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अब हर वर्ष 25 जून से खुलेंगे परिषदीय विद्यालय, 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने की तैयारी

'शिक्षक सर्वोपरि' के मंत्र के साथ शिक्षा सुधारों को नई गति दे रही योगी सरकार, एसीएस ने रखा व्यापक रोडमैप – अब हर वर्ष 25 जून से खुलेंगे परिषदीय विद्यालय, 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने की तैयारी – यूट्यूब लाइव संवाद में लाखों शिक्षकों से जुड़े अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा, कक्षा कक्ष को बताया शिक्षा सुधारों का केंद्र – निपुण भारत मिशन का विस्तार कक्षा 5 तक, स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण में आउट ऑफ स्कूल बच्चों पर फोकस – 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा, 21 हजार नई भर्तियों की प्रक्रिया से शिक्षकों में उत्साह लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों का दायरा लगातार व्यापक होता जा रहा है। बुनियादी शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए सरकार शिक्षक सशक्तीकरण, छात्र नामांकन, अधिगम सुधार, स्वास्थ्य सुरक्षा और मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण पर एक साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने मंगलवार को यूट्यूब लाइव सत्र के माध्यम से प्रदेशभर के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स से संवाद करते हुए शिक्षा विभाग की आगामी कार्ययोजना और प्राथमिकताओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण बार-बार अवकाश बढ़ाने की स्थिति से बचने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप न्यूनतम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अब परिषदीय विद्यालय प्रत्येक वर्ष 25 जून से संचालित होंगे। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि विद्यालय खुलने पर बच्चों का आत्मीय स्वागत किया जाए तथा गर्मी को देखते हुए उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जाए। संवाद के दौरान पार्थ सारथी सेन शर्मा ने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक परिवर्तन का केंद्र कक्षा कक्ष है और शिक्षक उसकी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर बनाई गई योजनाओं की सफलता अंततः शिक्षक की प्रतिबद्धता और कक्षा में उसके कार्य से तय होती है। इसलिए शिक्षा सुधारों में शिक्षक की भूमिका सर्वोपरि है। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई से शुरू होने वाले स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण में विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान और नामांकन पर विशेष फोकस रहेगा। आशा कार्यकर्ताओं के जन्म रिकॉर्ड और स्थानीय स्तर की सूचनाओं की सहायता से ऐसे बच्चों तक पहुंच बनाई जाएगी। साथ ही कक्षा 5 से कक्षा 6 में विद्यार्थियों के निर्बाध प्रवेश को सुनिश्चित कर ड्रॉपआउट दर कम करने पर भी विशेष बल दिया जाएगा। नियमित उपस्थिति और सीखने में पीछे रह गए बच्चों के लिए कैच-अप शिक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि निपुण भारत मिशन का दायरा अब कक्षा 5 तक विस्तारित किया जा रहा है। भाषा, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन के लिए स्पष्ट अधिगम लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं। इसके लिए राज्य स्तर पर एसआरजी और डायट मेंटर्स का प्रशिक्षण प्रारंभ हो चुका है, जो आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। आगामी 6 जुलाई को आयोजित होने वाली निपुण संकल्प कार्यशाला में अकादमिक और प्रशासनिक तंत्र मिलकर निपुण जनपद बनाने का संकल्प लेगा। उन्होंने विद्यालयों में पुस्तकालयों, प्रिंट समृद्ध सामग्री और अभिभावक सहभागिता को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्ट को और अधिक प्रभावी बनाते हुए उसे वर्ष में दो बार अभिभावकों के साथ साझा करने की व्यवस्था की गई है। साथ ही विद्यालयों में ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड (DEAR)’ अभियान जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की भी बात कही गई। शिक्षकों के कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने सभी पात्र लाभार्थियों से समयबद्ध पंजीकरण कराने की अपील की। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों में लगभग 11 हजार शिक्षकों और 10 हजार अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की जानकारी भी दी। संवाद के अंत में उन्होंने शिक्षकों से अध्ययन और पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देने का आह्वान किया। मुंशी प्रेमचंद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि निरंतर अध्ययन ही बेहतर शिक्षण और व्यक्तित्व विकास का आधार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षकों की निष्ठा, प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता और समाज की सहभागिता के बल पर उत्तर प्रदेश बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में देश के लिए एक नया मॉडल स्थापित करेगा तथा प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त करेगा।

योगी सरकार का बड़ा कदम: BSB स्कूलों के छात्रों को मिलेगा मुख्यधारा से जुड़ने का मौका

छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता, बीएसबी से संबद्ध विद्यालयों को मुख्यधारा से जोड़ रही योगी सरकार – यू-डायस प्लस कोड आवंटन और विद्यालय श्रेणी उन्नयन की प्रक्रिया को मिली गति – छात्रों के शैक्षणिक अभिलेखों को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से जोड़ने की पहल – जिलों को आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की कार्रवाई समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक सक्षम और छात्र केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। शिक्षा सुधारों को संस्थागत मजबूती प्रदान करने और प्रत्येक विद्यार्थी को सुव्यवस्थित शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ने के क्रम में अब भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी), हरिद्वार से संबद्ध विद्यालयों के लिए यू-डायस प्लस कोड आवंटन तथा विद्यालय श्रेणी उन्नयन (स्कूल केटेगरी अपग्रेडेशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी निर्देशों के अंतर्गत संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। यह पहल विद्यार्थियों के शैक्षणिक अभिलेखों को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी शैक्षणिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उत्तर प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल प्रशासन, तकनीक आधारित अनुश्रवण और डेटा प्रबंधन को लगातार मजबूती दी जा रही है। यू-डायस प्लस जैसी व्यवस्थाओं के विस्तार से शिक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा रहा है। भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों को इस व्यवस्था से जोड़ने की पहल विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने, अभिलेखों के बेहतर प्रबंधन तथा शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों के लिए नवीन यू-डाइस प्लस कोड आवंटन तथा आवश्यकतानुसार विद्यालय श्रेणी उन्नयन की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, जिला विद्यालय निरीक्षकों तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन विद्यालयों के पास यू-डायस प्लस कोड उपलब्ध नहीं, उन्हें नवीन कोड आवंटित होंगे निर्देशों में कहा गया है कि जिन विद्यालयों के पास यू-डायस प्लस कोड उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें नवीन कोड आवंटित किए जाने की कार्रवाई की जाएगी, जबकि पूर्व से यू-डायस कोड प्राप्त विद्यालयों के लिए मान्यता के अनुरूप विद्यालय श्रेणी उन्नयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक अभिलेखों, आख्या और संस्तुति सहित प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सके। बीएसबी ने किया है नवीन कोड आवंटन तथा कक्षा उन्नयन संबंधी अनुरोध उल्लेखनीय है कि भारतीय शिक्षा बोर्ड, हरिद्वार द्वारा संचालित एवं संबद्ध विद्यालयों के लिए यू-डायस प्लस पोर्टल पर नवीन कोड आवंटन तथा कक्षा उन्नयन संबंधी अनुरोध प्राप्त हुए हैं। इसके दृष्टिगत शासन स्तर पर आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। विद्यालयों के यू-डायस प्लस प्रणाली से जुड़ने के बाद उनका शैक्षणिक डाटा राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली में व्यवस्थित रूप से समाहित हो सकेगा, जिससे नामांकन, शैक्षणिक प्रगति, परीक्षा संबंधी अभिलेखों तथा अन्य शैक्षिक प्रक्रियाओं का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित होगा।

नोएडा ने रचा नया इतिहास, देश की पहली स्मार्ट कचरा व्यवस्था शुरू; सफाई व्यवस्था होगी पूरी तरह हाईटेक

नोएडा  नोएडा प्राधिकरण शहर में कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए कई बड़े बदलाव करने जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है, ताकि वह सड़क पर किसी भी प्रकार का कचरा न फेंकें। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीकी से लैस कचरा पेटियों (डस्टबिन) की व्यवस्था की जाएगी। जैसे ही इन डस्टबिन में कचरा भर जाएगा, कंट्रोल रूम में घंटी बजने लगेगी। इससे प्राधिकरण का जन स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो जाएगा और कचरा कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह व्यवस्था देश में पहली बार नोएडा में लागू की जा रही है। प्रथम चरण में इसे सार्व जनिक शौचालयों पर लागू किया जाएगा। प्राधिकरण ने शहर में 320 सार्वजनिक शौचालयों की स्थापना की है, जो पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत संचालित हो रहे हैं। इस माॅडल की सराहना करते हुए मिनिस्ट्री आफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स (महुआ) ने अन्य नगर निगमों को भी इसे अपनाने की सलाह दी है। जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन डस्टबिन को शौचालयों के बाहर स्थापित किया जाएगा, जो जीपीएस और सेंसर से युक्त होंगे। इनकी मानिटरिंग इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर (आइसीसीसी) द्वारा की जाएगी, जहां डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की सभी गाड़ियों की निगरानी होती है। हालांकि नियमित डस्टबिन की सफाई और कचरा कलेक्शन का कार्य जारी रहेगा। यदि डस्टबिन में कचरा भर जाता है और कंट्रोल रूम पर घंटी बजती है, तो कचरा उठाने वाली गाड़ी मौके पर पहुंचकर डस्टबिन से कचरा हटा देगी। इससे सड़क पर कचरा फेंकने वालों को रोका जा सकेगा। शहर की जनसंख्या के अनुसार, वर्तमान में साढ़े छह लाख की आबादी के लिए डोर टू डोर कचरा कलेक्शन किया जा रहा था। नई जनगणना के अनुसार, लगभग पांच लाख मकान और 14.5 लाख की आबादी सामने आई है। इस बदलाव के चलते कचरा कलेक्शन के लिए नए नियमों के तहत कार्ययोजना बनाई जाएगी। कम से कम दो टेंडर जारी किए जाएंगे, जिससे गली, गांव, सेक्टर, सोसायटी और बाजारों में कचरा एकत्र करने का कार्य किया जाएगा। जनगणना के बाद शहर की स्थिति     नई जनगणना के हिसाब से करीब पांच लाख मकान     नई जनगणना के हिसाब से करीब आबादी 14.5 लाख     पुरानी जनगणना के हिसाब से करीब दो लाख मकान     पुरानी जनगणना के हिसाब से शहर की आबादी 6.5 लाख शहर में शौचालयों की स्थिति     पब्लिक टाॅयलेट : 117     कम्यूनिटी टाॅयलेट : 67     पिंक टाॅयलेट : 16     यूरिनल ब्लाॅक्स : 120     "तमाम फाइव स्टार व थ्री स्टार होटल्स में अत्याधुनिक शौचालय तैयार किए गए है, नोएडा में भी सड़क किनारे लग्जरी टायलेट की सुविधा उपलब्ध कराया जा रही है। ऐसे में अत्याधुनिक तकनीकी से लैस डस्टबिन को शौचालयों के बाहर लगवाजाएगा, जिसमें कचरा डालने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा। वैसे अधिकांश शौचालय उन्हीं जगहों पर बने है, जहां पर वेंडिंग जोन बाजार,आम जनमानस के आने जाने के पर्याप्त स्थान है।"     -इंदु प्रकाश सिंह, ओएसडी, नोएडा प्राधिकरण।  

मिर्जापुर में बनेगी भव्य गंगा पैड़ी! बलुआ लाल पत्थरों से संवरेगा घाट, काशी जैसा होगा नजारा

मिर्जापुर  उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में वाराणसी के काशी की तरह गंगा के किनारे 6 किलोमीटर निर्माण का निर्माण कराया जाएगा. पैड़ी के माध्यम से सभी गंगा घाट को एक किया जाएगा, जहां श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ख्याल रखते हुए घाटों का निर्माण कराया जाएगा. पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजा गया है।  प्रस्ताव मंजूर होने और धन आवंटन के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा. पैड़ी को विंध्याचल से मिर्जापुर तक जोड़ा जाएगा, इसमें लोगों के टहलने के साथी अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद रहेगी, जहां इसका लाभ आम लोग उठा सकेंगे. नए और अत्यधिक घाटों का निर्माण हो जाने के बाद न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. बल्कि, घाट के आसपास के लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।  50 फीट चौड़ी होगी पैड़ी लोक निर्माण विभाग के द्वारा विंध्याचल से फतहा गंगा घाट को जोड़ने के लिए 400 करोड रुपए की योजना तैयार की गई है. प्रस्तावित योजना के तहत 50 फीट चौड़ी पैड़ी का निर्माण काशी की तर्ज पर कराया जाएगा. यह करीब 6 किलोमीटर लंबा होगा, इससे मिर्जापुर से विंध्याचल के जितने भी गंगा घाट है, सभी एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे. वहीं, गंगा के तटीय क्षेत्र का विकास भी हो सकेगा. लोक निर्माण विभाग के द्वारा परियोजना शासन में भेज दिया गया है. परियोजना मंजूर होने के बाद काम शुरू किया जाएगा. प्रस्तावित योजना में लोगों के लिए मॉर्निंग वॉक और रोजगार व पर्यटन को बढ़ाने के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी।  मौजूद होगी सुविधाएं पैड़ी में घाट के किनारे रंग-बिरंगे फूलों को लगाया जाएगा. आराम करने के लिए बलुआ लाल पत्थरों से चबूतरे बनाए जाएंगे. ताकि, कोई आसानी से बैठकर आराम कर सके. पैड़ी के निर्माण को लेकर कुछ जगहों पर जमीन भी अधिग्रहित की जाएगी. सर्वे की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है. लोक निर्माण विभाग जमीन को अधिग्रहित करेगा. पैड़ी बन जाने के बाद मिर्जापुर के गंगा के तटीय इलाकों का विकास होगा. रोजगार के साथ सुबह टहलने के लिए समस्याएं खत्म होगी।  शासन को भेजा गया प्रस्ताव प्रांतीय लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार ने बताया कि गंगा के तट पर काशी के तर्ज पर पैड़ी का निर्माण किया जाना है. 400 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार करके शासन को भेजा गया है. 6 किलोमीटर लंबा और 50 मीटर चौड़े घाटों का निर्माण कराया जाएगा. परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद घाटों के निर्माण का काम तेजी के साथ किया जाएगा। 

कानपुर में कोचिंग सेंटरों पर छापा: 26 प्रतिष्ठान सील, सुरक्षा नियमों पर सख्त कार्रवाई

लखनऊ लखनऊ में आग की घटना के बाद हरकत में आए केडीए ने समूचे शहर में अवैध बेसमेंट, बेसमेंट में हो रहे नियम विपरीत व्यावसायिक कार्य और अग्निशमन संयंत्रों के बिना संचालित किए जा रहे प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की। लखनऊ अग्निकांड के बाद जागी सरकारी मशीनरी ने सोमवार की शाम से ही शहर में छापेमारी जारी रखी है। मंगलवार को भी दोपहर बाद तक 10 और कोचिंग सेंटरों को सील कर दिया गया। इसके साथ ही 20 और कोचिंग सेंटर कार्रवाई के लिए चिन्हित किए गए हैं। कानपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अंकुर कौशिक के निर्देश पर यह अभियान चल रहा है। सोमवार को भी 16 कोचिंग सेंटर सील किए गए थे। अब तक इसकी संख्या 26 पहुंच चुकी है। दूसरी ओर पुलिस कमिश्नर ने कोचिंग सेंटर संचालकों के साथ बैठक की है, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने के आसार हैं। सूत्रों के मुताबिक शहर के अधिकांश कोचिंग सेंटर बंद कर दिए गए हैं। कुछ सेंटरों में अग्नि शमन से जुड़ी सेवाएं शुरू की जा रही हैं। जिन कोचिंग सेंटर में क्लासेस चल रहे थे उनमें से छात्र-छात्राओं को पहले बाहर किया गया उसके बाद विकास प्राधिकरण द्वारा सील लगाई गई। इस दौरान विकास प्राधिकरण के सचिव अभय कुमार पांडेय ने बताया कि छात्र-छात्राओं की जन की सुरक्षा के लिए ही यह कदम उठाए गए हैं। अग्निशमन सुरक्षा संबंधी उपकरण और इंतजाम करने के बाद सेंटरों से सील हटाई जा सकती है। सोमवार को कोचिंग सेंटरों समेत 16 प्रतिष्ठान सील सोमवार को भी कानपुर में कोचिंग सेंटर समेत 16 प्रतिष्ठानों को सील कर दिया। इसके साथ ही अन्य प्रतिष्ठानों को भी कार्रवाई के लिए चिह्नित किया गया है। शासन के निर्देश पर केडीए उपाध्यक्ष अंकुर कौशिक ने सभी प्रवर्तन जोन के प्रभारियों को निर्देश दिया कि तत्काल जोन में जाएं और नियमों के विपरीत संचालित प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करें। इसमें कोचिंग संस्थान, गेमिंग सेंटर और काम्प्लेक्स में संचालित शो रूम को भी सूचीबद्ध किया गया। इससे पहले दिल्ली में आग की घटना के बाद भी केडीए ने अभियान चलाया था और प्रतिष्ठानों की सूची तैयार की थी। ऐसे में अभियान चलाने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। सोमवार को केडीए सबसे पहले बड़े कोचिंग सेंटरों पर धावा बोला। विद्यापीठ, फिजिक्स वाला, संजीव राठौर कोचिंग सेंटर, फिजिक्स स्टाइल ऑफ विवेक और अंकित सर क्लासेज के कोचिंग सेंटर को सील किया। केडीए के विधि, जनसंपर्क अधिकारी एवं ओएसडी सत शुक्ला के मुताबिक प्रवर्तन जोन-1ए में तीन, जोन-2बी में पांच, जोन-3 में तीन तथा जोन-4 में पांच प्रतिष्ठानों के विरुद्ध सीलबंदी की कार्यवाही की गई।

अयोध्या राम मंदिर दान जांच: गृह विभाग को सौंपी गई रिपोर्ट, दोषियों पर कार्रवाई की सिफारिश

अयोध्या अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। एसआईटी के प्रमुख सदस्य एवं लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने मंगलवार को टीम के अन्य दो सदस्यों के साथ अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को यह प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। जांच में मंदिर ट्रस्ट के कई अधिकारी और कर्मचारी प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की गई है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। बताया जा रहा है कि शाम को प्रारंभिक रिपोर्ट को सीएम योगी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। अयोध्या में राम मंदिर दान के वित्तीय प्रबंधन में कथित हेराफेरी की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को अपर मुख्‍य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को अपनी प्रारंभिक प्रतिवेदन रिपोर्ट सौंप दी। जांच दल का नेतृत्व कर रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और दान राशि से संबंधित आरोपों की जांच के लिए 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। अधिकारियों ने बताया था कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एसआईटी गठित की गई। यह दल तीर्थ क्षेत्र में दान पात्रों के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों की जांच कर सरकार को अपनी रिपोर्ट देगा। योगी ने किया था एसआईटी का गठन एसआईटी में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी तथा लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी व पुलिस महानिरीक्षक किरन एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। अयोध्या स्थित तीर्थ क्षेत्र में दानपात्रों को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को गंभीरता से लेते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल गठित किए जाने का अनुरोध किया था।ट्रस्ट के अनुसार, अफवाहों पर रोक लगाने और मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए इसकी गहन जांच आवश्यक है। यह तीर्थ क्षेत्र की छवि और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचाने की गहरी साजिश है, जिसका पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है। अयोध्या में क्या बोले थे योगी इस मामले की शुरुआत सात जून को हुई जब समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कुछ तथ्यों का हवाला देते हुए मंदिर के दान में गबन का मामला उठाया और इसमें न्यायिक संज्ञान लेने की अपील की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल में अपनी अयोध्‍या यात्रा में यह दावा किया था कि इस जांच में एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी करेगी। उन्होंने राम भक्तों से कहा कि पांच सौ वर्षों तक इंतजार किया और 15 दिन और इंतजार करके देख लो।

अतीक-अशरफ से जुड़ी संपत्तियों पर शिकंजा, शिकायतों के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई

प्रयागराज पी के संगमनगरी प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके करीबियों की कथित बेनामी संपत्तियों की जांच के लिए पुलिस ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है। यह कार्रवाई अधिवक्ता केपी श्रीवास्तव की शिकायत के बाद की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अतीक अहमद और उसके परिजनों ने अपने करीबी मदन लाल भारतीया के नाम पर धूमनगंज क्षेत्र में कई संपत्तियां खरीदी थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधिकारियों ने संपत्तियों की जांच कर आवश्यक विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एसआईटी में पुलिस उपायुक्त नगर मनीष कुमार शांडिल्य, एडीएम सिटी सत्यम मिश्र, अपर नगर आयुक्त अरविंद राय, एआईजी स्टाम्प राकेश चंद्रा और पीडीए सचिव विनीत कुमार सिंह को शामिल किया गया है। टीम को संबंधित संपत्तियों के बारे में गोपनीय एवं प्रामाणिक जानकारी जुटाने, दस्तावेजों की जांच करने तथा अवैध रूप से अर्जित संपत्तियां मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आदेश के अनुसार एसआईटी को तीन दिन के भीतर जांच शुरू करनी होगी। साथ ही टीम को प्रत्येक सोमवार को संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट अपर पुलिस आयुक्त को देनी होगी। माना जा रहा है कि अतीक अहमद से जुड़े आर्थिक नेटवर्क और बेनामी संपत्तियों के खिलाफ चल रहे अभियान में यह कार्रवाई महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हर दूसरी शिकायत में है नाम 15 अप्रैल 2023 की रात भले ही माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की मौत हो चुकी हो, लेकिन आज भी शहर में लोग उसके नाम और कारनामों से परेशान हैं। माफिया ने अपने जीवन में इतनी जमीनों पर कब्जा किया कि आज भी हर दूसरी शिकायत में उसका नाम आता है। लोग कभी अतीक तो कभी अशरफ और कभी उसके गुर्गों से खुद के परेशान होने की शिकायत कर रहे हैं। अफसर इस बात को लेकर त्रस्त हैं कि इस माफिया के अपराध की जड़े कितनी गहरी थीं कि मौत के तीन साल बाद भी उसके निशान मिट नहीं रहे हैं। 100 में से 40 से 50 शिकायतें अतीक-अशरफ के नाम सबसे ज्यादा मामले सदर तहसील की जनसुनवाई में आते हैं। हर दिन आने वाली 100 शिकायतों में 40 से 50 जमीन, संपत्ति कब्जे की शिकायतों में माफिया अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ का नाम रहता है। विशेषकर करेली, करैलाबाग, कटुहला, गौसपुर, रसूलपुर समेत अन्य क्षेत्रों के हर मामले में ही उसका नाम रहता है। गंभीरता से होती है जांच जिन शिकायतों पर अतीक और अशरफ का नाम आता है, उसकी जांच भी बहुत अधिक गंभीरता से होती है। कई शिकायतों की जांच में बात में सच्चाई भी होती है। अफसरों का कहना है कि माफिया की मौत के बाद उससे परेशान लोग अब धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। अभी गौसपुर कटहुला में ही पांच बीघा जमीन पर माफिया के गुर्गों ने कब्जा किया था। ऐसे मामलों की सूची बन रही है।

पुराने लखनऊ को राहत: 7 नए सबस्टेशन और 100 फीडर से खत्म होगी बिजली समस्या

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। पुराने लखनऊ के लोगों की समस्याएं दूर होंगी। पुराने लखनऊ की बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 550 करोड़ रुपये का प्लान तैयार किया गया है। आरडीएसएस योजना के तहत वर्ष 2031 तक की बिजली जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 07 नए उपकेंद्र व 01 नया पावर ट्रांसमिशन सबस्टेशन बनाया जाएगा। इसके अलावा 100 नये फीडर बनेंगे। इससे लगभग 10 लाख आबादी को बिजली कटौती व लो-वोल्टेज से निजात मिलेगी। 20-20 एमवीए लोड के बिजली उपकेंद्र बनेंगे लेसा के लखनऊ सेंट्रल जोन के राजाजीपुरम, अपट्रॉन, ऐशबाग, ठाकुरगंज, चौक, रेजीडेंसी, राजभवन, हुसैनगंज, अमीनाबाद क्षेत्र में बेहतर बिजली सप्लाई के लिए सात नये उपकेंद्रों का निर्माण होगा। इसमें तालकटोरा में दो उपकेंद्र बनेंगे। इसके अलावा ऐशबाग, मलपुर (राजाजीपुरम), राजेन्द्र नगर, अर्जुनगंज, बालागंज में एक-एक उपकेंद्र बनेंगे। सभी 20-20 एमवीए लोड के बिजली उपकेंद्र बनेंगे। पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता में वृद्धि पुराने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए क्षेत्र के 11 मौजूदा उपकेंद्रों के पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाई जाएगी। इनमें प्रमुख रूप से हरिहरपुर, अर्जुनगंज, जवाहर भवन, हनुमान सेतु, यूपीआईएल, नूरबाड़ी, अपट्रॉन, आरडीएसओ, ऐशबाग, विधानसभा मार्ग और बालाघाट शामिल हैं। इसके अलावा 33 केवी और 11 केवी की नई लाइन बिछाई जाएगी। नई एलटी लाइन निर्माण में इंसुलेटेड कंडक्टर लगाई जाएगी। 100 नए फीडर से सुधरेगी सप्लाई ओवरलोडिंग की समस्या को खत्म करने के लिए कुल 100 नए फीडर बनाए जाएंगे। मुख्य अभियंता के अनुसार, 07 नए उपकेंद्रों के बनने से 70 नए फीडर तैयार होंगे, जबकि पुराने उपकेंद्रों में 30 अतिरिक्त फीडर जोड़े जाएंगे। इसके अलावा, तालकटोरा में बनने वाले ट्रांसमिशन सबस्टेशन से 14 उपकेंद्रों के लिए नई बिजली लाइनें भी बिछाई जाएंगी। ऐसा होने इलाके बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल जाएगी। इलाके की बिजली व्यवस्था बेहतर हो जाएगी। दरअलस, लो वोल्टेज और बिजली कटौती की समस्या से उपभोक्ता जूझ रहे। बिजली व्यवस्था बेहतर होने से लोगों को समस्याओं से निजात मिल जाएगी। इलाके के लोगों को भरपूर बिजली मिलने लगेगी। लो-वोल्टेज की समस्या भी खत्म हो जाएगी। ओवरलोडिंग की समस्या भी खत्म हो जाएगी। मध्यांचल निगम को जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा लखनऊ सेंट्रल मुख्य अभियंता रवि अग्रवाल ने बताया कि आरडीएसएस योजना के तहत वर्ष 2031 तक बेहतर बिजली सप्लाई के लिए पुराने लखनऊ में 07 बिजली उपकेंद्रों का निर्माण होगा। इसके अलावा 11 उपकेंद्रों में पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि होगी। साथ ही 100 नये फीडर बनेंगे। मध्यांचल निगम को जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा।

नए सत्र के लिए बेसिक शिक्षा विभाग तैयार, 220 दिन की पढ़ाई और निपुण अभियान का होगा विस्तार

लखनऊ  ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 25 जून से नियमित पठन-पाठन शुरू होगा। नए शैक्षिक सत्र में केवल विद्यालय खोलने की औपचारिकता नहीं, बल्कि हर बच्चे के सीखने के स्तर में सुधार, उसकी व्यक्तिगत जरूरतों की पहचान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने मंगलवार को यूट्यूब संवाद के माध्यम से शिक्षकों, बेसिक शिक्षा अधिकारियों और राज्य व जिला स्तरीय रिसोर्स पर्सन को यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गर्मी को देखते हुए सुबह 10 बजे के बाद बच्चों की आउटडोर गतिविधियां नहीं कराई जाएं। विद्यालयों में ऐसा मित्रवत माहौल बनाया जाए, जहां बच्चे खुलकर अपनी बात रख सकें और शिक्षक उनके मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। स्कूल चलो अभियान का दूसरा चरण भी शुरू किया जाएगा। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तीन वर्ष के बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें बाल वाटिका से जोड़ेंगी, जबकि छह वर्ष या उससे अधिक आयु के बच्चों का विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा। शिक्षकों को कक्षा पांच से छह में बच्चों के सुचारु प्रवेश और संक्रमण काल को सहज बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार पढ़ाई होगी। जो बच्चे अपेक्षित सीखने के स्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं, उनके लिए कैच-अप ट्रेनिंग चलाकर विशेष सहयोग दिया जाएगा। शिक्षकों को बच्चों का लगातार आकलन कर नियमित फीडबैक देने और बेहतर कक्षा शिक्षण पद्धतियां अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यालयों में पढ़ने की संस्कृति विकसित करने के लिए बच्चों को पुस्तकालय से पुस्तकें जारी की जाएंगी और प्रतिदिन कम से कम आधे घंटे पठन गतिविधि कराई जाएगी। बच्चों को लेखन, कला और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों में भागीदारी के अवसर भी दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 22 जून से विद्यालय प्रशासनिक कार्यों के लिए खुल चुके हैं, जबकि 25 जून से नियमित शिक्षण शुरू होगा। यह व्यवस्था आगामी वर्षों में भी लागू रहेगी। वर्ष में कम से कम 220 दिन पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी और यह भी देखा जाएगा कि वास्तविक शिक्षण कितने घंटे हुआ। निपुण अभियान का विस्तार अब कक्षा एक और दो से आगे बढ़ाकर कक्षा एक से पांच तक किया जाएगा। बच्चों के भाषा और गणित के बुनियादी कौशल विकसित करने के लिए हिंदी, अंग्रेजी और गणित के सरल निपुण लक्ष्य तय किए जा रहे हैं। राज्य स्तरीय रिसोर्स पर्सन (एसआरपी) का प्रशिक्षण छह जुलाई से शुरू होगा, जबकि नवंबर-दिसंबर में निपुण आकलन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि एसआरपी, एसआरजी और मेंटर शिक्षक केवल निरीक्षण या चेकलिस्ट भरने तक सीमित न रहें, बल्कि शिक्षकों के साथ संवाद कर उनकी शैक्षणिक कमियों को दूर करने में सहयोग करें। उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के अनुभवों को शिक्षा संकुलों में साझा किया जाएगा। शिक्षक दीक्षा पोर्टल, आइ-गाट प्लेटफार्म और ‘द टीचर ऐप’ के माध्यम से प्रशिक्षण सामग्री, लेसन प्लान और एनसीईआरटी की गाइडलाइन का अध्ययन कर अपने शिक्षण को बेहतर बना सकते हैं। साथ ही अभिभावकों और समुदाय से संवाद मजबूत करें। उन्होंने शिक्षकों से स्वयं पढ़ने की आदत विकसित करने, समय प्रबंधन सीखने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की अपील की। मुंशी प्रेमचंद का उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षक समाज निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं और सकारात्मक सोच के साथ हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।  

प्लाईवुड उद्योग को बढ़ावा देने की तैयारी, योगी सरकार नई एग्रोफॉरेस्ट्री नीति पर कर रही विचार

योगी सरकार प्लाईवुड उद्योग के लिए नई एग्रोफॉरेस्ट्री नीति पर कर रही विचार प्लाईवुड उद्योग के लिए उत्तर प्रदेश ने खोले विकास के नए द्वार देशभर से आए लगभग 100 प्लाईवुड उद्योग प्रतिनिधियों ने लखनऊ और हरदोई में निवेश संभावनाओं को तलाशा  ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार, 36 से अधिक सेक्टोरल नीतियां और आकर्षक प्रोत्साहन निवेशकों को दे रहे नई गति : दीपक कुमार लखनऊ  योगी सरकार उद्योग-अनुकूल नीतियों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों, विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना और निवेशकों के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के साथ देश के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रही है। इसी क्रम में सोमवार को लखनऊ स्थित इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में पश्चिम बंगाल, हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक और पंजाब सहित विभिन्न राज्यों से आए लगभग 100 प्लाईवुड उद्योग प्रतिनिधियों एवं संभावित निवेशकों के साथ उच्चस्तरीय निवेश संवाद आयोजित किया गया। इसमें उठाए गए सभी सुझावों और मुद्दों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखा जाएगा ताकि उन पर शीघ्र अमल हो।  बैठक में उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, निवेश के लिए तैयार आधारभूत संरचना, सरल अनुमोदन प्रक्रियाओं तथा प्लाईवुड एवं संबद्ध उद्योगों में उपलब्ध निवेश अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई। वरिष्ठ अधिकारियों ने उद्योग प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद कर उद्योग वृद्धि के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने कहा कि राज्य सरकार प्लाईवुड एवं एग्रोफॉरेस्ट्री उद्योग के लिए प्रतिस्पर्धी और भविष्य उन्मुख पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहाकि उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र के लिए एक समर्पित नीति तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। हम पड़ोसी राज्यों की नीतियों का भी अध्ययन करेंगे ताकि प्लाईवुड और एग्रोफॉरेस्ट्री उद्योग के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी एवं उद्योग-अनुकूल ढांचा विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लिए गठित की जाने वाली समिति में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे नीतिगत निर्णय व्यावहारिक अनुभवों और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप लिए जा सकें। इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरन आनंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश निरंतर सुधारों, सक्रिय निवेश सुविधा तंत्र और मजबूत औद्योगिक आधार के कारण देश के सबसे प्रतिस्पर्धी निवेश स्थलों में उभरकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि राज्य की 36 से अधिक सेक्टोरल नीतियां, पूंजीगत सब्सिडी, भूमि आधारित प्रोत्साहन और रोजगार सहायता योजनाएं निवेशकों को विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार के लिए व्यापक और भविष्य उन्मुख अवसर प्रदान कर रही हैं।उन्होंने बताया कि राज्य शीघ्र ही उपलब्ध भूमि बैंक से चार से पांच औद्योगिक क्लस्टरों की पहचान कर उन्हें क्लस्टर आधारित विकास के लिए आरक्षित करेगा। साथ ही यदि निवेशकों को भूमि बैंक से अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी तो राज्य सरकार भूमि उपलब्ध कराने और छह माह के भीतर उसका आवंटन सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी। प्लाईवुड फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने इस उद्योग को कृषि, विनिर्माण और ग्रामीण आजीविका से जुड़ा बहुआयामी क्षेत्र बताते हुए ओडीओपी की तर्ज पर “वन इंडस्ट्रियल पार्क” मॉडल विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने एग्रोफॉरेस्ट्री आधारित उद्योगों के लाइसेंस, वन नियमों, प्रदूषण मानकों, दंडात्मक प्रावधानों और एनओसी से जुड़ी चुनौतियों को भी रेखांकित किया तथा एग्रो आधारित उद्योगों के लिए पृथक नीति बनाने का प्रस्ताव रखा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपक कुमार ने कहा, “उद्योग जगत द्वारा उठाए गए सभी सुझावों और मुद्दों को हम गंभीरता से आगे बढ़ाएंगे तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखकर उद्योग-अनुकूल और व्यावहारिक समाधान तलाशेंगे।” बैठक में इन्वेस्ट यूपी की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीमती प्रेरणा शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम के अंतर्गत निवेशक प्रतिनिधिमंडल 23 जून को हरदोई जिले के संडीला क्षेत्र का दौरा करेगा, जहां वे भूमि उपलब्धता, आधारभूत संरचना और औद्योगिक विकास की संभावनाओं का आकलन करेंगे। इस पहल से नए निवेश आकर्षित होने, रोजगार सृजन बढ़ने और उत्तर प्रदेश के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।