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यूपी में महिला ई-रिक्शा पायलटों की मुहिम, अयोध्या समेत 5 जिलों में हुआ आगाज

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को नई ऊंचाई देने की दिशा में योगी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। ‘सेफ मोबिलिटी प्रोग्राम’ के तहत प्रदेश में महिला ई-रिक्शा पायलटों की फौज तैयार की जा रही है, जिससे बालिकाओं और महिलाओं को विद्यालय, कार्यस्थल और अन्य जरूरी स्थानों तक सुरक्षित, सुलभ और सम्मानजनक परिवहन मिल सकेगा। इस योजना के तहत शुरुआत में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को 1000 ई-रिक्शा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी, कौशांबी और झांसी में इस सुविधा की शुरुआत कर दी गई है, जबकि लखनऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र, देवरिया, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में इसे जल्द शुरू किया जाएगा। योगी सरकार की यह पहल इसलिए भी खास है, क्योंकि इसका सीधा रिश्ता महिला सुरक्षा से जुड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और बालिकाओं के लिए अब महिला चालकों द्वारा संचालित ई-रिक्शा सेवा बेहतर समाधान बनकर उभर रही है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के तकनीकी सहयोग से चल रहे इस कार्यक्रम ने अब तक प्रभावी परिणाम दिए हैं। पांच जनपदों में 119 महिलाओं को ई-रिक्शा देकर उद्यमी बनाया जा चुका है। वहीं, 629 महिलाओं को संचालन का प्रशिक्षण दिया गया है और 244 महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध कराया गया है। इस पहल से जुड़ी महिलाएं अब सिर्फ वाहन ही नहीं चला रहीं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक धुरी भी बन रहीं हैं। योजना से जुड़ी महिलाओं की औसत वार्षिक आय 3 लाख रुपए से अधिक पहुंचने की बात इस मॉडल की सफलता को और मजबूत बनाती है। ‘सेफ मोबिलिटी’ का असर केवल सड़क तक सीमित नहीं है। इससे बेटियों की स्कूल तक पहुंच आसान होगी, कामकाजी महिलाओं का सफर सुरक्षित बनेगा, गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनेंगी। महिला सुरक्षा, सम्मानजनक परिवहन और स्वरोजगार इन तीनों मोर्चों पर एक साथ असर डालने वाली यह पहल उत्तर प्रदेश को नई पहचान दे रही है। यही वजह है कि महिला सुरक्षा में यूपी अब मॉडल स्टेट के रूप में अपनी अलग छाप छोड़ता दिख रहा है और ई-रिक्शा महिला पायलटों की यह नई फौज गांवों के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को बदलने की तैयारी में है।

यूपी में उल्टा दांव, उपभोक्ता ने विभाग से मांगा मुआवजा, स्मार्ट मीटर और सर्वर की खराबी ने पहुंचाई आर्थिक चोट

महराजगंज महराजगंज जिले के दुकानदार अजय गुप्ता ने बताया कि उनके दुकान पर स्मार्ट मीटर लगा है। 23 मार्च को बिल जमा करने गए तो सर्वर खराबी के कारण भुगतान नहीं हो सका। अगले दिन 24 मार्च को 8618 रुपये का भुगतान किया। इसके बावजूद 26 मार्च को अचानक बिजली आपूर्ति बंद हो गई। बिजली विभाग को दुकानदार ने भेजा 1.69 लाख का नोटिस, अफसर दंग; जानें पूरा मामला  आपने अक्सर बिजली विभाग से उपभोक्ताओं को नोटिस जारी होते देखा-सुना होगा। लेकिन उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में स्मार्ट मीटर की बीलिंग व्यवस्था से परेशान एक कामर्शियल उपभोक्ता ने बिजली विभाग को 1.69 लाख रुपये के नुकसान का नोटिस भेज दिया है। नोटिस देखकर बिजली विभाग के अधिकारी दंग रह गए हैं। उपभोक्ता का आरोप है कि विभागीय तकनीकी खामी और बिल अपडेट में देरी के कारण उसे सात दिन में पांच बार बिल जमा करना पड़ा, बावजूद इसके बिजली आपूर्ति बाधित रही। महराजगंज जिले के धनेवा-धनेई चौराहे के दुकानदार अजय गुप्ता ने बताया कि उनके दुकान पर स्मार्ट मीटर लगा है। 23 मार्च को बिल जमा करने गए तो सर्वर खराबी के कारण भुगतान नहीं हो सका। अगले दिन 24 मार्च को वेबसाइट पर दिख रहे 8618 रुपये का भुगतान किया। इसके बावजूद 26 मार्च को अचानक बिजली आपूर्ति बंद हो गई। शिकायत करने पर विभाग ने 5444 रुपये बकाया बताया, जिसे 29 मार्च को जमा किया गया। इसके बाद भी मीटर में बार-बार माइनस बकाया दिखता रहा।उपभोक्ता को 1500 रुपये और फिर 500 रुपये अतिरिक्त जमा करने पड़े। इसके बाद 30 मार्च को आपूर्ति बहाल हो सकी। दुकानदार का कहना है कि चार दिन बिजली गुल रहने से दुकान में रखा दूध, पनीर व खोया खराब हो गया, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ। उपभोक्ता ने कहा कि यदि पहली बार में सही बिल प्रदर्शित होता तो न तो बार-बार भुगतान करना पड़ता और न ही यह नुकसान होता। इस मामले में अधिवक्ता केसरी नंदन तिवारी के माध्यम से एक्सईएन को नोटिस भेजकर 15 दिन के भीतर 1.69 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की गई है। चेतावनी दी गई है कि तय समय में भुगतान नहीं होने पर उपभोक्ता फोरम में वाद दाखिल किया जाएगा, जिसमें विभाग को नोटिस खर्च और अधिवक्ता फीस भी वहन करनी होगी।

यूपी की जनता को सुरक्षा का भरोसा: सीएम योगी ने कर्फ्यू और अराजकता पर लगाई रोक

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा है कि वे उत्तर प्रदेश की धरती पर गुंडों और माफिया को पनपने नहीं देंगे। गुंडों और माफिया की जहां जगह होगी, वहां उन्हें पहुंचा दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश में दंगे, कर्फ्यू, अराजकता और लूटखसोट के दिन लग गए हैं। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में व्यापारियों व महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी है। सरकार हर व्यक्ति के जीवन सुगमता और उज्ज्वल भविष्य के लिए पूजरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। एम योगी रविवार शाम घंटाघर स्थित अमर बलिदानी बंधु सिंह पार्क में बने मल्टीलेवल पार्किंग सह कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स, घंटाघर के सौंदर्यीकरण कार्य के लोकार्पण और विरासत गलियारा पांडेयहाता कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स के शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। हर जिले में थी माफिया की समानांतर सरकार- सीएम  नवनिर्मित पार्किंग कॉम्प्लेक्स की छत पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद आज भी प्रदेश, इसका तंत्र और पुलिस वही है लेकिन आज इसकी पहचान बदल गई है। 2017 के पहले हर जिले में माफिया की समानांतर सरकार थी, नौजवानों के सामने पहचान का संकट था। जबकि आज प्रदेश के नौजवान को अन्य जगहों पर सम्मान मिलता है। आज का उत्तर प्रदेश अब उपद्रव नहीं उत्सव प्रदेश बन चुका है। अब यहां अराजकता नहीं है बल्कि यह माफियामुक्त हो चुका है। सुरक्षित माहौल में व्यापारी और बेटियों ने स्वावलंबन की नई ऊंचाई की यात्रा शुरू की है। नीयत साफ हो तो नजारा बदलते देर नहीं लगती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कि जब सरकार की नीयत साफ होती है तो नजारा बदलते देर नहीं लगती। विरासत गलियारा और मल्टीलेवल पार्किंग कॉम्प्लेक्स इसका उदाहरण है। सरकार की नियत साफ है तो विरासत गलियारा के पहले फेज का काम लगभग पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि 2017 के पहले इसी गोरखपुर की पहचान माफिया, मच्छर और इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी के चलते थी। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन की सरकार ने गोरखपुर सहित प्रदेश को माफियामुक्त, उपद्रवमुक्त, दंगामुक्त, मच्छरमुक्त और इंसेफिलाइटिसमुक्त बना दिया है। उन्होंने जनता को आगाह करते हुए कहा कि संकीर्णता में उठाए गए कदम से माफिया और मच्छर को पनपने का मौका मिलता है। इसलिए लोमड़ी की तरह ताक लगाए बैठे ऐसे लोगों को अवसर नहीं देना है जो शोषण का कारण बनते थे। माफिया और अराजकता को प्रश्रय देते थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में माफिया और गुंडों के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति बनी रहेगी। पुलिस को स्पष्ट हृदय दी गई है कि जहां भी गुंडों का फन उठे, उसे कुचल दीजिए। खाएंगे हिंदुस्तान का लेकिन गाएंगे नहीं अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का विरोध करने वाले लोगों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये ऐसे लोग हैं जो खाएंगे हिंदुस्तान का लेकिन हिंदुस्तान का गाएंगे नहीं। उन्होंने कहा कि नया भारत इसे कतई स्वीकार नहीं करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिना भेदभाव सबको शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है तो, राष्ट्र के प्रतीकों, राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान राष्ट्रीय ध्वज और बाबा साहब अंबेडकर के बनाए संविधान को सम्मान देना होगा। स्मार्ट सिटी के विजन के अनुरूप बढ़ रहा गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा, कारोबारी और जीवन सुगमता के क्षेत्र में आए उल्लेखनीय बदलाव की विस्तार से चर्चा की और कहा कि आज का गोरखपुर स्मार्ट विजन के अनुरूप आगे बढ़ रहा है। उन्होंने घंटाघर क्षेत्र में विरासत गलियारा के निर्माण और मल्टीलेवल पार्किंग कॉम्प्लेक्स को जाम की समस्या का समाधान करने वाला बताया। साथ ही कहा कि जब आवागमन सुगम होगा तो व्यापार में भी समृद्धि आएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब विरासत गलियारा बनकर तैयार होगा तो यहां की सड़क सबसे खूबसूरत होगी और यहां फिल्मों की शूटिंग भी होगी। जब विरासत गलियारा बन जाएगा तब यहां भव्य रोड शो की तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मल्टीलेवल पार्किंग कॉम्प्लेक्स में भी विरासत गलियारा के प्रभावित दुकानदारों को जगह दी गई है। जो शेष रह जाएंगे उनका पांडेयहाता के कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स में व्यवस्थित पुनर्वास कराया जाएगा। नौ साल में नहीं लगाया कोई नया टैक्स आमजन और व्यापारियों के हित पर सरकार के रूख का ध्यान आकर्षित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि नौ साल में उनकी सरकार ने कोई भी नया टैक्स नहीं लगाया। इसके बावजूद प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तीन गुना बढ़ाया गया है। उन्होंने नगर निगम को हिदायत दी कि कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स में व्यापारियों से अधिक किराया न लिया जाए। उतना ही किराया तय किया जाए, जितना व्यापारी आसानी से दे सकें। उन्होंने कहा कि जीआईएस सर्वे को लेकर भी उन्होंने अधिक टैक्स न लेने और अधिक लिए गए रुपये के समायोजन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि टैक्स में राहत देने की व्यवस्था पर उनका जोर है। टैक्स की व्यवस्था ऐसी ही होनी चाहिए जैसे बादल बारिश के रूप में वापस कर देते हैं। उन्होंने कहा कि जब टैक्स का पैसा विकास और वेलफेयर की योजनाओं में खर्च होगा तो समृद्धि आएगी। चिलुआताल में बनेगा फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्लांट मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने चिलुआताल में फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्लांट की स्थापना की मंजूरी दी है। यहां 20 मेगावाट बिजली पैदा होगी जिसका इस्तेमाल सोलर लाइट में किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब गोरखपुर सोलर सिटी के रूप में भी विकसित होगा। उन्होंने कहा कि गोड़धोइया नाला परियोजना भी जल्द पूर्ण होकर विकास का मॉडल बनेगा। मुख्यमंत्री में चार विश्वविद्यालय, नाइलिट, कई पॉलिटेक्निक, आईटीआई का उल्लेख करते हुए बताया कि एमपीआईटी में पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी बनकर तैयार है। 15 अप्रैल को इसके शुभारंभ अवसर पर टाटा संस के चेयरमैन एन चन्द्रशेखरन भी गोरखपुर आएंगे। आजादी की लड़ाई का साक्षी है घंटाघर मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक घंटाघर के सौंदर्यीकरण कार्य के लोकार्पण के अवसर पर कहा कि यह घंटाघर क्षेत्र आजादी की लड़ाई का साक्षी है। यह बता सकता है कि आजादी की क्या कीमत होती है। इसने पीढ़ियों को बदलते देखा है। यह प्रेरणा और गर्व का केंद्र है। इसके पुनरोद्धार और संरक्षण की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है। सीएम योगी के नेतृत्व में नजर आ रही विकास की अद्वितीय तस्वीर … Read more

बच्चों की मुस्कान और योगी का दुलार, कंपोजिट स्कूल में बंटे बैग और किताबें, पाँच निपुण स्कूल हुए सम्मानित

शिवपुर शिवपुर के कंपोजिट स्कूल में ‘स्कूल चलो’ अभियान की शुरुआत पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने बच्चों को खुद मिड-डे मील परोसा. बड़े प्यार से खाना खिलाया तो बच्चे भी खुश होकर मुस्कुराए और धन्यवाद कहा. सीएम ने बच्चों से रोज स्कूल आने और मन लगाकर पढ़ने को कहा, जिस पर बच्चों ने सिर हिलाकर हामी भरी. बच्चों ने मासूमियत से हाथ जोड़कर प्रणाम भी किया. इस दौरान उनके साथ मंत्री और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे और उन्होंने भी बच्चों को खाना परोसने में मदद की. नए सेशन की किताबें भी बच्चों को दी गई सीएम योगी ने नए सेशन की किताबें भी बच्चों में बांटी. मंच पर क्लास 1 से 8 तक के कई बच्चों को उनके हाथों स्कूल बैग, किताबें, किट, गिफ्ट और चॉकलेट दी गई. विकास, अंशिका, श्रेया, कजरी, दीपशिखा, रोली, रूचि और साक्षी जैसे बच्चों को ये चीजें मिलते ही चेहरे खिल उठे. बच्चों की मासूम मुस्कान ने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया. निपुण स्कूलों को प्रमाण-पत्र दिये गये सीएम के हाथों जिले के पांच निपुण स्कूलों को सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया. नयापुर सेवापुरी के प्रधानाचार्य कपिल देव, शगुनहा बड़ागांव की सुष्मिता भारती, फरीदपुर चिरईगांव के शशिकांत सिंह, भतसार अराजीलाइन की नीतू यादव और महमूरगंज की प्रीति त्रिवेदी को ये सम्मान मिला. सभी शिक्षकों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया, जिससे उनका हौसला और बढ़ा. कार्यक्रम की शुरुआत में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि आर्य महिला इंटर कॉलेज लहुराबीर की छात्राओं ने सरस्वती वंदना की मनभावन प्रस्तुति दी.

इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी के 711 जजों का तबादला

 प्रयागराज इलाहाबाद हाई कोर्ट प्रशासन ने रविवार को 711 न्यायिक अधिकारियों के कार्यक्षेत्र क्षेत्र में बदलाव किया है। बड़ी संख्या में अधिकारियों के जिलों में भी परिवर्तन हुआ है। कुछ को वर्तमान जिले में ही नया दायित्व सौंपा गया है। सभी अधिकारियों से 15 अप्रैल तक नया दायित्व संभाल लेने की अपेक्षा की गई है। महानिबंधक मनजीत सिंह श्योराण की ओर से जारी की गईं तीन अलग-अलग अधिसूचनाओं में क्रमशः 266 एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज 169 सिविल जज (सीनियर डिवीजन) तथा 276 जून सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के नाम है।

भीषण सड़क हादसा बरेली में: टैंकर से भिड़ी बोलेरो और बाइक, पांच जनों की जान गई

बरेली सीबीगंज थाना क्षेत्र में बड़ा बाइपास पर खड़े टैंकर में पीछे से बोलेरो और बाइक टकराने से पांच लोगों की मृत्यु हो गई। हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों को पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक, परधौली में बडा बाइपास पर सड़क किनारे एक टैंकर खड़ा था। शाम करीब साढ़े चार बजे शहर से रामपुर की ओर गोरखपुर नंबर की बोलेरो कार टैंकर में पीछे से जा टकराई। इसी दौरान पीछे से एक बाइक भी बोलेरो में टकरा गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भेजा, जहां बाइक सवार दोनों युवकों और बोलेरो में सवार तीन युवक को डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं हादसे में घायल तीन अन्य का इलाज चल रहा है, जिसमें दो बच्चे हैं। बाइक सवार दो मृतकों की पहचान सीबीगंज के अटा कायस्थान निवासी मुमताज और शहजाद के रूप में हुई है। वहीं बोलेरो सवार दो लोगों की पहचान फरीदपुर निवासी मनमोहन और पीलीभीत के बीसलपुर निवासी दुर्गेश हैं। एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई है। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

गंगा का बढ़ता जलस्तर और आंधी बनी काल, 2 करोड़ की लागत से बना प्लाटून पुल हुआ क्षतिग्रस्त

मिर्जापुर मिर्जापुर में गंगा नदी पर नेवढ़िया घाट से गेगराव घाट तक बने दूसरे प्लाटून पुल का उद्घाटन 21 मार्च को हुआ था, लेकिन महज 15 दिनों के अंदर यह पुल टूट गया. अधिकारियों के अनुसार, गंगा में अचानक पानी बढ़ने और तेज आंधी के कारण पुल क्षतिग्रस्त हुआ. मरम्मत का काम चल रहा है. मिर्जापुर में गंगा नदी पर बने दूसरे प्लाटून पुल के टूटने की खबर आई है. यह पुल नेवढ़िया घाट से गेगराव घाट को जोड़ता है, जो मझवां विधानसभा क्षेत्र में है. पुल का उद्घाटन 21 मार्च को स्थानीय बीजेपी विधायक सुचिस्मिता मौर्या ने किया था, लेकिन महज 15 दिनों के अंदर ही यह टूट गया. PWD विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पुल के टूटने की वजह गंगा में अचानक पानी का बढ़ना और तेज आंधी रही. PWD अधिकारी वीके पाण्डेय ने बताया कि गंगा में अचानक पानी बढ़ने के कारण पुल के पीपा अपनी जगह से खिसक गए थे. यह पानी बढ़ने और आंधी आने के कारण हुआ है. दो घंटे में पुल को चालू करवा दिया जाएगा. स्थानीय लोग भी पुल टूटने से परेशान हैं. इस मौके पर मौजूद मोहित ने कहा कि हम लोग यहां से जाने वाले थे, लेकिन जब आए तो पता चला कि पुल टूट चुका है. हम पुल के बनने का इंतजार कर रहे हैं. वहीं अवधेश ने बताया कि यह लोग बता रहे हैं कि आंधी और पानी के कारण पुल टूट गया था. यह मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि पिछले तीन दिनों के अंदर मिर्जापुर में दो प्लाटून पुल टूट चुके हैं. इससे पहले विंध्याचल और हरसिंगपुर के बीच बने प्लाटून पुल 15 दिनों के भीतर क्षतिग्रस्त हो गया था. स्थानीय लोग इस बार भी आवागमन में परेशानी महसूस कर रहे हैं. जल्द मरम्मत की उम्मीद कर रहे हैं. पुल का निर्माण दो करोड़ से अधिक की लागत से किया गया था. मरम्मत का चल रहा है और PWD अधिकारियों का कहना है कि यह काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा. पुल टूटने की वजह से इलाके में आवागमन प्रभावित हो रहा है. स्थानीय प्रशासन और PWD विभाग ने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.

‘गजवा-ए-हिंद’ की साजिश नाकाम, पाकिस्तान और दुबई से जुड़े तार, संवेदनशील स्थलों की रेकी करने वाले गिरफ्तार

मरेठ उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (UP ATS) ने मेरठ और आसपास के इलाकों में सक्रिय एक खतरनाक आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार सीधे तौर पर सीमा पार पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं। इस जांच में जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह मॉड्यूल न केवल भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल था, बल्कि पकड़े जाने से बचने के लिए हिंदू रंग-रूप और कोड नेम का इस्तेमाल कर रहा था। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि पाकिस्तान में बैठे आकाओं ने अपने गुर्गों को सख्त हिदायत दी थी कि वे सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए स्थानीय हिंदू युवाओं को भर्ती करें और संवेदनशील स्थलों की रेकी के लिए उन्हें कवर के तौर पर इस्तेमाल करें। 'गजवा-ए-हिंद' का मिशन मीडिया  रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी शाकिब से हुई पूछताछ में यह बात सामने आई है कि वह पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के सीधे संपर्क में था। शाकिब को निर्देश दिए गए थे कि किसी भी परिस्थिति में मिशन अधूरा नहीं रहना चाहिए। हैंडलर्स ने उसे गजवा-ए-हिंद के एजेंडे पर काम करने और नेटवर्क का विस्तार इस तरह करने को कहा था जिससे कि सुरक्षा एजेंसियों को भनक तक न लगे। हैंडलर्स ने शाकिब को चेतावनी दी थी कि यदि भारत इस बार कोई ऑपरेशन करने की कोशिश करता है, तो हमें तैयार रहना होगा। इस साजिश के तहत शाकिब ने विकास और लोकेश नाम के दो हिंदू युवाओं को लालच देकर मॉड्यूल में शामिल किया। पहचान छिपाने के लिए उन्हें कोड नेम दिए गए। लोकेश को सलीम और विकास को जाहिद के नाम से बुलाया जाता था। हिंदू रंग-रूप को बनाया सुरक्षा का पास जांचकर्ताओं का कहना है कि शाकिब ने लोकेश (सलीम) का उपयोग उन संवेदनशील और धार्मिक स्थलों की रेकी करने के लिए किया, जहां एक विशेष समुदाय के व्यक्ति के रूप में प्रवेश करना मुश्किल हो सकता था। हिंदू पहचान होने के कारण लोकेश को सुरक्षा जांच में संदिग्ध नहीं माना जाता था, जिसका फायदा उठाकर उसने कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की टोह ली। इस मॉड्यूल का मुख्य उद्देश्य सैन्य ठिकानों और प्रमुख धार्मिक स्थलों की जानकारी जुटाना था। एटीएस को पता चला है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स गूगल लोकेशन साझा करते थे, जिसके बाद शाकिब और उसके साथी उन स्थानों पर जाकर वीडियो रिकॉर्ड करते और वापस भेज देते थे। इस काम के बदले उन्हें विदेशी माध्यमों से भुगतान किया जाता था। दुबई कनेक्शन इस पूरे खेल की कड़ियां केवल पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका एक बड़ा सिरा दुबई से भी जुड़ा है। जांच में आकिब नाम के एक व्यक्ति की भूमिका सामने आई है, जो दुबई में बैठकर शाकिब और पाकिस्तानी हैंडलर्स के बीच सेतु का काम कर रहा था। आकिब इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का काम करता था। वह हथियारों (विशेषकर AK-47) के वीडियो और भड़काऊ कंटेंट साझा करता था ताकि युवाओं के मन में हिंसा के प्रति आकर्षण पैदा किया जा सके। एडीजी (कानून एवं व्यवस्था) अमिताभ यश का कहना है कि शाकिब सीधे तौर पर दुबई स्थित आकिब के संपर्क में था। आकिब के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। यूपी में पनपते हाइब्रिड मॉड्यूल का पुराना पैटर्न जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश में ऐसे कई मॉड्यूल सामने आए हैं। यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है जिसे हाइब्रिड टेररिज्म कहा जा सकता है, जहां अपराधी अपनी धार्मिक और सामाजिक पहचान छिपाकर वार करते हैं। हाल ही में एटीएस ने बीड़ीएस (BDS) छात्र हारिस अली को गिरफ्तार किया था, जो आईएसआईएस (ISIS) की विचारधारा फैला रहा था और टेलीग्राम, डिस्कॉर्ड जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए पाकिस्तान से निर्देश ले रहा था।

रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा, कानपुर में टेक्नीशियन ने निकाली किडनी, पुलिस की रडार पर कई बड़े डॉक्टर

 कानपुर  कानपुर पुलिस को किडनी खरीद-फरोख्त मामले में कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। किडनी ट्रांसप्लांट गैंग का नेटवर्क लगातार बढ़ता जा रहा था। इस गैंग के सदस्य एक विदेशी महिला का किडनी ट्रांसप्लांट कर चुके हैं। इसके साथ ही इस दौरान एक महिला की मौत भी हो चुकी है। कानपुर कमिश्नरेट पुलिस की जांच में यह बातें खुलकर सामने आई हैं। पुलिस किडनी कांड में आठ लोगों की गिरफ्तारी कर चुकी है। जांच टीम को डॉ. रोहित, अली, अखिलेश समेत कई लोगों की तलाश है। किडनी कांड की जांच डीसीपी वेस्ट एमएम कासिम आबिदी कर रहे हैं। पुलिस ने गाजियाबाद से पकड़े गए दो ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश को शुक्रवार को जेल भेजा था। पुलिस की पूछताछ में दोनों ने कई अहम राज उगले थे। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी ओटी टेक्नीशियन मुदस्सर अली सिद्दीकी दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला है। उसके घर पर दबिश दी गई, लेकिन वह पहले से फरार हो गया था। ओटी टेक्नीशियन ने किया ट्रांसप्लांट अली जिस मेडीलाइफ हॉस्पिटल में काम करता था। उस हॉस्पिटल के तीनों मालिक भी फरार हैं। वहीं, इस मामले में मेरठ के तीन डॉक्टरों के नाम भी प्रकाश में आए हैं। यह सभी किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े डोनर और मरीजों को ढूंढने का काम करते थे। जेल भेजे गए कुलदीप और राजेश ने पुलिस को बताया कि दिल्ली निवासी मुदस्सर अली सिद्दकी ने आयुष की किडनी निकाली और फिर पारुल तोमर को ट्रांसप्लांट कर दी। यदि पुलिस अली सिद्दकी को अरेस्ट करती है तो कई और बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं। परिवार ने दी सफाई पुलिस ने जब मुदस्सर अली सिद्दकी के घर पर दबिश दी तो अली वहां नहीं मिला। लेकिन उसकी पत्नी, बेटी और परिवार के अन्य सदस्य मिले। पत्नी ने बताया कि मेरे पति अस्पताल में ओटी स्टॉफ हैं। वह कोई न्यूरोलोजिष्ट या डॉक्टर नहीं हैं। ओटी टेक्नीशियन किडनी ट्रांसप्लांट कैसे कर सकता है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि अली दिसंबर 2025 में मेडीलाइफ हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है। मेडीलाइफ हॉस्पिटल औरैया के डॉ. नरेंद्र, कन्नौज के डॉ. रोहन, डॉ. संदीप के पार्टनरशिप में है।  

लखनऊ: केजीएमयू परिसर से हटेंगी 6 मजारें, रमजान के बाद प्रशासन ने तेज की कार्रवाई

लखनऊ किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) परिसर में स्थित छह मजारों को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। केजीएमयू प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी नोटिसों की मियाद समाप्त हो चुकी है और अब संबंधित पक्षों को अंतिम रूप से 15 दिन का समय दिया जाएगा। इसके बाद प्रशासन अपने स्तर पर मजारों को हटाने की कार्रवाई करेगा। नोटिस के बाद भी नहीं मिले दस्तावेज केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के अनुसार, प्रशासन की ओर से मजारों को हटाने के लिए पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे। इन नोटिसों में एक निश्चित समय-सीमा निर्धारित की गई थी। दो बार नोटिस देने के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत संबंधित पक्षकारों को एक दिन का अतिरिक्त समय भी दिया गया।हालांकि इस दौरान केवल एक मजार के प्रबंधक की ओर से जवाब मिला, लेकिन वह भी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। प्रशासन का कहना है कि ये सभी संरचनाएं परिसर के नियमों का उल्लंघन करती हैं। 15 दिन में हटेंगी मजारें, विरोध से निपटने की तैयारी प्रशासन ने साफ किया है कि अगले 15 दिनों के भीतर सभी छह मजारों को परिसर से हटा दिया जाएगा। इसके लिए संबंधित पक्षों को अंतिम मौका दिया जा रहा है। तय समयसीमा के बाद केजीएमयू प्रशासन स्वयं कार्रवाई करेगा। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य परिसर में व्यवस्था बनाए रखना और भविष्य में अनधिकृत निर्माणों पर रोक लगाना है। साथ ही किसी भी संभावित विरोध से निपटने के लिए भी तैयारी की जा रही है। मजार हटने के बाद परिसर में खाली जगह उपलब्ध होगी, जिससे व्यवस्थाएं बेहतर होंगी। रमजान के कारण टली थी कार्रवाई प्रो. केके सिंह ने बताया कि मजारों को हटाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी, लेकिन रमजान के चलते इस कार्रवाई में कुछ समय के लिए ढील दी गई थी। अब रमजान समाप्त होने के बाद प्रक्रिया को दोबारा तेज कर दिया गया है। पहले भी हो चुका है विवाद यह मामला पिछले काफी समय से विवादों में बना हुआ है। मजार हटाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन ने केजीएमयू कुलपति और भूमि मामलों के नोडल अधिकारी प्रो. केके सिंह के खिलाफ तहरीर दी थी। इसके जवाब में केजीएमयू प्रशासन ने भी संस्था पर छवि खराब करने और धमकाने का आरोप लगाते हुए लीगल नोटिस भेजा था। 2025 से शुरू हुआ विवाद केजीएमयू परिसर में मजारों को लेकर विवाद की शुरुआत वर्ष 2025 में हुई थी। उस समय न्यायालय के आदेश के बाद 26 अप्रैल 2025 को हाजी हरमैन शाह की मजार के आसपास का निर्माण ध्वस्त किया गया था। इसके बाद 23 जनवरी 2026 को प्रशासन ने परिसर में मौजूद मजारों पर नोटिस चस्पा कर 15 दिन के भीतर उन्हें हटाने का निर्देश दिया। पहली समयसीमा समाप्त होने के बाद 9 फरवरी को दूसरा नोटिस जारी कर अतिरिक्त 15 दिन का समय दिया गया था। अब सभी अवसर और समयसीमाएं समाप्त होने के बाद प्रशासन अंतिम कार्रवाई के लिए तैयार है।