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महिला सुरक्षा पर बड़ा कदम, अब कैब-बाइक टैक्सी ड्राइवरों का होगा ऑनलाइन पंजीकरण और वेरिफिकेशन

 लखनऊ  प्रदेशभर में एप से चलने वाले वाहनों की जल्द ही निगरानी शुरू होगी। ओला, उबर, रैपिडो, बाइक टैक्सी व डिलीवरी वाहनों को भी ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। इससे वाहन चलाने वाले ड्राइवरों का मेडिकल, पुलिस वेरिफिकेशन व फिटनेस टेस्ट आदि कराया जाएगा। यात्रियों खासकर महिलाओं की सुरक्षा में यह कदम अहम साबित होगा। परिवहन विभाग को मिले सुझाव व आपत्तियों का जवाब परिवहन विभाग ने शासन को भेज दिया है। अब इस माह के अंत या अगले महीने नई नियमावली लागू होगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 93 में एक जुलाई 2025 को संशोधन किया था। केंद्र सरकार के नियम को उत्तर प्रदेश ने अपनाया है। पहले ओला-उबर आदि पर कोई नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब इन्हें भी पंजीकरण कराना पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 10 मार्च को ही कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक व वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली 2026 पर मुहर लगाई थी। पांच अप्रैल तक नई नीति के संबंध में सुझाव व आपत्तियां मांगी गई थी। परिवहन विभाग को करीब डेढ़ दर्जन से अधिक आपत्तियां व सुझाव मिले थे। सुझाव मिला था कि एप आधारित वाहनों के लिए जगह-जगह हाल्ट बनाए जाएं, ताकि वहां पर ड्राइवरों के विश्राम करने की व्यवस्था हो। ड्राइवरों पर उम्र की शर्त न हो बल्कि वे जब तक फिट रहे वाहन चला सकें। राज्य परिवहन प्राधिकरण के सचिव सगीर अंसारी ने बताया कि परिवहन विभाग ने पॉलिसी से संबंधित ब्योरा शासन को भेज दिया है। शासन ही इस पर अंतिम निर्णय लेकर नई नियमावली लागू करेगा। वाहनों का पंजीकरण कराने की ऑनलाइन आवेदन की फीस 25 हजार रुपये होगी, वहीं 50 से 100 या इससे अधिक वाहन चलाने वाली कंपनी की लाइसेंसिंग फीस पांच लाख रुपये होगी। नवीनीकरण हर पांच साल में होता रहेगा, इसकी फीस पांच हजार रुपये होगी। इसके लिए परिवहन विभाग एप भी बनाएगा। अब 12 साल पुराने वाहनों का पंजीकरण हो सकेगा, पहले वाहन की आयु आठ वर्ष रखने पर मंथन हुआ था लेकिन, वाहन स्वामियों ने यह कहकर विरोध किया था कि सात वर्ष तक वे बैंक का ऋण ही चुकाते रहते हैं। महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए सभी वाहनों में पैनिक बटन लगे होंगे और वीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस से उन्हें जोड़ा जाएगा। वाहन बुक कराते ही ड्राइवर की पूरी जानकारी मोबाइल पर दिखेगी। यात्रियों व ड्राइवरों का होगा बीमा ओला-उबर या अन्य वाहनों के ड्राइवरों व यात्रियों का पांच-पांच लाख लाख रुपये का बीमा होगा। ड्राइवर का पांच लाख रुपये का हेल्थ व टर्म बीमा 10 लाख रुपये का होगा। शिकायतों की सुनवाई के लिए 24 घंटे ग्रीवांस सेल सक्रिय रहेगी। हर वाहन की रेटिंग होगी, यह रेटिंग यात्रियों के हाथ में रहेगी। उसी के आधार पर ड्राइवरों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।  

वर्ष 2015-17 की तुलना में 2021-23 की सर्वे रिपोर्ट में काफी कम दर्ज की गई मृत्यु दर

लखनऊ योगी सरकार की 102 एंबुलेंस सेवा (मदर एंड चाइल्ड सर्विसेस) गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। पहले गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलने से उनकी जान को खतरा रहता था। ऐसे में योगी सरकार ने 102 एंबुलेंस सेवा का सुदृढ़ीकरण कर मातृ मृत्यु अनुपात को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है। योगी सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि वर्तमान में 102 एंबुलेंस सेवा का रिस्पांस टाइम घटकर 7 मिनट रह गया है। इसका मतलब यह है कि आपात स्थिति में मात्र सात मिनट में चिकित्सीय सुविधा प्राप्त हो रही है। रिस्पांस टाइम में उत्तर प्रदेश पूरे देश में नंबर एक पर है।  2,270 एंबुलेंस के जरिये रोजाना 40 हजार से अधिक गर्भवती हो रहीं लाभान्वित   अपर मुख्य सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य अमित घोष ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी ने मातृ मृत्यु अनुपात को कम करने के लिए बड़े कदम उठाये। इसके लिए जहां प्रदेश के शहरी से लेकर ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों को सुदृढ़ किया गया, वहीं 102 एंबुलेंस सेवा के रिस्पांस टाइम को कम करने के लिए विभिन्न कदम उठाए गये। उसके नतीजे आज सबके सामने हैं। सीएम योगी की दूरदर्शी सोच और मॉनीटरिंग का ही असर है कि वर्तमान में एंबुलेंस सेवा 102 का रिस्पांस टाइम मात्र 7:06 मिनट है जबकि वर्ष 2016 में रिस्पांस टाइम 11:28 मिनट था। यह रिस्पांस टाइम अचानक कम नहीं हुआ बल्कि सीएम योगी के विगत नौ वर्षों में लगातार किए गये प्रयासों और पहलों से संभव हो पाया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सीएम योगी ने 2019 और 2023 में खटारा हो चुकी क्रमश: 1,554 और 674 एंबुलेंस को हटाकर नई स्वास्थ्य तकनीक से लैस एंबुलेंस की खरीद की। इसके अलावा सेवा को बेहतर करने के लिए 306 अतिरिक्त नई एंबुलेंस को जोड़ा गया। वर्तमान में प्रदेश में कुल 2,270 एंबुलेंस सेवा 102 संचालित हैं। इसके जरिये प्रदेश में औसतन रोजाना 40,524 जच्चा-बच्चा को सहायता प्रदान की जा रही है।  प्रदेश में बेहतर एंबुलेंस सेवा से मातृ मृत्यु अनुपात में दर्ज की गई कमी  राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि 102 एंबुलेंस सेवा के रिस्पांस टाइम में कमी आने से प्रदेश में मातृ मृत्यु अनुपात में काफी कमी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (एसआरएस) के अनुसार वर्ष 2015-17 में प्रदेश की मातृ मृत्यु अनुपात 216 प्रति लाख दर्ज की गयी थी, जो कम हो करके वर्ष 2021-23 में 141 प्रति लाख पहुंच गई है। पूरे देश में सबसे कम रिस्पांस टाइम उत्तर प्रदेश का मिशन निदेशक के अनुसार, सीएम योगी के प्रयासों का ही नतीजा है कि साल दर साल एंबुलेंस सेवा का रिस्पांस टाइम कम होता गया। उन्होंने बताया कि एंबुलेंस सेवा 102 का रिस्पांस टाइम वर्ष 2016 में 11:28 मि., वर्ष 2017 में 12:01 मि. और वर्ष 2018 में 11:21 मि. दर्ज किया गया। वहीं वर्ष 2020 में 13:42 मि. और वर्ष 2021 में 12:02 मि. रिस्पांस टाइम दर्ज किया। वर्ष 2020 और 2021 का रिस्पांस टाइम वैश्विक कोरोना बीमारी के समय का है। इसके बाद वर्ष 2022 में 7:01 मिनट और वर्ष 2023 में 7:02 मिनट दर्ज किया गया है। वहीं वर्तमान में रिस्पांस टाइम 7:06 मिनट है। सबसे बड़ी बात यह है कि पूरे देश में एंबुलेंस सेवा का सबसे कम रिस्पांस टाइम उत्तर प्रदेश का ही है, जबकि उत्तर प्रदेश देश भर में सबसे अधिक 25.74 करोड़ जनसंख्या वाला राज्य है। उत्तर प्रदेश एंबुलेंस सेवा के रिस्पांस टाइम 7:06 मिनट के साथ देशभर में पहले स्थान पर है। वहीं दूसरे स्थान पर 7:57 मिनट के साथ राजस्थान, तीसरे स्थान पर 10:45 मिनट के साथ केरल है।

उत्तर प्रदेश के 1.90 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों से 2.12 करोड़ बच्चे, गर्भवती और धात्री महिलाएं लाभान्वित

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल गांव-गांव में बदलाव की नई तस्वीर पेश कर रही है। प्रदेश के एक लाख 90 हजार आंगनवाड़ी केंद्र अब केवल पोषाहार वितरण केंद्र नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षित मातृत्व के मजबूत आधार बन चुके हैं। यही कारण है कि प्रदेश में 2 करोड़ 12 लाख बच्चे, गर्भवती एवं धात्री महिलाएं अनुपूरक पुष्टाहार योजनाओं से लाभान्वित हुई हैं और गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की दर में पांच प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है। संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 84 से अधिक पहुंचना भी मातृ सुरक्षा अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। आंगनवाड़ी केंद्रों में तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता योगी सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए अनुपूरक पुष्टाहार वितरण में बायोमीट्रिक प्रणाली लागू की है। इससे पोषाहार वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनी है। कुपोषण या पोषण स्थिति की सटीक पहचान के लिए सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को चार प्रकार के ग्रोथ मॉनीटरिंग डिवाइस और मोबाइल फोन उपलब्ध कराए गए हैं। पोषण ट्रैकर के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है। पोषण ट्रैकर के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक लाख से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और एएनएम को प्रशिक्षित भी किया गया। कार्यकुशलता मापन में 98 प्रतिशत उपलब्धि को इस अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। प्रदेश में 23 हजार से अधिक सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र आधुनिक सुविधाओं के साथ संचालित हो रहे हैं, जबकि 266 नए आंगनवाड़ी केंद्रों को भी स्वीकृति दी गई है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी प्रदेश में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 60 लाख से अधिक माताएं लाभान्वित हुई हैं। जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव कराने वाली महिलाओं को 1400 रुपये तथा शहरी क्षेत्रों में 1000 रुपये की सहायता राशि दी जा रही है। इसके सकारात्मक परिणाम मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी के रूप में सामने आए हैं। प्रदेश में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा साढ़े छह हजार आंगनवाड़ी केंद्र गोद लिए गए हैं। इससे इन केंद्रों की निगरानी, संसाधन और व्यवस्थाएं अधिक मजबूत हुई हैं। स्वस्थ मां ही स्वस्थ समाज और समृद्ध भविष्य की आधारशिला है। मातृ दिवस पर प्रदेश की आंगनवाड़ी व्यवस्था इसी संकल्प को नई मजबूती देती दिखाई दे रही है। कुपोषण के खिलाफ “संभव अभियान” बना प्रभावी हथियार मां के साथ ही बच्चों में कुपोषणता के खिलाफ चलाए जा रहे “संभव अभियान” के तहत उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेशभर में 1.7 करोड़ बच्चों की स्क्रीनिंग के साथ ही 2.5 लाख गंभीर कुपोषित बच्चों का पंजीकरण कर उन्हें विशेष पोषण सेवाओं से जोड़ा गया है। आंगनवाड़ी केंद्रों पर आने वाले 03 से 06 वर्ष आयु वर्ग के 35 लाख से अधिक बच्चों को प्रतिदिन हॉट कुक्ड मील उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए 60 हजार महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पुष्टाहार वितरण कर महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से भी जोड़ा गया है।

कुशीनगर से वाराणसी और नेपाल सीमा से प्रयागराज तक बनेंगे फोर लेन हाईवे

 लखनऊ  प्रदेश में प्रस्तावित किए गए छह नार्थ-साउथ हाईवे कारिडोर में से दो कारिडोर का काम जल्द शुरू होने जा रहा है। टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई, भूमि अधिग्रहण का काम शुरू किए जाने की तैयारी है। पहला कारिडोर कुशीनगर-देवरिया-दोहरीघाट-गाजीपुर-जमानिया होते हुए वाराणसी तक तथा दूसरा कारिडोर पिपरी (भारत-नेपाल सीमा)-बांसी-सिद्धार्थनगर से प्रयागराज तक के बीच बनेगा। दोनों कारिडोर में पीडब्ल्यूडी द्वारा कराए जाने वाले कार्यों में से तीन खंडों का काम स्वीकृत होने के साथ ही हुए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हाईवे कारिडोर का काम लोक निर्माण विभाग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) द्वारा किया जाना है। दोनों कारिडोर का निर्माण कार्य पूरा होने पर पूर्वांचल के दर्जन भर पिछड़े जिले आपस में फोर लेन हाईवे से जुड़ जाएंगे। प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी अजय चौहान ने बताया है कि कुशीनगर-देवरिया-गाजीपुर-वाराणसी हाईवे में 31.5 किमी कसया-देवरिया मार्ग तथा 21.75 किमी देवरिया-बरहज मार्ग का निर्माण कार्य स्वीकृत कर दिया गया है। वहीं पिपरी (भारत नेपाल सीमा)-बांसी-सिद्धार्थनगर से प्रयागराज तक प्रस्तावित हाईवे में 9.4 किमी बर्डपुर पिपरहवा मार्ग का काम भी स्वीकृत किया गया है। अन्य खंडों के काम भी जल्द स्वीकृत किए जाएंग। विशेष सचिव प्रभुनाथ के मुताबिक हाईवे कारिडोर के 62 किमी कार्य के लिए 725 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। अभी 235 किमी कार्य स्वीकृत किए जाना शेष है। मुख्य अभियंता (मुख्यालय-एक) अनिल कुमार दुबे के मुताबिक दोनों कारिडोर का काम दो वर्ष में पूरा होगा। भूमि अधिग्रहण के साथ ही निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा। कुशीनगर-वाराणसी हाईवे कारिडोर कुशीनगर-देवरिया-दोहरीघाट-गाजीपुर-जमानिया होते हुए वाराणसी तक बनने वाले कारिडोर की कुल लंबाई 220 किमी है। दोहरीघाट-मऊ-गाजीपुर खंड तथा गाजीपुर-वाराणसी पहले से चार लेन हैं। कुशीनगर-देवरिया और देवरिया-दोहरीघाट खंड का कार्य लोक निमार्ण द्वारा किया जाना है। जिसकी अनुमानित लागत 342 करोड़ रुपये है। कॉरिडोर-1 (कुशीनगर से वाराणसी) के जिले इस रूट पर आने वाले मुख्य जिले:     कुशीनगर     देवरिया     मऊ (दोहरीघाट खंड के जरिए)     गाजीपुर     वाराणसी नेपाल सीमा पिपरी-प्रयागराज कारिडोर पिपरी (भारत-नेपाल सीमा)-सिद्धार्थनगर- प्रयागराज कारिडोर की लंबाई 295 किलोमीटर है। पहला हिस्सा 9.4 किमी पिपरी-बर्डपुर का काम स्वीकृत कर दिया गया है। यह कारिडोर शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और विंध्य एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। इसमें 107 किमी के तीन खंडो का काम पीडब्ल्यूडी 642 करोड़ रुपये से और 123 किलोमीटर का काम सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) 738 करोड़ की लागत से करेगा। इस रूट की कनेक्टिविटी इन जिलों को कवर करेगी:     सिद्धार्थनगर (पिपरी-बर्डपुर-बांसी खंड)     बस्ती (सिद्धार्थनगर से प्रयागराज के रास्ते में)     संत कबीर नगर     अमेठी (पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लिंक के जरिए)     सुलतानपुर     प्रतापगढ़     प्रयागराज  

दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने में तेजी, 2.41 लाख से अधिक बच्चों का डेटा प्रेरणा पोर्टल से लिंक

लखनऊ योगी सरकार ने समावेशी शिक्षा को मिशन मोड में आगे बढ़ाते हुए दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। हाल ही में जारी विभागीय आंकड़ों के अनुसार समर्थ पोर्टल से जुड़े 2.41 लाख से अधिक दिव्यांग बच्चों का डेटा प्रेरणा पोर्टल से लिंक किया जा चुका है और अब पंजीकरण अभियान को जिला एवं ब्लॉक स्तर तक तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, पंजीकरण और शैक्षिक सहायता को पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था से जोड़ दिया है। इससे दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले कहीं अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हुई है। समर्थ और प्रेरणा पोर्टल के एकीकरण से छात्रवृत्ति, प्रशिक्षण और सहायता योजनाओं तक पहुंच आसन हुई है। प्रयागराज, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, आजमगढ़, गोंडा और हरदोई जैसे जिलों में अभियान की उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है। प्रयागराज में 6697, आजमगढ़ में 6322, लखीमपुर खीरी में 6182 और सीतापुर में 6121 दिव्यांग बच्चों का डेटा लिंक किया गया है। इससे स्पष्ट है कि योगी सरकार की तकनीक आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था अब जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दे रही है और 'कोई भी बच्चा शिक्षा से बाहर नहीं' का संकल्प तेजी से साकार होता दिखाई दे रहा है। शासन स्तर से सभी जिलों के बीएसए, बीईओ और समावेशी शिक्षा से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि दिव्यांग बच्चों का पंजीकरण अभियान मोड में पूरा कराया जाए। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि प्रदेश का कोई भी दिव्यांग बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर नहीं रहेगा। योगी सरकार की यह पहल दिखाती है कि जब नीति स्पष्ट हो, तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल हो और जमीनी स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जाए, तो शिक्षा व्यवस्था को वास्तव में समावेशी बनाया जा सकता है। दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का यह मॉडल आने वाले समय में देश के लिए भी नई मिसाल बन सकता है। तकनीक से आसान हुई शिक्षा और योजनाओं तक पहुंच योगी सरकार की रणनीति अब केवल स्कूलों में नामांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे बच्चों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर केंद्रित है जो लंबे समय तक व्यवस्था से दूर रहे। समर्थ और प्रेरणा पोर्टल के एकीकरण के बाद अब दिव्यांग बच्चों को छात्रवृत्ति, सहायक उपकरण, विशेष प्रशिक्षण, थेरेपी और दूसरी शैक्षिक सुविधाओं से जोड़ना आसान हो गया है। इसके साथ ही बच्चों की पढ़ाई, उपस्थिति और शैक्षिक प्रगति की डिजिटल निगरानी भी संभव हो सकेगी। पहले दिव्यांग बच्चों के वास्तविक आंकड़ों और उनकी शैक्षिक स्थिति को लेकर एकरूप व्यवस्था का अभाव था, लेकिन अब शासन के पास वास्तविक समय का डेटा उपलब्ध हो रहा है, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे पात्र बच्चों तक पहुंच सकेगा। तकनीक आधारित शिक्षा मॉडल को मिल रही मजबूती योगी सरकार पहले ही स्मार्ट क्लास, डिजिटल मॉनिटरिंग, निपुण भारत मिशन, मिशन प्रेरणा और स्कूल कायाकल्प जैसे अभियानों के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को तकनीक आधारित बनाने पर जोर दे चुकी है। अब समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में यह पहल उसी व्यापक विजन का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें शिक्षा को केवल अधिकार नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसर का माध्यम माना गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किसानों की डिजिटल पहचान की ओर तेजी से बढ़ रहा उत्तर प्रदेश

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से डिजिटल कृषि व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है। किसानों को सरकारी योजनाओं का पारदर्शी और त्वरित लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में चल रही फार्मर रजिस्ट्री अभियान ने अब बड़े स्तर पर परिणाम देना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार की सक्रिय पहल के चलते अब तक 2.23 करोड़ से अधिक किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य का 77.43 प्रतिशत है। प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत 5 नवंबर 2024 से की गई थी। केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए 2,88,70,495 किसानों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान प्रगति के अनुसार अब तक 2,23,54,644 किसानों का नामांकन किया जा चुका है, जबकि लगभग 65,15,851 किसानों का पंजीकरण अभी शेष है। योगी सरकार ने इस अभियान को मिशन मोड में संचालित करते हुए जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, कृषि विभाग और स्थानीय स्तर के कर्मचारियों को तेजी से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों का एकीकृत डिजिटल डाटाबेस तैयार करना है, जिससे उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, कृषि अनुदान, ऋण सुविधा और अन्य योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सके। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अगले 30 दिनों यानी 6 जून 2026 तक लक्ष्य पूरा करना है। इसके साथ ही वर्तमान प्रगति के आधार पर किसानों की आईडी निर्माण प्रक्रिया 108 दिनों में यानी 22 अगस्त 2026 तक पूर्ण होने का अनुमान है। योगी सरकार की प्राथमिकता केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमि और किसानों के रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना भी है। इसी क्रम में “अंश निर्धारण” का कार्य भी तेजी से चल रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अंश निर्धारण का कार्य 87.19 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। इससे भूमि रिकॉर्ड की शुद्धता बढ़ेगी और भविष्य में विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार फार्मर रजिस्ट्री उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे सरकार को वास्तविक किसानों की पहचान करने, योजनाओं की मॉनिटरिंग करने और कृषि आधारित नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। साथ ही किसानों को सरकारी सहायता प्राप्त करने में भी आसानी होगी। योगी सरकार लगातार तकनीक आधारित प्रशासन को बढ़ावा दे रही है। डिजिटल गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाओं और डेटा आधारित योजना क्रियान्वयन के जरिए उत्तर प्रदेश को आधुनिक और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। फार्मर रजिस्ट्री अभियान को भी इसी व्यापक परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जो आने वाले समय में प्रदेश के करोड़ों किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

योगी सरकार में बेटियों की सुरक्षा को लेकर बदली तस्वीर, देर रात में भी बेफिक्र हैं माताएं

लखनऊ माहौल खराब हो तो एक मां की सबसे बड़ी चिंता अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर होती है। जब तक बेटी घर न लौटे, मां का मन आशंकाओं से घिरा रहता है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में हर मां इसी कष्ट से गुजर रही थी, लेकिन योगी सरकार बनने के बाद बहन-बेटियों की सुरक्षा के मुद्दे पर प्रदेश की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। शाम ढलते ही बेटियों को घर बुला लेने वाली माताएं योगी सरकार में चिंतामुक्त हैं। उनका कहना है कि बेटी जल्दी घर लौटे या देर से, योगी सरकार में इस बात का पक्का भरोसा है कि बेटी सुरक्षित है। सड़क से लेकर स्कूल-कालेज, बाजार व अन्य तमाम सार्वजनिक स्थानों तक पुलिस की सक्रिय मौजूदगी हमारी बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। रात 10 बजे भी बेटी को अकेले भेजने में डर नहीं लखनऊ की रजनी त्रिपाठी ने बताया कि उनकी 15 वर्षीय बेटी निजी स्कूल में पढ़ती है। स्कूल में सांस्कृतिक और शैक्षिक कार्यक्रमों के कारण कई बार उसे घर लौटने में देर हो जाती है, लेकिन योगी सरकार में पहले जैसी चिंता नहीं होती। पिछली सपा सरकारों में हमारे लिए भी शाम 7 बजे के बाद घर से बाहर निकलना आसान नहीं था। माता-पिता हमेशा डरे रहते थे, लेकिन अब माहौल पूरी तरह बदल चुका है। पुलिस की सक्रियता और सख्ती के कारण मनचलों में डर दिखाई देता है। योगी सरकार में मैं अपनी बेटी को रात 10 बजे भी किसी जरूरी काम से अकेले भेजने में नहीं झिझकती। योगी सरकार में अपराधियों में कार्रवाई का डर त्रिवेणी नगर में रहने वाली कंचन दीक्षित ने कहा कि महिलाओं से जुड़े अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने प्रभावी कदम उठाए हैं। हमने किशोरावस्था में जो माहौल देखा, वैसा हमारी बेटियों को नहीं झेलना पड़ रहा। 2017 से पहले सड़कों पर निकलते ही डर बना रहता था, लेकिन योगी सरकार में कार्रवाई का डर अपराधियों में दिखाई देता है। यही वजह है कि आज हम अपनी बेटियों को ज्यादा आत्मविश्वास के साथ बाहर भेज पाते हैं। ममता निगम ने बताया कि उनकी 17 वर्षीय बेटी पढ़ रही है और शाम को कोचिंग भी जाती है। पहले लौटने में देर होने पर लगातार चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब पुलिस की नियमित गश्त और मौजूदगी से कोई डर नहीं लगता। हर मां की सबसे बड़ी चिंता उसकी बेटी की सुरक्षा होती है, लेकिन योगी सरकार में हमारी यह चिंता समाप्त हो चुकी है। हम इसके लिए मुख्यमंत्री के आभारी हैं। कहीं भी जरूरत पर आ जाती है पुलिस अयोध्या निवासी ज्योतिमा सिंह भी कानून-व्यवस्था में आए बदलाव को महसूस करती हैं। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले इसी कोशिश में रहती थी कि किसी तरह बेटी शाम होने से पहले घर लौट आए। लेकिन अब ऐसा कोई तनाव नहीं रहता। कहीं भी जरूरत पड़ने पर पुलिस सहायता उपलब्ध हो जाती है। पिछली सरकारों में अपराधियों के हौसले बढ़े हुए थे, इसलिए डर बना रहता था, लेकिन अब अपराधों पर नियंत्रण महसूस होता है। बेटियों को सम्मान से बदला नजरिया भी लखनऊ की ललिता प्रदीप ने कहा कि महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर प्रदेश में निश्चित रूप से सुरक्षा की भावना पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। किसी भी समाज में महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून व्यवस्था या पुलिसिंग तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह सामाजिक मूल्यों और सोच पर भी निर्भर करती है। जिस समाज में बेटियों और महिलाओं को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है, वहां सुरक्षा का वातावरण स्वतः मजबूत होता है। वहीं यदि महिलाओं को केवल उपभोग की वस्तु समझा जाए, तो वह समाज कभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। योगी सरकार ने दोनों मोर्चों पर काम किया। बहन-बेटियों को सम्मान दिया तो पुरुष प्रधान समाज के पैरोकारों का भी नजरिया बदला। गुडों-बदमाशों पर सख्त कार्रवाई की तो बेटियों को बेखौफ बाहर निकलने का मौका मिला। सुरक्षित माहौल से बढ़ा आत्मविश्वास प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर चलाए गए अभियान, सड़कों पर बढ़ी पुलिस की मौजूदगी, एंटी रोमियो स्क्वॉड जैसी व्यवस्थाओं और त्वरित कार्रवाई ने समाज में सकारात्मक बदलाव आया है। यही कारण है कि योगी सरकार में प्रदेश की माताएं अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर निश्चिंत हैं। सुरक्षित माहौल ने बेटियों के आत्मविश्वास को भी मजबूत किया है और वे शिक्षा, करियर और अपने सपनों की ओर बेखौफ कदम बढ़ा रही हैं।

सीएम योगी के निर्देश पर जल सुरक्षा और बाढ़ नियंत्रण को मजबूत करने के लिए शुरू हुआ गेट बदलने का कार्य

लखनऊ योगी सरकार द्वारा प्रदेश में बुनियादी ढांचे और जल प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी के तहत राजधानी स्थित गोमती बैराज को आधुनिक और आदर्श बैराज सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है। सीएम योगी के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने बैराज के पुराने और क्षतिग्रस्त वर्टिकल गेटों को बदलने का कार्य शुरू कर दिया है। इससे राजधानी लखनऊ की पेयजल आपूर्ति और अधिक मजबूत होगी। इसके अलावा जल सुरक्षा, बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरणीय संतुलन को नई तकनीक के माध्यम से और मजबूती मिलेगी।  बैराज के गेटों में जैविक एवं रासायनिक क्षरण बढ़ने से कार्यक्षमता होने लगी थी प्रभावित  प्रमुख सचिव सिंचाई अनिल गर्ग ने बताया कि वर्ष 1980 से 1983 के बीच निर्मित गोमती बैराज लंबे समय से राजधानी की जल आपूर्ति व्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है। यह बैराज कुड़िया घाट पंपिंग स्टेशन पर 105.6 मीटर का निर्धारित जल स्तर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे लाखों लोगों को निर्बाध पेयजल उपलब्ध हो पाता है। इसके साथ ही बारिश के मौसम में गोमती नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित कर शहर को बाढ़ जैसी स्थितियों से बचाने में भी यह अहम योगदान देता है। उन्होंने बताया कि समय के साथ नदी के पानी की गुणवत्ता और लगातार उपयोग के कारण बैराज के गेटों में जैविक एवं रासायनिक क्षरण बढ़ गया था। इससे गेटों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगी थी। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चरणबद्ध तरीके से गेट बदलने के निर्देश दिये थे। इसी क्रम में वर्ष 2024 में दो गेट बदले गए थे, जबकि 2025 में चार अन्य गेटों को प्रतिस्थापित किया गया। अब अंतिम चरण में शेष चार गेटों के निर्माण और स्थापना का कार्य तेजी से किया जा रहा है। बरेली के आईएसओ प्रमाणित सिंचाई कार्यशाला में किया गया गेटों का निर्माण मुख्य अभियंता यांत्रिक उपेंद्र सिंह ने बताया कि इन गेटों का निर्माण बरेली स्थित आईएसओ प्रमाणित सिंचाई कार्यशाला में किया गया है। प्रत्येक गेट दो स्तरों में तैयार किया गया है, जिसमें ऊपरी हिस्से का वजन लगभग 16 टन और निचले हिस्से का वजन करीब 18 टन है। सभी दस गेटों की चौड़ाई 18 मीटर तथा ऊंचाई 4.95 मीटर निर्धारित की गई है। अत्याधुनिक तकनीक और मजबूत संरचना वाले ये नए गेट लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम होंगे। उन्होंने बताया कि विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती गेट बदलने के दौरान राजधानी की पेयजल आपूर्ति को प्रभावित न होने देना था। इसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने बैराज के ऊपरी हिस्से में कॉफरडैम का निर्माण कराया है, ताकि मरम्मत और प्रतिस्थापन कार्य के दौरान जल स्तर को नियंत्रित रखा जा सके। इस व्यवस्था से कुड़िया घाट पंपिंग स्टेशन तक पर्याप्त पानी पहुंचता रहेगा और शहरवासियों को पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। बैराज को स्काडा तकनीक से स्वचालित रूप में संचालित करने की हो रही तैयारी  मुख्य अभियंता ने बताया कि मरम्मत और गेट प्रतिस्थापन कार्य को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए 8 मई से 15 जून तक कुल 45 दिनों की बंदी निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि गर्मी बढ़ने के कारण जल स्तर में गिरावट की संभावना को देखते हुए विभाग चौबीसों घंटे काम कर रहा है ताकि कार्य समय से पहले पूरा किया जा सके। इसके लिए इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों की विशेष टीम लगातार निगरानी कर रही है। बैराज को स्काडा तकनीक से स्वचालित रूप में संचालित करने की तैयारी की जा रही है। इससे बैराज के गेटों का संचालन डिजिटल माध्यम से किया जा सकेगा। जल स्तर की निगरानी, गेटों का नियंत्रण और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया जैसी व्यवस्थाएं अधिक प्रभावी बनेंगी। इससे मानवीय त्रुटियों में कमी आएगी और पूरी प्रणाली अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी होगी।

योगी सरकार की योजनाओं का गांव-गांव में दिख रहा असर, दुग्ध कारोबार के जरिए अवध क्षेत्र में बनीं 18 हजार लखपति दीदी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के गांवों में अब महिलाएं केवल घरेलू काम और पशुपालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक टेक्नोलॉजी और संगठित दुग्ध व्यापार के जरिए सीधे बाजार से जुड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए कीर्तिमान गढ़ रही हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ की योजनाओं और प्रशिक्षण मॉडल का असर यह है कि केवल अवध क्षेत्र में दुग्ध कारोबार से 18 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। योगी सरकार द्वारा तैयार किए गए पारदर्शी दुग्ध नेटवर्क के जरिए गांवों में कारोबार करने वालों को बिचौलियों से मुक्ति मिल गई है। अब दूध की गुणवत्ता जांच से लेकर भुगतान और बिक्री तक का पूरा हिसाब तकनीक के जरिए संचालित हो रहा है। मोबाइल एप और डिजिटल सिस्टम के माध्यम से महिलाएं गांव से ही सीधे बाजार व्यवस्था से जुड़ रही हैं। हाईटेक बन रहीं गांव की महिलाएं योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए दुग्ध क्षेत्र में बड़े स्तर पर योजनाएं लागू की गईं। अवध क्षेत्र में सवा लाख से अधिक महिलाओं को आधुनिक दुग्ध उत्पादन, गुणवत्ता प्रबंधन और डिजिटल भुगतान प्रणाली का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया गया है। महिला स्वामित्व वाली सामर्थ्या मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी के जरिए महिलाओं को कारोबार में तमाम सुविधाएं मिलने लगी हैं। महिला दुग्ध उत्पादकों को हर दस दिन में सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान किया जाता है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और ग्रामीण महिलाओं का भरोसा भी मजबूत हुआ है। बढ़ती आर्थिक ताकत और संगठित दुग्ध क्रांति का संकेत मात्र तीन वर्षों के भीतर सवा लाख से अधिक महिला सदस्य इस नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं। इनके माध्यम से प्रतिदिन लगभग चार लाख लीटर से ज्यादा दूध का संग्रहण किया जा रहा है। यह आंकड़ा गांवों में महिलाओं की बढ़ती आर्थिक ताकत और संगठित दुग्ध क्रांति का संकेत माना जा रहा है। दुग्ध उत्पादकों को रियल टाइम दूध बिक्री, गुणवत्ता और भुगतान से जुड़ी सूचनाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे गांवों में पारंपरिक दुग्ध कारोबार अब आधुनिक व्यवसाय मॉडल में बदलता दिखाई दे रहा है। लखपति दीदी मॉडल से बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था महिला स्वयं सहायता समूहों और दुग्ध समितियों के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है। दुग्ध व्यापार से जुड़ी महिलाएं अब अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ गांवों में रोजगार सृजन का भी माध्यम बन रही हैं। योगी सरकार की योजना गांव स्तर पर ऐसे नेटवर्क को और विस्तारित करने की है, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं तकनीक आधारित दुग्ध व्यापार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। योगी सरकार का यह मॉडल अब ग्रामीण महिला सशक्तीकरण और आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बनता जा रहा है।

लापरवाही और भ्रष्टाचार पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का सख्त एक्शन

 लखनऊ  उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लापरवाह और भ्रष्ट चिकित्सकों पर बड़ी कारवाई करते हुए पांच चिकित्साधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया। पीसीपीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन करने पर एडीएम की जांच में दोषी पाए गए अंबेडकरनगर के सीएमओ डॉ. संजय शैवाल एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के आदेश दिए गए हैं। हरदोई में संडीला के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने अवैध रूप से संचालित प्राइवेट अस्पतालों के संचालकों को बचाया। वरिष्ठ चिकित्साधिकारियों को नजरंदाज कर कनिष्ठों से काम लेने पर सीएमओ से जवाब-तलब किया गया है। लंबे समय से गैरहाजिर गोरखपुर जिला चिकित्सालय की डॉ. अलकनन्दा, कुशीनगर सीएमओ के अधीन डॉ. रामजी भरद्वाज, बलरामपुर सीएमओ के अधीन डॉ. सौरभ सिंह, अमेठी स्थिति जगदीशपुर सीएचसी के डॉ. विकलेश कुमार शर्मा व औरैया दिबियापुर सीएचसी की डॉ. मोनिका वर्मा को बर्खास्त किया गया है। प्रयागराज मेजा सीएचसी के अधीक्षक डॉ. शमीम अख्तर पर कोरांव सीएचसी अधीक्षक रहते हुए प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही पर विभागीय कार्यवाही एवं तबादला किये जाने के आदेश दिये गये हैं। सुल्तानपुर के लम्भुआ सीएचसी में महिला के इलाज में लापरवाही बरतने पर तत्कालीन अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह (वर्तमान तैनाती-सीएचसी कादीपुर), डॉ. धर्मराज, चिकित्साधिकारी एवं सीएचसी-लम्भुआ में तैनात फार्मासिस्ट अवधनारायण के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही होगी। मथुरा जिला चिकित्सालय में तैनात इमर्जेन्सी मेडिकल अफसर डॉ. देवेन्द्र कुमार एवं सर्जन डॉ. विकास मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने गलत मेडिकोलीगल बनाया। उन पर विभागीय अनुशासनिक कार्यवाही होगी। डिप्टी सीएम ने बलरामुर सीएमओ के अधीक्षक डॉ. अन्नू चन्द्रा, वाराणसी के पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय के डॉ. शिवेश जायसवाल, बदायूं जिला चिकित्सालय के डॉ. राजेश कुमार वर्मा, डॉ. अरुण कुमार, खीरी स्थित गोला सीएचसी के अधीक्षक डॉ. गणेश कुमार, संयुक्त चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं डा.अरविन्द कुमार श्रीवास्तव, संभल के जिला संयुक्त चिकित्सालय के डॉ. जानकीश चन्द्र शंखधर शामिल हैं। झांसी के मोठ ट्रामा सेंटर में आर्थोसर्जन डॉ. पवन साहू पर प्राइवेट प्रैक्टिस करने का आरोप सही पाए जाने पर दो वेतनवृद्धियां रोक दी गई हैं। बलरामपुर सीएमओ के अधीन डॉ. संतोष सिंह की चार, झांसी सीएमओ के अधीन डॉ. निशा बुन्देला की दो वेतनवृद्धियां रोकने के आदेश दिए गए हैं। हमीरपुर जिला महिला चिकित्सालय की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लालमणि पर आजमगढ़ में तैनाती के दौरान प्रसूताओं से वसूली एवं अभद्रता करने पर तीन वेतनवृद्धियां स्थायी रूप से रोकी गई हैं। स्टेट हेल्थ एजेन्सी, साचीज की ओर से संचालित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेश चिकित्सा योजना में प्रतिनियुक्ति पर तैनात डॉ. आदित्य पाण्डेय की प्रतिनियुक्ति समाप्त करते हुए उन्हें मूल तैनाती स्थल रायबरेली सीएमओ के अधीन भेजा गया है। लापरवाही बरतने के मामले में बहराइच महसी सीएचसी की डॉ. प्रतिभा यादव व मथुरा राल सीएचसी के डॉ. राकेश सिंह को परिनिन्दा का दंड दिया गया। बदायूं राजकीय मेडिकल कालेज में हड्डी रोग विभाग में तैनात सह-आचार्य डॉ. रितुज अग्रवाल द्वारा एक महिला चिकित्साधिकारी एवं एक अन्य चिकित्साधिकारी से गाली गलौज एवं अभद्रता किये जाने के मामले पर उन पर विभागीय कार्यवाही की गई है।