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दलित महिला हत्याकांड: मेरठ में सड़क पर उतरे परिजन, 5 घंटे से प्रदर्शन, बुलडोजर एक्शन की मांग

मेरठ यूपी के मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित महिला की हत्या और बेटी के अपहरण के मामले के विरोध में शुक्रवार को पांच घंटे बीत जाने के बाद भी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आ सका है। मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा जारी है। पीड़ित परिजन आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, उनके घरों पर बुलडोजर चलाने और कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। परिजनों का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक वे सुनीता का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। अधिकारी उन्हें समझा रहे है, लेकिन वे उनकी किसी बात की मानने के लिए राजी नहीं है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद है। वहीं सपा की महिला नेता ने एसपी को चूड़ियां सौंपकर विरोध जताया है।   उधर, अधिकारियों ने समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान, आजाद समाज पार्टी के जिला अध्यक्ष व कार्यकर्ताओं सहित अन्य नेताओं को गांव में प्रवेश की अनुमति दे दी। सभी नेता पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात कर रहे हैं और उन्हें न्याय का भरोसा दिला रहे हैं। गांव में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी परिजनों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई सहमति नहीं बन सकी थी।प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि परिजन तत्काल कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। यूपी के मेरठ में दलित युवती का अपहरण के बाद उसकी मां की हत्या के मामले बवाल बढ़ गया है। पांच घंटे से हंगामा जारी है। संजीव बालियान पहुंचे कपसाड़ कपसाड़ गांव में युवती के अपहरण व विरोध पर उसकी मां की हत्या को लेकर बवाल मचा हुआ है। सभी दलों के नेता पीड़ितो का दर्द बांटने गांव पहुंच रहे है। भाजपा की तरफ से शुक्रवार दोपहर में पूर्व सांसद संजीव बालियान गांव पहुंचे। उन्होंने पीड़ित पक्ष को कार्यवाही का भरोसा दिलाया। सपा नेत्री ने एसपी को सौंपी चूड़ियां कपसाड़ पहुंची सपा नेत्री नेहा गौड़ ने पुलिस प्रशासन को आड़े हाथ लिया। उन्होंने एसपी देहात अभिजीत सिंह को चूड़ियां भेट की। एसपी चूड़ियां साथ लेकर चले गए।  

योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद जारी की गई जीसीसी की एसओपी

जीसीसी इकाइयों को भूमि पर मिलेगी फ्रंट-एंड सब्सिडी पूर्वांचल और बुंदेलखंड में 50% तक भूमि सब्सिडी का प्रावधान गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में 30%, पश्चिमांचल–मध्यांचल में 40% सब्सिडी किराये या को-वर्किंग स्पेस पर नहीं मिलेगी कोई सब्सिडी समय पर परियोजना पूरी न होने पर वसूली जाएगी 12% ब्याज के साथ सब्सिडी की राशि लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम आउठाया है। इसके तहत पात्र इकाइयों को भूमि खरीद पर फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी दी जाएगी। यह व्यवस्था हाल ही में कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई एसओपी में शामिल की गई है। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग दर पर सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। पूर्वांचल और बुंदेलखंड में निवेश को प्रोत्साहन योगी सरकार की नीति के अनुसार गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद जनपदों में स्थापित होने वाली पात्र जीसीसी इकाइयों को 30 प्रतिशत भूमि सब्सिडी मिलेगी। पश्चिमांचल (गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद को छोड़कर) तथा मध्यांचल क्षेत्र में यह सब्सिडी 40 प्रतिशत होगी। वहीं पूर्वांचल और बुंदेलखंड में निवेश को और प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से 50 प्रतिशत तक भूमि सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है। इससे इन क्षेत्रों में नए निवेश और रोजगार के अवसरों में तेजी आने की उम्मीद है। सरकारी भूमि पर इकाई की स्थापना को प्राथमिकता यह सब्सिडी केवल उन्हीं इकाइयों को मिलेगी, जो राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण, विकास प्राधिकरण, शहरी निकायों या किसी अन्य सरकारी एजेंसी से भूमि प्राप्त करेंगी। इस व्यवस्था का स्पष्ट उद्देश्य सरकारी भूमि के माध्यम से औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है। यदि कोई इकाई किराये के परिसर या को-वर्किंग स्पेस में कार्य करेगी तो ऐसी परियोजनाओं को भूमि सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा। निर्धारित समय सीमा में प्रोजेक्ट पूरा करने पर जोर सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सब्सिडी लेने के बाद परियोजना निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करनी होगी। पात्र इकाइयों को दी गई भूमि निर्धारित अवधि तक या वाणिज्यिक संचालन शुरू होने तक संबंधित सरकारी निकाय के पक्ष में मॉर्टगेज रहेगी। यदि समयसीमा में परियोजना पूरी नहीं होती है तो दी गई भूमि सब्सिडी की राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस वसूल की जा सकती है। सब्सिडी का व्यय औद्योगिक विकास विभाग द्वारा वहन किया जाएगा। जीसीसी इकाइयों की स्थापना में आएगी तेजी सरकार का मानना है कि इस प्रोत्साहन नीति से प्रदेश में जीसीसी इकाइयों की स्थापना तेज होगी, आईटी और सेवा आधारित उद्योगों में विस्तार होगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। नीति में क्षेत्रवार सब्सिडी दरें तय कर पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में अधिक निवेश आकर्षित करने पर विशेष जोर दिया गया है।

चिकनकारी की कहानी कहने वाली लखनऊ की फिल्म ‘अंजुमन’ का राष्ट्रीय संरक्षण

  लखनऊ प्रसिद्ध फिल्मकार मुज़फ़्फ़र अली ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान देते हुए अपनी पुरस्कार-विजेता हिंदी फिल्म अंजुमन (1986) की दुर्लभ 35 मिमी रिलीज़ प्रिंट नेशनल फ़िल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) – नेशनल फ़िल्म आर्काइव ऑफ़ इंडिया (NFAI) को दान की है। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में श्री मुज़फ़्फ़र अली ने यह प्रिंट NFDC के प्रबंध निदेशक श्री प्रकाश मगदूम को औपचारिक रूप से सौंपी। फिल्म अंजुमन का उत्तर प्रदेश, विशेषकर लखनऊ से गहरा सांस्कृतिक संबंध है। फिल्म की अधिकांश शूटिंग पुराने लखनऊ में की गई थी और यह शहर की तहज़ीब, नफ़ासत और पारंपरिक हस्तशिल्प परंपरा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। यह फिल्म लखनऊ की प्रसिद्ध चिकनकारी कारीगरी से जुड़ी महिलाओं के जीवन को संवेदनशीलता के साथ चित्रित करती है तथा उनकी उत्कृष्ट कला के बावजूद उन्हें झेलनी पड़ने वाली सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को उजागर करती है। वर्ष 1986 में अंजुमन इंडियन पैनोरमा की आधिकारिक चयनित फिल्मों में शामिल रही। इसके साथ ही फिल्म को वैंकूवर फ़िल्म फ़ेस्टिवल और तेहरान फ़िल्म फ़ेस्टिवल जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रदर्शित किया गया। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय सराहना के बावजूद फिल्म को व्यावसायिक रूप से सिनेमाघरों में प्रदर्शित नहीं किया जा सका। इस अवसर पर श्री मुज़फ़्फ़र अली ने कहा कि राष्ट्रीय फ़िल्म विरासत मिशन के अंतर्गत NFDC–NFAI द्वारा किया जा रहा संरक्षण कार्य फ़िल्म जगत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सेल्युलॉइड माध्यम अत्यंत नाज़ुक होता है और समय के साथ रंगों व छवियों का नष्ट होना अत्यंत पीड़ादायक है। उनके अनुसार, फ़िल्म संरक्षण का यह कार्य व्यवसाय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक सेतु का निर्माण है, जिसे केवल राष्ट्र की व्यापक दृष्टि से ही संभव बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंजुमन जैसी फिल्म, जो लखनऊ और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा को दर्शाती है, उसका सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना आवश्यक है। NFDC के प्रबंध निदेशक श्री प्रकाश मगदूम ने कहा कि देश की सिनेमाई विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है। भारत सरकार का राष्ट्रीय फ़िल्म विरासत मिशन, जिसे NFDC–NFAI द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है, इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अंजुमन की प्रति दान करने के लिए श्री मुज़फ़्फ़र अली का आभार व्यक्त करते हुए फ़िल्म उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों से अपील की कि वे भी फिल्मों और फ़िल्म से संबंधित सामग्री को संरक्षण हेतु आगे आएँ। उल्लेखनीय है कि फिल्म अंजुमन भारतीय सिनेमा में कई कलात्मक उपलब्धियों के लिए जानी जाती है। फिल्म की मुख्य अभिनेत्री शबाना आज़मी ने संगीतकार ख़य्याम के निर्देशन में अपने स्वयं के प्लेबैक गीत गाए थे, जिनके बोल शायर शाहरीयार और दिवंगत फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने लिखे थे। इस प्रकार, अंजुमन न केवल एक महत्वपूर्ण सिनेमाई कृति है, बल्कि उत्तर प्रदेश—विशेषकर लखनऊ—की सांस्कृतिक, सामाजिक और कलात्मक विरासत का एक अमूल्य दस्तावेज़ भी है।

घर बनाने वालों को झटका: यूपी में सरिया और ईंटों की कीमतों ने तोड़ा रिकॉर्ड

लखनऊ अपना सपनों का घर बनाने का बजट बना रहे लोगों के लिए बुरी खबर है। निर्माण सामग्री की कीमतों में आई हालिया बढ़ोतरी ने आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। मकान की मजबूती के लिए सबसे जरूरी माने जाने वाले सरिया (Steel) और ईंटों के दामों में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है, जिससे निर्माण लागत में बड़ा अंतर आ गया है। सरिया की कीमतों में लगी आग बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कॉलम, बीम और छत ढलाई में इस्तेमाल होने वाली सरिया के दाम 52 रुपये से बढ़कर सीधे 57 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए हैं। सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाली 8 एमएम (8mm) की सरिया, जिससे रिंग बनाई जाती है, अब 59 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रही है। हालांकि, उत्तर प्रदेश सीमेंट व्यापार संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्याम मूर्ति गुप्ता का मानना है कि ये दाम बहुत दिनों तक टिकेंगे नहीं और जल्द ही इसमें 2 से 3 रुपये की गिरावट देखने को मिल सकती है।   सीमेंट पर बढ़ रहा है दबाव सीमेंट के बाजार में फिलहाल संशय की स्थिति बनी हुई है। कुछ ट्रेडर्स ने प्रति बैग 5 रुपये की बढ़ोत्तरी कर दी है, वहीं नामी कंपनियां प्रति बैग 10 रुपये बढ़ाने का दबाव बना रही हैं। फिलहाल बाजार में खपत कम होने के कारण कंपनियां पूरी तरह दाम बढ़ाने में सफल नहीं हो पा रही हैं, लेकिन भविष्य में इसके और महंगे होने के स्पष्ट संकेत हैं। प्रमुख ब्रांड्स के वर्तमान दाम (अनुमानित)     ACC: 370 रुपये     अल्ट्राटेक: 360 रुपये     प्रिज्म/माईसेम: 350 रुपये     बिरला सम्राट: 340 रुपये ईंट, मौरंग और बालू भी हुए महंगे सिर्फ सरिया ही नहीं, ईंटों के दाम भी सात हजार से बढ़कर 8,000 रुपये प्रति हजार तक पहुंच गए हैं। वहीं, प्लास्टर में इस्तेमाल होने वाली अच्छी मौरंग अब 60 से 62 रुपये प्रति फीट और स्लैब वाली मौरंग 58 रुपये प्रति फीट के भाव पर है। बालू की कीमतों में भी 1 से 2 रुपये का इजाफा हुआ है।   कहां मिली राहत? निर्माण सामग्री के इस बढ़ते ग्राफ के बीच गिट्टी के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं। पौना इंच की कबराई गिट्टी 52 से 53 रुपये प्रति फीट पर टिकी हुई है, जबकि जीरा गिट्टी 43 रुपये प्रति फीट के पुराने रेट पर ही उपलब्ध है। जानकारों का कहना है कि यदि सीमेंट और सरिया के दामों में यह अस्थिरता जारी रही, तो मध्यवर्गीय परिवारों के लिए अपना घर पूरा करना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। फिलहाल बाजार की स्थिति को देखते हुए बजट में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।

पुलिस बैरिकेडिंग पर बवाल: अतुल प्रधान को रूबी के घर जाने से रोका, समर्थकों से झड़प

मेरठ मेरठ में रूबी के अपहरण और उसकी मां की हत्या के बाद से शहर में तनाव की स्थिति बन गई है। गुरुवार को सपा विधायक अतुल प्रधान को पुलिस फोर्स ने कपसाड गांव जाने से रोक दिया। सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान अपने समर्थकों के साथ दलित महिला की हत्या और बेटी के अपहरण के मामले में अंतिम संस्कार में शामिल होने गांव जा रहे थे। गंगनर पटरी के विधायक अतुल प्रधान और समर्थकों को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर ब्लॉक कर दिया। इस दौरान पुलिस के साथ विधायक और उनके समर्थकों के धक्कामुक्की हुई। हालांकि फोर्स ने विधायक को आगे नहीं बढ़ने दिया। काफी विवाद और कहासुनी के बाद विधायक मौके पर ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान काफी हंगामा हुआ।   सपा विधायक अतुल प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "खुलेआम तालीबानी ढंग से एक महिला की हत्या कर दी गयी और उसकी बेटी को दबंग उठाकर ले गये और उस परिवार के दुख में स्थानीय विधायक होने के बावजूद में शामिल नही होने दे रही है। पुलिस गुड़ागर्दी दुख में शामिल होने वाले को दिखा रही है। वो अपहरणकर्ता कहां छुपे बैठे है जिन्होने उस मां की खुले आम हत्या कर दी। जो लोग न्याय से वंचित करने का काम करने का प्रयास कर रहे है वो लोग जान ले हम परिवार को न्याय मिलने तक संघर्ष करेगे।" जघन्य घटना के विरोध में सपा का कमिश्नरी चौराहे पर प्रदर्शन जघन्य अपराध के विरोध में कमिश्नरी पार्क पर सफाई होने पार्टी के प्रदेश सचिव विपिन चौधरी के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बेटी की सकुशल बरामदगी करने, दोषियों की गिरफ्तारी के साथ खिलाफ कठोरता करवाई करने की मांग की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस में तीखी झड़प भी हुई| सपाईयों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया। प्रदर्शनकारियों ने बेटी के अपहरण कर ले जाने एवं विरोध करने पर मां की हत्या की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। कहां की पुलिस अभी तक बेटी को बरामद नहीं कर पाई है और नहीं आरोपियों की गिरफ्तारी कर सकी है। सपा प्रदेश सचिव विपिन चौधरी एवं सपा वरिष्ठ नेत्री नेहा गौड़ ने कहा कि इस मामले में पुलिस प्रशासन और सरकार सख्ती के साथ कार्रवाई करे। बुलडोजर से लेकर अन्य सख्त कार्रवाई करें।  

अशोक लेलैंड की ईवी निर्माण यूनिट उत्तर प्रदेश को बनाएगी स्वच्छ और हरित परिवहन के क्षेत्र में अग्रणीः रक्षा मंत्री

विकसित भारत का रास्ता, विकसित उत्तर प्रदेश से होकर जाता हैः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अशोक लेलैंड की ईवी निर्माण यूनिट उत्तर प्रदेश को बनाएगी स्वच्छ और हरित परिवहन के क्षेत्र में अग्रणीः रक्षा मंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में आर्थिक विकास का पर्याय बन चुका है उत्तर प्रदेशः राजनाथ सिंह मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत मुहिम का सकारात्मक परिणाम है यह मैन्युफैक्चरिंग यूनिटः राजनाथ सिंह लखनऊ  प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को अशोक लेलैंड कंपनी के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) निर्माण की नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के उद्घाटन अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी। यह यूनिट न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश को भी स्वच्छ, हरित परिवहन और भविष्य की तकनीक के विकास में अग्रणी बनाएगी। साथ ही युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार के साथ ईवी की भविष्य की तकनीक में स्किल डेवलपमेंट प्राप्त करने का अवसर भी प्रदान करेगी। मुझे पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने वर्ष 2047 में विकसित भारत का जो लक्ष्य तय किया है, उसका रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर ही जाएगा। विकसित भारत का रास्ता, विकसित उत्तर प्रदेश से होकर ही जाता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश का जनप्रतिनिधि होने के नाते मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि यह लखनऊ की भूमि है, जो सभी को आसानी से अपने हृदय में जगह देती है और पूरा सहयोग करती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, जो कभी बीमारू राज्य कहा जाता था, जो गुंडों और अपराधियों के नाम से पहचाना जाता था, आज वहां उद्योग की बड़ी-बड़ी इकाइयां स्थापित हो रही हैं। इसके लिए मैं उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई देना चाहूंगा। उन्होंने जिस तरह से प्रदेश की कानून-व्यवस्था और औद्योगिक निवेश के लिए सकारात्मक माहौल तैयार किया है, वह प्रशंसनीय है। आज उत्तर प्रदेश आर्थिक विकास का पर्याय बन चुका है। यहां न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियां बढ़-चढ़कर निवेश कर रही हैं। जिस तरह से मुख्यमंत्री फॉर्च्यून-500 कंपनियों को उत्तर प्रदेश में लेकर आए हैं,  मैं उनकी सराहना करता हूं। डिफेंस निर्माण के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश सेना के लिए गोला-बारूद से लेकर एयरक्राफ्ट और ब्रह्मोस जैसी मिसाइल का निर्माण कर रहा है।  रक्षा मंत्री ने कहा कि इस इकाई की स्थापना में जहां 60 महीने लगने थे, वहां आप सभी ने मिलकर रिकॉर्ड 18 महीने में इसे पूरा कर लिया। इसके लिए हिंदुजा ग्रुप, अशोक लेलैंड और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निःसंदेह प्रशंसा के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल भविष्य का परिवहन है और आने वाले समय में पेट्रोलियम आधारित वाहनों की संख्या धीरे-धीरे कम होती जाएगी। ऐसे में उत्तर प्रदेश में अशोक लेलैंड की यह यूनिट न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश को स्वच्छ और हरित परिवहन के साथ भविष्य की तकनीक के क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि दिलाएगी।  रक्षा मंत्री ने कहा कि इस यूनिट के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं का स्किल डेवलपमेंट भी होगा जिससे प्रदेश के लाखों युवा आने वाले समय में रोजगार और अच्छी आय के लिए तैयार होंगे। उन्होंने बताया कि डबल इंजन की सरकार ने पिछले 11 वर्षों में जिस तरह देश में सड़कों का जाल बिछाया है, उसने औद्योगिक विकास का मार्ग प्रशस्त किया है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ मुहिम का सकारात्मक परिणाम है। आज भारत जिस गति से आर्थिक तरक्की कर रहा है, वह दिन दूर नहीं जब हम विकसित देशों की कतार में खड़े होंगे।  इस अवसर पर केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी उपस्थित रहे।

इश्क, कत्ल और राज़: कानपुर में प्रेमी ने 7 बच्चों की मां को मारकर गड्ढे में छुपाया शव, 8 महीने बाद सामने आई सच्चाई

कानपुर यूपी के कानपुर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां एक महिला की फिल्म दृश्यम की तरह हत्या कर दी गई। दरअसल, महिला की हत्या कर उसका शव जमीन में दफना दिया गया। मामले का खुलासा होने पर पुलिस ने हत्यारोपी और उसके भाई को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित गोरेलाल ने बताया कि महिला के संबंध एक किसी और से हो गए थे। इसके अलावा वह उम्र में भी 12 साल बढ़ी थी। इसके अलावा उसके पहले से ही 7 बच्चे थे। इसी वजह से पीछा छुड़ाने के लिए उसकी हत्या कर तीन फीट के गड्ढे में शव दफना दिया।   ये मामला सतेजी थाना क्षेत्र के टिकवांपुर गांव का है। यहां रहने वाले रामबाबू शंखवार को कैंसर था, पांच साल पहले उसकी मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद पत्नी रेशमा सात बच्चों को छोड़कर पड़ोसी गोरेलाल शंखवार के साथ रहने लगी थी। अप्रैल में वह गोरेलाल के साथ इटावा गेहूं कटाई करने गई थी, लेकिन वहां से लौटने के बाद किसी को नहीं मिली। इसके कुछ महीने बाद 29 नवंबर को एक शादी समारोह में महिला के बेटे बबलू ने प्रेमी से मां के बारे में पूछा तो उसने कहा कि अब वह कभी लौटकर नहीं आएगी। इस पर बब्लू ने पांच जनवरी को एसीपी के यहां शिकायत लेकर पहुंचा और सारी बात बताते हुए न्याय की गुहार लगाई। एसीपी के निर्देश पुलिस ने आरोपित को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पहले तो उसने इधर-उधर की बातें करके गुमराह करने की कोशिश की लेकिन शख्ती से पूछताछ करने पर पर टूट गया और रेशमा की हत्या कर शव दफनाने की बात कही। उसने बताया कि 7 बच्चों की मां रेशम उससे 12 साल बड़ी थी। इसके अलवा उसके संबंधं भी किसी और के साथ हो गए थे। इसी से पीछा छुड़ाने के लिए उसने ये कदम उठाया। आरोपित की बात सुनकर पुलिसकर्मियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। आरोपित की निशानदेही पर महिला का कंकाल बरामद कर लिया। उधर, इस मामले में एसीपी कृष्णकांत यादव ने बताया कि गोरेलाल को जेल भेज दिया गया है। वहीं, ग्रामीण की मानें तो बच्चों को छोड़कर प्रेमी संग रहने की जिद पर अड़ी रेशमा का घर में विवाद भी हुआ था।  

महिला की हत्या से मेरठ में बवाल: छावनी में तब्दील इलाका, अतुल प्रधान पर प्रशासन ने लगाई रोक

मेरठ यूपी के मेरठ के सरधना क्षेत्र के कपसाढ़ गांव में तनाव चरम पर है। रूबी की मां की हत्या के बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने से साफ मना कर दिया है। गांव में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया है। ​परिजनों का आक्रोश प्रशासन के आश्वासनों पर भारी पड़ रहा है। पीड़ित परिवार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक तीन शर्तें पूरी नहीं होतीं, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। उधर, पीड़िता के घर जा रहे सपा विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने रोक दिया।   परिजन और ग्रामीणों की मांग है कि पुलिस मुख्य आरोपियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजे।लापता लड़की को सकुशल वापस लाया जाए। साथ ही आरोपियों के अवैध निर्माण पर प्रशासन का बुलडोजर चलना चाहिए। ​घटनास्थल पर जिलाधिकारी डॉ वीके सिंह, डीआईजी डॉ विपिन टाडा समेत जिले के तमाम आला अधिकारी मौजूद हैं। पिछले कई घंटों से अधिकारियों और परिजनों के बीच बातचीत का दौर चल रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। अधिकारी परिवार को समझाने और कानून का पालन करने की अपील कर रहे हैं, जबकि ग्रामीण और परिजन 'न्याय नहीं तो अंतिम संस्कार नहीं' के नारे पर अड़े हैं। ​ गांव में भारी सुरक्षा बल तैनात ​किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कपसाढ़ गांव में कई थानों की फोर्स और पीएसी तैनात कर दी गई है। गांव की गलियों में सन्नाटा है और पुलिस लगातार गश्त कर रही है। इलाके में व्याप्त तनाव को देखते हुए खुफिया विभाग भी सक्रिय है। ​प्रशासन कोशिश कर रहा है कि परिजनों को मनाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई जा सके, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। विधायक अतुल प्रधान को कपसाड जाने से रोका, पुलिस से धक्कामुक्की विधायक अतुल प्रधान को पुलिस फोर्स ने कपसाड गांव जाने से रोक दिया। सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान अपने समर्थकों के साथ कपसाड में दलित महिला की हत्या और बेटी के अपहरण के मामले में अंतिम संस्कार में शामिल होने गांव जा रहे थे।गंगनर पटरी के विधायक अतुल प्रधान और समर्थकों को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर ब्लॉक कर दिया। इस दौरान पुलिस के साथ विधायक और उनके समर्थकों के धक्कामुक्की हुई। हालांकि फोर्स ने विधायक को आगे नहीं बढ़ने दिया। काफी विवाद और कहासुनी के बाद विधायक मौके पर ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान काफी हंगामा हुआ। मां की फरसे से हत्या कर बेटी का कर लिया था अपहरण दरअसल, गुरुवार सुबह आठ बजे सुनीता, अपनी 21 साल की बेटी रूबी के साथ गन्ना छीलने खेत पर जा रही थीं। गांव के बाहर रजवाहा पुल पर गांव का रहने वाला पारस सोम ने अपने साथी सुनील और दो अन्य के साथ मिलकर मां-बेटी पर हमला कर रूबी का अपहरण कर लिया। रूबी की मां आरोपियों से भिड़ गई तो उनके सिर पर फरसा से वार कर दिया और आरोपी फरार हो गए। घायल महिला को लोगों ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां दोपहर में उनकी मौत हो गई। उधर, वारदात के बाद गांव में तनाव फैल गया। मृतका के बेटे नरसी की ओर से पारस सोम और सुनील को नामजद करते हुए कुछ अज्ञात पर मां की हत्या और बहन के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया गया है।  

योगी आदित्यनाथ सरकार की औद्योगिक नीति को मिला उद्योग जगत का भरोसा

लखनऊ में हिंदुजा ग्रुप की कंपनी अशोक लेलैंड का इलेक्ट्रिक वाहन संयंत्र शुरू योगी आदित्यनाथ सरकार की औद्योगिक नीति को मिला उद्योग जगत का भरोसा योगी सरकार के सहयोग से रिकॉर्ड समय में इस संयंत्र को तैयार किया जाना संभव हुआ : धीरज हिंदुजा  उत्तर प्रदेश बना हरित परिवहन और निवेश का नया केंद्र लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को वाहन निर्माता कंपनी अशोक लेलैंड के नवीन विनिर्माण संयंत्र के उद्घाटन के साथ ही वाहन निर्माण और औद्योगिक विकास की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई। यह संयंत्र विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन पर केंद्रित है, जिससे लखनऊ को हरित औद्योगिक मानचित्र पर एक नई पहचान मिलने जा रही है। अशोक लेलैंड के चेयरमैन धीरज हिंदुजा ने कहा कि योगी सरकार के सहयोग और प्रशासनिक तत्परता के कारण रिकॉर्ड समय  में इस संयंत्र को तैयार किया जाना संभव हो सका। योगी सरकार के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से निवेश को प्रोत्साहन उद्घाटन के अवसर पर अशोक लेलैंड के चेयरमैन धीरज हिंदुजा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में यह कंपनी का पहला विनिर्माण संयंत्र है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि औद्योगिक विकास और निवेश के लिए प्रदेश में एक सुदृढ़ और भरोसेमंद तंत्र तैयार किया गया है। आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, मजबूत कनेक्टिविटी, प्रभावी कानून व्यवस्था और जवाबदेह प्रशासन आज उत्तर प्रदेश की पहचान है जो उद्योगपतियों और निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। प्रदेश में निवेश के साथ ही इससे बड़ी संख्या में रोजगार का भी सृजन होगा। उन्होंने इस परियोजना को धरातल पर उतारने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्पष्ट नीति और मजबूत नेतृत्व के साथ कोई भी लक्ष्य दूर नहीं होता। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आज उत्तर प्रदेश ‘फियरलेस बिजनेस’, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ट्र्स्ट ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए जाना जाता है। उल्लेखनीय है कि अशोक लेलैंड की स्थापना वर्ष 1948 में हुई थी और आज कंपनी 15 देशों में भारतीय विनिर्माण क्षमता और तकनीकी सामर्थ्य का वैश्विक स्तर पर प्रतिनिधित्व कर रही है। निवेश के लिए स्थायित्व और भरोसे का माहौल धीरज हिंदुजा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रक्षा तंत्र की मजबूती और स्थायित्व से देश में निवेश का भरोसेमंद वातावरण बना है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व में उद्योगों के लिए विकसित सकारात्मक माहौल की सराहना करते हुए कहा कि स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस और प्रभावी पहल की जा रही है। इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में देश लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। भविष्य की जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया गया संयंत्र अशोक लेलैंड कंपनी के अनुसार लखनऊ का यह संयंत्र भविष्य को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। आधुनिक विनिर्माण तकनीक और डिजिटल प्रक्रियाओं के माध्यम से यहां तीव्र गति से इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन किया जा सकेगा।  स्थानीय समुदाय के लिए लाभ और सामाजिक पहल अशोक लेलैंड के चेयरमैन धीरज हिंदुजा ने कहा कि जहां भी अशोक लेलैंड का संयंत्र स्थापित होता है, वहां स्थानीय समुदाय को प्रत्यक्ष लाभ मिलता है। उत्तर प्रदेश में भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। उन्होंने कंपनी की रोड टू स्कूल पहल का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रदेश में सरकारी स्कूलों के 25 हजार से अधिक छात्रों को पोषण और शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

योगी सरकार के संकल्प का लाभ उठाकर अशोक लीलैंड ने दो वर्षों से भी कम समय में निवेश को धरातल पर उतारा

निवेश का नया अध्याय लिख रहा उत्तर प्रदेश, और तेज हुई औद्योगिक रफ्तार योगी सरकार के संकल्प का लाभ उठाकर अशोक लीलैंड ने दो वर्षों से भी कम समय में निवेश को धरातल पर उतारा प्रदेश सरकार के प्रयासों से यूपी में निवेश केवल एमओयू तक सीमित नहीं, बल्कि प्लांट और प्रोडक्शन में बदल रहा उत्तर प्रदेश अब बड़े निवेशकों की पहली पसंद बन चुका है लखनऊ  उत्तर प्रदेश अब निवेश और औद्योगिक विकास के नए केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। बीते कुछ वर्षों में राज्य सरकार द्वारा किए गए व्यापक नीतिगत और विनियामक सुधारों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। इसी का ताजा उदाहरण है अशोक लीलैंड का नया प्लांट। यह प्लांट न केवल औद्योगिक प्रगति का प्रतीक है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि उत्तर प्रदेश अब बड़े निवेशकों की पहली पसंद बन चुका है। अशोक लीलैंड के इस प्लांट में लगभग 252 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इस परियोजना के लिए ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी 20 फरवरी 2024 को हुई थी। इतने कम समय में परियोजना का धरातल पर आ जाना इस बात का प्रमाण है कि अब निवेश केवल एमओयू तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि तेजी से प्लांट, उत्पादन और रोजगार में बदल रहा है। इस प्लांट से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को नया बढ़ावा मिलेगा। राज्य में निवेश की यह सफलता किसी एक परियोजना तक सीमित नहीं है। वर्ष 2018 में आयोजित उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स समिट में प्रदेश को 4.28 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे। इसके बाद वर्ष 2023 में आयोजित यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ने नया रिकॉर्ड बनाया, जिसमें करीब 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश आशय पत्र प्राप्त हुए। कुल मिलाकर पौने 9 वर्षों में 45 लाख करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है, जिसे चार ग्राउंड ब्रेकिंग समारोहों के माध्यम से धरातल पर उतारने की ठोस शुरुआत हुई है।   अब तक 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की 16,000 से अधिक परियोजनाओं के लिए ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह हो चुके हैं। इनमें से लगभग 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली 8,300 से अधिक परियोजनाएं वाणिज्यिक संचालन के चरण में पहुंच चुकी हैं। वहीं करीब 10 लाख करोड़ रुपये मूल्य की 8,100 से अधिक परियोजनाएं क्रियान्वयनाधीन हैं। यही नहीं, योगी सरकार जीबीसी 5 के माध्यम से फिर 6 लाख करोड़ से अधिक के निवेश को जल्द ही जमीन पर उतारने जा रही है। ये आंकड़े बताते हैं कि निवेश केवल कागजों पर नहीं, बल्कि हकीकत में उद्योग और रोजगार में बदल रहा है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक भी इस प्रगति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में मार्च 2025 में विनिर्माण का सूचकांक 167.97 और सामान्य सूचकांक 157.73 दर्ज किया गया। यह बताता है कि प्रदेश में औद्योगिक उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। अशोक लीलैंड का प्लांट इस पूरी यात्रा का मजबूत प्रतीक है। यह दिखाता है कि उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए केवल नीतियां नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की मजबूत व्यवस्था भी मौजूद है। तेज अनुमतियां, सिंगल विंडो सिस्टम, उद्योग-अनुकूल वातावरण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।