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कोविदार वृक्ष तथा सूर्य से संकल्प लेकर सत्पुरुषों के समान उत्तम जीवन जीने की दुनिया को देनी होगी प्रेरणा : डॉ. मोहन भागवत

संपूर्ण विश्व को अपने आलोक से सुख-शांति प्रदान करने वाला धर्म ध्वज फिर से हुआ शिखर पर विराजमान : डॉ. मोहन भागवत कोविदार वृक्ष तथा सूर्य से संकल्प लेकर सत्पुरुषों के समान उत्तम जीवन जीने की दुनिया को देनी होगी प्रेरणा : डॉ. मोहन भागवत अयोध्या  मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष पंचमी यानी विवाह पंचमी के पावन अवसर पर अयोध्या धाम सहित संपूर्ण विश्व प्रभु श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पूर्णत्व का साक्षी बना। इस अवसर पर मंगलवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज के आरोहण समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि आज हम सबके लिए सार्थकता का दिवस है। उन्होंने कहा कि कितने ही लोगों ने जो सपना देखा, कितने ही लोगों ने जो प्रयास किए, अपने प्राण अर्पित किए, आज उनकी स्वर्गस्थ आत्मा तृप्त हुई होगी। आज वास्तव में अशोक सिंघल जी को शांति मिली होगी। महंत रामचंद्र दास जी महाराज, डालमिया जी समेत कितने ही संत, गृहस्थ एवं विद्यार्थियों ने प्राणार्पण किया, पसीना बहाया। उन्होंने कहा कि जो पीछे रहे, वे भी यही इच्छा व्यक्त करते थे कि मंदिर बनेगा जो अब बन गया है। आज मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो गई। ध्वजारोहण भी हो गया। निश्चित तौर पर यह एक ऐतिहासिक व पूर्णत्व का क्षण है। आज का दिन कृतार्थता का दिवस है। आज हमारे संकल्प की पुनरावृत्ति का दिवस है, जिसे हमारे पूर्वजों ने हमें दिया है। धर्म का प्रतीक भगवा रंग ही है ध्वज का रंग डॉ. भागवत ने कहा कि रामराज्य का ध्वज, जो कभी अयोध्या में फहराता था और संपूर्ण विश्व में अपने आलोक से सुख-शांति प्रदान करता था, वह ध्वज आज फिर से नीचे से ऊपर चढ़कर शिखर पर विराजमान हो चुका है। इसे हमने अपनी आंखों से इसी जन्म में देखा है। ध्वज धर्म का प्रतीक होता है। इतना ऊंचा ध्वज चढ़ाने में भी समय लगा, ठीक ऐसे ही मंदिर बनाने में भी समय लगा। 500 साल छोड़ें तो भी 30 साल तो लगे ही। उस मंदिर के रूप में हमने उन तत्वों को ऊपर पहुंचाया है जिनसे संपूर्ण विश्व का जीवन ठीक चलेगा। उसी धर्म का प्रतीक भगवा रंग इस धर्म ध्वज का रंग है। रघुकुल परंपरा से जुड़े प्रतीक चिह्नों से सीखें सत्पुरुष का कर्तव्य उन्होंने कहा कि इस धर्म ध्वज पर कोविदार का प्रतीक रघुकुल की परंपरा से जुड़ा हुआ है। यह कचनार जैसा लगता है। यह मंदार और पारिजात दोनों वृक्षों के गुणों का संयुक्त रूप है। वृक्ष स्वयं धूप में खड़े रहकर सबको छाया देते हैं, फल स्वयं उगाते हैं और दूसरों को बांट देते हैं। “वृक्षाः सत्पुरुषाः इव” अर्थात वृक्ष सत्पुरुषों के समान हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा जीवन जीना है तो चाहे कितनी प्रतिकूलता हो, साधनहीनता हो, दुनिया स्वार्थ में बहती हो फिर भी हमारा संकल्प है कि हमें धर्म के पथ पर चलना है। भागवत बोले, कचनार के औषधीय गुण हैं, खाद्य उपयोग में भी आता है। सब प्रकार से उपयोगी यह प्रतीक धर्म जीवन का पर्याय है। सूर्य भगवान धर्म के तेज और संकल्प के प्रतीक हैं। उनके रथ का चक्र एक है, रास्ता नहीं है, सात घोड़े हैं, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए सर्प की लगाम है, सारथी के पैर नहीं हैं। क्या ऐसी गाड़ी चल सकती है? फिर भी वे बिना थके प्रतिदिन पूरब से पश्चिम जाते आते हैं। कार्य की सिद्धि स्वयं के भरोसे होती है। ओंकार से होता है सत्य का प्रतिनिधित्व डॉ. भागवत के अनुसार, हिंदू समाज ने लगातार 500 वर्षों और बाद के दीर्घ आंदोलन में अपने इस स्वत्व को सिद्ध किया। रामलला आ गए, मंदिर बन गया। यही बात सत्य पर आधारित धर्म को लेकर भी है। सत्य का प्रतिनिधित्व ओंकार से होता है। वही ओंकार संपूर्ण विश्व को देने वाला भारत हमें खड़ा करना है। उन्होंने कहा कि हमारे संकल्प का प्रतीक हम पूरा कर चुके हैं। धर्म, ज्ञान, छाया तथा सुफल संपूर्ण दुनिया में बांटने वाला भारतवर्ष खड़ा करने का काम शुरू हो गया है। इस प्रतीक को ध्यान में रखते हुए सभी विपरीत परिस्थितियों में हमें एकजुट होकर सतत कार्य करना होगा। भारतवर्ष के लोगों से दुनिया सीखे जीवन जीने का तरीका आरएसएस सर संघचालक ने कहा, “एतद्देशप्रसूतस्य सकाशादग्रजन्मनः” अर्थात इस देश में जन्मे अग्रजन्मा ऐसा जीवन जिएं कि दुनिया उनसे प्रेरणा लें। “स्वं स्वं चरित्रं शिक्षेरन् पृथिव्यां सर्वमानवाः” यानी पृथ्वी के समस्त मानव भारतवासियों के चरित्र से जीवन की विद्या सीखें। उन्होंने कहा कि परम वैभव सम्पन्न, सबके लिए खुशी और शांति बांटने वाला तथा विकास का सुफल देने वाला भारतवर्ष हमें खड़ा करना है। यही विश्व की अपेक्षा और हमारा कर्तव्य भी है। उन्होंने कहा कि श्रीरामलला विराजमान हैं, उनसे प्रेरणा लेकर कार्य की गति हम आगे बढ़ाएं। इस अवसर पर रामदास स्वामी के श्लोक “स्वप्नी जे देखिले रात्री, तेते तैसेचि होतसे” का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि जैसा सपना उन्होंने देखा था, उससे भी अधिक भव्य और सुंदर मंदिर आज बन गया है। सभी सनातन धर्मावलंबियों और भारतवर्ष के नागरिकों को शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि यह हमारे हृदय में तप का सृजन करे यही कामना है।

धर्मध्वजा की स्थापना से गदगद CM योगी, अयोध्या में बोले नए युग की शुरुआत का संदेश

अयोध्या  राम नगरी अयोध्या में धर्म ध्वजारोहण कार्यक्रम संपन्न हो गया. इस मौके पर मुख्य रूप से पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ, संघ प्रमुख मोहन भागवत और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल शामिल रहीं. ध्वजारोहण के बाद सीएम योगी बेहद खुश नजर आए. उन्होंने कार्यक्रम में आए हजारों लोगों को मंच से संबोधित करते हुए कहा कि अयोध्या में राम मंदिर ध्वजारोहण एक नए युग का प्रारंभ है. सीएम योगी ने कहा कि यह मंदिर 140 करोड़ भारतीयों की आस्था और आत्मसम्मान का प्रतीक है. ध्वजारोहण यज्ञ की पूर्णाहूति नहीं, 'नए युग का शुभारंभ' है अयोध्या धाम में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज के आरोहण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में इस क्षण को 'नए युग का शुभारंभ' बताया. उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर 140 करोड़ भारतीयों की आस्था, सम्मान व आत्मगौरव का प्रतीक है. मुख्यमंत्री ने इस संघर्ष में योगदान देने वाले सभी संतों, योद्धाओं और श्रीरामभक्तों को नमन किया. मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि राम मंदिर पर फहराता केसरिया ध्वज धर्म, मर्यादा, सत्य-न्याय व राष्ट्रधर्म का प्रतीक है. यह उस सत्य का उद्घोष है कि धर्म का प्रकाश अमर है और रामराज्य के मूल्य कालजयी हैं. संकल्प का कोई विकल्प नहीं होता उन्होंने कहा कि संकल्प का कोई विकल्प नहीं होता. आज भारत विकास और विरासत का बेहतरीन समन्वय देख रहा है, जहां बिना भेदभाव के 80 करोड़ लोगों को राशन और 50 करोड़ को निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है, जो रामराज्य की उद्घोषणा है. मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि 500 वर्षों में साम्राज्य बदले, लेकिन आस्था अडिग रही. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में अयोध्या अब संघर्ष से निकलकर 'उत्सवों की वैश्विक राजधानी' बन रही है.  बकौल मुख्यमंत्री योगी- रामलला की नगरी अब आस्था, आधुनिकता व अर्थव्यवस्था के नए युग में प्रवेश कर चुकी है. महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं के साथ यह देश की पहली सोलर सिटी के रूप में भी विकसित हो रही है. धर्म की ज्योति कभी बुझती नहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि ये ध्वज इस बात का प्रमाण है कि धर्म की ज्योति कभी बुझती नहीं और रामराज्य के सिद्धांत अमर हैं. उन्होंने यह भी कहा कि 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तब करोड़ों भारतीयों के मन में जो विश्वास जागा था, आज उसी विश्वास का प्रतीक ये भव्य राम मंदिर बनकर खड़ा है.  

ध्वजारोहण के साथ श्रीराम मंदिर में नया अध्याय, 5 तरीके जो बदल रहे तीर्थ यात्रा का अर्थ

अयोध्या अयोध्या में नवनिर्मित राम लला मंदिर न केवल हिंदुओं के पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुका है बल्कि सदियों की प्रतीक्षा के बाद यह मंदिर अब तीर्थ यात्रा के पारंपरिक मायने को भी बदल रहा है. यह भव्य मंदिर न केवल हिंदुओं के धार्मिक महत्व का प्रतीक है बल्कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और अर्थव्यवस्था में एक नया अध्याय लिख रहा है. पहले जहां तीर्थ यात्रा केवल आध्यात्मिक शांति और भक्ति तक सीमित थी, वहीं अब यह पर्यटन, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का माध्यम बन गई है. इसके साथ ही अयोध्या, जो कभी एक छोटा-सा शहर था, अब उत्तर प्रदेश की प्रगति का प्रमुख इंजन बन चुका है. परंपरागत रूप से, तीर्थ यात्रा का अर्थ था पैदल या साधारण साधनों से पवित्र स्थलों की यात्रा करना, जहां भक्त अपनी आत्मा की शुद्धि के लिए जाते थे. लेकिन राम मंदिर के निर्माण ने इस अवधारणा को पूरी तरह बदल दिया है. अब तीर्थ यात्रा एक आधुनिक, सुविधाजनक और बहुआयामी अनुभव बन गई है. मंदिर के उद्घाटन के बाद, अयोध्या में पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. 2024 में 13.77 करोड़ से अधिक दर्शनार्थी आए, जो ताजमहल के पर्यटकों से अधिक हैं. 2025 के पहले छह महीनों में ही 23 करोड़ पर्यटक पहुंचे, और वर्ष के अंत तक यह संख्या 50 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है. यह बदलाव केवल संख्याओं तक सीमित नहीं है. बहुत कुछ बदला है. 1-विदेशी पर्यटक और अमीर भारतीय अब योग और आयुर्वेद के साथ राम मंदिर को जोड़कर आते हैं अयोध्या ने हिंदुओं की तीर्थ यात्रा को वैश्विक पर्यटन का हिस्सा बना दिया है.राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में आने वाले विदेशी पर्यटकों का चरित्र पूरी तरह बदल गया है. पहले जहां ज्यादातर विदेशी केवल इंडिया का एक्सोटिक सर्किट (दिल्ली-आगरा-जयपुर-वाराणसी) देखकर चले जाते थे, अब वे जानबूझकर अयोध्या को अपने इटीनेरेरी में शामिल कर रहे हैं. वह भी केवल मंदिर देखने के लिए नहीं, बल्कि एक संपूर्ण वेलनेस + स्प्रिचुअल अनुभव के लिए. 2024-25 में अयोध्या आने वाले विदेशी पर्यटकों में सबसे तेज़ बढ़ोतरी अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड से दर्ज की गई है. इनमें से अधिकांश 30-55 आयु वर्ग के हैं, और वे योग, ध्यान, आयुर्वेद और भारतीय दर्शन से पहले से परिचित हैं. उनके लिए राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि रामायण के उस महाकाव्य का जीवंत केंद्र है जिसकी कहानियां वे बाली, कंबोडिया, थाईलैंड के मंदिरों में पहले ही देख चुके हैं. अब वे उसी कथा के मूल स्रोत को अनुभव करना चाहते हैं. इस नए ट्रेंड को समझते हुए अयोध्या में कई विशेष पैकेज शुरू हो गए हैं. उदाहरण के लिए रामायण वेलनेस रिट्रीट जिसमें सुबह सरयू तट पर सूर्य नमस्कार और प्राणायाम, फिर राम मंदिर दर्शन, दोपहर में पंचकर्म या अभ्यंगम मसाज, शाम को रामकथा या भजन संध्या.   योग इन द लैंड ऑफ राम 5 दिन का पैकेज है. इसमें हनुमान गढ़ी में अष्टांग योग, कनक भवन के पास ध्यान सत्र, और नमामि गंगे घाट पर साउंड हीलिंग शामिल है.   इसी तरह आयुर्वेदिक रामायण ट्रेल का भी एक पैकेज पॉपुलर हो रहा है. इसमें दर्शन के साथ-साथ स्थानीय जड़ी-बूटियों से बने सात्विक भोजन, तुलसी-गिलोय काढ़ा और केसर-दूध प्रसाद शामिल है.इन पैकेजों को प्रमोट करने में विदेशी योग टीचर्स और इन्फ्लुएंसर्स की बड़ी भूमिका है. 2-अयोध्या की तीर्थ यात्रा में डिजिटल क्रांति राम मंदिर के बाद अयोध्या की तीर्थयात्रा में आस्था और टेक्नोलॉजी का ऐसा संगम हुआ है कि पहले की पीढ़ी कल्पना भी नहीं करेगी इतना सब कुछ बदल गया. घर बैठे ही रामलला के दर्शन की बात पुरानी हो चुकी है क्योंकि कई मंदिरों में यह पहले से ही हो रहा है. यहां कतार में घंटों खड़े होने से पहले पता चल जाता है कि लाइन कितनी लंबी है. कतार में खड़े लोगों के मोबाइल पर रियल-टाइम अपडेट आता है कि 'आपकी बारी में अभी 42 मिनट बाकी हैं, कृपया रामपथ पर बने डिजिटल वेटिंग एरिया में विश्राम करें'.  बड़े-बड़े एलईडी स्क्रीन पर रामचरितमानस की चौपाइयां, 360° वर्चुअल टूर और लाइव आरती चलती रहती है. इतना ही नहीं सरयू की आरती का लाइव प्रसारण मोबाइल पर देखकर लोग अपने-अपने शहर में दीया जला लेते हैं.  दिवाली 2025 के दीपोत्सव को 187 देशों के 4.2 करोड़ लोगों ने लाइव देखा. अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, मॉरीशस, फिजी और इंडोनेशिया से लाखों प्रवासी भारतीय उसी समय अपने घरों में टीवी खोलकर जय श्री राम बोलते हैं और दिया जलाते हैं. अब अयोध्या की दीपावली सिर्फ़ अयोध्या की नहीं, विश्व हिंदू समाज की दीपावली बन गई है. मोबाइल ऐप पर 22 भाषाओं में ऑडियो गाइड उपलब्ध है . 3- जीवनशैली और सांस्कृतिक उत्सव में बदली तीर्थयात्रा  भक्त अब रामायण-थीम वाली हेरिटेज वॉक, सात्विक भोजन ट्रेल्स और लेजर शो का आनंद लेते हैं. पहले जहां यात्रा कष्टपूर्ण होती थी, वहीं अब इलेक्ट्रिक शटल, एयर-कंडीशंड होटल और साफ-सुथरी सड़कें उपलब्ध हैं. यह मंदिर न केवल राम लला के दर्शन का केंद्र है बल्कि सूर्या कुंड, गुप्तार घाट और भारत कुंड जैसे अन्य स्थलों को भी जोड़ता है, जो यात्रा को एक पूर्ण सांस्कृतिक पैकेज बनाते हैं.  सांस्कृतिक रूप से, राम मंदिर ने राम नवमी और दीपोत्सव जैसे त्योहारों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है. राम लीला प्रदर्शन बढ़े हैं, और कला-शिल्प में रामायण की थीम प्रमुख हो गई है. विदेशी पर्यटक अब योग और आयुर्वेद के साथ राम मंदिर को जोड़कर आते हैं, जिससे तीर्थ यात्रा वैश्विक पर्यटन का हिस्सा बन गई है.  यह बदलाव महिलाओं और युवाओं को भी सशक्त बना रहा है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. कुल मिलाकर, राम मंदिर ने तीर्थ यात्रा को मात्र धार्मिक कृत्य से ऊपर उठाकर एक जीवनशैली और सांस्कृतिक उत्सव में बदल दिया है.  4-नया पर्यटक वर्ग अयोध्या को केवल देखने नहीं, बल्कि अनुभव करने आ रहा है अयोध्या अब एक फोटो-पॉइंट नहीं रहा. 2024 के बाद जो पर्यटक यहां आ रहे हैं, वे सेल्फी लेकर लौटने वाले साधारण सैलानी नहीं हैं. वे यहां अपनी आत्मा को छूने, अपने भीतर कुछ बदलने, और घर लौटकर उस बदलाव को दूसरों तक पहुंचाने आते हैं. तीर्थयात्री सुबह चार बजे सरयू तट पर पहुंचते हैं. वहां कोई टूर गाइड नहीं, कोई लाउडस्पीकर नहीं—बस घंटों का … Read more

सनातन गौरव का क्षण, धर्मध्वज से आलोकित हुआ अयोध्या धाम

सदियों की प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में धर्मध्वज का आरोहण, संत समाज भावविभोर सनातन गौरव का क्षण, धर्मध्वज से आलोकित हुआ अयोध्या धाम योगी मोदी नेतृत्व में धर्म संस्कृति का पुनर्जागरण, मंदिरों में लौट रहा वैभव अयोध्या  सनातन परंपरा और आस्था के प्रतीक धर्मध्वज का आज राम मंदिर के शिखर पर प्रतिष्ठापन अयोध्या के संत समाज के लिए भावपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण बन गया। 500 वर्षों की प्रतिक्षा, संघर्ष और तपस्या के उपरांत प्रभु श्रीराम के दिव्य मंदिर पर धर्मध्वजा का आरोहण केवल एक धार्मिक क्षण ही नहीं बल्कि सनातन आस्था की वैश्विक प्रतिष्ठा का साक्ष्य बन रहा है। अवधपुरी के संत समाज श्रद्धा और भावनाओं से अभिभूत होकर इस पल को सनातन गौरव का क्षण बता रहे हैं। वे इसे उस संघर्षपूर्ण यात्रा का फल मानते हैं जिसमें संतों, भक्तों और समाज ने सैकड़ों वर्षों में अदम्य धैर्य और आस्था का परिचय दिया। साधु संतों का कहना है कि आज वह क्षण साकार हो रहा है जिसकी कल्पना उनके पूर्वजों ने सदियों पूर्व की थी। धर्म ध्वजा का आरोहण भारतवर्ष की आध्यात्मिक विरासत को और भी मजबूत करता है तथा संपूर्ण विश्व में सनातन आस्था की महिमा को प्रखरता से स्थापित करता है। संत समाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका को इस उपलब्धि का महत्वपूर्ण आधार मानता है। उनका कहना है कि डबल इंजन सरकार ने सनातन परंपराओं के संरक्षण और मंदिर संस्कृति के पुनरुद्धार का जो कार्य किया है वह देश की आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ कर रहा है। मठ मंदिरों का संवर्धन, धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार और संतों के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण को नई दिशा प्रदान की गई है। राम वैदेही मंदिर के प्रतिष्ठित संत दिलीप दास ने कहा कि अयोध्या मिशन के अंतर्गत सनातन संस्कृति का जिस प्रकार पुनरुद्धार हुआ है वह प्रशंसनीय है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धर्म की रक्षा और स्थापना के उद्देश्य से सतत संलग्न बताते हुए कहा कि वह केवल एक मुख्यमंत्री नहीं बल्कि धर्म परंपरा की रक्षा के प्रहरी हैं। विवाह पंचमी के अवसर पर आयोजित इस प्रतिष्ठा समारोह में साधु संतों द्वारा प्रभु श्रीराम और माता जानकी के विवाह पर्व का पूजन अर्चन भी किया गया। संत समाज का विश्वास है कि यह क्षण भारत के उज्ज्वल भविष्य की आस्था को और अधिक मजबूत करेगा तथा सनातन समाज के आत्मगौरव का शंखनाद साबित होगा।

अयोध्या में उमड़ा आस्था का सागर, देशभर से पहुंचे श्रद्धालु

ध्वजारोहण के क्षण भक्तिमय हुई अयोध्या, चारों दिशाओं में गूंजा जय श्रीराम अयोध्या में उमड़ा आस्था का सागर, देशभर से पहुंचे श्रद्धालु   आधुनिक और त्रेतायुगीन अयोध्या का अद्भुत संगम, संत समाज ने सराहा अयोध्या  श्रीराम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज फहराए जाने के ऐतिहासिक क्षण ने संपूर्ण अयोध्या को भक्ति भाव से ओतप्रोत कर दिया। धर्मपथ सहित शहर की सभी प्रमुख सड़कों पर जयघोष करते श्रद्धालु उमड़ पड़े और राम नाम की गूंज से नगर भक्तिरस से सराबोर हो गया। लता मंगेशकर चौक पर हजारों की संख्या में भक्त एकत्रित होकर ध्वजारोहण का सीधा प्रसारण देखते रहे। जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर शिखर पर धर्मध्वजा स्थापित की, उपस्थित जनसमूह भावविभोर होकर जय श्रीराम के उद्घोष में डूब गया। श्रद्धालुओं में अपार उमंग, कहा त्रेता युग जैसा वैभव अयोध्या के पड़ोसी जिलों सुल्तानपुर, बस्ती, अंबेडकर नगर और बाराबंकी सहित उत्तर भारत के अन्य हिस्सों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रावस्ती से आए राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय ने कहा कि वह 17 नवंबर को ही अयोध्या पहुंच गए थे और आज स्वयं को अत्यंत गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी और योगी ने अयोध्या का गौरव वापस दिलाया है और शहर को स्वस्थ व सुंदर बनाया है। श्रावस्ती के ही विश्वनाथ जायसवाल ने कहा कि राम मंदिर निर्माण का कार्य ऐतिहासिक रहा है और मोदी-योगी ने वह किया है जो पूर्व में कोई नहीं कर सका। सांस्कृतिक और भावनात्मक उत्सव में बदला समारोह बिहार के गोपालगंज से हनुमान जी की वेशभूषा में पहुंचे एक रामभक्त ने अपने नृत्य और गायन से माहौल को भक्ति रस में रंग दिया। दिल्ली से आई श्रद्धालु महिलाएं मधु, धारणा, संतोष और पूजा ने कहा कि राम मंदिर परिसर पहुंचते ही उन्हें देवलोक जैसी अनुभूति हुई। संत रमाकांत शर्मा, जो पिछले 25 वर्षों से अयोध्या आते रहे हैं, ने कहा कि अयोध्या आधुनिक भी हुई है और अपनी त्रेतायुगीन झलक भी पा चुकी है। ढोल और मंजीरों के मधुर स्वरों के बीच संतों की टोली ने इस आयोजन को एक दिव्य सांस्कृतिक पर्व में परिवर्तित कर दिया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं रहा, बल्कि आस्था, इतिहास और आधुनिकता के संगम का जीवंत प्रतीक बनकर उदित हुआ, जिसमें अयोध्या ने अपनी आध्यात्मिक प्रतिष्ठा विश्व के सामने पुनः स्थापित की।

राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साकेत हैलीपेड पर किया प्रधानमंत्री का स्वागत

अयोध्यावासियों ने जयश्रीराम, जय जय हनुमान के जयकारे संग पुष्पवर्षा से प्रधानमंत्री का किया स्वागत  राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साकेत हैलीपेड पर किया प्रधानमंत्री का स्वागत  श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण करने मंगलवार को अयोध्या पहुंचे प्रधानमंत्री  अयोध्या  श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के जरिए ‘संकल्प सिद्धि’ के लिए रामनगरी पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोरदार स्वागत हुआ। जयश्रीराम, जय जय हनुमान के गगनभेदी नारों संग अयोध्यावासियों ने प्रधानमंत्री के काफिले पर पुष्पवर्षा भी की। श्रीराम की अयोध्या ने प्रधानमंत्री का पूरे रास्ते में अभूतपूर्व स्वागत किया। अयोध्यावासियों के एक हाथ में भगवा ध्वज तो दूसरे हाथ में तिरंगा फहरा रहा था। वहीं स्वागत से अभिभूत प्रधानमंत्री ने भी हाथ हिलाकर अयोध्यावासियों का अभिवादन किया। अयोध्या पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया।  अयोध्यावासियों के एक हाथ में भगवा ध्वज तो दूसरे में तिरंगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार सुबह अयोध्या पहुंचे। साकेत महाविद्यालय पर उनका हेलीकॉप्टर उतरा। वहां से काफिले संग टेढ़ी बाजार होते हुए उन्होंने श्रीराम मंदिर परिसर में प्रवेश किया। इस दौरान अयोध्यावासियों ने जयश्रीराम, जय जय हनुमान के गगनभेदी नारों संग उनका स्वागत किया। अयोध्यावासी एक हाथ में भगवा ध्वज तो दूसरे हाथ में तिरंगा फहराते हुए प्रधानमंत्री का स्वागत करते रहे। प्रधानमंत्री ने भी पूरे रास्ते में हाथ हिलाकर अयोध्यावासियों का अभिवादन किया।  सप्त मंदिरों में झुकाया शीश, की पूजा-अर्चना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सप्त मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुह्य और माता शबरी मंदिर में पहुंचकर प्रधानमंत्री ने शीश झुकाया। प्रधानमंत्री ने शेषावतार मंदिर व माता अन्नपूर्णा मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया।  मुख्यमंत्री व राज्यपाल ने किया प्रधानमंत्री का स्वागत  प्रधानमंत्री अयोध्या में साकेत विश्वविद्यालय हैलीपेड पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की तरफ प्रस्थान किया। प्रधानमंत्री व सर संघ चालक ने रामलला के दरबार में झुकाया शीश  श्री राम मंदिर परिसर में राम दरबार पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दर्शन-पूजन व आरती की। यहां पुजारियों ने तीनों विशिष्टजनों को राम नामी गमछा ओढ़ाया व प्रसाद दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत ने विधिविधान से पूजन-अर्चन कर रामलला का भी आशीर्वाद प्राप्त किया।

अयोध्या में पीएम मोदी का संबोधन: राम मंदिर पर ध्वजारोहण, धर्म ध्वज बनेगा प्रेरणा

अयोध्या  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अयोध्या के राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज फहरा दिया है. इस मौके पर पीएम मोदी के साथ संघ प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद रहे. पीएम मोदी दिल्ली से अयोध्या से महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से हेलीकॉप्टर के जरिये साकेत महाविद्यालय पहुंचे. पीएम मोदी साकेत महाविद्यालय से सड़क मार्ग से रोड शो की शक्ल में सप्त मंदिर पहुंचे.पीएम मोदी सप्त मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद राम मंदिर पहुंचे और गर्भगृह के साथ ही मंदिर के प्रथम तल पर निर्मित राम दरबार में भी पूजा-अर्चना की. पीएम मोदी का यह दौरा आध्यात्मिक रूप से भी बेहद खास है. यह ध्वज सदियों के सपने साकार होने का प्रतीक- पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और पल की साक्षी बन रही है. आज संपूर्ण भारत, संपूर्ण विश्व राममय है. आज रामभक्तों के दिल में असीम आनंद है. सदियों के घाव भर रहे हैं. सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है. आज उस यज्ञ की पूर्णाहूति है, जिसकी अग्नि पांच सौ वर्ष तक प्रज्ज्वलित रही. आज भगवान श्रीराम के गर्भगृह की अनंत ऊर्जा प्रतिष्ठापित हुआ.यह धर्मध्वज इतिहास के सुंदर जागरण का रंग है. इसका भगवा रंग, इस पर लगी सूर्यवंश की थाती रामराज की कीर्ति को. यह ध्वज संकल्प है, यह संकल्प से सिद्धि की भाषा है, यह सदियों के संघर्ष की सिद्धि है, सदियों के सपने का साकार स्वरूप है, राम के आदर्शों का उद्घोष है. संतों की साधना और समाज की सहभागिता की गाथा है. यह धर्मध्वज प्रभु श्रीराम के आदर्शों का उद्घोष करेगा, सत्यमेव जयते का उद्घोष करेगा. यह ध्वज 'प्राण जाए पर वचन न जाई' की प्रेरणा है.  राम मंदिर की धर्म ध्वजा की विशिष्टता और महत्व अयोध्या के राम मंदिर के 161 फीट ऊंचे  शिखर पर फहराई गई यह केसरिया धर्म ध्वजा अनेक मायनों में बेहद खास है. इस 10 फीट ऊंचे और 20 फीट लंबे धर्म ध्वज पर एक तेजस्वी सूर्य की छवि है, जो भगवान श्री राम की प्रतिभा और वीरता का प्रतीक है, इस पर कोविदार वृक्ष की छवि के साथ एक 'ॐ' अंकित है. यह विशेष धर्म ध्वजा गुजरात की एक पैराशूट निर्माण कंपनी द्वारा 25 दिनों में तैयार की गई है. इसे टिकाऊ पैराशूट-ग्रेड कपड़े और प्रीमियम सिल्क के धागों से बनाया गया है. यह ध्वज 60 किमी/घंटा तक की हवा, बारिश और धूप का सामना करने में सक्षम है, जो इसकी लंबी आयु सुनिश्चित करता है. ध्वज के आयाम-  लंबाई: 20 फीट चौड़ाई: 10 फीट ध्वजदंड की ऊंचाई: 42 फीट केसरिया रंग का महत्व: केसरिया (भगवा) रंग सनातन परंपरा में त्याग, बलिदान, वीरता और भक्ति का प्रतीक है. यह ज्ञान, पराक्रम, समर्पण और सत्य की विजय का भी प्रतिनिधित्व करता है. रघुवंश के शासनकाल में इस रंग का विशेष महत्व था. ध्वज पर अंकित पवित्र चिह्न: ध्वज पर तीन मुख्य चिह्न अंकित हैं: सूर्य, ऊँ, और कोविदार वृक्ष. कोविदार वृक्ष: यह चिह्न रघुवंश की परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. प्राचीन ग्रंथों में इसे पारिजात और मंदार के दिव्य संयोग से बना वृक्ष बताया गया है, जो आज के कचनार वृक्ष जैसा दिखता है. सूर्यवंश के राजाओं के ध्वज पर सदियों से इसी वृक्ष का प्रतीक अंकित होता रहा है. वाल्मीकि रामायण में भी भरत के ध्वज पर इसका वर्णन मिलता है. ऊँ: सभी मंत्रों का प्राण माना जाने वाला 'ऊँ', ध्वजा पर अंकित होकर संपूर्ण सृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है. सूर्य: सूर्यदेवता को भी ध्वज पर चिह्नित किया गया है, जो विजय का प्रतीक माने जाते हैं. माना जाता है कि यह पूरा ध्वज सूर्य भगवान का प्रतीक है.  जैसा सपना देखा था, उससे भी शुभकर मंदिर बन गया है- मोहन भागवत मोहन भागवत ने कहा कि इस दिन के लिए कितने राम भक्तों ने अपने प्राण अर्पण किए. मंदिर बनने में भी समय लगता है. यह धर्म ध्वज है. इसका भगवा रंग है. इस धर्मध्वज पर रघुकूल का प्रतीक कोविदार वृक्ष है. कोविदार वृक्ष दो देव वृक्षों के गुणों का समुच्चय है. धर्मध्वज को शिखर तक पहुंचाना है. आज हमारे संकल्प की पुनरावृत्ति का दिवस है. सबको शांति बांटने वाला, सुफल देने वाला भारतवर्ष हमें खड़ा करना है. जैसा सपना देखा था कुछ लोगों ने, बिल्कुल वैसा, उससे भी अधिक शुभकर यह मंदिर बन गया है. अयोध्या धाम में आज हर प्रकार की सुविधा- योगी आदित्यनाथ यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर पर धर्मध्वज के आरोहरण को नए युग का शुभारंभ बताया और कहा कि यह भव्य मंदिर 140 करोड़ भारतीयों की आस्था का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि राम मंदिर पर लहराता यह केसरिया ध्वज धर्म का, भारत की संकल्पना का प्रतीक भी है. संकल्प का कोई विकल्प नहीं. योगी आदित्यनाथ ने 'लाठी-गोली खाएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे' नारे का भी उल्लेख किया और कहा कि भगवान राम की पावन नगरी एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है. हर प्रकार की सुविधा आज अयोध्या धाम में है. उन्होंने अयोध्या में हुए विकास के काम भी गिनाए और जय जय श्रीराम के नारे के साथ अपनी बात पूरी की. राम मंदिर पर लहराया धर्म ध्वज राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज लहराने लगा है. पीएम मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज लहराया.

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने जनपद भदोही में हुए फैक्ट्री हादसे का संज्ञान लिया  मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने के दिए निर्देश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद भदोही में फैक्ट्री में हुए हादसे का संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री जी ने जिला प्रशासन के आलाधिकारियों को तत्काल घटनास्थल पर पहुंचने का निर्देश दिए है। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।      दरअसल, औराई क्षेत्र के सूर्या कालीन फैक्ट्री में जहरीली गैस लीक होने से 3 लोगों की मौत हो गई है, जबकि एक मैकेनिक गंभीर रूप से घायल है।       मुख्यमंत्री जी ने घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर जिला प्रशासन के अधिकारियों को उनके समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही घायल के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने हनुमानगढ़ी व राम मंदिर में किया दर्शन पूजन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या पहुंच परखीं तैयारियां सीएम योगी आदित्यनाथ ने हनुमानगढ़ी व राम मंदिर में किया दर्शन पूजन मुख्यमंत्री ने ध्वजारोहण कार्यक्रम के आयोजन की तैयारियों के बारे में भी जाना अयोध्या  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम के एक दिन पहले सोमवार को ही अयोध्या पहुंच गए। यहां उन्होंने ध्वजारोहण कार्यक्रम के आयोजन की तैयारियों के बारे में भी जाना। मुख्यमंत्री ने हनुमानगढ़ी व श्रीराम मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को अयोध्या पहुंचने के बाद सबसे पहले वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे। वहां का निरीक्षण किया और अधिकारियों को यहां से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं के बारे में जाना। मुख्यमंत्री वहां से सीधे साकेत डिग्री कॉलेज स्थित हेलीपैड पहुंचे। यहां उन्होंने हेलीपैड से जुड़ी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इसके बाद मुख्यमंत्री हनुमानगढ़ी पहुंचे। यहां उन्होंने संकटमोचन हनुमान के चरणों में शीश झुकाया।  मुख्यमंत्री यहां से श्रीराम जन्म भूमि मंदिर पहुंचे। यहां पर उन्होंने कार्यक्रम की तैयारियों व सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली। सीएम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों से भी तैयारियों के संदर्भ में जानकारी ली। फिर सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों को ध्वजारोहण कार्यक्रम से संबंधित दिशा-निर्देश दिया। उन्होंने सुरक्षा, सफाई, अतिथि स्वागत आदि को लेकर भी प्रशासन की तैयारियों को जाना, फिर दिशा-निर्देश भी दिया।

अवैध विदेशी नागरिकों की जांच यूपी में शुरू, घुसपैठियों की पहचान के लिए सख्त कदम

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश में घुसपैठियों का सत्यापन अभियान शुरू हो गया है। रविवार से नेपाल सीमा से लगे इलाकों और बड़े शहरों में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। वापस भेजा जाएगा पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने ऐसे लोगों की छानबीन शुरू की है, जिन्हें पहचान के बाद डिटेंशन केंद्रों में रखा जाएगा। फर्जी दस्तावेजों पर रह रहे व्यक्तियों के बारे में पूरी जानकारी जुटाने के बाद उन्हें वापस भेजने की कार्रवाई की जाएगी। सभी थानों को किराएदार सत्यापन से जुड़े पुराने दस्तावेजों की दोबारा जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। हाल के महीनों में बांग्लादेशियों की घुसपैठ बढ़ने के कई मामले सामने आए हैं। कुछ गिरोह फर्जी पहचान पत्र बनवाकर विदेशी नागरिकों को राज्य में बसाने में मदद कर रहे हैं और इसके बदले मोटी रकम वसूल रहे हैं। अधिकतर बांग्लादेशियों को पश्चिम बंगाल के रास्ते यूपी लाया जा रहा है। पिछले कुछ समय में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां कई बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार भी कर चुकी हैं। प्रशासन ने सत्यापन की गति बढ़ा दी मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस और प्रशासन ने सत्यापन की गति बढ़ा दी है। सभी जिलों के एसएसपी और पुलिस कमिश्नरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि प्रक्रिया के दौरान किसी निर्दोष व्यक्ति को असुविधा न हो। साथ ही फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने या संदिग्ध गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।