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मुख्यमंत्री योगी ने 15 खिलाड़ियों को मंच पर प्रदान किया नियुक्ति पत्र

लखनऊ  खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा और मेहनत से प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले 15 खिलाड़ियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच पर नियुक्ति पत्र प्रदान किए। विभिन्न खेलों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले इन खिलाड़ियों को सरकारी सेवा से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। नियुक्ति पाने वाले खिलाड़ियों में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और दिल्ली के खिलाड़ी भी शामिल हैं। इन्हें मिला नियुक्ति पत्र कुशीनगर की आइस प्रजापति – बॉक्सिंग मेरठ के शार्दूल विहान – शूटिंग लखनऊ के आमिर अली – हॉकी उधम सिंह नगर, उत्तराखंड के हिमांशु तिवारी – बैडमिंटन मुरादाबाद के मोहित पाल – शूटिंग गाजीपुर की अनन्या राय – वॉलीबॉल जबलपुर की रागिनी मार्को – तीरंदाजी भदोही की तान्या चौधरी – एथलेटिक्स बरेली की सुहानी राजपूत – भारोत्तोलन लखनऊ की तनु भारती – साइकिलिंग दिल्ली के प्रणय शर्मा – कराटे वाराणसी के अभिषेक यादव – बॉक्सिंग मुजफ्फरनगर के अमरेश – कबड्डी गोरखपुर की प्रतिमा सरोज – हॉकी लखनऊ के अभय सिंह राठौर – बॉक्सिंग खेल अभी खत्म नहीं हुआ, पुलिस सेवा के साथ पदक जीतने का भी अवसर: केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि नियुक्ति पत्र वितरण के कार्यक्रम लगातार होते हैं, लेकिन देश और प्रदेश का मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र प्रदान करने का आनंद और गौरव कुछ अलग है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने अपने खेल के माध्यम से प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है और अब उन्हें पुलिस सेवा के माध्यम से जनसेवा का अवसर मिलने जा रहा है। यह उनके लिए नई जिम्मेदारी और नए दायित्व की शुरुआत है। उपमुख्यमंत्री ने नवचयनित खिलाड़ियों से कहा कि खेल के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा के बल पर उन्हें पुलिस सेवा में आने का अवसर मिला है, लेकिन उनका खेल अभी खत्म नहीं हुआ है। पुलिस सेवा के साथ-साथ उनके पास खेल के मैदान में भी देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की बेहतर स्थिति की चर्चा आज पूरे देश में हो रही है और ऐसे समय में पुलिस सेवा का हिस्सा बनना गौरव की बात है। बॉक्स खेल प्रतिभाओं को सम्मान और रोजगार दे रही योगी सरकार: खेल मंत्री उत्तर प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में खेल और खिलाड़ियों के लिए नई संस्कृति विकसित हुई है। सरकार ने खिलाड़ियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करते हुए उन्हें सम्मान, रोजगार, बेहतर प्रशिक्षण और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चाहे एशियन गेम्स हों, कॉमनवेल्थ गेम्स, ओलंपिक, पैरालंपिक या अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं, प्रदेश के पदक विजेता खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने और पुरस्कार राशि उपलब्ध कराने का काम किया गया है। खिलाड़ियों को मिलने वाली पुरस्कार राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। जिन पदों पर पहले सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से भर्ती होती थी, उन्हें आयोग के दायरे से बाहर कर कुशल खिलाड़ियों को सीधे भर्ती के माध्यम से अवसर देने की व्यवस्था की गई। अब तक ऐसे 17 खिलाड़ियों को सीधी नियुक्ति दी जा चुकी है। खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के अनुरूप उच्च पदों पर भी नियुक्तियां दी गई हैं। डिप्टी एसपी, जिला पंचायत राज अधिकारी और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर खिलाड़ियों को अवसर देकर सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि खेल प्रतिभा को सरकारी सेवा में भी सम्मानजनक स्थान मिलेगा। बॉक्स कुशल खिलाड़ी प्रदेश और यूपी पुलिस के वैश्विक राजदूत: डीजीपी डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस में कुशल खिलाड़ियों को सम्मान और अवसर देने की नीति के तहत 470 प्रतिभाशाली खिलाड़ी पुलिस परिवार का हिस्सा बनने जा रहे हैं। इनमें आरक्षी नागरिक पुलिस एवं आरक्षी पीएसी के 427 खिलाड़ी तथा उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस के 43 खिलाड़ी शामिल हैं। वर्ष 2022 से अब तक 950 कुशल खिलाड़ियों की भर्ती उत्तर प्रदेश पुलिस में की जा चुकी है। यह केवल भर्ती का आंकड़ा नहीं, बल्कि खेल प्रतिभाओं को सम्मान, अवसर और जनसेवा से जोड़ने की प्रभावी व्यवस्था का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि खेल और पुलिस सेवा में गहरा संबंध है। खेल खिलाड़ियों में अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व, धैर्य, फिटनेस और दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है। यही गुण पुलिस सेवा के लिए भी आवश्यक हैं। मैदान पर खिलाड़ियों की जीत उत्तर प्रदेश पुलिस का गौरव बढ़ाती है, जबकि वर्दी में उनका आचरण जनता के विश्वास को मजबूत करता है। प्रदेश में कुशल खिलाड़ियों के लिए भर्ती के साथ-साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन पर आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन और शीर्ष उपलब्धियों पर पुलिस उपाधीक्षक पद तक सीधी नियुक्ति जैसी व्यवस्थाएं लागू हैं। अब तक कुशल खिलाड़ियों को निरीक्षक/दलनायक पीएसी के पद पर 14 आउट-ऑफ-टर्न पदोन्नतियां दी गई हैं, जिनमें पांच महिलाएं और नौ पुरुष शामिल हैं। इसी प्रकार उपनिरीक्षक/प्लाटून कमांडर के पद पर 59 आउट-ऑफ-टर्न पदोन्नतियां दी गई हैं, जिनमें 21 महिलाएं और 38 पुरुष हैं। मुख्य आरक्षी नागरिक पुलिस/पीएसी के पद पर भी 440 आउट-ऑफ-टर्न पदोन्नतियां दी जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के खिलाड़ियों ने विगत एक दशक में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और अखिल भारतीय पुलिस प्रतियोगिताओं में 1105 पदक अर्जित किए हैं। वहीं वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स-2025 में यूपी पुलिस के खिलाड़ियों ने 95 पदक जीतकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। डीजीपी ने कहा कि जब कोई खिलाड़ी मैदान पर पदक जीतता है तो उसके साथ उत्तर प्रदेश पुलिस, उत्तर प्रदेश और देश का नाम भी गौरवान्वित होता है। इसलिए कुशल खिलाड़ी केवल पुलिस संगठन के गौरव नहीं, बल्कि प्रदेश और उत्तर प्रदेश पुलिस के वैश्विक राजदूत भी हैं।

‘प्रदेश डुबाओ एलायंस’ में सैफई या सिफारिश से मिलती थी नौकरी, एनडीए का मतलब ‘नौकरी देंगे एलायंस’: सीएम योगी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लोक भवन सभागार में उत्तर प्रदेश पुलिस में कुशल खिलाड़ी कोटे के अंतर्गत चयनित 470 खेल प्रतिभाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों, खेलों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में युवाओं की नौकरी पर एक परिवार का कब्जा था और नौकरी पाने के लिए ‘सैफई या सिफारिश’ की जरूरत पड़ती थी, जबकि आज नियुक्ति में न किसी की सिफारिश चलती है और न पैसा। आज सिर्फ खिलाड़ी की प्रतिभा, परिश्रम और पसीने की कीमत मिल रही है। “पहले प्रदेश डुबाओ एलायंस’’ था और अब एनडीए की सरकार है। एनडीए का मतलब है- “नौकरी देंगे एलायंस।” अब नौकरी पर केवल पसीने और प्रतिभा का कब्जा है। जिन खिलाड़ियों ने अपने परिश्रम से अपनी प्रतिभा साबित की, उन्हें उसी आधार पर नियुक्ति मिल रही है। ‘सैफई या सिफारिश’ का दौर खत्म मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश में युवाओं के सामने पहचान का संकट था और उनकी नौकरियों पर डकैती डाली जाती थी। खिलाड़ी मैदान में पसीना बहाता था। उसके पास सिफारिश कराने का समय नहीं था। इसी कारण उसे नौकरी नहीं मिल पाती थी। वर्ष 2017 से पहले समाजवादी पार्टी की सरकार के समय बड़ी संख्या में अराजक तत्वों को संरक्षण मिला। सपा ने प्रदेश में 10 लाख गुंडे पाले थे। वे बेटियों की सुरक्षा के लिए खतरा बनते थे। दंगे-अराजकता फैलाते, गरीबों की जमीनों पर कब्जा करते थे। इसके विपरीत हमारी सरकार ने 10 लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी देकर उत्तर प्रदेश को नई पहचान देने का काम किया है। सपा की बातें मगरमच्छ के शांति उपदेश जैसी सीएम ने कहा कि जब समाजवादी पार्टी युवाओं की नियुक्ति की बात करती है तो हंसी आती है। लगता है जैसे कोई पानी में तैरता मगरमच्छ शांति का उपदेश दे रहा हो। ऐसे मगरमच्छों से सावधान रहना होगा। आप खूब खेलिए, खूब पसीना बहाइए, नए रिकॉर्ड बनाइए। नौकरी की चिंता मत करिए, हमने ऐसी पॉलिसी बना दी है कि नौकरी आपको जरूर मिलेगी। कोई भी आपका प्रमोशन नहीं टाल सकता और ऐसा करेगा तो हम उसको ही टाल देंगे। शराब और सपा से सावधान रहें युवा मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को शराब व सपा से सावधान रहना चाहिए। ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं, दोनों ने प्रदेश को बर्बाद किया था। सरकार की खेल नीति का उद्देश्य अच्छे खिलाड़ियों को आगे बढ़ाना और उन्हें सम्मान व अवसर देना है। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में खनन, भर्ती, रिवर फ्रंट समेत विभिन्न घोटालों की चर्चा होती थी, जबकि आज प्रदेश में मेरठ में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट, वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज और खिलाड़ियों के मेडल्स की चर्चा होती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने केवल चुनाव जीतने के रिकॉर्ड नहीं बनाए, बल्कि मेडल जीतने के रिकॉर्ड भी बनाए हैं। एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों द्वारा 107 मेडल जीतने का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे अब तक का सर्वोच्च रिकॉर्ड बताया और खिलाड़ियों से नए रिकॉर्ड बनाने का आह्वान किया। ‘मर्डर से मेडल तक बदली यूपी की पहचान’ सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री जी खिलाड़ियों के साथ व्यक्तिगत संवाद करते हैं, उनकी सुविधाओं पर ध्यान देते हैं और दुनिया में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को फोन करके प्रोत्साहित करते हैं। कभी भारत की पहचान राष्ट्रमंडल खेलों के घोटालों से होती थी, लेकिन आज भारत के खिलाड़ी देश के लिए मेडल्स लेकर लौट रहे हैं। इसी तरह पहले प्रदेश की पहचान अपराध और अराजकता से जुड़ी खबरों से होती थी, लेकिन आज यूपी की पहचान उसके कुशल खिलाड़ियों के मेडल्स से हो रही है। मर्डर और मेडल में अंतर है- एक पहचान दिलाता है और दूसरा पहचान डुबोता है। जर्सी से वर्दी की यात्रा में भी वही अनुशासन चाहिए मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों से कहा कि आज उनकी ‘जर्सी से वर्दी’ की यात्रा शुरू हुई है। जर्सी में उन्होंने जिस अनुशासन, टीम वर्क, परिश्रम और समर्पण के साथ परिणाम दिए हैं, वर्दी में भी उनसे वही अपेक्षा है। नवनियुक्त 470 खिलाड़ियों में 303 पुरुष और 167 महिलाएं शामिल हैं। आरक्षी नागरिक पुलिस में 295 खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जिनमें 148 पुरुष और 147 महिलाएं हैं। उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस में 43 पुरुष और 20 महिलाएं हैं, जबकि आरक्षी पीएसी में 132 खिलाड़ियों का चयन हुआ है। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से पूछा कि क्या नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान किसी ने उनसे पैसे की मांग की? क्या किसी को सिफारिश कराने की जरूरत पड़ी? आज जो नियुक्ति पत्र उन्हें मिल रहा है, वह न सरकार की कृपा है और न मुख्यमंत्री की अनुकंपा, बल्कि यह उनके पसीने और परिश्रम की कीमत है। 2017 से बदली खिलाड़ी नियुक्ति की व्यवस्था मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले पुलिस अथवा किसी अन्य विभाग में खिलाड़ियों की सीधी भर्ती का कोई नियम नहीं था। उनकी सरकार ने पुलिस भर्ती की प्रक्रिया के साथ-साथ विभिन्न विभागों में खिलाड़ियों को सीधी नियुक्ति देने की व्यवस्था शुरू की। अब तक करीब 1000 खिलाड़ियों को सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। इसके साथ 1470 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है और 555 खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है। जीवन में जीत का जितना महत्व है, उससे कहीं अधिक महत्व हार के बाद खड़ा होना, फिर तैयारी करना, संघर्ष करना और अंततः मेडल जीतकर लौटना है। डिप्टी एसपी बनने के लक्ष्य ने दिलाया गोल्ड सीएम ने कहा कि उन्होंने एक खिलाड़ी से पूछा कि मेडल जीतने के पीछे उसकी प्रेरणा क्या थी। खिलाड़ी ने कहा कि उसने गोल्ड मेडल इसलिए जीता, क्योंकि उसका लक्ष्य उत्तर प्रदेश पुलिस में डिप्टी एसपी बनना था। जिस तरह अर्जुन का निशाना अपने लक्ष्य पर था, उसी तरह उस खिलाड़ी का लक्ष्य भी डिप्टी एसपी का पद था और उसने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के लिए मेडल जीता। सरकार अब तक ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में मेडल जीतने वाले सात कुशल खिलाड़ियों को सीधी भर्ती से डिप्टी … Read more

‘इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश को बुलाया तक नहीं गया’, कांग्रेस-सपा की कलह पर सुभाष यदुवंश का तंज

'चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं दोनों राजकुमार', बीजेपी MLC सुभाष यदुवंश का अखिलेश-राहुल पर हमला 'इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश को बुलाया तक नहीं गया', कांग्रेस-सपा की कलह पर सुभाष यदुवंश का तंज 'इनको वोट देना अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद करना है’, सुभाष यदुवंश का अखिलेश-राहुल पर हमला ‘राजतंत्र और परिवारतंत्र में विश्वास करते हैं राहुल और अखिलेश’, सुभाष यदुवंश ने साधा निशाना सुभाष यदुवंश का अखिलेश-राहुल पर हमला, बोले- ‘दोनों राजकुमार एक-दूसरे को बर्दाश्त नहीं कर सकते’ 'अखिलेश को यूपी की सत्ता मिली तो उन्होंने प्रदेश को सिरफुटौव्वल का अड्डा बना दिया था', बीजेपी MLC का सपा पर हमला लखनऊ बीजेपी के विधान परिषद सदस्य (MLC) सुभाष यदुवंश ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। दिल्ली में बुधवार को कांग्रेस की ओर से आयोजित इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव को नहीं बुलाए जाने का जिक्र करते हुए यदुवंश ने दोनों नेताओं को ‘राजकुमार’ बताया और कहा कि वे एक-दूसरे को बर्दाश्त नहीं कर सकते। 'अखिलेश को बुलाया ही नहीं गया' सुभाष यदुवंश ने कहा, 'इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव जी को बुलाया ही नहीं गया।' उन्होंने कहा कि जब अखिलेश यादव लखनऊ आ गए, तब राहुल गांधी के किसी ‘शिष्य’ का फोन उनके पास आया। यदुवंश ने कहा कि कुछ दिन पहले अखिलेश यादव के इशारे पर ही एक सपाई सांसद ने कहा कि कांग्रेस की हैसियत तो 10 सीटों की भी नहीं है।  'चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए दोनों राजकुमार' यदुवंश ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, 'ये जो चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए दोनों राजकुमार हैं, ये सत्ता के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।' यदुवंश ने कहा कि इन दोनों नेताओं में अनुशासन नहीं है, टीम भावना नहीं है और समन्वय नहीं है। अखिलेश और राहुल दोनों ही किसी व्यवस्था को चला नहीं सकते। 'डेढ़ साल मंच पर पूरा परिवार लड़ता रहा' अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए सुभाष यदुवंश ने कहा कि जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के ‘युवराज’ को सत्ता मिली, तो डेढ़ साल तक मंच पर पूरा परिवार लड़ता रहा। उन्होंने कहा कि इस दौरान उत्तर प्रदेश को 'सिरफुटौव्वल का अड्डा' बना दिया गया। 'राजतंत्र पर भरोसा करते हैं राहुल गांधी' राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए यदुवंश ने कहा कि जब कांग्रेस के ‘युवराज’ को सत्ता मिली थी, तब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का तैयार किया हुआ मसौदा राहुल गांधी ने फाड़ दिया था। उन्होंने कहा, 'युवराज ने मसौदा फाड़ करके बताया कि देखो, मैं राजतंत्र में बिलीव करता हूं, संविधान मानता नहीं हूं, संविधान को जेब में रख करके चलता हूं।' बता दें कि 2013 में मनमोहन सिंह सरकार द्वारा दोषी सांसदों-विधायकों को तत्काल अयोग्यता से बचाने के लिए लाए गए जनप्रतिनिधित्व संशोधन अध्यादेश को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘पूरी तरह बकवास’ बताते हुए सार्वजनिक रूप से फाड़ दिया था। अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर हमला करते हुए सुभाष यदुवंश ने कहा कि इन पर भरोसा करना, इनको वोट देना अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद करना है। ये दोनों परिवारतंत्र पर भरोसा करने वाले नेता हैं।

झिझक की टूट रही दीवार, योगी सरकार में बेटियों के लिए सशक्त एमएचएम व्यवस्था

लखनऊ योगी सरकार बेटियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरिमा को विद्यालयी व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाते हुए मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन (एमएचएम) को व्यापक रूप से मजबूत कर रही है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के निर्देशानुसार प्रदेश के विद्यालयों में मासिक धर्म को लेकर झिझक और संकोच दूर करने के साथ छात्राओं को आवश्यक सुविधाएं और सही जानकारी उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है। इसका असर विद्यालय स्तर पर दिखाई भी दे रहा है।  प्रदेश में अब तक 68,358 विद्यालयों में एमएचएम क्लब गठित, 66,045 विद्यालयों में पैड बैंक स्थापित, 63,633 विद्यालयों में बच्चों के साथ जागरूकता सत्र और 63,928 विद्यालयों में शिक्षकों के साथ एमएचएम के बिंदुओं पर चर्चा की जा चुकी है। इसको और गति देने के लिए 13 और 14 अगस्त 2026 को राज्य परियोजना कार्यालय में 209 मास्टर ट्रेनर्स की कार्यशालाएं आयोजित की गई थीं। इसके बाद 9 से 25 सितंबर 2026 के बीच प्रदेश के 450 मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण पूर्ण हुआ। इससे विद्यालय स्तर पर मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़ी जानकारी और गतिविधियों को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। विद्यालयों में सुविधा के साथ जागरूकता का तंत्र एमएचएम व्यवस्था को सिर्फ सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता तक सीमित नहीं रखा गया है। विद्यालयों में एमएचएम क्लब और पैड बैंक के माध्यम से छात्राओं को जरूरी सुविधा उपलब्ध कराने के साथ जागरूकता गतिविधियों को भी नियमित रूप दिया जा रहा है। शनिवार को मीना मंच के अंतर्गत होने वाली गतिविधियों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन और महत्वपूर्ण आपातकालीन सहायता नंबरों से संबंधित सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं। विद्यालय स्तर पर किशोर एवं किशोरियों के लिए साप्ताहिक गतिविधि आधारित पुस्तिका ‘प्रगति के पंख’ में भी मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन तथा डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार एवं अन्य से संबंधित पारित निर्णय की जानकारी को शामिल करते हुए टीएलएम/प्रशिक्षण गतिविधियों को आगे बढ़ाया गया है। 450 मास्टर ट्रेनर्स को किया जा रहा प्रशिक्षित प्रदेश स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण का विशेष अभियान चलाया गया। अगस्त में 209 मास्टर ट्रेनर्स की राज्य स्तरीय कार्यशालाएं आयोजित की गई, जबकि सितंबर में 450 मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण पूर्ण हुआ। इससे मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़ी जानकारी को विद्यालयों तक व्यवस्थित रूप से पहुंचाने में मदद मिल रही है। पाठ्यक्रम में भी शामिल हुई मासिक धर्म स्वच्छता मासिक धर्म स्वच्छता को विद्यालयी शिक्षा की नियमित गतिविधियों से जोड़ने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उत्तर प्रदेश की ओर से भी पहल की गई है। प्रचलित पाठ्यक्रम पर आधारित पाठ्यपुस्तकों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन संबंधी जागरूकता की विषयवस्तु का समावेशन किया गया है। इससे छात्राओं के साथ-साथ विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच मासिक धर्म से जुड़े विषयों पर सहज संवाद का वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी। सुविधा, जागरूकता और सम्मान; तीनों पर एक साथ जोर योगी सरकार की एमएचएम व्यवस्था का उद्देश्य बेटियों को सिर्फ जरूरी सामग्री उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां मासिक धर्म को लेकर झिझक कम हो, सही जानकारी मिले और छात्राएं पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। इसके लिए स्वच्छ शौचालय, पानी और हाथ धोने की सुविधा से लेकर सैनिटरी नैपकिन, पैड बैंक, एमएचएम क्लब, सुरक्षित निस्तारण, शिक्षक प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियों तक पूरी व्यवस्था को एक साथ मजबूत किया जा रहा है।  “योगी सरकार बेटियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विद्यालयों में ऐसा सुरक्षित और सहज वातावरण तैयार कर रही है, जहां मासिक धर्म उनकी पढ़ाई या आत्मविश्वास में बाधा न बने। प्रदेश में एमएचएम क्लब, पैड बैंक, जागरूकता सत्र और मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के माध्यम से इस व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि हर बेटी को जरूरी सुविधा, सही जानकारी और सम्मानजनक वातावरण मिले, ताकि वह पूरे आत्मविश्वास के साथ शिक्षा की राह पर आगे बढ़ सके।” संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा

त्रिवर्षीय आबकारी नीति से निर्यात उछला तो यूपी में किसानों और उद्योगों के लिए बढ़े अवसर

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति (2026-29) का असर विदेशी बाजारों से आगे किसानों और उद्योगों तक दिखाई देने लगा है। निर्यात बढ़ने के साथ कच्चे माल की मांग में भी तेजी आई है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है, जबकि ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने के कारण अनाज की खरीद में वृद्धि हुई है। इससे कृषि और उद्योग के बीच आर्थिक गतिविधियों को गति मिल रही है। नई इकाइयों से औद्योगिक गतिविधियों को बल प्रदेश में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों के बीच नई इकाइयों की स्थापना का सिलसिला भी आगे बढ़ रहा है। उन्नाव में यूनाइटेड ब्रुअरीज और हरदोई में माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। फर्रुखाबाद में वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने इकाई स्थापित की है। इससे संबंधित क्षेत्रों में उत्पादन और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की दिशा में कदम बढ़े हैं। चीनी मिलों के शीरे की बढ़ी मांग आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में नीति का लाभ प्रदेश के किसानों तक पहुंच रहा है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है। वहीं ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने के कारण अनाज की खरीद में भी वृद्धि हुई है। इससे किसानों के उत्पादों की मांग बढ़ने के साथ कृषि और उद्योग के बीच आर्थिक गतिविधियों का संबंध मजबूत हुआ है। बंद इकाई फिर हुई सक्रिय मुरादाबाद में एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स ने बंद इकाई को फिर सक्रिय किया है। वहीं गोरखपुर में कियान डिस्टिलरी ने पेय आसवनी और ब्रुअरी के लिए आवेदन किया है। आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि निर्यात के विस्तार के साथ प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। नई इकाइयों की स्थापना और बंद इकाइयों के पुनर्जीवन से उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ संबंधित क्षेत्रों में कारोबारी अवसर भी पैदा हो रहे हैं। नीति में किसानों के हितों को भी ध्यान में रखा गया है। जिस आसवनी अथवा उसके स्वामी की किसी अन्य इकाई या चीनी मिल पर गन्ना मूल्य भुगतान की वसूली प्रमाण-पत्र प्रभावी है, उसे नीति की छूट नहीं दी जाएगी। इसके जरिए नीति के लाभ को निर्धारित नियामकीय शर्तों से जोड़ा गया है। 4 माह में 183 लाख डॉलर का निर्यात, 66 लाख डॉलर अतिरिक्त विदेशी मुद्रा अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात 183 लाख डॉलर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 117 लाख डॉलर था। इस तरह चार माह में 56.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि राष्ट्रीय वृद्धि 20.4 प्रतिशत रही। प्रदेश ने इस अवधि में 66 लाख डॉलर की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा अर्जित की। राष्ट्रीय निर्यात में हिस्सेदारी 9.7 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई और प्रदेश चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंच गया। निर्यात लाइनें 29 से बढ़कर 39 तथा संचालित बंदरगाहों की संख्या सात से बढ़कर 10 हो गई।

Air Force Day 2026: काशी में एयर शो की खास तैयारी, हवा-गंगा-जमीन पर अलग रिस्पॉन्स प्लान

लखनऊ चेन्नई एयर शो में अक्टूबर 2024 में सामने आई स्थिति से सबक लेते हुए काशी में एयरफोर्स डे एरियल डिस्प्ले की तैयारी की जा रही है। यहां किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए हवा, गंगा और जमीन, तीनों स्तर पर अलग रिस्पॉन्स प्लान रहेगा। एनडीआरएफ की विशेषज्ञता भी ली जाएगी। तैयारियों का पूरा खाका मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखा गया है। प्रजेंटेशन देखने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए स्टेट इवेंट है। उत्तर प्रदेश डिफेंस एक्सपो और महाकुंभ में अपनी शक्ति और तैयारी दिखा चुका है। उन्होंने उसी स्तर पर एयर शो की तैयारी करने के निर्देश दिए। वाराणसी में 22, 24 और 25 अक्टूबर को एयरफोर्स डे एरियल डिस्प्ले प्रस्तावित है। तैयारियों के प्रजेंटेशन में चेन्नई एयर शो के दौरान भीड़ की स्थिति को अलग से रखा गया। इसके बाद काशी के लिए तैयार क्राउड मैनेजमेंट प्लान बताया गया है। इससे साफ है कि चेन्नई में सामने आई स्थिति को ध्यान में रखकर यहां आपात इंतजाम किए जा रहे हैं। हवा में हादसा हो या गंगा में, पहले से तय रहेगा रिस्पॉन्स एयर शो के दौरान किसी आपात स्थिति में अलग-अलग विभागों को मौके पर व्यवस्था तय करने का इंतजार नहीं करना होगा। कार्ययोजना में हवा, पानी और जमीन पर होने वाली संभावित घटनाओं के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट और कंटिंजेंसी प्लान बनाने की बात है। इसके लिए एनडीआरएफ की विशेषज्ञता ली जाएगी। यानी हवा में कोई आपात स्थिति बने, गंगा में घटना हो या जमीन पर अचानक हालात बिगड़ें, तीनों के लिए पहले से रिस्पॉन्स तय रहेगा। इसके लिए एयरफोर्स, रेलवे, रोडवेज, जलमार्ग, जिला प्रशासन और पुलिस को आपस में जोड़ा जाएगा। कार्ययोजना में इन एजेंसियों के बीच समन्वय को प्रमुख जरूरत के रूप में रखा गया है। जरूरत पर दूसरे जिलों से मजिस्ट्रेट बुलाने और अतिरिक्त संसाधन जुटाने का भी प्रस्ताव है। तीन कंट्रोल रूम, अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर इमरजेंसी में सूचना मिलने से मरीज को अस्पताल पहुंचाने तक का नेटवर्क भी तैयार किया जा रहा है। इसके लिए इंटीग्रेटेड, सीएमओ और इमरजेंसी लाइन के तीन कंट्रोल रूम होंगे। अस्पताल तक एंबुलेंस की निर्बाध आवाजाही के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने की योजना है। सरकारी और निजी अस्पतालों में 170 इमरजेंसी और 44 आईसीयू बेड चिह्नित किए गए हैं मेडिकल बैकअप में आयोजन स्थल से 20 किमी के दायरे के सात सरकारी अस्पताल और 15 किमी के दायरे के सात निजी अस्पताल शामिल किए गए हैं। 23 ब्लड बैंक भी चिह्नित हैं। वाराणसी में 58 एंबुलेंस उपलब्ध रहेंगी। इसके अलावा दूसरे जिलों से 39 एंबुलेंस मंगाई जाएंगी। इस तरह जरूरत पड़ने पर 97 एंबुलेंस उपलब्ध होंगी। 21 समितियों को अलग-अलग जिम्मा एयर शो की तैयारियों के लिए 21 समितियां बनाई गई हैं। किसी समिति को घाट संभालने हैं तो किसी को कंट्रोल रूम और मेडिकल कवर। आयोजन स्थल, पीए सिस्टम, आमंत्रण और पास, स्वागत और आवास, परिवहन, वीडियोग्राफी-फोटोग्राफी और मीडिया प्रबंधन की जिम्मेदारी भी अलग-अलग बांटी गई है। नमो घाट से अस्सी और रविदास घाट तक के लिए एक घाट प्रबंधन समिति और रामनगर-डोमरी क्षेत्र के लिए दूसरी समिति बनाई गई है। पक्षियों पर नजर रखने के लिए भी अलग कमेटी तैयारी में एक अलग ‘बर्ड कंट्रोल कमेटी’ भी बनाई गई है। एयर शो के दौरान पक्षियों से जुड़ी चुनौती पर यह समिति काम करेगी। सड़क और गंगा के रास्ते आवाजाही के लिए अलग ‘ट्रांसपोर्ट कमेटी (लैंड एंड रिवर)’ बनाई गई है। कंट्रोल रूम के संचालन और मेडिकल कवर की जिम्मेदारी भी अलग-अलग समितियों को दी गई है।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 470 खिलाड़ियों को सौंपे नियुक्ति पत्र, अब पुलिस की वर्दी में निभाएंगे नई जिम्मेदारी

 लखनऊ कभी बॉक्सिंग रिंग में प्रतिद्वंद्वी को मात दी तो कभी निशानेबाजी में अचूक निशाना लगाकर पदक जीते। किसी ने हॉकी के मैदान पर पहचान बनाई तो किसी ने तीरंदाजी और एथलेटिक्स में प्रतिभा का लोहा मनवाया। खेल के मैदान में मेहनत से मुकाम हासिल करने वाले ऐसे 470 खिलाड़ी अब उत्तर प्रदेश पुलिस की वर्दी में कानून-व्यवस्था संभालने में योगदान देंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लोक भवन सभागार में आयोजित समारोह में इन्हें नियुक्ति पत्र सौंपे। इनमें 43 उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस, 295 आरक्षी नागरिक पुलिस और 132 आरक्षी पीएसी शामिल हैं।   पदक जीतने वाले खिलाड़ी अब संभालेंगे नई जिम्मेदारी नियुक्ति पाने वालों में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता शामिल हैं। कुशीनगर की बॉक्सर आइस प्रजापति ने नेशनल गेम्स 2024 में स्वर्ण पदक जीता था। मेरठ के निशानेबाज शार्दुल विहान एशियन गेम्स 2018 के रजत पदक विजेता हैं। लखनऊ के हॉकी खिलाड़ी आमिर अली एशियन चैंपियनशिप 2024 और मुरादाबाद के निशानेबाज मोहित पाल नेशनल चैंपियनशिप 2025 के स्वर्ण पदक विजेता हैं। चारों को उपनिरीक्षक बनाया गया है।   बॉक्सिंग से तीरंदाजी तक, प्रतिभाओं को मिला अवसर बैडमिंटन खिलाड़ी हिमांशी तिवारी, कराटे खिलाड़ी प्रणय शर्मा और बॉक्सर अभिषेक यादव को भी उपनिरीक्षक नियुक्त किया गया है। तीरंदाज रागिनी मार्को, एथलीट तान्या चौधरी और वॉलीबॉल खिलाड़ी अनन्या राय को नियुक्ति पत्र मिले हैं। बरेली की भारोत्तोलक सुहानी राजपूत और लखनऊ की साइक्लिस्ट तनु भारती को आरक्षी बनाया गया है। कबड्डी खिलाड़ी अमरेश, हॉकी खिलाड़ी प्रतिमा सरोज और बॉक्सर अभय सिंह राठौर भी नियुक्ति पाने वालों में शामिल हैं।   950 खिलाड़ियों को मिल चुकी नौकरी योगी सरकार की कुशल खिलाड़ी योजना के तहत वर्ष 2022 से अब तक 950 खिलाड़ियों को पुलिस विभाग में नौकरी मिल चुकी है। उत्तर प्रदेश पुलिस स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड इन खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाएं भी उपलब्ध करा रहा है, ताकि नौकरी के साथ खेलों में उनका प्रदर्शन जारी रहे।   एक लाख सरकारी नौकरियों के महाअभियान में 7,142 को नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक लाख सरकारी नौकरियां देने के महाअभियान के तहत सितंबर से नियुक्ति पत्र वितरण का सिलसिला जारी है। 19 सितंबर को विभिन्न विभागों के 818 चयनित अभ्यर्थियों, 20 सितंबर को 912 पुलिसकर्मियों, 22 सितंबर को 3,567 शिक्षकों और प्रधानाचार्यों तथा 28 सितंबर को 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इन चार कार्यक्रमों में 6,672 युवाओं को नियुक्ति पत्र मिले। आठ अक्टूबर को 470 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र मिलने के बाद इन पांच कार्यक्रमों में नियुक्ति पाने वालों की कुल संख्या 7,142 हो गई है।

‘12 बजे तक अखिलेश करते हैं अली-अली, उसके बाद बजरंगबली’- सपा प्रमुख पर ओपी राजभर का बड़ा हमला

‘अखिलेश यादव को न राम प्यारे हैं, न कृष्ण’, सपा प्रमुख पर निशाना साधते हुए राजभर बोले- 2027 में हम जीतेंगे 350 सीट ‘12 बजे तक अखिलेश करते हैं अली-अली, उसके बाद बजरंगबली’- सपा प्रमुख पर ओपी राजभर का बड़ा हमला ‘इसलिए कर रहे प्रदर्शन ताकि बाद में वोट चोरी का आरोप लगा सकें’- विपक्ष के हंगामे पर ओपी राजभर का बयान 'अखिलेश यादव शिवपाल को फूटी आंख भी नहीं देखना चाहते'- राजभर 'सपा में शिवपाल की हालत झुनझुना बजाने वाले जैसी': अखिलेश पर ओपी राजभर का निशाना ओपी राजभर ने सपा को बताया डूबती नांव, 2027 को लेकर कहा- NDA के साथ लड़ेंगे चुनाव लखनऊ,  योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि 2027 के चुनाव में हम 350 सीट जीतने जा रहे हैं। वहीं अयोध्या में हो रही कथा में अखिलेश यादव के जाने को लेकर राजभर ने कहा, “उनको ना तो राम प्यारे हैं और ना ही कृष्ण प्यारे हैं, अखिलेश यादव खुद को कृष्ण का वशंज बताते हैं लेकिन वो मथुरा और अयोध्या नहीं जाते। उन्हें डर लगा रहता है कि मुस्लिम सपा का साथ न छोड़ दें।” राजभर ने कहा, “अखिलेश यादव 12 बजे तक अली-अली करते हैं। उसके बाद बजरंगबली करते हैं। अखिलेश यादव का हाल माया मिली ना राम वाला है।” उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव कांग्रेस को चालू पार्टी बता चुके हैं। कांग्रेस सपा को भाजपा की बी टीम बता चुकी है। 2027 में कोई लड़ाई नहीं है।” वहीं सपा में शिवपाल यादव की स्थिति को लेकर ओपी राजभर ने कहा, “शिवपाल की स्थिति बैंड पार्टी में झुनझुना बजाने वाले जैसी हो गई है जिसे सुर-ताल से कोई मतलब नहीं होता। वही हाल उनका भी है।” उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव शिवपाल यादव को फूटी आंख से भी नहीं देखना चाहते हैं। अभी उनको लोहिया ट्रस्ट से भी हटा दिया। अभी मैंने सुना कि अब कार्यालय में भी शिवपाल जाएंगे तो अखिलेश से पूछकर जाएंगे। यह सब अविश्वास ही तो है। अखिलेश यादव हमेशा शिवपाल यादव को अपमानित करने का काम करते हैं।” ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रोटेस्ट पर राजभर का बयान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रोटेस्ट पर ओपी राजभर ने कहा, “कांग्रेस-सपा को तो ज्ञानेश कुमार को धन्यवाद देना चाहिए कि निष्पक्ष चुनाव करवाया। जिसमें 37 सीट सपा को, 6 सीट कांग्रेस को मिली।” उन्होंने कहा, “अगर चोरी होती, तो 2019 में लोकसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 303 सीट जीती। चोरी करती, तो बढ़ता न। और 2024 में 240 ही आई। यह क्या साबित करता है?” राजभर ने कहा, “2014 के पहले पूरे देश के सिस्टम पर कब्जा कांग्रेस का था। चुनाव आयोग कांग्रेस का था। तो क्या कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मिलकर के मोदी जी को प्रधानमंत्री बना दिया? 2012 से 2017 तक समाजवादी पार्टी का कब्जा उत्तर प्रदेश के सारे सिस्टम पर था। तो क्या अखिलेश जी ने योगी जी को मुख्यमंत्री बना दिया?” उन्होंने आगे कहा, “अब मोदी जी और योगी जी दोनों लोग मिलकर के जनता का काम करने लगे, तो जनता उन पर विश्वास करने लगी और राहुल-अखिलेश को छोड़ दिया। तो अब यह लोग सोच रहे हैं कि अब प्रदर्शन करें कि आगामी चुनाव के बाद जनता से हम लोग कह सकें कि भाई वोट चोरी हो गई। बस इसी नाते लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। और कोई बात नहीं है।” 2027 को लेकर क्या बोले राजभर? 2027 को लेकर ओम प्रकाश राजभर से सवाल हुआ कि क्या सुभासपा भाजपा के साथ रहेगी या कहीं जाएगी? इस पर राजभर ने कहा, “अखिलेश यादव भी तो 8 बार समझौता किए, बसपा से, आरएलडी से, कांग्रेस से, सुभासपा से। उनसे नहीं कोई पूछता है।” राजभर ने कहा कि हम लोग NDA के साथ हैं। समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए राजभर ने कहा, “सपा डूबती हुई नैया है, जिसे डूबना हो वही उस पार्टी में जाए।"

सर्वाधिक मतों से जिताकर बिहार की जनता ने दिया बड़ा सम्मान, रामविलास जी का मिशन बढ़ा रहे चिरागः सीएम

दलितों, वंचितों की प्रखर आवाज थे रामविलास पासवानः मुख्यमंत्री  राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की छठी पुण्यतिथि पर अर्पित की श्रद्धांजलि  रामविलास जी को जो सम्मान बिहार में मिला, वही यूपी में भी दिलाएंगेः मुख्यमंत्री सर्वाधिक मतों से जिताकर बिहार की जनता ने दिया बड़ा सम्मान, रामविलास जी का मिशन बढ़ा रहे चिरागः सीएम  लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान जुझारू तेवर वाले जननेता थे। उन्होंने अपने इस तेवर से सामाजिक चेतना को नया आयाम प्रदान किया। 50 वर्ष पहले बिहार में ऐसे युवा नेता का अभ्युदय हुआ था, जो उस समय दलितों, वंचितों की प्रखर आवाज बना। बिहार की जनता ने उस स्वर को बड़ा सम्मान दिया और रामविलास जी को सबसे अधिक मतों से जिताकर संसद भेजा। उन्होंने भारतीय राजनीति के माध्यम से अपना जीवन सामाजिक चेतना को जागरूक करने और बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के सपने का भारत बनाने के लिए समर्पित किया।  राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की छठी पुण्यतिथि पर सुशांत गोल्फ सिटी में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में अपनी बातें रखीं। मुख्यमंत्री ने रामविलास पासवान के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर सभी ने भजनों का श्रवण करते हुए आध्यात्मिक गंगा में डुबकी लगाई। संसद में हमने साथ कार्य किया  मुख्यमंत्री ने कहा कि बतौर सांसद मुझे भी पासवान जी के साथ लंबे समय तक संसद में कार्य करने का अनुभव प्राप्त हुआ। उनके मन में भारत की परंपरा के प्रति सदैव श्रद्धा व सम्मान की भावना रही। दलित-वंचित को न्याय मिले, उन्हें समाज की मुख्य धारा में सम्मान व उचित स्थान मिले, अपने इस संकल्प को मंजिल तक पहुंचाने के लिए रामविलास जी ने निरंतर कार्य किया।  जो सम्मान बिहार में मिला, वही यूपी में दिलाएंगे सीएम ने बिहार सरकार का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि वहां उनकी पुण्यतिथि को राष्ट्रीय समारोह के रूप में आयोजित किया जा रहा है। सीएम ने रामविलास पासवान के दृढ़ संकल्प का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने जो बोला, उसके अनुरूप जीवन जिया। उत्तर प्रदेश में इस आयोजन के लिए सीएम ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का आभार जताया और विश्वास दिलाया कि बिहार में जो सम्मान रामविलास पासवान को मिला है, वही सम्मान उत्तर प्रदेश में भी दिलाएंगे। रामविलास जी के मिशन को बढ़ा रहे चिराग  सीएम ने कहा कि रामविलास पासवान की अनुपस्थिति खलती है, लेकिन इस बात की संतुष्टि है कि चिराग पासवान उनके मिशन को बढ़ाने के लिए अनवरत कार्य कर रहे हैं। पीएम मोदी जी के सान्निध्य में केंद्रीय मंत्री के रूप में चिराग पासवान अपनी आवाज को हर मंच के माध्यम से बढ़ा रहे हैं।  रामविलास जी की सदाशयता हृदय छू लेती थी सीएम ने कहा कि रामविलास जी ने सामाजिक न्याय की लड़ाई को बिना भेदभाव आगे बढ़ाने का काम किया। श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी तथा नरेंद्र मोदी जी के मंत्रिमंडल में बतौर केंद्रीय मंत्री के रूप में, चुनावी जनसभाओं या अन्य अवसरों पर भी रामविलास जी की सहजता, स्नेह व सदाशयतापूर्ण व्यवहार हर किसी का हृदय छू लेता था।

अखिलेश के अयोध्या दौरे पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का हमला, बोले- ‘सपा को सनातन संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं’

लखनऊ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने तीखा हमला बोला है। अयोध्या में राम मंदिर दर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर ब्रजेश पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी को सनातन संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा केवल तुष्टीकरण और वोट की राजनीति करती है, इसी वजह से राम मंदिर जाने से बचती है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेताओं के हाथ कारसेवकों के खून से रंगे हुए हैं। ऐसे में वे राम मंदिर कैसे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सपा अल्पसंख्यकों को नाराज नहीं करना चाहती, इस डर से अखिलेश राम मंदिर नहीं जा रहे हैं। उनके मुताबिक, सपा के लिए यह पूरा मामला वोट पॉलिटिक्स से जुड़ा हुआ है। ‘जीतने पर चुनाव आयोग अच्छा, हारने पर खीज मिटाता है विपक्ष’ एसआईटी को लेकर विपक्ष के हंगामे पर भी डिप्टी सीएम ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष जब चुनाव जीतता है तो निर्वाचन आयोग अच्छा होता है, लेकिन जब हारता है तो अपनी खीज निर्वाचन आयोग पर निकालता है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि केरल, तमिलनाडु और हिमाचल में विपक्ष चुनाव जीता, लेकिन जीत के बाद उसने निर्वाचन आयोग को लेकर कोई सवाल नहीं उठाया। ‘2027 में सपा की लुटिया डूबने वाली है’ ब्रजेश पाठक ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भी सपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को पता है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष की लुटिया पूरी तरह डूबने वाली है। इसी वजह से विपक्ष फेस सेविंग के लिए इस तरह के षड्यंत्र रच रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी आने वाली स्थिति को लेकर परेशान है और इसी के चलते चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।