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योगी सरकार ने 2000 करोड़ के ड्रग रैकेट को तोड़ा, अवैध संपत्तियों पर होगा बुलडोजर एक्शन

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अब तक की सबसे कड़ी और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत चलाए जा रहे इस विशेष अभियान में कोडीनयुक्त कफ सीरप के जरिए युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह की कमर तोड़ दी गई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सख्त रुख ने साफ कर दिया है कि अब इस काले धंधे से जुड़े लोगों को किसी भी तरह की कानूनी राहत नहीं मिलेगी। हाईकोर्ट से सरकार को बड़ी मजबूती इलाहाबाद हाईकोर्ट में चार दिनों तक चली गहन सुनवाई के बाद कोर्ट ने 22 आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। यह फैसला न केवल जांच एजेंसियों के लिए बड़ी राहत है, बल्कि यह भी संकेत है कि न्यायपालिका इस अपराध को केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि समाज के खिलाफ गंभीर हमला मान रही है। अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी की दलीलों से सहमत होते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कफ सिरप का अवैध भंडारण और तस्करी सीधे तौर पर NDPS एक्ट के अंतर्गत आता है। आरोपियों के उस तर्क को खारिज कर दिया गया, जिसमें इसे केवल लाइसेंस से जुड़ा तकनीकी मामला बताया जा रहा था। संगठित अपराध, जिसका निशाना पूरी पीढ़ी सरकार ने कोर्ट के सामने यह मजबूती से रखा कि यह मामला साधारण तस्करी का नहीं, बल्कि युवाओं को नशे की गिरफ्त में झोंकने वाले संगठित अपराध का है। शुभम जायसवाल, भोला प्रसाद और विभोर राणा जैसे प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तारी से किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी गई। अक्टूबर 2025 से शुरू हुआ यह विशेष अभियान अब देश में नशीली दवाओं के खिलाफ सबसे बड़े अभियानों में गिना जा रहा है। STF, FSDA और राज्य पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नेपाल से लेकर बांग्लादेश तक फैले लगभग 2000 करोड़ रुपये के ड्रग सिंडीकेट की परत-दर-परत पोल खुल चुकी है। फर्जी कंपनियों से मनी लॉन्ड्रिंग का जाल जांच में सामने आया है कि सीए विष्णु अग्रवाल और बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह जैसे लोगों ने 140 से अधिक फर्जी कंपनियों के माध्यम से अवैध कमाई को वैध दिखाने का बड़ा तंत्र खड़ा किया था। झारखंड, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा तक फैले इस नेटवर्क से जुड़े अहम सबूतों को मिटाने की कोशिशें भी जांच एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर दीं। आर्थिक रीढ़ तोड़ने की तैयारी पूरी योगी सरकार अब इस नेटवर्क की आर्थिक ताकत पर सीधा प्रहार कर रही है। केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर अपराधियों को पूरी तरह आर्थिक रूप से निष्क्रिय करने की रणनीति पर काम हो रहा है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 107 के तहत संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब तक 30 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज किया जा चुका है, जिनमें करोड़ों रुपये के लेन-देन के प्रमाण मिले हैं। अवैध निर्माणों पर बुलडोजर की तैयारी वाराणसी, कानपुर, लखनऊ और सहारनपुर में नशे की कमाई से खड़ी की गई अवैध संपत्तियों की पहचान कर ली गई है। प्रशासन ने संकेत दे दिए हैं कि जल्द ही इन निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी। यह पूरा अभियान साफ संदेश देता है कि उत्तर प्रदेश में युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के लिए न तो जमीन सुरक्षित है, न पैसा और न ही कानून से बचने का कोई रास्ता।  

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: उन्नाव रेप केस में कुलदीप सेंगर को जमानत, आजीवन कारावास पर स्टे

उन्नाव  दिल्ली हाईकोर्ट ने 2017 के उन्नाव रेप केस में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाते हुए उसे जमानत दे दी है। हालांकि, पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में सजायाफ्ता होने के कारण कुलदीप सेंगर जेल से बाहर नहीं आ पाएगा। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने मंगलवार को अपने फैसले में कुलदीप सेंगर की सजा को उसकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील लंबित रहने के दौरान निलंबित किया है। पेंडिंग अपील में ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें उन्हें 17 साल की लड़की के रेप के लिए दोषी ठहराया गया था। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी और 25 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने कई शर्तें लगाई हैं। जमानत के लिए कुलदीप सेंगर को 15 लाख रुपए का मुचलका भी देना होगा। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जब तक निचली अदालत के दोषी ठहराने के खिलाफ दाखिल अपील पर फैसला नहीं आ जाता, तब तक जमानत बरकरार रहेगी। हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर को आदेश दिया कि वह पीड़िता के 5 किलोमीटर के दायरे में न आए और जमानत की अवधि के दौरान दिल्ली में ही रहे। उसे हर सोमवार को पुलिस को रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है। पूर्व विधायक को जमानत के साथ अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करने और पीड़िता को कोई धमकी न देने की शर्तें भी रखी गई हैं। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा, "किसी भी शर्त का उल्लंघन करने पर जमानत रद्द कर दी जाएगी।" 2017 में उन्नाव की एक नाबालिग ने पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर पर अपहरण और रेप करने का आरोप लगाया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले में सेंगर की गिरफ्तारी हुई थी। अगस्त 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव बलात्कार मामले से जुड़े चार मामलों को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया और आदेश दिया कि इसकी सुनवाई प्रतिदिन के आधार पर की जाए और 45 दिनों के भीतर पूरी की जाए। दिसंबर 2019 में, निचली अदालत ने सेंगर को बलात्कार मामले में दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

मुख्यमंत्री ने कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज में आयोजित 134वीं वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के समापन पर छात्र-छात्राओं को दिया मूलमंत्र

लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए इतिहास के गौरवशाली क्षणों से प्रेरणा लेना आवश्यक है। इतिहास की गलतियों का समय पर परिमार्जन होना चाहिए, तभी समाज प्रगति करता है। यदि कहीं त्रुटि हुई है तो उसे सुधार करना होगा और अच्छे कार्यों को जीवन की प्रेरणा बनाकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी परंपराओं को पर्व-त्योहारों के माध्यम से संजोकर रखा है। देश में राजनीति अपना काम करती रही, लेकिन राजे रजवाड़ों और समाज के नेतृत्वकर्ताओं ने कभी हस्तक्षेप नहीं किया, बल्कि संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में योगदान दिया। मुख्यमंत्री योगी ने मंगलवार को कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज में आयोजित 134वीं वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के समापन अवसर पर विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को संबोधित किया। मुख्यमंत्री योगी ने की मार्च पास्ट की तारीफ मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मार्च पास्ट के दौरान विद्यार्थियों का अनुशासन, कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने का जज्बा और समर्पण देखकर ऐसा प्रतीत हुआ मानो नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आह्वान पर आजाद हिंद फौज के नौजवान देश की आजादी के लिए स्वयं को समर्पित कर रहे हों। उन्होंने कहा कि यह प्रयास सराहनीय है और इससे विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और आत्मविश्वास का विकास होता है। उन्होंने कहा कि मैं इस अवसर पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करूंगा इस संस्था के पूर्व अध्यक्ष कुंवर आनंद सिंह को, जिनके साथ मैंने कई बार इस संस्था के उन्नयन के बारे में चर्चा की। आज वे भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं है, मैं उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। समाज को जोड़ने में शिक्षा संस्थानों की भूमिका मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाज को तोड़ने वाले तत्व हमेशा मौजूद रहते हैं, लेकिन समाज को जोड़ने की जिम्मेदारी शिक्षण संस्थानों की होती है। वर्ष 1889 में जब इस संस्थान की स्थापना हुई होगी, तब देश की परिस्थितियां कठिन रही होंगी। उसी कालखंड में वंदे मातरम् जैसे विचारों ने लोगों के मन में स्वतंत्रता की चेतना जगाई। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद भी गुलामी को स्थायी मान लिया गया था, लेकिन बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपने उपन्यास आनंदमठ के माध्यम से वंदे मातरम् जैसी कालजयी रचना देश को दी। वर्ष 1896 में कांग्रेस के मंच से गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा इसे स्वर दिए जाने के बाद यह आजादी के आंदोलन का मंत्र बन गया। भारत की विरासत पर आधारित हाउस प्रणाली की सराहना मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज द्वारा विद्यार्थियों के लिए अजंता, नालंदा, तक्षशिला, सांची और उज्जैन जैसे ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों के नाम पर हाउस बनाना भारत की गौरवशाली परंपरा को जीवित रखने का उत्कृष्ट प्रयास है। तक्षशिला दुनिया के प्राचीनतम विश्वविद्यालयों में से एक रहा, जहां ढाई हजार वर्ष पहले ज्ञान, विज्ञान, आयुर्वेद और दर्शन की आधारशिला रखी गई। नालंदा की समृद्ध परंपरा, उज्जैन का खगोल ज्ञान और महाराज विक्रमादित्य का न्याय, अजंता और सांची की स्थापत्य विरासत आज भी भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक ऊंचाई का प्रमाण हैं। इन मूल्यों के आधार पर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का प्रयास सराहनीय है। ऐतिहासिक उपलब्धियों से जुड़ा महत्वपूर्ण वर्ष मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, यह वर्ष देश के लिए अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियों से जुड़ा हुआ है। गुरु तेगबहादुर जी की 350वीं शहादत, लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 350वीं जयंती, वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष, सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और भारतीय संविधान के 75 वर्ष पूरे होना देश के गौरवपूर्ण इतिहास की स्मृति कराते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के अयोध्या लौटने का उत्सव केवल अयोध्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश ने दीपावली के माध्यम से इसे अपनाया। होली सामाजिक समता का पर्व बनी। रामनवमी, जन्माष्टमी, शिवरात्रि और रक्षाबंधन जैसे पर्वों ने समाज को जोड़ने का कार्य किया। हमारे पूर्वजों ने इन पर्वों को परंपरा के रूप में संरक्षित कर पीढ़ियों तक आगे बढ़ाया। बच्चों को दिया सफलता का मूलमंत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनुशासन और परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। नियमित पढ़ाई के साथ किसी न किसी रचनात्मक गतिविधि से जुड़ना चाहिए। समय पर उठना, समय पर सोना और संयमित दिनचर्या स्वस्थ जीवन का आधार है। उन्होंने सोशल मीडिया और स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह दी और कहा कि आधे घंटे से अधिक समय तक इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल न करें। भाषा व ज्ञान का विकास समाचार पत्रों और अच्छी पुस्तकों के अध्ययन से होता है, इसलिए पढ़ने की आदत विकसित करने के साथ लाइब्रेरी में जाकर पौराणिक व ऐतिहासिक रचनाओं को पढ़ें। खेल, फिटनेस और तकनीक पर जोर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में देश में खेलकूद को नई ऊंचाइयां मिली हैं। खेलो इंडिया, फिट इंडिया और सांसद खेलकूद प्रतियोगिताओं के माध्यम से खेल संस्कृति को बढ़ावा मिला है। हर गांव में खेल का मैदान और स्टेडियम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ओपन एयर जिम और शारीरिक गतिविधियों को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक के नए युग में हम प्रवेश कर रहे हैं। हमें तकनीक को आत्मसात करना है। तकनीक हमारा वाहक बने, हमें तकनीक का वाहक नहीं बनना है। उन्होंने कहा कि एआई, ड्रोन और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में अवसर हैं, जिनके प्रति जागरूकता आवश्यक है। साथ ही, वैश्विक परिदृश्य में हो रहे उन्नयन कार्यों के प्रति भी अपडेट रहना चाहिए। कानाफूसी करने वालों से रहने की सलाह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाज में कुछ लोग भ्रम फैलाने का कार्य करते हैं। ऐसे लोगों से दूरी बनाकर अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहना चाहिए। हार से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही सफलता का मार्ग है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को कप और शील्ड देकर सम्मानित किया। सम्मानित होने वाले प्रमुख छात्र-छात्राओं में दिनेश प्रताप सिंह, प्रांजल त्रिपाठी, देवराज सिंह पटेल, आयुषी सिंह और सार्थक त्रिपाठी शामिल रहे। कार्यक्रम में 11 गोरखा राइफल्स के बैंड ने परेड में  मुख्यमंत्री को सलामी दी। इस दौरान केन्द्रीय मंत्री तथा ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन के अध्यक्ष कीर्तिवर्धन सिंह, पूर्व विधान परिषद सदस्य राकेश प्रताप सिंह, कॉलेज के प्रबंधक मनीष वर्धन सिंह, प्रबंध समिति के सदस्य विनय कुमार … Read more

राष्ट्र प्रेरणा स्थल म्यूजियम के क्यूरेशन का काम पूरा, प्रधानमंत्री करेंगे 25 दिसंबर को उद्घाटन

एलडीए ने 98000 वर्ग फुट के क्षेत्र में बनाया है म्यूजियम ब्लॉक, पैन इंटेल कॉम ने किया है क्यूरेशन म्यूजियम में राष्ट्र नायकों को समर्पित 5 गैलरियों और 5 कोर्टयार्ड का किया गया है निर्माण भावी पीढ़ियों में राष्ट्रवाद की भावना का करेगा संचार, ओरियेंटेशन रूम में दिखेंगे राष्ट्र नायकों के जीवन के प्रेरक प्रसंग  आ लखनऊ,  राष्ट्रवाद की त्रिवेणी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय और श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेयी को समर्पित हैं, राष्ट्र प्रेरणा स्थल। राष्ट्र प्रेरणा का उद्घाटन 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। राष्ट्र प्रेरणा स्थल के भव्य उद्घाटन समारोह की लगभग सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इसी क्रम में प्रेरणा स्थल में राष्ट्र नायकों के जीवन वृत्त को दर्शाने वाले म्यूजियम के क्यूरेशन का कार्य भी पूरा हो चुका है। 5 गैलरियों और 5 कोर्टयार्ड से युक्त म्यूजियम के क्यूरेशन का कार्य पैन इंटेल कॉम कंपनी ने किया है। भावी पीढ़ियों में राष्ट्रवाद की भावना के संचार के लिए बने म्यूजियम को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। राष्ट्र नायकों को समर्पित है प्रेरणा स्थल का म्यूजियम ब्लॉक राष्ट्र प्रेरणा स्थल में राष्ट्रवाद की त्रिवेणी कहे जाने वाले राष्ट्र नायकों को समर्पित म्यूजियम का भी निर्माण किया गया है। प्रेरणा स्थल के 98000 वर्ग फुट के क्षेत्र में एलडीए ने म्यूजियम ब्लॉक का निर्माण कराया है। इसके क्यूरेशन का कार्य पैन इंटेल कॉम कंपनी ने किया है। म्यूजियम में 2 फ्लोर में 5 गैलरियां और 5 कोर्टयार्ड, वीवीआईपी ग्रीन रूम और 12 इंटरप्रिटेशन वॉल का निर्माण किया गया है। म्यूजियम की पहली गैलरी ओरियेंटेशन रूम के रूप में बनाई गई है, जिसमें वीडियो और एवी के माध्यम से राष्ट्र नायकों के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों को दिखाया जाएगा। दूसरी गैलरी में भारतीय जन संघ के निर्माण और उसकी विकास यात्रा को दर्शाया गया है। म्यूजियम की क्रमशः तीसरी, चौथी और पाँचवीं गैलरी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय और श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेयी को समर्पित हैं। इन गैलरियों में उनकी फोटो, अखबार की कटिंग, सिलिकॉन की मूर्तियों के जरिए उनके जीवन के प्रेरक प्रसंगों को दिखाया गया है। म्यूजियम में लगी हैं भारत माता, दीपक और सुदर्शन चक्र की प्रतिकृतियां म्यूजियम में 5 गैलरियों के साथ 5 कोर्टयार्ड का भी निर्माण किया गया है। फर्स्ट फ्लोर पर बने तीन कोर्टयार्ड क्रमशः भारत माता, जन संघ के प्रतीक चिन्ह दीपक और सुदर्शन चक्र की प्रतिकृतियां बनाई गई हैं। एक कोर्टयार्ड में भारत माता की 10 फिट ऊँची मूर्ति लगी है, साथ ही दीवार पर वन्दे मातरम उत्कीर्ण किया गया है। सेकंड फ्लोर पर बने कोर्टयार्ड में राष्ट्र नायकों के प्रयोग किए गए समान जैसे- तख्त, मेज-कुर्सी, छड़ी को लोगों के दर्शन के लिए रखा गया है। इसके अलावा म्यूजियम में 12 इंटरप्रिटेशन वॉल बनाई गई हैं, जिन पर म्यूरल और रिलीफ आर्ट के माध्यम से भारत के स्वतंत्रता संग्राम की घटनाओं और महान विभूतियों को दर्शाया गया है। एक वॉल पर, राष्ट्रवाद से प्रेरित पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की कविता की पंक्तियाँ लिखी गई हैं। इसके साथ ही म्यूजियम ब्लॉक में वीवीआईपी ग्रीन रूम का भी निर्माण किया गया है। राष्ट्र नायकों को समर्पित म्यूजियम आने वाले समय में भी भावी पीढ़ियों में राष्ट्रवाद की भावना का संचार करेगा।

डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिस को तकनीकी रूप से सशक्त बना रही योगी सरकार

लखनऊ, डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन गतिविधियों के बढ़ते दायरे के साथ साइबर ठगी और हाईटेक अपराध के चलते आम नागरिकों की सुरक्षा और डिजिटल विश्वास को मजबूत करने के उद्देश्य से योगी सरकार साइबर अपराध के विरुद्ध सशक्त रणनीति के तहत लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में साइबर क्राइम प्रशिक्षण पोर्टल के माध्यम से अब तक 84,705 पुलिस कर्मियों को प्रमाणित प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है, जिससे पुलिस बल को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाया गया है। चरणबद्ध तरीके से साइबर अपराध नियंत्रण का ढांचा किया मजबूत विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित जवाब में सरकार ने साइबर ठगी और हाईटेक अपराधों पर नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी। जवाब में बताया गया कि वर्ष 2017 से पूर्व उत्तर प्रदेश में केवल दो साइबर क्राइम थाने (लखनऊ और गौतमबुद्धनगर) ही कार्यरत थे। साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए योगी सरकार ने चरणबद्ध तरीके से साइबर अपराध नियंत्रण का ढांचा मजबूत किया। इसके तहत 06 फरवरी 2020 को 16 परिक्षेत्रीय साइबर क्राइम थानों तथा 14 दिसंबर 2023 को 57 जनपदीय साइबर क्राइम थानों की स्थापना की गई। साथ ही प्रदेश के सभी जनपदीय थानों में साइबर सेल का गठन कर प्रशिक्षित पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है। वर्तमान में प्रदेश के सभी जनपदों में कुल 75 साइबर क्राइम थाने संचालित हो रहे हैं, जबकि प्रत्येक जनपदीय थाने में साइबर सेल भी सक्रिय है। सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम सरकार ने यह भी अवगत कराया कि साइबर अपराध से बचाव के लिए अब तक 65,966 सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। वहीं, साइबर अपराध की त्वरित शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 की क्षमता 20 सीटों से बढ़ाकर 50 सीट कर दी गई है, जो 24×7 क्रियाशील है। सरकार के अनुसार, प्रशिक्षित पुलिस बल, मजबूत साइबर ढांचा और व्यापक जन-जागरूकता अभियान के माध्यम से प्रदेश में साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में लगातार प्रगति हो रही है।

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत मिला ऋण, 3000 के लक्ष्य की ओर बढ़ा उद्योग विभाग

कानपुर,  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का 'जॉब क्रिएटर' बनाने का मिशन अब कानपुर में हकीकत बनकर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना ने जिले के युवाओं की सोच को एक नई उड़ान दी है, जिससे कानपुर नगर अब उद्यम का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। जिले में अब तक 1879 युवाओं को उनके नए स्टार्टअप और बिजनेस को विस्तार देने के लिए ऋण वितरित किया जा चुका है। 3000 का लक्ष्य जल्द होगा प्राप्त कानपुर के लिए शासन द्वारा 3000 लाभार्थियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उपायुक्त उद्योग, अंजनीश प्रताप सिंह के अनुसार, इस लक्ष्य को पाने के लिए विभाग और बैंक मिलकर काम कर रहे हैं। वर्तमान में 1879 लाभार्थियों को सीधे आर्थिक स्वावलंबन से जोड़ा गया है, जिससे न केवल जिले की बेरोजगारी कम हो रही है बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। स्वरोजगार से संवर रही तकदीर योजना का लाभ लेकर शहर के युवा अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं। इन्ही में से एक हैं अनुभव शुक्ला, जिन्होंने मशरूम उत्पादन जैसे आधुनिक कृषि क्षेत्र को अपना करियर चुना। विभाग ने उनकी मार्जिन मनी भी जारी कर दी है। वहीं, नारी शक्ति का उदाहरण पेश करते हुए प्रभनूर कौर ने बेकरी मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में कदम रखा है। आयुषी चतुर्वेदी ने भी ब्यूटी पार्लर खोलकर स्वरोजगार की राह चुनी है। शहर के खान-पान के शौक को व्यापार बनाने में अनुपम शुक्ला और मोहम्मद अशफाक भी पीछे नहीं हैं। अनुपम ने फास्ट फूड सेवा की शुरुआत की है, तो वहीं मोहम्मद अशफाक ने अपना खुद का फूड रेस्टोरेंट शुरू कर दिया है। उपायुक्त उद्योग ने विश्वास जताया कि यह योजना जल्द ही कानपुर के एमएसएमई (MSME) क्षेत्र को एक नई और मजबूत पहचान दिलाएगी।

लखनऊ, अयोध्या, बाराबंकी, सुल्तानपुर, सीतापुर की एक हजार से अधिक महिलाएं मोरिंगा के जरिए बन रहीं आत्मनिर्भर

एफपीओ के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के साथ ग्रामीण महिलाओं की बढ़ रही आमदनी सवा लाख रुपये तक की हो रही आय, बाजार में बढ़ रही उत्पादों की मांग लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के विजन का असर अब गांव-गांव दिखने लगा है। राजधानी लखनऊ, अयोध्या, बाराबंकी, सुल्तानपुर और सीतापुर समेत तमाम जिलों में मोरिंगा आधारित आजीविका मॉडल ने ग्रामीण महिलाओं को स्थायी रोजगार और सम्मानजनक आय का रास्ता दिया है। इन जिलों की एक हजार से अधिक महिलाएं मोरिंगा की पत्तियों, बीज और छाल की प्राथमिक प्रोसेसिंग से जुड़कर नियमित कमाई कर रही हैं। मोरिंगा को लेकर इस पहल की अगुवाई कर रहीं जेवीकेएस बायो एनर्जी फार्मर प्रोडूसर कंपनी लिमिटेड बीकेटी लखनऊ की डायरेक्टर डॉ. कामिनी सिंह बताती हैं कि सीतापुर जिले के सिधौली ब्लॉक के ग्राम गाजीपुर में सीमा देवी, बउआ देवी, शालिनी देवी, ममता देवी, पूनम देवी, प्रियंका, राजकुमारी सहित प्रदेश के अन्य जिलों की सैकड़ों महिलाएं इस मॉडल से जुड़ी हैं। इन्हें प्रतिमाह 10,000 तक और वार्षिक सवा लाख रुपये तक की आय हो रही है। महिलाओं ने समूह के रूप में काम सीखकर गुणवत्ता, पैकेजिंग और समयबद्ध सप्लाई पर फोकस किया, जिससे बाजार में उनके उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है। प्राइमरी प्रोसेसिंग यूनिट्स के जरिए हो रहा काम यह पूरा प्रोजेक्ट एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के अंतर्गत संचालित किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से चल रहा है। एफपीओ ने प्राइमरी प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित की हैं, जहां मोरिंगा की पत्तियों, बीजों और छाल से वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन हुआ है और महिलाओं की आय में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है। घर के पास काम मिलने से महिलाओं की भागीदारी बढ़ी सीएम योगी के निर्देश पर मोरिंगा के जरिए स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसकी सबसे खास बात ये है कि घर के पास काम मिलने से महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। ग्रामीण महिलाएं पत्तियों की तुड़ाई, सुखाने, ग्रेडिंग और प्रोसेसिंग का प्रशिक्षण लेकर आय अर्जित कर रही हैं। डॉ कामिनी सिंह के अनुसार मोरिंगा से टैबलेट, पाउडर, मोरिंगा चाय, हैंडमेड साबुन, मोरिंगा सीड आयल और मोरिंगा लड्डू, मोरिंगा बिस्कुट बनते हैं। इसके माध्यम से प्रशिक्षित महिलाएं गांव की अन्य महिलाओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही हैं।

यूपी सरकार को अदालत से झटका: अखलाक लिंचिंग मामले में केस वापस लेने से इनकार

नई दिल्ली  ग्रेटर नोएडा के बिसाहाड़ा के चर्चित अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में सूरजपुर कोर्ट ने सोमवार को आरोपियों के खिलाफ केस वापस लेने की राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। इस अपील के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार ने केस वापस लेने की इजाजत मांगी थी। सूरजपुर जिला अदालत के इस फैसले से उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ा झटका लगा है।   सुनवाई के दौरान अदालत ने यूपी सरकार की दलीलों को अपर्याप्त और आधारहीन करार दिया। अदालत ने कहा कि केस वापस लेने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। फैसले से आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है। फैसले ने मामले को बंद करने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। बता दें कि 10 साल पहले दिल्ली से 50 किलोमीटर दूर दादरी के बिसाड़ा गांव में एक अफवाह के तहत भीड़ ने 50 साल के मोहम्मद अखलाक को कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डाला था। भीड़ का आरोप था कि अखलाक के परिवार ने बछड़े का मांस खाया है। भीड़ का यह भी कहना था कि अखलाक ने घर में गोमांस रखा है। इसके बाद गांव के लोगों ने पीट-पीटकर अखलाक की हत्या कर दी थी। 28 सितंबर 2015 को हुई इस घटना की चर्चा देशभर में हुई थी। इस घटना की जमकर आलोचना हुई थी। पुलिस ने जांच के बाद कुल 19 लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया था। सभी पर हत्या, दंगा भड़काने और जान से मारने की धमकी देने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था। कानूनी लड़ाई के बीच अक्टूबर 2025 में उत्तर प्रदेश शासन ने अचानक एक बड़ा कदम उठाते हुए आरोपियों के खिलाफ चल रहे आरोपों को वापस लेने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया था। उत्तर प्रदेश शासन की ओर से अदालत से केस चार्जशीट में नामजद सभी 19 लोगों के खिलाफ आरोप वापस लेने की इजाजत मांगे जाने के कारण यह केस एकबार फिर सुर्खियों में आ गया था। इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष की दलीलें थी कि केस वापस लिया जाना चाहिए। हालांकि अदालत दलीलों से सहमत नहीं हुई। अदालत ने कहा कि अपील का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। कोर्ट ने अर्जी को महत्वहीन मानते हुए इसे खारिज कर दिया।  

उत्तर प्रदेश में आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू में स्थापित होंगे दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

योगी सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को दी मंजूरी उत्तर प्रदेश में आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू में स्थापित होंगे दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन अनुसंधान, तकनीकी विकास, मानव संसाधन सशक्तिकरण एवं औद्योगिक उपयोग को मिलेगा प्रोत्साहन लखनऊ  हरित परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन अनुसंधान, तकनीकी विकास, मानव संसाधन सशक्तिकरण एवं औद्योगिक उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE)  स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। पहला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आईआईटी कानपुर द्वारा हरकोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय (HBTU), कानपुर के सहयोग से स्थापित किया जाएगा। वहीं दूसरा सेंटर आईआईटी-बीएचयू द्वारा मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT), गोरखपुर के साथ संयुक्त रूप से स्थापित किया जाएगा। दोनों सेंटर साझेदार संस्थानों के परिसरों से संचालित होंगे। हब-एंड-स्पोक मॉडल पर कार्य करेगा सेंटर   यूपी नेडा के एमडी एंड डायरेक्टर इंद्रजीत सिंह ने बताया कि इन सेंटरों में चलने वाली परियोजनाओं में दोनों संस्थान बारी-बारी से नेतृत्व करेंगे। यह सेंटर हब-एंड-स्पोक मॉडल पर कार्य करेगा, जिसके तहत प्रदेश के अन्य इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों को इससे जोड़ा जाएगा। सेंटर में बायोमास आधारित एवं इलेक्ट्रोलाइज़र आधारित ग्रीन हाइड्रोजन पर अनुसंधान और तकनीकी विकास किया जाएगा। इन्क्यूबेशन सेंटर भी होगा स्थापित ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में एक इन्क्यूबेशन सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से हर वर्ष 10 स्टार्टअप्स को और 5 वर्षों में कम से कम 50 स्टार्टअप्स को सहयोग और मार्गदर्शन दिया जाएगा। इसके लिए ₹25 लाख प्रतिवर्ष (5 वर्षों तक) की सहायता का प्रावधान किया गया है। सेंटर प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलीटेक्निक संस्थानों के लिए पाठ्यक्रम निर्माण, मेंटरिंग, तकनीकी प्रदर्शनियों और कॉन्फ्रेंसों के आयोजन में भी सहयोग करेगा। साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से जुड़े विषयों पर राज्य सरकार को नीतिगत सुझाव भी देगा। ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन तथा बसें चलाने के भी होंगे प्रयास सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में कम से कम 50 प्रतिशत औद्योगिक भागीदारी उत्तर प्रदेश से होगी, जिससे राज्य को ग्रीन हाइड्रोजन के औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग में अधिक लाभ मिल सके। हरित परिवहन को बढ़ावा देने के लिए रेल मंत्रालय के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन आधारित ट्रेनों तथा उत्तर प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (UPSRTC) के माध्यम से कानपुर–लखनऊ, वाराणसी और गोरखपुर रूट पर ग्रीन हाइड्रोजन बसें चलाने के प्रयास भी किए जाएंगे। ग्रीन हाइड्रोजन के लिए इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में एक प्रमुख नवाचार और औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अनुसंधान, स्टार्टअप्स और उद्योगों के सहयोग से यह पहल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन कम करने, निवेश आकर्षित करने और राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित करने में सहायक होगी।

राष्ट्रगान के वक्त चुप्पी और दूरी पर सवाल, राजा भैया बोले— CCTV सबूत मौजूद

लखनऊ वंदे मातरम पर यूपी विधानसभा में चर्चा के दौरान जनसत्ता दल के नेता राजा भैया ने सवाल उठाया कि आखिर किसे राष्ट्रगीत से आपत्ति है। राजा भैया ने कहा कि किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि हमारा राष्ट्रगीत विवाद में आएगा। यह किसी धर्म के विरोध में नहीं है। देश का हर सदन वंदे मातरम से ही शुरू होता है, लेकिन क्या इस सदन में कुछ सदस्य ऐसे नहीं हैं जो वंदे मातरम पर चुप रह जाते हैं या फिर लॉबी में बैठे रहते हैं। सीसीटीवी में सब कुछ दर्ज है। यह प्रमाण है, जिसे कभी भी देखा जा सकता है।   उन्होंने कहा कि कुछ चीजें ऐसी हैं, जो खुलकर सामने आनी चाहिए। वंदे मातरम किसी एक व्यक्ति के कहने या लिखने पर राष्ट्रगीत नहीं बना था। पूरी संविधान सभा ने यह निर्णय लिया कि वंदे मातरम राष्ट्रगीत होगा और जन गण मन राष्ट्रगान होगा। उस सभा में कौन-कौन से महानुभाव थे, यह बताने की जरूरत नहीं है। लेकिन आज कष्ट हुआ। वंदे मातरम पर चर्चा कोई हास-परिहास का विषय नहीं है। हम मानकर चल रहे थे कि वंदे मातरम सभी के लिए पूज्य है। बंकिम चंद्र चटर्जी ने बंगाल में इसे लिखा, लेकिन पूरे भारत ने इसे स्वीकार किया। राजा भैया ने कहा, 'खुदीराम बोस का जन्म बंगाल के मिदनापुर में हुआ था। उन्हें फांसी मुजफ्फरपुर बिहार में मिली थी और उनके अंतिम शब्द वंदे मातरम थे। इसी तरह मदन लाल धींगरा का पंजाब में जन्म हुआ और लंदन में फांसी की सजा मिली थी। इसी तरह शाहजहांपुर में जन्मे रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर में फांसी मिली थी। उनके भी आखिरी शब्द वंदे मातरम ही थे। हमारा कहने का उद्देश्य यह है कि वंदे भारत की व्यापकता पर तब कोई प्रश्न नहीं उठा, जब देश बड़े संकट से गुजर रहा था। किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि आगे चलकर हमारा राष्ट्रगीत विवाद में आएगा। यह किसी धर्म के विरोध में नहीं है।' 'कभी ताइवान माता या जापान माता सुना है? सिर्फ भारत को मां का दर्जा' कुंडा के विधायक ने कहा कि वैदिक काल से हमने अपने राष्ट्र को मां माना है। सभी जगह देशभक्त हैं और वे अपने राष्ट्र के प्रति आस्था रखते हैं, लेकिन हमने कभी जापान माता, ताइवान माता या अमेरिका माता नहीं सुना। ऐसा इसलिए क्योंकि हम प्राचीन काल से भारत माता कहते आए हैं और उस धरती ने हमारा पालन-पोषण भी किया है। एक बात यह समझ नहीं आती कि वंदे मारतम पर आखिर किसे और क्यों आपत्ति है। यह कहा जाता है कि वंदे मातरम को दिल से गाना चाहिए, डंडे से नहीं। आखिर डंडा कौन चला रहा है? राष्ट्रगीत को दिल से गाना चाहिए, इसमें कोई दोराय नहीं है। 'जनता से अपील कि वोट देते समय ध्यान रखे, कौन वंदे मातरम नहीं गाता' हम जब चुनाव लड़ने जाएंगे तो मतदाताओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि कौन वंदे मातरम पर चुप रह जाता है और बैठा रह जाता है। संविधान की बात करने वाले लोग यह समझें कि वंदे मातरम को राष्ट्रगीत का दर्जा संविधान सभा ने ही दिया था। कल को कोई यह देगा कि हम भारत को अपना भाग्य विधाता नहीं मानते हैं और इसलिए राष्ट्रगान को भी हटा दिया जाए।