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930 कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियुक्ति पत्र, योगी बोले—2017 से पहले यूपी में अराजकता का माहौल था

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को पुलिस विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नियुक्त हुए युवाओं को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र बांटा। इस मौके पर यूपी पुलिस में किए गए रिफार्म के बारे में खुलकर बात की। 2017 के पहले और अब हुए बदलावों पर चर्चा की। पुलिस कमिश्नरेट के फायदे गिनाएं और इस व्यवस्था पर ऊंगली उठाने वालों पर निशाना साधा। यहां तक कहा कि आईपीएस को आईएएस ऐसा दबाते थे कि फाइलें बंद हो जाएं तो खुलती नहीं थीं। हंसते हुए कहा कि यमराज भी आ जाएं तो फाइलें नहीं मिल पाती थीं। दरअसल पुलिस कमिश्नरेट बनने से आईएएस अधिकारियों के पास से तमाम अधिकार आईपीएस अफसरों के पास चले गए हैं। यूपी में जब पुलिस कमिश्नरेट बनना शुरू हुआ तो आईएएस एसोसिएशन ने सबसे पहले फैसले का विरोध किया था। सीएम योगी इसी की चर्चा कर रहे थे। योगी ने कहा कि कमिश्नरेट सिस्टम 1972 से चला आ रहा है लेकिन इसे लागू करने की हिम्मत कोई नहीं ले पा रहे था। आईपीएस को आईएएस ऐसा दबाते थे कि एक बार फाइल बंद हो जाए तो खुलती ही नहीं थी। यमराज भी आ जाएं तो फाइल नहीं खुल पाती थी। पता नहीं कहां वो फाइल पड़ी रहती थी। हमने हिम्मत दिखाई और सात जनपदों में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू कर दिया। सीएम योगी ने कहा कि पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम पुलिस रिफार्म का ही पार्ट है। जिन्हें पुलिस रिफार्म की जानकारी नहीं है वह पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम पर उंगली उठाते हैं। जिन्हें पुलिसिंग की जानकारी नहीं वह इस सिस्टम का विरोध करते हैं। विरोध करने वाले वह लोग हैं जिन्हें सुविधाओं की जानकारी ही नहीं है। जब आप कोई कदम उठाएंगे तो आलोचना होगी। 2017 से पहले पुलिस भी सुरक्षित नहीं थी कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियुक्ति पत्र देने के बाद उन्हें संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले पुलिस भी सुरक्षित नहीं थी। प्रदेश में हर दूसरे-तीसरे दिन दंगा होता था। महीनों-महीनों कर्फ्यू लगता था। हर उत्सव से पहले उपद्रव होने लगते थे। मुरादाबाद में डीआईजी स्तर के अधिकारी को घेरकर मारा था। उपद्रवी उन्हें मरा हुआ समझकर चले गए थे। जब आईपीएस स्तर का पुलिस अधिकारी ही सुरक्षित नहीं है तो कैसे अनुमान कर सकते हैं कि एक सामान्य नागरिक, एक महिला, एक बेटी, एक व्यापारी सुरक्षित रहता होगा। यूपी जैसे राज्य के लिए सुशासन की लोगों ने कल्पना करना बंद कर दिया था। लोगों को लगता था कि सुधार नहीं हो सकता है। डीआईजी पर हमला करने वाले अपराधियों को बचाने के लिए तमाम राजनीतिक दबाव पड़ रहे थे। उन सभी लोगों को कुछ समय पहले सजा हुई है। ऐसी सजा हुई कि आने वाली पीढ़िया अपराध भूल जाएंगी। आज सबसे ऊंची बिल्डिंग में पुलिस बैरक सीएम योगी ने कहा कि हमने इंफ्रास्ट्रचर विकसित किया है। जिन पुलिस वालों के भरोसे हम लोग सुरक्षा की गारंटी देना चाहते हैं, उनका ही कुछ ठिकाना नहीं था। टूटे हुए बैरक में पुलिस वालों को रहना पड़ता था। आज आप देखिए 56 जिले ऐसे हैं जहां सबसे ऊंची कोई बिल्डिंग है तो वह पुलिस की बैरक होगी। यूपी में अब पुलिस सबसे टॉप पर चल रही है। यह बताता है कि प्रदेश अब दौड़ रहा है। पहले पुलिस की भर्ती होती थी तो ट्रेनिंग के लिए मिलिट्री, पैरा मिलिट्री और दूसरे राज्यों के ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण लेना होता था। अब अपने यहां ही ट्रेनिंग हो रही है। अब यूपी में ही होती है पुलिस की ट्रेनिंग 2017 में हमने सबसे पहले पुलिस की रिक्तियां मंगाई। पता चला कि लाखों पद खाली हैं। पूछा क्यों खाली हैं तो पता चला कि कोर्ट में मामला फंसा है। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक फंसा हुआ था। कोर्ट से आदेश लिया गया और भर्ती प्रक्रिया शुरू कराई गई। इसके बाद ट्रेनिंग की क्षमता बढ़ाई गई। 60 हजार की भर्ती के बाद ट्रेनिंग भी अब यूपी में ही कराई गई है। पहले 17 हजार की ट्रेनिंग की व्यवस्था थी, इसे 60 हजार की हो गई है। यह स्पीड है, इसी स्पीड से चलेंगे तो परिणाम आएगा। अब कोई सिफारिश नहीं, कोई भेदभाव नहीं 930 कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियुक्ति पत्र देते हुए सीएम योगी ने बताया कि पिछले दिनों पुलिस आरक्षी के लिए परीक्षा संपन्न हुई है। उससे पहले होमगार्ड्स के लिए परीक्षा हुई। उससे पहले सवा दो लाख पुलिसकर्मियों की भर्ती हुई है। सब कुछ पारदर्शी तरीके से हुआ। कोई सिफारिश नहीं, कोई भेदभाव नहीं हुआ है। सीएम योगी ने कहा कि 75 जिलों और 25 करोड़ की आबादी वाले राज्य में केवल चार फारेंसिंक लैब थे। अब 25 लैब हमारे पास हैं। हर जनपद में मोबाइल फोरेंसिंक लैब भी मौजूद है। साइबर पुलिस का एक थाना था, आज सभी जिलों में साइबर थाना है और हर थाने में साइबर डेस्क है। यह सब प्रयास करने से होता है। यूपी पुलिस ने समय का प्रयोग किया। आज यूपी पुलिस पर कोई ऊंगली नहीं उठा सकता है। नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी सीएम योगी ने कहा कि पहले यूपी में नौकरी नहीं थी। यूपी के बाहर जाने पर पहचान का संकट था। बोल ही नहीं सकते थे कि यूपी का रहने वाला हूं। अब बाहर भी जाने पर कोई मना नहीं कर सकता है। लोगों का नजरिया बदल गया है। नौ साल में नौ लाख से ज्यादा सरकारी नौकरी दी गई है। प्रदेश में निवेश का माहौल बना है। उसके पीछे सुरक्षा ही है। आज 32 हजार बड़े कारखाने हैं और 96 लाख एमएसएमई हैं। यूपी के युवा को यूपी में रोजगार मिल रहा है। अब दंगा नहीं होता, कर्फ्यू नहीं लगता है।

मस्जिद से मदरसे तक प्रशासन की सख्ती, वाराणसी-गाजियाबाद-आगरा में क्या-क्या हुआ?

लखनऊ यूपी में धार्मिक स्थलों से जुड़े कई मामले एक साथ चर्चा में हैं. कहीं मस्जिद को नोटिस मिला है, कहीं मदरसे पर बुलडोजर चला है, तो कहीं सड़क के बीच स्थित मजार को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया है. वहीं बहराइच में हाईवे किनारे स्थित एक मस्जिद को हटाने की प्रस्तावित कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया है. चारों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं. वाराणसी में रेलवे स्टेशन के विस्तार का मामला है, गाजियाबाद में सरकारी भूमि पर कथित कब्जे का आरोप है, आगरा में सड़क सुरक्षा और यातायात का मुद्दा सामने आया, जबकि बहराइच में प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक कार्रवाई रोकने का फैसला लिया है।  वाराणसी: काशी रेलवे स्टेशन के पास मस्जिद को मिला नोटिस न्यूज एजेंसी के मुताबिक सबसे ज्यादा चर्चा वाराणसी की हो रही है. यहां काशी रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद पर रेलवे प्रशासन ने नोटिस चस्पा किया है. नोटिस में संबंधित पक्षों को 20 जून तक परिसर खाली करने के लिए कहा गया है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह कदम काशी मॉडल रेलवे स्टेशन परियोजना के तहत उठाया गया है. स्टेशन का विस्तार और आधुनिकीकरण किया जाना है, जिसके लिए रेलवे अपनी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है. स्टेशन अधीक्षक अर्पित गुप्ता के मुताबिक प्रस्तावित निर्माण कार्यों के लिए भूमि की आवश्यकता है और इसी प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी किया गया है।  कुछ दिन पहले भी हुई थी कार्रवाई गंज शहीदा मस्जिद को नोटिस दिए जाने का मामला ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही रेलवे स्टेशन परिसर के भीतर स्थित अजगैब शहीद मजार और एक मस्जिद को हटाया गया था. 3 जून को हुई इस कार्रवाई के पीछे भूमि स्वामित्व विवाद में न्यायालय के आदेश का हवाला दिया गया था. रेलवे अधिकारियों का कहना था कि पुनर्विकास परियोजना के लिए कराए गए सर्वे में संबंधित ढांचे रेलवे भूमि पर पाए गए थे. इसके बाद नोटिस जारी किए गए और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर कार्रवाई की गई।  गाजियाबाद: 30 साल पुराने मदरसे पर चला बुलडोजर उधर गाजियाबाद में प्रशासन ने कुशालिया गांव में स्थित एक मदरसे को ध्वस्त कर दिया. प्रशासन का दावा है कि यह मदरसा सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर बना हुआ था. कार्रवाई से पहले कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं. मौके पर सुरक्षा व्यवस्था के तहत रैपिड रिस्पांस फोर्स (आरआरएफ) और चार थानों की पुलिस तैनात की गई थी. कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार का विरोध या तनाव सामने नहीं आया. सदर एसडीएम अरुण दीक्षित के अनुसार यह मदरसा लगभग 30 वर्षों से संचालित हो रहा था. जिस भूमि पर यह बना था उसका क्षेत्रफल करीब 880 वर्ग मीटर था और उसकी बाजार कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. जांच में पाया गया कि भूमि राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक रास्ते और खाद निस्तारण स्थल के रूप में दर्ज थी. प्रशासन का कहना है कि अभिलेखों की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण का फैसला लिया गया।  आगरा: बातचीत से निकला रास्ता, दूसरी जगह पहुंची मजार आगरा का मामला बाकी दोनों मामलों से कुछ अलग रहा. यहां प्रशासन ने किसी प्रकार का ध्वस्तीकरण नहीं किया, बल्कि बातचीत के जरिए समाधान निकाला. आगरा कॉलेज के निकट व्यस्त एमजी रोड पर स्थित एक मजार को उसकी प्रबंधन समिति की सहमति से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया. प्रशासन का कहना है कि मजार सड़क के बीच स्थित थी, जिससे यातायात प्रभावित होता था और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी पैदा हो रही थीं. अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त हिमांशु गौरव के मुताबिक मजार प्रबंधन समिति के साथ कई दौर की बातचीत हुई. इसके बाद आपसी सहमति से मजार को वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया. पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई और कहीं किसी प्रकार का तनाव नहीं देखा गया. आगरा प्रशासन इस मॉडल को संवाद आधारित समाधान के तौर पर देख रहा है।  बहराइच: फिलहाल रुकी कार्रवाई वहीं बहराइच में स्थिति कुछ अलग है. यहां बहराइच-नेपाल राजमार्ग के किनारे स्थित एक मस्जिद को लेकर कार्रवाई की चर्चा जरूर हुई, लेकिन प्रशासन ने फिलहाल किसी भी तरह की कार्रवाई पर रोक लगा दी है. मामला तब चर्चा में आया जब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) का एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. पत्र में कथित अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था. पत्र वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया. मामले को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाए कोई कार्रवाई नहीं होगी. उन्होंने कहा कि पहले संबंधित पक्षों को नोटिस दिया जाए, जमीन की पैमाइश कराई जाए और सभी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए. इसके बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा. प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। 

रेलवे दोहरीकरण कार्य का असर: कई प्रमुख ट्रेनें डायवर्ट, सुवंसा स्टेशन पर बढ़ाया गया इंटरसिटी का ठहराव

लखनऊ गर्मी की छुट्टी में रेल यात्रियों की आफत थोड़ी बढ़ गई है। उत्तर रेलवे के गौरा-सुवंसा-जंघई रेलखंड पर दोहरीकरण कार्य के चलते रेलवे ने 23 से 30 जून तक अर्चना और नीलांचल एक्सप्रेस समेत नौ प्रमुख ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया है। वहीं, यात्रियों की सुविधा के लिए वाराणसी-लखनऊ इंटरसिटी का सुवंसा स्टेशन पर अस्थाई ठहराव बढ़ाया गया है। सीनियर डीसीएम समर्थ गुप्ता ने यात्रियों से सफर पर निकलने से पहले हेल्पलाइन नंबर 139 पर स्थिति जांचने की अपील की है। मार्ग परिवर्तन के तहत लखनऊ-वाराणसी (24204), अमृतसर-हावड़ा पंजाब मेल (13006), जम्मूतवी-पटना अर्चना एक्सप्रेस (12356) और नई दिल्ली-वाराणसी विशेष गाड़ी (04210) लखनऊ-सुलतानपुर-जफराबाद-वाराणसी मार्ग से चलेंगी, जिससे रायबरेली, अमेठी और प्रतापगढ़ जैसे स्टेशनों पर इनका ठहराव नहीं होगा। दूसरी तरफ, हावड़ा-अमृतसर पंजाब मेल (13005), पटना-जम्मूतवी अर्चना एक्सप्रेस (12355) और पुरी-आनंद विहार नीलांचल एक्सप्रेस (12875) वाराणसी-जफराबाद-सुलतानपुर-लखनऊ मार्ग से डायवर्ट रहेंगी। बनारस-देहरादून एक्सप्रेस (15119) 23 से 27 जून तक जंघई-फाफामऊ और 28 से 30 जून तक प्रयागराज के रास्ते चलाई जाएगी, जबकि फिरोजपुर-पटना साहिब गाड़ी (04616) 23 जून को उतरेठिया-सुलतानपुर होकर निकलेगी। बनारस इंटरसिटी का ठहराव सुवंसा पर रेलवे के अनुसार 26 से 30 जून तक बादशाहपुर स्टेशन पर प्लेटफॉर्म न होने से 15108 लखनऊ-बनारस इंटरसिटी, 15107 बनारस-लखनऊ इंटरसिटी और 24203 वाराणसी-लखनऊ एक्सप्रेस का ठहराव सुवंसा स्टेशन पर 2 मिनट के लिए दिया जाएगा। जंघई पर ठहराव यथावत रहेगा। 29 मिनट में ट्रेन पलटाने की साजिश का रहस्य छुपा लखनऊ, संवाददाता। दिलकुशा के पास रेलवे पटरी पर लोहे का एंगल रखकर पंजाब मेल ट्रेन को पलटाने की साजिश का रहस्य 29 मिनट में छिपा। पुलिस, एजेंसियां, जीआरपी और आरपीएफ की विशेष टीमें इस दो ट्रेनों के बीच के इस अंतराल में ट्रैक पर हुई गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। इस दौरान ट्रैक पर कौन गया? वह किधर से आया? कितने लोग थे? टीमें तफ्तीश कर रही हैं। एसपी जीआरपी रोहित मिश्रा के मुताबिक शुक्रवार दोपहर एक ट्रेन ट्रैक से 1:36 बजे निकली। उस समय ट्रैक पर लोहे का एंगल नहीं था। दूसरी पंजाब मेल 2:05 बजे निकली। उस समय ट्रैक पर एंगल रखा था। चालक ने काफी हद तक हादसा रोकने की कोशिश की पर आखिर में इंजन में एंगल फंस गया था। लोहे का एंगल करीब 50 किलो वजन का था। जिसे उठाने में करीब तीन से चार लोग लगे होंगे। एसीपी कैंट ज्ञानेंद्र सिंह निर्देशन में थाने की टीम के अलावा, जीआरपी, रेलवे, खुफिया एजेंसियां घटनास्थल को जाने वाले मार्ग पर लगे सीसी कैमरे खंगाल रही हैं।

5.87 लाख परिवारों को मिला आशियाना, सर्वे में सामने आया मुख्यमंत्री आवास योजना का सकारात्मक प्रभाव

 लखनऊ  शासन के मूल्यांकन प्रभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के मध्य कराए गए सर्वेक्षण में मुख्यमंत्री आवास योजना के सकारात्मक प्रभाव सामने आए हैं। सर्वे में दावा किया गया है कि पक्का मकान मिलने के बाद सबसे बड़ा बदलाव सुरक्षा के स्तर पर आया है। 84 प्रतिशत लाभार्थियों ने बताया कि अब उन्हें सर्दी, गर्मी और बारिश जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों से बेहतर सुरक्षा मिल रही है। जबकि 77 प्रतिशत परिवारों ने रहन-सहन और जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार की बात कही। प्रदेश सरकार ने फरवरी 2018 में मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की शुरुआत की थी। इसके तहत प्राकृतिक आपदा, कालाजार, वनटांगिया, मुसहर, नट, चेरो, सहरिया, कोल, थारू, पछइया लोहार, गढ़इया लोहार, बैगा वर्ग, जेई-एईएस प्रभावित, कुष्ठ रोग प्रभावित परिवारों व प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जाता है। पात्रों में दिव्यांगजन, 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की निराश्रित विधवा महिलाओं व अनुसूचित जनजातियों को भी शामिल किया गया है। योजना में अब तक 5.87 लाख से अधिक आश्रयहीन ग्रामीण परिवारों को आवास आवंटित किए जा चुके हैं। इनमें 1.30 लाख दिव्यांगजन व 72 हजार से अधिक निराश्रित विधवाएं भी शामिल हैं। मूल्यांकन प्रभाग की रिपोर्ट के अनुसार सर्वेक्षण में शामिल 1464 परिवारों में से 1457 परिवारों ने माना कि पक्का घर मिलने के बाद उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। आवास मिलने से लोगों के आत्मसम्मान में भी वृद्धि हुई है। 71 प्रतिशत लाभार्थियों ने माना कि पक्का घर मिलने से समाज में उनका सम्मान बढ़ा है और उन्हें सामाजिक बराबरी का अनुभव हो रहा है। ॉसर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि 68 प्रतिशत लाभार्थियों को पहले घरों में सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं के खतरा रहता था, जिससे अब उन्हें राहत मिली है। वहीं 27 प्रतिशत परिवारों ने बताया कि आवास मिलने के बाद बच्चों की शिक्षा, परिवार के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन की व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आया है। सर्वेक्षण को लेकर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अब केवल मकान निर्माण की योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह गरीब परिवारों के जीवन में स्थायित्व, सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का मजबूत आधार बन चुकी है। पक्की छत ने लाखों परिवारों के जीवन में आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा का नया अध्याय जोड़ा है।

6.30 लाख ग्राहकों के लिए खुशखबरी, पोस्ट ऑफिस से निकासी के लिए पासबुक जरूरी नहीं

 रायबरेली  जिले के करीब 6.50 लाख डाकघर खाताधारकों के लिए राहत भरी खबर है। अब पासबुक साथ न होने पर भी आधार कार्ड के माध्यम से मुख्य डाकघर, उपडाकघर और ग्रामीण शाखा डाकघरों से जमा-निकासी की सुविधा मिल सकेगी। इससे विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के खाताधारकों को बड़ी सहूलियत होगी। डाक विभाग ने अन्य बैंकों की तर्ज पर आधार आधारित लेनदेन एईपीएस (आधार-सक्षम भुगतान प्रणाली) की सुविधा लागू कर दी है। इसके तहत खाताधारक आधार संख्या और बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए अपने खाते से नकदी निकालने के साथ ही धनराशि जमा भी करा सकेंगे। इससे पासबुक खो जाने या साथ न होने की स्थिति में भी बैंकिंग कार्य प्रभावित नहीं होगा। जिले में दो मुख्य डाकघर और 54 उपडाकघर संचालित हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में शाखा डाकघरों के माध्यम से भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। डाक अधीक्षक अनूप अग्रवाल का कहना है कि 6.50 लाख खाताधारकों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि आधार आधारित जमा-निकासी प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है और बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही लेनदेन किया जाएगा।

हीट वेव की चुनौती को देखते हुए पूरे प्रदेश में लागू होगी एक समान अवकाश व्यवस्था

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश में लगातार बढ़ रही गर्मी और हीट वेव की परिस्थितियों को देखते हुए बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रणाधीन एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि बढ़ाकर 24 जून तक कर दी गई है।  अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब प्रत्येक वर्ष 20 मई से 24 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा तथा 25 जून से विद्यालयों में नियमित पठन-पाठन प्रारंभ होगा। योगी सरकार का उद्देश्य बच्चों को भीषण गर्मी से सुरक्षित रखते हुए नए शैक्षणिक सत्र की बेहतर और व्यवस्थित शुरुआत सुनिश्चित करना है। प्रदेश सरकार ने यह निर्णय पिछले वर्षों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए लिया है, जब हीट वेव की स्थिति के कारण जिलाधिकारियों को स्थानीय स्तर पर बार-बार अवकाश बढ़ाना पड़ता था। नई व्यवस्था से पूरे प्रदेश में एकरूपता सुनिश्चित होगी और विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा शिक्षकों को स्पष्ट शैक्षणिक कैलेंडर उपलब्ध हो सकेगा। 22 जून से विद्यालय पहुंचेंगे शिक्षक, नए सत्र की तैयारियां होंगी पूरी योगी सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि विद्यालय खुलने से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं। इसके लिए 22, 23 और 24 जून को सभी शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी विद्यालय में उपस्थित रहेंगे। इस अवधि में लेसन प्लान तैयार करने, मध्याह्न भोजन व्यवस्था को अंतिम रूप देने, पाठ्यपुस्तक वितरण की तैयारी, विद्यालय प्रबंध समिति की बैठक, बाल वाटिका संचालन की तैयारी, विद्यालय परिसर, रसोईघर एवं शौचालयों की साफ-सफाई, खेल सामग्री की उपलब्धता तथा स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब को क्रियाशील बनाने जैसे कार्य संपन्न किए जाएंगे। 220 कार्यदिवस और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर रहेगा विशेष जोर अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में न्यूनतम 220 कार्यदिवस और नियमित पठन-पाठन सुनिश्चित किया जाए। जिलाधिकारियों को भी स्थानीय स्तर पर अवकाश घोषित करने से पूर्व इस विधिक प्रावधान को ध्यान में रखने के निर्देश दिए गए हैं। योगी सरकार का मानना है कि बच्चों के अधिगम परिणामों में सुधार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पर्याप्त शिक्षण दिवस सुनिश्चित करना आवश्यक है। योग, स्वच्छता और बेहतर अधिगम वातावरण पर फोकस आदेश में विद्यालयों में बिजली, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं को सुचारु रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं की सहभागिता से सामूहिक योगाभ्यास आयोजित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली, अनुशासन और सकारात्मक सोच से जोड़ना भी है।

79 करोड़ रुपये से अधिक होंगे खर्च, पयर्टन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देकर टेंपल इकोनॉमी की जाएगी मजबूत

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में पर्यटन विभाग ने 31 मार्च 2026 तक स्वीकृत परियोजनाओं पर तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदेश के 8 जिलों में 33 पर्यटन एवं धार्मिक विकास परियोजनाओं पर निर्माण कार्य प्रारम्भ कराया जा रहा है, जिन पर लगभग 79.18 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता ‘आस्था के साथ विकास’ है। इसी सोच के तहत धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थलों का सौंदर्यीकरण कर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देकर टेंपल इकोनॉमी को मजबूत करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि स्वीकृत परियोजनाओं के लिए आवश्यक धनराशि जारी कर दी गई है और कार्यदायी संस्थाओं को निर्धारित समय सीमा में गुणवत्ता के साथ कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को 8 जिलों की 33 परियोजनाओं का दायित्व सौंपा गया है, जिनकी कुल अनुमानित लागत 79.17 करोड़ रुपये से अधिक है। आधुनिक सुविधाओं से जुड़ेंगे आस्था स्थल इन परियोजनाओं में लखनऊ और सीतापुर की एक-एक परियोजना, मिर्जापुर की 7, भदोही की 5, सोनभद्र की 2, हमीरपुर की 2, महोबा की 3, बांदा और चित्रकूट की 6-6 परियोजनाएं शामिल हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के विभिन्न आस्था स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई दी जाए। परियोजनाओं के लिए जारी धनराशि का ब्योरा जयवीर सिंह ने बताया कि लखनऊ स्थित मोहनलाल गंज में हुलासखेड़ा का पर्यटन विकास के लिए 11.99 करोड़, सीतापुर के नैमिषारण्य धाम में बेदारण्यम की स्थापना कार्य के लिए 1.49 करोड़ रुपये, मिर्जापुर की 07 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 1.04 करोड़, करोड़, 79.64 लाख, 1.94 करोड़, 1.97 करोड़, 83.69 लाख, 88.87 लाख और 2.15 करोड़ रुपये के करीब धनराशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार भदोही जनपद की 05 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 1.03 करोड़, 1.47 करोड़, 1.45 करोड़ 99.97 लाख, 1.25 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। वहीं सोनभद्र जनपद की 02 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 1.25 करोड़ और 1.16 करोड़ रुपये की धनराशि अनुमोदित की गई है। इसी तरह महोबा जनपद के विभिन्न मंदिरों के लिए क्रमशः 1.08 करोड़ रुपये, 45.58 लाख और 71.77 लाख रुपये तीन परियोजनाओं के लिए स्वीकृत किए गए। हमीरपुर की 02 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 70 लाख और 69.81 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। बांदा की 06 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 53.82 लाख, 1.38 करोड़, 1.14 करोड़, 1.30 करोड़, 3.38 करोड़ और 2.83 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई। वहीं चित्रकूट की 06 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 1.81 करोड़, 2.29 करोड़, 5.25 करोड़, 1.71 करोड़, 1.66 करोड़ और 9.05 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। निविदा की कार्यवाही भी जारी उन्होंने बताया कि लगभग सभी परियोजनाओं पर कार्य प्रारम्भ कराने के लिए निविदा की कार्यवाही प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि पर्यटन सेक्टर की लोकप्रियता एवं निवेश की असीमित संभावनाओं को देखते हुए प्रदेश सरकार आस्था के साथ विकास के अंतर्गत सभी स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं सुलभ करा रही है।

72 जिलों के 1011 केंद्रों पर पारदर्शी और नकलविहीन तरीके से सम्पन्न हुई बी.एड. प्रवेश परीक्षा

लखनऊ मंगलवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के पुस्तकालय भवन में उत्तर प्रदेश संयुक्त बी.एड. प्रवेश परीक्षा-2026 का परिणाम घोषित किया गया। उत्तर प्रदेश संयुक्त बी.एड. प्रवेश परीक्षा-2026 के टॉपर्स से उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, राज्यमंत्री रजनी तिवारी, कुलपतिगण तथा प्रमुख सचिव एवं सचिव द्वारा वीडियो कॉल पर वार्ता कर शुभकामनाएं दी और उनकी भविष्य की योजनाओं को जाना। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने सभी सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि परीक्षा में उत्तीर्ण होकर अभ्यर्थियों ने अपने भविष्य की दिशा तय की है। उन्होंने कहा कि माता-पिता के त्याग और गुरुओं के मार्गदर्शन से ही यह मुकाम हासिल हुआ है। 'गुरु देवो भव, मातृ देवो भव, पितृ देवो भव' की भावना के साथ हमें राष्ट्र के प्रति समर्पित रहना चाहिए। देशभक्ति केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। समाज ने जो जिम्मेदारी दी है, उसका ईमानदारी, परिश्रम और समर्पण से पालन करना ही सच्ची देशभक्ति है। उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने टेक्नोलॉजी और एआई को जोड़कर अभेद्य सिस्टम से परीक्षा कराई। यह उदाहरण प्रस्तुत करता है कि परीक्षाएं कैसे शुचिता, पारदर्शिता और गोपनीयता के साथ कराई जाएं। योगी सरकार के आने के बाद लखनऊ, बरेली और अब झांसी विश्वविद्यालय ने बी.एड. परीक्षाएं कराकर शिक्षा के स्तर को सुधारा है। पहले नकल को बढ़ावा देने की बात होती थी, लेकिन अब टेक्नोलॉजी से जुड़कर परीक्षाएं नकलविहीन हो रही हैं। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि आज बी.एड. करने वाले छात्रों के लिए हर्ष का दिन है। उन्होंने सभी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आपका ज्ञान, अनुभव और समर्पण आपको अलग पहचान दिलाएगा। उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय और उसकी टीम को परीक्षा के सफल आयोजन के लिए बधाई दी। परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य: उत्तर प्रदेश शासन द्वारा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी को राज्य स्तरीय संयुक्त बी.एड. प्रवेश परीक्षा-2026 आयोजित कराने का दायित्व सौंपा गया था। विश्वविद्यालय द्वारा दिनांक 31 मई 2026 को दो पालियों में प्रातः 9.00 से 12.00 बजे तक तथा अपराह्न 2.00 से 5.00 बजे तक प्रदेश के 72 जिलों के 1011 परीक्षा केंद्रों पर पूर्ण शुचिता, पारदर्शिता एवं गोपनीयता के साथ परीक्षा आयोजित कराई गई। बी.एड. प्रवेश परीक्षा में 4,44,958 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें 2,72,659 महिलाएं, 1,72,297 पुरुष तथा 2 ट्रांसजेंडर शामिल थे। श्रेणीवार 2,36,272 सामान्य, 1,32,217 अन्य पिछड़ा वर्ग, 72,128 अनुसूचित जाति, 1341 अनुसूचित जनजाति तथा 2448 विकलांग अभ्यर्थी पंजीकृत थे। प्रथम पाली में 4,00,499 तथा द्वितीय पाली में 4,00,756 अभ्यर्थी सम्मिलित हुए। कुल उपस्थिति लगभग 90 प्रतिशत रही। कासगंज एवं पीलीभीत में सबसे अधिक 95 प्रतिशत तथा गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में सबसे कम 84 प्रतिशत उपस्थिति रही। तकनीक का हुआ अभूतपूर्व प्रयोग:   परीक्षा में हाईटेक कमांड कंट्रोल रूम स्थापित कर आईसीसीसी (इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर) के माध्यम से 72 जिलों के 1011 केंद्रों की लाइव मॉनिटरिंग की गई। 22000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे और 5651 बायोमेट्रिक्स मशीनें लगाई गईं। एआई और रियल टाइम बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम से सभी अभ्यर्थियों की फेस रिकॉगनीशन एवं फिंगर प्रिंट अटेंडेंस कराई गई। स्ट्रांग रूम, परीक्षा कक्ष एवं प्रवेश/निकास स्थान की एआई युक्त सीसीटीवी से निगरानी की गई। वीओआईपी आधारित सिस्टम से सभी केंद्रों से रियल टाइम संपर्क स्थापित किया गया। विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों को जीपीएस आधारित बॉडी बॉर्न कैमरे दिए गए। परीक्षा के दौरान 04 अभ्यर्थी अनुचित साधन प्रयोग करते पाए गए, जिनका परिणाम निरस्त कर दिया गया। परीक्षाफल: परीक्षा के दौरान ओएमआर उत्तर पत्रकों की डबल स्कैनिंग एवं इमेज स्कैनिंग के माध्यम से स्कोरिंग की गई। कुल 4,00,107 अभ्यर्थियों को रैंक जारी की गई, जिनमें 1,53,612 पुरुष, 2,46,494 महिला तथा 01 ट्रांसजेंडर हैं। कला वर्ग के 2,48,452, विज्ञान वर्ग के 1,28,018, वाणिज्य वर्ग के 20,514 एवं कृषि वर्ग के 3771 अभ्यर्थी शामिल हैं। टॉपर्स: प्रथम 10 में स्थान प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों में 04 पुरुष तथा 06 महिला हैं। जनपद अलीगढ़ की सुश्री वन्दना सिंह (विज्ञान वर्ग) ने प्रदेश में प्रथम, अलीगढ़ के श्री नितिन पचौरी (विज्ञान वर्ग) ने द्वितीय तथा जौनपुर की सुश्री मिश्रा खुशी अजय (विज्ञान वर्ग) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।  इस अवसर पर उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पांडे, आरएमएल विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमरपाल सिंह, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा  एम.के. अग्रवाल, प्रमुख सलाहकार प्रो. एस.पी. सिंह, राज्य समन्वयक प्रो. सौरव श्रीवास्तव, सह राज्य समन्वयक प्रो. डी.के. भट्ट एवं प्रो. काव्या दुबे, कुलसचिव ज्ञानेन्द्र कुमार, परीक्षा नियंत्रक राजबहादुर, वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह सहित विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

जुलाई में सभी विद्यार्थियों के लिए चलेगा 15 दिवसीय पुनरावृत्ति शिक्षण कार्यक्रम

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा सुधार के अगले चरण में प्रवेश करते हुए अब बच्चों के सीखने के अंतराल (लर्निंग गैप) को समाप्त करने के लिए प्रदेशव्यापी ‘कैच-अप शिक्षण अभियान’ शुरू करने जा रही है। निपुण भारत मिशन के माध्यम से आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करने के बाद सरकार का फोकस अब उन विद्यार्थियों तक पहुंचने पर है, जो किसी कारणवश अपेक्षित अधिगम स्तर से पीछे रह गए हैं। इसी उद्देश्य से जुलाई 2026 में सभी विद्यार्थियों के लिए 15 दिवसीय पुनरावृत्ति शिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जाएगा, जबकि अगस्त 2026 से जनवरी 2027 तक विद्यालयों में प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का विशेष कैच-अप शिक्षण सत्र आयोजित होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और एनसीएफएसई-2023 की भावना के अनुरूप तैयार की गई इस कार्ययोजना का उद्देश्य प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी सीखने की आवश्यकता के अनुसार शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराना है। योगी सरकार का मानना है कि यदि समय रहते अधिगम अंतराल को दूर नहीं किया गया तो बच्चों की आगे की शैक्षणिक प्रगति प्रभावित हो सकती है। इसलिए विद्यालय स्तर पर सुनियोजित, व्यवस्थित और परिणामोन्मुखी रणनीति लागू की जा रही है। अधिगम परिणामों पर केंद्रित शिक्षा सुधार का नया चरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधार अब नामांकन और आधारभूत सुविधाओं के साथ-साथ बच्चों के वास्तविक अधिगम परिणामों पर केंद्रित हो चुका है। निपुण भारत मिशन, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल अनुश्रवण और अब कैच-अप शिक्षण अभियान के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है कि कोई भी बच्चा सीखने की दौड़ में पीछे न रह जाए। यह पहल गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और परिणामोन्मुखी शिक्षा व्यवस्था के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। अनुभव आधारित और रुचिकर होगा शिक्षण कैच-अप शिक्षण को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखते हुए स्थानीय परिवेश, दैनिक जीवन के अनुभवों और गतिविधि आधारित शिक्षण से जोड़ा जाएगा। शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम), गणित किट, पुस्तकालय पुस्तकों, चार्ट, पोस्टर और स्थानीय संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। खेल आधारित गतिविधियों, कहानी, चित्र, लेखन, समूह कार्य तथा सहभागितापूर्ण शिक्षण के माध्यम से बच्चों की सीखने में रुचि बढ़ाई जाएगी। त्रुटि विश्लेषण और पीयर लर्निंग पर रहेगा जोर कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों की कठिनाइयों की पहचान कर उनका समाधान किया जाएगा। त्रुटि विश्लेषण के माध्यम से यह समझा जाएगा कि बच्चे कहां और क्यों पिछड़ रहे हैं। ‘मैं करूं-हम करें-तुम करो’ रणनीति, पीयर लर्निंग, पेयर लर्निंग और कोऑपरेटिव लर्निंग जैसी पद्धतियों का उपयोग कर बच्चों में आत्मविश्वास, सहयोग और समस्या समाधान क्षमता विकसित की जाएगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी विद्यार्थी स्वयं को कमजोर या उपेक्षित महसूस न करे। आकलन, अनुश्रवण और अभिभावक सहभागिता बनेगी सफलता की कुंजी कार्यक्रम को परिणाममुखी बनाने के लिए विद्यार्थियों का बेसलाइन और एंडलाइन आकलन किया जाएगा तथा उनकी प्रगति का नियमित अभिलेखीकरण किया जाएगा। एआरपी, एसआरजी, डायट मेंटर और खंड शिक्षा अधिकारी समय-समय पर कार्यक्रम की समीक्षा करेंगे। वहीं विद्यालय प्रबंधन समिति और अभिभावकों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि बच्चों को विद्यालय और घर दोनों स्थानों पर सीखने के लिए अनुकूल वातावरण मिल सके।

सीएम योगी की मंशा के अनुरूप स्थानीय स्तर पर विकसित होंगे छोटे उद्योग

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने गोशालाओं की क्षमता का राज्यव्यापी मूल्यांकन पूरा कर लिया है। इसके आधार पर अब प्रदेश के प्रत्येक जिले में स्थानीय संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुरूप एक प्रमुख गो आधारित उद्योग विकसित करने की तैयारी है। इस पहल को "एक जनपद-एक नवाचार" मॉडल के रूप में लागू किया जाएगा। गोशालाओं की भूमि, गोवंश, जल संसाधन और स्थानीय बाजार के आधार पर आकलन योजना का उद्देश्य गोशालाओं को केवल निराश्रित गोवंश के संरक्षण तक सीमित न रखकर उन्हें उत्पादन, रोजगार, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके लिए प्रदेशभर की गोशालाओं में उपलब्ध भूमि, गोवंश, जल संसाधन, पंचगव्य इकाइयों और स्थानीय बाजार की संभावनाओं का विस्तृत आकलन किया गया है। किसी जिले में बायोगैस उत्पादन तो कहीं इको पेंट निर्माण को मिलेगा बढ़ावा उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि निरीक्षण और अध्ययन के बाद प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग नवाचार मॉडल तैयार किए जा रहे हैं। किसी जिले में बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा तो कहीं इको पेंट निर्माण, जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, गोबर आधारित उत्पाद, पंचगव्य उत्पादों को प्राथमिकता मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर छोटी उद्योग इकाइयों का विकास होगा और ग्रामीण युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। ऐसा होगा जिला विशेष नवाचार मॉडल जिला विशेष नवाचार मॉडल के माध्यम से संसाधनों को आय और रोजगार में बदलने की रणनीति तैयार की गई है। योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों और युवाओं को प्रशिक्षण देकर उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन से जोड़ा जाएगा। यह मॉडल सफल होने पर गोशालाएं आत्मनिर्भर बनेंगी, प्राकृतिक खेती को नई गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा। साथ ही प्रत्येक जिले की एक विशिष्ट गो-आधारित पहचान विकसित होगी, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी।