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40 किलो गेहूं गायब होने से भड़का मजदूर, सड़क पर धरने पर बैठ बस रुकवाई

 राजगढ़  मेहनत की कमाई से खरीदे 40 किलो गेहूं का कट्टा गायब हुआ तो एक मजदूर का गुस्सा सड़क पर उतर आया। राजस्थान रोडवेज की बस जैसे ही खिलचीपुर बस स्टैंड से रवाना होने लगी, मजदूर बस के सामने बैठ गया और बोला— “गेहूं नहीं मिला तो बस भी नहीं जाएगी।” करीब 25 मिनट तक बस स्टैंड पर हंगामे जैसी स्थिति बनी रही। यात्री परेशान होते रहे, भीड़ जमा हो गई और आखिरकार मामला 500 रुपये देकर शांत कराया गया। अकलेरा से लेकर आया था परिवार का राशन खिलचीपुर के कालाजी बड़ली निवासी बिरम मोगिया मजदूरी कर परिवार चलाता है। शुक्रवार शाम वह राजस्थान के अकलेरा से 40 किलो गेहूं का कट्टा लेकर कोटा-ब्यावरा रोडवेज बस में सवार हुआ था। उसने गेहूं का कट्टा बस की डिग्गी में रखवाया, लेकिन खिलचीपुर पहुंचने पर उसका सामान गायब मिला। बस कंडक्टर से शिकायत करने पर उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला और उसे खिलचीपुर बस स्टैंड पर उतार दिया गया, जिसके बाद बस आगे निकल गई। आरोप है कि किराया लेने के बावजूद कंडक्टर ने टिकट तक नहीं दिया। अगले दिन बस देखते ही अड़ गया मजदूर शनिवार सुबह वही बस फिर खिलचीपुर बस स्टैंड पहुंची तो बिरम पहले से वहां मौजूद था। बस जैसे ही रवाना होने लगी, वह अचानक बस के सामने बैठ गया। उसने साफ कह दिया कि “जब तक मेरा गेहूं नहीं मिलेगा, बस आगे नहीं जाएगी।” हालात ऐसे बने कि मजदूर ने बस के आगे लेटने तक की चेतावनी दे डाली। यात्रियों की भीड़, बस स्टैंड पर हंगामा मजदूर के विरोध के चलते करीब 25 मिनट तक बस खड़ी रही। बस में बैठे यात्री परेशान होते रहे, वहीं बाहर लोगों की भीड़ जुट गई। स्थिति बिगड़ती देख बस परिचालक ने मजदूर को 500 रुपये दिए। इसके बाद स्थानीय लोगों ने समझाइश देकर मामला शांत कराया और बस को रवाना किया गया।  

सर्वे से बाहर रह गए हितग्राहियों को राहत, PM जनमन योजना में जल्द मिलेगा आवास

गरियाबंद. उड़ीसा में निवासरत होने के कारण आवास सर्वे में शामिल नहीं हो पाए जिले के हितग्राहियों के सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर उठे सवालों पर जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने बताया कि वीडियो में दिख रहे हितग्राही विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार से हैं, लेकिन पूर्व में उनके उड़ीसा में निवासरत रहने के कारण उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वे में दर्ज नहीं हो सका था। अब पीएम जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (PM JANMAN) के तहत उनका पुनः सर्वे कर लिया गया है और उन्हें जल्द आवास स्वीकृत किया जाएगा। पीएम जनमन अभियान के तहत बड़े पैमाने पर आवास स्वीकृति बता दें कि जिले में विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए चलाए जा रहे पीएम जनमन अभियान के तहत अब तक 33 हजार से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 21 हजार आवासों का निर्माण कार्य भी पूर्ण हो चुका है। प्रशासन का कहना है कि जो पात्र हितग्राही पहले सर्वे में छूट गए थे, उनके लिए विशेष अनुमति लेकर पुनः सर्वे किया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना से वंचित न रहे। उड़ीसा में निवास के कारण सूची से बाहर था परिवार सीईओ ने स्पष्ट किया कि संबंधित परिवार वर्ष 2011 और 2018 के आवास सर्वे में शामिल नहीं था, क्योंकि उस समय वे छत्तीसगढ़ में निवासरत नहीं थे और उड़ीसा में रह रहे थे। वर्ष 2024 में किए गए नवीन सर्वे के दौरान भी वे गांव में उपस्थित नहीं थे। हाल ही में उनके छत्तीसगढ़ लौटने के बाद उनका सर्वे पीएम जनमन योजना के अंतर्गत पूरा कर लिया गया है और पात्रता के अनुसार आवास स्वीकृति की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। समाधान शिविर में तत्काल बने दस्तावेज प्रशासन ने यह भी बताया कि समाधान शिविर के दौरान हितग्राही को मौके पर ही आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। उनके राशन कार्ड और मनरेगा जॉब कार्ड तत्काल बनवाए गए। साथ ही आयुष्मान कार्ड के लिए भी प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि शासन की सभी योजनाओं का लाभ उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दिया जाएगा। पुनः सर्वे और सूची में शामिल करने की प्रक्रिया जारी जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि जिले में विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के लिए बसाहटों के आधार पर बार-बार सर्वे कराया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना से वंचित न रहे। जो परिवार पहले सूची में शामिल नहीं हो पाए थे, उन्हें अब पुनः सर्वे के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। सर्वे पूर्ण होने के बाद अंतिम सूची भारत सरकार को भेजी जाएगी और स्वीकृति मिलते ही आवास प्रदान किए जाएंगे। प्रशासन का दावा: हर पात्र परिवार तक पहुंचेगा लाभ जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पीएम जनमन योजना का उद्देश्य केवल आवास देना नहीं, बल्कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना है। इसलिए हर पात्र परिवार की पहचान कर उन्हें योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। प्रशासन ने कहा कि किसी भी योग्य हितग्राही को वंचित नहीं रहने दिया जाएगा और सभी को नियमानुसार लाभ प्रदान किया जाएगा।

बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव, कई IPS अधिकारियों की नई पोस्टिंग

 पटना  सम्राट चौधरी सरकार ने बिहार पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 16 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया है। गृह विभाग ने रविवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो एवं आधुनिकीकरण के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) सुधांशु कुमार को अब एडीजी विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नैयर हसनैन बीसैप भेजे गए वहीं, नैयर हसनैन खान को आर्थिक अपराध इकाई (EOU) से हटाकर बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बीसैप) की जिम्मेदारी दी गई है। विकास वैभव को मगध क्षेत्र (गया) का पुलिस महानिरीक्षक (IG) बनाया गया है। अधिसूचना के अनुसार, असैनिक सुरक्षा के एडीजी और 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी परेश सक्सेना को इसी विभाग में पुलिस महानिदेशक (DG) बनाया गया है। तकनीकी सेवाएं एवं संचार के एडीजी निर्मल कुमार आजाद को पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के एडीजी डॉ. अमित कुमार जैन अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के एडीजी होंगे। बजट, अपील एवं कल्याण के एडीजी डॉ. कमल किशोर सिंह को रेलवे में एडीजी बनाया गया है, जबकि एडीजी प्रोविजनिंग अजीताभ कुमार को राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो एवं आधुनिकीकरण की जिम्मेदारी दी गई है। एडीजी (प्रशिक्षण) संजय सिंह अब एडीजी (बजट, अपील एवं कल्याण) होंगे। चर्चित आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा को राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो से हटाकर एडीजी तकनीकी सेवाएं एवं संचार बनाया गया है। विकास वैभव बने मगध के आईजी एडीजी सुरक्षा अमृत राज को एडीजी साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई की जिम्मेदारी दी गई है। गृह विभाग (विशेष शाखा) के विशेष सचिव केएस अनुपम को अपराध अनुसंधान विभाग में एडीजी (कमजोर वर्ग) बनाया गया है। विकास वैभव को बिहार राज्य योजना परिषद के परामर्शी पद से हटाकर मगध क्षेत्र का पुलिस महानिरीक्षक नियुक्त किया गया है। रेलवे आईजी पी. कन्नन को आईजी प्रोविजनिंग बनाया गया है। वहीं, साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई के आईजी रंजीत कुमार मिश्र अब अपराध अनुसंधान विभाग के आईजी होंगे। बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के आईजी संजय कुमार को विशेष शाखा का पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया है।

जमीन विवाद में हैवान बनी बड़ी मां, दमोह में मासूम भतीजे की ले ली जान

दमोह/तेंदूखेड़ा. दमोह जिले के महुआखेड़ा गांव में 3 वर्षीय बच्चे अनिरुद्ध सिंह की हत्या का मामला सुलझ गया है। पुलिस ने बच्चे की सगी बड़ी मां राजकुमारी लोधी को गिरफ्तार किया है, जिसने आंगन के विवाद में अपने ही भतीजे को जहर देकर और गला दबाकर मौत के घाट उतार दिया। मृतक के दादा छोटे सिंह लोधी ने बताया कि विवाद की असली वजह घर का आंगन था। अनिरुद्ध के पिता तीन भाई हैं और सबके पास चार-चार एकड़ जमीन है, लेकिन साझा आंगन दादा के नाम था। राजकुमारी चाहती थी कि वह आंगन उसके नाम हो जाए ताकि वहां से कोई दूसरा न निकल सके। इसी रंजिश में 3 मई, शुक्रवार सुबह 9:30 बजे, जब घर के नल खुले थे और सब काम में व्यस्त थे, उसने अनिरुद्ध को अगवा कर लिया। हत्या का तरीका और शव छिपाने की कोशिश एसपी आनंद कलादगी के अनुसार, आरोपी महिला ने पहले बच्चे को जहर खिलाया, फिर गला दबाया और सिर पर पत्थर पटककर उसकी हत्या कर दी। उसने शव को बोरे में भरकर घर के अंदर ही भूसे के ढेर में छिपा दिया। शुक्रवार रात भर पुलिस गांव में सर्चिंग करती रही, इसलिए वह शव बाहर नहीं निकाल सकी। इस दौरान वह खुद भी परिजन के साथ बच्चे को खोजने का नाटक करती रही। कचरे के ढेर से मिला शव शनिवार सुबह जैसे ही पुलिस घर के पास से हटी, राजकुमारी ने शव को भूसे से निकालकर प्लास्टिक के टब में रखा और बाहर गोबर के ढेर पर फेंक दिया। उसने शव के ऊपर कचरा डाल दिया ताकि किसी को शक न हो। हालांकि, जब डॉग स्क्वायड की टीम गांव पहुंची, तो खोजी कुत्ता सीधे उसी ढेर पर जाकर रुक गया, जहां से पुलिस को बोरे में बंद शव मिला। रविवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन को सौंपा गया। पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल दो बेटियों के बाद हुए इकलौते बेटे की मौत से मां संगीता लोधी का बुरा हाल है। ग्रामीणों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर पुलिस समय रहते घर के अंदर तलाशी लेती, तो शायद बच्चा जीवित मिल जाता। इस पर एसपी ने कहा कि डीएसपी स्तर के अधिकारी से मामले की जांच कराई जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई होगी। फिलहाल पुलिस आरोपी महिला के पति भगवान सिंह से भी पूछताछ कर रही है।

इलेक्ट्रिशियन का काम सीख रोजगार की नई राह पर बढ़ाए कदम

रायपुर. पुरूषों के वर्चस्व वाले एक और क्षेत्र में पैर जमाने एवं अपनी पहचान स्थापित करने महिलाएं एक बार फिर तैयार हैं। महिलाओं के लिए अब तक अछूते रहे ‘इलेक्ट्रिशियन’ का काम सीख कर महिलाएं रोजगार की एक नई राह पर कदम बढ़ा रही हैं। ग्रामीण महिलाओं के लिए एक नए क्षेत्र में रोजगार के अवसर खोलने बिलासपुर के कोनी स्थित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आर-सेटी) में विभिन्न गांवों की 20 महिलाओं को इलेक्ट्रिशियन के काम का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये महिलाएं अब एक नए आकाश में उड़ान के लिए तैयार हैं।    आर-सेटी बिलासपुर में महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए एक नई पहल की गई है। अब ग्रामीण महिलाएं केवल सिलाई, बुनाई या पारंपरिक रोजगार तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उन क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रही हैं जिन्हें वर्षों से पुरुष प्रधान माना जाता रहा है। ‘बिहान’ (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) से जुड़ी बिलासपुर जिले की 20 महिलाएं इस बदलाव की मिसाल पेश कर रही हैं। एक नए व्यवसाय इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रही हैं।      बिलासपुर के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में इस साल पहली बार महिलाओं के लिए इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण शुरू किया गया। महिलाओं को तकनीकी कौशल प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए इसकी शुरूआत की गई है। यहां प्रशिक्षण ले चुकीं रतनपुर की बिहान दीदी आबिदा कहती हैं – “शुरू में लगा था कि बिजली का कार्य केवल पुरुष ही कर सकते हैं। लेकिन प्रशिक्षण के दौरान उनकी यह सोच पूरी तरह बदल गई। कुशल प्रशिक्षकों ने उन्हें वायरिंग, स्विच बोर्ड सुधार, घरेलू विद्युत उपकरणों की मरम्मत, सुरक्षा उपाय और तकनीकी जानकारी सरल तरीके से सिखाई।“  आबिदा बताती हैं कि अब वे आत्मविश्वास के साथ घर के बिजली संबंधी कार्य स्वयं कर लेती हैं और भविष्य में इसी कौशल के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने की योजना बना रही हैं। वे बताती हैं कि पहले छोटी-छोटी बिजली खराबियों के सुधार के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब वे न केवल अपने घर की समस्याएं हल कर पाएंगी, बल्कि आसपास के लोगों की मदद भी कर सकती हैं। आबिदा का मानना है कि यह प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खोल रहा है।         आर-सेटी से प्रशिक्षित मस्तूरी के डोमगांव की तिगमती डहरिया ने बताया कि उन्हें पहले से ही बिजली के कार्यों में रुचि थी और वे एक निजी कंपनी में इलेक्ट्रिशियन के रूप में कार्य कर रही थीं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उनके तकनीकी ज्ञान और आत्मविश्वास में और अधिक वृद्धि हुई है। तिगमती बताती हैं कि इस प्रशिक्षण ने उन्हें आधुनिक तकनीकों और सुरक्षा मानकों की बेहतर समझ दी है। जब उनसे जोखिम भरे कार्य के बारे में पूछा गया तो उन्होंने आत्मविश्वास से कहा कि यदि सावधानी, सही तकनीक और सुरक्षा नियमों का पालन किया जाए तो यह कार्य महिलाओं के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है।  बिलासपुर आर-सेटी में प्रशिक्षित विमला का कहना है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, आवश्यकता केवल अवसर और सही प्रशिक्षण की होती है। यहां से प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं ने बताया कि प्रशिक्षण अवधि के दौरान उनके रहने और भोजन की बेहतर व्यवस्था की गई थी। साथ ही अनुभवी एवं कुशल प्रशिक्षकों द्वारा व्यवहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें कार्य के हर पहलू की जानकारी दी गई। महिलाओं ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें केवल तकनीकी जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि आत्मविश्वास, कार्य अनुशासन और स्वरोजगार के अवसरों के बारे में भी मार्गदर्शन दिया गया। इससे उनमें आत्मनिर्भर बनने की नई ऊर्जा और विश्वास पैदा हुआ है।          केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा एसबीआई के सहयोग से आर-सेटी में ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने विभिन्न निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। हर वर्ष सिलाई, ब्यूटी-पार्लर, कम्प्यूटर, अगरबत्ती निर्माण जैसे पारंपरिक कोर्स चलाए जाते रहे हैं। लेकिन इस वर्ष पहली बार महिलाओं के लिए इलेक्ट्रिशियन प्रशिक्षण शुरू किया गया, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में नई सोच और सकारात्मक बदलाव की शुरुआत की है। यह पहल केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर समाज में उनकी भागीदारी और सम्मान बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

बिहार के व्यापारी बंगाल से लीची खरीदकर महानगरों की मांग पूरी करने को मजबूर

मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर के व्यापारी अपना कारोबार बचाने के लिए इस बार पश्चिम बंगाल से लीची खरीद रहे हैं। जिले में मौसम की मार और स्टिंक बग कीट के प्रकोप से बगानों में 30 फीसदी लीची भी नहीं बची है। किसान अपने बगान को देख हताश हैं तो जिले के दर्जनों बड़े व्यापारी बंगाल का रूख कर रहे हैं। दरअसल, यहां के किसानों से खरीदे गए लीची के बगान की हालत देख व्यापारी झांकने आना भी नहीं चाहते। यही कारण है कि जिले के कांटी, मीनापुर, बोचहां आदि प्रखंडों के दर्जनों व्यापारी बंगाल जाकर किसानों का लीची का बाग खरीद रहे हैं। बंगाल की लीची से पूरा करेंगे महानगरों का ऑर्डर कांटी के लीची व्यापारी बबलू शाही ने बताया कि मुजफ्फरपुर से हर साल 50 टन से अधिक लीची बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई, लखनऊ समेत देश के विभिन्न शहरों में भेजते हैं। इस बार भी मंजर देख हमलोग उत्साहित थे। आज 30 फीसदी लीची भी नहीं दिख रही है। प. बंगाल में 15 मई से लीची की तुड़ाई शुरू होने लगती है, इसलिए हमारे साथ दर्जनों व्यापारी बंगाल आए हैं। इस बार बंगाल से ही लीची खरीद महानगरों की मांग पूरी करेंगे। मुशहरी के व्यापारी संतू महतो ने बताया कि 12 एकड़ लीची का बाग खरीदा था। आज किसानों को पैसे देने लायक भी लीची नहीं है। उद्यान रत्न किसान भोलानाथ झा ने कहा कि लीची की हालत देख बाग में जाना छोड़ दिए हैं। कमजोर फसल से दो लाख मजदूरों के रोजगार पर संकट बिहार लीची एसोसिएशन के अध्यक्ष बच्चा प्रसाद सिंह ने कहा कि मुजफ्फरपुर जिले में 15 हजार हेक्टेयर में लीची के बाग हैं। इससे हर साल सीजन में दो लाख से अधिक मजदूरों को रोजगार मिलता था। हर साल करीब 125 हजार टन लीची का उत्पादन होता है। फसल बर्बाद होने पर भी 70-80 हजार टन लीची मिल जाती थी। इस बार 25 से 30 हजार टन लीची उत्पादन भी मुश्किल है। बताया कि जिले में छोटे-बड़े मिलाकर तीन हजार से अधिक बगान हैं। एक बगान में 25 से 50 मजदूरों को एक माह तक रोजगार मिलता था। वहीं, लीची प्रसोसेसिंग यूनिट के संचालक आलोक केडिया ने बताया कि लीची के सीजन में ग्रेड बी लीची का पल्प तैयार होता है। इसमें लीची की छिलाई में मजदूरों को काम मिलता है। इस बार फसल कमजोर होने से मजदूरों के रोजगार पर असर पड़ेगा। इसके आलवा ट्रांसपोटिंग तुड़ाई, गुच्छा बनाने में मजदूर को काम मिलता है।

यूडी टैक्स बकाया पर नगर परिषद की सख्ती, गर्ग पैलेस सीज

करौली शादी के सीजन में करौली के मैरिज होम संचालकों के सामने परेशानी पैदा हो गई है. मैरिज होम सील होने की कार्रवाई शुरू होने के साथ ही हड़कंप मच गया है. नगर परिषद ने नगरीय विकास शुल्क (यूडी टैक्स) की बकाया राशि को लेकर सख्त कार्रवाई की है. हिंडौन दरवाजा स्थित गर्ग पैलेस उर्फ आशा पैलेस को सीज कर दिया गया है. सिर्फ यही एक मैरिज होम नहीं है, बल्कि 14 मैरिज गार्डन संचालकों को पहले भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं. 11 लाख रुपए बकाया होने के चलते एक्शन रविवार को कार्यवाहक नगर परिषद आयुक्त प्रेमराज मीणा समेत परिषद की टीम हिंडौन दरवाजा स्थित गर्ग पैलेस पहुंची. टीम ने मैरिज हॉल के मुख्य द्वार पर सील लगाते हुए बकाया राशि जल्द जमा कराने के निर्देश दिए. मैरिज हॉल पर करीब 11 लाख रुपये से अधिक का विकास शुल्क बकाया था. कार्रवाई के बाद शहर के अन्य मैरिज गार्डन संचालक भी हरकत में आ गए हैं. निगम की चेतावनी के बाद भी माने संचालक पिछले माह शहर के बड़े मैरिज गार्डन और पैलेस संचालकों को करीब 1.25 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया है. इसके भुगताने के लिए निगम ने नोटिस जारी करते हुए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. कई संचालकों ने बकाया राशि जमा करवाई, जबकि कुछ ने अतिरिक्त समय मांगा. लेकिन गर्ग पैलेस संचालक की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नगर निकाय अधिनियम के तहत सीज की कार्रवाई की गई. 10-10 लाख से भी ज्यादा का बकाया नगर परिषद द्वारा जारी नोटिस में कई बड़े मैरिज गार्डनों पर लाखों रुपये का यूडी टैक्स बकाया बताया गया था. इनमें भंवर विलास पैलेस पर 19.10 लाख, बाबूभाई पैराडाइज पर 14.07 लाख, आशीर्वाद मैरिज होम पर 11.87 लाख, लक्ष्मी मैरिज गार्डन पर 11.60 लाख, गर्ग पैलेस पर 11.01 लाख और करौली इन मैरिज गार्डन पर 10.76 लाख रुपये बकाया शामिल हैं. इसके अलावा वृन्दावन गार्डन, जिंदल मैरिज गार्डन, गोवर्धन पैलेस, लाडली पैलेस, द्वारिकाधीश, शिवशक्ति, गणेश बैंक्वेट हॉल और शिवलॉज को भी नोटिस जारी किए गए हैं.

IPL मुकाबले से पहले Preity Zinta ने टेका माथा, Golden Temple में मांगी PBKS की जीत की दुआ

अमृतसर. बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा आज श्री हरमंदिर साहिब  में माथा टेकने पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने गुरु घर में नतमस्तक होकर सरबत के भले की अरदास की और वाहेगुरु का शुक्राना अदा किया। प्रीटी जिंटा को देखने के लिए श्रद्धालुओं में भी काफी उत्साह देखने को मिला। माथा टेकने के बाद प्रीटी जिंटा ने लंगर हॉल में सेवा भी निभाई। उन्होंने संगत को लंगर वितरित किया और सेवा भाव से गुरु घर के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।  मीडिया से बातचीत करते हुए प्रीटी जिंटा ने कहा, “बस बाबा जी का बुलावा आया था, हम आ गए।” उन्होंने बताया कि 11 तारीख को टीम का अहम मैच है और वह पंजाब की जीत के लिए अरदास करने पहुंची हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि वाहेगुरु की कृपा से टीम शानदार प्रदर्शन करेगी और सभी मैच जीतने की कोशिश करेगी। इस मौके पर उन्होंने पंजाब टीम के कप्तान Shreyas Iyer की भी तारीफ की। प्रीटी जिंटा ने कहा कि पंजाब के लोग उन्हें प्यार से “सरपंच” कहकर बुलाते हैं, जो टीम के लिए गर्व की बात है। उन्होंने पंजाब के युवाओं और फैंस द्वारा मिल रहे प्यार और समर्थन के लिए सभी का धन्यवाद किया।

छत्तीसगढ़ का बढ़ाया मान, सुष्मिता सिंह ने UPSC में 32वीं रैंक के साथ पाई भारतीय वन सेवा में जगह

राजनांदगांव. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा शुक्रवार शाम भारतीय वन सेवा परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम जारी किया गया, जिसमें 148 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। प्रतिष्ठित सूची में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में पली-बढ़ी सुष्मिता सिंह ने 32वीं रैंक हासिल कर भारतीय वन सेवा (IFS) में चयन प्राप्त किया है। उनकी इस सफलता से प्रदेश में हर्ष का माहौल है। राजनांदगांव से लेकर IFS तक का सफर सुष्मिता सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजनांदगांव के जेएमजे नवजीवन स्कूल और रॉयल किड्स स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने डीएवी पब्लिक स्कूल सरकंडा, जैन इंटरनेशनल स्कूल बिलासपुर और डीपीएस भिलाई से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। आगे चलकर उन्होंने यूपीएस देहरादून से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की। नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी, पांचवें प्रयास में मिली सफलता बीटेक के बाद सुष्मिता सिंह ने नौकरी भी की, लेकिन UPSC की तैयारी में कठिनाई आने पर उन्होंने नौकरी से इस्तीफा देकर पूरी तरह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया। लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में यह सफलता हासिल की। पिता भी रह चुके हैं IFS अधिकारी सुष्मिता सिंह का परिवार भी वन सेवा से जुड़ा रहा है। उनके पिता भारतीय वन सेवा के अधिकारी रह चुके हैं और छत्तीसगढ़ में लंबे समय तक एसडीओ, डीएफओ, वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में वे सेवानिवृत्त होकर भिलाई में निवासरत हैं। परिवार और मेहनत को दिया सफलता का श्रेय सुष्मिता सिंह ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां की प्रेरणा, पिता के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग को दिया है। उन्होंने कहा कि निरंतर मेहनत, धैर्य और दृढ़ निश्चय ही सफलता की असली कुंजी है। उनकी इस उपलब्धि से युवाओं में नई प्रेरणा का संचार हुआ है।

कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को दायित्वों का समय पूर्व निर्वहन करने के कलेक्टर ने दिए निर्देश

उमरिया  हजरत नौगजा शाहदाता रहमतुल्ला अलैह चंदिया में रात्रिकालीन उर्स का आयोजन 15, 16 एवं 17 मई 2026 को किया जाना है आयोजित रात्रिकालीन हजरत नौगजा शाहदाता रहमतुल्ला अलैह चंदिया उर्स की पूर्व तैयारी बैठक कलेक्टर राखी सहाय की अध्यक्षता में नगर परिषद चंदिया में संपन्न हुई। बैठक में यातायात व्यवस्था , पार्किग व्यवस्था , स्वच्छ पेयजल एवं अग्निशमन व्यवस्था, चिकित्सा व्यवस्था,बिजली व्यवस्था, मार्ग का समतलीकरण, नौगजा बाबा मजार मे श्रध्दालुओ के आवागमन एवं दर्शन व्यवस्था, बैरीकेटिंग व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था आदि पर विस्तार से चर्चा की गई।   यातायात की समीक्षा के दौरान बताया गया कि पार्किग व्यवस्था के लिए 6 स्थानों को चिन्हित किया गया है, जहां पर समुचित रूप से वाहनों की पार्किग की जा सकेगी, ताकि उर्स तक आने वाले लोगो को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नही करना पडे ।  कलेक्टर ने बाजार व्यवस्था  पर कहा कि दुकानों कि इस तरह से लगवाया जाए, जिससे आवागमन में परेशानी का सामना नही करना पडे । उर्स मेला स्थल पर मजार तक पहुंचने वाले लोगो के लिए प्रवेश एवं निकासी अलग अलग बनाएं जाए। उर्स मेला स्थल पर जहां पर कव्वाली का कार्यक्रम आयोजित होना है वहां मंच के सामने पीडब्ल्यूडी विभाग को बैरीकेटिंग उपलब्ध कराने के निर्देश कलेक्टर व्दारा दिए गए ।   सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने बताया कि 4 वॉच टॉवर के माध्यम से पुलिस कर्मियों व्दारा उर्स मेला स्थल पर नजर जाएगी, ताकि लोगो को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नही करना पडे।   कलेक्टर राखी सहाय ने कहा कि मेला स्थल पर जो झूले लगने है, उन्हे परमीशन देने से पहले झूले कि स्थिति का निरीक्षण करें जिससे किसी भी प्रकार की अनहोनी घटित नही हो सके । आपने कहा कि पीडब्ल्यूडी एवं एमपीईबी की एनओसी के उपरांत ही झूले लगने की परमीशन जारी की जाए । उन्होने कहा कि सर्विलेंस कैमरा के माध्यम से मानीटरिंग की जाए ।  उन्होने कहा कि पार्किग स्थल, मजार के पास तथा मंच के चारो तरफ कैमरे लगाए जाए। भीड़ के दौरान चोरी की घटना को रोकने के लिए वालेटिंयर पुलिस के साथ रहे।   कलेक्टर ने कहा कि उर्स मेला स्थल पर एंबुलेंस की व्यवस्था  कि जाए तथा उसमें डॉक्टर की ड्युटी लगाई जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर लोगो को त्वरित स्वास्थ्य  लाभ उपलब्ध कराया जा सके । उन्होने कथली नदी के किनारे बैरीकेटिंग की व्यवस्था करने के निर्देश पीडब्ल्यूडी विभाग को दिए । उन्होने कहा कि  मेले में शुध्द पेयजल की व्यवस्था की जाए । इस दौरान बताया गया कि मेला के दौरान आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए तीन फायर बिग्रेड की व्यवस्था की गई है।  बैठक उपरांत कलेक्टर राखी सहाय ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण करते हुए पार्किग स्थल, मंच व्यवस्था, प्रवेश एवं निकासी व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था का अवलोकन किया तथा अधिकारियों से कहा है कि जिन अधिकारियों को जो दायित्वि सौपे गये है , उसका निर्वहन समय पूर्व करना सुनिश्चित करें ताकि उर्स के दौरान आम जनों को किसी भी प्रकार की परेशानियों का सामना नही करना पड़े ।   इस अवसर पर अतिरिक्त  पुलिस अधीक्षक सीताराम सत्या, एसडीएम बांधवगढ अंबिकेश प्रताप सिंह, मुख्य नगर पालिका अधिकारी किशन सिंह, कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य  यांत्रिकीय, यातायात प्रभारी, उर्स कमेटी के अध्यक्ष सहित कार्यक्रम व्यवस्था से जुडे अन्य, कर्मचारी उपस्थित रहे ।