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कानपुर:3500 करोड़ की ठगी का खुलासा, रजिस्ट्री ऑफिस में आयकर टीम ने मारा छापा

 कानपुर   कानपुर रजिस्ट्री विभाग एक बार फिर आयकर विभाग की कार्रवाई की जद में आया है।  विभाग के जोन-3 में आयकर विभाग ने सर्वे किया। सिविल लाइंस स्थित कार्यालय में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। छह घंटे की जांच में लगभग 3500 करोड़ की विसंगतियों के साक्ष्य मिले हैं। आयकर विभाग को लगभग 800 करोड़ के टैक्स का चूना लगा है। फिलहाल रजिस्ट्री अधिकारियों को दस दिन का समय देकर कागजात प्रस्तुत करने को कहा गया है। आयकर निदेशक (आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण) के निर्देश पर रजिस्ट्री कार्यालय के जोन वन में सहायक निदेशक विमलेश राय की अगुवाई में अचल संपत्ति की रजिस्ट्री की जांच के लिए सर्वे किया गया। टीम में आयकर निरीक्षक कुलदीप गुप्ता, देव अनंत श्रीवास्तव, कय्यूम अहमद, रवि पासवान के साथ भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। आयकर अधिकारियों ने वर्ष 2020 से 2025 तक की रजिस्ट्री की जांच की। सर्वे टीम का कहना है कि अब तक जिन दस्तावेजों की छानबीन हुई है, उसके अनुसार, 3500 करोड़ रुपये की विसंगतियां मिली हैं। एक हजार पैन में नंबर मनमर्जी के मिलेः आयकर सर्वे के दौरान कई रजिस्ट्री में मनमर्जी पैन लिखा गया। लगभग एक हजार पैन में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी मिलीं। गलत मोबाइल नंबर तक लिखे गए। सर्वे टीम का आकलन है कि ऐसा जानबूझकर किया गया। इसकी आड़ में आयकर विभाग की आंखों में धूल झोंकने का पूरा प्रयास किया गया। रजिस्ट्री विभाग की ओर से संपत्तियों की रजिस्ट्री का जो डाटा आयकर विभाग को भेजा गया, वह वास्तविक रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा था। डिजिटल और मैनुअल दोनों प्रकार के रिकॉर्ड, स्टांप शुल्क की गणना से संबंधित विवरण और डाटा ट्रांसफर प्रक्रिया की पड़ताल की गई। 34 दिन में तीसरी बड़ी कार्रवाई, अभी और रडार में : रजिस्ट्री विभाग के खिलाफ आयकर विभाग की 34 दिन में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है। 26 दिसंबर को जोन वन में सर्वे किया गया था, जिसमें 2500 करोड़ की हेराफेरी का मामला सामने आया था। वहीं 30 दिसंबर को जोन टू में सर्वे के दौरान 1100 करोड़ की विसंगतियां मिली थीं। जोन-3 में तो 3500 करोड़ का खेल सामने आया है। विभाग को तीनों जोन में लगभग 2 हजार करोड़ के टैक्स का चूना लगने की बात कही जा रही है।

राज चौहान हत्याकांड: आगरा एनकाउंटर में तीन इनामी बदमाश घायल

 आगरा  यूपी के आगरा में एक बार फिर से एनकाउंटर हुआ है. राज चौहान हत्याकांड में शामिल आरोपियों के साथ पुलिस की बीती रात मुठभेड़ हुई जिसमें तीन बदमाशों के पैर में गोली लगी है. इसके एक दिन पहले हुए एनकाउंटर में अरबाज खान उर्फ़ मंसूरी मारा गया था. जबकि आशु और मोहित घायल हो गए थे. दो पुलिसवाले भी जख्मी हुए थे.  आपको बता दें कि आगरा के दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में पुलिस की हत्यारोपियों से मुठभेड़ हुई. थाना एत्मादपुर और थाना बमरौली कटारा में हुई इन मुठभेड़ में तीन बदमाशों के पैर में गोली लगी है.  बताया जा रहा है कि कानून व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए चेकिंग कर रही पुलिस को देख बदमाश भागने लगे. रोकने पर मरौली कटारा क्षेत्र में मुठभेड़ हो गई. इस दौरान विष्णु पंडित उर्फ भुल्ला के पैर में गोली लगी जबकि उसका साथी शिवांग शर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. दोनों के पास से जिंदा कारतूस और तमंचा बरामद हुआ है.  दूसरी मुठभेड़ थाना एत्मादपुर क्षेत्र में हुई. यहां भी चेकिंग के दौरान संदिग्धों को रोकने पर पुलिस पर फायरिंग की गई थी. जवाबी कार्रवाई में बदमाश के पैर में गोली लग गई. पकड़े गए बदमाश ने अपना नाम आकाश प्रजापति है. आकाश और विष्णु उर्फ भुल्ला पर राज हत्याकांड मामले में 25-25 हजार का इनाम था. हत्याकांड में दो लोगों को पुलिस कल जेल भेज चुकी है जबकि एक मुठभेड़ में हो ढेर चुका है और तीन आज गिरफ्तार हुए हैं.  मालूम हो कि राज चौहान की गोली मारकर हत्या की गई थी. इस हत्याकांड के खुलासे के लिए पुलिस ने 9 टीमें बनाई थीं. इनपुट मिलने पर आरोपियों की घेराबंदी की गई. बचने के लिए इन्होने पुलिस टीम पर फायर किया. आत्मरक्षा में पुलिस ने भी गोली चलाई. 

शंकराचार्य का बड़ा बयान: चेहरा साधु का, काम राक्षसों जैसे— धर्म के नाम पर ढोंग पर निशाना

वाराणसी प्रयागराज में माघ अमावस्या से ही प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। इसी बीच शंकराचार्य का एक और बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यहां लोगों के काम राक्षसों के हैं और चोला साधुओं का पहने बैठे हैं। शंकराचार्य ने कहा कि संत कभी बंट नहीं सकते। संत के नाम पर जो लोग वेशधारी बनकर दिखाई देते हैं, वो अपने आप ही अलग हैं। वे असली संत नहीं हैं। ढोंगी संत और सच्चा संत हमेशा अलग होते हैं। प्रयागराज में जो लाठी चलाई गई, उसका निशाना सिर्फ असली संत नहीं थे। लाठी उन लोगों पर भी चली जो गुरुकुल में शिक्षा लेने आए थे, संन्यासियों, ब्रह्मचारियों, साध्वियों और बुजुर्गों पर भी। ये सब लोग सनातन धर्म का हिस्सा हैं। जिनको इससे पीड़ा नहीं हो रही, वे असली संत नहीं हैं, बल्कि ढोंगी संत हैं। उन्होंने सरकार पर ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि पहले किसी पर हमला होता था, लेकिन महिलाओं और बच्चों को नहीं छुआ जाता था। अब ऐसा हो रहा है कि ब्राह्मण बच्चों को भी निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन ने इस घटना के बाद किसी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इससे यह साबित होता है कि सरकार अब ब्राह्मणों के खिलाफ नजरिया रखती है। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि माफी मांगना या अपराध को स्वीकार करना प्रशासन के ऊपर निर्भर करता है। उन्होंने बताया कि संतों ने ग्यारह दिन तक संयम बनाए रखा और मौके दिए कि प्रशासन अपनी गलती सुधार सके, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसका सबूत जनता ने देखा। उन्होंने कहा कि वीडियो और फोटो ने साफ दिखा दिया कि लोगों को कैसे मारा और पीटा गया, चोटी पकड़कर अपमानित किया गया, लेकिन किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब माघ समाप्त हो गया है और संत वहां से निकल गए हैं। उन्होंने जो अहंकार दिखाया, वो सभी के सामने है। अब जनता खुद देख रही है कि प्रशासन ने संतों के साथ कैसा व्यवहार किया। उन्होंने मंदिरों और मूर्तियों को तोड़े जाने का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि बनारस और अन्य जगहों पर मंदिरों की परंपरागत मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं और फेंकी जा रही हैं। ये औरंगजेब के समय जैसी घटना है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को औरंगजेब कहने पर कुछ संतों को गुस्सा आ रहा है और ये स्वाभाविक भी है कि जिससे आपको प्रेम या लगाव होगा, उसे कोई कुछ कहे तो आपको बुरा लगता है, लेकिन सरकार से लगाव रखने वाले इन संतों को भगवान या मंदिरों से लगाव नहीं है क्या? अगर आपको मंदिर, मूर्तियों और भगवान से लगाव है, तो उनकी हानि देखकर दर्द होना चाहिए। उन्होंने 'कालनेमी' शब्द को लेकर कहा कि मंत्री ने उनका अपमान करने और अपनी भड़ास निकालने के लिए यह शब्द इस्तेमाल किया। अगर उनके पास इसका प्रमाण है तो लाएं और इस बात को सिद्ध करें। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि आज कुछ लोग साधु-संतों का चोला पहने हैं और काम राक्षसों जैसा है। आज ब्राह्मणों पर हमला हो रहा है और गायों, मंदिरों और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर राक्षसों का काम बताया, जबकि साधु-संत धर्म और समाज के संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन और सरकार ने संतों के खिलाफ जो कदम उठाए, वह संसद और लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ हैं। संतों को अलग-अलग करने और हिंदू समाज को विभाजित करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने आगे कहा कि यह सब देखकर जनता और साधु संतों का विश्वास कमजोर हुआ है। लोग अब यह सोचने लगे हैं कि देश में न्याय और लोकतंत्र पर भरोसा कैसे किया जा सकता है। प्रशासन की तानाशाही ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। सरकार ने संतों और जनता के अधिकारों का उल्लंघन किया है और जांच या कार्रवाई करने का कोई इरादा नहीं दिखाया।

SC की रोक के बाद मायावती का बयान, कहा- ‘सवर्ण होते तो विवाद नहीं होता’

लखनऊ यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले पर विपक्षी नेताओं के भी रिएक्शन आने शुरू हो गए हैं। केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, अगर यूजीसी नियमों में सवर्णों को भी कमिटी में रख लिया जाता तो बवाल नहीं होता। उन्होंने आगे कहा, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी द्वारा देश के सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों मे जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए जो नये नियम लागू किए गए है, जिससे सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा हो गया है। ऐसे वर्तमान हालात के मद्देनजर रखते हुये माननीय सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नये नियम पर रोक लगाने का आज का फैसला उचित। जबकि देश में, इस मामले में सामाजिक तनाव आदि का वातावरण पैदा ही नहीं होता अगर यूजीसी नये नियम को लागू करने से पहले सभी पक्ष को विश्वास में ले लेती और जांच कमेटी आदि में भी अपरकास्ट समाज को नेचुरल जस्टिस के अन्तर्गत उचित प्रतिनिधित्व दे देती।   अखिलेश ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर उच्चतम न्यायालय द्वारा रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सच्चा न्याय यह सुनिश्चित करने में है कि किसी पर भी अत्याचार या अन्याय न हो। यादव ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, 'सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं होता है, माननीय न्यायालय यही सुनिश्चित करता है। कानून की भाषा भी साफ होनी चाहिए और भाव भी। बात सिर्फ़ नियम नहीं, नीयत की भी होती है।' उन्होंने कहा, ‘न किसी का उत्पीड़न हो, न किसी के साथ अन्याय, न किसी पर जुल्म-ज्यादती हो, न किसी के साथ नाइंसाफ़ी।’ यूजीसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक उच्चतम न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हालिया नियमों के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए इस पर रोक लगा दी। इन याचिकाओं में दलील दी गई थी कि आयोग ने जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने विनियमन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किए। उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव संबंधी शिकायतों की जांच करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए सभी संस्थानों द्वारा 'समानता समितियां' गठित करने को अनिवार्य बनाने संबंधी नए नियम 13 जनवरी को अधिसूचित किए गए थे।  

सरकारी नौकरी में फायदा! यूपी सरकार दे रही उम्र और अनुभव में विशेष लाभ

लखनऊ सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 32 प्रस्ताव रखे गए, जिनमें से 30 को मंजूरी दी गई। इनमें सबसे महत्वपूर्ण फैसला मुख्यमंत्री फेलो (CM Fellow) को लेकर रहा, जिसके तहत उन्हें यूपी सरकार की भर्तियों में विशेष राहत दी गई है।कैबिनेट के फैसले के अनुसार, अब सीएम फेलो को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के तहत होने वाली भर्तियों में आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट मिलेगी। इसके साथ ही, उनके अनुभव के आधार पर अतिरिक्त वेटेज (भारांक) भी दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे प्रतिभाशाली युवाओं को प्रशासनिक अनुभव का लाभ मिलेगा और वे बेहतर ढंग से प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग ले सकेंगे।   बैठक में शिक्षकों के लिए भी बड़ी सौगात का ऐलान किया गया। बेसिक शिक्षा विभाग के 11 लाख 95 हजार 391 शिक्षक और कर्मियों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। वहीं, माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन 2 लाख 97 हजार 589 शिक्षकों और कर्मचारियों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, विधानसभा के बजट सत्र की तारीखों की भी घोषणा की गई। विधानसभा का बजट सत्र 9 फरवरी से शुरू होगा और 11 फरवरी को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना बजट पेश करेंगे।शहरी विकास से जुड़े प्रस्तावों में वाराणसी के 18 वार्डों में सीवरेज लाइन के लिए 266 करोड़ रुपये और गोरखपुर में 721 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज परियोजना को मंजूरी दी गई। साथ ही उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026 को स्वीकृति दी गई, जिसके तहत पुरानी और निष्प्रयोज्य संपत्तियों को तोड़कर नई इमारतें बनाने की अनुमति होगी। बैठक में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शोक प्रस्ताव भी पारित किया गया। मंत्रिपरिषद ने इसे अपूरणीय क्षति बताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की।

डिजिटल रिकॉर्ड की ओर तेज़ी: 6 माह में ऑनलाइन होंगे उप निबंधक कार्यालयों के पुराने दस्तावेज

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में उप निबंधक कार्यालयों में पंजीकृत पुराने दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन को लेकर योगी सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में वर्ष 2002 से 2017 तक पंजीकृत विलेखों की स्कैनिंग व इंडेक्सिंग की परियोजना अवधि को अगले 6 माह तक बढ़ाने को मंजूरी दे दी गई है। यह परियोजना पहले ही अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और इसके लिए सरकार ने किसी अतिरिक्त बजट की आवश्यकता नहीं बताई है। इस योजना को पहले वर्ष 2022 में 95 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी। बाद में व्यावहारिक कारणों से इसमें देरी होने पर जुलाई 2024 में परियोजना की अवधि बढ़ाते हुए कुल लागत 123.62 करोड़ रुपये कर दी गई थी। वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंत तक इस योजना पर 109.05 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और शेष कार्य उपलब्ध बजट में ही पूरा कर लिया जाएगा। 99% से अधिक इंडेक्सिंग, 98% स्कैनिंग पूरी प्रदेशभर में इस परियोजना के तहत इंडेक्सिंग का 99.11 प्रतिशत और स्कैनिंग का 98.37 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। अधिकांश जिलों में यह कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। फिलहाल एटा, वाराणसी, मुरादाबाद, मैनपुरी, लखनऊ, अलीगढ़, हाथरस, आगरा, सहारनपुर व प्रयागराज में कुछ कार्य शेष है, जिसे अगले 6 माह में पूरा कर लिया जाएगा। दो स्तर पर हो रही जांच व सत्यापन डिजिटाइजेशन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हर दस्तावेज का दो स्तर पर सत्यापन किया जा रहा है। पहले स्तर पर सहायक महानिरीक्षक निबंधन द्वारा जांच की जा रही है, जबकि दूसरे स्तर पर मंडलों और वृत्तों के उप महानिरीक्षक निबंधन द्वारा पुनः परीक्षण किया जा रहा है। यह प्रक्रिया शत-प्रतिशत सत्यापन तक जारी रहेगी। पुराने दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन से कूटरचना व फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और जमीन-जायदाद से जुड़े रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित हो सकेंगे।

इन्फ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा मजबूत फंड

लखनऊ. प्रदेश के शहरी इलाकों में सड़कों, खाली पड़े स्थानों, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, बुनियादी तथा अन्य जन सुविधाओं के विकास के लिए प्रदेश सरकार ने अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में शहरी क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए विकास शुल्क की संशोधित प्रणाली लागू करने और इससे जुड़ी नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास नियमावली-2014 (यथा संशोधित 2021)  में बदलाव के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी है। इस फैसले से शहरी विकास के लिए जरूरी वित्तीय संसाधन अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध हो सकेंगे। संशोधित विकास शुल्क प्रणाली से विकास प्राधिकरणों को अपनी विकास परियोजनाओं और अन्य नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए स्थायी वित्तीय संसाधन मिलते रहेंगे। इससे शहरी इलाकों में बुनियादी ढांचे के निर्माण और विस्तार को गति मिलेगी। इस फैसले से प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ेगी और सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही निर्माण व विकास गतिविधियों में तेजी आने से रोजगार सृजन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। यह निर्णय शहरों को बेहतर, व्यवस्थित और रहने योग्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

11 फरवरी को पेश होगा उत्तर प्रदेश का बजट: विकास और कल्याण पर रहेगी नजर

लखनऊ. उत्तर प्रदेश का वर्ष 2026-27 का बजट 11 फरवरी को पेश किया जाएगा। यह निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को कैबिनेट बैठक में लिया गया। इसके साथ ही यह भी तय हुआ कि विधानमंडल का बजट सत्र 9 फरवरी से प्रारंभ होगा। प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सत्र के पहले दिन 9 फरवरी को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का अभिभाषण होगा। इसके बाद 10 फरवरी को सदन में दिवंगत सदस्यों के निधन पर शोक व्यक्त किया जाएगा। वित्त मंत्री ने बताया कि 11 फरवरी को पूर्वाह्न 11 बजे वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार का फोकस विकास, जनकल्याण, बुनियादी ढांचे और आर्थिक मजबूती पर रहेगा।

जोखिम से राहत: भरथापुर गांव के विस्थापित परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्के घर

लखनऊ.  बहराइच जनपद के राजस्व ग्राम भरथापुर के आपदा प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की गई घोषणा के क्रम में गुरुवार को कैबिनेट ने ग्राम को विस्थापित कर 136 परिवारों के पुनर्वास की योजना को मंजूरी दे दी है। पुनर्वास के बाद बसाई जाने वाली नई बस्ती का नामकरण मुख्यमंत्री की अनुमति से किया जाएगा। यह गांव एक ओर गेरुआ नदी और दूसरी ओर कौड़ियाल नदी से घिरा हुआ है, जबकि उत्तर दिशा में वन्य जीव क्षेत्र और नेपाल सीमा है। गांव तक सड़क मार्ग न होने के कारण लोगों को केवल नाव के सहारे आवागमन करना पड़ता है, जिससे हर समय जान का खतरा बना रहता है। नाव दुर्घटना में गई थी 9 व्यक्तियों की जान 29 अक्टूबर 2025 को कौड़ियाल नदी में नाव पलटने से 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 नवंबर 2025 को गांव का हवाई सर्वेक्षण किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद उन्हें सुरक्षित स्थान पर बसाने की घोषणा की थी। अब कैबिनेट ने उस घोषणा पर औपचारिक मुहर लगा दी है। सेमरहना गांव में मिलेगा नया ठिकाना आपदा प्रभावित परिवारों को ग्राम पंचायत सेमरहना, तहसील मिहींपुरवा (मोतीपुर) में पुनर्वासित किया जाएगा। इसके लिए करीब 1.70 हेक्टेयर भूमि राजस्व विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया जिलाधिकारी बहराइच द्वारा पूरी की जाएगी। हर परिवार को आवासीय प्लॉट और पक्का घर पुनर्वास के तहत विस्थापित 136 परिवारों को अलग-अलग प्लॉट आवंटित किए जाएंगे। इन परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना/प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्के मकान उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सके। नई बसाई जा रही बस्ती में सड़क, नाली, सीसी रोड, इंटरलॉकिंग टाइल्स, ग्रीन बेल्ट, एलईडी स्ट्रीट लाइट और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन कार्यों को लोक निर्माण विभाग, ग्राम्य विकास विभाग और जल जीवन मिशन के माध्यम से कराया जाएगा। प्रत्येक परिवार को भूमि आवंटन की जिम्मेदारी उपजिलाधिकारी मिहींपुरवा (मोतीपुर) को दी गई है। सभी अवसंरचनात्मक सुविधाएं विकसित होने के बाद यह बस्ती ग्राम पंचायत को हस्तांतरित कर दी जाएगी। वन विभाग के पैकेज के अतिरिक्त मिलेगा लाभ जो परिवार पहले से अपने पुराने स्थान को खाली कर वन विभाग या अन्य विभागों को भूमि सौंप चुके हैं, उन्हें वन विभाग से मिलने वाले पैकेज के अतिरिक्त यह पुनर्वास सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

मानवीय संवेदना का निर्णय: 99 हिंदू बंगाली विस्थापित परिवारों को स्थायी पुनर्वासन की मंजूरी

लखनऊ. प्रदेश सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित होकर उत्तर प्रदेश में रह रहे हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वासन को लेकर बड़ा एवं मानवीय फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जनपद मेरठ से जुड़े इस प्रकरण को मंजूरी दी गई। यह मामला जनपद मेरठ की तहसील मवाना के ग्राम नंगला गोसाई का है, जहां पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 99 हिंदू बंगाली परिवार झील की भूमि पर लंबे समय से अवैध रूप से निवास कर रहे हैं। कैबिनेट के फैसले के अनुसार इन सभी 99 परिवारों का पुनर्वासन जनपद कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील में किया जाएगा। ग्राम भैंसाया में पुनर्वास विभाग के नाम दर्ज 11.1375 हेक्टेयर (27.5097 एकड़) भूमि पर 50 परिवारों को तथा ग्राम ताजपुर तरसौली में पुनर्वास विभाग के नाम अंकित 10.530 हेक्टेयर (26.009 एकड़) भूमि पर शेष 49 परिवारों को बसाया जाएगा। प्रत्येक परिवार को 0.50 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी। यह भूमि प्रीमियम अथवा लीज रेंट पर 30 वर्ष के पट्टे पर दी जाएगी, जिसे आगे 30-30 वर्ष के लिए नवीनीकृत किया जा सकेगा। इस प्रकार पट्टे की अधिकतम अवधि 90 वर्ष होगी। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ विस्थापित परिवारों के सम्मानजनक और सुरक्षित पुनर्वासन को सुनिश्चित करेगा। लंबे समय से अस्थायी हालात में रह रहे इन परिवारों को अब स्थायी ठिकाना और भविष्य की सुरक्षा मिल सकेगी।