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धनबाद-बोकारो सड़क हादस,गैस रिसाव और भू-धंसान के बाद विस्थापन ही अंतिम विकल्प

धनबाद केंदुआडीह में धनबाद-बोकारो सड़क धंसने के दूसरे दिन वहां बड़े पैमाने पर गैस रिसाव शुरू हो जाने से हड़कंप मच गया है। गैस रिसाव की सूचना पर पहुंचे धनबाद डीसी आदित्य रंजन एवं बीसीसीएल सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि विस्थापन ही अब अंतिम विकल्प है। अधिकारियों ने साइंटिफिक एजेंसियों की स्टडी के हवाले से बताया कि यह इलाका डेंजर जोन है। भूमिगत आग, भू-धंसान और गैस रिसाव पर नियंत्रण संभव नहीं लग रहा है। इसलिए बेलगड़िया शिफ्टिंग ही विकल्प है। एसएसपी प्रभात कुमार भी मौके पर मौजूद थे। डीसी ने कहा कि भूमिगत आग के कारण गैस रिसाव बंद नहीं होगा। समय के साथ-साथ इसका दायरा बढ़ेगा। आईआईटी आईएसएम, खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस), सिंफर सहित अन्य तकनीकी संस्थानों ने इस स्थान का निरीक्षण कर निष्कर्ष निकला है कि पूरा क्षेत्र डेंजर जोन है। भविष्य में इससे भी अधिक भयावह स्थित हो सकती है। इसलिए सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रभावित क्षेत्र से परिवारों का शिफ्ट होना ही एकमात्र विकल्प है। प्रभावितों को दिए जाएंगे दो फ्लैट झरिया मास्टर प्लान 2.0 में सरकार के स्पष्ट निर्देशानुसार प्रभावित परिवारों को बेलगड़िया में दो फ्लैट दिए जा रहे हैं। उनके रोजगार के लिए कौशल विकास केंद्र भी बनाया गया है। बिजली, पानी, सोलर स्ट्रीट लाइट, आवागमन के लिए बस का परिचालन, ई-रिक्शा, विद्यालय, हेल्थ सेंटर, रानी रोड का चौड़ीकरण, गुणवत्तापूर्ण कंस्ट्रक्शन सहित सभी बुनियादी सुविधाएं प्रदान की गई हैं। आनेवाले दिनों में यहां के निवासियों को किसी भी निजी सोसाइटी से अधिक सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के कारण डेंजर जोन में रहने वाले भोले-भाले परिवारों को दिग्भ्रमित कर रहे हैं। 535 परिवार प्रभावित डीसी ने बताया कि प्रभावितों की सूची में 535 परिवार हैं, लेकिन सर्वे में कुछ परिवार छूट गए हैं। जिला प्रशासन को अग्नि प्रभावित क्षेत्र में रहनेवाले हर परिवार की सुरक्षा की चिंता है। इसलिए प्रशासन का प्रभावित परिवारों से अनुरोध है कि वे तत्काल बेलगड़िया में शिफ्ट हो जाएं। वहीं अग्नि एवं भू-धंसान से प्रभावित धनबाद-बोकारो सड़क को लेकर डीसी ने लोगों से वैकल्पिक मार्ग का प्रयोग करने का अनुरोध किया। साथ में कहा कि एनएचएआई एवं आरसीडी नई सड़क का आकलन कर रहे हैं। यह सड़क अब उपयोग के लायक नहीं है। मौके पर निदेशक तकनीकी (संचालन) संजय कुमार सिंह भी मौजूद थे। रूट होगा डायवर्ट, थाना दूसरी जगह शिफ्ट होगा आरसीडी की रिपोर्ट के अनुसार सड़क को बंद रखने का निर्णय लिया गया है। डायवर्ट रूट पर विचार किया जाएगा। अधिकारियों ने गैस रिसाव स्थल का भ्रमण किया। इसके बाद डीसी, सीएमडी एवं एसएसपी सहित जीएम आदि की मौजूदगी में बैठक की गई। डीसी ने बताया कि अग्नि एवं भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र से परिवारों को बेलगड़िया शिफ्ट करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। साथ में सोमवार तक केंदुआडीह थाना, जो भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र में है, उसे भी दो दिन में केंदुआ स्थित पुराने बीएसएनएल के टेलीफोन एक्सचेंज में शिफ्ट कर दिया जाएगा। अधिकारियों ने बैठक के बाद उक्त स्थल का भी निरीक्षण किया।

बिहार आदेश: टीसी के आधार पर बच्चों का नामांकन नहीं रोका जाएगा

 सुपौल  जिले में अब निजी स्कूलों से स्थानांतरण प्रमाण-पत्र अर्थात टीसी लेकर आने वाले बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला नहीं रोका जा सकेगा। जिला शिक्षा विभाग ने इसे लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सभी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश जारी किया है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान प्रवीण कुमार ने इसको लेकर सभी सरकारी व निजी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को पत्र भेजकर कहा कि कई अभिभावकों से शिकायत मिली है कि निजी स्कूल की टीसी के आधार पर सरकारी स्कूलों में बच्चों का नामांकन नहीं लिया जा रहा। तुरंत लिया जाएगा एक्शन विभाग ने इसे विभागीय निर्देशों की अवहेलना माना है। कहा है कि ऐसी शिकायत पर अब सीधे कार्रवाई की जाएगी। जारी निर्देश में डीपीओ ने कहा है कि निजी स्कूल की टीसी के आधार पर सरकारी स्कूल में बच्चे का एडमिशन होगा। अगर बच्चे का आधार नहीं बना है, तो जन्म प्रमाण-पत्र या अन्य पहचान पत्र देखकर भी दाखिला देना होगा। आधार के नाम पर किसी का नामांकन नहीं रोका जाएगा। नामांकन लटकाना गलत जिला कार्यालय से टीसी सत्यापित कराने के नाम पर दाखिले को लटकाना गलत है। यदि टीसी में वर्णित जानकारी पर कोई शक होता है तो सरकारी स्कूल के प्रधान निजी स्कूल से मौखिक या पत्राचार से एक सप्ताह में सत्यापन करा लेंगे। हालांकि, निजी विद्यालयों को भी इसमें कुछ बिंदुओं को अंकित करना अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने कहा है कि ट्रांसफर सर्टिफिकेट पर स्कूल का यू-डायस कोड, मान्यता अवधि आदि अंकित रहना अनिवार्य होगा। विभाग ने साफ किया है कि सभी स्कूल सरकार के नियम से बंधे हैं। किसी बच्चे का दाखिला रोकना अब कार्रवाई के दायरे में आएगा। दरअसल, कई निजी स्कूल संचालक सरकारी स्कूल में जाने वाले बच्चों को टीसी देने में आनाकानी करते हैं या सरकारी स्कूल टीसी को अमान्य बता देते थे। इससे बच्चों का एक साल बर्बाद होने का खतरा रहता था। नए आदेश से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी।  

डॉ. मोहन यादव बोले – समाज के हर वर्ग तक संवाद एवं संपर्क बढ़ाना आवश्यक

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने शुक्रवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में संभाग और जिला प्रभारियों की बैठक को संबोधित किया। बैठक में पार्टी के आगामी कार्यक्रमों, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, पं. दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण वर्ग-2026 पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यकर्ताओं की एकजुटता से ही भाजपा के उद्देश्यों की प्राप्ति संभव- डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी के कार्यक्रमों को धरातल पर उतारने के लिए कार्यकर्ताओं की मेहनत और एकजुटता अनिवार्य है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र और प्रदेश सरकार के विकासोन्मुखी योजनाओं को समाज के हर वर्ग तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के लिए सभी कार्यकर्ताओं को पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ जुटना है। जब तक हम सब मिलकर पार्टी के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए एकजुट होकर काम नहीं करेंगे, तब तक हमारी योजनाओं में सफलता नहीं मिल सकती। पार्टी की सफलता केवल चुनावी जीत में नहीं, बल्कि समाज में भाजपा की स्थायी पहचान और सेवा की भावना से भी जुड़ी हुई है। हमें समाज के हर वर्ग से संवाद बढ़ाना होगा, उनकी समस्याओं को समझते हुए पार्टी की नीतियों का लाभ समाज तक पहुंचाना होगा। भाजपा का विचार और उसकी नीतियां समाज के हर वर्ग के हितों की रक्षा करते हुए अधिक प्रभावी बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है। चुनौतियों का सामना करते हुए हमें पार्टी के उद्देश्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि यही भाजपा की असली ताकत है और यही पार्टी के भविष्य की सफलता सुनिश्चित करेगा। संगठन के कार्यकर्ता ही पार्टी की असली ताकत – हेमंत खण्डेलवाल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन के कार्यकर्ता ही पार्टी की असली ताकत हैं। पार्टी की सफलता कार्यकर्ताओं की मेहनत, निष्ठा और एकजुटता पर निर्भर करती है। हमारी सरकार और संगठन की योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए हमें एकजुट होकर काम करना होगा, ताकि भाजपा की नीतियों और योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके। भाजपा की जीत केवल चुनावी दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि समाज में पार्टी की स्थायी पहचान और सेवा की भावना से जुड़ी हुई है। पार्टी की सफलता का आधार सिर्फ चुनावी जीत नहीं है, बल्कि समाज के प्रति हमारी सेवा और भाजपा की स्थायी पहचान भी है। हमें सिर्फ चुनावी सफलता ही नहीं, बल्कि समाज में स्थायित्व और विकास के लिए सक्रिय रूप से काम करना होगा। संगठन के संभाग और जिला प्रभारी संगठन की गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे हमारा संगठन जमीनी स्तर पर सशक्त होता है। 33 प्रतिशत महिला आरक्षण सुनिश्चित करना भाजपा की प्राथमिकता है। यह महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करेगा और उन्हें समाज में समान अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में इस दिशा में किए गए ऐतिहासिक कदमों की सराहना करते हुए कहा कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एक दूरदर्शी पहल है। पं. दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण वर्ग-2026 पार्टी के कार्यकर्ताओं को नई दिशा और प्रेरणा देगा, संगठन को अधिक मजबूत करेगा और हमारे कार्यकर्ताओं को पार्टी के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए तैयार करेगा। बैठक में पार्टी के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी एवं गौरव रणदिवे मंचासीन रहे।

शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन,कंप्यूटर शिक्षकों की फाइलों की जांच तेज

 भागलपुर  जिले में कार्यरत कंप्यूटर शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता की जांच को लेकर शिक्षा विभाग एक्शन मोड में आ गया है। कुल 282 कंप्यूटर शिक्षकों की शैक्षणिक कुंडली खंगालने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस प्रक्रिया के तहत विभाग ने सभी संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है, जिससे नियुक्ति और योग्यता की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। 207 शिक्षकों की फाइल उपलब्ध, 75 की मांगी गई जानकारी जिला शिक्षा विभाग के पास फिलहाल 207 कंप्यूटर शिक्षकों की शैक्षणिक फाइल उपलब्ध है, जबकि ट्रांसफर होकर आए 75 शिक्षकों की फाइल अब तक विभाग को प्राप्त नहीं हो सकी है। इसको लेकर डीपीओ स्थापना ने सभी संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी कर 24 घंटे के भीतर फाइल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही सभी शिक्षकों की सूची भी भेजी गई है, ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न हो। प्रधानाध्यापक करेंगे काउंटर सिग्नेचर जारी निर्देश के अनुसार, संबंधित शिक्षकों के प्रमाण पत्रों वाली फाइल पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक का काउंटर सिग्नेचर अनिवार्य किया गया है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जमा किए गए दस्तावेज सत्यापित और प्रमाणिक हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना काउंटर सिग्नेचर के फाइल को अधूरा माना जाएगा। हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में हो रही कार्रवाई डीपीओ स्थापना द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि यह पूरी कार्रवाई उपनिदेशक, माध्यमिक शिक्षा के पत्रांक 383 दिनांक 13 अप्रैल 2026 तथा माननीय उच्च न्यायालय में लंबित सीडब्ल्यूजेसी संख्या 874/2024 (निरंजन कुमार एवं अन्य बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में 14 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश के आलोक में की जा रही है। विभाग ने इस आदेश को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू की है। लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई शिक्षा विभाग ने इस कार्य को ‘अति आवश्यक’ श्रेणी में रखा है और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर फाइल उपलब्ध नहीं कराने वाले संबंधित विद्यालयों और प्रधानाध्यापकों पर कार्रवाई की जा सकती है। आदेश जारी होते ही विद्यालयों में बढ़ी हलचल जैसे ही विभाग की ओर से यह आदेश जारी हुआ, जिले के विभिन्न विद्यालयों में हलचल तेज हो गई। प्रधानाध्यापक संबंधित शिक्षकों के दस्तावेज जुटाने और उन्हें व्यवस्थित करने में जुट गए हैं। कई स्कूलों में रिकॉर्ड को अपडेट करने का काम तेजी से चल रहा है। इन प्रखंडों से मांगी गई है फाइल जिला शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार ट्रांसफर होकर आए 75 कंप्यूटर शिक्षकों की शैक्षणिक फाइल विभिन्न प्रखंडों से मांगी गई है। इनमें बिहपुर से तीन, गोपालपुर से चार, गोराडीह और जगदीशपुर से एक-एक, इस्माइलपुर से तीन, कहलगांव और खरीक से सात-सात शिक्षक शामिल हैं। इसके अलावा नगर निगम क्षेत्र से 11, नारायणपुर से चार, नाथनगर से तीन, नवगछिया से एक, पीरपैंती से नौ, रंगरा चौक से दो, सबौर से तीन, सन्हौला से सात, शाहकुंड से पांच और सुल्तानगंज से चार शिक्षक शामिल हैं। पारदर्शिता सुनिश्चित करना विभाग का उद्देश्य शिक्षा विभाग का मानना है कि इस जांच के जरिए नियुक्ति प्रक्रिया और शिक्षकों की योग्यता में पारदर्शिता लाई जा सकेगी। साथ ही भविष्य में किसी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि सभी दस्तावेजों की गहन जांच के बाद ही अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।  

मुख्यमंत्री साय ने ‘मोर गांव, मोर पानी, मोर तरिया’ महाअभियान अंतर्गत 500 नए तरिया का किया शिलान्यास

रायपुर. छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी पहल “मोर गांव, मोर पानी, मोर तरिया महाअभियान” का आज जशपुर के रणजीता स्टेडियम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुभारंभ किया। अभियान के अंतर्गत “नवा तरिया, आय के जरिया” के तहत प्रदेश में 500 नए तरिया (तालाब) के निर्माण का भी शिलान्यास किया। इससे जल संचयन, भूजल स्तर में वृद्धि और कृषि कार्यों के लिए सिंचाई सुविधा में सुधार होगा। इस अभियान के माध्यम से जल संरक्षण, जल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में बड़े स्तर पर कार्य किए जाएंगे। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत इस महाअभियान के तहत प्रदेशभर में 10,000 आजीविका डबरी निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके विरुद्ध 15 अप्रैल 2026 तक 13,000 से अधिक डबरी निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। यह उपलब्धि अभियान की गति और प्रभावशीलता को दर्शाती है।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि जल ही जीवन और विकास का आधार है। ‘मोर गांव, मोर पानी, मोर तरिया’ अभियान के माध्यम से हम गांव-गांव में जल संरक्षण को जन आंदोलन बना रहे हैं। इससे न केवल पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि आजीविका डबरी के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन, बत्तख पालन, सिंघाड़ा उत्पादन, सब्जी उत्पादन और वृक्षारोपण जैसे विविध आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लोगों को अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त होंगे।  ग्रामीण स्तर पर इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए दीवार लेखन, बैनर, ग्राम सभाओं में जागरूकता अभियान तथा क्यूआर कोड के माध्यम से विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भी व्यापक प्रचार किया जा रहा है। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए आजीविका डबरी से जुड़े कार्यों में स्व सहायता समूह की महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। हितग्राही परिवार की महिला सदस्य का नाम नागरिक सूचना पटल में अंकित किया जा रहा है, जिससे महिलाओं की अधिकारिता और भागीदारी मजबूत हो सके। इसके तहत उन्नत तकनीक आधारित योजना निर्माण और ग्राम सभा की स्वीकृति के आधार पर कार्यों को मंजूरी दी जा रही है, जिससे पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो रही है। सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से यह अभियान ग्राम पंचायतों के समग्र विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का कार्य करेगा। “मोर गांव, मोर पानी, मोर तरिया” महाअभियान जशपुर सहित पूरे प्रदेश में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाते हुए ग्रामीणों के जीवन में स्थायी बदलाव लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में उभर रहा है। इस अवसर पर  उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, अध्यक्ष छ.ग. भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल रामप्रताप सिंह, विधायक पत्थलगांव श्रीमती गोमती साय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

बालवाटिका को सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिक गढ़ने की पहली प्रयोगशाला बना रही योगी सरकार

लखनऊ. बालवाटिका को प्रारंभिक शिक्षा के केंद्र के साथ-साथ योगी सरकार उसे भविष्य के सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिकों के निर्माण की पहली प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने की दिशा में निर्णायक पहल कर रही है। प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को नई दिशा देते हुए बालवाटिका (3 से 6 वर्ष आयु वर्ग) को समग्र विकास के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। बालवाटिका के नवीन पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा के ‘पंचकोश’ सिद्धांत को बाल विकास के पांच प्रमुख आयामों से वैज्ञानिक रूप से जोड़ा गया है। अन्नमय कोष को शारीरिक विकास, प्राणमय कोष को सामाजिक-भावनात्मक एवं नैतिक विकास, मनोमय कोष को भाषा एवं साक्षरता, विज्ञानमय कोष को संज्ञानात्मक विकास तथा आनंदमय कोष को सौंदर्यबोध विकास से जोड़ा गया है। इसी के अनुरूप एससीईआरटी द्वारा इनके लिए चहक, कदम और कलांकुर जैसी वर्कबुक, गतिविधि पुस्तिकाएं, चित्र कथा, संख्या ज्ञान, कला एवं संगीत आधारित सामग्री विकसित की गई है। ये खेल, कहानी और गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करतीं हैं।  योगी सरकार की इस पहल से बच्चों का विकास शैक्षणिक स्तर के साथ-साथ उनके शरीर, मन, बुद्धि और भावनाओं के संतुलित व समग्र विकास के रूप में होगा। वे प्रारंभिक अवस्था से ही सृजनशील, संवेदनशील और सक्षम नागरिक के रूप में विकसित भी होंगे।  यह है उद्देश्य इस पाठ्यक्रम को तैयार करने का उद्देश्य बच्चों के व्यक्तित्व के प्रत्येक पहलू को संतुलित रूप से विकसित करना है, ताकि प्रारंभिक अवस्था से ही उनकी सीखने की नींव मजबूत हो सके। बालवाटिका के लिए तैयार यह पाठ्यक्रम खेल, गतिविधि और अनुभव आधारित शिक्षण पर आधारित है। बच्चों को कहानी, संवाद, चित्रकला और समूह गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया जा रहा है, जिससे वे बिना दबाव के भाषा और संख्यात्मक दक्षताओं के साथ-साथ सामाजिक व्यवहार भी विकसित कर सकें। यह हैं पाठ्यक्रम-बाल विकास के निर्धारित चरण पाठ्यक्रम में शारीरिक विकास के लिए खेलकूद, भाषा विकास के लिए संवाद आधारित गतिविधियां, संज्ञानात्मक विकास के लिए जिज्ञासा आधारित सीखने की प्रक्रिया, सामाजिक एवं नैतिक विकास के लिए समूह सहभागिता तथा सौंदर्यबोध के लिए रचनात्मक गतिविधियों को शामिल किया गया है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और सृजनात्मक सोच का विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा। भविष्य में दिखेगा सकारात्मक प्रभाव एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान का कहना है कि 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, जिसमें विकसित होने वाली लगभग 85% क्षमताएं बच्चे के भविष्य की दिशा तय करती हैं। ऐसे में इस आयु वर्ग के लिए समग्र और गुणवत्तापूर्ण बाल केंद्रित पाठ्यक्रम विकसित किया गया है।

महाकुंभ वायरल गर्ल और फरमान की तलाश में केरल में छापा, एमपी पुलिस कर रही है जांच

 खरगोन मध्य प्रदेश की रहने वाली महाकुंभ वायरल गर्ल और फरमान की शादी देशभर में चर्चा में बनी हुई है। वायरल गर्ल नाबालिग होने की खबरों के बाद एमपी पुलिस एक्टिव है। बताया जा रहा है कि पीड़िता और आरोपी फरमान गायब हैं। पुलिस उन्हें ढूंढ़ती हुई केरल पहुंच गई है। वहां जगह-जगह छापामारी कर दोनों को तलाशा जा रहा है। केरल में सबूत जुटा रही पुलिस ​महाकुंभ वायरल गर्ल और फरमान की शादी के मामले में खरगोन एसपी के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया था। यही टीम जांच के लिए आज केरल पहुंच गई है। 4 सदस्यीय इस टीम में एक थाना प्रभारी, एक सब-इंस्पेक्टर, एक महिला सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबल शामिल हैं। जानकारी मिल रही है कि टीम ने कई जगह छापामारी की है। जहां से पुलिस सबूत जुटा रही है। केरल के स्थानीय थाने की पुलिस के साथ मिलकर मध्य प्रदेश पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। शादी के बाद हुई थी नाबालिग होने की पुष्टि बता दें कि​ शादी के बाद वायरल गर्ल के नाबालिग होने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद ही एमपी पुलिस के पास खरगोन थाने में आरोपी फरमान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। FIR दर्ज होने के बाद से ही केरल की स्थानीय पुलिस के साथ ही एमपी पुलिस भी पूरी तरह सक्रिय हो गई। लेकिन अब तक वायरल गर्ल और फरमान नहीं मिल सके हैं। एमपी पुलिस का कहना है कि आरोपी फरमान की तलाश और पीड़िता की बरामदगी के लिए विभाग ने अब हर स्तर पर प्रयास तेज कर दिए हैं। पिता के खिलाफ जाकर मुस्लिम बॉयफ्रेंड से की थी शादी बता दें कि वायरल गर्ल केरल में एक फिल्म की शूटिंग कर रही थीं। इसी दौरान उसकी मुलाकात फरमान खान से हुई थी। इस बीच दोनों दोनों करीब आए और यह करीबी प्यार में बदल गई। इसके बाद दोनों ने शादी कर ली। बता दें कि दोनों की शादी को लेकर पिता ने भी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि वे दोनों के रिश्ते से नाराज थे और शादी के सख्त खिलाफ थे। उनका कहना था कि उसने अपने बॉयफ्रेंड से शादी उनकी मर्जी के खिलाफ जाकर की थी। फरमान ने शेयर किया वीडियो, भाग गई वायरल गर्ल, बड़ा खुलासा बता दें कि इन दिनों फरमान खान का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो पोस्ट में फरमान नजर आ रहा है। वह वीडियो में कह रहा है कि शादी के कुछ दिन बाद ही वायरल गर्ल उसे छोड़कर भाग गई। वह कह रहा है कि वह राजस्थान के पुष्कर में आया हूं, उसे ढूंढ़ रहा हूं।

चिन्हारी योजना से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को मिल रही है नई शक्ति

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा संचालित चिन्हारी योजना राज्य की समृद्ध लोक-संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाकारों को नई पहचान देने का सशक्त माध्यम बनती जा रही है। इस योजना के माध्यम से न केवल पारंपरिक कला रूपों का संरक्षण हो रहा है, बल्कि कलाकारों को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से भी सशक्त किया जा रहा है। चिन्हारी योजना के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों में लोक कलाकारों, शिल्पकारों, गायकों और नर्तकों की पहचान कर उनका पंजीयन किया जा रहा है। इससे एक व्यापक सांस्कृतिक डेटाबेस तैयार हो रहा है, जो भविष्य में कला के संरक्षण और संवर्धन में सहायक सिद्ध होगा। योजना के अंतर्गत चयनित कलाकारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है तथा उन्हें राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी कला प्रस्तुत करने के अवसर भी दिए जाते हैं। इसके साथ ही मेलों, उत्सवों और शासकीय कार्यक्रमों में इन कलाकारों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है, जिससे उन्हें व्यापक पहचान मिल रही है। चिन्हारी योजना से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति चिन्हारी योजना से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृतिनई पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन भी इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गुरु-शिष्य परंपरा को बढ़ावा देते हुए अनुभवी कलाकारों के मार्गदर्शन में युवाओं को पारंपरिक कला का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। चिन्हारी योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू विलुप्त होती लोक परंपराओं का संरक्षण और पुनर्जीवन है। इसके तहत लोक नृत्य, लोकगीत और पारंपरिक शिल्प को संरक्षित कर उन्हें नई ऊर्जा प्रदान की जा रही है। साथ ही, डिजिटल माध्यमों के जरिए इन कलाओं का प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही, स्थानीय कला को पर्यटन से जोड़कर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। चिन्हारी योजना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और कलाकारों को सशक्त बनाने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है।

मध्यप्रदेश: पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत 3% बढ़ी, नया आदेश जारी

भोपाल एमपी में सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियोें और पेंशनर्स को सौगातों का सिलसिला लगातार जारी है। अब मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत में 3 प्रतिशत की वृद्धि की है। कंपनी में 1 जून 2005 के बाद सेवानिवृत्त सभी पेंशनरों, परिवार पेंशनरों व 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के पेंशनरों को महंगाई राहत में वृद्धि दी जा रही है। छठवें वेतनमान के अंतर्गत 257 प्रतिशत एवं सातवें वेतनमान अंतर्गत 58 प्रतिशत मंहगाई राहत देने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। सेवानिवृत्त और परिवार पेंशनर को छटवें वेतनमान अंतर्गत 01 जनवरी 2026 से 05 प्रतिशत की वृद्धि की गई मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा सेवानिवृत्त पेंशनर और परिवार पेंशनर को छटवें वेतनमान अंतर्गत 01 जनवरी 2026 से 05 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सातवें वेतनमान के अंतर्गत पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत में 3 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। आदेश के अनुसार माह जनवरी 2026 से बढ़ी हुई मंहगाई राहत राशि का भुगतान किया जाएगा आदेश के अनुसार माह जनवरी 2026 से बढ़ी हुई मंहगाई राहत राशि का भुगतान किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि सभी पात्र पेंशनर्स को इस संबंध में सूचित किया जा रहा है। छठवें वेतनमान के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़कर हुआ 257 प्रतिशत, एरियर का भी लाभ इधर राज्य शासन ने छठवें वेतनमान में वेतन प्राप्त कर रहे शासकीय सेवकों को राहत देते हुए महंगाई भत्ते में वृद्धि का निर्णय लिया है। इस फैसले से कर्मचारियों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेगा और लंबित एरियर का भी भुगतान सुनिश्चित किया गया है। राज्य शासन द्वारा छठवें वेतनमान अंतर्गत कार्यरत शासकीय सेवकों के महंगाई भत्ते में वृद्धि की गई है। संशोधित दरों के अनुसार महंगाई भत्ता 252 प्रतिशत से बढ़ाकर 257 प्रतिशत कर दिया गया है। यह 1 जुलाई 2025 से प्रभावशील होगा। इस वृद्धि का वास्तविक लाभ कर्मचारियों को 1 अप्रैल 2026 से (भुगतान माह मई 2026) से मिलना शुरू होगा। इसके साथ ही 1 जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि का एरियर 6 समान किश्तों में मई से अक्टूबर 2026 तक दिया जाएगा। उक्त अवधि के दौरान सेवानिवृत्त या दिवंगत हो चुके कर्मचारियों अथवा उनके नामांकित परिजनों को एरियर की राशि एकमुश्त प्रदान की जाएगी सरकार ने यह भी प्रावधान किया है कि उक्त अवधि के दौरान सेवानिवृत्त या दिवंगत हो चुके कर्मचारियों अथवा उनके नामांकित परिजनों को एरियर की राशि एकमुश्त प्रदान की जाएगी। इससे उन्हें तत्काल राहत मिल सकेगी।

उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को मिलने वाले बीज की होगी डिजिटल ट्रैकिंग

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश सरकार गन्ना किसानों को डिजिटल माध्यमों से राहत प्रदान करने का बड़ा कदम उठा रही है। इसी क्रम में गन्ना किसानों को बेहतर पैदावार के लिए नए बीज ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि उत्पादन और आय को बढ़ाया जा सके। प्रदेश सरकार की मंशा के मुताबिक गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग एक नया मोबाइल ऐप तैयार करा रहा है, जिसके जरिए गन्ना शोध केंद्रों से निकलने वाले बीजों की किसानों के खेत में पहुंचने तक ट्रैकिंग होगी।  एडिशनल केन कमिश्नर, यूपी, वीके शुक्ला का कहना है कि किसान प्रदेश सरकार की प्राथमिकता हैं। गन्ने की खेती में यूपी का योगदान बेहद अहम रहा है। ऐसे में विभाग गन्ना किसानों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है। नया मोबाइल ऐप गन्ने के बीज वितरण की ट्रैकिंग से किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होगा। इससे गन्ना उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। ऐप लॉचिंग को लेकर तैयारी तेजी से चल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने बीजों की कालाबाजारी पर पूरी तरह नियंत्रण का प्लान बनाया है। प्लान के तहत गन्ना किसानों को उच्च गुणवत्ता वाला बीज उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही इन बीजों की सीड (बीज) ट्रेस एंड ट्रैक मोबाइल ऐप के जरिए ट्रैकिंग की जाएगी। इससे बीज की ट्रैकिंग से उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को काफी लाभ होगा। किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज मिलने के साथ उत्पादन भी बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अच्छे बीज से बढ़िया पैदावार होने पर किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। यूपी-गुजरात की मदद से तैयार हो रहा मोबाइल ऐप गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग लखनऊ मुख्यालय के जिला गन्ना अधिकारी विजय बहादुर सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार की मंशा के मुताबिक विभाग कई विभागों की मदद से नया मोबाइल ऐप तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशन सेंटर, गुजरात के भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लिकेशन एंड जियो-इंफॉर्मेटिक्स (बीआईएसएजी-एन) इंस्टिट्यूट मिलकर गन्ना किसानों के लिए सीड (बीज) ट्रेस एंड ट्रैक मोबाइल ऐप तैयार कर रहे हैं। विजय बहादुर सिंह ने बताया कि सबसे अच्छी बात है कि नए डिटिजल ऐप को तैयार करने में एक रूपये भी विभाग का खर्च नहीं हो रहा है। ये सारा काम पीएम गति शक्ति योजना के तहत किया जा रहा है। बीजों की ट्रैकिंग वाली ये मोबाइल ऐप एक से दो महीने में लॉन्च हो जाएगी। फिलहाल इसकी टेस्टिंग चल रही है। ऐप का जमीनी स्तर पर भी परिक्षण किया जाएगा। सीड (बीज) ट्रेस एंड टेस्टिंग ऐप के फायदे गन्ने का बीज तीन से चार चरणों के बाद किसानों तक पहुंचता है। सबसे पहले गन्ने का कोई भी बीज शोध केंद्रों से निकलता है। इसके बाद गन्ना विकास परिषद (आधार बीज उत्पाद केंद्र) तक पहुंचता है। फिर प्राथमिक बीज उत्पादन नर्सरी तक जाता है। यहां से किसानों को वितरित होना शुरू होता है। इतने सारे चरणों में बीज की ट्रैकिंग संभंव नहीं हो पाती थी, लेकिन नए मोबाइल ऐप के जरिए यह संभंव हो पाएगा। किसान को मोबाइल ऐप पर ही बीज की उपलब्धता पता चलेगा। यहां से वह विभाग को बीज की मांग (डिमांड) भेज सकता है। फिर गन्ना विकास परिषद में तैनात गन्ना पर्यवेक्षक हर जिले में आने वाली डिमांड की उपलब्धता के आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। मोबाइल ऐप पर गन्ना बीज पाने वाले किसानों का भी डाटा उपलब्ध रहेगा। इससे अगले चरण में उत्पादन की ट्रैकिंग भी आसान हो जाएगी। ट्रैकिंग शुरू होने से गन्ने की वैराइटी को पैदावार के हिसाब से आगामी वर्षों में बदलना आसान हो पाएगा। फैक्ट फाइल यूपी में गन्ना किसान – 46.50 लाख (चीनी मीलों को सप्लाई करने वाले) कुल गन्ना उत्पादन – 83.25 टन प्रति हेक्टेयर कुल गन्ना बोआई (पिछले वर्ष) – 28.61 लाख हेक्टेयर