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शोक प्रस्ताव के समय यूपी विधायक का मोबाइल बजा, स्पीकर महाना ने तुरंत जब्त किया

लखनऊ  यूपी विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में शोक प्रस्ताव पास हुआ। विधायक का मोबाइल एक-दो बार बजा जिसे विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन की कार्यवाही में व्यवधान माना। स्पीकर महाना ने सदन में मार्शल टीम के सदस्य को इशारा किया। महाना ने कहने पर विधायक चौधरी बाबू लाल का फोन जब्त कर लिया गया। दरअसल, विधान सभा और विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान मोबाइल इस्तेमाल करने की मनाही है। अगर मोबाइल सदन के भीतर लाया जाए तो उसे साइलेंट मोड में हो लाना होता है। इसके अतिरिक्त तब भी सदन की कार्यवाही के दौरान लगातार मोबाइल इस्तेमाल करने की भी मनाही है। मंगलवार को दूसरे दिन भाजपा विधायक प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल और सपा विधायक विजय सिंह गौड़ के निधन पर शोक प्रस्ताव पास हुआ। इसके बाद विधानसभा की कार्यवाही कल 11 बजे तक स्थगित कर दी है। मुख्यमंत्री योगी समेत सभी दल के नेताओं ने अपने विचार रखे। प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल का निधन 2 जनवरी को हुआ था। बरेली की फरीदपुर सीट से दूसरी बार निर्वाचित हुए थे। वह मिलनसार, शिक्षित और जमीन से जुड़े नेता थे। समाज के सभी तबके के विकास के लिए समर्पित रहे। अपने क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं बढ़ावाएं। इतिहास संकलन समिति बरेली और जेएनयू की कार्यसमिति के भी सदस्य थे। उनके निधन से कुशल नेता खो दिया है। 8 जनवरी को हुआ था विजय सिंह गौड़ का निधन वहीं विजय सिंह गौड़ का निधन 8 जनवरी को हुआ था। वे वरिष्ठ सदस्य थे।आठवीं बार निर्वाचित हुए थे। विधानसभा की अनेक समितियों के सदस्य थे। जनजातीय समाज की सशक्त आवाज थे। जनता के और समाज के जन जंगल और जमीन के अधिकार को सदैव प्राथमिकता दी। आदिवासी विकास परिषद के भी सदस्य थे। उनके निधन से समाज की अपूरणीय क्षति हुई है। वहीं नेता प्रतिपक्ष् माता प्रसाद पांडेय ने भी दुख जताया। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल जी चले गए। जब मनुष्य आता है तब ही तय हो जाता है की जाना है। सामयिक मृत्य तब होती है जब व्यक्ति अपना पूरा काम करके जाता है जबकि असामयिक मृत्य तब होती है जब वह अधूरा काम छोड़ जाता है। इनके जाने से विधासभा उनकी जानकारी और ज्ञान से वंचित रह गई है। विजय सिंह गौड़ हमारे साथ 1980 में चुनकर आए थे। राजनीतिक चमक दमक से दूर रहते थे। जब पांच बार के विधायकों को सम्मानित किया जा रहा था तब उन्होंने इसे गैरजरूरी बताते हुए उसमें हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था। राम निवास वर्मा ने कहा कि इतिहास के क्षेत्र में उनका विशेष योगदान रहा। लगातार दो बार वह फरीदपुर से निर्वाचित हुए। उनके निधन से हुई रिक्ति की भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है। विजय सिंह गौड़ के निधन पर अपनी संवेदनाएं भारी मन से व्यक्त करता हूं। उन्होंने जनसेवा के लिए स्वयं को समर्पित किया।वह विशेष रूप से आदिवासी समाज के विकास के लिए प्रयत्नशील रहे। राजनीति को उन्होंने सेवा का माध्यम बनाया। शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना। श्याम बिहारी लाल को दी श्रद्धांजलि राजपाल सिंह बालियान ने कहा कि श्याम बिहारी लाल का असामयिक निधन बेहद दुखद है। उनके निधन से प्रदेश ने कुशल राजनीतिक और समाजसेवी खो दिया है। आत्म की शांति की कामना और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना है। विजय सिंह गौड़ का असामयिक निधन दुखद है। इनका राजनीति में काफी अनुभव था। 18वीं विधानसभा के उपचुनाव में सदस्य निर्वाचित हुए थे। निधन से कुशल राजनीतिक और समाजसेवी खो दिया है। दिवंगत आत्मा की शांति की कामना है। ओपी राजभर ने भी प्रोफेसर लाल और विजय सिंह को श्रद्धांजलि दी। आराधना मिश्रा मोना ने भी विनम्र श्रद्धांजलि दी। उनका निधन अपूरणीय क्षति है। दो बार सदन के सदस्य रहे। उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं को गंभीरता से उठाया है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि आत्मा को शांति और शोकाकुल परिवार को धैर्य दे। विजय सिंह गौड़ मुलायम सिंह मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री थे सतीश महाना ने कहा कि समाज सेवा, अध्ययन और अध्यापन में प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल की विशेष रुचि थी। विजय सिंह गौड़ मुलायम सिंह मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री थे। वह विभिन्न आंदोलनों में जेल भी गए। उनके निधन से कुशल राजनीतिक और समाजसेवी खो दिया है। पूरा सदन शोकाकुल है। दोनों की आत्माओं को शांति और शोकाकुल परिवारों को संवेदनाएं। दोनों परिवारों को सदन की ओर से संवेदनाएं प्रेषित की जाएंगी।

आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को EPF की राहत, विधान परिषद में गूंजा मुद्दा

लखनऊ उत्तर प्रदेश विधान परिषद में मंगलवार को भारतीय जनता पाटर्ी (भाजपा) के एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने नियम 115 के अंतर्गत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन से की जा रही ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) कटौती की राशि कर्मचारियों के खातों में अनिवार्य रूप से जमा कराए जाने की मांग उठाई। उन्होंने इस विषय को लोक महत्व का बताते हुए सरकार का ध्यान आकृष्ट किया। आउटसोर्सिंग सेवा निगम बनाए जाने का निर्णय एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने कहा कि राज्य में आउटसोर्सिंग के आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आउटसोर्सिंग सेवा निगम बनाए जाने का निर्णय लिया गया है, जिसकी पूरे प्रदेश में सराहना हो रही है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का शोषण आम बात थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक पहल की है। कर्मचारियों के खातों में जमा नहीं हो रही थी ईपीएफ की राशि उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश के कई हिस्सों से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ की कटौती तो नियमित रूप से की जा रही है, लेकिन संबंधित धनराशि कर्मचारियों के खातों में जमा नहीं हो रही है। इस स्थिति से कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है और वे लगातार संबंधित विभागाध्यक्षों से शिकायत कर रहे हैं। कर्मचारियों की मूल समस्या का अब होगा समाधान विजय बहादुर पाठक ने सदन को अवगत कराया कि विभागीय अधिकारी अक्सर ठेकेदारों और सेवा प्रदाता कंपनियों पर जिम्मेदारी डालकर मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं। कई स्थानों पर यह विषय आंदोलन का रूप ले चुका है और कहीं-कहीं ठेकेदार या एजेंसी बदल दी जाती है, लेकिन कर्मचारियों की मूल समस्या जस की तस बनी रहती है।  कर्मचारियों के खाते में अब पूरी राशि समय से जमा होगी उन्होंने बताया कि बरेली, गाजियाबाद, आगरा, कानपुर, वाराणसी सहित कई नगर निगमों से इस तरह की शिकायतें सामने आई हैं। लखनऊ नगर निगम में तो कर्मचारियों ने लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनकी ईपीएफ राशि एजेंसी, ठेकेदार और नगर निगम अधिकारियों की मिलीभगत से हड़पी जा रही है। एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने सरकार से मांग की कि इस गंभीर और तात्कालिक लोक महत्व के विषय पर ठोस कारर्वाई करते हुए ऐसी सुनिश्चित व्यवस्था की जाए, जिससे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन से की जाने वाली ईपीएफ कटौती की पूरी राशि समय से उनके खातों में जमा हो सके।

योगी सरकार में दिव्यांगजन पेंशन तीन गुना से अधिक बढ़ी, कोई भी पात्र वंचित नहीं

लखनऊ.   योगी सरकार ने दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण को सामाजिक न्याय की धुरी बनाते हुए पेंशन, सहायता योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में ऐतिहासिक सुधार किए हैं। सरकार की पारदर्शी, ऑनलाइन और समयबद्ध व्यवस्था के चलते आज प्रदेश में कोई भी पात्र दिव्यांगजन सरकारी योजनाओं से वंचित नहीं है। विधानपरिषद में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने स्पष्ट किया कि योगी सरकार में दिव्यांगजनों के लिए धन की कोई कमी नहीं है और जो भी पात्र है, उसे शत-प्रतिशत लाभ मिलेगा। तीन गुना से अधिक बढ़ी दिव्यांगजन पेंशन, सीधा खाते में भुगतान मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने सदन को अवगत कराया कि वर्ष 2017 से पूर्व दिव्यांग पेंशन मात्र 300 रुपये  प्रतिमाह थी, जिसे योगी सरकार ने बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। यह पेंशन पात्र लाभार्थियों के खातों में पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से सीधे हस्तांतरित की जाती है, जिससे किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहती। यूडीआईडी कार्ड से लेकर पेंशन तक पूरी तरह ऑनलाइन व्यवस्था उन्होंने बताया कि भारत सरकार के स्वावलंबन पोर्टल के माध्यम से यूडीआईडी कार्ड जारी किए जाते हैं। आकांक्षी जनपद सिद्धार्थनगर में 31 जनवरी 2026 तक 24,414 दिव्यांगजनों को यूडीआईडी कार्ड जारी किए जा चुके हैं। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 14,356 पात्र दिव्यांगजनों को पेंशन, 153 कुष्ठावस्था पेंशन और 321 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। 31 दिसंबर 2025 तक कोई भी पात्र लाभार्थी लंबित नहीं है। पात्रता के आधार पर लाभ, यूडीआईडी कार्ड से स्वतः पेंशन नहीं मंत्री कश्यप ने स्पष्ट किया कि यूडीआईडी कार्ड धारक सभी दिव्यांगजन स्वतः पेंशन के पात्र नहीं होते। पेंशन के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता, ग्रामीण क्षेत्र में 46,080 रुपये और शहरी क्षेत्र में 56,460 रुपये से कम वार्षिक आय तथा अन्य किसी पेंशन योजना का लाभ न लेना अनिवार्य है। आवेदन एकीकृत सामाजिक पेंशन पोर्टल पर ऑनलाइन किया जाता है, जिसकी जांच जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी द्वारा की जाती है। दलालों और भ्रष्टाचारियों के लिए कोई जगह नहीं मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने दो टूक कहा कि विभाग में दलालों और भ्रष्टाचारियों के लिए कोई स्थान नहीं है। यदि किसी स्तर पर शिकायत मिलती है तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जो दिव्यांगजन स्वयं कार्यालय नहीं आ सकते, उनके घर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी कराई जाए। विशेष विद्यालयों और पदोन्नति प्रक्रिया पर भी सदन को दी जानकारी उन्होंने बताया कि दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के विशेष विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में चयनित शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़े प्रस्ताव उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजे जा चुके हैं और इस पर कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। मंत्री कश्यप ने यह भी स्पष्ट किया कि वितरण कार्यक्रमों में वरिष्ठ एवं कनिष्ठ सभी जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाना अनिवार्य है।

सिंचाई व्यवस्था का हो रहा सुदृढ़ीकरण, 74.33 करोड़ रुपये की लागत से 7 नई ड्रेनेज परियोजनाओं का होगा निर्माण

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। जल प्रबंधन को बेहतर बनाने, बाढ़ की समस्या को कम करने और किसानों की आय में बढ़ोतरी के उद्देश्य से ड्रेनेज व्यवस्था के विस्तार और ड्रेनों की नियमित सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस क्रम में वित्तीय वर्ष 2025-26 में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग विभिन्न जनपदों में 7 नई ड्रेन परियोजनाओं का निर्माण करा रहा है। साथ ही जल प्रबंधन और खेतों तक सुचारू रूप से जल की पहुंच को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 17,500 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बहराइच, बिजनौर, गोण्डा, हापुड़ और मेरठ में बन रही हैं 7 नई ड्रेन वित्तीय वर्ष 2025-26 में सिंचाई व्यवस्था के विस्तार के उद्देश्य से विभिन्न जनपदों में 7 नई ड्रेन परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें गोण्डा, हापुड़ और मेरठ में एक-एक ड्रेन परियोजना को मंजूरी दी गई है, जबकि बिजनौर और बहराइच में दो-दो ड्रेन परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। जिन पर कुल 74.33 करोड़ रुपये की धनराशि व्यय करने की स्वीकृति मिली है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से संबंधित क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था सुदृढ़ होगी और किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हर खेत को पानी के विजन को साकार करने में मजबूती मिलेगी। मार्च 2026 तक पूरा होगा ड्रेनों की सफाई का कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक सफाई का कार्य भी नियमित तौर पर कराया जाता है। बाढ़ एवं साल भर ड्रेनों के परिचालन से इनमें भारी मात्रा में गाद और सिल्ट जमा हो जाती है, जो खेतों तक जल की पहुंच में बाधा उत्पन्न करती है। इस क्रम में वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 17,500 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें से 11,065 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। शेष कार्य मार्च 2026 तक पूरा किया जाना है। विभाग द्वारा कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि तय समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण हो सके। इससे न केवल किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, बल्कि जलभराव और बाढ़ की समस्या में भी कमी आएगी, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है।

बाबरी ढांचे पर CM योगी का सख्त संदेश: ‘कयामत तक पुनर्निर्माण नहीं होगा’

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाराबंकी में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर बड़ा बयान दिया है. मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों और कट्टरपंथी विचारधारा रखने वालों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अयोध्या में जिस स्थान पर राम मंदिर बना है, वहां अब किसी और ढांचे की कल्पना करना भी व्यर्थ है. बाराबंकी की जनसभा में मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है और इसे लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज होने की संभावना जताई जा रही है. सीएम योगी ने कहा कि बाबरी मस्जिद के ढांचे का पुनर्निर्माण अब कभी नहीं होगा. उन्होंने साफ तौर पर कहा, "कयामत के दिन तक भी बाबरी मस्जिद के ढांचे का पुनर्निर्माण नहीं होगा." जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री ने राम मंदिर निर्माण का जिक्र करते हुए कहा कि जनता से किया गया वादा पूरा किया गया है. उन्होंने कहा, “हम लोगों ने कहा था रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे. और मंदिर वहीं बन गया.” उन्होंने दोहराया कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर अपने निर्धारित स्थान पर बन चुका है और यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक है. 'अवसरवादी लोग स्वार्थ के लिए राम को भूल जाते हैं' सीएम योगी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि जो लोग बाबरी ढांचे के पुनर्निर्माण के सपने देख रहे हैं, उनका सपना कभी पूरा नहीं होगा. उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण देश की सांस्कृतिक विरासत और सनातन आस्था का प्रतीक है. भगवान राम सबके हैं और इसमें कोई भेदभाव नहीं है, लेकिन कुछ अवसरवादी लोग अपने स्वार्थ के लिए राम को भूल जाते हैं. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने और विकास कार्यों को गति देने के लिए लगातार काम कर रही है. सीएम ने कहा कि जो कयामत के दिन का सपना देख रहे हैं, वे सड़-गल जाएंगे, वह दिन कभी आने वाला नहीं है. भारत की विरासत, गौरवशाली परंपरा और सनातन धर्म का सम्मान करते हुए केसरिया ध्वज सदैव देश का मान बढ़ाता रहेगा. योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री द्वारा अयोध्या में श्रीराम मंदिर पर केसरिया ध्वजारोहण का उल्लेख करते हुए इसे सनातन का प्रतीक बताया. उन्होंने अवसरवादियों पर निशाना साधते हुए कहा कि संकट आने पर कुछ लोगों को राम याद आते हैं, बाकी समय वे राम को भूल जाते हैं, इसलिए भगवान राम भी उन्हें भूल चुके हैं.  कानून तोड़ने वालों को सख्त चेतावनी सीएम योगी ने जनसभा में कानून व्यवस्था को लेकर सख्त चेतावनी देते हुए कहा, “कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे. कानून तोड़कर जन्नत जाने का सपना देखने वालों का यह सपना कभी पूरा नहीं होगा. सरकार जो कहती है, वह करके दिखाती है और कानून तोड़ने वालों को ऐसा सबक सिखाया जाएगा कि उनकी सात पीढ़ियां उसे याद रखेंगी. जो कानून तोड़ेगा, उसे जहन्नुम का रास्ता दिखाएंगे." उन्होंने कहा कि रामभक्तों पर गोली चलाने वालों और रामकाज में बाधा डालने वालों के लिए कोई जगह नहीं बची है. भारत और सनातन एक-दूसरे के पूरक हैं, दोनों को अलग नहीं किया जा सकता. देश और सनातन पर अंदर और बाहर से प्रहार हो रहे हैं, जिनसे सजग और सचेत रहने की जरूरत है. कुछ लोग साजिश कर रहे हैं, कुछ साजिश का शिकार हो रहे हैं और कुछ लोग साजिश के लिए बिककर काम कर रहे हैं. उन्होंने जनता से इन दुष्प्रवृत्तियों के खिलाफ तैयार रहने का आह्वान किया. 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि तब प्रदेश में दंगे, कर्फ्यू और असुरक्षा का माहौल रहता था. उन्होंने कहा कि उस समय न बेटियां सुरक्षित थीं, न व्यापारी, न किसान, न नौजवान, मंदिर, विद्यालय और घर तक सुरक्षित नहीं थे. पहले हर तीसरे-चौथे दिन किसी न किसी जिले में कर्फ्यू लगता था और लोगों में भय का वातावरण बना रहता था. अब प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत हुई है और सुरक्षा का माहौल स्थापित हुआ है.

बाबरी ढांचे का सपना देखने वालों से सीएम योगी की दो टूक, कभी नहीं आने वाला कयामत का दिन

बाराबंकी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबरी ढांचे का सपना देखने वालों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने दो टूक कहा कि कयामत का दिन कभी आने वाला नहीं है, जो लोग इसका सपना देख रहे हैं, सड़-गल जाएंगे। हिंदुस्तान में कायदे में रहने वाले फायदे में रहेंगे। अगर कोई कानून तोड़कर जन्नत जाने का सपना देख रहा है तो उसका यह सपना कभी पूरा नहीं होने वाला। कानून तोड़ने वाले का रास्ता कहीं और नहीं, सीधे जहन्नुम की तरफ ले जाता है। मुख्यमंत्री ने पूरी दृढ़ता के साथ कहा कि यह डबल इंजन सरकार पीएम मोदी के मार्गदर्शन में जो बोलती है, वह करके दिखाती है और जितना करती है, उतना ही बोलती है। हमने कहा कि रामलला आएंगे…। अब मंदिर भी बन गया है। हम विरासत को सम्मान देते हुए भारत व सनातन धर्म की गौरवशाली परंपरा को अक्षुण्ण रखेंगे। पीएम मोदी ने 25 नवंबर को अयोध्या में सनातन के प्रतीक श्रीराम मंदिर में भव्य केसरिया ध्वज का आरोहण किया था,  यह ध्वज सदा भारत व सनातन के गौरव को आगे बढ़ाएगा।  मुख्यमंत्री मंगलवार को हिंद केसरी ब्रह्मलीन महंत बाबा हरिशंकर दास जी महाराज की पुण्य स्मृति में श्रीराम जानकी मंदिर, दुल्हदेपुर कुटी (बाराबंकी) में आयोजित दशम श्री हनुमत विराट महायज्ञ एवं श्री रामार्चा पूजन में सम्मिलित हुए। सीएम ने केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाएं व उपलब्धियां गिनाने के साथ ही कहा कि बाराबंकी में जल्द ही विकास प्राधिकरण प्रारंभ होगा। सीएम की दो टूक, कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे  सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या में 500 वर्ष पश्चात यह गौरवशाली क्षण आया। इतने वर्षों में अनेक राजा-महाराजा आए। 1952 के बाद से अनेक सरकारें बनीं, लेकिन किसी से मन में यह नहीं आया कि भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या पर भव्य मंदिर निर्माण हो। राम सबके हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो अवसरवादी रवैया अपनाते हैं। जब संकट आता है तो उन्हें राम याद आते हैं, बाकी समय राम को भूल जाते हैं। ऐसे लोगों को भगवान राम भी भूल चुके हैं, अब उनकी नैया कभी पार नहीं होनी है। रामभक्तों पर गोली चलाने वालों और रामकाज में बाधक रामद्रोहियों के लिए कोई जगह नहीं है। बाबरी ढांचे का सपना देखने वालों को योगी ने चेताया कि कयामत का दिन कभी नहीं आने वाला। कयामत के दिन के लिए मत जियो। हिंदुस्तान में कायदे से रहना सीखो। यहां का कानून मानो, कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे। कानून तोड़ने वालों का रास्ता जन्नत नहीं, सीधे जहन्नुम की तरफ जाएगा।  यह देश कभी कमजोर नहीं था सीएम योगी ने कहा कि यह देश कभी कमजोर नहीं था। हमारे पास सब कुछ था। उन्होंने 2017 के पहले यूपी में फैली असुरक्षा का जिक्र किया। कहा, हर तीसरे-चौथे दिन किसी न किसी जनपद व शहर में कर्फ्यू-दंगे होते थे। परिवार का कोई सदस्य बाहर गया है और सूर्यास्त होते यदि घऱ नहीं आया तो घरवाले सशंकित रहते थे। गरीबों की जमीन पर कब्जा हो जाता था। सैकड़ों पहलवान तैयार करने वाले बाबा हरिशंकर दास का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि श्रीराम जानकी मंदिर की जमीन पर भी कब्जा करने का प्रयास हुआ। बाबा जी को गोली मार दी गई, लेकिन सरकार बदलते ही यूपी में सारी अराजकता गायब हो गई। 2013 कुंभ में 12 करोड़ श्रद्धालु आए थे और इस वर्ष माघ मेला में अब तक 21 करोड़ श्रद्धालु डुबकी लगा चुके हैं। अयोध्या व वाराणसी में पहले लाखों श्रद्धालु आते थे, अब वह संख्या करोड़ों में पहुंच गई है। 2024-25 में 122 करोड़ श्रद्धालु यूपी के धार्मिक स्थलों पर दर्शन करने आए। महाकुम्भ में 66 करोड़ श्रद्धालु आए, यह संख्या बताती है कि यूपी में अब सुरक्षा और सुविधा है। बेटी सुरक्षित होगी तो समाज सुरक्षा का अहसास कर लेगा, व्यापारी सुरक्षित होगा तो उत्तर से दक्षिण तक सेतुबंध के रूप में कार्य करेगा।  पहले भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया था विकास मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी समृद्धि की नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है। पहले यूपी में वेतन देने का पैसा नहीं था, लेकिन आज पैसे का उपयोग हर तबके के हित के लिए हो रहा है। छात्रों को बिना भेदभाव छात्रवृत्ति दी जा रही है। यूपी में अच्छे संस्थान खुल रहे हैं, हर तीर्थ स्थल का विकास हो रहा है। सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्य कर रही है। कानून को ठेंगा दिखाने वालों को ऐसा मजा चखाएंगे कि सात पीढ़ियां याद करेंगी। सीएम ने विकास कार्यों को गिनाया और कहा कि 8-9 साल पहले तक जो पैसा भ्रष्टाचार में खर्च होता था, वह आज विकास में खर्च हो रहा है।  यूपी अब ‘बीमारू’ नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था का मजबूत राज्य  सीएम योगी ने कहा कि यूपी देश की तीन बड़ी अर्थव्यवस्था में शामिल है। यूपी अब ‘बीमारू’ नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था का मजबूत राज्य बनकर उभरा है। गांव की बेटी, सबकी बेटी मानते हुए सरकार बेटी के जन्म लेने से लेकर स्नातक की पढ़ाई, शादी आदि की जिम्मेदारी उठा रही है। दिव्यांगजन, वृद्धजन व निराश्रित महिलाओं के रूप में 1.6 करोड़ परिवारों को सरकार 12 हजार रुपये सालाना की पेंशन दे रही है। यूपी में 15-16 करोड़ लोग राशन की सुविधा पा रहे हैं। आयुष्मान भारत के अंतर्गत अब तक 5.46 करोड़ से अधिक गरीबों के लिए पांच लाख रुपये निशुल्क स्वास्थ्य सुविधा वाले गोल्डन कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार बिना भेदभाव सबके विकास के लिए कार्य कर रही है।  दुनिया भर से सनातन, भारत-भारतीयता पर प्रहार मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि हर भारतीय का दायित्व सकारात्मक सोच के साथ भारत का विकास होना चाहिए। सभी भारतीय मिलकर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के लिए कार्य करें। जीवन का संकल्प होना चाहिए कि हमारा देश वैभवशाली व विकसित हो। हर संत की साधना देश, धर्म के लिए होती है और धर्म भी देश के लिए समर्पित होता है। एक शरीर है तो दूसरा उसकी आत्मा। भारत और सनातन एक-दूसरे के पूरक हैं, इसे अलग करके नहीं रखा जा सकता। वर्तमान में दुनिया भर से सनातन, भारत-भारतीयता पर प्रहार हो रहे हैं। अंदर-बाहर से होने वाले इन प्रहारों से सचेत रहना होगा। जिन्हें भारत की प्रगति अच्छी नहीं लग रही है, विकसित भारत की संकल्पना पचती नहीं … Read more

केंद्र सरकार की योजना में उत्तर प्रदेश से 4 एक्सेलेरेटरों का चयन, राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी पहचान

लखनऊ.  केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेटी) की महत्वाकांक्षी “स्टार्टअप एक्सेलेरेटर ऑफ मेटी फॉर प्रोडक्ट इनोवेशन, डेवलपमेंट एंड ग्रोथ” (SAMRIDH) योजना में उत्तर प्रदेश ने प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। स्टार्टअप्स को नवाचार, उत्पाद विकास और विस्तार के लिए तैयार करने वाली इस योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश से चयनित एक्सेलेरेटरों और स्टार्टअप्स की संख्या यह संकेत देती है कि प्रदेश तेजी से देश के प्रमुख स्टार्टअप हब के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपनाई गई नीतियों का असर अब राष्ट्रीय स्तर पर साफ दिखने लगा है। योगी सरकार द्वारा केंद्र की योजनाओं का लाभ जमीन तक पहुंचाने के लिए प्रदेश स्तर पर लगातार समन्वय किया जा रहा है। एक्सेलेरेटरों और स्टार्टअप्स की निगरानी, मेंटरशिप और बाजार से जोड़ने की प्रक्रिया को मजबूत किया गया है, ताकि युवा उद्यमियों को केवल फंडिंग ही नहीं बल्कि स्थायी विकास का रास्ता भी मिल सके। समृद्ध को लेकर उत्तर प्रदेश से कुल 10 एक्सेलेरेटरों ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जमा किया था। इनमें से 4 एक्सेलेरेटरों का चयन किया गया। इन चयनित एक्सेलेरेटरों के माध्यम से प्रदेश के 35 स्टार्टअप्स को एक्सेलेरेशन सपोर्ट दिया गया, जिनमें से 27 स्टार्टअप्स फंडिंग प्राप्त करने में सफल रहे। उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप्स को इस योजना के तहत कुल 9.91 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई। यह राशि स्टार्टअप्स को उनके उत्पाद के विकास, बाजार विस्तार और तकनीकी मजबूती के लिए दी गई है। केंद्र सरकार की इस योजना में स्टार्टअप्स को अधिकतम 40 लाख रुपये तक की मैचिंग फंडिंग का प्रावधान है, जबकि प्रत्येक स्टार्टअप के लिए एक्सेलेरेटरों को भी वित्तीय सहयोग दिया जाता है। प्रदेश सरकार का मानना है कि बीते कुछ वर्षों में स्टार्टअप्स के लिए बनाए गए अनुकूल माहौल का ही यह परिणाम है कि उत्तर प्रदेश अब केवल उपभोक्ता राज्य नहीं बल्कि नवाचार और उद्यमिता का मजबूत केंद्र बन रहा है। नई स्टार्टअप नीति, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को बढ़ावा, इन्फ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास और सिंगल विंडो सिस्टम जैसी पहल युवाओं को उद्यम के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। समृद्ध योजना के अंतर्गत हेल्थ टेक, एजुकेशन टेक, एग्री टेक, फिनटेक, सॉफ्टवेयर सर्विस और कंज्यूमर टेक जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप्स को समर्थन दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप्स की इन सेक्टर्स में सक्रिय भागीदारी यह दिखाती है कि राज्य की अर्थव्यवस्था अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर ज्ञान और तकनीक आधारित मॉडल की ओर अग्रसर है।

दवा वितरण के बाद बड़ा हादसा: स्कूल के 100+ बच्चे अस्पताल पहुंचाए गए

फर्रुखाबाद फर्रुखाबाद जिले में मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के गांव राठौर मोहिद्दीनपुर के एक स्कूल में मंगलवार दोपहर में दवा खाने के बाद कुछ ही देर में 100 से अधिक बच्चे बीमार हो गए। उल्टी-दस्त पेट में दर्द की शिकायत के बाद पहुंचे अभिभावकों ने इसकी शिकायत शिक्षकों से की। इसके बाद मौके पर जिले भर की एंबुलेंस बुला ली गईं। बच्चों को कमालगंज सीएचसी भेजा जा रहा है। कई परिजन अपने बच्चों को निजी अस्पताल लेकर चले गए हैं। गांव में अफरा तफरी का माहौल है। शिक्षा विभाग और पुलिस को सूचना दी गई हैं। अधिकारी मौके पर रवाना हो रहे हैं। दोपहर ढाई बजे जिले की सभी एंबुलेंस को मौके पर रवाना होने के निर्देश दिए गए हैं।  

सीएम बोले- प्रो. श्याम बिहारी लाल ने शिक्षण अनुभव को जनसेवा से जोड़कर लोकतंत्र को दी मजबूती

प्रदेश ने खोए जमीन से जुड़े और जनजातीय समाज के नेता: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने विधानसभा के दिवंगत सदस्यों के प्रति अर्पित की श्रद्धांजलि सीएम बोले- प्रो. श्याम बिहारी लाल ने शिक्षण अनुभव को जनसेवा से जोड़कर लोकतंत्र को दी मजबूती विजय सिंह गौड़ ने जल-जंगल-जमीन और बुनियादी अधिकारों के लिए सदन से सड़क तक किया संघर्ष: सीएम योगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को दिवंगत विधायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने शोक जताते हुए सदन में कहा कि वर्तमान विधानसभा के सदस्य प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल का निधन 2 जनवरी 2026 को 60 वर्ष की आयु में हो गया। वह दूसरी बार विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे और फरीदपुर (बरेली) से भारतीय जनता पार्टी के विधायक थे। प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल मिलनसार और जमीन से जुड़े जनप्रतिनिधि थे। शिक्षा जगत से उनका गहरा जुड़ाव रहा। वह इतिहास संकलन समिति, बरेली के अध्यक्ष तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली की कार्यसमिति के सदस्य भी रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में बुनियादी विकास कार्यों को गति दी और पिछड़े, वंचित व गरीब वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर काम किया। शिक्षा जगत से जुड़े विद्वान जब जनप्रतिनिधि बनते हैं तो वह लोकतांत्रिक परंपराओं को सशक्त करते हैं। उनके निधन से प्रदेश और भारतीय जनता पार्टी को अपूर्णनीय क्षति हुई है। मुख्यमंत्री ने वर्तमान विधानसभा के वरिष्ठ सदस्य विजय सिंह गौड़ के निधन पर भी शोक व्यक्त किया। उन्होंने सदन को बताया कि समाजवादी पार्टी से विधायक विजय सिंह का निधन 8 जनवरी 2026 को 71 वर्ष की आयु में हो गया था। वह आठवीं बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे। वर्ष 1980 से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ था। उन्होंने सर्वप्रथम वर्ष 1980, फिर 1985, 1989, 1991, 1993, 1996, 2002 में चुनाव जीता था। वर्ष 2024 के उप चुनाव में वह दुद्धी विधानसभा से निर्वाचित हुए थे। वह जनजातीय समाज की सशक्त आवाज के रूप में जाने जाते थे। सीएम योगी ने कहा कि विजय सिंह गौड़ ने जल, जंगल, जमीन के अधिकारों के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों को सदैव प्राथमिकता दी। उनके निधन से न केवल जनजातीय समाज, बल्कि पूरे प्रदेश ने संघर्षशील समाजसेवी और अनुभवी राजनेता को खो दिया है। मुख्यमंत्री ने दोनों दिवंगत सदस्यों के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए ईश्वर से शोकाकुल परिजनों को संबल देने की प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री का निर्देश, प्रदेश में इको-टूरिज्म विकास हेतु समग्र कार्ययोजना तैयार की जाए

निजी क्षेत्र की भागीदारी से इको-टूरिज्म स्थलों पर विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित हों: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का निर्देश, प्रदेश में इको-टूरिज्म विकास हेतु समग्र कार्ययोजना तैयार की जाए प्रकृति संरक्षण, रोजगार और निवेश का समन्वित मॉडल बने इको-टूरिज़्म, स्थानीय सहभागिता अनिवार्य: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश ईको-टूरिज़्म विकास बोर्ड की बैठक सप्ताहांत में दिल्ली-पलिया और लखनऊ पलिया बस सेवाएं शुरू हों: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में इको-टूरिज्म को रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनाते हुए इसके लिए एक समग्र एवं समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की समृद्ध जैवविविधता, वन क्षेत्रों और प्राकृतिक विरासत में इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं निहित हैं, जिन्हें योजनाबद्ध ढंग से धरातल पर उतारने की आवश्यकता है। इसके लिए निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि इको-टूरिज्म को एक सशक्त और टिकाऊ उद्योग के रूप में विकसित किया जा सके। सोमवार को हुई उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म विकास बोर्ड की बैठक मेंमुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि चयनित इको-टूरिज्म स्थलों पर पर्यटकों के लिए अच्छे होटल और स्तरीय रेस्टोरेंट, गुणवत्तापूर्ण आवासीय सुविधाएं और आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाए, जिससे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि गोरखपुर का कुसम्ही जंगल, अयोध्या का कुमारगंज क्षेत्र, गाजीपुर का कामाख्या वन पार्क तथा लखीमपुर खीरी की महेशपुर रेंज जैसे संभावनाशील क्षेत्रों को पीपीपी मॉडल के माध्यम से विकसित किया जाए और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जैवविविधता, प्राकृतिक संपदा, वेटलैंड, झीलें, वन्यजीव और नदी तंत्र केवल पर्यटन का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य का आधार हैं। उन्होंने कहा कि इको-टूरिज्म आने वाले वर्षों में रोजगार, अर्थव्यवस्था, संरक्षण और वैश्विक पहचान का बड़ा स्तंभ बनेगा, इसलिए प्रत्येक जिले में सुरक्षित, स्वच्छ और सस्टेनेबल इको-टूरिज़्म मॉडल विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इको-टूरिज्म को प्रकृति संरक्षण, स्थानीय रोजगार, निजी निवेश और ग्रामीण विकास का मजबूत मॉडल बनाया जाए तथा इसके संचालन में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाए।  बैठक में अवगत कराया गया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच दुधवा, पीलीभीत, रानीपुर और कतरनियाघाट टाइगर रिज़र्व सहित हैदरपुर, बखिरा, सूर सरोवर, समसपुर और नवाबगंज जैसे प्रमुख वेटलैंड्स में कुल 44 इको-टूरिज़्म इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। बोर्ड अब परिसंपत्तियों के मॉनेटाइजेशन और दीर्घकालिक सस्टेनेबिलिटी पर काम कर रहा है, जिसके तहत इको लॉज, फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और पर्यटक सुविधाओं के लिए पीपीपी मॉडल लागू किया जा रहा है।  मुख्यमंत्री ने कनेक्टिविटी सुधार पर जोर देते हुए कहा कि लखनऊ-पलिया और नई दिल्ली-पलिया के बीच सप्ताहांत एसी बस सेवा का संचालन किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने पीलीभीत-मैलानी-बहराइच के लिए क्षेत्रीय बस सेवा प्रारंभ करने के निर्देश दिए और कहा कि परिवहन निगम के सफल मॉडल को देखते हुए इन सेवाओं का विस्तार अन्य इको-टूरिज़्म स्थलों तक किया जाए। बैठक में यह भी बताया गया कि वर्ष 2025-26 में विभिन्न जिलों जैसे अयोध्या, आगरा, गोरखपुर, लखनऊ, चित्रकूट, महराजगंज, प्रयागराज, बांदा, बहराइच, सीतापुर, उन्नाव, बलिया, इटावा, मैनपुरी आदि में नए पार्क, इंटरप्रिटेशन सेंटर, वेटलैंड विकास, बर्ड वॉचिंग टॉवर, ट्रेल्स, कैंपिंग और पर्यटक सुविधाओं पर आधारित कुल 31 नई परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। बोर्ड द्वारा एक एआई चैटबॉट और मोबाइल एप भी विकसित किया जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने पर्यटन विकास की विभागीय गतिविधियों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। बैठक में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह और वन एवं पर्यावरण मंत्री अरुण सक्सेना की गरिमामयी सहभागिता रही।