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लखनऊ में खाद्य विभाग की समीक्षा बैठक, 25 लाख टन लक्ष्य पर जोर

 लखनऊ  खाद्य तथा रसद राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने गेहूं खरीद की गति बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि खरीद का लक्ष्य पाने के लिए तेजी से प्रयास किए जाएं। क्रय केंद्रों पर किसानों को परेशानी न हो। खाद्य तथा रसद राज्यमंत्री ने दिए निर्देश राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने शुक्रवार को आयोजित बैठक में बताया गया कि गेहूं खरीद के लिए 5797 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। भारत सरकार ने 25 लाख टन की खरीद का लक्ष्य तय किया है और अब तक 190704 किसानों से 9.75 लाख टन (39.01 प्रतिशत) की खरीद हो चुकी है। जबकि पिछले वर्ष इस अवधि में 9.19 लाख टन की खरीद हुई थी। मंत्री ने राशन की दुकानों पर ई-पास मशीनों से खाद्यान्न वितरण की नियमित जांच के भी निर्देश दिए। मंत्री ने 60 प्रतिशत से कम प्रगति वाले जिलों में गति बढ़ाने के निर्देश दिए। बताया गया कि खाद्यान्न वितरण की ऑनलाइन रिपोर्ट की मानिटरिंग की जा रही है और विभागीय कार्मिकों द्वारा फील्ड स्तर पर मोबाइल इंस्पेक्शन एप से आनलाइन जांच भी की जा रही है। इसकी औसत प्रगति 71.31 प्रतिशत है। मंत्री ने 60 प्रतिशत से कम प्रगति वाले जिलों में गति बढ़ाने के निर्देश दिए। ई-केवाईसी और अन्नपूर्णा भवनों का निर्माण जल्द पूरा कराने के भी निर्देश दिए मंत्री ने राशन कार्ड धारकों की ई-केवाईसी और अन्नपूर्णा भवनों का निर्माण जल्द पूरा कराने के भी निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव एवं आयुक्त रणवीर प्रसाद, अपर आयुक्त (प्रशासन) कामता प्रसाद सिंह, अपर आयुक्त (आपूर्ति) सत्यदेव, वित्त नियंत्रक शशि भूषण तोमर, संभागीय खाद्य नियंत्रक (मुख्यालय) अशोक कुमार पाल आदि मौजूद रहे।  

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत प्रतापगढ़ जंक्शन का आधुनिकीकरण तेज

 प्रतापगढ़  मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़ जंक्शन के यार्ड को अपग्रेड किया जाएगा। इससे यार्ड से होकर ट्रेनें स्पीड से प्लेटफार्म पर पहुंचेंगी और रवाना भी होंगी। यार्ड के सभी प्वाइंट्स व्यवस्थित किए जाएंगे। स्लीपर व नई पटरियां भी लगाई जाएंगी। ट्रैक पैकेजिंग भी होगी। इससे ट्रेनों का संचालन बेहतर होगा। बारिश से पहले यार्ड को बेहतर बनाने की तैयारी है। स्टेशन के पुराने भवन की जगह नए बनाए जा रहे मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़ जंक्शन पर अमृत भारत स्टेशन के तहत कार्य चल रहा है। पुराने भवन को गिराकर नए भवन बनाए जा रहे हैं। यात्री सुविधाओं पर भी ध्यान है। एलईडी स्क्रीन, कोच संकेतक भी लग गए हैं। सीसीटीवी का कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा ट्रेनों के संचालन नर भी विशेष ध्यान है। इसी के क्रम में जंक्शन के यार्ड को अपग्रेड किया जाएगा। खास-खास – 5 प्लेटफार्म हैं जंक्शन पर – 5 हजार यात्री आते-जाते हैं प्रतिदिन – 20 से अधिक वाटर बूथ लगे हैं जंक्शन पर – 2 जनरल टिकट के काउंटर – 2 आरक्षण टिकट काउंटर – 3 एलईडी स्क्रीन स्लीपर व पटरी बदली जाएगी यार्ड की स्क्रीनिंग करने के बाद स्लीपर व पटरी को बदला जाएगा। सभी प्वाइंट्स को बेहतर बनाया जाएगा। इससे ट्रेन की स्पीड बढ़ेगी। दरअसल, जंक्शन के दोनों छोर पर यार्ड को अपग्रेड हुए लंबा समय हो गया है। इससे जब यहां ट्रेन पहुंचती है तो इनकी स्पीड धीमी हो जाती है। कई बार आउटर पर ही ट्रेनें खड़ी हो जाती हैं। धीरे-धीरे यह प्लेटफार्म की ओर रुख करती हैं। दक्षिणी छोर और उत्तरी छोर पर यार्ड से पहले ट्रेनों की गति धीमी हो जाती है। यार्ड सुदृढ़ीकरण कार्य जल्द शुरू : पीडब्ल्यूआइ पटरियों से भी तेज आवाज आती है। कई बार तो ट्रेनों के कोच नया माल गोदाम रोड क्रासिंग व जेल रोड क्रासिंग पर देखे जाते हैं। इससे जाम की स्थिति भी रहती है, लेकिन अब यार्ड के अपग्रेड होने के बाद ट्रेनों के संचालन में बदलाव दिखेगा। पीडब्ल्यूआइ जितेंद्र कुमार ने बताया कि जल्द ही यार्ड के सुदृढ़ीकरण का कार्य शुरू होगा। इसे और बेहतर बनाया जाएगा। इससे ट्रेनों का आवागमन सुगम होगा।  

ड्राइवरलेस ट्रेनों के साथ यूपी मेट्रो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मेंटेनेंस और ऑटोमैटिक कंट्रोल सिस्टम

लखनऊ यूपी में मेट्रो का नया ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिहाजा और उन्नत तकनीक से युक्त होगा। सफर के दौरान समस्या आने पर यात्री कोच में लगे इंटरकॉम से जब ऑपरेशन कंट्रोल और सिक्योरिटी कंट्रोल रूम से संपर्क करेगा तो कोच की लाइव फुटेज इन दोनों ही स्थानों पर तैनात कर्मचारी देख सकेंगे। ऐसे में उस तक तुरंत मदद पहुंचाने में आसानी होगी। लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (फेज-1 बी) के लिए 15 अत्याधुनिक ट्रेन सेट और सिग्नलिंग सिस्टम के डिजाइन और निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता हुए सभी कोचों में पैसेंजर इमरजेंसी इंटरकॉम (पीईआई बटन) की सुविधा हलगी। इस बटन को दबाते ही यात्री सीधे ट्रेन ऑपरेटर से संपर्क कर सकेंगे और अपनी समस्या बता सकेंगे। जिस कोच से कॉल किया जाएगा उसकी लाइव फुटेज ड्राइवर केबिन, ऑपरेशन कंट्रोल रूम और सिक्योरिटी कंट्रोल रूम में दिखाई देगी। ट्रेन के अगले स्टेशन पर पहुंचते ही सुरक्षा टीम तुरंत मदद के लिए मौजूद रहेगी। एआई आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस … मेट्रो ट्रेन के ट्रेन कंट्रोल एंड मैनेजमेंट सिस्टम (टीसीएमएस टीजीसी) को कम्प्यूटरीकृत मेंटेनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएमएस) से जोड़ा जाएगा। इस व्यवस्था में सर्वर सीधे ट्रेनों से जुड़ा रहेगा, जिससे ट्रेनों के डेटा की ऑनलाइन मॉनिटरिंग और डाउनलोडिंग होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से प्रिवेंटिव और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस किया जाएगा। इसमें किसी भी फाल्ट का पता चलते ही स्वतः जॉब कार्ड तैयार होने की सुविधा भी होगी। यूपीएमआरसी के एमडी, सुशील कुमार ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पर चलने वाली ट्रेनें सुरक्षा और ऊर्जा बचत में विश्वसनीय और बेहतर होंगी। ड्राइवर लेस ट्रेन का संचालन होगा संभव ट्रेनें अनअटेंडेड ट्रेन ऑपरेशन (यूटीओ) ) मोड पर संचालित होंगी, जिससे उनका संचालन पूरी तरह "ड्राइवर लेस" होगा। इस प्रणाली के तहत ट्रेनें कम्युनिकेशन-बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (सीबीटीसी) जैसी उन्नत तकनीक की मदद से स्वतः संचालित होंगी। गति भी नियंत्रित करेंगी। साथ ही ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर (ओसीसी) प्रणाली से सुरक्षित दूरी बनाते हुए चलेंगी। किसी भी तकनीकि या अन्य समस्या की स्थिति में स्वतः ब्रेक लग जाएगा। ट्रेनों में सीओटू सेंसर आधारित एचवीएसी सिस्टम लगाया जाएगा। यह सिस्टम से एसी की कूलिंग अपने आप एडजस्ट करेगा। इससे यात्रियों को बेहतर आराम मिलेगा और ऊर्जा की बचत भी होगी। लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (चारबाग से बसंतकुंज) पर बिना ड्राइवरों वाली ट्रेनें दौड़ेंगी। कंट्रोल सिस्टम से इनका संचालन होगा, जिससे इससे सुरक्षा और पुख्ता होगी। मेट्रो प्रशासन ने शुक्रवार को 15 ड्राइवरलेस ट्रेन सेट और सिग्ननलिंग सिस्टम के डिजाइन और निर्माण के लिए टेंडर जारी किया।

मंत्रिमंडल में सिर्फ छह नए चेहरों की एंट्री तय, किसी मंत्री की छुट्टी नहीं होगी

 लखनऊ यूपी में योगी मंत्रिमंडल विस्तार की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। बिहार, बंगाल और असम के बाद यूपी की बारी है यानी 12 मई के बाद कभी भी टीम योगी का आकार बढ़ सकता है। खास बात यह है कि यह केवल विस्तार होगा, बदलाव नहीं। मतलब ये कि मंत्रिमंडल में सिर्फ छह नये चेहरे शामिल होंगे। प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक होने के चलते किसी बड़े बदलाव पर सहमति नहीं बन सकी है। सूत्रों की मानें तो किसी मंत्री को हटाए जाने की संभावना नहीं है। विभाग बदले जाने के आसार भी कम ही हैं। प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार का खाका लगभग तैयार है। इस पर अंतिम मुहर दिल्ली से लगना बाकी है। इसके लिए जल्द मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली जा सकते हैं। फिलहाल, जिन नामों को मंत्री बनाए जाने की संभावना बताई जा रही है, उनमें पूजा पाल, मनोज पांडेय, सुरेंद्र दिलेर, भूपेंद्र चौधरी के नाम शामिल हैं। इनके अलावा पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह, कृष्णा पासवान, संतोष सिंह, हंसराज विश्वकर्मा, आशा मौर्य के नाम भी रेस में शामिल बताए जा रहे हैं। इनके अलावा संगठन से जुड़े ब्राह्मण चेहरे और ब्रज के एक विधायक का नाम इस फेहरिस्त में शुमार है। कई बुजुर्ग मंत्रियों ने ली राहत की सांस पूजा पाल का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पार्टी इस दांव से कई निशाने साध सकती है। महिला और पिछड़े वर्ग का कोटा पूरा करने के साथ ही भाजपा उन्हें सपा को घेरने के लिए सियासी हथियार के रूप में भी इस्तेमाल कर सकती है। मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव न होने की संभावनाओं ने पार्टी के उम्रदराज मंत्रियों के साथ ही उनको भी राहत दे दी है, जिनके विभाग बदले जाने की चर्चाएं तेज थीं। बीते कुछ दिनों से इनमें से कई दिल्ली दरबार हो आए थे। चुनाव नजदीक होने के चलते बदलाव का फैसला नहीं कुछ मंत्रियों की कार्यशैली से केंद्रीय नेतृत्व नाखुश है, तो कइयों से मुख्यमंत्री नाराज हैं। मगर चुनाव नजदीक होने के चलते इन्हें बदलने पर फैसला नहीं हो पा रहा। पार्टी का एक वर्ग यह समझाने में भी काफी हद तक सफल रहा है कि इस समय किसी मंत्री को हटाने का संदेश सही नहीं जाएगा।

तय समय में बिजली कनेक्शन न जुड़ने पर उपभोक्ताओं को मिलेगा मुआवजा, नियामक आयोग सख्त

 लखनऊ यूपी के लखनऊ के मीटर रीचार्ज करने के बाद भी दो घंटे तक कनेक्शन न जुड़ने के मामले में नियामक आयोग पावर कॉरपोरेशन पर जुर्माना लगाने की तैयारी में है। जल्द ही इस संबंध में आदेश जारी हो सकते हैं। नेगेटिव बैलेंस की वजह से स्मार्ट मीटर के कनेक्शन कटने के बाद अगर उपभोक्ता मीटर रीचार्ज करवाता है तो उसके अधिकतम दो घंटे के भीतर कनेक्शन जुड़ने का प्रावधान है। अन्यथा उपभोक्ता मुआवजे का हकदार है। स्मार्ट मीटर को प्रीपेड में बदले जाने के बाद मार्च से पावर कॉरपोरेशन ने स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था लागू कर दी थी। इसके तहत नेगेटिव बैलेंस वाले उपभोक्ताओं के कनेक्शन कट रहे थे। उसी दरम्यान तमाम उपभोक्ताओं ने मीटर रीचार्ज करने के बाद कई घंटे तक कनेक्शन दोबारा न जुड़ने की शिकायत की थी। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही शिकायतों के बाद राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में लोकमहत्व याचिका दायर करते हुए तय मियाद में कनेक्शन न जुड़ने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा दिलवाने की मांग की थी। आयोग अब इस मामले में पावर कॉरपोरेशन पर जुर्माना लगाने की तैयारी कर रहा है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इस मामले में पावर कॉरपोरेशन पर जुर्माना अनिवार्य तौर पर लगाया जाएगा। अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी का फैसला वापस स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को दोबारा पोस्टपेड व्यवस्था में बदलने के बाद उपभोक्ताओं से नई दरों के हिसाब से अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी वसूलने का फैसला पावर कॉर्पोरेशन ने वापस ले लिया है। अब उपभोक्ताओं की पहले से जमा सुरक्षा राशि ही मान्य होगी और उन्हें नई कॉस्ट डेटा बुक-2025 के अनुसार अतिरिक्त पैसा नहीं देना पड़ेगा। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के विरोध के बाद पावर कॉर्पोरेशन ने देर रात अपना आदेश संशोधित किया। दरअसल, जब पोस्टपेड कनेक्शनों को प्रीपेड स्मार्ट मीटर में बदला गया था, तब उपभोक्ताओं की जमा सिक्योरिटी मनी को उनके प्रीपेड खाते में एडजस्ट कर दिया गया था। बाद में दोबारा पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने पर नई दरों के अनुसार अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी मांगी जा रही थी। इसका असर करीब 83 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ता। उपभोक्ता परिषद ने इसे गलत और नियमों के खिलाफ बताते हुए विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद कॉर्पोरेशन को फैसला वापस लेना पड़ा। हेल्पलाइन और व्हाट्सएप नंबर जारी उधर, उपभोक्ता अपना बिल प्राप्त करने और सहायता के लिए व्हाट्सएप चैटबॉट नंबर 7859804803 का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा विद्युत हेल्पलाइन नंबर 1912 पर भी विशेष व्यवस्था की गई है। जिन उपभोक्ताओं का मोबाइल नंबर अपडेट नहीं है, वे उसे तुरंत अपडेट करा लें जिससे समय पर बिल और सूचनाएं मिल सकें।

पांच राज्य संग्रहालयों का निर्माण पूरा, तीन परियोजनाएं अंतिम चरण में

लखनऊ  योगी सरकार प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी क्रम में संस्कृति विभाग के अधीन संचालित पांच राज्य संग्रहालयों के निर्माण और सुदृढ़ीकरण कार्य पूरे कर जनता को समर्पित कर दिया गया है, जबकि तीन अन्य परियोजनाओं के कार्य तेजी से अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं। इन संग्रहालयों में प्रदेश की गौरवशाली परंपरा, पुरातात्विक महत्व की वस्तुएं और दुर्लभ मूर्तियां संरक्षित की गईं हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और संस्कृति से जुड़ सकेंगी। प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय और नवाबी कला गैलरी बनी आकर्षण का केंद्र पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि बीते पांच वर्षों में राज्य संग्रहालयों के विकास के लिए व्यापक कार्य किए गए हैं। उन्होंने कहा कि योगी सरकार सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ उसे आधुनिक स्वरूप देने का कार्य कर रही है। राज्य संग्रहालय लखनऊ में 2483.05 लाख रुपये की लागत से निर्मित प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय का उद्घाटन 4 मार्च 2024 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जा चुका है। यह संग्रहालय आम लोगों और विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसके अलावा अवधी गैलरी (नवाबी कला) के सुदृढ़ीकरण और नवीनीकरण का कार्य भी 171.80 लाख रुपये की लागत से पूरा करा लिया गया है। यहां अवध की समृद्ध कला, संस्कृति और नवाबी परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। वहीं विदेशी मूर्तिकला गैलरी की दुर्लभ मूर्तियों को भी स्थानांतरित कर सुरक्षित रूप से संग्रहालय परिसर में स्थापित कर दिया गया है। आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित हो रहा संग्रहालय परिसर संग्रहालय परिसर को आधुनिक सुविधाओं से भी लैस किया जा रहा है। चतुर्थ पार्श्व गैलरियों के पहुंच मार्ग, शौचालय, विद्युत व्यवस्था और सौंदर्यीकरण के कार्य पूरे कराए जा चुके हैं। साथ ही संग्रहालय सभागार के सौंदर्यीकरण का कार्य पूर्ण होने के बाद उसका उद्घाटन 27 अगस्त 2025 को किया गया। ओल्ड कोठी में कैफेटेरिया आदि का कार्य 459.12 लाख रुपये और 460.49 लाख रुपये की लागत से बेसमेंट कक्षों के सुदृढ़ीकरण तथा 174.66 लाख रुपये की लागत से सीवर लाइन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट और नलकूप बोरिंग से जुड़े कार्य तेजी से चल रहे हैं।

17 जनपदों के 319 परीक्षा केंद्रों पर पूरी हुईं तैयारियां, एआई आधारित सीसीटीवी निगरानी में होगी परीक्षा

प्रयागराज / लखनऊ उ०प्र० शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा प्रवक्ता संवर्ग के 18 विषयों के कुल 624 पदों हेतु लिखित परीक्षा का आयोजन 09 एवं 10 मई 2026 को किया जाएगा। परीक्षा प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित होगी, जिसमें कुल 4,64,605 पंजीकृत अभ्यर्थी प्रतिभाग करेंगे। योगी सरकार की पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा नीति के अनुकूल सभी तैयारियां की गई हैं।  आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार  ने 17 जनपदों के 319 परीक्षा केंद्रों की तैयारियों की गहन समीक्षा की। उन्होंने बताया कि सभी परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा संबंधी तैयारियां पूर्ण कर ली गईं हैं। परीक्षा केंद्रों के सभी कक्षों एवं महत्वपूर्ण स्थलों को एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों से आच्छादित कर जिला कंट्रोल रूम तथा आयोग के अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से जोड़ा गया है। आयोग द्वारा सभी केंद्रों की कनेक्टिविटी का सफल परीक्षण भी कर लिया गया है। आयोग की ओर से परीक्षा के सघन अनुश्रवण के लिए प्रत्येक जनपद में एक-एक प्रेक्षक नियुक्त किया गया है। जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं निगरानी टीमें लगातार परीक्षा केंद्रों का भ्रमण करेंगी। परीक्षा केंद्रों के आसपास निषेधाज्ञा लागू रहेगी तथा पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा की शुचिता प्रभावित करने वाले व्यक्तियों एवं नकल माफियाओं के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  09 मई को प्रथम पाली में भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, गृह विज्ञान, इतिहास एवं शिक्षाशास्त्र सहित 06 विषयों तथा द्वितीय पाली में अंग्रेजी, कृषि, वाणिज्य एवं समाजशास्त्र सहित 04 विषयों की परीक्षा आयोजित की जाएगी। वहीं 10 मई को प्रथम पाली में नागरिक शास्त्र, गणित, अर्थशास्त्र, संस्कृत एवं मनोविज्ञान सहित 05 विषयों तथा द्वितीय पाली में रसायन विज्ञान, भूगोल, हिन्दी एवं कला सहित 04 विषयों की परीक्षा संपन्न कराई जाएगी। अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन सहित किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। साथ ही एआई तकनीक की सहायता से ऐसे संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान की गई है, जिन्होंने एक ही नाम से अलग-अलग फोटो के साथ अथवा एक ही फोटो के साथ अलग-अलग नामों से आवेदन किया है। ऐसे परीक्षार्थियों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोग द्वारा अभिनव प्रयोग के रूप में लखनऊ मंडल के 10 परीक्षा केंद्रों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रत्येक पाली की परीक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद अभ्यर्थियों द्वारा प्रयुक्त ओएमआर उत्तर पत्रकों की स्कैनिंग परीक्षा कक्ष में ही कक्ष निरीक्षकों एवं परीक्षार्थियों की उपस्थिति में की जाएगी। स्कैन डाटा को तत्काल सुरक्षित किया जाएगा, जिसका आवश्यकता पड़ने पर मूल ओएमआर से मिलान किया जा सकेगा। आयोग अध्यक्ष ने सभी अभ्यर्थियों से समय से परीक्षा केंद्र पर पहुंचने एवं प्रवेश पत्र में अंकित निर्देशों का अक्षरशः पालन करने की अपील की है। उन्होंने अभ्यर्थियों से किसी भी अफवाह अथवा भ्रामक सूचना से बचने तथा आयोग की वेबसाइट यूपीईएसएससी एवं आधिकारिक एक्स हैंडल पर उपलब्ध सूचनाओं पर ही भरोसा करने को कहा। आयोग ने स्पष्ट किया कि परीक्षा को पूर्णतः निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं। परीक्षा की शुचिता को प्रभावित करने वाले अनुचित साधनों के प्रयोग पर उ०प्र० सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी परीक्षार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं ।

29 लाख से ज्यादा महिलाओं को मिल रहा पेंशन का लाभ, डीबीटी से पारदर्शिता

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित वृद्धावस्था पेंशन योजना प्रदेश की लाखों बुजुर्ग महिलाओं के लिए जीवन का नया आधार बनकर उभरी है। वर्तमान में राज्य सरकार 29,23,364 बुजुर्ग महिलाओं को नियमित पेंशन का लाभ प्रदान कर रही है। आर्थिक रूप से कमजोर और निराश्रित महिलाओं के लिए यह योजना केवल एक सरकारी सहायता नहीं, बल्कि उनके बुढ़ापे की सबसे मजबूत लाठी साबित हो रही है, जिससे उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान मिला है। पारदर्शिता और डीबीटी: बिचौलियों का खेल खत्म योगी सरकार की इस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसकी पारदर्शिता है। समाज कल्याण विभाग के माध्यम से दी जाने वाली 1,000 रुपये प्रति माह की सहायता राशि अब बिचौलियों के बजाय सीधे लाभार्थियों तक पहुँच रही है। डीबीटी (Direct Benefit Transfer) प्रणाली के तहत हर तिमाही 3,000 रुपये सीधे बुजुर्ग महिलाओं के बैंक खातों में जमा किए जा रहे हैं। इस डिजिटल पहल ने भ्रष्टाचार की गुंजाइश को खत्म कर दिया है और पात्र महिलाओं को समय पर आर्थिक संबल सुनिश्चित किया है। पूर्वांचल में सबसे अधिक लाभ: जौनपुर रहा नंबर वन आंकड़ों के नजरिए से देखें तो पूर्वांचल के जिलों में इस योजना का व्यापक असर देखने को मिला है। जौनपुर जिला इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है, जहाँ 1,00,820 बुजुर्ग महिलाओं को पेंशन मिल रही है। इसके बाद आजमगढ़ (86,166) और बलिया (79,160) का स्थान है। प्रशासन का विशेष जोर उन महिलाओं की पहचान करने पर है जो अब भी इस दायरे से बाहर हैं, ताकि कोई भी जरूरतमंद महिला सामाजिक सुरक्षा के इस चक्र से वंचित न रहे। आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान में वृद्धि नियमित आर्थिक सहायता ने बुजुर्ग महिलाओं के जीवन स्तर में गुणात्मक बदलाव लाया है। अब उन्हें दवा, राशन और छोटे-मोटे खर्चों के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इस आत्मनिर्भरता ने परिवारों के भीतर भी उनकी स्थिति को मजबूत किया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाएं अब अधिक आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन जी रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य इस योजना का दायरा बढ़ाकर प्रदेश की हर निराश्रित बुजुर्ग महिला को सशक्त और स्वावलंबी बनाना है।  

सपा सरकार में हर दिन होते थे 19 दंगे और 33 अपहरण

लखनऊ  उत्तर प्रदेश जिसे वर्ष 2017 से पहले ‘दंगा प्रदेश’ कहा जाता था, जहां सपा सरकार में वर्ष 2012 से 2017 के बीच एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार प्रतिदिन 19 दंगे होते थे, उसी उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में एक भी दंगा नहीं हुआ। इस अवधि में कुछ अराजक तत्वों द्वारा जरूर दंगा भड़काने की कोशिश की गई, लेकिन योगी सरकार में सख्त कानून व्यवस्था ने दंगाइयों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। स्थिति बिगड़ने से पहले ही दंगा विरोधी सख्त कार्रवाई करते हुए ऐसे अराजक तत्वों को सलाखों के पीछे धकेला गया। इतना ही नहीं, जिस उत्तर प्रदेश में कभी व्यापारियों को आए दिन फिरौती के लिए अगवा कर लिया जाता था, उसी प्रदेश में वर्ष 2024 की एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार फिरौती के लिए अपहरण की एक भी घटना नहीं हुई। प्रदेश में दो वर्षों में फिरौती के लिए अपहरण की एक भी घटना नहीं वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में हर दिन अपहरण की 33 घटनाएं दर्ज की गईं। एनसीआरबी की वर्ष 2024 रिपोर्ट के अनुसार फिरौती के लिए अपहरण के मामले में उत्तर प्रदेश की अपराध दर (क्राइम रेट) शून्य दर्ज की गई है। देश के अन्य राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश इस मामले में सबसे बेहतर स्थिति में दिखाई देता है। रिपोर्ट के अनुसार नगालैंड में यह अपराध दर 0.7, मणिपुर में 0.6, अरुणाचल प्रदेश में 0.3 और मेघालय में 0.2 दर्ज की गई, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा शून्य रहा। रिपोर्ट यह भी बताती है कि वर्ष 2023 में भी यूपी में इस श्रेणी में क्राइम रेट शून्य था। यह बदलाव योगी सरकार की अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति, सक्रिय पुलिसिंग और संगठित अपराधों पर लगातार कार्रवाई से संभव हुआ है। पुलिस द्वारा गैंगस्टर एक्ट, माफिया की संपत्तियों की जब्ती और अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने जैसे सख्त कदमों का असर धरातल पर दिखाई दे रहा है।  योगी सरकार ने दंगााइयों के मंसूबों पर फेरा पानी उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में दंगे की एक भी घटना नहीं हुई। कुछ अराजक तत्वों द्वारा दंगा भड़काने की कोशिश जरूर की गई, लेकिन योगी सरकार में सख्त कानून व्यवस्था ने दंगाइयों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। मामूली हिंसक घटनाओं के उग्र रूप लेने से पहले ही अराजक तत्वों के खिलाफ दंगा विरोधी सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें सलाखों के पीछे धकेल दिया गया। एनसीआरबी की 2024 रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बलवा की अपराध दर 1.1 दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 2.2 रही। यहां यूपी में बलवा की अपराध दर 1.1 दर्ज होने का आधार वही मामले हैं, जिनमें दंगा भड़काने की कोशिशों को योगी सरकार ने समय रहते विफल कर दिया और अराजक तत्वों के खिलाफ दंगा भड़काने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सार्वजनिक मंचों से कहते हैं, ‘नो कर्फ्यू-नो दंगा, यूपी में सब चंगा।‘ एनसीआरबी रिपोर्ट में मणिपुर में बलवा की अपराध दर 8.4, महाराष्ट्र में 6.4, कर्नाटक में 5.4, हरियाणा में 5.3 और हिमाचल प्रदेश में 4.7 दर्ज की गई है।  सपा सरकार के समय प्रदेश में 25 हजार से अधिक दंगे उत्तर प्रदेश में एक समय ऐसा था जब दंगे, अपहरण और फिरौती जैसी घटनाएं आम चर्चा का विषय बन चुकी थीं। विशेष रूप से वर्ष 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार के दौरान प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। उस दौरान एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 25 हजार से अधिक दंगे हुए। उस समय औसतन हर दिन करीब 19 दंगे और अपहरण की 33 घटनाएं सामने आती थीं।

मोबाइल एप के जरिए होगा प्रतिदिन चार लाख लीटर से ज्यादा दूध का कारोबार

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम अब तकनीक के नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। अवध क्षेत्र और आसपास के 10 जिलों में कार्यरत ‘सामर्थ्य दुग्ध उत्पादक कंपनी’ के जरिए ग्रामीण महिलाएं अब आधुनिक तकनीक और मोबाइल एप के माध्यम से दुग्ध उत्पादन, संग्रह और भुगतान व्यवस्था को संचालित कर सकेंगी। इस पहल से प्रतिदिन चार लाख लीटर से अधिक दूध के व्यापार को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में गांव की महिलाओं के लिए तैयार किया गया पारदर्शी दुग्ध नेटवर्क अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनता जा रहा है। अवध और आसपास के जिलों में सवा लाख से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ा जा चुका है, जिनके हाथों में अब केवल दुग्ध उत्पादन ही नहीं बल्कि तकनीकी प्रबंधन की जिम्मेदारी भी होगी। गांव-गांव बने दुग्ध संग्रह केंद्र सामर्थ्य दुग्ध उत्पादक कंपनी द्वारा गांव गांव दुग्ध संग्रह केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां किसानों के यहां से दूध को उचित मूल्य पर खरीदा जा रहा है। इसे महिलाएं ही संचालित करती हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है, वहीं पशुपालकों को भी बाजार की अनिश्चितताओं से राहत मिली है। योगी सरकार की प्राथमिकता केवल खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि भुगतान व्यवस्था को भी पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है। महिला किसानों को महीने में तीन बार, दस-दस दिन के अंतराल पर सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान किया जाता है। इससे बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है। इन जिलों में तैयार हुआ नेटवर्क लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, अमेठी सुल्तानपुर, बाराबंकी, उन्नाव, प्रतापगढ़ कानपुर नगर और फतेहपुर में ग्रामीण महिलाओं का विशाल नेटवर्क तैयार किया गया है। ‘सामर्थ्य साथी’ एप से मिलेगा हर दिन का हिसाब दुग्ध कारोबार को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए ‘सामर्थ्य साथी’ नाम से मोबाइल एप शुरू किया गया है। इस एप के जरिए दुग्ध उत्पादकों को रियल टाइम दूध बिक्री, भुगतान, गुणवत्ता जांच और अन्य आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़ना केवल सुविधा नहीं बल्कि आर्थिक सशक्तीकरण का बड़ा माध्यम है। इसी उद्देश्य से गांव स्तर पर महिलाओं को डिजिटल प्रशिक्षण और तकनीकी जागरूकता भी की जा रही है। पारदर्शिता से बढ़ा महिलाओं का भरोसा दूध की गुणवत्ता जांच से लेकर पैसे के भुगतान तक पूरी प्रक्रिया तकनीक आधारित होने से दुग्ध उत्पादकों का भरोसा तेजी से बढ़ा है। ग्रामीण महिलाएं अब केवल पशुपालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डेटा, भुगतान और डिजिटल रिकॉर्ड की निगरानी भी स्वयं कर रहीं हैं। योगी सरकार की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को नई पहचान देने के साथ ही ‘आत्मनिर्भर गांव’ मॉडल को भी मजबूत करती दिखाई दे रही है। दुग्ध क्रांति अब गांव की चौपाल से मोबाइल स्क्रीन तक पहुंच रही है।