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देश को दहलाने की प्लानिंग! शाहीन गैंग ने कानपुर से ली दो कारें, पांच शहरों में ब्लास्ट की साजिश

कानपुर फरीदाबाद विस्फोटक बरामदगी और दिल्ली ब्लास्ट में गिरफ्तार डॉक्टर शाहीन के दस्ते ने कानपुर से भी दो कारें खरीदी थीं। कानपुर, लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज में धमाके की साजिश रची गई थी। कार का इस्तेमाल इन धमाकों में होना था या नहीं, अभी यह रहस्य नहीं खुला है। पुलिस और एजेंसियों को कानपुर से कारें खरीदने की भनक लग गई तो गाड़ियां गायब कर दी गईं। सुरक्षा एजेंसियों ने कानपुर के पुरानी कारों के बाजार से दो लोगों को उठाया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक डॉ. शाहीन और डॉ. आरिफ के साथ तीन अन्य डॉक्टर यूपी में बड़ी वारदात को अंजाम देने की साजिश रच चुके थे। इसके लिए ही अलग-अलग शहरों से पुरानी कारें खरीदने की योजना बनी। सूत्रों का कहना है कि कानपुर से दो कारें खरीदी गईं। इन्हें अलग-अलग स्थानों पर देखा गया। इनमें से एक कार से डॉ. आरिफ भी एयरपोर्ट के पास दिखाई दिया था। वह एयरपोर्ट के असपास क्यों गया, यह अभी साफ नहीं है। अब तक की जांच में पता चला है कि दोनों कारें एक ही एजेंट से खरीदी गई हैं। छानबीन के सिलसिले में पुरानी कारों के एक व्यापारी और एक ड्राइवर को हिरासत में लेने के बाद दिल्ली में ले जाकर पूछताछ की जा रही है। केन्द्रीय खुफिया एजेंसी इससे जुड़े सुरागों की कड़ियां जोड़ रही है। अब तक पकड़े गए लोगों ने कार खरीदारों के पहचान पत्र समेत कई कागजात दिए हैं। साथ ही खरीदार बन कर आए तीन लोगों के हुलिए भी बताए हैं। इनमें से दो की शक्ल-सूरत, रंग, पहनावे और बोली से उनके कश्मीरी होने का संदेह है। एजेंसियों को कुछ ऐसी फुटेज भी मिली हैं जिनमें इन कारों पर सवार होकर आते-जाते लोग दिखे हैं। यह कारें प्रयागराज, लखनऊ नंबरों की हैं। कहा जा रहा है कि ऐसी ही एक फुटेज में डॉ. शाहीन भी डिफेंस एरिया में दिखाई दी है। एजेंसियां इन सभी बिंदुओं पर गहनता से जांच कर रही हैं। टेरर की लाइफलाइन को वाहन कबाड़ों से मिल रही ऑक्सीजन दिल्ली बम धमाके में इस्तेमाल हुई कार ने खरीद-फरोख्त के इस कारोबार में टेरर की लाइफलाइन पनपने का खुलासा किया है। कंडम वाहनों को खरीदने वाले कबाड़ों से आतंकवाद और अपराध को ऑक्सीजन दी जा रही है। कबाड़ मालिकों और निजी बीमा कंपनियों की मजबूत सांठगांठ और परिवहन व पुलिस विभाग के कमजोर निगरानी तंत्र से यह धंधा फल फूल रहा है। कंडम वाहनों का पंजीकरण निरस्त कराए बिना ऐसे वाहनों की चेसिस नंबर और कागजात के जरिये देश के अलग-अलग हिस्सों में वाहन चल रहे हैं, जो पंजीकृत तो मूल स्वामियों के नाम से हैं लेकिन उनका इस्तेमाल अपराधी और आतंकवादी भी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा जांच एजेंसियां अगर भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के सर्वेक्षकों और बीमा कंपनियों की मदद लें तो टेरर की लाइफलाइन को काटा जा सकता है। टोटल लॉस क्लेम मिलने से खत्म नहीं होती जिम्मेदारी कार वाहनों के बीमा के क्षेत्र में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी निजी बीमा कंपनियों की है। इन कंपनियों में तैनात इनहाउस सर्वेयरों की भूमिका पर शतप्रतिशत भरोसा करना महंगा पड़ सकता है। किसी दुर्घटना में वाहन के अधिक क्षतिग्रस्त होने पर वाहन के बीमा की राशि लेने के लिए वाहन स्वामी जब बीमा कंपनी से संपर्क करता है तो कंपनी का सर्वेयर निरीक्षण करने पहुंचता है। जबकि आईआरडीएआई की गाइडलाइंस के मुताबिक वाहन में 50 हजार से अधिक के नुकसान पर आंकलन कंपनी का सर्वेयर नहीं बल्कि आईआरडीएआई के सर्वेयर करेगा। कंपनियों के सर्वेयर बीमा ग्राहक पर वास्तविक नुकसान का आकलन न कर दबाव बनाकर उस पर ‘कैशलॉस’ कराने का झांसा देते हैं। इसके बाद पंजीकरण समेत उस वाहन को कबाड़ी को बेच देते हैं। दुर्घटना विषय विशेषज्ञ निर्मल त्रिपाठी के मुताबिक वाहन स्वामी गाड़ी का क्लेम लेकर आरटीओ के फॉर्म 29 और 30 पर ब्लैंक सिग्नेचर के बाद भूल जाते हैं। इसके बाद वाहनों की चेसिस और पंजीकरण का इस्तेमाल चोरी और दूसरी गाड़ियों में हो जाता है। इंडियन मोटर टैरिफ के जीआर-8 के मुताबिक टोटल लॉस वाहनों पर कुल बीमित राशि लेना ग्राहक का अधिकार है। अगर बीमा कंपनियां उसे पूर्ण भुगतान करने से मना करती हैं या उसे कम ज्यादा राशि देने के लिए अनुचित दबाव बनाती हैं तो इसकी शिकायत आईआरडीएआई से कर सकते हैं। शिकायत पर बीमा कंपनियों पर करोड़ों का जुर्माना हो सकता है और लाइसेंस भी निरस्त हो कसता है। 75 प्रतिशत से अधिक क्षतिग्रस्त वाहन टोटल लॉस की श्रेणी में आते हैं। इसमें खाई में गिरकर पूरी तरह से बर्बाद गाड़ी, जली हुई और चोरी हुई गाड़ियां आती हैं। बीमा कंपनियां आईआरडीएआई के एक सर्कुलर में टोटल लॉस के साथ कंस्ट्रक्टिव टोटल लॉस का जिक्र न होने की खामी का फायदा उठा रही हैं। कंडम वाहन के क्षतिग्रस्त होने के बाद बीमा की रकम लेने के बाद कबाड़ी को बेचे गए वाहन की चेसिस को निकलवार आरटीओ ऑफिस में जमा कराएं और आरसी निरस्त कराएं। दुर्घटना विषय विशेषज्ञ निर्मल त्रिपाठी के अनुसार सुरक्षा एजेंसियां आईआरडीएआई के सर्वेक्षकों और बीमा कंपनियों की मदद से आतंक और अपराध में यूज होने वाले ऐसे वाहनों का खेल बंद करा सकती हैं। बीमा कंपनियां भी नियमों का पालन करें।  

फर्जी RAW अफसर ने जज को छल किया, ग्रेटर नोएडा में हुआ गिरफ्तार

ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (एसटीएफ)की टीम ने बुधवार तड़के एक फर्जी रॉ अधिकारी को गिरफ्तार किया है। वह कहीं खुद को रॉ अधिकारी और कहीं पर खुद को आर्मी का मेजर बताकर रहता था। इसने खुद को रॉ अधिकारी बताकर एक महिला जज को झांसे में ले लिया और उनसे सादी कर ली। पत्नी बिहार के छपरा में तैनात हैं। वहीं आरोपी एक कंपनी बनाकर लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी करने की योजना बना रहा था। कंपनी से संबंधित दस्तावेज भी एसटीएफ ने बरामद किया है। फर्जी अफसर के पास से भारी मात्रा में फेक आईडी, चेक बुक, फर्जी पुलिस वेरिफिकेशन पत्र, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, पैन कार्ड ,आधार कार्ड, वोटर आई कार्ड आदि बरामद हुआ है। एसटीएफ और गुप्तचर एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी इससे गहनता से पूछताछ कर रहे हैं। इसके टैब में दिल्ली ब्लास्ट से संबंधित वीडियो भी बरामद हुई है। अपर पुलिस अधीक्षक एसटीएफ (नोएडा यूनिट) राजकुमार मिश्रा ने बताया कि बीती रात को उप निरीक्षक अक्षय परमवीर कुमार त्यागी और उनकी टीम को सूचना मिली कि एक व्यक्ति जो कि कभी स्वयं को मेजर अमित और कभी खुद को डायरेक्टर रॉ बताकर अलग-अलग सोसाइटी में रहता है। वह संदिग्ध है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट की वजह से इस सूचना को गंभीरता से ली गई। एक टीम बनाकर पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट सोसायटी ग्रेटर नोएडा में छापेमारी की गई। जब टीम सोसाइटी के उस फ्लैट में पहुंची जहां पर कथित रॉ अधिकारी रहता था तो दरवाजा एक महिला ने खोला। इसी बीच एक व्यक्ति वहां पर आ गया। उसने अपना नाम सुनीत कुमार पुत्र स्वर्गीय बृजनंदन शाह बताया। उसके हाथ में पकड़े हुए पर्स की तलाशी ली गई तो उसमें एक आई कार्ड केबिनेट सेक्रेट्रिएट गवर्नमेंट ऑफ इंडिया का मिला। जिसपर सुमित कुमार आईसी 7623 बी, रैंक जॉइंट सेक्रेटरी, डेजिग्नेशन डायरेक्टर (ऑपरेशन), जेआईसी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल, पुश्त पर सर्विस रिसर्च एंड एनेलसिस सर्विस, ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव, जन्मतिथि 25 मार्च 1988, पिता का नाम बृजनंदन शाह अंकित है। शक होने पर एसटीएफ ने रॉ के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। जब वे लोग मौके पर आए तो उन्होंने जांच किया। पता चला कि इस नाम का कोई भी व्यक्ति उनके विभाग में कार्यरत नहीं है। जो आई कार्ड उसके पास से बरामद हुआ है वह फर्जी है। उन्होंने बताया कि जिस फ्लैट में उक्त व्यक्ति रह रहा था उसके मकान मालकिन मंजू गुप्ता से जब संपर्क किया गया तो, उन्होंने कहा कि उनके यहां किराएदार मेजर अमित कुमार हैं। उन्होंने अपना पुलिस वेरिफिकेशन दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर के लेटर हेड पर मेजर अमित कुमार के नाम से करवाकर उपलब्ध करवाया है। उन्होंने बताया कि मंजू गुप्ता ने उन्हें दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए वेरिफिकेशन की कॉपी वॉट्सऐप के माध्यम से भेजी। उन्होंने बताया कि उक्त सुनीत की पत्नी छपरा बिहार में न्यायिक मजिस्ट्रेट है, उनसे फोन करके जानकारी की गई तो उन्होंने बताया कि उनके पति गृह मंत्रालय में कार्यरत हैं, और गोपनीय नियुक्ति पर हैं। उन्होंने बताया कि उक्त व्यक्ति के पास से काफी फर्जी अभिलेख बरामद हुए हैं। जिनमें मुख्य रूप से दो फर्जी आईडी, 20 चेक बुक, दिल्ली पुलिस की फर्जी वेरीफिकेशन लेटर,8 क्रेडिट/ डेबिट कार्ड, एक डायरी, 17 एग्रीमेंट, 5 पैन कार्ड, दो आधार कार्ड, तीन वोटर आईडी कार्ड, दो फार्म वोटर आईडी कार्ड, दो कंपनी संबंधित रजिस्ट्रेशन कागजात, आईटीआर के कागजात, बैंक स्टेटमेंट, 3 लैपटॉप, दो टेबलेट आदि बरामद हुआ है। उन्होंने बताया कि उक्त आरोपी के टैब से दिल्ली ब्लास्ट से संबंधित वीडियो भी बरामद हुई है। उन्होंने बताया कि अभियुक्त सुमित कुमार को एसटीएफ ने आज सुबह गिरफ्तार कर लिया। इसके खिलाफ थाना सूरजपुर मे भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2),318(4),338,336(3), 340, 66 डी (सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम 2008, के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपी को न्यायालय में पेश किया जा रहा है।

सरकार पर निर्भरता कम करें, परियोजना निर्धारित करते समय आय सृजन की संभावनाओं का भी रखें ध्यान: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन की विकास कार्ययोजना की समीक्षा की परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए रेवेन्यू शेयरिंग और पीपीपी मॉडल अपनाने पर जोर सरकार पर निर्भरता कम करें, परियोजना निर्धारित करते समय आय सृजन की संभावनाओं का भी रखें ध्यान: मुख्यमंत्री तीनों शहरों में 478 विकास परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार मेरठ में बिजली बम्बा बाईपास को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की संभावना तलाशने के निर्देश यातायात सुधार, मल्टीलेवल पार्किंग, स्मार्ट रोड और शहरी सौंदर्यीकरण को प्राथमिकता कानपुर और मथुरा वृंदावन में विरासत, संस्कृति और पर्यटन आधारित विकास मॉडल लागू होगा जनहित से जुड़े कार्यों के लिए धनराशि की कमी नहीं होगी, जरूरत पड़ेगी तो अतिरिक्त बजट भी मिलेगा: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन के समग्र नगरीय विकास की कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इन नगरों का विकास केवल सड़कों और इमारतों के निर्माण तक सीमित न हो, बल्कि उनका स्वरूप ऐसा बने जिसमें स्थानीय पहचान, इतिहास, संस्कृति और आधुनिक सुविधाओं का संतुलन दिखे। उन्होंने निर्देश दिया कि योजनाएं चरणबद्ध ढंग से लागू हों, कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरे किए जाएं और नागरिकों को इसका प्रत्यक्ष लाभ दिखे। मुख्यमंत्री ने मेरठ में प्रस्तावित बिजली बम्बा बाईपास को लखनऊ ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर पीपीपी मोड में विकसित करने की संभावना तलाशने के निर्देश दिए। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तीनों मंडलों के मंडलायुक्तों ने बारी-बारी से अपनी कार्ययोजना से अवगत कराया। बताया गया कि अयोध्या, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज की तर्ज पर अब मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन के लिए भी समेकित विकास मॉडल अपनाया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों से विमर्श और विभागों के बीच समन्वय के आधार पर इन शहरों में कुल 478 परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार की गई है। इनमें मेरठ में 111, कानपुर में 109 और मथुरा-वृंदावन में 258 परियोजनाओं का विकास प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं को अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक श्रेणी में विभाजित कर स्पष्ट समयसीमा तय की गई है। बैठक में बताया गया कि पहले चरण की कार्ययोजना के रूप में वर्ष 2025-26 में मेरठ में 11, कानपुर में 13 और मथुरा-वृंदावन में 14 प्राथमिक परियोजनाओं पर कार्य किया जाए। इन परियोजनाओं में यातायात सुधार, चौराहों का पुनर्विकास, मल्टीलेवल पार्किंग, हरित क्षेत्र, सड़क और पेवमेंट सुधार, बिजली लाइनों का भूमिगतकरण, जल प्रबंधन, पर्यटन सुविधाओं का उन्नयन और शहरी सौंदर्यीकरण जैसी जरूरतों को प्राथमिकता दी गई है। बैठक में बताया गया कि मेरठ में यातायात सुगमता के लिए बिजली बम्बा बाईपास, लिंक रोड, हापुड़ अड्डा से गांधी आश्रम तक चौड़ीकरण, ईस्टर्न कचहरी रोड, सूरजकुंड चौराहा, क़य्यम नगर पार्क, 19 प्रमुख चौराहों पर जंक्शन इम्प्रूवमेंट, संजय वन, शताब्दी नगर एसटीपी से मोहकमपुर औद्योगिक क्षेत्र तक जल पुनर्चक्रण व्यवस्था, स्मार्ट रोड और यूनिवर्सिटी रोड क्षेत्रीय पुनर्विकास जैसी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। कानपुर के संबंध में बताया गया कि विकास का आधार “रूटेड इन लेगेसी, राइजिंग टू टुमॉरो” की अवधारणा होगी। मैनावती मार्ग चौड़ीकरण, मल्टीलेवल पार्किंग, मास्टर प्लान सड़कों का निर्माण, ग्रीन पार्क के आसपास शहरी डिजाइन सुधार, मकसूदाबाद सिटी फॉरेस्ट, बोटैनिकल गार्डन, वीआईपी रोड, रिवरफ्रंट लिंक, ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, मेट्रो विस्तार और ग्रेटर कानपुर के रूप में नए विस्तार क्षेत्र की दृष्टि इस योजना में शामिल है। मथुरा-वृंदावन के लिए प्रस्तुत मास्टर प्लान के तहत शहर को 'विजन-2030' के रूप में विकसित करने की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए स्ट्रीट फसाड डेवलपमेंट, मल्टीलेवल पार्किंग, बस पार्किंग, प्रवेश द्वारों का सौंदर्यीकरण, नए मार्गों का निर्माण, बरसाना-गोवर्धन-राधाकुंड कॉरिडोर सुधार, परिक्रमा मार्ग पर सुविधाएं और नगर प्रवेश से धार्मिक स्थलों तक संकेतक एवं प्रकाश व्यवस्था की योजना शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के लिए नवाचार, बेहतर प्रबंधन और वित्तीय संयोजन पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने अधिकारियों को रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल पर निजी क्षेत्र का सहयोग लेने और जहां संभव हो वहां पीपीपी मोड अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास का उद्देश्य ऐसा शहरी ढांचा तैयार करना है जो यातायात को सुगम बनाए, पैदल यात्रियों और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दे, हरे-भरे शहरों की दिशा में आगे बढ़े और स्थानीय पहचान को मजबूत करे। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के लिए यदि अतिरिक बजट की आवश्यकता होगी तो उसे उपलब्ध कराया जाएगा।

₹39453 लाख की परियोजनाओं से 36 हजार हेक्टेयर में पुनर्स्थापित होगी सिंचाई क्षमता

नहर व्यवस्था सुधार के लिए 95 नई परियोजनाओं को मुख्यमंत्री ने दी मंजूरी ₹39453 लाख की परियोजनाओं से 36 हजार हेक्टेयर में पुनर्स्थापित होगी सिंचाई क्षमता मुख्यमंत्री का निर्देश सभी परियोजनाएं तय समय सीमा में गुणवत्तापूर्वक पूरी हों अनुपयोगी भूमि के उपयोग के लिए विभाग को कार्ययोजना बनाने के निर्देश सिंचाई सुधार कार्यक्रम से करीब 9 लाख किसानों को होगा सीधा लाभ सिंचाई एवं जल प्रबंधन और अन्नदाता किसान हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक में नहर व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से 95 नई परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं प्रदेश के कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने और किसानों को समयबद्ध सिंचाई उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। कुल ₹39453.39 लाख की लागत वाली इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर 36 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई क्षमता पुनर्स्थापित होगी, जिससे लगभग 9 लाख किसान और ग्रामीण आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। साथ ही 273 हेक्टेयर विभागीय राजकीय भूमि को संरक्षित किया जा सकेगा। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी स्वीकृत कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण हों और गुणवत्ता पर किसी भी स्थिति में समझौता न किया जाए। बैठक में बताया गया कि नहर पुनर्स्थापना से जुड़ी इन 95 परियोजनाओं में नहर प्रणाली के गैप्स में नहर निर्माण, हेड रेगुलेटर, क्रॉस रेगुलेटर, साइफन, फॉल तथा अन्य पक्की संरचनाओं का निर्माण शामिल है। नहरों के आंतरिक एवं बाह्य सेक्शन के सुधार, फिलिंग रीच में लाइनिंग के कार्य, क्षतिग्रस्त कुलाबों के पुनर्निर्माण, नहरों पर पुल-पुलियों के निर्माण एवं मरम्मत तथा नहर पटरियों पर खड़ंजा निर्माण को भी परियोजनाओं में शामिल किया गया है। निरीक्षण भवनों, कार्यालय भवनों तथा नहरों पर निर्मित पनचक्कियों के जीर्णोद्धार के साथ ही विभागीय भूमि की सुरक्षा हेतु बाउंड्रीवाल निर्माण भी प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से सिंचाई नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी और विभिन्न क्षेत्रों में जल उपलब्धता सुचारू होगी, विशेष रूप से पूर्वांचल, तराई, बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को इनसे बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल निर्माण नहीं बल्कि जल प्रबंधन की दक्षता, किसान हित, कृषि उत्पादन वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी किसान सिंचाई के अभाव में अपनी फसल प्रभावित न होने पाए।  मुख्यमंत्री ने बैठक में विभाग को अनुपयोगी पड़ी भूमि के सर्वेक्षण और उसके सदुपयोग हेतु विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय भूमि का सुविचारित उपयोग विभाग की आय संवर्द्धन में सहायक होगा।  बैठक में मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रबंधन से जुड़े कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि आगामी वर्ष की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सभी तैयारियां जनवरी माह से प्रारंभ कर दी जाएं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जनप्रतिनिधियों के मार्गदर्शन से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि समय रहते आगे की कार्यवाही सुनिश्चित हो सके।

उत्तर प्रदेश 2047 के विकास हेतु ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्रों में रणनीतिक हस्तक्षेप

इन्फ्रास्ट्रक्चरः "विकसित उत्तर प्रदेश @2047 के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप" ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्र विकसित भारत संकल्प @2047 के अनुरूप लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ में "इन्फ्रास्ट्रक्चरः विकसित उत्तर प्रदेश @2047 के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप" विषय पर उच्च-स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, उ‌द्योग समूहों, नीति अनुसंधान संस्थानों, ऊर्जा विशेषज्ञों तथा वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस कार्यशाला का उ‌द्देश्य वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को स्वच्छ, विश्वसनीय, किफायती एवं टिकाऊ ऊर्जा उपलब्ध कराने हेतु दीर्घकालिक रणनीति तैयार करना था, जो विकसित भारत संकल्प @2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है। नीतिगत नेतृत्व द्वारा दिशा-निर्देश कार्यक्रम के प्रथम सत्र में श्री नरेन्द्र भूषण, अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) उत्तर प्रदेश ने अपने संबोधन के माध्यम से प्रदेश में ऊर्जा खपत, 24×7 निर्बाध बिजली उपलब्धता, नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, विकेन्द्रीकृत ऊर्जा, ग्रिड स्थिरता, माइक्रो-ग्रिड, परमाणु, फ्लोटिंग सोलर, ग्रीन हाईड्रोजन, ग्रीन अमोनिया, सर्फेस काईनेटिक्स, सस्टेनेबल ऐविएशन फ्यूल तथा भविष्य की तकनीकों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों के सुझाव सुनकर उन्हें विभाग को लिखित रूप से उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया, ताकि हरित ऊर्जा के लक्ष्यों की प्राप्ति में उन्हें सम्मिलित किया जा सके। श्री आशीष गोयल, चेयरमैन, उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने अपने संबोधन में कहा कि 2047 के लिए ऊर्जा क्षेत्र के लक्ष्यों का अनुमान लगाना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि प्रौ‌द्योगिकी अत्यंत तीव्र गति से बदल रही है। इसलिए नीतियों को लचीला रखते हुए वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप क्रियान्वित करना आवश्यक है, ताकि उत्तर प्रदेश को विकसित एवं समृद्ध राज्य बनाने का संकल्प साकार किया जा सके। श्री आलोक कुमार, प्रमुख सचिव (योजना) द्वारा विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के विज़न पर विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि स्मार्ट पोर्टल के माध्यम से विभिन्न वर्गों-युवा, महिलाएँ, उ‌द्योग, संस्था, स्टार्टअप, एसोसिएशन, अकादमिक जगत, सरकारी/गैर-सरकारी संगठनों तथा स्वयं सहायता समूहों से प्राप्त 1 करोड़ से अधिक सुझावों का AI आधारित विश्लेषण किया जा रहा है, जिनके आधार पर क्षेत्रवार प्राथमिकताएँ निर्धारित की जा रही हैं। श्री मनोज उपाध्याय, सलाहकार (ऊर्जा), नीति आयोग ने अपने वक्तव्य मे बताया कि नीति आयोग के मार्गदर्शन के अनुरूप उत्तर प्रदेश की दीर्घकालिक ऊर्जा योजनाओं को क्रियान्वयन योग्य बनाने पर बल दिया। सभी वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश देश की ऊर्जा संक्रमण यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखता है। राज्य ने वर्ष 2047 तक अपनी 40-50% ऊर्जा आवश्यकता नवीकरणीय स्रोतों से पूरी करने की प्रतिबद्धता दोहराई। ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा विज़न 2047 के क्रम में ऊर्जा विभाग के अन्तर्गत डिलाओएट के सहयोग से तैयार "Energy & Renewable Vision 2047" में निम्न प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए- * बड़े सौर पार्क * फ्लोटिंग सोलर * कैनाल-टॉप परियोजनाएँ * हाइब्रिड (विंड-सोलर) मॉडल * छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट * बायोमास एवं CBG आधारित बिजली उत्पादन * ऊर्जा भंडारण (Storage) प्रणालियाँ CEEW ने माँग पूर्वानुमान, स्मार्ट मीटरिंग और डिजिटल ग्रिड प्लानिंग पर सुझाव दिए। Vasudha Foundation ने जलवायु-अनुकूल राज्य-स्तरीय ऊर्जा योजनाएँ, राज्य रैंकिंग और सामुदायिक ऊर्जा शासन मॉडल पर प्रस्तुतिकरण दिया। उ‌द्योग संगठनों एवं बिज़नेस समूहों के सुझाव के क्रम मे CII, PHDCCI, IIA, SEVA सहित प्रमुख उ‌द्योग निकायों ने निम्न सुझाव प्रस्तुत किए- * बुंदेलखंड एवं पश्चिमी यूपी में सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर स्थापित किए जाएँ। * CBG एवं बायो-एनर्जी पार्क विकसित किए जाएँ। * MSMES हेतु रूफटॉप सोलर और कम-ब्याज वाले ग्रीन लोन उपलब्ध हों। * ओपन एक्सेस सुधार, सिंगल विंडो क्लियरेंस प्रणाली एवं RE पारिस्थितिकी तंत्र को गति मिले। * EV चार्जिंग, बैटरी स्टोरेज और ऊर्जा दक्षता योजनाओं को बढ़ावा दिया जाए। ऊर्जा डेवलपर्स एवं तकनीकी विशेषज्ञों का दृष्टिकोण प्रमुख RE कंपनियाँ – Avada, JSW, Adani Green * हाइब्रिड (सोलर-विंड) पार्क * मिनी-हाइड्रो क्लस्टर्स * ग्रीन बैंकिंग/रन-ऑफ-द-रिवर नीतियाँ IIT कानपुर * "State Centre for Advanced Green Hydrogen Research" की स्थापना का प्रस्ताव Intellismart, PowerXchange, Tata Power * 100% स्मार्ट मीटरिंग * डिजिटल सबस्टेशन * AI आधारित मांग पूर्वानुमान * डिजिटल ट्विन मॉडल हरित वित्तपोषण एवं निवेश रणनीतियाँ शीर्षक के अन्तर्गत PFC एवं वित्त विशेषज्ञों ने- * ग्रीन बॉन्ड * ESG-लिंक्ड लोन * ब्लेंडेड फाइनेंस * VGF मॉडल अपनाने का सुझाव दिया, जिससे सौर पार्क, स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन एवं माइक्रो-ग्रिड परियोजनाओं को गति मिल सके। * UP Renewable Marketplace Portal बनाने का विचार भी रखा गया। विकेन्द्रीकृत ऊर्जा एवं ग्रामीण सशक्तिकरण के अन्तर्गत Tata Power Renewable Microgrid विषयक ग्रामीण क्षेत्रों में सौर-आधारित माइक्रो-ग्रिड द्वारा निम्न मॉडल प्रस्तुत किए- * कोल्ड स्टोरेज * फूड प्रोसेसिंग * ई-रिक्शा चार्जिंग * डिजिटल शिक्षा केंद्र Shakti Foundation ने कृषि, ग्रामीण उ‌द्योगों और स्वच्छ रसोई तकनीकों को ऊर्जा-कुशल बनाने पर बल दिया। उ‌द्योग समूहों ने "Urja Surakshit Gram" अभियान को राज्यव्यापी रूप से लागू करने का प्रस्ताव रखा। कार्यशाला का समापन इस दृढ़ संकल्प के साथ हुआ कि वर्ष 2030-2040-2047 के ऊर्जा रोडमैप को उ‌द्योग, शोध संस्थानों और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से लागू किया जाएगा। उत्तर प्रदेश ने वर्ष 2047 तक भारत का अग्रणी हरित ऊर्जा राज्य बनने की प्रतिबद्धता दोहराई, जो विकसित भारत संकल्प @2047 के अनुरूप है।

अयोध्या में लहराया राजवंश का प्रतीक केसरिया ध्वज, ‘ऊँ’ और सूर्य चिन्ह बना आकर्षण

अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पर लगने वाले दिव्य केसरिया ध्वज को तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री चंपत राय ने राम राज्य की आदर्श परिकल्पना, समाज में निर्भय वातावरण के निर्माण, और 'राम सबके और सबके राम' की भावना का जीवंत प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि इस ध्वजारोहण का उद्देश्य परंपरा का निर्वाह करने के साथ-साथ सनातन संस्कृति के उस विराट स्वरूप का पुनर्स्मरण है, जो राष्ट्र को एकजुट करता है। चंपत राय ने बताया कि अयोध्या में आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक आयोजन में आमंत्रित अतिथियों में से लगभग तीन हजार केवल अयोध्या जनपद के हैं, जबकि शेष अतिथि पूरे उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों से आमंत्रित किए गए हैं। उन्होंने पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा कि यह कार्यक्रम अयोध्या की सांस्कृतिक धरोहर और भारतीय आस्था के वैश्विक प्रभाव का प्रतीक बनने जा रहा है। श्रीराम मंदिर का ध्वजारोहण धार्मिक आस्था के उत्सव के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक परंपरा, राजवंशीय गौरव और सनातन मूल्यों का अद्वितीय संगम है। यह अयोध्या की धरती से राष्ट्रभर में एक नई प्रेरणा प्रसारित करेगा। उन्होंने ध्वज पर अंकित प्रतीकों का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि केसरिया रंग ज्वाला, प्रकाश, त्याग और तप का प्रतीक है। मंदिर के 161 फीट ऊंचे शिखर के ऊपर 30 फीट का बाहरी ध्वजदंड लगाया गया है, जिससे ध्वज कुल 191 फीट की ऊंचाई पर लहराएगा। उन्होंने बताया कि केसरिया ध्वज पर अंकित सूर्य प्रभु श्रीराम के सूर्यवंश का द्योतक है, जबकि 'ऊँ' परमात्मा का प्रथम नामाक्षर है, जो चेतना और शाश्वत सत्य का प्रतिनिधित्व करता है। ध्वज पर अंकित कोविदार वृक्ष के संबंध में भी उन्होंने विस्तृत जानकारी दी। यह वृक्ष अयोध्या के राजवंशीय चिह्न के रूप में प्रतिष्ठित रहा है और इसका उल्लेख वाल्मीकि रामायण व हरिवंश पुराण दोनों में मिलता है। ज्ञानीजन इसे पारिजात और मंदार के संयोग से बना बताते हैं। उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार यह संसार का पहला हाइब्रिड पौधा था। परंपरा में वर्णित है कि इसी कोविदार वृक्ष पर चढ़कर लक्ष्मण ने भरत को सेना सहित वन की ओर आते देखा था।

लापरवाही बर्दाश्त नहीं: पुलिस से जुड़े मामलों में कठोर कदम उठाने के निर्देश

गोरखपुर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को दो टूक हिदायत दी है कि पुलिस से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। पीड़ितों की मदद में विलंब और लापरवाही कतई नहीं होनी चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में किसी तरह की लापरवाही हुई तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी तय है। किसी पीड़ित की समस्या के समाधान में अगर कहीं भी कोई दिक्कत आ रही है, तो उसका पता लगाकर निराकरण कराया जाए और किसी स्तर पर जानबूझकर कर प्रकरण को लंबित रखा गया है तो संबंधित की जवाबदेही तय की जाए। सीएम योगी ने यह निर्देश मंगलवार को गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन के दौरान लोगों की समस्याएं सुनने के दौरान दिए। मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 300 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। सीएम योगी ने सभी को आश्वस्त किया कि किसी को भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। हर समस्या का वह प्रभावी निस्तारण कराएंगे। इसे लेकर उन्होंने प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों को मौके पर ही दो टूक समझाया कि जनता की समस्याओं का समयबद्ध, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करें। कुछ प्रकरणों पर उन्होंने अफसरों को निर्देशित किया कि यह भी पता लगाएं कि यदि किसी को प्रशासन का सहयोग नहीं मिला है, तो ऐसा क्यों और किन कारणों से हुआ। हर पीड़ित की त्वरित मदद की जाए। उन्होंने जमीन कब्जाने की शिकायतों पर विधि सम्मत कठोर कदम उठाने का निर्देश दिया। हर बार की तरह इस बार भी जनता दर्शन में कुछ लोग इलाज में आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। इस पर सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा कि जल्द से जल्द अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया पूर्ण कराकर शासन को उपलब्ध करा दें। इलाज के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पर्याप्त मदद की जाएगी। जनता दर्शन में परिजनों के साथ आए बच्चों को प्यार-दुलारकर सीएम योगी ने उन्हें चॉकलेट दिया। गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। मंदिर की गोशाला में पहुंचकर गोसेवा की। गायों और गोवंश को स्नेहिल भाव से गुड़-रोटी खिलाया। 

पहली बार यूपी में सफलता: पीजीआई डॉक्टरों ने एडवांस तकनीक से किया जटिल घुटना सर्जरी का कमाल

लखनऊ संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस) ने उत्तर प्रदेश में उन्नत आर्थोपेडिक सर्जरी का नया मानक स्थापित करते हुए पहली बार दो अत्याधुनिक तकनीकों को एक साथ उपयोग कर जटिल घुटना सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया है। एसजीपीजीआईएमएस के आर्थोपेडिक विभाग ने दो हाई-एंड तकनीकों—आर्थ्रोस्कोपिक माइक्रोफ्रैक्चर और हाइब्रिड हाई टिबियल ऑस्टियोटॉमी—को एक ही ऑपरेशन में संयोजित करते हुए सफल घुटना सर्जरी की है।  इस जटिल प्रक्रिया के बाद 46 वर्षीय महिला मरीज तेजी से स्वस्थ हो रही है और सामान्य रूप से चलने लगी है। मरीज कई वर्षों से तीव्र घुटना दर्द, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी झेल रही थी। वेरस विकृति (बो-लेग्ड) के कारण वजन घुटने के अंदरूनी हिस्से पर ज्यादा पड़ रहा था, जिससे कार्टिलेज लगातार क्षतिग्रस्त हो रहा था। दवाओं और फिजियोथेरेपी से राहत न मिलने पर परिजन उन्हें एसजीपीजीआईएमएस लेकर पहुंचे, जहां विस्तृत जांच के बाद विशेषज्ञों ने सर्जरी को अंतिम समाधान माना। सर्जरी का नेतृत्व एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के आर्थोपेडिक्स विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार ने किया। टीम ने दो चरणों में ऑपरेशन पूरा किया। पहले चरण में आर्थ्रोस्कोपिक माइक्रोफ्रैक्चर तकनीक का उपयोग कर हड्डी के नीचे नई फाइब्रोकार्टिलेज बनने की प्रक्रिया शुरू की गई, जिससे दर्द में कमी और जोड़ की कुशनिंग मजबूत होने की संभावना बढ़ी। दूसरे और सबसे चुनौतीपूर्ण चरण में हाइब्रिड हाई टिबियल ऑस्टियोटॉमी की गई। इसमें टिबिया की हड्डी को नियंत्रित रूप से काटकर दुबारा ऐसा संरेखित किया गया कि शरीर का भार क्षतिग्रस्त हिस्से से हटकर घुटने के स्वस्थ हिस्से पर आने लगे। यह तकनीक न केवल विकृति सुधारती है, बल्कि प्राकृतिक जोड़ की उम्र भी बढ़ाती है। डॉ. अमित कुमार के मुताबिक संयुक्त सर्जरी युवा और सक्रिय मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है, क्योंकि यह घुटना प्रत्यारोपण की आवश्यकता को काफी हद तक टाल देती है। संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमन ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रदेश में उन्नत आर्थोपेडिक उपचार का नया अध्याय खोलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अत्याधुनिक तकनीक उन मरीजों के लिए आशा की किरण है, जो गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस या वेरस विकृति से लंबे समय से परेशान हैं और पारंपरिक उपचारों से लाभ नहीं पा सके हैं।

चारबाग़ रेलवे स्टेशन पर डी.आर.आई द्वारा 3.110 किग्रा हेरोइन जब्त

लखनऊ एक गोपनीय सूचना के आधार पर राजस्व आसूचना निदेशालय  (DRI), लखनऊ के अधिकारियों द्वारा चारबाग़ रेलवे स्टेशन पर 18.11.2025 को सवेरे 3.110 kg हेरोइन जब्त की गयी I DRI अधिकारियों को न्यू जलपाईगुड़ी से दिल्ली की ओर यात्रा कर रही दो महिला यात्रियों के पास मादक पदार्थों होने की सुचना प्राप्त हुई । प्राप्त सूचना के आधार पर, अधिकारियों की टीम ने रेलवे स्टेशन पर निगरानी रखी और ट्रेन के आगमन पर संदिग्ध यात्रियों की गुप्त रूप से पहचान की। जांच के दौरान दोनों यात्रियों के सामान की तलाशी ली गई, जिसमें उनके सामान के भीतर छिपाकर रखे गए कई पैकेट बरामद हुए। इन पैकेटों में सफेद रंग का पाउडरनुमा पदार्थ पाया गया। बरामद पदार्थ का परीक्षण NDPS फील्ड टेस्टिंग किट से किया गया, जिसमें वह हेरोइन पाया गया। इस प्रकार कुल 3.110 किलोग्राम हेरोइन बरामद कर जब्त की गई।  इस जब्त मादक पदार्थों का अवैध बाजार में अनुमानित मूल्य लगभग ₹21.77 करोड़ है। हेरोइन एक अत्यंत नशीला एवं खतरनाक मादक पदार्थ है, जिसका दुरुपयोग गंभीर स्वास्थ्य एवं सामाजिक जोखिम उत्पन्न करता है। इसका अवैध परिवहन एवं सेवन, एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। दोनों महिला यात्रियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड सायकोट्रोपिक सब्स्टेन्सेस (NDPS) अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है।

योगी सरकार की नीतियों का उत्कृष्ट परिणाम, छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार में उत्तर प्रदेश का दबदबा

जल संक्षरण और जल संचय के लिए मुख्यमंत्री की नीति रंग लायी 6 वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों में यूपी ने मारी बाजी उत्तरी क्षेत्र में पहला दूसरा और तीसरा तीनो स्थान उत्तर प्रदेश को मिला पहला स्थान मीरजापुर, दूसरा वाराणसी तो जालौन को तीसरा स्थान मिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रदान किया पुरस्कार जल संचय जन भागीदारी केटेगरी में गोरखपुर नगर निगम को मिला तीसरा पुरस्कार जल संचय जन भागीदारी केटेगरी में देश के टॉप 10 नगर निगम में गोरखपुर को तीसरा स्थान वाराणसी उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध डबल इंजन सरकार की नीतियां पूरे देश में विशिष्ट पहचान बना रही है। प्रदेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल क्रियान्वयन में जल संरक्षण की दिशा में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है, जिसे अब राष्ट्रीय पटल पर भी मान्यता मिल गई है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को को छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार (2024) समारोह में जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिलों का सम्मान किया। उत्तरी क्षेत्र में पहला स्थान मीरजापुर, दूसरा वाराणसी तो तीसरा स्थान  जालौन को मिला इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले ने उत्तरी क्षेत्र में 'सर्वश्रेष्ठ जिला' के रूप में द्वितीय स्थान प्राप्त किया।          इस उपलब्धि के लिए जिले को ₹2 करोड़ का नकद पुरस्कार भी प्रदान किया गया। वहीं, जल संचय जन भागीदारी केटेगरी में देश के टॉप-10 नगर निगम में गोरखपुर को तीसरा पुरस्कार मिला है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान यह स्पष्ट करता है कि योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियां और स्थानीय प्रशासन की कुशल पहलें जल संरक्षण व सतत विकास के क्षेत्र में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। जल संचयन व नदी कायाकल्प में वाराणसी का सराहनीय प्रदर्शन वाराणसी जिले में जल संरक्षण के क्षेत्र में प्रमुख पहलें विशेष रूप से सराहनीय रही हैं। जनपद में 25,000 से अधिक जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया, जिससे भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ। इसके साथ ही नदी कायाकल्प परियोजनाओं और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण की दिशा में जन जागरूकता बढ़ाई गई। इन पहलों ने जिले को उत्तर भारत में जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित किया। योगी सरकार की नीतियों का प्रभाव यह पुरस्कार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सशक्त और प्रभावी जल नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है, जिन्होंने जिले में जल संरक्षण और जल उपयोग की श्रेष्ठ प्रथाओं को बढ़ावा दिया। इसी श्रेणी में मीरजापुर को प्रथम स्थान और जालौन को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। यह सम्मान न केवल जल संरक्षण की दिशा में प्रदेश के विभिन्न जिलों की प्रतिबद्धता को मान्यता देता है, बल्कि प्रदेश समेत देश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन रहा है।