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सीएम योगी ने चेताया: जातिवाद के नाम पर देश को लूटने वाले राष्ट्रद्रोहियों से रहें सतर्क

जातिवाद के नाम पर देश को लूटने वाले राष्ट्रद्रोहियों से सावधान रहें: सीएम योगी तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ के शुभारंभ एवं ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका के विमोचन कार्यक्रम को सीएम ने किया संबोधित राष्ट्रकवि दिनकर की कृति आज भी राष्ट्र चेतना की मशाल, साहित्य समाज का दर्पण: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने देखा रश्मिरथी का मंचन, कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति की सराहना की तीन दिवसीय आयोजन में स्वामी विवेकानंद, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और अटल जी पर भी होंगे विशेष नाट्य कार्यक्रम लखनऊ, "राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति ‘रश्मिरथी’ आज भी समाज और राष्ट्र को दिशा देने वाली प्रेरणा है। यदि भारत को मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित बनाना है तो जातिवाद के नाम पर समाज को बांटने वाली शक्तियों से सावधान रहना होगा।" ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ के शुभारंभ एवं ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर की कालजयी काव्यकृति ‘रश्मिरथी’ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यह तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। साहित्य के ऐसे सशक्त साधक के प्रति हम सब अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए प्रदेश की राजधानी में एकत्र हैं। यहां हम उनकी कालजयी काव्यकृति पर आधारित नाट्य-श्रृंखला का मंचन देखेंगे। हम देखेंगे कि किस प्रकार मां सरस्वती दिनकर जी की जिह्वा पर विराजती थीं और उनकी लेखनी शब्दों को पिरोती थी। यह सब ‘रश्मिरथी’ के इस मंचन के माध्यम से हम सभी को देखने-सुनने को मिलेगा। इस अवसर पर दिनकर जी की स्मृतियों को नमन करते हुए मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। दिनकर जी की कृतियों के कुछ अंश लेकर विरोधियों पर प्रहार भी करता हूं सीएम योगी ने कहा कि जब इस कार्यक्रम का पत्र मिला, तो सबसे पहले मैंने कहा कि यह कार्यक्रम उसी दिन रखिए, जिस दिन मैं भी इसका भागीदार बन सकूं, क्योंकि मैं अक्सर दिनकर जी की कृतियों के कुछ अंश लेकर विरोधियों पर प्रहार भी करता हूं। भारत धन-धान्य से परिपूर्ण रहा है, दुनिया की बड़ी ताकत रहा है, लेकिन भारत ने सैकड़ों वर्षों की गुलामी भी सही है। बल और बुद्धि में भारत का कोई मुकाबला नहीं कर सकता था, लेकिन हमारी कुछ कमियां भी थीं। दिनकर जी ने इन कमियों पर जिस प्रकार प्रहार किया है, उसे देखकर मुझे अच्छा लगता है। आप इस नाट्य मंचन के माध्यम से भी देखेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिनकर जी ने ‘रश्मिरथी’ में लिखा है- “ऊंच-नीच का भेद न जाने, वही श्रेष्ठ ज्ञानी है, दया-धर्म जिसमें हो, सबसे वही पूज्य प्राणी है।" जातिवाद पर भी उन्होंने कितना सशक्त प्रहार किया है- “मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का, वीरों का, धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता रणधीरों का। पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर, जाति-जाति का शोर मचाते केवल कायर क्रूर।” सीएम योगी ने कहा कि यदि हमें अपनी आजादी को लंबे समय तक अक्षुण्ण बनाए रखना है और विकसित व आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करना है, तो जातिवाद के नाम पर देश को लूटने और समाज को कमजोर करने वाले राष्ट्रदोहियों से सावधान रहना होगा। युवा वर्ग के लिए दिनकर जी इस बात की प्रेरणा इन पंक्तियों के माध्यम से दशकों पहले ही दे चुके हैं- "सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, कांटों में राह बनाते हैं।" मुख्यमंत्री ने कहा कि दिनकर जी ने समाज की चेतना को जिस रूप में जागरूक किया और पूरे समाज को एकजुट किया, वह अद्वितीय है। अपनी कृतियों के माध्यम से वह अलग-अलग स्तरों पर लोगों को जागृत करते रहे और देश की चेतना को निरंतर सशक्त करते रहे। जब भारत के लोकतंत्र को दबाने का प्रयास हुआ, तब भी दिनकर जी ने आह्वान किया- “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।” शब्द किस प्रकार मंत्र बन जाएं और हर व्यक्ति के मन में राष्ट्र के लिए त्याग, चेतना और समर्पण की भावना को जागृत करें, यह गुण महान कवि में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि 'रश्मिरथी' ऐसे पात्र के बारे में है, जो अपनी पहचान के लिए मोहताज रहा। उसकी गाथा को दिनकर जी ने जिस प्रकार प्रस्तुत किया और उसके गुणों की व्याख्या की, उसने हर व्यक्ति को सोचने के लिए मजबूर किया कि कौन किस स्थान पर हो सकता है और हमें किसी की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ में उन्होंने लिखा है- "जब किसी जाति का अहम चोट खाता है, पावक प्रचण्ड हो कर बाहर आता है। यह वही चोट खाये स्वदेश का बल है, आहत भुजंग है, सुलगा हुआ अनल है।" स्वामी विवेकानंद ने शिकागो की धर्मसभा के बाद लखनऊ, अयोध्या, काशी की यात्राएं की सीएम ने बताया कि उन्होंने संस्कृति विभाग से कहा है कि ऐसी साहित्यिक कृतियों पर आधारित कार्यक्रम आज की पीढ़ी के लिए नई प्रेरणा हैं। इस प्रेरणा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। कल यहीं पर स्वामी विवेकानंद पर आधारित एक नाट्य मंचन का कार्यक्रम है। स्वामी विवेकानंद हर भारतीय के लिए प्रेरणा हैं। वह एक संन्यासी थे, लेकिन हर युवा के लिए मार्गदर्शक बने। उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की वैदिक और सनातन परंपरा को सम्मान दिलाया। उन्होंने ज्ञान को विज्ञान के साथ जोड़कर तत्कालीन समाज को उसके अनुरूप तैयार करने का कार्य किया और भारत की चेतना को जागरूक करने के लिए पूरी शक्ति के साथ समर्पित रहे। स्वामी विवेकानंद ने शिकागो की धर्मसभा के बाद भारत में जो यात्राएं कीं, उनमें लखनऊ, अयोध्या, काशी सहित उत्तर प्रदेश के कई स्थान शामिल थे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 अप्रैल को यहां लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक पर आधारित कार्यक्रम होगा। तिलक जी ने भारत की स्वाधीनता के लिए “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा” का उद्घोष इसी लखनऊ में किया था, जो भारत की आजादी का एक प्रमुख केंद्र बना। इसी दिन ‘अटल स्वरांजलि’ कार्यक्रम भी आयोजित होगा, जिसमें भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविताओं पर आधारित एक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। अटल जी का शताब्दी वर्ष हाल में संपन्न हुआ है, और इस अवसर … Read more

25, 26 और 27 अप्रैल को अभ्यर्थियों के लिए विशेष सुरक्षा निर्देश: सीएम योगी ने किए कड़े इंतजाम

अभूतपूर्व सुरक्षा में होगी होमगार्ड लिखित परीक्षा सीएम योगी ने दिए कड़े सुरक्षा इंतजाम के निर्देश, 25, 26 व 27 अप्रैल को 1053 केंद्रों पर 25 लाख से अधिक अभ्यर्थी होंगे शामिल 41,424 पदों के लिए जुटेंगे लाखों अभ्यर्थी, हर 240 परीक्षार्थियों पर एक निरीक्षक/उप निरीक्षक की तैनाती सभी केंद्रों व स्ट्रॉन्ग रूम में सीसीटीवी से निरंतर निगरानी, घड़ी, मोबाइल, ब्लूटूथ समेत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित लखनऊ  योगी सरकार की “पारदर्शी एवं नकलविहीन भर्ती” की प्रतिबद्धता के तहत होमगार्ड एनरॉलमेंट 2025 की लिखित परीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने अभूतपूर्व सुरक्षा का खाका तैयार किया है। 41,424 पदों के लिए आयोजित होने वाली इस परीक्षा में 25.32 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा 25, 26 व 27 अप्रैल को प्रदेश भर के 1053 केंद्रों पर दो पालियों में आयोजित की जाएगी। योगी सरकार के निर्देशन में व्यापक एवं बहुस्तरीय व्यवस्था न केवल परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करेगी, बल्कि प्रदेश में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी मजबूती से स्थापित करेगी। हर स्तर पर कड़ी निगरानी, पुलिस-प्रशासन अलर्ट मोड में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अध्यक्ष डीजी एस.बी. शिरडकर ने बताया कि परीक्षा की शुचिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक जिले में अपर पुलिस अधीक्षक/अपर पुलिस उपायुक्त स्तर के नोडल ऑफिसर बनाए गए हैं। सभी केंद्रों पर प्रति 240 परीक्षार्थियों पर एक निरीक्षक/उप निरीक्षक की तैनाती की गई है। प्रवेश द्वार पर हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर से सभी अभ्यर्थियों की सघन चेकिंग होगी। महिला अभ्यर्थियों की जांच महिला पुलिसकर्मियों द्वारा बंद परिसर में कराई जाएगी। प्रश्नपत्र सुरक्षा के लिए ‘डबल लॉक’ सिस्टम, सख्त प्रोटोकॉल प्रश्नपत्रों को कोषागार में डबल लॉक व्यवस्था में रखा गया है, जिसकी चाबियां अलग-अलग अधिकारियों के पास रहेंगी। स्ट्रॉन्ग रूम में 24 घंटे बिजली, इंटरनेट और अग्निशमन व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। प्रश्नपत्रों को केंद्रों तक पहुंचाने के लिए रूट मैप बनाकर सेक्टर मजिस्ट्रेट द्वारा पूर्वाभ्यास (रिहर्सल) किया गया है। परिवहन के दौरान किसी भी प्रकार की फोटोग्राफी पर पूर्ण प्रतिबंध रहा। परीक्षा केंद्रों का सैनिटाइजेशन, सीसीटीवी से होगी निगरानी सभी परीक्षा केंद्रों का गहन सैनिटाइजेशन कराया गया है और छत, गैलरी, मैदान और वॉशरूम तक की सघन जांच की गई है, ताकि किसी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस या आपत्तिजनक सामग्री छिपी न रह जाए। सभी केंद्रों और स्ट्रॉन्ग रूम में सीसीटीवी कैमरों से निरंतर निगरानी की जाएगी। साथ ही पेयजल, क्लॉक रूम और समय की सूचना के लिए बेल जैसी मूलभूत सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। अभ्यर्थियों के लिए सख्त गाइडलाइन, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पूरी तरह प्रतिबंधित अभ्यर्थियों को केवल प्रवेश पत्र, पहचान पत्र और काला/नीला पेन लाने की अनुमति होगी। किसी भी प्रकार की घड़ी, मोबाइल, ब्लूटूथ या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परीक्षा केंद्र में पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। कक्ष निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सीटिंग व्यवस्था और अनुशासन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं। रेलवे स्टेशन से परीक्षा केंद्र तक सुरक्षा, यूपी-112 और एम्बुलेंस तैनात परीक्षा के दौरान रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष पुलिस व्यवस्था की गई है। परीक्षा केंद्रों के आसपास यूपी-112 की गाड़ियां और एम्बुलेंस तैनात रहेंगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी, जिससे अफवाहों पर रोक लगाई जा सके। आधार आधारित ई-केवाईसी प्रक्रिया से गुजरना होगा डीजी शिरडकर ने बताया कि नकलविहीन और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पूर्व आधार आधारित ई-केवाईसी प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके साथ ही केंद्रों पर आइरिस बायोमेट्रिक डेस्क स्थापित की जाएंगी, जहां अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। इस व्यवस्था के माध्यम से इंपर्सनेशन (दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देने) जैसी अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगेगी और ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

Ganga Expressway: पश्चिमी यूपी से पूरब तक, 12 जिलों को जोड़ने वाला 594KM लंबा एक्सप्रेसवे

नई दिल्ली Ganga Expressway: उत्तर प्रदेश में सड़क नहीं, रफ्तार का एक नया अध्याय खुलने जा रहा है. 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) का लोकार्पण कर सकते हैं. ये सिर्फ एक प्रोजेक्ट की शुरुआत नहीं होगी, बल्कि 'नए यूपी' की रेस का अगला गियर लगेगा. सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार जिस इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल की बात करती रही है, गंगा एक्सप्रेसवे उसका सबसे बड़ा और सबसे तेज उदाहरण बनकर सामने आने वाला है।  सबसे ख़ास बात ये है कि, तकरीबन 36,402 करोड़ की लागत से बनकर तैयार होने वाला 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसव अब तक का यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेस वे है. इसके बाद गोरखपुर–शामली ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे पर भी काम चल रहा है जो तकरीबन 700 किमी लंबा होगा. यानी फिलहाल गंगा एक्सप्रेसवे ही सबसे बड़ा है।  करीब 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुडापुर दांदू गांव तक जाएगा. यह सड़क पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वी हिस्से से जोड़ेगी. इससे लंबी दूरी का सफर पहले से कहीं ज्यादा तेज, सुरक्षित और आरामदायक हो जाएगा. बताया जा रहा है कि, इस एक्सप्रेसवे के जरिए मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा केवल 6-7 घंटों में ही पूरी की जा सकेगी, जिसके लिए अभी तकरीबन 11 घंटे से ज्यादा समय लगता है।  इस एक्सप्रेसवे से मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, सम्भल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 जिलों को सीधा फायदा मिलेगा. करीब 519 गांव इस परियोजना से जुड़ेंगे. इससे गांव और शहर के बीच की दूरी सिर्फ किलोमीटर में नहीं, बल्कि विकास के रफ्तार में भी घटेगी।  AI बेस्ड हाईटेक टोल कलेक्शन  इस एक्सप्रेस वे पर कुल 14 टोल प्लाजा बनाए जाएंगे. टोल सिस्टम पूरी तरह से मॉडर्न और डिजिटल होगी, ताकि वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत ही न पड़े. इसके अलावा टोल कलेक्शन के लिए सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक पर बेस्ड हाईटेक कैमरे लगाए गए हैं. जो सिर्फ वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर से ही फास्टैग टोल कलेक्ट कर लेंगे।  इतना ही नहीं इस एक्सप्रेसवे पर  ‘नो-स्टॉप टोल कलेक्शन सिस्टम’ लगाया जा रहा है. यानी वाहन बिना रूके टोल कलेक्ट करवाते हुए आगे बढ़ते रहेंगे. इससे एक्सप्रेस के टोल प्लाजाओं पर लगने वाले ट्रैफिक जाम के झंझट से भी मुक्ति मिलेगी. वाहनों की अधिकत स्पीड लिमिट 120 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी. सड़क के आसपास कटीले तारों से फेंसिंग की जा रही है, ताकि किसी भी तरह से मवेशियों को सड़क पर आने से रोका जाए और दुर्घटना की स्थिति न बने।  एक्सप्रेसवे पर मिलेंगी ये सुविधाएं गंगा एक्सप्रेसवे पर कुल 9 फेसिलिटी सेंटर बनाये गए हैं. हर फैसिलिटी सेंटर पर यात्रियों को कई अलग-अलग तरह की सुविधाएं मिलेंगी. जिसमें पेट्रोल पंप, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग पॉइंट, फूड कोर्ट, कैफेटेरिया, ढाबा, मोटेल, डॉरमेट्री, ट्रामा सेंटर, टॉयलेट्स इत्यादि शामिल हैं. इसके अलावा बीच सड़क किसी के वाहन खराब होने की स्थिति को ध्यान में रखकर मोटर व्हीकल सर्विस सेंटर भी मिलेगा. इस फैसिलिटी सेंटर पर वाहनों को खड़ा करने के लिए बड़ी पार्किंग भी उपलब्ध होगी।  लाइटिंग का भी इंतजाम आमतौर पर रात में एक्सप्रेसवे से यात्रा करने पर सबसे बड़ी समस्या लाइटिंग को लेकर देखने को मिलती है. चूकिं एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ खेत होते हैं और आबादी काफी दूर होती है ऐसे में सड़क पर पर्याप्त रोशनी की जरूरत होती है. इसके लिए गंगा एक्सप्रेसवे पर रेड कलर के रेडियम लाइट, सड़क के दोनों किनारों पर ब्लिंकर्स, बीच में पड़ने वाले पुलों पर स्ट्रीट लाइट्स और बेरिकेड्स पीली रेडियम लाइट्स का इंतजाम किया गया है. ताकि रात के समय भी लोग सुरक्षित यात्रा कर सकें।  किसानों के लिए बड़ा गेमचेंजर किसानों के लिए यह एक्सप्रेसवे किसी लाइफलाइन से कम नहीं होगा. अब फसलें तेजी से बाजार तक पहुंच सकेंगी. इससे फसलों की गुणवत्ता बनी रहेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिल सकेगी. खासकर जल्दी खराब होने वाले फसलों और उत्पाद के लिए यह बड़ा फायदा साबित होगा. प्रयागराज समेत कई धार्मिक और सांस्कृतिक शहर इस एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेंगे. इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी. स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।  एक्सप्रेसवे में यूपी का दबदबा देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क में पहले ही उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 55 प्रतिशत है. गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही यह आंकड़ा करीब 60 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा. यानी एक्सप्रेसवे की रेस में यूपी बाकी राज्यों से काफी आगे निकलता नजर आ रहा है. बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा मतलब है कम लॉजिस्टिक्स लागत. इससे उद्योगों को फायदा मिलेगा और नए निवेश के दरवाजे खुलेंगे. गंगा एक्सप्रेसवे एक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तौर पर विकसित हो सकता है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके पैदा होंगे।  गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं है. यह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में अहम भूमिका निभा सकता है. पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के बाद अब यह प्रोजेक्ट यूपी को “एक्सप्रेसवे स्टेट” के रूप में और मजबूत बनाएगा. आने वाले समय में यही इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदेश को देश की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में खड़ा करने की बड़ी वजह बन सकता है। 

लखनऊ में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) के शुभारंभ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को लखनऊ में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) के शुभारंभ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। यह बदलाव वैज्ञानिक तकनीकों, एग्रो-क्लाइमेटिक जोन आधारित रणनीति तथा केंद्र-राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। यूपी में “लैब टू लैंड” की अवधारणा धरातल पर उतर चुकी है, जिससे किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। कृषि विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि, प्रति हेक्टेयर उत्पादन में रिकॉर्ड सुधार, बहुफसली खेती का विस्तार और वैल्यू एडिशन पर बढ़ता फोकस इस परिवर्तन के स्पष्ट संकेत हैं। मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों, अंतरराष्ट्रीय कृषि केंद्रों की स्थापना, कृषि विज्ञान केंद्रों के सशक्तीकरण और प्रगतिशील किसानों की भूमिका को इस बदलाव का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। भिन्न-भिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के अनुरूप बनें नीतियां अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग देशों और क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोन होने के कारण नीतियां भी उसी अनुरूप तय की जानी चाहिए। यदि अलग-अलग जोन में इस प्रकार की गोष्ठियां आयोजित की जाएं तो उसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि गत वर्ष ‘विकसित कृषि अभियान’ और ‘खेती की बात, खेत में’ कार्यक्रम के दौरान उन्हें कई जनपदों में जाने का अवसर मिला, जहां किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि शिक्षा से जुड़े प्रशिक्षुओं में अभूतपूर्व उत्साह व जिज्ञासा देखने को मिली। पहली बार इनोवेशन को सीधे व्यावहारिक धरातल पर उतारने का अवसर मिला है। पहले लैब में होने वाले अनुसंधान को लैंड तक पहुंचने में काफी समय लगता था, लेकिन अब “लैब टू लैंड” की अवधारणा साकार हो चुकी है और तकनीक सीधे खेत तक पहुंच रही है। इस अभिनव पहल के लिए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस अवधारणा को व्यवहारिक रूप से देशभर में लागू करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। योजनाओं की सही जानकारी मिले तो किसान स्वयं बेहतर परिणाम देने में सक्षम मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, आवश्यकता केवल प्रभावी नेतृत्व की है, जिसकी शुरुआत भारत सरकार के स्तर से होती है और राज्य उसे तेजी से अपनाते हैं। पहले नीतियां केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित रह जाती थीं, लेकिन अब उनके ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। अन्नदाता किसानों को योजनाओं की सही जानकारी दी जाए, तो वे स्वयं बेहतर परिणाम देने में सक्षम हैं। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 की स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय प्रदेश में मात्र 69 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) थे, जो लगभग निष्क्रिय अवस्था में थे और उनके वैज्ञानिक भी अन्य संस्थानों में अटैच थे। इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा 20 नए केवीके की पहल के साथ-साथ मौजूदा केंद्रों को सशक्त बनाने की कार्ययोजना पर काम हुआ। आज स्थिति यह है कि सभी केवीके सक्रिय होकर नवाचारों को बढ़ावा दे रहे हैं और प्रदेश के सभी 9 एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से कृषि विकास को नई दिशा दे रहे हैं। अब कृषि को वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ने की आवश्यकता मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ये वैज्ञानिक स्थानीय स्तर पर डेमोंस्ट्रेशन करते हैं और फिर किसानों के खेत में जाकर उसे लागू करते हैं, लगातार दौरे करते हैं, निरंतर गोष्ठियां चलती हैं और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। साथ ही भारत सरकार के साथ उनका सतत संवाद बना रहता है। इसी का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर 8 से बढ़कर लगभग 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। परिणाम बताते हैं कि हम इससे भी बेहतर उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। सीएम ने कहा कि मेरा मानना है कि आजादी के समय भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान लगभग 41-42 प्रतिशत था। समय के साथ इसका योगदान घटता गया। यदि कृषि व मैन्युफैक्चरिंग के बीच बेहतर समन्वय हो, तो विकास की गति और तेज हो सकती है। वर्तमान में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान अब भी लगभग 15–16 प्रतिशत के आसपास है, जबकि कृषि का हिस्सा घटकर लगभग 20–21 प्रतिशत तक सीमित रह गया। अब आवश्यकता है कि कृषि को वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ा जाए। इसके लिए नए प्रयासों को और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाने तथा प्रभावी ढंग से विस्तार देने की आवश्यकता है। निर्णायक भूमिका निभा सकती है तकनीक मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक आज के दौर में अत्यंत निर्णायक भूमिका निभा सकती है। उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में विभिन्न उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र स्थापित करवाए हैं। उदाहरण के तौर पर, वाराणसी में इंटरनेशनल राइस इंस्टीट्यूट की स्थापना हुई है, जो बेहतरीन परिणाम दे रहा है। यहां से नई-नई किस्में विकसित की गई हैं। अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के अनुसार कौन-सी किस्म उपयुक्त होगी, कौन-सी तकनीक अपनाई जानी चाहिए, क्वालिटी सीड किस प्रकार उत्पादन बढ़ा सकते हैं, ये सभी परिणाम अब स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि कुछ क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर धान का उत्पादन 100 कुंतल तक पहुंच गया है, जो पहले 50–60 कुंतल तक सीमित था। मुख्यमंत्री ने कहा कि अल नीनो के कारण गेहूं और उद्यान फसलों, विशेष रूप से आम पर प्रभाव पड़ा है, लेकिन यह एक सतत चुनौती है। इसके बावजूद, लागत कम करके उत्पादन बढ़ाना, समय पर अच्छे बीज उपलब्ध कराना, केमिकल फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड के उपयोग को कम करते हुए नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देना, इन सभी क्षेत्रों में निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। उत्तर प्रदेश में कृषि के लिए अनुकूल वातावरण मुख्यमंत्री ने बाराबंकी के प्रगतिशील किसान पद्म पुरस्कार से सम्मानित रामशरण वर्मा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि गत वर्ष मुझे उनके खेत पर ‘विकसित कृषि अभियान’ के तहत जाने का अवसर मिला। यदि कोई रामशरण वर्मा से उनकी शैक्षिक योग्यता पूछता है, तो वह स्वयं को “दसवीं फेल” बताते हैं, लेकिन खेती में उनकी दक्षता और वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग अत्यंत प्रेरणादायक है। वह कम लागत में अधिक उत्पादन करने का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भारत … Read more

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना विभाग ने शुरू की तैयारी

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी की गई है। इसके तहत गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग गन्ने की फसल का जीपीएस सर्वेक्षण कराएगा। यह जीपीएस सर्वेक्षण 1 मई से शुरू होकर 30 जून 2026 तक चलेगा। इसकी सूचना 3 दिन पहले सभी रजिस्टर्ड गन्ना किसानों को मोबाइल एसएमएस के जरिए दी जाएगी। गन्ना सर्वेक्षण टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल कर्मचारी शामिल होंगे। इनको सर्वेक्षण से पहले प्रशिक्षित भी किया जाएगा। सर्वेक्षण के दौरान किसान की मौजूदगी जरूरी होगी। टीम किसान के खेत पर पहुंचकर जीपीएस के जरिए उत्पादन का डाटा सीधे विभाग के सर्वर पर फीड करेगी। वहीं सर्वेक्षण के बाद खेत का क्षेत्रफल, गन्ने की किस्म समेत अन्य जानकारी भी किसानों को एसएमएस के जरिए दी जाएगी। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त वीना कुमारी मीना ने बताया कि पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी कर दी गई है। सर्वेक्षण कार्य 1 मई से प्रारम्भ कर 30 जून तक पूरा किया जाएगा। साथ ही बताया कि किसी भी गन्ना कृषक के सर्वेक्षित भूमि का सत्यापन राजस्व विभाग की वेबसाइट www.upbhulekh.gov.in से किया जा सकता है। चीनी मिलें गन्ना सर्वेक्षण के अंतिम आंकड़े सीधे विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन पोर्ट करेंगी और अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगी। सर्वेक्षण के दौरान होगा नए किसानों का पंजीकरण विभाग के मुताबिक गन्ना सर्वेक्षण के दौरान नए सदस्यों (किसान) का पंजीकरण भी किया जाएगा। 30 सितम्बर 2026 तक पंजीकृत कृषकों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा। उपज बढ़ोत्तरी के लिए गन्ना सर्वेक्षण से लेकर 30 सितम्बर 2026 तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसके लिए अनुसूचित जाति व जनजाति के कृषकों, लघु कृषकों और अन्य कृषकों से क्रमशः 10, 100 एवं 200 रुपये प्रति कृषक शुल्क जमा कराया जाएगा।

योगी सरकार में महिलाओं का मजबूत सहारा बनी 181 हेल्पलाइन

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में महिलाओं की सुरक्षा व सशक्तीकरण शीर्ष प्राथमिकता पर है। इसी दिशा में संचालित 181 महिला हेल्पलाइन प्रदेश की महिलाओं के लिए संकट के समय मजबूत सहारा बनकर उभरी है। वर्ष 2025-26 में इस हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण एक बड़ी उपलब्धि है, जो नारी की गरिमा व सुरक्षा के प्रति सरकार की गंभीरता दर्शाती है। इलाज व राशन दिलाने में भी मदद की हेल्पलाइन ने आंकड़ों पर नजर डाले तो महिला हेल्पलाइन 181 पर 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक 85 हजार से ज्यादा शिकायतें आई। इनमें अधिसंख्य शिकायतें घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, साइबर क्राइम, मारपीट से जुड़ी थीं। कुछ ऐसे भी मामले थे, जिनमें महिलाओं ने अस्पताल में इलाज के लिए या जमीन-जायदाद से जुड़े प्रकरणों में मदद मांगी। राशन दिलाने में मदद के लिए भी कई महिलाओं ने हेल्पलाइन से संपर्क किया। ये सभी मामले निस्तारण के लिए सम्बंधित विभागों को ट्रांसफर किए गए। उल्लेखनीय यह है कि हेल्पलाइन इन सभी मामलों का संतुष्टिपरक निस्तारण करने में सफल रही। 24 घंटे सक्रिय रहती है 181 महिला हेल्पलाइन किसी भी प्रकार की समस्या या जानकारी के लिए महिलाएं इस हेल्पलाइन से सीधे संपर्क कर सकती हैं। शिकायत के मामले 2 मिनट के भीतर संबंधित वन स्टॉप सेंटर को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। इसके बाद संबंधित जनपद में स्थापित डैशबोर्ड के माध्यम से तैनात महिला कर्मचारी पीड़िता से संपर्क कर उसकी समस्या को समझती है और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराती है। यह हेल्पलाइन 24×7 सक्रिय रहती है, जहां घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, दहेज प्रताड़ना और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को त्वरित सहायता मिलती है। साथ ही पीड़ित महिलाओं को मनोवैज्ञानिक, कानूनी और सामाजिक सहयोग भी प्रदान किया जाता है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए योगी सरकार प्रतिबद्ध योगी सरकार के कार्यकाल में इस सेवा का दायरा और प्रभाव लगातार बढ़ा है। तेज निस्तारण, संवेदनशील कार्यप्रणाली और तकनीकी सुदृढ़ता के जरिए 181 महिला हेल्पलाइन आज प्रदेश की महिलाओं के सशक्तीकरण की एक मजबूत कड़ी बन चुकी है, जो हर महिला को सुरक्षा और सम्मान का भरोसा दिला रही है। महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 181 महिला हेल्पलाइन इस दिशा में एक सशक्त माध्यम बनकर सामने आई है, जिसके जरिए महिलाओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

योगी सरकार का बड़ा फैसला: कम लोड वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए अहम कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने विद्युत उपभोक्ताओं के हित में बड़ा निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि 1 किलोवाट तक के घरेलू विद्युत कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी गई है। अगर उनका बैलेंस नेगेटिव हो जाता है, तब भी 30 दिनों तक उनका बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं। यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से लागू की गई है। 5-स्तरीय एसएमएस सूचना प्रणाली लागू की गई ऊर्जा मंत्री ने साफ किया कि नेगेटिव बैलेंस की स्थिति में भी एक माह का चक्र पूरा होने से पहले किसी भी स्थिति में कनेक्शन विच्छेद नहीं किया जाएगा। साथ ही पारदर्शिता और उपभोक्ता सुविधा को ध्यान में रखते हुए कनेक्शन काटने से पूर्व उपभोक्ताओं को 5 अनिवार्य एसएमएस अलर्ट भेजे जाएंगे। जिससे उन्हें समय रहते भुगतान का अवसर मिल सकेगा। इसके साथ ही 2 किलोवाट के कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को भी राहत प्रदान की गई है। ऐसे उपभोक्ताओं का विद्युत कनेक्शन 200 रुपए तक के माइनस बैलेंस पर नहीं काटा जाएगा। इनके लिए भी 5 चरणों में एसएमएस सूचना प्रणाली लागू की गई है, जिससे किसी भी असुविधा से बचा जा सके।   अब तक करीब 30 लाख नए बिजली खंभे लगाए जा चुके हैं वहीं बढ़ती गर्मी को देखते हुए ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने सभी जिलों के अधिकारियों को विद्युत अनुरक्षण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में विद्युत आपूर्ति को सुदृढ़ करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य किए गए हैं। अब तक लगभग 30 लाख नए विद्युत खंभे स्थापित किए जा चुके हैं। साथ ही ट्रांसफार्मरों की क्षमता में भी व्यापक वृद्धि की गई है। ऊर्जा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति करने वाला राज्य बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि इस भीषण गर्मी में प्रदेश की जनता को बिजली की दृष्टि से किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। सरकार पूरी तरह से सजग है और निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में छाया ‘योगी मॉडल’, यूपी की शिक्षा नीति बनी देशभर में चर्चा का विषय

लखनऊ.  देश में शिक्षा सुधार को लेकर आयोजित एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में उत्तर प्रदेश का ‘योगी मॉडल’ प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया। सेंट्रल स्क्वेयर फाउंडेशन (सीएसएफ) द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय मंच पर बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में हुए बदलावों को रेखांकित किया। कार्यक्रम में मौजूद विभिन्न राज्यों के नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और प्रशासकों के बीच उत्तर प्रदेश का मॉडल चर्चा का केंद्र रहा। कॉन्क्लेव में मूल्यांकन प्रणाली को भी सुधार के दृष्टिकोण से विकसित परख, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएनएल), प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ईसीई), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और एडटेक के उपयोग जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। ‘निपुण भारत मिशन’ के अंतर्गत राज्यों के अनुभवों और सफल मॉडलों को साझा किया गया। इस दौरान एसीएस शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधार को स्पष्ट लक्ष्य, सतत मूल्यांकन और सशक्त शिक्षक के आधार पर आगे बढ़ाया गया है। राज्य में ‘लक्ष्य’ आधारित शिक्षण, निरंतर आकलन और शिक्षक-केंद्रित दृष्टिकोण ने शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है। योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए उन्हें जमीन पर परिणाम में बदला गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार देखने को मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों को सहयोग देने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने पर प्रदेश सरकार ने विशेष जोर दिया है। एआरपी (अकादमिक रिसोर्स पर्सन) जैसे मेंटर कैडर, संकुल बैठकों के माध्यम से संवाद और ‘तालिका’ के जरिए छात्रों की प्रगति की नियमित निगरानी ने सिस्टम को अधिक जवाबदेह और परिणाममुखी बनाया है। मूल्यांकन प्रणाली को सुधारात्मक दृष्टिकोण के साथ विकसित करते हुए इसे पुरस्कार या दंड के बजाय अधिगम की कमियों की पहचान और उनके समाधान के प्रभावी उपकरण के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जिससे वास्तविक सीखने के परिणामों पर फोकस बढ़ा है। निपुणता हासिल करने में जिन विद्यालयों को कठिनाइयां आ रही हैं, उन्हें निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जबकि तकनीक के प्रभावी उपयोग से प्रशासन और शिक्षक के बीच रियल-टाइम कनेक्टिविटी स्थापित होकर त्वरित निर्णय और प्रभावी क्रियान्वयन संभव हुआ है, जो शिक्षा प्रणाली की एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है; साथ ही रणनीति को केवल ‘निपुण विद्यालयों’ की मान्यता तक सीमित न रखते हुए उन सफल प्रक्रियाओं और प्रथाओं की पहचान कर पूरे राज्य में लागू करने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे मॉडल के विस्तार और संस्थागत मजबूती को गति मिल रही है।

खाद्य सुरक्षा विभाग का बड़ा एक्शन, असुरक्षित तेल उत्पादों की बिक्री पर रोक

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मानक के विपरीत बिक्री पर 14 फर्मों के खाद्य तेलों एवं अन्य उत्पादों पर पाबंदी लगा दी गई है। ये फर्में खाद्य तेल और वसायुक्त किसी भी उत्पाद को नहीं बना सकेंगी। इनके उत्पाद की बिक्री, भंडारण और वितरण प्रतिबंधित किया गया है। यह प्रतिबंध खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की आयुक्त डा. रोशन जैकब ने लगाया है। प्रदेश में खाद्य तेलों में मिलावट की शिकायत पर 23 फरवरी को प्रदेशभर में 58 टीमों ने 64 खाद्य तेल इकाइयों की जांच की। इसमें 56 इकाइयों से 206 नमूने लिए गए। नमूनों की जांच भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा अधिकृत प्रयोगशालाओं में कराई गई। जांच में संबंधित नमूने असुरक्षित और अधोमानक पाए गए हैं। कुछ उत्पादों में लेड तत्व की अधिक मात्रा पाई गई है, जो मानव जीवन के लिए खतरनाक है। कई उत्पादों में अनधिकृत रूप से एक से अधिक खाद्य तेलों का मिश्रण किया गया। फोर्टिफाइड तेलों में विटामिन की मात्रा कम पाई गई, जिससे उपभोक्ताओं को धोखा दिया जा रहा था। ऐसे में इन कंपनियों के तेल और वसायुक्त उत्पादों पर प्रतिबंध लगा लगा दिया गया है। इन कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध     हिंद वेज ऑइल प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ     संकट मोचन एंटरप्राइसेस, लखनऊ     भीम श्री, प्रोडक्ट कानपुर एनआर उद्योग, कानपुर     कटारिया एडिबल्स, कानपुर     वैभव एडिबल्स, कानपुर देहात     मंटोरा ऑयल प्रोडक्शन प्राइवेट लि., कानपुर देहात     आगरा ऑयल जनरल इंडस्ट्री लि, हाथरस     एनएम ऑयल कॉरपॉरेशन, आगरा     जीएस एग्रो फूड्स, मेरठ     जेपी एग्रो ऑयल, मेरठ     राजेन्द्र कुमार सुशील चंद, मेरठ     केएल वेजिटेबल ऑयल प्रोडक्ट, प्रा लि, हापुड़     जय लक्ष्मी सोलवेंटस प्रा लि, गोरखपुर सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं खाद्य पदार्थ एवं वसा तेल में लेड तत्व की अधिक मात्रा सेहत के लिए हानिकारक है। इसी तरह अलग- अलग पैरामीटर पर अधोमानक पाए गए उत्पादों की फर्मों पर प्रतिबंध लगाया गया है। डॉ. रोशन जैकब, आयुक्त एफएसडीए  

महिला सामर्थ्य योजना से अवध में डेढ़ हजार से ज्यादा गांवों का कायाकल्प

लखनऊ.  योगी सरकार की महिला सामर्थ्य योजना अवध क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने वाली बड़ी पहल बनकर उभरी है। अयोध्या, सुल्तानपुर, रायबरेली, अमेठी, प्रतापगढ़, फतेहपुर और कानपुर नगर के डेढ़ हजार से अधिक गांवों में इस योजना के तहत एक लाख से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं हैं। वहीं, लखनऊ, उन्नाव और बाराबंकी में योजना का विस्तार किया जा रहा है। इस योजना की सबसे बड़ी बात यह है कि इस पहल के जरिए एक लाख से अधिक महिलाएं डेयरी नेटवर्क से जुड़ चुकीं हैं और अब तक 1380 करोड़ रुपये से अधिक सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर भी किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री का फोकस : आत्मनिर्भर महिला, सशक्त परिवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि महिलाओं की आर्थिक मजबूती ही मजबूत परिवार और समृद्ध समाज की नींव है। महिला सामर्थ्य योजना इसी सोच का विस्तार है, जहां महिलाओं को उत्पादन से लेकर बाजार और भुगतान तक सीधे जोड़ा गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनीं महिलाएं अवध क्षेत्र के इन जिलों में आज महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रहीं हैं। रोज करीब 4 लाख लीटर दूध का संग्रह इस बात का प्रमाण है कि डेयरी अब केवल परंपरागत काम नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक गतिविधि बन चुकी है। यह नेटवर्क गांव-गांव में रोजगार, आय का नया आधार तैयार कर रहा है। व्यवसाय की रफ्तार : 8000 से एक लाख पार का सफर मार्च 2023 में 340 गांवों और 8000 महिलाओं से शुरू हुआ यह अभियान आज 1550 गांवों और एक लाख से भी अधिक महिलाओं तक पहुंच चुका है। दुग्ध व्यवसाय का तेजी से हुआ यह विस्तार दर्शाता है कि योगी सरकार की योजनाएं अब सीधे जमीन पर असर डाल रही हैं। बिचौलिया खत्म, सीधे खाते में पैसा जाने से बढ़ा भरोसा योजना की सबसे बड़ी ताकत है डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी)। महिलाओं को भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में मिल रहा है, जिससे पर्ची-खर्ची और बिचौलिया तंत्र पूरी तरह खत्म हो गया है। इस पारदर्शिता ने महिलाओं के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। सुल्तानपुर की अनीता वर्मा बनीं सफलता का मॉडल सुल्तानपुर के दूबेपुर ब्लॉक के मुकुंदपुर गांव की अनीता वर्मा इस योजना की सफलता की सशक्त मिसाल हैं। दो गायों से उन्होंने छोटा सा प्रयास शुरू किया। गत वर्ष उन्हें  करीब साढ़े छह लाख रुपये का भुगतान हुआ है। उनकी कहानी न सिर्फ आर्थिक बदलाव की है, बल्कि यह दिखाती है कि सही अवसर और समय पर योजनाओं का लाभ मिलने पर ग्रामीण महिलाएं कैसे अपने परिवार और समाज का भविष्य बदल सकती हैं।