samacharsecretary.com

बिहार में 100 साल पुराने जमीन के दस्तावेज़ खंगाले जाएंगे, रियासतों से मांगे गए कैडस्ट्रल खतियान

सहरसा. बिहार के विभिन्न जिलों में जमीन के कैडस्ट्रल सर्वे के दौरान तैयार खतियान सरकार के पास नहीं होने के कारण राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आम सूचना जारी कर रैयतों से अपील की है कि अगर उनके पास यह है तो उसे उपलब्ध कराएं। खतियान को अंचल कार्यालयों और जिला अभिलेखागार में संरक्षित किया जाएगा। बिहार में ब्रिटिश काल में जमीन का सर्वे किया गया था। इसे कैडस्ट्रल सर्वे का नाम दिया गया था। इसके आधार पर खतियान तैयार किया गया। इसके बाद रीविजनल सर्वे किया गया। इससे नया खतियान बना। अब भी जमीन के पुराने विवाद पर दोनों खतियान का मिलान किया जाता है। इसके आधार पर भी मालिकाना हक मिलता है। सीओ मौनी बहन ने बताया कि सरकार ने सभी खतियान को डिजिटाइज्ड कर दिया है। इस क्रम में राज्य के 9334 मौजे का कैडस्ट्रल सर्वे उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। सौ साल से अधिक समय पहले का खतियान कैडस्ट्रल सर्वे ब्रिटिश शासनकाल के दौरान साल 1900 से 1910 के बीच किया गया था। कुछ क्षेत्रों में यह 1892 से 1920 तक चला था। यह बंगाल काश्तकारी अधिनियम, 1885 के तहत पहला व्यापक भू-सर्वेक्षण था। यह दस्तावेज काफी महत्वपूर्ण है। जिले में खासमहाल की जमीन को लेकर कैडस्ट्रल सर्वे से ही कई निर्णय लिए जा रहे हैं। इसके अलावा बड़े जमींदारों की जमीन का खतियान भी इसमें शामिल है।

मध्यप्रदेश पुलिस में बड़ा प्रमोशन, 8 राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों को मिलेगा IPS कैडर; DPC ने तय किए नाम

 भोपाल राज्य पुलिस सेवा के आठ (1997 बैच के एक और 1998 बैच के सात) अधिकारी आईपीएस संवर्ग में पदोन्नत होंगे। गुरुवार को मंत्रालय में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक में इनके नाम तय किए गए। लगभग दो माह में अधिसूचना जारी होने पर इन्हें आईपीएस संवर्ग आवंटित होगा। कुल नौ पदों के लिए डीपीसी की बैठक की गई थी, जिसमें 1997 बैच के अमृत लाल मीणा का नाम विचार में लिया गया, पर निर्णय घोषित नहीं किया गया। मीणा का जाति प्रमाण पत्र का मामला छानबीन समिति में लंबित है। वहीं, राजेश मिश्रा और संदीप मिश्रा के नामों पर विचार नहीं किया। राजेश मिश्रा के विरुद्ध विभागीय जांच चल रही है, जबकि संदीप मिश्रा की एसीआर अनुकूल नहीं होने के चलते उन्हें बाहर रखा गया है। डीपीसी में संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य संजय वर्मा, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, डीजीपी कैलाश मकवाणा और एसीएस होम संजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे। 27-28 वर्ष की सेवा के बाद पदोन्नति यह डीपीसी वर्ष 2025 के लिए हुई है। पदोन्नत होने वाले अधिकारियों को 2017 बैच आवंटित होगा। 27 से 28 वर्ष की सेवा के बाद इन्हें पदोन्नति मिलने जा रही है। बड़े राज्यों में सबसे देरी से पदोन्नति मध्य प्रदेश में ही हो रही है। तेलंगाना सहित कुछ राज्यों में तो 2010 से 2012 बैच तक के पुलिस अधिकारी पदोन्नत होकर आईपीएस बन चुके हैं। यानी पदोन्नति में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी राज्य प्रशासनिक सेवा 10 वर्ष पीछे चल रहे हैं। बता दें, राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस संवर्ग में 13 अधिकारियों की पदोन्नति के लिए भी शीघ्र डीपीसी की बैठक होने वाली है। इसमें वर्ष 2007 और 2008 बैच के अधिकारियों के नामों पर विचार चल रहा है। ये अधिकारी होंगे पदोन्नत 1997 बैच के सीताराम सस्त्या, 1998 बैच की मनीषा पाठक सोनी, निमिषा पांडेय, मलय जैन, अमित सक्सेना, सुमन गुर्जर, सव्यसाची सराफ और समर वर्मा।  

परियोजना बंद तो खत्म हुई नौकरी, संविदा वैज्ञानिक को राहत नहीं; पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब स्टेट काउंसिल फार साइंस एंड टेक्नोलॉजी में कार्यरत संविदा वैज्ञानिक दिव्या कौशिक को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी  अपील   खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस परियोजना के लिए नियुक्ति की गई थी, वह 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है और ऐसी स्थिति में संविदा सेवा को जारी रखने का कोई आधार नहीं बनता। जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी और जस्टिस अमरजोत भट्टी की खंडपीठ ने यह फैसला उस अपील पर सुनाया, जिसमें एकल पीठ द्वारा पारित 23 मार्च और 6 अप्रैल 2026 के अंतरिम आदेशों को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि मूल  याचिका अभी भी एकल पीठ के समक्ष लंबित है और अपील केवल अंतरिम आदेशों के खिलाफ दायर की गई है, इसलिए हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है। 2011 में जॉइन की थी सेवा याचिकाकर्ता दिव्या कौशिक की ओर से कहा गया कि उन्हें वर्ष 2011 में पेटेंट इनफार्मेशन सेंटर (पीआईसी) में वैज्ञानिक के पद पर संविदा आधार पर नियुक्त किया गया था और समय-समय पर उनका कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा। उन्होंने  याचिका में उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनके पद को समाप्त कर दिया गया था। एकल पीठ ने 16 जुलाई 2024 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। हालांकि बाद में परिषद की ओर से दायर आवेदन पर एकल पीठ ने 23 मार्च 2026 को आदेश में संशोधन करते हुए कहा था कि यदि परियोजना 31 मार्च 2026 के बाद भी बढ़ाई जाती है तो यथास्थिति का आदेश जारी रहेगा, अन्यथा परिषद उस आदेश से बाध्य नहीं होगी। इस आदेश को वापस लेने की मांग भी 6 अप्रैल 2026 को खारिज कर दी गई थी। 5 वर्षों के लिए थी परियोजना सुनवाई के दौरान परिषद की ओर से अदालत को बताया गया कि 'पेटेंट इनफार्मेशन सेंटर' परियोजना पांच वर्ष की अवधि के लिए थी और यह 31 मार्च 2026 को पूरी हो चुकी है। इसलिए परियोजना के साथ सह-समाप्त (को-टर्मिनस) संविदा नियुक्ति भी स्वत  समाप्त हो गई। परिषद ने यह भी बताया कि नियुक्ति पत्र में स्पष्ट शर्त थी कि परियोजना की अवधि समाप्त होने पर अनुबंध समाप्त माना जाएगा। खंडपीठ ने कहा कि एकल पीठ द्वारा पारित आदेश न तो अवैध हैं और न ही उनमें किसी प्रकार की त्रुटि है। चूंकि परियोजना का विस्तार नहीं हुआ और वह पूर्ण हो चुकी है, इसलिए संविदा कर्मचारी की सेवा जारी रखने का कोई कानूनी आधार नहीं बचता। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने अपील खारिज कर दी।

डिग्री की देरी खत्म होगी, बिहार सरकार विश्वविद्यालय व्यवस्था में करेगी बड़ा बदलाव

पटना बिहार में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए विश्वविद्यालयों के लिए नया कानून लाया जाएगा। नया अधिनियम दूसरे राज्यों एवं केंद्रीय विश्वविद्यालयों की श्रेष्ठ प्रणालियों पर आधारित होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल सय्यद अता हसनैन की अध्यक्षता में पटना स्थित लोक भवन में शुक्रवार को हुई बैठक में यह सहमति बनी। इस बैठक में उच्च शिक्षा के विकास को लेकर कई फैसले लिए गए। यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स की डिग्री की लेटलतीफी को भी जल्द खत्म किया जाएगा, इस पर मिशन मोड में काम चल रहा है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री की मौजूदगी में शुक्रवार को करीब 1 घंटे तक चली इस बैठक में यूनिवर्सिटी के पठन-पाठन, नामांकन, नियुक्ति, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था समेत अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। लोक भवन के द्वारा प्रस्तुतीकरण के माध्यम से नई पहल की जानकारी दी गई। इस दौरान उच्च शिक्षा मंत्री संजय टाइगर भी मौजूद रहे। नए डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की संविदा पर नियुक्ति सीएम सम्राट ने कहा कि राज्य में ऐसी व्यवस्था हो कि उच्च शिक्षा के लिए बिहार के बच्चों को बाहर नहीं जाना पड़े। वहीं, राज्यपाल सय्यद अता हसनैन ने 31 दिसंबर तक विश्वविद्यालय समर्थ पोर्टल के 26 मॉड्युल्स पूरी तरह लागू करने के निर्देश दिए। बैठक में फैसला लिया गया कि राज्य में खुले 211 नए डिग्री कॉलेजों में केंद्रीयकृत तरीके से सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसर) की संविदा पर नियुक्ति की जाएगी। डिग्री की लेटलतीफी बंद होगी विद्यार्थियों की लंबित डिग्रियों के जल्द और समयबद्ध वितरण के लिए मिशन मोड में किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि इस कार्य को 30 सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनुशासन एवं नियमितता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों एवं कर्मचारियों के ट्रांसफर और पदोन्नति के लिए समय-सीमा निर्धारित करने संबंधी जानकारी भी दी गई। सामान्य स्थानान्तरण केवल जून माह में होंगे तथा इससे इतर ट्रांसफर केवल अति आवश्यक होने पर ही कुलाधिपति के पूर्वानुमोदन से हो सकेगा। सरकार द्वारा जारी बयान में कहा गया कि राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) एवं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बिहार लोक भवन में आज राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार एवं प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस दौरान उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई पहलों की समीक्षा की गई तथा शिक्षा की गुणवत्ता, सुशासन और संस्थागत मजबूती सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। बैठक में राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता, दक्षता, डिजिटल प्रशासन एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता सुनिश्चित करने के लिए संचालित विभिन्न सुधारात्मक पहलों की विस्तृत समीक्षा की गई।

डोंगरगढ़ परिक्रमा पथ के लिए जमीन अधिग्रहण विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, कलेक्टर को सुनवाई करने के निर्देश

बिलासपुर. हाईकोर्ट में डोंगरगढ़ के बहुचर्चित परिक्रमा पथ निर्माण मामले में सुनवाई हुई. कोर्ट ने कलेक्टर राजनांदगांव को पीड़ित याचिकाकर्ता के शिकायत पत्र पर सुनवाई का अवसर देते हुए परीक्षण कर निराकरण किए जाने का निर्देश जारी किया है. बता दें, कि याचिकाकर्ता की कृषि भूमि को अवैध रूप से अधिग्रहित करने के प्रस्ताव एवं प्रस्तुत शिकायत पत्र पर विभाग के द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा है. दरअसल, राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ के अंतर्गत बुधवारी पारा वार्ड नंबर 19 निवासी फहीम अख्तर ने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के जरिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी कि, उसकी कृषि भूमि ग्राम छीरपानी पटवारी हल्का नंबर 29 खसरा नंबर 196/2 में स्थित है. कुछ दिन पूर्व जानकारी मिली कि, उसके उक्त खसरा नंबर की भूमि को प्रस्तावित डोंगरगढ़ परिक्रमा पथ निर्माण के लिए अधिग्रहित किए जाने कार्रवाई जारी है. जबकि याचिकाकर्ता ने इस संबंध में कोई लिखित या मौखिक सहमति नहीं दी थी. वर्तमान में याचिकाकर्ता की उक्त भूमि पर सड़क निर्माण की कार्रवाई किए जाने की तैयारी की जा रही है और याचिकाकर्ता को ज्ञापन जारी कर उसके उक्त कृषि भूमि को मनमाने अत्यधिक कम कीमत पर खरीदने के संबंध में शासन के द्वारा प्रस्ताव भी जारी कर दिया गया है. याचिकाकर्ता अपनी उक्त कृषि भूमि को बेचना नहीं चाहता और ना ही उसके बदले में किसी प्रकार का मुआवजा चाहता है. याचिकाकर्ता ने आपत्ति करते हुए कलेक्टर जिला राजनांदगांव के समक्ष एक शिकायत पत्र भी दिया था, कि उक्त प्रस्तावित परिक्रमा पथ के लिए किसी भी प्रकार से निजी भूमि अधिग्रहित करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है क्योंकि प्रस्तावित परिक्रमा पथ के आसपास ही पर्याप्त शासकीय एवं राजस्व भूमि उपलब्ध है, जिसके माध्यम से सड़क का निर्माण किया जा सकता है. स्वीकृत नक्शे के विरूद्ध निजी भूमि का चयन किया जाना अनुचित है. यदि सड़क निर्माण उपलब्ध राजस्व भूमि से किया जाता है तो शासन को भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा भुगतान में होने वाले अतिरिक्त व्यय से बचाया जा सकता है, साथ ही परिक्रमा पथ के लिए  पूर्व से ही मार्ग बना हुआ है. नए मार्ग की कोई जरूरत भी नहीं है.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नए लोगो का किया विमोचन

आवास निर्माण तक सीमित रहा मंडल अब अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी प्रदेश के विकास को देगा नई गति : मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नए लोगो का किया विमोचन पूंजीगत व्यय करने वाले विभागों को सक्षम बनाकर प्रदेश के विकास को गति देना हमारी इकोनॉमिक फिलॉसफी : मंत्री ओ पी चौधरी आवास बुक करने वाले लकी ड्रा के विजेताओं को कार, स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन सहित अन्य पुरस्कार का किया वितरण दो वर्षों में 07 हजार से अधिक परिसंपत्तियों का विक्रय कर 1500 करोड़ रुपये का किया राजस्व अर्जित छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना  विकास मंडल का नया लोगो तैयार करने वाले अंशुल कश्यप को दी 2.50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नया रायपुर स्थित सर्किट हाउस में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नवीन लोगो का विमोचन किया। इस अवसर पर वर्ष 2025 के आवास मेले में आवास बुक करने वाले हितग्राहियों को लकी ड्रा के माध्यम से कार, स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एलईडी टीवी सहित विभिन्न पुरस्कार वितरित किए गए। साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना  विकास मंडल का नया लोगो तैयार करने वाले अंशुल कश्यप को शुभकामनाएं दी और प्रतियोगिता की पुरस्कार राशि ढाई लाख रुपए का चेक सौंपा।                मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार का अपना पक्का घर होने का सपना होता है और राज्य सरकार इस सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पूर्व में केवल गृह निर्माण तक सीमित रहा मंडल अब अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में मंडल ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आर्थिक चुनौतियों से उबरते हुए मंडल ने लगभग 7,388 संपत्तियों का विक्रय कर 1,532 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग, मंडल के अध्यक्ष तथा पूरी टीम को बधाई दी।               मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने सभी संकल्पों और वायदों को तेजी से पूरा किया है। सरकार के गठन के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को स्वीकृति प्रदान की गई थी। आज प्रदेश में गरीब और जरूरतमंद साढ़े दस लाख से अधिक परिवार के आवास पूर्ण हो चुके हैं तथा प्रतिदिन लगभग 1,600 नए आवास तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार से 15 हजार अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कराए गए हैं तथा विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए भी विशेष आवास योजना संचालित की जा रही है।              मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन हमारे सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 'सेवा सेतु' के माध्यम से 450 से अधिक शासकीय सेवाएं अब मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 भी प्रारंभ की गई है, जहां नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज कर समयबद्ध समाधान प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में लगभग 65 हजार घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना के माध्यम से सरकार घर में सोलर संयंत्र लगाने के लिए आकर्षक सब्सिडी भी दे रही है और इन परिवारों लिए आने वाले समय में बिजली पूरी तरह मुफ्त हो जाएगी और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेच पाएंगें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के माध्यम से लंबित बिजली बिल के भुगतान का भी बड़ा अवसर दिया है और बिल पर लगने वाले सरचार्ज समेत आकर्षक छूट का प्रावधान किया है। साय ने कहा कि सरकार न केवल जनहितैषी योजनाएं लागू कर रही है बल्कि सुशासन तिहार के माध्यम से उसका फीडबैक लेने लोगों के बीच भी गई। दो महीने लगातार जनता से फीडबैक लेकर व्यवस्थाओं में सुधार का काम किया गया है। उन्होंने इस दौरान शासन की विभिन्न नवाचारी पहल की जानकारी देते हुए सुशासन और पारदर्शी सरकार के संकल्प को दोहराया।             आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विभाग में व्यापक प्रशासनिक सुधार लागू किए गए हैं। गृह निर्माण मंडल को अधोसंरचना विकास मंडल के रूप में नई पहचान देकर प्रदेश के पूंजीगत व्यय और विकास कार्यों में इसकी भूमिका का विस्तार किया गया है। मंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय करने वाले विभागों को वित्तीय और मानव संसाधन के माध्यम से सक्षम बनाने का काम किया है ताकि प्रदेश में आर्थिक गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि अब किसी भी नई आवासीय परियोजना का निर्माण तभी प्रारंभ होगा जब पर्याप्त बुकिंग सुनिश्चित हो जाएगी, जिससे अनावश्यक निर्माण और वित्तीय जोखिम से बचा जा सके। मंत्री चौधरी ने कहा कि सरकार ने वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू कर वर्षों से लंबित संपत्तियों के विक्रय को गति दी तथा वित्तीय अनुशासन स्थापित किया। इसके परिणामस्वरूप मंडल की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और अब यह अधोसंरचना विकास के नए आयाम स्थापित करने के लिए तैयार है।             मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में मंडल ने नई कार्य संस्कृति अपनाई है। गृह निर्माण मंडल का विस्तार कर अधोसंरचना विकास मंडल बनाया जाना प्रदेश के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में मंडल ने रिकॉर्ड संपत्तियों का विक्रय कर नई उपलब्धियां हासिल की हैं और भविष्य में मांग आधारित, गुणवत्तापूर्ण तथा वित्तीय रूप से व्यवहारिक परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया जाएगा।            कार्यक्रम में लकी ड्रा के नौ विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। सारंगढ़ की श्रीमती पूजा बरेठ को प्रथम पुरस्कार के रूप में कार प्रदान की गई। इसके अलावा स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एलईडी टीवी सहित अन्य आकर्षक पुरस्कार भी वितरित किए गए।          इस अवसर पर आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ,आयुक्त … Read more

UP Politics: ब्रजेश पाठक ने सपा-कांग्रेस से पूछा ‘बाबरी मस्जिद चंदे का हिसाब’, सियासत गरमाई

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि राम मंदिर चंदा मामले से जुड़ा विवाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की एक साजिश का हिस्सा है. उन्होंने सवाल किया कि बाबरी मस्जिद के लिए इकट्ठा किए गए चंदे का क्या हुआ, इस पर किसी ने सवाल क्यों नहीं उठाया।  ब्रजेश पाठक ने कहा, 'बाबरी मस्जिद के लिए भी चंदा इकट्ठा किया गया था. कोई नहीं पूछ रहा है कि उस पैसे का क्या हुआ. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति कर रही हैं और मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिए सनातन धर्म पर हमला कर रही हैं।  उनके ये बयान अयोध्या पुलिस द्वारा राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी के मामले में FIR दर्ज करने के एक दिन बाद आए हैं. यह FIR एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की सिफारिशों के आधार पर दर्ज की गई थी, जिसके बाद कई लोगों को गिरफ्तार किया गया।  विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों को बचाया जा रहा है।  विपक्ष के इस आरोप पर कि केवल जूनियर कर्मचारियों पर केस दर्ज किया गया है, पाठक ने कहा कि पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी और BJP सरकार भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाती है।  न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ब्रजेश पाठक ने कहा कि पत्रकारों को विपक्षी नेताओं से बाबरी मस्जिद के लिए इकट्ठा किए गए फंड के बारे में सवाल पूछना चाहिए और आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति कर रही हैं।  उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीमावर्ती जिलों में चल रहे अवैध मदरसों को टेरर फंडिंग मिल रही थी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ऐसे संस्थानों की जांच की, अवैध गतिविधियों को बंद कराया और जिम्मेदार लोगों को जेल भेजा। 

Ayodhya Ram Mandir Donation Row: ‘दूध का दूध, पानी का पानी होगा’, CM योगी ने SIT रिपोर्ट पर दिया बड़ा बयान

देवरिया पिछले कुछ दिनों से राम मंदिर चंदा चोरी का मामला सुर्खियों में है. कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और एसआईटी जांच जारी है. इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या मामले को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि रामभक्तों की अग्निपरीक्षा मत न ली जाए, अगर सबूत है, तो एसआईटो को सबूत दिया जाए. अयोध्या हमारी आस्था का प्रतीक है।  यूपी के देवरिया में जनता को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा, "एसआईटी की रिपोर्ट आते ही एक्शन लिया गया. दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा. आरोप लगाने वालों की मंशा ठीक नहीं है।  मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की कामयाबियों का जिक्र करते हुए कहा, "हमें इस बात को ध्यान रखना होगा, जितनी अच्छी कनेक्टिविटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर होगा, विकास उतनी ही तेज गति के साथ आगे बढ़ेगा. विकास के लिए चाहिए कि अच्छी रोड हो, रेल की बेहतरीन व्यवस्था हो, स्किल मेनपॉवर हो और जल संसाधन हो, तो दुनिया की ताकत बनने में देर नहीं लगेगी।  'जो खिलवाड़ करेगा…' सीएम योगी ने कहा, "जनआस्था के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं है. सनातन के साथ जो भी खिलवाड़ करेगा उसका भुक्तभोगी होगा. किसी को छूट नहीं दी जा सकती. ये जो लोग आज आक्षेप कर रहे हैं, उठाने का कुंठित प्रयास कर रहे हैं, इनकी मंशा अच्छी नहीं है. ये वे लोग हैं, जो भगवान राम को नकार चुके थे. भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्न खड़ा कर चुके थे. एक पक्ष उसमें है, जो कहता था कि राम हुए ही नहीं, यानी अयोध्या को भी ये नकारना चाहते थे।  उन्होंने आगे कहा कि अयोध्या के बारे में हमने कहा था SIT गठित की गई है. SIT की रिपोर्ट आने के साथ ही हमारी कारवाई भी शुरू हो जाएगी और आपने देखा होगा कि SIT की रिपोर्ट आयी, तुरंत कार्रवाई शुरू हो गई. जन आस्था के साथ जो खिलवाड़ करेगा, उसके साथ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई करेंगे।  'बड़ी-बड़ी चट्टानों को पलटने की ताकत… सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारे पास सब कुछ मौजूद है, दुनिया के अंदर सबसे युवा ताकत किसी के पास है, तो उत्तर प्रदेश के पास है. हमारी युवा शक्ति प्रतिभावान और ऊर्जावान है. हम बड़ी-बड़ी चट्टानों को पलटने की ताकत रखते हैं और यूपी के विकास के लिए कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का काम करते हैं।  उन्होंने आगे कहा कि हम युवाओं को रोजगार देने का काम कर रहे हैं, हमने 9 लाख नौजवानों को नौकरी दी है. सुरक्षा का बेहतरीन माहौल पैदा करते हुए, जीरो टॉलरेंस नीति लागू की गई है।  'सुरक्षा और विश्वास का वातावरण…' योगी आदित्यनाथ ने कहा, "प्रदेश को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने माफियाग्रस्त बना दिया था. मुझे याद है 2016 में यहीं मदनपुर थाने में कैसे असलहे लूट ले गए थे और एक थाने को आग लगा दी गई थी. आज मुहर्रम है, कहीं किसी का पता नहीं है. कोई अस्त्र-शस्त्र का प्रदर्शन नहीं कर सकता है. कोई सड़कों पर गुंडागर्दी नहीं कर सकता है. उत्सवपूर्ण माहौल में कोई उपद्रव नहीं कर सकता है, और अगर करेगा तो सात पीढ़ियों तक भुगतेगा. यह सुरक्षा और विश्वास का वातावरण बनाया है।  उन्होंने आगे कहा कि देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर में निवेश आ रहे हैं, उद्यम लग रहे हैं. हमारे नौजवानों को नौकरी मिल रही है, रोजगार मिल रहे हैं. युवा अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का लाभ अपने क्षेत्र को दे रहा है। 

विधानसभा चुनाव से पहले यूपी भाजपा में बड़ा फेरबदल, नई कार्यकारिणी में कई नए चेहरे शामिल

 लखनऊ  विधानसभा चुनाव से पहले कील कांटे दुरुस्त करने में जुटी भाजपा ने बड़े बदलावों के साथ प्रदेश इकाई घोषित कर दी है। चुनावी वर्ष को देखते हुए पिछली बार की तुलना में इस बार 64 सदस्यीय बड़ी टीम बनाई गई है। आठ महामंत्री, 19 उपाध्यक्ष, 19 मंत्री, छह क्षेत्रीय अध्यक्ष व छह मोर्चों के अध्यक्ष बनाए गए हैं। कई दिग्गजों सहित आधे पदाधिकारियों को संगठन से मुक्त कर नए चेहरों पर भरोसा किया गया है। जातीय समीकरणों का ध्यान देते हुए पिछड़े और अनुसूचित समाज को विशेष वरीयता दी गई है। छह में चार क्षेत्रीय अध्यक्ष ओबीसी समाज से हैं। महामंत्रियों की संख्या सात से बढ़ाकर आठ की गई है, वहीं 16 की जगह अब 19 उपाध्यक्ष होंगे। कई नए और चौंकाने वाले नाम शामिल किए गए हैं। पूर्व मंत्री सुरेश राणा और नवाब सिंह नागर को भी संगठन में बड़ा दायित्व दिया गया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह की जगह नीरज सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाकर उन्हें राजनीतिक पारी शुरू करने का अवसर दिया गया। भाजपा ने इसमें क्षेत्रीय से ज्यादा जातीय संतुलन पर फोकस किया है। जातीय समीकरणों के पैमाने पर देखें तो 27 सामान्य चेहरों में 12 ब्राह्मण, सात क्षत्रिय, चार भूमिहार, दो वैश्य व एक-एक कायस्थ और त्यागी हैं। किस वर्ग को मिला कितना अवसर? समाज में सबसे बड़ा करीब 55 प्रतिशत समूह ओबीसी का माना जाता है, जिनको सबसे ज्यादा 29 पदों पर भागीदारी दी गई है। इसमें सर्वाधिक तीन जाट, दो-दो यादव, कुर्मी, पाल, गुर्जर व लोधी को स्थान दिया गया है। साथ ही एक-एक पद पर कुशवाहा, मौर्य, बिंद, शिवहरे, विश्वकर्मा, निषाद, गिरी, राजभर, सैंथवार, सैनी, चौरसिया, तेली, कलार व लोनिया चौहान को अवसर दिया गया है। अनुसूचित वर्ग में पासी को सबसे ज्यादा तीन पद दिए गए हैं, जबकि कोरी, वाल्मीकि, जाटव व एसटी के रूप में गोंड को भी अवसर दिया गया है। वहीं, 64 में 13 पदों पर महिलाओं को दायित्व दिया गया है, जो पार्टी के संकल्प 33 प्रतिशत की तुलना में कमतर प्रतिनिधित्व है। यूजीसी नियमों से उपजे आक्रोश से लेकर कई अन्य विषयों पर ब्राह्मणों में असंतोष उभरा था, जिसको साधने के लिए प्रदेश इकाई में उन्हें विशेष वरीयता दी गई है। अभिजात मिश्रा को जहां महामंत्री बनाया गया, वहीं बृज बहादुर, अर्चना मिश्रा, शंकर गिरी, अंकुर शर्मा, यतेंद्र शर्मा, रजनी पांडे के अलावा अवध के क्षेत्रीय अध्यक्ष के रूप में अवधेश द्विवेदी को अवसर दिया गया, वहीं कार्यालय मंत्री व सह मंत्री और अन्य भूमिकाओं में कई ब्राह्मणों को समायोजित किया गया। आठ से तीन महामंत्री अभिजात, उपेंद्र रावत व शंकर लोधी अवध क्षेत्र के हैं, जबकि पश्चिम क्षेत्र से कोई चेहरा महामंत्री नहीं बनाया गया। धार्मिक व राजनीतिक केंद्र के रूप में उभरे ब्रज क्षेत्र से रामप्रताप सिंह व राजेश चौधरी को महामंत्री बनाने के साथ ही सबसे ज्यादा नौ पदाधिकारियों को स्थान दिया गया है। पश्चिम क्षेत्र से दिग्गज क्षत्रिय चेहरा सुरेश राणा को हरियाणा व बंगाल चुनाव में बेहतर जिम्मेदारी निभाने का फायदा मिला और उनकी उपाध्यक्ष पद पर लंबे समय बाद वापसी हुई। दिल्ली आइआइटी से पढ़े लिखे और पश्चिम क्षेत्र के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनीवाल को युवा जाट नेता के रूप में दोबारा उपाध्यक्ष बनाया गया है। प्रदेश संगठन में लंबे समय तक पदाधिकारी व कई जिलों में चुनावी जमीन बनाने में भूमिका निभाने वाले मेरठ के जाट चेहरे देवेंद्र सिंह को किसान मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बड़ा संदेश दिया गया है। सत्यपाल सैनी के रूप में पश्चिम में बड़े जातीय समूह में संदेश देने का प्रयास किया गया है। मथुरा में मांट के विधायक जाट चेहरा राजेश चौधरी को प्रदेश महामंत्री जैसा अहम पद दिया गया है। जाट समाज को गुर्जरों से ज्यादा प्रतिनिधित्व मिला। पिछली टीम में सुरेंद्र नागर के रूप में गुर्जर चेहरे को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया था, जिन्हें बाद में राष्ट्रीय मंत्री बना दिया गया। इस बार महामेधा नागर को मंत्री बनाया गया है। हालांकि, पश्चिम क्षेत्र की कमान नवाब सिंह नागर को देकर पार्टी ने बड़ा दांव चला है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र नीरज सिंह के मिलनसार व्यवहार व उनकी जमीनी पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन्हें उपाध्यक्ष बनाया है। पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के छह माह बाद गठित हुई कार्यकारिणी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने दिसंबर में कार्यभार संभाला। तब से ही नई प्रदेश इकाई बनाने की चर्चा चल पड़ी, लेकिन संगठन छह माह बाद ही बन सका। प्रदेश इकाई में बड़े बदलाव किए गए हैं। प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ल, सुभाष यदुवंश, अनूप गुप्ता, अमरपाल मौर्य, त्रियंबक त्रिपाठी, अंजुला महौर, विजय बहादुर पाठक, संतोष सिंह, कांता कर्दम, डा.चंद्रमोहन, सुनीता दयाल, सलिल विश्नोई, मीना चौबे समेत दर्जनभर नामों को स्थान नहीं मिला। रदेश उपाध्यक्ष के रूप में सुरेश राणा, सत्यपाल सैनी, ब्रज बहादुर, डा.धर्मेंद्र सिंह, मोहित बेनीवाल, देवेश कोरी, प्रियंका रावत, दुर्विजय शाक्य, रमेश सिंह, नीरज सिंह, अर्चना मिश्रा, पूजा पाल, शंकर गिरी, कामेश्वर सिंह, डा.कृतिका अग्रवाल, सुरेश मौर्य, राजेश यादव, कृष्ण बिहारी राय और आलोक गुप्ता को अवसर दिया गया है। मंत्री पद के लिए विजय शिवहरे, बसंत त्यागी, शिवभूषण सिंह, सहजानंद राय, अंकुर शर्मा, अनिल यादव, अवधेश श्रीवास्तव, विजय राजभर, प्रमेन्द्र जांगड़ा, किरण लोधी निषाद, राकेश बिंद मंत्री, संचिता सिंह चौहान (लुनिया), रजनी पांडेय, राहुल वाल्मीकि, महामेधा नागर दीपमाला संतोषी, सुहासिनी जायसवाल, यतेंद्र शर्मा व आकांक्षा सोनकर के नाम पर मुहर लगी है। भारत दीक्षित कार्यालय मंत्री व अतुल अवस्थी व लक्ष्मण सिंह कार्यालय सह-मंत्री होंगे। दिनेश प्रताप सिंह मुख्य प्रवक्ता बनाए गए हैं, जबकि मनीष दीक्षित प्रदेश मीडिया संयोजक बने रहेंगे। हिमांशु राज पंडित को प्रदेश सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया है। सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्ष बदले कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल को पिछड़ा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। उनकी जगह क्षेत्रीय महामंत्री रहे रामकिशोर साहू को क्षेत्रीय अध्यक्ष की कमान दी गई। ब्रज के क्षेत्रीय अध्यक्ष दुर्गविजय शाक्य को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया, उनकी जगह बरेली के पूर्व जिलाध्यक्ष पूरण लाल लोधी क्षेत्रीय अध्यक्ष होंगे। पश्चिम के क्षेत्रीय अध्यक्ष सतेंद्र शिशौदिया किसी इकाई में जगह नहीं बना सके। उनकी जगह गुर्जर चेहरा व दो बार प्रदेश सरकार में मंत्री रहे नवाब सिंह नागर क्षेत्रीय अध्यक्ष बने हैं। अवध के क्षेत्रीय अध्यक्ष कमलेश मिश्र प्रदेश इकाई से लेकर … Read more

MP Transco की बड़ी राहत: पेंशनर्स और कर्मचारियों को कैशलेस स्वास्थ्य योजना से जुड़ने का फिर मिला मौका

भोपाल मध्यप्रदेश शासन के उपक्रम म.प्र. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा संचालित अंशदायी कैशलेस स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत अब तक शामिल होने से वंचित रह गए कार्मिकों, पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों को योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए एक और अवसर प्रदान किया गया है। एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता मानव संसाधन एवं प्रशासन श्री धीरेंद्र सिंह ने बताया कि पात्र कार्मिकों, पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों से 25 जून से 20 जुलाई 2026 तक पुनः आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से स्वीकार किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जो पात्र हितग्राही वर्तमान में योजना का लाभ नहीं ले रहे हैं और अब इसमें शामिल होना चाहते हैं, उन्हें योजना के प्रारंभ होने की तिथि से अब तक देय सभी अंशदान किस्तों का भुगतान एकमुश्त करना होगा। योजना के अन्य सभी नियम एवं शर्तें यथावत रहेंगी। एमपी ट्रांसको प्रबंधन ने पात्र कार्मिकों, पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों से निर्धारित अवधि में आवेदन प्रस्तुत कर इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेने का आग्रह किया है।