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200 बेड व अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ बुजुर्गों को मिलेगा समर्पित इलाज, मुख्यमंत्री ने गुणवत्ता व समयबद्ध निर्माण के दिए निर्देश

वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान परिसर में लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन 200 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ का स्थलीय निरीक्षण किया। सात मंजिला इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की और कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को युद्धस्तर पर अभियान चलाकर निर्धारित समय सीमा में निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न करने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। उन्होंने बीएचयू प्रशासन के अधिकारियों को भी परियोजना की नियमित निगरानी करने और निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बुजुर्गों को समर्पित यह अत्याधुनिक ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ देश का तीसरा तथा उत्तर भारत का प्रमुख जरा (वृद्धावस्था) चिकित्सा केंद्र होगा। इसका निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। केंद्र में बुजुर्गों के लिए मल्टी-स्पेशियलिटी जेरिएट्रिक (वृद्धावस्था चिकित्सा) ओपीडी संचालित की जाएगी। इसके अलावा मेमोरी क्लीनिक, गठिया (अर्थराइटिस) क्लीनिक समेत वृद्धावस्था से जुड़ी विभिन्न बीमारियों के उपचार हेतु विशेष सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इस केंद्र में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, अत्याधुनिक रेडियोलॉजी एवं जांच सुविधाएं, पुनर्वास सेवाएं, डे-केयर सेंटर, आईसीयू तथा प्राइवेट वार्ड की व्यवस्था भी होगी। इसके साथ ही यह संस्थान जरा चिकित्सा के क्षेत्र में क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास का प्रमुख केंद्र बनेगा। शैक्षणिक गतिविधियों के तहत यहां जेरिएट्रिक मेडिसिन विभाग में डॉक्टरों और नर्सों को बुजुर्गों की विशेष देखभाल के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। वरिष्ठ चिकित्सकों एवं सीनियर रेजिडेंट की सीटों में वृद्धि के साथ-साथ एमडी जेरिएट्रिक मेडिसिन की स्नातकोत्तर सीटें भी बढ़ाई जाएंगी। वृद्धावस्था संबंधी रोगों पर अनुसंधान, उपचार पद्धतियों का विकास तथा बुजुर्गों के लिए विशेष चिकित्सा दिशानिर्देश तैयार करने का कार्य भी इस केंद्र में किया जाएगा। नेशनल सेंटर फॉर एजिंग के शुरू होने के बाद पूर्वांचल सहित उत्तर भारत के लाखों बुजुर्ग मरीजों को एक ही छत के नीचे आधुनिक और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

गो संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता, योगी सरकार का विजन : छोटी लागत में बड़ी बचत कर सकेंगे ग्रामीण

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गो संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अब गो सेवा को ग्रामीण समृद्धि और स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। प्रदेश में गांवों के एक लाख से अधिक घरों में मिनी बायोगैस प्लांट स्थापित करने की योजना तैयार की गई है। इस पहल का उद्देश्य गो संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और उनकी घरेलू बचत बढ़ाना है।  योगी सरकार का विजन है कि ग्रामीण परिवार कम लागत में अपने घरों पर ही मिनी बायोगैस संयंत्र लगाकर रसोई गैस के खर्च में बड़ी कमी ला सकें। गो सेवा आयोग की इस योजना के अनुसार 25 हजार से 50 हजार रुपये की लागत में मिनी बायोगैस प्लांट स्थापित किए जा सकेंगे। इससे गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट का उपयोग कर स्वच्छ ईंधन तो तैयार होगा ही साथ में किसानों को जैविक खाद भी बड़े पैमाने पर प्राप्त होगी। इसके साथ ग्रामीणों को रसायनमुक्त भोजन मिलेगा।  गो संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को प्राथमिकता के आधार पर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह योजना महत्वपूर्ण साबित होगी। स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण आत्मनिर्भरता और गो पालन को एक साथ जोड़ने वाली इस पहल से गांवों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। घरेलू खर्च में होगी बचत उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया है। आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योजना के लागू होने पर रसोईघरों में एलपीजी की खपत में भी कमी आएगी, जिससे घरेलू खर्च में उल्लेखनीय बचत होगी। उन्होंने बताया कि मिनी बायोगैस प्लांट के माध्यम से किसान बायोगैस तैयार करेंगे और उससे निकलने वाली स्लरी का उपयोग जैविक खाद के रूप में कर सकेंगे। इससे खेती की लागत घटेगी और अतिरिक्त आय के अवसर भी पैदा होंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति इस योजना के तहत बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार कम खर्च में अपने घरों पर संयंत्र स्थापित कर सकेंगे। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूत करेगी। साथ ही गो संरक्षण को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर गो पालकों के लिए आय के नए स्रोत भी विकसित होंगे। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार की इस महत्वाकांक्षी पहल से उत्तर प्रदेश में ‘गो सेवा से समृद्धि’ का नया मॉडल विकसित हो रहा है, जहां गो संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण आत्मनिर्भरता एक साथ आगे बढ़ेंगे।

57,694 ग्राम पंचायतों में सचिवालय, डिजिटल सेवाओं का विस्तार और स्वच्छता अभियान से ग्रामीण विकास को मिली नई गति

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के पंचायती राज विभाग ने पिछले पांच वर्षों में ग्रामीण विकास, डिजिटल सुशासन, स्वच्छता और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में विभाग की उपलब्धियों और भावी योजनाओं पर प्रस्तुत किए गए विवरण में ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए किए गए कार्यों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।       उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 57,694 ग्राम पंचायतें हैं और ग्रामीण आबादी लगभग 15.53 करोड़ है, जो राज्य की कुल जनसंख्या का 78 प्रतिशत है। बीते वर्षों में सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय स्थापित किए गए हैं तथा 24,311 पंचायत भवनों का निर्माण कराया गया। पंचायत सचिवालयों में फर्नीचर, कंप्यूटर, इंटरनेट और पेयजल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के तहत 54,958 कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से 49.38 लाख से अधिक सेवाएं ग्रामीणों को उपलब्ध कराई गईं। इससे पंचायतों की आय और पारदर्शिता दोनों में वृद्धि हुई।       स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ने सामुदायिक शौचालय निर्माण में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। राज्य में हजारों गांवों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रे-वाटर मैनेजमेंट और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के कार्य सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल के माध्यम से पंचायतों की आय में भी वृद्धि हुई है।    विभाग ने पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के क्षमता विकास पर भी विशेष जोर दिया है। विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लाखों जनप्रतिनिधियों और कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि डिजिटल लाइब्रेरी, पंचायत गेटवे पोर्टल और परिवार रजिस्टर के डिजिटलीकरण जैसे नवाचार ग्रामीण प्रशासन को आधुनिक स्वरूप प्रदान कर रहे हैं।       आगामी वर्षों के लिए विभाग ने मेरा तालाब-मेरी जिम्मेदारी, फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट, डिजिटल लाइब्रेरी विस्तार, पंचायत उत्सव भवन और मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई इबारत लिखने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

दालमंडी में फिलहाल नहीं चलेगा बुलडोजर, हाईकोर्ट के आदेश से प्रशासनिक कार्रवाई पर ब्रेक

वाराणसी  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण योजना से जुड़े भवन ध्वस्तीकरण मामले में प्रभावित पक्ष को बड़ी राहत दी है. अदालत ने विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की जाएगी. इस फैसले से स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को अस्थायी राहत मिली है, जो लंबे समय से प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण योजना को लेकर चिंतित थे।  याचिकाकर्ता ने नोटिस को दी थी चुनौती यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने अलिमुन्निशा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया. याचिका में नगर निगम वाराणसी के जोनल अधिकारी/सहायक नगर आयुक्त द्वारा 26 मई 2026 को उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 331 के तहत जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि कार्रवाई में प्रक्रियात्मक अनियमितताएं हैं और बिना उचित सुनवाई के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है।  हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है और संबंधित पक्षों को अगली सुनवाई में विस्तृत दलीलें पेश करने का अवसर दिया है. यह मामला दालमंडी क्षेत्र में प्रस्तावित चौड़ीकरण परियोजना को लेकर चल रहे विवाद का अहम हिस्सा माना जा रहा है। याचिकाकर्ता ने दी थी ये दलीलें याचिकाकर्ता का कहना था कि नगर निगम ने उनके मकान को जर्जर बताते हुए ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया है, जबकि उनकी आपत्तियों पर अब तक कोई अंतिम आदेश न तो पारित किया गया और न ही विधिवत तामील किया गया है. ऐसे में मकान गिराने की कार्रवाई कानून सम्मत नहीं मानी जा सकती।  मामले की पृष्ठभूमि में यह भी सामने आया कि पूर्व में नगर निगम द्वारा जारी नोटिस को चुनौती दिए जाने पर हाईकोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को संयुक्त समिति गठित कर याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर देने और उनके पक्ष पर विचार करने के बाद निर्णय लेने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद बाद में जारी नोटिस में कहा गया कि संयुक्त समिति की रिपोर्ट में भवन को जर्जर पाया गया है और उसे ध्वस्त किया जाना आवश्यक है।  याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता काज़ी मुहम्मद अकरम एवं उनकी टीम ने न्यायालय के समक्ष दलील दी कि बिना अंतिम आदेश की विधिवत सेवा और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी किए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई असंवैधानिक एवं अवैध होगी. पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने मामले को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार व अन्य प्रतिवादियों से जवाब तलब किया।  20 जुलाई को होगी अगली सुनवाई अदालत ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है. इसके बाद याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने की अनुमति प्रदान की गई है।  खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 निर्धारित करते हुए आदेश दिया कि तब तक विवादित परिसर के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी जाए. साथ ही 26 मई 2026 के नोटिस के आधार पर किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई न की जाए।  हाईकोर्ट के इस आदेश को दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण परियोजना के दायरे में आने वाले प्रभावित भवन स्वामियों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है. अब मामले की अगली सुनवाई में राज्य सरकार और नगर निगम अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।   

गाय के असामान्य व्यवहार से फैली भीड़, जांच में हाइपोग्लाइसीमिया की पुष्टि

श्रीवस्ती यूपी श्रावस्ती जिले के बसभरिया पुरैना गांव में एक गाय का असामान्य व्यवहार पिछले एक सप्ताह तक लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। गाय लगातार सात दिनों तक एक खेत में चक्कर लगाती रही, जिससे उसे देखने के लिए आसपास ही नहीं बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी लोगों की भीड़ उमड़ने लगी। सोशल मीडिया पर इसके वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया। हालांकि पशु चिकित्सकों की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि गाय किसी चमत्कार के कारण नहीं, बल्कि एक बीमारी की वजह से ऐसा व्यवहार कर रही थी। 7 दिनों से खेत के चक्कर लगा रही थी गाय ग्रामीणों के अनुसार गाय ने शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे खेत में घूमना शुरू किया था। इसके बाद वह रुक-रुक कर लगातार सात दिनों तक उसी खेत में परिक्रमा करती रही। गाय के इस व्यवहार को देखकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कई लोगों ने इसे चमत्कार मान लिया और खेत में पहुंचकर गाय की पूजा-अर्चना करने लगे। कुछ श्रद्धालुओं ने तो स्वयं भी खेत की परिक्रमा शुरू कर दी। गाय के दर्शन के लिए पहुंचने लगे लोग गांव में लगातार बढ़ती भीड़ के कारण स्थिति को नियंत्रित करना मुश्किल होने लगा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के चलते प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग गांव पहुंच रहे थे, जिससे स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस ने भी स्थिति पर नजर रखनी शुरू कर दी। उधर, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में पशु चिकित्सा विभाग की टीम गांव पहुंची और गाय की जांच की। उत्तर प्रदेश के जिला श्रावस्ती में गाय पिछले 8 दिन से एक ही खेत के लगातार चक्कर लगा रही थी। लोगों ने चमत्कार मानकर पूजा–अर्चना शुरू कर दी। गाय की तरह लोगों ने भी खेत की परिक्रमा शुरू कर दी।      सर्रा बीमारी से पीड़ित निकली गाय डॉक्टरों ने बताया कि गाय ‘सर्रा’ यानी हाइपोग्लाइसीमिया नामक बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी के कारण पशु असामान्य व्यवहार करने लगते हैं और लगातार एक ही दिशा में घूमने जैसी गतिविधियां कर सकते हैं। टीम ने गाय का उपचार शुरू कर दिया और उसकी स्थिति पर निगरानी रखी। आठवें दिन पुलिस मौके पर पहुंची और अनावश्यक भीड़ को हटाने के लिए लोगों को समझाया। इसके बाद गाय को उसके मालिक के सुपुर्द कर दिया गया। साथ ही परिवार को भी निर्देश दिए गए कि घटना को लेकर भीड़ इकट्ठा न होने दें। डॉक्टर बोले- धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी गाय पशु चिकित्सकों का कहना है कि उपचार के बाद गाय धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी। हालांकि विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बावजूद कई लोग अब भी इस घटना को चमत्कार या किसी विशेष संकेत के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल गांव में हालात सामान्य हैं और लोग गाय के पूरी तरह स्वस्थ होने का इंतजार कर रहे हैं।

सीएम योगी का बयान: कृषि और विज्ञान भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत रहे हैं

लखनऊ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि कृषि प्रधान देश भारत का किसान हमेशा से नवाचारी रहा है और खेती किसानी में नए प्रयोग कर कृषि योग्य भूमि की उत्पादक क्षमता बढ़ाने और उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर करने में दिलचस्पी जाहिर करता रहा है। यही कारण है कि भारत में कृषि क्षेत्र कभी घाटे का सौदा नहीं रहा है। योगी ने अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन शनिवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय में विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कहा, पहले किसान केवल किसान नहीं था, बल्कि वह इनोवेटर था। कृषि कभी घाटे का सौदा नहीं था। उस समय का किसान स्वयं नवाचार करता था। हमारा व्यापारी केवल व्यापारी नहीं था, बल्कि वह देश को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी था। हमारी अर्थव्यवस्था खेती-बाड़ी से जुड़ी हुई थी, जो अपने उत्पादों को दुनिया भर में पहुंचाने का काम करती थी। भारत एक कृषि प्रधान देश माना जाता है। हमारी सबसे बड़ी ताकत एमएसएमई और कृषि क्षेत्र था। विज्ञान का मतलब ही लोक कल्याण सीएम योगी विज्ञान का मतलब ही लोक कल्याण है। दुनिया के अंदर जिस भी देश ने प्रगति की है, उसके पास विज्ञान का यही भाव था। आधुनिक विज्ञान का कुल समय चार से पांच सौ साल का रहा है। भारत की प्राचीन गौरवशाली परंपरा का अध्ययन करें तो पता चलता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 से 45 प्रतिशत थी। चार सौ साल पहले भी लगभग 24-25 प्रतिशत हिस्सेदारी हमारी थी, लेकिन स्वतंत्रता के समय हम डेढ़ से दो प्रतिशत पर आ गए थे। हमें यह देखना होगा कि ऐसा क्यों हुआ। मुख्यमंत्री ने जगदीश चंद्र बसु की दो पौधों वाली कहानी का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवों में ही नहीं, जड़-पौधों में भी चेतना होती है। उन्होंने बचपन में अपनी मां द्वारा पौधे लगाए जाने का जिक्र किया और कहा कि ज्ञान जहां से भी आए, उसका स्वागत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले कारीगरों को बदहाल बना दिया गया था, उनके बनाए उत्पादों को बेकार बताया गया था, परिणामस्वरूप वे बाजारों से बाहर हो गए थे। 2017 के बाद एक जिला एक उत्पाद दिया जोर सीएम योगी ने कहा, 2017 के बाद हमने 'एक जिला एक उत्पाद' शुरू करके डिजाइन और पैकेजिंग पर जोर दिया। बाजार से कारीगरों को जोड़ने का काम किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में विशेषकर बुजुर्गों की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिये लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 200 बिस्तरों वाले सात मंजिला अत्याधुनिक 'नेशनल सेंटर फॉर एजिंग' का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद कार्यदायी संस्था के अभियंताओं को युद्धस्तर पर कार्य कर प्राथमिकता के आधार पर समय से पहले निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए।

लर्निंग गैप भरने की पहल: परिषदीय और कस्तूरबा विद्यालयों में शुरू होगा विशेष शिक्षण कार्यक्रम

 लखनऊ अब परिषदीय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में कोई भी बच्चा पढ़ाई में पीछे नहीं छूटेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (एनसीएफएसई) के अनुरूप प्रदेश सरकार जुलाई से विशेष ‘कैच-अप शिक्षण’ अभियान शुरू करने जा रही है। इससे विद्यार्थियों के सीखने के अंतर (लर्निंग गैप) को भरना है जो नियमित कक्षाओं के बावजूद अपेक्षित अधिगम स्तर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। सभी डायट प्राचार्यों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को अपर मुख्य सचिव बेसिक और माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत जुलाई में सभी विद्यालयों में 15 दिवसीय पुनरावृत्ति शिक्षण अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद अगस्त से जनवरी 2027 तक प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का अतिरिक्त कैच-अप शिक्षण कराया जाएगा। कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों का फॉर्मेटिव असेसमेंट कराया जाएगा। इसके आधार पर उनकी जरूरतों के अनुसार समूह बनाए जाएंगे और अलग-अलग शिक्षण योजनाएं तैयार की जाएंगी। नई अवधारणाओं को विद्यार्थियों को दैनिक जीवन और स्थानीय अनुभवों से जोड़कर पढ़ाया जाएगा ताकि सीखना आसान और स्थायी बन सके। विद्यालयों में बिग बुक, वार्तालाप कार्ड, पोस्टर, पुस्तकालय की किताबें, गणित किट और स्थानीय स्तर पर तैयार शिक्षण सामग्री का उपयोग बढ़ाया जाएगा। भाषा शिक्षण में पहले दो अक्षरों वाले शब्द, फिर छोटे वाक्य और उसके बाद अनुच्छेद पढ़ाने की रणनीति अपनाई जाएगी। गणित को खेल आधारित बनाया जाएगा। किसी बच्चे को नहीं कहा जाएगा कमजोर कैच-अप शिक्षण में पहले शिक्षक उदाहरण देंगे, फिर विद्यार्थियों के साथ अभ्यास करेंगे और अंत में बच्चे स्वयं कार्य करेंगे। पीयर लर्निंग, पेयर लर्निंग और कोआपरेटिव लर्निंग जैसी विधियों का भी प्रयोग होगा। भाषा खेल, कहानी, चित्र आधारित गतिविधियां, रोल प्ले, स्किट और प्रतियोगिताओं के माध्यम से पढ़ाई को रोचक बनाया जाएगा। किसी भी विद्यार्थी को कमजोर या पीछे होने का एहसास नहीं कराया जाएगा। अतिरिक्त कक्षाओं को सकारात्मक शैक्षिक सहयोग के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। कार्य पुस्तिकाओं और नोटबुक की नियमित जांच होगी तथा गलतियों को दंड नहीं बल्कि सीखने का अवसर माना जाएगा।

दान चोरी के आरोपों पर राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा कदम, मुख्यमंत्री योगी से निष्पक्ष जांच की गुहार

अयोध्या  उत्तर प्रदेश के अयोध्या के राम मंदिर में जो पैसा भक्त दान करते हैं, उसकी कथित तौर पर चोरी को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इस मामले में विवाद इतनी तेजी से फैलीं कि अब खुद राम मंदिर का ट्रस्ट मैदान में आ गया है. ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे अनुरोध किया है कि इस पूरे मामले की जांच एक SIT यानी विशेष जांच दल से करवाई जाए।  राम मंदिर में श्रद्धालु जो पैसे दान करते हैं, उन्हें दान पात्रों में डाला जाता है. ये दान पात्र यानी वो बक्से या डिब्बे जिनमें भक्त पैसे डालते हैं. इन्हीं दान पात्रों से पैसे चोरी होने की बात कही जा रही है।  अब इस कथित चोरी को लेकर बाजार में तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगीं. कोई कुछ कह रहा था, कोई कुछ. इन अफवाहों ने मामले को और उलझा दिया और लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई।  इसी वजह से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, जो राम मंदिर की देखरेख करने वाला सरकारी ट्रस्ट है, उसने तय किया कि अब चुप रहना ठीक नहीं है. ट्रस्ट ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अनुरोध किया।  ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी से क्या अनुरोध किया? ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी से तीन बातें मांगी हैं. पहली – इस पूरे मामले की जांच एक SIT यानी से करवाई जाए. SIT एक खास जांच दल होती है जो किसी बड़े मामले की गहराई से, बिना किसी दबाव के जांच करती है।  दूसरी – यह जांच निष्पक्ष हो यानी बिना किसी की तरफदारी के हो और पूरी तरह से सच सामने आए. तीसरी – जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. ट्रस्ट ने साफ कहा कि दोषियों को बख्शा न जाए. SIT जांच की मांग क्यों? ट्रस्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर माना है. राम मंदिर की दान राशि से जुड़ा यह मामला सिर्फ पैसों की चोरी नहीं है, बल्कि यह भक्तों की आस्था और भरोसे का सवाल भी है. करोड़ों लोग इस मंदिर में श्रद्धा से दान करते हैं. ऐसे में अगर उस दान की चोरी होती है और उस पर अफवाहें भी फैलती हैं, तो यह बेहद संवेदनशील मामला बन जाता है।  ट्रस्ट चाहता है कि SIT जांच से यह बात एकदम साफ हो जाए कि आखिर हुआ क्या था, कितनी चोरी हुई, कौन जिम्मेदार है और इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाने चाहिए।  मुख्यमंत्री योगी से अनुरोध क्यों? उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी का राम मंदिर से गहरा जुड़ाव है. अयोध्या और राम मंदिर उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक रही है. SIT का गठन करना राज्य सरकार के अधिकार में आता है, इसलिए ट्रस्ट ने सीधे मुख्यमंत्री योगी से यह अनुरोध किया। 

कर्वी में भारी वाहनों पर प्रतिबंध, श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम

 चित्रकूट  प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में सोमवार को पड़ रही सोमवती अमावस्या पर करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम यातायात और मूलभूत सुविधाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। वहीं कर्वी नगर में भारी और मध्यम मालवाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाते हुए विस्तृत रूट डायवर्जन योजना लागू कर दी गई है। अच्छी वर्षा और सुख-समृद्धि की कामना लेकर श्रद्धालु कामदगिरि की परिक्रमा करेंगे और मां मंदाकिनी में पवित्र स्नान करेंगे। भीषण गर्मी को देखते हुए रामघाट क्षेत्र में बड़े टेंट लगाकर छाया की व्यवस्था की जा रही है। परिक्रमा और पैदल मार्गों पर मैट और कारपेट बिछाए जा रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को गर्म जमीन से राहत मिल सके। कर्वी नगर में भारी एवं मध्यम मालवाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा बैठने और विश्राम के लिए अलग-अलग स्थानों पर छायादार स्थल बनाए गए हैं, जबकि पेयजल, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी ने परिक्रमा मार्ग पर पड़ी निर्माण सामग्री को तत्काल हटाने के निर्देश भी दिए हैं। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए 14 जून प्रातः 5:30 बजे से 16 जून मध्यरात्रि तक कर्वी नगर में भारी एवं मध्यम मालवाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके बाद 17 जून से अगले 30 दिनों तक निर्धारित समयावधि में नो-एंट्री व्यवस्था लागू रहेगी। प्रयागराज, कौशांबी, बांदा और सतना की ओर से आने वाले भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं। वहीं जानकीकुंड और सतना की ओर जाने वाले हल्के वाहनों के लिए भी अलग डायवर्जन प्लान बनाया गया है, ताकि मेले के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

गोरखपुर में 295 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण, योगी ने गिनाए सरकार के काम

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल जोरशोर से तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी एक तरह से चुनावी शंखनाद कर दिया है। सीएम योगी पश्चिम से लेकर पूरब तक यूपी के धुआंधार दौरे कर रहे हैं। इन दौरों के दौरान सैकड़ों करोड़ की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण-शिलान्यास के साथ ही वह लोगों को अपनी सरकार के कामों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं साथ ही विपक्ष पर जमकर हमला भी बोल रहे हैं। शनिवार को सीएम योगी वाराणसी, आजमगढ़ से होते हुए अपने गृह जनपद गोरखपुर पहुंचे। यहां चिल्लूपार की जनसभा में उन्होंने राम मंदिर निर्माण, रोजगार, कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों पर विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। सीएम योगी ने जनता से आह्वान किया जो दल आस्था का सम्मान, युवाओं को रोजगार और क्षेत्र का विकास नहीं कर सकते, उन्हें न चुनें। सीएम योगी शनिवार को गांधी इंटर कालेज महुआपार बड़हलगंज में 295 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 152.21 करोड़ रुपये की 122 पूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और 143.25 करोड़ रुपये की 197 नई परियोजनाओं का शिलान्यास किया। सीएम योगी ने कहा कि चिल्लूपार क्षेत्र के लोग सरयू मैया के प्रति गहरी आस्था रखते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से सरयू में स्नान करते हैं और पर्व-त्योहारों पर काशी तथा अयोध्या धाम की यात्रा करते हैं। अनुमान कीजिए आपका एक वोट कैसे पीढ़ियों को तार देता है। 500 वर्ष पहले जिस अयोध्या धाम में हम सब अपमानित हुए थे। पांच सौ वर्षो तक संघर्ष चलता रहा। पीढ़ी दर पीढ़ी, साल दर साल संघर्ष का सिलसिला थमा नहीं। फिर डबल इंजन की सरकार आई। आज अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर का निर्माण हो गया। सीएम ने सभा में लोगों से पूछा कि क्या ये काम कांग्रेस कर पाती? कांग्रेस के वश का था? क्या समाजवादी पार्टी कर पाती? उन्होंने कहा कि आप सोचें कि जब ये आपकी आस्था को सम्मान नहीं दे सकते, महापुरुषों को सम्मान नहीं दे सकते, विकास की योजनाएं नहीं ला सकते, नौजवान को रोजगार नहीं दे सकते, उद्योग धंधे नहीं ला सकते, बेटी बहन को सुरक्षा नहीं दे सकते, बाढ़ की समस्या का समाधान नहीं दे सकते, सड़कों का निर्माण नहीं कर सकते है, बब इन्हें चुनकर भेजते क्यों हैं? इन्हें चुनकर भेजने का मतलब स्वयं पर एक बोझ और कलंक का ठप्पा लगा लेना है। सपा पर साधा निशाना सीएम योगी ने नाम लिए बगैर सपा पर जमकर निशाना साधा। सीएम योगी ने कहा कि जब गलत लोग चुन कर जाते थे, तब जनता का पैसा चंद लोगों के परिवारों के विकास में लगता था। नौकरियों में सेंध लगती, यूपी के नौजवानों को नौकरी नहीं लगती। विकास की योजना में ठेके पट्टे के लिए पहले ही मार होने लगती थी। विधायक स्वयं ठेका करेगा तो हो चुका काम। यही होता था। लेकिन अब विकास भी हो रहा, नौजवानों को नौकरी भी मिल रही है। पुलिस भर्ती में चिल्लूपार और गोरखपुर के नौजवान भर्ती हुए। हर सरकारी भर्ती में नियुक्ति पत्र वितरित करता हूं तो गोरखपुर के सभी विधानसभा क्षेत्र से नौजवान मंच पर दिखते हैं। प्रसन्नता होती है। सीएम ने एक बार फिर लोगों से पूछा कि क्या ये 2017 के पहले संभव था? उन्होंने कहा कि तब चाचा-भतीजे की जोड़ी आपके हक पर डकैती डालती थी। नौजवानों का सलेक्शन नहीं होता था बल्कि वे नौकरी रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पहचान के संकट से जूझता था। मै मानता हूं कि चिल्लूपार, आजमगढ़, मऊ और यूपी के नाम पर रोजगार नहीं मिलता था। हक विकास भी करेंगे, सुरक्षा और सम्मान भी देंगे सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में दंगा, कर्फ्यू, अव्यवस्था, गुंडागर्दी, माफियागिरी यही सब था यूपी में। न बेटी सुरक्षित न व्यापारी। आज ऐसा नहीं है। एक नई पहचान बनी है यूपी की। यह नई पहचान आपके विकास की इस यात्रा की पहचान है। हम विकास भी करेंगे, सुरक्षा भी देंगे, आस्था का सम्मान भी करेंगे और समृद्धि की नई उंचाई की ओर आप सब को भी लेकर जाएंगे। सीएम योगी ने कहा कि सरकार यहां लगने वाले उद्योगों के लिए ऐसे प्रशिक्षण केंद्र भी खोलेगी जहां तकनीशियन पैदा होंगे। उद्योगों में प्रशिक्षित बेटे और बेटियों को नौकरी मिलेगी, उन्हें पलायन नहीं करना होगा। लेकिन इन प्रक्रियाओं को गति तब मिलेगी जब अच्छी सरकारें होंगी, सुशासन होगा, सुरक्षा होगी।