samacharsecretary.com

रांची समेत कई जिलों में उपभोक्ता फोरम खाली, ऑनलाइन सुनवाई बनी सहारा

 रांची  झारखंड में अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे उपभोक्ताओं को न्याय मिलने में लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। वर्तमान में झारखंड उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में करीब छह हजार मामले लंबित हैं। विडंबना यह है कि पूरे राज्य के मामलों के निष्पादन का जिम्मा केवल अध्यक्ष बसंत कुमार गोस्वामी के कंधों पर है। रांची, देवघर, बोकारो और धनबाद जैसे महत्वपूर्ण जिलों के फोरम में सदस्यों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। क्यों अटकी हैं नियुक्तियां? जानकारी के अनुसार, रांची फोरम में जनवरी 2025 से ही एक भी अधिकारी मौजूद नहीं है। हालांकि इन पदों पर नियुक्ति राज्य सरकार को करनी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नया कानून बनाने का निर्देश दिया है। ऑनलाइन सुनवाई बना सहारा कोर्ट के आदेशानुसार, नए नियमों के गठन के बाद ही नियुक्तियां संभव हो पाएंगी, जिसके कारण वर्तमान में सरकार के हाथ बंधे हुए हैं। पदों के अभाव और बढ़ते बोझ के बीच अध्यक्ष बसंत कुमार गोस्वामी ऑनलाइन माध्यम से मामलों का निपटारा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आयोग के पास सबसे अधिक मामले गाड़ी इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस और बैंक लोन से जुड़े आते हैं। उपभोक्ताओं को त्वरित न्याय देने के लिए ऑनलाइन सुनवाई को प्राथमिकता दी जा रही है। घर बैठे ऐसे दर्ज करें शिकायत उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए आयोग ने हर जिले को ऑनलाइन प्रणाली से जोड़ दिया है। अब शिकायतकर्ता को कार्यालय के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। शिकायत दर्ज करने के लिए तीन प्रमुख विकल्प उपलब्ध हैं:         CP Grams (सीओपी ग्राम): सबसे पहले यहां शिकायत दर्ज करनी चाहिए।         हेल्पलाइन नंबर 1915: यदि पहले स्तर पर समाधान न मिले तो इस नंबर पर संपर्क करें।         ई-जागृति पोर्टल: उपभोक्ता सीधे इस पोर्टल के माध्यम से भी अपनी कानूनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। हालिया सफलताएं: उपभोक्ताओं को मिला हक संसाधनों की कमी के बावजूद आयोग ने इस वर्ष कई महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं:         हजरत अली मामला: दुर्घटना के एक मामले में बीमा कंपनी की आनाकानी के बाद आयोग ने पीड़ित को 2 लाख 96 हजार रुपये का भुगतान सुनिश्चित कराया।         महावीर महतो केस: उपभोक्ता को 9 लाख रुपये का हर्जाना दिलवाया गया।         मोहन कुमार केस: ऑटो चोरी होने के बाद बीमा राशि नहीं मिल रही थी, आयोग ने सुनवाई कर 3 लाख रुपये से अधिक की राशि दिलवाई।     सीमित साधनों में काम करना पड़ रहा है। रांची जिला उपभोक्ता फोरम में कोई अधिकारी नहीं है। हमारे यहां भी सदस्य नहीं है। अकेले ही काम करना पड़ रहा है। इसलिए, हमने आनलाइन सेवा शुरू की और लोग इसका लाभ उठा रहे हैं -बसंत कुमार गोस्वामी, अध्यक्ष, झारखंड उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग  

रांची प्रशासन का बड़ा फैसला, बोटिंग के दौरान लाइफ जैकेट अनिवार्य और सुरक्षा जांच सख्त

 रांची  मध्यप्रदेश के जबलपुर में हुए क्रूज हादसे (jabalpur cruise accident) के बाद झारखंड में प्रशासन सतर्क हो गया है। रांची जिले के सभी डैम एवं जलाशयों में बोटिंग के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य बोटिंग गतिविधियों के दौरान होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को रोकना और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। बैठक में जिला स्तर पर वाटर ट्रांसपोर्ट एक्शन ग्रुप गठित करने का निर्देश दिया गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। सभी पर्यटकों और यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य किया गया है। बिना लाइफ जैकेट के बोटिंग कराने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, मौसम की स्थिति पर विशेष नजर रखने और खराब मौसम में बोटिंग पूरी तरह बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। सभी नौकाओं के लिए वैध फिटनेस प्रमाण-पत्र अनिवार्य किया गया है। बिना फिटनेस सर्टिफिकेट वाली नावों को संचालन की अनुमति नहीं मिलेगी। साथ ही, सभी बोटिंग स्थलों पर हेल्पलाइन नंबर के साथ सूचना पट्ट लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन ने बोटिंग स्थलों पर नशापान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, बोट को निर्धारित गति सीमा में चलाने और किसी भी प्रकार की स्टंटबाजी या जोखिम भरे संचालन पर सख्त रोक लगाई गई है। मानकों का होगा कड़ाई से पालन जिला दंडाधिकारी भजन्त्री ने कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। प्रशासन ने खासकर बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों से अपील की है कि वे बोटिंग के दौरान बच्चों को सही तरीके से लाइफ जैकेट पहनाएं और उसकी बेल्ट अच्छी तरह कसकर बांधें। बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अभिभावकों की होगी। बैठक में पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) गौरव गोस्वामी, अनुमंडल पदाधिकारी कुमार रजत, जिला परिवहन पदाधिकारी अखिलेश कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज, जिला खेल पदाधिकारी शिवेंद्र सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बैठक में लिए गए निर्णयों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि बोटिंग गतिविधियां सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो सकें।

एग्जाम फ्रॉड पर बड़ी कार्रवाई: NEET सॉल्वर गिरोह पकड़ा, MBBS छात्र सहित 3 अरेस्ट

नालंदा. नीट परीक्षा में सॉल्वर बैठाने वाले एक अंतरजिला गिरोह का नालंदा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने एमबीबीएस के एक छात्र सहित तीन जालसाजों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई नीट परीक्षा के मद्देनजर चलाए जा रहे विशेष ‘रोको-टोको’ एवं वाहन चेकिंग अभियान के दौरान की गई। राजगीर डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि 2 मई की रात करीब 1:45 बजे पावापुरी मोड़ के पास वाहन चेकिंग के दौरान दो संदिग्ध गाड़ियां पुलिस को देखकर भागने लगीं। घेराबंदी कर दोनों वाहनों को पकड़ा गया। स्कॉर्पियो चला रहे व्यक्ति की पहचान मुजफ्फरपुर निवासी अवधेश कुमार (31) के रूप में हुई, जो विम्स कॉलेज में एमबीबीएस द्वितीय सत्र का छात्र है। कैश और डिजिटल सबूत बरामद तलाशी के दौरान स्कॉर्पियो के डैशबोर्ड के नीचे से 2 लाख 95 हजार रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा तीन मोबाइल फोन और दो लग्जरी गाड़ियां (स्कॉर्पियो व ब्रेजा) भी जब्त की गईं। शुरू में आरोपियों ने पैसों के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दिया, लेकिन मोबाइल जांच में बड़ा खुलासा हुआ। फोन से नीट, एईओ और बीएसएनएल समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, अभ्यर्थियों के साथ चैट और लेन-देन के ठोस सबूत मिले। गिरफ्तार आरोपित और मास्टरमाइंड गिरफ्तार आरोपियों में मुजफ्फरपुर के अवधेश कुमार, मोतिहारी के अमन कुमार सिंह और मुजफ्फरपुर के ही पंकज कुमार साह शामिल हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का मास्टरमाइंड उज्जवल उर्फ राजा बाबू है, जो पावापुरी मेडिकल कॉलेज के 2022 बैच का छात्र है। डीएसपी के अनुसार उज्जवल पर पहले भी सीबीआई के केस दर्ज हैं और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। बड़ी साजिश नाकाम पुलिस की मुस्तैदी के कारण सॉल्वर परीक्षा केंद्रों तक नहीं पहुंच सके, जिससे एक बड़ी साजिश विफल हो गई। अब पुलिस उन अभ्यर्थियों और अभिभावकों की भी जांच कर रही है, जिनके एडमिट कार्ड और कॉल डिटेल्स आरोपियों के मोबाइल से मिले हैं। जांच तेज, केस दर्ज इस मामले में पावापुरी थाना में कांड दर्ज कर लिया गया है और अनुसंधान तेज कर दिया गया है। पूरी कार्रवाई राजगीर एसडीपीओ सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में गिरियक, राजगीर, पावापुरी और कतरीसराय थानों की संयुक्त टीम ने की। पहले भी जुड़ चुका है नालंदा का नाम गौरतलब है कि नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले में भी नालंदा के संजीव मुखिया का नाम सामने आ चुका है। वह कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों में आरोपी रहा और जेल भी जा चुका है।

निर्माणाधीन पंचायत भवन में भोजन के साथ साथ मुख्यमंत्री साय लेते रहे योजनाओं का फीडबैक

रायपुर. सुशासन तिहार के अंतर्गत आज कबीरधाम जिले के ग्राम लोखान में एक बेहद आत्मीय और संवेदनशील दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय निर्माणाधीन पंचायत भवन के औचक निरीक्षण के दौरान सीधे श्रमिकों के बीच पहुंच गए। निरीक्षण के दौरान उनका यह दौरा केवल कार्यों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आमजन के साथ उनके सहज जुड़ाव और संवेदनशील नेतृत्व का जीवंत उदाहरण बन गया। मुख्यमंत्री के अचानक पहुंचने से वहां कार्यरत श्रमिकों में उत्साह का माहौल बन गया और सभी ने उनका आत्मीय स्वागत किया। निरीक्षण के दौरान वहां काम कर रही महिला श्रमिकों ने मुख्यमंत्री को बड़े स्नेह और आग्रह के साथ दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया। इस सादगी भरे निमंत्रण को मुख्यमंत्री ने तुरंत स्वीकार किया और मुस्कुराते हुए उनसे पूछा कि वे खाने में क्या लेकर आई हैं। महिलाओं ने बताया कि वे अपने घर से पारंपरिक भोजन- बोरे बासी, पान पुरवा रोटी, चना भाजी, चरोटा भाजी, मुनगा बड़ी और आमा (आम) की चटनी लेकर आई हैं। यह सुनकर मुख्यमंत्री ने उसी सहजता से उनके साथ भोजन करने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री साय श्रमिकों के बीच जमीन पर बैठ गए और उनके टिफिन से ही भोजन ग्रहण किया। बोरे बासी और आमा चटनी का स्वाद लेते हुए उन्होंने कहा कि यह भोजन उनकी अपनी जीवनशैली और संस्कृति से जुड़ा हुआ है। भोजन के दौरान श्रमिक बहनों से बात करते हुए मुख्यमंत्री साय ने शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत को भी समझने का प्रयास किया। उन्होंने श्रमिक महिलाओं से महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी ली। महिलाओं ने भी खुले मन से अपने अनुभव साझा किए, जिससे मुख्यमंत्री को योजनाओं की वास्तविक स्थिति का सीधा फीडबैक मिला। मुख्यमंत्री ने जब गांव की प्रमुख समस्याओं के बारे में पूछा, तो महिलाओं ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण पेयजल की समस्या लगातार बनी रहती है। बोरवेल और हैंडपंप लंबे समय तक कारगर नहीं रह पाते, जिससे गर्मी के दिनों में पानी की दिक्कत और अधिक बढ़ जाती है। इस समस्या को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया और तत्काल समाधान की दिशा में पहल करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने मौके पर ही कलेक्टर से पेयजल व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली। कलेक्टर ने बताया कि क्षेत्र के 26 गांवों के लिए एक विशेष पेयजल योजना तैयार की गई है, जिसके अंतर्गत दूरस्थ जल स्रोतों से पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की योजना है। यह योजना तकनीकी रूप से तैयार है और इसे जल्द ही क्रियान्वित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश देते हुए कहा कि इस योजना को यथाशीघ्र स्वीकृति प्रदान कर धरातल पर कार्य शुरू किया जाए, ताकि ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि शासन की योजनाएं समय पर और प्रभावी रूप से आमजन तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि हमारी सुशासन सरकार जनसमस्याओं के समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

पढ़ाई पहले! जनगणना में स्कूल कंप्यूटर के इस्तेमाल पर शिक्षा विभाग का प्रतिबंध

चंडीगढ़. पंजाब में चल रहे जनगणना कार्य के बीच स्कूलों के कंप्यूटर और लैब के उपयोग को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। ऑफिस डायरेक्टर जनरल स्कूल शिक्षा पंजाब की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी विभाग को सरकारी स्कूलों के कंप्यूटर या कंप्यूटर लैब का इस्तेमाल गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए नहीं करने दिया जाएगा। जारी पत्र के अनुसार, इन दिनों जनगणना का कार्य जारी है, जिसके चलते विभिन्न विभागों की ओर से स्कूलों की कंप्यूटर लैब में काम करने और कंप्यूटर लेने की मांग की जा रही थी। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने कहा है कि इससे विद्यार्थियों की कंप्यूटर शिक्षा प्रभावित हो रही है और हार्डवेयर को भी नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। स्कूलों में चल रही दाखिले की प्रक्रिया विभाग ने यह भी उल्लेख किया है कि इस समय स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में यदि स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध नहीं होंगे, तो प्रवेश प्रक्रिया पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की कंप्यूटर शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए किसी भी विभाग को जनगणना या अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए स्कूलों से कंप्यूटर ले जाने या कंप्यूटर लैब के उपयोग की अनुमति न दी जाए। पढ़ाई में बाधा न डालने के आदेश यह आदेश सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी किया गया है। साथ ही, इस संबंध में सभी संबंधित अधिकारियों को सूचना देकर निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने को कहा गया है। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सभी स्कूल प्रमुखों और संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई और प्रवेश प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए।

अचानक गांव पहुंचे CM साय, हेलिकॉप्टर लैंड कर पेड़ तले लगाई चौपाल

कवर्धा. प्रदेशभर में आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सुशासन तिहार कार्यक्रम जारी है. अभियान के तहत मुख्यमंत्री साय लोगों के बीच पहुंचकर योजनाओं का फीडबैक ले रहे हैं. साथ ही फरियादों की समस्याओं को सुन रहे हैं. आज सीएम का हेलिकॉप्टर अचानक कवर्धा जिले के पंडरिया तहसील के कुई-कुकदूर में उतरा. सीएम साय के आगमन पर स्थानीय विधायक भावना बोहरा समेत भाजपा नेताओं ने गमछा भेंटकर स्वागत किया. भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं. कलेक्टर, एसपी, डीएफओ सहित आला अधिकारी मौजूद है.  पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर ग्रामीणों की सुनएंगे समस्याएं मुख्यमंत्री सबसे पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के एक हितग्राही के घर पहुंचकर उनसे सीधा संवाद करेंगे और योजनाओं की जमीनी स्थिति का फीडबैक लेंगे. इसके बाद वे कमराखोल गांव में आम के पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधे चर्चा करेंगे. इस दौरान सीएम ग्रामीणों की समस्याएं सुनेंगे और प्रदेश व केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देंगे. साथ ही अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा सकते हैं कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे. 1 मई से 10 जून तक सुशासन तिहार  सुशासन तिहार के तहत 1 मई से 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में जन समस्या निवारण शिविर आयोजित किए जाएंगे. ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह और शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर के आधार पर शिविर लगाए जाएंगे. इन शिविरों में न केवल जन समस्याओं का समाधान किया जाएगा, बल्कि शासन की योजनाओं के प्रति जन-जागरूकता भी बढ़ाई जाएगी. पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही योजनाओं का लाभ प्रदान करने की व्यवस्था की जाएगी. शिविरों में प्राप्त आवेदनों का अधिकतम एक माह के भीतर निराकरण सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक आवेदक को उसके आवेदन की स्थिति से अवगत कराने के भी निर्देश दिए गए हैं.

कनाडा से खालिस्तानी हिंसा को मिलती है फंडिंग, CSIS रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बताया

लुधियाना कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) की ताजा रिपोर्ट में खालिस्तान समर्थकों को कनाडा की नेशनल सिक्योरिटी को खतरा बताया है। यही नहीं रिपोर्ट में यह भी बात सामने आई कि खालिस्तान समर्थक कनाडा में फंड जुटाकर भारत में हिंसा फैलाते हैं। CSIS ने एक मई को एक पब्लिक रिपोर्ट-2025 जारी की, जिसमें स्पष्ट तौर पर लिखा है कि खालिस्तान समर्थक कनाडाई नागरिकों से जुड़कर यहां की संस्थाओं का फायदा उठाते हैं। वो कनाडा में सिख संगठनों व आम लोगों से फंड जुटाते हैं। लोग उन्हें धार्मिक कार्यों के लिए फंड देते हैं, लेकिन वो उसका इस्तेमाल बाद में हिंसक गतिविधियों में करते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा है कि कनाडा में खालिस्तान समर्थकों का एक छोटा सा ग्रुप है। CSIS ने 49 पेजों की रिपोर्ट जारी की है, जिसके पेज नंबर पर 25 पर कनाडा बेस्ड खालिस्तान एक्सट्रिमिस्ट (CBKE) यानि कनाडा में रहने वाले खालिस्तान समर्थकों की गतिविधियों के बारे में लिखा है। CSIS की रिपोर्ट में खालिस्तान समर्थकों के लिए क्या-क्या लिखा, जानिए.. एयर इंडिया हमले का जिक्र: रिपोर्ट में 1985 के एयर इंडिया फ्लाइट-182 बम विस्फोट की 40वीं वर्षगांठ का खास उल्लेख है। CSIS ने इसे कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला बताया, जिसमें 329 लोग मारे गए थे। हमले के संदिग्ध कनाडा-आधारित खालिस्तान समर्थक चरमपंथी संगठनों से जुड़े थे। खालिस्तान समर्थक संगठनों पर सख्त रुख: रिपोर्ट में पॉलिटिकली मोटिवेटेड वायलेंट एक्सट्रीमिज्म (PMVE) की विस्तार से चर्चा की गई है। CSIS ने लिखा है कि 2025 में कनाडा में कनाडा बेस्ड खालिस्तान एक्सट्रिमिस्ट (CBKE) से जुड़ा कोई हमला नहीं हुआ, लेकिन CBKE की हिंसक गतिविधियां लगातार कनाडा की नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा बनी हैं। फंडिंग और भारत में हिंसा का खुलासा: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि कुछ CBKE कनाडाई नागरिकों से जुड़कर कनाडा की संस्थाओं का फायदा उठाते हैं और अनजान समुदाय के लोगों से फंड इकट्ठा करते हैं। यह फंड बाद में भारत में हिंसक गतिविधियों में इस्तेमाल होता है। CSIS ने स्पष्ट किया कि केवल एक छोटा समूह कनाडा को आधार बनाकर मुख्य रूप से भारत में हिंसा को बढ़ावा देने, फंड जुटाने और हमलों की योजना बनाने का काम करता है। इन्हीं लोगों को खालिस्तानी एक्सट्रिमिस्ट माना जाता है। कनाडा में खालिस्तान की मांग पर आपत्ति नहीं: रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा में खालिस्तान राज्य की मांग के लिए शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अभियान चलाना चरमपंथ नहीं है। CSIS केवल हिंसा और फंडिंग वाले हिस्से को खतरा मानती है। कनाड़ा में 2025 में 12 नए आतंकी संगठन: CSIS की मदद से कनाडा सरकार ने इस साल 12 नए संगठनों को आतंकवादी घोषित किया, जिनमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग, 764, मेनियक मर्डर कल्ट, टेररग्राम कलेक्टिव आदि शामिल हैं। आर्थिक और तकनीकी सुरक्षा पर चिंता: रिपोर्ट में 2025 को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बदलाव का साल बताया गया। बढ़ती जियो पॉलिटिकल टेंशन और नई तकनीकों की होड़ से कनाडा की सुरक्षा को खतरा बढ़ा है। विदेशी राज्य खुलेआम और गुप्त तरीके से कनाडा के हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बैंकिंग क्षेत्र को अलर्ट: CSIS ने बैंकिंग और बीमा कंपनियों को विदेशी हस्तक्षेप पर ब्रिफिंग दी। ऑफिस ऑफ द सुपरिंटेंडेंट ऑफ फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस (OSFI) के साथ मिलकर नेशनल सिक्योरिटी थ्रेट फोरम बनाया गया है, ताकि वित्तीय क्षेत्र मजबूत बना रहे। क्रिप्टोकरेंसी का बढ़ता खतरा: रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रिप्टोकरेंसी अब सुरक्षा के लिए नया खतरा बन गई है। विदेशी कंपनियों की पहचान छुपाकर मार्केट में क्रिप्टो करंसी के जरिए हेराफेरी कर रहे हैं, जो दुश्मनों के लिए खतरनाक हथियार साबित हो सकता है। इस पर नकेल कसे जाने की जरूरत है। CSIS आतंकवादी फंडिंग की जांच, नए पैटर्न का विश्लेषण और FINTRAC, वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रही है। खालिस्तान समर्थकों पर CSIS की नजर: CSIS की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि कनाडा खालिस्तानी चरमपंथ, फंडिंग के जरिए भारत में हिंसा की योजना और आर्थिक जासूसी को बहुत गंभीर चुनौती मानता है। एजेंसी इन सभी खतरों पर लगातार नजर रख रही है और जरूरी कार्रवाई करने के लिए तैयार है। रिपोर्ट के आधार पर कनाडा सरकार बनाएगी नीतियां कनेडियन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार CSIS की रिपोर्ट पर संसद व मंत्री समीक्षा करेंगे। एजेंसी ने रिपोर्ट पब्लिक सेफ्टी मिनिस्टर को सौंप दी है और संसद में इसे पेश किया जाएगा। उसके आधार पर सरकार खालस्तानी कट्‌टपंथियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की पॉलिसी तैयार कर सकती है। विक्रमजीत साहनी बोले- PM मोदी के प्रयासों से हुआ आप से भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य विक्रमजीत सिंह साहनी ने कनाडा के इस निर्णय का स्वागत किया और कहा कि उग्रवादी तत्वों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित करना बेहतर कदम है। उन्होंने कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है और भारत के निरंतर कूटनीतिक प्रयासों को दर्शाता है। साहनी ने कहा कि यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के दूरदर्शी नेतृत्व के कारण हुआ है। उन्होंने इस मुद्दे को लगातार और मजबूती से वैश्विक मंचों पर अपने समकक्षों के सामने उठाया। यह भी स्पष्ट करता है कि ऐसे तत्व बेहद छोटे और हाशिए पर मौजूद समूह हैं, जिनका बड़े समुदाय द्वारा अपनाए गए शांति के मूल्यों से कोई संबंध नहीं है।  

वन विभाग की नई योजना, मानसून से पहले ही शुरू होगा पौधरोपण अभियान

 रांची  झारखंड में वन क्षेत्र के अलावा औषधीय पार्क, सामुदायिक स्थल पर लगाने के लिए तीन लाख पौधे तैयार हैं। वन विभाग आमतौर पर जुलाई से पौधरोपण प्रारंभ करता है, लेकिन अप्रैल के आखिरी सप्ताह से राज्य में बारिश हो रही है। विभाग की नर्सरी में तैयार पौधों को औषधीय पार्क, स्कूल, आवासीय सामुदायिक भूखंड पर लगाया जाएगा। ये पौधे अनुदानित दर पर लोगों को दिए जाएंगे। इसके अलावा वन भूमि पर इस वर्ष दस लाख से अधिक पौधे लगाने की योजना है। कृषि विश्वविद्यालय स्थित वानिकी संकाय के विशेषज्ञ ज्ञानरंजन पांडेय ने बताया कि लोहरदगा से लेकर डाल्टेनगंज तक पिछले दस सालों में लाखों आंवला के पेड़ लगाए गए हैं आयुर्वेद से जुड़ी कंपनियों ने झारखंड में उत्पादित आंवला को उच्च गुणवत्ता वाला माना है। इस वर्ष आंवला और जामुन के पौधे पार्कों और सामुदायिक स्थलों पर लगाए जाएंगे। राज्य में छह औषधीय पार्क बनाकर उनमें वेलनेस उत्पाद में प्रयुक्त होने वाले फलदार पौधे लगाए जाएंगे। पांच साल पहले लगे पौधों की उत्तरजीविता बढ़ी राज्य के वन क्षेत्र में पांच साल पहले जो पौधे लगाए गए थे, उनमें से 80 प्रतिशत अब वृक्ष का स्वरूप ले रहे हैं। केंद्रीय वन उत्पादकता संस्थान ने राज्य में पौधों के संरक्षण की उत्तम श्रेणी की रिपोर्ट दी है। केंद्रीय संस्थान पांच वर्ष में पौधों की वृद्धि, उनके आसपास की हरियाली और सुरक्षा का आकलन कर रिपोर्ट देती है। पिछले दो सालों से हुई बारिश ने भी पौधों की वृद्धि में योगदान दिया है। 130 एकड़ नई भूमि पौधरोपण के लिए चिह्नित वन एवं पर्यावरण विभाग ने 130 एकड़ नई वन भूमि में मानसून के दौरान पौधरोपण की योजना बनाई है। इनमें सामाजिक वानिकी और क्षतिपूर्ति वानिकी योजना के तहत पौधे लगाए जाएंगे। विभाग ने इस वर्ष अतिक्रमण मुक्त की गई भूमि पर भी पौधरोपण की तैयारी की है।  

बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन से बुलाया विशेष सत्र, झामुमो ने किया पलटवार

 रांची  नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नारी शक्ति वंदन पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। उन्होंने रविवार को प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता कर कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से मिलने के लिए समय मांगा गया था जो नहीं मिला। मरांडी ने कहा कि पार्टी के महामंत्री अमर कुमार बाउरी द्वारा 30 अप्रैल से ही मुख्यमंत्री से मिलने का समय लेने का प्रयास किया जा रहा था। समय नहीं मिलने पर उनको एक पत्र लिखकर ही सारी बातों से अवगत करा दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने 16, 17, 18 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में लाया था। इससे देश की आधी आबादी के लिए लोकसभा और विधानसभा में 33% सीटें उनके लिए आरक्षित होगी। झारखंड में 14 लोकसभा की सीटें बढ़कर 21 हो जाती। जिसमें सात महिलाओं के लिए रिजर्व होती। इसी प्रकार विधानसभा की सीटें 81 से बढ़कर 121 हो जाती। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इसके विरोध में मतदान किया। इसलिए पार्टी ने तय किया था कि मुख्यमंत्री से मिलकर उनसे पार्टी आग्रह करेगी कि इस मुद्दे पर राज्यपाल की सहमति से एक विशेष सत्र बुलाएं और सदन से पारित कराकर केंद्र को प्रस्ताव भेजें। झामुमो का पलटवार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात का समय नहीं मिलने के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के आरोप पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पलटवार किया है। महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास निरर्थक सवालों के लिए समय नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सकारात्मक एजेंडा हो तो सरकार संवाद के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन केवल राजनीतिक आरोपों के आधार पर मुलाकात की अपेक्षा उचित नहीं है। भट्टाचार्य ने नगर निकाय चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी की है। इसके बावजूद विपक्ष महिलाओं के नाम पर राजनीति कर उन्हें गुमराह कर रहा है।  

पर्यावरण की ओर बड़ा कदम: हिसार में 3 एकड़ में तैयार होगा ई-बस स्टैंड

हिसार. हिसार बस डिपो में इलेक्ट्रिक बसों के लिए अलग स्टैंड बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। इसके तहत करीब 3.09 एकड़ भूमि पर उगी झाड़ियों को जेसीबी व अन्य मशीनें मंगवाकर हटाया जा रहा है और निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत कर दी गई है। नया बस स्टैंड आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जिससे यात्रियों को बेहतर और सुगम परिवहन सुविधा मिल सकेगी। डिपो में पहले ही पांच इलेक्ट्रिक बसें लाई जा चुकी हैं, जबकि पांच और बसें जल्द शामिल की जाएंगी। यह बस स्टैंड करीब 14 करोड़ रुपये की लागत में तैयार किया जाएगा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है, जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद शहर में इलेक्ट्रिक बस सेवा को और मजबूती मिलेगी। फिलहाल चलाई जा रही पांच बसों को आजाद नगर रूट व तोशाम रोड पर आधार अस्पताल तक चलाया जा रहा है। हिसार में 50 बसें लाने की योजना है। नया इलेक्ट्रिक स्टैंड बनाए जाने पर यहां कुल 10 इलेक्ट्रिक चार्जर स्थापित किए जाएंगे। जिनसे बसों को चार्ज किया जाएगा। इन बसों को विभिन्न रूटों पर चलाया जाएगा।