरोपों पर योगी सरकार के मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने तीखा पलटवार किया है। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित इस अवैध ढांचे को लेकर अखिलेश यादव के बयान को भाजपा नेताओं ने निंदनीय बताया। कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने सहारनपुर मामले पर कहा कि प्रशासन ने माननीय न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी वास्तव में इस मामले को लेकर गंभीर है और जनता को गुमराह नहीं कर रही है तो उसके नेताओं को न्यायालय जाना चाहिए और आदेश के खिलाफ अपील करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल झूठ को आधार बनाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सपा 10 साल से सत्ता से बाहर है और उसकी परेशानी समझी जा सकती है, लेकिन ऐसे बयान नहीं देने चाहिए, जिन्हें जनता गंभीरता से लेना ही छोड़ दे। उन्होंने इसे विपक्ष की ओर से डाली जा रही एक गलत परिपाटी बताया। अवैध मस्जिद के बहाने धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश- भूपेंद्र चौधरी कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी अवैध मस्जिद के बहाने धार्मिक उन्माद पैदा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई किसी धार्मिक ढांचे के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकारी जमीन पर हुए अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ की गई है। प्रशासन ने यह कदम मनमाने तरीके से नहीं उठाया है। अदालत से आदेश की पुष्टि के बाद ही प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई की। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी वोट बैंक की राजनीति के चलते अवैध अतिक्रमण का बचाव कर रही है और धार्मिक उन्माद पैदा करने की कोशिश कर रही है। अखिलेश यादव गलत नैरेटिव गढ़ते हैं- बृजलाल राज्यसभा सदस्य बृजलाल ने भी अखिलेश यादव के बयान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव हमेशा गलत नैरेटिव गढ़ते हैं। सहारनपुर का संबंधित अवैध मस्जिद ढांचा सरकारी जमीन पर था और कार्रवाई प्रशासन के मनमाने आदेश से नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत हुई। पहले मामला सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में गया और उसके बाद न्यायिक अदालत में सुनवाई हुई। जिला जज की अदालत के निर्णय के बाद सरकारी जमीन पर बने ढांचे को हटाया गया। उन्होंने कहा कि जब कार्रवाई न्यायालय के आदेश के तहत हुई है तो अखिलेश यादव को इस मामले में लोगों को भ्रमित करने वाला नैरेटिव नहीं गढ़ना चाहिए। असीम अरुण ने बुद्ध से जुड़े जिलों के नाम बदलने का उठाया मुद्दा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने अखिलेश यादव के भगवान बुद्ध के प्रति प्रेम को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते भगवान बुद्ध से जुड़े जिलों के नाम बदले गए। उन्होंने कहा कि महामाया जी भगवान बुद्ध की माता थीं और उनके नाम पर बने महामाया नगर का नाम बदल दिया गया। इसी तरह पंचशील नगर और प्रबुद्ध नगर के नाम बदले जाने का भी उन्होंने जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज जब उत्तर प्रदेश की जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया है, तब उन्हें भगवान बुद्ध की याद आ रही है। कलेक्ट्रेट परिसर की इमारत पूरी तरह अनाधिकृत थी- दिनेश सिंह प्रदेश के मुख्य भाजपा प्रवक्ता दिनेश सिंह ने कहा कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी इमारत के मामले में प्रशासन ने न्यायालय के आदेश का अनुपालन किया है। उन्होंने अखिलेश यादव और विपक्ष पर मामले का राजनीतिकरण करने तथा धार्मिक उन्माद पैदा करने की कोशिश का आरोप लगाया। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार है और किसी को भी धार्मिक उन्माद पैदा करने का अवसर नहीं दिया जाएगा।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में यूपी के 16 शहरों ने बनाई जगह, लखनऊ देश में पहले स्थान पर

लखनऊ उत्तर प्रदेश में स्वच्छ हवा को लेकर किए जा रहे लगातार प्रयासों ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से कराए गए सर्वेक्षण में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ ने पहली बार इंदौर को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान प्राप्त किया है।  लखनऊ ने 198 अंक के साथ प्रथम स्थान जबकि इंदौर 197 और जबलपुर 195 अंकों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे हैं। यह उपलब्धि केवल राजधानी लखनऊ तक सीमित नहीं है। प्रदेश के 16 शहरों ने अलग-अलग आबादी वर्गों में राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश में स्वच्छ वायु को लेकर शहर स्तर से लेकर वार्ड स्तर तक योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। यूपी के दूसरे शहरों ने भी दिखाया दम 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में उत्तर प्रदेश के कई शहरों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। आगरा 192 अंकों के साथ चौथे, गाजियाबाद 184 अंकों के साथ नौवें, कानपुर 183.2 अंकों के साथ 11वें और प्रयागराज 180 अंकों के साथ 13वें स्थान पर रहा। मेरठ 22वें और वाराणसी 34वें स्थान पर रहे। इस रैंकिंग से यह संकेत मिलता है कि स्वच्छ हवा को लेकर प्रदेश के बड़े शहरों में किए जा रहे प्रयासों का असर व्यापक स्तर पर दिखाई दे रहा है। 3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों में भी यूपी का दबदबा मध्यम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। फिरोजाबाद ने 195 अंक हासिल कर देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। शहर में कांच उद्योगों को स्वच्छ प्राकृतिक गैस ईंधन की ओर तेजी से स्थानांतरित करने को अहम उपलब्धि माना गया। झांसी 192.5 अंकों के साथ पांचवें, जबकि मुरादाबाद और नोएडा 187.5-187.5 अंकों के साथ संयुक्त रूप से आठवें स्थान पर रहे। गोरखपुर 22वें और बरेली 26वें स्थान पर रहा। छोटे शहरों में भी बेहतर प्रदर्शन तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में भी यूपी के शहरों ने प्रभावी प्रदर्शन किया। रायबरेली 180.5 अंकों के साथ 17वें स्थान पर रहा। अनपरा 29वें, खुर्जा 30वें और गजरौला 31वें स्थान पर रहे। इन शहरों में धूल नियंत्रण और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए किए गए प्रयासों को प्रमुखता मिली। वार्ड स्तर पर भी यूपी की बड़ी उपलब्धि स्वच्छ वायु प्रबंधन को शहरों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय स्तर पर भी प्रभावी कदम उठाए गए। 30 हजार से अधिक आबादी वाले शहरी वार्डों की राष्ट्रीय श्रेणी में लखनऊ के जोन-4 स्थित वार्ड-70 ने पहला स्थान हासिल किया। वहीं 10 हजार से 30 हजार आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में प्रयागराज के वार्ड-31 ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। राज्य स्तरीय वार्ड पुरस्कारों में कानपुर के वार्ड केएनपी078, प्रयागराज के वार्ड-33 और बरेली के गांधी उद्यान वार्ड-32 को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। खुले में कूड़ा जलाने पर प्रभावी रोक और स्थानीय स्तर पर धूल नियंत्रण जैसे उपायों को इसमें महत्वपूर्ण माना गया। समन्वित रणनीति का परिणाम प्रदेश में स्वच्छ हवा के लिए नगर विकास विभाग, स्थानीय नगरीय निकायों और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समन्वय से विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की गई। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत तैयार और लागू की गई समन्वित रणनीति का असर लखनऊ के देश में पहले स्थान समेत यूपी के कई शहरों और वार्डों की राष्ट्रीय रैंकिंग में दिखाई दिया है।  पुरस्कार के साथ बढ़ा स्थानीय निकायों का उत्साह स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में उत्तर प्रदेश ने शानदार प्रदर्शन किया है। श्रेणी-1 में लखनऊ नगर निगम को प्रथम पुरस्कार हासिल करने के साथ ही 1.5 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि मिली है। वहीं श्रेणी-2 में फिरोजाबाद नगर निगम को प्रथम पुरस्कार के साथ 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई है। वार्ड स्तर पर भी प्रदेश को महत्वपूर्ण सफलता मिली। लखनऊ नगर निगम के वार्ड-70 को प्रथम पुरस्कार के साथ 50 लाख रुपये, प्रयागराज नगर निगम के वार्ड-31 ने तृतीय पुरस्कार के साथ 20 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई है। स्वच्छ वायु के क्षेत्र में लखनऊ की उपलब्धि प्रदेश के लिए नई प्रेरणा- नगर विकास मंत्री नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के शहरों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। लखनऊ ने स्वच्छ वायु संरक्षण के क्षेत्र में पहली बार इंदौर को पीछे छोड़कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के लिए एक नई प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिस प्रकार स्वच्छ वायु के क्षेत्र में लखनऊ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है, उसी प्रकार स्वच्छता सर्वेक्षण में भी लखनऊ को देश का नंबर-वन शहर बनाने के लिए सरकार, नगर निगम और नागरिक मिलकर पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करेंगे। लखनऊ की नंबर-1 उपलब्धि ने बढ़ाया यूपी का गौरव लखनऊ को 198 अंकों के साथ देश में पहला स्थान मिलना प्रदेश के लिए विशेष उपलब्धि है। राजधानी में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए इलेक्ट्रिक परिवहन, सड़क की धूल नियंत्रण, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, हरियाली बढ़ाने और यातायात व्यवस्था को बेहतर करने जैसे क्षेत्रों में लगातार काम किया गया। नगर निगम की ओर से डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण के लिए करीब 1,100 इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए शहर में 12 चार्जिंग स्टेशन और 916 चार्जिंग प्वाइंट बनाए गए हैं। स्वच्छ परिवहन की दिशा में 140 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी किया जा रहा है। सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए 97 इलेक्ट्रिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें संचालित हैं। इसके साथ ही 559.85 किलोमीटर सड़कों को एंड-टू-एंड पक्का किया गया है, जिससे धूल के कारण होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिली है। कचरा प्रबंधन और हरियाली पर भी विशेष जोर स्वच्छ वायु की रणनीति में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन को भी महत्वपूर्ण स्थान … Read more

निजी विश्वविद्यालयों की अद्यतन जानकारी के लिए नया वेब पोर्टल शुरू- राज्यपाल श्री डेका ने किया शुभारंभ

रायपु  राज्यपाल  रमेन डेका ने आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा तैयार किए गए नए वेब पोर्टल cgpurc.cgstate.gov.in का क्लिक कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष   वी. के. गोयल सहित आयोग के अन्य सदस्य उपस्थित थे।  नए पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित महत्वपूर्ण एवं अद्यतन जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। इसमें अध्यादेश के आधार पर संचालित पाठ्यक्रमों का विवरण, अकादमिक कैलेंडर, प्रवेशित विद्यार्थियों की जानकारी, विद्यार्थियों की अंकसूची ,डिग्री तथा गत वर्षों के परीक्षा परिणाम अपलोड किए जाएंगे। पोर्टल पर विश्वविद्यालयों द्वारा लिए जाने वाले शुल्क, कार्यरत अधिकारियों, विभिन्न समितियों एवं उनके सदस्यों तथा पीएच.डी. शोध-निर्देशकों की विस्तृत जानकारी भी उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा एनईपी-2020, नैक प्रत्यायन, अन्य विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू, स्किल डेवलपमेंट, इनोवेशन, स्टार्टअप, जॉब ओरिएंटेशन प्रोग्राम, कैंपस प्लेसमेंट और ई-लाइब्रेरी से संबंधित जानकारी भी पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएगी। पोर्टल में शैक्षणिक स्वीकृतियों, भरे एवं रिक्त पदों  से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे निजी विश्वविद्यालयों की गतिविधियों में पारदर्शिता, सूचना की सुगमता और प्रभावी निगरानी को बढ़ावा मिलेगा।

भारतीय ज्ञान परंपरा से प्रेरित परीक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि प्रवेश, पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम में समयबद्धता शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता की मूल आवश्यकता है। समय पर प्रवेश, नियमित अध्ययन-अध्यापन, निर्धारित समय पर परीक्षा एवं परिणाम तथा अकादमिक कैलेंडर का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किए बिना विद्यार्थियों का समग्र एवं न्यायसंगत मूल्यांकन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए इस सत्र से ‘सार्थक ऐप’ के माध्यम से उनकी उपस्थिति दर्ज की जाएगी। मंत्री  परमार ने भोपाल स्थित एलएनसीटी विश्वविद्यालय में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में परीक्षा संचालन एवं मूल्यांकन : राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 केवल शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन का दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, जीवन-मूल्यों और दृष्टिकोण के अनुरूप विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास का राष्ट्रीय संकल्प है। इसी भावना के अनुरूप हमारी परीक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था भी पारदर्शी, समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण, विद्यार्थी-केंद्रित और परिणामोन्मुख होनी चाहिए। मंत्री  परमार ने कहा कि परीक्षा केवल विद्यार्थी के ज्ञान को मापने का माध्यम नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा, क्षमता, कौशल, चिंतन, सृजनशीलता और संभावनाओं को पहचानने का अवसर बननी चाहिए। भारतीय ज्ञान परंपरा शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखती, बल्कि विद्यार्थी के समग्र व्यक्तित्व विकास पर बल देती है। इसके लिए शिक्षकों को विद्यार्थियों के प्रत्येक पहलू को समझना और उनके साथ निरंतर शिक्षक-विद्यार्थी संवाद स्थापित करना आवश्यक है। मंत्री  परमार ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली एवं एलएनसीटी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यशाला भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा दृष्टि के समन्वय से परीक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था में सकारात्मक, सार्थक एवं दूरगामी परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा से समृद्ध ऐसी आदर्श परीक्षा एवं मूल्यांकन पद्धति विकसित करेगा, जो देश के लिए भी अनुकरणीय बने। मंत्री  परमार ने कहा कि देशभर से आए कुलगुरुओं, कुलसचिवों, परीक्षा नियंत्रकों, शिक्षाविदों एवं विषय-विशेषज्ञों का सामूहिक मंथन ऐसी मूल्यांकन व्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा, जिसमें विद्यार्थी के ज्ञान के साथ उसकी प्रतिभा, कौशल, चिंतन, सृजनशीलता और समग्र क्षमता का न्यायसंगत आकलन हो सके। कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी, मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक  अशोक कड़ेल, मध्यप्रदेश प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति के पूर्व अध्यक्ष एवं शिक्षाविद् डॉ. रविंद्र कान्हेरे, महर्षि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल, हरियाणा के पूर्व कुलपति एवं शिक्षाविद् डॉ. रमेश चंद्र भारद्वाज, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के चेयरमैन डॉ. खेम सिंह डेहरिया, आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, एलएनसीटी समूह के सचिव  अनुपम चौकसे सहित देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, शिक्षाविद एवं विषय-विशेषज्ञ उपस्थित थे।  

दुबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित एआईएम कांग्रेस-2026 में मुख्यमंत्री ने की शिरकत

भोपाल  दुबई विजिट- दूसरा दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई प्रवास के दौरान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित 'एआईएम कांग्रेस-2026' में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने रूसी गणराज्य तातारस्तान के प्रमुख (रईस) महामहिम रुस्तम मिन्निखानोव के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। बैठक का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश और तातारस्तान के बीच व्यापार एवं निवेश सहयोग को प्रगाढ़ करना, सेक्टर-विशिष्ट रणनीतिक साझेदारियों की पहचान करना तथा आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 (GIS) में तातारस्तान की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महामहिम रुस्तम मिन्निखानोव को मध्यप्रदेश की समृद्ध औद्योगिक क्षमताओं और निवेश अनुकूल वातावरण से अवगत कराते हुए आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में सम्मिलित होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। तातारस्तान के प्रमुख ने इस निमंत्रण का स्वागत करते हुए आश्वस्त किया कि वे एक सशक्त निवेशक प्रतिनिधिमंडल (डेलिगेशन) के साथ समिट में भाग लेंगे तथा राज्य में निवेश की ठोस संभावनाओं को आगे बढ़ाएंगे। बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, पेट्रोकेमिकल्स, फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास, कृषि एवं इनोवेशन-आधारित आधुनिक तकनीकों में सहयोग पर विस्तृत विमर्श हुआ। भारत और तातारस्तान के प्रगाढ़ होते आर्थिक संबंधों के परिप्रेक्ष्य में मध्यप्रदेश के साथ बीटूबी और जीटूजी स्तर पर दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। तातारस्तान की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव, उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों और राज्य के व्यापारिक प्रतिनिधियों को “टाइम: रूस–भारत” फोरम तथा संबंधित प्रदर्शनी में सहभागिता के लिये आमंत्रित किया गया। बैठक में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय बिजनेस मिशन आयोजित करने, संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं को धरातल पर उतारने और त्वरित समन्वय के लिए अधिकृत नोडल ऑफिसर्स को नामित करने पर भी सहमति व्यक्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री डॉ. थानी बिन अहमद ज़ैयौदी से की वन-टू-वन मीटिंग मध्यप्रदेश में निवेश के लिए किया आमंत्रित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद ज़ैयौदी के साथ उच्च स्तरीय वन-टू-वन बैठक की। बैठक में दोनों पक्षों के बीच भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (India-UAE CEPA) के तहत गैर-तेल व्यापार, उन्नत प्रौद्योगिकी, सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला और सीमा-पार निवेश को गति देने पर गहन विचार-विमर्श हुआ। मध्यप्रदेश को यूएई निवेशकों के पसंदीदा गंतव्य के रूप में किया पेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई के निवेशकों के समक्ष मध्यप्रदेश के निवेश अवसरों और आदर्श निवेश गंतव्य की विशेषताओं से अवगत कराया, जिनमें रणनीतिक केंद्रीय अवस्थिति, प्रतिस्पर्धी लागत, उपलब्ध औद्योगिक भूमि और स्थापित अवसंरचना को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के प्रमुख बाजारों तक सीधी और सुगम पहुंच प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की उद्योग-हितैषी नीतियों और सिंगल विंडो सुविधा का उल्लेख करते हुए यूएई निवेशकों को समयबद्ध राज्य-स्तरीय सहायता का पूर्ण भरोसा दिलाया। प्राथमिकता वाले सेक्टर्स और खाद्य प्रसंस्करण में साझेदारी का आह्वान बैठक में मध्यप्रदेश में निवेश के विभिन्न अवसरों पर चर्चा हुई, जिनमें विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्य पालन, नवकरणीय ऊर्जा एवं भंडारण, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), स्मार्ट विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फूड पार्क, मत्स्य पालन एवं एक्वाकल्चर, कोल्ड चेन, हरित ऊर्जा और निर्यात प्लेटफॉर्म्स के विकास में यूएई की सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए दिया न्योता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद ज़ैयौदी को मध्यप्रदेश में आयोजित होने वाले आगामी 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027' में शामिल होने का औपचारिक आमंत्रण दिया। यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री ने इस आमंत्रण को स्वीकारते हुए आश्वस्त किया कि वे यूएई के प्रमुख निवेशकों का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल (डेलिगेशन) के साथ सहभागिता करेंगे। अगला कदम: 3 माह में समीक्षा और नोडल ऑफिसर की नियुक्ति द्विपक्षीय संबंधों और औद्योगिक साझेदारी को व्यावहारिक रूप देने के लिए 5 से 10 क्रियान्वयन-तैयार परियोजनाओं की पहचान करने और संयुक्त समीक्षा व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति बनी। इसके तहत 'मध्यप्रदेश-यूएई इन्वेस्टमेंट राउंड टेबल' का आयोजन किया जाएगा तथा चयनित परियोजनाओं के लिए समर्पित नोडल अधिकारी नामित किए जाएंगे, जिनकी पहली प्रगति समीक्षा तीन माह के भीतर सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व बैंक के उपाध्यक्ष से की उच्च स्तरीय बैठक प्रदेश में एआई परियोजनाओं के लिए फंडिंग पर हुआ संवाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'एआईएम कांग्रेस-2026' सम्मेलन के दौरान विश्व बैंक के डिजिटल एवं एआई (Digital and AI) मामलों के वाइस प्रेसिडेंट  सांगबु किम तथा उनकी टीम के साथ बैठक की। बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच मध्यप्रदेश में डिजिटल और तकनीकी विस्तार को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इस संवाद में विश्व बैंक के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार की नीतियों के तहत संचालित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल गवर्नेंस से संबंधित परियोजनाओं में फंडिंग और वित्तीय सहयोग देने में रुचि दिखाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में उभरती तकनीकों, नवाचार और निवेश के अनुकूल वातावरण की जानकारी साझा करते हुए राज्य के विकास में वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यूएई के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री एचई अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री निवेश की संभावनाओं पर हुई बैठक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को दुबई स्थित अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्रालय में यूएई कैबिनेट सदस्य एवं अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री एचई अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री के साथ बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एचई अल मर्री को मध्यप्रदेश में आयोजित होने वाली आगामी 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट' (GIS) में सहभागिता के लिए औपचारिक निमंत्रण दिया। आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए एचई अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री ने आश्वस्त किया कि होटल एवं हॉस्पिटैलिटी इंवेस्टमेंट के क्षेत्र में संभावनाओं को धरातल पर उतारने के लिए दुबई से एक विशेष निवेश प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही मध्यप्रदेश का दौरा करेगा। प्रमुख क्षेत्रों में निवेश और नीतिगत सहयोग पर गहन विमर्श उच्च स्तरीय वार्ता के दौरान दोनों पक्षों के मध्य खनन (माइनिंग), टेक्सटाइल, वन (फॉरेस्ट) एवं पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश सरकार की पारदर्शी नीतियों, भूमि स्वामित्व नियमों, श्रम सुधारों और विदेशी निवेशकों के लिए उपलब्ध सुरक्षा तंत्र (प्रोटेक्शन मैकेनिज्म) से अवगत कराया। उन्होंने राज्य में पहले से सक्रिय यूएई कंपनियों के सकारात्मक अनुभवों को साझा करते हुए नए निवेशकों के लिए अनुकूल औद्योगिक वातावरण की प्रतिबद्धता दोहराई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य की नई … Read more

CBI चार्जशीट के बाद ट्विशा केस में फिर उठे सवाल, दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों को लेकर विरोधाभास का दावा

भोपाल भोपाल शहर में सबसे चर्चित ट्विशा शर्मा मौत (Twisha Sharma Case) मामले में बड़ी उलझन सामने आई है। बीत दिनों ट्विशा केस में सीबीआइ ने चार्जशीट पेश कर दी है लेकिन ट्विशा पक्ष के वकील अंकुर पांडेय ने बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि जांच में सामने आई दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के कारण को लेकर एकमत हैं। शरीर पर मिली चोटों की वजह को लेकर भोपाल एम्स और दिल्ली एम्स की रिपोर्ट में बड़ा अंतर सामने आया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनी आधार सीबीआइ के कोर्ट में पेश किए गए को अंतिम निष्कर्ष में एम्स दिल्ली की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को प्रमुख आधार बनाया गया है। वकील अंकुर पांडेय ने विरोध करते हुए कहा कि शुरुआती पोस्टमार्टम में शरीर पर सात एंटी-मॉर्टम चोटें, यानी मौत से पहले लगी चोटें दर्ज की गई थीं। 18 मई एम्स भोपाल ने एसीपी मिसरोद को भेजे जवाब में इन चोटों का अलग-अलग परीक्षण किया था। इसमें गर्दन पर मिले दो छोटे लाल निशान फंदे के रगड़ने या खिसकने से बने हो सकते है। ये नाखून या उंगलियों के दबाव के निशान नहीं थे। वहीं बाएं हाथ और कलाई पर मिले नीले निशान एक से तीन दिन पुराने बताए गए थे। पहले पोस्टमार्टम में यह भी दर्ज वकील का दावा है कि पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कलाई और उंगलियों पर कुछ चोटें ताजा थीं और मौत से कुछ समय पहले लगी प्रतीत हुईं। एम्स भोपाल ने इन चोटों के किसी संघर्ष या हाथापाई के दौरान लगने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ये चोटें मौत से पहले की थीं, इसलिए शव को उतारने या बाद में ले जाने के दौरान नहीं लग सकतीं। क्लासमेट्स ने किया पोस्टमार्टम ट्विशा की मां ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी बेटी कोई गलत कदम नहीं उठा सकती है। सास गिरिबाला ने उससे कहा था कि अगर तुम यहां से गई तो कोई तुमसे बात नहीं करेगा। न ही तुम वापस आ पाओगी। आगे उन्होंने कहा कि दूसरी पोस्टमर्टम रिपोर्ट गिरिबाला के क्लासमेट ने की थी इसलिए रिपोर्ट में कोई खुलासा नहीं हुआ है। दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पहले जैसी जानकारी के लिए बता दें कि ट्विशा शर्मा की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी पहले ही जैसी है। दोनों पोस्टमार्टम में मौत का कारण दम घुटना बताया गया। एम्स दिल्ली की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मानसिक क्रूरता का आरोप चार्जशीट का मुख्य आधार है। वहीं दहेज की मांग और दहेज मृत्यु के पहलू की आगे जांच जारी है। ट्विशा का आईफोन, घर के डीवीआर और आरोपियों की आवाज के फोरेंसिक परीक्षण भी कई बड़े राज खोल सकते हैं। ये है पूरा मामला जानकारी के लिए बता दें कि ट्विशा शर्मा की 12 मई को मौत हुई थी। शव कटारा हिल्स थाना क्षेत्र स्थित ससुराल में मिला था। पिता और मायके पक्ष की शिकायतों पर दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया था। जांच सीबीआइ को सौंपी गई। तब से गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह केंद्रीय जेल में बंद हैं।

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी तेज, सितंबर में जुटेंगे सियासी दिग्गज; पार्टियों ने कसी कमर

चंडीगढ़  पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सितंबर सियासी तौर पर बेहद अहम रहने वाला है। प्रदेश में एक के बाद एक बड़े केंद्रीय नेताओं के दौरे से चुनावी माहौल गरमाने के आसार हैं।  नशे के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी की यात्रा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पहुंचने की चर्चा है, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी 19 सितंबर के बाद पंजाब का दौरा कर सकते हैं।कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए सचिन पायलट को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में सितंबर पंजाब की सियासत में शक्ति प्रदर्शन और चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद अहम होगा।  17 से भाजपा की चार यात्राएं भाजपा 17 सितंबर से नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था के मुद्दे को लेकर चार यात्राएं आयोजित करेगी। इसकी शुरुआत भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन कर सकते हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इसके समापन कार्यक्रम के दौरान जालंधर में शामिल होने की संभावना है। दो यात्राएं मालवा क्षेत्र में होंगी जहां पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 69 हैं जबकि एक-एक यात्रा माझा और दोआबा क्षेत्रों में होगी। पंजाब विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने हैं जिसके लिए अभी से भाजपा ने तैयारी शुरू कर दी है। इन यात्राओं में शाह के अलावा अन्य केंद्रीय मंत्रियों की भी ड्यूटी लगाई जा रही है इसलिए चार यात्राओं के दौरान आधे से ज्यादा केंद्रीय मंत्रियों का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। 19 से गरजेंगे राहुल इसी तरह 19 सितंबर के बाद विपक्ष के नेता राहुल गांधी पंजाब आएंगे जो हरिमंदिर साहिब में माथा टेकने जाएंगे। साथ ही वह पंजाब कांग्रेस की तरफ से आयोजित की जाने वाली यात्रा में भी शामिल होंगे। जानकारी के अनुसार 150 किलोमीटर की यह यात्रा चार दिन चल सकती है। अमृतसर के बाद यह यात्रा करीब 20 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेगी जिसके जरिये पार्टी सूबे में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए काम करेगी। कांग्रेस के नए प्रभारी भी आएंगे पंजाब इसी तरह पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट भी अगले सप्ताह से पहले पंजाब आ सकते हैं जिनका कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। 7 और 8 सितंबर को पूर्व प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल का यहां आना तय था लेकिन इससे ठीक पहले ही कांग्रेस नेतृत्व ने प्रभारी बदल दिया। अब पार्टी जल्द पायलट का दौरा आयोजित करवाने की तैयारी कर रही है क्योंकि पंजाब कांग्रेस को पहले ही गुटबाजी का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व सीएम एवं सांसद चरणजीत चन्नी के समर्थक इससे पहले खुलकर पार्टी कार्यक्रमों के दौरान चन्नी के समर्थन में आवाज बुलंद कर सकते हैं। अब पायलट के सामने प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी को खत्म करने की बड़ी चुनौती है। इससे पहले राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री के बीच चल रही खींचतान के दौरान पंजाब से सुखजिंदर सिंह रंधावा को 2022 में राजस्थान कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया था और अब जब पंजाब कांग्रेस के मौजूदा प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और सांसद चरणजीत चन्नी के बाद खींचतान की चर्चाओं का बाजार गर्म है तो सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस के प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। आप पंजाब ने भी बढ़ाई सूबे में गतिविधियां  आम आदमी पार्टी (आप) ने भी विधानसभा चुनाव से पहले गतिविधियां बढ़ा दी हैं। सीएम भगवंत सिंह मान खुद भी अलग-अलग हलकों में जाकर लोक मिलनी कर रहे हैं। साथ ही मंत्रियों और पार्टी के नेताओं को भी इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। आने वाले दिनों आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल के भी प्रदेश में बड़े कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी चल रही है। इस तरह शिअद ने भी सभी हलकों में रैलियों और बैठकों का दौर शुरू कर दिया है।  

योगी सरकार का सड़क सुरक्षा विजन, हादसों पर रोक के लिए जीरो फैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना को मिशन मोड में लागू करने के निर्देश

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के विजन के तहत प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय में जीरो फैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेडएफडी) योजना के तृतीय एवं चतुर्थ चरण की क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारियों की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें 59 जिलों के 213 दुर्घटना बाहुल्य स्थानों पर गठित 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारी और जेडएफडी नोडल अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में हादसों के मूल कारणों की वैज्ञानिक पहचान कर उनकी रोकथाम पर विशेष जोर दिया गया। हादसों को महज संयोग न मानें, मूल कारण तलाशें: डीजीपी यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को केवल आकस्मिक घटना मानकर नहीं चलना चाहिए। प्रत्येक हादसे के पीछे मौजूद कारणों की पहचान कर उन्हें दूर करना जरूरी है। उन्होंने क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को अपने-अपने क्षेत्र में दुर्घटना संभावित स्थानों और उनके कारणों की पहचान कर मिशन मोड में प्रभावी रोकथाम और प्रवर्तन कार्रवाई करने के निर्देश दिए। डीजीपी ने कहा कि दुर्घटना रोकथाम और दुर्घटना की विवेचना दोनों विशेषज्ञता वाले कार्य हैं, इसलिए टीमों को तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी के साथ काम करना होगा। उन्होंने संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय और चिन्हित कमियों के समाधान का फॉलोअप करने के भी निर्देश दिए। दुर्घटना के बाद कार्रवाई ही नहीं, रोकथाम भी प्राथमिक जिम्मेदारी डीजीपी ने स्पष्ट किया कि क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों की जिम्मेदारी केवल दुर्घटना के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि हादसों को रोकना भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। प्रत्येक दुर्घटना के बाद उसके कारणों की समीक्षा कर यह पता लगाया जाए कि व्यवस्था में कौन सी कमी के कारण हादसा हुआ और उसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या सुधार जरूरी है। उन्होंने आवश्यक प्रवर्तन, सड़क सुरक्षा उपाय और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ प्रक्रिया का सही और लगातार पालन करने पर भी जोर दिया। रोजाना औसतन 7 हादसे और 5 जानें बचीं बताया गया कि जेडएफडी योजना के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। जनवरी से अगस्त 2026 तक जेडएफडी से आच्छादित स्थानों पर पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में 6.97 प्रतिशत, मृतकों में 8.03 प्रतिशत और घायलों में 6.11 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इस अवधि में 1,255 सड़क दुर्घटनाएं कम हुईं और 1,107 अमूल्य मानव जीवन बचाने में सफलता मिली। यानी औसतन रोजाना करीब 7 दुर्घटनाएं कम हुईं और करीब 5 लोगों की जान बची। जहां दुर्घटनाएं अधिक, वहां कार्रवाई अधिक जेडएफडी योजना ‘जहां दुर्घटनाएं अधिक, वहां कार्रवाई अधिक’ के सिद्धांत पर आधारित है। इसके तहत वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर दुर्घटना बाहुल्य स्थानों की पहचान की जा रही है। इन स्थानों पर लक्षित प्रवर्तन, सड़क सुरक्षा उपाय, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और सड़क अभियांत्रिकी से जुड़ी कमियों को दूर करने पर जोर दिया जा रहा है। तकनीक और प्रशिक्षण से मजबूत होगी सड़क सुरक्षा कार्यशाला में सड़क सुरक्षा, मोटर वाहन अधिनियम, दुर्घटना जांच, ब्लैक स्पॉट, प्रथम उपचार, सीपीआर समेत अन्य विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया। डीजीपी ने सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और जांच में विशेषज्ञता विकसित करने, जरूरी प्रशिक्षण लेने व उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश दिए।

योगी सरकार में बिजली चोरी और लाइन लॉस पर लगाम, AT&C हानि 31% से घटकर 17.83% हुई

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने और बिजली वितरण में होने वाले नुकसान को कम करने के प्रयासों का असर आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020-21 में 20.63 प्रतिशत रही वितरण हानि वर्ष 2025-26 में घटकर 13.04 प्रतिशत रह गई। इसी अवधि में एटीएंडसी हानि भी 31.19 प्रतिशत से घटकर 17.83 प्रतिशत पर आ गई। कृषि फीडरों को छोड़कर प्रदेश में फीडरों की संख्या 18,351 से बढ़कर 21,463 हो गई है। इनमें लाभकारी फीडरों की संख्या 5,772 से बढ़कर 8,104 पहुंच गई। इसमें 2,332 अतिरिक्त फीडर लाभकारी श्रेणी में आए हैं। लाभकारी फीडरों की हिस्सेदारी भी 31 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत हो गई है। डिस्कॉमवार प्रदर्शन में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम 53 प्रतिशत लाभकारी फीडरों के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। केस्को 39 प्रतिशत, दक्षिणांचल और मध्यांचल 37-37 प्रतिशत तथा पूर्वांचल 22 प्रतिशत पर रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक कुशल, जवाबदेह और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में लगातार सुधार हुआ है। हाई लॉस क्लस्टर मॉडल से वसूली और नए कनेक्शन में तेजी योगी सरकार के नेतृत्व में बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए लागू हाई लॉस क्लस्टर मॉडल के तहत प्रदेश में 703 क्लस्टर, 1703 फीडर, 42.21 लाख उपभोक्ता और 76,839 वितरण ट्रांसफार्मरों को कवर किया गया। यह कुल उपभोक्ताओं का करीब 11 प्रतिशत है। अभियान के तहत 654 करोड़ 31 लाख रुपये की बकाया वसूली की गई है, जबकि 1,01,548 नए विद्युत संयोजन जारी किए गए हैं। दक्षिणांचल डिस्कॉम में भी सुधार उल्लेखनीय रहा। यहां वितरण हानि 25.64 प्रतिशत से घटकर 14.78 प्रतिशत और एटीएंडसी हानि 31.03 प्रतिशत से घटकर 19.57 प्रतिशत रह गई। थ्रू-रेट 3.65 रुपये प्रति यूनिट से बढ़कर 4.06 रुपये हो गया। दक्षिणांचल में वर्ष 2025-26 में 105 करोड़ रुपये तथा चालू वित्तीय वर्ष में जुलाई तक 155 करोड़ रुपये की वसूली की गई। हाई लॉस फीडरों पर कार्रवाई का असर तालबेहट टाउन-2 ललितपुर में एटीएंडसी हानि 63 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत, मणिकापुर सीरी कासगंज में 87 से 53 प्रतिशत और राल मथुरा में 83.62 से 47.82 प्रतिशत तक आ गई। आगरा, मथुरा, चित्रकूट, राठ और कोसी के टॉप-10 हाई लॉस फीडरों का घाटा 22.53 करोड़ से घटकर 17.89 करोड़ रुपये रह गया, जो करीब 21 प्रतिशत की कमी है। फीडर स्तर पर मॉनिटरिंग से बढ़ा वित्तीय अनुशासन अधिकारियों के अनुसार, यह सुधार योगी सरकार और यूपीपीसीएल अध्यक्ष के मार्गदर्शन और लगातार मॉनिटरिंग का परिणाम है। फीडर स्तर पर दैनिक समीक्षा, डेटा आधारित निगरानी और फील्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने से विद्युत विभाग में वित्तीय अनुशासन मजबूत हुआ है और राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।  

टाटा पिगमेंट्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात, सितंबर से बढ़ी सैलरी और नवंबर में मिलेगा 28 महीने का एरियर

जमशेदपुर  टाटा स्टील की अनुषंगी इकाई, 'टाटा पिगमेंट्स' में प्रबंधन और यूनियन नेतृत्व के बीच सात वर्षों (1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2031) के नए वेतन समझौते पर अंतिम मुहर लग गई है। कंपनी परिसर स्थित इंद्रधनुष भवन में आयोजित बैठक के दौरान 28 महीनों से लंबित चल रहे वेतन संशोधन पर निर्णायक सहमति बनी। इस नए समझौते का सीधा लाभ कंपनी के 95 कर्मचारियों को मिलेगा, जिससे उनके मासिक वेतन में न्यूनतम ₹8,600 से लेकर अधिकतम ₹15,000 तक का इजाफा होगा। सितंबर से मिलेगा बढ़ा बेसिक, नवंबर में एरियर कर्मचारियों को नए बेसिक का मौद्रिक लाभ सितंबर माह के वेतन से ही मिलना शुरू हो जाएगा, जबकि पिछले 28 महीनों (अप्रैल 2024 से अगस्त 2026) के लंबित एरियर का भुगतान प्रबंधन द्वारा नवंबर माह में सीधे उनके बैंक खातों में कर दिया जाएगा। पिगमेंट्स यूनियन नेतृत्व के अनुसार, कंपनी के इतिहास में पहली बार औसत रेट ऑफ इंक्रीमेंट (ग्रेड स्ट्रक्चर) में रिकॉर्ड 400 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। PLR स्कीम लॉन्च और NPS कैश भत्ता की सौगात   समझौते के तहत कर्मचारियों के प्रदर्शन, उत्पाद की गुणवत्ता और सेफ्टी रिकॉर्ड को बेहतर बनाए रखने के उद्देश्य से परफॉर्मेंस लिंक्ड रिवार्ड (PLR) स्कीम लॉन्च की गई है। इसके तहत पात्र कर्मचारियों को ₹550 का लाभ मिलेगा, जिसकी राशि में अप्रैल 2027 में और वृद्धि की जाएगी। इसके अलावा, कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय अतिरिक्त आर्थिक सुरक्षा देने हेतु नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत ₹500 का कैश भत्ता भी प्रदान किया जाएगा। समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले प्रतिनिधि प्रबंधन पक्ष: प्रबंध निदेशक सरोज कुमार बनर्जी, मुख्य कारखाना प्रबंधक मानित कुमार, प्लांट हेड केएम महाराज, सीएफओ दिनेश अग्रवाल, सीएचआरओ अंकिता केविन नटाल, हेड एचआर अतुल कुमार शर्मा, चीफ ऑफ मार्केटिंग एंड सेल्स विजेन पटनायक, हरेंद्र कुमार राय व एचआर ऑफिसर विवेक कुमार।   यूनियन पक्ष: अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह, उपाध्यक्ष कुलबीर सिंह व सत्यनारायण राव, सह सचिव कमलेश कुमार शर्मा व अनिल प्रसाद, कोषाध्यक्ष भुनेश्वर राम तथा पायो।