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हाईकोर्ट में ट्राइडेंट मामला: फैसला सुरक्षित, प्रदूषण बोर्ड की कार्रवाई पर उठे सवाल

चंडीगढ़. ट्राइडेंट समूह और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीच चल रहे विवाद पर उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में ट्राइडेंट समूह ने बोर्ड की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया है, जबकि बोर्ड ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे नियमों के तहत की गई सामान्य जांच बताया है। ट्राइडेंट ग्रुप हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उसके संस्थापक एवं राज्यसभा सांसद राजेंद्र गुप्ता के राजनीतिक पाला बदलने के तुरंत बाद पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने बदले की भावना से फैक्टरी पर असामान्य कार्रवाई शुरू कर दी व उसकी सुरक्षा भी वापिस ले ली गई है। सोमवार को याचिकाकर्ता ट्राइडेंट ग्रुप की ओर से  हाई कोर्ट के समक्ष यह प्रमुख तर्क रखा कि ट्राइडेंट ग्रुप पर कार्रवाई पर्यावरणीय उल्लंघन के बजाय “राजनीतिक प्रतिशोध” से प्रेरित प्रतीत होती है। अदालत को बताया गया कि कंपनी के चेयरमैन एमेरिटस के राजनीतिक रुख बदलने के बाद ही अचानक कड़ी कार्रवाई शुरू हुई। ट्राइडेंट ग्रुप ने कहा कि ट्राइडेंट ग्रुप के यार्न और अन्य डिवीजनों को 7 अप्रैल और 13 अप्रैल 2026 तक वैध कंसेंट/क्लियरेंस प्राप्त थे, जबकि पेपर डिवीजन का पूर्व अनुमति रिकॉर्ड भी मौजूद है और टॉवल डिवीजन के लिए आवेदन 30 जनवरी 2026 से लंबित है। निरीक्षण विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत होना चाहिए याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी कहा कि निरीक्षण करने की शक्ति पर कोई विवाद नहीं, लेकिन निरीक्षण भी विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। आरोप लगाया गया कि 30 अप्रैल की शाम लगभग 7:30 बजे 30 सदस्यीय टीम ने अचानक परिसर में प्रवेश किया, स्टाफ पर दबाव बनाया, नमूने लिए और प्रक्रिया का उचित पालन नहीं किया गया। अदालत को बताया कि सैंपलिंग रिपोर्ट पर उन्होंने “प्रोटेस्ट” के साथ हस्ताक्षर किए थे क्योंकि उन्हें आशंका थी कि कार्रवाई पूर्वाग्रहपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाई जा रही है। साथ ही, अदालत के समक्ष ई-फाइल की गई अतिरिक्त दस्तावेजी सामग्री पेश कर यह दर्शाने का प्रयास किया गया कि नियामक संस्थाएं पूर्व में लगातार निरीक्षण करती रही हैं और ट्राइडेंट ग्रुप को हालिया समय तक आवश्यक स्वीकृतियां मिलती रही हैं। बोर्ड ने आरोप खारिज किए दूसरी ओर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इस पूरे आरोप को “कल्पना” करार दिया गया। बोर्ड के वकील ने स्पष्ट कहा कि यह कोई “रेड” नहीं बल्कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के तहत नियमित निरीक्षण था। अदालत को बताया गया कि वाटर एक्ट की धारा 23 के तहत रेड कैटेगरी और बड़े औद्योगिक इकाइयों की नियमित जांच अनिवार्य है तथा पिछले छह महीनों में लगभग 450 निरीक्षण किए जा चुके हैं। बोर्ड ने जोर देकर कहा कि अभी तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित ही नहीं हुआ है, इसलिए याचिका समयपूर्व है। उनका तर्क था कि ट्राइडेंट ग्रुप अदालत से मूलतः यह आदेश चाहता है कि भविष्य में संभावित प्रतिकूल रिपोर्ट के आधार पर भी कोई कार्रवाई न हो, जबकि अभी केवल निरीक्षण हुआ है और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। याचिका की वैधता पर भी उठा सवाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सबसे पहले याचिका की वैधता  पर तीखा सवाल उठाया गया। बोर्ड के वकील ने अदालत को स्पष्ट कहा कि अभी तक उद्योग के खिलाफ कोई अंतिम या दंडात्मक आदेश पारित ही नहीं हुआ, इसलिए याचिका समयपूर्व  है। उनका तर्क था कि केवल आशंका के आधार पर अदालत से यह मांग नहीं की जा सकती कि भविष्य में संभावित कार्रवाई रोकी जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि कोई प्रतिकूल आदेश पारित होता है तो एनजीटी की धारा 14 के तहत वैकल्पिक वैधानिक उपाय उपलब्ध है, इसलिए सीधे हाई कोर्ट का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए। सैंपल लेने के दौरान नहीं हुई नियमों की पालना याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत के समक्ष विस्तार से कहा कि सैंपल लेने की शक्ति पर विवाद नहीं है, लेकिन कानून में निर्धारित प्रक्रिया बाध्यकारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि निरीक्षण टीम ने मौके पर विधिसम्मत नोटिस नहीं दिया, नमूनों को दो भागों में विभाजित नहीं किया, न ही उन्हें विधिवत सील कर उद्योग प्रतिनिधि के हस्ताक्षर लिए गए। धारा 21(3) का उल्लेख करते हुए कहा गया कि यदि यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई तो ऐसे नमूनों की विश्लेषण रिपोर्ट कानूनी साक्ष्य के रूप में भी संदिग्ध हो सकती है। कोर्ट में अन्य सांसदों का भी उठा मुद्दा याचिकाकर्ता ने अदालत को यह भी बताया कि पीपीसीबी के अपने रिकॉर्ड के अनुसार 25 मार्च 2026 तक उद्योग के विभिन्न मानक निर्धारित सीमा के भीतर थे और 13 अप्रैल 2026 तक सहमति आदेश भी जारी किया गया था। ऐसे में एक महीने के भीतर अचानक कठोर रुख अपनाने पर संदेह स्वाभाविक है। अदालत ने एक ओर माना कि राजनीतिक समय-क्रम से आशंका पैदा हो सकती है, लेकिन साथ ही कहा कि अंतिम सुरक्षा कानून सम्मत प्रक्रिया के भीतर ही दी जाएगी। कोर्ट को एक मीडिया हाउस के खिलाफ कार्रवाई ओर क्रिकेटर हरभजन सिंह व संदीप पाठक के खिलाफ कार्रवाई का भी हवाला दिया गया। कंपनी का दावा- वैध कंसेंट मौजूद कंपनी के पास अब भी वैध कंसेंट मौजूद हैं, हालिया निरीक्षण से पहले तक उसके अनुपालन रिकॉर्ड बोर्ड के दस्तावेजों में संतोषजनक हैं, और इसलिए बिना निष्पक्ष संयुक्त निरीक्षण के किसी भी कठोर कदम- विशेषकर बिजली कटौती, बंदी या 33A के तहत दमनात्मक आदेश- से 15,000 कर्मचारियों वाली सूचीबद्ध कंपनी को अपूरणीय क्षति हो सकती है। उसने अदालत से कम-से-कम इतना संरक्षण मांगा कि बिना शो-कॉज नोटिस या निष्पक्ष प्रक्रिया कोई कठोर कदम न उठाया जाए। इसके विपरीत, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अत्यंत आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि याचिका वस्तुतः अदालत से यह निर्देश चाहती है कि एक वैधानिक प्राधिकरण अपनी शक्तियों का उपयोग किस प्रकार करे जो न्यायिक मर्यादा के विपरीत है। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपन फैसला सुरक्षित रख लिया।

बैठक में गरजे CM साय: अधूरी रिपोर्ट पर PWD अधिकारी को लगाई कड़ी फटकार

रायपुर. विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के तहत बलरामपुर प्रवास के दौरान समीक्षा बैठक में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया. समीक्षा बैठक के दौरान लोक निर्माण विभाग के एक अधिकारी द्वारा सड़क मरम्मत की सही जानकारी नहीं देने पर मुख्यमंत्री ने कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट निर्देश दिया कि मीटिंग से बाहर जाकर सही जानकारी लेकर आइए. इस घटनाक्रम के बाद बैठक में सन्नाटा छा गया और यह संदेश साफ हो गया कि अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी. सीएम ने अधिकारियों के बीच यह स्पष्ट किया है कि जनहित से जुड़े कामों को समय और प्राथमिकता के साथ पूरा किए जाए.  समय सीमा से पूरे हों काम मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार का विकास सड़कों से ही दिखाई देता है, इसलिए मानसून से पहले सभी सड़कों की मरम्मत अनिवार्य रूप से पूरी की जाए. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आबादी वाले क्षेत्रों की सड़कों को प्राथमिकता दी जाए और समय-सीमा में काम पूरा किया जाए, अन्यथा सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें. उन्होंने प्रशासनिक अमले को संबोधित करते हुए कहा कि सभी अपने कार्यालयों को “सेवा तीर्थ” मानें, जहां जनता की सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता हो. साथ ही कलेक्टरों को अपने अधीनस्थ अधिकारियों के काम का नियमित मूल्यांकन करने और जरूरत पड़ने पर कठोर कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. जल्द शुरू होगी सीएम हेल्पलाइन मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य के राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जाएगा, जिससे नागरिकों को खसरा-नक्शा डिजिटल हस्ताक्षर के साथ घर बैठे मिल सकेगा. इसके अलावा “मुख्यमंत्री हेल्पलाइन” भी जल्द शुरू की जाएगी, जहां टोल फ्री नंबर पर आमजन अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे. बैठक में उन्होंने DMF फंड के उपयोग को लेकर भी सख्त निर्देश दिए और कहा कि इसका उपयोग केवल खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास में ही किया जाए.

एमपी में बिजली बिल में सरचार्ज का तगड़ा झटका, एक महीने तक बढ़ेगी जेब पर अतिरिक्त खर्च

भोपाल  प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं पर अप्रैल माह के बिल में अतिरिक्त शुल्क लागू किया गया है। मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) ने फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) की दर 5.36 प्रतिशत तय की है। यह दर उपभोक्ताओं के बिजली बिल में ऊर्जा शुल्क के साथ जोड़ी जाएगी। बिजली कंपनियों ने एक महीने पहले ही बिजली दरों में 4.8 प्रतिशत का इजाफा किया था। यह सरचार्ज 24 अप्रैल 2026 से 24 मई 2026 एक महीने की अवधि के लिए लागू रहेगा।  कंपनी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अप्रैल 2026 के लिए FPPAS की गणना 5.40 प्रतिशत आई थी। नियामक आयोग के नियमों के तहत यदि यह 5 प्रतिशत से अधिक होता है तो 5 प्रतिशत मूल रूप से लागू किया जाता है और शेष राशि का 90 प्रतिशत जोड़कर अंतिम दर तय की जाती है। इसी आधार पर 5.36 प्रतिशत FPPAS निर्धारित किया गया है। इस दौरान उपभोक्ताओं को अपने बिजली बिल में ऊर्जा शुल्क के साथ यह अतिरिक्त राशि भी चुकानी होगी। इसके बाद अगले महीने के लिए दरें अलग से तय की जाएंगी, जो उस समय की फ्यूल और पावर खरीद लागत पर निर्भर करेंगी।  इस आदेश के तहत सभी बिजली वितरण कंपनियों पूर्व, मध्य और पश्चिम क्षेत्र को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस सरचार्ज को उपभोक्ताओं के बिल में शामिल करें और इसकी जानकारी अपनी वेबसाइट पर भी सार्वजनिक करें। इस फैसले से घरेलू और व्यावसायिक दोनों उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में बढ़ोतरी होगी। पहले से ही महंगाई के दबाव में चल रहे उपभोक्ताओं पर यह अतिरिक्त शुल्क आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला माना जा रहा है।  चुपचाप बढ़ा दिए बिजली के दाम बताया जा रहा है कि, बिजली कंपनियों को बिजली खरीदने में ज्यादा खर्च आ रहा है, जिसका बोझ अब बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर डाला जा रहा है। हालांकि, इस बढ़ोतरी को लेकर अबतक विभागीय अधिकारियों की ओर से किसी तरह की जानकारी या सफाई नहीं दी गई है। आम लोगों के बजट पर पड़ेगा असर ज्यादातर लोगों को अभी तक इसकी जानकारी भी नहीं है। सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि बार-बार इस तरह की बढ़ोतरी से आम लोगों का घरेलू बजट प्रभावित होता है और लोगों में नाराजगी भी बढ़ सकती है। अब आम आदमी को 4.26 की जगह 11 प्रतिशत ज्यादा बिल चुकाना होगा। बढ़ने लगी लोगों की चिंता मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड ने अप्रैल 2026 के लिए फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज की नई दर 5.36 फीसदी तय कर दी है। इसके बाद मई 2026 से कुल 6 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है, जबकि मार्च 2026 में ये दर ऋणात्मक 0.63 प्रतिशत थी। राज्य में पहले अप्रैल 2026 से 4.8 फीसद की बढ़ोतरी हुई थी। इस तरह लगातार जारी बिजली दरों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, इस तरह हुई बढ़ोतरी को लेकर अधिकारी कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। -बिजली कंपनी ने अप्रैल और मई 2026 से बिजली बिल में कुल मिलाकर करीब 11 फीसदी सरचार्ज की बढ़ोतरी की गई है। -इस बढ़ोतरी का असर प्रदेश के गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की जेब पर पड़ेगा। -कंपनियों को बिजली खरीदने में ज्यादा खर्च आ रहा है, जिसका बोझ अब बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर डाला गया है। -हालिया बढ़ोतरी को लेकर अबतक विभागीय अधिकारियों की ओर से किसी तरह की जानकारी या सफाई नहीं दी गई है। यानी ये बढ़ोतरी चुपचाप कर दी गई है। 

UP के 1.43 लाख शिक्षामित्रों के लिए खुशखबरी, बढ़े मानदेय के बाद सम्मान कार्यक्रम

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के 1:43 लाख शिक्षा मित्रों के लिए 5 मई का दिन बेहद खास होने जा रहा है। योगी सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि के बाद अब उनके सम्मान को भी प्राथमिकता देते हुए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इस पहल को प्रदेशव्यापी स्वरूप देते हुए आगामी 5 मई को गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्यस्तरीय भव्य कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। 18,000 रुपए प्रतिमाह मानदेय के साथ लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों को इस प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा, जिसके माध्यम से पूरे प्रदेश में स्पष्ट तौर पर यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि शिक्षा व्यवस्था की नींव को मजबूत करने वाले शिक्षामित्रों को अब उचित पहचान और संबल मिल रहा है। योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रदेश के शिक्षा मित्रों को अप्रैल महीने से ही बढ़े हुए मानदेय का लाभ मिलना शुरू हो चुका है। अब 5 मई को गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह से मुख्यमंत्री इसका औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षा मित्रों के साथ संवाद भी करेंगे। पांच मई को सुबह 11 बजे होने वाले इस कार्यक्रम के समानांतर प्रदेश के सभी जनपदों में भी आयोजन कर इसे व्यापक रूप दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों के लिए लिया गया यह निर्णय अब पूरी तरह लागू हो चुका है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी इस व्यवस्था के अंतर्गत बेसिक शिक्षा के 13,597 और समग्र शिक्षा के 1,29,332 शिक्षामित्रों को 18,000 रुपए प्रतिमाह की दर से भुगतान किया जा रहा है। योगी सरकार का कहना है कि इससे उनका आर्थिक सशक्तीकरण हुआ है। योगी सरकार का कहना है कि प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में सुधार और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। पहले मानदेय में वृद्धि और अब उन्हें सम्मान देने के लिए की जा रही यह पहल शिक्षामित्रों के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को भी नई दिशा देगी। गोरखपुर में पांच मई को होने जा रहा यह आयोजन शिक्षा सुधार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। लाइव प्रसारण और व्यापक भागीदारी शिक्षा मित्रों के लिए गोरखपुर के आयोजित इसा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन और मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर किया जाएगा, जिससे प्रदेश भर के शिक्षा मित्र इस अवसर के साक्षी बन सकें। साथ ही, सभी जनपदों में भी समानांतर रूप से आयोजन किए जाएंगे, जहां स्थानीय स्तर पर जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षा मित्रों की भागीदारी उल्लेखनीय होगी।

ग्रामीण विकास में बड़ा बदलाव, रेरा की तर्ज पर बनेगा नया प्राधिकरण

पटना बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब बहुमंजिली इमारत या मकान के निर्माण के पूर्व इसका नक्शा पास कराना अनिवार्य होगा। जल्द ही यह प्रावधान लागू हो सकता है। पंचायती राज विभाग ने इसके लिए नियमावली का प्रारूप तैयार कर लिया है। इस पर विधि विभाग और उच्चस्तरीय कमेटी से मंजूरी ली जाएगी। नियमावली के प्रारूप को राज्य मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद विधानमंडल से पारित कराया जाएगा। शहरों से सटे ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में अपार्टमेंट निर्माण को देखते हुए यह तैयारी की जा रही है। नियमावली में रेरा (रियल एस्टेट विनिमय और विकास अधिनियम) की तर्ज पर प्राधिकार गठित करने का प्रावधान है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाली बहुमंजिली इमारत के नक्शे को स्वीकृति देगा। यह बिल्डरों को परियोजना रजिस्टर करने (500 वर्गमीटर से अधिक) पर खरीदार की राशि का 70 फीसदी अलग खाते में रखने और समय पर कब्जा देने के लिए बाध्य करेगा। जमा कराए गए 70 फीसदी कोष का भी इस्तेमाल सिर्फ उसी परियोजना के निर्माण में किया जा सकेगा। खरीदारों को समय पर कब्जा नहीं देने की स्थिति या देरी होने पर उन्हें ब्याज सहित हर्जाना देना पड़ सकता है। प्राधिकार में बिल्डर को प्रोजेक्ट का लेआउट, योजना, सरकारी मंजूरी और काम की प्रगति की जानकारी साझा करनी होगी। इसमें निर्माण का संपूर्ण एरिया (बिल्डप एरिया) और वास्तविक जगह (कॉरपेट एरिया) भी स्पष्ट रहेगा, ताकि बिल्डर धोखे से खरीदारों से ज्यादा कीमत नहीं वसूल सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में बहुमंजिला भवन में पांच साल में दोषपूर्ण निर्माण या संरचनात्मक कमी मिलने पर बिल्डर को उसे मुफ्त में ठीक करना होगा। खरीदार संबंधित संस्था के पास बिल्डर के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

हरियाणा निकाय चुनाव: सीएम नायब सैनी ने सोनीपत में गिनाई उपलब्धियां, कांग्रेस पर साधा निशाना

चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी निकाय चुनावों की सरगर्मियों के बीच सोनीपत पहुंचे। आज उन्होंने सोनीपत के वॉर्ड नंबर 8 से अपने दौरे की शुरुआत की और पहले गांव राई में जनसभा को संबोधित किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आज सोनीपत में करीब दो दर्जन छोटी-छोटी जनसभाएं करेंगे। मेयर उम्मीदवार ने करीब 19 कार्यक्रम रखे हैं। मंच से संबोधन में सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा कि वॉर्ड के पार्षद और मेयर को अपना आशीर्वाद देने का काम जनता करेगी। सीएम सैनी ने गिनाई उपलब्धियां सीएम ने कहा कि डेढ़ वर्ष पहले विधानसभा चुनाव में 217 संकल्पों में से 63 पूरे कर दिए गए हैं और 163 संकल्पों पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है जिन्हें डबल इंजन की सरकार पूरा करने का काम कर रही है।  कम आय वाले परिवारों को गैस सिलिंडर 500 रुपये में उपलब्ध करवाया जा रहा है। किसानों की पूरी फसल एमएसपी पर खरीदी जा रही है। युवाओं को बिना पर्ची-खर्ची के 2 लाख नौकरियां दी गईं। लाडो लक्ष्मी योजना लागू कर दी गई है। कांग्रेस पर बोला हमला नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस की अन्य राज्यों की सरकारों पर हमला बोलते हुए कहा कि वहां महिलाओं को कोई सुरक्षा नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दिल्ली में जो गलती की, वो हरियाणा में भी देखने को मिली। महिलाओं की तरफदारी करने की जगह वे बाहर बैठ गए। सीएम ने जनता से अपील की कि कमल के फूल पर बटन दबाकर मेयर और पार्षदों को जिताएं। वहीं, हरियाणा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ोली  ने भी बीजेपी के पार्षदों और मेयर को जिताने की लोगों से अपील की।  

नगर विकास विभाग की नई पहल, 264 निकायों को जोड़ेगा एकीकृत ई-गवर्नेंस सिस्टम

पटना शहरी निकायों के नागरिकों को अपनी समस्या के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्हें निकाय से संबंधित समस्या का समाधान अब एक क्लिक पर मिलेगा। यानी सभी नगरीय सुविधाएं एक प्लेटफार्म पर मिलेंगी। नगर विकास विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए पोर्टल विकसित किया जा रहा है। इसी पोर्टल पर राज्य के 264 निकायों से संबंधित कार्य होंगे। वर्तमान में होल्डिंग टैक्स को छोड़कर अन्य सभी तरह की सुविधाओं के लिए नागरिकों को निकाय कार्यालय का चक्कर काटना पड़ता है। सभी निकायों की अपनी अलग-अलग व्यवस्था है। नियमों के पालन में एकरूपता नहीं है। इसीलिए नगर विकास विभाग ने राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन के तहत ई-गवर्नेंस मॉड्यूल्स विकसित करने का निर्णय लिया है। इसका मकसद शहरी नागरिकों को सभी तरह की सेवाओं की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है। सॉफ्टवेयर विकसित होने के साथ ही सभी निकाय एक पोर्टल से जुड़ जाएंगे। उसी पोर्टल पर अलग-अलग 15 प्रकार की सेवाओं के विकल्प मौजूद होंगे। आम नागरिक अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प का चयन कर सकता है। संबंधित निकाय के पास उनकी समस्या भेज दी जाएगी। मुख्यालय स्तर से इसकी निगरानी की जाएगी। इससे नागरिकों की समस्या का समाधान भी सुनिश्चित होगा। इसके अलावा विकास से जुड़े कार्यों के दुहराव से भी बचा जा सकेगा।नगर विकास विभाग ने इस पर अगले पांच वर्षों में करीब 120 करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय लिया है। लोगों को 15 प्रकार की सुविधाएं प्राप्त होंगी शहरी नागरिकों को पंद्रह प्रकार की सेवाएं ऑनलाइन मिलेंगी। इसमें प्रोपर्टी टैक्स, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, व्यापार लाइसेंस, नक्शा पास कराना, किसी समस्या की शिकायत करना, किसी काम के लिए एनओसी लेना, पेयजल और सीवरेज कनेक्शन, होर्डिंग्स या विज्ञापन, अन्य कर संग्रह, साफ-सफाई और ठोस कचरा प्रबंधन से संबंधित कार्य होंगे। निकायों के लीगल, एसेट मैनेजमेंट, मैटेरियल मैनेजमेंट आदि प्रमुख कार्य शामिल हैं। कर्मचारियों को प्रशिक्षण मिलेगा सॉफ्टवेयर विकसित होने के साथ ही नगर विकास विभाग इस सेवा की शुरुआत कर देगा। इससे पहले नगर निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार ने सात निश्चय-3 के तहत सबका सम्मान, जीवन आसान के तहत ई-गवर्नेंस को लागू कर रही है। इसके संचालन के लिए मुख्यालय स्तर पर विशेषज्ञों की एक टीम होगी।

श्री हरमंदिर साहिब की बेअदबी के आरोप में एआई से बनाई तस्वीर, एसजीपीसी ने जांच शुरू की

अमृतसर तीन युवकों की ओर से एआई के जरिए तस्वीर बनाकर श्री हरमंदिर साहब की बेअदबी करने का मामला सामने आया है। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में तीन व्यक्तियों को परिक्रमा क्षेत्र में चप्पल पहने हुए दिखाया गया है, जबकि उनके सिर भी ढके नहीं हैं। सिख मर्यादा के विपरीत इस तरह के दृश्य को लेकर लोगों ने आपत्ति जताई है।  जानकारी के अनुसार, यह तस्वीर एक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट की गई थी। तस्वीर में एक व्यक्ति नई स्कूटी के साथ हाथ में स्कूटी की चाबी पकड़े खड़ा है। जबकि दो अन्य उसके बगल में खड़े दिखाई दे रहे हैं। पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही है।  सिख संगठनों की ओर से  जब संबंधित व्यक्ति से संपर्क किया गया तो उसने तस्वीर हटाने और माफी मांगने की बात कही। पोस्ट डालने वाले ने इसे अनजाने में हुई गलती बताया ओर माफ करने की अपील की। यह पहला मामला नहीं है, जब इस तरह की सामग्री सामने आई हो। इससे पहले भी एआई तकनीक का इस्तेमाल कर एक वीडियो तैयार किया गया था, जिसमें एक कंकाल को पगड़ी पहनाकर परिक्रमा क्षेत्र में दिखाया गया था। उसी वीडियो में लंगर हॉल में जूते पहनकर भोजन करते हुए दृश्य भी जोड़े गए थे। इसके अलावा एक अन्य वीडियो में एक युवक को वाहन सहित परिक्रमा में दिखाया गया था, जिसे लेकर भी विवाद हुआ था। कुछ समय पहले एक युवक द्वारा पवित्र सरोवर में प्रवेश कर कुल्ला करता हुए रील बनाने का मामला भी सामने आया था, जिस पर धार्मिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने जांच शुरू कर दी है।  एसजीपीसी के कानूनी सलाहकार अमन बीर सिंह ने बताया कि संबंधित तस्वीर मंगवाई गई है और इसकी तकनीकी जांच एआई कमेटी के माध्यम से कराई जाएगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। धार्मिक संस्थाओं का कहना है कि इस तरह की डिजिटल सामग्री न केवल धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करती है, बल्कि तकनीक के दुरुपयोग का भी उदाहरण है। ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय करना और आवश्यक कदम उठाना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके। 

भीषण आग से हड़कंप: पानीपत की टेक्सटाइल फैक्ट्री में लगी आग पर 52 दमकल ने पाया काबू

पानीपत. शहर में रिसालू रोड स्थित लक्ष्य टेक्सटाइल मिल में रविवार देर रात भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन आग की भयावहता को देखते हुए सोनीपत, करनाल, समालखा, एनएफएल और रिफाइनरी से भी दमकल की गाड़ियां मंगानी पड़ीं। प्रत्यक्षदर्शियों और मिल प्रबंधन ने बताया कि रात को खराब मौसम के चलते बिजली आ जा रही थी, जिससे शार्ट सर्किट होने के बाद आग लग गई। फैक्ट्री में धागा और कच्चा माल होने के कारण आग तेजी से फैल गई। फायरमैन अमित गोस्वामी ने बताया कि आग रात करीब ढाई बजे लगी थी, जिस पर सुबह साढ़े 9 बजे तक काबू पाया जा सका। इस दौरान कुल 52 से अधिक दमकल गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का कार्य किया। आग के चलते एक मंजिला फैक्ट्री के ऊपर बना भवन भी गिर गया। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

दिल्ली में अहम बैठक: राष्ट्रपति मुर्मु से मिलेंगे मान और चड्ढा, पंजाब के मुद्दे उठाएंगे

चंडीगढ़. आम आदमी पार्टी के छह राज्यसभा सदस्यों के साथ भाजपा में शामिल होने वाले राघव चड्ढा मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलेंगे। चड्ढा ने राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए समय मांगा था और राष्ट्रपति ने उन्हें मंगलवार को सुबह 10.40 बजे का समय दिया है। चड्ढा के साथ दो अन्य राज्यसभा सदस्य भी राष्ट्रपति से मिलेंगे। खास बात यह है कि इसी दिन दोपहर 12 बजे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी राष्ट्रपति से मिलने वाले हैं। पता चला है कि राघव चड्ढा राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान उन्हें पंजाब सरकार की ओर से भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सदस्यों पर की जा रही कार्रवाई से अवगत करवाएंगे। उधर, मुख्यमंत्री भगवंत मान की राष्ट्रपति से मुलाकात को भी अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान एक मई को विधानसभा के बुलाए गए विशेष सत्र में पहले ही कह चुके हैं कि वे राष्ट्रपति से मिलकर दल बदल कानून में संशोधन की मांग करेंगे। इसके साथ ही वे विधानसभा में पास हुए विश्वास प्रस्ताव से भी उन्हें अवगत करवाएंगे। मान ने कहा था कि पंजाब देश का पहला राज्य बन जाएगा जो दल बदल कानून में बदलाव की मांग करेगा।