samacharsecretary.com

मॉरीशस दौरे में पीएम मोदी ने परोसा स्वादिष्ट बनारसी भोजन, विदेशियों ने की तारीफ

वाराणसी प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा मॉरीशस के प्रधानमंत्री के सम्‍मान में ताज होटल में द‍िए गए मध्याह्न भोज में व‍िदेशी म‍ित्रों के स्‍वाद का जहां ध्‍यान रखा गया वहीं बनारसी जायके की सुवास भी टेबल पर ब‍िखरी और सुस्‍वादु बनारसी जायका भी विदेशी मेहमानों ने खूब पसंद क‍िया। दरअसल गुरुवार को भारत के प्रधानमंत्री और काशी के सांसद नरेन्‍द्र मोदी मेजबान की भूम‍िका में नजर आए। उनके द्वारा डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम और श्रीमती वीणा राम गुलाम के सम्मान में मध्याह्न भोज में जो मीनू परोसा गया वह खांटी भारतीय और बनारसी जायके से भरपूर था।    भुने भुट्टे और पुदीना का रस से बने पुदीना और भारतीय मसाले से युक्त भुने हुए मक्के का पतला सूप मीनू में पहले नंबर पर था। वहीं टिक्की टमाटर चाट में स्थानीय व्यंजन मसालेदार टमाटर मैश के ऊपर भुनी हुई कुरकुरी आलू पैटी, रागी दही बड़ा में मीठे मसाले वाली दही की चटनी में भिगोई हुई रागी थी। वहीं पनीर लौंग लता में स्थानीय व्यंजन के क्रम में मखमली टमाटर अखरोट से तैयार ग्रेवी में पका हुआ भरवा पनीर था। बनारसी कढ़ी पकौड़ी में छाछ से तैयार ग्रेवी में पक्के अजवाइन और बेसन के तले हुए पकौड़े थे। आलू कुटी मिर्च में दरदरे भरे कश्मीरी मिर्च से सजे जीरे के तड़के वाली मसालेदार सूखी आलू की सब्जी भी थी। तुवर दाल में तड़का में जीरा टमाटर और भारतीय मसाले से युक्त पीली दाल भी शाम‍िल थी। सब्जी दम बिरयानी में दम शैली में पकाई गई सुगंधित सब्जियों के साथ केसर उत्तर लंबे दाने वाले बासमती चावल भी थे। इसके अलावा मिश्रित भारतीय रोटियां भी मीनू में शाम‍िल थीं। इसके अलावा लाल पेड़ा भी था जो धीरे-धीरे पकाए गए दूध से बनी सूखी मिठाई है। स्थानीय व्यंजन में जलेबी- रबड़ी गाढ़े दूध के साथ परोसे गए केसर चीनी सिरप में भिगोए हुए खमीर युक्त आटे के कुरकुरे स्पाइरल भी थे। इसके अलावा आखि‍र में बनारसी पान के पत्‍ते में लपेटा हुआ गुलाब गुलकंद, सौंफ और कटे हुए खजूर के अलावा चाय- कॉफी के साथ कश्‍मीरी कहवा का भी जायका रखा गया था। व‍िदेशी मेहमान बनारसी जायके को जहां खूब पसंद क‍िए वहीं पीएम ने भी बनारसी जायके का आनंद ल‍िया।   

UP Trade Show 2025: स्टार्टअप और तकनीकी कौशल विकास पर होगा विशेष फोकस

लखनऊ यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025 में इस बार निवेश पर ही नहीं सरकार की तरफ से संचालित योजनाओं पर फोकस करने के साथ ही फ्यूचर डेवलपमेंट पर भी फोकस होगा। इसके लिए सरकार की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए स्टाटर्अप, आईटी, इंश्योरेंस, फाइनेंस मैनेजमेंट, मेडिकल हेल्थ, ई-कॉमर्स और स्किल डेवलपमेंट जैसे अहम विषयों पर विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे। यूपीआईटीएस 2025 के शेड्यूल के अनुसार 25 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रात: ट्रेड शो का शुभारंभ करेंगे। उसी दिन शाम 3 बजे से रात 8 बजे तक बी2सी विजिटर्स के लिए शो ओपन रहेगा। जबकि 26 से 29 सितंबर तक प्रतिदिन दोपहर 11 बजे से 3 बजे तक बी2बी मीटिंग्स और शाम 3 से 8 बजे तक बी2सी विजिटर्स के लिए आयोजन होगा। इस दौरान एक्सपटर् की तरफ से नॉलेज सेशन की शुरुआत 26 सितंबर से होगी जो 28 तक जारी रहेगी। 26 सितंबर को सुबह 11.30 से 12.30 बजे तक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी का सत्र होगा। जिसका विषय वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी में स्टाटर्अप इकोसिस्टम का योगदान रखा गया है। दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, यूपी-यूपीएलसी का सत्र होगा, जो प्रदेश में आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री की ग्रोथ और डेवलपमेंट पर केंद्रित रहेगा। 26 सितंबर को ही 3 बजे से 4 बजे तक मेडिकल हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर विभाग वायरल हेपेटाइटिस और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना पर वकर्शॉप करेगा। शाम 4.30 से 5 बजे तक आईआरडीएआई और एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस नॉन-लाइफ एवं हेल्थ इंश्योरेंस पर अवेयरनेस सेशन आयोजित करेंगे। 5 बजे से 6 बजे तक वित्त विभाग का सत्र होगा, जिसमें प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना शामिल भी होंगे। जबकि 6 से 6.30 बजे तक लाइफ इंश्योरेंस पर अवेयरनेस सेशन होगा वहीं 27 सितंबर को 11.30 से 12.30 बजे तक अर्बन डेवलपमेंट का सत्र होगा। इसमें नगर विकास मंत्री एके शर्मा शामिल होंगे। दोपहर 1 से 2 बजे तक मेडिकल हेल्थ पर दोबारा वकर्शॉप होगी। शाम 4 से 6 बजे तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना सीएम युवा के तहत यूनिवर्सिटीज के साथ एमओयू एक्सचेंज प्रोग्राम होगा। इसके अतिरिक्त, शाम 6 बजे से खादी पर फैशन शो आयोजित किया जाएगा। वही 28 सितंबर को 11.30 से 12.30 बजे तक जीबीयू (गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय) इंडस्ट्री-एकेडमिया टाईअप फॉर स्किल डेवलपमेंट विषय पर सत्र आयोजित करेगा। 29 सितंबर को वैलेडिक्ट्री और अवार्ड्स से शो का समापन होगा।  

मौसम विभाग की चेतावनी: 40 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी तेज हवाएं, मूसलाधार बारिश की संभावना

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर करवट ली है। जहां एक ओर लोग सितंबर में राहत की उम्मीद कर रहे थे, वहीं अब मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। खासतौर पर पूर्वी यूपी के 11 जिलों में मूसलधार बारिश की चेतावनी दी गई है। इस दौरान बिजली गिरने, जलभराव और सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। इसके साथ ही 40 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभवाना जताई गई है। 11, 12 और 15 सितंबर को भारी बारिश का अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से गोरखपुर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में 11 और 12 सितंबर को झमाझम बारिश होने की संभावना है। 15, 16 और 17 सितंबर को भी फिर से भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जिससे एक बार फिर इन इलाकों में जलभराव और आवाजाही में दिक्कतें आ सकती हैं। पश्चिमी यूपी में राहत, लेकिन उमस बरकरार वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश की तीव्रता उतनी नहीं होगी। यहां सिर्फ हल्की बौछारें पड़ने का अनुमान है। लेकिन बारिश की कमी के बावजूद उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान करती रहेगी। 13-14 सितंबर: थोड़ी राहत, फिर बढ़ेगी बारिश 13 और 14 सितंबर को पूरे प्रदेश में मौसम थोड़ा शांत रहेगा। इन दो दिनों में हल्की या मध्यम बारिश होने के आसार हैं, जिससे तापमान में थोड़ी गिरावट आ सकती है। लेकिन यह राहत ज्यादा दिनों तक टिकने वाली नहीं है, क्योंकि 15 सितंबर से फिर से पूर्वी यूपी में मूसलधार बारिश लौटने वाली है।   स्कूलों और आमजन के लिए चेतावनी भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए कई जिलों में स्कूल बंद करने जैसे निर्णय लिए जा सकते हैं। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम में यात्रा से बचें, जलभराव वाले इलाकों में न जाएं और मौसम अपडेट पर नजर रखें। इस बार देरी से होगी मानसून की विदाई आमतौर पर 15 से 20 सितंबर के बीच मानसून प्रदेश से विदा लेने लगता है, लेकिन इस बार मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रक्रिया में देरी हो सकती है। अनुमान है कि सितंबर के अंत तक रुक-रुक कर बारिश जारी रह सकती है।  

योगी सरकार का विजन : आत्मनिर्भर भारत का मजबूत आधार बनेंगे यूपी में निवेश और डिफेंस इंडस्ट्रीज़ सेक्टर

 यूपी में अबतक 45 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव, 15 लाख करोड़ धरातल पर  निवेश से 60 लाख युवाओं को नौकरी, लाखों परिवारों को मिला स्वरोजगार  हरदोई-कानपुर में मेगा लेदर क्लस्टर, गोरखपुर में प्लास्टिक पार्क की स्थापना  यूपी बना देश का सबसे बड़ा एमएसएमई हब, 96 लाख इकाइयां सक्रिय  डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में अबतक 28 हजार करोड़ से अधिक का निवेश  लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण शुरू, प्रदेश को डिफेंस इंडस्ट्री सेक्टर में मिल रही नई पहचान लखनऊ, उत्तर प्रदेश अगले 22 वर्षों में एक नए औद्योगिक और सामरिक अवतार में ढलने की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन 'विकसित यूपी @2047' के अंतर्गत प्रदेश को 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें निवेश और रक्षा उद्योग दो ऐसे स्तंभ हैं, जो न केवल प्रदेश की समृद्धि बल्कि पूरे देश की आत्मनिर्भरता का आधार बनेंगे। 2017 से पहले की स्थिति 2017 से पहले उत्तर प्रदेश निवेश और उद्योग के क्षेत्र में पिछड़े राज्यों में गिना जाता था। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की स्थिति बेहद सीमित थी और रक्षा क्षेत्र में निजी भागीदारी लगभग नगण्य थी। न तो निवेशकों को सुरक्षित वातावरण मिलता था और न ही पर्याप्त नीति समर्थन। निवेश की धार : बदलती तस्वीर बीते साढ़े आठ साल में यूपी ने निवेश के क्षेत्र में ऐतिहासिक छलांग लगाई है। प्रदेश को अब तक 45 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपए से अधिक को धरातल पर उतारा जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप 60 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार और लाखों परिवारों को स्वरोजगार मिला है। फरवरी 2024 में आयोजित ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के दौरान ही 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों का क्रियान्वयन शुरू हुआ। यूपी ने उद्यमियों के लिए 33 सेक्टरल नीतियां लागू कीं और ‘निवेश मित्र’ जैसे डिजिटल प्लेटफार्म को शुरू किया, जो देश का सबसे कुशल सिंगल विंडो पोर्टल बन चुका है। प्रदेश में टेक्सटाइल, लेदर, प्लास्टिक, परफ्यूम, केमिकल और फार्मा पार्क तेजी से विकसित हो रहे हैं। हरदोई-कानपुर में लेदर क्लस्टर, गोरखपुर में प्लास्टिक पार्क और कन्नौज में परफ्यूम पार्क प्रदेश को उद्योग का नया हब बना रहे हैं। आज यूपी देश का सबसे बड़ा एमएसएमई केंद्र है, जहां 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं। रक्षा की दीवार : आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला फरवरी 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर ने यूपी को सामरिक मजबूती का केंद्र बना दिया है। आगरा, अलीगढ़, कानपुर, लखनऊ, झांसी और चित्रकूट में स्थापित छह नोड्स पर तेजी से काम हो रहा है। यूपी में अब तक 170 से अधिक एमओयू साइन हुए हैं, जिनसे 28 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निवेश और 4600 से अधिक रोजगार का वादा है। इनमें अदाणी, एआर पॉलिमर, वैरिविन डिफेंस, एमिटेक इंडस्ट्रीज़ और ब्रह्मोस जैसी नामचीन डिफेंस सेक्टर की कंपनियां कार्य शुरू कर चुकी हैं। जैसे, कानपुर में बुलेटप्रूफ जैकेट और आधुनिक सैन्य सामग्री का उत्पादन हो रहा है। अलीगढ़ में स्मॉल आर्म्स और राडार तकनीक पर काम चल रहा है। सबसे बड़ी उपलब्धि है, लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल का उत्पादन, जो प्रदेश को वैश्विक स्तर पर रक्षा उत्पादन का हब बनाएगा। मिशन 2047 : लक्ष्य और रणनीति सरकार ने रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू से समझौता किया है। यह संस्थान रक्षा निवेशकों को अनुसंधान एवं विकास, स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन और नई तकनीक उपलब्ध कराने में मदद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि यूपी को मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट और एफडीआई में देश में प्रथम स्थान दिलाना है। 2047 तक यूपी में फॉर्च्यून ग्लोबल 500 की कम से कम 5 कंपनियां मुख्यालय स्थापित करें, इसके लिए रणनीतिक स्तंभ तय किए गए हैं, इनमें एयरोस्पेस, डिफेंस प्रोडक्शन, अपैरल, ईवी और सेमीकंडक्टर सेक्टर को सबसे अधिक वरीयता दी जा रही है। 6 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी की राह फिलहाल यूपी की जीएसडीपी करीब 353 बिलियन डॉलर है। लक्ष्य है कि 2030 तक इसे वन ट्रिलियन डॉलर, 2036 तक दो ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक छह ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचना है। इसके लिए प्रदेश को 16 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी। इसमें निवेश और रक्षा उद्योग दोनों प्रमुख आधार स्तंभ होंगे।

यात्रियों के लिए खुशखबरी: नमो भारत RRTS कॉरिडोर पूरी तरह शुरू होने को तैयार, दिल्ली-मेरठ सफर होगा आसान

मेरठ  राजधानी दिल्ली से मेरठ तक की बहुप्रतीक्षित रेलवे परियोजना नमो भारत दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस कॉरीडोर जल्द ही पूरी तरह खुलने जा रहा है। फिलहाल इसके 55 किलोमीटर का हिस्सा अभी चल रहा है, जिसमें दिल्ली के अशोक नगर स्टेशन से मेरठ साउथ स्टेशन तक यात्रियों के लिए इसे चालू किया गया है। इस रेलवे लाइन की बची हुई 27 किलोमीटर की भी शुरुआत जल्द होने वाली है। यह जानकारी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल ने दी है। इस कॉरीडोर के पूरी तरह खुलने के बाद एनसीआर में 8 और कॉरीडोर को कैबिनेट से मंजूरी मिलने की संभावना है। इस मामले की जानकारी देते हुए शलभ गोयल ने बताया कि जून में पूरे 82 किलोमीटर लंब रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) का सफल ट्रायल किया गया था। उन्होंने बताया कि अब जल्द ही इसे आम यात्रियों के लिए भी खोल दिया जाएगा। शलभ ने बताया कि पूरा कॉरीडोर उद्घाटन के लिए तैयार हो गया है। उन्होंने बताया कि अभी इस कॉरीडोर के माध्यम से करीब 60 हजार यात्री हर महीने यात्रा कर रहे हैं। पूरी तरह से खुल जाने के बाद इस रास्ते पर करीब 1 लाख से ज्यादा कारों को सड़कों से हटाने में कामयाबी मिलेगी। इससे सड़कों पर लगने वाला जाम कम हो जाएगा। दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस कॉरीडोर में चलने वाली ट्रेनों की अधिकतम स्पीड 160 किलोमीटर प्रतिघंटा है। इस तरह अब दिल्ली से मेरठ के बीच की दूरी 1 घंटे से कम समय में पूरी हो जाएगी। इस कॉरीडोर के पूरी तरह से खुल जाने के बाद दिल्ली और उसके आसपास के शहरों में लगने वाले भीषण जाम से भी हल्की राहत मिल जाएगी। बता दें कि नमो भारत परियोजना पर कुल 30 हजार करोड़ रुपए का खर्च आया है। इसे मेरठ के साथ ही आसपास के कई शहरों को जोड़ने के लिए बनाया गया है। इसके बाद जल्द ही दिल्ली-अलवर कॉरीडोर को मंजूरी मिलने की संभावना है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद गुरुग्राम होते हुए यह कॉरीडोर 106 किलोमीटर तक जाएगा। दिल्ली-पानीपत कॉरीडोर को भी इसी साल स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। इस तरह एनसीआर में कुल मिलाकर 8 नमो भारत आरआरटीएस कॉरीडोर बनाए जाएंगे, जिससे आसपास के शहरों तक की यात्रा आसान हो जाएगी और सड़कों पर से ट्रैफिक की समस्या भी कम हो जाएगी।  

अयोध्या में मॉरीशस के पीएम का दौरा, रामलला के दर्शन के साथ शिव मूर्ति का करेंगे जलाभिषेक

अयोध्या मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम शुक्रवार को अयोध्या के दौरे पर रहेंगे। आज गुरुवार को वाराणसी में पीएम नरेंद्र मोदी ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर संग द्विपक्षीय वार्ता की। अब बताया जा रहा है कि कल मॉरीशस के प्रधानमंत्री अयोध्या रामलला के दर्शन के लिए जाएंगे। सीएम योगी आदित्यनाथ उनका स्वागत करेंगे। जानकारी के अनुसार मॉरीशस के प्रधानमंत्री कल सुबह 11 बजे अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि हवाई अड्डे पहुंचेंगे। एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनका पारंपरिक शैली में स्वागत करेंगे। इसके बाद मॉरीशस के पीएम प्रयागराज-लखनऊ हाईवे के रास्ते राम मंदिर जाएंगे। राम मंदिर में राम लला के दर्शन करेंगे और लगभग डेढ़ घंटे रुकेंगे। इस दौरन मॉरीशस के पीएम मंदिर निर्माण कार्य का अवलोकन करेंगे और प्रगति की जानकारी लेंगे। बताया जा रहा है कि इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ मॉरीशन के पीएम जटायु, अंगद टीले पर शिव मूर्ति का जलाभिषेक करेंगे। शुक्रवार के कार्यक्रम के लिए कार सुरक्षा एजेंसियां एयरपोर्ट से लेकर मंदिर तक अलर्ट मोड पर रहेंगी। मॉरीशस के प्रधानमंत्री गुलाम 12:30 बजे देहरादून के लिए रवाना होंगे। कहा जा रहा है कि मॉरीशस के पीएम की आगामी अयोध्या यात्रा से राजनयिक संबंधों को मजबूती मिलने की उम्मीद है क्योंकि प्रशासन सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आध्यात्मिक कार्यक्रमों के साथ उनका स्वागत करने की तैयारी कर रहा है। ज़िला मजिस्ट्रेट निखिल टीकाराम फुंडे ने प्रधानमंत्री के दर्शन और पूजन के लिए योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की।स्थानीय संस्कृति को और बढ़ावा देने के लिए, ज़िला प्रधानमंत्री रामगुलाम को एक ज़िला-एक उत्पाद (ओडीओपी) कार्यक्रम के चुनिंदा उत्पाद भेंट करेगा, जिसका उद्देश्य स्वदेशी शिल्प को प्रोत्साहित करना है।  

जिन्ना की अंतिम घड़ियां: खराब एंबुलेंस में पड़े रहे, चेहरे पर मक्खियां तक बैठीं

लखनऊ  मोहम्मद अली जिन्ना आधुनिक भारत के इतिहास की ऐसी शख्सियत रहे हैं, जिन्हें विभाजन का सबसे बड़े दोषी कहा जाता है। खोजा इस्मायली परिवार में गुजरात के काठियावड़ में जन्मे मोहम्मद अली जिन्ना की शख्सियत कई विरोधाभासों से भरी रही। अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन में वह हद दर्जे के धर्मनिरपेक्ष नेता बनने के प्रयास करते रहे तो वहीं आखिरी एक दशक में इतने सांप्रदायिक बने कि पाकिस्तान ही बनवा दिया। इसी तरह पहनावे, व्यवहार और खान-पान में वह निहायत ही पश्चिमी सभ्यता का पालन करते थे, लेकिन राजनीतिक राह ऐसी पकड़ी कि कट्टरता की हद तक गए। ऐसी ही एक विडंबना उनकी मृत्यु के साथ भी जुड़ी है। उन्होंने जिस पाकिस्तान को बनवाने के लिए लड़ाई लड़ी और एक प्राचीन देश का बंटवारा कराया, वहां उनकी मृत्यु भी बेहद दुखद रही। वह अपने आखिरी दिनों में एकदम अकेले से पड़ गए थे। राजनीतिक संघर्ष में वह किसी खेमे के नहीं रह गए थे और अकेले में मरने को मजबूर हुए। उन्हें क्षय रोग यानी टीबी की समस्या हो गई थी। वह इस बीमारी से विभाजन से पहले से पीड़ित थे, लेकिन छिपाते रहे। ऐसा इसलिए ताकि उनकी भारत विभाजन की लड़ाई कहीं कमजोर न पड़ जाए। लेकिन पाकिस्तान बनने के बाद वह बमुश्किल एक साल ही चल पाए और मौत हो गई। उनकी मृत्यु के आखिरी दिनों के बारे में वीरेंद्र कुमार बरनवाल ने अपनी शोधपरक पुस्तक 'जिन्ना एक पुनर्दृष्टि' में विस्तार से लिखा है। वह लिखते हैं, 'जिन्ना का स्वास्थ्य बड़ी तेजी से गिरता जा रहा था। खांसी के साथ उनके कफ में खून की मात्रा बढ़ती जा रही थी। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के उद्घाटन भाषण से लौटते ही 1 जुलाई, 1948 को जूते पहने हुए ही अपने बिस्तर पर निढाल गिर पड़े थे। उनकी हालत देखकर अमेरिका में पाकिस्तान के नव नियुक्त राजदूत और उनके अनन्य प्रशंसक इस्पहानी रो पड़े थे। टीबी से पीड़ित अपने फेफड़ों के लिए स्वस्थ हवा की तलाश में वह बहन फातिमा के साथ छह जुलाई, 1948 को क्वेटा के पास एक शांतिपूर्ण हिल स्टेशन जियारत आ गए थे।' बरनवाल लिखते हैं, 'वहां उनकी नाजुक हालत को देखकर सेना के सर्जन जनरल डॉक्टर लेफ्टिनेंट कर्नल इलाही बख्श तुरंत पहुंच गए। उन्होंने पाया कि जिन्ना के दोनों फेफड़े न केवल टीबी से बल्कि इन्फ्लुएन्जा से भी बुरी तरह ग्रस्त थे। अपनी बीमारी को जिन्ना ने अपने बंबईआ के डॉक्टर की मदद से एक अर्से से छिपा रखा था। उसे उन्होंने डॉ. इलाही बख्श से भी छिपाने की कोशिश की, लेकिन सफल ना रहे। इसी बीच लियाकत अली खान उनसे मिलने आए। लियाकत के आने की खबर पर जिन्ना ने कांपती आवाज़ में कहा था, 'फाती, जानती हो यह शख्स क्यों आया है? वह यह जानना चाहता है कि मैं कितना बीमार हूं और कब तक जिंदा रह पाऊंगा।' 'जिन्ना का संदेश तक ना जनता पर पहुंच सका' इससे समझा जा सकता है कि मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान की राजनीति में खुद को कितना अकेला और असहाय मान रहे थे। बरनवाल लिखते हैं, 'जिन्ना की भूख लगभग समाप्त हो गई थी। आमतौर से वह अब चाय और कॉफी की चंद प्यालियों पर ही निर्भर थे। आखिरी दिनों में खास फरमाइश पर उन्हें उनका प्रिय भोजन हलुवा और पूरी खिलाया गया। 14 अगस्त, 1948 को पाकिस्तान के जन्म और स्वतंत्रता की पहली सालगिरह थी। जिन्ना ने पाकिस्तान की अवाम को जो सन्देश दिया गया था, उसकी बजाय लियाकत ने अपने भाषण के पर्चे छपवाए। यह जानकर फातिमा अवाक रह गईं। बीमार जिन्ना को रिसीव करने कोई नहीं पहुंचा, एंबुलेंस हो गई खराब जिन्ना की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी। 11 सितंबर, 1948 को उन्हें जियारत से क्वेटा और वहां से कराची के निकट एयरफोर्स के मौरीपुर हवाई अड्डे तक एयरफोर्स के ही विमान से लाया गया। उनके साथ उनके चिकित्सक डॉ. इलाही बख्श, डॉ. सैयद, डॉ. एमए मिस्री, क्वेटा के मिलिट्री अस्पताल की अनभुवी नर्स सिस्टर डनहम और फातिमा जिन्ना थीं। हवाई अड्डे से जिन्ना को सेना की एक एम्बुलेंस में लिटाकर गवर्नर जनरल निवास के लिए रवाना किया गया। हालत यह थी कि जब उन्हें लेकर एयर फोर्स का विमान मौरीपुर उतरा तो अपने नवोदित राष्ट्र के जनक को मिजाज़पुर्सी के लिए या औपचारिक शिष्टाचारवश के लिए ही सही, न तो प्रधानमंत्री लियाकत और न ही उनके मंत्रिमंडल का कोई सदस्य उपस्थित था। चार-पांच मील की यात्रा के बाद ही एम्बुलेंस खराब हो गई। पहले तो बताया गया कि पेट्रोल खत्म हो गया है। फिर पता चला कि इंजन में खराबी थी, जिसमें वक्त लगने वाला था।  

अनोखी परंपरा: प्रयागराज की रामलीला में भगवान राम का 120 साल पुराने सिंहासन पर बैठना जारी

प्रयागराज प्रयागराज में दशहरे के दौरान भोर में श्रृंगार चौकी निकालने की दशकों पुरानी परंपरा आज भी जारी है। श्री पथरचट्टी रामलीला कमेटी की ओर से यह चौकियां निकाली जाती हैं। सिंहासन पर विराजमान होकर प्रभु राम और लक्ष्मण निकलते हैं। जिस सिंहासन पर इन्हें विराजमान किया जाता है, वह 120 वर्ष पुराना है। छह क्विंटल का यह सिंहासन देखने में बिल्कुल सोने की तरह लगता है, जिसे जडियल टोला के नत्थू राम जडिया और उनके दोस्त बलदेव ने बनवाया था। वर्तमान में कमेटी की श्रृंगार चौकी समिति के महामंत्री राजेश कुमार सिंह जड़िया है। नत्थू राम जडिया इनके परनाना थे। राजेश बताते हैं कि परनाना की श्रीराम में अगाध आस्था थी। इसलिए उन्होंने अपने दोस्त के साथ छह क्विंटल का सिंहासन बनवाया था, जिसे बनाने में बीस कारीगर लगे थे और वह पांच महीने में बनकर तैयार हुआ था। 120 वर्ष पहले उसमें लाखों की संख्या में नग लगवाए गए थे। इस सिंहासन को नत्थू राम ने दीपक की रोशनी में अपने पांच बादशाही मंडी स्थित आवास पर बनवाया था। बरेली के राधेश्याम कथावाचक की रामायण पर रामलीला में डॉक्टर पिता-पुत्र करते हैं रोल, रिहर्सल शुरू है आज भी रामलीला के दौरान पुष्प, केला, मोती और पोत की जो चौकियां निकलती हैं, उनमें वही सिंहासन रहता है। श्रृंगार चौकी वंशीधर कोठी से कोतवाली, ठठेरी बाजार, जानसेनगंज, निरंजन टॉकीज चौराहा, चमेली बाई धर्मशाला से होते हुए परनाना के आवास पर पहुंचकर समाप्त होती है। राजेश ने बताया कि पिछले वर्ष इस सिंहासन की मरम्मत कराई गई थी और उसमें हजारों नग जड़वाए गए थे। रामलीला कमेटी के राज्याभिषेक समारोह में इसी सिंहासन पर भगवान को बिठाया जाता है।

मॉरीशस के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए काशी पहुंचे पीएम मोदी  

राज्यपाल व सीएम योगी ने काशी में किया प्रधानमंत्री का स्वागत  मॉरीशस के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए काशी पहुंचे पीएम मोदी   जीएसटी में सुधार के बाद पहली बार वाराणसी पहुंचे प्रधानमंत्री का भाजपा कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत कर जताया आभार  जीएसटी और धन्यवाद लिखी हुई तख्ती लेकर रास्ते में खड़े रहे भाजपा कार्यकर्ता  भाजपा कार्यकर्ताओं ने शंखनाद और हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ पीएम पर पुष्पवर्षा भी की  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाथ हिलाकर काशीवासियों का किया अभिवादन वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को 'अपनी काशी' पहुंचे। वे यहां मॉरीशस के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए आए हैं। लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचने पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया। एयरपोर्ट से पीएम हेलीकॉप्टर से पुलिस लाइन पहुंचे। यहां से ताज होटल के लिए निकले प्रधानमंत्री के काफिले का भाजपा कार्यकर्ताओं व आमजन ने शंखनाद, हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया। पीएम मोदी ने भी हाथ हिलाकर काशीवासियों का अभिवादन किया। रास्ते में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए कलाकारों ने भी उनका स्वागत किया। वहीं द्विपक्षीय वार्ता के लिए मॉरीशस के प्रधानमंत्री बुधवार को ही प्रतिनिधिमंडल के साथ वाराणसी पहुंच गए थे।  काशीवासियों व भाजपा कार्यकर्ताओं ने पूरे रास्ते में किया स्वागत पुलिस लाइन से निकलते ही भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और काशीवासियों ने अपने सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोरदार स्वागत किया। बटुकों ने शंखनाद, भाजपा कार्यकर्ता और लोगों ने ढोल- नगाड़ों के बीच उनका स्वागत किया। हर- हर महादेव के जयकारे से काशी गूंजती रही। जीएसटी में सुधार के बाद पहली बार वाराणसी पहुंचे प्रधानमत्री का आभार जताने के लिए रास्ते में जीएसटी और धन्यवाद लिखी तख्ती लेकर भाजपा कार्यकर्ता खड़े रहे। प्रधानमंत्री द्विपक्षीय वार्ता के बाद काशी से निकल जाएंगे।  सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच किया गया स्वागत प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए पूरे रास्ते को सजाया गया था। छह स्थानों पर भाजपा पदाधिकारियों और जनप्रतिधियों ने मंच बनाकर प्रधानमंत्री पर गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा कर स्वागत किया। पुलिस लाइन से ताज होटल तक रोड शो जैसा मंजर देखने को मिला। जहां सड़क के दोनों ओर बड़ी तादाद में खड़े काशीवासियों ने मोदी पर पुष्प वर्षा भी की। प्रधानमंत्री ने भी हाथ हिलाकर अपने काशीवासियों का अभिवादन स्वीकार किया। कचहरी,अम्बेडकर चौराहा समेत कई स्थानों पर लोकनृत्य समेत अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम से प्रधानमंत्री का जोरदार स्वागत हुआ। बुधवार को ही काशी पहुंचे थे मॉरीशस के पीएम  मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम बुधवार को ही काशी पहुंच गए थे। काशीवासियों ने अपनी परंपरा के अनुरूप मॉरीशस के प्रधानमंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल का भी भव्य स्वागत किया था । मॉरीशस के प्रधानमंत्री गुरुवार की शाम क्रूज़ से गंगा आरती देखेंगे। फिर 12 सितंबर की सुबह बाबा काशी विश्वनाथ का दर्शन करेंगे। इसके बाद वे अयोध्या रवाना होंगे। अध्यात्म व आधुनिकता के संगम 'नई काशी' में पीएम का स्वागत  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने 'एक्स' अकाउंट पर पोस्ट भी किया। सीएम योगी ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का अध्यात्म व आधुनिकता के संगम उनकी 'नई काशी' में हार्दिक स्वागत व अभिनंदन।

सनातन संस्कृति का मूल है कर्ता के प्रति आभार: मुख्यमंत्री का वक्तव्य

कर्ता के प्रति कृतज्ञता का भाव सनातन का पहला संस्कार : मुख्यमंत्री सनातन संस्कृति का मूल है कर्ता के प्रति आभार: मुख्यमंत्री का वक्तव्य कृतज्ञता ही है सनातन का प्रथम संस्कार: मुख्यमंत्री ने कहा कर्तव्य और कृतज्ञता सनातन की नींव: मुख्यमंत्री का बयान राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज की 11वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह में बोले मुख्यमंत्री युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का समापन गोरखपुर  गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कर्ता के प्रति कृतज्ञता का भाव प्रकट करना सनातन धर्म का पहला संस्कार है। भारतीय मनीषा के ज्ञान दर्शन में इस बात को प्रतिष्ठित किया गया है कि जीवन में हमारे, समाज और राष्ट्र के प्रति जिस किसी ने योगदान दिया हो उसके प्रति कृतज्ञता का भाव होना ही चाहिए।  सीएम योगी युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के अंतिम दिन गुरुवार (आश्विन कृष्ण चतुर्थी) को महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने रामायणकाल में हनुमानजी और मैनाक पर्वत के बीच हुए संवाद के मुख्य उद्धरण ‘कृते च कर्तव्यम एषः धर्म सनातनः’ को समझाते हुए कहा कि यह भाव सनातन से ही मिलता है। सनातन की परंपरा में पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्त करने के लिए आश्विन माह का पूरा कृष्ण पक्ष ही समर्पित किया गया है। गोरक्षपीठ में ब्रह्मलीन पूज्य महंतद्वय की पुण्य स्मृति में साप्ताहिक आयोजन भी कृतज्ञता ज्ञापन का ही आयाम है।  सनातन और भारत के हित में हर मुद्दे पर आजीवन प्रतिबद्ध रहे गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय : सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ का स्मरण करते हुए कहा कि महंतद्वय समाज, राष्ट्र और लोक जीवन से जुड़े हर मुद्दे पर सनातन धर्म और भारत के हितों के प्रति प्रतिबद्ध रहे।  महंत दिग्विजयनाथ जी ने सनातन धर्म, शिक्षा, सेवा और राष्ट्रीयता के जिन मूल्यों और आदर्शों को स्थापित किया, उन्हें महंत अवेद्यनाथ जी ने आत्मसात कर आगे बढ़ाया। इन मूल्यों और आदर्शों के लिए, देश और धर्म के लिए महंतद्वय आजीवन समर्पित रहे। दोनों ने सदैव देश और धर्म को प्राथमिकता दी। गोरक्षपीठ आज भी उनके बताए मार्ग का अनुसरण कर रहा है।  गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सशक्त राष्ट्र की बुनियाद मानते थे महंतद्वय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सभ्य समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला माना। महंत दिग्विजयनाथ जी ने इसी ध्येय से देश की गुलामी के कालखंड में ही 1932 में महाराणा प्रताप जैसे वीर योद्धा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की थी। 1932 में पहली संस्था खुली और फिर यह श्रृंखला बढ़ती गई। गोरखपुर में जब पहले विश्वविद्यालय की स्थापना की बात आई तो उन्होंने महाराणा प्रताप महाविद्यालय और महाराणा प्रताप महिला विद्यालय दान में देकर विश्वविद्यालय की स्थापना का शुभारंभ कराया। यह कार्य श्रेय के लिए नहीं था। उन्होंने महिला शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, आयुष शिक्षा सहित शिक्षा के हरेक क्षेत्र को आगे बढ़ाया। उनके बाद महंत अवेद्यनाथ जी ने भी इस सिलसिले को जारी रखा।  अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनाने में महंतद्वय का अविस्मरणीय योगदान सीएम योगी ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण में गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय के अविस्मरणीय योगदान का भी उल्लेख किया। कहा कि श्रीराम मंदिर निर्माण के यज्ञ का शुभारंभ महंत दिग्विजयनाथ जी ने किया था। उनके बाद 1983 से लेकर जीवन पर्यंत महंत अवेद्यनाथ मंदिर निर्माण के लिए संघर्षरत रहे।  सामाजिक समरसता को आजीवन बढ़ाते रहे महंत अवेद्यनाथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी समाज को तोड़ने वाली ताकतों से चिंतित रहे। उन्होंने अश्पृश्यता के खिलाफ आवाज उठाई और आजीवन सामाजिक समरसता को बढ़ाते रहे।