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लापरवाही पर गिरी गाज: Rajnandgaon में राजस्व निरीक्षक निलंबित

राजनांदगांव. शासकीय कार्यों में लापरवाही और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना के कारण खैरझिटी राजस्व निरीक्षक मंडल के राजस्व निरीक्षक अवधराम ठाकुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने की है। कार्यालय कलेक्टर, भू-अभिलेख शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) राजनांदगांव द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में पाया गया कि संबंधित राजस्व निरीक्षक ने अपने क्षेत्र के सीमांकन प्रकरणों को लंबे समय तक बिना किसी प्रगति के लंबित रखा। इस संबंध में जनसामान्य से शिकायत प्राप्त होने पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन अवधराम ठाकुर द्वारा संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की गई, जिसके तहत निलंबन की कार्रवाई की गई। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कार्यालय कलेक्टर, भू-अभिलेख शाखा, राजनांदगांव निर्धारित किया गया है।

कौशल और सामाजिक उद्यमिता से होगा भारत विकसित: राज्यपाल पटेल का बयान

कौशल और सामाजिक उद्यमिता से होगा भारत विकसित : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने पांचवें "समर्थ भारत कॉन्क्लेव" का किया शुभारंभ भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि कौशल आधारित सामाजिक उद्यमिता विकसित भारत का पथ है। इस दिशा में वैचारिक स्तर पर चिंतन की पहल समसामयिक और सराहनीय है। कॉन्क्लेव, शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी की समाप्ति के लिए समाधान का वैचारिक मंच बने। उन्होंने कहा कि कौशल और सामाजिक उद्यमिता से विकसित भारत निर्माण के चिंतन में सामाजिक एवं पर्यावरणीय चुनौतियों जैसे स्वच्छता, शिक्षा, जल संरक्षण, लैंगिक समानता, प्राथमिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के समाधान खोजने का प्रयास किया जाना चाहिए। राज्यपाल पटेल बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में पांचवें "समर्थ भारत कॉन्क्लेव" के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कॉन्क्लेव का आयोजन  “विकसित  भारत  के  निर्माण में कौशल विकास और सामाजिक उद्यमिता”  विषय पर किया गया है। राज्यपाल पटेल ने कॉन्क्लेव से पहले कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।    राज्यपाल पटेल ने कहा कि कॉन्क्लेव में कौशल विकास की प्रासंगिकता, शिक्षा–उद्योग-समन्वय, सामाजिक उद्यमिता विस्तार, ग्रामीण युवाओं के सशक्तिकरण, स्टार्ट-अप इको सिस्टम की मजबूती, महिला और वंचित वर्गों की सहभागिता का पथ प्रदर्शन पर बल दिया जाए। डिजिटल एवं तकनीकी कौशल, नीतिगत सहयोग और सतत विकास के संतुलित मॉडल पर विचार जरूरी है, ताकि आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता के ठोस उपाय खोंजें जाए। उन्होंने कहा समय की आवश्यकता है कि सरकारी, कॉर्पोरेट क्षेत्र एवं गैर-लाभकारी संगठन के समन्वित और एकजुट प्रयासों को नवाचारी सोच और सतत विकास के लिए, उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाए। राज्यपाल पटेल ने प्रतिभागियों से कौशल आधारित सामाजिक उद्यमिता के द्वारा समाज की समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशील और व्यवहारिक नवाचारों पर चिंतन का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर, समृद्ध, सशक्त और विकसित भारत की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है। स्किल इंडिया मिशन, स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया आदि योजनाओं से देश में सशक्त स्टार्ट-अप इको सिस्टम बना है। उन्होंने कहा कि जरूरी है कि हम समाज की आवश्यकताओं को पूरा करने नए और उपयोगी तरीके विकसित करें, ताकि गरीब और वंचित लोगों के जीवन में वास्तविक सुधार एवं खुशहाली आए। युवाओं को समावेशी विकास का सहभागी बनाएं राज्यपाल पटेल ने कहा कि हमारी लगभग 65 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। युवाओं को जमीनी स्तर से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्हें पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर, नई और रचनात्मक पहल के द्वारा आर्थिक परिवर्तन का माध्यम तथा समावेशी विकास का सहभागी बनाना होगा। डिजिटल एवं तकनीकी कौशल, नीतिगत सहयोग और सतत विकास के संतुलित मॉडल और आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समरसता के ठोस उपायों से परिचय करना होगा। राज्यपाल पटेल ने कहा कि तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था के लिए कौशलयुक्त मानव संसाधन और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली सोच समय की मांग है। शिक्षण संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि शिक्षा व्यवस्था तकनीकी, प्रबंधकीय और उद्यमशील क्षमतावान ऐसे युवा तैयार करें, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सफल हो सकें। राज्यपाल पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर 2 दिवसीय आयोजन का शुभारंभ किया। वोकेशनल ट्रेनर्स को सम्मानित किया। उनका आईसेक्ट के चान्सलर संतोष चौबे ने पुष्प-गुच्छ और अंगवस्त्रम् भेंट कर स्वागत किया। स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। स्वागत उद्बोधन, स्कोप ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी के चान्सलर डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने दिया। आईसेक्ट के चान्सलर संतोष चौबे ने संस्थान की स्थापना से दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में किए गए कौशल और सामाजिक उद्यमिता प्रयासों की विस्तार से चर्चा की। आभार स्कोप ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी के कुलगुरू डॉ. विजय सिंह ने व्यक्त किया। इस अवसर पर रविन्द्र नाथ टैगोर यूनिवर्सिटी के वी.सी. डॉ. आर.पी. दुबे, वाधवानी फाउंडेशन के कर्नल संतोष, प्रो. चान्सलर डॉ. अदिति चतुर्वेदी और विषय-विशेषज्ञ उपस्थित थे।  

मध्यप्रदेश को सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए समन्वित प्रयास करें: मंत्री कुशवाह

चिंतन शिविर संपन्न मध्यप्रदेश को सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिये करें समन्वित प्रयास : मंत्री कुशवाह समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना हम सब का दायित्व मैदानी अमले के सुझावों को योजनाओं के क्रियान्वयन में किया जाएगा शामिल भोपाल  सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायन सिंह कुशवाह ने कहा है कि मध्यप्रदेश को सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए सभी अधिकारी-कर्मचारी समन्वय और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। विभाग के मैदानी अमले की योजनाओं और कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर उतारने में भागीदारी कैसे सुनिश्चित की जाए, योजनाओं को लागू करने के साथ नीति निर्माण में उनके सुझाव को कैसे शामिल किया जा सकता है इस विषय पर विस्तृत विचार विमर्श के लिये सामाजिक न्याय विभाग द्वारा विभागीय चिंतन शिविर का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय विभाग मानवीय संवेदनाओ से जुड़ा विभाग है। इसके माध्यम से हम कमजोर और असहाय लोगों की सहायता कर सकते है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन की सेवा ईश्वर सेवा से कम नहीं है। मंत्री कुशवाह ने कहा कि राज्य सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुँचे। उन्होंने कहा कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। मंत्री कुशवाह ने कहा कि विभागीय योजनाओं के प्रति व्यापक जनजागरूकता बढ़ाई जाए, जिससे अधिक से अधिक पात्र हितग्राही लाभान्वित हो सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चिंतन शिविर में विभागीय कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए मंत्री ने निर्देश दिए कि जिलों में लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण किया जाए। साथ ही, हितग्राहियों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए प्रक्रियाओं को सरल एवं सुगम बनाया जाए। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों, दिव्यांगजन एवं वंचित समुदायों के सशक्तिकरण के लिए विभाग सतत प्रयासरत है। अधिकारियों को सेवा भाव के साथ कार्य करते हुए जनसमस्याओं का संवेदनशीलता एवं प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है। वृद्धजनों के लिए वित्तीय एवं डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे चिंतन शिविर में प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने विभाग की आगामी एक वर्ष की कार्ययोजना के महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शासकीय और अशासकीय योजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्वालिटी ऑडिट ऐप के माध्यम से नियमित जांच की जाएगी, अटल अभ्युदय योजना के अंतर्गत वृद्धजनों के लिए वित्तीय एवं डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। साथ ही, प्रत्येक जिले में ट्रांसजेंडर जिला बोर्ड तथा भिक्षावृत्ति की निगरानी के लिये जिला स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। नए जिलों में डीडीआरसी (जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र), नशामुक्ति केंद्र एवं वृद्धाश्रम स्थापित करने की कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2027 तक नशामुक्त भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रदेशभर में विशेष नशामुक्ति अभियान चलाया जाएगा तथा नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग्स डिमांड के अंतर्गत प्रत्येक जिले में विस्तृत कार्ययोजना बनाई जाएगी। साथ ही जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्रों को वन स्टॉप सेंटर के रूप में विकसित करने का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण कृष्ण गोपाल तिवारी ने कहा कि योजनाओं के जमीनीस्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी विभागीय अमले पर है उनकी कार्यक्षमता और संवेदनशीलता से ही विभागीय लक्ष्यों की पूर्ति संभव होगी। उन्होंने अमले से अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य करने की अपेक्षा की। चिंतन शिविर में आये जिले के अधिकारियों के 5 समूह गठित कर नशामुक्त भारत, वृद्धाश्रम व अन्य संस्थाओं के संचालन, भिक्षुक गृह और ट्रांसजेंडर से संबंधित योजना के संचालन, शासकीय और अशासकीय संस्थाओं से संचालन और गुणवत्ता नियंत्रण तथा दिव्यांगजन पुर्नवास केन्द्र तथा निराश्रित निधि के उपयोग और प्रक्रिया विषय पर सुझाव मांगे गये। शिविर में प्रदेश के सभी जिलों से आए अधिकारियों ने जमीनी स्तर पर कार्य करते समय आने वाली समस्याओं, चुनौतियों एवं अनुभवों को साझा किया। शिविर का उद्देश्य प्रक्रियात्मक जटिलताओं, संसाधनों की कमी तथा समन्वय संबंधी मुद्दों को समझकर उनके समाधान के लिये व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करना रहा, जिससे योजनाओं का लाभ सुगमता एवं समयबद्ध तरीके से पात्र हितग्राहियों तक पहुँच सुनिश्चित की जा सकेगा। चिंतन शिविर में निःशक्त जन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया, प्रदेश संयोजक दिव्यांगजन कल्याण प्रकोष्ठ संदीप रजक सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

‘अब सिस्टम बदलने का वक्त’: Bhagwant Mann का बड़ा बयान, मुफ्त सुविधाएं रहेंगी जारी

चंडीगढ़. देश की राजनीति में भगवंत मान एक मात्र एसे मुख्यमंत्री हैं जो स्टेज से लेकर स्टेट तक को लीड कर रहे हैं। बतौर कलाकार मुख्यमंत्री भगवंत मान की ताकत ‘पोलटिकल सटायर’ हुआ करती थी। जो राजनीतिक सिस्टम पर चोट करती थी। 2022 में भगवंत मान मुख्यमंत्री बने तो उनके हाथों में हरा कलम आ गया। बतौर कलाकार मैं अपने शब्दों से सिस्टम पर चोट करता था। लोगों ने हाथों में हरा कलम जब से थमाया है। तब से मैं सिस्टम को बदल रहा हूं। ताकि सिस्टम में सुधार हो। विचार मंच के दौरान ‘चुनौतियां और राह’ पर बोलते हुए भगवंत मान ने कहा कि 70 साल का घाटा चार वर्षों में पूरा नहीं किया जा सकता। आम आदमी पार्टी ने भले ही चुनाव में लोगों से किए गए गारंटियों को पूरा कर दिया हो लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। इस दौरान उन्होंने न अपने निजी जीवन से लेकर पंजाब के राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर खुल कर विचार रखे। गरीबों को मिलने वाली मुफ्त योजना जारी रहेगी मु्ख्यमंत्री ने कहा कि जब आम आदमी पार्टी ने 300 यूनिट फ्री बिजली का वायदा किया तो कहा गया कि ‘रेवड़ियां’ बांट रहे हैं। उन्होंने कहा ‘फिर 15 लाख का पापड़ पहले किसने बेचा था। अब कह रहे हैं कि जुमला था। नेताओं का तो टोल भी फ्री है और गाड़ी भी। तेल भी फ्री हैं जो टेलीफोन का बिल भी। जब गरीबों को बिजली, राशन, ईलाज, बस सफर मिलता हैं तो इन नेताओं को दर्द क्यों होता है। गरीब आदमी भले ही डायरेक्ट टैक्स नहीं देता लेकिन इन डायरेक्ट टैक्स तो देता ही है। गरीब आदमी के चाय से लेकर रात को सोते समय चलने वाले पंखे पर भी टैक्स है।’ उन्होंने कहा कि अंबानियों का जब कर्जा माफ हो जाता हैं तो गरीबों को सहूलियत क्यों नहीं दिया जा सकता है। यह योजनाएं बंद नहीं होगी। क्योंकि जब आम लोगों को यह भरोसा हो जाए कि उसके द्वारा दिए जाने वाला इन-डायरेक्ट का लाभ उन्हें ही मिलेगा तो उन्हें टैक्स देने का दुख नहीं होता। फसली विविधिकरण संभव नहीं, धान होगा तो पराली भी होगी किसानों को पारंपरिक खेती से मुक्ति दिलवाने के उठ रहे सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञापन देने मात्र से फसली चक्र नहीं टूटने वाला है। इसके लिए किसानों को बदली हुई फसल का मूल्य देना होगा। दीवारों पर हमने बहुत लिखा कि ‘हम दो हमारे दो’ तो इससे क्या जनसंख्या नियंत्रित हो गई। पराली में लगने वाली आग के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि असली कारण को समझना ही होगा। अक्टूबर-नवंबर में दशहरा-दीपावली और दशहरा एक साथ आते हैं। किसान धान की पराली में इसलिए आग लगाता हैं क्योंकि उसे 10 से 12 दिन के भीतर गेहूं की फसल लगानी होती है। जब पंजाब 185 लाख मिट्रिक टन धान सेंट्रल पूल में देता हैं तो पंजाब बहुत अच्छा लेकिन इसके साथ पराली भी तो होगी। जब किसान पराली जलाते हैं तो कहा जाता हैं कि किसानों पर पर्चा दर्ज कर दो। 10 दिन से किसान अन्नदाता से अपराधी बन जाता है दस दिन पहले जो किसान अन्नदाता होता हैं 10 दिन बाद ही वह अपराधी बन जाता है। किसानों को पराली संभालने का इंसेंटिव देना होगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में पराली जलती भी नहीं हैं कि दिल्ली में हंगामा शुरू हो जाता है। एनजीटी के सेवानिवृत्त जज ने भी स्पष्ट किया कि पंजाब को यूं ही बदनाम किया जाता है। पंजाब के धुएं से दिल्ली को असर नहीं पड़ता। लेकिन जज साहब ने यह बात तब कहीं जब वह सेवानिवृत्त हो गए। सर्विंग में होते हुए उन्होंने यह बात नहीं कहीं। मुख्यमंत्री ने मार्डन खेती पर विशेष जोर दिया। पंजाब के छात्र जमीन पर नहीं बैठते मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में शिक्षा क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। स्कूल आफ एमिनेंस तो बने ही हैं साथ ही पंजाब का अब कोई भी ऐसा स्कूल नहीं हैं जहां पर बच्चे जमीन पर पढ़ते हो। कोई स्कूल ऐसा नहीं हैं जो बिना चाहरदिवारी के हो। स्कूलों में लैब बने हैं और सकरारी स्कूल के बच्चे जेईई और नीट की परीक्षा पास कर रहे हैं। यह वहीं स्कूल जहां दो-तीन साल पहले तक बच्चों को जेईई और नीट के बारे में पता तक नहीं था। ड्रग्स को लेकर पंजाब बदनाम किया जा रहा ड्रग्स के मुद्दे पर उठे सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, बदनाम तो पंजाब को किसा जाता हैं लेकिन 3000 किलों ड्रग्स मुंद्रा पोर्ट से पकड़ी जाती है। पंजाब सरकार ड्रग्स के खिलाफ मुहीम चला रही है। वहीं, नए इनोवेशन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था जब प्रति दिन 15 मौतें सड़कों पर हो रही थी। लोग इसे कुदरती आपदा मानते थे लेकिन यह मानवीय आपदा थी। मुख्यमंत्री ने कहा जब मैंने सड़क सुरक्षा फोर्स का गठन किया तो सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या में कमी आई। आज प्रति वर्ष 2600 कीमती जानें बचाई जा रही है।

भोपाल से 24 ट्रेनों का डायवर्ट रूट, 30 अप्रैल तक यात्रियों को झेलनी होगी मुश्किलें

भोपाल  भोपाल रेलवे स्टेशन पर समर सीजन का असर साफ नजर आ रहा है। जहां प्लेटफार्म पर यात्रियों की गहमागहमी बनी रहती है वहीं सभी ट्रेनें खचाखच भरी आ रहीं हैं। समर सीजन में यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है पर इसके बावजूद दिक्कत कम नहीं हुई। रेलवे के मेंटेनेंस ने यात्रियों को मिलने वाली राहत को घटा दिया है। एक बार फिर रेलवे मेंटेनेंस के चलते भोपाल से गुजरने वाली कई ट्रेनों को डायवर्ट कर दिया गया है। इससे यात्रियों की परेशानी खासी बढ़ गई है। भोपाल रेल मंडल के अधिकारियों के मुताबिक, मेंटेनेंस के चलते भोपाल से गुजरने वाली 24 ट्रेनों को डायवर्ट किया गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार दानापुर मंडल एवं प्रयागराज स्टेशन पर होने वाले निर्माण कार्य के चलते इन ट्रेनों को अलग-अलग तारीखों पर डायवर्ट किया गया है। प्रयागराज रूट पर जाने वाली ट्रेनें खासी प्रभावित हुई हैं। ऑनलाइन चेकिंग करने के बाद ही अपने रेल यात्रा शुरू करें रेलवे की ओर से बताया गया है कि ये ट्रेन 30 अप्रेल तक डायवर्ट रहेंगी। यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे द्वारा ये सुझाव भी दिया गया है कि वे ऑनलाइन चेकिंग करने के बाद ही अपने रेल यात्रा शुरू करें। प्रयागराज रूट पर जाने वाली ये ट्रेनें हुईं प्रभावित, रेलवे ने रूट किया डायवर्ट 15560 अहमदाबाद- दरभंगा एक्सप्रेस 15559 दरभंगा- अहमदाबाद एक्सप्रेस 15018 गोरखपुर- लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस 15017 लोकमान्य तिलक-गोरखपुर एक्सप्रेस 15267 रक्सौल- लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस 15268 लोकमान्य तिलक-रक्सौल एक्सप्रेस 11033 पुणे-दरभंगा एक्सप्रेस 11034 दरभंगा-पुणे एक्सप्रेस 01025 दादर- बलिया स्पेशल 01027 दादर- गोरखपुर स्पेशल 01026 बलिया- दादर स्पेशल 01028 गोरखपुर- दादर स्पेशल 22131 पुणे-बनारस एक्सप्रेस 22132 बनारस-पुणे एक्सप्रेस 11060 छपरा- लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस 18609 रांची-एलटी एक्सप्रेस 18610 एलटी-रांची एक्सप्रेस। रेलवे ने स्थायी समाधान निकालने के तहत प्लेटफार्म नंबर 6 के साइड रेन बसेरा के पास स्थायी होल्डिंग एरिया बनाने की तैयारी की इधर भोपाल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। अधिकारियों ने बताया कि स्टेशन पर करीब 3000 यात्रियों के बैठने की क्षमता वाला पक्का होल्डिंग एरिया बनाया जाएगा। यह करीब 10 हजार वर्गमीटर का होगा। खासतौर पर सिंहस्थ 2028 को देखते हुए ये निर्णय लिया गया है। अभी किसी आयोजन, त्योहार आदि पर यात्रियों की संख्या बढ़ने पर प्लेटफॉर्म के बाहर टेंट लगाकर उनके बैठने के इंतजाम किए जाते हैं। रेलवे ने इसका स्थायी समाधान निकालने के तहत प्लेटफार्म नंबर 6 के साइड रेन बसेरा के पास स्थायी होल्डिंग एरिया बनाने की तैयारी की है।

नर्मदापुरम जनसुनवाई में कलेक्टर का दिल जीतने वाला कदम, गर्मी में फरियादियों के लिए ठंडा पानी और शरबत

नर्मदापुरम  मध्य प्रदेश के सभी जिलों में हर मंगलवार को जनसुनवाई होती है. जहां कलेक्टर, एसपी व बड़े अधिकारी लोगों की परेशानी सुनते हैं और उसका समाधान करते हैं. जनसुनवाई को लेकर अलग-अलग तरह की खबरें देखने मिलती है. वहीं नर्मदापुरम में कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने जनसुनवाई को संवेदनशील और जनहितैषी बनाया है. आमतौर पर सरकारी दफ्तरों में अपनी समस्याएं लेकर आने वाले लोगों को लंबी प्रतीक्षा और असुविधाओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन अब यह तस्वीर बदलती नजर आ रही है।  जनसुनवाई में पहले ठंडा पानी और शरबत, फिर समस्याएं कलेक्टर सोमेश मिश्रा के पदभार संभालने के बाद जनसुनवाई में एक अनोखा इनोवेशन शुरू किया गया है. अब जनसुनवाई में पहुंचने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पहले ठंडा पेयजल, शरबत उपलब्ध कराया जाता है और आराम से बैठने के लिए कुर्सी दी जाती है. इसके बाद उनकी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना जाता है और आवेदन लिए जाते हैं. यह छोटा सा बदलाव आमजन के लिए बड़ी राहत लेकर आया है. गर्मी और लंबी कतारों के बीच ठंडा पानी और बैठने की सुविधा न केवल लोगों को सुकून देती है, बल्कि यह प्रशासन की संवेदनशीलता को भी दर्शाती है।  कलेक्टर ने नेमप्लेट पर लिखवाया अपना नंबर यह पहल इस बात का संकेत है कि शासन केवल आदेश देने तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं और आवश्यकताओं को समझने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है. इतना ही नहीं, कलेक्टर ने पारदर्शिता और पहुंच को बढ़ावा देने के लिए अपने कार्यालय के बाहर नेम प्लेट पर अपना मोबाइल नंबर भी अंकित करवाया है. इससे आमजन सीधे संपर्क कर सकते हैं और अपनी समस्याएं आसानी से साझा कर सकते हैं।  ठंडा पानी पीकर तरोताजा हुए लोग, फिर सुनाई समस्याएं मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में इस नई व्यवस्था का असर साफ दिखाई दिया. लोग पहले ठंडा पेयजल लेकर तरोताजा हुए, फिर उन्होंने अपनी समस्याएं रखी. इससे न केवल माहौल सकारात्मक बना, बल्कि लोगों में प्रशासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ. कुल मिलाकर, यह पहल दर्शाती है कि यदि प्रशासन चाहे तो छोटे-छोटे कदमों के माध्यम से भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. कलेक्टर सोमेश मिश्रा की यह पहल निश्चित रूप से अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकती है। 

जेलों में मोबाइल पर हाईकोर्ट की नाराज़गी, प्रशासन से पूछे तीखे सवाल

चंडीगढ़. नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने जहां आरोपित को नियमित जमानत दे दी, वहीं जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा के जेल प्रशासन को आत्ममंथन करने की जरूरत बताई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि कोई कैदी हिरासत में रहते हुए मोबाइल फोन के जरिये आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यह आदेश जस्टिस संजय वशिष्ठ की एकल पीठ ने आरोपित आकाश उर्फ रिंकू द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ता ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामले में नियमित जमानत की मांग की थी। मामला फतेहाबाद के भूना थाना में दर्ज एफआइआर से जुड़ा है, जिसमें 505 ग्राम हेरोइन बरामद होने के बाद कई आरोपितों के नाम सामने आए थे। जांच के दौरान मुख्य आरोपित मोहन लाल ने बताया था कि उसने यह नशीला पदार्थ दिल्ली क्षेत्र में एक विदेशी नागरिक से खरीदा था और इस सौदे में अन्य आरोपितों की वित्तीय भूमिका रही। पुलिस ने आगे की जांच में कई सह-आरोपितों को गिरफ्तार किया और याचिकाकर्ता को भी जांच में शामिल किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उसके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है और उसे केवल पुलिस रिकार्ड में शामिल होने के कारण फंसाया गया है। यह भी कहा गया कि जिस मोबाइल फोन को नष्ट करने का आरोप लगाया गया, वह कभी उसके कब्जे में था ही नहीं, खासकर तब जब वह पहले से ही न्यायिक हिरासत में था। अदालत ने रिकार्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कई आपराधिक मामले जरूर दर्ज हैं, लेकिन एनडीपीएस एक्ट में केवल एक ही मामले में सजा हुई है। अन्य मामलों में या तो वह बरी हुआ या सजा पूरी कर चुका है। सबसे अहम टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि यह चौंकाने वाला है कि एक कैदी जेल में रहते हुए अन्य आरोपितों से मोबाइल फोन के जरिये संपर्क में बताया जा रहा है, जबकि इसकी जानकारी जेल प्रशासन को नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि या तो आरोप झूठे हैं या फिर जेल प्रशासन की गंभीर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने आरोपित को जमानत देते हुए निर्देश दिया कि भविष्य में यदि वह समान गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसकी जमानत रद की जा सकती है। साथ ही, ट्रायल कोर्ट को मामले का स्वतंत्र और शीघ्र निपटारा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

आंगनवाड़ी सेवाओं को डिजिटल बनाने की मांग, Punjab में मोबाइल और पोषण ट्रैकर पर जोर

फतेहगढ़ साहिब. फतेहगढ़ साहिब में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासनिक परिसर के बाहर जोरदार रोष प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन आंगनवाड़ी कर्मचारी यूनियन पंजाब (सीटू) के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष हरजीत कौर ने जिला प्रशासन को संबोधित करते हुए कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए खरीदे गए नए मोबाइल फोन बिना किसी देरी के तुरंत वितरित किए जाएं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मोबाइल देने का फैसला लिया था, लेकिन लंबे इंतजार के बाद अब जाकर फोन खरीदे गए हैं। कर्मचारियों को मोबाइल देने की मांग हरजीत कौर ने आशंका जताई कि इन मोबाइल फोन को कार्यकर्ताओं को देने के बजाय अन्य सरकारी कार्यों जैसे बीएलओ ड्यूटी या नशा सर्वेक्षण के लिए दूसरे कर्मचारियों को दिया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कार्यकर्ता किसी भी हालत में इस्तेमाल किए हुए फोन स्वीकार नहीं करेंगी और उन्हें केवल सील बंद यानी डिब्बा बंद फोन ही चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने निजी मोबाइल फोन से ही कई सरकारी काम कर रही हैं, जिनमें पोषण ट्रैकर, एम सेवा और पीएमबीवाई जैसे अनुप्रयोग शामिल हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से मोबाइल उपयोग के लिए मात्र 153.84 रुपये मासिक भत्ता दिया जा रहा है, जो आज के समय में रिचार्ज खर्च के लिए भी पर्याप्त नहीं है। यूनियन ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनसे नए-नए कार्यों की अपेक्षा की जाती है, तो जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएं। यदि खरीदे गए मोबाइल फोन किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग किए गए, तो यूनियन इसकी जिम्मेदारी लेने से इनकार करेगी और आने वाले समय में संघर्ष को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन के अंत में कार्यकर्ताओं ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और जल्द से जल्द मांगें पूरी करने की मांग की।

जनता के बीच पहुंची Durg पुलिस, ‘पुलिस जन मित्र योजना’ से रिश्ते होंगे मजबूत

दुर्ग. पुलिस एवं आम नागरिकों के बीच संवाद, विश्वास एवं सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने थाना सुपेला एवं थाना खुर्सीपार क्षेत्र में “पुलिस जन मित्र योजना” का शुभारंभ किया. इस योजना के तहत दुर्ग पुलिस नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाव, डिजिटल सुरक्षा, महिला सुरक्षा, नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता, सूने मकानों की सुरक्षा एवं यातायात नियमों के पालन के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान कर रही है. विभिन्न जन-जागरूकता पोस्टर एवं मार्गदर्शिका के माध्यम से नागरिकों को हेल्पलाइन नंबर 1930 (साइबर फ्रॉड), 1091 (महिला सुरक्षा) एवं 1033 (नशा नियंत्रण) की जानकारी दी जाकर आवश्यक सुरक्षा उपायों एवं सावधानियों से अवगत कराया जा रहा है. यह पहल सामुदायिक पुलिसिंग को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसके माध्यम से नागरिकों को पुलिस कार्यों से जोड़ते हुए उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है. योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सहायता, बेहतर समन्वय एवं अपराधों की रोकथाम में सहायता प्राप्त होगी. आम नागरिकों से दुर्ग पुलिस की अपील दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे “पुलिस जन मित्र योजना” से जुड़कर कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें तथा साइबर अपराध, नशा, यातायात नियमों एवं व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति सजग रहें. किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देकर सुरक्षित एवं जागरूक समाज के निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें.

सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसे अधोसंरचना निर्माण तथा विकास के लिए 33 हजार 985 करोड़ रूपये की स्वीकृति

किसानों को ग्रामीण क्षेत्र की कृषि भूमि के भूअर्जन पर मिलेगा बाजार दर का 4 गुना मुआवजा सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसे अधोसंरचना निर्माण तथा विकास के लिए 33 हजार 985 करोड़ रूपये की स्वीकृति इन्दौख-रुदाहेड़ा सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 157 करोड़ 14 लाख रूपये की स्वीकृति छिन्दवाडा सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना में पुनर्वास के लिए 969 करोड़ रूपये के विशेष पुनर्वास पैकेज की स्वीकृति लोक निर्माण अंतर्गत विकास कार्यों के लिए 25,164 करोड़ रूपये की स्वीकृति निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना और शैक्षणिक संस्थानों के उन्नयन के लिए 2,190 करोड़ 44 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदेश में उन्नत चिकित्सा सेवाओं के लिए 5,479 करोड़ रूपये की स्वीकृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में परिजन आवास की स्थापना की स्वीकृति छठवें राज्य वित्त आयोग के कार्यों के संपादन के लिए 15 पदों के सृजन की स्वीकृति "मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम" के लिए 24 करोड़ रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ.यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में किसानों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए कृषि भूमि के भूअर्जन पर गुणन कारक (मल्टीफिकेशन फैक्टर) को दोगुना करते हुए 2.0 कर दिया गया है। इससे अब अधिग्रहित कृषि भूमि का मुआवजा किसानों को दोगुना के स्थान पर बाजार दर से 4 गुना प्राप्त होगा। यह निर्णय संपूर्ण प्रदेश की ग्रामीण क्षेत्र की कृषि भूमि के अधिग्रहण पर लागू होगा। मंत्रि-परिषद ने नगरीय सीमा में मुआवजा गुणन कारक को यथावत एक रखा गया है। मंत्रि-परिषद ने इसके साथ सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसे अधोसंरचना निर्माण तथा विकास के कार्यों के लिए लगभग 33 हजार 985 करोड़ रूपये की स्वीकृति भी दी है। भू-अर्जन पर बाजार दर का 4 गुना मुआवजा मिलने से किसानों को होगा जबरदस्त फायदा मंत्रि-परिषद ने किसानों के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए ' मध्यप्रदेश भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार नियम 2015 ' के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए गुणन कारक (Multiplication Factor) को बढ़ाकर 2.0 कर दिया गया है, जिससे किसानों को अब उनकी कृषि भूमि का बाजार दर से 4 गुना मुआवजा मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इस निर्णय से सिंचाई परियोजनाओं, सड़क, पुल, रेलवे और बांध निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित की जाने वाली कृषि भूमि पर किसानों को अधिक राशि मिल सकेगी। इससे न केवल विकास कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि भूमि देने वाले किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी व्यापक सुधार होगा। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में मंत्री तुलसीराम सिलावट, राकेश सिंह और चेतन्य कुमार काश्यप की उप-समिति ने अनुशंसा की थीं। उप-समिति ने अन्य राज्यों की नीतियों का अध्ययन करने के साथ ही विभिन्न् किसान संगठन क्रेडाई,सीआईआई और फिक्की से चर्चा के बाद यह रिपोर्ट तैयार की थी। सरकार के इस पारदर्शी और किसान-हितैषी निर्णय से प्रदेश के हजारों परिवारों को सीधा लाभ पहुँचेगा। इन्दौख-रुदाहेड़ा सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 157 करोड़ 14 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा उज्जैन जिले की इन्दौख- रुदाहेड़ा सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की लागत राशि 157 करोड़ 14 लाख रूपये, सैंच्य क्षेत्र 10,800 हेक्टेयर की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया है। परियोजना से झारड़ा तहसील के 35 ग्रामों को सिंचाई सुविधा का लाभ होगा। छिन्दवाड़ा सिंचाई काम्पलेक्स परियोजना में पुनर्वास के लिए 969 करोड़ रूपये के विशेष पुनर्वास पैकेज की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा छिन्दवाड़ा सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना में पुनर्वास के लिये स्वीकृत राशि 840 करोड़ 80 लाख रूपये के स्थान पर लगभग 969 करोड़ रूपये का विशेष पुनर्वास पैकेज स्वीकृति किया गया है। यह विशेष पैकेज त्वरित क्रियान्वयन व विस्थापितों के अपेक्षित सहयोग के लिए केन-बेतवा अन्तर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना के समकक्ष प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है। छिन्दवाड़ा सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना के अंतर्गत छिन्दवाड़ा जिले में संगम 1 बाँध, संगम 2 बाँध, रामघाट बांध एवं पांढुर्णा जिले में बेलेंसिग रिजर्वायर (पांढुर्णा) इस प्रकार कुल 4 बांध प्रस्तावित है, जिससे छिन्दवाड़ा एवं पांढुर्णा जिलों के 1,90,500 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी । परियोजना से छिन्दवाड़ा जिले के 369 एवं पांढुर्णा जिले के 259 ग्राम इस प्रकार कुल 628 ग्राम लाभान्वित होंगे। लोक निर्माण अंतर्गत विकास कार्यों के लिए 25,164 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा लोक निर्माण विभाग अंतर्गत विकास कार्यों के लिए 25,164 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति अनुसार म..प्र. सड़क विकास निगम के माध्यम से सड़कों का निर्माण को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखे जाने और संचालन के लिए 7 हजार 212 करोड़ रूपये, ग्रामीण सडकों एवं अन्य जिला मार्गों का निर्माण और उन्नयन के कार्य की निरंतरता के लिए 6 हजार 150 करोड रूपये, पुलों और सड़कों के उन्नयन के लिए 1 हजार 87 करोड़ रूपये, भवनों के मरम्मत और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 765 करोड़ रूपये और वृहद पुलों का निर्माण की योजना को सोलहवें वित्त आयोग की अवधि (1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031) तक में निरंतर रखे जाने और संचालन के लिए 9 हजार 950 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना और शैक्षणिक संस्थानों के उन्नयन के लिए 2,191 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत ग्राम क्षेत्रों में शासकीय विद्यालयों में कक्षा 6 वीं एवं कक्षा 9 वी में अध्ययनरत विद्यार्थियों को साइकिल प्रदाय करने से संबंधित निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर रखने के लिए 990 करोड़ रूपये और शिक्षक प्रशिक्षण संस्थाओं के वेतन भत्ते, कार्यालयीन व्यय एवं संस्थानों का सृदृढ़ीकरण से संबंधित 8 योजनाओं के संचालन के लिए 1,200 करोड़ 44 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना मध्यप्रदेश में वर्ष 2004-05 से संचालित की जा रही है। निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना अंतर्गत निर्धारित मापदण्ड अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत् विद्यार्थी जो कि शासकीय विद्यालयों में कक्षा 6 वीं एवं कक्षा 9 वी में अध्ययनरत् है, तथा वह जिस ग्राम का निवासी है उस ग्राम में शासकीय माध्यमिक / हाईस्कूल संचालित नहीं है तथा वह अध्ययन के लिए किसी अन्य ग्राम या शहर के शासकीय स्कूल में … Read more