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लखनऊ में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) के शुभारंभ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को लखनऊ में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) के शुभारंभ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। यह बदलाव वैज्ञानिक तकनीकों, एग्रो-क्लाइमेटिक जोन आधारित रणनीति तथा केंद्र-राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। यूपी में “लैब टू लैंड” की अवधारणा धरातल पर उतर चुकी है, जिससे किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। कृषि विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि, प्रति हेक्टेयर उत्पादन में रिकॉर्ड सुधार, बहुफसली खेती का विस्तार और वैल्यू एडिशन पर बढ़ता फोकस इस परिवर्तन के स्पष्ट संकेत हैं। मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों, अंतरराष्ट्रीय कृषि केंद्रों की स्थापना, कृषि विज्ञान केंद्रों के सशक्तीकरण और प्रगतिशील किसानों की भूमिका को इस बदलाव का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। भिन्न-भिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के अनुरूप बनें नीतियां अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग देशों और क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोन होने के कारण नीतियां भी उसी अनुरूप तय की जानी चाहिए। यदि अलग-अलग जोन में इस प्रकार की गोष्ठियां आयोजित की जाएं तो उसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि गत वर्ष ‘विकसित कृषि अभियान’ और ‘खेती की बात, खेत में’ कार्यक्रम के दौरान उन्हें कई जनपदों में जाने का अवसर मिला, जहां किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि शिक्षा से जुड़े प्रशिक्षुओं में अभूतपूर्व उत्साह व जिज्ञासा देखने को मिली। पहली बार इनोवेशन को सीधे व्यावहारिक धरातल पर उतारने का अवसर मिला है। पहले लैब में होने वाले अनुसंधान को लैंड तक पहुंचने में काफी समय लगता था, लेकिन अब “लैब टू लैंड” की अवधारणा साकार हो चुकी है और तकनीक सीधे खेत तक पहुंच रही है। इस अभिनव पहल के लिए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस अवधारणा को व्यवहारिक रूप से देशभर में लागू करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। योजनाओं की सही जानकारी मिले तो किसान स्वयं बेहतर परिणाम देने में सक्षम मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, आवश्यकता केवल प्रभावी नेतृत्व की है, जिसकी शुरुआत भारत सरकार के स्तर से होती है और राज्य उसे तेजी से अपनाते हैं। पहले नीतियां केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित रह जाती थीं, लेकिन अब उनके ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। अन्नदाता किसानों को योजनाओं की सही जानकारी दी जाए, तो वे स्वयं बेहतर परिणाम देने में सक्षम हैं। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 की स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय प्रदेश में मात्र 69 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) थे, जो लगभग निष्क्रिय अवस्था में थे और उनके वैज्ञानिक भी अन्य संस्थानों में अटैच थे। इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा 20 नए केवीके की पहल के साथ-साथ मौजूदा केंद्रों को सशक्त बनाने की कार्ययोजना पर काम हुआ। आज स्थिति यह है कि सभी केवीके सक्रिय होकर नवाचारों को बढ़ावा दे रहे हैं और प्रदेश के सभी 9 एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से कृषि विकास को नई दिशा दे रहे हैं। अब कृषि को वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ने की आवश्यकता मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ये वैज्ञानिक स्थानीय स्तर पर डेमोंस्ट्रेशन करते हैं और फिर किसानों के खेत में जाकर उसे लागू करते हैं, लगातार दौरे करते हैं, निरंतर गोष्ठियां चलती हैं और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। साथ ही भारत सरकार के साथ उनका सतत संवाद बना रहता है। इसी का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर 8 से बढ़कर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। परिणाम बताते हैं कि हम इससे भी बेहतर उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। सीएम ने कहा कि मेरा मानना है कि आजादी के समय भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान लगभग 41-42 प्रतिशत था। समय के साथ इसका योगदान घटता गया। यदि कृषि व मैन्युफैक्चरिंग के बीच बेहतर समन्वय हो, तो विकास की गति और तेज हो सकती है। वर्तमान में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान अब भी लगभग 15–16 प्रतिशत के आसपास है, जबकि कृषि का हिस्सा घटकर लगभग 20–21 प्रतिशत तक सीमित रह गया। अब आवश्यकता है कि कृषि को वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ा जाए। इसके लिए नए प्रयासों को और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाने तथा प्रभावी ढंग से विस्तार देने की आवश्यकता है। निर्णायक भूमिका निभा सकती है तकनीक मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक आज के दौर में अत्यंत निर्णायक भूमिका निभा सकती है। उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में विभिन्न उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र स्थापित करवाए हैं। उदाहरण के तौर पर, वाराणसी में इंटरनेशनल राइस इंस्टीट्यूट की स्थापना हुई है, जो बेहतरीन परिणाम दे रहा है। यहां से नई-नई किस्में विकसित की गई हैं। अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के अनुसार कौन-सी किस्म उपयुक्त होगी, कौन-सी तकनीक अपनाई जानी चाहिए, क्वालिटी सीड किस प्रकार उत्पादन बढ़ा सकते हैं, ये सभी परिणाम अब स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि कुछ क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर धान का उत्पादन 100 कुंतल तक पहुंच गया है, जो पहले 50–60 कुंतल तक सीमित था। मुख्यमंत्री ने कहा कि अल नीनो के कारण गेहूं और उद्यान फसलों, विशेष रूप से आम पर प्रभाव पड़ा है, लेकिन यह एक सतत चुनौती है। इसके बावजूद, लागत कम करके उत्पादन बढ़ाना, समय पर अच्छे बीज उपलब्ध कराना, केमिकल फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड के उपयोग को कम करते हुए नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देना, इन सभी क्षेत्रों में निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। उत्तर प्रदेश में कृषि के लिए अनुकूल वातावरण मुख्यमंत्री ने बाराबंकी के प्रगतिशील किसान पद्म पुरस्कार से सम्मानित रामशरण वर्मा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि गत वर्ष मुझे उनके खेत पर ‘विकसित कृषि अभियान’ के तहत जाने का अवसर मिला। यदि कोई रामशरण वर्मा से उनकी शैक्षिक योग्यता पूछता है, तो वह स्वयं को “दसवीं फेल” बताते हैं, लेकिन खेती में उनकी दक्षता और वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग अत्यंत प्रेरणादायक है। वह कम लागत में अधिक उत्पादन करने का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भारत … Read more

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना विभाग ने शुरू की तैयारी

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी की गई है। इसके तहत गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग गन्ने की फसल का जीपीएस सर्वेक्षण कराएगा। यह जीपीएस सर्वेक्षण 1 मई से शुरू होकर 30 जून 2026 तक चलेगा। इसकी सूचना 3 दिन पहले सभी रजिस्टर्ड गन्ना किसानों को मोबाइल एसएमएस के जरिए दी जाएगी। गन्ना सर्वेक्षण टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल कर्मचारी शामिल होंगे। इनको सर्वेक्षण से पहले प्रशिक्षित भी किया जाएगा। सर्वेक्षण के दौरान किसान की मौजूदगी जरूरी होगी। टीम किसान के खेत पर पहुंचकर जीपीएस के जरिए उत्पादन का डाटा सीधे विभाग के सर्वर पर फीड करेगी। वहीं सर्वेक्षण के बाद खेत का क्षेत्रफल, गन्ने की किस्म समेत अन्य जानकारी भी किसानों को एसएमएस के जरिए दी जाएगी। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त वीना कुमारी मीना ने बताया कि पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी कर दी गई है। सर्वेक्षण कार्य 1 मई से प्रारम्भ कर 30 जून तक पूरा किया जाएगा। साथ ही बताया कि किसी भी गन्ना कृषक के सर्वेक्षित भूमि का सत्यापन राजस्व विभाग की वेबसाइट www.upbhulekh.gov.in से किया जा सकता है। चीनी मिलें गन्ना सर्वेक्षण के अंतिम आंकड़े सीधे विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन पोर्ट करेंगी और अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगी। सर्वेक्षण के दौरान होगा नए किसानों का पंजीकरण विभाग के मुताबिक गन्ना सर्वेक्षण के दौरान नए सदस्यों (किसान) का पंजीकरण भी किया जाएगा। 30 सितम्बर 2026 तक पंजीकृत कृषकों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा। उपज बढ़ोत्तरी के लिए गन्ना सर्वेक्षण से लेकर 30 सितम्बर 2026 तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसके लिए अनुसूचित जाति व जनजाति के कृषकों, लघु कृषकों और अन्य कृषकों से क्रमशः 10, 100 एवं 200 रुपये प्रति कृषक शुल्क जमा कराया जाएगा।

योगी सरकार में महिलाओं का मजबूत सहारा बनी 181 हेल्पलाइन

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में महिलाओं की सुरक्षा व सशक्तीकरण शीर्ष प्राथमिकता पर है। इसी दिशा में संचालित 181 महिला हेल्पलाइन प्रदेश की महिलाओं के लिए संकट के समय मजबूत सहारा बनकर उभरी है। वर्ष 2025-26 में इस हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण एक बड़ी उपलब्धि है, जो नारी की गरिमा व सुरक्षा के प्रति सरकार की गंभीरता दर्शाती है। इलाज व राशन दिलाने में भी मदद की हेल्पलाइन ने आंकड़ों पर नजर डाले तो महिला हेल्पलाइन 181 पर 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक 85 हजार से ज्यादा शिकायतें आई। इनमें अधिसंख्य शिकायतें घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, साइबर क्राइम, मारपीट से जुड़ी थीं। कुछ ऐसे भी मामले थे, जिनमें महिलाओं ने अस्पताल में इलाज के लिए या जमीन-जायदाद से जुड़े प्रकरणों में मदद मांगी। राशन दिलाने में मदद के लिए भी कई महिलाओं ने हेल्पलाइन से संपर्क किया। ये सभी मामले निस्तारण के लिए सम्बंधित विभागों को ट्रांसफर किए गए। उल्लेखनीय यह है कि हेल्पलाइन इन सभी मामलों का संतुष्टिपरक निस्तारण करने में सफल रही। 24 घंटे सक्रिय रहती है 181 महिला हेल्पलाइन किसी भी प्रकार की समस्या या जानकारी के लिए महिलाएं इस हेल्पलाइन से सीधे संपर्क कर सकती हैं। शिकायत के मामले 2 मिनट के भीतर संबंधित वन स्टॉप सेंटर को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। इसके बाद संबंधित जनपद में स्थापित डैशबोर्ड के माध्यम से तैनात महिला कर्मचारी पीड़िता से संपर्क कर उसकी समस्या को समझती है और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराती है। यह हेल्पलाइन 24×7 सक्रिय रहती है, जहां घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, दहेज प्रताड़ना और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को त्वरित सहायता मिलती है। साथ ही पीड़ित महिलाओं को मनोवैज्ञानिक, कानूनी और सामाजिक सहयोग भी प्रदान किया जाता है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए योगी सरकार प्रतिबद्ध योगी सरकार के कार्यकाल में इस सेवा का दायरा और प्रभाव लगातार बढ़ा है। तेज निस्तारण, संवेदनशील कार्यप्रणाली और तकनीकी सुदृढ़ता के जरिए 181 महिला हेल्पलाइन आज प्रदेश की महिलाओं के सशक्तीकरण की एक मजबूत कड़ी बन चुकी है, जो हर महिला को सुरक्षा और सम्मान का भरोसा दिला रही है। महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 181 महिला हेल्पलाइन इस दिशा में एक सशक्त माध्यम बनकर सामने आई है, जिसके जरिए महिलाओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

नरवाई जलाना खेत और सेहत दोनों के लिए हानिकारक : कृषि मंत्री कंषाना

भोपाल.  किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि प्रदेश में नरवाई जलाने के नुकसान और नहीं जलाने के फायदों को लेकर कृषि विभाग द्वारा व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुरूप ‘कृषि चौपाल’ के माध्यम से हर विकासखंड के गांवों में किसानों को नरवाई प्रबंधन की वैज्ञानिक जानकारी दी जा रही है। कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि रबी कटाई के बाद अप्रैल-मई में यह अभियान तेज कर दिया गया है। वर्तमान में मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, महाकौशल, चंबल और विंध्य क्षेत्र के सभी 313 विकासखंडों में ‘कृषि चौपाल’ आयोजित की जा रही हैं। बड़े स्तर पर नरवाई प्रबंधन पर चर्चा हो रही है। कृषि विज्ञान केंद्र, आत्मा परियोजना और कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से लाइव प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। मंत्री कंषाना ने कहा कि नरवाई जलाने के कई दुष्परिणाम हैं। इसे जलाने से मिट्टी की उर्वरता नष्ट होती है। लगभग 1 टन नरवाई जलाने से 5.5 किलो नाइट्रोजन, 2.3 किलो फॉस्फोरस, 25 किलो पोटाश व 400 किलो कार्बनिक पदार्थ जल जाते हैं, जिससे मित्र कीट मर जाते हैं। पर्यावरण व स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। धुएं से जहरीली गैसें बढ़ती हैं, जिससे सांस व आंखों के रोग होते हैं। दृश्यता घटने से सड़क हादसे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देश पर नरवाई जलाना दंडनीय अपराध है और जुर्माने का प्रावधान है। मंत्री कंषाना ने कहा कि नरवाई नहीं जलाने के फायदे हैं। इसे खेतों में मिलाने से भूमि की सेहत सुधरती है। हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, मल्चर से नरवाई खेत में मिलाने पर जैविक कार्बन बढ़ता है, पानी रोकने की क्षमता 30 प्रतिशत बढ़ती है। किसानों को अतिरिक्त आय भी होती है। स्ट्रॉ बेलर से गट्ठर बनाकर गोशाला, पेपर मिल, बायो-सीएनजी प्लांट को बेचा जा सकता है। पराली को खेत में मिलाने से अगली फसल में 20 प्रतिशत यूरिया कम लगती है। प्रदेश में नरवाई प्रबंधन यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। कृषि मंत्री कंषाना ने अपील की है कि किसान ‘कृषि चौपाल’ में अवश्य भाग लें और ‘ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल’ से मशीनों के लिए आवेदन करें। उन्होंने कहा कि “नरवाई खेत का सोना है, इसे जलाएं नहीं, अपनाएं।” अधिक जानकारी के लिए किसान कॉल सेंटर या ‘एमपी किसान ऐप’ पर संपर्क कर सकते हैं।  

योगी सरकार का बड़ा फैसला: कम लोड वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए अहम कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने विद्युत उपभोक्ताओं के हित में बड़ा निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि 1 किलोवाट तक के घरेलू विद्युत कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी गई है। अगर उनका बैलेंस नेगेटिव हो जाता है, तब भी 30 दिनों तक उनका बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं। यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से लागू की गई है। 5-स्तरीय एसएमएस सूचना प्रणाली लागू की गई ऊर्जा मंत्री ने साफ किया कि नेगेटिव बैलेंस की स्थिति में भी एक माह का चक्र पूरा होने से पहले किसी भी स्थिति में कनेक्शन विच्छेद नहीं किया जाएगा। साथ ही पारदर्शिता और उपभोक्ता सुविधा को ध्यान में रखते हुए कनेक्शन काटने से पूर्व उपभोक्ताओं को 5 अनिवार्य एसएमएस अलर्ट भेजे जाएंगे। जिससे उन्हें समय रहते भुगतान का अवसर मिल सकेगा। इसके साथ ही 2 किलोवाट के कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को भी राहत प्रदान की गई है। ऐसे उपभोक्ताओं का विद्युत कनेक्शन 200 रुपए तक के माइनस बैलेंस पर नहीं काटा जाएगा। इनके लिए भी 5 चरणों में एसएमएस सूचना प्रणाली लागू की गई है, जिससे किसी भी असुविधा से बचा जा सके।   अब तक करीब 30 लाख नए बिजली खंभे लगाए जा चुके हैं वहीं बढ़ती गर्मी को देखते हुए ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने सभी जिलों के अधिकारियों को विद्युत अनुरक्षण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में विद्युत आपूर्ति को सुदृढ़ करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य किए गए हैं। अब तक लगभग 30 लाख नए विद्युत खंभे स्थापित किए जा चुके हैं। साथ ही ट्रांसफार्मरों की क्षमता में भी व्यापक वृद्धि की गई है। ऊर्जा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति करने वाला राज्य बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि इस भीषण गर्मी में प्रदेश की जनता को बिजली की दृष्टि से किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। सरकार पूरी तरह से सजग है और निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

CAF फायर फाइटिंग व्हीकल 300 मीटर ऊंचाई तक बुझाएगा आग

नोएडा दिल्ली से सटे नोएडा में तेजी से बढ़ रही हाईराइज बिल्डिंग्स में आग लगने की घटनाओं से निपटने के लिए फायर विभाग लगातार नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में काम कर रहा है. इसी क्रम में नोएडा में कम्प्रेश्ड एयर फोम (CAF) आधारित हाईराइज फायर फाइटिंग व्हीकल का सफल ट्रायल किया गया. यह ट्रायल दिल्ली NCR की सबसे ऊंची बिल्डिंग सुपरनोवा की 45वीं मंजिल पर किया गया है, जहां इस अत्याधुनिक व्हीकल की क्षमता को परखा गया. ट्रायल के दौरान यह देखा गया कि यह वाहन तकरीबन 300 मीटर की ऊंचाई तक आसानी से पानी और फोम पहुंचाने में सक्षम है, जिससे ऊंची इमारतों में लगी आग पर तेजी से काबू पाया जा सकता है. अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक में पानी और कंप्रेस्ड एयर को मिलाकर एक विशेष प्रकार का फोम तैयार किया जाता है. यह फोम आग बुझाने में अधिक प्रभावी होता है और 100 मंजिल तक की ऊंचाई पर लगी आग को भी नियंत्रित करने की क्षमता रखता है. इस हाईराइज फायर फाइटिंग व्हीकल की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसके जरिए अग्निशमन कर्मियों को इमारत के अंदर जाकर आग बुझाने में काफी सहायता मिलती है, जिससे रिस्क कम होता है और रेस्क्यू ऑपरेशन अधिक सुरक्षित बनता है. ट्रायल के दौरान डीजी फायर सुजीत पांडे भी मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने इस तकनीक को हाईराइज इमारतों के लिए बेहद उपयोगी बताया. DG फायर ने कहा कि इस तरह की आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में इमरजेंसी सेवाओं को और मजबूत किया जा सकेगा.

बच्चों के पोषण पर फोकस, मिड-डे मील को बेहतर बनाने की नई पहल

चंडीगढ़ हरियाणा में मिड-डे मील को और बेहतर बनाने के लिए एक खास प्लान तैयार किया गया है। इसके तहत अब सीधे कुक-कम-हेल्पर को ट्रेनिंग देने के बजाय पहले शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा। ये मास्टर ट्रेनर आगे कुक-कम-हेल्पर को पोषण, स्वास्थ्य और साफ-सफाई के बारे में ट्रेनिंग देंगे। योजना के अनुसार, हर जिले के हर ब्लॉक से 4-5 टीजीटी शिक्षकों के नाम मंगवा लिया गया है। खास बात यह है कि इसमें गृह विज्ञान (होम साइंस) के अध्यापकों को प्राथमिकता दी जाएगी, क्योंकि उन्हें खान-पान और पोषण की बेहतर समझ होती है। इन शिक्षकों को पहले विशेषज्ञों द्वारा ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे सही जानकारी और तरीके आगे पहुंचा सकें इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि स्कूलों में बनने वाला खाना ज्यादा पौष्टिक और सुरक्षित होगा। साफ-सफाई के बेहतर नियम अपनाए जाएंगे, जिससे बच्चों की सेहत पर सकारात्मक असर पड़ेगा। साथ ही, खाना बनाने वालों की स्किल भी बढ़ेगी, जिससे भोजन की गुणवत्ता में सुधार आएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ खाना खिलाना नहीं, बल्कि बच्चों को स्वस्थ और मजबूत बनाना है। बेहतर पोषण से बच्चों की पढ़ाई में भी सुधार होगा और उनकी उपस्थिति बढ़ेगी। कुल मिलाकर, यह कदम शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।  

CM भगवंत मान बोले – AAP के राज्यसभा MP जो BJP में शामिल हुए, वे पंजाब के गद्दार हैं

चंडीगढ़.  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पार्टी छोड़ने वाले राज्यसभा MPs को पंजाब और पंजाबियत का गद्दार बताया है और कहा है कि पंजाब के लोग जल्द ही उन्हें इस हरकत का जवाब देंगे। आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा MPs ने शुक्रवार को दिल्ली में पार्टी से इस्तीफे का ऐलान किया। इन सात MPs में से छह पंजाब के हैं। राजनीतिक घटनाक्रम के बाद चंडीगढ़ में रिपोर्टर्स से बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सात गद्दारों के जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता। पार्टी पूरी तरह मजबूत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पंजाब में 300 यूनिट फ्री बिजली दे रही है और पंजाब को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया है। पंजाब में 19 टोल टैक्स खत्म कर दिए गए हैं। भगवंत मान ने RDF का फंड रोकने के लिए केंद्र सरकार पर हमला बोला और कहा कि BJP पंजाब में हो रहे विकास के कामों को पचा नहीं पा रही है। BJP शुरू से ही पंजाब के लोगों को धोखा और धमका रही है। हरियाणा और देश के कई दूसरे राज्यों में BJP के गठबंधनों, जिसमें दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी भी शामिल है, का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि BJP जिस भी पार्टी से गठबंधन करती है, उसे खत्म कर देती है। भगवंत मान ने कहा कि पंजाब में ऐसी घटना पहले भी हो चुकी है, जब सुखपाल सिंह खैरा ने कई MLA को तोड़कर अलग गुट बना लिया था। भारतीय जनता पार्टी ने पहले भी पंजाब में कई MLAs को तोड़ने के लिए ऑपरेशन लोटस चलाया था, लेकिन वह कामयाब नहीं हो सका। पार्टी छोड़ने वाले राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह भज्जी, विक्रमजीत साहनी और राजिंदर गुप्ता को पंजाब का सबसे बड़ा गद्दार बताते हुए भगवंत मान ने कहा कि ये सभी अपनी जान बचाने के लिए BJP में शामिल हुए हैं, लेकिन इन्हें बहुत जल्द इसका पछतावा होगा। मनप्रीत बादल और कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे नेता, जो BJP में शामिल हो गए थे, आज पंजाब की राजनीति में हाशिये पर हैं। भगवंत मान ने ED और दूसरी जांच एजेंसियों को चुनौती देते हुए कहा कि वे जब चाहें उनके खिलाफ जांच कर सकते हैं। पिछले चार सालों में कई कोशिशें की गईं लेकिन जब कुछ नहीं मिला तो उन्होंने अपने लोगों को दबाने की कोशिश शुरू कर दी।

मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी की शीघ्र होगी पूर्ति : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल. उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा एवं लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने शुक्रवार को मंदसौर जिले को स्वास्थ्य एवं अधोसंरचना विकास की सौगात देते हुए इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय में 29 करोड़ 52 लाख रुपए की लागत से विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने 7 करोड़ 50 लाख रुपए की लागत से निर्मित 100 बिस्तरीय नवनिर्मित वार्ड तथा 17 करोड़ 29 लाख रुपए की लागत से बने 100 बिस्तरीय मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) भवन का लोकार्पण किया। साथ ही 4 करोड़ 73 लाख रुपए की लागत से चांदाखेड़ी फंटा से खजुरिया मार्ग निर्माण कार्य का भूमि-पूजन भी किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से प्रदेश के स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी को धीरे-धीरे दूर किया जा सकेगा। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि पहले प्रदेश में सीमित संख्या में मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन अब प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन संस्थानों से प्रशिक्षित होकर निकलने वाले चिकित्सक प्रदेश में ही सेवाएं देंगे, जिससे आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि जिला चिकित्सालय मंदसौर में आज जो सुविधाएं जोड़ी गई हैं, वे क्षेत्र के नागरिकों के लिए बड़ी सौगात हैं और इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। लोक निर्माण मंत्री सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य भवन केवल एक इमारत नहीं है, बल्कि यह भविष्य की आशाओं का केंद्र है। यह विशेष रूप से माताओं और बहनों की सेवा के लिए समर्पित रहेगा तथा समाज के लिए प्रेरणादायक केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्य पर्यावरण संरक्षण को दृष्टिगत रखते हुए किये जा रहे हैं। बदलते हुए भारत में परिवर्तन को महसूस किया जा रहा है। सकारात्मक परिवर्तन देखा जा रहा है। विकास को नए पंख लगे हैं। विकास की धारा बह रही हैं। विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि सरकार निरंतर विकास कार्यों को गति दे रही है और विभिन्न क्षेत्रों में नई सौगातें प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े स्तर पर बजट आवंटन किया गया।जिसके परिणामस्वरूप सुविधाओं में व्यापक सुधार देखने को मिल रहा है।  सांसद बंशीलाल गुर्जर ने लोक निर्माण विभाग की कार्य प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि विभाग ने एक नई कार्य संस्कृति विकसित की है, जिसमें गुणवत्ता के साथ कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। लोकार्पण कार्यक्रम में ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत मरीजों को फूड बास्केट वितरित किए गए। इसका उद्देश्य टीबी मरीजों को पोषण सहायता प्रदान कर उनके स्वास्थ्य में सुधार लाना है। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारी सहित गणमान्यजन उपस्थित रहे।

मंत्री सारंग बोले – सहकारिता किसानों की आय, तकनीक और विश्वास में बढ़ोतरी का आधार बनी

भोपाल. सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि मध्यप्रदेश सहकारिता के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ते हुए देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है। राज्य में पेक्स के डिजिटलीकरण, व्यवसाय विविधिकरण, सदस्यता विस्तार और दुग्ध संघों की प्रगति ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी है। पेक्स कम्प्यूटरीकरण में देश में अग्रणी मध्यप्रदेश मंत्री सारंग ने बताया कि प्रदेश की सभी 4536 कार्यशील पेक्स का सफल कम्प्यूटरीकरण किया जा चुका है। ईआरपी सॉफ्टवेयर के माध्यम से कार्यप्रणाली पारदर्शी और आधुनिक बनी है। किसानों को एसएमएस के जरिए लेन-देन की जानकारी देने में मध्यप्रदेश देश में प्रथम है। साथ ही, ऑनलाइन और पेपरलेस सदस्यता सुविधा से किसानों को सरल और सुगम सेवाएं मिल रही हैं। व्यवसाय विविधिकरण से बढ़ रही आय मंत्री सारंग ने बताया कि पेक्स अब पारंपरिक गतिविधियों से आगे बढ़कर नए व्यवसाय अपना रही हैं। आईएफएफसीओ-एमसी आउटलेट, सांची पार्लर, पशुचारा और रिटेल स्टोर जैसे नवाचारों से समितियों की आय में वृद्धि हो रही है। आगामी वर्षों में 1500 से अधिक पेक्स में व्यवसाय विविधिकरण का लक्ष्य रखा गया है। सदस्यता अभियान से बढ़ेगी भागीदारी मंत्री सारंग ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 58 लाख से अधिक सदस्य हैं, जबकि 41 लाख नए सदस्य बनाने की अपार संभावनाएं हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए 10 लाख नए सदस्य बनाने का अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण, सस्ती कृषि सामग्री और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। दुग्ध संघों में ऐतिहासिक प्रगति मंत्री सारंग ने बताया कि एनडीडीबी के साथ हुए समझौते के बाद प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और संग्रहण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दूध उत्पादकों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया गया है और उनकी आय में भी वृद्धि हुई है। नए डेयरी प्लांट और बल्क मिल्क कूलर की स्थापना से डेयरी क्षेत्र को नई गति मिली है। सहकारिता से आत्मनिर्भरता की ओर मंत्री सारंग ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से किसानों, महिलाओं और ग्रामीण समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार का उद्देश्य सहकारिता को जन-जन तक पहुंचाकर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना है। बैठक में प्रमुख सचिव सहकारिता डी.पी. आहूजा, उपसचिव रानी बाटड़, प्रबंध संचालक अपैक्स बैंक मनोज गुप्ता, प्रबंध संचालक राज्य सहकारी संघ ऋतुराज रंजन, प्रबंध संचालक बीज निगम महेंद्र दीक्षित सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।