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इंटरनेशनल ट्रेड शो में 300 जेन जी-जेन अल्फा के बीच कला-संस्कृति का ‘मुकाबला’

ग्रेटर नोएडा  कहीं नृत्य की थिरकन और समूहगान के सुर तो कहीं कैनवास पर उतरती संस्कृति। कहीं नई पीढ़ी के हाथ पारंपरिक कला और शिल्प को आकार देते दिखे। आधुनिक कारोबार और वैश्विक अवसरों के मंच यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में रविवार को जेन जी और जेन अल्फा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े नजर आए। कला एवं संस्कृति प्रतियोगिता में 28 से अधिक स्कूलों के 300 से अधिक विद्यार्थियों के बीच तीन विधाओं में मुकाबला हुआ। जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा ने सह-नोडल विद्यालय ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा के साथ प्रतियोगिता का आयोजन किया। प्रस्तुति कला, दृश्य कला और ‘हाथों की विरासत’ कला एवं शिल्प में कक्षा 6-8 और 9-12 के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। सुर-ताल में दिखे संस्कृति के रंग प्रस्तुति कला के कक्षा 6-8 वर्ग में एस्टर पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा की तोशिता प्रथम, श्रीराम मिलेनियम स्कूल, नोएडा की अर्शिया महाजन द्वितीय और ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा की ग्रुप सॉन्ग टीम तृतीय रही। कक्षा 9-12 में बेथनी कॉन्वेंट स्कूल की युविका एवं चार्वी प्रथम रहीं। बेथनी कॉन्वेंट स्कूल की संस्कृति पाठक एवं ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा की अर्पिता द्वितीय और जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा की सांची तृतीय रहीं। कैनवास पर उतरी विरासत दृश्य कला के कक्षा 6-8 वर्ग में स्पर्श इंटरनेशनल स्कूल की वर्णिका त्यागी प्रथम, ग्रेटर नोएडा वर्ल्ड स्कूल की अंशी मौर्य द्वितीय और जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा की कृतिका सिंह तृतीय रहीं। कक्षा 9-12 में स्पर्श इंटरनेशनल स्कूल की अंशिका शर्मा प्रथम, ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल की तान्या चौहान द्वितीय और रयान इंटरनेशनल स्कूल की चार्वी बघेल तृतीय रहीं। हाथों ने दिया परंपरा को आकार ‘हाथों की विरासत’ के कक्षा 6-8 वर्ग में स्पर्श इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा की सानवी सिंह प्रथम, ग्रेटर नोएडा वर्ल्ड स्कूल के लोविश भाटी द्वितीय और जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा की श्रद्धा तृतीय रहीं। कक्षा 9-12 में जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा के नवदीप तोमर एवं अनिका प्रथम, ग्रेटर नोएडा वर्ल्ड स्कूल के सार्थक द्वितीय और स्पर्श इंटरनेशनल स्कूल की सानवी सिंह तृतीय रहीं। जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा की सांची, कृतिका सिंह और श्रद्धा ने अपनी-अपनी विधाओं में तीसरा स्थान हासिल किया, जबकि नवदीप तोमर एवं अनिका ने पहला स्थान प्राप्त किया। इनके हाथ रही कमान आयोजन जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा की प्रधानाचार्या मीता भंडूला और ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा की प्रधानाचार्या अदिति बसु के मार्गदर्शन में हुआ। समन्वय जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा की हेडमिस्ट्रेस रितु भटनागर और ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल की सुशीला ने किया। निर्णायक मंडल में पी.टी. डी.यू. मॉडल इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. बिनिता, राजकीय उच्च विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. रजनी पिलानी, केंद्रीय विद्यालय, दिल्ली के कला विशेषज्ञ आर.पी. पॉल और DJIC, होशियारपुर की गीतांजलि शामिल रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों की मौलिकता, रचनात्मकता, प्रस्तुति और सांस्कृतिक विरासत की समझ की सराहना की।

बलरामपुर में गाय की हत्या कर मांस खाने का आरोप, 4 कटे पैर मिलने से खुला मामला; 9 गिरफ्तार

बलरामपुर रनहत: बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के चौकी रनहत अंतर्गत ग्राम चंदौरा में गोवंश (गाय) की हत्या कर उसका मांस पकाने और खाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए महिलाओं सहित कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। मामले का खुलासा तब हुआ जब प्रार्थी सुदन हड्डे निवासी चंदौरा ने चौकी में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी गाय 23 सितंबर को चरने के दौरान पास के जंगल में खो गई थी। तलाश के दौरान 24 सितंबर को गांव के ही धर्मजीत अगरिया के घर के पास बने सोख्ता गड्ढे में गाय के चार कटे हुए पैर बरामद हुए। घटना के बाद गांव में बुलाई गई पंचायत की बैठक में जब संदेहियों से पूछताछ की गई, तो आरोपियों ने गाय को मारकर पकाने और खाने का अपराध स्वीकार कर लिया। प्रार्थी की शिकायत और पंचायती निर्णय के बाद रनहत पुलिस ने दबिश देकर मामले में शामिल राजेश कुम्हरिया, प्रदीप चरगट, धर्मजीत अगरिया, रविशंकर, अमरसाय, नधुराम, कोमला, फुलबसिया और रेशमा उर्फ हुगली (सभी निवासी चंदौरा) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 325, 3(5) और छत्तीसगढ़ पशु परिरक्षण अधिनियम की धारा 4, 6, 10 के तहत अपराध दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की है।

एमपी ट्रांसको ने रतलाम में स्थापित किया 200 एमवीए का नया ट्रांसफार्मर : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने उत्तरी मालवा क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए रतलाम के 220 केवी सबस्टेशन की क्षमता में वृद्धि की है। रतलाम सबस्टेशन में वर्ष 1988 में स्थापित सेकंड जेनरेशन के 160 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर के स्थान पर नये थर्ड जेनरेशन तकनीक आधारित 220/132 केवी वोल्टेज स्तर का 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। रतलाम जिले का पहला 200 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर ऊर्जा मंत्री  तोमर ने बताया कि रतलाम जिले में पहली बार इतनी उच्च क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। इससे क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी तथा आगामी रबी सीजन के दौरान किसानों और अन्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। मालवा क्षेत्र का 5 वां और प्रदेश का 19 वां 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर एमपी ट्रांसको रतलाम -मंदसौर के अधीक्षण अभियंता  वाय आर मांडलेकर ने बताया कि रतलाम में ऊर्जीकृत हुआ यह पावर ट्रांसफार्मर प्रदेश का 19 वां 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर है। मालवा क्षेत्र में इस क्षमता का यह पांचवां पावर ट्रांसफार्मर है। इसके स्थापित होने से रतलाम 220 केवी सबस्टेशन की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 520 एमवीए हो गई है। जिले का 28 वां पावर ट्रांसफार्मर यह रतलाम जिले का 28वां पावर ट्रांसफार्मर है। एमपी ट्रांसको जिले में अपने 10 सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण व्यवस्था का संचालन कर रही है। इनमें 220 केवी के रतलाम, जावरा एवं सैलाना सबस्टेशन तथा 132 केवी के रतलाम, सैलाना, शिवगढ़, ताल, आलोट और बिलपांक सबस्टेशन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त नगरा में एक स्विचिंग सबस्टेशन भी संचालित है। नए पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने के साथ ही रतलाम जिले की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 2165 एमवीए की हो गई है।  

किसान आईडी में राजस्थान की बड़ी उपलब्धि, उत्तर भारत में 100% लक्ष्य पाने वाला पहला राज्य

जयपुर  राजस्थान ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश ने केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से निर्धारित 90.19 लाख किसान आईडी के लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा कर लिया है। इसके साथ राजस्थान उत्तर भारत में 100 प्रतिशत किसान आईडी लक्ष्य हासिल करने वाला पहला और देश का छठा राज्य बन गया है। वर्ष 2015-16 की कृषि गणना में प्रदेश में 76.54 लाख परिचालित जोत दर्ज थीं। इनके मुकाबले किसान आईडी की उपलब्धि करीब 118 प्रतिशत पहुंच गई है। इस आधार पर राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर है। किसान आईडी को आधार और भूमि अभिलेखों से जोड़ने के साथ जन आधार से भी जोड़ा गया है। करीब 83 लाख किसान जन आधार में किसान आईडी के साथ जुड़े हैं। राज्य में लगभग 99 प्रतिशत गांवों का भू-संदर्भीकरण पूरा हो चुका है। वहीं रबी 2025-26 के दौरान 2.72 करोड़ से अधिक भू-खण्डों पर डिजिटल फसल सर्वे किया गया। प्रदेश के कुल बोए गए क्षेत्र का करीब 62 प्रतिशत हिस्सा किसान आईडी के दायरे में आ चुका है। प्रधानमंत्री किसान योजना के लगभग 50 लाख लाभार्थियों को भी किसान आईडी से जोड़ा गया है। किसान आईडी के जरिए किसान की डिजिटल पहचान को उसकी कृषि भूमि और फसल संबंधी जानकारी से जोड़ा जा रहा है। इससे कृषि योजनाओं में पात्र लाभार्थियों की पहचान, उर्वरक और बीज वितरण, सूक्ष्म सिंचाई, कृषि उपकरण, फसल बीमा तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद जैसी व्यवस्थाओं को अधिक लक्षित बनाने में मदद मिलेगी। राज्य में एग्रीस्टैक आयुक्तालय की स्थापना की जा रही है। एग्रीस्टैक के आंकड़ों को विभिन्न विभागीय योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इससे किसानों को बार-बार समान दस्तावेज देने की जरूरत कम होने और सरकारी सेवाओं की पहुंच आसान होने की संभावना है। क्रम    उपलब्धि                                                    स्थिति 1    किसान आईडी का लक्ष्य                                90.19 लाख का शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा 2    राष्ट्रीय स्थिति                                                उत्तर भारत में पहला, देश में छठा राज्य 3    परिचालित जोत के मुकाबले उपलब्धि             करीब 118 प्रतिशत 4    किसान आईडी से पीएम-किसान लाभार्थी         करीब 50 लाख 5    बोया गया क्षेत्र                                               करीब 62 प्रतिशत क्षेत्र कवर 6    गांवों का भू-संदर्भीकरण                                   करीब 99 प्रतिशत पूरा 7    डिजिटल फसल सर्वे                                        2.72 करोड़ से अधिक भू-खण्ड 8    जन आधार से जुड़ाव                                        करीब 83 लाख किसान 9    डिजिटल एकीकरण                                          आधार, भूमि रिकॉर्ड, पीएम-किसान व अन्य कृषि योजनाओं से जुड़ाव 10    विशेष अभियान    1 से 30 सितंबर 2026 तक छूटे किसानों को जोड़ने का अभियान कृषि विभाग के अनुसार, छूटे हुए पात्र किसानों को किसान आईडी से जोड़ने के लिए 1 से 30 सितंबर तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में कृषि पर्यवेक्षकों की भागीदारी, पीएम-किसान लाभार्थियों को सूचना और अन्य स्तरों पर सत्यापन की व्यवस्था की गई है।

खाद्य प्रसंस्करण से किसानों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे: केशव प्रसाद मौर्य

ग्रेटर नोएडा जबूत स्थिति में है और बड़ी मात्रा में सब्जियां, फल तथा अन्य कृषि उत्पाद यहां उपलब्ध होते हैं। इन उत्पादों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग कर किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को गांव और जिले के स्तर तक मजबूत किया जाए। यू.पी. इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के अंतर्गत ‘खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023’ पर आयोजित विशेष सत्र को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मंडियों में बड़ी मात्रा में कृषि उत्पाद पहुंचते हैं, लेकिन उचित प्रसंस्करण एवं भंडारण की व्यवस्था नहीं होने से कई बार इनका बड़ा हिस्सा खराब हो जाता है। यदि कृषि उत्पादों का समय पर प्रसंस्करण किया जाए तो खाद्य पदार्थों की बर्बादी को कम करने के साथ किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य दिलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसमें पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन, परिवहन और निर्यात जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में अवसर उपलब्ध हैं। युवा, महिला उद्यमी और स्वयं सहायता समूह इस क्षेत्र में आगे आकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर जोर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश के खाद्य उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना होगा। यूरोप, अमेरिका सहित दुनिया के प्रमुख बाजारों में खाद्य उत्पादों के लिए निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन आवश्यक है। उद्यमियों को उत्पाद की गुणवत्ता के साथ आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि प्रदेश के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न नीतियों और योजनाओं के माध्यम से उद्यमियों को आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। जिला स्तर पर संबंधित विभागों के अधिकारी संभावित उद्यमियों को योजनाओं से जोड़ने तथा उद्योग स्थापित करने में सहायता कर रहे हैं। बैंकिंग एवं वित्तीय सहायता से संबंधित मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। कार्यक्रम में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों और लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर उपमुख्यमंत्री ने पॉलिसी के अंतर्गत चुनिंदा लाभार्थियों को चेक वितरण और सम्मानित किया। इस दौरान, यूपी सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कुमार कश्यप, राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा एवं अन्य गणमान्यजन की उपस्थिति रही। खाद्य प्रसंस्करण में निवेश और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर: बीएल मीणा यूपीआईटीएस-2026 में खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित विशेष सत्र को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को कृषि उत्पादन से जोड़ते हुए आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण क्षमता, कोल्ड-चेन और निर्यात के लिए व्यापक अवसर तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विभिन्न जिलों की स्थानीय कृषि उपज और उत्पादों को केंद्र में रखकर नए खाद्य प्रसंस्करण हब विकसित हो रहे हैं, जिससे किसानों के उत्पादों को मूल्यवर्धित स्वरूप देने के साथ रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने उद्यमियों से उपलब्ध सरकारी योजनाओं और प्रोत्साहनों का लाभ उठाकर आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने तथा स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश बढ़ने से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों से लेकर उद्यमियों तक पूरी मूल्य श्रृंखला को लाभ होगा।

छत्तीसगढ़ की बेटी ने अपनी प्रतिभा और परिश्रम से देश-प्रदेश का मान बढ़ाया : मुख्यमंत्री साय

रायपुर एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य और छत्तीसगढ़ की बेटी सु संजू देवी ने आज मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री  साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए सु संजू देवी को बधाई देते हुए उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सु संजू देवी को 51 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सु संजू देवी ने अपने उत्कृष्ट खेल, कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प से अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ और पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। उनकी यह उपलब्धि प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्रतिभाओं में अपार सामर्थ्य है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और प्रोत्साहन मिले, ताकि वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। मुख्यमंत्री ने सु संजू देवी से एशियन गेम्स के अपने अनुभवों और भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन के संबंध में आत्मीय बातचीत की। उन्होंने संजू देवी की मेहनत और खेल के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक खिलाड़ी की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं होती, बल्कि वह अपने साथ हजारों युवाओं के सपनों को भी नई उड़ान देती है। संजू देवी की सफलता प्रदेश के गांवों और छोटे शहरों में खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देख रहे बच्चों और युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ाएगी। उल्लेखनीय है कि जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 की महिला कबड्डी स्पर्धा में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल मुकाबले में ईरान को पराजित कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारतीय टीम की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि में छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की सु संजू देवी ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल और खिलाड़ियों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश के दूरस्थ अंचलों से निकलने वाली प्रतिभाओं को भी अपनी क्षमता निखारने और देश-दुनिया के खेल मंचों तक पहुंचने के पर्याप्त अवसर मिलें। सु संजू देवी जैसी प्रतिभाओं की उपलब्धियां इस संकल्प को और मजबूत करती हैं। सु संजू देवी ने सम्मान और प्रोत्साहन के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार से मिला यह प्रोत्साहन उन्हें आगे और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगा।

राष्ट्रधर्म, शिक्षा और लोक कल्याण को आजीवन समर्पित रहे महंत दिग्विजयनाथ

गोरखपुर  राष्ट्रीयता, कृतज्ञता, सांस्कृतिक स्वाभिमान और गुरु-परंपरा के प्रति अटूट निष्ठा की संवाहक गोरक्षपीठ में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पितरों (पूर्वजों) की स्मृति में अध्यात्म और राष्ट्रचेतना के स्वर गूंज रहे हैं। अवसर है युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का। गोरक्षपीठ में 23 सितंबर से श्रीमद्भागवत महापुराण कथा एवं 24 सितंबर से समसामयिक विषयों पर सम्मेलन जारी है। इसी क्रम में आश्विन कृष्ण तृतीया (मंगलवार, 29 सितंबर) को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं पुण्यतिथि पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में विशाल श्रद्धांजलि सभा गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में आयोजित होगी, जिसमें देशभर के अनेकानेक संतजन उपस्थित रहेंगे। आजीवन और स्मृतिशेष होकर भी अपने विचारों, संकल्पों और कार्यों से भावी पीढ़ी का मार्गदर्शन करने वाले, 1935 से 1969 तक नाथपंथ की विश्वविख्यात गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर रहे महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज को इतिहास 'युगपुरुष' के रूप में स्मरण करता है। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज न केवल गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी रहे, बल्कि उनका पूरा जीवन राष्ट्र, धर्म, अध्यात्म, संस्कृति, शिक्षा व समाजसेवा के जरिये लोक कल्याण को समर्पित रहा। तरुणाई से ही वह देश की आजादी की लड़ाई में जोरदार भागीदारी निभाते रहे तो देश के स्वतंत्र होने के बाद सामाजिक एकता और उत्थान के लिए। इसके लिए शैक्षिक जागरण पर उनका सर्वाधिक जोर रहा। महंत दिग्विजयनाथ का जन्म वर्ष 1894 में वैशाख पूर्णिमा के दिन चित्तौड़, मेवाड़ ठिकाना ककरहवां (राजस्थान) में हुआ था। उनके बचपन का नाम नान्हू सिंह था। पांच वर्ष की उम्र में 1899 में इनका आगमन गोरखपुर की गोरक्षपीठ में हुआ। अपनी जन्मभूमि मेवाड़ की माटी का प्रभाव था कि बचपन से ही उनमें दृढ़ इच्छाशक्ति और स्वाभिमान से समझौता न करने की प्रवृत्ति कूट-कूटकर भरी हुई थी। उनकी शिक्षा गोरखपुर में ही हुई और उन्हें खेलों से भी गहरा लगाव था। 15 अगस्त 1933 को गोरखनाथ मंदिर में उनकी योग दीक्षा हुई और 15 अगस्त 1935 को वह गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर बने। वह अपने जीवन के तरुणकाल से ही आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेते रहे। देश को स्वतंत्र देखने का उनका जुनून था कि उन्होंने 1920 में महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन के समर्थन में स्कूल छोड़ दिया। ब्रिटिश हुकूमत की तरफ से उन पर लगातार आरोप लगते थे कि वह क्रांतिकारियों को संरक्षण और सहयोग देते हैं। 1922 के चौरीचौरा के घटनाक्रम में भी उनका नाम आया लेकिन उनकी बुद्धिमत्ता के सामने ब्रिटिश हुकूमत को झुकना पड़ा और उन्हें रिहा कर दिया गया। श्रीराम मंदिर आंदोलन में नींव के पत्थर हैं ब्रह्मलीन महंतश्री अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण को लेकर हुए आंदोलनों में गोरक्षपीठ की महती भूमिका को सभी जानते हैं। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज इस आंदोलन में नींव के पत्थर हैं। 1934 से 1949 तक उन्होंने लगातार अभियान चलाकर आंदोलन को न केवल नई ऊंचाई दी, बल्कि 1949 में वह श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के नेतृत्वकर्ता भी रहे। 22-23 दिसंबर 1949 को अयोध्या में भगवान रामलला की मूर्ति प्रकट होने के नौ दिन पहले महंत दिग्विजयनाथ जी के नेतृत्व में अखंड रामायण पाठ का आयोजन शुरू हो गया था। रामलला के प्रकट होने के समय महंत जी स्वयं वहां उपस्थित थे। पांच सौ वर्षों के इंतजार के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम अपनी जन्मभूमि स्थित मंदिर में विराजमान हो चुके हैं। प्रभु रामलला के मंदिर निर्माण के लिए चले आंदोलन को उनके बाद उनके शिष्य महंत अवेद्यनाथ जी ने निर्णायक बनाया। एक सुखद संयोग यह भी है कि न्यायालय के निर्णय के बाद मंदिर निर्माण की जब शुभ घड़ी आई तब राज्य की सत्ता का नेतृत्व भी गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं। ऐसे में जब भी अयोध्या के श्रीराम मंदिर का जिक्र होगा तो वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर के दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी स्वत: सबको स्मरण होंगे।  शिक्षा की जलाई ज्योति से प्रकाशित हो रहा पूर्वांचल महंत दिग्विजयनाथ जी ने गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए शिक्षा की जो ज्योति जलाई, उससे आज पूरा पूर्वांचल प्रकाशित हो रहा है। शिक्षा क्रांति के लिए उन्होंने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। एक किराए के मकान में परिषद के अंतर्गत महाराणा प्रताप क्षत्रिय स्कूल शुरू हुआ। 1935 में इसे जूनियर हाईस्कूल की मान्यता मिली और 1936 में हाईस्कूल की भी पढाई शुरू हुई। नाम 'महाराणा प्रताप हाई स्कूल' हो गया। इसी बीच महंत दिग्विजयनाथ जी के प्रयास से गोरखपुर के सिविल लाइंस में पांच एकड भूमि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद को प्राप्त हो गयी और महाराणा प्रताप हाईस्कूल का केंद्र सिविल लाइंस हो गया तथा देश के आजाद होते समय यह विद्यालय महाराणा प्रताप इंटरमीडिएट कालेज के रुप में प्रतिष्ठित हुआ। 1949-50 में इसी परिसर में महाराणा प्रताप डिग्री कालेज की स्थापना महंतश्री के नेतृत्व में हुई। शिक्षा को लेकर उनकी सोच दूरदर्शी और निजी हित से परे थी। यही वजह थी कि उन्होंने 1958 में अपनी दो संस्थाओं महाराणा प्रताप डिग्री कालेज व महाराणा प्रताप महिला महाविद्यालय को गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु दान में दिया। बाद में परिषद की तरफ से उनकी स्मृति में महंत दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना की गई। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद द्वारा वर्तमान में चार दर्जन से अधिक शिक्षण संस्थाएं गोरखपुर क्षेत्र में संचालित हो रही हैं। इनमें प्राथमिक शिक्षा से लेकर विश्वविद्यालय, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा तक के प्रकल्प सम्मिलित हैं। राजनीति को भी लोक कल्याण का ध्येय माना महंत दिग्विजयनाथ जी ने राजनीति में भी गोरक्षपीठ की लोक कल्याण की परंपरा को ही ध्येय बनाया। 1937 में हिंदू महासभा में शामिल होकर उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की विधिवत शुरुआत की। महंत जी ने 1944 में हिंदू महासभा के प्रांतीय अधिवेशन का ऐतिहासिक आयोजन गोरखपुर में कराया। महासभा के राजनीतिज्ञ होने के कारण 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के मिथ्यारोप में उन्हें बंदी बना लिया गया, लेकिन सरकार को उन्हें 1949 में दस माह बाद ससम्मान बरी करना पड़ा। राष्ट्रहित में उन्होंने 1956 में पृथक पंजाबी राज्य के लिए मास्टर तारा सिंह के आमरण अनशन को सूझबूझ से समाप्त कराया। वह 1961 में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष (हिंदू राष्ट्रपति के रूप … Read more

जबलपुर में शीघ्र होगी विशेष संगोष्ठी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि महाकौशल और जबलपुर क्षेत्र के लिए समग्र विकास के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। संस्कारधानी जबलपुर पर माँ नर्मदा का विशेष आशीर्वाद है, जो जल, थल और भू-गर्भ में प्राकृतिक संपदाओं से  संपन्न है। हमारी सरकार ने महाकौशल क्षेत्र को तकनीकी विश्वविद्यालय और आधुनिक जू एंड रेस्क्यू सेंटर की सौगात दी है। राज्य सरकार जबलपुर सहित मंडला , डिंडौरी, बालाघाट, सिवनी,कटनी, पांढुर्णा, छिन्दवाड़ा और नरसिंहपुर में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रही है। लगभग 25 नई नीतियों के माध्यम से उद्यमियों को अनेक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इस क्षेत्र के उद्यमियों के सपनों को साकार करने के लिए पंख लगाने का कार्य सरकार करेगी।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री निवास के संवाद सभाकक्ष में महाकौशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स और जबलपुर व्यापारी संघ के प्रतिनिधियों से क्षेत्र के विकास को लेकर चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव व्यापारी का बंधुओं ने क्षेत्र के विकास के लिए जनहितैषी निर्णयों और प्रदेश में व्यापारी कल्याण बोर्ड गठित करने की पहल के लिए अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाकौशल में उद्योग-व्यापार की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। जबलपुर में औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ जल्द ही विशेष संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसका ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के पहले जबलपुर अंचल को पूरा लाभ मिल सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस प्रकार से ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन (टीएमजेड) विकसित किया जा रहा है, उसी प्रकार से आईटी और माइनिंग सेक्टर में जबलपुर को भी अवसर मिलना चाहिए। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को गति प्रदान करने के लिए इंदौर-भोपाल-जबलपुर को विशेष इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। यह एक ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. निवास में हुई चर्चा में उद्यमियों और व्यापारियों ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र, मेडिकल यूनिवर्सिटी, माइनिंग सेक्टर, लॉजिस्टिक, होटल इंडस्ट्री, टूरिज्म, ऑटोमोबाइल, अधोसंरचना विकास, एजुकेशन, अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विकास की संभावनाएं बताते हुए अपने विचार व्यक्त किए।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों को बताया कि हमारी सरकार भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित कर रही है। अब जबलपुर को भी मेट्रोपोलिटन सिटी बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य की दृष्टिगत रखते हुए जबलपुर के मास्टर प्लान के लिए व्यापारी बंधु अपने सुझाव दें। राज्य सरकार इन्हें मास्टर प्लान के ड्रॉफ्ट में शामिल करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यापारी संघ ने महाकौशल में लॉजिस्टिक हब विकसित करने के सुझाव पर सहमति जताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  कहा कि कटनी जिले में माइनिंग सेक्टर के विकास की अपार संभावनाएं हैं। इसलिए लॉजिस्टिक हब कटनी में बनाने से व्यवसायिक गतिविधियों को अधिक लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि महाकौशल क्षेत्र में स्थित कान्हा नेशनल पार्क टाइगर सफारी के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां पर्यटकों के लिए सभी सुविधाओं का विकास करने के साथ जबलपुर शहर में आधुनिक जू एंड रेस्क्यू सेंटर तैयार किया जा रहा है। यहां भी पर्यटक टाइगर को देखकर रोमांचित हो सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे व्यापारी बदलते दौर में युवा पीढ़ी को पारंपरिक व्यवसाय में तो दक्ष बनाएं, साथ ही उन्हें नए कार्यों और रोजगार सृजन के प्रकल्पों के लिए भी प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि जबलपुर शहर में डिफेंस प्रोडक्शन, आयरन प्रोडक्शन, माइनिंग, दूध उत्पादन और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपार क्षमताएं है। राज्य सरकार गरीब, किसान, युवाओं सहित सभी वर्गों के सपनों को पूरा करने के लिए संकल्पित है। उन्होंने व्यापारियों से आह्वान करते हुए कहा कि आइए, हम सभी मिलकर वीरांगना रानी दुर्गावती के जबलपुर अंचल को हर क्षेत्र में नंबर 1 बनाएं। लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जबलपुर और महाकौशल के विकास के नए आयाम स्थापित हुए हैं।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ नर्मदा के प्रसिद्ध भेड़ाघाट के समग्र विकास के लिए 87 करोड़ रुपए की सौगात दी है। जबलपुर को ढाई साल में बहुत कुछ मिला है। राज्य सरकार महाकौशल क्षेत्र की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए संकल्पित है। शहरी अधोसंरचनात्मक विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के मद्देनजर उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए स्वयं पैतृक मकान पर कुदाल चलाकर प्रदेशवासियों के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उद्योगपति  रवि गुप्ता ने कहा कि जबलपुर और महाकौशल में औद्योगिक विकास को रफ्तार बढ़ाने की आवश्यकता है। किसी क्षेत्र की आर्थिक स्थिति ही विकास को मापने का पैमाना होती है। जबलपुर में विभिन्न सेक्टर्स की इंडस्ट्री स्थापित करने के लिए पर्याप्त लैंड बैंक उपलब्ध है। संवाद के दौरान व्यापारी संघ के अन्य पदाधिकारियों ने होटल इंडस्ट्री को प्रोत्साहित करने, रेरा नियमों को शिथिल करने, रेडिमेड कॉन्क्रीट मटैरियल को उद्योग का दर्जा देने, वन उत्पादों के प्रसंस्करण, पर्यटन सुविधाओं और रोड नेटवर्क को विस्तार देने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री कार्यालय और औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, एमपीआईडीसी के एमडी  चंद्रमौली शुक्ला, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसंपर्क  मनीष सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज के सभागार में बाल मेला सम्मान समारोह, मुख्यमंत्री योगी ने करीब 70 प्रतिभावान बच्चों को किया सम्मानित

 गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सवालों के जवाब दे सकता है और काम आसान कर सकता है, लेकिन सवाल करना अच्छी किताब ही सिखाएगी। तकनीक का उपयोग करें, लेकिन उस पर पूरी तरह निर्भर न हों। अच्छी पुस्तकें और समाचार पत्र पढ़ें और नई चीजों को जानने की जिज्ञासा बनाए रखें। मुख्यमंत्री योगी दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज के सभागार में एक मीडिया हाउस की ओर से आयोजित बाल मेला सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विज्ञान मॉडल, चित्रकला, निबंध समेत विभिन्न प्रतियोगिताओं के करीब 70 विजेता छात्र-छात्राओं को मेडल पहनाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में करीब 500 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश बदनाम प्रदेश था। यूपी के नाम से लोग चौंकते थे और युवाओं के सामने पहचान का संकट था। अकेले यूपी पुलिस में दो लाख से अधिक पद खाली थे। सरकार बनने के बाद भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया और प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाई गई। उन्होंने कहा कि साढ़े नौ वर्षों में विभिन्न विभागों में साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई। अकेले यूपी पुलिस में 2.30 लाख से अधिक भर्तियां हुई हैं। इन भर्तियों की पारदर्शिता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। पहले दंगे और कर्फ्यू, अब सुरक्षित प्रदेश मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले हर दूसरे दिन दंगे होते थे और महीनों कर्फ्यू रहता था। आज उत्तर प्रदेश कर्फ्यू, दंगा और उपद्रव से मुक्त सुरक्षित प्रदेश है। सामर्थ्य पहले भी थी, लेकिन करने की इच्छाशक्ति नहीं थी। आज प्रयास हो रहा है तो परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कभी उत्तर प्रदेश देश के पिछड़े राज्यों में गिना जाता था। आज यह शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय तीन गुना हुई है। 120 से बढ़कर 24 हजार से अधिक स्टार्टअप मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में केवल 120 स्टार्टअप थे। आज इनकी संख्या 24 हजार से अधिक है। अब यूपी का युवा केवल नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि स्टार्टअप के जरिए दूसरों को नौकरी देने वाला भी बन रहा है। गोरखपुर के टेराकोटा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट से कारीगरों को बाजार मिला है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 2,400 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं और 90 देशों से 650 से अधिक विदेशी खरीदार पहुंचे हैं। 550 खिलाड़ियों को नौकरी, अगले सप्ताह 500 और मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सरकार खेलों में करियर बनाने वाले युवाओं को भी सहयोग दे रही है। ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले प्रदेश के खिलाड़ी को छह करोड़ रुपये के साथ सरकारी नौकरी दी जाती है। अब तक 550 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है और अगले सप्ताह 500 से अधिक खिलाड़ियों को फिर नौकरी दी जाएगी। उन्होंने हॉकी खिलाड़ी ललित उपाध्याय और राजकुमार पाल का उदाहरण देते हुए कहा कि पदक जीतने के बाद दोनों को सीधे पुलिस उपाधीक्षक बनाया गया। अंकों के दबाव में बच्चों का खेलना न हो बंद मुख्यमंत्री योगी ने अभिभावकों से बच्चों पर अंकों का अनावश्यक दबाव नहीं बनाने को कहा। बोले कि अंकों के पीछे उतना ही भागें, जितना मानसिक संतुष्टि दे सके। दबाव ऐसा नहीं होना चाहिए कि बच्चे का खेलना, सोना और खाना-पीना प्रभावित हो जाए। उन्होंने स्कूल-कॉलेजों में समाचार पत्र मंगवाने पर जोर दिया। कहा कि हिंदी और अंग्रेजी के समाचार पत्र पढ़ने से भाषा और व्याकरण सुधारने के साथ नई चीजों को जानने का अवसर मिलता है। असफलता से सीखें, प्रयास नहीं छोड़ें मुख्यमंत्री योगी ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि वह वायुसेना के फाइटर पायलट बनना चाहते थे, लेकिन सफल नहीं हुए। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आगे चलकर मिसाइल मैन तथा देश के राष्ट्रपति बने। कवि सोहनलाल द्विवेदी की रचना कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती का उल्लेख करते हुए बच्चों से लगातार प्रयास करने को कहा। मुख्यमंत्री ने बच्चों से अपने शहर की विरासत को जानने को भी कहा। गोरखनाथ मंदिर, गीता प्रेस, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और रामगढ़ताल का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चे वहां की व्यवस्था और इतिहास को समझें। सम्मान पाने में बेटियां आगे मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सम्मान पाने वाले बच्चों में बेटियों की संख्या अधिक है। बेटियों को अवसर मिले तो वे अपनी प्रतिभा के बल पर सब कुछ कर सकती हैं। उन्होंने सांसद रवि किशन से बच्चों को शूटिंग स्थल पर ले जाकर फिल्म निर्माण की प्रक्रिया दिखाने को भी कहा। सांसद रवि किशन ने कहा कि सम्मान के लिए ऐसे बच्चों को चुना गया है, जिन्होंने कुछ अलग किया है। गोरखपुर में बच्चों को आगे बढ़ने के लिए हर तरह की सुविधा उपलब्ध है। कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित कार्यक्रम में सांसद रवि किशन शुक्ला, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा समेत शिक्षक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

पटना में आवासीय इलाकों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कार्रवाई की तैयारी, 24 कॉलोनियां चिन्हित

पटना  आवासीय क्षेत्र में गैर आवासीय गतिविधियों के मामले में राजधानी की 24 आवासीय कॉलोनियां नगर निगम के रडार पर है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में यहां सबसे पहले कार्रवाई हो सकती है। मास्टर प्लान 2031 में इन कॉलोनियों के नाम दर्ज हैं। इनमें बिहार सरकार की 11, केंद्र सरकार की तीन और निजी 10 कॉलोनियां शामिल हैं। बिहार सरकार की कालोनियों राजवंशी नगर, शास्त्री नगर, गर्दनीबाग, श्रीकृष्ण पुरी, पाटलिपुत्र कॉलोनी , कंकड़बाग कॉलोनी , बहादुरपुर कॉलोनी, राजेंद्र नगर कॉलोनी, हनुमान नगर, छज्जूबाग तथा सीडीए कॉलोनी शामिल हैं। इसी प्रकार केंद्र सरकार की कालोनियों में पीएनटी कॉलोनी , राजस्व कॉलोनी तथा आरबीआइ कॉलोनी शामिल हैं। वहीं निजी कालोनियों में आशियाना नगर, कृषि नगर, पुलिस कॉलोनी, बीएम कॉलोनी, एजी कॉलोनी, राजीव नगर, बुद्धा कॉलोनी, श्रीकृष्ण नगर (आइएएस) कॉलोनी, आनंदपुरी तथा एमएमए फ्लैट कॉलोनी शामिल हैं। कार्रवाई की तैयारी बता दें कि आवासीय क्षेत्रों में मकानों और परिसरों के व्यावसायिक इस्तेमाल के मामले में नगर निगम ने 27,395 संपत्तिधारकों को नोटिस जारी किया है। संबंधित अंचल कार्यालयों की ओर से नोटिस का तामिला भी कराया जा चुका है। इस मामले में पटना की महापौर सीता साहू को भी नगर निगम की ओर से नोटिस दिया जा चुका है। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ऐसे मामलों और स्थलों को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए सभी अंचलों को निर्देशित किया गया है। जिन मामलों में स्थिति स्पष्ट है, वहां नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, जिन मामलों या क्षेत्रों में अभी तक निर्धारण नहीं हुआ है, उन सभी बिंदुओं और आदेश के प्रविधानों की विस्तृत समीक्षा (रिव्यू) की जा रही है। समीक्षा के बाद नियमों के तहत आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। शहर में 47.55 प्रतिशत क्षेत्र आवासीय मास्टर प्लान के अनुसार, नगर निगम क्षेत्र की कुल 104.22 वर्ग किलोमीटर जमीन में सबसे अधिक हिस्सा आवासीय उपयोग में है। शहर की 49.56 वर्ग किलोमीटर जमीन आवासीय है, जो कुल क्षेत्रफल का 47.55 प्रतिशत है। इसके बाद 18.40 वर्ग किलोमीटर (17.66 प्रतिशत) जमीन खाली या कृषि उपयोग में है। 10.61 वर्ग किलोमीटर (10.18 प्रतिशत) जमीन सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक उपयोग में है। परिवहन और सड़क के लिए 6.15 वर्ग किलोमीटर (5.90 प्रतिशत), व्यावसायिक गतिविधियों के लिए 4.65 वर्ग किलोमीटर (4.46 प्रतिशत) और मिश्रित उपयोग के लिए 3.52 वर्ग किलोमीटर (3.37 प्रतिशत) जमीन है। वहीं, औद्योगिक उपयोग में 1.09 वर्ग किलोमीटर, हवाई अड्डे के लिए 1.10 वर्ग किलोमीटर और रेलवे के लिए 0.73 वर्ग किलोमीटर जमीन है। नदी/बांध स्थल के हिस्से में 3.49 वर्ग किलोमीटर और जलाशय के लिए 1.06 वर्ग किलोमीटर जमीन दर्ज है। वन क्षेत्र 0.67 वर्ग किलोमीटर है। नक्शे में सभी क्षेत्रों को दर्शाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मुख्य बातें – जिन इलाकों को स्पष्ट रूप से आवासीय घोषित किया गया है और जहां सरकार ने केवल आवासीय उपयोग की अनुमति दी है, वहां व्यावसायिक गतिविधि नहीं हो सकती। – आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधि पाए जाने पर संबंधित परिसर को पहले चरण में सील किया जाएगा। – जिन इलाकों में यह स्पष्ट नहीं है कि जमीन/भवन का उपयोग आवासीय है या व्यावसायिक, वहां फिलहाल मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि कागजी कार्रवाई जारी रह सकती है। – जमीन या भवन के स्वामित्व अथवा किसी अन्य विवाद का मामला अदालत में लंबित होने के बावजूद, यदि उसका इस्तेमाल स्वीकृत उद्देश्य के खिलाफ हो रहा है, तो प्राधिकरण परिसर को सील कर सकते हैं। – यदि कोई निर्माण बिना किसी अनुमति के पूरी तरह अनधिकृत पाया जाता है, तो कानून के अनुसार उसके खिलाफ सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी रहेगी। पांच सदस्यीय समिति पर टिकीं निगाहें 25 अगस्त को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आवासीय क्षेत्र में गैर-आवासीय इस्तेमाल के मामलों के समाधान के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी समिति के अध्यक्ष हैं। नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश कुमार मिश्र सदस्य सचिव, जबकि ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव और विधान पार्षद संजय कुमार सिंह सदस्य हैं। समिति मामले का अध्ययन कर व्यावहारिक और जनहितकारी समाधान सुझाएगी। लोगों की निगाहें समिति पर टिकी हैं।